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नौतपा 2026: : 25 मई से 3 जून तक तपेगी धरती, जानिए वैज्ञानिक और ज्योतिषीय कारण, “नौतपा में जितनी तपन, उतनी बरखा सुखद।”

नीलम अहिरवार

नीलम अहिरवार

May 24, 2026
12:17 PM
25 मई से 3 जून तक तपेगी धरती, जानिए वैज्ञानिक और ज्योतिषीय कारण, “नौतपा में जितनी तपन, उतनी बरखा सुखद।”

देशभर में भीषण गर्मी के बीच अब नौतपा की चर्चा तेज हो गई है। 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक चलने वाले नौतपा को साल के सबसे गर्म दिनों का दौर माना जाता है। ग्रामीण इलाकों में मान्यता है कि नौतपा जितना तपता है, मानसून उतना बेहतर होता है। लेकिन क्या सच में नौतपा की गर्मी बारिश और खेती का भविष्य तय करती है? आइए जानते हैं परंपरा और विज्ञान क्या कहते हैं। उत्तर भारत से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक इस समय तेज गर्मी और लू का असर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने कई राज्यों में हीटवेव अलर्ट जारी किया है। इसी बीच 25 मई से नौतपा की शुरुआत हो रही है, जो 2 जून तक रहेगा। माना जाता है कि इन नौ दिनों में सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है। इस दौरान कई इलाकों में पारा 42 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार नौतपा

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, नौतपा तब शुरू होता है जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है। ग्रामीण भारत में इसे खेती और मानसून से जोड़कर देखा जाता है। किसानों का मानना है कि अगर नौतपा के दौरान तेज गर्मी पड़े, तो अच्छी बारिश होती है। गांवों में एक कहावत भी प्रचलित है—
“नौतपा में जितनी तपन, उतनी बरखा सुखद।”

नौतपा का वैज्ञानिक दृष्टि

विशेषज्ञों के मुताबिक तेज गर्मी से जमीन ज्यादा गर्म होती है, जिससे समुद्र से उठने वाली नमी मानसूनी बादलों को तेजी से खींचती है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी नौतपा की गर्मी फायदेमंद मानी जाती है क्योंकि इससे खेतों में मौजूद कीट-पतंगे, बैक्टीरिया और जहरीले जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसलों को नुकसान कम होता है।हालांकि मौसम वैज्ञानिक मानते हैं कि क्लाइमेट चेंज के दौर में केवल नौतपा की गर्मी के आधार पर मानसून का अनुमान लगाना पूरी तरह सही नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून कई वैश्विक और समुद्री कारकों पर निर्भर करता है।ग्रामीण इलाकों में यह मान्यता भी है कि अगर नौतपा नहीं तपा तो “जलजला” आ सकता है, यानी खेती और मौसम से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। परंपराओं और मान्यताओं के बीच विज्ञान की अपनी अलग राय है, लेकिन इतना जरूर है कि नौतपा हर साल गर्मी, मानसून और खेती को लेकर चर्चा का बड़ा विषय बन जाता है। अब देखना होगा कि इस बार नौतपा कितना तपता है और मानसून पर इसका कितना असर पड़ता है।

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हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बदलते मौसम और क्लाइमेट चेंज के दौर में सिर्फ नौतपा की गर्मी के आधार पर मानसून का अनुमान लगाना पूरी तरह सही नहीं है। वैज्ञानिक मानते हैं कि मानसून कई वैश्विक और समुद्री परिस्थितियों पर निर्भर करता है। लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण भारत में आज भी नौतपा को खेती और बारिश से जोड़कर देखा जाता है। फिलहाल देशभर में गर्मी अपने चरम पर है और अब सबकी नजरें नौतपा पर टिकी हैं… क्योंकि मान्यता भी यही कहती है — जितना तपेगा नौतपा, उतनी मेहरबान होगी बारिश।

नीलम अहिरवार
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नीलम अहिरवार

17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।

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