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मकर संक्रांतिः संगम से लेकर काशी तक भक्तों से खचाखच भरे घाट : हर ओर सुनाई दे रहे थे हर-हर गंगे के जयघोष और देखने को मिला धामिक उत्साह

हर ओर सुनाई दे रहे थे हर-हर गंगे के जयघोष और देखने को मिला धामिक उत्साह
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admin

Jan 15, 202602:03 PM

वाराणसी। मकर संक्रांति के मौके पर वाराणसी के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। लोग आस्था और श्रद्धा के साथ गंगा में पवित्र स्नान कर रहे हैं। संगम, काशी और वाराणसी के घाट भक्तों से खचाखच भरे हैं। सुबह से ही घाटों पर हर-हर गंगे के जयघोष और धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहे हैं।

टूरिस्ट गाइड विवेकानंद पांडे ने बताया कि मकर संक्रांति रात 9रू35 बजे शुरू हो गया है, जिस वजह से सुबह से दूरदराज से लोग काशी के पवित्र घाटों में आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन बेहद शुभ है, क्योंकि आज से सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। ऐसे में आज लोग धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। इसके अलावा, खिचड़ी, मिष्ठान, तिल आदि चीजों का दान भी कर रहे हैं।

अयोध्या के सरयू घाट पर भी भक्तों की भीड़ देखने को मिल रही है। एक भक्त अशोक कुमार पाल ने बताया कि वह राम जन्मभूमि और कौशल्या माता के घर आए हैं। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति पर तिल से बनी मिठाई का दान किया जाता है, जो सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल से सुबह 3:30 बजे यात्रा शुरू की, पवित्र स्नान किया, दान दिया और अब वापस लौट रहे हैं।

गाजीपुर में भी गंगा के घाटों पर हजारों श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगाते नजर आए। एक श्रद्धालु संध्या वर्मा ने बताया कि 14 तारीख को गंगा स्नान होना था, लेकिन एकादशी के कारण यह पर्व 15 तारीख को मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति हिंदू धर्म में हर साल बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाती है और यह सनातन काल से चलता आ रहा है।

एक अन्य श्रद्धालु संजय कुमार वर्मा ने बताया कि आज के शुभ अवसर पर घाटों पर सुबह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक, हर उम्र के लोग पवित्र स्नान कर रहे हैं।

पुजारी कन्हैया पांडे ने बताया कि मकर संक्रांति पर गंगा नदी में स्नान का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि प्रकाश की किरणों में स्नान करने से व्यक्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लोग संगम, काशी और गंगा के अन्य घाटों पर स्नान करते हैं, दान करते हैं, खुशियां मनाते हैं और अपने रिश्तेदारों के पास जाते हैं।

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