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प्यार और बदले की आग में तपती 'ओ रोमियो' : शाहिद कपूर के दमदार अभिनय ने जीता दर्शकों का दिलपवन सिंह ने नहीं किया सपोर्ट : रियलिटी शो द 50 से बाहर आई डिंपल सिंह ने उठाए सवालटी20 विश्व कप 2026 : नामीबिया के खिलाफ तूफानी पारी खेलकर ईशान ने जाहिर किए ईरादे, पाकिस्तान को किया आगाहसर्राफा बाजार में उथल-पुथल का दौर : गिरावट के बाद फिर संभली कीमती धातुएं, जाने सोना-चांदी के ताजा भाव

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वेस्ट मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को नहीं करते मजबूत : भोपाल नगर निगम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, जानें क्या है पूरा मामला

भोपाल नगर निगम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, जानें क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली-भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों में बार-बार बदलाव करने से जमीनी हकीकत में तब तक सुधार नहीं होगा, जब तक अधिकारी आने वाले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2026 के हिसाब से वेस्ट मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत नहीं करते। जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने भोपाल नगर निगम द्वारा दायर उन अपीलों की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिनमें राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल द्वारा लगाए गए भारी पर्यावरणीय मुआवजे को चुनौती दी गई थी। ग्रीन ट्रिब्युनल ने अपने 31 जुलाई 2023 और 11 अगस्त 2023 के विवादित आदेशों के माध्यम से, नगर निकाय को क्रमशः 1.80 करोड़ रुपए और 121 करोड़ रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा देने का निर्देश दिया था।सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में नगरपालिका अपशिष्ट प्रबंधन को नियंत्रित करने वाली विकसित हो रही वैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कहा कि नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (प्रबंधन और संचालन) नियम, 2000 को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था, जिसे अब ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाला है, हालांकि जस्टिस मिथल की अध्यक्षता वाली पीठ ने जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में मौजूद कमियों पर चिंता व्यक्त की।आदेश में कहा गया है, ष्अदालत का मानना है कि जमीनी स्तर पर कई कारकों के कारण वैधानिक तंत्र वांछित परिणाम नहीं दे रहा है।ष्नए नियमों की शुरुआत को ष्स्वागत योग्य कदमष् बताते हुए शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि जब तक समय पर प्रारंभिक कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक नए नियमों की मात्र अधिसूचना पर्याप्त नहीं होगी। पीठ ने टिप्पणी की, नए नियमों की शुरुआत एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रभावी तिथि से पहले आवश्यक कार्य पूरा कर लें, अन्यथा 2026 के नियम जमीनी हकीकत में सुधार नहीं ला पाएंगे।पीठ ने पक्षकारों के वकीलों की बातों को विस्‍तार से सुनने के बाद अपीलकर्ता निगम को दोनों अपीलों में केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश देकर कार्यवाही के दायरे को व्यापक बनाने का प्रस्ताव रखा।इसमें निर्देश दिया गया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव, मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश के शहरी विकास और आवास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और मध्य प्रदेश के आवास और पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव को प्रतिवादी के रूप में जोड़ा जाए।सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया, अपीलकर्ता को निर्देश दिया जाता है कि वह संशोधन करे और सुनवाई के अगले दिन या उससे पहले संशोधित कारण शीर्षक प्रस्तुत करे।ष् अपीलकर्ता के वकील को भारत संघ के केंद्रीय एजेंसी अनुभाग को अपील की प्रतियां सौंपने की अनुमति भी दी गई। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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मनोरंजन

प्यार और बदले की आग में तपती 'ओ रोमियो' : शाहिद कपूर के दमदार अभिनय ने जीता दर्शकों का दिल

शाहिद कपूर के दमदार अभिनय ने जीता दर्शकों का दिल

फिल्म 'ओ रोमियो' इन दिनों सिनेमाघरों में दर्शकों का ध्यान खींच रही है। प्यार और बदले की भावना से बुनी यह फिल्म सच्ची घटनाओं से प्रेरित है। फिल्म की कहानी में प्यार, दर्द, गुस्सा, जज्बात और इंसानी रिश्तों की कई परतें दिखाई गई हैं। निर्माता साजिद नाडियाडवाला ने कहानी और किरदारों को सोच-समझकर पेश किया है। फिल्म में शाहिद कपूर, तृप्ति डिमरी, अविनाश तिवारी, नाना पाटेकर और फरीदा जलाल मुख्य भूमिकाओं में हैं। इसके अलावा दिशा पाटनी, तमन्ना भाटिया और विक्रांत मैसी स्पेशल अपीयरेंस में हैं।फिल्म का निर्देशन विशाल भारद्वाज ने किया है, जिन्होंने कहानी को संतुलित रखा है। छोटे-छोटे सीन, कैमरे की पकड़ और भावनाओं की गहराई यह दिखाती है कि हर सीन पर बारीकी से काम किया गया है। फिल्म के एक्शन सीन बेहद दमदार हैं। शाहिद कपूर और अविनाश तिवारी के एक्शन सीन दर्शकों को बांधे रखते हैं। वहीं तृप्ति डिमरी भी एक्शन में चौंकाती हैं। फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है।फिल्म का हर कलाकार अपने किरदार में पूरी तरह फिट बैठता है। शाहिद कपूर का किरदार उस्तारा उनके करियर के बेहतरीन रोल्स में से एक माना जा रहा है। उनका अभिनय बेहद प्रभावशाली है। तृप्ति डिमरी का रोल अफशां अपनी मासूमियत और बदले की आग, दोनों को बखूबी दिखाती हैं। अविनाश तिवारी ने जलाल के रूप में दर्शकों को चौंका दिया है। उनका लुक, सिर पर बना टैटू और सख्त अंदाज किरदार को डरावना बनाता है। उनका अभिनय इतना अलग है कि कई जगह पहचानना मुश्किल हो जाता है। शाहिद और तृप्ति की जोड़ी नई होते हुए भी स्वाभाविक लगती है।वहीं नाना पाटेकर और फरीदा जलाल जैसे अनुभवी कलाकार फिल्म में जान डाल दिखते हैं। नाना पाटेकर के डायलॉग्स सीधे दर्शकों पर गहरा असर छोड़ते हैं, वहीं फरीदा जलाल की दमदार लाइन्स फिल्म को मजबूती देती हैं। फिल्म में हास्य सीन्स भी रखे गए हैं, लेकिन उन्हें बेहद समझदारी से जोड़ा गया है। हास्य कहानी की गंभीरता को तोड़ता नहीं, बल्कि कुछ पलों के लिए राहत देता है। संगीत फिल्म की एक और बड़ी खासियत है। विशाल भारद्वाज का संगीत भावनाओं को और गहरा करता है। गाने कहानी के साथ चलते हैं। 'आशिकों की कॉलोनी' और 'पान की दुकान' जैसे गाने फिल्म में एनर्जी लाते हैं।डांस नंबर में दिशा पाटनी और शाहिद कपूर की केमिस्ट्री खास तौर पर ध्यान खींचती है। दोनों का डांस दर्शकों को काफी पसंद आ रहा है। निर्माता साजिद नाडियाडवाला ने इस फिल्म के साथ अपनी शानदार फिल्मों की लिस्ट में एक और मजबूत नाम जोड़ दिया है। इससे पहले वे 'छिछोरे', '83', 'तमाशा', और 'चंदू चैंपियन' जैसी यादगार फिल्में दे चुके हैं। 'ओ रोमियो' उनकी उसी सोच और सिनेमाई दृष्टि को आगे बढ़ाती है।

बिज़नेस

न लोन महंगे होंगे और न ही ईएमआई पर पड़ेगा असर : आरबीआई गवर्नर ने एमपीसी की बैठक में लिए गए फैसलों पर दिया अपडेट

आरबीआई गवर्नर ने एमपीसी की बैठक में लिए गए फैसलों पर दिया अपडेट

नई दिल्ली। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को को मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग में लिए फैसलों की जानकारी शेयर कर दी है। आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। इसे 5.25 फीसदी पर यथावत रखा गया है। ऐसे में न लोन महंगे होंगे और न ही ईएमआई पर कोई असर पड़ेगा। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने कहा कि मॉनिटरी पॉलिसी की बैठक में रेपो रेट को नहीं बदलने का फैसला किया हैबता दें कि केंद्रीय बजट 2026 और हाल ही में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद यह पहली नीतिगत समीक्षा है, जिस पर दलाल स्ट्रीट और आर्थिक जगत की निगाहें टिकी थी। आरबीआई ने इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे यथास्थिति बनाए रखा है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि जहां ग्‍लोबल लेवल पर अनिश्चितता फैली हुई है, वहीं भारत में महंगाई पूरी तरह से कंट्रोल है। महंगाई दर आरबीआई के सीमा से नीचे बना हुआ है। महंगाई दर 4 फीसदी के आसपास बना हुआ है, जिसका मतलब है कि हमारी इंडस्‍ट्री और देश पर महंगाई का ज्‍यादा भार नहीं है।आरबीआई गवर्नर ने जोर देकर कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और घरेलू मुद्रास्फीति व विकास का परिदृश्य सकारात्मक है। गवर्नर ने यह भी साफ किया कि भविष्य में मौद्रिक नीति संशोधित शृंखला पर आधारित नए मुद्रास्फीति आंकड़ों से निर्देशित होगी। इससे पहले साल 2025 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने उदार रुख अपनाते हुए रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की बड़ी कटौती की थी। दिसंबर 2025 में हुई साल की अंतिम मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट और घटा दिया गया, जिससे यह 5.5% से घटकर 5.25% पर आ गया था। 2026 की पहली एमपीसी के बाद मांग व खपत पर गवर्नर क्या बोले?अर्थव्यवस्था के चालकों पर प्रकाश डालते हुए गवर्नर ने कहा कि कॉरपोरेट प्रदर्शन में सुधार और अनौपचारिक क्षेत्र में निरंतर गति से विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। मांग के मोर्चे पर, ग्रामीण मांग स्थिर बनी हुई है, जबकि शहरी खपत में और वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके अलावा, गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता और संभावित भारत-अमेरिका व्यापार सौदा निर्यात की गति को मजबूत समर्थन प्रदान करेंगे।आर्थिक अनुमानों पर क्या बोले गवर्नर?आरबीआई गवर्नर ने भविष्य के आर्थिक परिदृश्य पर भरोसा जताते हुए अगले वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के लिए विकास दर के अनुमान को संशोधित कर बढ़ा दिया है, जिसके क्रमशः 6.9 फीसदी और 7 फीसदी रहने की उम्मीद है। महंगाई के मोर्चे पर, चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति 2.1 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इसके 4 फीसदी और दूसरी तिमाही में 4.2 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है। वैश्विक हालात के बारे में बोलते हुए गवर्नर ने कहा कि जनवरी के अंत तक विदेशी मुद्रा भंडार 723.8 अरब डॉलर के बहुत ही स्वस्थ स्तर पर है और चालू वित्त वर्ष में चालू खाता घाटा भी श्मध्यमश् रहने की उम्मीद है।

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#shorts यूपी का बजट जन आकांक्षाओं के अनुरूप होगा #hindinews #newstoday #breakingnews #news #viral

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खेल

टी-20 वल्र्ड कपः हाईवोल्टेज मुकाबले से पहले जुबानी जंग तेज : पाकिस्तान से जुड़े विवाद पर श्रीकांत ने नासिर को दिखाया आइना

पाकिस्तान से जुड़े विवाद पर श्रीकांत ने नासिर को दिखाया आइना

नई दिल्ली। टी-20 विश्व कप 2026 में 15 फरवरी को भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। इस बीच पाकिस्तान के टी20 विश्व कप 2026 से जुड़े विवाद पर इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन की टिप्पणी के पर भारतीय क्रिकेट के पूर्व सलामी बल्लेबाज क्रिस श्रीकांत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। श्रीकांत ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, 2003 विश्व कप के दौरान नासिर हुसैन इंग्लैंड के कप्तान थे। इंग्लैंड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जिम्बाब्वे और केन्या जाने से इनकार कर दिया था। उस फैसले के चलते इंग्लैंड को टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा और केन्या क्वार्टर फाइनल में पहुंच गया। उस समय इंग्लैंड ने अपने फैसले लिए थे। अब वे सवाल क्यों उठा रहे हैं? आपका एक नियम है और हमारा एक नियमकृऐसा नहीं चल सकता।उस समय इंग्लैंड का दबदबा था, आज है भारत काउन्होंने यह भी कहा कि आईसीसी की आय का बड़ा हिस्सा भारतीय दर्शकों से आता है, इसलिए भारत को कुछ मामलों में प्रभावशाली माना जाता है। हर दौर में किसी न किसी टीम का प्रभाव रहता है। उस समय इंग्लैंड का दबदबा था, आज भारत का है। श्रीकांत ने पाकिस्तान के भारत के साथ खेलने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, मुझे खुशी है कि पाकिस्तान खेलने के लिए तैयार हो गया है। यह विश्व क्रिकेट के लिए बेहद जरूरी है। भारत-पाकिस्तान मुकाबला सिर्फ खेल नहीं, बल्कि करोड़ों दर्शकों की भावनाओं से जुड़ा होता है।पाकिस्तान मैच नहीं खेलता तो उसे होता भारी नुकसानउन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान मैच नहीं खेलता तो उसे सबसे अधिक नुकसान होता। ऐसे फैसलों से किसी एक देश को अलग-थलग पड़ने का खतरा रहता है, इसलिए खेल को राजनीति से ऊपर रखना जरूरी है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब बांग्लादेश के टूर्नामेंट से हटने के बाद पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ ग्रुप-स्टेज मैच का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी थी। हालांकि, बाद में पाकिस्तान सरकार ने अपना रुख बदलते हुए टीम को खेलने की अनुमति दे दी।नासिर हुसैन ने इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) का प्रभाव है और सभी टीमों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।

लाइफस्टाइल

खतरे की घंटी है बढ़ते ट्राइग्लिसराइड का स्तर : जानें क्या है बचने के लिए जरूरी कदम

 जानें क्या है बचने के लिए जरूरी कदम

नई दिल्ली। शरीर को ऊर्जा देने के लिए वसा बहुत जरूरी है। वसा ही शरीर में ऊर्जा के रूप में परिवर्तित होकर काम करने की क्षमता को बढ़ाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही वसा जब रक्त में बढ़ जाती है तो ट्राइग्लिसराइड का स्तर बढ़ जाता है और यह पूरे शरीर के लिए खतरे की घंटी है। ट्राइग्लिसराइड का स्तर बढ़ना, मधुमेह, मोटापा, जोड़ों का दर्द और दिल की बीमारियों की शुरुआत है।आमतौर पर लोग ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल को एक ही मानकर चलते हैं, लेकिन ये दोनों रक्त में पाए जाने वाले दो अलग फैट्स हैं। ट्राइग्लिसराइड शरीर की कोशिकाओं में जमा होता है और शरीर को ऊर्जा देने का काम करता है। रक्त में मौजूद ट्राइग्लिसराइड का सही स्तर गुड कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखता है, शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस को बैलेंस करता है, शरीर के अंदर की इन्फ्लेमेशन को कम करता है, और मेटाबॉलिज्म को मजबूत करने में मदद करता है, जबकि कोलेस्ट्रॉल कोशिकाओं के निर्माण, हार्मोन और विटामिन बनाने में मदद करता है।अब जानते हैं कि शरीर में क्यों बढ़ता है ट्राइग्लिसराइड। ट्राइग्लिसराइड के बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। सामान्यत: शरीर में ट्राइग्लिसराइड का स्तर 150 एमजी/डीएल होना चाहिए। अगर स्तर ज्यादा है तो सावधानी बरतनी जरूरी है। यह मुख्यत: जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाने, मोटापा अधिक होने, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी और शराब और तंबाकू के सेवन से होता है। ये सभी कारण ट्राइग्लिसराइड के स्तर को बढ़ाने में मदद करते हैं।ट्राइग्लिसराइड पर डॉक्टर दवा से स्तर को नीचे लाने का काम करते हैं, लेकिन आयुर्वेद में मौजूद कुछ तरीकों से ट्राइग्लिसराइड को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले आहार में कार्बोहाइड्रेट कम करें। अगर आप शारीरिक मेहनत कम करते हैं तो कार्बोहाइड्रेट कम खाएं। कार्बोहाइड्रेट गेहूं, चावल, ज्वार, बाजरा, रागी और मिलेट में भी पाया जाता है।दूसरा, आहार में हेल्दी फैट्स को शामिल करें। जैसे देसी घी, मक्खन, सरसों का तेल, और एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल को आहार में शामिल कर सकते हैं। इसके साथ ही कम से कम 1 घंटा शारीरिक व्यायाम भी जरूरी है। रोजाना वॉक से लेकर एक्सरसाइज जरूर करें। बार-बार खाने की आदत भी ट्राइग्लिसराइड के स्तर को बढ़ाने में मदद करती है। इसलिए इंटरमिटेंट फास्टिंग करें। रोजाना खुद को 14-16 घंटे भूखा रखें।

राजनीती

वेस्ट मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को नहीं करते मजबूत : भोपाल नगर निगम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, जानें क्या है पूरा मामला

भोपाल नगर निगम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, जानें क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली-भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों में बार-बार बदलाव करने से जमीनी हकीकत में तब तक सुधार नहीं होगा, जब तक अधिकारी आने वाले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2026 के हिसाब से वेस्ट मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत नहीं करते। जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने भोपाल नगर निगम द्वारा दायर उन अपीलों की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिनमें राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल द्वारा लगाए गए भारी पर्यावरणीय मुआवजे को चुनौती दी गई थी। ग्रीन ट्रिब्युनल ने अपने 31 जुलाई 2023 और 11 अगस्त 2023 के विवादित आदेशों के माध्यम से, नगर निकाय को क्रमशः 1.80 करोड़ रुपए और 121 करोड़ रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा देने का निर्देश दिया था।सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में नगरपालिका अपशिष्ट प्रबंधन को नियंत्रित करने वाली विकसित हो रही वैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कहा कि नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (प्रबंधन और संचालन) नियम, 2000 को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था, जिसे अब ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाला है, हालांकि जस्टिस मिथल की अध्यक्षता वाली पीठ ने जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में मौजूद कमियों पर चिंता व्यक्त की।आदेश में कहा गया है, ष्अदालत का मानना है कि जमीनी स्तर पर कई कारकों के कारण वैधानिक तंत्र वांछित परिणाम नहीं दे रहा है।ष्नए नियमों की शुरुआत को ष्स्वागत योग्य कदमष् बताते हुए शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि जब तक समय पर प्रारंभिक कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक नए नियमों की मात्र अधिसूचना पर्याप्त नहीं होगी। पीठ ने टिप्पणी की, नए नियमों की शुरुआत एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रभावी तिथि से पहले आवश्यक कार्य पूरा कर लें, अन्यथा 2026 के नियम जमीनी हकीकत में सुधार नहीं ला पाएंगे।पीठ ने पक्षकारों के वकीलों की बातों को विस्‍तार से सुनने के बाद अपीलकर्ता निगम को दोनों अपीलों में केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश देकर कार्यवाही के दायरे को व्यापक बनाने का प्रस्ताव रखा।इसमें निर्देश दिया गया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव, मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश के शहरी विकास और आवास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और मध्य प्रदेश के आवास और पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव को प्रतिवादी के रूप में जोड़ा जाए।सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया, अपीलकर्ता को निर्देश दिया जाता है कि वह संशोधन करे और सुनवाई के अगले दिन या उससे पहले संशोधित कारण शीर्षक प्रस्तुत करे।ष् अपीलकर्ता के वकील को भारत संघ के केंद्रीय एजेंसी अनुभाग को अपील की प्रतियां सौंपने की अनुमति भी दी गई। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।

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