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आईसीसी टी-20 रैंकिंग:न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाजों का दिखा जलवा, बल्लेबाजों की लिस्ट में अभिषेक शीर्ष पर कायम
दुबई। आईसीसी ने बुधवार को टी-20 फार्मेट की रैंकिंग जारी कर दी है। साउथ अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज में शानदार प्रदर्शन के साथ पुरुषों की आईसीसी टी20 गेंदबाजी रैंकिंग में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाजों को फायदा मिला है। इस लिस्ट में चार कीवी तेज गेंदबाजों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के बीच टी20 सीरीज के शुरुआती चार मुकाबले उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं, जिसमें दोनों टीमों के खिलाड़ियों के प्रदर्शन के कारण रैंकिंग में काफी फेरबदल हुआ।अनुभवी तेज गेंदबाज लॉकी फर्ग्यूसन को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिला। फर्ग्यूसन ने ऑकलैंड में मैच जिताऊ स्पेल डाला था। उन्होंने महज 9 रन देकर 1 विकेट हासिल किया था, जिसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। इस प्रदर्शन ने उन्हें 12 पायदान ऊपर चढ़ाकर 39वें स्थान पर पहुंचा दिया है। उनके साथी तेज गेंदबाज बेन सियर्स 20 पायदान ऊपर चढ़कर 59वें स्थान पर पहुंच गए हैं। काइल जैमीसन ने पांच पायदान की छलांग लगाई है। वह 76वें स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं, जैकरी फॉल्क्स 8 पायदान ऊपर चढ़कर 81वें स्थान पर पहुंच गए हैं।साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों ने भी रैंकिंग में किया सुधारसाउथ अफ्रीकी गेंदबाजों ने भी रैंकिंग में सुधार किया है। केशव महाराज ने 5 पायदान की छलांग लगाकर 47वां स्थान अपने नाम कर लिया है। उनके साथी खिलाड़ी ओटनील बार्टमैन सात पायदान ऊपर चढ़कर 66वें स्थान पर पहुंच गए है। गेराल्ड कोएत्जी 46 पायदान ऊपर चढ़कर 88वें स्थान पर पहुंच गए हैं। ऑलराउंडर्स की लिस्ट में जॉर्ज लिंडे बल्ले और गेंद दोनों से अहम योगदान देने के बाद एक पायदान ऊपर चढ़कर 22वें स्थान पर पहुंच गए हैं। टी20 ऑलराउंडर रैंकिंग में सिकंदर रजा ने शीर्ष स्थान बरकरार रखा है।दो पायदान ऊपर चढ़े सूर्याभारत के अभिषेक शर्मा टी20 बल्लेबाजी रैंकिंग में शीर्ष पर बने हुए हैं। वह फिलहाल हमवतन ईशान किशन से आगे चल रहे हैं। हालांकि, भारत की टी20 विश्व कप विजेता टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव दो पायदान ऊपर चढ़कर सातवें स्थान पर पहुंच गए हैं। न्यूजीलैंड के सलामी बल्लेबाज टिम रॉबिन्सन उन चुनिंदा बल्लेबाजों में से एक रहे जिन्होंने रैंकिंग में सुधार किया। वेलिंगटन में 32 रनों की पारी खेलने के बाद वह 2 पायदान ऊपर चढ़कर 34वें स्थान पर पहुंच गए हैं।

भारतीय शेयर बाजार में फिर लौटी रौनक:बड़ी बढ़त लेकर बंद हुआ सेंसेक्स, निफ्टी में भी दिखी तेजी
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में बड़ी तेजी के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,205 अंक या 1.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 75,273.45 और निफ्टी 394.05 अंक या 1.72 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,306.45 पर था। बाजार में चैतरफा तेजी थी और करीब सभी सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (3.51 प्रतिशत), निफ्टी रियल्टी (2.69 प्रतिशत), निफ्टी पीएसयू बैंक (2.67 प्रतिशत), निफ्टी मेटल (2.56 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस (2.35 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (2.22 प्रतिशत) और निफ्टी हेल्थकेयर (2.05 प्रतिशत) की तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुए।मिडकैप और स्मॉलकैप में भी दिखी तेजीलार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,244.05 अंक या 2.30 प्रतिशत की तेजी के साथ 55,331.05 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 401.35 अंक 2.59 प्रतिशत की बढ़त के साथ 15,896.55 पर था। 4.31 करोड़ हुआ लिस्टेड कंपनियों का मार्केटकैबसेंसेक्स पैक में अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, टाइटन, इंडिगो, ट्रेंट, एमएंडएम, टाटा स्टील, एसबीआई, सन फार्मा, बजाज फिनसर्व, अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स और एचडीएफसी बैंक गेनर्स थे। टेक महिंद्रा, पावर ग्रिड, टीसीएस और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लूजर्स थे। बाजार में तेजी के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केटकैप करीब 8 लाख करोड़ रुपए बढ़कर 4.31 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि पहले 4.23 लाख करोड़ रुपए था।

खाद की कालाबाजारी-जमाखोरी करने वालों की अब खैर नहीं:मिडिल ईस्ट वार के बीच केन्द्रीय कृषि मंत्री ने हाईलेवल मीटिंग, दिए सख्त निर्देश
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच खाद की आपूर्ति मजबूत करने, कालाबाजारी रोकने के लिए केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को हाईलेवल मीटिंग की। बैठक में आने वाले खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए तैयारियों की भी समीक्षा की गई। बैठक में शिवराज ने सख्त निर्देश दिए हैं कि की आपूर्ति पूरे देश में बराबर और बिना रुकावट के होनी चाहिए। खाद-बीज की कालाबाजारी करने वालों पर हो सख्त एक्शनमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि खाद और बीज की कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक संकट का फायदा उठाने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को भी इस दिशा में कड़े कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।बीज सुखाने के लिए गैसों की उपलब्धता की भी समीक्षाबैठक में कृषि रसायनों और बीज सुखाने के लिए जरूरी गैसों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा दूध और अन्य कृषि उत्पादों के लिए पैकेजिंग सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने पेट्रोलियम मंत्रालय और अन्य विभागों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए ताकि सप्लाई में कोई बाधा न आए।कृषि क्षेत्र की माॅनिटरिंग के लिए बनाया गया स्पेशल सेलकृषि क्षेत्र की लगातार निगरानी के लिए एक स्पेशल सेल बनाया गया है, जो चैबीसों घंटे काम करेगा। यह सेल हर हफ्ते खाद, बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता पर रिपोर्ट सीधे कृषि मंत्री को देगा। कृषि मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि संकट के समय उन्हें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और सरकार किसानों तक जरूरी संसाधन समय पर पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।10 वर्षो में 44 फीसदी बढ़ा कृषि उत्पादनउन्होंने यह भी बताया कि पिछले 10 वर्षों में देश में कृषि उत्पादन करीब 44 प्रतिशत बढ़ा है और कई किसानों की आय दोगुनी हुई है। केंद्र सरकार किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर रिकॉर्ड खरीद भी शामिल है।

देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टाॅक:अफवाहों पर आयल कंपनियों ने स्पष्ट की स्थिति, दिलाया भरोसा भी
नई दिल्ली। देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच तेल कंपनियों ने साफ किया है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है और कहीं भी ईंधन की कोई कमी नहीं है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें।कंपनी ने स्पष्ट कहा कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है, पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और सप्लाई चेन बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चल रही है। भारत पेट्रोलियम ने यह भी बताया कि भारत पेट्रोल और डीजल का नेट एक्सपोर्टर है और कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के पर्याप्त भंडार मौजूद हैं।घबराहट में पेट्रोल पंपों पर न लगाए भीड़ः बीपीसीएल ने की अपीलबीपीसीएल ने लोगों से अपील की कि वे घबराहट में पेट्रोल पंपों पर भीड़ न लगाएं और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। बीपीसीएल ने यह भी भरोसा दिलाया कि वह निर्बाध ईंधन आपूर्ति के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी तरह हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने भी सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि देश भर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है।कंपनी ने ग्राहकों से कहा कि वे अफवाहों से भ्रमित न हों और सामान्य रूप से ईंधन का उपयोग जारी रखें। एचपीसीएल ने भरोसा दिलाया कि उसका नेटवर्क निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सक्रिय है।सरकार ने भी स्पष्ट की स्थितिइस बीच, सरकार ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि देश की सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और ईंधन का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने मंगलवार को जानकारी दी कि देश में 18,700 टन कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति की जा चुकी है और 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंप सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं।उन्होंने बताया कि पीएनजी कनेक्शन का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है और सिर्फ एक दिन में 7,500 नए घरेलू और वाणिज्यिक कनेक्शन दिए गए हैं। सरकार एलपीजी आपूर्ति को और मजबूत करने के लिए लगातार नए स्रोतों पर काम कर रही है, ताकि किसी भी तरह की कमी न हो।जमाखोरी-कालाबाजारी रोकने सख्त कार्रवाई जारीसरकार ने यह भी बताया कि एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए देश भर में सख्त कार्रवाई जारी है। अब तक 642 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 155 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पिछले 24 घंटों में करीब 3,400 छापे मारे गए और लगभग 1,000 सिलेंडर जब्त किए गए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश भर में सभी रिटेल आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है।

होर्मुज को लेकर ईरान से आई राहत भरी खबर:भारतीय जहाजों के लिए भी है गुड न्यूज, पर तेहरान ने रखी हैं सख्त शर्तें
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, खासकर स्ट्रेट आफ होर्मुज को लेकर। यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 फीसदी कच्चे तेल और एलपीजी परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल ही में इस मार्ग के बाधित होने से कई देशों के जहाज फंस गए थे, जिनमें भारत के भी 20 जहाज शामिल हैं।भारत सरकार ने पुष्टि की है कि ये जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में खड़े हैं और आगे बढ़ने के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच ईरान की ओर से राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सीमित रूप से फिर से खोलने के लिए तैयार है, लेकिन इसके साथ कुछ सख्त शर्तें भी लागू की जाएंगी।गैर शत्रुतापूर्ण देशों के जहाजों को ही मिलेगी अनुमतिईरान द्वारा संयुक्त राष्ट्र को भेजे गए संदेश के अनुसार, केवल “गैर-शत्रुतापूर्ण” देशों के जहाजों को ही होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए संबंधित जहाजों को ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा और निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। हालांकि, यूनाइटेड स्टेट और इजरायल से जुड़े जहाजों पर पूरी तरह प्रतिबंध जारी रहेगा। इतना ही नहीं, ईरान ने उन देशों के जहाजों पर भी रोक लगाने की बात कही है, जो उसके खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं।यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब क्षेत्र में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।भारत सरकार ने ईंधन संकट से किया इनकारभारत के लिए राहत की बात यह है कि सरकार ने देश में किसी भी प्रकार के ईंधन संकट से इनकार किया है। शिपिंग, जलमार्ग और पोर्ट मंत्रालय के अनुसार, देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है। करीब एक लाख पेट्रोल पंप सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं।होर्मुज स्ट्रेट बंद रहा तो पूरी दुनिया पर पड़ेगा असरविशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से बंद रहता, तो इसका असर न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ता। फिलहाल ईरान के इस सीमित राहत वाले फैसले से वैश्विक बाजार को कुछ हद तक स्थिरता मिलने की उम्मीद है, लेकिन हालात अब भी संवेदनशील बने हुए हैं।

बंद दरवाजों के पीछे खेला जाएगा पीएसएल:कंगाल पीसीबी की फिर हुई इंटरनेशनल बेइज्जती
नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) हमेशा से ही पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) की तुलना इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से करता रहा है। हालांकि, बीसीसीआई की तरह पीसीबी कभी भी पीएसएल का आयोजन नहीं कर सका है। इसका ताजा उदाहरण आगामी सीजन की शुरुआत से पहले ही सामने आ गया है। पाकिस्तान सुपर लीग 2026 का आयोजन बंद दरवाजों के पीछे किया जाएगा, मतलब दर्शकों को स्टेडियम में आने की परमिशन नहीं होगी। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि पीएसएल के सभी मुकाबले अब छह की जगह महज दो शहरों में खेले जाएंगे। पीसीबी ने अपने इस फैसले का कारण पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईंधन संकट को बताया है। पीसीबी ने खर्च कटौती का दिया हवालापाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का कहना है कि खर्चे में कटौती करने की खातिर टूर्नामेंट का आयोजन सिर्फ दो वेन्यू पर करने का निर्णय लिया गया है। पीएसएल की शुरुआत 26 मार्च से होनी है और फाइनल मुकाबला 3 मई को खेला जाना है।आईपीएल के आयोजनों में कोई कमी नहींअमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव का असर जितना पाकिस्तान पर हो रहा है, उतना ही भारत पर भी हो रहा है। तेल की कीमतों में यहां भी उछाल आया है और बाकी चीजों के दाम भारत में भी बढ़े हैं। हालांकि, इसके बावजूद आईपीएल 2026 के आयोजन में कोई कमी नहीं रखी गई है। पीएसएल का आयोजन तो छह शहरों में किया जाना था, जबकि आईपीएल 2026 कुल 10 शहरों में खेला जाना है। इसके बावजूद खर्चे में कटौती के नाम पर बीसीसीआई ने टूर्नामेंट के शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं किया है। यह दर्शाता है कि पीसीबी के मुकाबले बीसीसीआई का कद काफी ऊंचा है।पीएसएल छोड़कर आईपीएल से जुड़ रहे विदेशी खिलाड़ीसिर्फ यही नहीं, बल्कि इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने के लिए विदेशी खिलाड़ी बिना कुछ सोचे ही पाकिस्तान सुपर लीग को छोड़कर भारत आ रहे हैं। ब्लेसिंग मुजारबानी और दासुन शनाका इसके ताजा उदाहरण भी हैं। पीसीबी के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने पीएसएल छोड़कर आईपीएल में खेलने जा रहे खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात भी कही है। हालांकि, इसके बावजूद खिलाड़ी आईपीएल की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। इसका पहला कारण आईपीएल में मिलने वाला पैसा तो है ही, लेकिन इसके साथ ही पीएसएल के मुकाबले आईपीएल की ज्यादा लोकप्रियता भी है। पीएसएल को लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के दावे एक बार फिर खोखले साबित हो रहे हैं। वहीं, आईपीएल की बराबरी करना पीएसएल और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के लिए अभी दूर की कौड़ी ही लगता है।

मिडिल ईस्ट वार:जंग जारी रही तो होंगे घातक परिणाम, राज्यसभा से पीएम मोदी ने देश को किया आगाह, और क्या कहा पढ़े खबर
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया जंग पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मंगलवार को राज्यसभा में कहा है कि इस युद्ध ने पूरी दुनिया में बड़ा ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। अगर यह जंग जारी रही, तो इसके गंभीर दुष्परिणाम होंगे। जिसका असर भारत पर भी पड़ रहा है। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने जंग छोड़कर संवाद का रास्ता सुझाया है। हम सभी संबंधित पक्षों के संपर्क में हैं।पीएम ने कहा कि हालात चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन भारत लगातार कूटनीतिक प्रयासों के जरिए समाधान की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भारत हर सेक्टर में यह प्रयास कर रहा है कि किसी भी सेक्टर में दूसरे देशों पर बहुत अधिक निर्भरता न हो। पीएम ने शिप बिल्डिंग से लेकर रेयर अर्थ मिनरल्स तक, आत्मनिर्भरता के प्रयास गिनाए और कहा इस संकट ने दुनिया को हिला दिया है। इससे रिकवर करने में भी दुनिया को काफी समय लगेगा। सरकार पल-पल बदलते हालात पर नजर रखे हुए है।समस्या के समाधान के लिए भारत ने सुझाया संवाद का रास्तापीएम ने कहा कि उन्होंने क्षेत्र के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर दो दौर की बातचीत की है और ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी निरंतर संवाद जारी है। भारत ने इस समस्या के समाधान के लिए संवाद का ही रास्ता सुझाया है। उन्होंने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बड़ी संख्या में जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें भारतीय क्रू मेंबर्स भी शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में इस तरह की रुकावट और कमर्शियल जहाजों पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। भारत इस स्थिति में अपने जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।भारत ने हमलों का किया विरोधउन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने नागरिकों, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और परिवहन से जुड़े ढांचों पर हमलों का कड़ा विरोध किया है। किसी भी तरह का हिंसक संघर्ष मानवता के हित में नहीं है, और भारत सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांति के रास्ते पर आने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।भारतीयों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकताविदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इस संकट के दौरान अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित वापस लौटे हैं। केवल ईरान से ही 1,000 से अधिक भारतीय लौटे हैं, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल हैं।संघर्ष में कुछ भारतीयों की भी हुई मौतप्रधानमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि इस संघर्ष के दौरान कुछ भारतीयों की मौत हुई है और कुछ घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दी जा रही है और घायलों के बेहतर इलाज की व्यवस्था की गई है। सरकार इस कठिन समय में पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी देशों से सकारात्मक आश्वासन भी मिला है।पीएम ने देश की जनता को दिलाया भरोसाऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में कई देशों से तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत पहुंचे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में भी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि देश की जरूरतों से जुड़े सभी आवश्यक सामान सुरक्षित रूप से भारत में पहुंचते रहें।

मौके का फायदा:तेल को लेकर ईरान ने भारत को दिया आफर, पर रख दी कठिन शर्तें, पढ़े खबर
नई दिल्ली। ईरान के तेल को लेकर वैश्विक बाजार में नई हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय संघर्ष के बीच कच्चे तेल और गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसी बीच अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईरान का तेल फिर उपलब्ध हो गया है। इस मौके का फायदा उठाते हुए ईरान ने भारत को भी तेल बेचने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन इसके साथ कुछ कठिन शर्तें जुड़ी हुई हैं।सूत्रों के अनुसार, ईरान भारत को जो तेल ऑफर कर रहा है, उसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड से 6 से 8 डॉलर प्रति बैरल अधिक है। यह स्थिति भारत के लिए चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि आमतौर पर प्रतिबंधों के कारण ईरान अपना तेल छूट देकर बेचता रहा है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, ने मई 2019 के बाद से अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था।ऊर्जा बाजार पर बढ़ा दबाव मौजूदा हालात में होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो रही है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ गया है। भारत को भी इसका असर झेलना पड़ रहा है, खासकर एलपीजी (रसोई गैस) की कमी के रूप में।तेल का भुगतान डाॅलर में चाहती हैं ईरानी ट्रेडर्स और सरकारी कंपनियां ईरान की ओर से एक और बड़ी शर्त पेमेंट को लेकर रखी गई है। ईरानी ट्रेडर्स और सरकारी कंपनियां तेल का भुगतान डॉलर में चाहती हैं, हालांकि कुछ मामलों में रुपये में भुगतान की भी बात सामने आई है। लेकिन मुख्य समस्या यह है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम तीव्र से बाहर है, जिससे भुगतान प्रक्रिया जटिल हो जाती है।ट्रम्प प्रशासन ने दी है 30 दिनों की छूटअमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने हाल ही में 30 दिनों की सीमित छूट दी है, जिसके तहत पहले से समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की खरीद की अनुमति है। इस छूट के तहत 20 मार्च तक लोड किए गए तेल को 19 अप्रैल तक उतारना होगा और भुगतान सात दिनों के भीतर करना होगा। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियां किसी भी समझौते से पहले भुगतान तंत्र और जोखिमों का आकलन कर रही हैं, ताकि भविष्य में किसी वित्तीय या कानूनी संकट से बचा जा सके।

कोलंबिया विमान हादसा:मरने वालों की संख्या पहुंची 65 के पार, 57 घायल, सेना के विमान में सवार थे 125 यात्री, इनमें 11 क्रू मेंबर
बोगोटा। दक्षिणी कोलंबिया के पुटुमायो क्षेत्र में कोलंबियाई सैन्य विमान दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 66 हो गई है, जबकि 57 अन्य घायल हुए हैं। स्थानीय मीडिया ने सैन्य सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक, कोलंबियाई एयरोस्पेस फोर्स (एफएसी) के कमांडर कार्लोस सिल्वा ने एफएसी द्वारा एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा कि सी-130 हरक्यूलिस परिवहन विमान में 114 यात्री और 11 चालक दल के सदस्य सवार थे। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए एक जांच दल भेजा गया है।सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कोलंबियाई वायु सेना के कमांडर फर्नांडो सिल्वा ने कहा कि विमान में 114 सैनिक और 11 चालक दल के सदस्य सवार थे, अधिकारी दुर्घटना के कारणों की जांच कर रहे हैं।दुर्घटना के कारणों का अब तक नहीं चला पताकोलंबिया के रक्षा मंत्री पेड्रो सांचेज ने बताया कि प्यूर्टो लेगुइजामो से उड़ान भरते समय एक परिवहन विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। सेना घटनास्थल पर मौजूद हैं और दुर्घटना के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। सांचेज ने पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि प्रभावित लोगों की सहायता के लिए सभी आवश्यक उपाय सक्रिय कर दिए गए हैं। कुछ घायल सैनिकों को इलाज के लिए राजधानी बोगोटा ले जाया गया है।यह बोले कोलंबिया के राष्ट्रपति कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि विमान में सवार 40 से अधिक लोगों की स्थिति की अभी पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यह दुर्घटना होनी ही नहीं चाहिए थी। उन्होंने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की कमी पर खेद व्यक्त किया, जिसका कारण उन्होंने नौकरशाही संबंधी कठिनाइयोंष्को बताया। राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने दुर्घटनास्थल पर पहुंचकर विमान में सवार लोगों की जान बचाने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया।उड़ान भरने के तुरंत बाद नीचे गिरा विमानसोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए फुटेज में सैनिकों को ले जाने वाला विमान उड़ान भरने के तुरंत बाद तेजी से नीचे गिरता हुआ दिखाई दे रहा है। स्थानीय स्रोत ब्लू रेडियो के अतिरिक्त मीडिया में दुर्घटना के बाद मलबे से भारी धुआं उठता हुआ दिखाया गया है। हालांकि एचटी ने इन दृश्यों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है। ब्लू रेडियो ने बताया कि दुर्घटना आबादी वाले क्षेत्र से केवल 3 किमी दूर हुई।

खत्म होना चाहिए मिडिल ईस्ट वार:पीएम मोदी ने लोकसभा में भारत को रुख को किया स्पष्ट, कहा- नागरिकों-पावर प्लांट में हमले मंजूर नहीं
नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बीते करीब 25 दिनों से चल रही जंग ने दुनिया को संकट में डाल दिया है। मिडिल ईस्ट में आए इस संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमवार को लोकसभा में भारत के रुख को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने इन हमलों का विरोध किया है और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट अस्वीकार्य है। वहीं उन्होंने भारत के सामने आई परिस्थितियों पर बोलते हुए कहा कि सरकार संवेदनशील, सतर्क और हर सहायता के लिए तत्पर है।पीएम मोदी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा, पश्चिमी एशिया के हालात चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि भारत की स्पष्ट भूमिका है कि पश्चिम एशिया में तनाव खत्म होना चाहिए। भारत शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष है और नागरिकों और पावर प्लांट पर हमले मंजूर नहीं हैं। पीएम ने यह भी बताया कि पिछले दो-तीन हफ्तों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस विषय पर सदन को जरूरी जानकारी दी है। अभी इस संकट को तीन सप्ताह से ज्यादा हो रहा है। इससे देशों की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर विपरीत असर हो रहा है। इसलिए दुनिया संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह कर रही है।युद्ध ने खड़ी की अप्रत्याशित चुनौतियांप्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के सामने भी युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियों खड़ी की हैं। ये चुनौतियों आर्थिक भी हैं, नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ी भी हैं और मानवीय भी हैं। युद्धरत और युद्ध से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक और व्यापारिक रिश्ते हैं। जिस क्षेत्र में युद्ध हो रहा है, वह दुनिया के दूसरे देशों के साथ हमारे व्यापार का भी महत्वपूर्ण रास्ता है। विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा यही क्षेत्र पूरा करता है।यह भी बोले पीए मोदीउन्होंने कहा कि हमारे लिए ये क्षेत्र एक और कारण से भी अहम है। लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं और वहां काम करते हैं। वहां समंदर में जो कमर्शियल शिप चलते हैं, उनमें भारतीय क्रू मैंबर की संख्या भी बहुत अधिक है। ऐसे अलग-अलग कारणों के चलते भारत की चिंताएं स्वभाविक रूप से अधिक हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज दुनिया में जाए।प्रभावित परिवारों को दी जा रही आवश्यक मददपीएम मोदी ने कहा कि जब से युद्ध शुरू हुआ है, जब से हर भारतीय को जरूरी मदद दी जा रही है। मैंने खुद पश्चिम एशिया के देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बात की है। सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है। दुर्भाग्य से कुछ लोगों की दुखद मृत्यु हुई है और कुछ घायल हुए हैं। ऐसे मुश्किल हालात में प्रभावित परिवारों को आवश्यक मदद दी जा रही है। जो घायल हैं, उनका बेहतर इलाज सुनिश्चित कराया जा रहा है।भारतीयों की मदद में जुटे मिशनउन्होंने कहा कि प्रभावित देशों में हमारे जितने भी मिशन हैं, वे लगातार भारतीयों की मदद में जुटे हैं। वहां काम करने वाले भारतीय हों या टूरिस्ट हों, सभी को हर संभव मदद दी जा रही है। हमारे मिशन नियमित रूप से एडवाइजरी जारी कर रहे हैं। यहां भारत और अन्य प्रभावित देशों में 24 घंटों कंट्रोल रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन जारी की गई हैं। सभी भारतीयों को त्वरित जानकारी दी जा रही है।संकट की स्थिति में भारतीयों की सुरक्षा प्राथमिकताप्रधानमंत्री ने कहा कि संकट की स्थिति में भारतीयों की सुरक्षा हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता रही है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3.72 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से एक हजार भारतीय सुरक्षित लौटे हैं। इनमें 700 से अधिक मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवा हैं। खाड़ी के देशों में भारतीय स्कूलों में हजारों विद्यार्थी पढ़ते हैं। सीबीएसई ने ऐसे सभी भारतीय स्कूलों में होने वाली कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। छात्रों की पढ़ाई लगातार चलती रहे, इसके लिए सीबीएसई उचित कदम उठा रही है।

रनवे पर टक्कर:न्यूयॉर्क में एयर कनाडा प्लेन फायर ट्रक से भिड़ा, ला गार्डियो एयरपोर्ट पर चार घायल, सवार थे करीब 100 यात्री
वाशिंगटन। न्यूयार्क में सोमवार सुबह एक बड़ा विमान हादसा हो गया है। ला गार्डियो एयरपोर्ट खराब मौसम के चलते एयर कनाडा का एक जेट रनवे पर खड़े फायर ट्रक से टकरा गया है। टक्कर इतनी जोरदार थी कि इसमें चार दमकलकर्मी घायल हो गए हैं। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। वही हादसे के समय विमान में करीब 100 यात्री सवार थे। इस घटना के बाद एयरपोर्ट पर विमानों के परिचालन को कुछ घंटे के लिए रोकना पड़ा। घटना के बाद एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का भी माहौल निर्मित हो गया था। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा और स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, हादसे का शिकार हुआ विमान एयर कनाडा एक्सप्रेस सीआरजे-900 है, जो मॉन्ट्रियल से न्यूयॉर्क पहुंचा था। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, सोमवार तड़के विमान लैंड करने की कोशिश में था, तभी अचानक यह हादसा हुआ। हादसे के बाद आपातकालीन बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया. सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों और वीडियो में यात्री विमान के अगले हिस्से और श्नोजश् को भारी नुकसान पहुंचता दिख रहा है।पूरा एयरपोर्ट हुआ ठपहादसे के तुरंत बाद अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने ला गॉर्डिया एयरपोर्ट पर ग्राउंड स्टॉप लागू कर दिया। इसका मतलब है कि न तो कोई विमान वहां उतर सकता है और न ही उड़ान भर सकता है। प्रशासन ने शुरुआती बयान में कहा कि आपातकालीन स्थिति के कारण एयरपोर्ट को शाम 6 बजे तक बंद रखा जा सकता है।यात्रियों के लिए बढ़ी मुश्किलला गॉर्डिया न्यूयॉर्क का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है। इस हादसे और उसके बाद लागू हुई पाबंदियों के कारण हजारों यात्रियों के फंसने की आशंका है। एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि रनवे पर इस तरह की घटनाएं दुर्लभ होती हैं, लेकिन इनके कारण पूरे एयर ट्रैफिक नेटवर्क पर बुरा असर पड़ता है। जानकारी के मुताबिक, कई फ्लाइट के रूट को डायवर्ट भी किया गया है। फिलहाल, एयर कनाडा और न्यूयॉर्क फायर डिपार्टमेंट ने इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। जांच टीमें मौके पर मौजूद हैं। जांच इस बात को लेकर हो रही है कि आखिर ये हादसा कैसे हुआ।

धमकियों से नहीं घबराएगा कोई भी ईरानी:ट्रंप के 48 घंटे वाले अल्टीमेटम पर अराघची का करारा जवाब
नई दिल्ली। मिडिल-ईस्ट में चल रही जंग के करीब 25 दिन बीत गए हैं, लेकिन यह युद्ध अभी तक अंजाम तक नहीं पहुंचा है। अमेरिका-इजरायल जहां ईरान को लगातार परिणाम भुगतने की चेतावनी दे रहे हैं। वहीं ईरान भी मुंहतोड़ जवाब देने की चेतावनी देने से बाज नहीं आ रहा है। इस बीच होर्मुज खोलने को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 48 घंटे वाले अल्टीमेटम वाले बयान पर ईरान ने करारा जवाब दिया है। बता दें कि ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि होर्मुज खोलो, वरना बिजलीघर तबाह कर देंगे। ट्रंप के इस अल्टीमेटम पर ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान ने इस सामरिक समुद्री मार्ग को बंद नहीं किया है। उन्होंने कहा कि जहाजों की आवाजाही में आ रही कमी का मुख्य कारण बीमा कंपनियों में व्याप्त युद्ध का भय है, जिसकी वजह से शिपिंग कंपनियां इस क्षेत्र से गुजरने में संकोच कर रही हैं। अराघची ने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। ईरानी विदेश मंत्री ने ट्रंप को दिखाया आईनासोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल पर युद्ध शुरू करने का आरोप लगाते हुए कहा, होर्मुज स्ट्रे्ट बंद नहीं हुई है। शिपिंग कंपनियां इसलिए हिचकिचा रही हैं क्योंकि बीमा कंपनियों को उस युद्ध का डर है जो ईरान ने नहीं, बल्कि आपने ही शुरू किया है। कोई भी बीमा कंपनी और कोई भी ईरानी और धमकियों से नहीं घबराएगा। सम्मान करने की कोशिश करें। समुद्र में जहाजों के आने-जाने की आजादी तभी संभव है जब व्यापार करने की आजादी हो। अगर आप इन दोनों का सम्मान नहीं करेंगे, तो आपको दोनों में से कुछ भी नहीं मिलेगा।आईडीएफ ने ईरान को लेकर किया यह दावाइजरायली डिफेंस फोर्स का कहना है कि उसने तेहरान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए हैं, जिनका निशाना ईरान के आतंकवादी शासन का इंफ्रास्ट्रक्चर है। ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान की राजधानी तेहरान में हुए धमाकों की आवाज बहुत ज्यादा है। फार्स न्यूज एजेंसी ने तेहरान के पांच इलाकों में धमाकों की भयानक आवाजें आने की खबर दी।ईरानी मीडिया ने कहा कि हमले एरिया 1, 4, 11, 13 और 21 में हुए और कितना नुकसान हुआ और कितने लोग मारे जा सकते हैं, इसकी घोषणा बाद में की जाएगी। वहीं ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम शहर के पूर्वी हिस्से में एक्टिवेट हो गए हैं। इसका मतलब है कि ईरान अमेरिका-इजरायली ड्रोन का जवाब दे रहे हैं।मिडिल ईस्ट के हालात बहुत गंभीरइंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में हालात बहुत गंभीर हैं और 1970 के दशक के दो एनर्जी संकटों को मिलाकर भी उनसे ज्यादा खराब हैं। ऑस्ट्रेलिया के नेशनल प्रेस क्लब में एक भाषण में बिरोल ने कहा कि मौजूदा संकट का सबसे बड़ा समाधान होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना है, जिसे ईरान ने देश पर अमेरिका-इजरायल हमले के बाद असरदार तरीके से ब्लॉक कर दिया है।

सेंसेक्स में सूनामी, निफ्टी भी बिखरा:भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार, रिकार्ड निचले स्तर पर पहुंचा रूपया भी
नई दिल्ली। जिसका डर था वही हुआ, विदेशों से मिल रहे खराब संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार खुलते ही औंधे मुंह गिर गया है। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,800 अंकों यानि 2 प्रतिशत का गोता लगाया है। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 575 अंक के आसपास बिखर गया है। इस बीच बीएसी लार्जकैप में शामिल सभी शेयर लाल निशान पर कारोबार करते हुए नजर आए। इतना ही नहीं शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 41 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 93.94 पर पहुंच गया है। सप्ताह के पहले दिन सोमवार को शेयर बाजार में हाहाकार देखने को मिला। बीएसई का सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 74,532.96 की तुलना में बुरी तरह टूटकर 73,732 पर खुला। इसके कुछ ही मिनटों में ये गिरावट और भी तेज हो गई, जिसके चलते सेंसेक्स करीब 1600 अंक गिरकर 72,977 के लेवल पर आ गया। वहीं इसके कुछ मिनटों बाद ही ये गिरावट और बढ़ गई और सेंसेक्स 1800 अंक से ज्यादा फिसलकर 72,724 पर कारोबार करने लगा। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से टाटा स्टील, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बजाज फाइनेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टाइटन और अदानी पोर्ट्स सबसे पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। एचसीएल टेक एकमात्र विजेता के रूप में उभरी।न सिर्फ सेंसेक्स, बल्कि एनएसई का निफ्टी-50 भी खुलने के साथ ही औंधे मुंह गिर गया। .ये इंडेक्स अपने पिछले शुक्रवार के बंद 23,114 की तुलना में फिसलकर 22,824 पर ओपन हुआ था और फिर सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए ये मिनटों में 480 अंक की भारी गिरावट के साथ 22,634 के लेवल पर आ गया और कुछ देर के कारोबार के बाद 575 अंक टूटकर 22,538 पर ट्रेड करता दिखा। एशियाई बाजारों में बड़ी गिरावटवैश्विक संकेत बेहद कमजोर रहे और एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 4ः से ज्यादा गिरकर 51,280 पर आ गया। सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 2.20 फीसदी गिरकर 4,839 पर, हांगकांग का हैंगसेंग 3.41 फीसदी टूटकर 24,415 पर बंद हुआ। ताइवान का वेटेड इंडेक्स 2.65ः गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 6 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गया।अमेरिकी बाजार भी दबाव मेंशुक्रवार को अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए थे। डाउ जोन्स 0.96 फीसदी गिरकर 45,577 पर बंद हुआ, एस एंड पी 500 में 1.51 फीसदी की गिरावट रही और नैस्डैक 2 फीसदी टूटकर 21,647 पर आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और दबाव बना रह सकता है।ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 112.9 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचावैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.62 प्रतिशत बढ़कर 112.9 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 5,518.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 5,706.23 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक भारतीय शेयर बाजार से 88,180 करोड़ रुपये (लगभग 9.6 अरब अमेरिकी डॉलर) निकाल लिए हैं।शुक्रवार को सेंसेक्स 325.72 अंक या 0.44 प्रतिशत बढ़कर 74,532.96 पर बंद हुआ। निफ्टी 112.35 अंक या 0.49 प्रतिशत बढ़कर 23,114.50 पर समाप्त हुआ।

ईरानी मिसाइलों से कतर में भीषण तबाही:ट्रंप पर भड़के कतरएनर्जी सीईओ, दिया तीखा जवाब
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के जवाबी हमलों ने खाड़ी देशों की ऊर्जा व्यवस्था को झकझोर दिया है। इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर किए गए हमले के बाद ईरान ने कतर, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत के तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाया। इस हमले में सबसे अधिक नुकसान कतर को हुआ है, जहां रास लाफान स्थित दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी कॉम्प्लेक्स को भारी क्षति पहुंची है।कतर की सरकारी कंपनी कतरएनर्जी के सीईओ और ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने खुलासा किया कि उन्होंने पहले ही अमेरिका को ऐसे खतरे को लेकर चेताया था। उनका कहना है कि अगर ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला होगा, तो उसका कड़ा जवाब मिलेगा और क्षेत्रीय सप्लाई पर गंभीर असर पड़ेगा।ईरानी हमले से एलएनजी का निर्यात 17 फीसदी पड़ा ठपईरानी हमले के कारण कतर की एलएनजी निर्यात क्षमता का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा ठप हो गया है। रास लाफान में स्थित अत्याधुनिक “कोल्ड बॉक्स” यूनिट्स को भारी नुकसान पहुंचा है, जो गैस को तरल रूप में बदलने की प्रक्रिया का मुख्य हिस्सा होती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 14 में से 2 कोल्ड बॉक्स पूरी तरह नष्ट हो गए हैं।नुकसान की भरपाई करने में लग सकते हैं पांच सालअल-काबी के अनुसार, इस नुकसान की भरपाई में तीन से पांच साल तक का समय लग सकता है। इसका सीधा असर यूरोप और एशिया की गैस सप्लाई पर पड़ेगा, जो कतर से बड़े पैमाने पर एलएनजी आयात करते हैं। साथ ही, कतर की महत्वाकांक्षी विस्तार योजना, जिसके तहत 2027 तक उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 126 मिलियन टन प्रति वर्ष करने का लक्ष्य था, अब प्रभावित हो सकती है।हमले के बाद सुरक्षा कारणों से रास लाफान से 24 घंटों के भीतर करीब 10,000 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और सभी ऑपरेशंस बंद कर दिए गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस दौरान कोई हताहत नहीं हुआ।अल-काबी ने दी चेतावनीअमेरिका ने स्वीकार किया है कि उसे सप्लाई में अस्थायी रुकावट का अंदाजा था और इसके लिए तैयारी की गई थी। फिर भी, इस संघर्ष का व्यापक असर पूरे खाड़ी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। अल-काबी ने चेतावनी दी कि यह युद्ध क्षेत्र को 10-20 साल पीछे धकेल सकता है, जिससे व्यापार, पर्यटन और ऊर्जा आय पर गंभीर असर पड़ेगा।

भारत के देसी दम से कांपेगा दुश्मन:नीले समंदर में उतरने को तैयार तारागिरी, ब्रह्मोस मिसाइल से है लैस
नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायइल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच भारत की समुद्री ताकत और बढ़ने जा रही है। दरअसल नीले समंदर में खलबली मचाने और दुश्मन को भारत का देसी दम दिखाने के लिए स्वदेशी गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट तारागिरी के समंदर में उतरने की तारीख तय हो गई है। खास बात है कि ‘तारागिरी’ ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है। यह वही ब्रह्मोस है, जिसने पाकिस्तान को दर्द दिया था। नौसेना द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, अगले महीने यानी 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम में तारागिरी को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया जाएगा। इस अवसर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह स्वयं इस गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट को नौसेना को समर्पित करेंगे। वर्ष 2026 की शुरुआत में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘अंजदीप’ को भी नौसेना में शामिल किया गया था। बता दें कि 2047 तक पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तैयारी तेज हो गई है। लगातार नए स्वदेशी प्लेटफॉर्म नौसेना में शामिल किए जा रहे हैं। नीलगिरी जनवरी में नौसेना के बेड़े में हुआ था शामिलप्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सात नीलगिरी क्लास के युद्धपोतों में से पहला एडवांस स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरी को जनवरी 2025 में नौसेना में शामिल किया गया था। इसके बाद इसी वर्ष हिमगिरी और उदयगिरी को भी शामिल कर लिया गया। अब तारागिरी की बारी है। गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है, जो एंटी-सर्फेस और एंटी-शिप युद्ध में अत्यंत सक्षम है। एंटी-एयर वॉरफेयर के लिए इसमें लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल ‘बराक-8’, एयर डिफेंस गन, तथा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए स्वदेशी टॉरपीडो ‘वरुणास्त्र’ और रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं।आधुनिक सिस्टम से लैस है तारागिरीतारागिरी लंबी दूरी से आने वाले हमलों का पता लगाने, ट्रैक करने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए आधुनिक सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और मल्टी-फंक्शन डिजिटल रडार से लैस है। इस फ्रिगेट में हेलिकॉप्टर हैंगर भी है, जिसमें दो हेलिकॉप्टर आसानी से लैंड कर सकते हैं। प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सभी सात फ्रिगेट में लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से लिए गए हैं। इसका डिजाइन और स्टील भी स्वदेशी है। इसका डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। 6700 टन वजनी यह फ्रिगेट 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है।भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे 7 फ्रिगेटप्रोजेक्ट 17ए के तहत सात नीलगिरी क्लास गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे हैं। इनमें से चार फ्रिगेट मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) और तीन गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा बनाए गए हैं। वर्ष 2019 से 2022 के बीच इन सभी को लॉन्च किया जा चुका है।नीलगिरी क्लास का चौथा फ्रिगेट है तारागिरीतारागिरी नीलगिरी क्लास का चौथा फ्रिगेट है, जो अब नौसेना में शामिल होने जा रहा है, जबकि बाकी तीन के समुद्री परीक्षण जारी हैं। इन सभी स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट के शामिल होने के बाद समुद्र में भारत की ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। नीलगिरी क्लास के सभी युद्धपोतों का डिजाइन नेवल डिजाइन ब्यूरो द्वारा किया गया है। प्रोजेक्ट 17 और 17ए के सभी फ्रिगेट के नाम भारत की पर्वत शृंखलाओं पर रखे गए हैं, जैसे- शिवालिक, सह्याद्रि, सतपुड़ा, नीलगिरी, हिमगिरी, तारागिरी, उदयगिरी, दूनागिरी, महेंद्रगिरि और विंध्यगिरि।

मिडिल ईस्ट वार:तेल संकट गहराया तो अमेरिका ने बदला रुख, ईरान को दी सीमित छूट, शर्ते भी हैं लागू
वाशिंगटन। अमेरिका-इजरायल और ईरान तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने लगा है, क्योंकि तेल आपूर्ति के प्रमुख मार्गों पर असर पड़ रहा है। इसी स्थिति को संभालने के लिए अमेरिका ने एक अहम कदम उठाते हुए समुद्र में फंसे ईरानी तेल को बेचने की 30 दिनों की अस्थायी अनुमति दे दी है। यह फैसला वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखने के उद्देश्य से लिया गया है।अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी इस विशेष लाइसेंस के तहत केवल वही ईरानी कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बेचे जा सकेंगे, जो 20 मार्च से 19 अप्रैल के बीच पहले ही जहाजों पर लादे जा चुके हैं। स्पष्ट किया गया है कि यह छूट किसी भी नए उत्पादन या नई खरीद पर लागू नहीं होगी। यानी यह पूरी तरह सीमित और अस्थायी राहत है, जिसका मकसद मौजूदा आपूर्ति को बाजार तक पहुंचाना है।140 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजार में आने की उम्मीदअमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि इस कदम से लगभग 140 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजार में आ सकता है। उन्होंने इसे एक “केंद्रित हस्तक्षेप” बताते हुए कहा कि यह उपाय केवल पहले से उपलब्ध तेल को जारी करने के लिए है, न कि ईरान के तेल निर्यात को बढ़ावा देने के लिए।440 मिलियन बैरल अतिरिक्त तेल बाजार में लाने के प्रयासबेसेंट के अनुसार, हाल के सप्ताहों में यह तीसरी ऐसी राहत है। इससे पहले रूस से जुड़ी आपूर्ति को लेकर भी कदम उठाए गए थे। उन्होंने बताया कि कुल मिलाकर करीब 440 मिलियन बैरल अतिरिक्त तेल बाजार में लाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि वैश्विक ऊर्जा संकट को कम किया जा सके।बाधाओं का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा ईरानउन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में आई बाधाओं का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, अमेरिका ने साफ किया है कि ईरान पर लगाए गए व्यापक प्रतिबंध जारी रहेंगे और इस अस्थायी छूट का दायरा बेहद सीमित रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे अहम जलमार्गों पर तनाव के कारण आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। ऐसे में अमेरिका का यह कदम अल्पकालिक राहत देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

मिडिल ईस्ट वार:ट्रंप ने ईरानी सेना को लेकर किया बड़ा दावा, डोनाल्ड ने ईरान के परमाणु हथियार को लेकर भी जाहिर किए इरादे
वॉशिंगटन। अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के करीब 23 दिन हो गए हैं, लेकिन यह वार अब तक निर्णायक मोड़ में नहीं पहुंचा है। यही नहीं दोनों ओर से जारी भीषण जंग ने दुनिया भर के देशों को चिंता में डाल दिया है। तेल आपूर्ति मार्गों व क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर दुनिया भर में टेंशन बनी हुई है। इन सबके बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सेना “पूरी तरह खत्म” हो चुकी है। व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई को समाप्त करने के करीब पहुंच गया है। उन्होंने कहा, “हम अपने लक्ष्यों को हासिल करने के बहुत करीब हैं और मध्य पूर्व में ईरान के आतंकी शासन के खिलाफ चल रहे अपने बड़े सैन्य अभियान को अब खत्म करने पर विचार कर रहे हैं।”ईरान की मिसाइल क्षमता को कमजोर करना चाहता है अमेरिकाट्रंप ने अपने लक्ष्यों को गिनाते हुए कहा कि अमेरिका ईरान की मिसाइल क्षमता, लॉन्च सिस्टम और उनसे जुड़ी हर चीज को पूरी तरह कमजोर करना चाहता है। इसके अलावा ईरान के रक्षा उद्योग को नष्ट करना और उसकी नौसेना व वायुसेना, साथ ही एंटी-एयरक्राफ्ट हथियारों को खत्म करना भी लक्ष्य थे। उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार बनाने से हर हाल में रोकेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि वह परमाणु क्षमता के करीब भी न पहुंच सके।सैन्य स्थिति पूरी तरह से अमेरिका के फेवर मेंपत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि सैन्य स्थिति पूरी तरह अमेरिका के पक्ष में है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हम जीत चुके हैं। हमने सब कुछ खत्म कर दिया है और हम पूरी तरह से आजाद होकर काम कर रहे हैं। सैन्य नजरिए से देखें तो वे खत्म हो चुके हैं।” हालांकि कई देशों ने युद्ध रोकने की अपील की है, लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया कि वह युद्धविराम के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा, “जब आप सामने वाले को पूरी तरह खत्म कर रहे हों, तो युद्धविराम नहीं करते। हम ऐसा करने की सोच नहीं रहे हैं।”होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी ट्रंप ने की बातट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी बात की, जो दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। उन्होंने कहा कि जिन देशों को इस रास्ते की जरूरत है, उन्हें इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। उन्होंने कहा, “अमेरिका इस मार्ग पर निर्भर नहीं है। यूरोप, कोरिया, जापान, चीन और कई अन्य देशों को इसकी जरूरत है, इसलिए उन्हें आगे आना होगा।” उन्होंने इस रास्ते को फिर से खोलने को “आसान सैन्य कदम” बताया, लेकिन साथ ही कहा कि इसके लिए काफी सहयोग और संसाधनों की जरूरत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि नाटो अब तक इस मामले में कदम उठाने की हिम्मत नहीं दिखा पाया है।

मिसाइल से मैसेज:ईरान ने डिएगो गार्सिया सैन्य बेस पर दागी मिसाइलें, तेहरान ने दूर बैठे अमेरिका-इजरायल को दे डाली चेतावनी
नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका-इजरायल हमलों का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। दोनों देशों के बीच जारी हमले अब तक मिडिल ईस्ट तक ही सिमटे हुए थे, हालांकि, अब ये अलग-अलग क्षेत्रों में अपने पांव पसार रहे हैं। दरअसल, ईरान ने ताजा हमला हिंद महासागर में अमेरिका और ब्रिटेन के सैन्य बेस पर किया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, डिएगो गार्सिया को ईरान ने कम से कम दो मिड-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया है। डिएगो गार्सिया पर अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य बेस है।रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक मिसाइल उड़ान के बीच में फेल हो गई, जबकि दूसरी मिसाइल एक वॉरशिप से दागे गए अमेरिकी इंटरसेप्टर से टकरा गई। बता दें, डिएगो गार्सिया इक्वेटर के दक्षिण में मध्य हिंद महासागर में है। ईरान ने अपने देश से करीब 4,000 किलोमीटर दूर एक बेस पर हमला किया है। इससे एक बात साफ हो गई है कि ईरानी मिसाइलों की रेंज जितनी पहले मानी जाती थी, उससे कहीं ज्यादा है।ईरान ने 2000 किमी तक सीमित की मिसाइलों की रेंजईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पिछले महीने दावा किया था कि ईरान ने अपनी मिसाइलों की रेंज 2,000 किलोमीटर तक सीमित कर दी है। हालांकि, ताजा हमला ईरान की मिसाइल ताकत को लेकर कुछ और ही हकीकत बयां कर रहा है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि अगर ईरान के पास 2000 किमी से लंबी दूरी की मिसाइल नहीं है, तो उसने डिएगो गार्सिया पर हमले किस मिसाइल से किए हैं? हालांकि, इसे लेकर ईरानी अधिकारियों की तरफ से कोई जानकारी सामने नहीं आई है।वहीं भारत से डिएगो गार्सिया की दूरी 1800 किलोमीटर है। अमेरिका और ब्रिटेन इस एयरबेस से पूरे एशिया और पश्चिम एशिया में गतिविधियों में अपनी भागीदारी निभाते हैं। यह अमेरिका के लिए एशिया और पश्चिम एशिया में सैन्य रणनीति का मजबूत केंद्र है। यहां से अमेरिका अपने बमवर्षक विमान, परमाणु पनडुब्बियां और गाइडेड मिसाइल जहाज तैनात करता है। इसके अलावा, यहां विशाल ईंधन भंडारण, रडार सिस्टम और कंट्रोल टावर मौजूद हैं, जो लंबी दूरी के सैन्य अभियानों को संभव बनाते हैं।ईरानी हमले से बढ़ा चिंताओं का लेवलईरान के इस हमले ने चिंता को कई लेवल पर बढ़ा दिया है। फिलहाल अमेरिका और ब्रिटेन की ओर से इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन एक बात साफ है कि ईरान ने अपने दुश्मनों को बड़ा घाव दिया है।

मिडिल ईस्ट में वार, भारत में फूटा महंगाई का बम: प्रीमियम पेट्रोल 2.30 रुपए हुआ महंगा, नई दरें लागू
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। तेल विपणन कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। आॅयल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल में 2.30 रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया है। हालांकि आम उपभोक्ताओं फिलहाल राहत दी गई है। दरअसल नॉर्मल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नई दरें 20 मार्च से लागू हो चुकी हैं।डीलरों के माध्यम से प्राप्त जानकारी में कहा गया है, इस ताजा मूल्य वृद्धि का सीधा असर प्रमुख तेल कंपनियों के ब्रांडेड ईंधनों पर देखने को मिला है। इनमें इंडियन आॅयल काॅर्पोरेशन, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन ने यह बढ़ोतरी खास तौर पर प्रीमियम या ब्रांडेड ईंधनों पर लागू की है। इसमें एचपीसीएल का पावर पेट्रोल और आईओसीएल का एक्सपी95 शामिल हैं, जिन्हें बेहतर इंजन परफॉर्मेंस और ज्यादा माइलेज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।जानें राज्यों के बढ़े हुए रेटनई कीमतों के मुताबिक, नई दिल्ली में प्रीमियम पेट्रोल 107 रुपये से बढ़कर 112.30 रुपये प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में इसकी कीमत 115 रुपये से बढ़कर 120.30 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है, जबकि चेन्नई में यह 112 रुपये से बढ़कर 117.30 रुपये प्रति लीटर हो गई है। नई दिल्ली में सामान्य पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल 103.50 रुपये और डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं चेन्नई में पेट्रोल 100.80 रुपये और डीजल 92.39 रुपये प्रति लीटर है।तो सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ेगा असरविशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल सरकार और कंपनियां आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने से बचने की कोशिश कर रही हैं।

ईरान के आईआरजीसी प्रवक्ता की भी मौत:इजरायल ने हिला दिया तेहरान का सैन्य ढांचा, मुखर चेहरों में से एक थे अली मोहम्मद नैनी
नई दिल्ली। ईरान पर इजरायल के ताबड़तोड़ हमले थमने का नाम नहीं ले रहे, और अब इस संघर्ष ने एक और बड़ा मोड़ ले लिया है। ताजा हमले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नैनी की मौत ने तेहरान की सत्ता और सैन्य ढांचे को हिला कर रख दिया है। यह सिर्फ एक सैन्य अधिकारी की मौत नहीं, बल्कि ईरान की रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक ताकत पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।अली मोहम्मद नैनी, जो आईआरजीसी के मुखर चेहरों में से एक थे, अक्सर दुनिया को ईरान की मिसाइल और ड्रोन ताकत का संदेश देते नजर आते थे। उन्होंने हाल ही में दावा किया था कि ईरान छह महीने तक चलने वाले भीषण युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। लेकिन इजरायल के इस सटीक हमले ने उस दावे पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।इजरायल की दो टूकः अभी खत्म नहीं होगा अभियानइजरायल ने साफ कर दिया है कि उसका अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। उसके अनुसार, अब तक 130 से ज्यादा रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है, जिनमें बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स, न्।ट बेस और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। इजरायली वायुसेना लगातार पश्चिमी और मध्य ईरान में हमले कर रही है, ताकि ईरान की जवाबी क्षमता को पूरी तरह कुंद किया जा सके।लारिजानी की मौत ने झकझोर दिया था ईरान की राजनीति कोइससे पहले 17 मार्च को हुए हमले में अली लारिजानी की मौत ने पहले ही ईरान की राजनीति को झकझोर दिया था। उन्हें देश का अस्थायी शीर्ष नेता माना जा रहा था, और उनकी हत्या ने सत्ता के भीतर गहरी अनिश्चितता पैदा कर दी है। अब नैनी की मौत ने इस संकट को और गहरा कर दिया है।इजरायल की रणनीति यहीं तक सीमिति नहींविश्लेषकों का मानना है कि इजरायल की यह रणनीति सिर्फ सैन्य ठिकानों को नष्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ईरान के नेतृत्व और कमांड संरचना को व्यवस्थित तरीके से खत्म करने की कोशिश कर रहा है। लगातार हो रहे इन हमलों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और भी ज्यादा खतरनाक रूप ले सकता है। मध्य पूर्व में बढ़ता यह तनाव अब सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

ट्रंप-नेतन्याहू के दावों पर ईरान का पलटवार:कहा- भरे हैं हमारे भंडार, खत्म नहीं होंगे हमारे हथियार
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बीते करीब तीन सप्ताह से भीषण युद्ध जारी है। एक ओर जहां अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान पर मिसाइलों की बारिश कर रहे हैं। तो वहीं ईरान भी अपने कदम पीछे न खींचते हुए मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। इस जंग के बीच मिसाइल क्षमता को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के राष्ट्रपति बेंजानियम नेतन्याहू के दावों का ईरान ने करारा जवाब दिया है। ईरान की सेना की प्रमुख इकाई इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने साफ कहा है कि देश में मिसाइल उत्पादन लगातार जारी है और किसी भी तरह की कमी नहीं है। आईआरजीसी के मुताबिक, युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी ईरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को बनाए रखा है। बयान में कहा गया कि “मिसाइलें लगातार बन रही हैं और हमारे भंडार में कोई कमी नहीं आई है।” यह प्रतिक्रिया सीधे तौर पर इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के उस दावे के जवाब में देखी जा रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता पूरी तरह खत्म कर दी गई है।यह बोले थे नेतन्याहूनेतन्याहू ने हाल ही में कहा था कि इजरायल ने ईरान पर कई दिशाओं से हमले किए हैं, जिससे उसकी सैन्य और परमाणु क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान अब यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) करने की स्थिति में नहीं है और वह वैश्विक स्तर पर दबाव बनाने की ताकत खो चुका है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान द्वारा दी जा रही मिसाइल हमलों की धमकियां अब खोखली हैं।डोनाल्ड ट्रंप ने किया था यह दावावहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने भी पहले दावा किया था कि ईरान का नेतृत्व कमजोर हो चुका है और वह इस संघर्ष में पीछे हट रहा है। हालांकि, ट्रंप ने ईरान के गैस फील्ड पर हुए हमले की जानकारी होने से इनकार किया और कथित तौर पर नेतन्याहू को ऐसे हमलों से बचने की सलाह दी।खाड़ी क्षेत्र में तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहा ईरानहाल के घटनाक्रम में इजरायल द्वारा ईरान के पार्स गैस फील्ड पर हमले की खबरें सामने आई थीं, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इस बढ़ते टकराव ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता की आशंका बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्षों के दावे और जवाबी दावे केवल सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में स्थिति और तनावपूर्ण होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

रत्नागिरी में हाई-प्रोफाइल लैंड डील:अंडरवर्ल्ड सरगना की जमीन बिकी, दो खरीददारों ने 4 भूखंडों के लिए लगाई बोली
मुंबई। भगोड़े अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम से जुड़ी रत्नागिरी स्थित पुश्तैनी जमीनों को आखिरकार खरीदार मिल गए हैं। लंबे समय से बार-बार नीलामी के बावजूद इन संपत्तियों के लिए कोई खरीदार सामने नहीं आ रहा था, लेकिन हालिया नीलामी में दो लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार नीलामी 5 मार्च को केंद्र सरकार की ओर से आयोजित की गई थी। इसमें रत्नागिरी जिले के खेड़ तालुका के मुम्बके गांव में स्थित चार कृषि भूखंडों के लिए बोली लगाई गई। ये सभी जमीनें दाऊद इब्राहिम के परिवार, विशेष रूप से उनकी मां अमीना बी के नाम पर दर्ज थीं। हालांकि खरीददारों के नाम और पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।नीलामी में एक खरीददार ने लगाई ऊंची बोलीनीलामी के दौरान एक खरीदार ने एक प्लॉट के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई, जबकि दूसरे व्यक्ति ने बाकी तीन प्लॉट अपने नाम किए। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक दोनों खरीदारों की पहचान उजागर नहीं की गई है।सरकार ने इन संपत्तियों को “स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स (फॉरफीचर ऑफ प्रॉपर्टी) एक्ट” के तहत जब्त किया था। यह कानून उन संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति देता है, जिनका संबंध तस्करी या अन्य आपराधिक गतिविधियों से होता है। इसी प्रक्रिया के तहत इन जमीनों को नीलामी के लिए प्रस्तुत किया गया।कई बार असफल हो चुकी थी नीलामीगौरतलब है कि इन संपत्तियों की नीलामी पहले कई बार असफल रही थी। वर्ष 2017, 2020, 2024 और 2025 में भी इन्हें बेचने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार या तो कोई बोली लगाने वाला नहीं मिला या प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। नवंबर 2025 की नीलामी में तो एक भी खरीदार सामने नहीं आया था।चारों भूखंडों के लिए अलग-अलग तय किए गए थे रिजर्व प्राइसइस बार चारों भूखंडों के लिए अलग-अलग रिजर्व प्राइस तय किए गए थे। एक प्रमुख प्लॉट, जिसकी कीमत करीब 9.41 लाख रुपए रखी गई थी, वह 10 लाख रुपए से अधिक में बिका है। नीलामी में सफल बोली लगाने वालों को अप्रैल 2026 तक पूरी राशि जमा करनी होगी। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी मिलने पर यह सौदा पूरी तरह वैध हो जाएगा। लंबे इंतजार के बाद इन संपत्तियों का बिकना सरकार की कार्रवाई में एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है।

सर्राफा बाजार में सुनामी :चांदी 12,000 टूटी, सोना भी फिसला जोर से, क्या रहे गिरावट के कारण जानें
नई दिल्ली। गुरुवार को वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल के बीच सोने और चांदी की कीमतों में अचानक तेज गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी के दाम में 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना भी करीब 2.5 प्रतिशत तक फिसल गया। दोपहर करीब 12ः30 बजे चांदी की कीमतों में तेज टूट शुरू हुई और कुछ ही समय में यह लगभग 12,000 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई। वहीं सोने की कीमतों में करीब 4,500 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई। फिलहाल चांदी करीब 2.35 लाख रुपये प्रति किलो और सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे कारोबार कर रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने बाजार की दिशा को प्रभावित किया है। हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच टकराव बढ़ने के बाद तेल से जुड़े ठिकानों पर हमले हुए हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। आमतौर पर ऐसे हालात में सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार निवेशकों का रुख अलग नजर आ रहा है।अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से बाजार में बढ़ा दबावइसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के हालिया फैसले ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। फेड ने ब्याज दरों को स्थिर रखा है और संकेत दिए हैं कि निकट भविष्य में दरों में कटौती की संभावना कम है। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने वैश्विक अनिश्चितता और आर्थिक चुनौतियों का जिक्र किया, जिसके बाद निवेशकों ने कीमती धातुओं में मुनाफावसूली शुरू कर दी।4.20 लाख के रिकार्ड स्तर को छुआ था चांदी नेगौरतलब है कि पिछले दो वर्षों में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी देखी गई थी। जनवरी 2026 में चांदी ने 4.20 लाख रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड स्तर छुआ था, लेकिन इसके बाद से कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। जानकारों का कहना है कि मौजूदा गिरावट निवेशकों की मुनाफावसूली और वैश्विक आर्थिक संकेतों का मिश्रित असर है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर निर्भर करेगी।

मिडिल ईस्ट वार से सहमा भारतीय शेयर बाजार:प्री-ओपनिंग में औंधे मुंह गिरा सेंसेक्स, डाॅलर के मुकाबले रिकार्ड निलचले स्तर पर पहुंचा रुपया
मुंबई। मिडिल ईस्ट जंग का असर भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त देखने को मिल रहा है। यही नहीं गुरुवार को बाजार भारी गिरावट के साथ खुला। प्री-ओपनिंग में सेंसेक्स करीब 2000 अंक तक गिरकर 74,750.92 और निफ्टी 580 अंक या 2.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,197.75 पर था। वहीं शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 49 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 92.89 पर पहुंच गया।बाजार में हर ओर गिरावट देखी जा रही है। रियल्टी, प्राइवेट बैंक, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज, पीएसयू बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, सर्विसेज, डिफेंस और मेटल के साथ सभी सूचकांक लाल निशान में थे। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बड़ी गिरावट देखी जा रही है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,194.40 अंक या 2.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 55,095.45 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 246.50 अंक या 1.52 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 15,930.95 पर था। सेंसेक्स के 28 शेयर लाल निशान पर खुलेसेंसेक्स पैक में 30 में से 28 शेयर लाल निशान में थे। एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी, एक्सिस बैंक, एमएंडएम, ट्रेंट, इटरनल, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट,बजाज फिनसर्व और इंडिगो लूजर्स थे। केवल एनटीपीसी और पावर ग्रिड ही हरे निशान में थे। जंग ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ऊर्जा ढांचे पर हमलों ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। ईरान के प्रमुख गैस उत्पादन क्षेत्र पर हमले और कतर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी एलएनजी उत्पादन सुविधा को निशाना बनाए जाने से ऊर्जा आपूर्ति पर असर की आशंका गहरा गई है। बैंकिंग और मार्केट विशेषज्ञ अजय बग्गा कहा कि इन घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र के तनाव को बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचा दिया है। उनके अनुसार, इससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई में बाधा की आशंका बढ़ी है, जिसका असर महंगाई और बाजारों पर साफ दिख सकता है।ज्यादातर बिकवाली एशियाई बाजारों मेंज्यादातर एशियाई बाजारों में बिकवाली देखी जा रही है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल लाल निशान में थे। अमेरिकी बाजार भी बुधवार को लाल निशान में बंद हुए थे। मुख्य सूचकांक डाओ 1.63 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी नैस्डैक 1.46 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की ओर से बिकवाली जारी है। एफआईआई ने बुधवार को 2,714.35 करोड़ रुपए की इक्विटी में बिकवाली की थी। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 3,253.03 करोड़ रुपए का इक्विटी में निवेश किया था।

टी20 वर्ल्ड कप से दूरी पड़ी भारी!:बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पर जांच की तलवार, ईद के बाद शुरु होगा एक्शन
ढाका। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) का टी20 विश्व कप 2026 से बाहर रहने का फैसला एक बार फिर से चर्चा में है। बांग्लादेश की नई सरकार ने इस मामले की जांच शुरू करने का फैसला लिया है। युवा एवं खेल राज्य मंत्री अमीनुल इस्लाम ने कहा है कि ईद के बाद एक नई जांच कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी इस बात की पड़ताल करेगी कि क्या भारत और श्रीलंका में आयोजित इस टूर्नामेंट से हटने का फैसला स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी में विफलता का नतीजा था।मंत्री अमीनुल इस्लाम ने कहा कि सरकार यह समझना चाहती है कि क्या यह स्थिति टाली जा सकती थी। उन्होंने कहा, “हमें यह गहराई से जांचना होगा कि हम विश्व कप में हिस्सा क्यों नहीं ले पाए और हमारी स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी में कमी कहां रह गई।” उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ टूर्नामेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय खेल संबंधों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में मौजूद कमियों को भी उजागर करता है।अनियमितताओं से जोड़कर देखा जा रहा जांच कोसरकार इस जांच को बीसीबी के हालिया चुनावों में कथित अनियमितताओं से जोड़कर भी देख रही है। मंत्री के मुताबिक क्लब और जिला स्तर के कई स्टेकहोल्डर्स ने शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिनकी जांच पहले से चल रही है। बीसीबी ने हाल ही में मंत्रालय से पिछली जांच बंद करने की अपील की थी, लेकिन इसके ठीक अगले दिन नई जांच की घोषणा ने बोर्ड और सरकार के बीच बढ़ते तनाव को उजागर कर दिया है।विवाद की यहां से हुई थी शुरुआतविवाद की शुरुआत तब हुई थी जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए टूर्नामेंट में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था। आईसीसी के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद बोर्ड अपने रुख पर कायम रहा, जिसके बाद बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया। उनकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया गया। अब इस पूरे मामले पर सबकी नजरें हैं, क्योंकि जांच के नतीजे न सिर्फ बांग्लादेश क्रिकेट प्रशासन बल्कि वैश्विक क्रिकेट में उसकी साख पर भी बड़ा असर डाल सकते हैं।

मुंद्रा पोर्ट पर ‘जग लाडकी’ की धमाकेदार एंट्री: तिरंगे के साथ पहुंचा विशाल क्रूड ऑयल टैंकर
मुद्रा। यूएई से चला भारतीय झंडे वाला क्रूड ऑयल टैंकर जग लाडकी बुधवार को भारत पहुंच गया है। इसने गुजरात में अदाणी ग्रुप द्वारा संचालित मुंद्रा पोर्ट पर डॉक किया है। इस टैंकर में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से प्राप्त लगभग 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल है, जिसे फुजैराह बंदरगाह पर लोड किया गया था। इस 274.19 मीटर की लंबाई और 50.04 मीटर की चैड़ाई वाले टैंकर का डेडवेट टन भार लगभग 164,716 टन और ग्रॉस टन भार लगभग 84,735 टन है।फुजैराह बंदरगाह, मध्य पूर्व में मौजूद उन गिने चुने बंदरगाहों में से एक है, जो कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है। ईरान-अमेरिका, इजरायल युद्ध के कारण फारस की खाड़ी में मौजूद यह संकरा रास्ता प्रभावित है और इससे विश्व के कुल कच्चे तेल का 20 प्रतिशत का आवागमन होता है। मुंद्रा स्थित अदाणी पोर्ट्स में इसका आगमन कच्चे तेल के भारी आयात को संभालने में इस सुविधा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। डिलीवरी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में बनेगी सहायकयह डिलीवरी एक प्रमुख रिफाइनरी के लिए सहायक है जो परिचालन बनाए रखने और क्षेत्र में आपूर्ति में व्यवधान के दौरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ऐसे शिपमेंट पर निर्भर करती है। अदाणी पोर्ट्स मुंद्रा ने पोत जग लाडकी को सुरक्षित रूप से लंगर डालने और भारत की महत्वपूर्ण ऊर्जा लाइनों की सुरक्षा में समुद्री समन्वय प्रदान किया है। ईरान-अमेरिका, इजरायल युद्ध के बीच केंद्र सरकार लगातार देश की निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है। इससे पहले शिवालिक और नंदा देवी दो एलपीजी लदे जहाज भारत पहुंच चुके हैं। इसमें शिवालिक ने भी मुद्रा पोर्ट पर सोमवार को डॉक किया था। नंदादेवी ने कडीनार पोर्ट पर किया था डाॅकवहीं, नंदा देवी ने कंडला पोर्ट के पास स्थित वडीनार पोर्ट पर डॉक किया था। वडीनार पोर्ट, गुजरात में कच्छ की खाड़ी के पास स्थित एक प्रमुख ऑफ-शोर ऑयल टर्मिनल है, जो दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण (पूर्व में कांडला पोर्ट) का हिस्सा है। शिवालिक और नंदा देवी दोनों में 92,700 टन के करीब एलपीजी थी, जिसमें शिवालिक में 46,000 टन से ज्यादा और नंदा देवी में 47,000 टन से ज्यादा एलपीजी थी।

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पता चलेगा,:टी-20 विश्व कप की तैयारियों को लेकर बोली वेस्टइंडीज की कप्तान- उठाएंगे मौके का फायदा
नई दिल्ली। आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 का आयोजन 12 जून से 5 जुलाई के बीच इंग्लैंड में होना है। यह विश्व कप का दसवां संस्करण है। इस बार 12 टीमें विश्व कप में हिस्सा लेंगी। सभी टीमें विश्व कप की तैयारी अपने स्तर पर कर रही हैं। वेस्टइंडीज की टीम भी अपने आगामी ऑस्ट्रेलिया दौरे को विश्व कप के लिहाज से अहम मान रही है। ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज महिला टीमों के बीच 3 टी20 मैचों की सीरीज 19, 21 और 23 मार्च को खेली जाएगी। वेस्टइंडीज की कप्तान हेली मैथ्यूज ने इस सीरीज को टी20 विश्व कप की तैयारी के लिहाज से अहम माना है। मैथ्यूज ने कहा, मैं उन मौकों का पूरा फायदा उठाने के लिए और खासकर ऑस्ट्रेलिया में कुछ महीनों के बाद एक साथ प्लेन में बैठकर फिर से एक ग्रुप के तौर पर जुड़ने के लिए उत्सुक हूं। यह हमारे लिए बहुत अच्छा होने वाला है।उन्होंने कहा कि यह एक बहुत ही अहम (सीरीज) है और मुझे लगता है कि यह इस बात का अच्छा टेस्ट होगा कि हम एक टीम के तौर पर अभी कहां हैं। वर्ल्ड कप शुरू होने में बस कुछ ही महीने बाकी हैं, इसलिए उम्मीद है कि हम कुछ अच्छी चीजें देख पाएंगे और इस सीरीज से बहुत सारी पॉजिटिव बातें सीख पाएंगे।वेस्टइंडीज इस सीरीज को टी20 विश्व कप की तैयारी के तौर पर देखेगी। 2016 में खिताब जीतने वाली वेस्टइंडीज ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैचों के लिए पूरी ताकत से मैदान में उतरेगी। टीम में कप्तान हेली मैथ्यूज, स्टेफनी टेलर, एफी फ्लेचर, शमीन कैम्पबेल और डिएंड्रा डॉटिन जैसी अनुभवी खिलाड़ी शामिल हैं। कप्तान मैथ्यूज ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज की अहमियत भी जानते हैं। उन्होंने टीम में शामिल युवा खिलाड़ियों एबोनी ब्रैथवेट और जहजारा क्लैक्सटन से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई है। ऑस्ट्रेलिया सीरीज के लिए वेस्टइंडीज की टीम हेली मैथ्यूज (कप्तान), चिनेल हेनरी, आलिया एलीने, एबोनी ब्रैथवेट, शमीन कैम्पबेल, जहजारा क्लैक्सटन, डिएंड्रा डॉटिन, एफी फ्लेचर, जैनिलेया ग्लासगो, शॉनिशा हेक्टर, जैदा जेम्स, कियाना जोसेफ, मैंडी मंगरू, करिश्मा रामहरैक, स्टेफनी टेलर

मिडिल ईस्ट वारः इजरायल का ईरान पर एक और घातक प्रहार: आईडीएफ के टारगेट में थे सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी, मौत या घायल नहीं हुई पुष्टि
नई दिल्ली। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के 17 दिन बीत गए हैं। यह जंग मंगलवार को 18वें दिन में प्रवेश कर गई है, लेकिन पश्चिम एशिया का यह तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस जंग का असर दुनिया भर में देखने को मिल रहा है। तेल और एलपीजी गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से जनता की चिंताएं बढ़ती ही जा रही है। इन सबके बीच इस युद्ध से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई है। इजरायल ने ईरान के सुरक्षा प्रमुख लारीजानी पर सैन्य कार्रवाई किए जाने का दावा किया है। इस्राइली मीडिया के हवाले से समाचार एजेंसी ने बताया कि इस्राइल की सेना ने ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी को निशाना बनाया है। मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हमले के बाद लारीजानी की स्थिति कैसी है, इसे लेकर हालात तुरंत साफ नहीं हो सके हैं। सेना ने कहा कि लारीजानी मारे गए हैं या घायल हुए हैं, इसकी पुष्टि होनी बाकी है। ये भी महत्वपूर्ण है कि ईरान ने अभी तक लारीजानी पर हमले की इस रिपोर्ट पर कोई टिप्पणी नहीं की है।खामेनेई की मौत के बाद लारीजानी को माना जा रहा था सबसे ताकतवर सख्शबता दें कि पिछले दिनों अली खामेनेई और ईरान के बाकी बड़े नेतृत्व के मारे जाने के बाद अली लारीजानी को ही सबसे ताकतवर शख्स माना जा रहा था, जो इस युद्ध में ईरान की अगुवाई कर रहा है। अली लारीजानी कथित तौर पर आखिरी बार 13 मार्च को कुद्स डे पर देखे गए थे। इजरायली सेना का कहना है कि उसने सोमवार को तेहरान, शिराज और तबरीज में इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ हमला किया है। सेना का कहना है कि तेहरान में हुए हमलों में कमांड सेंटर, लॉन्च साइट और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया।युद्ध के बीच हताहतों के तेजी से बढ़ रहे आंकड़ेयुद्ध के बीच हताहतों के आंकड़े भी लगातार बढ़ रहे हैं। ईरान में मृतकों की संख्या 2,000 से अधिक बताई जा रही है, जिनमें ज्यादातर नागरिक हैं। इजरायल में 25 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि अमेरिका के 20 सैनिक मारे गए हैं। इस जंग के कारण 40 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं और कई इलाकों में खाद्य संकट गहराता जा रहा है।

महिला टी-20 सीरीज:दक्षिण अफ्रीका ने दूसरे मुकाबले में न्यूजीलैंड को 18 रन से दी शिकस्त, खाका-म्लाबा की घातक गेंजबाजी बनी हार की वजह
हैमिल्टन। साउथ अफ्रीका महिला क्रिकेट टीम ने मंगलवार को दूसरे टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में न्यूजीलैंड को 18 रनों से हराया। हैमिल्टन के सेडन पार्क में साउथ अफ्रीका से मिले 178 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए न्यूजीलैंड की पूरी टीम 159 रन बनाकर ऑलआउट हुई। साउथ अफ्रीका ने दूसरे टी20 में जीत के साथ ही सीरीज को 1-1 से बराबर कर दिया है। 178 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। जॉर्जिया प्लिमर महज एक रन बनाकर पवेलियन लौटीं। वहीं, विकेटकीपर-बल्लेबाज इसाबेला गेज भी बल्ले से कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकीं और 6 रन बनाकर आउट हुईं। 31 के स्कोर पर 2 विकेट गंवाने के बाद साउथ अफ्रीका की लड़खड़ाती हुई पारी को कप्तान अमेलिया केर और सोफी डिवाइन ने संभाला। दोनों ने मिलकर तीसरे विकेट के लिए 39 रन जोड़े। हालांकि, डिवाइन अच्छी शुरुआत का फायदा उठाने में नाकाम रहीं और 18 गेंदों में 25 रन बनाकर पवेलियन लौटीं।अमेलिया केर ने 18 गेंदों में 6 चैकों की मदद से 32 रन बनाए। इसके बाद न्यूजीलैंड ने लगातार अंतराल पर विकेट गंवाए। इजी शार्प ने 21 गेंदों में 29 रन बनाए, जबकि जेस केर ने 10 गेंदों में 14 रनों का योगदान दिया। साउथ अफ्रीका की तरफ से गेंदबाजी में अयाबोंगा खाका ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 ओवर में सिर्फ 27 रन देकर 4 बड़े विकेट निकाले। वहीं, नॉनकुलुलको म्लाबा ने 27 रन देकर 3 विकेट चटकाए।इससे पहले साउथ अफ्रीका ने 20 ओवर में 5 विकेट गंवाकर स्कोरबोर्ड पर 177 रन लगाए। टीम की ओर से ताजमिन ब्रिट्स ने बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए 43 गेंदों में 53 रनों की दमदार पारी खेली। वहीं, कप्तान लौरा वोल्वार्ट ने 33 गेंदों में 41 रन बनाए। पहले विकेट के लिए ब्रिट्स और सुने लुस ने मिलकर 6.6 ओवर में 62 रन जोड़े और साउथ अफ्रीका को बढ़िया शुरुआत दी। लुस ने 21 गेंदों में 5 चैके और एक छक्के की मदद से 31 रन बनाए।इसके बाद कप्तान वोल्वार्ट और ब्रिट्स ने मिलकर दूसरे विकेट के लिए 48 रन जोड़े। ब्रिट्स ने अपनी अर्धशतकीय पारी के दौरान 5 चैके और 3 छक्के लगाए। अंत के ओवरों में कायला रेनके ने सिर्फ 9 गेंदों में 311 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए नाबाद 28 रन बनाए। न्यूजीलैंड की ओर से गेंदबाजी में अमेलिया केर और जेस केर ने दो-दो विकेट चटकाए।

झूठा दावा, सच्ची मौतें:काबुल में 400 लोगों की जान लेने वाला हमला, वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के खतरनाक इरादे उजागर
नई दिल्ली। पाकिस्तान की नापाक साजिशों ने वैश्विक मंच पर एक बार फिर उसके खतरनाक इरादों को उजागर कर दिया है। आतंकियों का पनाहगार पाकिस्तान इतना मसरूफ हो गया है कि निर्दोष लोगों की जान भी उसके लिए मामूली बन गई है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के काबुल में एयरस्ट्राइक कर जहां नशा मुक्ति अस्पताल तबाह को तबाह कर दिया है। वहीं 400 मौतें और 250 बेगुनाहों के घायल होने की खबर है। लेकिन वहीं, पाकिस्तान ने अस्पताल पर हमले के आरोपों को खारिज किया है। पाकिस्तान का दावा है कि केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इस बमबारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि 400 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के प्रवक्ता ने कहा है कि पाकिस्तान ने इस कार्रवाई के दौरान बेगुनाह लोगों को निशाना बनाया है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एयरस्ट्राइक अस्पताल पर की गई, जिससे बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए हैं।मलबे से निकाले जा रहे शवफितरत ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी देते हुए कहा कि बचाव कार्य जारी है और मलबे से शव निकाले जा रहे हैं। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना के बाद अस्पताल में आग लग गई थी, जिसे बुझाने में दमकल कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हमले से पहले लड़ाकू विमानों की आवाज सुनी गई और उसके बाद बम गिराए गए।पाकिस्तान ने आरोपों को किया खारिजहालांकि, पाकिस्तान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता ने कहा कि उनकी सेना ने केवल आतंकवादी ठिकानों और सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया था, न कि किसी अस्पताल को। उनका दावा है कि ये कार्रवाई उन ठिकानों के खिलाफ थी, जहां से पाकिस्तान के खिलाफ हमलों की योजना बनाई जा रही थी।अंतरराष्ट्रीय स्तर जताई जा रही घटना पर चिंताइस घटना पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। अफगानिस्तान के प्रसिद्ध क्रिकेटर राशिद खान ने सोशल मीडिया पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि नागरिक ठिकानों को निशाना बनाना युद्ध अपराध है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है।गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में दोनों देशों के बीच सीमा पर गोलीबारी की घटनाएं भी सामने आई थीं, जिनमें लोगों की जान गई थी। कुल मिलाकर, इस घटना ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। दोनों देशों के दावों के बीच सच्चाई क्या है, यह निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन फिलहाल निर्दोष नागरिकों की मौत ने मानवता को झकझोर कर रख दिया है।

जब भारत बना शांति का सूत्रधार:1956 के स्वेज संकट पर जयराम रमेश का बड़ा बयान
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच 1956 के स्वेज संकट को याद करते हुए भारत की कूटनीतिक भूमिका को अहम बताया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह उस समय भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संतुलन और शांति कायम करने में योगदान दिया था, वैसी ही समझदारी आज के दौर में भी जरूरी है।रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि करीब 70 साल पहले दुनिया स्वेज संकट से जूझ रही थी। 26 जुलाई 1956 को मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्देल नासिर ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया था, जिससे पश्चिमी देशोंकृविशेष रूप से ब्रिटेन और फ्रांसकृमें तीखी प्रतिक्रिया हुई। इसके बाद 29 अक्टूबर 1956 को ब्रिटेन, फ्रांस और इजराइल ने मिस्र पर सैन्य हमला कर दिया, जिससे युद्ध जैसी स्थिति बन गई।हालांकि, कुछ ही दिनों में उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर के हस्तक्षेप के बाद हमलावर देशों को पीछे हटना पड़ा। रमेश ने यह भी उल्लेख किया कि यही आइजनहावर इससे पहले ईरान के प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसद्देग को हटाने के अभियान को मंजूरी दे चुके थे। संघर्ष के थमने के बाद नवंबर 1956 में संयुक्त राष्ट्र ने संयुक्त राष्ट्र आपातकालीन बल की तैनाती सिनाई और गाजा क्षेत्र में की। इस बल में भारत सहित 10 देशों ने भाग लिया और इसने जून 1967 तक क्षेत्र में शांति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।भारत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए रमेश ने बताया कि इस मिशन में भारतीय सैन्य अधिकारियों ने नेतृत्व किया। दिसंबर 1959 से जनवरी 1964 तक लेफ्टिनेंट जनरल पी.एस. ज्ञानि और जनवरी 1966 से जून 1967 तक मेजर जनरल इंदरजीत रिक्ये ने इस बल की कमान संभाली। साथ ही, 20 मई 1960 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने गाजा में तैनात भारतीय सैनिकों को संबोधित भी किया था।रमेश ने यह भी कहा कि यूएनएफई की वापसी के तुरंत बाद 1967 में छह-दिवसीय युद्ध शुरू हो गया, जिसने क्षेत्र में बड़े संघर्ष को जन्म दिया। यह ऐतिहासिक संदर्भ ऐसे समय में सामने आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता है। हालिया हमलों के चलते जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है और तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।

भारत में गैस की किल्लत होगी खत्म:कतर से एलपीजी लेकर रवाना हुआ नंदा देवी आज पहुंचेगा वतन, कल मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा था शिवालिक
नई दिल्ली। कतर से एलपीजी लेकर रवाना हुए भारतीय जहाज नंदा देवी के मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट से होते हुए गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। एक दिन पहले शिवालिक जहाज लगभग 45-46 हजार टन एलपीजी लेकर मुंद्रा बंदरगाह पहुंच चुका है। जहाज के सुरक्षित पहुंचने से संवेदनशील समुद्री मार्ग से ईंधन की ढुलाई को लेकर बनी चिंताओं के बीच राहत मिलने की उम्मीद है। इससे पहले, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान बताया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने के बाद टैंकर सफलतापूर्वक खुले समुद्र में प्रवेश कर गया है। उन्होंने बताया कि दो भारतीय एलपीजी जहाज, शिवालिक और नंदा देवी, लगभग 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी भारत ला रहे हैं। ये दोनों जहाज सरकारी स्वामित्व वाली शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हैं। सिन्हा ने यह भी कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में कार्यरत सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उनसे जुड़ी किसी भी अप्रिय घटना की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद 22 भारतीय जहाजसरकारी आंकड़ों के अनुसार, फारस की खाड़ी क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में 22 भारतीय जहाज मौजूद थे, जिनमें कुल 611 नाविक सवार थे। नंदा देवी गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचेगा, जबकि संयुक्त अरब अमीरात से लगभग 81,000 टन कच्चा तेल लेकर आ रहा जहाज जग लाडकी मुंद्रा बंदरगाह की ओर रवाना हो चुका है। जहाज और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं।दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य उल्लेखनीय है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। क्षेत्र में तनाव जारी रहने के कारण, अधिकारी जहाजों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं और क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं।मंत्रालय ने पहले की एक ब्रीफिंग में कहा था, ष्देश भर के प्रमुख बंदरगाह जहाजों की आवाजाही और माल ढुलाई कार्यों पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं और शिपिंग लाइनों और माल ढुलाई हितधारकों को सहायता प्रदान कर रहे हैं, जिसमें लंगरगाह, किराया और भंडारण शुल्क में रियायतें शामिल हैं।


