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भृंगराज : सिर्फ बालों के लिए ही नहीं, पित्त और वात को भी संतुलित करने में सहायक, जानें सेवन के लाभ'ये नया सफर जरूर धमाल मचाएगा' : 'मंगल-देश की बेटी' के लिए दीपिका सिंह को फैंस ने दी बधाईक्रिकेट ऑस्ट्रेलिया : सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट में बड़ा उलटफेर, मैक्सवेल-कोंस्टास को नहीं मिली जगह

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राजेन्द्र भारती : बैंक से धोखाधड़ी कर जेल पहुंचे दतिया विधायक, दिल्ली की एमपीएमएलए कोर्ट ने ठहराया दोषी

बैंक से धोखाधड़ी कर जेल पहुंचे दतिया विधायक, दिल्ली की एमपीएमएलए कोर्ट ने ठहराया दोषी

दतिया। दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को भूमि विकास बैंक से जुड़े एक धोखाधड़ी मामले में दिल्ली की एमपीएमएलए कोर्ट ने दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत अपराधी मानते हुए जेल भेज दिया है। हालांकि उनकी सजा को लेकर गुरुवार को सुनवाई होगी। यह फैसला बुधवार को सुनाया गया, जिसने प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।मामले के अनुसार, विधायक ने अपनी मां के नाम पर बैंक में 10.50 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) कराई थी। यह एफडी मूल रूप से तीन साल की अवधि के लिए थी, जिस पर 13.50 प्रतिशत ब्याज दर तय की गई थी। आरोप है कि बाद में इस एफडी की अवधि को नियमों के विरुद्ध बढ़ाकर 15 साल कर दिया गया। इस बदलाव को फर्जीवाड़ा बताते हुए इसे धोखाधड़ी का मामला माना गया।बैंक कर्मचारी ने दर्ज कराई थी शिकायतइस पूरे प्रकरण की शिकायत बैंक कर्मचारी नरेंद्र सिंह ने अदालत में दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि एफडी की अवधि बढ़ाने की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ और दस्तावेजों में हेरफेर की गई। अदालत ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए, जिसके बाद मामला दर्ज हुआ और सुनवाई शुरू हुई।सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट ने राजेंद्र भारती को दोषी पाया। अब सजा को लेकर अगली सुनवाई में निर्णय लिया जाएगा। इस फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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मनोरंजन

'ये नया सफर जरूर धमाल मचाएगा' : 'मंगल-देश की बेटी' के लिए दीपिका सिंह को फैंस ने दी बधाई

'मंगल-देश की बेटी' के लिए दीपिका सिंह को फैंस ने दी बधाई

मुंबई । भारतीय टेलीविजन की दुनिया में कई शो होते हैं जो दर्शकों के दिल में अपनी खास जगह बना लेते हैं। ऐसे ही शो में से एक है 'मंगल लक्ष्मी', जो अब अपने नए अध्याय 'मंगल-देश की बेटी' के साथ दर्शकों के सामने आ रहा है। इस नई कहानी में मुख्य किरदार मंगल नई जिम्मेदारियों और चुनौतियों का सामना करती हैं। अभिनेत्री दीपिका सिंह ने इस नई यात्रा को लेकर इंस्टाग्राम पर एक भावपूर्ण पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने अपनी खुशी, उत्साह और टीम के प्रति आभार जताया।दीपिका ने अपने पोस्ट में लिखा कि वह इस नए चैप्टर को लेकर पूरी तरह से अभिभूत और उत्साहित हैं। उन्होंने दर्शकों को बताया कि इस कहानी में मंगल को देश की सेवा का अवसर मिलता है और वह खुद को विशेष महसूस करती हैं। दीपिका ने अपने कैप्शन में लिखा, '''मंगल-देश की बेटी' के इस नए सफर को निभाने के लिए मैं बेहद खुश, रोमांचित और उत्साहित हूं।''उन्होंने अपने पोस्ट में टीम का भी धन्यवाद किया। दीपिका ने कहा कि पिछले 700 एपिसोड्स के दौरान पूरी टीम ने लगातार मेहनत और समर्पण दिखाया। उन्होंने बताया कि दर्शकों का समर्थन ही उनकी इस सफलता की सबसे बड़ी वजह है। उन्होंने अपने फैंस से हर एपिसोड देखने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वे सोमवार से शुक्रवार रात 8:30 बजे इस शो का आनंद लेते रहेंगे।दीपिका के इस पोस्ट पर कई लोगों ने कमेंट्स किया। एक ने लिखा, 'दीपिका जी, आपका नया किरदार देखकर बहुत खुश हूं! मंगल का यह रूप बहुत प्रेरणादायक लग रहा है।' दूसरे फैंस ने लिखा, 'आपकी मेहनत और एनर्जी सच में कमाल की हैं!' अन्य ने लिखा, 'शो देखने के लिए अब और भी उत्साहित हो गए हैं, ये नया सफर जरूर धमाल मचाएगा।', 'आपकी एक्टिंग हमेशा दिल को छूती है।' 'मंगल लक्ष्मी' कन्नड़ टीवी सीरीज 'भाग्यलक्ष्मी' का आधिकारिक रूपांतरण है। इस शो में दीपिका के अलावा सनिका अमित, नमन शॉ और शुभम दीप्ता मुख्य कलाकार हैं। इस कहानी में मंगल अपनी बहन लक्ष्मी के लिए सही जीवनसाथी खोजती हैं।

बिज़नेस

महंगाई का तगड़ा झटका : कामर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में बड़ा इजाफा, अब एक सिलेंडर पर देने होंगे 2,078 रुपए

कामर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में बड़ा इजाफा, अब एक सिलेंडर पर देने होंगे 2,078 रुपए

नई दिल्ली। वित्तीय वर्ष के पहले दिन ही महंगाई का झटका लगा है। 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 195 रुपये 50 पैसे का इजाफा हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद कामर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,078 रुपये 50 पैसे हो गई है। कंपनियों द्वारा मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के चलते के कारण कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए हैं। राहत की बात यह रही की कि घरेलू रसोई गैस की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। 14.2 किलो का घरेलू सिलेंडर अभी भी 913 रुपये में मिल रहा। बता दें कि कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 1 मार्च को 1768.50 रुपये थे, जो 7 मार्च को बढ़कर 1883 रुपये हो गए थे। इसके बाद अब 195.50 रुपये बढ़कर 2078.50 हो गए हैं। यानी 1 मार्च से अब तक 310 की कुल बढ़ोतरी हो चुकी है। अब दिल्ली में इस सिलेंडर का दाम बढ़ कर 1883 रुपये से बढ़कर 2078.50 रुपये हो गया है वहीं 19 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 2208.00 रुपये, मुंबई में 2031.00 रुपये और चेन्नई में 2246.50 रुपये हो गई है। होटल या बाहर खाना होगा महंगाकमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि होटल और रेस्टोरेंट संचालक खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ा सकते हैं। इसका अर्थ है कि होटल या बाहर खाना महंगा हो सकता है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से गैस और कच्चे तेल की सप्लाई में दिक्कतदरअसल, ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के चलते पूरी दुनिया के सामने ऊर्जा संकट बढ़ गया है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से गैस और कच्चे तेल की सप्लाई में दिक्कत हो रही है। इसकी वजह से कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहें है। दुनिया के कई देशों में गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों भारी इजाफा हुआ है। भारत में एलपीजी गैस के दाम युद्ध के बीच अब तक दो बार बढ़ चुके हैं।

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खेल

पैरा ताइक्वांडो नेशनल चैंपियनशिप : मप्र की बेटी ने मनवाया प्रतिभा का लोहा, देश के लिए स्वर्ण जीतकर रचा इतिहास

मप्र की बेटी ने मनवाया प्रतिभा का लोहा, देश के लिए स्वर्ण जीतकर रचा इतिहास

लगातार चार बार नेशनल चैंपियनशिप जीतने वाली देश की पहली दिव्यांग खिलाड़ी बनीं सपनानीरज द्विवेदी, इंदौरमध्यप्रदेश के इंदौर की बेटी सपना शर्मा ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। पैरा ताइक्वांडो नेशनल चैंपियनशिप 2025-26 में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने नया इतिहास रच दिया। यह उनका लगातार चैथा राष्ट्रीय स्वर्ण पदक है, और इसी के साथ वह देश की पहली दिव्यांग खिलाड़ी बन गई हैं, जिन्होंने लगातार चार बार नेशनल चैंपियनशिप अपने नाम की है। उनकी यह उपलब्धि न केवल इंदौर, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है।यह प्रतियोगिता 28 और 29 मार्च को बेंगलुरु के कोरामंगला स्टेडियम में आयोजित हुई, जिसमें देशभर से लगभग 70 खिलाड़ियों ने भाग लिया। फाइनल मुकाबले में सपना शर्मा ने शानदार तकनीक, आत्मविश्वास और धैर्य का प्रदर्शन करते हुए अपने प्रतिद्वंद्वियों को मात दी। तेलंगाना की ममता ने रजत पदक और कृष्णवेणी ने कांस्य पदक हासिल किया।साहस-संघर्ष की प्रेरक मिसाल हैं सपनासपना शर्मा की यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष और दृढ़ संकल्प की प्रेरक मिसाल है। बचपन में दोनों पैरों में पोलियो होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी दिव्यांगता को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया और खेल के मैदान में अपनी अलग पहचान स्थापित की।सपना ने कई खेलों में किया मप्र का प्रतिनिधित्वताइक्वांडो से पहले भी सपना ने कई खेलों में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने टेबल टेनिस में प्रदेश का नाम रोशन किया और आर्म रेसलिंग में भी पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वह भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और कई सम्मान अपने नाम कर चुकी हैं। आर्थिक कठिनाइयों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद सपना ने अपने अभ्यास में कभी कमी नहीं आने दी। उन्होंने लगातार मेहनत की और अपने सपनों को साकार करने के लिए हर संभव प्रयास किया।सपना ने मुश्किलों को बनाया अपनी ताकतसपना का कहना है कि उनके जीवन की सबसे बड़ी चुनौती उनकी शारीरिक स्थिति रही है। इसके साथ ही आर्थिक समस्याएं, नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियां भी उनके सामने रहीं। कई बार ऐसा भी हुआ कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए चयनित होने के बावजूद आर्थिक कारणों से वह विदेश नहीं जा सकीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनका कहना है, “मैंने हर मुश्किल को अपनी ताकत बनाया और हमेशा आगे बढ़ती रही।”

लाइफस्टाइल

गर्मी में खानपान में बरते सावधानी : कब्ज, गैस और अपच से राहत दिलाती है परवल की सब्जी, पोषक तत्वों से भी है भरपूर

कब्ज, गैस और अपच से राहत दिलाती है परवल की सब्जी, पोषक तत्वों से भी है भरपूर

नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में खानपान में सावधानी बरतना जरूरी है। कब्ज, गैस और अपच की समस्या से परेशान लोगों के लिए परवल की सब्जी बेहद कारगर है। पोषक तत्वों से भरपूर परवल को गर्मियों में अपने आहार में शामिल करने की सलाह हेल्थ एक्सपर्ट्स देते हैं। यह सब्जी पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है और कई स्वास्थ्य लाभ देती है। परवल का वैज्ञानिक नाम ट्राइकोसेन्थेस डायोइका रॉक्सब है। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। परवल में एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं, साथ ही यह खून को शुद्ध करने में मददगार है। रिसर्च के अनुसार, परवल प्रोटीन और विटामिन ए से भरपूर है। इसमें औषधीय गुण हैं, जो ब्लड शुगर और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक साबित होते हैं। आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति में परवल का विशेष महत्व है। प्राचीन ग्रंथ चरक संहिता में पीलिया समेत कई रोगों के इलाज के लिए परवल के फल और पत्तियों का उल्लेख मिलता है। इसे ‘तृप्तिघ्न’ भी कहा जाता है क्योंकि यह भोजन से तृप्ति दिलाने में मदद करता है।आयुर्वेद के अनुसार परवल कफ और पित्त दोष को संतुलित रखता है। यह मुंहासे, पित्त, खुजली और प्यास बुझाने में भी उपयोगी है। गर्मियों में कब्ज और अपच आम समस्या है। परवल का फाइबर पेट साफ रखता है और गैस की समस्या कम करता है। इसमें कैलोरी कम होती है और फाइबर ज्यादा होता है। इसके नियमित सेवन से वजन संतुलित रहता है और वजन घटाने में भी मदद मिलती है। डायबिटीज के मरीजों के लिए परवल फायदेमंद है। यह ब्लड शुगर को संतुलित रखने में सहायता करता है।परवल त्वचा के लिए फायदेमंद है। एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर परवल चेहरे पर रौनक बनाए रखता है और त्वचा को स्वस्थ रखता है। इम्युनिटी बढ़ाता है, साथ ही अन्य पोषक तत्व प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।परवल को कई तरीकों से खाया जा सकता है। इसे सब्जी, भुजिया, चोखा, सूप, करी, अचार या मिठाई के रूप में तैयार किया जाता है। गर्मियों में हल्की परवल की सब्जी बनाकर खाना सबसे अच्छा रहता है। हालांकि, परवल सभी के लिए उपयुक्त नहीं है। कुछ लोगों को इससे परहेज करना चाहिए। इसलिए डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही इसका सेवन करें।

राजनीती

लाल आतंक का THE END! : केंद्र सरकार का नक्सलवाद मुक्त भारत का लक्ष्य हुआ पूरा ?

केंद्र सरकार का नक्सलवाद मुक्त भारत का लक्ष्य हुआ पूरा ?

बस्तर। 31 मार्च 2026 की तारीख जो बस्तर से नक्सलियों का अंतिम दिन गृह मंत्री अमित शाह ने घोषित किया था। इसी क्रम में पुलिस लाइन दंतेवाड़ा में पांच नक्सलियों ने बस्तर IG पी सुंदरराज, कलेक्टर देवेश ध्रुव और SP गौरव राज की मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया, साथ ही नक्सलियों की निशानदेही पर जंगल में छुपाए हथियार ही बरामद हुए हैं, जिनमें 8 SLR, 1 कार्बाइन, 3 इंसास, 2 देशी पिस्तौल, 2 देशी कट्टा, 1 देशी रिवॉल्वर, 1 राइफल 303, 3 बंदूक 315, 5 छोटे BGL लॉन्चर, 8 बारह बोर, 5 देसी मोटार और कारतूस है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बस्तर IG ने बस्तर को नक्सल मुक्त बताया और फोर्स की सतर्कता में कोई कमी नहीं आने की बात भी कही। नक्सल मुक्त हुआ बस्तर क्या बोले अमित शाहलोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा “2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद देश के हर गरीब को घर मिला, गैस मिला, शुद्ध पीने का पानी मिला, 5 लाख तक का स्वास्थ्य का बीमा मिला, प्रति व्यक्ति, प्रतिमाह 5 किलो मुफ्त अनाज मिला... लेकिन, ये बस्तर वाले क्यों छूट गए थे?”अमित शाह ने आगे कहा कि हम एक लोकतंत्र में रहते हैं।हमने इस देश के संविधान को अपनाया है। यह ऐसी सरकार नहीं है जो किसी की धमकियों के आगे झुक जाए। यह सरकार सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। अमित शाह ने कहा कि मैं इसलिए कह रहा हूं कि सत्य को झुठलाया जा रहा है।ये बस्तर वाले इसलिए छूट गए थे, क्योंकि वहां लाल आतंक की परछाई थी, इसलिए वहां विकास नहीं पहुंचा। मोदी सरकार में आज वो परछाई हट गई है, और इसलिए आज बस्तर विकास कर रहा है। ये नरेंद्र मोदी की सरकार है, जो हथियार उठाएगा, उसका हिसाब चुकता होगा।बड़े नक्सलियों का सरेंडरअक्टूबर 2025 में मल्लोजुला वेणुगोपाल राव समेत 61 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। सीपीआई माओवादी की सेंट्रल कमेटी के सदस्य देवजी के साथ मुरली उर्फ संग्राम (₹1 करोड़), दामोदर (TSC सचिव), और नरसिम्हा रेड्डी (DKSZDC सदस्य) ने आत्मसमर्पण किया। बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे हॉटस्पॉट में, हिड़मा जैसे नक्सलियों का प्रभाव था, वहां भी सरेंडर की दर बढ़ी है।ऑपरेशन ऑक्टोपस (बुढ़ा पहाड़), ऑपरेशन डबल बुल, और ऑपरेशन थंडर स्टॉर्म जैसे अभियानों के कारण कई नक्सली मुख्यधारा में लौटे हैं। पिछले 10 साल में 10,000 से ज्यादा माओवादियों ने हथियार डाल दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों के दबाव और सरकार की पुनर्वास नीतियों ने इस उग्रवाद को करारा झटका दिया है।आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में 2,300 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। वहीं, 2026 के पहले तीन महीनों में ही 630 से ज्यादा कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया। भारत में माओवाद का इतिहासगृह मंत्री अमित शाह ने भारत में नक्सलवाद के इतिहास पर कहा कि 1969 में भारत में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) या सीपीआई (मार्क्सवादी), की स्थापना हुई। जिसका प्राथमिक उद्देश्य न तो राष्ट्र का विकास था और न ही नागरिकों के अधिकारों की रक्षा। इसके बजाय, पार्टी का संवैधानिक लक्ष्य चीन और रूस के उदाहरणों का अनुसरण करना औऱ सशस्त्र विद्रोह के माध्यम से संसदीय प्रणाली को उखाड़ फेंकना था। हालांकि, भारत में राजतंत्र नहीं था, बल्कि यहां लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार थी।नक्सलवाद की चिंगारी साल 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से भड़की थी।सिलीगुड़ी में सीपीआई(एम) के कट्टरपंथी धड़ों ने जमींदारों के ख़िलाफ़, कर्ज में डूबे आदिवासियों और भूमिहीन किसानों के साथ मिलकर अभियान शुरू किया था। सशस्त्र संघर्ष फैलना शुरू हुआ तो चीन की मीडिया ने इसे 'स्प्रिंग थंडर ओवर इंडिया' करार दिया। इससे दो साल पहले एक स्थानीय सीपीआई(एम) नेता चारु मजूमदार ने गुरिल्ला युद्ध के जरिए इंडियन स्टेट को उखाड़ फेंकने के मक़सद के साथ 'आठ दस्तावेज' तैयार किए थे, उन्होंने शुरुआत में नक्सलबाड़ी आंदोलन का नेतृत्व किया। यह आंदोलन बाद में श्रीकाकुलम, तेलंगाना, बिहार समेत दंडकारण्य के जंगलों तक फैल गया।नक्सल प्रभावित क्षेत्र2014 में देश के 126 जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर मात्र 11 रह गई थी। फरवरी 2026 को गृह मंत्रालय की एक समीक्षा बैठक के आंकड़े बताते हैं कि देश में केवल सात जिले ही वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित बचे हैं। इसके अलावा 2014 में 36 जिले नक्सलवाद से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों की श्रेणी में आते थे, जिनकी संख्या अब घटकर सिर्फ तीन रह गई है।

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