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नर्मदा परिक्रमा पथ को बजट किया गया नजरअंदाज : नाथ ने खड़े किए सवाल, बताया दुर्भाग्यपूर्णबैंड बाजा और बेटियां के वीडियो ने छुआ स्मृति ईरानी का दिल : बेटियों पर लागू होने वाले शब्दों को जड़ से मिटाने की अपीलटी20 विश्व कप 2026 : पहले दौर में ही खुल गई इन 4 टीमों की पोल, ऑस्ट्रेलिया ने किया सबसे ज्यादा निराशकैलाश विजयवर्गीय : औकात वाले बयान पर मंत्री को नहीं गम, सीएम के माफी मांगने पर कही यह बात

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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला : ट्रंप के टैरिफ को किया रद्द, राष्ट्रपति की आपात शक्तियों पर लगाई सीमा

ट्रंप के टैरिफ को किया रद्द, राष्ट्रपति की आपात शक्तियों पर लगाई सीमा

वॉशिंगटन। अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी असर वाले फैसले में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है। 6-3 के बहुमत से दिए गए इस निर्णय को ट्रंप के आर्थिक एजेंडे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 1977 केइंटरनेशन इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर एक्ट के तहत राष्ट्रपति को लगभग सभी व्यापारिक साझेदार देशों से आने वाले सामानों पर व्यापक आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।आपातकालीन शक्तियों की सीमा तयसुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आईईईपीए का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े असाधारण हालात से निपटना है, न कि सामान्य व्यापार नीति तय करना। अदालत ने माना कि ट्रंप प्रशासन ने इस कानून की व्याख्या अत्यधिक विस्तार से की और उसे व्यापार युद्ध छेडऩे के औजार के रूप में इस्तेमाल किया। न्यायाधीशों ने कहा कि व्यापक पारस्परिक टैरिफ लगाना कांग्रेस के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि राष्ट्रपति के एकतरफा निर्णय से।आर्थिक असर: अरबों डॉलर दांव परयह फैसला ऐसे समय आया है जब इन टैरिफ के कारण वैश्विक व्यापार में अस्थिरता देखी जा रही थी। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, विवादित प्रावधानों के तहत 14 दिसंबर तक अमेरिकी सरकार लगभग 134 अरब डॉलर का शुल्क वसूल चुकी थी। ये टैरिफ खरबों डॉलर के आयात-निर्यात को प्रभावित कर रहे थे, जिससे व्यवसायों, आपूर्ति शृंखलाओं और उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, टैक्स फाउंडेशन के अनुमान बताते हैं कि ट्रंप के व्यापार युद्ध की नीतियों के कारण 2025 में प्रत्येक अमेरिकी परिवार को औसतन करीब 1,100 डॉलर का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से मुद्रास्फीति के दबाव में कुछ राहत मिल सकती है और बाजारों में स्थिरता लौटने की संभावना बढ़ेगी।पहले मिला था अदालत का साथगौरतलब है कि पिछले एक वर्ष में सुप्रीम कोर्ट ने कई अंतरिम आदेशों में ट्रंप प्रशासन को राहत दी थी। इनमें ट्रांसजेंडर सैनिकों के सैन्य सेवा में शामिल होने पर प्रतिबंध, सरकारी एजेंसियों को संवेदनशील डेटा तक पहुंच देने और शिक्षा विभाग में कटौती जैसी नीतियों को कानूनी चुनौतियों के दौरान लागू रहने की अनुमति शामिल थी। ऐसे में यह फैसला प्रशासन के लिए असाधारण झटका माना जा रहा है।वैश्विक संदेश और आगे की राहयह निर्णय उस समय आया है जब अमेरिका और भारत हाल ही में पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते के लिए एक अंतरिम रूपरेखा पर सहमत हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत के इस फैसले से अमेरिकी व्यापार नीति में पारदर्शिता और संतुलन बढ़ेगा तथा भविष्य में राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों के उपयोग पर स्पष्ट सीमाएं तय होंगी। कानूनी विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला न केवल ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर प्रभाव डालेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच शक्तियों के संतुलन को भी नई दिशा देगा।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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आज की बुलेटिन 26 June

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आज की बुलेटिन 24 June

मनोरंजन

बैंड बाजा और बेटियां के वीडियो ने छुआ स्मृति ईरानी का दिल : बेटियों पर लागू होने वाले शब्दों को जड़ से मिटाने की अपील

बेटियों पर लागू होने वाले शब्दों को जड़ से मिटाने की अपील

मुंबई । हिंदी सिनेमा में कई ऐसी फिल्में बन रही हैं, जो समाज की सोच और दिशा बदलने की कोशिश कर रही हैं। ऐसी ही फिल्म है बैंड बाजा बेटियां। गजराज राव की फिल्म के एक छोटे से वीडियो ने सोशल मीडिया पर सबकी आंखें खोल दी हैं। बैंड बाजा और बेटियां के वीडियो ने स्मृति ईरानी का दिल भी छू लिया है और अब वे ऐसे समाज के निर्माण की बात कर रही हैं, जहां बेटों को सही पालन-पोषण दिया जाए और हर महिला को साधारण महिला की तरह समझा जाए।हर मुद्दे पर मुखर राय रखने वाली स्मृति ईरानी बैंड बाजा और बेटियां के वीडियो से बहुत प्रभावित हैं। उन्होंने समाज में सिर्फ बेटियों पर लागू होने वाले उन वाक्यों को जड़ से मिटाने की बात की है, जो सुनने में साधारण लेकिन असहनीय पीड़ा देते हैं। स्मृति का कहना है कि बेटियों को ष्समझौताष् करने, असहनीय पीड़ा को सहन करने और अपनी गरिमा की कीमत पर दिखावा बनाए रखने के लिए कहा जाता रहा है। हमने ष्थोड़ा बहुत चलता हैष् जैसे वाक्यों को सामान्य मान लिया है, लेकिन अब बेटियों को भी सुरक्षित घर और गरिमा की जरूरत है, जो सिर्फ परिवार ही उन्हें दे सकता है।दरअसल टीवी जगत की तुलसी ने बैंड बाजा और बेटियों का वीडियो पोस्ट कर समाज को बदलने की धारणा पेश की है। उन्होंने पोस्ट में साफ किया है कि हिंसा संस्कृति नहीं है, परंपरा नहीं है और यह स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने लड़कियों के परिवारों से भी अपील की है कि वे बेटियों को गरिमा या रिश्तों के बोझ के तले न दबाएं बल्कि उनके लिए गरिमा और सम्मान से भरा घर बनाएं, जहां वापसी के बाद उन्हें हार का नहीं, बल्कि गौरव का अहसास हो।बैंड बाजा बेटियां का वीडियो और संदेश दोनों ही सोशल मीडिया पर खूब पसंद किए जा रहे हैं। गजराज राव की फिल्म खूब तारीफ बटोर रही है। फिल्म कब रिलीज होगी, इसे लेकर सस्पेंस बना हुआ है। फिल्म में कुछ नए कलाकार भी दिखने वाले हैं।

बिज़नेस

भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर साबित हुई एआई समिट : टाटा संस के चेयरमैन का दावाः समिट के जरिए दुनिया को दिया स्पष्ट संदेश

टाटा संस के चेयरमैन का दावाः समिट के जरिए दुनिया को दिया स्पष्ट संदेश

नई दिल्ली। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर साबित हुई है। उनके अनुसार, इस मंच के जरिए भारत ने वैश्विक समुदाय को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में उसका विजन क्या है और वह इसे किस स्तर तक ले जाने की क्षमता रखता है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित इस समिट में दुनिया भर के उद्योग जगत, नीति-निर्माताओं और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने भाग लिया।समिट के दौरान एक विशेष बातचीत में चंद्रशेखरन ने कहा कि यह आयोजन भारत की एआई से जुड़ी पहलों, नीतियों और दीर्घकालिक रणनीतियों को प्रदर्शित करने का प्रभावी मंच बना। उन्होंने कहा कि देश न केवल एआई तकनीक को अपनाने में तेजी दिखा रहा है, बल्कि इसके लिए आवश्यक मजबूत डिजिटल अवसंरचना भी तैयार कर रहा है।समिट की सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक ओपन एआई और टाटा समूह के बीच रणनीतिक साझेदारी रही। इस साझेदारी के तहत भारत में स्थानीय स्तर पर एआई-आधारित अत्याधुनिक डेटा सेंटर विकसित किए जाएंगे। इन डेटा सेंटरों को डेटा रेजिडेंसी, उच्च स्तरीय सुरक्षा और दीर्घकालिक घरेलू क्षमता को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है, ताकि संवेदनशील और सरकारी कार्यों के लिए सुरक्षित एआई समाधान उपलब्ध कराए जा सकें।चंद्रशेखरन ने बताया कि टीसीएस के हाइपरवॉल्ट डेटा सेंटर कारोबार की पहली ग्राहक ओपनएआई होगी। इस परियोजना की शुरुआत 100 मेगावाट क्षमता से की जाएगी, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 1 गीगावाट तक ले जाया जा सकता है। यह अवसंरचना ओपनएआई के सबसे उन्नत मॉडलों को भारत में सुरक्षित और कम विलंबता (लो लेटेंसी) के साथ संचालित करने में सक्षम बनाएगी।उन्होंने कहा कि यह सहयोग भारत को वैश्विक एआई हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय डेटा प्रोसेसिंग और भंडारण से न केवल सुरक्षा और अनुपालन आवश्यकताओं को मजबूती मिलेगी, बल्कि भारतीय उद्योगों को भी एआई समाधानों का तेजी से लाभ मिल सकेगा। इससे वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा, विनिर्माण और सरकारी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बड़े बदलाव की संभावना है।चंद्रशेखरन ने यह भी बताया कि टाटा समूह आने वाले वर्षों में अपने कर्मचारियों के बीच चैटजीपीटी एंटरप्राइज को लागू करने की योजना बना रहा है। इसकी शुरुआत टीसीएस के लाखों कर्मचारियों से होगी। यह पहल दुनिया के सबसे बड़े एंटरप्राइज एआई डिप्लॉयमेंट में से एक मानी जा सकती है। इसके माध्यम से कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और कौशल विकास को नई दिशा देने का लक्ष्य रखा गया है।उन्होंने कहा कि ओपनएआई और टीसीएस के लिए यह उद्योगों को रूपांतरित करने का अनूठा अवसर है। साथ मिलकर दोनों संस्थाएं भारत के युवाओं को एआई युग के लिए तैयार करेंगी और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए सशक्त बनाएंगी। समिट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत एआई क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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खेल

टी-20 विश्व कप : कोलंबो में आज टकराएंगे श्रीलंका-जिम्बाब्वे, ग्रुप बी में शीर्ष पर पहुंचने दोनों टीमें लगाएंगी जोर

कोलंबो में आज टकराएंगे श्रीलंका-जिम्बाब्वे, ग्रुप बी में शीर्ष पर पहुंचने दोनों टीमें लगाएंगी जोर

कोलंबो। टी 20 विश्व कप 2026 में आज श्रीलंका और जिम्बाब्वे आमने-सामने होंगे। कोलंबों के आर प्रेरदासा स्टेडियम में दोनों टीमें अपना आखिरी ग्रुप स्टे मुकाबला खेलेंगी। सुपर-8 के लिए क्वालीफाई कर चुकी दोनों टीमें ग्रुप बी में शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए जोर लगाएंगी। इसलिए ये मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है।ग्रुप बी में श्रीलंका फिलहाल शीर्ष स्थान पर काबिज है। श्रीलंका ने अपने तीन मैच जीते हैं और उसके 6 अंक हैं। श्रीलंका ने आयरलैंड को 20 रन से, ओमान को 105 रन से और ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से हराया है। जिम्बाब्वे के खिलाफ जीत हासिल कर श्रीलंका अपने शीर्ष स्थान को बरकरार रखने उतरेगी।जिम्बाब्वे ने विश्व कप में किया प्रभावी प्रदर्शनजिम्बाब्वे ने विश्व कप में अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया है। सिकंदर रजा की कप्तानी वाली इस टीम ने ग्रुप स्टेज के अपने शुरुआती 2 मैच जीते। ओमान के खिलाफ 8 विकेट से जीत हासिल करने वाली श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया को 23 रन से हराया था। आयरलैंड के खिलाफ मैच बारिश की वजह से धुल गया था। इस मैच से मिले 1 अंक लेकर कुल 5 अंक के साथ जिम्बाब्वे ग्रुप में दूसरे स्थान पर है। श्रीलंका के खिलाफ जीत हासिल कर जिम्बाब्वे 7 अंक के साथ ग्रुप में पहले स्थान पर रहते हुए सुपर-8 में प्रवेश करना चाहेगी।दोनों टीमों के बीच अब तक खेले गए 11 टी 20 मुकाबलेजिम्बाब्वे और श्रीलंका के बीच अब तक 11 टी20 मुकाबले खेले गए हैं। श्रीलंका ने 8 मैचों में जीत हासिल की है। जिम्बाब्वे 3 मैचों में विजयी रही है। जिम्बाब्वे के लिए इस विश्व कप में ब्रायन बेनेट श्रेष्ठ स्कोरर हैं। वे 2 पारियों में 112 रन बना चुके हैं। वहीं, ब्लेसिंग मुजरबानी 2 मैचों में 7 विकेट लेकर शीर्ष गेंदबाज हैं। श्रीलंका के खिलाफ टीम मैनेजमेंट और कप्तान रजा दोनों खिलाड़ियों से अपना फॉर्म बरकरार रखने की उम्मीद करेंगे। श्रीलंका को पथुम निसांका और कुसाल मेंडिस से एक बार फिर निर्णायक पारियों की उम्मीद रहेगी।

लाइफस्टाइल

न करें ये लापरवाही : प्रसव के बाद मां-बच्चे की सही देखभाल है जरूरी

प्रसव के बाद मां-बच्चे की सही देखभाल है जरूरी

नई दिल्ली । प्रसव के बाद का समय मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद नाज़ुक और महत्वपूर्ण होता है। डिलीवरी के बाद अक्सर ध्यान सिर्फ बच्चे पर चला जाता है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि अगर मां स्वस्थ रहेगी तभी शिशु की सही देखभाल संभव है। इस समय थोड़ी-सी लापरवाही आगे चलकर मां और बच्चे दोनों की सेहत पर भारी पड़ सकती है, इसलिए प्रसवोत्तर देखभाल को हल्के में नहीं लेना चाहिए। डिलीवरी के बाद मां का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। गर्भावस्था और प्रसव के दौरान शरीर की ताकत, खून और पोषक तत्व काफी हद तक कम हो जाते हैं। ऐसे में मां को पूरा आराम, सुकून भरा माहौल और परिवार का सहयोग मिलना बहुत जरूरी है। अत्यधिक काम करना, नींद पूरी न होने देना या मानसिक तनाव देना मां की रिकवरी को धीमा कर देता है। आयुर्वेद के अनुसार, इस समय मां को चिंता, डर और तनाव से दूर रखना चाहिए क्योंकि इसका सीधा असर दूध बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है।खान-पान की बात करें तो प्रसव के बाद हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन बहुत जरूरी होता है। हरी सब्जियां, दालें, दूध और दूध से बनी चीजें, थोड़ी मात्रा में घी, दलिया, खिचड़ी जैसे भोजन शरीर को ताकत देते हैं और पाचन भी ठीक रखते हैं। आयुर्वेद में मेथी, जीरा, सौंफ, अदरक और शतावरी को बहुत लाभकारी माना गया है। ये न सिर्फ शरीर की कमजोरी दूर करते हैं बल्कि मां के दूध की मात्रा बढ़ाने में भी मदद करते हैं। बहुत ठंडा, बासी या तला-भुना खाना इस समय नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए इससे बचना चाहिए।शारीरिक देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। डिलीवरी के बाद हल्की मालिश, गुनगुने पानी से स्नान और धीरे-धीरे किए गए हल्के व्यायाम शरीर को फिर से संतुलन में लाने में मदद करते हैं। पेट और कमर की मांसपेशियां धीरे-धीरे मजबूत होती हैं और दर्द में भी राहत मिलती है। लेकिन किसी भी तरह की जल्दबाजी या तेज एक्सरसाइज से बचना चाहिए।अक्सर लोग इस समय मां की भावनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जो गलत है। हार्मोनल बदलाव के कारण मां को उदासी, चिड़चिड़ापन या थकान महसूस हो सकती है। ऐसे में परिवार का प्यार, समझदारी और सहयोग बहुत मायने रखता है। अगर समय रहते सही देखभाल की जाए तो यह दौर मां और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित और सुखद बन सकता है।अब बात करें बच्चे की, तो जन्म के तुरंत बाद मां का पहला दूध (कोलोस्ट्रम) बच्चे के लिए अमृत के समान होता है। इसे किसी भी बच्चे को पिलाना चाहिए। पहले छह महीने तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध देना सबसे अच्छा माना जाता है। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वह स्वस्थ रहता है। बच्चे की साफ-सफाई, गर्माहट और समय-समय पर स्तनपान का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है।

राजनीती

टॉपलेस, ब्रेनलेस और शेमलेस बन चुकी है कांग्रेस : एआई समिट में यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन पर भाजपा का पलटवार, कहा- जेन-जी नहीं करेगा माफ

एआई समिट में यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन पर भाजपा का पलटवार, कहा- जेन-जी नहीं करेगा माफ

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे एआई शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय युवा कांग्रेस के नेताओं ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के बाद भाजपा ने कांग्रेस को आड़े हाथ लिया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने एआई समिट में यूथ कांग्रेस की ओर से किए गए विरोध प्रदर्शन को लेकर शुक्रवार को कहा कि भारत की जेन-जी कांग्रेस को नहीं माफ करेगी। उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर देश के युवाओं, खासकर जेन-जी में भारी नाराजगी है और जेन-जी कांग्रेस को कभी माफ नहीं करेगी। पात्रा ने कहा कि भारत की तकनीकी प्रगति, स्टार्टअप पारिस्थितिकी और युवाओं की क्षमता का मजाक उड़ाया गया है, जो देश के हितों के खिलाफ है।संबित पात्रा ने कांग्रेस की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी टॉपलेस, ब्रेनलेस और शेमलेस बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस यह समझने में भी असफल रही कि जिस एआई समिट में विरोध किया गया, वह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं बल्कि भारत का वैश्विक आयोजन था, जहां दुनिया भर के नेता मौजूद थे और भारत की उपलब्धियों की सराहना कर रहे थे।भाजपा प्रवक्ता ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि अतीत में जवाहरलाल नेहरू की एक तस्वीर सांप सपेरे के साथ दुनिया में भारत की अलग छवि पेश करती थी। उनके अनुसार, आज के विरोध प्रदर्शन के जरिए भी भारत की आधुनिक और उभरती तकनीकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। संबित पात्रा ने कहा कि भारत की उपलब्धियों पर सवाल उठाना और पाकिस्तान की प्रशंसा करना देशहित के विपरीत है। जब पूरी दुनिया भारत की सराहना कर रही थी, उस समय इस प्रकार का विरोध दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।बता दें कि दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान शुक्रवार को यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। समिट के बीच हुए इस प्रदर्शन से कार्यक्रम स्थल पर कुछ समय के लिए हलचल का माहौल बन गया। प्रदर्शन के दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने टी-शर्ट खोलकर नारेबाजी की और श्पीएम इज कंप्रोमाइजश् के नारे लगाए। जिस वक्त समिट में यह विरोध प्रदर्शन किया गया, उस समय वहां पर देश-विदेश के कई दिग्गज और प्रतिनिधि मौजूद थे।इसके बाद सुरक्षाकर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। सरकारी अधिकारियों, इंडस्ट्री के नेताओं और विदेशी डेलीगेट्स की भागीदारी वाले इस हाई-प्रोफाइल इंटरनेशनल इवेंट में इस तरह के प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रदर्शनकारियों को तुरंत हिरासत में लिया गया और जगह से दूर ले जाया गया।

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