डीजल संकट और गिरते भाव ने तोड़ी किसानों की कमर : 500 एकड़ पपीता फसल ट्रैक्टर से नष्ट, ट्रांसपोर्ट बंद होने से औंधे मुंह गिरे दाम

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में इस बार पपीता किसानों को गहरा आर्थिक झटका लगा है। एक ओर डीजल संकट के चलते ट्रांसपोर्ट व्यवस्था ठप हो गई, वहीं दूसरी ओर बाजार में पपीते के दाम इतने गिर गए कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया। हालात इतने बिगड़ गए कि किसानों ने करीब 500 एकड़ में खड़ी तैयार पपीते की फसल को ट्रैक्टर चलाकर नष्ट कर दिया।
पिछले वर्ष पपीते के अच्छे दाम मिलने के कारण बड़ी संख्या में किसानों ने इस बार बड़े पैमाने पर इसकी खेती की थी। लेकिन इस साल उत्पादन बढऩे और मांग कमजोर रहने से बाजार में आवक अधिक हो गई, जिससे भाव लगातार नीचे आते चले गए। पूरे सीजन में पपीते का दाम अधिकतर 6 से 7 रुपए प्रति किलो ही बना रहा। कभी-कभार ही यह 10 से 12 रुपए तक पहुंच सका।
इन राज्यों में भेजा जाता है पपीता
किसानों का कहना है कि हालात तब और खराब हो गए जब डीजल की कमी के कारण ट्रकों की आवाजाही प्रभावित होने लगी। धमधा क्षेत्र से कच्चा पपीता आमतौर पर पश्चिम बंगाल, बिहार और दिल्ली जैसे राज्यों की मंडियों में भेजा जाता है, लेकिन ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बाधित होने के कारण माल खेतों से बाहर नहीं निकल सका। इससे तैयार फल खेतों में ही पककर खराब होने लगे।
परेशान किसानों के सामने दोहरी चुनौती
स्थिति से परेशान किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई—एक ओर कम कीमतें और दूसरी ओर परिवहन संकट। ऐसे में किसानों ने मजबूरी में खेत खाली करने का फैसला लिया ताकि अगली फसल की तैयारी समय पर की जा सके।
खरीदार नहीं मिलने से मेहनत गई बेकार
धमधा के किसान शिवकुमार वर्मा ने बताया कि उन्होंने लगभग 50 एकड़ में पपीते की खेती की थी। पैदावार अच्छी रही, लेकिन खरीदार नहीं मिलने से पूरी मेहनत बेकार हो गई। उन्होंने बताया कि खेतों में फसल छोडऩे पर अगली बुवाई भी प्रभावित होती, इसलिए ट्रैक्टर चलाकर फसल नष्ट करनी पड़ी।
इस घटना ने एक बार फिर कृषि विपणन व्यवस्था और ट्रांसपोर्ट सप्लाई चेन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय पर परिवहन और उचित दाम मिलते तो यह स्थिति पैदा नहीं होती।
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