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बामुलाहिजा : दतिया का हिसाब, दिल्ली की खिचड़ी और अफसरशाही में अगली कुर्सी का खेल

admin

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Aug 11, 2026
05:44 AM
दतिया का हिसाब, दिल्ली की खिचड़ी और अफसरशाही में अगली कुर्सी का खेल

-संदीप भम्मरकर

दतिया में आखिर हारा कौन?

सियासत में जो सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है, हार का हिसाब भी सबसे पहले उसी से मांगा जाता है। दतिया उपचुनाव में यही नरोत्तम मिश्रा के साथ हो रहा है। घनश्याम सिंह की जीत से ज्यादा चर्चा नरोत्तम की भूमिका की है। आंकड़े देखें तो कहानी पुरानी है। 2008 में बीजेपी करीब 11 हजार, 2013 में 12 हजार और 2018 में महज 2656 वोट से जीती। 2023 में नरोत्तम 7742 वोट से हारे और अब उपचुनाव में हार का अंतर करीब 6 हजार रहा। नरोत्तम मौन हैं, लेकिन गलियारों में ठीकरा उनके खेमे की तरफ घूम रहा है। सवाल यही है, दतिया में बीजेपी हारी है… या नरोत्तम को हराया हुआ बताया जा रहा है?

दिल्ली में पक रही सियासी खिचड़ी

दिल्ली में बड़ी मुलाकातें यूं ही नहीं होतीं… और वो भी चुनावी नतीजे के तुरंत बाद। दतिया उपचुनाव के बाद शिवराज, कैलाश और वीडी की पीएम मोदी और अमित शाह से अलग-अलग मुलाकातों ने भोपाल के सियासी गलियारों में कान खड़े कर दिए हैं। कौन क्या कहकर आया और किसे क्या संकेत मिला, फिलहाल सब पर्दे में है। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि दतिया के नतीजे के बाद दिल्ली में सियासी खिचड़ी चढ़ चुकी है। पकने में वक्त लगेगा, मगर गलियारों में चुटकी है, जब ये खिचड़ी थाली में आएगी… कई नेताओं की जुबान का स्वाद जरूर बिगाड़ेगी।

जमने की दौर में ही चर्चा में अगले

नए साहब अभी कुर्सी पर जमे ही हैं और अगले सीएस का कैलकुलेटर चालू हो गया। नए मुख्य सचिव ने अपनी कार्यशैली में काम शुरू कर दिया है, लेकिन जनवरी 2027 की रिटायरमेंट तारीख ने अफसरशाही में अभी से गुणा-भाग शुरू करा दिया। एक्सटेंशन मिला तो कहानी आगे बढ़ेगी, नहीं तो छह महीने बाद फिर कुर्सी का स्वयंवर होगा। दिलचस्प यह कि पिछली कई रेस में आगे रहे कुछ नाम इस बार दावेदारों की सूची से बाहर हैं। लिहाजा नए नाम ऊपर चढ़ाने की कवायद तेज है। गलियारों में चर्चा है कि सीएस की कुर्सी पर न जाने क्या टोटका हुआ है कि एक के बैठते ही नए की दौड़ शुरू हो जाती है।

सौरभ के ‘गायब माल’ का राज़?

रेड में जो मिला, उससे ज्यादा चर्चा अब उसकी है… जो कथित तौर पर मिला और फिर गायब हो गया। सौरभ शर्मा प्रकरण में अफसरों के बीच नई कानाफूसी चल रही है। चर्चा है कि छापे के दौरान एक ठिकाने से कुछ सोना और नकदी गायब हो गया था। ये चर्चा अब हाईलेवल ग्रुप्स तक है। दिलचस्प यह कि इस कथित माल का न कहीं लिखा-पढ़ी में जिक्र है, न उसे वापस हासिल करने की कोई कवायद दिखाई दी। अब सवाल माल से बड़ा है, अगर कुछ गायब हुआ था, तो उसे खोजने की फिक्र आखिर किसी को क्यों नहीं हुई?

कांग्रेस कैंप में वेद-वाणी!

सियासत में अब बूथ मैनेजमेंट के साथ श्लोक मैनेजमेंट भी शुरू हो गया है। कांग्रेस के ट्रेनिंग कैंप में इन दिनों संगठन के साथ धर्म चर्चा की भी बाकायदा क्लास लग रही है। आधे प्रदेश तक पहुंच चुके इस प्रशिक्षण में राम मंदिर, तीन तलाक और यूसीसी जैसे मुद्दों पर बीजेपी के सवालों का जवाब कैसे दिया जाए, इसके पॉइंट्स समझाए जा रहे हैं। दिलचस्प यह कि कभी सर्वधर्म सद्भाव के सहारे जवाब देने वाली कांग्रेस के ट्रेनर्स अब वेदों के श्लोक भी सुना रहे हैं। जाहिर बात है, कांग्रेस के सियासी सिलेबस में धर्म का चैप्टर जब असर दिखाएगा तो बीजेपी के लिए भी पैटर्न बदलने की ज़रूरत पड़ेगी ही।

दीदी निकलीं गांव की राह!

सियासत में सिर्फ चुनावी दौड़ नहीं, पैदल चलने की प्रैक्टिस भी जरूरी है। इंदौरी दीदी लंबे अर्से बाद अफसरों के लाव-लश्कर के साथ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम जनसंपर्क पर निकलीं, तो किस्से पीछे-पीछे चल पड़े। सफाई की बारी आई तो दीदी की डिमांड पर बड़ी झाड़ू की जगह छोटी झाड़ू मंगानी पड़ी। फिर पैदल भ्रमण लंबा खिंचा तो कार्यक्रम में थकान भी साफ दिखाई दी। बस, नींद के झटकों की वजह से विरोधियों को चर्चा का मसाला मिल गया। अब इलाके में चुटकी ली जा रही है, दीदी, गांव की पगडंडियां चुनाव देखकर नहीं आतीं… उन पर थोड़ा रेगुलर चला भी कीजिए!

पुलिस कांस्टेबल का अपहरण

भोपाल पुलिस के तेवर चढ़े हुए हैं। इसकी वजह है महकमे के ही एक कांस्टेबल का अपहरण। मामला भोपाल का है, जहां रात के वक्त दो पुलिस कांस्टेबल ने चैकिंग के दौरान एक वाहन चालक को रोक लिया। उन्हें थाने ले जाने के लिए एक आरोपियों की कार में बैठ गया। लेकिन बदमाशों ने कांस्टेबल को रात भर बंधक बनाकर गाड़ी में रखा और सुबह गवर्नमेंट प्रेस की सुनसान जगह पर छोड़ दिया। नशे के खिलाफ मुहिम में जुटी पुलिस के साथ ये वारदात भोपाल पुलिस के होश उड़ा देने वाली है।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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