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न लोन महंगे होंगे और न ही ईएमआई पर पड़ेगा असर:आरबीआई गवर्नर ने एमपीसी की बैठक में लिए गए फैसलों पर दिया अपडेट
नई दिल्ली। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को को मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग में लिए फैसलों की जानकारी शेयर कर दी है। आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। इसे 5.25 फीसदी पर यथावत रखा गया है। ऐसे में न लोन महंगे होंगे और न ही ईएमआई पर कोई असर पड़ेगा। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मॉनिटरी पॉलिसी की बैठक में रेपो रेट को नहीं बदलने का फैसला किया हैबता दें कि केंद्रीय बजट 2026 और हाल ही में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद यह पहली नीतिगत समीक्षा है, जिस पर दलाल स्ट्रीट और आर्थिक जगत की निगाहें टिकी थी। आरबीआई ने इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे यथास्थिति बनाए रखा है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि जहां ग्लोबल लेवल पर अनिश्चितता फैली हुई है, वहीं भारत में महंगाई पूरी तरह से कंट्रोल है। महंगाई दर आरबीआई के सीमा से नीचे बना हुआ है। महंगाई दर 4 फीसदी के आसपास बना हुआ है, जिसका मतलब है कि हमारी इंडस्ट्री और देश पर महंगाई का ज्यादा भार नहीं है।आरबीआई गवर्नर ने जोर देकर कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और घरेलू मुद्रास्फीति व विकास का परिदृश्य सकारात्मक है। गवर्नर ने यह भी साफ किया कि भविष्य में मौद्रिक नीति संशोधित शृंखला पर आधारित नए मुद्रास्फीति आंकड़ों से निर्देशित होगी। इससे पहले साल 2025 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने उदार रुख अपनाते हुए रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की बड़ी कटौती की थी। दिसंबर 2025 में हुई साल की अंतिम मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट और घटा दिया गया, जिससे यह 5.5% से घटकर 5.25% पर आ गया था। 2026 की पहली एमपीसी के बाद मांग व खपत पर गवर्नर क्या बोले?अर्थव्यवस्था के चालकों पर प्रकाश डालते हुए गवर्नर ने कहा कि कॉरपोरेट प्रदर्शन में सुधार और अनौपचारिक क्षेत्र में निरंतर गति से विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। मांग के मोर्चे पर, ग्रामीण मांग स्थिर बनी हुई है, जबकि शहरी खपत में और वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके अलावा, गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता और संभावित भारत-अमेरिका व्यापार सौदा निर्यात की गति को मजबूत समर्थन प्रदान करेंगे।आर्थिक अनुमानों पर क्या बोले गवर्नर?आरबीआई गवर्नर ने भविष्य के आर्थिक परिदृश्य पर भरोसा जताते हुए अगले वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के लिए विकास दर के अनुमान को संशोधित कर बढ़ा दिया है, जिसके क्रमशः 6.9 फीसदी और 7 फीसदी रहने की उम्मीद है। महंगाई के मोर्चे पर, चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति 2.1 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इसके 4 फीसदी और दूसरी तिमाही में 4.2 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है। वैश्विक हालात के बारे में बोलते हुए गवर्नर ने कहा कि जनवरी के अंत तक विदेशी मुद्रा भंडार 723.8 अरब डॉलर के बहुत ही स्वस्थ स्तर पर है और चालू वित्त वर्ष में चालू खाता घाटा भी श्मध्यमश् रहने की उम्मीद है।

सराफा बाजार में उथल-पुथल का दौर:14000 फिर गिरे चांदी के भाव, गोल्ड के दाम भी गिरे
मुंबई। बीते एक सप्ताह से सर्राफा बाजार में उथल-पुथल का दौर जारी है। रिकार्ड स्तर को छूने के बाद सोने-चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसा ही शुक्रवार को भी देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी मार्केट में चांदी 14 हजार रुपये टूटकर 2.27 लाख रुपये पर आ गया। वहीं गोल्ड करीब 2000 रुपये टूटकर 1.49 लाख रुपये पहुंच गया है। सोने और चांदी में गिरावट की बड़ी वजह ग्लोबल लेवल पर आई भारी गिरावट है। अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर चांदी गुरुवार को 20 फीसदी तक टूट गया, जिसका असर शुक्रवार को एमसीएक्स पर दिखाई दे रहा है। इससे पहले गुरुवार को चांदी 30,300 रुपये सस्ती होकर 2.68 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। वहीं सोना 4,500 रुपये की गिरावट के साथ 1.6 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।अंतरराष्ट्रीय बाजारों में क्या रहा भाव?अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के करीब दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने और अमेरिका-चीन व्यापार तनाव में नरमी के संकेतों के बीच सोने-चांदी की कीमतों में गुरुवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। मजबूत डॉलर के कारण अन्य मुद्राओं में लेन-देन करने वाले निवेशकों के लिए सोना महंगा हो गया, जिससे मांग पर असर पड़ा।स्पॉट गोल्ड की कीमत 2.5% गिरकर 4,838.81 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जो सत्र की शुरुआत में बने करीब एक सप्ताह के उच्च स्तर से फिसल गई। अप्रैल डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 1.9ः टूटकर 4,855.60 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुए। चांदी में गिरावट और भी तीखी रही। स्पॉट सिल्वर की कीमत 14.9% लुढ़ककर 74.94 डॉलर प्रति औंस रह गई। गौरतलब है कि बीते सप्ताह ही चांदी ने 121.64 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड उच्च स्तर छुआ था।

भारतीय विदेश मंत्री ने अमेरिकी दौरे को बताया प्रोडक्टिव-सकारात्मक:शेयर की ऐतिहासिक व्यापार समझौते की पूरी डिटेल
वॉशिंगटन। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर तीन दिवसीय दौरे पर 2 से 4 फरवरी तक अमेरिका में थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो से भी मुलाकात की। जयशंकर ने अमेरिकी दौरे को प्रोडक्टिव और सकारात्मक बताया। उन्होंने ऐतिहासिक व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते संबंध में मजबूत रफ्तार साफ दिख रही है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीरें साझा कर ईएएम एस. जयशंकर ने लिखा, अमेरिका का एक प्रोडक्टिव और सकारात्मक दौरा खत्म हुआ। सेक्रेटरी रुबियो को उनकी अच्छी मेहमाननवाजी के लिए धन्यवाद। ऐतिहासिक भारत-अमेरिका व्यापार समझौता डिटेलिंग के आखिरी स्टेज में है जो बहुत जल्द पूरी हो जाएगी। यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों में एक नया दौर शुरू करता है, जिसमें संबंधों के लिए बहुत सारी संभावनाएं हैं।उन्होंने कहा कि हमारा जरूरी खनिज सहयोग भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में रणनीतिक मुद्दों, रक्षा और ऊर्जा पर बातचीत की उम्मीद है। कुल मिलाकर एक मजबूत मोमेंटम दिख रहा है। इस अहम दौरे में विदेश मंत्री ने अमेरिकी सरकार के सीनियर सदस्यों के साथ मीटिंग भी की। इसमें अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो और वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट के साथ अलग-अलग मीटिंग शामिल थीं। इस दौरान उन्होंने भारत-अमेरिका रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी पर बड़े पैमाने पर चर्चा की।उन्होंने कहा कि रुबियो के साथ बातचीत में भारत-अमेरिका संबंध के कई अहम पहलुओं पर बात हुई। ईएएम जयशंकर ने कहा, भारत-यूएस रणनीतिक साझेदारी के जिन पहलुओं पर बात हुई, उनमें व्यापार, ऊर्जा, न्यूक्लियर, रक्षा, जरूरी खनिज और तकनीक शामिल थे। विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष फॉलो-अप कामों पर तेजी से आगे बढ़ने पर सहमत हुए। हमारे साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरीकों की जल्द मीटिंग पर सहमति हुई।अमेरिकी विभाग की ओर से साझा जानकारी के अनुसार विदेश मंत्री जयशंकर और रुबियो ने जरूरी मिनरल्स की खोज, माइनिंग और प्रोसेसिंग पर द्विपक्षीय सहयोग को औपचारिक बनाने पर चर्चा की। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जो भारत-अमेरिका आर्थिक और रणनीतिक संबंध का एक अहम हिस्सा बनकर उभरा है। बुधवार को हुई यह मीटिंग अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के व्यापार समझौते की घोषणा के एक दिन बाद हुई, जिसका मकसद दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच रुकावटों को कम करना और मार्केट एक्सेस को बढ़ाना है।

सर्राफा बाजार में मुनाफा वसूली :चांदी की चमक फिर पड़ी फीकी, 3000 सोना भी लुढ़का
मुंबई। बीते कुछ दिनों से कीमती धातुओं की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। गुरुवार को भी ऐसा ही देखने को मिला। एक ओर जहां आसमान छू रही चांदी 25000 रुपए टूटकर 2,40,125 रुपये प्रति किलो पर आ गई। वहीं सोना 3 हजार लुढ़कर 1.50 लाख पर पहुंच गया है। सर्राफा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन यानी 4 फरवरी को तेज उछाल आया था। चांदी करीब 2.98 लाख रुपये प्रति किलो और सोना 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंचा। सर्राफा कारोबारियों के अनुसार चांदी की कीमत 14,300 रुपये उछलकर 2,98,300 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में यह 2,84,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।वहीं 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 7,400 रुपये चढ़कर 1,65,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंचा। एक दिन पहले इसका बंद भाव 1,57,700 रुपये प्रति 10 ग्राम था। दोनों धातुओं में यह उछाल टैक्स सहित कीमतों में दर्ज किया गया।इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार, आज सर्राफा बाजार में चांदी 30,230 रुपए गिरकर 2,52,232 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई है। वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 3,613 रुपए कम होकर 1,53,012 रुपए पर आ गया है। मुनाफा वसूली के कारण सोने-चांदी की कीमत में गिरावट है।अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी सोना-चांदी की कीमतेंअंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना और चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के चलते सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग बढ़ने से पीली धातु में जोरदार उछाल आया।स्पॉट गोल्ड 2.8 फीसदी की तेजी के साथ 5,076.01 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले सोने में 5.9 फीसदी की छलांग लगी थी, जो नवंबर 2008 के बाद एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त रही। पिछले गुरुवार को सोना रिकॉर्ड ऊंचाई 5,594.82 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचा था। वहीं, अप्रैल डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 3.3 फीसदी चढ़कर 5,097.20 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करते दिखे।चांदी की कीमतों में भी तेज उतार-चढ़ाव के बीच मजबूती आई। स्पॉट सिल्वर 5ः बढ़कर 89.38 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इससे पहले गुरुवार को चांदी 121.64 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक गई थी, लेकिन शुक्रवार को एक ही सत्र में 27 फीसदी की रिकॉर्ड गिरावट के बाद सोमवार को यह एक महीने के निचले स्तर 71.33 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गई थी।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील से भारतीय बाजार में लौटी हरियाली:इडियन करेंसी में आया जबरदस्त उछाल, डाॅलर के मुकाबले पहुंचा 90.39 पर
मुंबई। भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील होने के बाद भारतीय शेयर बाजार झूम उठा है। चैतरफा हरियाली दिखाई दे रही है। भारतीय रुपए में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। मंगलवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डाॅलर के मुकाबले 112 पैसे बढ़कर 90.39 पर खुला। जबकि सोमवार को यह 91.51 पर बंद हुआ था। ऐसे में आज भारतीय रुपया 1 प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुआ। फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि 18 फीसदी टैरिफ ने कहानी बदल दी है, जिससे भारत की सापेक्ष स्थिति बेहतर हुई है और विदेशी संस्थागत निवेशकों (थ्प्प्) की वापसी की संभावना बढ़ी है। विश्लेषकों ने बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपया पहले और ज्यादा मजबूत हुआ था, लेकिन बाद में यह 90.20 से 91.20 के दायरे में स्थिर हो गया। 92 के ऊपर टिक न पाने के बाद इसमें थोड़ी गिरावट आई, जिसे सामान्य सुधार माना जा रहा है। बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि रुपए की मौजूदा गिरावट अस्थायी है और लंबे समय में इसका रुझान अभी भी मजबूत बना हुआ है। अगर रुपया 90.50-90.80 के नीचे जाता है, तो यह 90 या 89.80 तक भी पहुंच सकता है।आरबीआई के रुख पर रहेगी नजरफिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली के मुताबिक, करीब नौ महीने की देरी के बाद घोषित यह व्यापार समझौता,जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषित किया और प्रधानमंत्री मोदी ने समर्थन दिया भारत को बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की तुलना में निर्यात में बढ़त देता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से बिकवाली करने वाले एफआईआई अब भारतीय शेयरों में खरीदारी कर सकते हैं। हालांकि, आगे की दिशा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के रुख पर नजर जरूरी होगी।पीएम मोदी से बात करने के बाद ट्रंप ने फैसलाबता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को बताया कि भारत के साथ ट्रेड डील हुई है। इसके तहत भारतीय सामानों पर लगने वाला टैक्स (टैरिफ) 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद लिया गया। इस समझौते में यह भी कहा गया है कि भारत रूस से तेल की खरीद कम करेगा और अमेरिका व संभवतः वेनेजुएला से ज्यादा तेल आयात करेगा।ट्रेड डील के बाद कम हुई अनिश्चितता विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रेड डील के बाद अनिश्चितता कम हुई है, जिससे विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार और बॉन्ड में निवेश कर सकते हैं। इससे रुपए की मांग और बढ़ सकती है। हालांकि, आने वाले दिनों में आरबीआई का रुख भी काफी अहम रहेगा। भारत-अमेरिका ट्रेड डील, भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) एफटीए और विकास पर केंद्रित बजट, इन तीनों के असर से बाजार का माहौल बेहतर होने की उम्मीद है। इससे विदेशी पूंजी तेजी से आ सकती है और भारत के भुगतान संतुलन (बीओपी) की स्थिति भी सुधर सकती है।

इंडिया-यूएस ट्रेड डील फाइनल, झूमा भारतीय शेयर बाजार:सेंसेक्स बना राॅकेट, निफ्टी में भी आया जबरदस्त उछाल
मुंबई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात भारत से व्यापार समझौते का ऐलान कर दिया है। इतना ही नहीं उन्होंने भारत पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया। ट्रंप के इस ऐलान के बाद भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद से करीब 3,657 अंक उछलकर 85,323.20 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी अपने पिछले क्लोजिंग से 1,219.65 अंकों की बढ़त के साथ 26,308.05 पर ओपन हुआ। खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 9.31 बजे) 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 2254 अंकों यानी 2.76 प्रतिशत की तेजी के साथ 83,920.51 पर था, तो वहीं एनएसई निफ्टी 691.30 (2.76 प्रतिशत) अंकों की उछाल के साथ 83,920.51 पर था। इस दौरान निफ्टी के सभी इंडेक्स हरे निशान में ट्रेड करते हुए नजर आए।सेंसेक्स ने छुआ अपने हाई स्तर कोकारोबार के दौरान जहां सेंसेक्स ने 85,871.73 का हाई स्तर छुआ, वहीं निफ्टी ने 26,341.20 का स्तर छुआ। व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप दोनों में 4 प्रतिशत की शानदार तेजी देखने को मिली। वहीं विभिन्न सेक्टर्स में निफ्टी ऑटो, आईटी, मेटल, बैंक, पीएसयू बैंक और फार्मा में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल दर्ज की गई।सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 में दिखी तेजीइस दौरान सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 में तेजी देखी गई, जिनमें अदाणी पोर्ट्स में सबसे ज्यादा 6.89 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। इसके बाद बजाज फाइनेंस (4.90 प्रतिशत), इंडिगो (4.66 प्रतिशत), बजाज फिनसर्व (4.39 प्रतिशत), इटरनल (4.16 प्रतिशत), एल एंड टी (3.70 प्रतिशत) और सन फार्मा (3.63 प्रतिशत) टॉप गेनर्स में शामिल रहे। सिर्फ आईटीसी के शेयरों में गिरावट देखी गई।

शेयर बाजार में फिर लौटी रौकन:943 अंक उछलकर बंद हुआ सेंसेक्स, निफ्टी ने भी बनाई बढ़त
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में बड़ी तेजी के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 943.52 अंक या 1.17 प्रतिशत की तेजी के साथ 81,666.46 और निफ्टी 262.95 अंक या 1.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,088.40 पर था। बाजार में तेजी का नेतृत्व इन्फ्रा और ऑटो शेयरों ने किया। निफ्टी इन्फ्रा (2.26 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (2.13 प्रतिशत), निफ्टी पीएसई (2.04 प्रतिशत), निफ्टी पीएसई (2.04 प्रतिशत), निफ्टी ऑयलएंडगैस (2.04 प्रतिशत), निफ्टी मेटल (1.88 प्रतिशत) और निफ्टी कमोडिटीज (1.87 प्रतिशत) की तेजी के साथ बंद हुआ।केवल निफ्टी आईटी (0.47 प्रतिशत) और निफ्टी हेल्थकेयर (0.08 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बड़ी तेजी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 546.80 अंक या 0.96 प्रतिशत की तेजी के साथ 57,667.60 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 105.20 अंक या 0.64 प्रतिशत की बढ़त के साथ 16,523.35 पर था।सेंसेक्स पैक में पावर ग्रिड, अदाणी पोर्ट्स, बीईएल, एमएंडएम, एलएंडटी, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, आईटीसी, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति सुजुकी गेनर्स थे। एक्सिस बैंक, इन्फोसिस, टीसीएस, ट्रेंट, टाइटन और कोटक महिंद्रा बैंक लूजर्स थे।एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक दे ने कहा कि बड़ी गिरावट के बाद निफ्टी में मजबूत उछाल देखने को मिला है। हालांकि, व्यापक ट्रेंड अभी भी कमजोर बना हुआ है। इंडेक्स अभी भी 200 डीएमए से नीचे है। उन्होंने आगे कहा कि किसी भी तेजी को लीवरेज पॉजिशन को कम करने और शॉर्ट पॉजिशन बनाने के लिए करना चाहिए। निफ्टी के लिए रुकावट का स्तर 25,200 है और सपोर्ट 24,900 के आसपास है।मिले-जुले वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला था। इस दौरान, बीएसई सेंसेक्स 167.26 अंक या 0.21 प्रतिशत गिरकर 80,555.68 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी 28.95 अंक या 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,796.50 पर खुला। हालांकि कुछ ही मिनटों बाद बाजार हरे निशान में आ गया।

शेयर मार्केट को रास नहीं आ रहा निर्मला का बजट:आज भी बदली-बदली नजर आ रही सेंसेक्स-निफ्टी की चाल
मुंबई। शेयर बाजार में बीते कारोबारी दिन रविवार को भारी गिरावट देखने को मिली थी। यही नहीं सेंसेक्स-निफ्टी देखते ही देखते क्रैश हो गए थे। शेयर बाजार में बजट का असर सोमवार को भी जारी रहा। सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स की चाल बदली-बदली नजर आई है, कभी ग्रीन, तो कभी रेड जोन में ये कारोबार करते दिखे।बीएसई सेंसेक्स 167.26 अंक या 0.21 प्रतिशत गिरकर 80,555.68 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी50 28.95 अंक या 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,796.50 पर खुला। हालांकि कुछ ही मिनटों बाद बाजार हरे निशान में आ गया। खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 9.34 बजे) 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 331.67 अंकों यानी 0.41 प्रतिशत की तेजी के साथ 81,054.61 पर था, तो वहीं एनएसई निफ्टी 72.80 अंकों यानी 0.29 प्रतिशत की उछाल के साथ 24,898.25 पर था।व्यापक बाजार की बात करें तो शुरुआती कारोबार में निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.30 प्रतिशत तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.41 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। वहीं विभिन्न सेक्टर्स में निफ्टी मेटल और निफ्टी ऑयल एंड गैस को छोड़कर अन्य सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में थे।सेंसेक्स पैक में शुरुआती कारोबार के दौरान एनटीपीसी, आईटीसी, बजाज फिनसर्व, टाइटन और ट्रेंट टॉप लूजर्स वाले शेयरों में शामिल थे, जिनमें 1.79 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। जबकि लार्सन एंड टुब्रो, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स और इंडिगो 2.5 प्रतिशत तक की बढ़त के साथ टॉप गेनर्स रहे।रविवार, 1 फरवरी को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा और अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफ एंड ओ) पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में बढ़ोतरी करने की घोषणा की और फ्यूचर्स पर एसटीटी बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया। तो वहीं, ऑप्शंस प्रीमियम पर एसटीटी को 0.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया।इस बड़ी घोषणा के बाद घरेलू बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली और प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी धराशायी हो गए। कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 79,899.42 के निचले स्तर तक पहुंच गया था और करीब 3,000 अंकों की इंट्राडे गिरावट देखने को मिली। वहीं, निफ्टी50 भी फिसलकर 24,572 तक आ गया।चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने बताया कि पिछले कारोबारी सत्र में निफ्टी ने एक मजबूत बेयरिश कैंडल बनाई है और यह 200-डे ईएमए से नीचे बंद हुआ है, जो ट्रेंड के कमजोर होने का संकेत देता है। फिलहाल 24,950-25,000 के बीच मजबूत रेजिस्टेंस है, जबकि 24,650-24,700 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है। आरएसआई घटकर 31 पर आ गया है, जो ओवरसोल्ड स्थिति दिखाता है। वहीं, इंडिया वीआईएक्स में 10.73 प्रतिशत की तेजी आई और यह 15.09 पर पहुंच गया, जिससे बाजार में बढ़ी हुई घबराहट साफ दिखती है।एक्सपर्ट ने आगे कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और बढ़ती वोलैटिलिटी को देखते हुए निवेशकों और ट्रेडर्स को फिलहाल चुनिंदा और अनुशासित रणनीति अपनाने की सलाह दी जाती है। गिरावट के दौरान मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही नजर रखें। निफ्टी में 25,000 के ऊपर मजबूत और टिकाऊ ब्रेकआउट आने के बाद ही नई लॉन्ग पोजिशन बनाना बेहतर रहेगा, क्योंकि यही स्तर बाजार की धारणा में वास्तविक सुधार का संकेत देगा।

चांदी ने खोई चमक, सोने के भाव भी पड़े फीके:सिल्वर 23,900 तो गोल्ड 5,700 रुपए फिर हुआ सस्ता
मुंबई। सर्राफा बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। बजट में सोना और चांदी को लेकर कोई बड़ी या सीधी घोषणा नहीं की गई, इसके बावजूद कमोडिटी मार्केट में कीमती धातुओं पर दबाव साफ दिखा। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन, सोमवार को एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट देखी गई। चांदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से करीब 1.79 लाख तक टूट चुकी है, जबकि सोना भी फिसलकर करीब 1.37 लाख रुपए के स्तर पर आ गया है। बीते तीन दिनों से सोने-चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।2,41 लाख रुपए पर आई चांदी फिलहाल खबर लिखे जाने तक (सुबह 11.22 बजे) एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 5,719 रुपए यानी 4.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,36,498 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। तो वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 23,908 रुपए सस्ती होकर 2,41,744 लाख रुपए प्रति किलो पर आ गई, जिसमें करीब 9 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की मुनाफावसूली और कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते सर्राफा बाजार में दबाव बना हुआ है।4 फीसदी तक टूटा गोल्डअंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो सोमवार की शुरुआती ट्रेडिंग में स्पॉट गोल्ड करीब 4 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि चांदी में भी लगभग इतनी ही गिरावट देखने को मिली। हालांकि, पहले 12 प्रतिशत तक गिरने के बाद चांदी 80 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर टिकने में सफल रही। इससे पहले सत्र में चांदी ने पिछले 10 वर्षों की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट दर्ज की थी, जिससे बाजार में हलचल तेज हो गई।गिरावट के पीछे कई अहम वजहेंगिरावट के पीछे कई अहम वजहें मानी जा रही हैं। हाल ही में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं, जिसने बड़े और अनुभवी निवेशकों को भी हैरान कर दिया था। जनवरी में यह तेजी और बढ़ गई थी, जब वैश्विक तनाव, कमजोर होती मुद्राएं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर चिंताओं के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने-चांदी का रुख किया था।अमेरिका भी निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिकाहालिया गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से जुड़ी एक खबर को माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फेड चेयर के रूप में केविन वॉर्श को नामित करने की योजना बना रहे हैं। इस खबर के बाद अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जिससे कमजोर डॉलर की उम्मीद कर रहे ट्रेडर्स की धारणा बदल गई और सोने-चांदी में तेज बिकवाली देखने को मिली।

कीमती धातुओं के भाव जमीन पर:चांदी की कीमत में आई भारी गिरावट, सोना भी लुढ़का
नई दिल्ली। सोने और चांदी में शुक्रवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट देखी जा रही है और कीमती घातुओं के दाम 10 प्रतिशत तक कम हो गए हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दोपहर 2ः16 पर 2 अप्रैल 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में सोने की कीमत 4.70 प्रतिशत कम होकर 1,75,307 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है।सोने के साथ चांदी में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 5 मार्च 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में चांदी की कीमत 10.77 प्रतिशत कम होकर 3,56,831 रुपए प्रति किलो हो गई है।वायदा के साथ हाजिर बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी देखने को मिल रही है।इंडिया बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) की ओर से दोपहर 12 बजे जारी की गई कीमतों के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 6,865 रुपए कम होकर 1,68,475 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,75,340 रुपए प्रति 10 ग्राम था। चांदी की कीमत 22,825 रुपए कम होकर 3,57,163 रुपए प्रति किलो हो गई है, जो कि पहले 3,79,988 रुपए प्रति किलो थी।सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट की वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमती धातुओं में गिरावट होना है। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोने की कीमत 4.07 प्रतिशत कम होकर 5,137 डॉलर प्रति औंस और चांदी की कीमत 9.28 प्रतिशत कम होकर 103 डॉलर प्रति औंस हो गई है।जानकार इस बिकवाली को मुनाफावसूली मान रहे हैं। वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ने और अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ के कारण सोने ने बीते एक साल में 80 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया है, जबकि इस दौरान चांदी ने 220 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। हाल ही में आई वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में बताया गया था कि सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के कारण इस साल देश में ज्वेलरी की मांग में गिरावट आ सकती है।

शिखर पर पहुंचे सोने-चांदी के भाव: सिल्वर ने तोड़े सारे रिकार्ड, गोल्ड पहुंचा 1.60 लाख के करीब
मुंबई। अमेरिकी डॉलर की लगातार कमजोरी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के बीच मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। दिन के शुरुआती कारोबार में सोना 2.4 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,59,820 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे हाई स्तर है। हालांकि बाद में मुनाफावसूली के कारण कीमतों में थोड़ी गिरावट आई।वहीं चांदी पिछले सभी रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 3,59,800 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। हालांकि खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 10.47 बजे) एमसीएक्स पर फरवरी कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना 1.45 प्रतिशत या 2,270 रुपए की उछाल के साथ 1,58,307 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं मार्च कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी 4.84 प्रतिशत यानी 16,197 रुपए की तेजी के साथ 3,50,896 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोना और चांदी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए। दुनिया में बढ़ते तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोना-चांदी की ओर बढ़ रहे हैं।अमेरिका में सरकारी कामकाज बंद होने की आशंका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 25 प्रतिशत नए टैरिफ की धमकियों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप ने दक्षिण कोरिया की कारों, लकड़ी और दवाइयों के आयात पर टैरिफ लगाने की बात कही है। साथ ही उन्होंने कनाडा को चेतावनी दी है कि अगर वह चीन से समझौता करता है तो उस पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा।अमेरिका में अप्रैल डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 5,113.70 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर पहुंच गए। इस दौरान डॉलर इंडेक्स 0.1 प्रतिशत कमजोर हुआ, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए सोना सस्ता हो गया। लगातार सुरक्षित निवेश की मांग, केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद और दुनिया भर में नरम मौद्रिक नीतियों की उम्मीद से कीमतों को सहारा मिल रहा है। वहीं कॉमेक्स चांदी 99 डॉलर के स्तर को पार कर गई है और नए रिकॉर्ड बना रही है।इस हफ्ते अमेरिका में फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की दो दिन की बैठक होने वाली है। उम्मीद है कि फिलहाल ब्याज दरें नहीं बदली जाएंगी, लेकिन साल के अंत तक कम से कम दो बार दरों में कटौती की उम्मीद की जा रही है। मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी विशेषज्ञ राहुल कलंत्री ने कहा कि बाजार की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले पर है। राजनीतिक दबाव की चर्चाओं ने सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं में निवेश को और बढ़ा दिया है।विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने को 1,57,050 से 1,55,310 रुपए के बीच सपोर्ट मिल सकता है, जबकि ऊपर की ओर 1,59,850 और 1,62,950 रुपए पर रेजिस्टेंस है। चांदी के लिए 3,38,810 और 3,22,170 रुपए सपोर्ट स्तर हैं, जबकि 3,55,810 और 3,62,470 रुपए पर रेजिस्टेंस मानी जा रही है।एक अन्य विश्लेषक का अनुमान है कि आने वाले सत्रों में सोना 1,65,000 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 3,65,000 रुपए प्रति किलो तक पहुंच सकती है। हाल की रिपोर्ट के अनुसार, चांदी में तेज उछाल के बाद अब ऊंचे स्तरों पर स्थिरता या थोड़ी गिरावट भी देखने को मिल सकती है, क्योंकि निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं।

बाजार की पाठशाला:पीएफ और ईपीएस क्या होते हैं, इनमें क्या है अंतर? रिटायरमेंट के बाद कैसे तय होती है पेंशन, समझें गणित
नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों की आर्थिक सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार उनका प्रोविडेंट फंड (पीएफ) और पेंशन स्कीम (ईपीएस) है। हर महीने सैलरी से कटने वाली रकम भविष्य के लिए जमा होती है, लेकिन अधिकतर कर्मचारी यह नहीं जानते कि यह पैसा किन हिस्सों में जाता है और रिटायरमेंट के बाद उन्हें इससे क्या फायदा मिलता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत ईपीएफ और ईपीएस दो अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं, जिनका उद्देश्य और लाभ भी अलग है। ईपीएफ यानी कर्मचारी भविष्य निधि एक तरह की लॉन्ग टर्म सेविंग स्कीम है, जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान होता है। इसमें जमा रकम पर हर साल ब्याज मिलता है और रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने पर पूरी राशि निकाली जा सकती है। वहीं, ईपीएस यानी कर्मचारी पेंशन योजना का मकसद रिटायरमेंट के बाद हर महीने तय पेंशन देना होता है, ताकि बुढ़ापे में नियमित आमदनी बनी रहे।कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए का 12 प्रतिशत हिस्सा सीधे उसके ईपीएफ खाते में जमा होता है। इसके अलावा नियोक्ता भी 12 प्रतिशत योगदान देता है, लेकिन यह दो भागों में बंटता है। नियोक्ता के योगदान का 8.33 प्रतिशत हिस्सा ईपीएस यानी पेंशन फंड में जाता है, जबकि बाकी 3.67 प्रतिशत ईपीएफ खाते में जमा होता है। सरकार ने पेंशन के लिए अधिकतम वेतन सीमा 15,000 रुपए तय की है, यानी इससे ज्यादा सैलरी होने पर भी पेंशन की गणना इसी सीमा के आधार पर होती है।यह जानना जरूरी है कि पेंशन की राशि आपके ईपीएस खाते में जमा कुल रकम पर निर्भर नहीं करती। ईपीएफओ इसके लिए एक तय फॉमूर्ला लागू करता है। पेंशन की गणना पेंशन योग्य वेतन और पेंशन योग्य सेवा के आधार पर होती है। इसका फॉमूर्ला है: पेंशन योग्य वेतन ़ पेंशन योग्य सेवा रु 70। यही फॉमूर्ला तय करता है कि रिटायरमेंट के बाद आपको हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी।ईपीएस स्कीम का एक बड़ा फायदा फैमिली पेंशन है। अगर किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान या पेंशन शुरू होने के बाद मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को पेंशन मिलती है। ईपीएफओ के नियमों के अनुसार, सदस्य की पत्नी या पति को उसकी पेंशन का 50 प्रतिशत हिस्सा आजीवन दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी सदस्य की पेंशन 7,500 रुपए थी, तो उसके निधन के बाद उसके जीवनसाथी को 3,750 रुपए प्रति माह पेंशन मिलेगी।ईपीएस के तहत परिवार के दो बच्चों को भी पेंशन का लाभ मिलता है। प्रत्येक बच्चे को सदस्य की पेंशन का 25-25 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता है। यह बाल पेंशन 25 वर्ष की उम्र तक मिलती है। अगर बच्चे अनाथ हो जाते हैं, तो यह पेंशन बढ़ाकर 75 प्रतिशत तक कर दी जाती है। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपए से कम न हो।आमतौर पर कर्मचारी को 58 साल की उम्र के बाद पेंशन मिलती है, लेकिन 50 साल की उम्र के बाद अर्ली पेंशन लेने का विकल्प भी मौजूद है। हालांकि, अर्ली पेंशन लेने पर हर साल 4 प्रतिशत की कटौती होती है। वहीं, अगर कोई कर्मचारी 58 साल के बाद भी काम जारी रखता है और पेंशन लेना टालता है, तो उसकी पेंशन में हर साल 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान है।

सोन-चांदी की कीमतों पर नहीं लग रही लगाम:कीमती धातुओं ने बनाया एक और रिकार्ड, गोल्ड में 4%का आया उछाल, 3.30 लाख के पार पहुंची सिल्वर
नई दिल्ली। कीमती धातुओं की भाव आसमान छूते जा रहे हैं। बुधवार को सोने की कीमतों में 4 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल देखने को मिली और यह एक बार फिर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। चांदी ने भी अपने पिछले रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नया उच्चतम स्तर छू लिया। अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार संघर्ष बढ़ने और डॉलर के कमजोर होने की आशंका के चलते निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प यानी सोने-चांदी का रुख कर रहे हैं। बुधवार के कारोबारी सत्र में एमसीएक्स पर गोल्ड फरवरी वायदा 1,58,339 रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, तो वहीं सिल्वर मार्च वायदा 3,35,000 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 11.50 बजे) एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 7,363 रुपए यानी 4.89 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,57,928 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। जबकि, मार्च डिलीवरी वाली चांदी 10,499 रुपए यानी 3.24 प्रतिशत चढ़कर 3,34,171 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई।अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने ने बनाया नया रिकॉर्ड अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने ने नया रिकॉर्ड बनाया। कॉमेक्स पर अमेरिकी सोना 4,849 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमतें 92.5 से 95.7 डॉलर के दायरे में बनी रहीं। कीमतों में यह तेजी उस खबर के बाद आई, जिसमें कहा गया कि अमेरिका फरवरी से यूरोप के आठ देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। साथ ही जून तक इन टैरिफ को 25 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। इसके जवाब में यूरोपीय देश भी अमेरिका के खिलाफ व्यापारिक कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं।चांदी का भविष्य दिख रहा मजबूतविशेषज्ञों का कहना है कि मध्यम और लंबी अवधि में चांदी का भविष्य काफी मजबूत दिख रहा है। सप्लाई की कमी और उद्योगों में बढ़ती मांग के कारण 2026 तक चांदी की कीमत 110 से 120 डॉलर तक जा सकती है। एमसीएक्स पर चांदी के फ्यूचर्स में फिलहाल 3,30,000 से 3,32,000 रुपए का स्तर अहम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में यह कीमत 3,35,000 से 3,50,000 रुपए प्रति किलो तक भी जा सकती है।

कीमती धातुओं ने फिर बनाया नया रिकार्ड:3.20 लाख के करीब पहुंची सिल्वर, गोल्ड की कीमतों भी आया तेज उछाल
मुंबई। बढ़ते वैश्विक तनावों के बीच सोने और चांदी ने मंगलवार के कारोबारी सत्र में एक और नया रिकॉर्ड बना लिया है। एमसीएक्स पर कीमती धातुओं की कीमतें पिछले दिन के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। गोल्ड फरवरी वायदा 1,47,996 रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, तो वहीं सिल्वर मार्च वायदा 3,19,949 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।सोमवार के ट्रेडिंग सेशन में एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना जहां रिकॉर्ड 1,45,500 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था, तो वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 3,01,315 रुपए प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर सिल्वर की कीमत 94.320 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। तो वहीं गोल्ड 4,708.10 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इससे पहले के सत्र में सोने ने 4,689.39 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छुआ था।चांदी की कीमतों में 2.35 का आया उछालखबर लिखे जाने तक एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1.55 प्रतिशत यानी 2,255 रुपए की तेजी के साथ 1,47,894 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, जबकि मार्च डिलीवरी वाली चांदी 7,279 रुपए यानी 2.35 प्रतिशत की उछाल के साथ 3,17,554 रुपए प्रति किलोग्राम पर थी। यह तेजी उस समय आई थी जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड मुद्दे का विरोध करने वाले आठ यूरोपीय देशों पर नया टैरिफ लगाने का ऐलान किया।ट्रंप की यूरोपीय देशों की धमकी के बाद कीमती धातुओं में आ रहा उछालकीमती धातुओं में यह उछाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड मुद्दे का विरोध करने वाले आठ यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी के बाद आई। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी दोहराया कि यूरोपीय देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर टैरिफ लगाने की धमकी पर वे अमल करेंगे।मांग बढ़ने से कीमती धातुओं की कीमतों में आ रही तेजीविशेषज्ञों के अनुसार, कीमती धातुओं में आई यह तेजी सुरक्षित निवेश के साथ-साथ चांदी की औद्योगिक मांग को भी दिखाती है। चांदी का उपयोग सोलर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में बढ़ रहा है। विश्लेषकों ने कहा कि तकनीकी रूप से कॉमेक्स पर चांदी का रुख अभी मजबूत बना हुआ है। 85 से 88 डॉलर प्रति औंस का स्तर आने वाले समय में कीमतों को सहारा दे सकता है।मुनाफा वसूली के कारण कीमतों में आ सकती है गिरावटऑगमोंट की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मुनाफावसूली के कारण कीमतों में थोड़ी गिरावट आ सकती है और चांदी 84 डॉलर प्रति औंस या 2,60,000 रुपए प्रति किलो तक आ सकती है, इसके बाद फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि बहुत तेज बढ़त के बाद निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं, लेकिन उनका मानना है कि आपूर्ति की चिंताओं और औद्योगिक मांग बढ़ने के कारण लंबे समय में सोने और चांदी का रुझान मजबूत बना रहेगा।

बीसीसीएल का शेयर मार्केट में धमाकेदार डेब्यू:आईपीओ की कीमत से लगभग दोगुने पर लिस्टिंग
मुंबई। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के आईपीओ की सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त लिस्टिंग हुई है। कंपनी के शेयर बीएसई पर 45.21 रुपए पर लिस्ट हुए, जो आईपीओ कीमत 23 रुपए से करीब 96.57 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, एनएसई पर शेयर 45 रुपए पर लिस्ट हुआ, यानी करीब 95.65 प्रतिशत का प्रीमियम देखने को मिला। कंपनी का आईपीओ बोली के तीसरे दिन बंद हुआ और इसे कुल 145 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। इस आईपीओ में सबसे ज्यादा मांग बड़े संस्थागत निवेशकों की ओर से देखने को मिली। यह साल 2026 का पहला आईपीओ था, जिसे लॉन्च के पहले ही दिन पूरी तरह सब्सक्राइब कर लिया गया था। यह 2026 का पहला मेन-बोर्ड आईपीओ भी रहा और इसमें सभी तरह के निवेशकों की ओर से रिकॉर्ड तोड़ मांग देखी गई।आईपीओ में कुल 1.17 लाख करोड़ की लगी बोलियां भारत कोकिंग कोल के आईपीओ में कुल 1.17 लाख करोड़ रुपए की बोलियां आईं। इससे यह आईपीओ कुल मिलाकर 146.87 गुना सब्सक्राइब हुआ। यह सब्सक्रिप्शन के हिसाब से दूसरा सबसे ज्यादा सब्सक्राइब होने वाला पीएसयू आईपीओ बना, जबकि कुल बोली राशि के मामले में यह तीसरे नंबर पर रहा।निवेशकों को दिखाई दे रहा भरोूसाशेयर बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि हाल के वर्षों में किसी भी पब्लिक इश्यू में इतनी ज्यादा मांग कम ही देखने को मिली है। इससे निवेशकों का कंपनी और सरकारी कंपनियों (पीएसयू) में निवेश को लेकर भरोसा साफ दिखाई देता है।पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल था आईपीओ यह 1,300 करोड़ रुपए का आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल था, जिसमें प्रमोटर कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड ने अपनी 46.57 करोड़ इक्विटी शेयर बेचे। इस आईपीओ का प्राइस बैंड 21 से 23 रुपए के बीच तय किया गया था। आईपीओ के बुक रनिंग लीड मैनेजर आईडीबीआई कैपिटल मार्केट्स एंड सिक्योरिटीज लिमिटेड और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज लिमिटेड हैं।

ट्रंप की नए टैरिफ धमकी से कीमती धुओं की कीमतों में लगी आग:तीन लाख के पार पहुंची चांदी, सोने ने भी बनाया रिकार्ड
मुंबई। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सोने और चांदी की कीमतें एक बार फिर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। कीमती धातुओं में यह उछाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 8 यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी के बाद आई, जिससे निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना और चांदी खरीदना शुरू कर दिया। सोमवार के ट्रेडिंग सेशन में एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना जहां रिकॉर्ड 1,45,500 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, तो वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी ने 3,01,315 रुपए प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड स्तर छू लिया। वहीं, खबर लिखे जाने तक एमसीएक्स गोल्ड फरवरी वायदा 2,438 रुपए यानी 1.71 प्रतिशत बढ़कर 1,44,955 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, वहीं एमसीएक्स सिल्वर मार्च वायदा 13,062 रुपए यानी 4.54 प्रतिशत की उछाल के साथ 3,00,824 रुपए प्रति किलो हो गई।अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बढ़े सोने के दामअंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत में तेज उछाल देखा गया। स्पॉट गोल्ड 1.6 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 4,700 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया और बाद में 4,670 डॉलर के आसपास स्थिर हुआ। इस दौरान सोने ने अब तक का सबसे ऊंचा स्तर भी छुआ। सोने और चांदी में तेजी तब और बढ़ गई जब राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका तब तक यूरोप के आठ देशों से आने वाले सामान पर ज्यादा टैक्स लगाएगा, जब तक अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने की अनुमति नहीं मिलती। इस बयान के बाद यूरोपीय संघ के देशों ने अमेरिका को मनाने और जरूरत पड़ने पर जवाबी कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी।राजनीतिक अस्थिरता कीमतों को दे रहीं सहारामेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री ने बताया कि दुनिया में राजनीतिक अस्थिरता, अमेरिका की मौद्रिक नीति को लेकर सवाल और लगातार चल रहे भू-राजनीतिक तनाव भी सोने की कीमतों को सहारा दे रहे हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि अमेरिका में ब्याज दरों में आगे कटौती की उम्मीद भी सोने और चांदी की कीमतों को ऊपर बनाए हुए है, खासकर 2025 में अच्छे प्रदर्शन के बाद।विशेषज्ञों ने जताया भरोसाविशेषज्ञों के अनुसार, इस हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसकी वजह डॉलर की कीमतों में अस्थिरता और अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट का टैरिफ पर आने वाला फैसला है। विश्लेषकों ने बताया कि सोने को 1,41,650 से 1,40,310 रुपए के स्तर पर सपोर्ट मिल सकता है, जबकि 1,44,150 से 1,45,670 रुपए के बीच इसमें रेजिस्टेंस आ सकती है। चांदी के लिए 2,85,810 से 2,82,170 रुपए का स्तर सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 2,94,810 से 2,96,470 रुपए पर रेजिस्टेंस है।

दिसंबर में बढ़े मैन्यूफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स के दाम:थोक महंगाई दर पहुंची, 0.83 % पर, खाने-पीने की चींजों में मिली राहत
नई दिल्ली। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, थोक कीमतों पर आधारित भारत की महंगाई दर दिसंबर 2025 में 0.83 प्रतिशत रही। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से विनिर्मित वस्तुओं (मैन्यूफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स) और खनिजों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई है। दिसंबर में खाने-पीने की चीजों की थोक कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, इसलिए खाद्य महंगाई दर शून्य प्रतिशत रही। इसका मतलब है कि पिछले साल की तुलना में खाने की चीजें महंगी नहीं हुईं।थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) में सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाले विनिर्मित वस्तुओं के समूह की हिस्सेदारी 64.23 प्रतिशत है, जिसकी कीमतों में दिसंबर में 0.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस समूह के 22 उत्पादों में से 13 की कीमतें बढ़ीं, 8 उत्पादों की कीमतें घटीं और एक की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ।दिसंबर में इन वस्तुओं की बढ़ीं कीमतेंदिसंबर में जिन वस्तुओं की कीमतें बढ़ीं, उनमें मूल धातुएं, रसायन और रासायनिक उत्पाद, वस्त्र और अन्य गैर-धातु खनिज उत्पाद शामिल हैं। वहीं, रबर और प्लास्टिक उत्पाद, खाद्य उत्पाद, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक सामान, कागज और पेय पदार्थों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।नवंबर में शून्य से नीचे थी थोक महंगाई दरनवंबर 2025 में थोक महंगाई दर शून्य से नीचे (-0.32 प्रतिशत) थी। इससे पहले अक्टूबर में यह -1.21 प्रतिशत रही थी, जबकि पिछले साल नवंबर में यह 2.16 प्रतिशत थी। दिसंबर 2025 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई दर 1.33 प्रतिशत रही, जो नवंबर के 0.71 प्रतिशत से थोड़ी ज्यादा है।लगातार सातवें महीने नकारात्मक बनी रही खाद्य महंगाई दरदिसंबर में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) -2.71 प्रतिशत रही, यानी खाने की चीजों की कीमतें पिछले साल की तुलना में कम रहीं। यह लगातार सातवां महीना है जब खाद्य महंगाई नकारात्मक बनी हुई है, जिससे आम लोगों के घर के बजट को राहत मिली है।देश में महंगाई को लेकर स्थिति काबू मेंकुल मिलाकर, महंगाई को लेकर स्थिति अभी काबू में है। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने पिछले महीने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई का अनुमान 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किया था। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि महंगाई घटने के कारण रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की गई है, जो अब 5.25 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि और महंगाई में गिरावट ने भारत को एक खास सुनहरा समय दिया है, जिसमें विकास और स्थिरता दोनों साथ-साथ चल रहे हैं।

कीमती धातुओं ने फिर बनाया नया रिकार्ड:सोने का भाव पहुंचा सर्वोच्च स्तर पर, आल टाइम हाई पर पहुंची चांदी
मुंबई। हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन, बुधवार को कीमती धातु (सोना और चांदी) एक बार फिर नया रिकॉर्ड बनाते हुए अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। अमेरिका में महंगाई के नरम आंकड़े और दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने-चांदी में खरीदारी कर रहे हैं। बुधवार के कारोबारी सत्र में एमसीएक्स पर सोने ने जहां 1,43,500 रुपए प्रति 10 ग्राम का सर्वोच्च स्तर छुआ, वहीं चांदी भी 2,87,990 रुपए प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। बीते कुछ दिन पहले भी इन कीमती धातुओं ने अपना रिकॉर्ड स्तर छुआ था।हालांकि खबर लिखे जाने तक (दोपहर 12.16 बजे के करीब) एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1,059 रुपए या 0.74 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,43,300 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। तो वहीं, मार्च डिलीवरी वाली चांदी 9,942 रुपए या 3.61 प्रतिशत की उछाल के साथ 2,85,129 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी।दिसंबर के लिए अमेरिकी कोर कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) के आंकड़ों में महीने-दर-महीने महंगाई 0.2 प्रतिशत और साल-दर-साल 2.6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो उम्मीद से कम रहे, जिससे बाजार को भरोसा मिला कि अमेरिका का केंद्रीय बैंक भविष्य में ब्याज दरें घटा सकता है। इससे सोने की कीमतों को सपोर्ट मिला।विशेषज्ञों का कहना है कि कम महंगाई और अमेरिका के रोजगार से जुड़े मिले-जुले आंकड़ों को देखते हुए केंद्रीय बैंक जनवरी में ब्याज दरें स्थिर रख सकता है, लेकिन साल भर में दो से तीन बार दरों में कटौती हो सकती है, जिससे सोने की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

भारतीय परिवार बन रहे निवेशक:एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट दे रही गवाही, देखें बीते दस सालों का आंकड़ा
नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2015 से 2025 के बीच भारतीय बैंकों में जमा राशि और कर्ज की रकम लगभग तीन गुना हो गई है। इससे यह साफ होता है कि देश का बैंकिंग सिस्टम मजबूत हुआ है और कर्ज देने की प्रक्रिया फिर से तेज हुई है। सोमवार को जारी एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। भारतीय स्टेट बैंक की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2015 से 2025 के दौरान बैंकों में जमा राशि 85.3 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपए हो गई। वहीं, बैंकों द्वारा दिया गया कर्ज 67.4 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बैंकों की कुल संपत्ति देश की जीडीपी के मुकाबले बढ़कर 94 प्रतिशत हो गई है, जो पहले 77 प्रतिशत थी। इससे पता चलता है कि देश की वित्तीय स्थिति और बैंकिंग प्रणाली मजबूत हुई है।रिपोर्ट के अनुसार, देश के कई राज्यों में अब परिवार सिर्फ बचत ही नहीं कर रहे, बल्कि निवेश की ओर भी रुख करने लगे हैं। गुजरात, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में बैंक में जमा राशि का एक हिस्सा तेजी से शेयर बाजार और अन्य वित्तीय बाजारों की ओर जा रहा है। लंबे समय की बात करें तो वित्त वर्ष 2005 से 2025 के बीच बैंकों में जमा राशि 18.4 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपए हो गई। इसी तरह बैंकों का कर्ज 11.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपए हो गया। इससे साफ है कि बैंकिंग प्रणाली का आकार काफी बढ़ गया है।हालांकि, रिपोर्ट में बताया गया है कि कर्ज देने की रफ्तार जमा की तुलना में तेज रही है, जिससे कर्ज और जमा का अनुपात वित्त वर्ष 2021 में 69 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 79 प्रतिशत हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी बैंक भी धीरे-धीरे फिर से ज्यादा कर्ज देने लगे हैं। पहले कुछ वर्षों में उनका हिस्सा कम हो गया था, लेकिन अब उनकी आर्थिक स्थिति सुधर रही है और वे ज्यादा कर्ज देने को तैयार हैं।वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में बैंकों में नई जमा राशि 8.6 लाख करोड़ रुपए से घटकर 8.1 लाख करोड़ रुपए रह गई, जबकि इस दौरान कर्ज बढ़कर 7.6 लाख करोड़ रुपए हो गया। एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी बैंकों का मुनाफा बढ़ने के पीछे ब्याज से होने वाली कमाई, सरकारी बॉन्ड से लाभ और खुदरा तथा छोटे कारोबारियों को दिए गए कर्ज की अहम भूमिका रही है।रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में बैंकों का मुनाफा और बेहतर होगा। त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग, कर्ज में तेजी, कम कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) आवश्यकता से मिलने वाले फायदे और असुरक्षित व एमएफआई सेगमेंट में डिफॉल्ट के मामलों के धीरे-धीरे सामान्य होने से बैंकों को फायदा मिलेगा।

एसआईपी निवेश:दिसंबर में बना नया रिकॉर्ड एएमएफआई ने जारी किए आंकड़े, एक महीने में 31,002 करोड़ का हुआ इन्वेस्टमेंट
नई दिल्ली। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) द्वारा शुक्रवार को जारी मासिक आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड (एमएफ) में 28,054.06 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जिसमें एसआईपी की भूमिका सबसे अहम रही। इस महीने सिस्टैमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) ने अब तक का सबसे ज्यादा निवेश करते हुए एक नया रिकॉर्ड बनाया। एएमएफआई के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में म्यूचुअल फंड एसआईपी के तहत निवेश बढ़कर 31,002 करोड़ रुपए हो गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। नवंबर में यह राशि 29,445 करोड़ रुपए थी। इससे पता चलता है कि छोटे निवेशकों का भरोसा अभी भी बना हुआ है। इतना ही नहीं, दिसंबर में गोल्ड ईटीएफ फंड में 11,647 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जो नवंबर में 3,742 करोड़ रुपए था। इससे स्पष्ट है कि निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ा है।हालांकि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में दिसंबर में 66,591 करोड़ रुपए की निकासी दर्ज की गई, जबकि नवंबर में 32,755 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश हुआ था। हालांकि निवेश घटा है, फिर भी कुछ कैटेगरी में अच्छी हिस्सेदारी बनी रही। एएमएफआई के मुताबिक, दिसंबर में सभी इक्विटी फंड कैटेगरी में नवंबर की तुलना में निवेश कम हुआ, लेकिन फ्लेक्सी-कैप फंड सबसे आगे रहे। फ्लेक्सी-कैप फंडों में निवेश बढ़कर 10,019 करोड़ रुपए हो गया, जबकि नवंबर में यह 8,135 करोड़ रुपए था।लार्ज-कैप फंड्स में दिसंबर में 1,567 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जबकि नवंबर में यह 1,640 करोड़ रुपए था। वहीं, मिड-कैप फंड में 4,176 करोड़ रुपए का निवेश दर्ज किया गया, जो नवंबर के 4,487 करोड़ रुपए से कम है। स्मॉल-कैप फंड में दिसंबर में 3,824 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जबकि नवंबर में यह 4,407 करोड़ रुपए था।सेक्टर और थीम आधारित फंड्स में निवेश में 49 प्रतिशत की गिरावट आई। दिसंबर में इस कैटेगरी में 946 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जबकि नवंबर में यह 1,865 करोड़ रुपए था। डेट म्यूचुअल फंड से दिसंबर में 1.32 लाख करोड़ रुपए की निकासी हुई, जो नवंबर में 25,692.63 करोड़ रुपए थी। ओवरनाइट फंड्स में दिसंबर में 254.25 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जबकि नवंबर में इसमें 37,624.5 करोड़ रुपए का निवेश हुआ था। लिक्विड फंड्स से दिसंबर में 47,307.95 करोड़ रुपए की निकासी दर्ज की गई, जो नवंबर से अधिक है।हाइब्रिड स्कीम्स में दिसंबर में 10,755.57 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जबकि नवंबर में यह 13,299.20 करोड़ रुपए था। आर्बिट्राज फंड्स में भी इस महीने 126.31 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जबकि नवंबर में इसमें 4,191.90 करोड़ रुपए का निवेश दर्ज किया गया था। दिसंबर में कई नए फंड ऑफर भी लॉन्च किए गए। अन्य ईटीएफ कैटेगरी में सबसे अधिक 8 नए फंड शुरू किए गए, जबकि नवंबर में कुल 23 नए फंड लॉन्च हुए थे, जिनमें 4,074 करोड़ रुपए का निवेश हुआ था। इससे पहले महीने में 24 नए फंड लॉन्च हुए थे, जिनमें 3,126 करोड़ रुपए का निवेश दर्ज किया गया था।

86 प्रतिशत भारतीयों के लिए ज्वेलरी सबसे अहम संपत्ति:डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट में खुलासा, नई पीढ़ी तेजी से अपना रही नया ट्रेंड
नई दिल्ली। भारत में लगभग 86 प्रतिशत लोग सोने और आभूषणों (ज्वेलरी) को संपत्ति बनाने का एक अच्छा साधन मानते हैं। यह संख्या लगभग म्यूचुअल फंड और शेयरों जैसे बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों के बराबर है, जिन्हें 87 प्रतिशत लोग पसंद करते हैं। इससे साफ है कि गहनों की अहमियत आज भी बहुत ज्यादा है। बुधवार को जारी डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ज्वेलरी मार्केट तेजी से बदल रहा है। अब लोग आभूषणों को सिर्फ शादी या परंपरा से नहीं जोड़ते, बल्कि अपनी पहचान, जीवनशैली और रोजमर्रा के पहनावे का हिस्सा भी मानते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 56 प्रतिशत लोग ज्वेलरी को, निवेश और फैशन, दोनों के रूप में देखते हैं। वहीं, 28 प्रतिशत लोग केवल निवेश के रूप में गहने खरीदते हैं। इससे पता चलता है कि आभूषणों की भूमिका अब सिर्फ सेविंग्स तक सीमित नहीं रही।रिपोर्ट के अनुसार, पुरुष और 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोग आभूषणों को ज्यादा निवेश के रूप में खरीदते हैं। वहीं, युवा वर्ग गहनों में स्टाइल, अपने हिसाब से डिजाइन और अलग-अलग तरह से पहनने की सुविधा को ज्यादा महत्व देता है। रिपोर्ट के मुताबिक, जेनजी और युवा पीढ़ी तेजी से हल्के और रोज पहनने वाले गहनों की ओर रुख कर रही है। 51 प्रतिशत जेनजी को चांदी और 34 प्रतिशत को प्लेटिनम वाली ज्वेलरी पसंद है। करीब 49 प्रतिशत लोग हल्के और सादे गहनों को भारी और ज्यादा सजावटी गहनों से ज्यादा पसंद करते हैं।रिपोर्ट में बताया गया कि 45 प्रतिशत जेनजी और युवा सिल्वर की ज्वेलरी में निवेश करना पसंद करते हैं। इसकी वजह है अच्छा डिजाइन, कम कीमत और आसानी से खरीदना। अब चांदी को सोने के साथ रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए भी चुना जा रहा है। डेलॉइट इंडिया के अनुसार, पहले भारत में लगभग 70 प्रतिशत गहने शादियों के लिए खरीदे जाते थे, लेकिन अब यह समीकरण बदल रहा है। युवा जन्मदिन और सालगिरह (38 प्रतिशत), रोजाना और आॅफिस में पहनने वाले परिधान (32 प्रतिशत) और पदोन्नति व पढ़ाई जैसी करियर संबंधी उपलब्धियों के लिए आभूषण खरीदते हैं।रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 49 प्रतिशत लोग अंगूठियां, चेन और कान की बालियां जैसे गहनों को निजी और गैर-धार्मिक मौकों के लिए पसंद करते हैं, जो पारंपरिक भारी गहनों से ज्यादा हैं। हालांकि आॅनलाइन प्लेटफॉर्म का असर बढ़ रहा है, लेकिन गहनों के मामले में लोग अब भी दुकान पर जाकर उसे खरीदना ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में आभूषण उद्योग की तरक्की के लिए बेहतर कामकाज, सही योजना और भरोसे पर ध्यान देना सबसे जरूरी होगा।

शेयर बाजार:शेयर प्राइस, टारगेट प्राइस और स्टॉप लॉस क्या होता है? निवेशकों के लिए यह सब जानना जरूरी
मुंबई। शेयर बाजार में हर निवेशक के लिए कुछ बुनियादी शब्दों (टर्म्स) को समझना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि बाजार के ये टर्म्स ही निवेशकों के ज्ञान और विश्वास को बढ़ाते हैं और इसी के आधार पर उनके मुनाफे की सीढ़ी ऊंचाई छूती है। इनमें सबसे अहम हैं शेयर प्राइस, टारगेट प्राइस और स्टॉप लॉस। अगर निवेशक इन तीनों को सही तरह से समझ ले, तो वह नुकसान को कम कर सकता है और समझदारी से निवेश का फैसला ले सकता है।दरअसल, शेयर प्राइस उस कीमत को कहा जाता है, जिस पर किसी कंपनी का शेयर स्टॉक मार्केट में खरीदा या बेचा जाता है। यह कीमत हर सेकेंड बदलती रहती है और कंपनी के कारोबार, मुनाफे, खबरों, मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी कंपनी का शेयर बाजार में 500 रुपए पर ट्रेड कर रहा है, तो वही उसका मौजूदा शेयर प्राइस कहलाता है।एक्सपर्ट्स का कहना है कि टारगेट प्राइस वह अनुमानित कीमत होती है, जहां तक किसी शेयर के पहुंचने की उम्मीद की जाती है। निवेशक या एक्सपर्ट यह तय करते हैं कि अगर शेयर सही दिशा में चला यानी ऊपर की ओर भागा, तो उसे किस कीमत पर बेचकर मुनाफा लिया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर आपने किसी शेयर को 200 रुपए में खरीदा है और आपको लगता है कि आने वाले समय में यह 300 रुपए तक जा सकता है, तो यही उस शेयर का टारगेट प्राइस कहलाएगा।वहीं, स्टॉप लॉस वह कीमत होती है जिस पर निवेशक नुकसान बढ़ने से पहले शेयर बेचने का फैसला करता है। इसका मकसद नुकसान को सीमित रखना होता है। मान लीजिए आपने 200 रुपए में कोई शेयर खरीदा और तय किया कि अगर यह 170 रुपए से नीचे गया तो आप शेयर बेच देंगे। ऐसे में 170 रुपए आपका स्टॉप लॉस होगा। इस तरह टारगेट प्राइस मुनाफा कमाने में मदद करता है और स्टॉप लॉस नुकसान से बचाता है।बाजार के जानकारों का कहना है कि शेयर प्राइस से आपको शेयर मार्केट की मौजूदा स्थिति का पता चलता है। टारगेट प्राइस आपको लालच से बचाता है और सही समय पर मुनाफा लेने में मदद करता है। वहीं स्टॉप लॉस आपको बड़े नुकसान से बचाता है। इन तीनों का सही इस्तेमाल निवेश को सुरक्षित और अनुशासित बनाता है।एक्सपर्ट्स का कहना है कि शेयर बाजार में बेहतर निवेश के लिए सिर्फ सही शेयर चुनना ही काफी नहीं होता, बल्कि निवेश के लिए सही रणनीति बनानी भी जरूरी होती है। शेयर प्राइस, टारगेट प्राइस और स्टॉप लॉस को समझकर और अपनाकर निवेशक जोखिम को कम कर सकता है और लंबे समय में बेहतर परिणाम हासिल कर सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में बड़ा खिलाड़ी बनेगा भारत:मोदी के मंत्री के दावा- 11 वर्षों में 6 गुना बढ़ा उत्पादन
नई दिल्ली। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि भारत पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम यानी डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, ऑपरेटिंग सिस्टम, एप्लीकेशन, मटेरियल और इक्विपमेंट में आने वाले समय में बड़ा खिलाड़ी बनेगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एप्पल ने 2025 में भारत से 50 अरब डॉलर मूल्य के मोबाइल फोन को शिप किया है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया और हमारे उत्पादन केंद्रित अर्थव्यवस्था बनने की तरफ एक बड़ा मील का पत्थर है।वैष्णव ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बीते 11 वर्षों में छह गुना बढ़ा है। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 8 गुना बढ़ा है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स देश की ओर से किए जाने वाले शीर्ष तीन निर्यातों में शामिल हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि 46 कंपोनेंट निर्माण परियोजनाएं, लैपटॉप, सर्वर और ऑडियो डिवाइस निर्माताओं के जुड़ने से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख चालक बन रहा है।इस साल चार सेमीकंडक्टर संयत्रों को किया जाएगा शुरूकेंद्रीय मंत्री के कहा कि इस वर्ष चार सेमीकंडक्टर संयंत्रों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में अब कुल रोजगार की संख्या 25 लाख हैं, जिनमें से कई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में एक ही स्थान पर 5,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। कुछ यूनिट्स में तो एक ही स्थान पर 40,000 तक कर्मचारी कार्यरत हैं।24 नए चिप डिजाइन प्रोजेक्ट्स को केन्द्र ने दी थी मंजूरी इससे पहले, केंद्र सरकार ने रविवार को डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (डीएलआई) के तहत भारतीय सेमीकंडक्टर यानी चिप बनाने वाले उद्योग को मजबूत करने के लिए 24 नए चिप डिजाइन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी। ये प्रोजेक्ट्स वीडियो निगरानी, ड्रोन का पता लगाने, एनर्जी मीटर, माइक्रोप्रोसेसर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ब्रॉडबैंड और आईओटी सिस्टम ऑन-चिप्स (एसओसी) जैसे क्षेत्रों में हैं।तेजी से आगे बढ़ रहीं डीएलआई समर्थित योजनाएंसेमीकंडक्टर चिप डिजाइन चिप बनाने की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा मूल्य जोड़ने वाला हिस्सा है। यह आपूर्ति श्रृंखला में 50 प्रतिशत और फैबलेस सेगमेंट के माध्यम से वैश्विक सेमीकंडक्टर बिक्री में 30-35 प्रतिशत का योगदान देता है। सरकारी बयान में कहा गया कि डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) समर्थित योजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। स्कीम के तहत अब तक 16 टेप-आउट, 6 एएसआईसी चिप्स, 10 पेटेंट और 1,000 से ज्यादा इंजीनियर शामिल हो चुके हैं। साथ ही निजी निवेश भी तीन गुना तक बढ़ा है।

विकसित भारत के विजन को साकार कर रहा जीएसटी 2.0: सरकार का दावा- टैक्स का बोझ कम होने से इकोनाॅमी को मिली मजबूती, खरीदारी भी बढ़ी
नई दिल्ली। पिछले कुछ वर्षों में केन्द्र सरकार ने कई बड़े सुधार किए हैं , जिससे एक आधुनिक, कुशल और नागरिक-हितैषी व्यवस्था का निर्माण हुआ है। इसके तहत 40,000 से ज्यादा बेकार नियम हटाए गए और 1,500 से अधिक पुराने कानूनों को निरस्त किया गया, जिससे देश में काम करना आसान हुआ है। 22 सितंबर से लागू हुआ जीएसटी दरों में बदलाव भी ऐसा ही एक बड़ा सुधार है, जिसका मकसद विकसित भारत के विजन को साकार करना है।79वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि दीपावली तक नए जीएसटी सुधार लाए जाएंगे। इन सुधारों से रोजमर्रा की चीजों पर टैक्स कम होगा। उन्होंने कहा कि इससे आम लोगों पर टैक्स का बोझ कम होगा और यह दीपावली का तोहफा होगा।वित्त मंत्रालय के अनुसार, जीएसटी 2.0 का असर अब दिखने लगा है। लोगों की खरीदारी बढ़ी है, खासकर गाड़ियों जैसे क्षेत्रों में बिक्री ज्यादा हुई है और लोगों का भरोसा भी बढ़ा है। इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।नवंबर महीने में यात्री वाहनों की बिक्री में अच्छी बढ़त देखी गई। त्योहारों के बाद की मांग, जीएसटी दरों में कटौती और शादी के सीजन की वजह से गाड़ियों की बिक्री बढ़ी। एक रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर में खुदरा बिक्री पिछले साल की तुलना में 22 प्रतिशत बढ़ी। वहीं, थोक बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 4.1 लाख यूनिट तक पहुंच गई।इसके अलावा, जीएसटी दरों में बदलाव से राज्यों की कमाई भी बढ़ी है। सितंबर से नवंबर के बीच राज्यों को मिलने वाला जीएसटी राजस्व पिछले साल की तुलना में 5 प्रतिशत ज्यादा रहा। हाल ही में समाप्त हुए शीतकालीन सत्र के दौरान वित्त राज्य मंत्री पंकज चैधरी ने राज्यसभा में कहा कि चालू वित्त वर्ष (2025-26) के सितंबर से नवंबर के दौरान जीएसटी संग्रह 2024-25 की इसी अवधि में 2,46,197 करोड़ रुपए से बढ़कर 2,59,202 करोड़ रुपए हो गया।सरकार का मानना है कि जीएसटी सुधार और व्यापार को आसान बनाने की नीतियों से लोगों की खरीदारी और बढ़ेगी। इससे आने वाले समय में जीएसटी से होने वाली कमाई भी ज्यादा होगी। जीएसटी सुधारों के बाद लोगों का भरोसा बढ़ा है और बैंक से लिए जाने वाले कर्ज में भी बढ़ोतरी हुई है। कई आंकड़े बताते हैं कि जीएसटी सुधारों के बाद देश की आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर और अक्टूबर 2025 के दौरान ई-वे बिल जनरेशन में वार्षिक आधार पर 14.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच कुल जीएसटी संग्रह में 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो बताती है कि मजबूत खपत और नियमों के बेहतर अनुपालन के चलते राजस्व का मूल स्रोत स्थिर बना हुआ है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, अब सरकार का अगला लक्ष्य कस्टम टैक्स को आसान बनाना है।

गोल्ड ने तोड़े सभी रिकार्ड, चांदी की चमक भी बरकरार:फेड के ब्याज दर कटौती की उम्मीदों से मिला सपोर्ट
मुंबई। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव और अमेरिका में अगले साल फेड द्वारा ब्याज दर में कटौती की उम्मीदों के चलते हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन, बुधवार को सोने और फेड द्वारा ब्याज दर में कटौती की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 0.5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 4,500 डॉलर प्रति औंस के पार चली गई। भारतीय बाजार में एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर फरवरी कॉन्ट्रैक्ट वाले सोने का भाव बढ़कर 1,38,676 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया, जो कि अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। वहीं, मार्च कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी 2 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 2,24,300 प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।खबर लिखे जाने तक एमसीएक्स पर सोना 0.45 प्रतिशत यानी 625 रुपए की तेजी के साथ 1,38,510.00 रुपए प्रति 10 ग्राम पर, तो वहीं सिल्वर 4,207 रुपए यानी 1.92 प्रतिशत की शानदार तेजी के साथ 2,23,860.00 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा था। पिछले कुछ समय से सोने और चांदी की कीमतों ने लगातार बढ़ोतरी दर्ज की है और एक के बाद एक नया रिकॉर्ड बनाया है।सत्र के दौरान डॉलर इंडेक्स में करीब 0.20 प्रतिशत की गिरावट आई। डॉलर कमजोर होने से सोना और चांदी विदेशी बाजारों में सस्ते हो गए, जिससे इनकी मांग और बढ़ गई। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च के प्रमुख देवर्ष वकील ने कहा कि दुनिया में बढ़ती अनिश्चितता और अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के चलते लोग सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी में निवेश कर रहे हैं। इसी कारण हाजिर सोने ने 4,500 डॉलर प्रति औंस का आंकड़ा पार कर लिया। वहीं चांदी ने भी नया रिकॉर्ड बनाया और अंतरराष्ट्रीय बाजार में 72 डॉलर के पार पहुंच गई।

ग्लोबल चैलेंज के बावजूद इंडियन ईकोनाॅमी मजबूत:आरबीआई गवर्नर का दावा- सहारा बनी कम महंगाई और तेज विकास
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि दुनिया में कई आर्थिक चुनौतियां होने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में तेजी से विकास करने को तैयार है। आरबीआई के दिसंबर बुलेटिन में गवर्नर ने कहा कि महंगाई के कम होने से सरकार और केंद्रीय बैंक को देश के विकास को बढ़ावा देने का अच्छा मौका मिला है। आरबीआई आगे भी देश की जरूरतों के अनुसार सही कदम उठाता रहेगा, ताकि आर्थिक स्थिरता बनी रहे।उन्होंने कहा कि 2025 एक चुनौतीपूर्ण साल रहा, लेकिन इसके बावजूद हम इस साल की उपलब्धियों से संतुष्ट हैं। इस साल देश की अर्थव्यवस्था ने अच्छा प्रदर्शन किया, महंगाई नियंत्रण में रही और बैंकिंग व्यवस्था और मजबूत हुई।उन्होंने बताया कि बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए नियमों में सुधार किया गया। इससे व्यापार करना आसान हुआ, ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ी और वित्तीय व्यवस्था बेहतर हुई। आरबीआई गवर्नर ने कहा, हम भारतीय अर्थव्यवस्था को और अधिक समर्थन देने और देश की तरक्की के लिए एक नई उम्मीद, जोश और दृढ़ संकल्प के साथ नए साल में प्रवेश कर रहे हैं।जीएसटी सुधारों से घटी महंगाईअक्टूबर में लागू हुई नीति के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था में महंगाई बहुत तेजी से घटी है और यह अभूतपूर्व रूप से निचले स्तर पर पहुंच गई है। फ्लेक्सिबल इन्फ्लेशन टारगेटिंग (आईआईटी) को अपनाने के बाद पहली बार वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में औसत महंगाई दर 1.7 प्रतिशत रही, जो अब तक का सबसे कम स्तर है। अक्टूबर 2025 में यह और गिरकर सिर्फ 0.3 प्रतिशत रह गई। दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि 8.2 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिसका कारण त्योहारी सीजन में ज्यादा खर्च और जीएसटी दरों में सुधार रहा।छह महीनों में महंगाई दर 2.2 और विकास दर रहेगी 8.0 फीसदीमल्होत्रा ने आगे कहा कि पहले छह महीनों में महंगाई 2.2 प्रतिशत और विकास दर 8.0 प्रतिशत रही, जो श्गोल्डीलॉक्स पीरियडश् का संकेत है, यानी न ज्यादा महंगाई और न कम विकास। आने वाले समय में अच्छी खेती, कम महंगाई, मजबूत कंपनियां और बेहतर बैंकिंग व्यवस्था जैसे घरेलू कारक देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद करेंगी। गवर्नर ने कहा कि सुधार संबंधी पहलों को जारी रखने से विकास को और अधिक गति मिलेगी।

आाईबीएम ने बड़े अभियान का किया ऐलान:2030 तक 50 लाख भारतीय युवाओं को एडवांस टेक्लोलाॅजी से करेगा प्रशिक्षित
नई दिल्ली। आईबीएम ने शुक्रवार को भारत में कौशल विकास के लिए एक बड़े अभियान की घोषणा की है। इसमें कहा गया है कि वह 2030 तक 50 लाख भारतीय छात्रों और युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर सुरक्षा और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उन्नत तकनीकों में प्रशिक्षित करेगा। यह पहल आईबीएम स्किल्सबिल्ड के माध्यम से चलाई जाएगी, जिसका उद्देश्य देश में भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण करना है और छात्रों और वयस्कों को डिजिटल और नौकरी केंद्रित कौशल तक आसान पहुंच प्रदान करना है। आईबीएम ने कहा कि इस कार्यक्रम के जरिए उन्नत तकनीक की शिक्षा को अधिक समावेशी और सुलभ बनाया जाएगा, जिसके तहत स्कूल, विश्वविद्यालय और व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में एआई और उभरती तकनीकी शिक्षा का विस्तार किया जाएगा।आईबीएम का मकसद छात्रों-शिक्षकों को अनुभव प्रदान करनाआईबीएम, ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर एआई-केंद्रित पाठ्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण, हैकथॉन और इंटर्नशिप जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देगा, जिसका मकसद छात्रों और शिक्षकों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है। आईबीएम के चेयरमैन और सीईओ अरविंद कृष्णा ने कहा कि भारत में एआई और क्वांटम तकनीक में वैश्विक नेतृत्व करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि इस योजना से युवाओं को नई चीजें सीखने, नवाचार और देश के विकास में मदद करने का मौका मिलेगा।आईबीएम स्कूलों में एआई शिक्षा को किया जा रहा मजबूतआईबीएम स्कूलों में एआई शिक्षा को मजबूत कर रहा है। वरिष्ठ माध्यमिक छात्रों के लिए एआई पाठ्यक्रम विकसित किया जा रहा है और शिक्षकों को एआई प्रोजेक्ट कुकबुक, शिक्षक मार्गदर्शिका और समझाने वाले मॉड्यूल जैसी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इसका उद्देश्य छात्रों को कंप्यूटेशनल सोच और जिम्मेदार एआई की समझ देना है।इस योजना का मुख्य हिस्सा है आईबीएम स्किल्सबिल्ड, जो दुनिया के सबसे बड़े और आसान डिजिटल शिक्षा प्लेटफॉर्म में से एक है। यह 1,000 से ज्यादा कोर्सेस प्रदान करता है, जिनमें एआई, साइबर सुरक्षा, क्वांटम कंप्यूटिंग, क्लाउड, डेटा और नौकरी से जुड़े कौशल शामिल हैं।

कर्मचारियों को पीएफ से जोड़ने ईपीएफओ की नई पहल: कंपनियों को मिलेगा 6 महीने का समय, कहा- खास योजना का उठाएं लाभ
नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने कर्मचारियों को पीएफ से जोड़ने के लिए नई पहल शुरू की है। ईपीएफओ ने गुरुवार को नियोक्ताओं (कंपनियों) से कहा है कि वह उसकी एक खास योजना का लाभ उठाएं। इस योजना के तहत कंपनियों को 6 महीने का समय दिया जा रहा है, ताकि वह उन कर्मचारियों को पीएफ (प्रोविडेंट फंड) में शामिल कर सकें, जिन्हें पहले इसमें नहीं जोड़ा गया था। यह मौका 1 जुलाई 2017 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच छूटे कर्मचारियों के लिए है। ईपीएफओ ने इस योजना का नाम कर्मचारी नामांकन योजना यानी एंप्लाइज एनरोलमेंट स्कीम (ईईएस)-2025 रखा है। यह एक बार मिलने वाली विशेष योजना है, जिसका मकसद ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को पीएफ की सुविधा देना और पहले हुई गलतियों को आसानी से ठीक करना है।कंपनियां स्वेच्छा से पात्र कर्मचारियों को पीएफ में कर सकती हैं शामिलइस योजना के तहत नवंबर 2025 से 6 महीने तक का समय दिया जाएगा। इस दौरान कंपनियां स्वेच्छा से ऐसे पात्र कर्मचारियों को पीएफ में शामिल कर सकती हैं, जिन्हें पहले शामिल नहीं किया गया था। जो संस्थान या कंपनी अभी तक ईपीएफ कानून के तहत पंजीकृत नहीं हैं, वे भी इस योजना के जरिए रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं और अपने कर्मचारियों को पीएफ में जोड़ सकते हैं।ईईएस-2025 योजना के तहत, अगर पहले कर्मचारियों के पीएफ का पैसा नहीं काटा गया था, तो इस योजना में कंपनी को केवल नियोक्ता वाला हिस्सा (एंप्लॉयर शेयर) जमा करना होगा। इसके साथ ही धारा 7क्यू के तहत ब्याज, लागू प्रशासनिक शुल्क और 100 रुपए का जुर्माना देना होगा, तभी इसे पूरी तरह सही माना जाएगा।जांच के दायरे वाले संस्थाएं भी ले सकती है योजना का लाभजिन संस्थानों पर जांच चल रही है, वह भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। इसके अलावा, कुछ शर्तों के साथ प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत मिलने वाले फायदे भी इस योजना में शामिल हैं।ईपीएफओ ने कंपनियों से की अपीलईपीएफओ ने सभी नियोक्ताओं से अपील की है कि वह इस एक बार मिलने वाले अवसर का पूरा लाभ उठाएं और “सबके लिए सामाजिक सुरक्षा” के लक्ष्य में योगदान दें। ईपीएफओ ऐसे नियोक्ताओं को एसएमएस और ईमेल के जरिए जानकारी देगा, जिन्होंने पहले नियमों का पालन नहीं किया था। बयान में कहा गया है कि ईपीएफओ ने इस योजना के बारे में जानकारी देने के लिए देश भर में जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। साथ ही, सरकार के अलग-अलग विभागों से भी बात की जा रही है, ताकि ठेके पर काम करने वाले और अस्थायी कर्मचारियों को भी पीएफ की सुविधा मिल सके।

भारत में डिजिटल पेमेंट की ऐतिहासिक बढ़ोतरी:देश में UPI QR कोड की संख्या पहुंची 70.9 करोड़ पर, जुलाई से सितंबर के बीच 59 अरब का हुआट्रांजैक्शन
मुंबई। भारत में डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहा है और अब रोजमर्रा की खरीदारी में खासकर दुकानों पर लोग इसका ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। जुलाई से सितंबर के बीच यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) माध्यम से 59.33 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जो पिछले साल के मुकाबले 33.5 प्रतिशत ज्यादा है। इस अवधि में कुल 74.84 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ, जो पिछले साल की तुलना में 21 प्रतिशत ज्यादा है। यह वृद्धि देश में डिजिटल पेमेंट्स के तेजी से बढ़ने को दिखाता है।यहां पर हो रहा क्यूआर कोड का इस्तेमालवर्ल्डलाइन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अब 70.9 करोड़ सक्रिय यूपीआई क्यूआर कोड हो गए हैं। यह संख्या जुलाई, 2024 से अब तक 21 प्रतिशत बढ़ी है। इन क्यूआर कोड्स का इस्तेमाल अब किराना दुकानों, दवाइयों की दुकानों, बस-रेलवे स्टेशनों और गांवों तक पहुंच चुका है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, यूपीआई का इस्तेमाल अब दुकानों पर भुगतान (पीटूएमदृ पर्सन टू मर्चेंट) के लिए ज्यादा हो रहा है। दुकानों पर होने वाले लेन-देन में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो कि 37.46 अरब ट्रांजैक्शन तक पहुंच गई है। लोगों के बीच होने वाले लेन-देन (पीटूपीदृ पर्सन टू पर्सन) में 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो कि 21.65 अरब ट्रांजैक्शन तक पहुंच गई है।हालांकि अगर हम एक ट्रांजैक्शन की औसत रकम देखें तो वह घटकर 1,262 रुपए रह गई है, जो पहले 1,363 रुपए थी। इसका मतलब यह है कि लोग अब यूपीआई का ज्यादा इस्तेमाल छोटी-मोटी खरीदारी जैसे खाना, यात्रा, दवाइयां और अन्य रोजमर्रा की चीजों के लिए कर रहे हैं।पीओएस मशीनों की संख्या बढ़ीरिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनों की संख्या भी बढ़ी है। ये मशीनें अब 35 प्रतिशत बढ़कर 12.12 मिलियन हो गई हैं। हालांकि, भारत क्यूआर की संख्या में थोड़ी कमी आई है, क्योंकि लोग अब यूपीआई क्यूआर कोड का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ ही क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड से होने वाले लेन-देन में भी बदलाव आया है। क्रेडिट कार्ड से लेन-देन में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि डेबिट कार्ड से लेन-देन में 22 प्रतिशत की कमी आई है, क्योंकि लोग अब छोटी रकम के लेन-देन के लिए यूपीआई का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।मोबाइल और टैप आधारित पेमेंट्स भी बढ़ रहे तेजी सेमोबाइल और टैप आधारित पेमेंट्स भी तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर शहरों में और मेट्रो, टैक्सी जैसी सेवाओं में लोग अब बिना कार्ड स्वाइप किए मोबाइल से पेमेंट करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।आने वाले समय में भारत में यूपीआई का इस्तेमाल और भी बढ़ने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में इंटरऑपरेबल क्यूआर कोड को आम इस्तेमाल में लाया जाएगा, जिससे लोग पेट्रोल पंप, अस्पतालों, सार्वजनिक सेवाओं और यात्रा जैसे स्थानों पर एक ही क्यूआर कोड से पेमेंट कर सकेंगे।

सौर ऊर्जा से जगमगा रहे देश के 2,626 रेलवे स्टेशन:स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल में रेलवे की बड़ी उपलब्धि, बिजली खर्च में भी आई कमी
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस साल नवंबर तक रेलवे ने अपने कामकाज के लिए 898 मेगावाट सौर ऊर्जा संयत्र शुरू कर दिए हैं। साल 2014 में रेलवे सिर्फ 3.68 मेगावाट सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करता था, जो कि अब बढ़कर 898 मेगावाट हो गया है। इस दौरान सौर ऊर्जा का उपयोग करीब 244 गुना बढ़ गया है।रेल मंत्रालय के मुताबिक, इस समय देश के 2,626 रेलवे स्टेशन सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे रेलवे के बिजली खर्च में कमी आ रही है और पर्यावरण को भी कम नुकसान हो रहा है। रेलवे ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में सौर ऊर्जा के उपयोग की रफ्तार और तेज हुई है। नवंबर तक 318 नए रेलवे स्टेशन सौर ऊर्जा नेटवर्क से जोड़े गए हैं। इसके साथ ही सौर ऊर्जा का उपयोग करने वाले स्टेशनों की कुल संख्या 2,626 हो गई है।कुल शुरू की गई सौर ऊर्जा में से 629 मेगावाट का उपयोग ट्रेनों को चलाने के लिए किया जा रहा है। इससे सीधे तौर पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों को बिजली मिलती है। बाकी 269 मेगावाट ऊर्जा का उपयोग स्टेशन की लाइट, वर्कशॉप, सर्विस बिल्डिंग और रेलवे कॉलोनियों के लिए किया जा रहा है।रेलवे के कामकाज को बेहतर बना रहे सौर ऊर्जा का उपयोगसौर ऊर्जा का यह संतुलित उपयोग सामान्य बिजली पर निर्भरता को कम करता है और रेलवे के कामकाज को ज्यादा बेहतर बनाता है। मंत्रालय के अनुसार, रेलवे स्टेशनों, इमारतों और रेलवे की जमीन पर लगाए गए सोलर प्लांट भारतीय रेलवे की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो रही है और प्रदूषण कम करने में मदद मिल रही है। ऐसे कदम यह दिखाते हैं कि भारतीय रेलवे 2030 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।वंदे भारत ने भारत में बदली रेल यात्रा की परिभाषाइस बीच, भारतीय रेलवे की वंदे भारत एक्सप्रेस ने फरवरी 2019 में शुरू होने के बाद से भारत में रेल यात्रा की परिभाषा बदल दी है। आज देश के बड़े शहरों को जोड़ने वाली 164 वंदे भारत ट्रेन सेवाएं चल रही हैं। यह ट्रेनें यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव प्रदान करती हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस की लोकप्रियता इस बात से समझी जा सकती है कि 2019 से अब तक 7.5 करोड़ से ज्यादा यात्री इस हाईटेक ट्रेन में सफर कर चुके हैं।

एमसीएक्स पर चमकी चांदी:ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के चलते बनाया नया रिकार्ड, जानें कहां पर पहुंचे सिल्वर के दाम
मुंबई। पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव के बाद भी कीमती धातुओं (गोल्ड और सिल्वर) की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं। इस बीच मजबूत अंतरराष्ट्रीय संकेतों और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद के चलते बुधवार को चांदी की कीमतों ने एक नया रिकॉर्ड बनाया। बुधवार के कारोबारी सत्र में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सिल्वर की कीमतें 4 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल के साथ 2,06,111 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गईं, जो कि अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। हालांकि खबर लिखे जाने तक (दोपहर 12.30 बजे) मार्च डिलीवरी वाला सिल्वर 7,417 रुपए (3.75 प्रतिशत) की तेजी के साथ 2,05,172 रुपए प्रति किलोग्राम पर था।सोने की कीमतों में देखने को मिला उतार-चढ़ाववहीं अगर सोने की बात करें, तो कारोबारी सत्र में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। खबर लिखे जाने तक एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला गोल्ड 65 रुपए यानी 0.05 प्रतिशत गिरकर 1,34,344 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करते हुए दिखाई दिया। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सोने की कीमत 1,35,500 रुपए से ऊपर टिकती है, तो इसमें और तेजी आ सकती है और इसके दाम 1,36,000 से 1,38,000 रुपए तक जा सकते हैं। चांदी की कीमतों में जोरदार तेजीअंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। स्पॉट सिल्वर 2.8 प्रतिशत बढ़कर 65.63 डॉलर प्रति औंस हो गई, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। सोने की कीमत भी थोड़ी बढ़कर 4,321.56 डॉलर प्रति औंस हो गई, जिसकी वजह अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना था। अमेरिका के कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद सिल्वर की कीमतों में तेज उछाल आया, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें मजबूत हुईं।

इंडियन रेलवे की बड़ी उपलब्धि:हाई-टेक एलएचबी कोचों के प्रोडक्शन में 18 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने उच्च तकनीक वाले लिंके हॉफमैन बुश (एलएचबी) कोचों के उत्पादन में लगातार बेहतरी दिखाई है, जो यात्रियों के लिए बेहतर सुरक्षा, सुविधाजनक यात्रा और रेलवे के बेहतर कार्य प्रदर्शन को दर्शाते हैं। चालू वित्त वर्ष 2025-26 (नवंबर 2025 तक) के दौरान कुल 4,224 एलएचबी कोच बनाए गए हैं। यह पिछले साल की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है, जब केवल 3,590 कोच बनाए गए थे। रविवार को रेल मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, उत्पादन में यह वृद्धि रेलवे के विभिन्न कारखानों की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और बेहतर उत्पादन योजना का परिणाम है।इस अवधि में चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) ने 1,659 एलएचबी कोच बनाए, जबकि रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्ट्री (एमसीएफ) ने 1,234 कोच और कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ) ने 1,331 कोच बनाए, जिससे कुल मिलाकर एलएचबी कोचों के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है।दीर्घकालिक तुलना में पिछले कुछ वर्षों में काफी प्रगति हुई है। 2014 से 2025 तक भारतीय रेलवे ने 42,600 एलएचबी कोच बनाए, जो 2004 से 2014 के बीच बने 2,300 कोच से 18 गुना ज्यादा है। यह विस्तार सुरक्षा मानकों और कम रख-रखाव की विशेषताओं के कारण एलएचबी कोचों की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।एलएचबी कोच आधुनिक, सुरक्षित और आरामदायक यात्री कोच हैं, जो जर्मन डिजाइन से विकसित हैं और आधुनिक सुविधाएं जैसे स्टेनलेस स्टील बॉडी, एडवांस्ड डिस्क ब्रेक्स और 160 किमीध्घंटा तक की उच्च गति प्रदान करते हैं। इन कोचों में एंटी-क्लाइम्बिंग डिवाइस जैसे सुरक्षा फीचर्स होते हैं, जो पुराने आईसीएफ कोचों की जगह लेते हैं और राजधानी और शताबदी एक्सप्रेस जैसी लंबी दूरी की ट्रेनों में इस्तेमाल होते हैं।भारतीय रेलवे आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जिससे घरेलू उत्पादन में वृद्धि हो रही है और आयात पर निर्भरता कम हो रही है। भारतीय रेलवे का लक्ष्य उत्पादन क्षमता को और बढ़ाना है, ताकि देश की बढ़ती यातायात आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके और यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिल सके।


