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जेडीयू से दूरी, नई दिशा की खोज : केसी त्यागी की दिल्ली में अहम बैठक पर सबकी नजर

केसी त्यागी की दिल्ली में अहम बैठक पर सबकी नजर

पटना। राज्यसभा के चुनाव जीत जाने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का उच्च सदन में जाने का रास्ता साफ है। इस बीच बिहार की सियासत से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। दरअसल नीतीश के पुराने मित्र और जेडीयू के सीनियर नेता केसी त्यागी पार्टी से किनारा करने की तैयारी में जुट गए हैं। इस तरह के कयास तब लगने लगे जब उन्होंने जेडीयू का सदस्यता अभियान खत्म होने के बाद भी केसी त्यागी ने अपनी सदस्यता रिन्यू नहीं कराई। सूत्रों की मानें तो वे राजनीति के नए रास्ते खोजने में जुट गए हैं। सूत्रों ने दावा किया कि केसी त्यागी वे अपने कुछ राजनीतिक मित्र, शुभचिंतक और कार्यकर्ताओं के साथ 22 मार्च को दिल्ली में समान विचारधारा वाले लोगों के साथ एक बैठक आयोजित कर रहे हैं, जिसमें देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में वे आगे की रणनीति या कार्ययोजना संबंधित लोगों से विचार-विमर्श करने के बाद तय करेंगे। पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं के रूप में होती केसी की गिनतीके सी त्यागी की गिनती जदयू के वरिष्ठ नेताओं और पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं के रूप में होती रही है। इनकी गणना नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में होती रही है, लेकिन कहा जाता है कि कुछ महीनों से इनकी दूरी बढ़ गई है। के सी त्यागी ने मंगलवार इस संबंध में एक बयान जारी करते हुए इसकी जानकारी सार्वजनिक की है। पार्टी से लंबे समय से दूरी बनाए हैं त्यागीगौरतलब है कि केसी त्यागी ने लंबे समय से जदयू से दूरी बनाए रखी है। उनके बयानों को पार्टी में भी अहमियत नहीं मिल रही थी। अब तक हालांकि आधिकारिक रूप से उन्होंने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है। अब केसी त्यागी ने स्वयं इसकी जानकारी सार्वजनिक की है कि उनकी जदयू की सदस्यता समाप्त हो गई है और उन्होंने अपनी सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया है। उन्होंने यह भी कहा है कि समाज के वंचित वर्गों, किसानों और कृषि से जुड़े लोगों के हितों से जुड़े व्यापक और विस्तृत वैचारिक मुद्दों के प्रति मेरी प्रतिबद्धता आज भी उतनी ही दृढ़ है, जितनी पहले थी।

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मनोरंजन

बंदूक नहीं, कला का सहारा लिया... : अशोक पंडित ने कश्मीरी फिल्म बट्ट कोच की तारीफ में पढ़ी कसीदें, दीं शुभकामनाएं

 अशोक पंडित ने कश्मीरी फिल्म बट्ट कोच की तारीफ में पढ़ी कसीदें, दीं शुभकामनाएं

मुंबई। कश्मीरी पंडित और फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने कश्मीरी भाषा में बनी फिल्म बट्ट कोच की तारीफ की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करते हुए फिल्म को भावनाओं से भरपूर, शक्तिशाली और दिल को छू लेने वाली बताया। अशोक पंडित ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट कर कैप्शन में लिखा, ष्यह फिल्म दर्शकों को पूरी तरह स्क्रीन से बांधे रखती है, सोचने पर मजबूर करती है और गहरा संदेश देती है। वीडियो में अशोक पंडित ने कहा, “हम सब जानते हैं कि 1990 में कश्मीरी पंडितों का निष्कासन हुआ, उनका नरसंहार हुआ, उनकी जातीय सफाई हुई और पूरी कौम घरों से बेघर हो गई।”उन्होंने बताया कि फिल्म का नाम बट्ट कोच है, जहां कोच कश्मीरी पंडितों की गली को कहते हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि इतनी बड़ी त्रासदी झेलने के बाद भी अगली पीढ़ी ने माता-पिता की कहानियां सुनकर अपनी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखा। अशोक पंडित ने फिल्म के निर्देशकों सिद्धार्थ कौल और अंकित वली की खास तारीफ की। उन्होंने कहा, “हमारी कम्युनिटी के ये दो लड़के सिद्धार्थ और अंकित ने सोचा कि हम अपनी पीड़ा को फिल्म के जरिए दुनिया के सामने लाएंगे। आज के जमाने में फिल्म बनाना और रिलीज करना बड़ी उपलब्धि है। सबसे बड़ी बात ये है कि उन्होंने बंदूक नहीं उठाई, न कोई बुरी राह चुनी। उन्होंने कला का सहारा लिया और अपनी व्यथा को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की।”उन्होंने प्रोड्यूसर विनायक के साहस और पैशन की भी सराहना की। उन्होंने कहा, “पैसे और फंड के बिना सपने पूरे नहीं होते। विनायक ने भरोसा जताया और फिल्म बनाई।” अशोक पंडित ने एम.के. रैना, कुसुम धर, अनिल कौल चिंगारी, कुसुम तिक्कू, साक्षी भट्ट, श्रीमे भट्ट, दिलीप पंडिता और अन्य कलाकारों के अभिनय की भी प्रशंसा की। उन्होंने फिल्म के संगीत की तारीफ करते हुए कहा कि सौरभ झाड़ू ने कश्मीरी लोक-संगीत की शैली में संगीत तैयार किया है, जो पंडित परिवार की भावनाओं को बखूबी पेश करता है। कैमरा वर्क, एडिटिंग (आकांक्षा झाड़ू), कॉस्ट्यूम्स और पोस्ट-प्रोडक्शन सब कुछ शानदार है।अशोक पंडित ने कैप्शन में लिखा, “पूरी टीम को ढेर सारी शुभकामनाएं। उम्मीद है कि इस साल क्षेत्रीय फिल्म श्रेणी के सभी पुरस्कार आप ही जीतेंगे। फिल्म ने वापस घाटी की यादों में ले जाकर भावुक कर दिया। यह फिल्म मानवता पर आधारित है। कम बजट में बनी यह छोटी-सी कश्मीरी फिल्म लोगों के सामने आई और अमिट छाप छोड़ गई।”अशोक पंडित ने पोस्ट के अंत में कहा, “यह फिल्म कश्मीरी पंडितों के लिए एक मील का पत्थर है। यह हमेशा याद रखी जाएगी।” उन्होंने सिद्धार्थ और अंकित को याद करते हुए कहा कि जब वे स्क्रिप्ट लेकर आए थे, उनकी आंखों में पैशन और ईमानदारी देखकर पता था कि फिल्म एक दिन रिलीज होगी।

बिज़नेस

रिटेल निवेशकों के लिए सबसे बेहतर रणनीति धैर्य : वैश्विक अस्थिरता पर सेबी चीफ की सलाह, बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव पर जल्दबाजी में न दें प्रतिक्रिया

वैश्विक अस्थिरता पर सेबी चीफ की सलाह, बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव पर जल्दबाजी में न दें प्रतिक्रिया

नई दिल्ली। सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत के पूंजी बाजार लगातार मजबूत और व्यापक होते जा रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी में एक मीडिया कार्यक्रम में बोलते हुए सेबी प्रमुख ने रिटेल निवेशकों को सलाह दी कि वे बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव पर जल्दबाजी में प्रतिक्रिया न दें।उन्होंने कहा, रिटेल निवेशकों के लिए सबसे बेहतर रणनीति धैर्य बनाए रखना है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐतिहासिक रूप से, बड़े वैश्विक संकटों के बाद बाजार में फिर से सुधार देखने को मिलता है। उन्होंने बताया कि भारत के पूंजी बाजार आकार, विविधता और मजबूती के मामले में तेजी से बढ़ रहे हैं। पांडे ने कहा, हमारे बाजार लगातार गहरे और विविध हो रहे हैं और उनकी मजबूती भी बढ़ रही है, लेकिन जैसे-जैसे बाजार का आकार और जटिलता बढ़ती है, वैसे-वैसे वे वैश्विक घटनाओं से भी अधिक प्रभावित होने लगते हैं।वैश्विक बाजारों में अस्थिरता को स्वीकार करते हुए, उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, तकनीकी बदलाव और ऊर्जा संकट अनिश्चितता में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा, भू-राजनीतिक तनाव आर्थिक संबंधों को आकार दे रहे हैं। मध्य पूर्व में संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है।संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा बड़ा असर उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है, जिसका प्रभाव वैश्विक पूंजी बाजारों पर भी पड़ा है। पांडे के अनुसार, आज के वित्तीय बाजारों की एक खासियत यह है कि उनमें अस्थिरता ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि जानकारी और खबरें तेजी से पूरी दुनिया में फैलती हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसे दौर स्थायी नहीं होते।अत्यधिक अस्थिरता के दौर हमेशा के लिए नहींउन्होंने कहा, एक बात स्पष्ट है कि अत्यधिक अस्थिरता के दौर हमेशा के लिए नहीं रहते। वैश्विक बाजारों में हो रहे संरचनात्मक बदलावों का जिक्र करते हुए सेबी चीफ ने कहा कि आर्थिक विभाजन, बदलते व्यापार मार्ग और तकनीक की बढ़ती भूमिका बाजारों को तेजी से बदल रही है। उन्होंने बताया कि एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स के कारण बाजार पहले से कहीं ज्यादा तेजी से काम कर रहे हैं।आज के दौर में बहुत तेजी से फैलती है जानकारीसेबी चेयरमैन ने यह भी कहा कि आज के दौर में जानकारी बहुत तेजी से फैलती है और राय उससे भी तेज, जिसके कारण बाजार अक्सर खबरों और कथाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देने लगते हैं। उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बाजार की तेजी के साथ उसकी स्थिरता भी बनी रहे।

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खेल

उसने रन आउट करने का कर लिया था फैसला, : मेहदी हसन की हरकत पर सलमान आगा ने निकाली भड़ास, सुलह को लेकर कही यह बात

मेहदी हसन की हरकत पर सलमान आगा ने निकाली भड़ास, सुलह को लेकर कही यह बात

ढाका। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच शुक्रवार को ढाका के शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम में वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला खेला गया। यह मैच सलमान अली आगा के रन-आउट के तरीके को लेकर चर्चा में है। आगा को जिस तरह आउट किया गया उसे खेल की भावना के खिलाफ माना जा रहा है। मैच के बाद आगा ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सलमान आगा ने मीडिया से बातचीत में कहा, मुझे लगता है कि खेल भावना होनी चाहिए। वह मेहदी हसन को गेंद वापस देने की कोशिश कर रहे थे। ऐसी स्थिति में इसे डेड करार दिया जा सकता था।उन्होंने कहा, गेंद मेरे पैड पर और फिर मेरे बैट पर लगी। इसलिए मुझे लगा कि वह अब मुझे रन-आउट नहीं कर सकते, क्योंकि बॉल पहले ही मेरे पैड और मेरे बैट पर लग चुकी थी। मैं बस उन्हें गेंद वापस देने की कोशिश कर रहा था। मैं रन नहीं ढूंढ रहा था, लेकिन उसने पहले ही रन-आउट करने का फैसला कर लिया। आगा ने कहा, बांग्लादेश ने जो किया है वह कानून के अंदर है। मुझे लगता है कि अगर उन्हें लगता है कि यह सही है, तो यह सही है, लेकिन मेरे नजरिए से, मैं इसे अलग तरह से करता। मैं खेल भावना के लिए जाता। हमने पहले ऐसा कुछ नहीं किया है, और भविष्य में भी ऐसा कभी नहीं करेंगे।रन आउट होने के गुस्से से लाल हुए आगाआगा रन आउट होने के बाद काफी गुस्से में नजर आए थे और उन्होंने बांग्लादेशी खिलाड़ियों के कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था। इस पर उन्होंने कहा, ष्उस पल मैंने गुस्से में रिएक्शन दिया था। उस समय ने मुझे कुछ नजरिया दिया है। कुछ चीजों को अलग तरह से हैंडल करना चाहिए।मैंने मेहदी से अब तक नहीं की सुलहबांग्लादेशी विकेटकीपर लिटन दास के साथ हुई बहस पर आगा ने कहा, मुझे याद नहीं कि मैं क्या कह रहा था। मुझे यकीन है कि मैं अच्छी बातें नहीं कह रहा था, और वह भी अच्छी बातें नहीं कह रहा था। लेकिन यह बस उस पल की गर्मी थी, इसलिए हम ठीक हैं। मैंने मेहदी से अभी तक सुलह नहीं की है, लेकिन चिंता मत करो, मैं उसे ढूंढ लूंगा।पारी की 39 ओवर में घटी घटनाघटना पाकिस्तान की पारी के 39वें ओवर की चैथी गेंद पर घटी। मेहदी हसन मिराज की गेंद को मोहम्मद रिजवान ने गेंदबाज की दिशा में खेला। गेंद पकड़ने की कोशिश में मिराज नॉन स्ट्राइक वाली क्रीज से बाहर खड़े सलमान अली आगा से लड़ गए। गेंद रुक गई थी इसलिए आगा ने सिंगल लेने का इरादा छोड़ दिया और गेंद खुद उठाकर मिराज को देने लगे। इतने में मिराज ने गेंद लेकर विकेट पर दे मारा। आगा क्रीज के बाहर थे और अपील के बाद उन्हें तीसरे अंपायर ने रन आउट करार दिया। आगा गेंद गेंदबाज को देने की कोशिश कर रहे थे और उन्हें रन आउट दे दिया गया। इसलिए फैसले को खेल भावना के विपरीत माना जा रहा है।यह बोले बांग्लादेश के कप्तान मेहंदी हसनबांग्लादेश के कप्तान मेहदी हसन मिराज ने इस घटना पर कहा, मेरा इरादा केवल गेंद को रोकने और संभावित रन को बचाने का था। वह क्रीज से बाहर थे और मैं सिर्फ गेंद की तरफ जा रहा था। अगर मैं गेंद को मिस कर देता तो वह आसानी से रन ले सकते थे, इसलिए मैंने स्टंप्स पर थ्रो करने का फैसला किया।114 रन पर सिमट गई थी बांग्लादेश की टीममैच की बात करें तो टॉस गंवाकर पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान ने माज सदाकत (75), आगा (64), और रिजवान (44) की मदद से 274 रन बनाए थे। बारिश की वजह से बांग्लादेश को डीएलएस नियम के तहत 32 ओवर में 243 का लक्ष्य दिया गया था। बांग्लादेश 114 रन पर सिमट गई और 128 रन के बड़े अंतर से मैच हार गई।

लाइफस्टाइल

मोटापा सिर्फ बढ़ता वजन नहीं : कई बीमारियों की बड़ी वजह, आसान उपाय संग ऐसे करें कंट्रोल

 कई बीमारियों की बड़ी वजह, आसान उपाय संग ऐसे करें कंट्रोल

नई दिल्ली। मोटापा अब सिर्फ दिखावे की समस्या नहीं रहा, बल्कि यह हृदय रोग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर समेत कई गंभीर बीमारियों का बड़ा कारण बन चुका है। ऐसे में बढ़ती वजन की समस्या से परेशान लोगों को हेल्थ एक्सपर्ट कुछ आसान उपाय की सलाह देते हैं, जो मोटापे की समस्या को खत्म करने में कारगर हैं। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के अनुसार, यह समस्या अब बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के लोगों में तेजी से फैल रही है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जंक फूड का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना और अनियमित जीवनशैली मोटापे की मुख्य वजह बन गई है। बच्चे मोबाइल-टीवी पर ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे उनकी शारीरिक सक्रियता कम हो जाती है। वहीं, बड़ों में ऑफिस की नौकरी, तनाव और फास्ट फूड की आदत ने मोटापे को और बढ़ावा दिया है।ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा सिर्फ वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर में सूजन पैदा करता है, इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ाता है और धमनियों में फैट जमा होने से हृदय रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। एनएचएम ने लोगों को मोटापे से बचने के लिए कुछ आसान लेकिन प्रभावी उपाय बताए हैं।वास्तव में मोटापा एक ऐसी समस्या है, जिसे दवाइयों से ज्यादा जीवनशैली में बदलाव से नियंत्रित किया जा सकता है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, जोड़ों के दर्द और यहां तक कि अन्य गंभीर रोगों का कारण भी बन सकता है।इसके लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम या शारीरिक गतिविधि करें। तेज चलना, साइकिल चलाना, योग या खेलकूद इसमें शामिल हो सकता है। संतुलित और पौष्टिक आहार लें। घर का बना खाना, ताजी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और कम तेल-चीनी का इस्तेमाल करें। जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं। स्क्रीन टाइम को सीमित करें। खासकर बच्चों को टीवी, मोबाइल या कंप्यूटर पर दो घंटे से ज्यादा समय न बिताने दें। पर्याप्त नींद लें। रात को 7-8 घंटे की अच्छी नींद मोटापे को नियंत्रित रखने में बहुत मदद करती है। एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएं। लिफ्ट की बजाय सीढ़ियां चढ़ें, छोटे-छोटे काम खुद करें और बैठे रहने की आदत छोड़ें।

राजनीती

मैटरनिटी लीव पर एससी का अहम फैसला : बच्चा गोद लेने वाली महिलाओं के लिए है राहत भरा

बच्चा गोद लेने वाली महिलाओं के लिए है राहत भरा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मैटरनिटी लीव को लेकर एक बहुत अहम और बड़ा फैसला सुनाया है, जो खास तौर पर बच्चा गोद लेने वाली महिलाओं के लिए राहत भरा माना जा रहा है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ तीन महीने तक के बच्चे को गोद लेने वाली ही नहीं, बल्कि उससे ज्यादा उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिलाएं भी मातृत्व अवकाश की हकदार होंगी। दरअसल, पहले कानून में यह प्रावधान था कि अगर कोई महिला तीन महीने तक के बच्चे को गोद लेती है, तभी उसे 12 हफ्तों की मैटरनिटी लीव मिलती थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस नियम को गलत और भेदभावपूर्ण माना। कोर्ट ने सामाजिक सुरक्षा संहिता के सेक्शन 60(4) को रद्द करते हुए कहा कि यह प्रावधान संविधान के आर्टिकल 14 (समानता का अधिकार) और आर्टिकल 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करता है।कोर्ट ने समझाया मातृत्व अवकाश का मकसदकोर्ट का मानना है कि मातृत्व अवकाश का मकसद सिर्फ बच्चे के जन्म या गोद लेने के शुरुआती समय तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि मां और बच्चे के बीच आत्मीय रिश्ता बनाने और बच्चे की देखभाल के लिए भी जरूरी होता है। अगर बच्चे की उम्र के आधार पर यह सुविधा दी जाए या रोकी जाए, तो यह सही नहीं है। इससे उन महिलाओं के साथ नाइंसाफी होती है, जो किसी कारण से थोड़ा बड़े बच्चे को गोद लेती हैं।कोर्ट ने केन्द्र को दिया सुझावइसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक और अहम सुझाव दिया है। कोर्ट ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि पिता के लिए भी पितृत्व अवकाश को लेकर साफ और ठोस कानून बनाया जाए। इससे बच्चों की परवरिश में पिता की भूमिका भी मजबूत होगी और जिम्मेदारी सिर्फ मां पर ही नहीं रहेगी। मैटरनिटी लीव को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले से तीन महीने से बड़े बच्चे को गोद लेने वाली महिलाओं को काफी राहत मिलेगी। अब पहले जैसी उम्र की पाबंदी नहीं रहेगी, जिससे कई महिलाओं को फायदा मिलेगा।

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