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बड़वानी भगोरिया उत्सवः ढोल की थाप पर आदिवासी कलाकारों के साथ थिरके मोहन : कृषि कैबिनेट से अन्नदाताओं को दिया होली का तोहफा, जानें फैसलों के बारे में

 कृषि कैबिनेट से अन्नदाताओं को दिया होली का तोहफा, जानें फैसलों के बारे में

बड़वानी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बड़वानी में होलिका दहन से पूर्व आदिवासियों के बीच पहुंचकर भगोरिया उत्सव में शामिल हुए। मुख्यमंत्री बड़वानी जिले में आयोजित भगोरिया उत्सव में शामिल होने मंत्रीमंडल के साथ पहुंचे। मुख्यमंत्री ने आदिवासियों की पारंपरिक वेशभूषा पहनी और उनके साथ ढोल की थाप पर आदिवासियों के वाड्यूओन की धुन पर पारंपरिक नृत्य किया। उनके साथ मंत्रिमंडल के अन्य सहयोगी और स्थानीय जन प्रतिनिधि भी भगोरिया उत्सव में शामिल हुए। वहीं शहर में आयोजित भगोरिया उत्सव में शामिल होने बड़वानी पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने सीएम डॉक्टर मोहन यादव का जोरदार स्वागत किया। कार्यक्रम में शामिल होने मंच पर पहुंचे सीएम ने कहा- जनजातीय संस्कृति की विविधता एवं समृद्धता अद्भुत है और भगोरिया पर्व अनुशासन और आनंद का पर्व है।मुख्यमंत्री हेलिपैड से सीधे शिखरधाम पहुंचे और 800 वर्ष पुराने भीलट देव मंदिर में पूजा-अर्चना की। उनके साथ उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मंत्री तुलसी सिलावट, गौतम टेटवाल और विजय शाह सहित कई मंत्री मौजूद रहे। मंदिर में दर्शन के बाद कैबिनेट बैठक प्रारंभ हुई, जिसमें 25 से अधिक मंत्रीगण शामिल हुए। खासबात यह रही कि नागलवाड़ी स्थित शिखरधाम में डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कृषि कैबिनेट बैठक हुई है। जहां शिखरधाम में भीलटदेव मंदिर की तलहटी पर बने 8 एकड़ के गार्डन को अस्थायी मंत्रालय का रूप दिया गया था।शिखरधाम में हुई कृषि कैबिनेटयहां कृषि प्रदर्शनी, ग्रीन रूम, कैबिनेट हॉल और भोजनशाला के लिए विशाल एसी डोम शेड तैयार किए गए थे। बैठक में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा सहित 25 से अधिक मंत्री उपस्थित हैं। शिखरधाम में बनाए गए अस्थायी मंत्रालय में कैबिनेट हॉल में बैठक हुई। जहां निमाड़ अंचल के सात जिलों के कृषि विकास, सिंचाई, मसाला फसलों को बढ़ावा और किसानों की आय वृद्धि जैसे मुद्दों पर मंथन हुआ। साथ ही भिलट देव शिखरधाम मंदिर पर बने करीब 80 लाख रुपए की लागत के भिलट देव व्याख्यान केंद्र का सीएम ने लोकार्पण किया, जो मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा निर्मित और खनिज साधन विभाग द्वारा स्वीकृत है।कृषि कैबिनेट में बड़वानी अंचल के लिए हुए अहम फैसलेकृषि कैबिनेट बैठक में उड़द पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस, सरसों को भावांतर योजना में शामिल करने का प्रस्ताव, सूक्ष्म सिंचाई के लिए हजारों करोड़ का प्रावधान, प्राकृतिक खेती, खाद्य तेल मिशन और दलहन उपार्जन जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।कुल 6 योजनाओं को स्वीकृति दी। बैठक के बाद सीएम डॉ मोहन ने खुद जानकारी दी। कहा- पहली कृषि कैबिनेट बड़वानी अंचल में करने का निर्णय लिया। इस साल किसान कल्याण वर्ष 2026 मना रहे हैं। खेतों के साथ टेंट तंबू में भी निर्णय होते हैं। 16 योजनाओं में निर्णय लिए गए। 27 हजार 746 करोड़ से अधिक का भार सरकार पर आएगा। बैठक में 6 विभागों की 16 योजनाएं मंजूर हुई है। बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।बड़वानी में आधुनिक सब्जी मंडी बनेगी4 हजार 264 करोड़ की खाद्य प्रसंस्करण की योजनाएं मंजूर। 8166 करोड़ की सहकारिता की योजनाएं। अब तक 38 हजार करोड़ से अधिक की योजनाएं किसानों को मिली हैं। भीलटदेव क्षेत्र पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। सच्चा वादा, पक्का काम थीम पर काम कर रहे हैं। बड़वानी में आधुनिक सब्जी मंडी बनेगी। बड़वानी की मंडी आदर्श मंडी के रूप में विकसित होगी।भगोरिया हाॅट में शामिल हुए सीएम मोहनकैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री और मंत्रीगण जुलवानिया के प्रसिद्ध भगोरिया हाट में शामिल होने के लिए रवाना हुए। जहां उन्होंने जनजातीय समाज से संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता की। इस दौरान सीएम ने जहां आदिवासी कलाकारों के साथ जमकर डांस किया। वहीं खाट में बैठकर उनसे संवाद भी किया। मतलब सुबह दर्शन, लोकार्पण और कृषि कैबिनेट बैठक के बाद अब पूरा काफिला भगोरिया के रंग में रंगा नजर आया।भगोरिया उत्सव में उमड़े हजारों समाजजनबता दें कि आदिवासी समाज का बहुप्रतीक्षित और पारंपरिक भगोरिया हाट 24 फरवरी से विधिवत शुरू हुआ था। भगोरिया हाट हजारों की संख्या में समाजजन उमड़े। शहर के प्रमुख मार्गों और हाट परिसर में सुबह से ही चहल-पहल रही। कहीं ढोल-मांदल की थाप पर युवक-युवतियां झूमते नजर आए, तो वहीं बुजुर्गों ने पारंपरिक गीतों से माहौल को जीवंत बना दिया। रंग-बिरंगी पारंपरिक पोशाकों, चांदी के आभूषणों और लोक वेशभूषा में सजे युवा आकर्षण का केंद्र बने रहे। युवतियों के श्रृंगार और युवाओं के पारंपरिक साफा-फेंटा ने सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की। पूरा वातावरण आदिवासी संस्कृति की खुशबू से महक उठा।देश भर में पहचान बना चुका है भगोरिया उत्सवउत्साह और उमंग का उत्सव भगोरिया पव प्रदेश के साथ ही देश में भी अपनी पहचान बना चुका है। खासतौर पर रंग-बिरंगी पारंपरिक पोशाकों, चांदी के आभूषणों और लोक वेशभूषा के लिए जाना जाता है खासतौर पर चांदी के आभूषणों के लिए प्रसिद्ध है३ दरअसल पश्चिमी मध्य प्रदेश के भील, भिलाला और बारेला आदिवासी समुदायों में चांदी केवल धातु नहीं, बल्कि पहचान, परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक रही है। पीढ़ियों से इन समुदायों ने सोने की बजाय चांदी को प्राथमिकता दी है। हालांकि इस वर्ष चांदी की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने भगोरिया जैसे पारंपरिक त्योहार की रौनक को फीका कर दिया।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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आज की बुलेटिन 26 June

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आज की बुलेटिन 24 June

मनोरंजन

ओटीटी पर रिलीज हो रही अनुपम खेर की 'तन्वी द ग्रेट' : अभिनेता ने बताया क्यों खास है फिल्म

अभिनेता ने बताया क्यों खास है फिल्म

मुंबई । हिंदी सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता अनुपम खेर के लिए 3 मार्च का दिन बेहद खास होने वाला है क्योंकि इसी दिन अभिनेता की मच-अवेटेड फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' रिलीज के लिए तैयार है। उन्होंने खुद अपनी खुशी जाहिर करते हुए और फिल्म से जुड़े अनुभव शेयर किए हैं। अनुपम खेर की इस फिल्म ने बीते साल से लेकर अब तक कई खिताब अपने नाम किए हैं।अनुपम खेर की 'तन्वी द ग्रेट' 3 मार्च, यानी होलिका दहन के दिन, ओटीटी पर रिलीज हो रही है। फिल्म को दर्शक अमेजन प्राइम पर देख पाएंगे। अभिनेता ने भावुक वीडियो पोस्ट कर बताया कि फिल्म एक छोटे से परिवार की बड़ी हिम्मत पर बनी है। कहानी देखने में सरल लेकिन बड़े साहस को पर्दे पर दिखाती है। उन्होंने कहा कि फिल्म इसलिए खास नहीं है क्योंकि उन्होंने बनाया है, बल्कि इसलिए खास है क्योंकि यह असल जीवन को दिखाती है। 'तन्वी द ग्रेट' मेरे लिए ऐसी ही एक फिल्म है। हमने इस फिल्म को विश्वास के साथ बनाया। यह विश्वास कि अलग होने का मतलब कम होना नहीं है। थिएटर से लेकर फेस्टिवल तक, सिनेमा हॉल से लेकर अजनबियों के शांत, भावुक संदेशों तक। यह सफर बेहद निजी रहा है।अभिनेता ने फैंस से फिल्म को देखने की अपील की है और फिल्म के रिव्यू को भी साझा करने के लिए कहा है। बता दें कि 'तन्वी द ग्रेट' साल 2025 में रिलीज हुई थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर 'सैयारा' के बज के कारण फिल्म बुरी तरीके पिट गई। अभिनेता ने इस बात पर नाराजगी भी जाहिर की थी कि एक अच्छी और सच्ची कहानी को किसी ने सपोर्ट नहीं किया, जिसके बाद अनुपम खेर ने फिल्म को दोबारा रिलीज किया। री-रिलीज के बाद फिल्म को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फेस्टिवल में स्पेशल स्क्रीनिंग भी मिली और फिल्म ने कई अवॉर्ड भी अपने नाम किए। आज हर तरफ फिल्म की तारीफ हो रही है। 'तन्वी द ग्रेट' आमिर खान की फिल्म 'तारे जमीन पर' से काफी मिलती जुलती है, जिसमें बच्चे के मानसिक विकार को दिखाया गया है। 'तन्वी द ग्रेट' ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों की कहानी को दिखाती है कि कैसे वे अलग होकर भी बेहद खास हैं।

बिज़नेस

शेयर में टूटा तेजी से सिलसिला : बंद होते-होते औंधे मुंह गिरा सेंसेक्स, निवेशकों को लगा गहरा धक्का, निफ्टी ने भी लगाया गोता

बंद होते-होते औंधे मुंह गिरा सेंसेक्स, निवेशकों को लगा गहरा धक्का, निफ्टी ने भी लगाया गोता

मुंबई। सप्ताह के चैथे कारोबारी दिन गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार बड़ी गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स 1,236.11 अंकों यानी 1.48 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 82,498.14 पर बंद हुआ, तो वहीं एनएसई निफ्टी 365 (1.41 प्रतिशत) अंक गिरकर 25,454.35 पर बंद हुआ। बाजार बंद होने के समय निफ्टी के सभी इंडेक्स लाल रंग में कारोबार करते हुए नजर आए। गुरुवार को घरेलू बाजार अपने पिछले बंद से मामूली बढ़त के साथ खुला। बैंकिंग, मेटल, ऑटो और एफएमसीजी शेयरों में भारी बिकवाली के चलते घरेलू बाजार में तीन दिन से जारी तेजी का सिलसिला टूट गया, और निफ्टी और सेंसेक्स शुरुआती बढ़त खोकर दबाव में आ गए। आज के कारोबारी सत्र में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,400 अंक से अधिक गिरकर 82,264.20 के निचले स्तर पर पहुंच गया। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी 1 प्रतिशत से ज्यादा या 400 अंक गिरकर 25,400 के स्तर से नीचे आ गया।बाजार में यह बड़ी गिरावट कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, अमेरिका-ईरान के बढ़ते तनाव और बैंकिंग व एफएमसीजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों में मुनाफावसूली के चलते आई। इस दौरान, सेंसेक्स के सभी 30 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिनमें इंडिगो, एम एंड एम, अल्ट्राटेक सीमेंट, ट्रेंट, बीईएल, कोटक बैंक, रिलायंस, टेक महिंद्रा और आईटीसी के शेयरों में सबसे अधिक 3.2 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली।व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 में 1.59 प्रतिशत और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विभिन्न सेक्टर्स की बात करें, तो निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मीडिया और निफ्टी ऑटो सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाले क्षेत्र रहे, जिनमें से प्रत्येक में 2 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी प्राइवेट और पीएसयू बैंक रहे, जिनमें 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।इस तेज गिरावट से निवेशकों को 53 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ, जिससे बीएसई का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) घटकर लगभग 466 लाख करोड़ रुपए रह गया। इस बीच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने फरवरी के पहले पखवाड़े में 10,956 करोड़ के आईटी शेयरों की बिक्री की। इसी अवधि में, दलाल स्ट्रीट में कुल 29,709 करोड़ का निवेश आया, जिसमें आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई।

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खेल

आईसीसी टी-20 गेंदबाजी रैंकिंग : शिखर पर कायम वरुण, बुमराह ने भी लगाई लंबी छलांग, राशिद खान दूसरे पर स्थान पर

शिखर पर कायम वरुण, बुमराह ने भी लगाई लंबी छलांग, राशिद खान दूसरे पर स्थान पर

नई दिल्ली। टी20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 मुकाबलों के बीच आईसीसी ने टी20 गेंदबाजों की रैंकिंग जारी की है। ताजा रैंकिंग में भारतीय स्पिनर वरुण चक्रवर्ती पहले स्थान पर बने हुए हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीका के कॉर्बिन बॉश, वेस्टइंडीज के मैथ्यू फोर्ड और भारत के जसप्रीत बुमराह ने लंबी छलांग लगाई है। ताजा रैंकिंग में अफगानिस्तान के कप्तान राशिद खान दूसरे स्थान पर हैं। दक्षिण अफ्रीका के कॉर्बिन बॉश ने 21 स्थान की छलांग लगाते हुए तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। इंग्लैंड के स्पिनर आदिल राशिद चैथे स्थान पर हैं। पाकिस्तान के स्पिनर अबरार अहमद को दो स्थान का नुकसान हुआ है। अबरार पांचवें स्थान पर हैं। ऑस्ट्रेलिया के लेग स्पिनर एडम जांपा ने 2 स्थान की छलांग लगाते हुए छठा स्थान हासिल किया है। वेस्टइंडीज के मैथ्यू फोर्ड ने भी बड़ी छलांग लगाई है। फोर्ड ने 23 स्थान की छलांग लगाते हुए शीर्ष 10 में एंट्री की है और सातवां स्थान हासिल किया है। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शानदार गेंदबाजी की थी। उस प्रदर्शन के आधार पर बुमराह की भी एंट्री भी शीर्ष 10 में हो गई है। बुमराह 7 स्थान की छलांग लगाते हुए आठवें स्थान पर पहुंच गए हैं। बांग्लादेश के मुस्तफिजुर रहमान नौवें स्थान पर हैं, जबकि श्रीलंका के वानिंदु हसरंगा दसवें स्थान पर हैं। विश्व कप से बाहर हो चुके हसरंगा को चार स्थान का नुकसान हुआ है। शीर्ष 10 में 7 स्पिनर हैंटी20 के शीर्ष 10 बल्लेबाजों में भारत के अभिषेक शर्मा पहले, इंग्लैंड के फिल साल्ट दूसरे, पाकिस्तान के साहिबजादा फरहान तीसरे (दो स्थान का फायदा हुआ है), श्रीलंका के पाथुम निसांका चैथे, भारत के ईशान किशन पांचवें (तीन स्थान का फायदा हुआ है), भारत के सूर्यकुमार यादव छठे, भारत के तिलक वर्मा सातवें (तीन स्थान का नुकसान हुआ है), इंग्लैंड के जोस बटलर आठवें (एक स्थान का नुकसान), दक्षिण अफ्रीका के डेवाल्ड ब्रेविस नौवें (दस स्थान का फायदा हुआ है), और न्यूजीलैंड के टिम साइफर्ट दसवें स्थान पर हैं।

लाइफस्टाइल

गर्मियों में सेहत के लिए गेम चेंजर है लौंग : कैसे करना है है उपयोग, जानें शानदार टिप्स

कैसे करना है है उपयोग, जानें शानदार टिप्स

नई दिल्ली। लौंग एक ऐसा मसाला है, जिसके उपयोग से खाने का स्वाद दोगुना हो जाता है। लौंग का इस्तेमाल सर्दियों में ज्यादा किया जाता है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है और ये सर्दी और खांसी में आराम भी देती है। बहुत कम लोग जानते हैं कि गर्मियों में भी लौंग का उपयोग कई बीमारियों से बचा सकता है? बशर्ते इसका सही प्रयोग पता होना चाहिए। विज्ञान और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि छोटी सी लौंग गर्मियों में शरीर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है, लेकिन कैसे, यह हम आपको बताएंगे।आयुर्वेद में लौंग को देवपुष्प कहा गया है। हालांकि इसकी तासीर गर्म मानी जाती है, लेकिन इसमें कुछ ऐसे गुण हैं जो विशेष परिस्थितियों में शरीर को ठंडक और शांति प्रदान करते हैं। अगर सही तरीके से लौंग का सेवन किया जाए तो गर्मी और लू जैसी परेशानियों से राहत पाई जा सकती है। लौंग की तासीर भले ही गर्म है, लेकिन इसके प्रभाव शीतलता देने वाले होते हैं। यह कफ, पित्त और रक्त दोषों को शांत करती है और शरीर में गर्मी का तापमान भी सही बनाए रखती है। बहुत कम लोग जानते हैं कि लौंग का उपयोग आंखों के लिए बेहद लाभकारी है।लौंग की तासीर गर्म है, लेकिन वो फिर भी शरीर में पित्त को संतुलित करती है। अगर गर्मियों में बार-बार प्यास लगती है या फिर डिहाइड्रेशन होता है, तब भी लौंग का सेवन राहत देता है। लौंग के सेवन से मुंह में लार का उत्पादन तेजी से होता है, जिससे गर्मियों में मुंह सूखने की परेशानी कम होती है।गर्मियों में अक्सर पानी की कमी से मुंह में दुर्गंध की समस्या रहती है। सर्दियों की तुलना में गर्मियों में मुंह और पेट के अंदर बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। ऐसे में लौंग बैक्टीरिया को कम करके ओरल हाइजीन को बनाए रखता है। इससे दुर्गंध की समस्या भी कम होती है। गर्मियों में भारी खाना कम पच पाता है क्योंकि पाचन अग्नि कम तीव्र होती है। ऐसे में जठराग्नि को संतुलित करने के लिए लौंग का सेवन करना जरूरी है। लौंग पाचन अग्नि को तेज कर खाने को पचाने में मदद करती है और पेट से संबंधित परेशानियों से भी राहत देती है।लौंग में मौजूद श्यूजेनॉलश् नाम का यौगिक पाया जाता है, जो शरीर को हर मौसम में संतुलित करने में मदद करता है। आयुर्वेद में इसलिए लौंग को नेचुरल कूलर माना गया है। इसके लिए रात को भिगोकर लौंग का सेवन करें और मिश्री के साथ भी लौंग ले सकते हैं।

राजनीती

हमारे युवा जो ठान लेते है, वह दिखाते हैं करके : पीएम मोदी ने ऐसे की युवाओं की शक्ति की प्रशंसा

पीएम मोदी ने ऐसे की युवाओं की शक्ति की प्रशंसा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं की शक्ति की प्रशंसा करते हुए एक संदेश में आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति के महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि आज हमारा देश अपने सपनों को साकार कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की युवा शक्ति का दृढ़ संकल्प अतुलनीय है। उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, भारतवर्ष की युवाशक्ति का दृढ़ संकल्प अतुलनीय है। हमारे युवा साथी जो ठान लेते हैं, वो करके दिखाते हैं। यही वजह है कि आज हमारा देश अपने सपनों को साकार कर रहा है।उन्होंने एक संस्कृत सुभाषितम भी शेयर किया है। पीएम मोदी ने लिखा, न वा उ मां वृजने वारयन्ते न पर्वतासो यदहं मनस्ये। मम स्वनात् कृधुकर्णो भयात एवेदनु द्यून्किरणः समेजात। संस्कृत सुभाषितम कहा गया है, आपके आत्मविश्वास की शक्ति गहन है। कोई भी आपके आत्मनिर्णय को कुचल नहीं सकता। बड़े पहाड़ के आकार की बड़ी बाधाएं भी आपके मार्ग में बाधा नहीं डाल सकतीं। आप सूर्य से अधिक शक्तिशाली हैं बशर्ते आपके पास इच्छा-शक्ति हो।बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने दिसंबर 2025 से भारतीय परंपरा के कालजयी ज्ञान को आधुनिक नीति और जन-संवाद से जोड़ने के लिए समय-समय पर संस्कृत सुभाषित (प्रेरणादायक श्लोक) शेयर करना शुरू किया है। वे अक्सर अपने भाषणों, मन की बात और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से संस्कृत सुभाषित शेयर करते हैं।संस्कृत सुभाषितों को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करके प्रधानमंत्री मोदी समकालीन शासन को भारत की सभ्यतागत ज्ञान से सचेत रूप से जोड़ रहे हैं और प्राचीन श्लोकों का उपयोग विकास, स्थिरता, लैंगिक न्याय, नैतिक नेतृत्व और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व जैसी आधुनिक प्राथमिकताओं को समझाने के लिए कर रहे हैं। पीएम मोदी ने 8 दिसंबर को पहले सुभाषित में भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन में संस्कृत की स्थायी प्रासंगिकता को रेखांकित किया था।

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