BUSINESS NEWS

शेयर बाजार में आई सुनामी जैसी तेजी: ट्रंप का बयान बना टर्निंग पॉइंट, सेंसेक्स-निफ्टी दोनों बने राॅकेट
नई दिल्ली। वैश्विक तनाव और युद्ध की आशंकाओं के कारण पिछले कुछ दिनों से गिरावट झेल रहे भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जोरदार वापसी देखने को मिली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर हालात में नरमी के संकेत मिलने के बाद बाजार में निवेशकों का भरोसा लौटा और प्रमुख सूचकांक तेज उछाल के साथ खुले।मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,566 के मुकाबले करीब 800 अंकों की तेजी के साथ 78,375 पर खुला। शुरुआती कारोबार में ही इसमें और तेजी आई और यह 900 अंक से अधिक चढ़कर लगभग 78,526 के स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 भी मजबूती के साथ 24,280 पर खुला और कुछ ही देर में 24,303 के स्तर तक पहुंच गया।यूएस की भूमिका को लेकर वैश्वि बाजारों में अस्थिरतादरअसल, बीते कुछ दिनों से ईरान और इजरायल के बीच युद्ध की स्थिति और यूनाइटेड स्टेट की भूमिका को लेकर वैश्विक बाजारों में भारी अस्थिरता बनी हुई थी। सोमवार को भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन सेंसेक्स करीब 1,352 अंक गिरकर 77,566 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी भी कमजोर होकर 24,028 के स्तर पर बंद हुआ था।ट्रंप का दावाः ईरानी सेना हो चुकी है काफी कमजोर मंगलवार को बाजार में आई तेजी के पीछे डोनाल्ड ट्रंप के बयान को अहम माना जा रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी सेना काफी कमजोर हो चुकी है और युद्ध अपने अंतिम चरण में हो सकता है। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में तनाव कुछ कम हुआ और निवेशकों की धारणा में सुधार देखने को मिला।90-91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचा कच्चा तेलइसी के साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज गिरावट आई। हाल ही में 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा कच्चा तेल घटकर करीब 90-91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयातक देशों के लिए सकारात्मक मानी जाती है, जिससे शेयर बाजार में खरीदारी बढ़ी। मजबूत वैश्विक संकेतों का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा। जापान और साउथ कोरिया समेत कई एशियाई बाजार तेजी के साथ कारोबार करते नजर आए। इसका असर भारतीय बाजार में भी दिखाई दिया।कई शेयरों में दिखी तेजीतेजी के माहौल में कई प्रमुख शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। इंटरग्लोब एविएशन इंडिगो एशियन पेंट्स टाइटन कंपनी वीकेएसजे और एचडीएफसी बैंक जैसे लार्जकैप शेयर बढ़त में रहे। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की खरीदारी देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में शेयर बाजार में और स्थिरता देखने को मिल सकती है।

मिडिल ईस्ट वार:क्रूड आयल की कीमतों में आया जबरदस्त उछाल, ग्लोबल स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंकाए हुईं तेज
नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के कारण शनिवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। ब्रेंट क्रूड की कीमत 91.84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का दाम 89.62 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इस तेजी के साथ ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई की कीमतों में क्रमशः 24.55 प्रतिशत और 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंकाएं फिर से तेज हो गई हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स अप्रैल 2024 के बाद पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत दिन के दौरान लगभग 11 प्रतिशत बढ़कर 89.62 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान को श्निर्धारित समय से पहले और पहले कभी न देखे गए स्तर परश् नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अब श्कोई एयरफोर्स और एयर डिफेंस नहीं बचा हैश् और उसकी वायु सेना लगभग खत्म हो चुकी है।दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा कि उनका देश किसी भी तरह की बातचीत करने का इरादा नहीं रखता और जमीनी युद्ध के लिए भी तैयार है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था, तब ब्रेंट क्रूड की कीमत 139 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। मौजूदा हालात में भी अगर तनाव बढ़ता है तो कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।हालांकि भारत के लिए राहत की बात यह है कि देश के पास फिलहाल कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। सरकार के अनुसार, भारतीय तेल कंपनियां खाड़ी क्षेत्र के अलावा अन्य देशों से भी आयात बढ़ाकर आपूर्ति में आने वाली कमी को पूरा कर रही हैं।एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि भारत के पास फिलहाल ऊर्जा संसाधनों का पर्याप्त स्टॉक है और देश ऊर्जा आपूर्ति के मामले में आरामदायक स्थिति में है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसी आपूर्ति से अधिक ऊर्जा स्रोत भारत के पास उपलब्ध हैं और जरूरत पड़ने पर अन्य क्षेत्रों से आयात बढ़ाया जाएगा।अधिकारी के अनुसार, भारत 2022 से रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। उस समय रूस से आयात कुल आयात का केवल 0.2 प्रतिशत था, लेकिन अब इसमें काफी बढ़ोतरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि फरवरी में भारत ने अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 20 प्रतिशत रूस से खरीदा, जो करीब 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन (1.04 मिलियन बैरल प्रतिदिन) है।सरकार ने रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे एलपीजी उत्पादन अधिकतम करें और घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दें, ताकि मध्य पूर्व संकट के कारण रसोई गैस की कमी न हो। इसके तहत प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी महत्वपूर्ण गैसों का उपयोग प्राथमिकता से एलपीजी उत्पादन में करने को कहा गया है।

मुश्किल में अनिल अंबानीः एक साथ एक दर्जन ठिकानों ईडी की रेड:जद में रहा मुंबई भी, संदिग्ध फंड ट्रांसफर और वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है मामला
मुंबई। रिलायंस पावर से जुड़े संदिग्ध फंड ट्रांसफर और वित्तीय लेन-देन के मामले में उद्योगपति अनिल अंबानी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के राडार पर हैं। ईडी ने शुक्रवार को एक बार फिर अनिल अंबानी और रिलायंस पावर से जुड़े करीब एक दर्जन ठिकानों पर रेड की है। सूत्रों के अनुसार, मुंबई में अलग-अलग स्थानों पर एक साथ यह कार्रवाई की गई। बताया जा रहा है कि ईडी की करीब 15 विशेष टीमों ने सुबह-सुबह तलाशी अभियान शुरू किया। यह कार्रवाई उन लोगों के रजिस्टर्ड ऑफिस और घरों पर की गई, जो इस पावर कंपनी से किसी न किसी तरह जुड़े हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि यह छापेमारी रिलायंस पावर से जुड़े संदिग्ध फंड ट्रांसफर और वित्तीय लेन-देन की जांच के तहत की जा रही है। हालांकि शुक्रवार को हुई इस कार्रवाई को लेकर ईडी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।3,716.83 करोड़ का आलीशान महल हो चुका है अटैचएक आधिकारिक बयान के अनुसार, इससे पहले ईडी ने अनिल अंबानी के आलीशान पाली हिल स्थित अबोड नामक आवासीय संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच किया था, जिसकी कीमत करीब 3,716.83 करोड़ रुपए बताई गई है। यह कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में की गई थी। प्रवर्तन निदेशालय के विशेष कार्य बल, मुख्यालय ने यह संपत्ति धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत जब्त की है। इससे पहले इसी संपत्ति के एक हिस्से को 473.17 करोड़ रुपए तक जब्त किया जा चुका था।पिछले महीने सीबीआई ने अनिल अंबानी के ठिकानों पर की थी छापेमारीवहीं पिछले महीने के अंत में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी अनिल अंबानी के आवासों और रिलायंस कम्यूनिकेशंस (आरकॉम) के दफ्तरों में तलाशी ली थी। यह कार्रवाई तब की गई जब बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर कंपनी के खिलाफ दूसरा मामला दर्ज किया गया था।आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी से जुड़ा है मामलासीबीआई के अनुसार यह मामला आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। एजेंसी के बयान के मुताबिक, मामला अनिल अंबानी, जो रिलायंस कम्युनिकेशंस के प्रमोटर और पूर्व चेयरमैन रहे हैं, और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया है।

भारतीय शेयर बाजार क्रैश:सेंसेक्स में 1500 अंकों की बड़ी गिरावट, निवेशकों के डूबे 12 लाख करोड़, निफ्टी भी गिरा औंधे मुह
मुंबई । भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। दोपहर 12:40 पर सेंसेक्स 1,451 अंक या 1.81 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,787 और निफ्टी 476 अंक या 1.91 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,392 पर था। बाजार में इस गिरावट के साथ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केटकैप 12 लाख करोड़ रुपए कम होकर 445 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि सोमवार को 456 लाख करोड़ रुपए था। बाजार में बड़ी कमजोरी की वजह इजरायल, अमेरिका- ईरान युद्ध में व्यापक स्तर पर पहुंचना है। अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान पर हमला कर रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ ईरान भी मध्यपूर्व में अमेरिकी ठिकानों को लगातार निशाना बना रहा है। इस युद्ध के लगातार बढ़ने से निवेशकों को आशंका है कि इससे अर्थव्यवस्था पर सीधा असर हो सकता है।दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमत में उछाल देखने को मिल रहा है और यह चार वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। खबर लिखे जाने तक डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.86 प्रतिशत की तेजी के साथ 76.69 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 3.16 प्रतिशत की तेजी के साथ 83.97 पर था। डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट होना भी शेयर बाजार की कमजोरी के पीछे बड़ा कारण है। डॉलर के मुकाबले रुपया आॅल-टाइम लो 92.41 पर पहुंच गया है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण है। सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 3,295.64 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 8,593.87 करोड़ रुपए निवेश किए थे। बाजार में उतार-चढ़ाव दशार्ने वाला इंडिकेटर इंडिया विक्स 21 प्रतिशत बढ़कर 21 पर पहुंच गया है, जब भी इसमें तेजी देखने को मिलती है। बाजार में गिरावट होने की संभावना बढ़ जाती है।

मिडिल ईस्ट में टेंशन, बिखरा भारतीय शेयर बाजार:औंधे मुंह गिरा सेंसेक्स, निफ्टी ने भी लगाया गोता, निवेशकों के 6 लाख करोड़ डूबे
मुंबई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते टेंशन और अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के चलते भारतीय शेयर बाजार बिखर गया है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सेंसेक्स 2743 अंक या 3.38 फीसदी टूटकर 78543 पर खुला, जबकि निफ्टी 519 अंक या 2.06 फीसदी गिरकर 24659 अंक पर खुला। बैंक निफ्टी में 1300 अंकों से ज्यादा की गिरावट रही।खबर लिखे जाने तक (सुबह 9.25 बजे के करीब) सेंसेक्स 1043.10 अंक (1.28 प्रतिशत) गिरकर 80,244.09 पर ट्रेड कर रहा था, वहीं निफ्टी 309.70 (1.23 प्रतिशत) लुढ़क गया और 24,868.95 पर पहुंच गया। इस दौरान निफ्टी के सभी इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। वहीं, सेंसेक्स के 30 शेयरों में से बीईएल को छोड़कर सभी शेयर लाल निशान में ट्रेड कर रहे थे।बेंचमार्क सूचकांकों से कमजोर रहा बाजारों का प्रदर्शनव्यापक बाजारों का प्रदर्शन बेंचमार्क सूचकांकों से कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमशः 1.36 प्रतिशत और 1.86 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। सेक्टर के हिसाब से देखें, तो निफ्टी रियल्टी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जिसमें खुलने के समय 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मीडिया दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाला सेक्टर रहा।निफ्टी मेटल में सबसे कम गिरावटनिफ्टी मेटल में सबसे कम गिरावट दर्ज की गई और यह खुलने के समय सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सूचकांक बन गया। सेक्टर्स की बात करें तो ऑटो, एफएमसीजी, आईटी, बैंक, हेल्थकेयर, फाइनेंशियल और बाकी सभी सेक्टर्स लाल निशान पर कारोबार कर रहे थे, सिर्फ मेटल सेक्टर में तेजी रही, क्योंकि निवेशक सेफ असेट में पैसा लगा रहे हैं। सभी सेक्टर में करीब 1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। कच्चे तेल के दाम भी गिरेइसके अलावा, कच्चे तेल के दाम में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ये जंग और आगे बढ़ती है तो गिरावट ज्यादा हावी हो सकती है। वहीं कच्चा तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं। बता दें कि अमेरिका-इजराइल के संयुक्त सैन्य अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य कई शीर्ष अधिकारी मारे गए। एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष जारी रहने की संभावना है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की जवाबी कार्रवाई में जान गंवाने वाले अमेरिकी सैनिकों का बदला लेने की कसम खाई है।निवेशकों के 6 लाख करोड़ डूबे शेयर बाजार में भारी गिरावट के कारण निवेश्कों को आज तगड़ा नुकसान हुआ। बीएसई मार्केट कैप में बड़ी गिरावट देखने को मिली। शुकवार को बीएसई मार्केट कैप 463.50 लाख करोड़ रुपये पर था, जो सोमवार को घटकर 457.50 लाख के करीब पहुंच गया। यह निवेशकों की वैल्यूवेशन में 6 लाख करोड़ रुपये की कमी है।

कीमती धातुओं की कीमतों में जबरदस्त इजाफा: सिल्वर के भाव में आया 14,530 रुपये का उछाल, जानें गोल्ड के बारे में भी
नई दिल्ली। देश में सोने-चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। सोमवार को चांदी की कीमत में 14,530 रुपये की बड़ी बढ़त दर्ज की गई, जिसके बाद इसका भाव 2.67 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। वहीं सोना भी 2,680 रुपये महंगा होकर 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। कीमती धातुओं में आई इस तेजी ने निवेशकों और खरीदारों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।बाजार जानकारों के अनुसार, घरेलू सर्राफा बाजार में यह उछाल वैश्विक संकेतों के चलते देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती बनी हुई है। स्पॉट मार्केट में सोना 5,027.13 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। वहीं कॉमेक्स पर सोने के वायदा भाव में 1.94 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है, जिससे यह 5,179 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया।चांदी की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसमें 5.42 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई है। चांदी का भाव बढ़कर 86.805 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है। वैश्विक बाजार में आई इस मजबूती का सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ रहा है।विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा है। खासकर अमेरिका की व्यापार नीतियों और टैरिफ को लेकर सख्ती के संकेतों ने बाजार में अस्थिरता बढ़ाई है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भी सोने-चांदी की मांग को समर्थन दिया है।बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी वैश्विक स्तर पर आर्थिक या राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाकर सोना और चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। यही कारण है कि बीते कुछ समय से कीमती धातुओं की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है।आने वाले दिनों में भी सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए बाजार में तेजी का रुख बरकरार रह सकता है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सोना नया रिकॉर्ड स्तर बनाएगा या कीमतों में कुछ समय के लिए ठहराव देखने को मिलेगा।

भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर साबित हुई एआई समिट:टाटा संस के चेयरमैन का दावाः समिट के जरिए दुनिया को दिया स्पष्ट संदेश
नई दिल्ली। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर साबित हुई है। उनके अनुसार, इस मंच के जरिए भारत ने वैश्विक समुदाय को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में उसका विजन क्या है और वह इसे किस स्तर तक ले जाने की क्षमता रखता है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित इस समिट में दुनिया भर के उद्योग जगत, नीति-निर्माताओं और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने भाग लिया।समिट के दौरान एक विशेष बातचीत में चंद्रशेखरन ने कहा कि यह आयोजन भारत की एआई से जुड़ी पहलों, नीतियों और दीर्घकालिक रणनीतियों को प्रदर्शित करने का प्रभावी मंच बना। उन्होंने कहा कि देश न केवल एआई तकनीक को अपनाने में तेजी दिखा रहा है, बल्कि इसके लिए आवश्यक मजबूत डिजिटल अवसंरचना भी तैयार कर रहा है।समिट की सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक ओपन एआई और टाटा समूह के बीच रणनीतिक साझेदारी रही। इस साझेदारी के तहत भारत में स्थानीय स्तर पर एआई-आधारित अत्याधुनिक डेटा सेंटर विकसित किए जाएंगे। इन डेटा सेंटरों को डेटा रेजिडेंसी, उच्च स्तरीय सुरक्षा और दीर्घकालिक घरेलू क्षमता को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है, ताकि संवेदनशील और सरकारी कार्यों के लिए सुरक्षित एआई समाधान उपलब्ध कराए जा सकें।चंद्रशेखरन ने बताया कि टीसीएस के हाइपरवॉल्ट डेटा सेंटर कारोबार की पहली ग्राहक ओपनएआई होगी। इस परियोजना की शुरुआत 100 मेगावाट क्षमता से की जाएगी, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 1 गीगावाट तक ले जाया जा सकता है। यह अवसंरचना ओपनएआई के सबसे उन्नत मॉडलों को भारत में सुरक्षित और कम विलंबता (लो लेटेंसी) के साथ संचालित करने में सक्षम बनाएगी।उन्होंने कहा कि यह सहयोग भारत को वैश्विक एआई हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय डेटा प्रोसेसिंग और भंडारण से न केवल सुरक्षा और अनुपालन आवश्यकताओं को मजबूती मिलेगी, बल्कि भारतीय उद्योगों को भी एआई समाधानों का तेजी से लाभ मिल सकेगा। इससे वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा, विनिर्माण और सरकारी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बड़े बदलाव की संभावना है।चंद्रशेखरन ने यह भी बताया कि टाटा समूह आने वाले वर्षों में अपने कर्मचारियों के बीच चैटजीपीटी एंटरप्राइज को लागू करने की योजना बना रहा है। इसकी शुरुआत टीसीएस के लाखों कर्मचारियों से होगी। यह पहल दुनिया के सबसे बड़े एंटरप्राइज एआई डिप्लॉयमेंट में से एक मानी जा सकती है। इसके माध्यम से कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और कौशल विकास को नई दिशा देने का लक्ष्य रखा गया है।उन्होंने कहा कि ओपनएआई और टीसीएस के लिए यह उद्योगों को रूपांतरित करने का अनूठा अवसर है। साथ मिलकर दोनों संस्थाएं भारत के युवाओं को एआई युग के लिए तैयार करेंगी और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए सशक्त बनाएंगी। समिट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत एआई क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

शेयर में टूटा तेजी से सिलसिला:बंद होते-होते औंधे मुंह गिरा सेंसेक्स, निवेशकों को लगा गहरा धक्का, निफ्टी ने भी लगाया गोता
मुंबई। सप्ताह के चैथे कारोबारी दिन गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार बड़ी गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स 1,236.11 अंकों यानी 1.48 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 82,498.14 पर बंद हुआ, तो वहीं एनएसई निफ्टी 365 (1.41 प्रतिशत) अंक गिरकर 25,454.35 पर बंद हुआ। बाजार बंद होने के समय निफ्टी के सभी इंडेक्स लाल रंग में कारोबार करते हुए नजर आए। गुरुवार को घरेलू बाजार अपने पिछले बंद से मामूली बढ़त के साथ खुला। बैंकिंग, मेटल, ऑटो और एफएमसीजी शेयरों में भारी बिकवाली के चलते घरेलू बाजार में तीन दिन से जारी तेजी का सिलसिला टूट गया, और निफ्टी और सेंसेक्स शुरुआती बढ़त खोकर दबाव में आ गए। आज के कारोबारी सत्र में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,400 अंक से अधिक गिरकर 82,264.20 के निचले स्तर पर पहुंच गया। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी 1 प्रतिशत से ज्यादा या 400 अंक गिरकर 25,400 के स्तर से नीचे आ गया।बाजार में यह बड़ी गिरावट कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, अमेरिका-ईरान के बढ़ते तनाव और बैंकिंग व एफएमसीजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों में मुनाफावसूली के चलते आई। इस दौरान, सेंसेक्स के सभी 30 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिनमें इंडिगो, एम एंड एम, अल्ट्राटेक सीमेंट, ट्रेंट, बीईएल, कोटक बैंक, रिलायंस, टेक महिंद्रा और आईटीसी के शेयरों में सबसे अधिक 3.2 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली।व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 में 1.59 प्रतिशत और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विभिन्न सेक्टर्स की बात करें, तो निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मीडिया और निफ्टी ऑटो सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाले क्षेत्र रहे, जिनमें से प्रत्येक में 2 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी प्राइवेट और पीएसयू बैंक रहे, जिनमें 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।इस तेज गिरावट से निवेशकों को 53 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ, जिससे बीएसई का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) घटकर लगभग 466 लाख करोड़ रुपए रह गया। इस बीच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने फरवरी के पहले पखवाड़े में 10,956 करोड़ के आईटी शेयरों की बिक्री की। इसी अवधि में, दलाल स्ट्रीट में कुल 29,709 करोड़ का निवेश आया, जिसमें आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई।

भारतीय शेयर बाजार:मामूली तेजी के साथ खुला सेंसेक्स, सुबह टाॅप गेनर रहा निफ्टी मेटल
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार की बुधवार को शुरुआत सपाट हुई। सुबह 9ः20 पर सेंसेक्स 7 अंक की मामूली तेजी के साथ 83,458 और निफ्टी एक अंक की बढ़त के साथ 25,724 पर था। शुरुआती कारोबार में बाजार को संभालने का काम मेटल शेयर कर रहे थे। सूचकांकों में निफ्टी मेटल करीब एक प्रतिशत की तेजी के साथ टॉप गेनर था। इसके अलावा निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी फार्मा और निफ्टी रियल्टी हरे निशान में थे। दूसरी तरफ निफ्टी आईटी, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी सर्विसेज लाल निशान में थे। लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में बढ़त के साथ कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 172 अंक या 0.29 प्रतिशत की तेजी के साथ 60,054 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 59 अंक या 0.35 प्रतिशत की तेजी के साथ 17,208 पर था। सेंसेक्स पैक में टाटा स्टील, बीईएल, आईटीसी, एसबीआई, बजाज फिनसर्व, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज फाइनेंस, एमएंडएम, सन फार्मा, टाइटन, इंडिगो, इटरनल, एशियन पेंट्स और भारती एयरटेल गेनर्स थे। इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, कोटक महिंद्रा बैंक और एनटीपीसी लूजर्स थे। जानकारों ने कहा कि तीसरी तिमाही में मजबूत नतीजें और वैश्विक स्तर पर सकारात्मक घटनाक्रम से निवेशकों की सकारात्मक धारणा को बल मिला है। हालांकि, एआई के चलते आईटी शेयरों में उठापटक रह सकती है। वैश्विक स्तर पर शंघाई, सोल और हांगकांग जैसे बड़े बाजार लूनर न्यू ईयर की छुट्टियों के कारण बंद हैं। टोक्यो, बैंकॉक और जाकार्ता हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार मंगलवार को तेजी के साथ बंद हुए थे। कमोडिटी मार्केट में तेजी देखी बनी हुई है। खबर लिखे जाने तक डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.19 प्रतिशत की तेजी के साथ 62.38 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 0.28 प्रतिशत की मजबूती के साथ 67.60 डॉलर प्रति बैरल पर था। सोना 0.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,938 डॉलर प्रति औंस और चांदी 74.54 डॉलर प्रति औंस पर थी।

जनवरी में सब्जियों के भाव रहे नरम:वेज थाली की कीमतों में आई एक फीसदी की गिरावट, मांसाहारी थाली के भाव भी गिरे
नई दिल्ली। घर में बनी शाकाहारी थाली और मांसाहारी थाली की कीमत में जनवरी में सालाना आधार पर कमी देखी गई है। इसकी वजह सब्जियों और दालों की कीमतों में कमी आना है। यह जानकारी मंगलवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई। क्रसिल इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में शाकाहारी थाली की कीमत में पिछले वर्ष की तुलना में एक प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि मांसाहारी थाली की कीमत में सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।शाकाहारी थाली की कीमत में गिरावट का मुख्य कारण प्याज, आलू और दालों की कीमतों में आई भारी कमी थी। ालांकि, क्रिसिल के नवीनतम मासिक खाद्य लागत संकेतक के अनुसार, टमाटर की कीमतों में वृद्धि ने समग्र राहत को सीमित कर दिया। रपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 में टमाटर की कीमत 31 रुपए प्रति किलोग्राम थी, जो जनवरी 2026 में बढ़कर 46 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई, यानी इसमें वार्षिक आधार पर 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई।यह वृद्धि इस महीने आवक में 39 प्रतिशत की कमी के कारण हुई, हालांकि यह वृद्धि पिछले वर्ष के कम आधार पर हुई। इसके विपरीत, प्याज की कीमतों में वार्षिक आधार पर 27 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसका कारण अधिक स्टॉक उपलब्धता और निर्यात में कमी थी। आलू की कीमतों में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है क्योंकि पिछली फसल में कम पैदावार के कारण कीमतें बढ़ गई थीं, जिससे उच्च आधार प्रभाव पैदा हुआ था।

डाॅलर हुआ मजबूत तो औंधे मुंह गिरे सोने-चांदी के भाव:गोल्ड 0.50 तो सिल्वर के 2 फीसदी रेट हुए कम
मुंबई। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को कीमती धातुओं यानी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली, और इसके पीछे का कारण अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों में सकारात्मक बदलाव के चलते डॉलर की मजबूती रही। दिन के कारोबारी सत्र में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 0.50 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 1,54,125 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया, जो दिन का निम्नतम स्तर है। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी करीब 2 प्रतिशत गिरकर 2,35,208 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गई।हालांकि खबर लिखे जाने तक (अपरह्न 2.47 बजे) एमसीएक्स पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला सोना 0.25 प्रतिशत यानी 395 रुपए गिरकर 1,55,500 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, तो वहीं 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी 1.39 प्रतिशत यानी 3,403 रुपए की गिरावट के साथ 2,40,957 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।जनवरी में अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में आई नरमी के चलते डॉलर इंडेक्स 0.10 प्रतिशत बढ़कर 97 पर पहुंच गया। इससे पहले मजबूत रोजगार आंकड़ों से सूचकांक को मजबूती मिली थी, जो अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित मजबूती का संकेत देते हैं। डॉलर मजबूत होने से डॉलर में कीमत तय होने वाले सोने-चांदी अन्य देशों के निवेशकों के लिए महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग पर असर पड़ता है।जनवरी में अमेरिकी सीपीआई में 0.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि दिसंबर में यह 0.3 प्रतिशत बढ़ा था। सालाना आधार पर महंगाई दर जनवरी में 2.4 प्रतिशत रही, जो पिछले महीने के 2.7 प्रतिशत से कम है। मजबूत रोजगार आंकड़ों और संतुलित महंगाई दर से अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने का अवसर मिल सकता है।विश्लेषकों के अनुसार, सोने को 1,54,000 और 1,53,150 रुपए के स्तर पर सपोर्ट मिल सकता है, जबकि 1,56,800 और 1,58,200 रुपए पर रेजिस्टेंस है। वहीं चांदी के लिए 2,38,800 और 2,32,000 रुपए सपोर्ट स्तर हैं, जबकि 2,49,100 और 2,55,000 रुपए पर रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है।

जनवरी में आम जनता की जेब हुई ढीली:खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी से 1.81 फीसदी रही थोक महंगाई दर
नई दिल्ली। भारत में थोक मूल्य सूचकांत आधारित महंगाई दर जनवरी में सालाना आधार पर 1.81 फीसदी रही है। यह जानकारी सोमवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दी है। उन्होंने बताया कि जनवरी में महंगाई बढ़ने की वजह बेसिक मेटल की कीमतों में इजाफा होना और मैन्युफैक्चरिंग एवं गैर-खाद्य उत्पादों, खाद्य वस्तुओं और टेक्सटाइल की कीमतों में बढ़ोतरी होना है।खाद्य सूचकांक, जिसमें प्राथमिक वस्तुओं के समूह से श्खाद्य पदार्थश् और विनिर्मित उत्पादों के समूह से श्खाद्य उत्पादश् शामिल हैं, दिसंबर 2025 में 196.0 से घटकर जनवरी 2026 में 194.2 हो गया है। थोक महंगाई दर जनवरी में पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में बढ़कर 1.41 प्रतिशत हो गई।डब्ल्यूपीआई में विनिर्माण समूह का भार 64.23 प्रतिशत है, और इस सूचकांक में महीने के दौरान 1.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 22 विनिर्मित उत्पादों में से 19 समूहों की कीमतों में वृद्धि देखी गई, जबकि तीन समूहों की कीमतों में कमी दर्ज की गई। जिन महत्वपूर्ण समूहों की कीमतों में महीने-दर-महीने वृद्धि हुई, उनमें बेसिक मेटल का निर्माण, खाद्य उत्पाद, वस्त्र, अन्य विनिर्माण और विद्युत उपकरण शामिल हैं।जिन वस्तुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, उनमें दवाइयों का निर्माण, औषधीय रसायन और वनस्पति उत्पाद, मशीनरी और उपकरण एवं फर्नीचर शामिल हैं, जिनकी कीमतें जनवरी 2026 में दिसंबर 2025 की तुलना में कम हुई हैं।भारत में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई दर जनवरी 2026 में सालाना आधार पर 2.75 प्रतिशत रही थी। बेस ईयर में बदलाव के बाद खुदरा महंगाई दर के यह पहले आंकड़े हैं। सरकार की ओर से बेस ईयर को बदलकर 2024 कर दिया गया है, जो कि पहले 2012 था। दिसंबर में खुदरा महंगाई दर 1.33 प्रतिशत थी। हालांकि, यह पुराने बेस ईयर 2012 पर आधारित थी।सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 2.73 प्रतिशत रही है और शहरी इलाकों में 2.77 प्रतिशत थी। वहीं, खाद्य महंगाई दर जनवरी में 2.13 प्रतिशत रही है। यह ग्रामीण इलाकों में 1.96 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 2.44 प्रतिशत रही है।

एचएएल का शानदार वित्तीय प्रदर्शन:तीसरी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 30 फीसदी बढ़ा, 1,866.66 करोड़ का हुआ शुद्ध मुनाफा
मुंबई। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (दिसंबर तिमाही) में शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया है। रक्षा क्षेत्र की इस सरकारी कंपनी का शुद्ध मुनाफा पिछले साल की तुलना में 29.6 प्रतिशत बढ़ गया है। कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि इस तिमाही में उसका शुद्ध मुनाफा (पीएटी) 1,866.66 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 1,439.79 करोड़ रुपए था।इस तिमाही में कंपनी की आय (रेवेन्यू) भी बढ़ी है। एचएएल की संचालन से आय 10.65 प्रतिशत बढ़कर 7,698.80 करोड़ रुपए हो गई, जो पिछले साल इसी तिमाही में 6,957.31 करोड़ रुपए थी। इस दौरान कंपनी की कुल आय बढ़कर 8,612.60 करोड़ रुपए हो गई जो पिछले साल इसी तिमाही में 7,588.71 करोड़ रुपए थी।तिमाही नतीजों के साथ ही एचएएल के निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पहला अंतरिम लाभांश (डिविडेंड) घोषित किया है। कंपनी ने प्रत्येक 5 रुपए फेस वैल्यू वाले शेयर पर 35 रुपए का डिविडेंड देने की घोषणा की है। कंपनी ने 18 फरवरी को रिकॉर्ड डेट तय की है। इस तारीख तक जिन निवेशकों के पास कंपनी के शेयर होंगे, उन्हें यह डिविडेंड मिलेगा। एचएएल ने कहा है कि यह राशि 14 मार्च 2026 तक पात्र निवेशकों को दे दी जाएगी।एचएएल पिछले कई वर्षों से नियमित रूप से डिविडेंड देती आ रही है। 28 मार्च 2019 से अब तक कंपनी 14 बार डिविडेंड घोषित कर चुकी है। पिछले एक साल में कंपनी ने कुल 40 रुपए प्रति शेयर का डिविडेंड दिया है, जिससे डिविडेंड यील्ड 0.98 प्रतिशत रही है। इससे पहले कंपनी ने 15 रुपए प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया था, जिसकी रिकॉर्ड डेट 21 अगस्त 2025 थी। तो वहीं इससे पहले कंपनी ने अपने निवेशकों को 25 रुपए का डिविडेंड दिया था, जिसके लिए रिकॉर्ड डेट 18 फरवरी 2025 थी।बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, एचएएल का शेयर प्राइस 4,161 रुपए है। स्टॉक का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 5,166 रुपए और 52 हफ्ते का निम्नतम स्तर 3,045.95 रुपए है। वहीं कंपनी का मार्केट कैप 2,78,812.30 करोड़ रुपए है (2.21 बजे, 12 फरवरी 2026 तक)।

कमोडिटी बाजार में हलचल:चांदी 2.60 लाख के पार, सोने ने भी पकड़ी रफ्तार
मुंबई। सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को कमोडिटी बाजार में जोरदार हलचल देखने को मिल रही है और कीमती धातुओं सोने और चांदी की कीमतों में मजबूत रिकवरी देखने को मिल रही है। एमसीएक्स पर सुबह से ही दोनों कीमती धातुओं में तेजी का माहौल है। खासतौर पर चांदी, जो मंगलवार को करीब 10,000 रुपए तक टूट गई थी, आज फिर तेजी की राह पर लौटती नजर आ रही है। बुधवार को शुरुआती कारोबार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना करीब एक प्रतिशत बढ़कर 1,58,436 रुपए प्रति 10 ग्राम के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी करीब 3 प्रतिशत चढ़कर 2,62,892 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के उच्च स्तर पर पहुंच गई।हालांकि खबर लिखे जाने तक (दोपहर करीब 12.56 बजे) एमसीएक्स पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला सोना करीब 1 प्रतिशत यानी 1,554 रुपए की तेजी के साथ 1,58,357 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, तो वहीं 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी 3.72 प्रतिशत यानी 9,401 रुपए की उछाल के साथ 2,61,949 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी।हालांकि, अगर रिकॉर्ड स्तर से तुलना करें तो अब भी दोनों धातुएं अपने ऑल टाइम हाई से काफी नीचे हैं। 29 जनवरी को सोने ने 1,83,000 रुपए और चांदी ने 4,20,000 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ था। अमेरिका में उपभोक्ता खर्च के कमजोर आंकड़े आने के बाद उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिस कारण सोने-चांदी की कीमतों में तेजी आई।शुरुआती कारोबार में डॉलर इंडेक्स भी थोड़ा कमजोर होकर 96.80 से घटकर 96.59 पर आ गया। डॉलर के कमजोर होने से विदेशी निवेशकों के लिए सोना-चांदी थोड़ा सस्ता हो जाता है, जिससे मांग बढ़ती है। इससे भी कीमतों को सहारा मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी की कीमतों में बढ़त देखी गई। अमेरिका में दिसंबर महीने के रिटेल सेल्स के आंकड़े उम्मीद से कम रहे, जिससे यह संकेत मिला कि लोगों का खर्च कम हो रहा है और अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख कायम:तेजी तेजी के साथ खुले सेंसेक्स- निफ्टी, आटो सेक्टर ने लगाया जोर
मुंबई। सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क तेजी के साथ हरे निशान में खुले। इस दौरान सेंसेक्स अपने पिछले बंद (84,273.92) से 65.23 अंक उछलकर 84,339.15 पर खुला, तो वहीं निफ्टी अपने पिछले बंद (25,935.15) से 62.3 अंक की बढ़त के साथ 25,997.45 पर खुला। यह इस सप्ताह का लगातार तीसरा सत्र है जब बाजार ने कारोबार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की। खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 9.25 बजे) 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 102 अंक या 0.1 प्रतिशत बढ़कर 84,374 पर था, तो वहीं एनएसई निफ्टी 44 अंकों की बढ़त के साथ 25,979 पर ट्रेड कर रहा था। इस दौरान, व्यापक सूचकांकों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। बीएसई मिडकैप सूचकांक में 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि स्मॉलकैप सूचकांक में 0.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।सेक्टर वार देखें तो, निफ्टी ऑटो में सबसे ज्यादा 1.34 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। वहीं निफ्टी एफएमसीजी में 0.18 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी आईटी में 0.45 प्रतिशत तो निफ्टी बैंक में 0.28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।सेंसेक्स पैक में महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाइटन, मारुति सुजुकी, टाटा स्टील, एसबीआई और सन फार्मा के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई। तो वहीं एचसीएल टेक, ट्रेंट, टीसीएस, भारती एयरटेल, आईटीसी और लार्सन एंड टुब्रो के शेयर टॉप लूजर्स में शामिल रहे।चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने बताया कि निफ्टी अपने प्रमुख शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज के ऊपर बना हुआ है और 25,800-25,900 के सपोर्ट जोन के ऊपर मजबूती से टिके रहने में सफल रहा है। ऊपर की ओर 26,000 का स्तर इमीडिएट रेजिस्टेंस है। अगर निफ्टी 26,000 के ऊपर मजबूती से निकलता है, तो शॉर्ट कवरिंग बढ़ सकती है और बाजार में मौजूदा रिकवरी और आगे बढ़ सकती है। नीचे की ओर 25,800 पहला अहम सपोर्ट है, उसके बाद 25,700 का स्तर महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल बाजार की संरचना सकारात्मक है, लेकिन रेजिस्टेंस के पास कुछ समय के लिए कंसोलिडेशन हो सकता है।

न लोन महंगे होंगे और न ही ईएमआई पर पड़ेगा असर:आरबीआई गवर्नर ने एमपीसी की बैठक में लिए गए फैसलों पर दिया अपडेट
नई दिल्ली। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को को मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग में लिए फैसलों की जानकारी शेयर कर दी है। आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। इसे 5.25 फीसदी पर यथावत रखा गया है। ऐसे में न लोन महंगे होंगे और न ही ईएमआई पर कोई असर पड़ेगा। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मॉनिटरी पॉलिसी की बैठक में रेपो रेट को नहीं बदलने का फैसला किया हैबता दें कि केंद्रीय बजट 2026 और हाल ही में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद यह पहली नीतिगत समीक्षा है, जिस पर दलाल स्ट्रीट और आर्थिक जगत की निगाहें टिकी थी। आरबीआई ने इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे यथास्थिति बनाए रखा है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि जहां ग्लोबल लेवल पर अनिश्चितता फैली हुई है, वहीं भारत में महंगाई पूरी तरह से कंट्रोल है। महंगाई दर आरबीआई के सीमा से नीचे बना हुआ है। महंगाई दर 4 फीसदी के आसपास बना हुआ है, जिसका मतलब है कि हमारी इंडस्ट्री और देश पर महंगाई का ज्यादा भार नहीं है।आरबीआई गवर्नर ने जोर देकर कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और घरेलू मुद्रास्फीति व विकास का परिदृश्य सकारात्मक है। गवर्नर ने यह भी साफ किया कि भविष्य में मौद्रिक नीति संशोधित शृंखला पर आधारित नए मुद्रास्फीति आंकड़ों से निर्देशित होगी। इससे पहले साल 2025 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने उदार रुख अपनाते हुए रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की बड़ी कटौती की थी। दिसंबर 2025 में हुई साल की अंतिम मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट और घटा दिया गया, जिससे यह 5.5% से घटकर 5.25% पर आ गया था। 2026 की पहली एमपीसी के बाद मांग व खपत पर गवर्नर क्या बोले?अर्थव्यवस्था के चालकों पर प्रकाश डालते हुए गवर्नर ने कहा कि कॉरपोरेट प्रदर्शन में सुधार और अनौपचारिक क्षेत्र में निरंतर गति से विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। मांग के मोर्चे पर, ग्रामीण मांग स्थिर बनी हुई है, जबकि शहरी खपत में और वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके अलावा, गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता और संभावित भारत-अमेरिका व्यापार सौदा निर्यात की गति को मजबूत समर्थन प्रदान करेंगे।आर्थिक अनुमानों पर क्या बोले गवर्नर?आरबीआई गवर्नर ने भविष्य के आर्थिक परिदृश्य पर भरोसा जताते हुए अगले वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के लिए विकास दर के अनुमान को संशोधित कर बढ़ा दिया है, जिसके क्रमशः 6.9 फीसदी और 7 फीसदी रहने की उम्मीद है। महंगाई के मोर्चे पर, चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति 2.1 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इसके 4 फीसदी और दूसरी तिमाही में 4.2 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है। वैश्विक हालात के बारे में बोलते हुए गवर्नर ने कहा कि जनवरी के अंत तक विदेशी मुद्रा भंडार 723.8 अरब डॉलर के बहुत ही स्वस्थ स्तर पर है और चालू वित्त वर्ष में चालू खाता घाटा भी श्मध्यमश् रहने की उम्मीद है।

सराफा बाजार में उथल-पुथल का दौर:14000 फिर गिरे चांदी के भाव, गोल्ड के दाम भी गिरे
मुंबई। बीते एक सप्ताह से सर्राफा बाजार में उथल-पुथल का दौर जारी है। रिकार्ड स्तर को छूने के बाद सोने-चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसा ही शुक्रवार को भी देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी मार्केट में चांदी 14 हजार रुपये टूटकर 2.27 लाख रुपये पर आ गया। वहीं गोल्ड करीब 2000 रुपये टूटकर 1.49 लाख रुपये पहुंच गया है। सोने और चांदी में गिरावट की बड़ी वजह ग्लोबल लेवल पर आई भारी गिरावट है। अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर चांदी गुरुवार को 20 फीसदी तक टूट गया, जिसका असर शुक्रवार को एमसीएक्स पर दिखाई दे रहा है। इससे पहले गुरुवार को चांदी 30,300 रुपये सस्ती होकर 2.68 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। वहीं सोना 4,500 रुपये की गिरावट के साथ 1.6 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।अंतरराष्ट्रीय बाजारों में क्या रहा भाव?अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के करीब दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने और अमेरिका-चीन व्यापार तनाव में नरमी के संकेतों के बीच सोने-चांदी की कीमतों में गुरुवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। मजबूत डॉलर के कारण अन्य मुद्राओं में लेन-देन करने वाले निवेशकों के लिए सोना महंगा हो गया, जिससे मांग पर असर पड़ा।स्पॉट गोल्ड की कीमत 2.5% गिरकर 4,838.81 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जो सत्र की शुरुआत में बने करीब एक सप्ताह के उच्च स्तर से फिसल गई। अप्रैल डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 1.9ः टूटकर 4,855.60 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुए। चांदी में गिरावट और भी तीखी रही। स्पॉट सिल्वर की कीमत 14.9% लुढ़ककर 74.94 डॉलर प्रति औंस रह गई। गौरतलब है कि बीते सप्ताह ही चांदी ने 121.64 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड उच्च स्तर छुआ था।

भारतीय विदेश मंत्री ने अमेरिकी दौरे को बताया प्रोडक्टिव-सकारात्मक:शेयर की ऐतिहासिक व्यापार समझौते की पूरी डिटेल
वॉशिंगटन। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर तीन दिवसीय दौरे पर 2 से 4 फरवरी तक अमेरिका में थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो से भी मुलाकात की। जयशंकर ने अमेरिकी दौरे को प्रोडक्टिव और सकारात्मक बताया। उन्होंने ऐतिहासिक व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते संबंध में मजबूत रफ्तार साफ दिख रही है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीरें साझा कर ईएएम एस. जयशंकर ने लिखा, अमेरिका का एक प्रोडक्टिव और सकारात्मक दौरा खत्म हुआ। सेक्रेटरी रुबियो को उनकी अच्छी मेहमाननवाजी के लिए धन्यवाद। ऐतिहासिक भारत-अमेरिका व्यापार समझौता डिटेलिंग के आखिरी स्टेज में है जो बहुत जल्द पूरी हो जाएगी। यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों में एक नया दौर शुरू करता है, जिसमें संबंधों के लिए बहुत सारी संभावनाएं हैं।उन्होंने कहा कि हमारा जरूरी खनिज सहयोग भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में रणनीतिक मुद्दों, रक्षा और ऊर्जा पर बातचीत की उम्मीद है। कुल मिलाकर एक मजबूत मोमेंटम दिख रहा है। इस अहम दौरे में विदेश मंत्री ने अमेरिकी सरकार के सीनियर सदस्यों के साथ मीटिंग भी की। इसमें अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो और वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट के साथ अलग-अलग मीटिंग शामिल थीं। इस दौरान उन्होंने भारत-अमेरिका रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी पर बड़े पैमाने पर चर्चा की।उन्होंने कहा कि रुबियो के साथ बातचीत में भारत-अमेरिका संबंध के कई अहम पहलुओं पर बात हुई। ईएएम जयशंकर ने कहा, भारत-यूएस रणनीतिक साझेदारी के जिन पहलुओं पर बात हुई, उनमें व्यापार, ऊर्जा, न्यूक्लियर, रक्षा, जरूरी खनिज और तकनीक शामिल थे। विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष फॉलो-अप कामों पर तेजी से आगे बढ़ने पर सहमत हुए। हमारे साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरीकों की जल्द मीटिंग पर सहमति हुई।अमेरिकी विभाग की ओर से साझा जानकारी के अनुसार विदेश मंत्री जयशंकर और रुबियो ने जरूरी मिनरल्स की खोज, माइनिंग और प्रोसेसिंग पर द्विपक्षीय सहयोग को औपचारिक बनाने पर चर्चा की। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जो भारत-अमेरिका आर्थिक और रणनीतिक संबंध का एक अहम हिस्सा बनकर उभरा है। बुधवार को हुई यह मीटिंग अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के व्यापार समझौते की घोषणा के एक दिन बाद हुई, जिसका मकसद दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच रुकावटों को कम करना और मार्केट एक्सेस को बढ़ाना है।

सर्राफा बाजार में मुनाफा वसूली :चांदी की चमक फिर पड़ी फीकी, 3000 सोना भी लुढ़का
मुंबई। बीते कुछ दिनों से कीमती धातुओं की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। गुरुवार को भी ऐसा ही देखने को मिला। एक ओर जहां आसमान छू रही चांदी 25000 रुपए टूटकर 2,40,125 रुपये प्रति किलो पर आ गई। वहीं सोना 3 हजार लुढ़कर 1.50 लाख पर पहुंच गया है। सर्राफा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन यानी 4 फरवरी को तेज उछाल आया था। चांदी करीब 2.98 लाख रुपये प्रति किलो और सोना 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंचा। सर्राफा कारोबारियों के अनुसार चांदी की कीमत 14,300 रुपये उछलकर 2,98,300 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में यह 2,84,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।वहीं 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 7,400 रुपये चढ़कर 1,65,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंचा। एक दिन पहले इसका बंद भाव 1,57,700 रुपये प्रति 10 ग्राम था। दोनों धातुओं में यह उछाल टैक्स सहित कीमतों में दर्ज किया गया।इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार, आज सर्राफा बाजार में चांदी 30,230 रुपए गिरकर 2,52,232 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई है। वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 3,613 रुपए कम होकर 1,53,012 रुपए पर आ गया है। मुनाफा वसूली के कारण सोने-चांदी की कीमत में गिरावट है।अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी सोना-चांदी की कीमतेंअंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना और चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के चलते सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग बढ़ने से पीली धातु में जोरदार उछाल आया।स्पॉट गोल्ड 2.8 फीसदी की तेजी के साथ 5,076.01 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले सोने में 5.9 फीसदी की छलांग लगी थी, जो नवंबर 2008 के बाद एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त रही। पिछले गुरुवार को सोना रिकॉर्ड ऊंचाई 5,594.82 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचा था। वहीं, अप्रैल डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 3.3 फीसदी चढ़कर 5,097.20 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करते दिखे।चांदी की कीमतों में भी तेज उतार-चढ़ाव के बीच मजबूती आई। स्पॉट सिल्वर 5ः बढ़कर 89.38 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इससे पहले गुरुवार को चांदी 121.64 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक गई थी, लेकिन शुक्रवार को एक ही सत्र में 27 फीसदी की रिकॉर्ड गिरावट के बाद सोमवार को यह एक महीने के निचले स्तर 71.33 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गई थी।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील से भारतीय बाजार में लौटी हरियाली:इडियन करेंसी में आया जबरदस्त उछाल, डाॅलर के मुकाबले पहुंचा 90.39 पर
मुंबई। भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील होने के बाद भारतीय शेयर बाजार झूम उठा है। चैतरफा हरियाली दिखाई दे रही है। भारतीय रुपए में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। मंगलवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डाॅलर के मुकाबले 112 पैसे बढ़कर 90.39 पर खुला। जबकि सोमवार को यह 91.51 पर बंद हुआ था। ऐसे में आज भारतीय रुपया 1 प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुआ। फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि 18 फीसदी टैरिफ ने कहानी बदल दी है, जिससे भारत की सापेक्ष स्थिति बेहतर हुई है और विदेशी संस्थागत निवेशकों (थ्प्प्) की वापसी की संभावना बढ़ी है। विश्लेषकों ने बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपया पहले और ज्यादा मजबूत हुआ था, लेकिन बाद में यह 90.20 से 91.20 के दायरे में स्थिर हो गया। 92 के ऊपर टिक न पाने के बाद इसमें थोड़ी गिरावट आई, जिसे सामान्य सुधार माना जा रहा है। बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि रुपए की मौजूदा गिरावट अस्थायी है और लंबे समय में इसका रुझान अभी भी मजबूत बना हुआ है। अगर रुपया 90.50-90.80 के नीचे जाता है, तो यह 90 या 89.80 तक भी पहुंच सकता है।आरबीआई के रुख पर रहेगी नजरफिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली के मुताबिक, करीब नौ महीने की देरी के बाद घोषित यह व्यापार समझौता,जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषित किया और प्रधानमंत्री मोदी ने समर्थन दिया भारत को बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की तुलना में निर्यात में बढ़त देता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से बिकवाली करने वाले एफआईआई अब भारतीय शेयरों में खरीदारी कर सकते हैं। हालांकि, आगे की दिशा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के रुख पर नजर जरूरी होगी।पीएम मोदी से बात करने के बाद ट्रंप ने फैसलाबता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को बताया कि भारत के साथ ट्रेड डील हुई है। इसके तहत भारतीय सामानों पर लगने वाला टैक्स (टैरिफ) 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद लिया गया। इस समझौते में यह भी कहा गया है कि भारत रूस से तेल की खरीद कम करेगा और अमेरिका व संभवतः वेनेजुएला से ज्यादा तेल आयात करेगा।ट्रेड डील के बाद कम हुई अनिश्चितता विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रेड डील के बाद अनिश्चितता कम हुई है, जिससे विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार और बॉन्ड में निवेश कर सकते हैं। इससे रुपए की मांग और बढ़ सकती है। हालांकि, आने वाले दिनों में आरबीआई का रुख भी काफी अहम रहेगा। भारत-अमेरिका ट्रेड डील, भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) एफटीए और विकास पर केंद्रित बजट, इन तीनों के असर से बाजार का माहौल बेहतर होने की उम्मीद है। इससे विदेशी पूंजी तेजी से आ सकती है और भारत के भुगतान संतुलन (बीओपी) की स्थिति भी सुधर सकती है।

इंडिया-यूएस ट्रेड डील फाइनल, झूमा भारतीय शेयर बाजार:सेंसेक्स बना राॅकेट, निफ्टी में भी आया जबरदस्त उछाल
मुंबई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात भारत से व्यापार समझौते का ऐलान कर दिया है। इतना ही नहीं उन्होंने भारत पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया। ट्रंप के इस ऐलान के बाद भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद से करीब 3,657 अंक उछलकर 85,323.20 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी अपने पिछले क्लोजिंग से 1,219.65 अंकों की बढ़त के साथ 26,308.05 पर ओपन हुआ। खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 9.31 बजे) 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 2254 अंकों यानी 2.76 प्रतिशत की तेजी के साथ 83,920.51 पर था, तो वहीं एनएसई निफ्टी 691.30 (2.76 प्रतिशत) अंकों की उछाल के साथ 83,920.51 पर था। इस दौरान निफ्टी के सभी इंडेक्स हरे निशान में ट्रेड करते हुए नजर आए।सेंसेक्स ने छुआ अपने हाई स्तर कोकारोबार के दौरान जहां सेंसेक्स ने 85,871.73 का हाई स्तर छुआ, वहीं निफ्टी ने 26,341.20 का स्तर छुआ। व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप दोनों में 4 प्रतिशत की शानदार तेजी देखने को मिली। वहीं विभिन्न सेक्टर्स में निफ्टी ऑटो, आईटी, मेटल, बैंक, पीएसयू बैंक और फार्मा में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल दर्ज की गई।सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 में दिखी तेजीइस दौरान सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 में तेजी देखी गई, जिनमें अदाणी पोर्ट्स में सबसे ज्यादा 6.89 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। इसके बाद बजाज फाइनेंस (4.90 प्रतिशत), इंडिगो (4.66 प्रतिशत), बजाज फिनसर्व (4.39 प्रतिशत), इटरनल (4.16 प्रतिशत), एल एंड टी (3.70 प्रतिशत) और सन फार्मा (3.63 प्रतिशत) टॉप गेनर्स में शामिल रहे। सिर्फ आईटीसी के शेयरों में गिरावट देखी गई।

शेयर बाजार में फिर लौटी रौकन:943 अंक उछलकर बंद हुआ सेंसेक्स, निफ्टी ने भी बनाई बढ़त
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में बड़ी तेजी के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 943.52 अंक या 1.17 प्रतिशत की तेजी के साथ 81,666.46 और निफ्टी 262.95 अंक या 1.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,088.40 पर था। बाजार में तेजी का नेतृत्व इन्फ्रा और ऑटो शेयरों ने किया। निफ्टी इन्फ्रा (2.26 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (2.13 प्रतिशत), निफ्टी पीएसई (2.04 प्रतिशत), निफ्टी पीएसई (2.04 प्रतिशत), निफ्टी ऑयलएंडगैस (2.04 प्रतिशत), निफ्टी मेटल (1.88 प्रतिशत) और निफ्टी कमोडिटीज (1.87 प्रतिशत) की तेजी के साथ बंद हुआ।केवल निफ्टी आईटी (0.47 प्रतिशत) और निफ्टी हेल्थकेयर (0.08 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बड़ी तेजी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 546.80 अंक या 0.96 प्रतिशत की तेजी के साथ 57,667.60 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 105.20 अंक या 0.64 प्रतिशत की बढ़त के साथ 16,523.35 पर था।सेंसेक्स पैक में पावर ग्रिड, अदाणी पोर्ट्स, बीईएल, एमएंडएम, एलएंडटी, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, आईटीसी, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति सुजुकी गेनर्स थे। एक्सिस बैंक, इन्फोसिस, टीसीएस, ट्रेंट, टाइटन और कोटक महिंद्रा बैंक लूजर्स थे।एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक दे ने कहा कि बड़ी गिरावट के बाद निफ्टी में मजबूत उछाल देखने को मिला है। हालांकि, व्यापक ट्रेंड अभी भी कमजोर बना हुआ है। इंडेक्स अभी भी 200 डीएमए से नीचे है। उन्होंने आगे कहा कि किसी भी तेजी को लीवरेज पॉजिशन को कम करने और शॉर्ट पॉजिशन बनाने के लिए करना चाहिए। निफ्टी के लिए रुकावट का स्तर 25,200 है और सपोर्ट 24,900 के आसपास है।मिले-जुले वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला था। इस दौरान, बीएसई सेंसेक्स 167.26 अंक या 0.21 प्रतिशत गिरकर 80,555.68 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी 28.95 अंक या 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,796.50 पर खुला। हालांकि कुछ ही मिनटों बाद बाजार हरे निशान में आ गया।

शेयर मार्केट को रास नहीं आ रहा निर्मला का बजट:आज भी बदली-बदली नजर आ रही सेंसेक्स-निफ्टी की चाल
मुंबई। शेयर बाजार में बीते कारोबारी दिन रविवार को भारी गिरावट देखने को मिली थी। यही नहीं सेंसेक्स-निफ्टी देखते ही देखते क्रैश हो गए थे। शेयर बाजार में बजट का असर सोमवार को भी जारी रहा। सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स की चाल बदली-बदली नजर आई है, कभी ग्रीन, तो कभी रेड जोन में ये कारोबार करते दिखे।बीएसई सेंसेक्स 167.26 अंक या 0.21 प्रतिशत गिरकर 80,555.68 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी50 28.95 अंक या 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,796.50 पर खुला। हालांकि कुछ ही मिनटों बाद बाजार हरे निशान में आ गया। खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 9.34 बजे) 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 331.67 अंकों यानी 0.41 प्रतिशत की तेजी के साथ 81,054.61 पर था, तो वहीं एनएसई निफ्टी 72.80 अंकों यानी 0.29 प्रतिशत की उछाल के साथ 24,898.25 पर था।व्यापक बाजार की बात करें तो शुरुआती कारोबार में निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.30 प्रतिशत तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.41 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। वहीं विभिन्न सेक्टर्स में निफ्टी मेटल और निफ्टी ऑयल एंड गैस को छोड़कर अन्य सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में थे।सेंसेक्स पैक में शुरुआती कारोबार के दौरान एनटीपीसी, आईटीसी, बजाज फिनसर्व, टाइटन और ट्रेंट टॉप लूजर्स वाले शेयरों में शामिल थे, जिनमें 1.79 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। जबकि लार्सन एंड टुब्रो, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स और इंडिगो 2.5 प्रतिशत तक की बढ़त के साथ टॉप गेनर्स रहे।रविवार, 1 फरवरी को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा और अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफ एंड ओ) पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में बढ़ोतरी करने की घोषणा की और फ्यूचर्स पर एसटीटी बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया। तो वहीं, ऑप्शंस प्रीमियम पर एसटीटी को 0.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया।इस बड़ी घोषणा के बाद घरेलू बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली और प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी धराशायी हो गए। कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 79,899.42 के निचले स्तर तक पहुंच गया था और करीब 3,000 अंकों की इंट्राडे गिरावट देखने को मिली। वहीं, निफ्टी50 भी फिसलकर 24,572 तक आ गया।चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने बताया कि पिछले कारोबारी सत्र में निफ्टी ने एक मजबूत बेयरिश कैंडल बनाई है और यह 200-डे ईएमए से नीचे बंद हुआ है, जो ट्रेंड के कमजोर होने का संकेत देता है। फिलहाल 24,950-25,000 के बीच मजबूत रेजिस्टेंस है, जबकि 24,650-24,700 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है। आरएसआई घटकर 31 पर आ गया है, जो ओवरसोल्ड स्थिति दिखाता है। वहीं, इंडिया वीआईएक्स में 10.73 प्रतिशत की तेजी आई और यह 15.09 पर पहुंच गया, जिससे बाजार में बढ़ी हुई घबराहट साफ दिखती है।एक्सपर्ट ने आगे कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और बढ़ती वोलैटिलिटी को देखते हुए निवेशकों और ट्रेडर्स को फिलहाल चुनिंदा और अनुशासित रणनीति अपनाने की सलाह दी जाती है। गिरावट के दौरान मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही नजर रखें। निफ्टी में 25,000 के ऊपर मजबूत और टिकाऊ ब्रेकआउट आने के बाद ही नई लॉन्ग पोजिशन बनाना बेहतर रहेगा, क्योंकि यही स्तर बाजार की धारणा में वास्तविक सुधार का संकेत देगा।

चांदी ने खोई चमक, सोने के भाव भी पड़े फीके:सिल्वर 23,900 तो गोल्ड 5,700 रुपए फिर हुआ सस्ता
मुंबई। सर्राफा बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। बजट में सोना और चांदी को लेकर कोई बड़ी या सीधी घोषणा नहीं की गई, इसके बावजूद कमोडिटी मार्केट में कीमती धातुओं पर दबाव साफ दिखा। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन, सोमवार को एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट देखी गई। चांदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से करीब 1.79 लाख तक टूट चुकी है, जबकि सोना भी फिसलकर करीब 1.37 लाख रुपए के स्तर पर आ गया है। बीते तीन दिनों से सोने-चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।2,41 लाख रुपए पर आई चांदी फिलहाल खबर लिखे जाने तक (सुबह 11.22 बजे) एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 5,719 रुपए यानी 4.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,36,498 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। तो वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 23,908 रुपए सस्ती होकर 2,41,744 लाख रुपए प्रति किलो पर आ गई, जिसमें करीब 9 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की मुनाफावसूली और कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते सर्राफा बाजार में दबाव बना हुआ है।4 फीसदी तक टूटा गोल्डअंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो सोमवार की शुरुआती ट्रेडिंग में स्पॉट गोल्ड करीब 4 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि चांदी में भी लगभग इतनी ही गिरावट देखने को मिली। हालांकि, पहले 12 प्रतिशत तक गिरने के बाद चांदी 80 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर टिकने में सफल रही। इससे पहले सत्र में चांदी ने पिछले 10 वर्षों की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट दर्ज की थी, जिससे बाजार में हलचल तेज हो गई।गिरावट के पीछे कई अहम वजहेंगिरावट के पीछे कई अहम वजहें मानी जा रही हैं। हाल ही में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं, जिसने बड़े और अनुभवी निवेशकों को भी हैरान कर दिया था। जनवरी में यह तेजी और बढ़ गई थी, जब वैश्विक तनाव, कमजोर होती मुद्राएं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर चिंताओं के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने-चांदी का रुख किया था।अमेरिका भी निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिकाहालिया गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से जुड़ी एक खबर को माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फेड चेयर के रूप में केविन वॉर्श को नामित करने की योजना बना रहे हैं। इस खबर के बाद अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जिससे कमजोर डॉलर की उम्मीद कर रहे ट्रेडर्स की धारणा बदल गई और सोने-चांदी में तेज बिकवाली देखने को मिली।

कीमती धातुओं के भाव जमीन पर:चांदी की कीमत में आई भारी गिरावट, सोना भी लुढ़का
नई दिल्ली। सोने और चांदी में शुक्रवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट देखी जा रही है और कीमती घातुओं के दाम 10 प्रतिशत तक कम हो गए हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दोपहर 2ः16 पर 2 अप्रैल 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में सोने की कीमत 4.70 प्रतिशत कम होकर 1,75,307 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है।सोने के साथ चांदी में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 5 मार्च 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में चांदी की कीमत 10.77 प्रतिशत कम होकर 3,56,831 रुपए प्रति किलो हो गई है।वायदा के साथ हाजिर बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी देखने को मिल रही है।इंडिया बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) की ओर से दोपहर 12 बजे जारी की गई कीमतों के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 6,865 रुपए कम होकर 1,68,475 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,75,340 रुपए प्रति 10 ग्राम था। चांदी की कीमत 22,825 रुपए कम होकर 3,57,163 रुपए प्रति किलो हो गई है, जो कि पहले 3,79,988 रुपए प्रति किलो थी।सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट की वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमती धातुओं में गिरावट होना है। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोने की कीमत 4.07 प्रतिशत कम होकर 5,137 डॉलर प्रति औंस और चांदी की कीमत 9.28 प्रतिशत कम होकर 103 डॉलर प्रति औंस हो गई है।जानकार इस बिकवाली को मुनाफावसूली मान रहे हैं। वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ने और अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ के कारण सोने ने बीते एक साल में 80 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया है, जबकि इस दौरान चांदी ने 220 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। हाल ही में आई वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में बताया गया था कि सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के कारण इस साल देश में ज्वेलरी की मांग में गिरावट आ सकती है।

शिखर पर पहुंचे सोने-चांदी के भाव: सिल्वर ने तोड़े सारे रिकार्ड, गोल्ड पहुंचा 1.60 लाख के करीब
मुंबई। अमेरिकी डॉलर की लगातार कमजोरी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के बीच मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। दिन के शुरुआती कारोबार में सोना 2.4 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,59,820 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे हाई स्तर है। हालांकि बाद में मुनाफावसूली के कारण कीमतों में थोड़ी गिरावट आई।वहीं चांदी पिछले सभी रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 3,59,800 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। हालांकि खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 10.47 बजे) एमसीएक्स पर फरवरी कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना 1.45 प्रतिशत या 2,270 रुपए की उछाल के साथ 1,58,307 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं मार्च कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी 4.84 प्रतिशत यानी 16,197 रुपए की तेजी के साथ 3,50,896 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोना और चांदी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए। दुनिया में बढ़ते तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोना-चांदी की ओर बढ़ रहे हैं।अमेरिका में सरकारी कामकाज बंद होने की आशंका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 25 प्रतिशत नए टैरिफ की धमकियों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप ने दक्षिण कोरिया की कारों, लकड़ी और दवाइयों के आयात पर टैरिफ लगाने की बात कही है। साथ ही उन्होंने कनाडा को चेतावनी दी है कि अगर वह चीन से समझौता करता है तो उस पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा।अमेरिका में अप्रैल डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 5,113.70 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर पहुंच गए। इस दौरान डॉलर इंडेक्स 0.1 प्रतिशत कमजोर हुआ, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए सोना सस्ता हो गया। लगातार सुरक्षित निवेश की मांग, केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद और दुनिया भर में नरम मौद्रिक नीतियों की उम्मीद से कीमतों को सहारा मिल रहा है। वहीं कॉमेक्स चांदी 99 डॉलर के स्तर को पार कर गई है और नए रिकॉर्ड बना रही है।इस हफ्ते अमेरिका में फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की दो दिन की बैठक होने वाली है। उम्मीद है कि फिलहाल ब्याज दरें नहीं बदली जाएंगी, लेकिन साल के अंत तक कम से कम दो बार दरों में कटौती की उम्मीद की जा रही है। मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी विशेषज्ञ राहुल कलंत्री ने कहा कि बाजार की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले पर है। राजनीतिक दबाव की चर्चाओं ने सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं में निवेश को और बढ़ा दिया है।विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने को 1,57,050 से 1,55,310 रुपए के बीच सपोर्ट मिल सकता है, जबकि ऊपर की ओर 1,59,850 और 1,62,950 रुपए पर रेजिस्टेंस है। चांदी के लिए 3,38,810 और 3,22,170 रुपए सपोर्ट स्तर हैं, जबकि 3,55,810 और 3,62,470 रुपए पर रेजिस्टेंस मानी जा रही है।एक अन्य विश्लेषक का अनुमान है कि आने वाले सत्रों में सोना 1,65,000 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 3,65,000 रुपए प्रति किलो तक पहुंच सकती है। हाल की रिपोर्ट के अनुसार, चांदी में तेज उछाल के बाद अब ऊंचे स्तरों पर स्थिरता या थोड़ी गिरावट भी देखने को मिल सकती है, क्योंकि निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं।

बाजार की पाठशाला:पीएफ और ईपीएस क्या होते हैं, इनमें क्या है अंतर? रिटायरमेंट के बाद कैसे तय होती है पेंशन, समझें गणित
नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों की आर्थिक सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार उनका प्रोविडेंट फंड (पीएफ) और पेंशन स्कीम (ईपीएस) है। हर महीने सैलरी से कटने वाली रकम भविष्य के लिए जमा होती है, लेकिन अधिकतर कर्मचारी यह नहीं जानते कि यह पैसा किन हिस्सों में जाता है और रिटायरमेंट के बाद उन्हें इससे क्या फायदा मिलता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत ईपीएफ और ईपीएस दो अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं, जिनका उद्देश्य और लाभ भी अलग है। ईपीएफ यानी कर्मचारी भविष्य निधि एक तरह की लॉन्ग टर्म सेविंग स्कीम है, जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान होता है। इसमें जमा रकम पर हर साल ब्याज मिलता है और रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने पर पूरी राशि निकाली जा सकती है। वहीं, ईपीएस यानी कर्मचारी पेंशन योजना का मकसद रिटायरमेंट के बाद हर महीने तय पेंशन देना होता है, ताकि बुढ़ापे में नियमित आमदनी बनी रहे।कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए का 12 प्रतिशत हिस्सा सीधे उसके ईपीएफ खाते में जमा होता है। इसके अलावा नियोक्ता भी 12 प्रतिशत योगदान देता है, लेकिन यह दो भागों में बंटता है। नियोक्ता के योगदान का 8.33 प्रतिशत हिस्सा ईपीएस यानी पेंशन फंड में जाता है, जबकि बाकी 3.67 प्रतिशत ईपीएफ खाते में जमा होता है। सरकार ने पेंशन के लिए अधिकतम वेतन सीमा 15,000 रुपए तय की है, यानी इससे ज्यादा सैलरी होने पर भी पेंशन की गणना इसी सीमा के आधार पर होती है।यह जानना जरूरी है कि पेंशन की राशि आपके ईपीएस खाते में जमा कुल रकम पर निर्भर नहीं करती। ईपीएफओ इसके लिए एक तय फॉमूर्ला लागू करता है। पेंशन की गणना पेंशन योग्य वेतन और पेंशन योग्य सेवा के आधार पर होती है। इसका फॉमूर्ला है: पेंशन योग्य वेतन ़ पेंशन योग्य सेवा रु 70। यही फॉमूर्ला तय करता है कि रिटायरमेंट के बाद आपको हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी।ईपीएस स्कीम का एक बड़ा फायदा फैमिली पेंशन है। अगर किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान या पेंशन शुरू होने के बाद मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को पेंशन मिलती है। ईपीएफओ के नियमों के अनुसार, सदस्य की पत्नी या पति को उसकी पेंशन का 50 प्रतिशत हिस्सा आजीवन दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी सदस्य की पेंशन 7,500 रुपए थी, तो उसके निधन के बाद उसके जीवनसाथी को 3,750 रुपए प्रति माह पेंशन मिलेगी।ईपीएस के तहत परिवार के दो बच्चों को भी पेंशन का लाभ मिलता है। प्रत्येक बच्चे को सदस्य की पेंशन का 25-25 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता है। यह बाल पेंशन 25 वर्ष की उम्र तक मिलती है। अगर बच्चे अनाथ हो जाते हैं, तो यह पेंशन बढ़ाकर 75 प्रतिशत तक कर दी जाती है। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपए से कम न हो।आमतौर पर कर्मचारी को 58 साल की उम्र के बाद पेंशन मिलती है, लेकिन 50 साल की उम्र के बाद अर्ली पेंशन लेने का विकल्प भी मौजूद है। हालांकि, अर्ली पेंशन लेने पर हर साल 4 प्रतिशत की कटौती होती है। वहीं, अगर कोई कर्मचारी 58 साल के बाद भी काम जारी रखता है और पेंशन लेना टालता है, तो उसकी पेंशन में हर साल 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान है।

सोन-चांदी की कीमतों पर नहीं लग रही लगाम:कीमती धातुओं ने बनाया एक और रिकार्ड, गोल्ड में 4%का आया उछाल, 3.30 लाख के पार पहुंची सिल्वर
नई दिल्ली। कीमती धातुओं की भाव आसमान छूते जा रहे हैं। बुधवार को सोने की कीमतों में 4 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल देखने को मिली और यह एक बार फिर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। चांदी ने भी अपने पिछले रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नया उच्चतम स्तर छू लिया। अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार संघर्ष बढ़ने और डॉलर के कमजोर होने की आशंका के चलते निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प यानी सोने-चांदी का रुख कर रहे हैं। बुधवार के कारोबारी सत्र में एमसीएक्स पर गोल्ड फरवरी वायदा 1,58,339 रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, तो वहीं सिल्वर मार्च वायदा 3,35,000 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 11.50 बजे) एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 7,363 रुपए यानी 4.89 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,57,928 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। जबकि, मार्च डिलीवरी वाली चांदी 10,499 रुपए यानी 3.24 प्रतिशत चढ़कर 3,34,171 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई।अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने ने बनाया नया रिकॉर्ड अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने ने नया रिकॉर्ड बनाया। कॉमेक्स पर अमेरिकी सोना 4,849 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमतें 92.5 से 95.7 डॉलर के दायरे में बनी रहीं। कीमतों में यह तेजी उस खबर के बाद आई, जिसमें कहा गया कि अमेरिका फरवरी से यूरोप के आठ देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। साथ ही जून तक इन टैरिफ को 25 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। इसके जवाब में यूरोपीय देश भी अमेरिका के खिलाफ व्यापारिक कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं।चांदी का भविष्य दिख रहा मजबूतविशेषज्ञों का कहना है कि मध्यम और लंबी अवधि में चांदी का भविष्य काफी मजबूत दिख रहा है। सप्लाई की कमी और उद्योगों में बढ़ती मांग के कारण 2026 तक चांदी की कीमत 110 से 120 डॉलर तक जा सकती है। एमसीएक्स पर चांदी के फ्यूचर्स में फिलहाल 3,30,000 से 3,32,000 रुपए का स्तर अहम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में यह कीमत 3,35,000 से 3,50,000 रुपए प्रति किलो तक भी जा सकती है।

कीमती धातुओं ने फिर बनाया नया रिकार्ड:3.20 लाख के करीब पहुंची सिल्वर, गोल्ड की कीमतों भी आया तेज उछाल
मुंबई। बढ़ते वैश्विक तनावों के बीच सोने और चांदी ने मंगलवार के कारोबारी सत्र में एक और नया रिकॉर्ड बना लिया है। एमसीएक्स पर कीमती धातुओं की कीमतें पिछले दिन के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। गोल्ड फरवरी वायदा 1,47,996 रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, तो वहीं सिल्वर मार्च वायदा 3,19,949 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।सोमवार के ट्रेडिंग सेशन में एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना जहां रिकॉर्ड 1,45,500 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था, तो वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 3,01,315 रुपए प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर सिल्वर की कीमत 94.320 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। तो वहीं गोल्ड 4,708.10 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इससे पहले के सत्र में सोने ने 4,689.39 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छुआ था।चांदी की कीमतों में 2.35 का आया उछालखबर लिखे जाने तक एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1.55 प्रतिशत यानी 2,255 रुपए की तेजी के साथ 1,47,894 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, जबकि मार्च डिलीवरी वाली चांदी 7,279 रुपए यानी 2.35 प्रतिशत की उछाल के साथ 3,17,554 रुपए प्रति किलोग्राम पर थी। यह तेजी उस समय आई थी जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड मुद्दे का विरोध करने वाले आठ यूरोपीय देशों पर नया टैरिफ लगाने का ऐलान किया।ट्रंप की यूरोपीय देशों की धमकी के बाद कीमती धातुओं में आ रहा उछालकीमती धातुओं में यह उछाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड मुद्दे का विरोध करने वाले आठ यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी के बाद आई। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी दोहराया कि यूरोपीय देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर टैरिफ लगाने की धमकी पर वे अमल करेंगे।मांग बढ़ने से कीमती धातुओं की कीमतों में आ रही तेजीविशेषज्ञों के अनुसार, कीमती धातुओं में आई यह तेजी सुरक्षित निवेश के साथ-साथ चांदी की औद्योगिक मांग को भी दिखाती है। चांदी का उपयोग सोलर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में बढ़ रहा है। विश्लेषकों ने कहा कि तकनीकी रूप से कॉमेक्स पर चांदी का रुख अभी मजबूत बना हुआ है। 85 से 88 डॉलर प्रति औंस का स्तर आने वाले समय में कीमतों को सहारा दे सकता है।मुनाफा वसूली के कारण कीमतों में आ सकती है गिरावटऑगमोंट की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मुनाफावसूली के कारण कीमतों में थोड़ी गिरावट आ सकती है और चांदी 84 डॉलर प्रति औंस या 2,60,000 रुपए प्रति किलो तक आ सकती है, इसके बाद फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि बहुत तेज बढ़त के बाद निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं, लेकिन उनका मानना है कि आपूर्ति की चिंताओं और औद्योगिक मांग बढ़ने के कारण लंबे समय में सोने और चांदी का रुझान मजबूत बना रहेगा।

बीसीसीएल का शेयर मार्केट में धमाकेदार डेब्यू:आईपीओ की कीमत से लगभग दोगुने पर लिस्टिंग
मुंबई। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के आईपीओ की सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त लिस्टिंग हुई है। कंपनी के शेयर बीएसई पर 45.21 रुपए पर लिस्ट हुए, जो आईपीओ कीमत 23 रुपए से करीब 96.57 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, एनएसई पर शेयर 45 रुपए पर लिस्ट हुआ, यानी करीब 95.65 प्रतिशत का प्रीमियम देखने को मिला। कंपनी का आईपीओ बोली के तीसरे दिन बंद हुआ और इसे कुल 145 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। इस आईपीओ में सबसे ज्यादा मांग बड़े संस्थागत निवेशकों की ओर से देखने को मिली। यह साल 2026 का पहला आईपीओ था, जिसे लॉन्च के पहले ही दिन पूरी तरह सब्सक्राइब कर लिया गया था। यह 2026 का पहला मेन-बोर्ड आईपीओ भी रहा और इसमें सभी तरह के निवेशकों की ओर से रिकॉर्ड तोड़ मांग देखी गई।आईपीओ में कुल 1.17 लाख करोड़ की लगी बोलियां भारत कोकिंग कोल के आईपीओ में कुल 1.17 लाख करोड़ रुपए की बोलियां आईं। इससे यह आईपीओ कुल मिलाकर 146.87 गुना सब्सक्राइब हुआ। यह सब्सक्रिप्शन के हिसाब से दूसरा सबसे ज्यादा सब्सक्राइब होने वाला पीएसयू आईपीओ बना, जबकि कुल बोली राशि के मामले में यह तीसरे नंबर पर रहा।निवेशकों को दिखाई दे रहा भरोूसाशेयर बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि हाल के वर्षों में किसी भी पब्लिक इश्यू में इतनी ज्यादा मांग कम ही देखने को मिली है। इससे निवेशकों का कंपनी और सरकारी कंपनियों (पीएसयू) में निवेश को लेकर भरोसा साफ दिखाई देता है।पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल था आईपीओ यह 1,300 करोड़ रुपए का आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल था, जिसमें प्रमोटर कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड ने अपनी 46.57 करोड़ इक्विटी शेयर बेचे। इस आईपीओ का प्राइस बैंड 21 से 23 रुपए के बीच तय किया गया था। आईपीओ के बुक रनिंग लीड मैनेजर आईडीबीआई कैपिटल मार्केट्स एंड सिक्योरिटीज लिमिटेड और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज लिमिटेड हैं।

ट्रंप की नए टैरिफ धमकी से कीमती धुओं की कीमतों में लगी आग:तीन लाख के पार पहुंची चांदी, सोने ने भी बनाया रिकार्ड
मुंबई। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सोने और चांदी की कीमतें एक बार फिर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। कीमती धातुओं में यह उछाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 8 यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी के बाद आई, जिससे निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना और चांदी खरीदना शुरू कर दिया। सोमवार के ट्रेडिंग सेशन में एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना जहां रिकॉर्ड 1,45,500 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, तो वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी ने 3,01,315 रुपए प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड स्तर छू लिया। वहीं, खबर लिखे जाने तक एमसीएक्स गोल्ड फरवरी वायदा 2,438 रुपए यानी 1.71 प्रतिशत बढ़कर 1,44,955 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, वहीं एमसीएक्स सिल्वर मार्च वायदा 13,062 रुपए यानी 4.54 प्रतिशत की उछाल के साथ 3,00,824 रुपए प्रति किलो हो गई।अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बढ़े सोने के दामअंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत में तेज उछाल देखा गया। स्पॉट गोल्ड 1.6 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 4,700 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया और बाद में 4,670 डॉलर के आसपास स्थिर हुआ। इस दौरान सोने ने अब तक का सबसे ऊंचा स्तर भी छुआ। सोने और चांदी में तेजी तब और बढ़ गई जब राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका तब तक यूरोप के आठ देशों से आने वाले सामान पर ज्यादा टैक्स लगाएगा, जब तक अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने की अनुमति नहीं मिलती। इस बयान के बाद यूरोपीय संघ के देशों ने अमेरिका को मनाने और जरूरत पड़ने पर जवाबी कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी।राजनीतिक अस्थिरता कीमतों को दे रहीं सहारामेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री ने बताया कि दुनिया में राजनीतिक अस्थिरता, अमेरिका की मौद्रिक नीति को लेकर सवाल और लगातार चल रहे भू-राजनीतिक तनाव भी सोने की कीमतों को सहारा दे रहे हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि अमेरिका में ब्याज दरों में आगे कटौती की उम्मीद भी सोने और चांदी की कीमतों को ऊपर बनाए हुए है, खासकर 2025 में अच्छे प्रदर्शन के बाद।विशेषज्ञों ने जताया भरोसाविशेषज्ञों के अनुसार, इस हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसकी वजह डॉलर की कीमतों में अस्थिरता और अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट का टैरिफ पर आने वाला फैसला है। विश्लेषकों ने बताया कि सोने को 1,41,650 से 1,40,310 रुपए के स्तर पर सपोर्ट मिल सकता है, जबकि 1,44,150 से 1,45,670 रुपए के बीच इसमें रेजिस्टेंस आ सकती है। चांदी के लिए 2,85,810 से 2,82,170 रुपए का स्तर सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 2,94,810 से 2,96,470 रुपए पर रेजिस्टेंस है।

दिसंबर में बढ़े मैन्यूफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स के दाम:थोक महंगाई दर पहुंची, 0.83 % पर, खाने-पीने की चींजों में मिली राहत
नई दिल्ली। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, थोक कीमतों पर आधारित भारत की महंगाई दर दिसंबर 2025 में 0.83 प्रतिशत रही। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से विनिर्मित वस्तुओं (मैन्यूफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स) और खनिजों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई है। दिसंबर में खाने-पीने की चीजों की थोक कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, इसलिए खाद्य महंगाई दर शून्य प्रतिशत रही। इसका मतलब है कि पिछले साल की तुलना में खाने की चीजें महंगी नहीं हुईं।थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) में सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाले विनिर्मित वस्तुओं के समूह की हिस्सेदारी 64.23 प्रतिशत है, जिसकी कीमतों में दिसंबर में 0.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस समूह के 22 उत्पादों में से 13 की कीमतें बढ़ीं, 8 उत्पादों की कीमतें घटीं और एक की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ।दिसंबर में इन वस्तुओं की बढ़ीं कीमतेंदिसंबर में जिन वस्तुओं की कीमतें बढ़ीं, उनमें मूल धातुएं, रसायन और रासायनिक उत्पाद, वस्त्र और अन्य गैर-धातु खनिज उत्पाद शामिल हैं। वहीं, रबर और प्लास्टिक उत्पाद, खाद्य उत्पाद, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक सामान, कागज और पेय पदार्थों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।नवंबर में शून्य से नीचे थी थोक महंगाई दरनवंबर 2025 में थोक महंगाई दर शून्य से नीचे (-0.32 प्रतिशत) थी। इससे पहले अक्टूबर में यह -1.21 प्रतिशत रही थी, जबकि पिछले साल नवंबर में यह 2.16 प्रतिशत थी। दिसंबर 2025 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई दर 1.33 प्रतिशत रही, जो नवंबर के 0.71 प्रतिशत से थोड़ी ज्यादा है।लगातार सातवें महीने नकारात्मक बनी रही खाद्य महंगाई दरदिसंबर में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) -2.71 प्रतिशत रही, यानी खाने की चीजों की कीमतें पिछले साल की तुलना में कम रहीं। यह लगातार सातवां महीना है जब खाद्य महंगाई नकारात्मक बनी हुई है, जिससे आम लोगों के घर के बजट को राहत मिली है।देश में महंगाई को लेकर स्थिति काबू मेंकुल मिलाकर, महंगाई को लेकर स्थिति अभी काबू में है। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने पिछले महीने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई का अनुमान 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किया था। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि महंगाई घटने के कारण रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की गई है, जो अब 5.25 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि और महंगाई में गिरावट ने भारत को एक खास सुनहरा समय दिया है, जिसमें विकास और स्थिरता दोनों साथ-साथ चल रहे हैं।


