UTTAR-PRADESH NEWS

मथुरा का खौफनाक मंजर:यमुना एक्सप्रेसवे पर बेकाबू कंटेनर ने बस यात्रियों को रौंदा, 6 मुसाफिरों की मौके पर मौत, कई गंभीर घायल
मथुरा। उत्तरप्रदेश में एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया है। यहां के मथुरा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर शनिवार तड़के एक हाई स्पीड कंटेनर ने बस से उतरकर खड़े एक दर्जन से अधिकारियों को कुचल दिया है। इस भीषण हादसे में जहां 6 मुसाफिरों की मौत हो गई है, जबकि कई गंभीर रूप से घायल हैं, जिन्हें इलाज के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद घटना स्थल का मंजर खौफनाक था। घटना सुरीर थाना क्षेत्र के माइल स्टोन 88 के पास की है, जहां एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार कंटेनर ने बस से उतरकर खड़े यात्रियों को रौंद दिया। मथुरा के जिलाधिकारी सीपी सिंह ने घटना पर दुख जताया। उन्होंने बताया कि छह लोग कुचल गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। एक व्यक्ति घायल हुआ था, जिसका इलाज के बाद वह खतरे से बाहर है।घटना के लिए बस चालक को ठहराया जिम्मेदारजिलाधिकारी ने घटना के लिए बस चालक को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बताया कि बस ड्राइवर ने गलत तरीके से यमुना एक्सप्रेसवे पर बस को खड़ा किया था। कुछ लोग शौचालय के लिए उतरे थे। इस बीच कुछ लोग बस के आगे खड़े थे। पीछे से एक कंटेनर ने टक्कर मारी, जिसके कारण 6 लोग बस के नीचे दब गए और उनकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि मृतकों में से पांच की पहचान हुई है और उनके परिजनों को रात में ही सूचना दी गई, जो अभी यहां आ चुके हैं। इस घटना में पूरा प्रशासन पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है। मामले में बस और कंटेनर चालक के खिलाफ मुकदमा किया जाएगा।दिल्ली से कानपुर जा रही थी बस मथुरा के एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि थाना सुरीर क्षेत्र में रात करीब 2ः45 बजे यमुना एक्सप्रेस के माइलस्टोन 88 के पास एक बस सड़क किनारे रुकी। यह बस दिल्ली से कानपुर जा रही थी। तभी रास्ते में कुछ यात्री टॉयलेट करने के लिए नीचे उतरे। उसी समय, एक तेज रफ्तार कंटेनर ने बस को टक्कर मार दी और पास खड़े यात्रियों को भी टक्कर लगी। छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और एक व्यक्ति घायल हो गया।घायलों को दी जा रही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएसएसपी ने कहा कि घायल का बेहतर से बेहतर इलाज कराया जा रहा है। मृतकों के परिजनों को हादसे की सूचना दी गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस की तरफ से एफआईआर दर्ज की जा रही है और मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मनोज वाजपेयी की फिल्म के टाइटल के विरोध में उठे स्वर:बसपा सुप्रीमों ने भी सुनाई खरी-खरी, प्रतिबंध लगाने भी की मांग
नई दिल्ली। नेटफ्लिक्स की अपकमिंग फिल्म घूसखोर पंडित के टाइटल को लेकर देशभर में विवाद गहराता जा रहा है। फिल्म के नाम को जातिसूचक और एक विशेष समुदाय की छवि को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए इसके विरोध में आवाजें तेजी से उठ रही हैं। फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए फिल्म के टाइटल की कड़े शब्दों में निंदा की और केंद्र सरकार से इस पर तुरंत कार्रवाई की मांग की। मायावती ने एक्स पोस्ट में लिखा, यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यूपी में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ’पंडित’ को घुसपैठिया बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है तथा जिससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय जबरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निन्दा करती है। ऐसी इस जातिसूचक फिल्म पर केन्द्र सरकार को तुरन्त प्रतिबन्ध लगाना चाहिये, बीएसपी की यह मांग।फिल्म को लेकर सोशल मीडिया में बहस तेजफिल्म के विरोध को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। यूजर्स इसे धार्मिक और जातिगत भावनाओं पर हमला करार दे रहे हैं। नेटफ्लिक्स या फिल्म के निर्माताओं की ओर से फिलहाल इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामलाइससे पहले, अधिवक्ता विनीत जिंदल ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि टाइटल घूसखोर पंडित ब्राह्मण समुदाय की गरिमा, प्रतिष्ठा और भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और जानबूझकर अपमानजनक बनाया गया है। याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने बताया कि नेटफ्लिक्स ने इस फिल्म का प्रचार शुरू कर दिया है। श्पंडितश् शब्द को भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से जोड़कर पेश किया जा रहा है, जो ब्राह्मण समुदाय के प्रति अपमानजनक और सांप्रदायिक रूप से उकसाने वाला है।उन्होंने आगे कहा कि फिल्म की रिलीज से ब्राह्मण समुदाय की छवि को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचेगा और सामाजिक सद्भाव बिगड़ेगा। ऐसे में डर है कि यह शो सामूहिक मानहानि, हेट स्पीच और सांप्रदायिक तनाव पैदा करेगा, इसलिए उन्होंने भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दिल्ली हाईकोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप और अंतरिम रोक की मांग की है।

आनलाइन गेमिंग की आदी तीन सगी बहनों ने लगाई मौत की छलांग: गाजियाबाद की दिल दहलाने वाली घटना, परिवार में मचा हाहाकार
गाजियाबाद। गाजियाबाद के टीलामोड़ थानाक्षेत्र इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां के भारत सिटी सोसाइटी में देर रात करीब 2ः30 बजे 16, 14 और 12 साल की तीन सगी बहनों ने एक साथ नौवीं मंजिल से मौत की छलांग लगा दी। तीनों बेटियों की मौत के बाद परिवार में हाहाकार मच गया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें कोरियन लवर नामक एक टास्क-बेस्ड ऑनलाइन गेम की शिकार हुई थीं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों के कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच में जुट गई है।बताया जा रहा है कि ये तीनों बहनें पिछले कुछ महीनों से ऑनलाइन गेम खेलने की आदी हो चुकी थीं और कोरोना महामारी के बाद से इनका स्कूल भी रेगुलर नहीं था। चेतन कुमार, जो ऑनलाइन ट्रेडिंग का काम करते हैं और तीन साल से भारत सिटी सोसायटी में किराये पर रह रहे हैं, उनकी तीन बेटियों की उम्र 16, 14 और 12 वर्ष थी। काफी समय से गेम खेल रही थीं बच्चियांमामला मंगलवार देर रात करीब दो बजे का है। चेतन कुमार पत्नी के साथ दूसरे कमरे में सो रहे थे। तीनों बहनों ने अपने कमरे की खिड़की से छलांग लगा दी। पिता चेतन कुमार ने बताया कि बच्चियां काफी समय से यह गेम खेल रही थीं और कल इसका 50वां यानी आखिरी टास्क था। इसी टास्क को पूरा करने के लिए उन्होंने मौत को चुना। बच्चियों ने दो स्टेप वाली सीढ़ी का लिया सहारा9वीं मंजिल की बालकनी से कूदने के लिए बच्चियों ने दो स्टेप वाली सीढ़ी का सहारा लिया ताकि वे रेलिंग के ऊपर जा सकें. पुलिस जांच में पता चला है कि 14 वर्षीय प्राची (बीच वाली बहन) इस गेम की लीडर थी. वही कमांड देती थी और तीनों हर काम साथ करती थीं। पुलिस को मौके से एक पन्ने का सुसाइड नोट मिला है, जिस पर सिर्फ मम्मी-पापा साॅरी लिखा था.पुलिस ने बच्चों के मोबाइल किए जब्त डीसीपी निमिष पाटिल और एसीपी अतुल कुमार ने बच्चों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं. पुलिस अब उस कंट्रोलर या लिंक की तलाश कर रही है जिसने बच्चों को यह गेम खेलने के लिए उकसाया। परिवार को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि डिजिटल स्क्रीन के पीछे उनकी बेटियों की मौत की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि तीनों बहनें पिछले कुछ माह से ऑनलाइन टास्क बेस्ड कोरियन लवर गेम खेल रही थीं। कोरोना के बाद से तीनों पढ़ाई भी छोड़ चुकी थीं।एसीपी शालीमार गार्डन अतुल कुमार सिंह ने बताया कि चेतन कुमार ऑनलाइन ट्रेडिंग का करते हैं और तीन वर्ष से भारत सिटी सोसायटी में किराये पर रह रहे हैं, मूल रूप से दिल्ली निवासी हैं। तीनों शव पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दिए हैं। मोबाइल कब्जे में लेकर जांच की जा रही है।

अविमुक्तेश्वरानंद को तब तक नहीं घुसने देंगे अयोध्या में, ...:तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर ने दी चेतावनी, जानें क्या है पूरा मामला
अयोध्या। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की कथित टिप्पणी पर संत समाज के बीच नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। अयोध्या स्थित तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने इस बयान को अत्यंत निंदनीय और अमर्यादित बताते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक वे अपने शब्द वापस लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से क्षमा नहीं मांगते, तब तक उन्हें अयोध्या में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।परमहंस आचार्य ने मंगलवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जिस प्रकार उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तुलना मुगल शासकों से की है, उससे सनातन धर्म को मानने वालों में गहरा आक्रोश है। योगी आदित्यनाथ केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि गोरक्ष पीठ के पीठाधीश्वर भी हैं और उनके प्रति इस तरह की भाषा का प्रयोग अत्यंत निंदनीय और अक्षम्य है।परमहंस ने की योगी की तारीफउन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन जन्मभूमि अयोध्या से मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शब्दों को वापस नहीं लेंगे और योगी जी से क्षमा नहीं मांगेंगे, तब तक उन्हें अयोध्या में घुसने नहीं दिया जाएगा। परमहंस आचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे सनातन के सूर्य हैं और उन्होंने उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने का काम किया है। किसी को उनसे असहमति या शिकायत हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में इस प्रकार की भाषा स्वीकार्य नहीं हो सकती।अविमुक्तेश्वरानंद के गोरक्षा आंदोलन पर भी खड़े किए सवालपरमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के गोरक्षा आंदोलन को राजनीति से प्रेरित बताते हुए उस पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि केवल गाय को राष्ट्र माता घोषित करने से संपूर्ण गोवंश की रक्षा नहीं हो पाएगी। उन्होंने तर्क दिया कि यदि सिर्फ गाय की बात की जाएगी तो बैल, बछड़ा और नंदी की हत्या नहीं रुकेगी, जिससे पूर्ण रूप से गौहत्या बंद नहीं मानी जा सकती। उन्होंने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से अपील की कि गोवंश को राष्ट्रीय धरोहर और राज्य धरोहर घोषित किया जाए, ताकि संपूर्ण रूप से गौहत्या पर रोक लग सके। उनका कहना था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आंदोलन केवल गाय तक सीमित है, जिससे न्याय का संतुलन नहीं बनता।आचार्य ने सनातनियों से की अपीलपरमहंस आचार्य ने आरोप लगाया कि गोरक्षा को लेकर चल रहा अविमुक्तेश्वरानंद का आंदोलन विपक्ष के इशारे पर सरकार को कमजोर करने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जो सनातन धर्म के हित में नहीं है। उन्होंने इसे पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया। परमहंस आचार्य ने सभी सनातनियों से अपील की कि जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर दिए गए अमर्यादित बयान को वापस नहीं लेते, तब तक उनका सामाजिक और धार्मिक बहिष्कार किया जाए।

एटा बर्ड सेंचुरी-कच्छ छारी-ढांड को रामसर साइट के रूप में मिली मान्यता:पीएम मोदी ने जताई खुशी, एक्स पर लिखी यह बात
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के एटा स्थित पटना बर्ड सेंचुरी और गुजरात के कच्छ स्थित छारी-ढांड को रामसर साइट के रूप में मान्यता मिलने पर प्रसन्नता जताई है। उन्होंने कहा कि ये मान्यताएं जैव विविधता को संरक्षित करने और महत्वपूर्ण इकोसिस्टम की रक्षा करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, खुशी है कि एटा (उत्तर प्रदेश) में पटना बर्ड सेंचुरी और कच्छ (गुजरात) में छारी-ढांड रामसर साइट बन गए हैं। वहां की स्थानीय आबादी के साथ-साथ वेटलैंड संरक्षण के प्रति उत्साही सभी लोगों को बधाई। ये मान्यताएं जैव विविधता को संरक्षित करने और महत्वपूर्ण इकोसिस्टम की रक्षा करने की हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं। ये वेटलैंड अनगिनत प्रवासी और स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में फलते-फूलते रहें।इससे पहले, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश के एटा जिले में पटना बर्ड सेंचुरी और गुजरात के कच्छ जिले में छारी-ढंड को रामसर साइट्स की सूची में शामिल किया गया है। भूपेंद्र यादव ने दो फरवरी को श्विश्व वेटलैंड्स दिवसश् से पहले भारत के रामसर नेटवर्क में दो नई वेटलैंड्स को शामिल करने की घोषणा की।उन्होंने श्एक्सश् पोस्ट में लिखा, विश्व वेटलैंड दिवस नजदीक होने के कारण मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत के बढ़ते रामसर नेटवर्क में दो नए नाम जुड़ गए हैं। उत्तर प्रदेश के एटा में पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ में छारी-ढांड प्रतिष्ठित रामसर साइटों की सूची में नए नाम हैं।भूपेंद्र यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का रामसर नेटवर्क 2014 में 26 साइट्स से बढ़कर अब 98 साइट्स हो गया है, यानी इसमें 276 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि यह अंतर्राष्ट्रीय मान्यता हमारे पर्यावरण की रक्षा करने और हमारे समृद्ध वेटलैंड्स के संरक्षण के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।मंत्री ने बताया कि सैकड़ों प्रवासी और निवासी पक्षी प्रजातियां इन दोनों वेटलैंड्स में अपना घर पाती हैं। इसके अलावा ये चिंकारा, भेड़ियों, कैरकल, रेगिस्तानी बिल्लियों और रेगिस्तानी लोमड़ियों के साथ-साथ लुप्तप्राय पक्षियों का भी घर हैं।

माघी पूर्णिमा पर त्रिवेणी में डुबकी लगा सकत हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरान:मनाने की कोशिशों में जुटे जिम्मेदारी, जगद्गुरु ने रखी शर्तें
प्रयागराज। ज्योतिर्मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज माघी पूर्णिमा पर संगम में डुबकी लगा सकते हैं। लखनऊ के कुछ उच्चाधिकारियों ने शंकराचार्य से संपर्क कर उन्हें मनाने की कोशिश शुरू कर दी है। अधिकारी शंकराचार्य से माघी पूर्णिमा पर संगम में स्नान के लिए आग्रह कर रहे हैं। शंकराचार्य ने स्नान करने के लिए कई शर्तें भी अधिकारियों के सामने रख दी हैं। जिसमें मौनी अमावस्या को अभद्रता करने वाले अधिकारी लिखित में माफी मांगें, संन्यासियों, बटुकों, ब्राह्मणों, साधु-संतों और वृद्धों की पिटाई करने वाले पुलिस कर्मियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के साथ एफआईआर हो, गाय माता को राज्यमाता घोषित किया जाए और चारों शंकराचार्यों के स्नान के लिए प्रोटोकॉल बने समेत ये चार मांग की हैं। यह सभी चार मांगें मानने पर ही शंकराचार्य ने स्नान की बात कही है। इसकी पुष्टि शंकराचार्य के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज सरकार ने की है।मौनी अमावस्या पर प्रशासन ने रोक दी थी पालकीमौनी अमावस्या पर संगम स्नान करने जा रहे ज्योतिष्ठ पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के रथ को पुलिस प्रशास ने संगम जाने से रोक दिया। उनके रथ और जुलूस को रास्ते में रोकने पर माहौल तनावपूर्ण हो गया। रथ रोकने पर शंकराचार्य के समर्थक साधु-संतों और पुलिस में तीखी नोकझोंक हो गई। अधिकारियों ने कहा कि पैदल जाकर स्नान करें, जिस पर विवाद और बढ़ गया। घटना के बाद देखते ही देखते पूरा संगम क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। गृह सचिव मोहित गुप्ता, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार और अन्य पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर शंकराचार्य ने संन्यासियों, ब्राह्मण बटुकों और साधु संतों के साथ मारपीट करने और उनकी चोटी पकड़कर घसीटने और अपमानित करने का आरोप लगाया। 11 दिन तक धरने पर रहे शंकराचार्यघटना से मर्माहत शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज माघ मेले में त्रिवेणी मार्ग पर स्थित अपने बद्रिकाश्रम हिमालय शिविर के सामने सड़क के किनारे धरने पर रहे। यह धरना मौनी अमावस्या 18 जनवरी से लेकर 27 जनवरी तक चला। वह अधिकारियों से माफी मांगने की जिद पर अड़े रहे, लेकिन किसी अधिकारी ने उनसे संपर्क नहीं किया। 28 जनवरी को शंकराचार्य माघ मेला छोड़कर वाराणसी के लिए रवाना हो गए।

शंकराचार्य भगवान समान:किन्नर अखाड़े से ममता कुलकर्णी को बाहर निकालने पर बोले कम्प्यूटर बाबा बोले
प्रयागराज। किन्नर अखाड़े ने पूर्व अभिनेत्री ममता कुलकर्णी के हाल में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर दिए बयान के कारण महामंडलेश्वर के पद से हटा दिया है। इस बीच कम्यूटर बाबा ने गुरुवार को किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के इस फैसले का स्वागत किया।कम्प्यूटर बाबा ने किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, यह निश्चित रूप से स्वागत योग्य है। अगर ममता कुलकर्णी को उनके अखाड़े से हटा दिया गया तो यह सही है। हमारे शंकराचार्य एक सम्मानित व्यक्ति हैं। हमारे धर्माचार्य हैं। चार शंकराचार्य होते हैं, उनमें से एक अविमुक्ताचार्य हैं। भगवान हैं वे। आप उन पर कैसे टिप्पणी कर सकते हैं? पूरा सनातन संत समाज इसकी कड़ी निंदा करता है।कम्प्यूटर बाबा ने आगे कहा कि ममता कुलकर्णी ने शंकराचार्य पर कड़ी टिप्पणी की, जो कि गलत था। किन्नर अखाड़े ने उन्हें इसलिए हटाया क्योंकि उन्होंने सनातन धर्म को गलत तरीके से पेश किया था। उन्होंने इस कार्रवाई को बहुत अच्छी बताया। दरअसल, ममता कुलकर्णी ने 25 जनवरी को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की भूमिका और आचरण पर सवाल उठाए थे। साथ ही, उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया और बड़ी भीड़ के साथ पालकी में स्नान करने की आवश्यकता पर सवाल उठाए।इसके बाद किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने 27 जनवरी को साफ कहा कि अब ममता कुलकर्णी का अखाड़े से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि ममता न तो अखाड़े की अधिकारी हैं और न ही सदस्य। उनके किसी भी बयान से अखाड़े का कोई लेना-देना नहीं है।बाद में ममता ने इंस्टाग्राम के जरिए इस्तीफे की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि उनका इस्तीफा 27 जनवरी से प्रभावी होगा और यह पूरी स्वेच्छा से लिया गया निर्णय है। बता दें कि ममता कुलकर्णी को महाकुंभ 2025 में 24 जनवरी को किन्नर अखाड़े ने महामंडलेश्वर बनाया था और नया नाम दिया था, लेकिन शुरू से ही कुछ संतों ने इसका विरोध किया था। अब यह फैसला आने के बाद ममता कुलकर्णी का अखाड़े से संबंध पूरी तरह खत्म हो गया है।

यूपी सरकार ने शिक्षा जगत से जुड़े लाखों कर्मियों को दी बड़ी राहत:योगी कैबिनेट ने 32 और प्रस्तावों पर लगाई मुहर
लखनऊ। यूपी सरकार ने शिक्षा जगत से जुड़े लाखों कर्मियों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह तय किया गया कि अब प्रदेश के माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मी और उनके आश्रित परिवार सरकारी के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज करा सकेंगे। मुख्यमंत्री ने बीते वर्ष शिक्षक दिवस पर इसकी घोषणा की थी, जिस पर अब कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। इससे बेसिक व माध्यमिक शिक्षा से जुड़े लगभग 15 लाख शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मी लाभान्वित होंगे। इस पर समग्र रूप से लगभग 448 करोड़ रुपए का व्यय होगा। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने प्रेसवार्ता में कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में कुल 32 प्रस्ताव आए, जिनमें 30 को कैबिनेट की स्वीकृति मिली।फैसले के तहत माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत अनुदानित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों (व्यावसायिक शिक्षा के विषय विशेषज्ञों एवं मानदेय शिक्षकों सहित), संस्कृत शिक्षा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त अनुदानित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों (मानदेय शिक्षकों सहित), माध्यमिक शिक्षा परिषद व संस्कृत शिक्षा परिषद के मान्यता प्राप्त स्ववित्तपोषित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और माध्यमिक शिक्षा विभाग के राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में मानदेय पर कार्यरत व्यावसायिक शिक्षा के विषय विशेषज्ञों को आईपीडी (अंतःद रोगी विभाग) इलाज की कैशलेस सुविधा मिलेगी। इस सुविधा का लाभ उनके आश्रित भी उठा सकेंगे। प्रेस वार्ता में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने बताया कि सरकार की इस पहल का लाभ 2.97 लाख से अधिक लोगों को मिल सकेगा, जबकि इस पर 89.25 करोड़ रुपए का व्यय अनुमानित है। इसी तरह, बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों एवं बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालयों (अनुदानित एवं स्ववित्त पोषित) में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, विशेष शिक्षकों, अनुदेशकों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में कार्यरत वार्डेन, पूर्णकालिकध्अंशकालिक शिक्षकोंध्शिक्षिकाओं एवं प्रधानमंत्री पोषण योजना के रसोइयों और उनके आश्रितों को भी इसका लाभ मिलेगा।बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि इस योजना से बेसिक शिक्षा परिषद के 11.95 लाख से अधिक शिक्षक व कर्मी लाभान्वित होंगे। सरकार की इस पहल से प्रति कर्मी करीब 3,000 रुपए सालाना प्रीमियम के हिसाब से कुल 358.61 करोड़ रुपए का वार्षिक खर्च अनुमानित है। कैशलेस इलाज की सुविधा सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ साचीज से जुड़े निजी अस्पतालों में भी उपलब्ध होगी। इलाज की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा तय मानकों के अनुसार होंगी। स्व वित्तपोषित मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों को वेरिफिकेशन के बाद योजना का लाभ मिलेगा।वेरिफिकेशन के लिए जनपदों में जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया जाएगा। इसके अलावा, यह भी स्पष्ट किया गया है कि पहले से जो लोग केंद्र या राज्य द्वारा संचालित किसी अन्य स्वास्थ्य योजना, प्रधानमंत्री आयुष्मान जन आरोग्य योजना या मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान से आच्छादित हैं, उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा।

प्रयागराज:माघ मेले से बिना स्नान किए लौटेंगे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, बोले- औरंगजेब के समय भी नहीं हुआ ऐसा
प्रयागराज। प्रयागराज में माघ अमावस्या के दिन से ही प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच संघर्ष जारी है। अब अविमुक्तेश्वरानंद ने घोषणा की है कि वे माघ मेले से बिना स्नान किए जा रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा और कहा कि ये सभी दोहरे चरित्र वाले लोग हैं। एक तरफ सनातन धर्म की बात करते हैं और दूसरी तरफ शंकराचार्य, बटुकों और ब्राह्मणों का अपमान करते हैं।शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने घोषणा की है कि वे संगम में स्नान किए बिना माघ मेले से लौटेंगे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, अगर प्रशासन अपनी गलती के लिए क्षमा-याचना कर सकता है, तब तो ठीक है, बाकी हमें आपसे कुछ नहीं चाहिए। जो हमारा है, वह आपको हमें देना ही होगा, अगर आज नहीं तो कल। यह हमारा अधिकार है, आपकी तरफ से दिया गया दान नहीं। जिस असली मुद्दे के लिए हम दस दिन शांतिपूर्वक बैठे रहे, उसे नजरअंदाज किया जा रहा है। हमने आपको विचार करने और अन्याय के परिणामों का सामना करने या माफी मांगने के लिए पर्याप्त समय दिया। लेकिन 10-11 दिन बाद भी, जब हमने जाने का फैसला किया, तो हमारे सामने इस तरह का प्रस्ताव आया है।उन्होंने आगे कहा, हमने प्रस्ताव को ठुकरा दिया है क्योंकि ये उस दिन आया है, जब हम बिना स्नान किए वापस जा रहे हैं। प्रस्ताव को अगर स्वीकार कर लेते तो ये हमारे धर्म, हमारे और शिष्यों के साथ हुए अत्याचार को भूलने जैसा होता। हमारा मन बहुत भारी है, लेकिन जो चीजें ब्राह्मणों और शंकराचार्य के साथ औरंगजेब के समय नहीं हुईं, वो तथाकथित हिंदू सरकारों के राज में हो रही हैं।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर अविमुक्तेश्वरानंद ने निशाना साधते हुए कहा, एक तरफ देश के गृह मंत्री कहते हैं कि साधु-संतों पर अत्याचार करने वाली और सनातनियों की सुध न लेने वाली सरकारें कभी भी स्थायी नहीं हो सकती हैं। एक तरफ इतना बड़ा ज्ञान दिया जा रहा है और दूसरी तरफ हिंदू धर्म के सबसे बड़े प्रतीक शंकराचार्य, ब्राह्मण, बटुक और संन्यासियों पर अत्याचार किया जा रहा है। ये सरकार का दोहरा चरित्र है, जिसके बारे में जनता को पता होना चाहिए।

जातिवादी मानसिकता के लोग नए नियमों का कर रहे विरोध:यूजीसी के समर्थन में बोलीं बसपा सुप्रीमो, New Rules पर खड़े किए प्रश्नचिन्ह भी
लखनऊ। यूजीसी के नए निमयों पर सियासी घमासान मचा हुआ है। कुछ राजनीतिक जहां इस नियम का विरोध कर रहे हैं, तो वहीं कुछ बचाव में उतर आए हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने यूजीसी के नए नियमों का बचाव किया है। मायावती ने कहा कि सामान्य वर्ग के कुछ लोगों की ओर से इस कदम का विरोध बिल्कुल भी सही नहीं है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ष्देश की उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण व समाधान के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से सरकारी कॉलेज और निजी यूनिवर्सिटियों में भी समता समिति बनाने के नए नियम के कुछ प्रावधानों को सामान्य वर्ग के सिर्फ जातिवादी मानसिकता के ही लोगों की तरफ से इसे अपने विरुद्ध भेदभाव व षडयंत्रकारी मानकर इसका जो विरोध किया जा रहा है, तो यह कतई भी उचित नहीं है।सरकार और संस्थाओं को इस ओर देना चाहिए धनमायावती ने यूजीसी के नए नियम को लेकर भी प्रश्नचिन्ह खड़े किए हैं। उन्होंने कहा, पार्टी का मानना है कि इस प्रकार के नियमों को लागू करने के पहले अगर सभी को विश्वास में ले लिया जाता तो यह बेहतर होता और देश में फिर सामाजिक तनाव का कारण भी नहीं बनता। इस ओर भी सरकारों व सभी संस्थानों को जरूर ध्यान देना चाहिए।बिकाऊ नेताओं के बहकावे में नहीं आना दलितों कोबसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में दलितों व पिछड़ों को भी इन वर्गों के स्वार्थी व बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों के बहकावे में भी कतई नहीं आना चाहिए, जिनकी आड़ में ये लोग आए दिन घिनौनी राजनीति करते रहते हैं। अपील है कि इन वर्गों के लोग जरूर सावधान रहें।

स्थापना दिवस पर योगी ने जनता को दिया संदेश:उदासीनता की बेड़ियों को तोड़ भारत के विकास का ग्रोथ इंजन बना यूपी
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि असीम संभावनाओं का हमारा प्रदेश आज संघर्ष और नीतिगत उदासीनता की बेड़ियों को तोड़ते हुए बीमारू से भारत के विकास का ग्रोथ इंजन बना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को एक वीडियो संदेश में कहा, उत्तर प्रदेश भारत की संस्कृति, साहित्य, संगीत, कला और आध्यामिक चेतना का प्राचीन काल से केंद्र रहा है। अयोध्या की मर्यादा, काशी की शाश्वत चेतना, ब्रज धाम की भक्ति और प्रयागराज की समरसता ने युगों-युगों से भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की है। सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संजोए हुए अमृतकाल में हमारा प्रदेश समावेशी विकास के संकल्प को धरातल पर साकार कर रहा है। दृढ़ संकल्प के साथ हमने कानून व सुशासन का राज स्थापित किया है।उन्होंने कहा कि लेबर रिफॉर्म, एमएसएमई, स्टार्टअप और स्किल डेवलपमेंट जैसे कार्यक्रमों ने प्रदेश को लोकल से ग्लोबल की दिशा में अग्रसर करते हुए बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन किया है। सरकार के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों के फलस्वरूप महिलाओं की श्रमबल भागीदारी में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और हेल्थ टेक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ हुई हैं। जल-थल-नभ की अद्भुत कनेक्टिविटी ने व्यापार, पर्यटन और निवेश को नई गति दी है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या, काशी और मथुरा से लेकर संभल तक सांस्कृतिक पुनर्जागरण की स्वर्णिम गाथा लिखी जा रही है। आज का अवसर विकसित प्रदेश के संकल्प को दोहराने का समय है। हमारे संयुक्त प्रयासों से यह संकल्प यात्रा निरंतर गतिशील और सिद्धि की ओर अग्रसर रहेगी।इस अवसर पर प्रवासी उत्तर प्रदेश वासियों के लिए भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मेरे प्रवासी बहनों और भाइयों, विदेश में रहकर अपने परिश्रम, प्रतिभा और मूल्यों के माध्यम से आपने उत्तर प्रदेश और भारत का मान वैश्विक मंच पर बढ़ाया है। हमारी सरकार आपके अनुभव और ज्ञान को प्रदेश की विकास यात्रा से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

वह साधु किस बात का जो अहंकार करे:अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर बोले योग गुरू, सनातन के शत्रुओं से लड़ने हिन्दुओं से की अपील
अयोध्या। योग गुरु बाबा रामदेव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के विषय को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं का एकजुट रहना जरूरी है, क्योंकि सनातन के शत्रु पहले से ही बहुत हैं। कोई इस्लामीकरण कर रहा है तो कोई गजवा-ए-हिंद में लगा है। इसलिए सनातन के शत्रुओं से लड़ना चाहिए, आपस में न लड़ें। प्रयागराज माघ मेला में स्नान के बाद अयोध्या में दर्शन करने पहुंचे बाबा रामदेव ने कहा, हम शंकराचार्य को भगवान का रूप मानते हैं और हम उम्मीद करते हैं कि कोई भी शंकराचार्य किसी विवाद में शामिल न हो। योग गुरु ने कहा, अब एक संत विवाद कैसे खड़ा कर सकता है? कम से कम धार्मिक स्थलों और तीर्थ स्थलों पर किसी भी संत को किसी विवाद में शामिल नहीं होना चाहिए। यहां न स्नान का और न पालकी का विवाद होना चाहिए। बाबा रामदेव ने यह भी कहा कि वह साधु किस बात का, जो अहंकार करे। साधु वही बनता है, जिसने अपने अपमान को मिटा दिया।लाव-लश्कर के साथ पालकी पर पहुंचे थे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 17 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रयागराज मेघा मेला में संगम घाट पर स्नान करने पहुंचे थे। पूरे लाव-लश्कर के साथ वह अपनी पालकी पर आए थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें बिना रथ के आगे बढ़ने को कहा। इसी बात पर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला व्यवस्था में जुटे कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ था। बाद में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके साथ यह व्यवहार जानबूझकर किया गया है। विवाद उस समय और बढ़ा, जब अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में ही धरने पर बैठ गए।सनातन सिर्फ शब्दों और प्रवचनों में नहींबाबा रामदेव ने अपने अयोध्या दौरे पर कहा, सनातन सिर्फ शब्दों और प्रवचनों में नहीं है। यह हमारे जीवन में उतरे, हम राम की मर्यादाओं पर चलें, इसी संकल्प के साथ अयोध्या में दर्शन करने आए हैं। इससे पहले, गुरुवार को रामदेव ने माघ मेला में पूजा-अर्चना की। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यहां आकर मुझे एक दिव्य अनुभव हुआ है। प्रयागराज तीर्थराज है। माघ मेले के दौरान लाखों सनातनी यहां तपस्या करते हैं। यहां आकर मेरा मन प्रसन्न हो गया है और मैंने यहां पूजा-अर्चना की।

मथुरा एक्सप्रेसवे पर हादसा:सड़क पर सरपट दौड़ रही बस बनी आग का गोला, मुसाफिरों ने ऐसे बचाई जान
मथुरा। यमुना एक्सप्रेसवे पर गुरुवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में राया पुलिस स्टेशन इलाके में माइलस्टोन 110 के पास एक चलती बस में आग लग गई। नोएडा जा रही राज कल्पना (संस्कार ट्रैवल्स) की बस में भीषण आग लगने के बाद यात्रियों में दहशत फैल गई। आग लगने के बाद बस में सवार यात्री चीखते-चिल्लाते नजर आए। हालांकि, आग के फैलने से पहले ही बस सवार यात्री खिड़कियों और दरवाजों से कूदकर बाहर निकलने में कामयाब रहे।बस में सवार थे 10 से 15 यात्रीरिपोर्ट्स के मुताबिक, यूपी90 एटी 8837 रजिस्ट्रेशन नंबर वाली बस बांदा से आगरा होते हुए दिल्ली-नोएडा जा रही थी। सुबह करीब 5.15 बजे, चलती बस से अचानक धुआं निकलने लगा और कुछ ही मिनटों में पूरी बस आग की लपटों में घिर गई। घटना के समय बस में महिलाओं और बच्चों समेत करीब 10 से 15 यात्री सवार थे।यात्रियों ने खिड़की से कूदकर बचाई जानजैसे ही बस में आग लगी, ड्राइवर ने एक्सप्रेसवे पर बस रोक दी, जिससे यात्रियों में घबराहट फैल गई और वे अपनी जान बचाने के लिए गाड़ी से उतरने लगे। तेजी से फैलती आग के बीच कई यात्रियों को खिड़कियों से कूदना पड़ा, क्योंकि आग पूरी बस में तेजी से फैल गई थी। सभी यात्री बिना किसी जानमाल के नुकसान के बच निकलने में कामयाब रहे।आग बुझाने फायर बिग्रेड को करनी पड़ी मशक्तघटना की जानकारी मिलने के बाद, राया पुलिस स्टेशन के कर्मी और यमुना एक्सप्रेसवे बचाव दल मौके पर पहुंचे। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि, जब तक आग पर काबू पाया गया, तब तक बस पूरी तरह से जलकर राख हो चुकी थी।एक्सप्रेसवे पर लगा लंबा जामइस घटना के कारण एक्सप्रेसवे पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे गाड़ियां कई घंटों तक लाइन में लगी रहीं। बाद में पुलिस ने क्रेन की मदद से बस के जले हुए अवशेषों को हटाया और फिर ट्रैफिक सामान्य हो गया। अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के सही कारण का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। यह जांच की जा रही है कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी या बस में किसी और टेक्निकल खराबी की वजह से।

प्रयागराज में एयरफोर्स का ट्रेनी माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट क्रैश:ग्रामीणों की सूझबूझ से बची पायलटों की जान, तालाब में गिरा था दुर्घटनाग्रस्त विमान
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बुधवार को बड़ा हादसा हो गया है। यहां के सिविल लाइंस क्षेत्र में केपी कॉलेज के भारतीय वायुसेना का एक ट्रेनी माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होकर शहर के बीचों-बीच एक तालाब में गिर गया। राहत की बात यह रही की कोई जनहानि नहीं हुई। अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई देने के बाद स्थानीय लोगों ने अपनी सूझबूझ से विमान में फंसे दोनों पायलटों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बाहर निकाले गए पायलट सेना की वर्दी में थे। कुछ ही देर में सेना के कई और हेलीकॉप्टर बचाव के लिए पहुंच गए। कई जवान पैराशूट के माध्यम से तालाब में उतरे। हालांकि तालाब की गहराई अधिक नहीं थी, लेकिन उसमें भारी मात्रा में जलकुंभ (पानी में उगने वाली वनस्पति) मौजूद था, जिसने बचाव कार्य को थोड़ा चुनौतीपूर्ण बना दिया।उड़ान भरने के कुछ ही देर में बिगड़ गया संतुलनचश्मदीदों के मुताबिक, विमान उड़ान भरते समय सामान्य स्थिति में था, लेकिन कुछ ही देर बाद उसका संतुलन बिगड़ गया और वह तेजी से नीचे आकर तालाब में गिर पड़ा। हादसे की आवाज सुनकर सैकड़ों स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और बिना किसी देरी के बचाव कार्य शुरू किया और विमान में फंसे दोनों पायलटों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की। दोनों पायलटों को किसी भी गंभीर चोट का सामना नहीं करना पड़ा है, जो राहत की बात है।विमान को निकालने में जुटी रेस्क्यू टीमचश्मदीद पदम सिंह ने बताया, हम लोग स्कूल कैंपस में थे, तभी रॉकेट जैसी आवाज आई। आवाज सुनकर दौड़कर पहुंचे तो देखा कि कुछ लोग दलदल में फंसे थे। हम लोग तालाब में कूद गए और 3 लोगों को बाहर निकाला। अब मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम विमान को तालाब से निकालने की कोशिश कर रही है। वहीं घटना की सूचना मिलते ही सेना के अधिकारी बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रशासनिक अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। डीसीपी मनीष कुमार शांडिल्य मौके पर पहुंच गए हैं।

अविमुक्तेश्वरानंद ने नकारा प्रयागराज मेला प्राधिकरण के आरोपों को:8 पन्नों में दिया नोटिस का जवाब
प्रयागराज। प्रयागराज मेला प्राधिकरण के नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से आठ पन्नों का प्रतिवाद भेजा गया है। अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वकील के जरिए भेजे गए जवाब में मेला प्राधिकरण के आरोपों को नकारा है और नोटिस के वापस लेने की मांग की है। उन्होंने मनमाना और भेदभावपूर्ण व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के वकील ने 15 बिंदुओं में प्रयागराज मेला प्राधिकरण को जवाब दिया है। उन्होंने लिखा, सोमवार को आपकी (मेला प्राधिकरण) ओर से नोटिस सम्मानित अविमुक्तेश्वरानंद को बदनाम और अपमानित करने के बुरे इरादे से जारी किया गया, जो मनमाना, द्वेषपूर्ण और भेदभावपूर्ण है। शारदामठ द्वारका के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज की वसीयत का भी जिक्र किया गया है। इसके आधार पर वकील ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शंकराचार्य होने को लेकर उठे सवालों का जवाब दिया।एक जुलाई 2021 को घोषित किया गया जगद्गुरु शंकराचार्य उन्होंने अपने जवाब में लिखा, एक जुलाई 2021 को एक घोषणा पत्र में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ज्योतिष्पीठ ज्योतिर्मठ का जगद्गुरु शंकराचार्य नियुक्त किया गया। 12 अक्टूबर 2022 को ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य की वसीयत और घोषणा का पालन करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को श्री सुबुद्धानंद ब्रह्मचारी की ओर से ज्योतिष्पीठ ज्योतिर्मठ के जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से नियुक्त और स्थापित किया गया, जो निर्धारित वेद मंत्रों के जाप के बीच लाखों लोगों की उपस्थिति में परमहांसी गंगा आश्रम में हुआ।झूठ फैलाने के लगाए आरोपउन्होंने लिखा, ये झूठे आरोप फैलाए जा रहे हैं कि अविमुक्तेश्वरानंद को जगतगुरु शंकराचार्य की उपाधि का उपयोग करने का अधिकार नहीं है, जिससे अधिकारियों और आम जनता के बीच अविमुक्तेश्वरानंद की ज्योतिषपीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में नियुक्ति की वैधता के बारे में भ्रम पैदा हो गया है। मेला प्राधिकरण के नोटिस के कारण अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को गंभीर वित्तीय, सामाजिक और प्रतिष्ठा संबंधी नुकसान हुआ है, जिससे उनकी गरिमा, सम्मान और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े वित्तीय मामलों पर असर पड़ा है।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से अनुरोध किया गया है कि सोमवार को जारी नोटिस को वापस लिया जाए। इसके साथ ही, कहा गया है कि जगद्गुरु शंकराचार्य संस्थान और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बदनाम और अपमानित करने के लिए जिम्मेदार सभी अन्य लोगों के खिलाफ उचित या कोई भी कानूनी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की बढ़ीं मुश्किलें:संगम में धरने पर बैठने के मामले में प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने थमाया नोटिस, एससी के आदेश का दिया हवाला
प्रयागराज। प्रयागराज संगम में मौनी अमावस्या पर स्नान न करने के बाद धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने नोटिस भेजा है। नोटिस में सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए पूछा गया है कि संबंधित व्यक्ति ज्योतिषपीठ के अधिकृत शंकराचार्य नहीं हैं, ऐसे में वे अपने नाम के साथ ‘शंकराचार्य’ शब्द का प्रयोग किस आधार पर कर रहे हैं? नोटिस में मेला प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर लिखित जवाब मांगा है। इसमें यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि वे किस वैधानिक या धार्मिक आधार पर स्वयं को शंकराचार्य कह रहे हैं। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। पत्र में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन ब्रह्मलीन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के लंबित मुकदमे का जिक्र किया गया है। नोटिस प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया है।धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर प्रशासन सतर्कसूत्रों के अनुसार, मेला क्षेत्र में आयोजित हो रहे धार्मिक कार्यक्रमों और शिविरों को लेकर प्रशासन पहले से ही सतर्क है। सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए सभी धार्मिक आयोजनों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। किसी भी पद, उपाधि या पहचान का गलत इस्तेमाल प्रशासन के लिए गंभीर विषय माना जा रहा है।नोटिस मिलने के बाद भड़के समर्थकनोटिस के सामने आने के बाद संत के समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि शंकराचार्य एक परंपरागत धार्मिक पद है और इस पर प्रशासनिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। समर्थकों का आरोप है कि मेला प्रशासन धार्मिक भावनाओं को आहत कर रहा है। वहीं, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि न्यायालय के आदेशों का पालन सभी के लिए अनिवार्य है, चाहे वह धार्मिक व्यक्ति ही क्यों न हो।

उन्नाव रेप केस में कुलदीप सिंह सेंगर को झटका:हाईकोर्ट ने पीड़िता की पिता के मौत मामले में खारिज की जमानत याचिका
नई दिल्ली। उन्नाव रेप केस में सजा काट रहे उन्नाव के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने सोमवार को सेंगर की सजा पर रोक लगाने और जमानत से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि कुलदीप सिंह सेंगर को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।यह मामला उन्नाव रेप कांड से जुड़े पीड़िता के पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हिरासत के दौरान हुई मौत से जुड़ा है, जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराया गया था। सेंगर इस मामले में 10 साल की सजा काट रहे हैं और उन्होंने अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील दायर कर रखी है।हाईकोर्ट ने कहा- यह एक गंभीर मामलादिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के दौरान अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि कुलदीप सिंह सेंगर के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें इस मामले में जमानत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और आरोपी के पूर्व आपराधिक इतिहास को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि यदि दोषसिद्धि के विरुद्ध दायर अपील पर शीघ्रता से फैसला किया जाता है तो यह सेंगर के हित में होगा।7.5 साल से जेल में हैं सेंगरकोर्ट के अनुसार, कुलदीप सिंह सेंगर अब तक 10 साल की कुल सजा में से करीब 7.5 साल हिरासत में बिता चुके हैं। इसके बावजूद उनकी अपील पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में अपील के निपटारे में हुई देरी के लिए आंशिक रूप से स्वयं कुलदीप सिंह सेंगर जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने समय-समय पर कई याचिकाएं दायर कीं।

जनता दर्शन:दो मासूम बेटियों लेकर भटक रही महिला का दुख सुन योगी का पसीजा दिल, पुलिस आयुक्त को दिए सख्त निर्देश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह जनता दर्शन किया। उन्होंने प्रदेश भर से आए हर फरियादी की समस्या सुनी और निराकरण के लिए अफसरों को निर्देश दिया। इस दौरान लखनऊ निवासी महिला सीमा ने मुख्यमंत्री से आर्थिक विपन्नता का जिक्र किया और पति द्वारा घर से निकाले जाने की शिकायत की। आग्रह किया कि उन्हें घर में रहने की जगह दिलाई जाए। इस पर मुख्यमंत्री ने पुलिस आयुक्त को तत्काल उचित कार्रवाई का निर्देश दिया।लखनऊ निवासी सीमा अपनी दो बच्चियों को लेकर सोमवार को जनता दर्शन में पहुंची। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि ससुर का निधन हो गया है। पति व ससुराल वालों ने उन्हें घर से निकाल दिया। दो छोटी बच्चियों को लेकर वह भटक रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से उन्हें वापस ससुराल में भिजवाने तथा वहां रहने देने के लिए गुहार लगाई। महिला ने बच्चों के लालन-पालन के लिए आर्थिक सहायता की मांग करते हुए मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस आयुक्त को मामले में तत्काल उचित कार्रवाई का निर्देश दिया।मुख्यमंत्री का उमड़ा बालप्रेममुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में अपने माता-पिता के साथ आए सभी बच्चों को चॉकलेट दी और मन लगाकर पढ़ाई करने को कहा। इस दौरान मां सीमा के साथ दो साल की नन्ही अनन्या भी आई थी। मुख्यमंत्री ने उसे भी चॉकलेट दी और दुलार किया। चॉकलेट पाकर बच्ची खिलखिला उठी। जब मुख्यमंत्री ने उससे चॉकलेट मांगी तो उसने बड़ी मासूमियत से चॉकलेट वापस सीएम की तरफ बढ़ा दी। यह देखकर मुख्यमंत्री का बालप्रेम उमड़ पड़ा। इस दौरान नन्ही बच्ची की भाव भंगिमा और मुख्यमंत्री का संवाद देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति भाव-विभोर हो गया।

अपर्णा यादव से तलाक लेंगे मुलायम के छोटे बेटे:प्रतीक यादव ने इंस्टाग्राम पर डाइवोर्स देने किया ऐलान, पत्नी को बताया स्वार्थी और बुरी आत्मा
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के संस्थापक और दिवंगत नेता मुलायम सिंह यादव के परिवार में एक बार फिर विवाद सामने आया है। इस बार का विवाद उनके छोटे बेटे प्रतीक यादव और उनकी पत्नी अपर्णा यादव से जुड़ा है। प्रतीक यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा करते हुए पत्नी अपर्णा यादव को जल्द डाइवोर्स देने का ऐलान किया है। प्रतीक यादव ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपर्णा यादव को स्वार्थी और बुरी आत्मा बताते हुए कहा कि उनकी वजह से पारिवारिक रिश्ते खराब हो गए हैं। पोस्ट में अपनी पत्नी की तस्वीर शेयर करते हुए प्रतीक यादव ने लिखा कि वह इस महिला से जल्द से जल्द डाइवोर्स लेने जा रहे हैं।प्रतीक ने लिखा- उसे सिर्फ अपनी ही है चिंताप्रतीक यादव ने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, मैं इस मतलबी औरत को जल्द से जल्द डाइवोर्स देने जा रहा हूं। उसने मेरे परिवार के रिश्ते खराब कर दिए। वह बस मशहूर और असरदार बनना चाहती है। पोस्ट में आगे प्रतीक यादव ने कहा, अभी, मेरी मेंटल हेल्थ बहुत खराब है और उसे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उसे सिर्फ अपनी ही चिंता है। मैंने इतनी बुरी औरत कभी नहीं देखी, और मैं बदकिस्मत था कि मेरी शादी उससे हुई।अपर्णा ने अब तक नहीं दी कोई प्रतिक्रियाहालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक अपर्णा यादव की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। परिवार के किसी अन्य सदस्य ने भी इस विवाद पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। बता दें कि अपर्णा यादव समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू हैं। वह इस समय भाजपा में हैं और यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं। अपर्णा यादव ने 2022 में भाजपा का दामन थामा था। प्रतीक यादव से उनकी शादी 2011 में हुई थी। बेहद भव्य और हाई-प्रोफाइल तरीके से दोनों की शादी हुई थी।

यूपी बनेगा देश का सबसे बड़ा हेल्थकेयर-मेडिकल टेक्नोलॉजी हब:सीएम योगी लखनऊ में हेल्थटेक कॉन्क्लेव 1.0 का किया शुभारंभ
लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजधानी लखनऊ में यूपी हेल्थटेक कॉन्क्लेव 1.0 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सिर्फ 25 करोड़ की आबादी वाला राज्य ही नहीं, बल्कि देश व पड़ोसी राज्यों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं की पूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र भी है। प्रदेश को मेडिकल टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर इनोवेशन और फार्मा मैन्युफैक्चरिंग का राष्ट्रीय तथा वैश्विक हब बनाने की दिशा में सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पिछले पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन किया है, जिसके परिणाम आज जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े हेल्थकेयर कंज्यूमर मार्केट के रूप में 35 करोड़ से अधिक लोगों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं का भार वहन करता है।स्वास्थ्य के क्षेत्र में कल्पना से परे हुअए परिवर्तनउन्होंने कहा कि पिछले पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में वह परिवर्तन किया है, जिसकी कल्पना पहले संभव नहीं थी। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर कुल 40 मेडिकल कॉलेज थे। आज प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज पूरी तरह क्रियाशील हैं। इसके अतिरिक्त दो एम्स, 100 से अधिक जिला अस्पताल, सैकड़ों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स की एक मजबूत श्रृंखला खड़ी की गई है, जिससे दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं। सरकार का उद्देश्य केवल भवन खड़े करना नहीं था, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना था, जिसमें अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति को भी सम्मानजनक व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।आयुष्मान कार्ड एक अतिरिक्त सुरक्षा कवचमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लागू होने से पहले किसी गरीब परिवार में यदि कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाता था, तो पूरा परिवार भय और आर्थिक संकट में घिर जाता था। इलाज अधूरा छूट जाता था, क्योंकि न सरकार का सहयोग होता था और न ही संसाधन। आज उत्तर प्रदेश में 5.5 करोड़ परिवारों को आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से प्रति परिवार ?5 लाख तक की नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जो पात्र परिवार किसी कारणवश आयुष्मान योजना में शामिल नहीं हो सके, उन्हें मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से कवर किया गया है। आयुष्मान कार्ड एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी तथा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के नि:शुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।

मौनी अमावस्या पर धार्मिक नगरी में देखने को मिला आस्था का भव्य संगम:हरिद्वार-वाराणसी-प्रयागराज में आस्थावानों ने पवित्र डुबकी, कड़ाके की ठंड में भी नहीं डिगे पैर
नई दिल्ली। मौनी अमावस्या के अवसर पर धार्मिक नगरी हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज में आस्था का भव्य संगम देखने को मिल रहा है। कड़ाके की ठंड के बावजूद सुबह-सुबह लाखों की संख्या में श्रद्धालु घाटों पर पहुंचे और पवित्र स्नान किया। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच श्रद्धालु स्नान के बाद मंदिरों में दर्शन-पूजन में लीन हैं। हरिद्वार में रविवार को हजारों श्रद्धालु गंगा में पवित्र डुबकी लगाने, पूजा-पाठ करने और तर्पण करने के लिए 'हर की पौड़ी' पर इकट्ठा हुए, जबकि अधिकारियों ने कड़ी सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और निगरानी के साथ सब कुछ सुचारू रूप से सुनिश्चित किया। एक श्रद्धालु ने कहा कि आज मौनी अमावस्या है और हम इसे पारंपरिक तरीके से मना रहे हैं। वह व्यक्तिगत रूप से हर मौनी अमावस्या पर यहां आते हैं। इसका परिवार के सदस्यों और पूर्वजों के लिए विशेष महत्व है।वाराणसी में लाखों श्रद्धालुओं ने किया स्नानवाराणसी में भी मौनी अमावस्या के मौके पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा घाटों पर पवित्र स्नान किया। एक महिला ने कहा कि यह कृष्ण पक्ष का नौवां दिन, मौनी अमावस्या है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं, अपनी हैसियत के हिसाब से दान करते हैं, पूजा करते हैं और प्रार्थना करते हैं। दशाश्वमेध घाट के तीर्थ पुरोहित विवेकानंद ने कहा कि माघ महीने के कृष्ण पक्ष में मौनी व्रत रखने वाले भक्त गंगा में अनुष्ठान करने आते हैं। गंगा में स्नान करने के बाद, वे पवित्र डुबकी लगाते हैं, अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं और उनकी शांति व कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं। बच्चे भी इन अनुष्ठानों में भक्ति भाव से भाग लेते हैं।माघ मेले का सबसे बड़ा स्नान मौनी अमवस्यामाघ मेले का तीसरा और सबसे बड़ा स्नान मौनी अमावस्या के दिन होता है। ऐसे में बड़ी संख्या में वहां श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। रविवार सुबह घने कोहरे और ठंड के मौसम के बीच मौनी अमावस्या के मौके पर पवित्र स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम घाट आए। ज्योतिषी आशुतोष वार्ष्णेय ने कहा कि मौनी अमावस्या स्नान का महत्व बहुत ज्यादा है। मान्यताओं के अनुसार, 33 करोड़ देवी-देवता प्रयागराज आते हैं और पवित्र स्नान करते समय मौन व्रत रखते हैं, जो इस अनुष्ठान के आध्यात्मिक महत्व को बताता है।श्रद्धालुओं ने शेयर किए अपने अनुभवश्रद्धालुओं ने कहा कि मौनी अमावस्या है और इस पवित्र मौके पर हम यहां पवित्र स्नान करने आए हैं। हम आधी रात के करीब निकले थे, और स्नान पूरा करने के बाद अब हम घर वापस जा रहे हैं। कई श्रद्धालुओं ने माघ मेला के दौरान व्यवस्थाओं की प्रशंसा की। प्रयागराज में संगम घाट पर कड़ी सुरक्षा और ट्रैफिक के इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एनडीआरएफ-एसडीआरएफ टीमों, सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी की जा रही है।डिविजनल कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने कहा कि शनिवार शाम 6 बजे से अब तक सभी घाटों पर लगभग पचास लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया है। भीड़ उम्मीद से ज्यादा है, लेकिन पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। स्नान की प्रक्रिया सुचारू रूप से और व्यवस्थित तरीके से चल रही है। डीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि मौनी अमावस्या का मुख्य स्नान आज हो रहा है और आधी रात से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र स्नान कर रहे हैं। स्नान छह घंटे से ज्यादा समय से चल रहा है और यह प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के जारी है। हर घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद हैं और स्नान कर रहे हैं।

आॅस्कर विनर ने हिन्दी सिनेमा को कहा कम्युनलिज्म:भड़के अयोध्या के संतों ने एआर रहमान को बताया जिहादी, कहा- उनकी सोच में है खोट
अयोध्या। भारतीय सिनेमा के ऑस्कर विनर संगीतकार ए आर रहमान अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। सिंगर ने बीबीसी एशियन के यूट्यूब चैनल पर दिए एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हे काम मिलने में परेशानी हो रही हैं और हिंदी सिनेमा में अब कम्युनलिज्म देखने को मिलता है। संगीतकार के इस बयान का अयोध्या के साधु-संतों ने विरोध किया है और ए आर रहमान को जिहादी तक कह दिया है।संगीतकार के धर्म- परिवर्तन पर निशाना साधते हुए जगत गुरु परमहंसाचार्य महाराज ने कहा, फिल्म इंडस्ट्री में उन्हीं को काम मिलना चाहिए, जो अच्छे इंसान हैं। रहमान की सोच बहुत खराब है। वे पहले हिंदू थे और उस वक्त वहां मुसलमानों का वर्चस्व था, तो धर्म बदलकर इस्लाम अपना लिया। वे काफी समय से सनातन धर्म को टारगेट कर रहे हैं, जो बिल्कुल भी सही नहीं है। ऐसे लोगों को बिल्कुल भी काम नहीं मिलना चाहिए, क्योंकि न तो ये राम के हैं और न ही रहीम के। ये देश के लिए बड़ा खतरा हैं।वहीं सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के देवेशाचार्य जी महाराज ने कहा, फिल्म उद्योग के लिए कम्युनल शब्द का इस्तेमाल करना ही गलत है। पहले ए आर रहमान के अंदर योग्यता थी और लोगों ने बहुत पसंद भी किया, ऑस्कर भी मिला, लेकिन अब उनकी योग्यता में कमी आई है। आज संगीत के क्षेत्र में इंडस्ट्री में बहुत सारी प्रतिभाएं हैं, जिन्हें मौका मिल रहा है, लेकिन ए आर रहमान हमेशा इंडस्ट्री पर कब्जा करके नहीं रह सकते। बाकी लोगों को भी बराबर का अवसर मिलना चाहिए। कम्युनल कहने से ये दया के पात्र नहीं बनेंगे और न ही उन्हें काम मिलेगा।दिवाकराचार्य महाराज ने कहा कि संगीतकार ए आर रहमान जेहादी है और अपनी सहूलियत के हिसाब से धर्म बदलने से काम नहीं मिलता है। उन्होंने कहा, ऑस्कर अवॉर्ड जीतने के बाद निरंतरता बनाए रखना भी जरूरी है। भले ही कोई किसी भी क्षेत्र में क्यों न हो, निरंतरता होना जरूरी है और दूसरा, अब संगीत के क्षेत्र में कई युवा संगीतकार आए हैं, जो अपने काम में बहुत अच्छे हैं और ए आर रहमान को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने अपने काम के साथ निरंतरता नहीं बनाए रखी और यही वजह है कि अब उन्हें काम नहीं मिल रहा है।बता दें कि बीबीसी एशियन के यूट्यूब पर दिए इंटरव्यू में संगीतकार ने रामायण और महाभारत से लेकर इंडस्ट्री में काम न मिलने का जिक्र किया। संगीतकार ने पिछले आठ सालों में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के भीतर सत्ता परिवर्तन और सांप्रदायिक भावना महसूस की, लेकिन उनके साथ कभी भी ये सामने से नहीं हुआ, बल्कि उनके कानों में ये बातें आती रहीं।

प्रयागराज:माघ मेले में फिर लगी आग, पूरी तरह से जला टेंट, 48 घंटे में तीसरी बार हुआ ऐसा, युवक गंभीर रूप से झुलसा
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित माघ मेला में एक बार फिर आग लगने की घटना हुई। पुरानी रेलवे लाइन के पास एक कैंप में 48 घंटे में तीसरी बार आग लग गई। फायर ब्रिगेड के आग बुझाने से पहले टेंट पूरी तरह जल गया। इस घटना में एक व्यक्ति गंभीर रूप से झुलस गया और उसे एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। माघ मेला के प्रमुख फायर ऑफिसर अनिमेष मिश्रा ने बताया कि रात 11रू08 बजे हमें जानकारी मिली कि गणपति और अन्नपूर्णा मार्ग के चैराहे पर पुराने रेलवे पुल के पास एक कैंप में आग लग गई है। हमारी गाड़ियां दो मिनट के अंदर मौके पर पहुंच गईं और आठ फायर टेंडर भी आ गए। आग पर तुरंत काबू पा लिया गया।अखंड ज्योति से लगी आगउन्होंने जानकारी दी कि एक घटना में एक युवक झुलस गया है, जिसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। अधिकारी ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह पता लगा है कि अखंड ज्योति जलने के कारण यह आग लगी। हालांकि, सही वजह का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। कैंप इंचार्ज योगेश मिश्रा ने भी कहा कि वहां एक अखंड ज्योति जल रही थी। ऐसा लगता है कि जो कुछ भी हुआ, वह उसी वजह से हुआ होगा। उस समय मेरा भतीजा सो रहा था। जब तक आस-पास के लोगों ने देखा, तब तक टेंट में आग लग चुकी थी। लोगों ने उसे बचाया और उसके बाद अस्पताल भेजा गया।कल्पवासी बोले- आग लगने के कारणों का नहीं चला पताकल्पवासी शिव देवी मिश्रा ने कहा कि आग लगने के कारणों का नहीं पता है। किसी ने पुलिस को बताया कि सेक्टर नंबर पांच में आग लग गई है। जब पुलिस आई और दरवाजा तोड़ा, तो हमारी आंखें अचानक खुल गईं। उस समय हमारी बहन और हमारे परिवार के लोग सो रहे थे। उन्होंने बताया कि बाहर निकलने पर देखा तो बाहर आग के कारण उजाला हो रहा था। मैंने सभी को जगाया और जल्दी से बाहर निकलने के लिए बोला। हम समय रहते ही वहां से निकल गए, लेकिन बाद में देखा तो वहां सब जल चुका था।

मकर संक्रांतिः संगम से लेकर काशी तक भक्तों से खचाखच भरे घाट:हर ओर सुनाई दे रहे थे हर-हर गंगे के जयघोष और देखने को मिला धामिक उत्साह
वाराणसी। मकर संक्रांति के मौके पर वाराणसी के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। लोग आस्था और श्रद्धा के साथ गंगा में पवित्र स्नान कर रहे हैं। संगम, काशी और वाराणसी के घाट भक्तों से खचाखच भरे हैं। सुबह से ही घाटों पर हर-हर गंगे के जयघोष और धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहे हैं। टूरिस्ट गाइड विवेकानंद पांडे ने बताया कि मकर संक्रांति रात 9रू35 बजे शुरू हो गया है, जिस वजह से सुबह से दूरदराज से लोग काशी के पवित्र घाटों में आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन बेहद शुभ है, क्योंकि आज से सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। ऐसे में आज लोग धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। इसके अलावा, खिचड़ी, मिष्ठान, तिल आदि चीजों का दान भी कर रहे हैं।अयोध्या के सरयू घाट पर भी भक्तों की भीड़ देखने को मिल रही है। एक भक्त अशोक कुमार पाल ने बताया कि वह राम जन्मभूमि और कौशल्या माता के घर आए हैं। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति पर तिल से बनी मिठाई का दान किया जाता है, जो सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल से सुबह 3:30 बजे यात्रा शुरू की, पवित्र स्नान किया, दान दिया और अब वापस लौट रहे हैं।गाजीपुर में भी गंगा के घाटों पर हजारों श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगाते नजर आए। एक श्रद्धालु संध्या वर्मा ने बताया कि 14 तारीख को गंगा स्नान होना था, लेकिन एकादशी के कारण यह पर्व 15 तारीख को मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति हिंदू धर्म में हर साल बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाती है और यह सनातन काल से चलता आ रहा है।एक अन्य श्रद्धालु संजय कुमार वर्मा ने बताया कि आज के शुभ अवसर पर घाटों पर सुबह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक, हर उम्र के लोग पवित्र स्नान कर रहे हैं।पुजारी कन्हैया पांडे ने बताया कि मकर संक्रांति पर गंगा नदी में स्नान का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि प्रकाश की किरणों में स्नान करने से व्यक्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लोग संगम, काशी और गंगा के अन्य घाटों पर स्नान करते हैं, दान करते हैं, खुशियां मनाते हैं और अपने रिश्तेदारों के पास जाते हैं।

जातिवादी पार्टियों को देना होगा जवाब:BSP सुप्रीमो ने 70वें जन्मदिन पर कार्यकर्ताओं में भरा जोश, पांचवीं बार सत्ता में वापसी की भी भरी हुंकार
लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती आज 70वां जन्म दिन मना रही हैं। इस खास पर उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर मीडियो को संबोधित किया। इस दौरान मायावती ने जहां बीजेपी, सपा और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। वहीं उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए सत्ता में वापसी की हुंकार भरी। लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि सभी सरकारें बसपा द्वारा ही चलाई जा रही योजनाओं का नाम बदलकर चला रही हैं। उन्होंने कहा कि विरोधियों ने भ्रम फैलाकर बसपा को तोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में कांग्रेस, भाजपा और दूसरी जाति-आधारित पार्टियां हमारी पार्टी के आंदोलन को कमजोर करने की साजिश रच रही हैं। इसका करारा जवाब देना होगा ताकि पूरे देश में बीएसपी को मजबूत किया जा सके और सबसे बड़े राज्य में इसे फिर से सत्ता में लाया जा सके। जातिवादी पार्टियों को देना होगा मुंहतोड़ जवाबमायावती ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि कांग्रेस, बीजेपी सहित अन्य जातिवादी पार्टियां अलग-अलग हथकंडे अपना रही हैं। इनको मुंहतोड़ जवाब देकर यूपी में पांचवीं बार बसपा की सरकार बनानी है। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र में बीजेपी और कांग्रेस के विधायक अपनी उपेक्षा से नाराज होकर जुटे थे। बसपा ने ब्राह्मण को भागीदारी दी। ब्राह्मणों को किसी का चोखा बाटी नहीं चाहिए। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य समाज का बसपा सरकार पूरा ध्यान रखेगी। बसपा ने हमेशा ही उनका सम्मान किया है। बसपा ऐसी पार्टी है जिसने सभी जातियों और धर्मो का सम्मान किया है। बसपा सरकार में नहीं हुआ दंगा-फसादसरकारों पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि कांशीराम के मरने पर राष्ट्रीय शोक नहीं घोषित किया। उनकी उपेक्षा की गई। दूसरी जातियों के साथ मुस्लिम समाज के साथ अन्याय हो रहा। बसपा सरकार में दंगा फसाद नहीं हुआ। हमारी सरकार में यादवों का भी ध्यान रखा गया। सभी चुनाव अकेले ही लड़ेगी बसपा मायावती ने कहा कि इस बार के विधानसभा चुनाव में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। वर्तमान में सभी समाज दुखी हैं और वह बसपा की सरकार चाह रहे हैं। इस बार गुमराह नहीं होना है। ईवीएम में धांधली और बेइमानी की चर्चा है। ये व्यवस्था कभी भी खत्म हो सकती है। एसआईआर की काफी शिकायतें है। इससे हमें सजग रहना होगा। गठबंधन से बसपा को नुकसान होता है। खासकर अपर कास्ट का वोट जातिवादी पार्टियों को मिलता है। तभी सारी पार्टियां हमसे गठबंधन चाहती हैं। भविष्य में बसपा सभी चुनाव अकेले लड़ेगी। आगे जब अपर कास्ट का वोट हमें मिलने का भरोसा हो जाएगा, तब गठबंधन करेंगे लेकिन इसमें अभी बरसों लगेंगे।

राहुल गिरगिट की तरह रूप बदलने वाले हैं शुद्ध कालनेमी:कांग्रेस नेता के अयोध्या दौरे पर महंतों ने दी तीखी प्रतिक्रिया, बताया डीएनए में खोट भी
अयोध्या। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के राम मंदिर में दर्शन को लेकर चल रही अटकलों पर अयोध्या के संतों और महंतों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा है कि राहुल गांधी समय-समय पर गिरगिट की तरह रूप बदलने वाले शुद्ध कालनेमी हैं, उनके डीएनए में भी खोट है। हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत राजू दास ने कहा कि जो व्यक्ति हिंदुओं को हिंसक कहे, जो यह कहे कि युवा मंदिर लड़कियों को छेड़ने के लिए जाते हैं, जिनकी पार्टी राम मंदिर के विरोध में 17 वकील खड़े कर दे, जो हमेशा सनातन की संस्कृति की अवहेलना करे, लेकिन राम मंदिर का विरोध करने वाली पार्टी के नेता आते हैं तो स्वागत है। कालनेमि से सचेत होने की जरूरत है। जब ये सत्ता में होते हैं तो सनातन पर प्रहार करते हैं।यह बोले हनुमानगढ़ी देवेशाचार्यहनुमानगढ़ी के देवेशाचार्य महाराज ने कहा कि देखिए, सूचना मिली है कि वे आ सकते हैं। स्वागत योग्य है। देर ही सही, राम की शरण में आ रहे हैं, कल्याण होगा। रामलला का दर्शन कर रहे हैं तो उनकी पार्टी का भी कल्याण होगा। किसी भी राजनीतिक दल को राम के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।राहुल की मानसिकता ने दिखाया वे राम विरोधीमहामंडलेश्वर विष्णु दास ने कहा कि राहुल गांधी तो भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे। सद्बुद्धि कहां से आ गई कि वे राम मंदिर आ रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राम पर सवाल उठाने वाले क्यों आ रहे हैं। यह राहुल गांधी की मानसिकता को दिखाता है कि वे राम विरोधी हैं। कभी कहते हैं हिंदू हिंसा फैलाता है, राम के वजूद पर सवाल उठाते हैं। वे राजनीति से प्रेरित होकर आ रहे हैं।सीताराम दास ने कहा- राहुल के डीएन में खोटसीताराम दास महाराज ने कहा कि राहुल गांधी के डीएनए में खोट है। समय-समय पर गिरगिट की तरह रूप बदलने वाले शुद्ध कालनेमी हैं। यूपी चुनाव को देखते हुए राम मंदिर आ रहे हैं। मैं पूछता हूं कि वे राम प्राण प्रतिष्ठा में क्यों नहीं आए। वे राम सेतु के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे। भगवान राम का दर्शन करने से उनका कल्याण नहीं होगा। इनकी पार्टी के लोग साधु-संतों पर अभद्र टिप्पणी करते हैं। इन्हें सनातन कभी स्वीकार नहीं करेगा। ये मजार पर चादर चढ़ाते हैं।उन्होंने कहा कि जो राम को काल्पनिक कहते थे, जो राम सेतु को काल्पनिक मानते हैं, अब राम की शरण में जाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है?

मकर संक्रांति का देशभर में उल्लास: प्रयागराज के संगम में भक्तों ने लगाई आस्था की डुबकी, हर की पौड़ी और सरयू में भी दिखी रौनक
नई दिल्ली। मकर संक्रांति का पर्व देशभर में आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही यह पर्व पुण्य, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देता है। इस मौके पर अयोध्या, प्रयागराज और ऋषिकेश जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालु नदियों में पवित्र स्नान कर रहे हैं। प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के बीच मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम पर उमड़ पड़े। संगम घाटों पर बुधवार सुबह बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए और सभी उम्र के लोगों ने पवित्र डुबकी लगाई।श्रद्धालुओं ने शेयर किए अपने अनुभवप्रयागराज में संगम घाट पर स्नान के बाद एक श्रद्धालु ने कहा, हम अयोध्या से आए हैं और हमने भी पवित्र स्नान किया। वहीं एक महिला ने कहा कि हम पिछले 10-12 सालों से प्रयागराज आ रहे हैं। हर बार एक महीने के लिए रुकते हैं। उन्होंने कहा कि यह इतनी महान और पवित्र जगह है कि इसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि बहुत अच्छा अनुभव रहा है। मकर संक्रांति का दिन है और चारों तरफ बस खुशी ही खुशी है।सरयू के घाटों में भी रौनकअयोध्या में सरयू के घाटों पर भी रौनक देखी गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरयू नदी के घाटों में पवित्र स्नान करने पहुंचे। कड़ाके की ठंड के बावजूद सुबह 4 बजे से श्रद्धालुओं का स्नान शुरू हो गया। स्नान के बाद श्रद्धालु हनुमानगढ़ी मंदिर और राम मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।यह बोले भक्तपहली बार अयोध्या पहुंचे मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिला निवासी एक श्रद्धालु ने कहा कि हमने पहले तीर्थ यात्रा की थी और उसका झंडा उठाया था। हमने इस बार यहां आने का फैसला किया। मिर्जापुर के निवासी एक युवक ने कहा कि मकर संक्रांति का त्योहार है। यहां की सरयू नदी को पवित्र माना जाता है। यहां आकर बहुत अच्छा लगा है।तीर्थयात्रियों ने प त्रिवेणी घाट पर किया दान-पुण्यमकर संक्रांति के मौके पर उत्तराखंड के ऋषिकेश में भी हजारों श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी घाट पर पवित्र स्नान किया। तीर्थयात्रियों ने पूजा-पाठ, प्रार्थना और दान-पुण्य किया। राजस्थान के रहने वाले दीपक ने बताया कि वह पिछले आठ साल से गंगा में पवित्र स्नान के लिए ऋषिकेश आते हैं। स्नान करने के बाद दान-पुण्य करते हैं और शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाते हैं।गंगा में पवित्र डुबकी लगाने आते हैं विदेशों सेएक और युवक ने कहा कि भक्त अलग-अलग राज्यों से और विदेश से भी गंगा में पवित्र डुबकी लगाने और दर्शन करने आते हैं। इस दिन लोग सुबह-सुबह पूजा-पाठ करते हैं, प्रार्थना करते हैं, दान करते हैं और अपने परिवार की भलाई और खुशहाली के लिए देवी गंगा से प्रार्थना करते हैं।हर की पौड़ी पर भक्तों ने लगाई आस्था की डुबकीइसी तरह उत्तराखंड के हरिद्वार में हर की पौड़ी पर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। एक श्रद्धालु ने बताया कि एक समय था जब हम छिपकर कांवड़ यहां लाते थे, कभी उत्तरकाशी के रास्ते और कभी दूसरे रास्तों से। आज हम खुश हैं कि हम बिना किसी डर के आजादी से यात्रा कर सकते हैं। एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि यह बहुत पवित्र स्नान है। यह पूरे साल में एक बार आता है और इसे बहुत पवित्र माना जाता है। हरिद्वार में स्नान के बाद बहुत अच्छा लग रहा है।

मकर संक्रांति- माघ मेला:संगम की रेत पर आध्यात्मिक लक्जरी, श्रद्धालुओं को नया अनुभव दे रही आधुनिक टेंट सिटी
लखनऊ। मकर संक्रांति और माघ मेला 2026 के अवसर पर प्रयागराज के संगम तट पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त टेंट सिटी विकसित की गई है, जो आध्यात्मिक पर्यटन का नया मानक स्थापित कर रही है। देश-दुनिया से संगम स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और यादगार अनुभव देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) द्वारा संगम क्षेत्र की रेत पर अत्याधुनिक टेंट कॉलोनी बसाई गई है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की परिकल्पना के अनुरूप विकसित यह टेंट सिटी माघ मेला को केवल आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि पर्यटन, संस्कृति और रोजगार से जोड़ने का सशक्त माध्यम बना रही है। उन्होंने बताया कि प्रयागराज के अरैल सेक्टर-7 में त्रिवेणी पुष्प से पूर्व विकसित टेंट कॉलोनी में कुल 50 आधुनिक कॉटेज तैयार किए गए हैं। श्रद्धालु इन कॉटेज की ऑनलाइन बुकिंग यूपीएसटीडीसी की वेबसाइट के माध्यम से कर सकते हैं। टेंट सिटी को तीन श्रेणियों- प्रीमियम, लग्जरी और डीलक्स में विभाजित किया गया है। निर्धारित किया गया किरायाप्रीमियम कॉटेज का किराया 15 हजार रुपये, लग्जरी का 11 हजार 500 रुपये और डीलक्स कॉटेज का किराया 7 हजार 500 रुपये निर्धारित किया गया है। इनमें क्रमशः 12 प्रीमियम, 8 लग्जरी और 30 डीलक्स टेंट शामिल हैं। पर्यटन मंत्री ने बताया कि टेंट सिटी में ठहरने वाले श्रद्धालुओं को उसी शुल्क में सात्विक भोजन की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। परिसर में यज्ञशालाओं का निर्माण किया गया है, जहां नियमित रूप से भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। साथ ही, सांस्कृतिक वातावरण को सजीव बनाने के लिए कलाग्राम भी विकसित किया गया है, जहां स्थानीय लोककला और शिल्प को बढ़ावा दिया जा रहा है। माघ मेले में रोजार और नवाचार को मिल रहा बढ़ावाजयवीर सिंह ने बताया कि माघ मेला 2026 में रोजगार और नवाचार को विशेष बढ़ावा मिला है। संगम टेंट कॉलोनी परिसर में एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत प्रदर्शनी लगाई गई है, जहां प्रयागराज की पारंपरिक मूंज कला के स्टॉल लगाए गए हैं। इससे स्थानीय कारीगरों को प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि माघ मेला अब केवल आध्यात्मिक पहचान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के लिए एक बड़े व्यावसायिक मंच के रूप में उभर रहा है। श्रद्धालुओं को भा रहे यह सबदेश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु मूंज से बने डलिया, पेन स्टैंड, रोटी रखने के बर्तन, गमले और सजावटी उत्पादों को विशेष रूप से पसंद कर रहे हैं। नैनी क्षेत्र के महेवा इलाके की यह पारंपरिक कला, जिसे वर्षों से स्थानीय कारीगर आगे बढ़ा रहे हैं, अब आधुनिक स्वरूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि प्रदेश का हर बड़ा आयोजन आस्था के साथ-साथ रोजगार, पर्यटन और स्थानीय कला को सशक्त करे। संगम टेंट सिटी इस सोच का सजीव उदाहरण है, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक वातावरण का अनूठा अनुभव श्रद्धालुओं को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि माघ मेला 2026 प्रदेश के सांस्कृतिक वैभव और आर्थिक संभावनाओं को एक साथ आगे बढ़ाता हुआ दिखाई दे रहा है।

माघ मेला 2026ः यूपी सीएम ने संगम में लगाई आस्था की डुबकी:मां गंगा की पूजा-अर्चना कर लिया आशीर्वाद, परखा स्नान पर्व की तैयारियों को
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को माघ मेला-2026 के दौरे के दौरान प्रयागराज में गंगा नदी में पूजा-अर्चना और अनुष्ठान किए। सीएम योगी शनिवार को माघ मेले में आने वाले स्नान पर्व की तैयारियों का जायजा लेने के लिए प्रयागराज पहुंचे। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने गंगा पूजन में हिस्सा लिया और माघ मेला क्षेत्र में सत्तू बाबा के पंडाल में आयोजित होने वाले अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे।सीएम आदित्यनाथ मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी सहित प्रमुख स्नान पर्वों की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक भी करेंगे। उम्मीद है कि इन स्नान अनुष्ठानों में देश भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आएंगे। गंगा में पवित्र डुबकी लगाने और पूजा करने के बाद सीएम योगी सत्तू बाबा के शिविर में श्री जगद्गुरु रामानंदाचार्य के प्रकटोत्सव समारोह में भाग लेंगे। उम्मीद है कि वह जल्द ही पंडाल पहुंचेंगे, जहां साधु-संत पहले ही इकट्ठा होना शुरू हो गए हैं।धार्मिक नेताओं से मुलाकात करेंगे योगीएक आधिकारिक बयान के अनुसार, सीएम योगी संतों और धार्मिक नेताओं से भी मिलेंगे। इसके अलावा, वह रामानंदाचार्य की 726वीं जयंती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। प्रयागराज दौरे के दौरान, मुख्यमंत्री योगी राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी भी जाएंगे। 44 दिनों तक चलने वाला माघ मेला 3 जनवरी को प्रयागराज में संगम पर पौष पूर्णिमा के शुभ स्नान के साथ शुरू हुआ।माघ मेले में होंगे 6 मुख्य स्नानमाघ मेले के दौरान छह मुख्य स्नान होंगे, जो 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के पवित्र स्नान के साथ खत्म होंगे। इस साल की महत्वपूर्ण स्नान की तारीखों में 14 जनवरी को मकर संक्रांति, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या, 23 जनवरी को बसंत पंचमी, 1 फरवरी को माघी पूर्णिमा और 15 फरवरी को महाशिवरात्रि शामिल हैं। माघ मेला-2026 की भव्य शुरुआत ने एक बार फिर प्रयागराज को आस्था और संस्कृति के एक शाश्वत केंद्र के रूप में उसकी स्थिति की पुष्टि की है।

रक्षा मंत्री ने यूपी को दी बड़ी सौगात: लखनऊ में अशोक लेलैंड के अत्याधुनिक ईवी प्लांट का किया लोकार्पण, हर महीने 2500 वाहनों का होगा प्रोडक्शन
लखनऊ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को राजधानी के सरोजनी नगर क्षेत्र में अशोक लेलैंड के अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) प्लांट का उद्घाटन किया। इस दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य इलेक्ट्रिक वाहनों का है, इसी दिशा में भारत आगे बढ़ रहा है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आने वाले वर्षों में पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन प्रमुख होंगे। पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से ईवी को बढ़ावा देना आवश्यक है और सरकार भविष्य की तकनीकों पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए नियमों को सरल किया गया है और उद्योगों को ऑनलाइन प्रक्रियाओं के माध्यम से सहूलियत दी जा रही है। संयंत्र केवल एक कंपनी की सफलता नहींउन्होंने कहा कि अशोक लेलैंड का यह संयंत्र केवल एक कंपनी की सफलता नहीं, बल्कि उद्योग जगत के सरकार की नीतियों पर बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। डबल इंजन की सरकार के तहत उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, सड़कों और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण निवेश का माहौल सुदृढ़ हुआ है। रिकार्ड 18 महीनों में बनकर तैयार हुआ संयंत्रराजनाथ सिंह ने बताया कि संयंत्र का निर्माण 24 महीनों में प्रस्तावित था, लेकिन रिकॉर्ड 18 महीनों में इसे पूरा किया गया। यहां परिचालन शुरू होने के बाद हर महीने लगभग 2,500 इलेक्ट्रिक वाहन तैयार किए जाएंगे। इससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा और अगले पांच वर्षों में हजारों करोड़ रुपये के निवेश तथा लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है। यूपी सरकार निवेश को दे रही बढ़ावाउन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार निवेश को बढ़ावा देने के लिए ‘फॉर्च्यून ग्लोबल 500 एवं फॉर्च्यून इंडिया 500 कंपनी निवेश प्रोत्साहन नीति-2023’ लेकर आई है। साथ ही ‘उत्तर प्रदेश एयरोस्पेस एवं डिफेंस यूनिट और रोजगार प्रोत्साहन नीति’ के माध्यम से राज्य को रक्षा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाया जा रहा है।

भारत एक जादुई जगह:माघ मेले में इटली से आई महिला पर्यटक ने शेयर किया अनुभव, काशी जाने की भी योजना बना रहीं लुक्रेजिया
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेला पूरे भव्य स्वरूप के साथ चल रहा है। इसी बीच मेले में इटली से आई एक महिला पर्यटक लुक्रेजिया ने भारत को जादुई देश बताया। उसने बताया कि यह उसकी तीसरी भारत यात्रा है और हर बार का अनुभव पहले से ज्यादा खास रहा है। लुक्रेजिया ने कहा कि वह अपने पिता के साथ दुनियाभर में यात्रा करती है, लेकिन भारत उसके दिल में एक खास जगह रखता है। लुक्रेजिया ने कहा, भारत एक जादुई जगह है। यहां के लोग, खाना, संस्कृति और हिंदू धर्म, सब कुछ बेहद खास है। यही वजह है कि हम बार-बार यहां आते हैं। लुक्रेजिया ने अपनी भारत यात्राओं का जिक्र करते हुए बताया कि वह पहली बार 2024 में भारत आई थी। इसके बाद वह 2025 में महाकुंभ में आई और अब 2026 में माघ मेले में शामिल होने के लिए प्रयागराज पहुंची है।10 दिनों की भारत यात्रा पर है लुक्रेजियालुक्रेजिया ने कहा, प्रयागराज के बाद मैं वाराणसी जाने की योजना बना रही हूं, जो दुनिया का सबसे पुराना शहर माना जाता है। लुक्रेजिया इस समय 10 दिनों की भारत यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने अपने आध्यात्मिक गुरु से जुड़ाव और उनसे मिली सीखों के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, मेरे गुरु मुझे दया, करुणा और अनावश्यक चीजों को छोड़ना सिखाते हैं। वे कहते हैं कि खुद को स्वीकार करना सबसे बड़ी सीख है। उन्होंने सब कुछ छोड़ दिया है, इसलिए उनके पास सब कुछ है। मुझे उनका जीवन जीने का तरीका बहुत पसंद है।पहले शाही स्नान में संत-महात्माओं ने लिया हिस्सामाघ मेले के पहले शाही स्नान में विभिन्न सनातन परंपराओं के संतों और महात्माओं ने हिस्सा लिया। 44 दिनों तक चलने वाला माघ मेला 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के पावन स्नान के साथ त्रिवेणी संगम पर शुरू हुआ था। इस दौरान छह प्रमुख स्नान पर्व होंगे और मेला 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान के साथ संपन्न होगा।अब तक लाखों से श्रद्धालु संगम में लगा चुके हैं आस्था की डुबकीअब तक लाखों श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, 3 जनवरी को ही करीब 22 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया। आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। इस वर्ष प्रमुख स्नान तिथियों में 14 जनवरी को मकर संक्रांति, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या, 23 जनवरी को बसंत पंचमी, 1 फरवरी को माघी पूर्णिमा और 15 फरवरी को महाशिवरात्रि शामिल हैं।सीएम के निर्देश पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाममुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। शहर और मेला क्षेत्र में 1,500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी निगरानी एक केंद्रीकृत कमांड सेंटर से 24 घंटे की जा रही है। आधुनिक उपकरण, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, वॉच टावर और सक्रिय जल पुलिस के जरिए भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी, व्यापक व्यवस्थाएं और गहरी आध्यात्मिक भावना के साथ माघ मेला 2026 की भव्य शुरुआत ने एक बार फिर प्रयागराज को आस्था और संस्कृति के शाश्वत केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है।

यूपी की जनता के नाम योगी ने लिखी पाती:साइबर क्राइम की चुनौतियों से किया आगाह, ओटीपी न शेयर करने दी सलाह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रदेश की जनता के नाम एक पत्र योगी की पाती लिखा। इस पत्र के जरिए उन्होंने साइबर अपराध की चुनौतियों को लेकर प्रदेश की जनता को आगाह किया है। सीएम योगी ने बताया कि इसे रोकने के लिए सरकार कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। सीएम योगी ने पत्र में लिखा, मोबाइल और कंप्यूटर ने हमारे जीवन को अधिक सुगम और सुविधाजनक बनाया है, परंतु इसके साथ ही साइबर अपराध की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। आपकी सरकार इसकी रोकथाम के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।उन्होंने कहा कि 2017 से पूर्व प्रदेश में केवल 2 साइबर क्राइम थाने थे। आज सभी 75 जनपदों में साइबर क्राइम थाने क्रियाशील हैं। साथ ही सभी जनपदीय थानों में साइबर हेल्प डेस्क बनाई गई है। साइबर ठगों के विरुद्ध सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़े शस्त्र हैं। ये अपराधी डिजिटल अरेस्ट जैसे झूठे और भ्रामक शब्दों का प्रयोग कर निर्दोष नागरिकों को डराते-धमकाते हैं और उनसे पैसे वसूलते हैं। देश के किसी भी कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। पुलिस या अन्य कोई सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल, वॉट्सऐप, या सोशल मीडिया के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है।सीएम योगी ने पत्र में कहा कि सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर भी सावधान रहना होगा। आप जो तस्वीरें, वीडियो या लोकेशन सार्वजनिक करते हैं, उसके माध्यम से अपराधी पहले आपके बारे में सूचनाएं जुटाते हैं और इन्हीं सूचनाओं को आपके विरुद्ध प्रयोग करते हैं। अपनी व्यक्तिगत जानकारी या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें। सावधानी के पश्चात भी यदि आपके साथ साइबर अपराध हो जाता है, तो सर्वप्रथम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रिपोर्ट करें।सीएम योगी ने आगे कहा कि जितना जल्दी आप पुलिस को सूचित करेंगे, बचाव की संभावना भी उतनी ही अधिक होगी। जागरूक बनें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को। आइए, हम सब मिलकर एक सुरक्षित और साइबर अपराध-मुक्त उत्तर प्रदेश का निर्माण करें।


