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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रम पर भारत सरकार की चुप्पी को लेकर देश की राजनीति में बहस तेज हो गई है। खास बात यह है कि इस मसले को लेकर कांग्रेस के नेता ही आमने-सामने हो गए हैं। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सरकार की चुप्पी को जिम्मेदारी से पलायन करने का आरोप लगाया। तो वहीं तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार के रुख का बचाव करते हुए इसे जिम्मेदार कूटनीति बताया है, जबकि
शशि थरूर ने अपने लेख में कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में केवल नैतिकता के आधार पर फैसले नहीं लिए जाते। उन्होंने माना कि यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून और भारत के मूल सिद्धांतोंकृसंप्रभुता, अहिंसा और शांतिपूर्ण समाधानकृके खिलाफ है, लेकिन इसके बावजूद भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देनी होती है। उनके अनुसार, कई बार सार्वजनिक रूप से कुछ न कहना भी एक रणनीतिक फैसला होता है, जिससे कूटनीतिक विकल्प खुले रहते हैं।
पश्चिम एशिया से भारत के जुड़े हैं आर्थिक और सामरिक हित
थरूर ने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया में भारत के बड़े आर्थिक और सामरिक हित जुड़े हैं। इस क्षेत्र के साथ भारत का लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार है, ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है और करीब 90 लाख भारतीय वहां रहते हैं। ऐसे में कोई भी कड़ा बयान इन हितों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने अमेरिका के साथ भारत के बढ़ते रक्षा और तकनीकी संबंधों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि भावनात्मक प्रतिक्रिया देना व्यावहारिक नहीं होगा।
वैश्विक मुद्दों पर स्पष्ट और नैतिक रुख अपनाना चाहिएः सोनिया
दूसरी ओर, सोनिया गांधी ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर मौन रहना तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से बचना है। उनके अनुसार, भारत जैसे बड़े देश को वैश्विक मुद्दों पर स्पष्ट और नैतिक रुख अपनाना चाहिए।
सरकार की आलोचना करना उचित नहींः थरूर
थरूर ने आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे आंशिक रूप से सहमत हैं कि युद्ध सही नहीं है, लेकिन सरकार की आलोचना करना उचित नहीं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति का हवाला देते हुए कहा कि भारत हमेशा सिद्धांत और व्यवहारिकता के बीच संतुलन बनाता आया है। अंत में, थरूर ने कहा कि भारत की चुप्पी किसी युद्ध का समर्थन नहीं, बल्कि संयम और जिम्मेदार कूटनीति का संकेत है, जो देश के दीर्घकालिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी है।
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