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छतरपुर-पन्ना नेशनल हाईवे पर जल संघर्ष : छतरपुर के रामशीला टेक गांव में श्मशान और कब्रिस्तान से पानी भरने को मजबूर ग्रामीण,प्रशासनिक दावों पर सवाल

नीलम अहिरवार

नीलम अहिरवार

Jun 09, 2026
10:29 AM
छतरपुर के रामशीला टेक गांव में श्मशान और कब्रिस्तान से पानी भरने को मजबूर ग्रामीण,प्रशासनिक दावों पर सवाल

छतरपुर: एक तरफ सरकार हर घर तक नल से जल पहुंचाने के दावे कर रही है दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के छतरपुर में लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए श्मशान घाट और कब्रिस्तान का सहारा लेने को मजबूर हैं। महिलाएं सिर पर पानी के बर्तन रखकर रोज एक किलोमीटर का सफर तय कर रही हैं... बच्चे पढ़ाई छोड़ पानी ढो रहे हैं... और बुजुर्ग भी इस संघर्ष में शामिल हैं। विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की यह तस्वीर आपको सोचने पर मजबूर कर देगी।

श्मशान बना गांव का जलस्रोत

राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बसे इस गांव में पानी की ऐसी किल्लत है कि लोगों की दिनचर्या का सबसे बड़ा हिस्सा पानी जुटाने में ही गुजर जाता है। भीषण गर्मी के बीच ग्रामीणों को गांव से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित श्मशान घाट और कब्रिस्तान के पास बने जल स्रोतों तक जाना पड़ रहा है।महिलाएं सिर पर डिब्बे और मटके रखकर लंबी दूरी तय कर रही हैं। बच्चे स्कूल जाने की उम्र में पानी के बर्तन ढोने को मजबूर हैं, जबकि बुजुर्ग भी इस कठिन सफर का हिस्सा बने हुए हैं। हर दिन कई चक्कर लगाकर परिवार की प्यास बुझाने का इंतजाम करना यहां की मजबूरी बन चुका है

एक बाल्टी पानी के लिए लंबा संघर्ष

ग्रामीणों का कहना है कि पानी की समस्या वर्षों पुरानी है। कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। गांव दो पंचायतों के बीच फंसा हुआ है। एक ओर चंद्रनगर ग्राम पंचायत है तो दूसरी ओर शिवराजपुर ग्राम पंचायत। ग्रामीणों का आरोप है कि इसी प्रशासनिक खींचतान का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।

प्रशासनिक दावों पर सवाल

सबसे हैरानी की बात यह है कि रामशिला टेक गांव छतरपुर-पन्ना नेशनल हाईवे के किनारे स्थित है, लेकिन यहां आज भी पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है। सरकार की जल योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर यहां साफ दिखाई देता है। मामले में चंद्रनगर ग्राम पंचायत के सचिव संजय पाठक ने भी स्वीकार किया है कि गांव में पेयजल संकट बना हुआ है और ग्रामीण कब्रिस्तान के पास बने जल स्रोत से पानी भरने को मजबूर हैं। वहीं जनपद पंचायत सीईओ राकेश शुक्ला ने जल्द समाधान कराने का भरोसा दिया है.

फिलहाल सवाल यही है कि आखिर कब तक ग्रामीण श्मशान और कब्रिस्तान के जल स्रोतों के भरोसे अपनी प्यास बुझाते रहेंगे। हर घर जल पहुंचाने के दावों के बीच छतरपुर के रामशिला टेक गांव की यह तस्वीर व्यवस्था को आईना दिखाने के लिए काफी है। अब देखना होगा कि प्रशासन के आश्वासन जमीनी हकीकत में कब बदलते हैं।

नीलम अहिरवार
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नीलम अहिरवार

17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।

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