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प्रयागराजः BSNL निदेशक को VIP ट्रीटमेंट मिलने पर भड़के सिंधिया : कहा- ऐसा आचरण अस्वीकार्य, नोटिस देकर 7 दिन में मांगा जवाब

कहा- ऐसा आचरण अस्वीकार्य, नोटिस देकर 7 दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भारत संचार निगम लिमिटेड के निदेशक विवेक बंसल की प्रस्तावित यात्रा के दौरान वीआईपी ट्रीटमेंट का खुलासा होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को विवेक बंसल को वीआईपी ट्रीटमेंट मिलने को अनुचित और नियमों का उल्लंघन बताया। साथ ही कहा कि ऐसा आचरण अस्वीकार्य और हैरान करने वाला है। उन्होंने यह भी बताया कि इस कार्य के लिए अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सिंधिया ने कहा कि यह घटना स्थापित नियमों और परंपराओं का उल्लंघन है। सिंधिया ने कहा,“कल मीडिया ने मुझसे कुछ सवाल पूछे और मैंने साफ कर दिया है कि यह अनुचित है और स्थापित नियमों और परंपराओं का उल्लंघन है। यह मुझे बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। यह बेहद हैरान करने वाला है।” उन्होंने आगे कहा,“निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है और उन्हें सात दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है। हम उचित कार्रवाई करेंगे।”सिंधिया ने आगे इस बात पर जोर दिया कि आज के दौर में अधिकारियों के लिए किसी भी प्रकार का रॉयल ट्रीटमेंट अकल्पनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उप महाप्रबंधक द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, यात्रा से जुड़े 21 अलग-अलग कार्यों के प्रबंधन के लिए दो दिनों में लगभग 50 कर्मचारियों को तैनात किया गया था।रिपोर्ट के अनुसार, मिनट-दर-मिनट की योजना में नौका विहार, मंदिर दर्शन, त्रिवेणी संगम में स्नान और तौलिये, तेल, कंघी और यहां तक ​​कि अंतर्वस्त्रों से युक्त स्नान किट की तैयारी शामिल थी। अधिकारियों को सूट की व्यवस्था करना, तस्वीरें खींचना, परिवहन का प्रबंध करना और वाहनों में पानी की बोतलें, चॉकलेट, चिप्स और अन्य पेय पदार्थ रखना जैसे काम भी सौंपे गए थे।इस निजी यात्रा से जुड़े दस्तावेज सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया और लोग इसकी खुलकर आलोचना कर रहे हैं। विवाद सामने आने के तुरंत बाद, बंसल की यात्रा रद्द कर दी गई। बता दें, सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल ने पिछली तिमाही में 1,300 करोड़ रुपए से अधिक का घाटा दर्ज किया था। हालांकि, कंपनी का इसे लेकर कोई बयान सामने नहीं आया है।

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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मनोरंजन

खुशी में वादे न करो और दुख में फैसला न करो : एक्ट्रेस भाग्यश्री ने बताया जिंदगी को आसान बनाने का फंडा

 एक्ट्रेस भाग्यश्री ने बताया जिंदगी को आसान बनाने का फंडा

मुंबई । अभिनेत्री भाग्यश्री अपनी शानदार अदाकारी और सकारात्मक सोच के लिए फैंस के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज करवाती रहती हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम के जरिए जिंदगी को खुलकर जीने की सलाह दी। उन्होंने एक वीडियो पोस्ट कर कैप्शन लिखा, "जिंदगी के आसान फंडे खुशी में वादे न करो, दुख में फैसला न करो, गुस्से में जवाब न दो और किसी के दर्द का कारण न बनो। ये जीवन को सही तरीके से जीने के लिए कुछ आसान उसूल हैं।उन्होंने लिखा, "जिंदगी के आसान सूत्र। कभी-कभी सबसे सरल चीजें भी मुश्किल हो जाती हैं, जब हम जरूरत से ज्यादा करने की कोशिश करते हैं। इससे यह सीख मिलती है कि किसी काम को तभी करें जब हमारा मन शांत और संतुलित हो।" भाग्यश्री सोशल मीडिया पर इस तरह के वीडियो पोस्ट कर सकारात्मकता फैलाती हैं। उन्होंने अपने इस वीडियो के माध्यम से समझाया है कि जीवन में असली खुशी और मजबूती अंदर के विचारों से आती हैं, न की बाहरी दिखावे से।फैंस उनके पोस्ट को काफी पसंद कर रहे हैं। साथ ही, उनके इस मैसेज से अपनी सहमति जाहिर कर रहे हैं। भाग्यश्री ने भले ही फिल्मों में कम काम किया हो, लेकिन अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास पहचान बनाई है। पहली फिल्म मैंने प्यार किया में काम कर उन्होंने अपनी सादगी से दर्शकों का ध्यान खींचा था। वह फिल्म की रिलीज के बाद रातों रात स्टार बन गई थीं। हालांकि इससे पहले वे टीवी सीरियल 'कच्ची धूप' में नजर आ चुकी थीं।आगे चलकर उन्होंने हिमालय दसानी से शादी की थी और परिवार को प्राथमिकता देते हुए सिनेमा से ब्रेक ले लिया था। भाग्यश्री ने हमेशा अपनी शर्तों पर काम किया है। अब वह 'थलाइवी', 'राधे श्याम' और 'किसी का भाई किसी की जान' जैसी हिंदी फिल्मों में सहायक भूमिकाओं के साथ सक्रिय हैं।

बिज़नेस

जनवरी में सब्जियों के भाव रहे नरम : वेज थाली की कीमतों में आई एक फीसदी की गिरावट, मांसाहारी थाली के भाव भी गिरे

वेज थाली की कीमतों में आई एक फीसदी की गिरावट, मांसाहारी थाली के भाव भी गिरे

नई दिल्ली। घर में बनी शाकाहारी थाली और मांसाहारी थाली की कीमत में जनवरी में सालाना आधार पर कमी देखी गई है। इसकी वजह सब्जियों और दालों की कीमतों में कमी आना है। यह जानकारी मंगलवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई। क्रसिल इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में शाकाहारी थाली की कीमत में पिछले वर्ष की तुलना में एक प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि मांसाहारी थाली की कीमत में सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।शाकाहारी थाली की कीमत में गिरावट का मुख्य कारण प्याज, आलू और दालों की कीमतों में आई भारी कमी थी। ालांकि, क्रिसिल के नवीनतम मासिक खाद्य लागत संकेतक के अनुसार, टमाटर की कीमतों में वृद्धि ने समग्र राहत को सीमित कर दिया। रपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 में टमाटर की कीमत 31 रुपए प्रति किलोग्राम थी, जो जनवरी 2026 में बढ़कर 46 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई, यानी इसमें वार्षिक आधार पर 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई।यह वृद्धि इस महीने आवक में 39 प्रतिशत की कमी के कारण हुई, हालांकि यह वृद्धि पिछले वर्ष के कम आधार पर हुई। इसके विपरीत, प्याज की कीमतों में वार्षिक आधार पर 27 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसका कारण अधिक स्टॉक उपलब्धता और निर्यात में कमी थी। आलू की कीमतों में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है क्योंकि पिछली फसल में कम पैदावार के कारण कीमतें बढ़ गई थीं, जिससे उच्च आधार प्रभाव पैदा हुआ था।

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खेल

स्क्वैश : 18-22 मार्च तक खेला जाएगा इंडियन ओपन, ब्रेबोर्न स्टेडियम में होंगे मुकाबले

18-22 मार्च तक खेला जाएगा इंडियन ओपन, ब्रेबोर्न स्टेडियम में होंगे मुकाबले

मुंबई । इंडियन ओपन 18 से 22 मार्च के बीच सीसीआई ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेला जाएगा। यह एक पीएसए कॉपर इवेंट है, जिसकी टिकट अब लाइव हैं। प्रोफेशनल स्क्वैश एसोसिएशन (पीएसए) से मान्यता प्राप्त, यह टूर्नामेंट अपने 2025 एडिशन की सफलता को आगे बढ़ा रहा है, जिसे साल के टॉप 10 आइकॉनिक पीएसए इवेंट्स में से एक चुना गया था।2026 एडिशन में डिफेंडिंग महिला चैंपियन अनाहत सिंह इवेंट में नजर आएंगी। लाइनअप में भारत के टॉप खिलाड़ी भी शामिल हैं, जैसे रमित टंडन, अभय सिंह, वीर चोटरानी, ​​वेलावन सेंथिलकुमार और जोशना चिनप्पा। इनके साथ याह्या एलनवासनी, हाना मोआताज और माजेन हेशाम जैसे इंटरनेशनल कंटेंडर भी शामिल हैं। इस प्रतियोगिता के साथ वर्ल्ड-क्लास स्क्वैश का एक बहुत प्रतिस्पर्धी हफ्ता शुरू होगा। टूर्नामेंट में पुरुषों और महिलाओं दोनों के इवेंट्स के लिए 44,500 यूएस डॉलर प्राइज मनी होगी।स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी जनरल साइरस पोंचा ने कहा, "इंडियन ओपन तेजी से पीएसए कैलेंडर का एक अहम पड़ाव बन गया है, जिससे भारतीय खिलाड़ियों को वर्ल्ड-क्लास कॉम्पिटिशन का अनुभव मिलता है और साथ ही स्क्वैश की प्रोफाइल देश भर में बढ़ती है। 2026 के लिए, हम टूर्नामेंट की इंटरनेशनल अहमियत को बढ़ाते रहने और फैंस को हाई-लेवल मैच लाइव देखने के लिए उत्साहित हैं, जिससे भारत में इस खेल के लंबे समय के विकास में मदद मिलेगी।"इस प्रतियोगिता के क्वार्टरफाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल ग्लास कोर्ट पर होंगे, जिससे एक एरीना-स्टाइल स्क्वैश वेन्यू बनेगा जो एनर्जेटिक, क्लोज-अप व्यूइंग के लिए ऑप्टिमाइज किया गया है। एक बड़े स्टेज पर समान प्राइज मनी और टॉप इंडियन और इंटरनेशनल प्लेयर्स के लाइनअप के साथ, 2026 इंडियन ओपन ग्लोबल स्क्वैश में भारत की जगह को मजबूत करेगा।

लाइफस्टाइल

न करें ये लापरवाही : प्रसव के बाद मां-बच्चे की सही देखभाल है जरूरी

प्रसव के बाद मां-बच्चे की सही देखभाल है जरूरी

नई दिल्ली । प्रसव के बाद का समय मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद नाज़ुक और महत्वपूर्ण होता है। डिलीवरी के बाद अक्सर ध्यान सिर्फ बच्चे पर चला जाता है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि अगर मां स्वस्थ रहेगी तभी शिशु की सही देखभाल संभव है। इस समय थोड़ी-सी लापरवाही आगे चलकर मां और बच्चे दोनों की सेहत पर भारी पड़ सकती है, इसलिए प्रसवोत्तर देखभाल को हल्के में नहीं लेना चाहिए। डिलीवरी के बाद मां का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। गर्भावस्था और प्रसव के दौरान शरीर की ताकत, खून और पोषक तत्व काफी हद तक कम हो जाते हैं। ऐसे में मां को पूरा आराम, सुकून भरा माहौल और परिवार का सहयोग मिलना बहुत जरूरी है। अत्यधिक काम करना, नींद पूरी न होने देना या मानसिक तनाव देना मां की रिकवरी को धीमा कर देता है। आयुर्वेद के अनुसार, इस समय मां को चिंता, डर और तनाव से दूर रखना चाहिए क्योंकि इसका सीधा असर दूध बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है।खान-पान की बात करें तो प्रसव के बाद हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन बहुत जरूरी होता है। हरी सब्जियां, दालें, दूध और दूध से बनी चीजें, थोड़ी मात्रा में घी, दलिया, खिचड़ी जैसे भोजन शरीर को ताकत देते हैं और पाचन भी ठीक रखते हैं। आयुर्वेद में मेथी, जीरा, सौंफ, अदरक और शतावरी को बहुत लाभकारी माना गया है। ये न सिर्फ शरीर की कमजोरी दूर करते हैं बल्कि मां के दूध की मात्रा बढ़ाने में भी मदद करते हैं। बहुत ठंडा, बासी या तला-भुना खाना इस समय नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए इससे बचना चाहिए।शारीरिक देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। डिलीवरी के बाद हल्की मालिश, गुनगुने पानी से स्नान और धीरे-धीरे किए गए हल्के व्यायाम शरीर को फिर से संतुलन में लाने में मदद करते हैं। पेट और कमर की मांसपेशियां धीरे-धीरे मजबूत होती हैं और दर्द में भी राहत मिलती है। लेकिन किसी भी तरह की जल्दबाजी या तेज एक्सरसाइज से बचना चाहिए।अक्सर लोग इस समय मां की भावनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जो गलत है। हार्मोनल बदलाव के कारण मां को उदासी, चिड़चिड़ापन या थकान महसूस हो सकती है। ऐसे में परिवार का प्यार, समझदारी और सहयोग बहुत मायने रखता है। अगर समय रहते सही देखभाल की जाए तो यह दौर मां और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित और सुखद बन सकता है।अब बात करें बच्चे की, तो जन्म के तुरंत बाद मां का पहला दूध (कोलोस्ट्रम) बच्चे के लिए अमृत के समान होता है। इसे किसी भी बच्चे को पिलाना चाहिए। पहले छह महीने तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध देना सबसे अच्छा माना जाता है। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वह स्वस्थ रहता है। बच्चे की साफ-सफाई, गर्माहट और समय-समय पर स्तनपान का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है।

राजनीती

कर्नाटक में सीएम पद को लेकर खींचतान चरम पर : डीके के बाद अब इस मंत्री ने ठोका दावा, कहा- इसमें गलत क्या ?

डीके के बाद अब इस मंत्री ने ठोका दावा, कहा- इसमें गलत क्या ?

बेंगलुरु। कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। अब तक यह खींचतान मुख्य रूप से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच मानी जा रही थी, लेकिन अब राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने भी खुलकर अपनी दावेदारी जता दी है। उनके हालिया बयान ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है।बुधवार को बंगलूरू में मीडिया से बातचीत के दौरान जी परमेश्वर से जब कुछ कांग्रेस नेताओं द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग पर सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “इसमें गलत क्या है? अगर इसमें कुछ गलत है तो मुझे बताइए, मैं उसे साफ करूंगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि नेतृत्व जैसे मुद्दों पर सड़क पर चर्चा नहीं होती, बल्कि पार्टी की एक तय प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया जाता है।परमेश्वर ने अपनी राजनीतिक यात्रा और अनुभव का किया जिक्रजी परमेश्वर ने अपनी राजनीतिक यात्रा और अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी काबिलियत पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। उन्होंने बताया कि वह आठ वर्षों तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे हैं और दो बार पार्टी को सत्ता में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उनके अनुसार, “क्या यह सब बिना योग्यता के संभव है?” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वह राज्य के उपमुख्यमंत्री पद पर भी कार्य कर चुके हैं, जो अपने आप में जिम्मेदारी और अनुभव का प्रमाण है।हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी से भी अपने नाम का प्रस्ताव रखने के लिए नहीं कहा है। उनके समर्थक यदि उनके नाम की मांग कर रहे हैं, तो यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है। परमेश्वर ने दोहराया कि मुख्यमंत्री पद पर अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान ही करेगा।दिल्ली हमारे लिए कोई नहीं जगह नहींदिल्ली जाकर पार्टी नेतृत्व से चर्चा करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि दिल्ली उनके लिए कोई नई जगह नहीं है। जब भी आवश्यकता होगी, वह दिल्ली जाएंगे और पार्टी आलाकमान से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि कोई आधिकारिक काम होगा तो वह इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से देंगे। कुल मिलाकर, कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही अंदरूनी हलचल अब और तेज होती नजर आ रही है। जी परमेश्वर के इस बयान ने यह संकेत दे दिया है कि मुख्यमंत्री पद की दौड़ अभी खुली हुई है और अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के हाथ में है।

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