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अमेरिका, इज़रायल और ईरान तनाव : युद्ध की आग से गले की प्यास पर संटक!

युद्ध की आग से गले की प्यास पर संटक!

प्रसन्न शहाणे अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच युद्ध का तनाव बढ़ता जा रहा है…जिसने दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ा दी है। क्रूड ऑयल की आपूर्ति बाधित होना भारत के लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है। तो दूसरी ओर एक और बड़ी चिंता पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर को लेकर सामने आ रही है। क्योंकि युद्ध का बढ़ता तनाव गर्मी की तपिश में अब आपकी प्यास पर भारी पड़ सकता है…अमेरिका,इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध से केवल डीजल ,पेट्रोल ,एलएनजी ,सीएनजी की दिक्कतें नहीं बढ़ रही है बल्कि इस युद्ध का सीधा असर आपकी प्यास पर भारी पड़ सकता है ,,ये युद्ध गर्मियों में आपके कंठ को तर करने वाली पानी की बोतल को बाजार से गायब करने की ताकत भी रखता है। गर्मियों की दस्तक के साथ ही आग उगलता सूरज लोगों के कंठ सुखाने लगा है… और तपती गर्मियों में शायद आपको अपनी प्यास बुझाने के लिए पहले से ज्यादा जद्दोजहद करनी पड़े। वजह कोई कुदरती अकाल नहीं, बल्कि इंसानी ज़िद और युद्ध है। अमेरिका और ईरान के बीच गहराता तनाव अब समुद्र के रास्ते होते हुए भारत की प्लास्टिक इंडस्ट्री के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। दरअसल, खाड़ी देशों में युद्ध की आग धधकने और क्रूड ऑयल की सप्लाई बाधित होने से इसके बाय-प्रोडक्ट्स का उत्पादन प्रभावित होने लगा है। खासतौर पर प्लास्टिक इंडस्ट्री पर संकट की आहट सुनाई देने लगी है। बाय-प्रोडक्ट के रूप में बनने वाले प्लास्टिक के दानों से पीने के पानी की बोतलें बनाई जाती हैं… और इन्हीं ग्रेन्यूल्स की सप्लाई महज दो बड़ी कंपनियां देश में करती है । जिसकी उपलब्धता अब बाजार में दिन-ब-दिन कम होती जा रही है। प्लास्टिक का दाना, जिसे हम रेज़िन कहते हैं, सीधे तौर पर कच्चे तेल का बाय-प्रोडक्ट है। देश में बोतलबंद पानी बनाने वाले बड़े ब्रांड्स तो शायद इस झटके को कुछ हफ्तों तक सह जाएं, लेकिन असली संकट उन छोटी इकाइयों पर है जो हर शहर और कस्बे में बोतलबंद पानी मुहैया कराती हैं। भोपाल में बोतलबंद पानी बनाने वाली लाल आयन एक्सचेंज के एमडी आर. के. रवि ने बताया कि लागत सिर्फ पानी की नहीं है, बल्कि उस बोतल और ढक्कन की भी है। अगर कच्चा माल इसी तरह महंगा होता रहा और सप्लाई रुकी रही, तो छोटी यूनिट्स के लिए प्रोडक्शन जारी रखना नामुमकिन हो जाएगा। हम सप्लाई और मांग के बीच फंसे हुए हैं।चलिए अब आपको बताते हैं कि भारत में पैकेज्ड पानी का बाजार कितना बड़ा है और कितनी तेजी से बढ़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार —6 साल पहले दैनिक पानी की खपत लगभग 15 करोड़ लीटर थी।2021 में वार्षिक खपत 23,605 मिलियन लीटर थी।2026 तक बढ़कर 2,744.47 करोड़ लीटर (लगभग 75 मिलियन लीटर दैनिक खपत) होने का अनुमान है।एक अनुमान के अनुसार हर महीने करीब 450 करोड़ बोतल पानी की खपत होती है।भारत में लगभग 12% शहरी परिवार बोतलबंद पानी का उपयोग करते हैं।उत्तर भारत 32.31% बाजार हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा बाजार है।जबकि पश्चिम भारत सबसे तेज गति से बढ़ रहा है।लगभग 92% से अधिक बाजार हिस्सेदारी के साथ PET (पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट) बोतलें सबसे प्रमुख हैं।मार्केटलाइन के अनुसार, 2022 में भारत का पैकेटबंद पानी का बाजार लगभग 905 अरब रुपये का था। अनुमान है कि यह बाजार 2027 तक 10.3% की CAGR से बढ़कर लगभग 1,480 अरब रुपये तक पहुंच जाएगा…भारत इस क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ता पैकेटबंद पानी का बाजार है…जो पूर्वानुमानित विकास दर के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ रहा है। लेकिन रॉ मटेरियल की कमी इस बाजार पर भारी संकट बनकर टूट सकती है। इसे लेकर आम जनता और बोतल सप्लायर्स ने भी चिंता व्यक्त की है। - हालांकि युद्ध को लेकर दिन-ब-दिन बढ़ते संकट के बीच अब कंपनियां कुछ नए प्रयोग करने के मूड में भी हैं। क्योंकि मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को अचानक बंद कर देना कई लोगों के रोजगार को भी प्रभावित कर सकता है लिहाजा कुछ पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर बनाने वाले अब प्लास्टिक की बोतलों की जगह कांच की बोतलों को बाजार में उतारने की व्यावहारिकता पर गंभीरता से सोच रहे हैं ।उपयोग करने पर विचार कर रहे हैं।संकट सिर्फ महंगाई का नहीं, बल्कि उपलब्धता का भी है। अगर सप्लाई चेन टूटी, तो आने वाले महीनों में बोतलबंद पानी बाजार से नदारद हो सकता है। एक तरफ उद्यमी काम बंद करने की कगार पर हैं, तो दूसरी तरफ आम आदमी यह सोचकर परेशान है कि क्या अब प्यास बुझाना भी उसकी पहुंच से बाहर हो जाएगा? साफ है कि सरहदों की लड़ाई अब हमारी थाली और पानी की बोतल तक आ पहुंची है… और इसके परिणाम क्या हो सकते हैं, इसे सोचकर आम आदमी डरा हुआ हैप्लास्टिक बनने की प्रक्रिया * कच्चा माल: सबसे पहले पेट्रोकेमिकल रिफाइनरियों में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस को परिष्कृत किया जाता है, जिससे एथिलीन और प्रोपलीन जैसे छोटे अणु या मोनोमर प्राप्त होते हैं।* पॉलिमराइजेशन  इन छोटे अणुओं (मोनोमर) को एक विशेष प्रक्रिया के जरिए आपस में जोड़कर लंबी श्रृंखलाएं बनाई जाती हैं, जिन्हें 'पॉलिमर' कहते हैं।* दैनिक रूप में ढालना: तैयार प्लास्टिक पॉलिमर को अक्सर छोटे दानों (pellets) के रूप में उत्पादकों को भेजा जाता है।* आकार देना इन दानों को पिघलाकर, रंग और अन्य रसायन मिलाकर इंजेक्शन मोल्डिंग या ब्लो मोल्डिंग जैसी मशीनों का उपयोग करके बाल्टी, बोतल, कुर्सी जैसी वस्तुओं में ढाला जाता है

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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आज की बुलेटिन 26 June

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आज की बुलेटिन 24 June

मनोरंजन

अजय हुड्डा और कविता जोशी की केमिस्ट्री : 'बालम माकोडे वर्गा' में देसी अंदाज से खींचा ध्यान

'बालम माकोडे वर्गा' में देसी अंदाज से खींचा ध्यान

मुंबई । हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री में अभिनेत्री और डांसर कविता जोशी का अपना एक अलग ही बोलबाला है। फैंस उन्हें प्यार से 'देसी क्वीन' भी कहते हैं। हरियाणवी गानों और फिल्मों के जरिए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है और सोशल मीडिया पर भी उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। शुक्रवार को कविता जोशी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक नई क्लिप साझा की है, जो उनके नए हरियाणवी गाने 'बालम माकोडे वर्गा' की शूटिंग से जुड़ी है। इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गई वीडियो में 'बालम माकोडे वर्गा' गाने की शूटिंग के कुछ खास पल दिखाई दे रहे हैं। क्लिप में देसी सेटअप, हरियाणवी माहौल और कलाकारों का पारंपरिक अंदाज देखने को मिल रहा है। वीडियो में कविता जोशी का लुक भी काफी आकर्षक लग रहा है। गाने की लाइन्स के साथ उनके हाव-भाव और देसी अंदाज इसे और दिलचस्प बना देते हैं। वहीं इस गाने में उनके साथ हरियाणवी कलाकार अजय हुड्डा भी नजर आ रहे हैं। दोनों की केमिस्ट्री को लोग काफी पसंद कर रहे हैं।गाने की बात करें तो, गाना टी-सीरीज हरियाणवी नामक यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है। इस गाने में विनू गौर और सुशीला तखर ने अपनी दमदार आवाज दी है। वहीं, संगीत विनू गौर ने दिया है, जबकि गीत अजय हुड्डा ने लिखे हैं।कविता जोशी ने हरियाणवी फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री में लंबे समय से काम किया है। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 2007 में आई हरियाणवी फिल्म 'मन्नू धाकड़ मैन' से की थी। इसके बाद वह कई फिल्मों और म्यूजिक वीडियो में नजर आईं और धीरे-धीरे हरियाणवी दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हो गईं। उनकी फिल्मों की लिस्ट में 'सोनोटेक', 'झलक', 'नटखट', 'लाड़ साहब', 'हम दो भगोड़े', 'हद हो गई संजना', 'कट्टू कट्टू', 'फक्कड़ गोरी', 'कुनबा' जैसी कई फिल्में शामिल हैं।इसके अलावा उन्होंने 'विकास की बहू', 'फजीता', 'उलझ पलझ', 'निकडू सेनापति', 'जोड़ा ठाठ का', 'डिअर वर्सेज बियर', 'अकड़ 2', 'धाकड़ लवर' और 'ये कैसा पल दो पल का प्यार' जैसी फिल्मों में भी काम किया है। फिल्मों के अलावा कविता जोशी टेलीविजन पर भी नजर आ चुकी हैं। वह क्राइम आधारित टीवी शो 'क्राइम पेट्रोल' में काम कर चुकी हैं।

बिज़नेस

मिडिल ईस्ट वार : क्रूड आयल की कीमतों में आया जबरदस्त उछाल, ग्लोबल स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंकाए हुईं तेज

क्रूड आयल की कीमतों में आया जबरदस्त उछाल, ग्लोबल स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंकाए हुईं तेज

नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के कारण शनिवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। ब्रेंट क्रूड की कीमत 91.84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का दाम 89.62 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इस तेजी के साथ ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई की कीमतों में क्रमशः 24.55 प्रतिशत और 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंकाएं फिर से तेज हो गई हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स अप्रैल 2024 के बाद पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत दिन के दौरान लगभग 11 प्रतिशत बढ़कर 89.62 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान को श्निर्धारित समय से पहले और पहले कभी न देखे गए स्तर परश् नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अब श्कोई एयरफोर्स और एयर डिफेंस नहीं बचा हैश् और उसकी वायु सेना लगभग खत्म हो चुकी है।दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा कि उनका देश किसी भी तरह की बातचीत करने का इरादा नहीं रखता और जमीनी युद्ध के लिए भी तैयार है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था, तब ब्रेंट क्रूड की कीमत 139 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। मौजूदा हालात में भी अगर तनाव बढ़ता है तो कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।हालांकि भारत के लिए राहत की बात यह है कि देश के पास फिलहाल कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। सरकार के अनुसार, भारतीय तेल कंपनियां खाड़ी क्षेत्र के अलावा अन्य देशों से भी आयात बढ़ाकर आपूर्ति में आने वाली कमी को पूरा कर रही हैं।एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि भारत के पास फिलहाल ऊर्जा संसाधनों का पर्याप्त स्टॉक है और देश ऊर्जा आपूर्ति के मामले में आरामदायक स्थिति में है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसी आपूर्ति से अधिक ऊर्जा स्रोत भारत के पास उपलब्ध हैं और जरूरत पड़ने पर अन्य क्षेत्रों से आयात बढ़ाया जाएगा।अधिकारी के अनुसार, भारत 2022 से रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। उस समय रूस से आयात कुल आयात का केवल 0.2 प्रतिशत था, लेकिन अब इसमें काफी बढ़ोतरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि फरवरी में भारत ने अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 20 प्रतिशत रूस से खरीदा, जो करीब 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन (1.04 मिलियन बैरल प्रतिदिन) है।सरकार ने रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे एलपीजी उत्पादन अधिकतम करें और घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दें, ताकि मध्य पूर्व संकट के कारण रसोई गैस की कमी न हो। इसके तहत प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी महत्वपूर्ण गैसों का उपयोग प्राथमिकता से एलपीजी उत्पादन में करने को कहा गया है।

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खेल

1983-2011 के सामने फीका टी20 वर्ल्ड कप! : महशहूर कमेंटेटर के बयान से मचा बवाल

महशहूर कमेंटेटर के बयान से मचा बवाल

नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब टीम इंडिया ने अपने नाम कर लिया है। अहमदाबाद के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में बीते रविवार को खेले गए फाइनल मैच में भारत ने 96 रनों से शानदार जीत हासिल की और तीसरी बार ये खिताब अपने नाम कर लिया। लेकिन टीम इंडिया के चैंपियन बनने के बाद पूर्व क्रिकेटर और मौजूदा दौर के मशहूर कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने कुछ ऐसा बयान दे दिया है, जिसको लेकर वह सुर्खियों में आ गए हैं। दरअसल संजय मांजरेकर की नजर में वनडे के 2 विश्व कप (1983, 2011) की तुलना में टी20 विश्व कप (2007, 2024 और 2026) की जीत कम अहमियत रखती है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, ष्समय के साथ हमें हर साल दिए जाने वाले इन विश्व कप खिताबों को सही नजरिए से देखना होगा। भारत की टी20 विश्व कप जीत, कपिल देव की कप्तानी में 1983 और धोनी की कप्तानी में 2011 की 50 ओवर की विश्व कप जीत के मुकाबले, अपनी असली चुनौती और पवित्रता के मामले में कहीं नहीं ठहरती।भारतीय टीम के टी20 विश्व कप 2026 जीतने के ठीक बाद आया मांजरेकर का यह बयान उन्हें फिर से आलोचना के घेरे में ले आया है। मांजरेकर को भारतीय क्रिकेट फैंस की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय क्रिकेट टीम ने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में वेस्टइंडीज को हराकर अपना वनडे विश्व कप जीता था। दूसरा वनडे विश्व कप जीतने में भारत को 28 साल का समय लगा। यह इंतजार 2011 में समाप्त हुआ जब एमएस धोनी की कप्तानी में भारत ने श्रीलंका को हराकर विश्व कप जीता। भारत ने अपना पहला टी20 विश्व कप एमएस धोनी की कप्तानी में ही 2007 में जीता था। दूसरे टी20 विश्व कप के लिए भारतीय टीम को 17 साल का इंतजार करना पड़ा। रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका को फाइनल में हराकर टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता था। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम ने 8 मार्च को अहमदाबाद में न्यूजीलैंड को फाइनल में हराकर टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता। टीम इंडिया लगातार 2 टी20 विश्व कप और कुल 3 टी20 विश्व कप जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बनी। इसके अलावा अपने घर में टी20 विश्व कप जीतने का रिकॉर्ड भी टीम इंडिया के नाम दर्ज हो गया।

लाइफस्टाइल

स्ट्रोक के लक्षणों को न करें नजरअंदाज : 'बचाव' फॉर्मूला से बनेगी बात

'बचाव' फॉर्मूला से बनेगी बात

नई दिल्ली । स्ट्रोक या ब्रेन अटैक एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है। यह तब होता है जब मस्तिष्क तक खून पहुंचने में रुकावट आ जाती है, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। ऐसे में हर मिनट मायने रखता है, क्योंकि जितनी जल्दी इलाज मिले, उतनी बेहतर रिकवरी की संभावना होती है। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) स्ट्रोक के लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह देता है, क्योंकि समय पर पहचान और त्वरित कार्रवाई से जान बचाई जा सकती है। ऐसे में एनएचएम आसान और कारगर बचाव फॉर्मूला के बारे में जानकारी देता है। स्ट्रोक के मुख्य लक्षणों को याद रखने का सबसे आसान तरीका है 'बचाव'।स्ट्रोक में देरी मतलब मस्तिष्क में स्थायी नुकसान है। इसके लिए तुरंत अस्पताल पहुंचने से क्लॉट-बस्टिंग दवाएं या अन्य इलाज दिए जा सकते हैं, जो रिकवरी में मदद करते हैं। स्ट्रोक से बचाव के लिए ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें, धूम्रपान-शराब छोड़ें, नियमित व्यायाम करें और संतुलित आहार लें। वहीं, 'बचाव' फॉर्मूला लक्षणों को आसानी से समझाता है-ब मतलब बाजू (बाहों में कमजोरी): व्यक्ति से दोनों बाहें ऊपर उठाने को कहें। अगर एक बाजू नीचे गिर जाए या कमजोर लगे, तो यह स्ट्रोक का संकेत है।च मतलब चेहरा (चेहरा असमान): मुस्कुराने को कहें। अगर चेहरे का एक हिस्सा लटक जाए या असमान दिखे, तो ध्यान दें।आ मतलब आवाज (बोलने में कठिनाई): व्यक्ति से कोई सरल वाक्य बोलने या दोहराने को कहें। अगर आवाज अस्पष्ट, तुतलाती हो या बोलना मुश्किल हो, तो यह बड़ा खतरा है। व मतलब वक्त (समय): ऊपर के कोई भी लक्षण दिखें तो तुरंत समय बर्बाद न करें। 108 पर कॉल करें, एम्बुलेंस बुलाएं और नजदीकी अस्पताल (जहां सीटी स्कैन उपलब्ध हो, जैसे जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज) पहुंचें।हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, ये लक्षण अचानक दिखते हैं और ज्यादातर शरीर के एक तरफ प्रभावित होते हैं। अन्य संकेतों में अचानक संतुलन बिगड़ना, आंखों में धुंधलापन या गंभीर सिरदर्द शामिल हो सकता है। स्ट्रोक को 'साइलेंट किलर' भी कहा जाता है, क्योंकि कभी-कभी बिना चेतावनी के आ जाता है, लेकिन 'बचाव' फॉर्मूला से 90 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में जल्दी पहचान संभव है।

राजनीती

सियासत : एलपीजी गैस सिलेंडर को प्रदर्शन और चाय की चुस्की, भाजपा सांसद ने राहुल पर ऐसे कसा तंज

एलपीजी गैस सिलेंडर को प्रदर्शन और चाय की चुस्की, भाजपा सांसद ने राहुल पर ऐसे कसा तंज

नई दिल्ली। एलजीपी गैस सिलेंडर को लेकर विपक्ष ने गुरुवार को संसद के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और तमाम इंडिया गठबंधन के नेताओं के चाय पीते नजर आए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया में भी वायरल हुआ। राहुल गांधी की चाय की चुस्की को लेकर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने तंज किसा है। इतना ही नहीं, उन्होंने राहुल को वोकेशनल लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा बताया और कहा कि उनका उद्देश्य पिकनिक मनाना है। राहुल को न गरीबों की और न ही देश की चिंताभाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, वे (राहुल गांधी) वोकेशनल लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा हैं और उनका मुख्य उद्देश्य पिकनिक मनाना है। इसलिए पिकनिक मनाने वाले को पूरा देश पहचानता है। उन्हें न तो गरीबों की चिंता है और न ही देश की चिंता है, देश उन्हें अच्छी तरह से जानता है।निशिकांत ने राहुल को दी चुनौतीएलपीजी पर विपक्ष के प्रदर्शन पर निशिकांत दुबे ने प्रतिक्रिया देते हुए एक रिपोर्ट के हवाले से कहा कि इसमें न्यूक्लियर फैसिलिटी का निर्माण, हाइडिल पावर बढ़ाने, रेलवे विद्युतीकरण और कोयला गैसीकरण की बात कही गई। भाजपा सांसद ने राहुल गांधी और कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल को छोड़कर 1974 से लेकर 2014 तक पिछले 40 साल में किस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का काम किया गया। उन्होंने कहा, 1970 में एक कमेटी बनी थी और 1974 में एक रिपोर्ट तैयार की गई। कांग्रेस का सिर्फ यही काम रहा कि उन्होंने रिपोर्ट बनाई और चुपचाप बैठ गए।विपक्ष के पास मुद्दे नहीं: एलजेपी सांसदवहीं, तेल-एलजीपी को लेकर विपक्ष के हंगामे पर एलजेपी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने कहा कि विपक्ष के पास मुद्दे नहीं हैं। विपक्ष को सिर्फ अपनी और अपने नेताओं की बात कहनी है। वह किसी का जवाब सुनने के लिए तैयार नहीं है। आज के दिन में सरकार ने भी अलग-अलग माध्यम से अपने नागरिकों को भरोसा दिया है कि अगर तेल-एलजीपी की किल्लत है तो वह उसकी निगरानी कर रहे हैं और नागरिकों को सुविधाओं की कमी नहीं होगी।अरुण भारती ने कहा कि जनता में किसी तरह के घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार सभी चीजों का ध्यान रख रही है और आगे भी ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा, ष्विपक्ष मुद्दाविहीन होकर लगातार संकट की बात कर रहा है, पैनिक क्रिएट करने की कोशिश कर रहा है। सिर्फ अपने नेता को सुर्खियों में रखने के लिए छोटे से छोटे मुद्दे को उठाने की कोशिश हो रही है।

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