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एटा बर्ड सेंचुरी-कच्छ छारी-ढांड को रामसर साइट के रूप में मिली मान्यता : पीएम मोदी ने जताई खुशी, एक्स पर लिखी यह बात

पीएम मोदी ने जताई खुशी, एक्स पर लिखी यह बात
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admin

Jan 31, 202611:57 AM

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के एटा स्थित पटना बर्ड सेंचुरी और गुजरात के कच्छ स्थित छारी-ढांड को रामसर साइट के रूप में मान्यता मिलने पर प्रसन्नता जताई है। उन्होंने कहा कि ये मान्यताएं जैव विविधता को संरक्षित करने और महत्वपूर्ण इकोसिस्टम की रक्षा करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, खुशी है कि एटा (उत्तर प्रदेश) में पटना बर्ड सेंचुरी और कच्छ (गुजरात) में छारी-ढांड रामसर साइट बन गए हैं। वहां की स्थानीय आबादी के साथ-साथ वेटलैंड संरक्षण के प्रति उत्साही सभी लोगों को बधाई। ये मान्यताएं जैव विविधता को संरक्षित करने और महत्वपूर्ण इकोसिस्टम की रक्षा करने की हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं। ये वेटलैंड अनगिनत प्रवासी और स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में फलते-फूलते रहें।

इससे पहले, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश के एटा जिले में पटना बर्ड सेंचुरी और गुजरात के कच्छ जिले में छारी-ढंड को रामसर साइट्स की सूची में शामिल किया गया है। भूपेंद्र यादव ने दो फरवरी को श्विश्व वेटलैंड्स दिवसश् से पहले भारत के रामसर नेटवर्क में दो नई वेटलैंड्स को शामिल करने की घोषणा की।

उन्होंने श्एक्सश् पोस्ट में लिखा, विश्व वेटलैंड दिवस नजदीक होने के कारण मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत के बढ़ते रामसर नेटवर्क में दो नए नाम जुड़ गए हैं। उत्तर प्रदेश के एटा में पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ में छारी-ढांड प्रतिष्ठित रामसर साइटों की सूची में नए नाम हैं।

भूपेंद्र यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का रामसर नेटवर्क 2014 में 26 साइट्स से बढ़कर अब 98 साइट्स हो गया है, यानी इसमें 276 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि यह अंतर्राष्ट्रीय मान्यता हमारे पर्यावरण की रक्षा करने और हमारे समृद्ध वेटलैंड्स के संरक्षण के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मंत्री ने बताया कि सैकड़ों प्रवासी और निवासी पक्षी प्रजातियां इन दोनों वेटलैंड्स में अपना घर पाती हैं। इसके अलावा ये चिंकारा, भेड़ियों, कैरकल, रेगिस्तानी बिल्लियों और रेगिस्तानी लोमड़ियों के साथ-साथ लुप्तप्राय पक्षियों का भी घर हैं।

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