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कर्नल सोफिया कुरैशी मामला : SC में सुनवाई पहले विजय शाह ने अपने किए पर फिर मांगी माफी, भाषा में लगाम लगाने खाई कसम

SC में सुनवाई पहले विजय शाह ने अपने किए पर फिर मांगी माफी, भाषा में लगाम लगाने खाई कसम

इंदौर। मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विजय शाह ने शनिवार को भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ अपने विवादित बयान पर एक बार फिर बिना शर्त माफी मांगी। उनकी यह माफी ऐसे समय में आई है, जब सर्वोच्च न्यायालय इस मामले की सुनवाई करने वाला है। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उनके शब्द 'देशभक्ति के उत्साह' में कहे गए थे। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या किसी विशेष समुदाय का अपमान करना नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि मैंने यह पहले भी कई बार कहा है, और आज फिर से यह दोहरा रहा हूं।उन्होंने कहा, "मेरे शब्दों में किसी भी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या समाज के किसी भी वर्ग का अपमान करने का इरादा नहीं था। सार्वजनिक जीवन में भाषा पर संयम और संवेदनशीलता अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने घटना पर आत्ममंथन किया है, जिम्मेदारी स्वीकार की है और भविष्य में अपनी भाषा पर अधिक नियंत्रण रखने की कसम खाई है। उन्होंने आश्वासन दिया, "ऐसी गलती फिर से नहीं होगी," और विशेष रूप से सशस्त्र बलों से जुड़े सभी नागरिकों से माफी मांगी।बता दें कि यह विवाद पिछले साल मई में इंदौर जिले के रायकुंडा गांव में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मंत्री कुंवर विजय शाह के भाषण के दौरान एक वीडियो क्लिप के वायरल होने से शुरू हुआ। वीडियो क्लिप में विजय शाह ने कथित रूप से कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में अपमानजनक बयान दिया, जो 'आॅपरेशन सिंदूर'- भारत की आतंकवादी हमले के खिलाफ सैन्य प्रतिक्रिया के दौरान मीडिया को ब्रीफिंग देने के लिए व्यापक रूप से पहचानी गई थीं।टिप्पणियों की हुई थी व्यापक आलोचनाइन टिप्पणियों की व्यापक आलोचना की गई थी, क्योंकि ये अशिष्ट, साम्प्रदायिक और एक महिला अधिकारी, भारतीय सेना, और कुछ समुदायों के प्रति अपमानजनक थीं। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पहले विजय शाह को 'अपमानजनक टिप्पणियां' और 'अशिष्ट भाषा' का उपयोग करने के लिए फटकारा था और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।सुप्रीम कोर्ट ने लिया था मामले पर संज्ञानसुप्रीम कोर्ट ने बाद में मामले का संज्ञान लिया और इसे जांचने के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया। इसके बाद कोर्ट ने विजय शाह द्वारा की गई पहले की माफी को 'नकली आंसू' कहते हुए खारिज कर दिया और जवाबदेही पर जोर दिया। 19 जनवरी को, सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर संबंधित धाराओं के तहत अभियोजन की स्वीकृति पर निर्णय लेने का आदेश दिया था। इस समय सीमा के पास आते ही विजय शाह ने शनिवार को इंदौर के रेजिडेंसी कोठी में कुछ विशेष पत्रकारों को बुलाकर अपने बयान को स्पष्ट करने और अपनी माफी को दोहराने की कोशिश की।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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आज की बुलेटिन 24 June

मनोरंजन

मेरी शादी हो चुकी है और मेरी दुल्हन... : मैरिज के सवाल पर खिलखिलाकर हंसे हर्षवर्धन राणे, बताया ये सच

मैरिज के सवाल पर खिलखिलाकर हंसे हर्षवर्धन राणे, बताया ये सच

मुंबई । अभिनेता हर्षवर्धन राणे बॉलीवुड में अपने इंटेंस और रोमांटिक किरदारों के लिए जाने जाते हैं। चाहे वह 'सनम तेरी कसम' में इंदर का किरदार हो या 'एक दीवाने की दीवानीयत' में 'विक्रमादित्य' का रोल वह दिल छू लेने वाली लव स्टोरी में शानदार एक्टिंग से छा जाते हैं। पर्दे पर उनका किरदार भावुक और गहरा होता है। दर्शक हर्षवर्धन को प्यार में डूबे हुए, संजीदा और रोमांटिक हीरो के रूप में देखते हैं। लेकिन असल जिंदगी में हर्षवर्धन शादी को लेकर कितने गंभीर हैं, इसका जवाब उन्होंने मजेदार अंदाज में दिया। बातचीत के दौरान जब उनसे शादी के बारे में सवाल किया गया, तो हर्षवर्धन ने बड़े प्यार से और मजाकिया अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने खिलखिलाकर हंसते हुए कहा, "शादी तो मेरी हो चुकी है... मेरे काम से! और मेरी दुल्हन हैं मेरी फिल्में।"हर्षवर्धन ने आगे बताया कि उनका पूरा फोकस अभी करियर पर है। फिल्में उनके लिए सिर्फ काम नहीं, बल्कि जिंदगी का सबसे बड़ा प्यार हैं। उन्होंने कहा कि जब भी वह किसी किरदार में डूबते हैं, तो वही उनकी सबसे करीबी साथी बन जाती है। रोमांटिक किरदार निभाने के कारण लोग अक्सर उनसे पूछते हैं कि असल जिंदगी में उनकी लव लाइफ कैसी है या शादी कब कर रहे हैं, लेकिन हर्षवर्धन का जवाब हमेशा यही रहता है कि उनका दिल और दिमाग अभी पूरी तरह से सिनेमा के साथ बंधा हुआ है।बता दें, हर्षवर्धन राणे ने 16 साल की उम्र में एक्टिंग का सपना देखते हुए घर छोड़ दिया था। कोई बड़ा सपोर्ट या गॉडफादर नहीं था, वे पूरी तरह आउटसाइडर थे। शुरुआत में मुश्किलें बहुत आईं, लेकिन उनकी मजबूत इच्छाशक्ति और मेहनत कभी कम नहीं हुई। सपनों के पीछे भागते हुए उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज वह बॉलीवुड के साथ-साथ साउथ इंडस्ट्री को भी कई हिट फिल्में दे चुके हैं। उनका मानना है कि सपनों या लक्ष्य के ऊपर चुनौतियों को हावी नहीं होने देना चाहिए।साल 2025 में 'सनम तेरी कसम' और 'एक दीवाने की दीवानीयत' की बंपर सफलता से उत्साहित हर्षवर्धन राणे फिलहाल अपनी अपकमिंग फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त हैं और इस साल भी दर्शकों को अपनी तीन फिल्में देने वाले हैं।

बिज़नेस

सराफा बाजार में उथल-पुथल का दौर : 14000 फिर गिरे चांदी के भाव, गोल्ड के दाम भी गिरे

14000 फिर गिरे चांदी के भाव, गोल्ड के दाम भी गिरे

मुंबई। बीते एक सप्ताह से सर्राफा बाजार में उथल-पुथल का दौर जारी है। रिकार्ड स्तर को छूने के बाद सोने-चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसा ही शुक्रवार को भी देखने को मिला। मल्‍टी कमोडिटी मार्केट में चांदी 14 हजार रुपये टूटकर 2.27 लाख रुपये पर आ गया। वहीं गोल्ड करीब 2000 रुपये टूटकर 1.49 लाख रुपये पहुंच गया है। सोने और चांदी में गिरावट की बड़ी वजह ग्‍लो‍बल लेवल पर आई भारी गिरावट है। अंतरराष्‍ट्रीय बाजार कॉमेक्‍स पर चांदी गुरुवार को 20 फीसदी तक टूट गया, जिसका असर शुक्रवार को एमसीएक्‍स पर दिखाई दे रहा है। इससे पहले गुरुवार को चांदी 30,300 रुपये सस्ती होकर 2.68 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। वहीं सोना 4,500 रुपये की गिरावट के साथ 1.6 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।अंतरराष्ट्रीय बाजारों में क्या रहा भाव?अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के करीब दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने और अमेरिका-चीन व्यापार तनाव में नरमी के संकेतों के बीच सोने-चांदी की कीमतों में गुरुवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। मजबूत डॉलर के कारण अन्य मुद्राओं में लेन-देन करने वाले निवेशकों के लिए सोना महंगा हो गया, जिससे मांग पर असर पड़ा।स्पॉट गोल्ड की कीमत 2.5% गिरकर 4,838.81 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जो सत्र की शुरुआत में बने करीब एक सप्ताह के उच्च स्तर से फिसल गई। अप्रैल डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 1.9ः टूटकर 4,855.60 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुए। चांदी में गिरावट और भी तीखी रही। स्पॉट सिल्वर की कीमत 14.9% लुढ़ककर 74.94 डॉलर प्रति औंस रह गई। गौरतलब है कि बीते सप्ताह ही चांदी ने 121.64 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड उच्च स्तर छुआ था।

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#shorts मोदीनगर में गूंजा भारत का नाम, मीराबाई ने जीता गोल्ड #breakingnews  #newstoday #hindinews

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#shorts : NEET PG 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई #hindinews #latestnews #newstoday #viral

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खेल

टीम इंडिया ने फतह किया अंडर-19 विश्व कप : बिहार में जश्न का माहौल, वैभव की तूफानी पारी पर यह बोले दादा

बिहार में जश्न का माहौल, वैभव की तूफानी पारी पर यह बोले दादा

, समस्तीपुर। बिहार में उस वक्त जश्न का माहौल तेज हो गया जब भारत की अंडर-19 टीम ने इंग्लैंड को 100 रनों से हराकर विश्व कप अपने नाम कर लिया। फाइनल मुकाबले में स्टार बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने 80 गेंदों में 175 रनों की शानदार पारी खेली। सूर्यवंशी की इस तूफानी पारी पर उनके दादा उपेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि हमें मालूम था कि वे फाइनल मुकाबले में बवंडर बनकर आएंगे, लेकिन वे तो चक्रवात बन गए। समस्तीपुर में आईएएनएस से बातचीत में वैभव सूर्यवंशी के दादा उपेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि यह बहुत खुशी का पल है। वैभव ने बहुत अच्छी बल्लेबाजी की है। हालांकि, वे दोहरा शतक लगाने से चूक गए, लेकिन कोई बात नहीं, उन्होंने बहुत शानदार खेल दिखाया। उन्होंने वैभव की बल्लेबाजी के बारे में कहा कि इससे बेहतर और क्या हो सकता है। हम शुरू से ही कह रहे थे कि वह फाइनल में शानदार खेलेगा।उन्होंने कहा कि 15 साल से कम उम्र का लड़का इतना शानदार खेल रहा है। उसने भले ही दोहरा शतक नहीं लगाया, लेकिन उसने सिर्फ 80 गेंदें खेलीं और 175 रन ठोक दिए। अगर दूसरे खिलाड़ियों का साथ मिलता तो और भी अच्छा खेलता।टीम इंडिया की सीनियर टीम का जिक्र करते हुए वैभव सूर्यवंशी के दादा उपेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि जल्द ही उसे भारतीय सीनियर टीम में लाना चाहिए। वह भारतीय जर्सी के लिए दरवाजा तोड़ने को तैयार है और बहुत जल्द ही वह दरवाजा टूट जाएगा। मार्च के बाद वे सीनियर टीम का हिस्सा होंगे।उन्होंने एक पूर्व क्रिकेटर का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने उन्हें कमेंट्री पर सुना कि वे कह रहे थे कि यह 15 साल से कम उम्र का लड़का 100 मीटर के छक्के मार रहा है; इससे बढ़कर और क्या हो सकता है? यह बहुत बड़ी गर्व की बात है। वैभव देहात का लड़का है और आज शिखर पर पहुंच रहा है। हम सभी उसकी सफलता को लेकर बेहद खुश हैं।

लाइफस्टाइल

शरीर को वज्र की तरह मजबूत बना देगी हीरा भस्म : कैंसर, गठिया और दिल से जुड़े रोगों में भी लाभकारी

कैंसर, गठिया और दिल से जुड़े रोगों में भी लाभकारी

नई दिल्ली । आयुर्वेद में दुर्लभ जड़ी-बूटियों की सहायता से रोगों का इलाज कई सालों से होता आया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जड़ी-बूटियों के अलावा, प्राकृतिक धातुओं से भी इलाज संभव है? आयुर्वेद में विभिन्न धातुओं द्वारा तैयार की गई भस्मों से भी लंबे समय से इलाज होता आया है। हीरा भस्म, हीरक भस्म या व्रज भस्म को भी आयुर्वेद में दवा की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर के सभी दोषों (वात, पित्त और कफ) के असंतुलन को दूर करती है और शरीर के किसी भी अंग से संबंधित पुरानी बीमारियों को दूर किया जा सकता है।आयुर्वेद में हीरा भस्म एक महत्वपूर्ण औषधि है, जिसके सेवन से आयु और जीवन की गुणवत्ता में सुधार आता है और कुछ गंभीर बीमारियों में भी हीरा भस्म का इस्तेमाल सदियों से होता आया है, जैसे कैंसर, ट्यूमर, तपेदिक, मधुमेह, मोटापा और पुरानी एनीमिया की बीमारी से छुटकारा पाने में हीरा भस्म मदद करती है। आयुर्वेद में इसे 'वज्र भस्म' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह शुद्ध हीरे से तैयार की जाती है। इस भस्म को शुद्ध हीरे और कुछ दुर्लभ जड़ी-बूटियों के कई बार शोधन के बाद तैयार किया जाता है।हीरे में कार्बन होता है, और इसमें रस सिंदूर और शुद्ध गंधक की बराबर मात्रा मिलाकर अच्छी तरह पीस लिया जाता है। फिर इसे एक डिब्बा बंद डिब्बे में हवा की अनुपस्थिति में गर्म किया जाता है, और इस प्रक्रिया को 14 बार दोहराया जाता है। इसकी एक ग्राम की कीमत हीरे की असल कीमत के कैलकुलेशन से तैयार की जाती है।हीरे के समान कीमती ये भस्म कई रोगों में काम आती है। यह हृदय रोगों के लिए लाभकारी है। अगर दिल ठीक से रक्त का प्रवाह नहीं करता है या रक्त धमनियां कमजोर हैं, तो हीरा भस्म दिल को मजबूती देता है। इस भस्म का उपयोग अस्थमा, मधुमेह, मोटापा, बांझपन और सूजन संबंधी बीमारियों के इलाज में किया जाता है।इसके अलावा, अगर रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है तब भी हीरा भस्म टॉनिक की तरह काम करता है और शरीर में स्फूर्ति लाने में सहायक है। हीरा भस्म का इस्तेमाल कैंसर, गठिया और अस्थि मज्जा से जुड़े रोगों को दूर करने में भी होता आया है। ये प्राकृतिक रूप से स्मृति शक्ति बढ़ाकर मस्तिष्क को तेज बनाती है, जिससे एकाग्रता बढ़ती है। पुरुषों से जुड़ी शारीरिक कमजोरी में भी हीरा भस्म लाभकारी है।

राजनीती

मप्र के नौकरशाही को नहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश की परवाह : उच्च शिक्षा विभाग ने कैम्पस के लिए जारी कर दी जातिगत भेदभाव वाली गाइडलाइन, सामान्य वर्ग बाहर

उच्च शिक्षा विभाग ने कैम्पस के लिए जारी कर दी जातिगत भेदभाव वाली गाइडलाइन, सामान्य वर्ग बाहर

भोपाल। कैम्पस में छात्रों का उत्पीड़न रोकने के लिए लाई गई विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ( यूजीसी ) की गाइडलाइन पर देश भर में मचे बवाल के बाद देश की सर्वोच्च अदालत ने भले ही इसके अमल पर रोक लगा दी हो, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार अपरोक्ष रूप से इसे लागू करने पर आमादा है। विवाद की जड़ में उत्पीडन का शिकार होने वाले छात्रों की श्रेणियां रही हैं, जिनमें सामान्य वर्ग को शामिल नहीं किया गया था। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट का स्टे भी आया। लेकिन लगता है प्रदेश की अफसरशाही को इससे कोई वास्ता नहीं। अदालत के आदेश के तीन दिन बाद ही प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने जो दिशा निर्देश जारी किये हैं उनमें भी कैंपस में पीड़ित होने वाले छात्रों को सिर्फ आरक्षित वर्ग तक ही सीमित रखा गया है। सरकार के इस कदम से सवर्ण समाज में आंदोलन की दबी चिंगारी को फिर हवा मिलने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी की गाइडलाइन लागू करने पर रोक लगा दी थी। सर्वोच्च अदालत ने माना था कि उत्पीडन के शिकार होने वाले छात्रों में सामान्य वर्ग को शामिल न करना और यह मानना की ऐसी सिर्फ आरक्षित वर्ग के साथ ही होगा, उचित नहीं है। इससे भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा। यह समाज को बांटने वाला है और इसका दुरूपयोग हो सकता है। इसके बाद अलग -अलग राज्यों में चल रहे आंदोलन थम गए थे। लेकिन तीन दिन बाद यानी 2 फरवरी को प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश की सभी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार और कॉलेजों के प्राचार्य को एक विस्तृत सर्कुलर भेजता है। उच्च शिक्षा विभाग के अवर सचिव वीरन सिंह भलावी के हस्ताक्षर से जारी इस सर्कुलर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2023 के नियमों का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में अनिवार्य रूप से लोकपाल और विद्यार्थी शिकायत निवारण समिति का गठन किया जाना है। ये समितियां 15 दिनों के भीतर शिकायतों का निराकरण कर संस्था प्रमुख को भेजेंगी। इससे असंतुष्ट होने पर छात्र लोकपाल को अपील करेंगे जहाँ से 30 दिनों के भीतर निराकरण होगा। ख़ास बात यह है कि शिकायत निवारण समितियों में एक सदस्य अनिवार्य रूप से एससी -एसटी - ओबीसी का रखे जाने का प्रावधान है। सामान्य वर्ग के सदस्य की कोई अनिवार्यता नहीं है। आपत्ति वाले प्रावधान जस के तससर्कुलर में छात्रों की शिकायतों में एडमिशन से लेकर सिलेबस, पढाई के स्तर को शामिल किया गया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की मंशा के विपरीत जातिगत भेदभाव यहां मौजूद है। इसके तहत यह मानकर चला जा रहा है कि भेदभाव केवल आरक्षित वर्ग के साथ ही हो सकता है, सामान्य वर्ग के साथ नहीं। सर्कुलर के बिंदु 7 की कंडिका कहती है- श्अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक अथवा दिव्यांग श्रेणियों के विद्यार्थियों से कथित भेदभाव की शिकायत।्य आगे कहा गया है कि लोकपाल का फैसला आने के बाद संस्थान के साथ ही पीड़ित छात्र को भी उसके आदेश की प्रति उपलब्ध कराई जाएगी। जहां शिकायत झूठी पाई जाएगी वहां लोकपाल शिकायतकर्ता के विरुद्ध उपयुक्त कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है। बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रदेश की नौकरशाही इस बात से अनजान है कि इस संवेदनशील मामले को लेकर देश भर में बवाल हो चुका है और सुप्रीम कोर्ट स्थगन आदेश दे चुका है। जाहिर है अफसर इससे अनजान तो नहीं होंगे। फिर , यह इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि किस तरह फाइलें चलती हैं और उन पर हस्ताक्षर होते हैं। अगर सतर्कता दिखाई जाती तो पहले से जारी इस गाइड लाइन से जातियों वाला बिंदु हटाया जा सकता था। सवाल यह भी कि ऐसे दिशा निर्देशों की वजह से यदि कोई अप्रिय घटना घटती है तो फिर जिम्मेदारी किसकी तय होगी।

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