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घूसखोर पंडत:मनोज वाजपेयी की फिल्म टाइटल पर फूटा संतों का गुस्सा, महामंडलेश्वर बोले- कुछ लोग खुश हैं, लेकिन यह गंभीर विषय
हरिद्वार। अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म घूसखोर पंडत को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। फिल्म का टीजर जारी होते ही ब्राह्मण समाज और संत समाज के लोग सड़कों पर उतर आए और इस फिल्म के खिलाफ कड़ा विरोध जताया। महामंडलेश्वर स्वामी ज्योतिर्मयानंद ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, इस तरह की फिल्म तुरंत प्रतिबंधित की जानी चाहिए, क्योंकि यह सीधे-सीधे एक विशेष समाज की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रही है। आजकल ब्राह्मण समाज के खिलाफ खुलेआम गालियां दी जा रही हैं और कुछ लोग इसे सामान्य मानकर खुश भी हैं, जबकि यह एक गंभीर और चिंताजनक बात है। उन्होंने कहा, ब्राह्मण समाज ने ही मानव और पशु के बीच का अंतर समाज को समझाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में फिल्म में समाज के खिलाफ गलत संदेश देना राष्ट्र और समाज के लिए हानिकारक है।घूसखोर पंडत नाम अपने आप में आपत्तिजनक इसी मुद्दे पर गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने भी फिल्म के नाम और कहानी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, घूसखोर पंडत नाम अपने आप में आपत्तिजनक है, क्योंकि घूसखोरी कोई मामूली शब्द नहीं है बल्कि यह एक गंभीर आपराधिक कृत्य है। किसी भी समाज के लोगों को अपराधी के रूप में पेश करना निंदनीय है। इस तरह के फिल्म निर्माता पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी समाज की छवि को नुकसान पहुंचाने का दुस्साहस न कर सके।आचार्य प्रमोद कृष्णम ने दी तीखी प्रतिक्रियाइनके अलावा, आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस फिल्म के टाइटल को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था, मेरी नजर में घूसखोर पंडत जैसा नाम रखना पाप के समान है। किसी भी समुदाय को जानबूझकर निशाना बनाकर फिल्म बनाना समाज को तोड़ने का काम करता है। कुछ लोग जानबूझकर जातियों का सहारा लेकर समाज में विभाजन पैदा करना चाहते हैं और यह फिल्म उसी तरह की साजिशों का हिस्सा हो सकती है।शिया धर्मगुरु ने अपनाया कड़ा रुखशिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास ने भी इस विवाद पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, किसी एक धर्म या समुदाय को टारगेट करके बनाई जा रही फिल्मों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगना चाहिए। सस्ती लोकप्रियता और प्रचार के लिए देश के अंदर जिस तरह का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है, वह बेहद अफसोसजनक है। मेरी भारत सरकार से मांग है कि इस फिल्म पर तुरंत पाबंदी लगाई जाए।उन्होंने आगे कहा, पहले फिल्मों का उद्देश्य मनोरंजन के साथ-साथ समाज को सकारात्मक संदेश देना होता था, लेकिन अब कुछ लोग केवल चर्चा में बने रहने और प्रचार पाने के लिए इस तरह के विवादित तरीकों का सहारा ले रहे हैं। ऐसी फिल्में देश में भाईचारे को मजबूत करने के बजाय माहौल खराब करने का काम कर रही हैं।

महाकालेश्वर मंदिर:उज्जैन में मौजूद हैं बाबा महाकाल का वृद्ध स्वरूप, इनके दर्शन के बिना अधूरी है धार्मिक यात्रा
नई दिल्ली। उज्जैन का महाकाल मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध दक्षिणमुखी और स्वयंभू मंदिर है। महाकाल मंदिर शिप्रा नदी के तट पर स्थित है, जहां जाने से समय भी बदल जाता है। माना जाता है कि महाकाल के दर्शन मात्र से जीवन में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलता है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि महाकाल मंदिर में मुख्य गर्भगृह में मौजूद शिवलिंग से भी पुराना शिवलिंग मंदिर में मौजूद है, जिसके दर्शन के बिना महाकाल की दर्शन यात्रा अधूरी मानी जाती है।उज्जैन के महाकाल मंदिर में कई प्राचीन मंदिर स्थापित हैं, जिनकी अपनी-अपनी मान्यता है। कुछ मंदिर का निर्माण नए सिरे से किया गया है लेकिन कुछ मंदिर की जड़े प्राचीन काल से जुड़ी हैं। मंदिर परिसर में महाकाल के दर्शन से पहले वृद्धकालेश्वर महादेव का मंदिर बना है, जिसे मुख्य मंदिर से भी प्राचीन बताया जाता है। मंदिर के गर्भगृह में बाबा महाकाल के प्रतिरूप में शिवलिंग मौजूद हैं और उनका शृंगार प्रतिदिन बाबा महाकाल की तरह ही होता हैं।भगवानों में फर्क कर पाना बहुत मुश्किलवृद्धकालेश्वर महादेव और बाबा महाकाल में फर्क कर पाना बहुत मुश्किल है क्योंकि शिवलिंग का आकार और रूप दोनों एक जैसे हैं। कहा जाता है कि वृद्धकालेश्वर महादेव, बाबा महाकाल के वृद्ध स्वरुप हैं और उनसे भी ज्यादा प्राचीन हैं। उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन का पुण्य तभी पूरा मिलता है, जब महाकालेश्वर के श्वृद्धश् स्वरूप के दर्शन न हो जाए। इसलिए भक्त महाकाल के दर्शन के बाद बाबा वृद्धकालेश्वर के दर्शन जरूर करते हैं।महाकाल से भी पुराने हैं बाबा वृद्धकालेश्वरमाना ये भी जाता है कि बाबा वृद्धकालेश्वर, महाकाल से भी पुराने हैं और उनसे पहले धरती पर प्रकट हुए थे। हालांकि आक्रमणकारियों की वजह से शिवलिंग और मंदिर दोनों को खंडित करने की कोशिश की गई लेकिन आज भी बाबा वृद्धकालेश्वर अपनी जगह पर स्थापित हैं और भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण कर रहे हैं। मंदिर की हालत थोड़ी जर्जर है जिसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि मंदिर आक्रमणकारियों का शिकार हुआ था लेकिन साथ ही समय-समय पर मंदिर का रखरखाव भी होता रहता है।हर किसी को नहीं हो पाते स्पर्श दर्शनजहां महाकाल के स्पर्श दर्शन हर किसी को नहीं हो पाते हैं, वहीं उसके उलट बाबा वृद्धकालेश्वर के स्पर्श दर्शन के लिए मंदिर हमेशा खुला रहता है। भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए सावन और महाशिवरात्रि के दिन विशेष पूजा कराते हैं। जूना महाकाल की भी बाबा महाकाल की तरह ही अलग-अलग आरतियां प्रतिदिन की जाती हैं।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी:गौरी पुत्र गणपति को प्रसन्न करने का उत्तम दिन, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल
नई दिल्ली । सनातन धर्म में पंचांग का बेहद महत्व है। नया काम, पूजा-पाठ हो या दिन की शुरुआत पंचांग का विचार महत्वपूर्ण है। फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 5 फरवरी, गुरुवार, को है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गणपति की उपासना से संकट का नाश होता है और सुख-समृद्धि आती है। द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी विघ्नहर्ता भगवान गणेश के द्विजप्रिय स्वरूप को समर्पित है। 'संकष्टी' का अर्थ है संकट से मुक्ति। इस दिन भक्त व्रत रखकर गौरी पुत्र गणपति की पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और विघ्न-बाधाओं के नाश के साथ सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। दृक पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 5 फरवरी की देर रात 12 बजकर 9 मिनट से शुरू होकर 6 फरवरी की रात 12 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। इस दिन चंद्रमा कन्या राशि में संचरण करेंगे और नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी रात 10 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। सूर्योदय 7 बजकर 7 मिनट और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 3 मिनट पर होगा।शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 22 मिनट से 6 बजकर 15 मिनट, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। वहीं, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 25 मिनट से 3 बजकर 8 मिनट तक और अमृत काल दोपहर 3 बजकर 32 मिनट से शाम 5 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 1 बजकर 57 मिनट से 3 बजकर 19 मिनट तक रहेगा, यमगण्ड सुबह 7 बजकर 7 मिनट से 8 बजकर 29 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 9 बजकर 51 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।चतुर्थी पर गजानन को दूर्वा, लाल फूल, मोदक, लड्डू, पान और दही-चीनी का भोग लगाना चाहिए। सिंदूर-घी से लेप करना फलदायी होता है। 'गं गणपतये नमः' और 'ओम द्विजप्रियाय नमः' मंत्र के जाप के साथ ही संकष्ट नाशन गणेश स्त्रोत और गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करना चाहिए।

उज्जैन का रहस्यमयी मंदिर:जहां दर्शन मात्र से 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन का मिलता है फल, बोर की आकृति में स्थापित हैं भगवान शिव
भोपाल। उज्जैन और काशी को बाबा महाकाल की धरती के रूप में पूजा जाता है, जहां हर मंदिर से कोई न कोई धार्मिक महत्व जरूर जुड़ा है। उज्जैन की धरती पर बाबा महाकाल के अलावा, भगवान शिव का एक अन्य अद्भुत रूप मौजूद है, जहां सिर्फ दर्शन मात्र से 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन का फल मिलता है। यही कारण है कि भक्त उज्जैन के रहस्यमयी मंदिर में भगवान के दर्शन करने के लिए आते हैं।उज्जैन जिले के दंगवाड़ा गांव में बोरेश्वर महादेव मंदिर स्थित है, जो बाकी शिव मंदिरों से काफी अलग है। हर मंदिर में जहां भोलेनाथ श्शिवलिंगश् के रूप में विराजमान हैं, वहीं बोरेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव बोर के आकार की आकृति में स्थापित हैं। ये देखने में बेलन की तरह लंबा और गोल लगता है। शिवलिंग जमीन के ऊपर की तरफ नहीं बल्कि नीचे की तरफ धंसे हुए हैं। यह मंदिर अत्यंत प्राचीन और रहस्यमयी धार्मिक धरोहर है, जिसकी जड़ें ताम्र पाषाण काल से लेकर गुप्त काल तक फैली हुई मानी जाती हैं।मंदिर के गर्भगृह में मौजूद भगवान बोरेश्वर महादेव स्वयंभू हैं। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जलाधारी है, जिसमें कितना भी जल अर्पित किया जाए, उसका स्तर कभी न बढ़ता है और न ही घटता है। हमेशा समान बना रहता है। मान्यता है कि यहां 12 ज्योतिर्लिंगों का समावेश है। माना जाता है कि मंदिर में रात के समय चमत्कार होते हैं, जैसे रात्रि में नंदी महाराज मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं और मंदिर की घंटियां भी खुद-ब-खुद बजने लगती हैं। यही कारण है कि भक्तों के लिए यह मंदिर श्रद्धा, आस्था और रहस्य का केंद्र है।मंदिर के पास से चंबल नदी भी गुजरती है, जो शिवलिंग की आधी परिक्रमा करती है। नदी भी भगवान शिव के सोमसूत्र का पालन करती है और आधी परिक्रमा ही करती है।महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ आती है क्योंकि महाशिवरात्रि पर बोरेश्वर महादेव का विशेष शृंगार होता है और बाबा की सवारी भी निकलती है, जो नगर में चक्कर लगाकर वापस मंदिर में आती है। माना जाता है कि महादेव स्वयं भक्तों को नगर में आशीर्वाद देते हैं। वहीं सावन के महीने में हर सोमवार को बाबा की सवारी निकलती है। इस विशेष सवारी का हिस्सा बनने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं।

महाशिवरात्रि पर्व:श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुरू हुई शिव-शक्ति के विवाह की तैयारियां, 9 दिनों तक होंगे भव्य आयोजन
उज्जैन। हिंदू धर्म में फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर की जाने वाली महाशिवरात्रि की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। इस दिन भगवान शिव के साधक अपने आराध्य देवता का पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि का पर्व इस साल 15 फरवरी 2026 की शाम को 05ः04 बजे से प्रारंभ होकर 16 फरवरी 2026 को 05ः34 बजे समाप्त होगा। शिव और पार्वती के विवाह के इस त्योहार को लेकर उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं। मंदिर की दीवारों से लेकर शिखर पर रंग-रोगन किया जा रहा है। इसी के साथ 6 फरवरी से मंदिर में 9 दिनों तक चलने वाले उत्सव की शुरुआत होगी, जिसमें बाबा भक्तों को नौ अलग-अलग रूपों में दर्शन देंगे। महा शिवरात्रि के लिए मंदिर में की जा रही तैयारियों पर महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा, ष्इस बार महाशिवरात्रि का त्योहार 15 फरवरी को मनाया जाएगा। कुछ जगह तिथि को लेकर थोड़ा भ्रम है, लेकिन 15 फरवरी को ही शिवरात्रि उज्जैन में मनाई जाएगी।6 फरवरी से शुरू होगा महाशिवरात्रि का सेलिब्रेशनबाबा महाकाल की नगरी में महाशिवरात्रि का सेलिब्रेशन 9 दिन तक चलता है, जो 6 फरवरी से शुरू होगा और 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें रोजाना भगवान का रुद्राभिषेक, 24 घंटे निराकार रूप में दर्शन और जलधारी, रात के समय स्नान और वस्त्र धारण का कार्यक्रम रहेगा। साथ ही अलग-अलग नौ विग्रहों की स्थापना और पूजा की जाएगी। ये नौ दिन भगवान की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों जैसी होती है। भक्तों के लिए मंदिर भी खुले रहेंगे और भक्त बाबा महाकाल पर जलधारी अर्पित कर पाएंगे।दुशाला ओढ़ाकर बाबा का होता है श्रृंगारउन्होंने बताया कि पहले दिन बाबा का दुशाला ओढ़ाकर शृंगार होता है और फिर दूसरे दिन बाबा को शेषनाग धारण कराए जाते हैं। तीसरे दिन घटाघटा स्थापित किया जाता है, जो शिवलिंग के समान ही होता है। चैथे दिन प्रभु के छवि दर्शन होते हैं और पांचवें दिन बाबा को मन-महेश, उमा महेश, शिव तांडव और होलकर के रूप में सजाया जाता है।15 फरवरी को होने वाली पूजा होगी खास15 फरवरी को होने वाली खास पूजा और अनुष्ठान पर पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि 15 फरवरी को जलधारी के साथ चारों पहर की पूजा और आरती होगी और रात के समय स्नान के साथ बाबा को दूल्हे के रूप में शृंगार कर सजाया जाएगा और रात को विशेष शृंगार पूजा होगी, जिसे सेहरा दर्शन भी कहा जाता है।मंदिर परिसर में 9 दिनों तक आयोजित होगा भजन-कीर्तनइस दौरान नौ दिनों तक मंदिर परिसर में भजन और कीर्तन का आयोजन होगा और भक्तों के आगमन के लिए तैयारियां की जा रही हैं क्योंकि महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भीड़ बढ़ जाती है। मंदिर में हो रही तैयारी पर उन्होंने कहा कि गर्भगृह की सफाई, मंदिर के कुंड़ों की सफाई और रंग-रोगन का काम शुरू हो चुका है, जिसे 6 फरवरी तक खत्म करने की कोशिश रहेगी।

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर में गणतंत्र दिवस की धूम:राष्ट्रभक्ति के रंगों में रंगे बाबा महाकाल, रात में केसरिया लाइटों से जगमगाया मंदिर शिखर
उज्जैन। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। देश के कोने-कोने में तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस मौके पर उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया है।उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर को तिरंगे की रोशनी से सजाया गया। रात के समय मंदिर का शिखर केसरिया, सफेद और हरे रंग की लाइटों से जगमगाया। यह सजावट देश के राष्ट्रीय ध्वज का प्रतीक है। शिखर पर बना ओम का प्रकाश चिन्ह श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहा।भस्मारती में बाबा का पंचामृत से हुआ अभिषेकइसके साथ ही, प्रातःकाल होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक किया गया। विशेष पर्व के उपलक्ष्य में बाबा का भव्य और आकर्षक शृंगार किया गया, जिसमें सबसे खास रहा उनके मस्तक पर सुशोभित ‘तिरंगा तिलक’। राष्ट्रभक्ति के रंगों में रंगे बाबा के इस स्वरूप ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भस्म आरती के पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा महाआरती संपन्न की गई। इस दिव्य दर्शन से पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के साथ ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से गूंज उठा।महाकालेश्वर मंदिर में भस्मारती का विशेष महत्वश्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भस्म आरती का विशेष धार्मिक और पौराणिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल निराकार स्वरूप में होते हैं, इसीलिए महिलाएं इस आरती में शामिल नहीं होती हैं। महिलाएं सिर पर घूंघट या ओढ़नी डालकर ही दर्शन करती हैं। इस परंपरा का मंदिर में सख्ती से पालन किया जाता है।

महाकाल मंदिर:भस्मारती में भगवान का हुआ मनमोहन श्रृंगार, अद्भुत स्वरूप देख भाव-विभोर हुए भक्त
उज्जैन। धार्मिक नगरीय उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर के दरबार में शनिवार को भक्तों का सैलाब देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली परंपरागत भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष जलाभिषेक और पंचामृत पूजन के साथ चंदन, भस्म और सूखे मेवे से विशेष शृंगार किया गया।माघ माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर हुए इस भस्म आरती के अवसर पर बाबा का अद्भुत और मनमोहक शृंगार भी किया गया, जिसे देख श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए और परिसर हर हर महादेव, जय महाकाल से गूंज उठा। बाबा महाकाल के मस्तक पर चंदन, भांग और सूखे मेवों से दिव्य रूप उकेरा गया। भस्म की पवित्र राख से सराबोर भगवान और महामृत्युंजय मंत्र के जयघोष और शंखध्वनि से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान रहा।भगवान की एक झलक पाने देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालुबाबा के दर्शन और भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय आरती है। यह ब्रह्म मुहूर्त में होती है, जिसमें भगवान शिव का भस्म से शृंगार किया जाता है। इस आरती में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।भस्म आरती का पौराणिक महत्वभस्म आरती का पौराणिक महत्व भी बहुत गहरा है। इसमें गोहरी, पीपल, पलाश, शमी और बेल की लकड़ियों की राख मिलाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल निराकार स्वरूप में होते हैं। इसीलिए महिलाओं को इस आरती में शामिल होने या सीधे देखने की अनुमति नहीं होती। महिलाएं सिर पर घूंघट या ओढ़नी डालकर दर्शन करती हैं।इस परंपरा का पालन मंदिर में सख्ती से किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाकालेश्वर के दर्शन मात्र से ही भक्तों को शांति, सुख और आशीर्वाद प्राप्त होता रोग-शोक दूर होते हैं और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।

गौरीगणेश चतुर्थी: विघ्नहर्ता को प्रसन्न करने का उत्तम दिन, विघ्नहर्ता की आराधना से होता है विघ्नों का नाश
नई दिल्ली। माघ मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि गुरुवार को पड़ रही है, जिसे गौरीगणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। यह दिन भगवान गणेश के गौरीगणेश स्वरूप की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में गणेश जी को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देवता के रूप में पूजा जाता है। इस विशेष तिथि पर व्रत, पूजन, जप, तप, स्नान, दान और हवन आदि शुभ कर्म सहस्रगुणा फल प्रदान करते हैं। मुद्गल पुराण और भविष्य पुराण जैसे ग्रंथों में चतुर्थी व्रत को समस्त अभीष्ट सिद्धि देने वाला बताया गया है। श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करने से गणेश भक्ति के साथ जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है और सभी प्रकार के विघ्नों का नाश होता है।सनातन धर्म में किसी भी पूजा-पाठ या नए कार्य को करने से पहले पंचांग का विचार महत्वपूर्ण है। दृक पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 23 जनवरी की सुबह 2 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। शतभिषा नक्षत्र दोपहर 2 बजकर 27 मिनट तक है, उसके बाद पूर्व भाद्रपद शुरू होगा। योग वरीयान् शाम 5 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। वहीं, चंद्रमा कुंभ राशि में संचरण करेंगे। सूर्योदय 7 बजकर 14 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 52 मिनट पर होगा।शुभ मुहूर्तों की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 20 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 19 मिनट से 3 बजकर 2 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 5 बजकर 49 मिनट से 6 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। मध्याह्न काल में गणेश पूजन करना विशेष रूप से शुभ फलदायी होता है। रवि योग सुबह 7 बजकर 14 मिनट से दोपहर 2 बजकर 27 मिनट तक है।अशुभ समय का विचार भी महत्वपूर्ण है। राहुकाल दोपहर 1 बजकर 53 मिनट से 3 बजकर 12 मिनट तक रहेगा, इस दौरान कोई शुभ कार्य न करें। यमगण्ड सुबह 7 बजकर 14 मिनट से 8 बजकर 33 मिनट तक है। पूरे दिन पंचक व्याप्त है।धार्मिक मान्यता के अनुसार, गौरी पुत्र गणेश की आराधना से जीवन के हर क्षेत्र में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत में गणेश पूजन अनिवार्य माना जाता है। गौरी गणेश चतुर्थी के दिन गजानन का विधि-विधान से पूजन, कर ओम गं गणपतये नमरू और उनके 12 नामों का जप करें। गणपति को दुर्वा, बेलपत्र चढ़ाकर मोदक और लड्डू का भोग लगाएं। गणेश अथर्वशीर्ष, संकटनाशन स्त्रोत का पाठ करना भी फलदायी होता है।साथ ही गुरुवार को शक्ति की आराधना को समर्पित गुप्त नवरात्रि का चैथा दिन है। इस दिन मां भुनेश्वरी और मां छिन्नमस्ता की आराधना का विधान है।

गुप्त नवरात्रि का तीसरा दिन:इस तिथि पर मां त्रिपुर सुंदर की पूजा का है विशेष महत्व, कब करें आराधना जानें
नई दिल्ली। गुप्त नवरात्रि का तीसरा दिन बुधवार को है। हिंदू पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि चल है, जो 22 जनवरी की सुबह 2 बजकर 47 मिनट तक प्रभावी रहेगी। यह मां त्रिपुर सुंदरी के पूजन का भी दिन है। दृक पंचांग के अनुसार किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले पंचांग का विचार महत्वपूर्ण है। कोई शुभ कार्य जैसे विवाह, नामकरण, गृह प्रवेश, मुंडन या नया व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें राहुकाल का विशेष ध्यान रखना चाहिए। 21 जनवरी को राहुकाल दोपहर 12 बजकर 33 मिनट से 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई भी मंगल कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।नक्षत्र की बात करें तो धनिष्ठा नक्षत्र दोपहर 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा, उसके बाद शतभिषा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। चंद्रमा कुंभ राशि में संचरण करेगा। सूर्योदय 7 बजकर 14 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 51 मिनट पर होगा।21 जनवरी के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 20 मिनट पर विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 19 मिनट से 3 बजकर 1 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त शाम 5 बजकर 49 मिनट से 6 बजकर 15 मिनट तक है। वहीं, रवि योग दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से अगले दिन सुबह 7 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।पंचांग के अनुसार, राहुकाल 12 बजकर 33 मिनट से 1 बजकर 52 मिनट तक, यमगंड सुबह 8 बजकर 34 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक है। वहीं, गुलिक काल सुबह 11 बजकर 13 से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक और पंचक पूरे दिन रहेगा।गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के गुप्त स्वरूप की साधना की जाती है। तृतीया तिथि पर देवी के तीसरे रूप मां त्रिपुर सुंदरी की पूजा का विशेष महत्व है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर मां दुर्गा की विधिवत पूजा करें, मंत्र जाप करें और श्रद्धा-भक्ति से प्रसाद अर्पित करें। इसके साथ ही जप का विशेष महत्व है।

गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन:मां की आराधना के लिए शुभ माना गया द्विपुष्कर योग, गुप्त साधना के नतीजे होते हैं अधिक शक्तिशाली
नई दिल्ली। सनातन धर्म में नवरात्रि के साथ ही गुप्त नवरात्रि का भी विशेष महत्व है। मंगलवार को गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन है और इस दौरान द्विपुष्कर योग बन रहा है। यह दिन मां दुर्गा की गुप्त साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। गुप्त नवरात्रि सामान्य नवरात्रि से अधिक गोपनीय होती है। इस दौरान साधक विशेष सिद्धियां प्राप्त करने के लिए मां दुर्गा की गुप्त रूप से आराधना करते हैं। गुप्त नवरात्रि में की गई साधना के नतीजों को कहीं अधिक शक्तिशाली भी माना जाता है।सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है, क्योंकि इसके पांचों अंग दृ तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार किसी भी कार्य की शुभता तय करते हैं। दृक पंचांग के अनुसार 20 जनवरी को शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है जो 21 जनवरी की सुबह 2 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। श्रवण नक्षत्र दोपहर 1 बजकर 6 मिनट तक रहेगा, उसके बाद धनिष्ठा शुरू होगा। योग की बात करें तो सिद्धि, शाम 8 बजकर 1 मिनट तक चलेगा। करण बालव है, जो दोपहर 2 बजकर 31 मिनट तक रहेगा, फिर कौलव करण प्रारंभ होगा।मंगलवार को चंद्रमा मकर राशि में संचरण करेंगे। सूर्योदय 7 बजकर 14 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 50 मिनट पर होगा। इस दिन द्विपुष्कर योग दोपहर 1 बजकर 6 मिनट से 21 जनवरी की सुबह 2 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। द्विपुष्कर योग में किए गए शुभ कार्यों, पूजा-पाठ, व्रत या अन्य मंगल कार्यों के फल कई गुना बढ़ जाते हैं।शुभ मुहूर्त देखें तो ब्रह्म मुहूर्त 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा, विजय मुहूर्त और गोधूलि मुहूर्त का भी संयोग बन रहा। इन समयों में पूजा या शुभ कार्य करना विशेष फलदायी होता है।किसी भी नए और शुभ काम करने के लिए अशुभ समय या राहुकाल का विचार महत्वपूर्ण है। राहुकाल दोपहर 3 बजकर 11 मिनट से 4 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए। अन्य अशुभ काल में यमगंड 9 बजकर 53 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट और गुलिक काल 12 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।

मौनी अमावस्या पर धार्मिक नगरी में देखने को मिला आस्था का भव्य संगम:हरिद्वार-वाराणसी-प्रयागराज में आस्थावानों ने पवित्र डुबकी, कड़ाके की ठंड में भी नहीं डिगे पैर
नई दिल्ली। मौनी अमावस्या के अवसर पर धार्मिक नगरी हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज में आस्था का भव्य संगम देखने को मिल रहा है। कड़ाके की ठंड के बावजूद सुबह-सुबह लाखों की संख्या में श्रद्धालु घाटों पर पहुंचे और पवित्र स्नान किया। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच श्रद्धालु स्नान के बाद मंदिरों में दर्शन-पूजन में लीन हैं। हरिद्वार में रविवार को हजारों श्रद्धालु गंगा में पवित्र डुबकी लगाने, पूजा-पाठ करने और तर्पण करने के लिए 'हर की पौड़ी' पर इकट्ठा हुए, जबकि अधिकारियों ने कड़ी सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और निगरानी के साथ सब कुछ सुचारू रूप से सुनिश्चित किया। एक श्रद्धालु ने कहा कि आज मौनी अमावस्या है और हम इसे पारंपरिक तरीके से मना रहे हैं। वह व्यक्तिगत रूप से हर मौनी अमावस्या पर यहां आते हैं। इसका परिवार के सदस्यों और पूर्वजों के लिए विशेष महत्व है।वाराणसी में लाखों श्रद्धालुओं ने किया स्नानवाराणसी में भी मौनी अमावस्या के मौके पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा घाटों पर पवित्र स्नान किया। एक महिला ने कहा कि यह कृष्ण पक्ष का नौवां दिन, मौनी अमावस्या है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं, अपनी हैसियत के हिसाब से दान करते हैं, पूजा करते हैं और प्रार्थना करते हैं। दशाश्वमेध घाट के तीर्थ पुरोहित विवेकानंद ने कहा कि माघ महीने के कृष्ण पक्ष में मौनी व्रत रखने वाले भक्त गंगा में अनुष्ठान करने आते हैं। गंगा में स्नान करने के बाद, वे पवित्र डुबकी लगाते हैं, अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं और उनकी शांति व कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं। बच्चे भी इन अनुष्ठानों में भक्ति भाव से भाग लेते हैं।माघ मेले का सबसे बड़ा स्नान मौनी अमवस्यामाघ मेले का तीसरा और सबसे बड़ा स्नान मौनी अमावस्या के दिन होता है। ऐसे में बड़ी संख्या में वहां श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। रविवार सुबह घने कोहरे और ठंड के मौसम के बीच मौनी अमावस्या के मौके पर पवित्र स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम घाट आए। ज्योतिषी आशुतोष वार्ष्णेय ने कहा कि मौनी अमावस्या स्नान का महत्व बहुत ज्यादा है। मान्यताओं के अनुसार, 33 करोड़ देवी-देवता प्रयागराज आते हैं और पवित्र स्नान करते समय मौन व्रत रखते हैं, जो इस अनुष्ठान के आध्यात्मिक महत्व को बताता है।श्रद्धालुओं ने शेयर किए अपने अनुभवश्रद्धालुओं ने कहा कि मौनी अमावस्या है और इस पवित्र मौके पर हम यहां पवित्र स्नान करने आए हैं। हम आधी रात के करीब निकले थे, और स्नान पूरा करने के बाद अब हम घर वापस जा रहे हैं। कई श्रद्धालुओं ने माघ मेला के दौरान व्यवस्थाओं की प्रशंसा की। प्रयागराज में संगम घाट पर कड़ी सुरक्षा और ट्रैफिक के इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एनडीआरएफ-एसडीआरएफ टीमों, सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी की जा रही है।डिविजनल कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने कहा कि शनिवार शाम 6 बजे से अब तक सभी घाटों पर लगभग पचास लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया है। भीड़ उम्मीद से ज्यादा है, लेकिन पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। स्नान की प्रक्रिया सुचारू रूप से और व्यवस्थित तरीके से चल रही है। डीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि मौनी अमावस्या का मुख्य स्नान आज हो रहा है और आधी रात से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र स्नान कर रहे हैं। स्नान छह घंटे से ज्यादा समय से चल रहा है और यह प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के जारी है। हर घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद हैं और स्नान कर रहे हैं।

महाकाल महोत्सव:भगवान भोलेनाथ की भस्मारती में शामिल होकर धन्य हुई बालीवुड सिंगर, कहा- अब आऊंगी बार-बार
उज्जैन। उज्जैन के महाकाल मंदिर में पांच दिवसीय महाकाल महोत्सव का आयोजन हुआ है, जहां महोत्सव के तीसरे दिन बॉलीवुड सिंगर सोना महापात्रा ने स्टेज से अपनी बुलंद आवाज में शिव भक्ति गीत गाए। शो उज्जैन के मंदिर परिसर के अंदर ही रखा गया। अब सिंगर को पहली बार शिव भक्ति से भरे गीत गाने का मौका मिला और उनके लिए भस्म आरती से लेकर भक्ति गीत गाने का अनुभव अद्भुत रहा।सोना महापात्रा ने भस्म आरती में शामिल होने के अनुभव के बारे में बात करते हुए कहा, भस्म आरती में शामिल होने का मौका पहली बार मिला है और हमने महाकाल महोत्सव में भी गाया है। ऐसा पहली बार है जब हमने 2 घंटे तक लगातार भक्ति गीत गाए और भगवान शिव और मां पार्वती के आशीर्वाद की वजह से ही संभव हो पाया है। भस्म आरती में शामिल होकर शांति और ऊर्जा दोनों मिली है, जब एक साथ, एक ही सुर में सब गा रहे थे तो मन ऊर्जा से भर उठा। मैं यहां पहली बार आई हूं लेकिन अब बार-बार आऊंगी।मैं भस्मारती की एनर्जी को ले जा रही हूं साथ उन्होंने आगे कहा, मुझे लगता है कि आज के बाद मेरे जीवन और देश में भी सबकुछ ठीक होने वाला है। साल 2025 हर तरह से उठक-पटक वाला साल रहा है और मुझे उम्मीद है कि भस्म आरती की जो ऊर्जा है, वो इस साल सब कुछ सही कर देगी। मैं इस एनर्जी को अपने साथ लेकर जा रही हूं।कलाकारों के लिए भगवान शिव ही सब कुछहिंदी सिनेमा में बन रहे गानों को लेकर सिंगर ने कहा कि मुझे लगता है अब सुकून वाले गाने सुनने और गाने भी चाहिए, क्योंकि हर तरफ सिर्फ प्रेशर महसूस होता है कि अच्छा ही करना है। हम कलाकारों के लिए भगवान शिव ही सबकुछ हैं क्योंकि उन्होंने ही नृत्य और कला की नींव रखी है। हम सबके लिए, इस पूरी सृष्टि के लिए उनका आशीर्वाद बहुत जरूरी है। बता दें कि सोना महापात्रा ने बॉलीवुड को बेहतरीन गानों से नवाजा है। उन्होंने अंबरसरिया, बहारा, नैना, मुझे का लूटेगा रुपैया, बेड़ा-पार, और जिया लागे न जैसे बेहतरीन गानों को आवाज दी है।

मकर संक्रांतिः संगम से लेकर काशी तक भक्तों से खचाखच भरे घाट:हर ओर सुनाई दे रहे थे हर-हर गंगे के जयघोष और देखने को मिला धामिक उत्साह
वाराणसी। मकर संक्रांति के मौके पर वाराणसी के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। लोग आस्था और श्रद्धा के साथ गंगा में पवित्र स्नान कर रहे हैं। संगम, काशी और वाराणसी के घाट भक्तों से खचाखच भरे हैं। सुबह से ही घाटों पर हर-हर गंगे के जयघोष और धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहे हैं। टूरिस्ट गाइड विवेकानंद पांडे ने बताया कि मकर संक्रांति रात 9रू35 बजे शुरू हो गया है, जिस वजह से सुबह से दूरदराज से लोग काशी के पवित्र घाटों में आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन बेहद शुभ है, क्योंकि आज से सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। ऐसे में आज लोग धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। इसके अलावा, खिचड़ी, मिष्ठान, तिल आदि चीजों का दान भी कर रहे हैं।अयोध्या के सरयू घाट पर भी भक्तों की भीड़ देखने को मिल रही है। एक भक्त अशोक कुमार पाल ने बताया कि वह राम जन्मभूमि और कौशल्या माता के घर आए हैं। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति पर तिल से बनी मिठाई का दान किया जाता है, जो सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल से सुबह 3:30 बजे यात्रा शुरू की, पवित्र स्नान किया, दान दिया और अब वापस लौट रहे हैं।गाजीपुर में भी गंगा के घाटों पर हजारों श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगाते नजर आए। एक श्रद्धालु संध्या वर्मा ने बताया कि 14 तारीख को गंगा स्नान होना था, लेकिन एकादशी के कारण यह पर्व 15 तारीख को मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति हिंदू धर्म में हर साल बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाती है और यह सनातन काल से चलता आ रहा है।एक अन्य श्रद्धालु संजय कुमार वर्मा ने बताया कि आज के शुभ अवसर पर घाटों पर सुबह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक, हर उम्र के लोग पवित्र स्नान कर रहे हैं।पुजारी कन्हैया पांडे ने बताया कि मकर संक्रांति पर गंगा नदी में स्नान का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि प्रकाश की किरणों में स्नान करने से व्यक्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लोग संगम, काशी और गंगा के अन्य घाटों पर स्नान करते हैं, दान करते हैं, खुशियां मनाते हैं और अपने रिश्तेदारों के पास जाते हैं।

श्री महाकाल महोत्सव का भव्य आगाज:पार्श्व गायक की सुमधुर प्रस्तुति ने भक्तों का मोहा मन, सीएम बोले- आयोजन ने उज्जैन की सुंदरता को बनाया स्वर्ग
भोपाल। श्रीमहाकाल लोक मंदिर में श्री महाकाल महोत्सव का भव्य आगाज हो गया है। मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने मकर संक्रांति पर्व की पावन संध्या पर पूजन अर्चन कर श्री महाकाल महोत्सव का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि श्री महाकाल महोत्सव से उज्जैन की सुंदरता को स्वर्ग के समान बना दिया है। आज की उज्जैन नगरी महाकवि कालिदास की रचनाओं की अवंतिका के समान हो गई है। सम्राट विक्रमादित्य और राजा भोज के काल से अवंतिका नगरी न्याय और प्रशासनिक दक्षता की वाहक है। सम्राट विक्रमादित्य, राजा भोज और अवंतिका नगरी की अन्य महान विभूतियों और प्रेरक कहानियों को श्री महाकाल महालोक में मूर्ति कला और दीवारों पर चित्रों के माध्यम से बड़ी सुंदर तरीके से दर्शाया गया है। श्री महाकाल की नगरी काल की नगरी है। श्री महाकाल की कृपा से हमारी प्रत्येक सांस है और प्रेरणा से यह जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित है। प्रदेश ने धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर अपनी नवीन पहचान स्थापित की है । श्री महाकाल महोत्सव श्रद्धालुओं को आध्यात्म, धर्म और प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ने का माध्यम है। इससे श्रद्धालुओं को बाबा का आशीर्वाद भी मिलेगा, और उज्जैन की जानकारी भी मिलेगी। उज्जैन की विविधता और समरसता निराली डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दो ज्योतिर्लिंग है ,दोनों ज्योतिर्लिंग की कनेक्टविटी सड़क ,वायु और रेल मार्ग से बढ़ाकर श्रद्धालुओं को सुविधा प्रदान की जा रही है। उज्जैन में तो शक्ति पीठ माता गढ़ कालिका भी है साथ ही यहाँ शिप्रा के किनारे गुरुद्वारा है जहां श्री गुरु नानक जी आए और उज्जैन का उल्लेख अपने पदों में किया है। उज्जैन की विविधता और समरसता निराली है।भोपाल-उज्जैन में आयोजित किए जाएंगे वन मेलेसीएम ने कहा कि उज्जैन में सावन महोत्सव 2003 के बाद शुरू किया गया। अब शिवरात्रि से लेकर गुड़ी पड़वा तक उज्जैन में मेला आयोजित हो रहे हैं। उज्जैन में आयोजित विविध कार्यक्रमों और मेलों के माध्यम से पर्यटनों को इतिहास और संस्कृत से जोड़ रहे है और सभी का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन और ग्वालियर में आयोजित व्यापार मेले में वाहनों में कर की छूट भी सरकार द्वारा प्रदान की जा रही है। इस परम्परा को ओर समृद्ध बनाकर अब भोपाल के साथ उज्जैन में भी 5 दिवसीय वन मेला दशहरा मैदान पर आयोजित किया जाएगा। इसमें विभिन्न वन उत्पाद नागरिक प्राप्त कर सकेंगे।जिले को जल्द मिलेंगी कई बड़ी सौगातेंमुख्यमंत्री ने कहा कि संगीत की समृद्ध परंपरा में डमरू सबसे पहला वाद्य यंत्र है। संगीत की समृद्ध परंपरा में अन्य यंत्र इसके बाद बने है। शंकर महादेवन द्वारा दी जाने वाली डमरू वाद्य यंत्र पर प्रस्तुति अद्भुत होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल्द ही जिले को इंदौर उज्जैन सिक्स लेन, हरिफटक पुल सिक्स लेन, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स आदि की सौगात मिलेगी। साथ ही जिले में अन्य विकास के कार्य भी किए जा रहे है। जिले में 25 जनवरी को राहगीरी का आनंद उत्सव भी आयोजित किया जाएगा।

श्रीमहाकाल लोक में श्रीमहाकाल महोत्सव का आगाज आज:त्रिवेणी संग्रहालय में देखने को मिलेगा कला, संगीत का अनूठा संगम, सीएम करेंगे शुभारंभ
उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज बुधवार को श्रीमहाकाल महालोक उज्जैन में पाँच दिवसीय श्रीमहाकाल महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। 18 जनवरी 2026 तक चलने वाला यह महोत्सव श्रीमहाकाल महालोक और त्रिवेणी संग्रहालय के प्रांगण में कला, संगीत और वैचारिक विमर्श का अनूठा संगम होगा। वीर भारत न्यास और श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त तत्वावधान में यह महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन एक बार फिर भारतीय संस्कृति, कला और अटूट श्रद्धा के महोत्सव की साक्षी बनने जा रही है।5 दिनों तक बहेगी संगीत सरितामहोत्सव की मुख्य सभाओं में देश के ख्यातिलब्ध कलाकार भगवान शिव की आराधना अपनी स्वर-लहरियों से करेंगे। 14 जनवरीरू महोत्सव के पहले दिन सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक शंकर महादेवन अपने पुत्रों सिद्धार्थ और शिवम् के साथ शिवोऽहम की संगीतमय प्रस्तुति देंगे। 15 जनवरीरू मुम्बई का प्रसिद्ध द ग्रेट इंडियन क्वायर शिवा थीम पर प्रस्तुति देगा। 16 जनवरीरू सुप्रसिद्ध गायिका सोना महापात्रा अपनी संगीत यात्रा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी। 17 जनवरीरू इंदौर के श्रेयश शुक्ला एवं मुम्बई के विपिन अनेजा व उनके बैंड द्वारा सुगम संगीत की प्रस्तुति होगी। 18 जनवरीरू महोत्सव का समापन इंडोनेशिया (कोकोरदा पुत्रा) और श्रीलंका (अरियारन्ने कालूराच्ची) के दलों द्वारा प्रस्तुत श्शिव केंद्रित नृत्य नाटिकाश् से होगा, जो महोत्सव के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को दर्शाएगा।त्रिवेणी संग्रहालय में प्रतिदिन जनजातीय संस्कृति के होंगे दर्शनमहोत्सव में प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे तक त्रिवेणी संग्रहालय में मध्यप्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति के दर्शन होंगे। इसमें छिंदवाड़ा का भड़म, बैतूल का ठाट्या, धार का भगोरिया और सागर का बरेदी जैसे पारंपरिक नृत्यों का प्रदर्शन होगा। प्रतिदिन निकलने वाली श्कला यात्राश् शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए श्रीमहाकाल लोक पहुँचेगी। इसमें शिव बारात, डमरू वादन और मलखंब के रोमांचक प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र होंगे।15 जनवरी को होगा बौद्धिक विमर्शसांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ, 15 जनवरी को प्रातः 10:30 बजे एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इसका विषय शिव तत्त्व और महाकाल पुरातिहास, साहित्य और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में रखा गया है, जहां विद्वान शिव तत्व की दार्शनिक गहराईयों पर प्रकाश डालेंगे। आमजन को इस भक्तिमय उत्सव में सहभागी होने के लिए सादर आमंत्रित किया गया है।

मकर संक्रांति का देशभर में उल्लास: प्रयागराज के संगम में भक्तों ने लगाई आस्था की डुबकी, हर की पौड़ी और सरयू में भी दिखी रौनक
नई दिल्ली। मकर संक्रांति का पर्व देशभर में आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही यह पर्व पुण्य, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देता है। इस मौके पर अयोध्या, प्रयागराज और ऋषिकेश जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालु नदियों में पवित्र स्नान कर रहे हैं। प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के बीच मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम पर उमड़ पड़े। संगम घाटों पर बुधवार सुबह बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए और सभी उम्र के लोगों ने पवित्र डुबकी लगाई।श्रद्धालुओं ने शेयर किए अपने अनुभवप्रयागराज में संगम घाट पर स्नान के बाद एक श्रद्धालु ने कहा, हम अयोध्या से आए हैं और हमने भी पवित्र स्नान किया। वहीं एक महिला ने कहा कि हम पिछले 10-12 सालों से प्रयागराज आ रहे हैं। हर बार एक महीने के लिए रुकते हैं। उन्होंने कहा कि यह इतनी महान और पवित्र जगह है कि इसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि बहुत अच्छा अनुभव रहा है। मकर संक्रांति का दिन है और चारों तरफ बस खुशी ही खुशी है।सरयू के घाटों में भी रौनकअयोध्या में सरयू के घाटों पर भी रौनक देखी गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरयू नदी के घाटों में पवित्र स्नान करने पहुंचे। कड़ाके की ठंड के बावजूद सुबह 4 बजे से श्रद्धालुओं का स्नान शुरू हो गया। स्नान के बाद श्रद्धालु हनुमानगढ़ी मंदिर और राम मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।यह बोले भक्तपहली बार अयोध्या पहुंचे मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिला निवासी एक श्रद्धालु ने कहा कि हमने पहले तीर्थ यात्रा की थी और उसका झंडा उठाया था। हमने इस बार यहां आने का फैसला किया। मिर्जापुर के निवासी एक युवक ने कहा कि मकर संक्रांति का त्योहार है। यहां की सरयू नदी को पवित्र माना जाता है। यहां आकर बहुत अच्छा लगा है।तीर्थयात्रियों ने प त्रिवेणी घाट पर किया दान-पुण्यमकर संक्रांति के मौके पर उत्तराखंड के ऋषिकेश में भी हजारों श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी घाट पर पवित्र स्नान किया। तीर्थयात्रियों ने पूजा-पाठ, प्रार्थना और दान-पुण्य किया। राजस्थान के रहने वाले दीपक ने बताया कि वह पिछले आठ साल से गंगा में पवित्र स्नान के लिए ऋषिकेश आते हैं। स्नान करने के बाद दान-पुण्य करते हैं और शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाते हैं।गंगा में पवित्र डुबकी लगाने आते हैं विदेशों सेएक और युवक ने कहा कि भक्त अलग-अलग राज्यों से और विदेश से भी गंगा में पवित्र डुबकी लगाने और दर्शन करने आते हैं। इस दिन लोग सुबह-सुबह पूजा-पाठ करते हैं, प्रार्थना करते हैं, दान करते हैं और अपने परिवार की भलाई और खुशहाली के लिए देवी गंगा से प्रार्थना करते हैं।हर की पौड़ी पर भक्तों ने लगाई आस्था की डुबकीइसी तरह उत्तराखंड के हरिद्वार में हर की पौड़ी पर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। एक श्रद्धालु ने बताया कि एक समय था जब हम छिपकर कांवड़ यहां लाते थे, कभी उत्तरकाशी के रास्ते और कभी दूसरे रास्तों से। आज हम खुश हैं कि हम बिना किसी डर के आजादी से यात्रा कर सकते हैं। एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि यह बहुत पवित्र स्नान है। यह पूरे साल में एक बार आता है और इसे बहुत पवित्र माना जाता है। हरिद्वार में स्नान के बाद बहुत अच्छा लग रहा है।

नारायण की कृपा प्राप्ति का विशेष दिन तिल द्वादशी:तिल दान से मिलता है अश्वमेध यज्ञ जैसा फल
नई दिल्ली। षटतिला एकादशी के अगले दिन मनाई जाने वाली तिल द्वादशी बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन तिल से स्नान, तिल का दान, तिल से हवन और तिल युक्त भोजन करने से बहुत लाभ मिलता है। हिंदू पंचांग के अनुसार द्वादशी तिथि है, जो रात 8रू16 बजे तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी शुरू हो जाएगी। दृक पंचांग के अनुसार, नक्षत्र ज्येष्ठा है, जो अगले दिन यानी 16 जनवरी की सुबह 5 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। इसके बाद मूल नक्षत्र शुरू होगा। चंद्रमा पूरे दिन वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे। सूर्योदय सुबह 7 बजकर 15 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 46 मिनट पर होगा। चंद्रोदय 16 जनवरी की सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर और चन्द्रास्त दोपहर 2 बजकर 34 मिनट पर होगा। इस दिन वृद्धि योग है, जो रात 8 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। तैतिल करण रात 8 बजकर 16 मिनट तक चलेगा।किसी भी कार्य को करने से पहले राहुकाल नोट कर लें। दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से 3 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य या नया काम नहीं करना चाहिए। भविष्य पुराण के अनुसार जब द्वादशी तिथि पर मूल नक्षत्र या पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र हो, तो इसे तिल द्वादशी कहा जाता है। इस साल 15 जनवरी को द्वादशी के साथ ज्येष्ठा नक्षत्र है और अगले दिन मूल नक्षत्र शुरू हो रहा है। इस संयोग में तिल द्वादशी व्रत का विशेष महत्व है।धर्म शास्त्रों में उल्लेखित है कि तिल द्वादशी का व्रत करने से व्यक्ति को कई जन्मों तक भयानक रोगों जैसे अंधापन, बहरापन, कोढ़ आदि से मुक्ति मिलती है। यह व्रत स्वास्थ्य, लंबी आयु और सदा निरोगी रहने का वरदान देता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। व्रत रखने वाले लोग तिल से बने व्यंजन जैसे तिल के लड्डू, तिल की चिक्की आदि बनाते और दान करते हैं। तिल दान करने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर का फल मिलता है।हिन्दू पंचांग के अनुसार, पौष मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को कूर्म द्वादशी मनाई जाती है। इसके लगभग 15 दिन बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की द्वादशी को कृष्ण कूर्म द्वादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की पूजा का विशेष महत्व होता है।

7 जनवरी पंचांग: मघा से पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का संयोग, किन शुभ समयों में करें जरूरी काम
नई दिल्ली। पंचांग भारतीय संस्कृति में दिन की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा, विवाह, गृह प्रवेश या नए काम की शुरुआत से पहले पंचांग देखकर शुभ-अशुभ समय जानने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल और मुहूर्त के आधार पर दिन को समझा जाता है। इसी कड़ी में 7 जनवरी 2026, यानी बुधवार के पंचांग की बात करें, तो हिन्दू पंचांग के अनुसार इस दिन माघ मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है। यह तिथि सुबह 06:52 बजे से प्रारंभ होकर 8 जनवरी 2026 को सुबह 06:33 बजे तक रहेगी, इसके बाद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि लग जाएगी।पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार, ये मास माघ है, जबकि अमांत पंचांग में इसे पौष मास माना गया है। इस दिन सूर्य धनु राशि में स्थित रहेगा, वहीं चन्द्रमा सिंह राशि में रहेगा। नक्षत्र की बात करें तो दिन की शुरुआत मघा नक्षत्र में होगी, जो सुबह 11ः56 बजे तक रहेगा। इसके बाद पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र आरंभ हो जाएगा, जो अगले दिन दोपहर तक प्रभावी रहेगा। योग के अनुसार, दिन में आयुष्मान योग रहेगा, जो शाम 6ः33 बजे तक मान्य है। इसके बाद सौभाग्य योग प्रारंभ होगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।अब बात करते हैं शुभ और अशुभ समय की। बुधवार के दिन राहुकाल दोपहर 12रू26 बजे से 1रू43 बजे तक रहेगा। इस दौरान किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य से बचना चाहिए। इसके अतिरिक्त यम गण्ड काल सुबह 8ः35 से 9ः52 बजे तक और कुलिक काल 11ः09 से 12ः26 बजे तक माना गया है। दुर्मुहूर्त दोपहर 12ः06 से 12ः47 बजे तक रहेगा, वहीं वर्ज्यम् काल रात 8ः05 से 9ः43 बजे तक अशुभ माना गया है।शुभ समय की बात करें तो दिन में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:42 से 6रू30 बजे तक रहेगा, जो ध्यान, पूजा और अध्ययन के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। अमृत काल सुबह 9:33 से 11:08 बजे तक तथा एक अन्य अमृत काल सुबह 5:52 से 7:30 बजे तक है। हालांकि इस दिन अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।चैघड़िया के अनुसार, सुबह का समय अपेक्षाकृत अनुकूल है। दिन में लाभ, अमृत और शुभ चैघड़िया आते हैं, जबकि राहुकाल के दौरान रोग चैघड़िया प्रभावी रहता है। चंद्र बल के अनुसार, इस दिन मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुंभ और मीन राशि वालों के लिए दिन अनुकूल माना गया है।

निमरत कौरः विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर पहुंची बालीवुड अभिनेत्री:दिव्य भस्मारती का लिया लाभ, नंदी हाल में बैठकर की भोले की भक्ति
उज्जैन। फिल्मी दुनिया के कई सितारे ऐसे भी हैं, जो अपने व्यस्त शेड्यूल से समय निकालकर आध्यात्मिक शांति की तलाश में मंदिरों और धार्मिक स्थलों का रुख करते हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री निमरत कौर इन्हीं कलाकारों में से एक हैं। वे मंगलवार की सुबह उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर पहुंची और भगवान श्री महाकाल के दर्शन करने पहुंची। निमरत कौर ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर की भस्म आरती में शामिल हुई। वह तड़के सुबह करीब चार बजे महाकाल मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने भस्म आरती में हिस्सा लिया। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल देखने को मिला। निमरत कौर ने नंदी हॉल में बैठकर करीब दो घंटे से अधिक समय तक भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन किया और ध्यान में लीन नजर आईं।आने वाले प्रोजेक्ट और जीवन के लिए की मंगलकामनाएंभस्म आरती में निमरत कौर पूरी तरह श्रद्धा भाव में डूबी हुई दिखाई दीं। उन्होंने देहरी से भगवान महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स और जीवन के लिए मंगलकामनाएं कीं। मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से उनका विधिवत स्वागत भी किया गया। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के उप प्रशासक एस. एन. सोनी ने अभिनेत्री का सम्मान किया और उन्हें मंदिर की परंपराओं की जानकारी दी।प्रसिद्ध मंदिरों का भ्रमण करती रहती हैं निमरत कौरयह पहला मौका नहीं है जब निमरत कौर किसी धार्मिक स्थल पर दर्शन के लिए पहुंची हों। इससे पहले भी वह देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों और तीर्थ स्थलों पर जाती रही हैं। हाल ही में नए साल के मौके पर उन्होंने जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में स्थित शंकराचार्य मंदिर के दर्शन किए। वहां उन्होंने भगवान शिव की पूजा की और आशीर्वाद प्राप्त किया।महाशिवरात्रि पर पहुंची थीं त्र्यंबकेश्वर इससे पहले, उन्होंने महाशिवरात्रि के अवसर पर महाराष्ट्र स्थित त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव के दर्शन किए थे। वहीं, गुरुपर्व के अवसर पर वह अमृतसर के स्वर्ण मंदिर भी गई, जहां उन्होंने मत्था टेका। निमरत कौर इन दिनों वेब सीरीज द फैमिली मैन सीजन 3 को लेकर चर्चा में हैं, जिसमें उनके किरदार को दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

मस्तक पर चन्द्रमा, भांग और भस्म से मनमोहक श्रृंगार:बाबा महाकाल के निराकार स्वरूप का दर्शन कर धन्य हुए भक्त
उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में माघ मास कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर सोमवार सुबह भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। देर रात से लाइन लगाए भक्तों ने बाबा महाकाल की दिव्य भस्मारती का दर्शन कर अभिभूत हुए। ब्रह्म मुहूर्त में बाबा का भांग और भस्म से विशेष शृंगार किया गया। महाकाल के मस्तक पर चंद्रमा और कमल लगाकर सजाया गया। यह दृश्य देखकर श्रद्धालु गदगद हो गए और मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। हजारों भक्त देर रात से ही लाइन में लगकर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचे। सुबह करीब 4 बजे बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया।भगवान शिव का प्रिय अलंकार है भस्ममान्यता है कि भस्म शिव का प्रिय अलंकार है, जो जीवन-मृत्यु के चक्र और निराकार स्वरूप का प्रतीक है। इस आरती में भाग लेने से भक्तों को संकटों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। दुनिया भर से श्रद्धालु भस्म आरती और बाबा के दर्शन के लिए उज्जैन आते हैं। भस्म आरती की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, हर दिन यहां हजारों भक्त शामिल होते हैं।दुनिया में अपनी तरह की इकलौती है महाकाल मंदिर की भस्मारतीमहाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती दुनिया में अपनी तरह की इकलौती आरती है, जो ब्रह्म मुहूर्त में सुबह करीब 4 बजे होती है। इस दौरान भगवान शिव का शृंगार और आरती भस्म की जाती है, जो पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। भस्म श्मशान से लाई गई ताजी चिता की राख से तैयार की जाती है। इसमें गोहरी, पीपल, पलाश, शमी और बेल की लकड़ियों की राख भी मिलाई जाती है।बाबा महाकाल के निराकार स्वरूप में होते हैं दर्शनधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय महाकाल निराकार स्वरूप में होते हैं, इसलिए महिलाएं सिर पर घूंघट या ओढ़नी डालकर रहती हैं। परंपरागत रूप से महिलाओं को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं होती, लेकिन वे बाहर से या विशेष व्यवस्था के अंतर्गत दर्शन कर सकती हैं। भस्म आरती में शंखनाद, ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चार के बीच भस्म चढ़ाई जाती है। इसके बाद पंचामृत अभिषेक और अन्य अलंकारों से बाबा को सजाया जाता है।

खगोलशास्त्र के शौकीनों के लिए खास रहेगा साल 2026ः:पूरे वर्ष में लगेंगे 4 ग्रहण, भारत में सिर्फ एक का ही मान्य होगा सूतक काल, वह भी चन्द्र ग्रहण का
नई दिल्ली। साल 2026 शुरू हो चुका है और इस साल खगोलशास्त्र के शौकीनों के लिए कुछ खास लेकर आया है। इस साल कुल चार ग्रहण होंगे, दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण, लेकिन ये चारों ग्रहण भारत में समान रूप से दिखाई नहीं देंगे। भारत में सिर्फ एक चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। बाकी के तीन ग्रहण या तो हमारे देश से दिखाई नहीं देंगे या फिर इनका असर इतना कम होगा कि इसे देख पाना मुश्किल होगा।साल का पहला ग्रहण 17 फरवरी को होगा। यह एक सूर्य ग्रहण है, जिसे वलयाकार सूर्य ग्रहण या रिंग ऑफ फायर कहा जाता है। इस ग्रहण में सूर्य का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा ढक जाएगा और यह लगभग 2 मिनट 20 सेकेंड तक रहेगा। यह ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अर्जेंटीना और अंटार्कटिका में दिखेगा। भारत में यह दिखाई नहीं देगा। इसलिए इसका सूतक काल भी लागू नहीं होगा।तीन मार्च को लगेगा पहला चन्द्र ग्रहणइसके बाद 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा और यह भारत में पूरी तरह दिखाई देगा। यही वह ग्रहण है जिसे हम सीधे देख पाएंगे। यह चंद्र ग्रहण लगभग 58 मिनट तक रहेगा और इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का नजर आएगा। इसे लोग ब्लड मून भी कहते हैं। खगोलशास्त्र के हिसाब से यह 2029 से पहले का आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। इस ग्रहण का सूतक काल भारत में मान्य होगा, यानी धार्मिक और पारंपरिक हिसाब से इसका महत्व भी रहेगा।तीसरा ग्रहण 29 जुलाई को लगेगा। यह भी सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन अफसोस की बात यह है कि यह भारत में दिखाई नहीं देगा। इसे देखने के लिए अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में रहना पड़ेगा। चूंकि भारत में यह दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी यहां मान्य नहीं होगा।28 अगस्त को लगेगा साल का आखिरी ग्रहणसाल का चैथा और आखिरी ग्रहण 28 अगस्त को होगा। यह दूसरा चंद्र ग्रहण है, जो उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा, लेकिन भारत से इसे देखा नहीं जा सकेगा। इसका भी सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा। कुल मिलाकर साल 2026 में चार ग्रहण होंगे, लेकिन भारत में केवल 3 मार्च का पूर्ण चंद्र ग्रहण ही दिखाई देगा।

श्री महाकालेश्वर मंदिर:नए साल के पहले दिन राजा स्वरूप में सजे भोलेनाथ, दुर्लभ दर्शन पाने उमड़े भक्त, काशी विश्व नाथ मंदिर में लगीं कतारें
उज्जैन। साल के पहले दिन उज्जैन के महाकाल मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है। सुबह से ही भक्त बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए कोहरे में लंबी कतारों में इंतजार कर रहे हैं। नए साल के पहले दिन बाबा के विशेष शृंगार किए गए हैं, जिन्हें उज्जैन के राजा के रूप में सजाया गया है। साल के पहले दिन इतने अद्भुत दर्शन पाकर भक्त निहाल हो गए हैं और पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज रहा है।नववर्ष के पहले दिन महाकाल मंदिर में पंचामृत पूजन के बाद महाकाल का राजा स्वरूप शृंगार किया गया है, जिसमें उनके मस्तक पर चांद, सूरज और त्रिशूल को अंकित किया गया है। पंचामृत पूजन में जल, फल, दूध, दही और घी से बाबा को स्नान कराया जाता है और फिर शृंगार होता है। आज यानी गुरुवार के दिन बाबा के दर्शन बेहद अद्भुत और दुर्लभ हैं, जहां बाबा के माथे पर चांद और सूरज दोनों को एक साथ अंकित किया गया है।आज रात 11 बजे बाबा महाकाल के कपाट खुले रहेंगे और भक्त पूरे दिन बाबा के दर्शन कर पाएंगे।विदेशी भक्तों ने भी किए बाबा महाकाल के दर्शनखास दिन पर बाबा महाकाल के पुजारी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि बाबा महाकाल के प्रति लाखों भक्त आस्था रखते हैं और उनके लिए बीतता साल भी बाबा है और आने वाला समय भी बाबा है। इसी क्रम में बाबा महाकाल के दर पर लाखों की भीड़ उनके अद्भुत दर्शन के लिए पहुंची है। पुजारी ने बताया कि भक्त विदेशों से आकर भी दर्शन कर रहे हैं।काशी विश्वनाथ मंदिर में हुई विशेष मंगला आरतीवाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर में नववर्ष के मौके पर विशेष मंगला आरती हुई और अस्सी घाट पर गंगा आरती के साथ नव वर्ष का स्वागत किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालु एकत्रित हुए। बाबा काशी विश्वनाथ का दूध, दही और घी से अभिषेक किया गया और फिर रुद्राक्ष और फूलों की माला से बाबा काशी विश्वनाथ के शृंगार किए गए। नववर्ष के उपलक्ष्य में काशी विश्वनाथ मंदिर भी देर रात तक खुला रहेगा। चढ़ते सूरज के मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ बढ़ती जा रही है।

मैहर:साल के अंतिम दिन देवी धाम में उमड़ी आस्थावानों की भीड़, पुरी के जगन्नाथ मंदिर में लगा भक्तों का तांता
मैहर। साल के अंतिम दिन और नए वर्ष के स्वागत से पहले देश भर के मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के मैहर में स्थित मां शारदा के मंदिर में भी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंच रही है। मां के दर्शन के लिए भक्त कई-कई घंटे तक कतार में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।लगभग हर बड़े मंदिर में नए साल को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि भीड़ को संभाला जा सके और भक्त शांति से अपने आराध्य के दर्शन कर सकें। ऐसे ही मां शारदा मंदिर में आस्था का विशेष नजारा देखने को मिल रहा है। कड़ी ठंड के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ है। श्रद्धालु लंबी लाइनों में खड़े होकर मां का आशीर्वाद ले रहे हैं और भक्ति गीत गा रहे हैं।मंदिर के पुजारी ने बताया कि नए साल की शुरुआत में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले वर्ष भी बड़ी संख्या में लोग आए थे, लेकिन इस बार श्रद्धालुओं की संख्या उससे कहीं अधिक है।मैहर मंदिर में नवरात्रि जैसी की गई व्यवस्थाएंमंदिर की व्यवस्थाओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भक्तों के उत्साह को देखते हुए मंदिर में नवरात्रि के दिनों जैसी व्यवस्था की है। सर्दी को देखते हुए हर तरह की सुविधा मौजूद है। भक्त मंदिर में यही मनोकामना लेकर आते हैं कि जैसे पिछला साल अच्छा बीता, वैसा ही आने वाला साल मां शारदा की कृपा से अच्छा रहे।पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भी लगा भक्तों का तांतामध्य प्रदेश के मैहर में मां शारदा के मंदिर के अलावा, 2025 के अंतिम दिन श्रद्धालु पुरी के जगन्नाथ मंदिर में महाप्रभु की पूजा-अर्चना करने भारी संख्या में पहुंचे हैं। भक्त मंदिर के बाहर खड़े होकर “जय जगन्नाथ” के भक्ति गीत गा रहे हैं। महाप्रभु के दर्शन के लिए भक्त सर्दी में लाइन में लगे हैं और तालियों और भजनों के साथ अपने आराध्य को याद कर रहे हैं। इसके अलावा, दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिर तिरुपति बालाजी और छत्तीसगढ़ के मंदिरों में भक्तों की भीड़ पहुंच रही है, जहां भक्तों को टोकन के जरिए दर्शन करने का मौका मिल रहा है।

नए साल के स्वागत को लेकर काशी नगरी हुई शिवमय:बाबा के दर्शन और गंगा आरती में शामिल होने उमड़ रहा आस्थावानों का रेला, भीड़ देख प्रशासन अलर्ट
वाराणसी। नए साल के स्वागत को लेकर काशी नगरी पूरी तरह शिवमय हो चुकी है। बाबा विश्वनाथ के दर्शन और गंगा आरती में शामिल होने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालुओं का सैलाब वाराणसी पहुंच रहा है। 25 दिसंबर से ही लगातार लाखों की संख्या में लोग काशी आ रहे हैं और जैसे-जैसे नया साल नजदीक आ रहा है, यह संख्या कई गुना बढ़ती जा रही है। इसी को देखते हुए काशी में हाई अलर्ट घोषित किया गया है और सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं।गोदौलिया से लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर तक पूरे रास्ते में बैरिकेडिंग की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई रास्तों को बदला गया है और अलग-अलग डाइवर्जन प्वाइंट बनाए गए हैं। पुलिस प्रशासन लगातार अनाउंसमेंट करवा रहा है ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और वे आसानी से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।संवेदनशील इलाकों में प्रशासन की पैनी नजरएसीपी अतुल अंजन त्रिपाठी ने बताया कि 25 दिसंबर से ही देश और विदेश से श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेने आ रहे हैं और नववर्ष पर संख्या ज्यादा बढ़ने का अनुमान है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बैरिकेडिंग, डाइवर्जन और नो-व्हीकल जोन बनाए गए हैं। मंदिर और घाटों के आसपास के संवेदनशील इलाकों पर खास नजर रखी जा रही है।घाट क्षेत्र में ड्रोन कैमरों से निगरानीघाट क्षेत्र में ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही सिविल पुलिस, पीएसी और पैरामिलिट्री फोर्स की भी तैनाती की गई है। कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। कई पेट्रोलिंग पार्टियां लगातार मंदिर परिसर और घाटों के आसपास गश्त कर रही हैं। महिलाओं की भारी भीड़ को देखते हुए महिला पुलिस बल को भी विशेष रूप से तैनात किया गया है।सोशल मीडिया पर भी रखी जा रही नजरसिर्फ जमीनी स्तर पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी पुलिस की कड़ी नजर है। अगर किसी तरह की भ्रामक या गलत जानकारी फैलती है तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की अफवाह से माहौल खराब न हो। भीड़ लगातार बढ़ने के कारण मंदिर प्रशासन ने अस्थायी तौर पर स्पर्श दर्शन व्यवस्था और कुछ विशेष प्रोटोकॉल पर रोक लगा दी है, ताकि दर्शन सुचारू रूप से हो सकें।ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी बड़े बदलाव मंदिर के आसपास दो से तीन किलोमीटर के क्षेत्र को नो-व्हीकल जोन घोषित किया गया है। मेहरागंज से लेकर गोदौलिया, कदौदिया और सुनारपुरा तक वाहनों की आवाजाही पर रोक है। इसका मकसद यही है कि श्रद्धालु पैदल ही आराम से बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकें, गंगा आरती का आनंद ले सकें और काशी की आध्यात्मिक अनुभूति को महसूस कर सकें।व्यवस्थाओं से संतुष्ट नजर आ रहे श्रद्धालुश्रद्धालु भी इन व्यवस्थाओं से काफी संतुष्ट नजर आ रहे हैं। शिकागो से आए एक श्रद्धालु ने बताया कि भीड़ तो काफी है, लेकिन व्यवस्था बहुत ही सुंदर है। इतने अच्छे इंतजाम हैं कि दर्शन करने में कोई परेशानी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि वे बहुत खुश हैं और बाबा के दर्शन कर मन को शांति मिली है। वहीं, बीकानेर से आए श्रद्धालु ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव की नगरी है और यहां की ऊर्जा ही अलग है। नए साल के मौके पर भीड़ बहुत ज्यादा है, लेकिन उसके बावजूद व्यवस्था शानदार है। उन्होंने कहा कि काशी आकर मन को जो सुकून मिलता है, वह कहीं और नहीं मिलता। चारों तरफ आस्था का सैलाब देखने को मिल रहा है। वे काल भैरव के दर्शन कर चुके हैं और अब बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद मणिकर्णिका घाट और नमो घाट जाने की योजना है। श्रद्धालुओं का कहना है कि नए साल की शुरुआत अगर काशी में हो जाए तो पूरा साल शुभ हो जाता है। इसी आस्था और विश्वास के साथ लाखों लोग यहां पहुंच रहे हैं।

ठाकुर बांके बिहारी मंदिर:5 जनवरी तक वृंदावन आने से करें परहेज, प्रबंधन ने की भक्तों से की गुजारिश, नए साल में बढ़ सकती है भीड़
मथुरा। नए साल से पहले ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में हो रही लगातार वृद्धि को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने देशभर के श्रद्धालुओं से 29 दिसंबर से पांच जनवरी तक वृंदावन न आने की गुजारिश की है। प्रबंधन ने अपील की है कि नए साल के अवसर पर भीड़ अधिक हो सकती है, इसलिए यदि संभव हो तो 5 जनवरी तक वृंदावन आने से परहेज करें।बांके बिहारी मंदिर की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि नववर्ष के अवसर पर मंदिर और आसपास के क्षेत्र में बढ़ने वाले दर्शनार्थियों की भीड़ और होने वाली असुविधाओं को दृष्टिगत रखते हुए 29 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 तक यदि संभव हो तो वृंदावन आने से परहेज करेंय अति आवश्यक होने पर ही यात्रा कार्यक्रम बनाए।दर्शनार्थियों से अनुरोधः वृंदावन आने से पहले कर लें स्थिति का आंकलनइसके साथ ही सभी बाहर से आने वाले दर्शनार्थियों से अनुरोध है कि वे वृंदावन आने से पहले स्थिति का आंकलन जरूर कर लें। संभव हो तो इस दौरान यात्रा से परहेज करें। इसके साथ ही कहा गया है कि श्रद्धालु अपने साथ किसी भी प्रकार का बैग अथवा कीमती सामान न लाएं। मंदिर में अनावश्यक समस्याओं से बचने के लिए निर्धारित प्रवेश और निकास मार्ग का ही प्रयोग करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही पब्लिक एड्रेस सिस्टम पर की जा रही घोषणाओं को ध्यानपूर्वक सुनने और उनका पालन करने की सलाह दी गई है।मंदिर में आने-जाने का रास्ता रहेगा अलग-अलगमंदिर की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि मंदिर में आने-जाने का रास्ता और गेट अलग-अलग रहेंगे। अनावश्यक समस्याओं से बचने हेतु श्रद्धालु जूता, चप्पल पहनकर मंदिर की तरफ न आएं। जूता और चप्पल की व्यवस्था मंदिर की तरफ से मंदिर से जुड़ने वाले सभी मुख्य मार्गों पर की गई है। अतः जूता और चप्पल कृपया निर्धारित स्थान पर ही उतारकर ही आएं।जेबकतरों से भी सावधान रहने की अपीलइसके साथ ही जेबकतरों, चैनकतरों और मोबाइल चोरों से सावधान रहने की सलाह दी गई है और बताया गया कि ट्रैफिक जाम एवं गलियों में भीड़ की वजह से भीषण जाम जैसी स्थिति बन सकती है। साथ आने वाले लोग अपने जेब में फोन नंबर लिखकर रखें, ताकि बिछड़ने की स्थिति में वे अपनों से संपर्क कर सकें। बीमार लोगों से मंदिर ना आने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही असामाजिक तत्वों से बचने और चोरों से सावधान रहने की चेतावनी भी दी गई है।

श्री महाकालेश्वर मंदिर:भस्मारती से पहले भोलेनाथ का हुआ अलौकिक श्रृंगार, एक झलक पाने उमड़े भक्त, विदेशी श्रद्धालुओं ने भी टेका माथा
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार सुबह से ही भक्तों का भारी जनसैलाब देखने को मिला। गुरुवार की तड़के सुबह ही लोग बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए उमड़ पड़े। सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे और पुजारी गर्भगृह में पहुंचे और बाबा महाकाल का जलाभिषेक शुरू किया। पानी, दूध, दही, घी और पंचामृत से भगवान का अभिषेक किया गया। इस दौरान पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। आज बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार भी किया गया। उनके मस्तक पर सुंदर त्रिपुंड और नवीन मुकुट धारण कराया गया। भांग, सूखे मेवे और अन्य शुभ सामग्री से श्रृंगार किया गया, जिससे पूरा मंदिर और भक्त दोनों ही मंत्रमुग्ध हो गए। लोगों ने महादेव को नमन किया और मन ही मन अपनी मनोकामनाएं मांगीं। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित किए जाने के बाद पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के उद्घोष से गूंज उठा।आरती के बाद सकार रूप में दर्शन देते हैं भगवानभस्म आरती का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस आरती के बाद भगवान निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। आज देश-विदेश से आए भक्तों ने इसका लाभ उठाया और बाबा महाकाल के दर्शन कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। यहां आए बच्चे, बुजुर्ग, पुरुष और महिलाएं सबके चेहरे पर श्रद्धा और आनंद साफ नजर आ रहा था।पूरे मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ थी, लेकिन व्यवस्थित व्यवस्था के कारण सभी को दर्शन का मौका मिल रहा था। मंदिर की पवित्रता और माहौल ने हर किसी को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। लोगों ने मंत्रोच्चारण किया, हाथ जोड़े और अपने जीवन में सुख-शांति की कामना की।नए साल के मौके पर भस्मारती की व्यवस्था में हुआ बदलावगौरतलब है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर में नववर्ष के मौके पर भस्म आरती की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। 25 दिसंबर से भस्म आरती की ऑनलाइन बुकिंग अगले 10 दिनों के लिए बंद रहेगी। इस दौरान श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए अब या तो ऑफलाइन परमिशन लेनी होगी या फिर चलित भस्म आरती का ही लाभ उठाना होगा। मंदिर प्रशासन ने ये कदम ज्यादा लोगों की भीड़ और सुरक्षित दर्शन के लिए उठाया है।

मंगलवार को करें राम भक्त की पूजा:विवि-विधान से भक्ति करने पर प्राप्त होते हैं मनोवांछित फल
नई दिल्ली। पौष माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि मंगलवार दोपहर 2 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। इसके बाद षष्ठी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन सूर्य वृश्चिक राशि में और चंद्रमा 10 दिसंबर रात 2 बजकर 22 मिनट तक कर्क राशि में विराजमान रहेगा। इसके बाद सिंह राशि में गोचर करेंगे।द्रिक पंचांग के अनुसार, मंगलवार के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 53 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इस तिथि पर कोई विशेष पर्व नहीं है, लेकिन आप वार के हिसाब से राम भक्त हनुमान की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं।स्कंद पुराण में उल्लेख मिलता है कि मंगलवार के दिन हनुमान का जन्म हुआ था, जिस वजह से इस दिन बजरंग बली की विधि-विधान से पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। बजरंग बली को प्रसन्न करने के लिए कुछ उपाय अपनाकर भक्त उनकी कृपा का पात्र बन सकते हैं।मंगलवार के दिन हनुमान भगवान की विधि-विधान से पूजा करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कर्म-स्नान आदि करने के बाद पूजा स्थल को साफ करें। अब एक लकड़ी की चैकी लें, उस पर एक लाल कपड़ा बिछाएं और पूजा की सम्पूर्ण सामग्री और अंजनी पुत्र की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद, हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ कर सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और प्रसाद चढ़ाएं और बजरंग बली की आरती करें। इसके बाद आरती का आचमन कर आसन को प्रणाम कर प्रसाद ग्रहण करें। साथ ही इस दिन शाम को भी हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए।व्रत में केवल एक बार भोजन करें और नमक का सेवन न करें। मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने से शक्ति और साहस में वृद्धि होती है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मान्यता है कि नियमपूर्वक बजरंगबली की पूजा करने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

विशेष गहन पुनरीक्षण:कांग्रेस-विपक्ष को एसआईआर से क्यों दिक्कत, दिग्गी ने बताया, कही यह बात भी
भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सोमवार को बताया कि आखिर क्यों उनकी पार्टी और विपक्ष के अन्य नेताओं की तरफ से मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध किया जा रहा है। दिग्विजय सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि हमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से कोई आपत्ति नहीं है। यह इस देश में पहले भी हुआ है, लेकिन इस बार जिस प्रक्रिया के तहत एसआईआर को किया जा रहा है, वो गलत है। इससे पहले, 2003 में एसआईआर के तहत बीएलओ आता था और सभी मतदाताओं का नाम पंजीकृत करता था। बीएलओ की ओर से सभी मतदाताओं के बारे में जानकारी जुटाई जाती थी। यहां तक कि वो खुद ही फॉर्म भरता था, लेकिन इस बार स्थिति काफी विपरीत नजर आ रही है। इस बार बीएलओ आ रहे हैं और लोगों को फॉर्म दे रहे हैं। इसके बाद उनसे भारत का नागरिक होने का प्रमाण मांग कर रहे हैं। उनसे कह रहे हैं कि हमें पुष्टि करके बताइए कि आप भारत के नागरिक हैं या नहीं? इसी वजह से हमें एसआईआर की प्रक्रिया से आपत्ति है।कांग्रेस नेता ने दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) कराया जा रहा है। अगर आपको यही पता लगाना है कि भारत का असली नागरिक कौन है और कौन नहीं, तो इसके लिए आपको सीधे सीएए कराना चाहिए। आप भला एसआईआर की आड़ में इसे क्यों करा रहे हैं? इस तरह की स्थिति को भारतीय राजनीति में किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। हम इस पर ही आपत्ति जता रहे हैं।उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत कई तरह की खामियां भी हो रही हैं। अभी हाल ही में मैं भोपाल के एक कार्यालय में गया था, वहां पर 30 मतदाताओं के नाम लगे हुए थे। मैं वहां पर गया तो मैंने उनसे पूछा कि आपका वोट कहां पर है? तो उन्होंने कहा कि भोपाल के मोहल्ले में हमारा वोट है। फिर, मैंने पूछा कि इस सूची में तो आप लोगों का नाम नहीं है ना? तो उन्होंने कहा कि हमारा नाम इस सूची में नहीं है। हमने 30 लोगों के नाम छांटे। इसके बाद बीएलओ से पूछा कि आपकी सूची ठीक है ना?, तो इस पर उन्होंने दावे से कहा कि हां, हमारी सूची ठीक है? घर में दो परिवार रह रहे थे। वो खटिक समुदाय से थे। वे किराए भी नहीं थे। वे जमीन पर कब्जा करके रह रहे थे। 30 मतदाताओं की सूची में सिर्फ एक लड़का वहां पर रहा था, बाकी के लोग वहां पर नहीं रह रहे थे, लेकिन वोट डाल रहे थे। अब हमने तो इस विसंगति को पकड़ लिया। हमने तय किया कि कि जिस बीएलओ और जिस आॅफिसर ने इस सूची को बनाया है, हम उसके खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराएंगे। अगर पुलिस की तरफ से संतुष्टिजनक कार्रवाई नहीं की गई तो हम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग की तरफ से स्पष्ट निर्देश दिया कि अगर किसी घर में 10 से ज्यादा मतदाता रहते हैं तो अस्टिटेंट रिटर्निंग आॅफिसर खुद उस घर में जाकर जांच करें कि वहां पर कुल कितने लोग रहते हैं, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। वहां 30 लोग रह रहे थे, लेकिन अस्टिटेंट आॅफिसर ने जांच करने की जरूरत नहीं समझी। बीएलओ के ऊपर सुपरवाइजर भी होता है। बीएलओ और सुपरवाइजर का ट्रांसफर हो चुका था। इसके बाद दोनों नए आए हैं, लेकिन असिस्टेंट रिटर्निंग आॅफिसर पुराना ही है। हमने उनसे फोन पर भी बात की तो उन्होंने कहा कि हम पटवारी से बात करेंगे। फिर, हमने कहा कि पटवारी का इस मामले में कोई लेना-देना नहीं है। अब जो नई बीएलओ थी, उनसे कहा कि मैं क्या करूं? पुराने बीएलओ नाम दर्ज किए थे। मैं अब नाम काट दूंगी। इसके बाद मैंने कहा कि सुपरवाइजर को बुलाओ, लेकिन उसने अपना फोन बंद कर लिया। यह केवल एक नमूना है। जिससे यह साफ जाहिर होता है कि एसआईआर में गड़बड़ी हो रही है।उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर हम चाहते हैं कि खुलकर चर्चा हो। किसी भी पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाए, लेकिन सत्तारूढ़ दल चर्चा से बच रहा है। एसआईआर के तहत 68 लाख मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। अब केंद्र सरकार से मेरा यही कहना है कि आप इन लोगों को घुसपैठिए कब घोषित करेंगे?

राम मंदिर के शिखर पर फहराया धर्म ध्वज:श्रद्धा और भावनाओं से अभिभूत हुए साधु-संत, बताया सनातन गौरव का क्षण
अयोध्या। सनातन परंपरा और आस्था के प्रतीक धर्मध्वज का आज राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज की स्थापना अयोध्या के साधु-संतों के लिए भावपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण बन गया। 500 वर्षों की प्रतीक्षा, संघर्ष और तपस्या के उपरांत प्रभु श्रीराम के दिव्य मंदिर पर धर्मध्वजा का आरोहण केवल एक धार्मिक क्षण ही नहीं बल्कि सनातन आस्था की वैश्विक प्रतिष्ठा का साक्ष्य बन रहा है। अवधपुरी के संत समाज ने श्रद्धा और भावनाओं से अभिभूत होकर इसे सनातन गौरव का क्षण बताया। वे इसे उस संघर्षपूर्ण यात्रा का फल मानते हैं जिसमें संतों, भक्तों और समाज ने सैकड़ों वर्षों में अदम्य धैर्य और आस्था का परिचय दिया।साधु-संतों का कहना है कि आज वह क्षण साकार हुआ है जिसकी कल्पना उनके पूर्वजों ने सदियों पूर्व की थी। धर्म ध्वजा का आरोहण भारतवर्ष की आध्यात्मिक विरासत को और भी मजबूत करता है तथा संपूर्ण विश्व में सनातन आस्था की महिमा को प्रखरता से स्थापित करता है।डबल की इंजन की सरकार ने सनातन परंपराओं का किया उद्धारसंत समाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका को इस उपलब्धि का महत्वपूर्ण आधार मानता है। उनका कहना है कि डबल इंजन सरकार ने सनातन परंपराओं के संरक्षण और मंदिर संस्कृति के पुनरुद्धार का जो कार्य किया है वह देश की आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ कर रहा है। मठ मंदिरों का संवर्धन, धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार और संतों के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण को नई दिशा प्रदान की गई है।योगी को बताया धर्म परंपरा की रक्षा का प्रहरीराम वैदेही मंदिर के प्रतिष्ठित संत दिलीप दास ने कहा कि अयोध्या मिशन के अंतर्गत सनातन संस्कृति का जिस प्रकार पुनरुद्धार हुआ है वह प्रशंसनीय है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धर्म की रक्षा और स्थापना के उद्देश्य से सतत संलग्न बताते हुए कहा कि वह केवल एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि धर्म परंपरा की रक्षा के प्रहरी हैं।विवाह पंचमी के अवसर पर आयोजित इस प्रतिष्ठा समारोह में साधु संतों द्वारा प्रभु श्रीराम और माता जानकी के विवाह पर्व का पूजन अर्चन भी किया गया। संत समाज का विश्वास है कि यह क्षण भारत के उज्ज्वल भविष्य की आस्था को और अधिक मजबूत करेगा तथा सनातन समाज के आत्मगौरव का शंखनाद साबित होगा।

राम मंदिर भव्य ध्वजारोहण समारोह:आज शाम से भक्तों के लिए बंद हो जाएंगे प्रभू के दर्शन, पीएम मोदी शिखर पर फहराएंगे भगवा ध्वज
अयोध्या । अयोध्या में दिव्य राम मंदिर में कल मंगलवार को भव्य ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी मंदिर के शिखर पर भव्य ध्वजा फहराएंगे। कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत, उत्तरप्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, और सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहेंगे। ध्वजारोहण समारोह की तैयारियों के चलते सोमवार शाम से राम मंदिर में राम लला के दर्शन भक्तों के लिए बंद रहेंगे।ध्वजारोहण समारोह को देखते हुए सड़कों को लाइट और बैनर से सजाया जा रहा है। शहर के खास पॉइंट्स पर सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। मंदिर परिसर के आसपास का स्पिरिचुअल माहौल जश्न की गहरी भावना दिखाता है। बिहार के औरंगाबाद के रहने वाले फूल-माला बेचने वाले नरेश कुमार ने कहा कि मंदिर बनने से उनकी रोजी-रोटी पूरी तरह बदल गई।बदल गई अयोध्या, बोले फूल विक्रेताउन्होंने कहा कि जब से राम मंदिर बना है, 99 प्रतिशत बदलाव आया है। हमारी बिक्री बहुत बढ़ गई है। हर दिन हम 2-3 क्विंटल माला बेचते हैं। मैं अब हर महीने लगभग 50,000-60,000 रुपए कमाता हूं। मंदिर के बनने से मिली स्थिरता की वजह से उनका परिवार अयोध्या में बस गया है। अगर पीएम मोदी ने यह मुमकिन नहीं किया होता, तो हम आज यहां नहीं होते। अयोध्या में 35 साल से काम कर रहे एक और फूल बेचने वाले संजय ने भी यही बात कही। उन्होंने कहा कि अयोध्या पूरी तरह बदल गई है। यहां का विकास बेमिसाल है। उन्होंने तीर्थयात्रियों के लगातार आने-जाने को लोकल व्यापारियों के लिए एक आशीर्वाद बताया।आध्यात्मिक गुरुओं ने कार्यक्रम के महत्व पूर दिया जोरआध्यात्मिक गुरुओं ने भी इस कार्यक्रम के महत्व पर जोर दिया है। तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगत गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज ने कहा कि इस समारोह का सभ्यता के लिए बहुत महत्व है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी युगपुरुष हैं। उन्होंने न सिर्फ अयोध्या की खूबसूरती बढ़ाई है, बल्कि उसे त्रेता युग जैसा रूप दिया है। आज जो लोग आते हैं, वे बदलाव को साफ महसूस कर सकते हैं। वेदों और पुराणों में जिस तरह अयोध्या धाम का वर्णन किया गया है, वह फिर से हकीकत बन रहा है।जैसे-जैसे अयोध्या 25 नवंबर का इंतजार कर रहा है, मंदिरों का शहर सचमुच और सांकेतिक रूप से रोशन है, जो ऐतिहासिक राम मंदिर के आस-पास के सांस्कृतिक पुनरुत्थान और आर्थिक तरक्की को दिखाता है।

महाकालेश्वर मंदिर, बाबा के भव्य श्रृंगार ने मोहा भक्तों का मन:भोलेनाथ ने सुदर्शन चक्र और त्रिशूल धारण किए हुए मनोहारी स्वरूप में दिए दर्शन
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकालेश्वर के दरबार में सोमवार प्रातःकाल एक विशेष आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला, जब मंदिर के पट खुलते ही पूरा परिसर जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंज उठा। तड़के से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और सभी ने उत्साहपूर्वक बाबा के दिव्य दर्शन किए। भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ और अधिक बढ़ गई, जिससे उज्जैन की गलियां भी भक्तिमय रंग में रंग गईं। मंदिर के साथ ही आस-पास भी जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंज उठा।सुबह सबसे पहले पुजारियों की ओर से बाबा महाकाल का हरि ओम जल से अभिषेक किया गया। इसके उपरांत पंचामृत दूध, दही, घी और शहद से पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार पूजन सम्पन्न हुआ। अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया, जिसने उपस्थित भक्तों का मन मोह लिया। हर कोई बाबा महाकाल का एक दर्शन करने के लिए लाइन में खड़ा रहा।भक्तों ने बाबा का दर्शन कर मांगी अपनी मनोकामनासोमवार को श्रृंगार विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि बाबा ने सुदर्शन चक्र और त्रिशूल धारण किए हुए मनोहारी स्वरूप में दर्शन दिए। यह अद्वितीय अलंकरण जैसे ही सामने आया, श्रद्धालुओं में हर्ष की लहर दौड़ गई और सभी ने हाथ जोड़कर बाबा का आशीर्वाद लेकर प्राप्त किया और अपनी मनोकामना मांगी।महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा को अर्पित की गई भस्मश्रृंगार के बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा को भस्म अर्पित की गई, जो उज्जैन की महाकाल परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण और प्राचीन अनुष्ठान माना जाता है। भस्म आरती के मंत्रोच्चार, ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। आरती के दौरान उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे और ‘महाकाल की जय’ और ‘जय श्री महाकाल’ के नारे पूरे परिसर में गूंजने लगे।अलौकिक स्वरूप ने भक्तों के मन को दी शांतिविशेष आरती में स्थानीय भक्तों के साथ-साथ दूर-दूर से आए यात्रियों ने भी हिस्सा लिया। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि महाकाल बाबा के इस अलौकिक स्वरूप ने उनके मन को शांति और ऊर्जा से भर दिया। मंदिर प्रशासन के अनुसार, त्योहारों के दिनों के समान ही सोमवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिससे महाकाल नगरी में धार्मिक माहौल पूरे दिन बना रहा।

देश के कोने-कोने में बसते हैं भगवान:राम मंदिर में ध्वजारोहरण कार्यक्रम को लेकर बोले पार्श्व गायक - ऐतिहासिक क्षण के तैयार बच्चा-बच्चा
नई दिल्ली। पार्श्व गायक कैलाश खेर अपनी मधुर आवाज से बॉलीवुड में बीते तकरीबन 22 सालों से राज कर रहे हैं। उनकी आवाज के बिना बॉलीवुड और लोक संगीत अधूरा लगता है। अब उन्होंने राम मंदिर ध्वजारोहण और अपने पिता की स्मृति में आयोजित मेहर रंगत 2025 के बारे में खुलकर बात की है। उन्होंने राम मंदिर को लेकर कहा कि भारत के कोने-कोने में भगवान राम बसते हैं और देश का बच्चा-बच्चा इस ऐतिहासिक क्षण के लिए तैयार है।25 नवंबर को विवाह पंचमी के दिन राम मंदिर पर केसरी ध्वजारोहण होगा। ध्वज पर कोविदार वृक्ष और ऊं की छवि होगी और ये पल देश के हर राम भक्त के लिए आस्था का दिन है। ध्वजारोहण पर बात करते हुए कैलाश खेर ने कहा, इस पावन अवसर पर समस्त भारतवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। 500 सालों से जिस स्वप्न का भारत को इंतजार था, वह अब साकार हो रहा है। यह एक ऐसा क्षण है जब देश के हर कोने में भगवान राम की उपस्थिति का एहसास हो रहा है। हर बच्चा और हर नागरिक इस ऐतिहासिक क्षण के प्रति जागरूक है, जो भारत के लिए एक स्वर्णिम युग का प्रतीक है। पूरा भारत राममय हो गया है।ष्मेहर रंग का आयोजन भावनात्मक उत्सवपिता की स्मृति में आयोजित मेहर रंगत 2025 पर बात करते हुए कैलाश खेर ने कहा कि आयोजन की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मेरे पिता की स्मृति में आयोजित मेहर रंगत का सातवां संस्करण मेरे लिए एक भावनात्मक उत्सव है जहां हम पूरे भारत के लोक संगीतकारों को एक मंच पर लाते हैं।21 नवंबर की रात हुआ था मेहर रंग का आयोजनबता दें कि मेहर रंगत 2025 का आयोजन 21 नवंबर की रात को हो चुका है, जहां दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता भी पहुंची थी। उन्होंने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए संगीतकारों को शॉल देकर सम्मानित भी किया था। देर रात अनुपम खेर ने भगवान शिव के गानों से कार्यक्रम में जान डाल दी थी।


