पेयजल संकट पर अलर्ट मोड में सरकार : जिलों में कंट्रोल रूम और 24 घंटे मॉनिटरिंग के आदेश, अधिकारियों की छुट्टियां रद्द

भोपाल। प्रदेश में गर्मी के बढ़ते असर और पेयजल संकट की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मुख्य सचिव ने सभी संभाग आयुक्तों, कलेक्टरों, जिला पंचायत सीईओ, पीएचई और नगरीय निकायों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और किसी भी तरह की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों की छुट्टियां रद्द, युद्ध स्तर पर काम के आदेश
मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि पेयजल संकट किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए नगरीय निकायों और पीएचई विभाग के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की आगामी एक माह तक सभी प्रकार की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं। सभी जिलों में कार्य को “युद्ध स्तर” पर करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जल आपूर्ति बाधित न हो।
हर जिले में कंट्रोल रूम और दैनिक समीक्षा अनिवार्य
सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि वे प्रतिदिन संबंधित विभागों के साथ समीक्षा बैठक करें और पेयजल स्थिति की लगातार निगरानी रखें। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे, जहां जल आपूर्ति की 24 घंटे मॉनिटरिंग की जाएगी। शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए तंत्र को सक्रिय किया गया है।
24 घंटे में शिकायत निपटारा और पारदर्शी जल आपूर्ति
सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज पेयजल संबंधी शिकायतों का 24 घंटे के भीतर समाधान अनिवार्य किया गया है। शहरी क्षेत्रों में पानी के टैंकरों की सप्लाई और वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। सभी जल टंकियों में समान और संतुलित आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि किसी भी क्षेत्र के साथ भेदभाव न हो।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 1500 करोड़ की व्यवस्था
ग्रामीण इलाकों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने 1500 करोड़ रुपये जारी किए हैं। पंचायतों को 10 हजार रुपये तक के पेयजल कार्यों को सरल प्रक्रिया से तत्काल कराने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के तहत पेयजल संबंधित कार्यों को भी शामिल किया गया है।
बिजली आपूर्ति पर भी विशेष निर्देश
ऊर्जा विभाग को निर्देशित किया गया है कि जल प्रदाय योजनाओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी स्थिति में पेयजल सप्लाई बाधित न हो।
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