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उपकार नहीं, सेवा करना हमारा धर्म : RSS चीफ ने मप्र से दिया संदेश, कहा - स्वयं के दु:ख के साथ समाज व देश का दु:ख दूर करना भारत का स्वभाव

 RSS चीफ ने मप्र से दिया संदेश, कहा  - स्वयं के दु:ख के साथ समाज व देश का दु:ख दूर करना भारत का स्वभाव

इंदौर/कसरावद । सभी परमेश्वर के स्वरूप है, अत: उपकार नहीं, सेवा करना हमारा धर्म है। हमारे यहां चैरिटी नहीं, अपितु सेवा है। जीवन में सेवा के जो भी अवसर मिलें, उसमें सेवा करना चाहिए। सेवा से हमारी शुद्धि होती हैं। जिसके पास जो हो, वो देना चाहिए। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनरावजी भागवत ने बुधवार को कसरावद के लेपा स्थित श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में आयोजित 'मनुष्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण विषय पर व्यक्त किए।डॉ. भागवत ने कहा कि मनुष्य देखकर ही सीखता है, सुनकर या बोलकर नहीं। भारत की यात्रा में यह सत्य सिद्ध हुआ कि सुख बाहर नहीं, अपितु मनुष्य के अंदर ही है। भारत में मनुष्य के अंदर की खोज की यात्रा प्रारंभ हुई। मनुष्य के अंदर की यात्रा से हमें शाश्वत सुख प्राप्त होता है। हमारे पूर्वजों ने अनुभव के आधार पर बताया कि माया का आधार अध्यात्म ही होना चाहिए। ईश्वर ने मनुष्य को संवेदना दी है। मनुष्य की संवेदना दूसरे के सुख-दु:ख को जानती है। किसी की उपेक्षा करके सुख भोगना, मनुष्य की संवेदना में नहीं है। जीवन मूल्यों के लिए जीवन में शिक्षा और शुचिता का आवश्यक है। मनुष्य को शिक्षा इसीलिए चाहिए कि उसे स्वयं का दु:ख दूर तो करना ही है, किंतु समाज और देश का भी दु:ख दूर करना है, यह स्वभाव भारत का स्वभाव है। ऐसा धर्म जब हमने दुनिया को दिया, तब भारत बना। परतंत्रता में भी हमारा स्वाभाव नहीं बदला।भारत का अर्थ स्वभाव हैभारतीय संदर्भों में शिक्षा के बारे में डॉ. भागवत ने कहा कि जन्मांतर का ज्ञान मनुष्य के मस्तिष्क में है, इसीलिए जो ज्ञान अंदर है, उसे बाहर निकालना चाहिए। टंट्या मामा और गाडगे महाराज जैसे महापुरुषों ने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी, किंतु आज भी उनका सम्मान है। हमारे अंदर दैवीय गुण निहित है, उन्हें बाहर निकालना होगा उसका ज्ञान प्राप्त करना होगा। मनुष्य को विश्व मानवता का ज्ञान दिलाने वाली शिक्षा, आत्मनिर्भर बनाने वाली शिक्षा, श्रम की प्रतिष्ठा वाली शिक्षा ही वास्तविक शिक्षा है। व्यक्ति की बजाय कर्म की मान्यता और परिणाम की बजाय प्रामाणिक और उत्कृष्ट कार्य करना, भारत का स्वभाव है। भारत का अर्थ केवल भूगोल नहीं, अपितु स्वभाव है। भारत की उन्नति का मतलब जल, जंगल, नदी, पहाड़, जानवर और मनुष्य सभी की उन्नति है। मंच पर भारती ताई ठाकुर, संस्था के उपाध्यक्ष महेश डाबक एवं संस्था के अध्यक्ष नीतीन करमलकर उपस्थित थे। कार्यक्रम में गोष्ट-नर्मदालयाची आडियोबुक का विमोचन भी हुआ।संस्थान 15 वर्षों से शिक्षा व कौशल विकास क्षेत्र में कार्य कर रहायह संस्थान पिछले 15 वर्षों से शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में कार्यरत है। श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 17-20 जनवरी को संपन्न हुआ, तत्पश्चात निकेतन और प्रकल्प के दर्शनार्थ पूजनीय सरसंघचालकजी का प्रवास लेपा में हो रहा है। संस्थान वनवासी क्षेत्रों के कुपोषित बच्चों को शिक्षा एवं कौशल विकास के कार्य करती है।निमाड़ अभ्युदय विद्यालय में 800 बच्चे अध्ययनरतसंस्थान वनवासी बच्चों के लिए कक्षा दसवीं तक एवं बेसिक रूरल टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा शिक्षा का प्रबंध कर रहा है। निमाड़ अभ्युदय के विद्यालयों में लगभग आठ सौ बच्चे अध्ययनरत है। अपनी नर्मदा परिक्रमा में वनवासी बच्चों का शिक्षा का संकल्प करने पर सुश्री भारती ठाकुर दीदी ने यह संस्थान प्रारंभ किया। रक्षा मंत्रालय की नौकरी छोड़ कर सुश्री भारती ठाकुर दीदी ने यह प्रकल्प प्रारंभ किया। दीदी को नागा साधु को पुनर्वास में मिला आश्रम दान में प्राप्त हुआ, जहां गौशाला सहित ये प्रकल्प चल रहा है।यह थे उपस्थितइस गरिमामय अवसर पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा ताई महाजन, प.पू. प्रतापे महाराज, भारती दीदी, मेवालाल पाटीदार, नितिन करमलकर, महेश दाबक, पद्मश्री महेश शर्मा, प्रांत प्रचारक राजमोहन तथा क्षेत्र प्रचारक स्वप्निल कुलकर्णी, प्रांत संघचालक डॉ. शास्त्री, प्रांत कार्यवाह विनित नवाथे, श्रीनाथ गुप्ता, राकेश भावसार, विकास दवे सहित कार्यक्रम में अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी एवं खरगोन जिलों से लगभग 300 गणमान्य अतिथि एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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आज की बुलेटिन 26 June

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आज की बुलेटिन 24 June

मनोरंजन

50 की उम्र में लीसा रे ने बदली 'बीच बॉडी' की परिभाषा, : बोलीं- 'अब मंजूरी नहीं, आजादी जरूरी'

बोलीं- 'अब मंजूरी नहीं, आजादी जरूरी'

मुंबई । फिल्म और फैशन की दुनिया में फिटनेस और लुक्स काफी मायने रखते हैं। ऐसे में एक्ट्रेसेस के लिए उम्र बढ़ने के साथ यह दबाव और भी बढ़ता जाता है, लेकिन कुछ अभिनेत्रियां ऐसी हैं, जिन्होंने इन दबावों को नहीं माना और अपनी शर्तों पर जिंदगी जीती हैं। अभिनेत्री लीसा रे उन्हीं में से एक हैं। 50 साल की उम्र में उन्होंने 'बीच बॉडी' की सोच को नए मायने दिए हैं और इसे आत्मस्वीकृति, आजादी और आत्मसम्मान से जोड़कर देखा है। लीसा रे ने बुधवार को इंस्टाग्राम पर बीच से अपनी कुछ तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों के कैप्शन में उन्होंने लिखा, ''एक समय था जब बीच पर खूबसूरत दिखने का मतलब एक तय इमेज से जोड़ा जाता था, रेड स्विमसूट, रेड लिपस्टिक और हर हाल में परफेक्ट दिखने का दबाव। साल 1991 के ग्लैडरैग्स कवर ने मेरी यही छवि लोगों के मन में बसा दी थी और इसी छवि के सहारे मैंने अपना करियर भी बनाया। लेकिन, आज मेरे लिए सबसे ज्यादा मायने आज रखती है।''उन्होंने आगे लिखा, ''शरीर समय के साथ बदला है, जिंदगी में उतार-चढ़ाव आए हैं, बीमारियों से लड़ी हूं और खुद को फिर से खड़ा किया है। अब दूसरों की मंजूरी से ज्यादा सुकून अपने आप को स्वीकार करने में मिलता है। उन असंभव सुंदरता मानकों से बाहर निकलना ही मुझे असली राहत है। ये मानक महिलाओं के लिए बनाए ही ऐसे गए थे कि उन्हें पूरा करना मुश्किल लगता है।'' लीसा रे ने हॉलीवुड अभिनेत्री पामेला एंडरसन का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "पामेला कभी रेड स्विमसूट में दिखाई देने वाली सबसे बड़ी फैंटेसी मानी जाती थीं। लेकिन आज वह खुद उस छवि को तोड़ चुकी हैं और अपनी पहचान खुद गढ़ रही हैं।"लीसा ने कहा, ''मुझे ग्लैमर या मेकअप से कोई परेशानी नहीं है। शूट, रील्स और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए सजना-संवरना मजेदार लगता है। बीच मेरे लिए वह जगह है, जहां मैं पूरी तरह नेचुरल रहना चाहती हूं।'' उन्होंने कहा, ''1990 के दशक में सनस्क्रीन का ज्यादा चलन नहीं था। मैं कई बार धूप में बुरी तरह झुलसी हूं। आज उसकी छाप मेरी त्वचा पर दिखती है। लेकिन यह मेरी कमजोरी नहीं है। यह सब उनकी जिंदगी का हिस्सा है और मैं इसके साथ पूरी तरह सहज हूं।''

बिज़नेस

चांदी ने खोई चमक, सोने के भाव भी पड़े फीके : सिल्वर 23,900 तो गोल्ड 5,700 रुपए फिर हुआ सस्ता

सिल्वर 23,900 तो गोल्ड 5,700 रुपए फिर हुआ सस्ता

मुंबई। सर्राफा बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। बजट में सोना और चांदी को लेकर कोई बड़ी या सीधी घोषणा नहीं की गई, इसके बावजूद कमोडिटी मार्केट में कीमती धातुओं पर दबाव साफ दिखा। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन, सोमवार को एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट देखी गई। चांदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से करीब 1.79 लाख तक टूट चुकी है, जबकि सोना भी फिसलकर करीब 1.37 लाख रुपए के स्तर पर आ गया है। बीते तीन दिनों से सोने-चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।2,41 लाख रुपए पर आई चांदी फिलहाल खबर लिखे जाने तक (सुबह 11.22 बजे) एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 5,719 रुपए यानी 4.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,36,498 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। तो वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 23,908 रुपए सस्ती होकर 2,41,744 लाख रुपए प्रति किलो पर आ गई, जिसमें करीब 9 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की मुनाफावसूली और कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते सर्राफा बाजार में दबाव बना हुआ है।4 फीसदी तक टूटा गोल्डअंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो सोमवार की शुरुआती ट्रेडिंग में स्पॉट गोल्ड करीब 4 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि चांदी में भी लगभग इतनी ही गिरावट देखने को मिली। हालांकि, पहले 12 प्रतिशत तक गिरने के बाद चांदी 80 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर टिकने में सफल रही। इससे पहले सत्र में चांदी ने पिछले 10 वर्षों की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट दर्ज की थी, जिससे बाजार में हलचल तेज हो गई।गिरावट के पीछे कई अहम वजहेंगिरावट के पीछे कई अहम वजहें मानी जा रही हैं। हाल ही में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं, जिसने बड़े और अनुभवी निवेशकों को भी हैरान कर दिया था। जनवरी में यह तेजी और बढ़ गई थी, जब वैश्विक तनाव, कमजोर होती मुद्राएं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर चिंताओं के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने-चांदी का रुख किया था।अमेरिका भी निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिकाहालिया गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से जुड़ी एक खबर को माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फेड चेयर के रूप में केविन वॉर्श को नामित करने की योजना बना रहे हैं। इस खबर के बाद अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जिससे कमजोर डॉलर की उम्मीद कर रहे ट्रेडर्स की धारणा बदल गई और सोने-चांदी में तेज बिकवाली देखने को मिली।

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#shorts 'घूसखोर पंडित’ बनकर लौटे मनोज बाजपेयी #breakingnews #news #newstoday #tv27newsdigital

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#video  मध्यप्रदेश में ठगी करने वाला शातिर चोर गिरफ्तार #tv27newsdigital #hindinews #breakingnews

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#shorts ऑस्ट्रेलिया में महात्मा गांधी की कांस्य प्रतिमा पर हमला #breakingnews   #tv27newsdigital

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खेल

टी20 वर्ल्ड कप 2026ः : टीम इंडिया के लड़ाकों में माही ने भरा जोश, बताया सबसे खतरनाक टीम भी

टीम इंडिया के लड़ाकों में माही ने भरा जोश, बताया सबसे खतरनाक टीम भी

नई दिल्ली। भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय टीम की संभावनाओं पर भरोसा जताया है। विश्व कप विजेता कप्तान का मानना है कि टीम इंडिया के पास अनुभव, कौशल और संतुलन का सही मिश्रण है। धोनी ने इस बात पर जोर दिया कि टीम की ताकत इस बात पर निर्भर करती है कि खिलाड़ी दबाव वाली स्थितियों को कितनी अच्छी तरह से संभालते हैं और उनका रोल कितने अच्छे से तय है। खिलाड़ी हमेशा मैच के लिए तैयार रहते हैं, चाहे वह बैटिंग हो या बॉलिंग, जिससे भारत को अपने प्रतिद्वंद्वियों पर एक महत्वपूर्ण बढ़त मिलती है।भारतीय टीम के पास है अनुभवधोनी ने कहा, यह सबसे खतरनाक टीमों में से एक है। आप जानते हैं, उन्होंने (भारतीय खिलाड़ी) पहले ही बैटिंग या बॉलिंग शुरू कर दी होगी, लेकिन एक अच्छी टीम में क्या चाहिए? सब कुछ है। उनके पास अनुभव है। खासकर जब इस फॉर्मेट की बात आती है, तो अनुभव बहुत ज्यादा है। उन्होंने दबाव में खेला है। जो भी खिलाड़ी टीम में जो भी भूमिका निभा रहे हैं, वे काफी समय से उस स्थिति में रहे हैं।टाॅस के फैसलों को महत्वपूर्ण बना सकती है ओसहालांकि धोनी आशावादी नजर आ रहे हैं, लेकिन उनका मानना है कि ओस व्हाइट-बॉल क्रिकेट में सबसे सावधानी से बनाई गई योजनाओं को भी खराब कर सकती है। माही के मुताबिक, ओस परिस्थितियों को काफी प्रभावित कर सकती है। टॉस के फैसलों को महत्वपूर्ण बना सकती है, जिससे मैचों में संभावित रूप से अनुचित फायदे हो सकते हैं।ओस बदल देती है बहुत सी चीजेंधोनी ने कहा, मुझे किस बात की चिंता है? मुझे ओस से नफरत है। ओस बहुत सी चीजें बदल देती है। इसलिए, जब मैं खेलता था, तो एक चीज जो मुझे सच में डराती थी, वह थी ओस। अगर हम कुछ बेहतरीन टीमों के साथ 10 मैच खेलते हैं, तो हम ज्यादातर बार विजेता बनकर उभरेंगे। अगर स्थितियां न्यूट्रल रहती हैं। चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व कप्तान ने यह भी बताया कि टी20 क्रिकेट अप्रत्याशित होता है, जहां एक खराब खेल या विपक्षी टीम का शानदार प्रदर्शन परिणाम को पूरी तरह से बदल सकता है। समस्या तब होती है जब कुछ खिलाड़ी अच्छा नहीं खेलतेपूर्व भारतीय कप्तान ने कहा, समस्या तब होती है जब आपके कुछ खिलाड़ी अच्छा नहीं खेलते और विपक्षी टीम का कोई खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन करता है। टी20 ग्रुप में ऐसा हो सकता है। तो, यही वह समय है। चाहे यह लीग स्टेज में हो, चाहे यह नॉकआउट स्टेज में हो, यहीं पर दुआओं की जरूरत होती है। आप जानते हैं, किसी को चोट नहीं लगनी चाहिए। जो भी भूमिकाएं दी गई हैं, लोगों को टीम के लिए अपनी भूमिकाएं निभानी चाहिए।

लाइफस्टाइल

सेहत : देसी घी में छिपा है सौंदर्य का खजाना, झुर्रियों और रूखी त्वचा से मिलेगी राहत

 देसी घी में छिपा है सौंदर्य का खजाना, झुर्रियों और रूखी त्वचा से मिलेगी राहत

नई दिल्ली। आयुर्वेद में शुद्ध घी को अमृत कहा जाता है क्योंकि ये सिर्फ मन के लिए ही लाभकारी नहीं होता है, बल्कि तन को भी अनगिनत फायदे देता है। आंतों की कब्ज दूर करने से लेकर घी हड्डियों को मजबूती देता है, लेकिन क्या आज जानते हैं कि देसी घी त्वचा के लिए कितना फायदेमंद है? घी त्वचा को अंदर से पोषण देता है, ड्राइनेस कम करता है और नेचुरल ग्लो लाने में मदद करता है। सही मात्रा में उपयोग करने से स्किन हेल्दी और एजिंग सपोर्टेड रहती है।आयुर्वेद में घी को शीतल, स्निग्ध और रसायन माना गया है। घी वात और कफ को संतुलित रखने में भी मदद करता है, जो त्वचा से जुड़े रोगों के पीछे की सबसे बड़ी वजह होती है। घी त्वचा को गहराई से पोषण देता है और गंदगी को खत्म कर चेहरे की मृत कोशिकाओं को हटाकर ग्लो लाने में भी मदद करता है। खास बात ये है कि घी में एजिंग को रोकने की क्षमता होती है। चेहरे पर आने वाली झुर्रियों को कम करने के लिए घी का सेवन करना लाभकारी रहेगा।देसी घी त्वचा को नरम बनाता है और सर्दियों में होने वाले रूखेपन से भी बचाता है, लेकिन घी के सेवन का तरीका और कुछ सावधानियां जाननी भी जरूरी हैं। पहले ये जानते हैं कि घी का इस्तेमाल कब और कैसे करना है। घी को सीमित मात्रा में भोजन में शामिल कर सकते हैं। सुबह और दोपहर के भोजन में घी का उपयोग आहार में किया जा सकता है। इसके अलावा, रात के समय घी को चेहरे के रूखे हिस्से पर भी लगाया जा सकता है।अब जानते हैं कि घी का प्रयोग करते हुए किन सावधानियों को बरतने की जरूरत है। अगर पाचन कमजोर है, तो एक सीमित मात्रा में ही घी का इस्तेमाल करें। अगर ऑयली स्किन है, तब भी घी का इस्तेमाल कम से कम करें क्योंकि ये मुहांसों और एक्ने का कारण बन सकता है। दिल से जुड़े रोगी और मधुमेह से पीड़ित लोगों को भी घी के सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। दिल से जुड़े रोगियों को कम चिकनाई खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि घी कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है, जो दिल के रोगी के लिए खतरा है।

राजनीती

पश्चिम बंगाल एसआईआर पर सुप्रीम सुनवाई : दीदी ने रखा अपना पक्ष, ईसी पर भी किया प्रहार, अब 9 को होगी सुनवाई

दीदी ने रखा अपना पक्ष, ईसी पर भी किया प्रहार, अब 9 को होगी सुनवाई

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर चल रहा विवाद सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है। यही नहीं बुधवार को इस विवाद पर सुनवाई भी हुई। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने की। इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वकीलों के बीच मौजूद थी। उन्होंने अदालत में अपनी बात रखने की कोशिश भी की। हालांकि बेंच ने इसकी अनुमति नहीं दी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी सोमवार को होगी. मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें पश्चिम बंगाल के अपने दो साथी न्यायाधीशों से जानकारी मिली, जिन्होंने पास प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया समझाई और इसी समझ के आधार पर इस मुद्दे को शामिल किया गया। मामले में सीएम ममता बनर्जी का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने बताया कि न्यायालय ने पहले तार्किक विसंगतियों की सूची प्रदर्शित करने का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि न्यायालय को सूचित किया गया था कि सूची संचार का एकमात्र माध्यम नहीं है और संबंधित व्यक्तियों को व्यक्तिगत नोटिस भी जारी किए जा रहे हैं।32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं- बंगाल सरकारअधिवक्ता श्याम दीवान ने न्यायालय से याचिकाकर्ता के संक्षिप्त नोट पर विचार करने का आग्रह किया और बताया कि इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए केवल चार दिन शेष हैं। उन्होंने कहा कि 32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं हैं, 1.36 करोड़ नाम तार्किक विसंगति सूची में हैं, और 63 लाख मामलों की सुनवाई अभी लंबित है। उन्होंने यह भी बताया कि 8,300 सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया है, जो संविधान के तहत परिकल्पित श्रेणी नहीं है। दीवान ने आगे कहा कि निवास प्रमाण पत्र, आधार और ओबीसी प्रमाण पत्र सहित कई स्वीकृत दस्तावेजों को अस्वीकार किया जा रहा है, जिससे लोगों को चार से पांच घंटे तक कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।चुनाव आयोग पर ममता के आरोपवहीं ममता बनर्जी ने कहा कि वह न्याय के लिए अदालत आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने चुनाव आयोग को तमाम फैक्ट्स बताए थे, लेकिन उन्हें नहीं सुना गया। इस पर सीजेआई ने साफ किया कि आपकी नई याचिका में कुछ नए मुद्दे जरूर हैं, लेकिन जो बातें आप कह रही हैं, वे आपके वकील पहले ही अदालत के सामने रख चुके हैं.वोटर्स के नाम हटाए जा रहे हैंः ममता बनर्जीसुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने रवींद्रनाथ टैगोर की स्पेलिंग में बदलावों का जिक्र करते हुए लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और राज्य में बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।सिर्फ नाम हटाने के लिए हो रहा एसआईआर का इस्तेमालः ममतामुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह ठोस उदाहरण दे रही हैं और प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित तस्वीरें भी दिखा सकती हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया का उपयोग केवल नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उदाहरण देते हुए, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि जब कोई बेटी शादी के बाद अपने ससुराल जाती है, तो सवाल उठते हैं कि वह अपने पति का उपनाम क्यों इस्तेमाल कर रही है। उनके अनुसार, ऐसी कई महिलाओं के नाम एकतरफा तरीके से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि फ्लैट खरीदने या निवास स्थान बदलने वाले गरीब लोगों के नाम भी हटाए जा रहे हैं। सीएम ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इन परिस्थितियों के बावजूद, अधिकारी ऐसे मामलों को श्गलत मानचित्रणश् बताकर अदालत के पूर्व निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं।ममता ने चुनाव आयोग को व्हाट्सएप आयोग कहासुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को श्व्हाट्सएप आयोगश् कहा और कहा कि चुनाव आयोग व्हाट्सएप के माध्यम से अनौपचारिक आदेश जारी कर रहा था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस दौरान कहा कि चार राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, 24 साल बाद, तीन महीने में यह सब करने की क्या जल्दी थी? जब फसल कटाई का मौसम चल रहा है...जब लोग यात्रा कर रहे हैं...100 से अधिक लोग मारे गए! बीएलओ की मौत हो गई, कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं। एसआईआर असम क्यों नहीं किया जा रहा है? मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगे कहा कि 58 लाख नाम काट दिए गए, उनके पास अपील करने का विकल्प नहीं था। केवल बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है - पश्चिम बंगाल के लोगों को कुचलने के लिए। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि शायद अधिकारियों की उपलब्धता के बाद सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की आवश्यकता नहीं होगी। इस पर चुनाव आयोग से मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अपने अधिकारियों को भी बताएं कि वे संवेदनशील रहें और नोटिस जारी न करें...बंगाल एसआईआर पर 9 फरवरी को सुनवाई, सीएम ने जताया आभारमुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एक व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकता है और निर्देश दिया कि सोमवार तक राज्य को ग्रुप बी के उन अधिकारियों की सूची प्रस्तुत करनी चाहिए जिन्हें कार्यमुक्त किया जा सकता है और उपलब्ध कराया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने दोनों याचिकाओं पर नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि एक अन्य याचिका भी है जिसमें भारत निर्वाचन आयोग पहले ही हलफनामा दाखिल कर चुका है और उसमें उठाए गए मुद्दे वर्तमान मामले से संबंधित होंगे। मुख्य न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि उक्त मामले पर भी सोमवार को सुनवाई की जाए और कहा कि न्यायालय उस दिन इससे संबंधित सभी मुद्दों पर सुनवाई करेगा। सीएम ममता बनर्जी ने न्यायालय से जनता के अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया और पीठ के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ को बहस का अवसर देने के लिए शुभकामनाएं दीं और सर्वोच्च न्यायालय से लोकतंत्र को बचाने का आग्रह किया।

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