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विश्वरंग 2025 का दूसरा दिन : सीएम बोले- कला, संस्कृति और संवेदनाओं का समावेशन है महोत्सव

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Author : admin

Published : 29-Nov-2025 11:41 AM

भोपाल। विश्वरंग टैगोर अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन का भव्य उद्घाटन मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी द्वारा किया गया। इस दौरान उनके साथ मंच पर विश्वरंग के महानिदेशक और रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधापति संतोष चैबे, विश्वरंग के निदेशक डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स, सीवीआरयू खंडवा के कुलपति डॉ. अरूण रमेश जोशी उपस्थित रहे।

महोत्सव को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि भाषा और संस्कृति एक-दूसरे की सहज पूरक हैं। संस्कृति, भाषा को वह कथा-बीज देती है, जिनसे लोक-साहित्य से लेकर वैश्विक साहित्य जन्म लेता है और भाषा, संस्कृति को वह अभिव्यक्ति देती है, जिससे परंपराएं पीढ़ियों तक सुरक्षित यात्रा कर पाती हैं। भाषा और संस्कृति दोनों एक-दूसरे की संरक्षक भी हैं। साहित्य का एक ही रंग होता है, राग और आनंद का।

सीएम ने कहा कि हिन्दी भाषा सच्चे अर्थों में लोक भाषा है। हिन्दी हमारे माथे की बिन्दी है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज हमारी हिन्दी वैश्विक मंच पर भारत की पहचान बन रही है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति ने अधिसत्ता नहीं, सदैव प्रभुसत्ता और लोक बन्धुत्व की भावना रखी। हमारी संस्कृति जियो और जीने दो की पवित्र भावना से ओत-प्रोत है। यही कारण है कि आज भारतीय संस्कृति दुनियाभर में अपनी अलग पहचान रखती है।

डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्य में औद्योगिक प्रगति के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए उन्हें धन्यवाद दिया और बताया कि विश्वरंग की पहल के जरिए हम युवाओ को हमारी संस्कृति, साहित्य और सभ्यता से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इस दौरान संतोष चैबे ने अपने वक्तव्य में कहा कि कला, साहित्य, संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मप्र सरकार एवं मुख्यमंत्री के लगातार प्रयासों को रेखांकित किया और बताया कि रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के अंतर्गत विश्वरंग भी इसी दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। इस दौरान विश्वरंग की फिल्म दिखाई गई और विश्वरंग से संबंधित साहित्य प्रदान किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन श्री विनय उपाध्याय जी द्वारा किया गया।

मंगलाचरण-आवाहन एवं वंदना

विश्व रंग के द्वितीय दिवस का शुभारंभ अत्यंत भव्यता और आध्यात्मिक सौम्यता के साथ हुआ। कार्यक्रम का आरंभ द्रुपद संस्थान के कलाकारों द्वारा तानपुरे की सुरीली करतल-ध्वनियों, और मनोहर सरगम के साथ अत्यंत भव्य रूप से हुआ। कलाकारों ने सर्वप्रथम राग भोपाली जो कि एक पेंटाटोनिक राग है जैसी मधुर रचना प्रस्तुत की। इसके बाद कलिंद राग की जिसने की सभागार में सुर-माधुरी हो उठा। उन्होंने राग यमन और राग केदार का गायन किया जिससे सभागार की पवित्रता और बढ़ गई।कार्यक्रम की उल्लेखनीय सफलता और गरिमामय संचालन की सराहना के लिए श्री उमा कांत गुमदेचा जी को विशेष रूप से आमंत्रित कर उनका सम्मान किया गया।

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