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भगवान सच में हैं बहुत दयालु:लगातार दूसरा टी-20 विश्व कप जीतने से गदगद बुमराह, बोले- मैं कभी पीछे नहीं छिपना चाहता
नई दिल्ली। भारतीय टीम को टी20 विश्व कप 2024 के बाद टी20 विश्व कप 2026 में चैंपियन बनाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने कहा है कि वह हमेशा चुनौतीपूर्ण काम करना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने क्रिकेट को चुना। बुमराह ने कहा है कि कुछ अलग कर पाना उन्हें बहुत खुशी देता है।बीसीसीआई टीवी पर शेयर किए गए एक वीडियो में जसप्रीत बुमराह ने कहा, मैं कभी पीछे नहीं छिपना चाहता। मैं चीजों के बीच रहना चाहता हूं। मैं हमेशा एक मुश्किल काम करना चाहता था। मैंने क्रिकेट उसी के लिए खेलना शुरू किया। जब मैं कुछ अलग कर पाता हूं, तो मुझे बहुत खुशी होती है। इससे बेहतर कोई एहसास नहीं हो सकता। मैंने अपना क्रिकेट अहमदाबाद में ही शुरू किया और सारा क्रिकेट यहीं खेला। गुजरात के लिए खेलकर रैंक में ऊपर आया। अब यहां विश्व कप खेल रहा हूं और मैन ऑफ द मैच बन रहा हूं। पिछली बार हम बस पीछे रह गए थे, इस बार हम आगे निकल गए। मैं बहुत खुश हूं।लगातार दो विश्व कप कभी नहीं हुएबुमराह ने कहा, मेरा बेटा आया, वह पिछली बार भी वहां था। इस बार, वह वहां था, मेरी मां आई थी, जो बहुत खास था। मुझे पूरे सर्कल के बारे में नहीं पता, लेकिन सच में बहुत खुश हूं। लगातार दो विश्व कप कभी नहीं हुए। भगवान सच में बहुत दयालु हैं, और मैं इससे ज्यादा शुक्रगुजार नहीं हो सकता।न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर भारत ने लगातार जीता दूसरा टी-20 विश्व कपभारतीय टीम ने 8 मार्च को टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर लगातार दूसरा टी20 विश्व कप जीता। लगातार 2 टी20 विश्व कप और कुल तीन टी20 विश्व कप जीतने वाली भारत पहली टीम है। इसके साथ ही अपने घर में टी20 विश्व कप जीतने वाली भी भारतीय टीम पहली टीम है। सेमीफाइनल में बेहतरीन गेंदबाजी करने वाले बुमराह ने फाइनल में भी शानदार गेंदबाजी की और 4 ओवर में 15 रन देकर 4 विकेट लिए। इस शानदार और यादगार प्रदर्शन के लिए बुमराह को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

मिडिल-ईस्ट वार:ईरान से आर्थिक वार में बुरा फंसा अमेरिका
गणेश साकल्लेअमेरिका-इजराइल और ईरान की जंग आज तेरहवें दिन में प्रवेश कर गई है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि अमेरिका ईरान पर हमला कर आर्थिक जंग में बुरी तरह उलझ गया है। उसे इस युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल पा रहा है। दरअसल लड़ाई तो इजराइल और ईरान के बीच थी। इसमें अमेरिका ने कूदकर पूरी दुनिया को विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। अमेरिका अब तक अपने हमलों में किसी भी मकसद में सफल नहीं हो पाया है। अगर उसके घोषित इरादों में नजर डाले तो उसका मूल मकसद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली हुसैनी खामेनेई समेत पूरी पहली पंक्ति को साफ करना था, किंतु इसमें भी वह पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। दूसरा लक्ष्य परमाणु ठिकानों को तबाह करना था। इसमें उसे सात महीने पहले हमले में कामयाबी मिली थी या अब मिली है, इसका कोई सही जवाब उसके पास नहीं है। तीसरा ईरादा ईरान में तख्ता पलट कर अपने पसंदीदा नेताओं को सत्ता के साकेत में बैठाना था, जो सफल नहीं हो पाया। 13 दिन में सैकड़ों हमले करने के बाद भी अमेरिका और इजराइल ईरान की हुकूमत को खदेड़ नहीं पाई है। इतना ही नहीं, वहां की जनता के दिलों में भी अमेरिका-इजराइल कोई जगह नहीं बना पाए हैं। सच पूछो तो यह सारे मुद्दे बहाना हैं, असल में तो अमेरिका को ईरान के तेल भंडार हथियाना है। इसके विपरीत ईरान ने बहुत ही सधी हुई रणनीति के तहत जवाबी हमले कर पूरे अमेरिका को आर्थिक युद्ध में फंसा दिया है। अमेरिका और इजराइल जिन आधुनिक हथियारों से ईरान पर हमले कर रहे हैं उसकी लागत कई करोड़ है, जबकि ईरान खाड़ी देशों के एक दर्जन देशों पर मिसाइल और ड्रोन दागकर अपने इरादे जाहिर कर चुका है। रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो ईरान जिस ड्रोन से पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिका के एयरबेस पर निशाने साध रहा है, उसकी लागत लभगग 16 लाख रुपए होती है। इन ड्रोन को ट्रेस कर मार गिराने में अमेरिका-इजराइल करीब 11 करोड़ रुपए खर्च कर रहे हैं। एक मोटे अनुमान के तहत बीते 13 दिनों में अमेरिका-इजराइल लगभग 30 हजार करोड़ से अधिक के आधुनिक हथियार चला चुके हैं। इस जंग को लेकर अमेरिका में भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ आवाज उठने लगी है। वहां के पत्रकारों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने सवाल पूछे हैं कि अमेरिका का इस लड़ाई से सीधा क्या संबंध है। उनका कहना है कि इजराइल की लड़ाई ईरान से है, इसमें अमेरिका को क्यों पड़ना चाहिए। इसका सटीम जवाब अभी तक ट्रम्प की ओर से नहीं आया है। अपने ही मुल्क में विरोध मुखर होने से ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। अब वे इस युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रहे हैं। पिछले दिनों उनके अलग-अलग बयानों से तो यही जाहिर होता है, लेकिन ईरान ने साफतौर पर सीजफायर करने से इनकार कर दिया है। उसका दावा है कि वह अमेरिका और इजराइल से लंबी लड़ाई के लिए तैयार है। खाड़ी देशों के तेल-कुओं, पेटृोलियम रिफाइनरी और दुबई जैसे बिजनेस हब पर ईरान ने हमले कर वहां की अर्थव्यवस्था को चैपट कर दिया है, जिसे पटरी आने में लंबा वक्त लगेगा। अगर इस युद्ध के लाभ-हानि का आंकलन किया जाए तो अभी तक अमेरिका-इजराइल के हाथ ईरान में इन्फ्रास्टक्चर नष्ट करने और ज्यादातर निदोर्ष लोगों को मौत के घाट उतारने के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ है, जबकि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस लेकर निकलने वाले जहाजों को निशाना बनाकर इसकी मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर ला दिया है। इसके चलते पूरी दुनिया में हाहाकार मच गया है। इसका सीधा असर भारत में भी दिखाई दे रहा है। रसोई गैस की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। साथ ही आवश्क वस्तुओं के दाम में भी अचानक उछाल आ गया है। आगे चलकर आम जरूरत की वस्तुएं और भी महंगी के आसार है।

मिडिल ईस्ट संकट में भारत की बड़ी डिप्लोमैटिक सफलता:स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता, जयशंकर की मेहनत लाई रंग
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता सामने आई है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच हुई अहम टेलीफोनिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। इस फैसले को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाला बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। हाल ही में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ा है। सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में करीब 90 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।भारत की सक्रिय कूटनीति आई कामऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भारत ने सक्रिय कूटनीति का परिचय देते हुए ईरान के साथ संवाद स्थापित किया। विदेश मंत्री जयशंकर और अराघची के बीच हुई बातचीत का मुख्य उद्देश्य इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखना और कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाना था। बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय टैंकरों को इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दे दी, जिससे भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति की चिंता काफी हद तक कम हो गई है।जयंशकर ने कई अन्य वैश्विक शक्तियों से भी की बातसूत्रों के मुताबिक, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मुद्दे पर केवल ईरान से ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख वैश्विक शक्तियों से भी संपर्क साधा। उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो से भी बातचीत कर समुद्री व्यापारिक मार्गों को खुला रखने और वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया।इन देशों के जहाजों पर सख्त प्रतिबंध लागूगौरतलब है कि ईरान ने यह विशेष रियायत ऐसे समय में दी है जब अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर इस मार्ग से गुजरने को लेकर सख्त प्रतिबंध लागू हैं। हालांकि भारत के साथ अपने विशेष संबंधों को ध्यान में रखते हुए ईरान ने भारतीय जहाजों को छूट दी है। इसे भारत की मजबूत और संतुलित विदेश नीति का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

रचा इतिहास:50 साल बाद अमेरिका में नई ऑयल रिफाइनरी, ट्रंप ने भारतीय साझेदार को सराहा
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका ऑयल रिफाइनरी खोलने का जा रहा है, जो टेक्सास के ब्राउन्सविल होगी। उन्होंने भारत की प्रमुख निजी ऊर्जा कंपनी को भी धन्यवाद दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सोशल ट्रुथ पर पोस्ट किया, अमेरिका असली एनर्जी दबदबे की ओर लौट रहा है। आज मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिका टेक्सास के ब्राउन्सविले में 50 सालों में पहली नई ऑयल रिफाइनरी खोलने जा रहा है। यह एक ऐतिहासिक 300 अरब डॉलर की डील है, जो अमेरिका के इतिहास की सबसे बड़ी डील है। इस निवेश के लिए हमारे सहयोगी देश भारत और उनकी निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस का शुक्रिया। हमारे अमेरिका फर्स्ट एजेंडे की वजह से स्ट्रीमलाइनिंग परमिट और टैक्स कम करने से देश में अरबों डॉलर की डील हुई है।ट्रंप ने रिलायंस का किया धन्यवादउन्होंने आगे लिखा, यह अमेरिकी कामगारों, ऊर्जा क्षेत्र और दक्षिण टेक्सास के लोगों के लिए एक बड़ी जीत है। इस निवेश के लिए भारत में हमारे सहयोगी और उनकी सबसे बड़ी प्राइवेट एनर्जी कंपनी रिलायंस का धन्यवाद। यह हमारे अमेरिका फर्स्ट एजेंडा, परमिट को आसान बनाने और टैक्स कम करने की वजह से है, जिससे हमारे देश में अरबों डॉलर की डील्स वापस आ रही हैं।नई रिफायनरी अमेरिकी बाजारों को देगी ताकतडोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट में लिखा, ब्राउन्सविले पोर्ट पर एक नई रिफाइनरी अमेरिकी बाजारों को ताकत देगी। यह हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगी और अमेरिकी एनर्जी प्रोडक्शन को बढ़ाएगी व अरबों डॉलर का आर्थिक प्रभाव डालेगी। यह दुनिया की सबसे साफ रिफाइनरी होगी। यह ग्लोबल एक्सपोर्ट को बढ़ावा देगी और उस इलाके में हजारों नौकरियां और प्रगति लाएगी, जो इसके लायक है। अमेरिकी एनर्जी का दबदबा ऐसा ही दिखता है। अमेरिका फर्स्ट, हमेशा! ट्रंप ने इसे अमेरिका की ऊर्जा प्रभुत्व की दिशा में बड़ा कदम बताया। इसके साथ ही अमेरिका फर्स्ट के नारे को फिर से दोहराया।

1983-2011 के सामने फीका टी20 वर्ल्ड कप!:महशहूर कमेंटेटर के बयान से मचा बवाल
नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब टीम इंडिया ने अपने नाम कर लिया है। अहमदाबाद के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में बीते रविवार को खेले गए फाइनल मैच में भारत ने 96 रनों से शानदार जीत हासिल की और तीसरी बार ये खिताब अपने नाम कर लिया। लेकिन टीम इंडिया के चैंपियन बनने के बाद पूर्व क्रिकेटर और मौजूदा दौर के मशहूर कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने कुछ ऐसा बयान दे दिया है, जिसको लेकर वह सुर्खियों में आ गए हैं। दरअसल संजय मांजरेकर की नजर में वनडे के 2 विश्व कप (1983, 2011) की तुलना में टी20 विश्व कप (2007, 2024 और 2026) की जीत कम अहमियत रखती है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, ष्समय के साथ हमें हर साल दिए जाने वाले इन विश्व कप खिताबों को सही नजरिए से देखना होगा। भारत की टी20 विश्व कप जीत, कपिल देव की कप्तानी में 1983 और धोनी की कप्तानी में 2011 की 50 ओवर की विश्व कप जीत के मुकाबले, अपनी असली चुनौती और पवित्रता के मामले में कहीं नहीं ठहरती।भारतीय टीम के टी20 विश्व कप 2026 जीतने के ठीक बाद आया मांजरेकर का यह बयान उन्हें फिर से आलोचना के घेरे में ले आया है। मांजरेकर को भारतीय क्रिकेट फैंस की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय क्रिकेट टीम ने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में वेस्टइंडीज को हराकर अपना वनडे विश्व कप जीता था। दूसरा वनडे विश्व कप जीतने में भारत को 28 साल का समय लगा। यह इंतजार 2011 में समाप्त हुआ जब एमएस धोनी की कप्तानी में भारत ने श्रीलंका को हराकर विश्व कप जीता। भारत ने अपना पहला टी20 विश्व कप एमएस धोनी की कप्तानी में ही 2007 में जीता था। दूसरे टी20 विश्व कप के लिए भारतीय टीम को 17 साल का इंतजार करना पड़ा। रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका को फाइनल में हराकर टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता था। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम ने 8 मार्च को अहमदाबाद में न्यूजीलैंड को फाइनल में हराकर टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता। टीम इंडिया लगातार 2 टी20 विश्व कप और कुल 3 टी20 विश्व कप जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बनी। इसके अलावा अपने घर में टी20 विश्व कप जीतने का रिकॉर्ड भी टीम इंडिया के नाम दर्ज हो गया।

तेल के सबसे अहम रास्ते पर अमेरिका का स्टैंड:हॉर्मुज स्ट्रेट खुला रखने की खाई कसम, ईरान को चेतावनी भी
वाशिंगटन। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान में छिड़ी जंग के चलते तेल-गैस आयात में रुकावट का असर दुनिया भर में दिखाई देने लगा है। इस संकट के बीच व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित करने की अनुमति नहीं देंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे अमेरिकी सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” का एक मुख्य लक्ष्य इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दैनिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने दोहराया है कि होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल की आपूर्ति लगातार जारी रहनी चाहिए, ताकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को उनकी ऊर्जा जरूरतें मिलती रहें।अमेरिका ने ईरान को दी चेतावनीउन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान इस अहम समुद्री रास्ते को बंद करने की कोशिश करता है, तो उसे कड़ी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। लेविट ने कहा कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट में तेल या सामान की आवाजाही रोकने की कोशिश करता है, तो दुनिया की सबसे ताकतवर सेना उसे अब तक से भी कई गुना ज्यादा सख्त जवाब देगी। उन्होंने कहा, ष्होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी चेकपॉइंट्स में से एक है, जहां से दुनिया भर में तेल शिपमेंट का एक बड़ा हिस्सा जाता है। वहाँ कोई भी रुकावट तेल की कीमतों को तेजी से बढ़ा सकती है और इंटरनेशनल मार्केट को अस्थिर कर सकती है।लेविट ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन को पहले से अंदेशा था कि ईरान संघर्ष के दौरान ऊर्जा बाजारों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है। इसी वजह से सरकार ने पहले से कई सुरक्षा कदम तैयार कर रखे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को पूरी उम्मीद थी कि ईरान की सरकार वैश्विक बाजारों को प्रभावित करने की कोशिश करेगी।ट्रंप ने खाड़ी में काम कर रहे टैंकरों को जोखिम बीमा देने की पेशकश इन तैयारियों के तहत अमेरिकी प्रशासन ने खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए कुछ कदम उठाए हैं। लेविट के मुताबिक, अब तक ट्रंप प्रशासन ने खाड़ी में काम करने वाले टैंकरों को राजनीतिक जोखिम बीमा देने की पेशकश की है। इसके अलावा संकट के दौरान तेल की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए अमेरिकी सरकार ने कुछ नियमों में अस्थायी राहत भी दी है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने तेल से जुड़े कुछ प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से ढील दी है।स्थिति पर नजर रखे हुए हैं ट्रंप व्हाइट हाउस ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नौसेना तेल टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकालने के लिए उनके साथ चल सकती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा और ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए आगे के कदमों पर भी लगातार विचार कर रहा है। लेविट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी ऊर्जा टीम बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और उद्योग जगत के नेताओं से बातचीत भी कर रहे हैं। साथ ही अमेरिकी सेना को भी निर्देश दिए गए हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए अतिरिक्त विकल्प तैयार किए जाएं।

मिडिल ईस्ट वार:चाय-नाश्ते से लेकर चाट तक पहुंची महंगाई की आंच, एलपीजी संकट ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत में भी साफ दिखाई देने लगा है। खासतौर पर एलपीजी (लिक्विड पेट्रोलियम गैस) की सप्लाई पर पड़े असर के कारण देश के कई शहरों में महंगाई बढ़ती नजर आ रही है। गैस कंपनियों ने एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है और कमर्शियल सिलेंडर के ऑर्डर पर रोक से छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े होटल-रेस्तरां तक चिंता में हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।चाय-नाश्ते से लेकर रेस्तरां में मिलने वाले खाने तक की कीमतें बढ़ गई हैं। कई जगहों पर जो चाय पहले 10 रुपये में मिलती थी, वह अब 15 से 20 रुपये तक पहुंच गई है। गैस की किल्लत के कारण नाश्ते की चीजों के दाम भी बढ़ गए हैं और कई दुकानदारों ने मजबूरी में अपने दाम बढ़ा दिए हैं।सप्लाई प्रभावित होने से देश में एलपीजी संकट गहरायादरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट में तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो गई है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है और इन आयात का 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से आता है। ऐसे में सप्लाई प्रभावित होने से देश में एलपीजी संकट गहराने लगा है।भारत में हर साल 31 मिलियन टन एलपीजी की होती है खपतभारत में हर साल करीब 31 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है। इसमें से लगभग 87 प्रतिशत गैस घरेलू उपयोग के लिए जाती है, जबकि बाकी हिस्सा होटल, ढाबों और रेस्तरां में इस्तेमाल होता है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए तेल कंपनियों को निर्देश दिए हैं, जिसके कारण कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हो रही है।कमर्शियल सिलेंडर की कमी का सबसे ज्यादा असर छोटे कारोबारियों पर पड़ा है। दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। कई दुकानदारों का कहना है कि ब्लैक मार्केट में 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर 2500 से 2800 रुपये तक में बिक रहा है। कुछ जगहों पर सिलेंडर लेने के लिए बोली तक लगाई जा रही है।खाने-पीने की चीजों पर दिख रहा गैस की कमी का असरगैस की कमी का असर खाने-पीने की चीजों पर भी साफ दिख रहा है। जहां पहले पूरी-सब्जी की प्लेट 25 रुपये में मिलती थी, वह अब 30 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, गोलगप्पे की प्लेट में भी कटौती देखने को मिली है। कई जगह 20 रुपये में पहले 8 गोलगप्पे मिलते थे, अब उसी कीमत में केवल 5 गोलगप्पे दिए जा रहे हैं।बड़े होटल और रेस्तरां भी इस संकट से अछूते नहीं हैं। कई रेस्तरां ने अपने मेन्यू में बदलाव करना शुरू कर दिया है। कुछ जगहों पर थाली से मटर पनीर जैसे आइटम हटा दिए गए हैं, जबकि कहीं थाली की कीमत बढ़ा दी गई है। कई होटल गैस की जगह इलेक्ट्रिक तंदूर और इंडक्शन जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करने लगे हैं।मुंबई में 20 फीसदी तक होटल रेस्तरां बंदमुंबई होटल एसोसिएशन के अनुसार, एलपीजी संकट के कारण लगभग 20 प्रतिशत होटल और रेस्तरां पहले ही बंद हो चुके हैं। यदि जल्द ही गैस सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो यह आंकड़ा 50 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। हालांकि केंद्र सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए तेल कंपनियों के अधिकारियों की एक समिति बनाई है, जो एलपीजी सप्लाई की समीक्षा कर रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर कारोबारियों का कहना है कि संकट अभी भी बना हुआ है और इससे आम लोगों पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ रहा है।

टी-20 विश्व कप 2026:इतिहास दोहराने वाली टीम इंडिया पर पैसों की बारिश, बीसीसीआई ने इतने करोड़ का इनाम देने किया ऐलान
मुंबई। टी-20 विश्व कप 2026 में इतिहास दोहराने के बाद टीम इंडिया पर पैसों की बारिश हुई है। भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड ने भारतीय टीम को 131 करोड़ रुपए का नकद पुरस्कार देने का ऐलान किया है। बीसीसीआई की ओर से यह घोषणा मंगलवार को की गई है। यह इनाम खिलाड़ियों के साथ-साथ कोचिंग स्टाफ और टीम के अन्य सपोर्ट स्टाफ को भी दिया जाएगा।खिलाड़ियों और स्टाफ को मिलेगा हिस्सारिपोर्ट के मुताबिक, इस राशि में 15 खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और अन्य सपोर्ट स्टाफ को शामिल किया गया है। बताया जा रहा है कि इनाम की रकम में सबसे बड़ा हिस्सा खिलाड़ियों को मिलेगा, जबकि सपोर्ट स्टाफ को मिलने वाली राशि उनकी जिम्मेदारी और पद के अनुसार तय की जाएगी।बता दें कि रविवार (8 मार्च) को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर खिताब अपने नाम किया था। इस जीत के साथ भारत ने अपना टी20 वर्ल्ड कप खिताब सफलतापूर्वक डिफेंड किया। भारत टूर्नामेंट के इतिहास में लगातार दो बार खिताब जीतने वाली पहली टीम बन चुका है।2024 के मुकाबले बढ़ा इनामइस बार घोषित 131 करोड़ रुपये की इनामी राशि 2024 टी20 वर्ल्ड कप के बाद दिए गए 125 करोड़ रुपये से ज्यादा है। यानी इस बार बोर्ड ने पिछले पुरस्कार की तुलना में छह करोड़ रुपये अधिक देने का फैसला किया है।बीसीसीआई सचिव ने दी बधाईबीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने टीम को बधाई देते हुए कहा, श्बोर्ड खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ और चयनकर्ताओं को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए एक बार फिर बधाई देता है और भविष्य के लिए उन्हें लगातार सफलता की शुभकामनाएं देता है।न्यूजीलैंड को हराकर जीता खिताबभारतीय टीम ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीता। टीम इंडिया ने इस जीत के साथ न सिर्फ अपना खिताब सफलतापूर्वक बचाया, बल्कि टूर्नामेंट के इतिहास में लगातार दो बार टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम भी बन गई।

एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में राहत:केंद्र ने एस्मा लागू कर जमाखोरी पर कसा शिकंजा, फैसले का उद्देश्य घरेलू रसोई गैस को प्राथमिकता
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट वार के चलते देश में एलपीजी सिलिंडरों की संभावित कमी और जमाखोरी की बढ़ती शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य घरेलू रसोई गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना और काले बाजारी गतिविधियों पर रोक लगाना है।सरकारी सूत्रों के अनुसार, एस्मा लागू होने के बाद एलपीजी और अन्य आवश्यक ईंधनों की आपूर्ति में प्राथमिक क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें अस्पताल, स्कूल, सरकारी संस्थान और अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। इससे इन संस्थानों में गैस की कमी से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को रोका जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से आम जनता को राहत मिलेगी और बाजार में कृत्रिम संकट पैदा करने वालों पर सख्ती की जा सकेगी।दरअसल, पिछले कुछ महीनों से कई राज्यों में एलपीजी सिलिंडरों की जमाखोरी और कालाबाजारी की घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिली थी। कई जगहों पर कमर्शियल गैस सिलिंडरों की कमी की शिकायतें सामने आईं, जिससे होटल और रेस्टोरेंट उद्योग की चिंताएं बढ़ गई हैं।एस्मा क्या है?आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) एक ऐसा कानून है, जिसका उद्देश्य जीवन से जुड़ी आवश्यक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना है। इस कानून के तहत सरकार को यह अधिकार मिलता है कि वह महत्वपूर्ण सेवाओं में बाधा डालने वाली गतिविधियों पर रोक लगाए और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करे। आमतौर पर इसका उपयोग परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सार्वजनिक सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए किया जाता है।रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देशसरकार ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बनी रहे। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत में एलपीजी की कुल खपत लगभग 3.13 करोड़ टन रही, जबकि घरेलू उत्पादन करीब 1.28 करोड़ टन ही था। शेष जरूरत आयात के जरिए पूरी की गई।

शेयर बाजार में आई सुनामी जैसी तेजी: ट्रंप का बयान बना टर्निंग पॉइंट, सेंसेक्स-निफ्टी दोनों बने राॅकेट
नई दिल्ली। वैश्विक तनाव और युद्ध की आशंकाओं के कारण पिछले कुछ दिनों से गिरावट झेल रहे भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जोरदार वापसी देखने को मिली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर हालात में नरमी के संकेत मिलने के बाद बाजार में निवेशकों का भरोसा लौटा और प्रमुख सूचकांक तेज उछाल के साथ खुले।मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,566 के मुकाबले करीब 800 अंकों की तेजी के साथ 78,375 पर खुला। शुरुआती कारोबार में ही इसमें और तेजी आई और यह 900 अंक से अधिक चढ़कर लगभग 78,526 के स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 भी मजबूती के साथ 24,280 पर खुला और कुछ ही देर में 24,303 के स्तर तक पहुंच गया।यूएस की भूमिका को लेकर वैश्वि बाजारों में अस्थिरतादरअसल, बीते कुछ दिनों से ईरान और इजरायल के बीच युद्ध की स्थिति और यूनाइटेड स्टेट की भूमिका को लेकर वैश्विक बाजारों में भारी अस्थिरता बनी हुई थी। सोमवार को भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन सेंसेक्स करीब 1,352 अंक गिरकर 77,566 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी भी कमजोर होकर 24,028 के स्तर पर बंद हुआ था।ट्रंप का दावाः ईरानी सेना हो चुकी है काफी कमजोर मंगलवार को बाजार में आई तेजी के पीछे डोनाल्ड ट्रंप के बयान को अहम माना जा रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी सेना काफी कमजोर हो चुकी है और युद्ध अपने अंतिम चरण में हो सकता है। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में तनाव कुछ कम हुआ और निवेशकों की धारणा में सुधार देखने को मिला।90-91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचा कच्चा तेलइसी के साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज गिरावट आई। हाल ही में 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा कच्चा तेल घटकर करीब 90-91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयातक देशों के लिए सकारात्मक मानी जाती है, जिससे शेयर बाजार में खरीदारी बढ़ी। मजबूत वैश्विक संकेतों का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा। जापान और साउथ कोरिया समेत कई एशियाई बाजार तेजी के साथ कारोबार करते नजर आए। इसका असर भारतीय बाजार में भी दिखाई दिया।कई शेयरों में दिखी तेजीतेजी के माहौल में कई प्रमुख शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। इंटरग्लोब एविएशन इंडिगो एशियन पेंट्स टाइटन कंपनी वीकेएसजे और एचडीएफसी बैंक जैसे लार्जकैप शेयर बढ़त में रहे। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की खरीदारी देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में शेयर बाजार में और स्थिरता देखने को मिल सकती है।

ग्लोबल ऑयल मार्केट में हलचल!:ईरान युद्ध के बीच रूसी तेल पर अमेरिकी रुख बदलेगा? ट्रंप का बड़ा इशारा
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध और तेल आपूर्ति पर खतरे के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिकी राट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया संकेतों ने यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या अमेरिका रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दे सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए कुछ देशों पर लगे ऊर्जा प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने पर विचार कर रहा है।दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खाड़ी क्षेत्र के कई बड़े तेल उत्पादक देशोंकृजैसे फंजंत, ज्ञनूंपज और प्तंुकृने उत्पादन में कटौती के संकेत दिए हैं। इसके अलावा ईरान की ओर से रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्यमें बाधा डालने की आशंका ने वैश्विक बाजार को और अस्थिर कर दिया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में से एक माना जाता है।यह बोले ट्रंप फ्लोरिडा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार तेल बाजार को स्थिर करने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ देशों पर लगाए गए प्रतिबंधों को फिलहाल हटाया जा रहा है, ताकि तेल की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित न हो। ट्रंप के मुताबिक, “दुनिया में तेल की कमी नहीं होने दी जाएगी।”ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई ठिकानों पर किए हमलेइसी बीच मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कई ठिकानों पर हमले किए हैं, जिनमें बहरीन के एक पेट्रोलियम परिसर को भी निशाना बनाया गया। दूसरी ओर अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है और उसकी नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है।तेल बाजार में देखने को मिला तनाव का असरइस भू-राजनीतिक तनाव का असर सीधे तेल बाजार पर देखने को मिला। सोमवार को वैश्विक बेंचमार्क कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और यह 25 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। एक समय यह 115 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर चला गया था। हालांकि बाद में ट्रंप के बयानों के बाद बाजार में कुछ राहत आई और कीमतें गिरकर करीब 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गईं।रूस के तेल पर प्रतिबंध हटने से बाजार में बढ़ सकती है सप्लाईविशेषज्ञों का मानना है कि अगर रूस के तेल पर प्रतिबंधों में ढील दी जाती है, तो इससे वैश्विक बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका आगे क्या फैसला लेता है और मध्य पूर्व का यह संघर्ष किस दिशा में जाता है।

कंगाली की मार:पेट्रोल गायब, भोजन गायब, अब पाकिस्तान में इफ्तार पार्टियों पर भी बैन
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती अस्थिरता का असर अब पाकिस्तान की आम जिंदगी पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के बाद पाकिस्तान में फ्यूल संकट गहरा गया है। हालात को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने ऊर्जा की खपत कम करने और बढ़ती आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं।प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के उद्देश्य से स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तरों के कामकाज में बदलाव का ऐलान किया है। सरकार के फैसले के अनुसार देशभर में स्कूलों को दो हफ्तों के लिए बंद कर दिया जाएगा, जबकि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा की कक्षाएं ऑनलाइन मोड में संचालित की जाएंगी। इससे छात्रों और स्टाफ की आवाजाही कम होगी और ईंधन की बचत हो सकेगी।रोक से ऊर्जा और संसाधनों की बचत होगी इसके अलावा सरकार ने आधिकारिक डिनर और बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाली इफ्तार पार्टियों पर भी रोक लगाने का फैसला किया है। रमजान के दौरान आमतौर पर सरकारी और निजी संस्थानों में बड़े स्तर पर इफ्तार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। सरकार का मानना है कि ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने से ऊर्जा और संसाधनों की बचत होगी।महंगाई ने तोड़ी जनता की कमरइसी बीच रमजान के महीने में पाकिस्तान में महंगाई ने भी लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। पंजाब प्रांत में फल और सब्जियों की कीमतें सरकारी तय दरों से काफी ज्यादा पर बिक रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पहले दर्जे के केले का सरकारी रेट 240 पाकिस्तानी रुपये प्रति दर्जन तय किया गया था, लेकिन बाजारों में दुकानदार इसे 300 रुपये से कम में बेचने को तैयार नहीं हैं। इसी तरह अमरूद, सेब और कंधारी अनार भी निर्धारित कीमतों से अधिक दरों पर बिक रहे हैं।आयातित थाई अदरक की कीमतें आसमान परवहीं आयातित थाई अदरक, जिसकी आधिकारिक कीमत 280 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई थी, कई बाजारों में 350 रुपये तक पहुंच गई। कीमतों में इस बढ़ोतरी ने आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। चूंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए तनाव बढ़ते ही वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं। पाकिस्तान अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए सप्लाई प्रभावित होने से वहां फ्यूल संकट और महंगाई दोनों गहराते जा रहे हैं।

दुनिया दंग:161 दिनों में 6 खिताब, क्रिकेट की दुनिया में भारत का डंका
नई दिल्ली। टीम इंडिया ने रविवार को टी20 वर्ल्ड कप 2026 के खिताबी मुकाबले में न्यूजीलैंड के विरुद्ध 96 रन से शानदार जीत दर्ज की। यह सिर्फ 161 दिनों के दौरान क्रिकेट जगत में भारत का छठा बड़ा खिताब है। एशिया कप 2025ः भारत ने दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में पाकिस्तान के खिलाफ 5 विकेट से एशिया कप का खिताब अपने नाम किया। 28 सितंबर को खेले गए इस मैच में पाकिस्तानी टीम 19.1 ओवरों में सिर्फ 146 रन पर सिमट गई। इसके जवाब में भारत ने 19.4 ओवरों में मुकाबला अपने नाम कर लिया।विमेंस ब्लाइंड टी20 वर्ल्ड कप 2025ः नेपाल की महिला टीम ने 23 नवंबर को कोलंबो में खेले गए इस ऐतिहासिक मुकाबले में 5 विकेट खोकर 114 रन बनाए। इसके जवाब में भारत ने 12.1 ओवरों में 7 विकेट शेष रहते जीत दर्ज कर ली।महिला वनडे वर्ल्ड कप 2025ः डीवाई पाटिल स्पोर्ट्स एकेडमी में 2 नवंबर को खेले गए इस मैच में भारतीय महिला टीम ने शेफाली वर्मा (87) और दीप्ति शर्मा (58) की अर्धशतकीय पारियों के दम पर 7 विकेट खोकर 298 रन बनाए। इसके जवाब में साउथ अफ्रीकी टीम 45.3 ओवरों में 246 रन पर सिमट गई। इसी के साथ भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने 52 रन से अपना वर्ल्ड कप खिताब जीता।अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026ः ये मुकाबला हरारे स्पोर्ट्स क्लब में 6 फरवरी को खेला गया था, जिसे भारत ने 100 रन से अपने नाम करते हुए रिकॉर्ड छठी बार वर्ल्ड कप खिताब जीता। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए वैभव सूर्यवंशी (175) की ऐतिहासिक पारी की मदद से 9 विकेट खोकर 411 रन बनाए। इसके जवाब में इंग्लैंड ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की। कालेब फाल्कनर ने 115 रन, जबकि बेन डॉकिन्स ने 66 रन का योगदान टीम के खाते में दिया, लेकिन इंग्लैंड 40.2 ओवरों में महज 311 रन पर सिमट गई।एसीसी विमेंस एशिया कप राइजिंग स्टार्स 2026ः बैंकॉक स्थित टेर्डथाई क्रिकेट ग्राउंड पर 22 फरवरी को खेले गए इस मुकाबले में भारत-ए ने 7 विकेट खोकर 134 रन बनाए। इसके जवाब में बांग्लादेशी टीम सिर्फ 19.1 ओवरों में 88 रन पर सिमट गई। टीम इंडिया ने 46 रन से खिताब अपने नाम किया।टी20 वर्ल्ड कप 2026: भारत ने 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में पहले बल्लेबाजी करते हुए 5 विकेट खोकर 255 रन बनाए। इस पारी में संजू सैमसन ने 89 रन, अभिषेक शर्मा ने 52 रन, जबकि ईशान किशन ने 54 रन की पारी खेली। इसके जवाब में न्यूजीलैंड 19 ओवरों में सिर्फ 159 रन पर सिमट गई।

संसद में जयशंकर की दो टूक:पश्चिम एशिया संकट का हल कूटनीति से, भारतीयों की सुरक्षित वापसी सरकार की प्राथमिकता
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर संसद में चिंता जताई गई। राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मिडिल ईस्ट की वर्तमान स्थिति पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।विदेश मंत्री ने बताया कि भारत ने 20 फरवरी को ही आधिकारिक बयान जारी कर अपनी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने तथा संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ता संघर्ष पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है और भारत शांति तथा स्थिरता का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रहे हैं। सरकार के विभिन्न मंत्रालय आपस में समन्वय के साथ काम कर रहे हैं ताकि स्थिति के अनुसार उचित कदम उठाए जा सकें। जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है।ईरान में हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारीविदेश मंत्री के अनुसार खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं, जबकि ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं। इस क्षेत्र से भारत को तेल और गैस की बड़ी आपूर्ति होती है, इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। उन्होंने बताया कि मौजूदा संकट के कारण क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति बिगड़ी है, जिसका असर आम जनजीवन और कामकाज पर पड़ रहा है। इस दौरान भारत ने अपने दो नाविकों को खो दिया है, जबकि एक अन्य नाविक अभी भी लापता है।ईरानी युद्धपोत को कोची एयरपोर्ट पर रुकने दी थी अनुमतिइस दौरान उन्होंने ईरानी जहाजों पर जानकारी देते हुए बताया, हिंद महासागर में ईरान के तीन जहाज थे, जिसमें से एक को हमने शरण दी। विदेश मंत्री ने कहा, मैंने ईरान के विदेश मंत्री से 28 फरवरी और पांच मार्च को बात की। ईरान के तीन जहाज हिंद महासागर में थे। हमने एक जहाज को ईरान के निवेदन पर डॉकिंग की परमिशन दी और शरण दी। भारत ने मानवीय आधार पर ईरानी युद्धपोत “लवन” को कोची पोर्ट पर रुकने की अनुमति दी थी, जिसके लिए ईरान ने धन्यवाद दिया। सरकार ने भरोसा दिलाया कि संकट के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। एस जयशंकर ने बताया कि हमने दो भारतीय नाविकों (मर्चेंट शिपिंग) को खो दिया है और एक अभी भी लापता है।भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर बोले भी विदेश मंत्रीभारतीय नागरिकों की सुरक्षा के बारे में जानकारी देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि तेहरान में भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय है और हाई अलर्ट पर काम कर रहा है। दूतावास भारतीय छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद कर रहा है। वहीं, ज्मीतंद में मौजूद भारतीय व्यापारियों को ।तउमदपं के रास्ते भारत लौटने में भी सहायता दी गई है। अब तक लगभग 67 हजार भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंच चुके हैं।

संन्यास की अटकलों पर लगा विराम:सूर्या ने तय किए अपने अगले दो बड़े लक्ष्य, टी20 विश्व कप जीत कर धोनी-रोहित के क्लब में भी हुए शामिल
अहमदाबाद। अहमदाबाद के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने इतिहास रच दिया है। एमएस धोनी और रोहित शर्मा के बाद सूर्यकुमार भारत के ऐसे तीसरे कप्तान बन गए हैं जिनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने टी20 विश्व कप जीता है। भारतीय टीम ने रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर टी20 विश्व कप का खिताब जीता। भारत की खिताबी जीत के बाद सूर्यकुमार यादव ने अपने अगले दो लक्ष्य भी स्पष्ट कर दिए हैं। 35 साल के हो चुके सूर्यकुमार यादव की विश्व कप के बाद संन्यास की अटकले लगाई जा रही थीं। मैच के बाद मीडिया से बात करते हुए भारतीय कप्तान ने इन तमाम अटकलों को खारिज करते हुए अपने अगले दो बड़े लक्ष्य स्पष्ट कर दिए। सूर्या के बयान से हुआ स्पष्टसूर्यकुमार यादव ने कहा, मेरा अगला लक्ष्य 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में ओलंपिक गोल्ड जीतना है। साथ ही, उसी साल हमें अपने टी20 वर्ल्ड कप खिताब का बचाव भी करना है। इसे भूलिएगा मत। सूर्या के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कम-से-कम अगले दो साल वह कहीं नहीं जाने वाले हैं। 2024 में सूर्या को सौंपी गई थी कप्तानीसूर्यकुमार यादव को टी20 विश्व कप 2024 के बाद इस फॉर्मेट की कप्तानी सौंपी गई थी। उनका लक्ष्य 2026 में खिताब को अपने घरेलू दर्शकों के सामने बचाना था, और इसमें वह सफल रहे। सूर्यकुमार आईसीसी के पूर्ण सदस्य देशों वाले कप्तानों में सबसे सफल कप्तान बन गए हैं। कुल 52 टी20 मैचों में उन्होंने कप्तानी की है, जिनमें टीम इंडिया ने 42 मैच जीते हैं। 8 मैचों में हार मिली है, और 2 मैचों का परिणाम नहीं आया है। सूर्या की जीत का प्रतिशत 80.77 है। दूसरे स्थान पर रोहित शर्मा हैं। सूर्या की छोटी पारियों ने कई मैचों में टीम को संभालाटी20 विश्व कप 2026 के पहले मैच में यूएसए के खिलाफ नाबाद 84 रन की पारी खेल टीम इंडिया को जीत दिलाने वाले सूर्या बाद के मैचों में बेशक बड़ी पारियां न खेल पाए हों, लेकिन उनकी छोटी पारियों ने कई मैचों में टीम को संभाला और बड़े स्कोर की नींव रखी। सूर्यकुमार यादव ने विश्व कप की 9 मैचों की पारियों में 30.25 की औसत से 242 रन बनाए। सैमसन और ईशान के बाद वह टीम के तीसरे श्रेष्ठ स्कोरर रहे।

भारत ने फिर फतह किया टी20 विश्व कप:किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं जीत की कहानी, एक हार से बनी खिताब की राह
अहमदाबाद। अहमदाबाद के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड की टीम को हराकर टी 20 विश्व कप का खिताब अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही भारतीय टीम तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप जीतने में सफल रही। इससे पहले भारत ने आईसीसी मेंस टी-20 विश्व कप 2007 और 2024 में भी ट्रॉफी जीती थी।इस बार की जीत की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं रही। पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाली टीम इंडिया को एक ऐसी हार मिली, जिसने आगे की रणनीति बदल दी और वही हार अंततः खिताब की राह बन गई।ग्रुप स्टेज में दमदार शुरुआतभारतीय टीम ने ग्रुप स्टेज में शानदार खेल दिखाया और अपने चारों मैच जीत लिए। इस दौरान चिर-प्रतिद्वंद्वी च्ंापेजंद दंजपवदंस बतपबामज जमंउ के खिलाफ भी भारत ने एकतरफा जीत दर्ज की। हालांकि जीत के बावजूद टीम की बल्लेबाजी को लेकर कुछ सवाल उठने लगे थे। कई मैचों में टॉप ऑर्डर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रहा था।साउथ अफ्रीका से हार ने बदली दिशासुपर-8 में भारत का पहला मुकाबला दक्षिण अफ्रीका की टीम से हुआ। इसी मैदान पर खेले गए इस मैच में भारतीय टीम को 76 रन से करारी हार का सामना करना पड़ा। इस मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई और टीम का नेट रन रेट भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस हार के बाद ऐसा लगा कि भारत का टूर्नामेंट में सफर मुश्किल हो सकता है। लेकिन यही हार टीम के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुई।रणनीति में बड़ा बदलावहार के बाद टीम मैनेजमेंट ने रणनीति में बड़े बदलाव किए। प्लेइंग इलेवन में संजू सैमसन को बतौर ओपनर मौका दिया गया। ईशान किशन को नंबर-3 पर भेजा गया, जबकि ज्पसंा टंतउं के बल्लेबाजी क्रम में भी बदलाव किया गया। इन बदलावों का असर तुरंत दिखाई दिया। भारतीय बल्लेबाजी पहले से ज्यादा आक्रामक और संतुलित नजर आने लगी।गेंदबाजी में भी दिखी चतुराईगेंदबाजी में भी कप्तान सूर्यकुमार यादव और टीम मैनेजमेंट ने शानदार रणनीति अपनाई। हार्दिक पंडया और वरुण चक्रवर्ती का इस्तेमाल परिस्थितियों के अनुसार किया गया, जबकि Jasprit Bumrah के ओवरों को डेथ ओवरों के लिए बचाकर रखा गया। इस रणनीति की बदौलत भारत ने यूएस, वेस्टइंडीज और इंग्लैंड जैसी मजबूत टीमों को हराते हुए फाइनल में जगह बनाई।तीसरी बार बना वर्ल्ड चैंपियनफाइनल में न्यूजीलैंड को हराकर भारत ने इतिहास रच दिया। तीन बार टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारत पहली टीम बन गई। साथ ही मेजबान के तौर पर खिताब जीतने का गौरव भी टीम इंडिया को मिला। इस तरह एक हार से शुरू हुई नई रणनीति ने अंततः टीम इंडिया को विश्व चैंपियन बना दिया और क्रिकेट इतिहास में एक यादगार अध्याय जोड़ दिया।

टी-20 विश्व कपः:टीम इंडिया ने दोहराया इतिहास, भारत की जीत पर भड़का पाकिस्तान का ढोंगी बाबा, झल्लाकर ऐसे दिया जवाब
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम ने रविवार (8 मार्च) को खेले गए टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर इतिहास रच दिया। इस जीत के साथ टीम इंडिया तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन बनी। हालांकि भारत की इस बड़ी जीत के बाद पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर का एक बयान चर्चा में आ गया है, जिसमें वह अपने गलत पूर्वानुमान को लेकर काफी नाराज दिखाई दिए।एक टीवी शो के दौरान उनसे सवाल किया गया कि उनकी भविष्यवाणी गलत साबित हुई, क्योंकि भारत ने फाइनल जीत लिया। इस पर आमिर ने झल्लाते हुए जवाब दिया, “जीत गए हैं तो ठीक है। कप अपने घर लेकर जाएंगे, मेरे घर थोड़े ही लेकर आएंगे। वेल डन।” उनके इस बयान से साफ झलक रहा था कि वह आलोचनाओं और ट्रोलिंग से परेशान हैं।आमिर ने कई बार की थी भारत की हार की भविष्यवाणीदरअसल, टी20 वर्ल्ड कप के दौरान आमिर ने कई बार भारत की हार की भविष्यवाणी की थी। उन्होंने पहले कहा था कि टीम इंडिया के लिए सेमीफाइनल तक पहुंचना भी मुश्किल होगा। बाद में उन्होंने सेमीफाइनल और फाइनल दोनों में भारत की हार का अनुमान लगाया था। फाइनल से पहले उन्होंने साफ कहा था कि चाहे भारत पहले बल्लेबाजी करे या गेंदबाजी, मुकाबला न्यूजीलैंड ही जीतेगा। लेकिन मैच का नतीजा इसके बिल्कुल उलट रहा और भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को करारी शिकस्त दी।शेहजाद ने किया बचावइस मामले में पाकिस्तान के बल्लेबाज अहमद शेहजाद ने आमिर का बचाव किया। उन्होंने कहा कि आमिर ने अपनी क्रिकेट समझ और विश्लेषण के आधार पर यह भविष्यवाणी की थी। इसमें कुछ भी गलत नहीं है, क्योंकि क्रिकेट में अनुमान हमेशा सही नहीं होते।इंग्लैंड के खिलाफ जीत पर यह बोले थे आमिरभारत की जीत के बाद आमिर ने यह भी कहा कि इंग्लैंड के खिलाफ मैच में एक अहम कैच छूटने की वजह से मुकाबला पलट गया था। उनके मुताबिक अगर भ्ंततल ठतववा ने ैंदरन ैंउेवद का कैच पकड़ लिया होता तो इंग्लैंड लक्ष्य हासिल कर सकता था। गौरतलब है कि भारतीय टीम ने फाइनल में शानदार खेल दिखाते हुए न्यूजीलैंड पर पूरी तरह दबदबा बनाया। इस जीत के बाद भारतीय खिलाड़ियों और फैंस में जश्न का माहौल है, जबकि सोशल मीडिया पर आमिर की गलत भविष्यवाणियों को लेकर उन्हें लगातार ट्रोल किया जा रहा है।

हम चैंपियन थे, चैंपियन हैं...:टीम इंडिया ने जीता सारा जहां, सूर्या ब्रिगेड ने तोड़ा नमो स्टेडियम का मिथक और भारत लगातार दूसरी बार बना टी-20 चैंपियन
नई दिल्ली। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में रविवार को टीम इंडिया ने इतिहास रच दिया। करीब 90 हजार दर्शकों की गूंज के बीच भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर टी20 विश्व कप का खिताब तीसरी बार अपने नाम कर लिया। भारतीय टीम की इस महाजीत के साथ ही अहमदाबाद के इस मैदान से 19 नवंबर 2023 की हार की याद भी खत्म हो गई।कप्तान सूर्या की अगुवाई में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब का सफल बचाव किया। यह पहली बार है जब किसी टीम ने अपने ही देश में टी20 विश्व कप जीता और साथ ही खिताब बचाने का कारनामा भी किया। इस जीत के साथ ही भारतीय मेन्स टीम टी20 विश्व कप में सबसे ज्यादा खिताब जीतने वाली टीम बन गई है। भारत ने 2007, 2024 और 2026 में खिताब जीते हैं, जबकि इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की टीमों ने दो-दो बार यह ट्रॉफी जीती है।महान कप्तानों की सूची में शामिल हुए सूर्यकुमार33 साल की उम्र में कप्तानी संभालने वाले सूर्यकुमार यादव अब उन भारतीय कप्तानों की सूची में शामिल हो गए हैं जिन्होंने विश्व कप जिताया है। इस सूची में कपिल देव, महेंद्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा और हरमनप्रीत कौर जैसे बड़े नाम शामिल हैं।अहमदाबाद का मिथक टूटा इस महामुकाबले से पहले हर किसी के मन में ये सवाल था कि आखिर भारत यहां कैसे मुकाबला जीतेगा। इसके पीछे 2023 की वो कड़वी याद थी जब टीम इंडिया ने वनडे वर्ल्ड कप का फाइनल आॅस्ट्रेलिया के सामने यहीं गंवाया था। तब भारत अजेय रहते हुए फाइनल में पहुंचा था लेकिन वह खिताब नहीं जीत सका था। इस टूनार्मेंट में भी भारत केवल एक मैच हारा था। वो मैच भी साउथ अफ्रीका के साथ इसी मैदान पर था। इसलिए फैन्स के मन में ये सवाल कौंध रहा था कि आखिर टीम इंडिया अहमदाबाद का मिथक कैसे तोड़ेगी। लेकिन चैम्पियन टीम मिथकों और तमाम रिकॉर्ड्स को तोड़कर ही बना जाता है। भारतीय टीम ने अपनी हर पिछली हार से सबक लिया। और सबसे बड़ी बात इस बार टीम इंडिया ने अहमदाबाद की पिच को अच्छे से समझा और उसी हिसाब से प्लानिंग की।भारत की तूफानी बल्लेबाजीन्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी, लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने इस फैसले को गलत साबित कर दिया। भारत ने 20 ओवर में 255 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। टूनार्मेंट में शानदार फॉर्म में चल रहे संजू सैमसन ने एक बार फिर धमाकेदार बल्लेबाजी की। उन्होंने 46 गेंदों में 89 रन बनाए और तीसरी बार शतक से थोड़ा पीछे रह गए। उनके अलावा ईशान किशन ने 25 गेंदों में 54 रन और अभिषेक शर्मा ने 21 गेंदों में 52 रन की तेज पारी खेली। अंत में शिवम दुबे ने सिर्फ 8 गेंदों में नाबाद 26 रन बनाकर टीम को 250 के पार पहुंचा दिया। यह लगातार दूसरा मौका था जब भारत ने इस टूनार्मेंट में 250 से ज्यादा रन बनाए।लक्ष्य का पीछा करते हुए बिखरी न्यूजीलैंड256 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम शुरूआत से ही दबाव में दिखी। पावरप्ले के अंदर ही उसके तीन विकेट गिर गए और टीम मैच में पीछे हो गई। नौवें ओवर तक न्यूजीलैंड का स्कोर 5 विकेट पर 72 रन हो चुका था और तभी से मैच का नतीजा लगभग तय हो गया था। भारतीय गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड की पूरी टीम को 19 ओवर में 159 रन पर समेट दिया। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 15 रन देकर 4 विकेट हासिल किए।

मुकाम पर पहुंचा टी-20 विश्व कप:खिताब के लिए कल आमने-सामने होंगे भारत-न्यूजीलैंड, नमो स्टेडियम में टीम इंडिया का रिकार्ड रहा है शानदार
अहमदाबाद। टी-20 विश्व कप 2026 अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। कल रविवार को अहमदाबाद के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में भारत और न्यूजीलैंड के बीच फाइनल मुकाबला खेला जाएगा। दोनों टीमें शाम 7 बजे आमने-सामने होंगी। अगर भारत जीता तो लगातार दूसरी बार चैंपियन बनेगा। वहीं न्यूजीलैंड जीती तो पहली बार इस विश्व कप के खिताब पर अपना नाम लिखेगी। मैदान की बात करें तो इस स्टेडियम में भारतीय टीम का हालिया रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। वनडे विश्व कप 2023 के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से मिली हार भारतीय फैंस अब भी नहीं भूले हैं। वहीं जारी टी20 विश्व कप में भी सुपर-8 के पहले मुकाबले में भारतीय टीम को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपनी पहली हार का सामना करना पड़ा था। इसलिए भारतीय फैंस इस मैच से पहले काफी चिंतित हैं, लेकिन आंकड़ों पर गौर करें तो टी20 में नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारतीय टीम का रिकॉर्ड अच्छा रहा है। भारतीय टीम ने नरेंद्र मोदी स्टेडियम में कुल 10 टी20 मैच खेले हैं जिसमें 7 मैचों में टीम ने सफलता हासिल की है, और तीन मैचों में हार मिली है। टीम इंडिया ने इंग्लैंड, नीदरलैंड्स, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड को भी हराया है। भारतीय टीम 2021 के बाद से इस स्टेडियम में तीन मैच हारी है। इस तरह नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारतीय टीम का टी20 में जो रिकॉर्ड है वो उत्साहजनक है।टी20 विश्व कप 2026 के दौरान भारतीय टीम ने नरेंद्र मोदी स्टेडियम में 2 मैच खेला है। इसमें एक मैच में जीत मिली है, जबकि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि, विश्व कप इतिहास में न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत का रिकॉर्ड निराशाजनक रहा है। भारतीय टीम ने टी20 विश्व कप इतिहास में न्यूजीलैंड के खिलाफ कुल तीन मैच खेले हैं और तीनों में हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में रविवार को होने वाले मुकाबले में भारतीय टीम को इतिहास बदलना होगा।भारतीय टीम अगर विश्व कप जीतती है तो लगातार 2 टी20 विश्व कप जीतने वाली पहली टीम बनेगी। अब तक, इस टी20 वर्ल्ड कप के दौरान नरेंद्र मोदी स्टेडियम में छह मैच हुए हैं। पहले बल्लेबाजी करने वाली टीमों ने तीन मैच जीते हैं, जबकि चेज करने वाली टीमों ने दो जीते हैं। एक मैच टाई रहा है।

सरकार ने 'इजरायली गिरफ्तारी' के दावे को बताया भ्रामक:कांग्रेस समर्थक के 'एक्स' अकाउंट से जुड़ा था पोस्ट
नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक दावे को भारत सरकार ने पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया है। दावा किया जा रहा था कि सऊदी अरब में एक भारतीय नागरिक को इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के एजेंट के रूप में गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में शनिवार को विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर सफाई जारी करते हुए लोगों से ऐसी अफवाहों से सावधान रहने की अपील की।दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही थी। इसमें दावा किया गया था कि सऊदी अरब की सुरक्षा एजेंसियों ने मोसाद से जुड़े दो एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि ये दोनों एजेंट ईरान को फंसाने के लिए बम धमाकों की साजिश रच रहे थे। हालांकि विदेश मंत्रालय ने इस दावे को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताया है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे ऐसे बेतुके और बिना किसी आधार वाले दावों से सावधान रहें।"सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह दावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच फैल रही गलत सूचनाओं की एक बड़ी लहर का हिस्सा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब में किसी भारतीय नागरिक की इस तरह की गिरफ्तारी की कोई विश्वसनीय जानकारी या आधिकारिक पुष्टि नहीं है। जांच में यह भी सामने आया कि यह भ्रामक दावा 'एमोक्सिसिलिन' नाम के एक 'एक्स' अकाउंट से पोस्ट किया गया था। इसी अकाउंट से यह जानकारी शेयर की गई थी कि सऊदी अरब ने दो कथित मोसाद एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक भारतीय भी शामिल है।बताया जा रहा है कि यह अकाउंट लंबे समय से राजनीतिक रूप से झुकाव वाले पोस्ट साझा करता रहा है। अकाउंट पर अक्सर कांग्रेस पार्टी के पक्ष में कथित तौर पर सामग्री पोस्ट की जाती है और कई बार बिना पुष्टि वाली जानकारी भी साझा की जाती रही है। इस अकाउंट पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषणों और बयानों की तारीफ करते हुए कई पोस्ट भी किए जाते हैं। कई बार उनके बयानों को साझा करते हुए उन्हें 'सांघियों' पर तीखा हमला बताया जाता है। 'सांघी' शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर ऑनलाइन भाजपा, आरएसएस या दक्षिणपंथी विचारधारा के समर्थकों के लिए किया जाता है।इसके साथ ही अकाउंट पर अक्सर भाजपा और उसके समर्थकों का मजाक उड़ाने या आलोचना करने वाले पोस्ट भी साझा किए जाते हैं, जिनमें 'सांघी इकोसिस्टम' और 'भक्त' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय सोशल मीडिया पर गलत जानकारी तेजी से फैलती है, इसलिए लोगों को ऐसी अपुष्ट खबरों पर भरोसा करने से बचना चाहिए और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करना चाहिए।

ईरान के राष्ट्रपति की दहाड़:पड़ोसियों पर हमला नहीं करेंगे, मगर सरेंडर का सपना देखने वाले अपने ख्वाब को कब्र तक ले जाएंगे साथ
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की ओर से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बयान सामने आया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने राष्ट्र के नाम अपने टेलीविजन संबोधन में घोषणा की कि ईरान ने पड़ोसी देशों पर सैन्य हमले रोकने का निर्णय लिया है। उन्होंने क्षेत्रीय देशों से माफी भी मांगी और स्पष्ट किया कि ईरान का किसी भी अन्य देश पर हमला करने का इरादा नहीं है।अपने संबोधन में पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान क्षेत्रीय स्थिरता और शांति को प्राथमिकता देता है। उन्होंने पड़ोसी देशों को आश्वस्त करते हुए कहा कि ईरान एक शांतिप्रिय राष्ट्र है और सैन्य कार्रवाई को रोकने का फैसला इसी सोच के तहत लिया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। राष्ट्रपति ने कड़े शब्दों में कहा, “जो लोग ईरान का बिना शर्त आत्मसमर्पण देखने का सपना देख रहे हैं, वे अपने इस ख्वाब को कब्र तक साथ ले जाएंगे।” उनके इस बयान को एक ओर शांति का संदेश और दूसरी ओर देश की ताकत और आत्मसम्मान का संकेत माना जा रहा है।विशेषज्ञों ने कही यह बातविशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में क्षेत्र में बढ़े सैन्य तनाव और मिसाइल हमलों की घटनाओं के बाद ईरान का यह नरम रुख अंतरराष्ट्रीय दबाव और घरेलू परिस्थितियों का परिणाम हो सकता है। पश्चिम एशिया में कई देशों के बीच बढ़ते टकराव के कारण युद्ध की आशंकाएं भी तेज हो गई थीं, ऐसे में ईरान का यह बयान क्षेत्रीय माहौल को शांत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।पेजेश्कियान ने रूसी राष्ट्रपति से की बातइस संबोधन से पहले पेजेश्कियान ने रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन से भी बातचीत की थी। रूस के राष्ट्रपति ने इस दौरान क्षेत्र में जारी विवादों को सुलझाने के लिए बल प्रयोग के खिलाफ अपने देश का स्पष्ट रुख दोहराया। पुतिन ने कहा कि रूस किसी भी प्रकार के सैन्य टकराव के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थन करता है।शत्रुता समाप्त करना बेहद जरूरीरूसी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि क्षेत्रीय तनाव को कम करना और शत्रुता को तुरंत समाप्त करना बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद के रास्ते पर आगे बढ़ने की अपील भी की। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान और रूस के बीच हुई यह बातचीत और उसके बाद आया यह बयान पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति में महत्वपूर्ण संकेत देता है। यदि सभी पक्ष बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं, तो क्षेत्र में लंबे समय से बने तनाव को कम करने की संभावना बढ़ सकती है।

मिडिल ईस्ट वार:क्रूड आयल की कीमतों में आया जबरदस्त उछाल, ग्लोबल स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंकाए हुईं तेज
नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के कारण शनिवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। ब्रेंट क्रूड की कीमत 91.84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का दाम 89.62 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इस तेजी के साथ ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई की कीमतों में क्रमशः 24.55 प्रतिशत और 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंकाएं फिर से तेज हो गई हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स अप्रैल 2024 के बाद पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत दिन के दौरान लगभग 11 प्रतिशत बढ़कर 89.62 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान को श्निर्धारित समय से पहले और पहले कभी न देखे गए स्तर परश् नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अब श्कोई एयरफोर्स और एयर डिफेंस नहीं बचा हैश् और उसकी वायु सेना लगभग खत्म हो चुकी है।दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा कि उनका देश किसी भी तरह की बातचीत करने का इरादा नहीं रखता और जमीनी युद्ध के लिए भी तैयार है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था, तब ब्रेंट क्रूड की कीमत 139 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। मौजूदा हालात में भी अगर तनाव बढ़ता है तो कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।हालांकि भारत के लिए राहत की बात यह है कि देश के पास फिलहाल कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। सरकार के अनुसार, भारतीय तेल कंपनियां खाड़ी क्षेत्र के अलावा अन्य देशों से भी आयात बढ़ाकर आपूर्ति में आने वाली कमी को पूरा कर रही हैं।एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि भारत के पास फिलहाल ऊर्जा संसाधनों का पर्याप्त स्टॉक है और देश ऊर्जा आपूर्ति के मामले में आरामदायक स्थिति में है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसी आपूर्ति से अधिक ऊर्जा स्रोत भारत के पास उपलब्ध हैं और जरूरत पड़ने पर अन्य क्षेत्रों से आयात बढ़ाया जाएगा।अधिकारी के अनुसार, भारत 2022 से रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। उस समय रूस से आयात कुल आयात का केवल 0.2 प्रतिशत था, लेकिन अब इसमें काफी बढ़ोतरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि फरवरी में भारत ने अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 20 प्रतिशत रूस से खरीदा, जो करीब 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन (1.04 मिलियन बैरल प्रतिदिन) है।सरकार ने रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे एलपीजी उत्पादन अधिकतम करें और घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दें, ताकि मध्य पूर्व संकट के कारण रसोई गैस की कमी न हो। इसके तहत प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी महत्वपूर्ण गैसों का उपयोग प्राथमिकता से एलपीजी उत्पादन में करने को कहा गया है।

भारत को हराना बेहद मुश्किल,: दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज ने न्यूजीलैंड को किया आगाह कीवियों से की चमत्कार की उम्मीद
नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच रविवार को टी20 विश्व कप 2026 का फाइनल खेला जाना है। दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज डेल स्टेन का मानना है कि घरेलू परिस्थितियों में भारतीय टीम बेहद मजबूत है और जीत के लिए न्यूजीलैंड को चमत्कार करना होगा। एबी डी विलियर्स के यूट्यूब चैनल पर बातचीत करते हुए डेल स्टेन कहा कि भारतीय टीम अपने देश और अपनी कंडीशन में बहुत मजबूत है। उन्हें हराना बेहद मुश्किल काम है। न्यूजीलैंड को अगर जीत दर्ज करनी है, तो उन्हें चमत्कार करना होगा। स्टेन ने कहा कि न्यूजीलैंड एक अच्छी टीम है और बेहतरीन क्रिकेट खेल रही है। इसलिए वे चाहते हैं कि टीम जीते, लेकिन भारत के सामने न्यूजीलैंड का जीत पाना मुश्किल लगता है। पूर्व तेज गेंदबाज ने मजाकिया लहजे में कहा कि अगर न्यूजीलैंड भारतीय टीम के खिलाफ नहीं जीत पाई तो दक्षिण अफ्रीका पर लगा चोकर्स का टैग वह उसे दे देंगे। न्यूजीलैंड अब तक सात आईसीसी फाइनल खेल चुकी है और सिर्फ 2 बार ही जीत सका है, इसलिए भारत के खिलाफ फाइनल न जीत पाने की स्थिति में चोकर्स का टैग उन्हें दे दिया जाना चाहिए। एबी डी विलियर्स ने इस दौरान 2015 वनडे विश्व कप सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के हाथों दक्षिण अफ्रीका को मिली हार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस हार का अब भी अफसोस है। ऑस्ट्रेलिया को उसके घर में फाइनल में सिर्फ साउथ अफ्रीका ही हरा सकता था। न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के लिए नॉक आउट मैचों से आगे बढ़ पाना हमेशा से मुश्किल रहा है। इस बार भी न्यूजीलैंड ने सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। न्यूजीलैंड अब तक सिर्फ 2 आईसीसी ट्रॉफी (चैंपियंस ट्रॉफी और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप) जीती है। दोनों जीत उसे भारत के खिलाफ ही मिली है। टी20 विश्व कप इतिहास में भारत के खिलाफ न्यूजीलैंड का रिकॉर्ड शानदार है। अब तक खेले गए तीनों ही मैचों में न्यूजीलैंड जीती है। ऐसे में फाइनल में न्यूजीलैंड के प्रदर्शन पर नजर रहेगी।

80 फाइटर जेट्स का तेहरान पर कहर:इजरायल के हमले से दहला ईरान, मिलिट्री और न्यूक्लियर साइट्स निशाने पर
यरूशलम-तेहरान। मध्य-पूर्व में जारी तनाव अब और गहरा हो गया है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच पिछले आठ दिनों से जारी भीषण संघर्ष के बीच इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान पर बड़ा हवाई हमला किया है। इजरायली रक्षा बल के अनुसार, शुक्रवार तड़के इजरायली एयरफोर्स के 80 से अधिक लड़ाकू विमानों ने तेहरान के कई इलाकों में बमबारी की। इन हमलों का मुख्य निशाना ईरान की सैन्य क्षमताएं, नेतृत्व से जुड़े ठिकाने और परमाणु कार्यक्रम से संबंधित बुनियादी ढांचा बताया गया है।इजरायली सेना का कहना है कि इस अभियान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें तेहरान स्थित इमाम हुसैन सैन्य विश्वविद्यालय भी शामिल है, जहां आईआरजीसी के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। आईडीएफ के मुताबिक हाल के दिनों में इस परिसर का इस्तेमाल आपातकालीन सैन्य संसाधन केंद्र और ऑपरेशन ‘राइजिंग लायन’ के दौरान आईआरजीसी के सभा परिसर के रूप में भी किया जा रहा था।ईरान की मिसालइ यूनिट पर भी हमलाइसके अलावा इजरायली लड़ाकू विमानों ने ईरान की मिसाइल यूनिट के एक बड़े भंडारण स्थल पर भी हमला किया। यह स्थल भूमिगत संरचना में बना हुआ था, जहां बैलिस्टिक मिसाइलों को संग्रहीत किया जाता था। सैन्य बंकर, कमान केंद्र और लॉन्चिंग इंफ्रास्ट्रक्चर वाले इस परिसर में बड़ी संख्या में ईरानी सैन्यकर्मी मौजूद थे। इजरायल का दावा है कि इस हमले से ईरान की सैन्य क्षमताओं को बड़ा नुकसान पहुंचा है।लेबनान में भी तेजी से बढ़ रहा तनावउधर, लेबनान में भी तनाव तेजी से बढ़ रहा है। 2024 के संघर्ष विराम के बाद यह अब तक का सबसे भीषण हमला माना जा रहा है। बेरूत और दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में रॉकेट हमलों और हवाई हमलों के कारण हालात बिगड़ गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक अब तक करीब 95,000 से ज्यादा लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं।ट्रंप ने ईरान के सामने रखी शर्तइस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग की है। अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि उसका लक्ष्य ईरान में मौजूदा शासन को कमजोर करना और वहां नया नेतृत्व स्थापित करना हो सकता है। इससे क्षेत्रीय और वैश्विक तनाव और बढ़ने की आशंका है।संघर्ष में अप्रत्यक्ष रूप से सक्रिय हो सकता है रूसखुफिया सूत्रों के अनुसार रूस भी इस संघर्ष में अप्रत्यक्ष रूप से सक्रिय हो सकता है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि रूस ने ईरान को ऐसी रणनीतिक जानकारी उपलब्ध कराई है, जिससे वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले कर सकता है। इस बीच एक दुखद घटना में तेहरान के पास एक स्कूल में विस्फोट हुआ, जिसमें कई छात्रों की मौत हो गई। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह विस्फोट पास स्थित रिवोल्यूशनरी गार्ड परिसर को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमले का असर हो सकता है।वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा युद्ध का असरमध्य-पूर्व में बढ़ते इस युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि यदि खाड़ी देशों से ऊर्जा निर्यात बाधित होता है तो तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। शुक्रवार को अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत दो साल में पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई।विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले और रूस-ईरान के बढ़ते सहयोग से यह संघर्ष और जटिल हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध रोकने की कोशिशें अब तक सफल नहीं हो पाई हैं। जैसे-जैसे लड़ाई तेज हो रही है, खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी खतरा बढ़ता जा रहा है।

मिडिल ईस्ट में महायुद्ध का संकेत?:ईरान में 3000 टारगेट ध्वस्त, अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा, तेहरान पर बरसे इजरायली बम भी
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी है कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान को और तेज कर दिया गया है। कमांड के मुताबिक, ऑपरेशन के पहले ही सप्ताह में ईरान के अंदर 3,000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा गया कि अमेरिका अपनी कार्रवाई धीमी करने के मूड में नहीं है और अभियान लगातार जारी रहेगा। इस ऑपरेशन को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया गया है।वहीं इजरायली वायुसेना के 80 से अधिक लड़ाकू विमानों ने तेहरान और मध्य ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए। पश्चिमी ईरान के कई इलाकों में पहचाने गए लॉन्च साइट्स को भी निशाना बनाया गया, ताकि इजरायल के क्षेत्र की ओर होने वाली मिसाइल फायरिंग को कम किया जा सके। ईरान ने हाल ही में इजरायल पर सीमित संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हमले के दौरान मध्य इजरायल में सायरन बजने लगे। प्रारंभिक सैन्य आकलन के अनुसार, दागी गई मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया गया और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांगइस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की है। शुक्रवार को दिए बयान में ट्रंप ने कहा कि जब तक ईरान आत्मसमर्पण नहीं करता, तब तक किसी भी तरह का समझौता संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश, खासकर इस्राइल, ईरान में नेतृत्व परिवर्तन के बाद ही किसी समझौते पर विचार करेंगे। ट्रंप ने “मेक ईरान ग्रेट अगेन” का नारा देते हुए कहा कि यदि ईरान आत्मसमर्पण करता है तो अमेरिका उसे आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करने को तैयार है।मारे जा चुके हैं ईरान के सर्वोच्च नेताबताया जा रहा है कि यह घटनाक्रम 28 फरवरी को हुए अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमले के बाद शुरू हुआ। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई अन्य वरिष्ठ नेता मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने कई अरब देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इस्राइली संपत्तियों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए। इसके बाद इजरायल ने भी तेहरान और लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं।ईरान में नए सर्वोच्च नेता को लेकर चर्चा तेजखामेनेई की मौत के बाद ईरान में नए सर्वोच्च नेता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। इस बीच ट्रंप ने कहा है कि वे ईरान के अगले सर्वोच्च नेता के चयन में भी व्यक्तिगत रूप से शामिल होना चाहते हैं। उन्होंने इसकी तुलना वेनेजुएला के राजनीतिक घटनाक्रम से की, जहां अमेरिका ने पहले भी सक्रिय भूमिका निभाई थी।खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई हो सकते हैं संभावित उत्तराधिकारीकुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई संभावित उत्तराधिकारी हो सकते हैं। हालांकि ट्रंप ने उन्हें कमजोर बताते हुए इस संभावना की आलोचना की है। वहीं ईरान सरकार ने इन खबरों का खंडन किया है। मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों ने कहा कि संभावित उम्मीदवारों को लेकर सामने आ रही खबरों का कोई आधिकारिक आधार नहीं है और इन्हें सही नहीं माना जा सकता। फिलहाल क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

टी 20 विश्व कप फाइनल:वानखेड़े जैसे नमो स्टेडियम में भी होगी रनों की बारिश, गेंदबाजों के लिए सहारा बनेगी हरी घास
अहमदाबाद। भारत और इंग्लैंड के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में रनों की बारिश देखने को मिली थी और कुल 499 रन बने थे। भारत और न्यूजीलैंड के बीच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में रविवार को होने वाले टी20 विश्व कप का फाइनल में भी ऐसा ही मंजर देखने को मिल सकता है। ईएसपीएनक्रिकइंफो की एक रिपोर्ट के मुताबिक फाइनल मुकाबले में स्कोर करीब 200 रन के आसपास रहने की संभावना है। शुरुआत में यह माना जा रहा था कि हरी घास वाली पिच तेज गेंदबाजों को मदद दे सकती है, लेकिन सेमीफाइनल में तस्वीर अलग ही नजर आई। गेंद बल्ले पर अच्छी तरह आई और बल्लेबाजों ने खुलकर रन बनाए।भारतीय गेंदबाजी आक्रमण में बुमराह पर रहेगा दबावभारतीय गेंदबाजी आक्रमण में जसप्रीत बुमराह ही ऐसे गेंदबाज रहे जिन्होंने अपनी सटीक लाइन-लेंथ और विविधता से लगातार दबाव बनाए रखा। बाकी गेंदबाजों को रन रोकने में काफी परेशानी हुई। वरुण चक्रवर्ती ने चार ओवर में 64 रन खर्च किए, जबकि अक्षर पटेल ने तीन ओवर में 35 रन दिए।सेंटर पिच पर खेला जाएगा फाइनल मुकाबलारिपोर्ट के मुताबिक फाइनल मुकाबला सेंटर पिच पर खेला जाएगा, जिसमें लाल और काली मिट्टी का मिश्रण है। इस टूर्नामेंट में अब तक सेंटर पिच पर सिर्फ एक ही मैच खेला गया है। 9 फरवरी को हुए उस मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने कनाडा को 53 रन से हराया था। दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 213 रन बनाए थे। नमो स्टेडियम में खेले जा चुके हैं दो मैचभारत इस टूर्नामेंट में नरेंद्र मोदी स्टेडियम में दो मैच खेल चुका है। ग्रुप स्टेज में उसने नीदरलैंड्स को 17 रन से हराया था, लेकिन सुपर-8 चरण में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उसे हार का सामना करना पड़ा था। टी20 विश्व कप में भारतीय टीम का न्यूजीलैंड खिलाफ रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। दोनों टीमों के बीच अब तक तीन मैच हुए हैं और तीनों ही मैचों में न्यूजीलैंड विजयी रही है। भारतीय टीम के पास इस बार पुराना इतिहास बदलने और नया इतिहास रचने का मौका है। बता दें कि लगातार दो टी20 विश्व कप किसी भी टीम ने नहीं जीता है। भारतीय टीम के पास इस बार यह मौका है।

मिडिल ईस्ट वारः अमेरिका-इजरायल के हमलों में ईरान में तबाही:अब तक 1300 से अधिक गंवा चुके हैं जान, इनमें 180 मासूम, हजारों घायल
संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा कि ने कहा कि ईरान में अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित कम से कम 1332 ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं। अमीर सईद इरावानी ने बताया कि देशभर में 180 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है और 20 से अधिक स्कूलों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने यह जानकारी ईरानियन रेड क्रेसेंट सोसाइटी के हवाले से न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों को दी।इरावानी ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाया है, जिससे यह साबित होता है कि वे अपने अपराधों में “कोई लाल रेखा नहीं मानते।” उन्होंने कहा कि ईरान के शहरों पर अंधाधुंध हमले किए जा रहे हैं और घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों तथा महत्वपूर्ण नागरिक ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। ये कृत्य स्पष्ट रूप से युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध हैं।ईरान के 13 स्वास्थ्य सुविधाओं पर किए गए हमलेइरावानी के अनुसार अब तक देश में 13 स्वास्थ्य सुविधाओं पर हमले किए गए हैं। गुरुवार को तेहरान और अन्य शहरों में कई नागरिक खेल और मनोरंजन स्थलों को भी निशाना बनाया गया, जिसमें 18 से अधिक महिला एथलीटों की मौत हुई और लगभग 100 अन्य घायल हुए। उन्होंने कहा, “अमेरिका-इजरायल का उद्देश्य स्पष्ट है- नागरिकों में आतंक फैलाना, निर्दोष लोगों का नरसंहार करना और अधिकतम विनाश तथा पीड़ा पैदा करना।” केवल सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाने के दावे बेबुनियाद हैं।अक्रामकता बंद होने तक आत्मरक्षा के अधिकार का उपयोग करता रहेगा ईरानइरावानी ने कहा कि ईरान संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद-51 के तहत अपने आत्मरक्षा के अधिकार का उपयोग तब तक करता रहेगा जब तक आक्रामकता बंद नहीं होती। ईरान की प्रतिक्रिया “कानूनी, आवश्यक और अनुपातिक” है और इसका लक्ष्य केवल हमलावरों के सैन्य ठिकाने हैं। उन्होंने कहा, “ईरान युद्ध नहीं चाहता लेकिन वह अपनी संप्रभुता कभी नहीं छोड़ेगा और अपने लोगों, क्षेत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।”इरावानी ने ट्रंप को चेतायाट्रंप द्वारा ईरान में नए सर्वोच्च नेता के चुनाव संबंधी टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए इरावानी ने कहा कि यह राज्यों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत का स्पष्ट उल्लंघन है, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित है। ईरान किसी भी विदेशी शक्ति को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं देगा।ईरानी राजदूत ने सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से इस “आक्रामकता और युद्ध अपराधों” की निंदा करने और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने इस हमले को रोकने की अपील की। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अब तुरंत, स्पष्ट और बिना देरी के कार्रवाई करनी चाहिए।”

मिडिल ईस्ट वार का असर भारतीयों पर:फ्लाइट कैंसिल दर्जनों टूरिस्ट फंसे कतर में, भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी
नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बीते एक से जारी सैन्य संघर्ष चरम पर पहुंच गया है। एक ओर जहां अमेरिका-इजराइल ईरान पर घातक हथियारों से करारा प्रहार कर रहे हैं, तो वही ईरान भी विरोधियों पर जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हट रहा है। इस भीषण जंग का असर भारतीयों पर खूब देखने को मिल रहा है। फ्लाइट कैंसिल होने की वजह दर्जनों भारतीय कतर में फंसे हुए हैं। में भारतीय दूतावास ने वहां फंसे लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है। कई लोग ऐसे हैं जो शॉर्ट टर्म वीजा पर कतर पहुंचे थे, लेकिन ताजा हालात की वजह से वह वहां फंस गए। भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी के साथ एक फॉर्म का लिंक भी जोड़ा है। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा, जो भारतीय नागरिक अभी कतर से 28 फरवरी से 7 मार्च 2026 के बीच फ्लाइट्स कैंसिल होने की वजह से टूरिस्ट-शॉर्ट टर्म विजिटर (हय्या ए1 वीजा वाले) के तौर पर कतर में फंसे हुए हैं, उनसे कहा जाता है कि वे यहां दिए गए लिंक पर अपनी डिटेल्स भरें। कृपया ध्यान दें कि यह सिर्फ उन फंसे हुए भारतीय नागरिकों की सही संख्या और डिटेल्स पता करने के लिए है जो कतर के रहने वाले नहीं हैं।कतर के ऊर्जा मंत्री ने दी चेतावनीइसके अलावा, मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष कुछ दिनों तक और जारी रहता है तो खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा निर्यातकों को ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित करना पड़ सकता है। इससे तेल और गैस की आपूर्ति रुक सकती है और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। दरअसल अगर कोई तेल कंपनी किसी युद्ध या प्राकृतिक आपदा की वजह से तेल की सप्लाई नहीं कर पाती, तो वह फोर्स मेज्योर घोषित कर सकती है और उसे अनुबंध के उल्लंघन का दोषी नहीं माना जाएगा।निर्यातकों को उठाना पड़ सकता है नुकसानफाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में साद अल-काबी ने कहा कि अगर मौजूदा हालात जारी रहे तो खाड़ी क्षेत्र के सभी निर्यातकों को आने वाले दिनों में फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां ऐसा नहीं करेंगी, उन्हें कानूनी रूप से भारी जिम्मेदारी और नुकसान उठाना पड़ सकता है।उन्होंने चेतावनी दी कि अगर टैंकर और अन्य जहाज जलडमरूमध्य से गुजरने में असमर्थ रहते हैं, तो अगले दो से तीन हफ्तों में कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। वहीं प्राकृतिक गैस की कीमतें चार गुना तक बढ़कर 40 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (मेट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट) तक जा सकती हैं।

मिडिल ईस्ट वार का असर बोर्ड परीक्षाओं पर:CBSE ने पश्चिम एशियाई देशों में स्थगित की 10वीं की परीक्षाए, मस्कट में भारतीय दूतावास ने की पुष्टि
नई दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने पश्चिम एशिया के कई देशों में कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। यह फैसला क्षेत्र में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच लिया गया है। मस्कट में भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की। मस्कट में भारतीय दूतावास ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म श्एक्सश् पर सीबीएसई का सर्कुलर शेयर किया, जिसमें छात्रों और अभिभावकों को खाड़ी देशों में परीक्षा कार्यक्रम में हुए बदलाव की जानकारी दी गई। सर्कुलर के अनुसार, यह फैसला बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) में सीबीएसई से जुड़े स्कूलों पर असर डालेगा।कक्षा 10 की परीक्षाएं 7 मार्च से 11 मार्च के बीच होनी थीं। 2 मार्च, 5 मार्च और 6 मार्च को होने वाली परीक्षाओं को पहले ही रद्द किया जा चुका है। सीबीएसई ने कहा कि पश्चिमी एशिया में कक्षा 10 के छात्रों के परिणाम कैसे घोषित किए जाएंगे, इसकी जानकारी बाद में अलग से दी जाएगी। इसी बीच, शनिवार को होने वाली कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा भी टाल दी गई है। टाली गई परीक्षा की नई तारीखें बाद में बताई जाएंगी। बोर्ड ने आगे कहा कि वह 7 मार्च को मौजूदा हालात की समीक्षा करेगा और 9 मार्च से होने वाली परीक्षाओं के बारे में आगे के निर्देश जारी करेगा।सीबीएसई ने कक्षा 12 के सभी छात्रों को सलाह दी है कि वे अपने-अपने स्कूलों के साथ लगातार संपर्क में रहें और आगे के अपडेट के लिए आधिकारिक घोषणाओं को ध्यान से फॉलो करें। छात्रों से यह भी कहा गया है कि वे अपने स्कूलों के साथ लगातार संपर्क में रहें, सिर्फ आधिकारिक सीबीएसई नोटिफिकेशन पर ही भरोसा करें। कोई भी परीक्षाओं के बारे में जानकारी के लिए अनौपचारिक स्रोतों या अफवाहों पर निर्भर न रहें।बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने तेहरान में कई ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए, जिसमें शहर के सेंटर में मौजूद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई भी मारे गए। इसके बाद ईरान ने तेल अवीव और इजरायल में दूसरी जगहों के साथ-साथ पश्चिमी एशिया में अमेरिकी मिलिट्री बेस और डिप्लोमैटिक मिशन को निशाना बनाकर जवाबी हमले किए। ईरानी हमलों ने पड़ोसी देशों में आम नागरिकों और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नुकसान पहुंचाया, जिसमें सऊदी अरब में एक ऑयल रिफाइनरी और दुबई में एक लग्जरी होटल शामिल हैं। इन हमलों से एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का डर बढ़ गया है, जिसमें और भी पश्चिमी एशियाई देश शामिल हो सकते हैं।

मिडिल ईस्ट वार से भारत को भारी नुकसान:दुबई के जेबेल अली बंदरगाह पर फंसे फल-सब्जियों से लदे 1000 कंटेनर, असर महाराष्ट्र के किसान और निर्यातकों पर
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर अब भारत के कृषि निर्यात पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दुबई के जेबेल अली बंदरगाह पर भारत से भेजे गए लगभग 800 से 1000 कंटेनर फंस गए हैं। इन कंटेनरों में केले, अंगूर, अनार, तरबूज, पत्तेदार सब्जियां और प्याज जैसे जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पाद भरे हुए हैं। बंदरगाह पर 28 फरवरी से कामकाज प्रभावित होने के कारण ये कंटेनर आगे अन्य देशों में नहीं भेजे जा पा रहे हैं, जिससे लाखों-करोड़ों रुपये के सामान के खराब होने का खतरा पैदा हो गया है।जेबेल अली बंदरगाह खाड़ी क्षेत्र का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है और मध्य-पूर्व के कई देशों में कृषि उत्पादों की आपूर्ति का मुख्य हब माना जाता है। यहां से भारत समेत कई देशों के फल और सब्जियां खाड़ी के अलग-अलग बाजारों में पहुंचते हैं। लेकिन मौजूदा संघर्ष के कारण बंदरगाह का संचालन बाधित हो गया है, जिससे वहां पहुंचे या रास्ते में आए कई भारतीय शिपमेंट फंस गए हैं।ऐसे उत्पाद ज्यादा दिन तक नहीं रह सकते सुरक्षितइस स्थिति से खास तौर पर महाराष्ट्र के किसान और निर्यातक प्रभावित हुए हैं। राज्य से बड़ी मात्रा में अंगूर, अनार, केले और प्याज खाड़ी देशों को निर्यात किए जाते हैं। चूंकि ये उत्पाद अधिक समय तक सुरक्षित नहीं रहते, इसलिए बंदरगाह पर देरी होने से इनके खराब होने की आशंका काफी बढ़ गई है। इससे निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।रमजान के महीने में अंगूर और अनार की अधिक रहती है मांगस्थिति इसलिए भी गंभीर हो गई है क्योंकि खाड़ी देशों में इस समय रमजान का महीना शुरू है। इस दौरान फलों, विशेष रूप से अंगूर और अनार की मांग बहुत अधिक रहती है। आमतौर पर किसान इसी मांग को ध्यान में रखते हुए अपनी फसल की कटाई और निर्यात की योजना बनाते हैं। लेकिन इस बार शिपमेंट फंस जाने के कारण बाजार की मांग पूरी नहीं हो पा रही है।निर्यातकों के अनुसार लगभग 5,000 से 6,000 टन अंगूर पहले ही प्रभावित हो चुके हैं, जबकि खेतों में मौजूद करीब 10,000 टन निर्यात योग्य अंगूरों को अब स्थानीय बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ सकता है। इससे किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है।मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट पर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। दुबई जाने वाले लगभग 80 कंटेनर अभी तक अनलोड नहीं किए जा सके हैं, जबकि नासिक से आए 200 से अधिक कंटेनर बंदरगाह के बाहर ही फंसे हुए हैं। इससे बंदरगाह क्षेत्र में भारी भीड़भाड़ और जाम की स्थिति बन गई है।किसान संगठनों ने सरकार से लगाई मदद की गुहारइस संकट को देखते हुए किसान संगठनों ने सरकार से तत्काल मदद की मांग की है। महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने सरकार से प्रति क्विंटल 1,500 रुपये की सब्सिडी देने, बंदरगाह शुल्क और विलंब शुल्क माफ करने तथा निर्यातकों के लिए अस्थायी खरीद योजना शुरू करने की मांग की है।नुकसान से बचने निर्यातक वापस मंगा रहे कंटेनरकुछ निर्यातकों ने नुकसान से बचने के लिए अपने कंटेनर वापस मंगाने भी शुरू कर दिए हैं। निर्यातकों का कहना है कि लंबी देरी के कारण कई बार माल बंदरगाह पर ही खराब हो जाता है। उदाहरण के तौर पर नासिक से भेजे गए प्याज के एक शिपमेंट को कस्टम मंजूरी मिलने में चार दिन लग गए और तब तक पूरा माल खराब हो गया।व्यवधान का असर यहीं तक सीमित नहींइस व्यवधान का असर केवल निर्यात तक सीमित नहीं है। ईरान और अन्य खाड़ी देशों से भारत आने वाले सेब, कीवी और खजूर के लगभग 600 से 700 कंटेनर भी बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं। इसके अलावा भारत के चीनी निर्यात पर भी अनिश्चितता पैदा हो गई है, क्योंकि चालू सीजन में मंजूर 20 लाख टन चीनी में से केवल लगभग 5 लाख टन ही निर्यात हो पाने की संभावना जताई जा रही है। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब सीधे भारतीय कृषि व्यापार और किसानों की आय पर पड़ने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही जहाजरानी सेवाएं सामान्य नहीं हुईं, तो नुकसान और बढ़ सकता है।

समंदर में तबाही:अमेरिका की बमबारी से ईरान के 30 जंगी जहाज तबाह, इसमें एक विशेष ड्रोन जहाज भी शामिल
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को लेकर अमेरिका की ओर से बड़ा दावा किया गया है। अमेरिकी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई में अब तक ईरान के 30 से अधिक जहाज डुबो दिए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद ईरान के मिसाइल हमलों में भी भारी गिरावट आई है।अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने शुक्रवार को बताया कि युद्ध की शुरुआत से अब तक अमेरिकी नौसेना ने ईरान के कई बड़े युद्धपोतों और छोटे जहाजों को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया है। इन जहाजों में एक विशेष ड्रोन जहाज भी शामिल था जिसका इस्तेमाल ईरान समुद्री निगरानी और हमलों के लिए कर रहा था। अमेरिकी सेना के मुताबिक यह जहाज हमले के बाद आग की लपटों में घिर गया और समुद्र में डूब गया।ईरान की सैन्य गतिविधियों के लिए बेहद अहम थे जहाजकूपर ने कहा कि ये जहाज ईरान की सैन्य गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण थे। इनके जरिए हथियारों की सप्लाई, समुद्री हमले और विभिन्न सैन्य ऑपरेशन किए जा रहे थे। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई ने इन क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया है।अमेरिकी सेना ने यह भी किया दावाअमेरिकी सेना का यह भी दावा है कि युद्ध के पहले दिन ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। लेकिन अब इन हमलों में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आ गई है। कूपर के अनुसार इसका कारण यह है कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान के मिसाइल ठिकानों, लॉन्च साइट्स और सप्लाई नेटवर्क को लगातार निशाना बनाया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि समुद्री मार्गों पर नियंत्रण स्थापित होने से ईरान के लिए हथियार और मिसाइलों की नई सप्लाई लाना मुश्किल हो गया है। इससे उसकी हमले करने की क्षमता काफी कम हो गई है।ईरान की हर गतिविधि पर नजर रख रही अमेरिकी सेनाः कूपरएडमिरल ब्रैड कूपर ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना ईरान की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रख रही है। उनका कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखना और ईरान के मिसाइल तथा परमाणु खतरे को कम करना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध अभी समाप्त नहीं हुआ है और आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रह सकती है।मध्य पूर्व में इस संघर्ष के कारण अभी भी तनाव बना हुआ है। हालांकि ईरान के हमलों में कमी आने से खाड़ी क्षेत्र में तेल आपूर्ति को लेकर कुछ राहत जरूर मिली है। अमेरिकी सेना का मानना है कि लगातार दबाव के कारण ईरान भविष्य में बातचीत के लिए मजबूर हो सकता है।

अंग्रेजों से लगान वसूल कर भारत पहुंचा फाइनल में:टीम इंडिया ऐतिहासिक प्रदर्शन से झूमा देश, बालीवुड सेलेब्स ने भी लुटाया प्यार
मुंबई। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड के बीच हुए शानदार मैच ने क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया। भारत ने इंग्लैंड को सात रनों से हराकर टी20 विश्व कप के फाइनल में जगह बना ली है। अब फाइनल में भारत न्यूजीलैंड से भिड़ने वाला है। टी20 विश्वकप के फाइनल में जगह बनाने और गुरुवार की जीत को लेकर देशभर में खुशी का माहौल है। बॉलीवुड सेलेब्स भी सोशल मीडिया के जरिए टीम को जीत की बधाई दे रहे हैं। बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार, यानी अक्षय कुमार, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक कॉमेडी वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह डांस करते दिख रहे हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा, इस तरह से आप फाइनल की ओर बढ़ते हैं... क्या शानदार जीत है, टीम इंडिया!प्रीति जिंटा ने दी टीम इंडिया को बधाईवहीं प्रीति जिंटा ने भारतीय टीम को जीत की बधाई दी। उन्होंने लिखा, ष्नीली जर्सी पहने भारतीय टीम को बधाई! क्या शानदार मैच था और भारतीय टीम का क्या ही दबदबा रहा! टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में शानदार एंट्री। अभिनेता सोनू सूद ने भी बधाई देने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स का सहारा लिया और टीम इंडिया की फोटो शेयर कर लिखा, ष्मेरा भारत महान, 1.4 अरब दिल इस जीत का जश्न मना रहे हैं।सांसद और अभिनेत्री कंगना ने भी टीम की जीत पर खुशी जाहिर की है और उम्मीद जताई है कि फाइनल में भी भारत का तिरंगा लहराएगा। उन्होंने इंस्टाग्राम पर टीम की फोटो पोस्ट कर लिखा, अब फाइनल में तिरंगा लहराने की बारी।अंगद बेदी ने टीम इंडिया के लिखा प्यारा पोस्टवहीं, अंगद बेदी ने टीम के नाम बहुत प्यारा पोस्ट लिखा है, जिसमें उन्होंने जसप्रीत बुमराह और अक्षर पटेल की तारीफ की है। उन्होंने लिखा, श्फाइनल में जाने के रास्ते साफ हो चुके हैं, और इससे पूरी भारतीय टीम का हौसला बुलंद है। जसप्रीत बुमराह की शानदार बॉलिंग और अक्षर पटेल द्वारा पकड़े गए दो कैच ने मैच का रुख बदल दिया।सुनील शेट्टी ने अक्षर पटेल को बताया टीम की ताकतवहीं, सुनील शेट्टी ने पूरी टीम को जीत की बधाई दी लेकिन अक्षर पटेल को टीम की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने लिखा, पूरी टीम ने मैच में शानदार प्रदर्शन किया लेकिन अक्षर पटेल के दो शानदार कैच ने जीत के रास्ते साफ कर दिए। इसके अलावा, वरुण धवन, रवीना टंडन, शहनाज गिल, मुनमुन दत्ता और आयुष्मान खुराना ने भी फोटो पोस्ट कर पूरी टीम को बधाई दी है और सेमीफाइनल की जीत के लिए शुभकामनाएं भी दी हैं।


