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आईसीसी टी-20 रैंकिंग:न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाजों का दिखा जलवा, बल्लेबाजों की लिस्ट में अभिषेक शीर्ष पर कायम
दुबई। आईसीसी ने बुधवार को टी-20 फार्मेट की रैंकिंग जारी कर दी है। साउथ अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज में शानदार प्रदर्शन के साथ पुरुषों की आईसीसी टी20 गेंदबाजी रैंकिंग में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाजों को फायदा मिला है। इस लिस्ट में चार कीवी तेज गेंदबाजों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के बीच टी20 सीरीज के शुरुआती चार मुकाबले उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं, जिसमें दोनों टीमों के खिलाड़ियों के प्रदर्शन के कारण रैंकिंग में काफी फेरबदल हुआ।अनुभवी तेज गेंदबाज लॉकी फर्ग्यूसन को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिला। फर्ग्यूसन ने ऑकलैंड में मैच जिताऊ स्पेल डाला था। उन्होंने महज 9 रन देकर 1 विकेट हासिल किया था, जिसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। इस प्रदर्शन ने उन्हें 12 पायदान ऊपर चढ़ाकर 39वें स्थान पर पहुंचा दिया है। उनके साथी तेज गेंदबाज बेन सियर्स 20 पायदान ऊपर चढ़कर 59वें स्थान पर पहुंच गए हैं। काइल जैमीसन ने पांच पायदान की छलांग लगाई है। वह 76वें स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं, जैकरी फॉल्क्स 8 पायदान ऊपर चढ़कर 81वें स्थान पर पहुंच गए हैं।साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों ने भी रैंकिंग में किया सुधारसाउथ अफ्रीकी गेंदबाजों ने भी रैंकिंग में सुधार किया है। केशव महाराज ने 5 पायदान की छलांग लगाकर 47वां स्थान अपने नाम कर लिया है। उनके साथी खिलाड़ी ओटनील बार्टमैन सात पायदान ऊपर चढ़कर 66वें स्थान पर पहुंच गए है। गेराल्ड कोएत्जी 46 पायदान ऊपर चढ़कर 88वें स्थान पर पहुंच गए हैं। ऑलराउंडर्स की लिस्ट में जॉर्ज लिंडे बल्ले और गेंद दोनों से अहम योगदान देने के बाद एक पायदान ऊपर चढ़कर 22वें स्थान पर पहुंच गए हैं। टी20 ऑलराउंडर रैंकिंग में सिकंदर रजा ने शीर्ष स्थान बरकरार रखा है।दो पायदान ऊपर चढ़े सूर्याभारत के अभिषेक शर्मा टी20 बल्लेबाजी रैंकिंग में शीर्ष पर बने हुए हैं। वह फिलहाल हमवतन ईशान किशन से आगे चल रहे हैं। हालांकि, भारत की टी20 विश्व कप विजेता टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव दो पायदान ऊपर चढ़कर सातवें स्थान पर पहुंच गए हैं। न्यूजीलैंड के सलामी बल्लेबाज टिम रॉबिन्सन उन चुनिंदा बल्लेबाजों में से एक रहे जिन्होंने रैंकिंग में सुधार किया। वेलिंगटन में 32 रनों की पारी खेलने के बाद वह 2 पायदान ऊपर चढ़कर 34वें स्थान पर पहुंच गए हैं।

भारतीय शेयर बाजार में फिर लौटी रौनक:बड़ी बढ़त लेकर बंद हुआ सेंसेक्स, निफ्टी में भी दिखी तेजी
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में बड़ी तेजी के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,205 अंक या 1.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 75,273.45 और निफ्टी 394.05 अंक या 1.72 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,306.45 पर था। बाजार में चैतरफा तेजी थी और करीब सभी सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (3.51 प्रतिशत), निफ्टी रियल्टी (2.69 प्रतिशत), निफ्टी पीएसयू बैंक (2.67 प्रतिशत), निफ्टी मेटल (2.56 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस (2.35 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (2.22 प्रतिशत) और निफ्टी हेल्थकेयर (2.05 प्रतिशत) की तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुए।मिडकैप और स्मॉलकैप में भी दिखी तेजीलार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,244.05 अंक या 2.30 प्रतिशत की तेजी के साथ 55,331.05 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 401.35 अंक 2.59 प्रतिशत की बढ़त के साथ 15,896.55 पर था। 4.31 करोड़ हुआ लिस्टेड कंपनियों का मार्केटकैबसेंसेक्स पैक में अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, टाइटन, इंडिगो, ट्रेंट, एमएंडएम, टाटा स्टील, एसबीआई, सन फार्मा, बजाज फिनसर्व, अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स और एचडीएफसी बैंक गेनर्स थे। टेक महिंद्रा, पावर ग्रिड, टीसीएस और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लूजर्स थे। बाजार में तेजी के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केटकैप करीब 8 लाख करोड़ रुपए बढ़कर 4.31 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि पहले 4.23 लाख करोड़ रुपए था।

खाद की कालाबाजारी-जमाखोरी करने वालों की अब खैर नहीं:मिडिल ईस्ट वार के बीच केन्द्रीय कृषि मंत्री ने हाईलेवल मीटिंग, दिए सख्त निर्देश
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच खाद की आपूर्ति मजबूत करने, कालाबाजारी रोकने के लिए केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को हाईलेवल मीटिंग की। बैठक में आने वाले खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए तैयारियों की भी समीक्षा की गई। बैठक में शिवराज ने सख्त निर्देश दिए हैं कि की आपूर्ति पूरे देश में बराबर और बिना रुकावट के होनी चाहिए। खाद-बीज की कालाबाजारी करने वालों पर हो सख्त एक्शनमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि खाद और बीज की कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक संकट का फायदा उठाने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को भी इस दिशा में कड़े कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।बीज सुखाने के लिए गैसों की उपलब्धता की भी समीक्षाबैठक में कृषि रसायनों और बीज सुखाने के लिए जरूरी गैसों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा दूध और अन्य कृषि उत्पादों के लिए पैकेजिंग सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने पेट्रोलियम मंत्रालय और अन्य विभागों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए ताकि सप्लाई में कोई बाधा न आए।कृषि क्षेत्र की माॅनिटरिंग के लिए बनाया गया स्पेशल सेलकृषि क्षेत्र की लगातार निगरानी के लिए एक स्पेशल सेल बनाया गया है, जो चैबीसों घंटे काम करेगा। यह सेल हर हफ्ते खाद, बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता पर रिपोर्ट सीधे कृषि मंत्री को देगा। कृषि मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि संकट के समय उन्हें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और सरकार किसानों तक जरूरी संसाधन समय पर पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।10 वर्षो में 44 फीसदी बढ़ा कृषि उत्पादनउन्होंने यह भी बताया कि पिछले 10 वर्षों में देश में कृषि उत्पादन करीब 44 प्रतिशत बढ़ा है और कई किसानों की आय दोगुनी हुई है। केंद्र सरकार किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर रिकॉर्ड खरीद भी शामिल है।

दिल्ली विधानसभा में गूंजा शीशमहल मुद्दा:मंत्री वर्मा ने खोली ‘महंगे राज’ की परतें, पढ़ें पूरी खबर
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर हुए खर्चों को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सदन में एक लंबी सूची पेश करते हुए कहा कि शीशमहल जैसे इस घर में अत्यंत महंगे और लग्जरी सामान लगाए गए हैं। प्रवेश वर्मा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री आवास में लगाए गए जिम उपकरणों से लेकर फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक आइटम तक हर चीज बेहद महंगी है। उन्होंने कहा कि एक ट्रेडमिल की कीमत करीब 14 लाख रुपए थी और उसके लिए अलग से ट्रेनर को भी भुगतान किया गया। इसके अलावा डम्बल सेट पर करीब 3 लाख रुपए खर्च किए गए। उन्होंने बताया कि घर में 88 इंच का बड़ा टीवी लगाया गया। साथ ही तीन टीवी पर कुल 27 लाख रुपए खर्च हुए। इसके अलावा चिमनी, सोफा, मिनी बार और एंट्रेंस लाइट जैसी सुविधाएं भी लगाई गईं।सोफा सेट के लिए हुए थे दो टेंटरप्रवेश वर्मा ने फर्नीचर के खर्च का जिक्र करते हुए कहा कि सोफा सेट के दो टेंडर हुए। एक 35 लाख रुपए का और दूसरा 1.5 लाख रुपए का। घर में 76 टेबल लगाए गए, जिन पर करीब 1 करोड़ 5 लाख रुपए खर्च हुए। 8 बेड पर 40 लाख रुपए खर्च किए गए, जबकि कुर्सियों पर 60 लाख रुपए और कंसोल पर 50 लाख रुपए खर्च किए गए। उन्होंने बताया कि घर में 1.5 करोड़ रुपए के पर्दे (कर्टन) लगाए गए। इसके अलावा 60 लाख रुपए के कार्पेट और छोटे पफी (सोफे के साथ रखे जाने वाले छोटे स्टूल) भी खरीदे गए।28 लोगों के बैठने लायक बनाया गया था डाइनिंग टेबलप्रवेश वर्मा ने आगे कहा कि एक बड़ा डाइनिंग टेबल लगाया गया, जो 28 लोगों के बैठने लायक है और जिसकी कीमत 14 लाख रुपए है। इसके अलावा, जिम में स्पिन बाइक 1 लाख रुपए की, फ्यूजन क्रेस्ट मशीन 3 लाख रुपए की और बॉडी सॉलिड उपकरण 6 लाख रुपए के लगाए गए। उन्होंने कहा कि घर में करीब 12 लाख रुपए के इलेक्ट्रिकल आइटम और 14 लाख रुपए की सीलिंग डेकोरेटिव फिटिंग्स लगाई गईं।घर में लगाए थे 11 टीवीउन्होंने यह भी दावा किया कि घर में कुल 11 टीवी लगाए गए, जिन पर डेढ़ करोड़ रुपए खर्च हुए। साथ ही बारबेक्यू यूनिट, सीलिंग स्पीकर, कैमरा, एम्प्लीफायर और प्री-एम्प्लीफायर जैसे महंगे उपकरण भी लगाए गए। उन्होंने कहा कि 50 एयर कंडीशनर लगाए गए और 5 लाख रुपए का इन्वर्टर सिस्टम भी लगाया गया।एक दिन में पास कर दिए गए थे कामों के टेंडर और एस्टिमेटप्रवेश वर्मा ने आरोप लगाया कि इन सभी कामों के टेंडर और एस्टिमेट एक ही दिन में तैयार और पास कर दिए गए। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता के पैसे पर बहुत बड़ी डकैती की गई है। दिल्ली सरकार के मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि बजट सत्र को बाधित करने के लिए धमकी भरे ईमेल भेजे जा रहे हैं।

छिंदवाड़ा का जहरीला सिरप कांड:एसआईटी ने कोर्ट में पेश की फाइनल रिपोर्ट, गुनहगारों की बढ़ी मुश्किलें
भोपाल। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 23 बच्चों की मौत से जुड़े बहुचर्चित जहरीले कफ सिरप कांड में जांच अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को न्यायालय में पूरक और अंतिम चालान पेश कर दिया। इस चालान में हाल ही में गिरफ्तार किए गए दो शिशु रोग विशेषज्ञों डॉ. एस.एस. ठाकुर और अमन सिद्दीकी के खिलाफ साक्ष्यों और जब्त दस्तावेजों का विस्तृत विवरण शामिल है।इस मामले की शुरुआत 4 अक्टूबर 2025 को हुई थी, जब परासिया के बीएमओ डॉ. अंकित सहलाम की शिकायत पर थाना परासिया में प्रकरण दर्ज किया गया। प्रारंभिक जांच के दौरान शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया गया था। बाद में जांच का दायरा बढ़ाते हुए तमिलनाडु से जुड़े तीन आरोपियों सहित कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन सभी के खिलाफ एसआईटी ने पहले ही आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिया था।नए तथ्यों और साक्षों के आधार पर एसआईटी ने और दो डाॅक्टरों को किया था अरेस्टजांच के दौरान सामने आए नए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने दो और डॉक्टरों को गिरफ्तार किया। इसके बाद पूरक चालान दाखिल कर जांच को पूर्ण घोषित कर दिया गया है। एसआईटी प्रमुख एवं डीएसपी जितेंद्र जाट ने बताया कि सभी गवाहों के बयान, वैज्ञानिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विवेचना पूरी कर ली गई है और अब आगे की कार्रवाई न्यायालय में होगी।विशेषज्ञों की मेडिकल रिपोर्ट ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई। जिन बच्चों की मौत हुई थी, उनके पोस्टमार्टम और क्लीनिकल जांच में समान लक्षण पाए गए। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि सभी मौतें जहरीले कफ सिरप के सेवन से हुईं, जिससे जांच को स्पष्ट दिशा मिली।पीड़ित परिवारों ने जांच पर उठाए सवालहालांकि, पीड़ित परिवारों ने जांच पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि परासिया के स्टेशन रोड स्थित एक अन्य डॉक्टर ने भी बीमार बच्चों को यही कफ सिरप लेने की सलाह दी थी, लेकिन उसके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि उसके क्लीनिक के सामने स्थित दो मेडिकल स्टोरों को सील किया जा चुका है। पीड़ित पक्ष के वकील संजय पटोरिया का कहना है कि न्यायालय के निर्देश पर इस मामले में आरोपियों की संख्या और बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के कुछ पहलुओं पर अभी और कार्रवाई की आवश्यकता है।

एलपीजी रिफिल बुकिंग के नहीं बदले नियम:सरकार ने दावों को बताया भ्रामक, कहा- अफवाहों पर न करें विश्वास
नई दिल्ली। एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग समय-सीमा (रिफिल टाइमलाइन) में बदलाव को लेकर चल रही खबरों और सोशल मीडिया पोस्ट पर सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ कहा है कि एलपीजी रिफिल बुकिंग के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और पुरानी व्यवस्था ही लागू है। मंत्रालय ने बताया कि कुछ समाचार रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्टों में यह दावा किया जा रहा था कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत एलपीजी रिफिल बुकिंग के लिए 45 दिन, नॉन-पीएमयूवाई सिंगल सिलेंडर के लिए 25 दिन और डबल सिलेंडर के लिए 35 दिन की नई समय-सीमा तय की गई है। सरकार ने इन दावों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मौजूदा नियमों के तहत एलपीजी रिफिल बुकिंग की समय-सीमा शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन ही है, और यह सभी प्रकार के कनेक्शन पर समान रूप से लागू होती है।अफवाहों पर न करें विश्वास, सरकार ने की अपीलसरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसी अफवाहों पर विश्वास न करें और न ही उन्हें आगे फैलाएं। साथ ही, घबराहट में गैस सिलेंडर की अनावश्यक बुकिंग से भी बचने की सलाह दी गई है। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि देश में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और किसी तरह की कमी की कोई स्थिति नहीं है। सरकार ने बताया कि देश की सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और सोमवार तक 18,700 टन कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति की जा चुकी है।में पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त भंडार पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, देश भर में पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त भंडार है और 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंप सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं। इसके साथ ही, पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन का तेजी से विस्तार किया जा रहा है और सिर्फ एक दिन में 7,500 नए कनेक्शन दिए गए हैं।सरकार ने यह भी बताया कि एलपीजी की आपूर्ति को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और नए स्रोतों को जोड़ा जा रहा है। राज्यों से निगरानी और वितरण व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए कहा गया है, ताकि सप्लाई पूरी तरह सुचारू बनी रहे।

अलविदा हरीश राणा :13 साल की लंबी खामोशी का हुआ अंत, माता-पिता ने बेटे को बनाया अमर
नई दिल्ली। कभी जिंदगी से भरे सपनों के साथ इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने निकले हरीश राणा ने 13 साल तक कोमा में रहने के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया है। गमगीन माहौल में बुधवार सुबह उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया है। इस दौरान सभी के आंखों से आंसू बह रहे थे। बता दें कि भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले पहले शख्स हरीश राणा का मंगलवार को शाम 4ः10 बजे निधन हो गया। वह पिछले 13 साल से कोमा में थे। असहनीय पीड़ झेलकर 13 साल बाद हरीश राणा दुनिया को जरूर अलविदा कह दिया है, लेकिन उनके माता-पिता ने अपने बेटे को अमर बना दिया है। सूत्रों के अनुसार, उनके माता-पिता की सहमति से एम्स में उनकी दोनों आंख के कॉर्निया व हृदय के वाल्व दान किया गया गया। हालांकि, एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि हरीश का हृदय, किडनी व लिवर दान नहीं हो सकता था। लेकिन, परिवार की सहमति से दोनों कॉर्निया व हृदय के चारों वाल्व लेकर सुरक्षित रख दिया गया है। इसके बाद पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया है। हरीश के परिजनों ने उनकी मौत के बाद हरीश के क्रियाशील अंगों को दान करने की इच्छा जताई थी।13 साल की लंबी खामोशी का अंतहरीश 2013 में हॉस्टल के चैथे फ्लोर से नीचे गिरने के बाद कोमा में चले गए थे और तब से लगातार लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे। बताया जाता है कि पंजाब विश्वविद्यालय से बीटेक कर रहे हरीश राणा चैथी मंजिल से गिर गए थे। सिर में गंभीर चोट लगी और इसके बाद उनकी जिंदगी अस्पताल और मशीनों के बीच सिमट कर रह गई। समय बीतता गया, लेकिन होश कभी वापस नहीं आया. परिवार के लिए यह इंतजार धीरे-धीरे एक अंतहीन पीड़ा में बदलता चला गया। सुप्रीम कोर्ट का फैसला 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले में हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। अदालत ने पूरी संवेदनशीलता के साथ इस मामले को सुना और मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत प्रक्रिया की अनुमति दी। इसके बाद 14 मार्च को हरीश राणा को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया। यहां पेलिएटिव केयर यूनिट में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनके साथ रही. डॉक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार धीरे-धीरे लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाने की प्रक्रिया शुरू की। यह कोई अचानक लिया गया कदम नहीं था, बल्कि पूरी मेडिकल निगरानी में चरणबद्ध तरीके से किया गया। इस दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि हरीश को किसी भी तरह का दर्द या असुविधा न हो। उन्हें लगातार दर्द निवारक दवाएं दी जाती रहीं, ताकि अंतिम समय में उन्हें शांति मिले। बेसुध बेटे को घर की हर बात बताती थी हरीश की मांहरीश राणा की मां ने अपने बेटे की हालत को लेकर भावुक करते हुए बताया कि वह लंबे समय से बेसुध था और अपनी पीड़ा भी व्यक्त नहीं कर पाता था। उन्होंने कहा कि एक मां के लिए इससे बड़ा दुख और क्या हो सकता है कि उसका बच्चा अपनी तकलीफ तक न बता सके। उन्होंने बताया कि वह रोज सुबह-शाम उसकी मालिश करती थी और उसे घर की सारी बातें सुनाती थीं। आज क्या हुआ, कौन आया, क्या-क्या हुआ। कई बार घंटों तक इंतजार करती रहती थी कि वह एक बार पलक झपका दे, ताकि मुझे लगे कि उसने मेरी बातें सुन लीं। उन्होंने कहा कि बेटे की छोटी-छोटी हरकतें ही उनके लिए सुकून का सहारा थीं। कभी उसे उबासी आती, कभी छींक आती या आंखों के आसपास की त्वचा फड़कती, तो हमें उसी से यह एहसास होता था कि वह जिंदा है। हरीश राणा की मां ने कहा कि अब जब उसके जीवन की अंतिम घड़ियां आ पहुंची हैं, तो उनके लिए यह स्थिति बेहद कठिन है।टीम में थे ये विभाग शामिलइससे पहले मरीज की देखभाल को लेकर डॉक्टर पूरी तरह सतर्क थे। एम्स की पूर्व ऑन्को-एनेस्थीसिया प्रमुख डॉ सुषमा भटनागर ने बताया था कि इस प्रक्रिया में मरीज को दिए जाने वाले पोषण को धीरे-धीरे कम किया जाता है या बंद किया जाता है। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाता है कि उसे किसी प्रकार का दर्द न हो। इसके लिए लगातार दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं, ताकि मरीज को आराम मिले और उसे किसी तरह की पीड़ा महसूस न हो। इस पूरी प्रक्रिया को लागू करने के लिए डॉक्टर सीमा मिश्रा के नेतृत्व में एक विशेष मेडिकल टीम गठित की गई थी। इस टीम में न्यूरोसर्जरी, ऑन्को-एनेस्थीसिया, पेलिएटिव मेडिसिन और मनोचिकित्सा विभाग के विशेषज्ञ शामिल थे।

देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टाॅक:अफवाहों पर आयल कंपनियों ने स्पष्ट की स्थिति, दिलाया भरोसा भी
नई दिल्ली। देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच तेल कंपनियों ने साफ किया है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है और कहीं भी ईंधन की कोई कमी नहीं है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें।कंपनी ने स्पष्ट कहा कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है, पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और सप्लाई चेन बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चल रही है। भारत पेट्रोलियम ने यह भी बताया कि भारत पेट्रोल और डीजल का नेट एक्सपोर्टर है और कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के पर्याप्त भंडार मौजूद हैं।घबराहट में पेट्रोल पंपों पर न लगाए भीड़ः बीपीसीएल ने की अपीलबीपीसीएल ने लोगों से अपील की कि वे घबराहट में पेट्रोल पंपों पर भीड़ न लगाएं और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। बीपीसीएल ने यह भी भरोसा दिलाया कि वह निर्बाध ईंधन आपूर्ति के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी तरह हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने भी सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि देश भर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है।कंपनी ने ग्राहकों से कहा कि वे अफवाहों से भ्रमित न हों और सामान्य रूप से ईंधन का उपयोग जारी रखें। एचपीसीएल ने भरोसा दिलाया कि उसका नेटवर्क निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सक्रिय है।सरकार ने भी स्पष्ट की स्थितिइस बीच, सरकार ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि देश की सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और ईंधन का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने मंगलवार को जानकारी दी कि देश में 18,700 टन कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति की जा चुकी है और 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंप सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं।उन्होंने बताया कि पीएनजी कनेक्शन का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है और सिर्फ एक दिन में 7,500 नए घरेलू और वाणिज्यिक कनेक्शन दिए गए हैं। सरकार एलपीजी आपूर्ति को और मजबूत करने के लिए लगातार नए स्रोतों पर काम कर रही है, ताकि किसी भी तरह की कमी न हो।जमाखोरी-कालाबाजारी रोकने सख्त कार्रवाई जारीसरकार ने यह भी बताया कि एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए देश भर में सख्त कार्रवाई जारी है। अब तक 642 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 155 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पिछले 24 घंटों में करीब 3,400 छापे मारे गए और लगभग 1,000 सिलेंडर जब्त किए गए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश भर में सभी रिटेल आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है।

होर्मुज को लेकर ईरान से आई राहत भरी खबर:भारतीय जहाजों के लिए भी है गुड न्यूज, पर तेहरान ने रखी हैं सख्त शर्तें
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, खासकर स्ट्रेट आफ होर्मुज को लेकर। यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 फीसदी कच्चे तेल और एलपीजी परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल ही में इस मार्ग के बाधित होने से कई देशों के जहाज फंस गए थे, जिनमें भारत के भी 20 जहाज शामिल हैं।भारत सरकार ने पुष्टि की है कि ये जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में खड़े हैं और आगे बढ़ने के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच ईरान की ओर से राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सीमित रूप से फिर से खोलने के लिए तैयार है, लेकिन इसके साथ कुछ सख्त शर्तें भी लागू की जाएंगी।गैर शत्रुतापूर्ण देशों के जहाजों को ही मिलेगी अनुमतिईरान द्वारा संयुक्त राष्ट्र को भेजे गए संदेश के अनुसार, केवल “गैर-शत्रुतापूर्ण” देशों के जहाजों को ही होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए संबंधित जहाजों को ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा और निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। हालांकि, यूनाइटेड स्टेट और इजरायल से जुड़े जहाजों पर पूरी तरह प्रतिबंध जारी रहेगा। इतना ही नहीं, ईरान ने उन देशों के जहाजों पर भी रोक लगाने की बात कही है, जो उसके खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं।यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब क्षेत्र में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।भारत सरकार ने ईंधन संकट से किया इनकारभारत के लिए राहत की बात यह है कि सरकार ने देश में किसी भी प्रकार के ईंधन संकट से इनकार किया है। शिपिंग, जलमार्ग और पोर्ट मंत्रालय के अनुसार, देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है। करीब एक लाख पेट्रोल पंप सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं।होर्मुज स्ट्रेट बंद रहा तो पूरी दुनिया पर पड़ेगा असरविशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से बंद रहता, तो इसका असर न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ता। फिलहाल ईरान के इस सीमित राहत वाले फैसले से वैश्विक बाजार को कुछ हद तक स्थिरता मिलने की उम्मीद है, लेकिन हालात अब भी संवेदनशील बने हुए हैं।

देश को तबाह करने की काली करतूत के जिम्मेदार नेहरू:भाजपा नेता ने फिर किया वाार, निशिकांत ने इंदिरा-राजीव को भी घेरा
नई दिल्ली। देश की सियासत में एक बार फिर तीखा वार देखने को मिल रहा है, जहां भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। दुबे लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तारीखवार उन समझौतों और निर्णयों को उजागर कर रहे हैं, जिन्हें वे देशहित के खिलाफ बताते हैं। “कांग्रेस का काला अध्याय” नाम से शुरू की गई उनकी यह शृंखला केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि दस्तावेजों के जरिए अतीत के फैसलों को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश है। निशिकांत की शृंखला ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जहां इसे आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। इसी क्रम में निशिकांत दुबे ने बुधवार को कांग्रेस का काला अध्याय 9 एपिसोड एक्स पर पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है, आज, यानी 25 मार्च 1914 को शिमला में ब्रिटिश इंडिया, चीन सरकार और तिब्बत ने मिलकर एक समझौता किया, जिसके अंतर्गत नेपाल और तिब्बती समझौता 1856 तथा जम्मू कश्मीर तिब्बती समझौता 1842 लागू हुआ। तिब्बत और भारत के बीच सीमा निर्धारण मैकमोहन लाइन के तहत किया गया। नेहरू ने तिब्बतियों को बनाया चीन का नागरिकहालांकि मई 1951 में नेहरू ने चीन के आधिपत्य को सत्रह समझौते के अनुसार तिब्बतियों को चीन का नागरिक बना दिया। बचा काम 29 अप्रैल 1954 में तिब्बत पर चीन के पूर्ण नियंत्रण का समझौता कर लिया तथा इस समझौते के तहत चीन को बेरोकटोक भारत आने की छूट दे दी। देश को तबाह करने की काली करतूत के जिम्मेदार केवल और केवल नेहरु जी ही हैं।श्रीलंका को लेकर राजीव गांधी को घेराइसके पहले 24 मार्च को निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा था, 24 मार्च 1990 को श्रीलंका से भारतीय सेना हारकर जबरदस्ती भगाई गई और लौटी। भारतीय सेना की अंतिम टुकड़ी को विदा करने वालों में आज के हमारे विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर भी थे, जो उन दिनों श्रीलंका में कार्यरत थे। भारतीय सेना तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के जिद और जुनून के कारण जबरदस्ती 1987 में अपने ही तमिल भाइयों को मारने पहुंची थी। इंदिरा को भी खड़ा किया कटखरे मेंगांधी परिवार का यह जुनून नया नहीं था। इसके पहले 24 मार्च 1971 को भी इंदिरा गांधी ने भारतीय सेना को श्रीलंका के छात्र आंदोलन पर नियंत्रण के लिए वहां भेजा था लेकिन 1971 के पाकिस्तान युद्ध के दौरान श्रीलंका ने पाकिस्तान का साथ दिया। हमारे हजारों जवान 1987 से लेकर 1990 तक मारे गए। श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रेमदास ने भारतीय जवानों पर तरह-तरह के आरोप लगाए और राजीव गांधी को चिट्ठी लिखी। पहली बार विदेशी धरती पर भारतीय प्रधानमंत्री के ऊपर हमला हुआ और देश के सम्मान को ठेस पहुंची।

चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन:मां महागौरी की आराधना से सौभाग्य और सुख की होती है प्राप्ति, इस बार बन रहा विशेष संयोग भी
नई दिल्ली। चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि 26 मार्च को पड़ रही है। इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। साथ ही अशोक अष्टमी व्रत और मासिक दुर्गाष्टमी भी मनाई जाएगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का भी संयोग बन रहा है, जो शुभ कार्यों के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है। नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की आराधना से भक्तों को शक्ति, सौभाग्य और सुख की प्राप्ति होती है।दृक पंचांग के अनुसार, गुरुवार को सूर्योदय 6 बजकर 18 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 36 मिनट पर होगा। तिथि की बात करें तो अष्टमी सुबह 11 बजकर 48 मिनट तक है। उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन अष्टमी का मान होगा। नक्षत्र आर्द्रा है जो शाम 4 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। धर्मशास्त्र के अनुसार, शुभ कार्य सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत काल या अभिजित मुहूर्त में करना शुभकर होता है। वहीं, राहुकाल और दुर्मुहूर्त या अशुभ समय के दौरान किसी भी शुभ काम से बचना चाहिए।जानें शुभ मुहूर्त के बारे मेंगुरुवार को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 45 मिनट से 5 बजकर 31 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 2 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। वहीं, गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 34 मिनट शाम से 6 बजकर 58 मिनट तक, अमृत काल सुबह 6 बजकर 50 मिनट से 8 बजकर 21 मिनट तक और सर्वार्थ सिद्धि योग शाम 4 बजकर 19 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। साथ ही रवि योग शाम 4 बजकर 19 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।अशुभ समयअशुभ समय की बात करें तो 26 मार्च को राहुकाल दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 3 बजकर 31 मिनट तक, यमगंड सुबह 6 बजकर 18 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 9 बजकर 23 मिनट से 10 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। वहीं, दुर्मुहूर्त सुबह 10 बजकर 24 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।

श्री महाकाल लोक में दिखा अलौकिक दृश्य:भोले की एक झलक पाने देर रात लाईन में लगे भक्त, भव्य शृंगार को देख हुए भाव-विभोर
उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर की प्राचीन भव्यता पूरे विश्व में विख्यात है। बारह ज्योतिर्लिंगों में दक्षिणमुखी महाकालेश्वर का अपना एक विशिष्ट स्थान है और उसमें भी विशिष्ट है यहां होने वाली भस्म आरती। आरती में शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और पूरे मंदिर का माहौल देखने लायक होता है। ऐसा ही अलौकिक दृश्य बुधवार को देखने को मिला है। इस दिन भक्त बाबा के दर पर दर्शन के लिए देर रात से लंबी कतारों में लगे हुए थे।देश-विदेश से आए श्रद्धालु बाबा का भव्य शृंगार देखने के लिए उत्सुक नजर आए। पूरा मंदिर बाबा के भक्तों की लंबी कतारों से भरा हुआ था। सुबह भोर में बाबा के पट खुले और फिर महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा पहले बाबा का जलाभिषेक किया, जिसमें उन्हें पंचामृत से स्नान करवाया गया। इस पंचामृत में शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस का मिश्रण शामिल था। अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई। इसमें महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।जय महाकाल के जयकारों से गूंजा परिसरइसके बाद पूरा मंदिर परिसर जय महाकाल के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। भक्तों ने श्हर हर महादेवश् और ऊं नमः शिवाय के जयकारे लगाए। इसके बाद भगवान महाकाल का सुंदर श्रृंगार किया गया। फूलों की मालाएं, बेलपत्र, चंदन और अन्य पूजा सामग्री से बाबा को सजाया गया। फिर, बाद में महाकाल की कपूर आरती की गई और उसके बाद उन्हें भोग लगाया गया। हर दिन अलग तरीके से किया जाता है बाबा का शृंगारहर दिन बाबा का शृंगार अलग-अलग तरीके से किया जाता है। वहीं, भस्म आरती देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उज्जैन आते हैं। महाकाल की भस्म आरती न सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि यह आस्था का जीवंत प्रमाण है। आरती में शामिल होने के लिए पुरुषों के लिए धोती और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

61 के हुए मप्र के मुखिया:पीएम मोदी ने की दीर्घायु और स्वस्थ्य जीवन की कामना, इन हस्तियों ने भी दी शुभकामनाएं
नई दिल्ली-भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार यानि 25 मार्च 2026 को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। यह उनका 61वां जन्म दिन है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत तमाम पार्टी के दिग्गज नेताओं ने सीएम मोहन को जन्म दिन की शुभकामनाएं दी है। पीएम ने सीएम के कार्यों की सराहना भी की है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं। वे मध्य प्रदेश के सर्वांगीण विकास को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई अनेक पहलों में अग्रणी हैं। मैं उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।अमित शाह ने मोहन को दी शुभकामनाएंकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। मोदी जी के मार्गदर्शन और आपके नेतृत्व में प्रदेश विकास और जनकल्याण के नए आयाम छू रहा है। प्रभु महाकाल आपको उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करें।गडकरी ने की दीर्घायु और मंगलमय जीवन की प्रार्थनाकेंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सीएम मोहन यादव को शुभकामनाएं देते हुए ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लिखा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करता हूं।ऊर्जावान नेतृत्व के धनी मप्र के सीएमः योगीउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पोस्ट में लिखा, जनसेवा को समर्पित, ऊर्जावान नेतृत्व के धनी, मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की हार्दिक बधाई। बाबा महाकाल से आपके उत्तम स्वास्थ्य, सुदीर्घ और सुयशपूर्ण जीवन की प्रार्थना है। वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पोस्ट किया, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। आपके दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।हरियाणा के सीएम ने भी दी जन्मदिन की शुभकामनाएंहरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लिखा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर से प्रार्थना है कि आप सदैव स्वस्थ रहें, ऊर्जावान रहें और दीर्घायु हों व प्रदेशवासियों के कल्याण और राज्य की निरंतर प्रगति के आपके सभी संकल्प पूर्ण हों।

जन्मदिवस विशेष:संघर्ष, अध्ययन और संस्कारों से गढ़ा नेतृत्व—डॉ. मोहन यादव
अनूप पौराणिकमध्यप्रदेश की राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो केवल पद प्राप्त नहीं करते, बल्कि अपने विचार, व्यवहार और कार्यशैली से नेतृत्व की नई परिभाषा गढ़ते हैं। डॉ. मोहन यादव ऐसे ही नेताओं में शामिल हैं, जिनका जीवन संघर्ष, अध्ययन, संगठन और संस्कारों के संतुलन का सशक्त उदाहरण है। 25 मार्च 1965 को उज्जैन में जन्मे डॉ. यादव का प्रारंभिक जीवन सादगी और अनुशासन से परिपूर्ण रहा। धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना से समृद्ध उज्जैन की भूमि ने उनके व्यक्तित्व को गहराई और संतुलन प्रदान किया, जहाँ परंपरा और आधुनिकता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।उनकी शैक्षिक यात्रा उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी आधारशिला रही है। विज्ञान, प्रबंधन (एमबीए), विधि और राजनीतिक शास्त्र में पीएचडी जैसी विविध शिक्षा ने उन्हें व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया। उनके लिए शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और शासन को समझने का उपकरण रही। यही कारण है कि उनके निर्णयों में संवेदनशीलता के साथ-साथ तर्क, तथ्य और दूरदृष्टि का संतुलन दिखाई देता है।डॉ. मोहन यादव का सार्वजनिक जीवन छात्र राजनीति से शुरू हुआ। माधव विज्ञान महाविद्यालय में छात्रसंघ के पदों पर रहते हुए उन्होंने नेतृत्व की प्रारंभिक झलक प्रस्तुत की। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने संगठन, अनुशासन और सामूहिक निर्णय की प्रक्रिया को निकट से समझा। नगर स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक की जिम्मेदारियों ने उन्हें एक सशक्त संगठनकर्ता के रूप में स्थापित किया। यही अनुभव उनके राजनीतिक जीवन की मजबूत नींव बना।राजनीतिक जीवन में संघर्ष भी उनके साथ-साथ चला। वर्ष 2003 में भारतीय जनता पार्टी द्वारा बड़नगर विधानसभा से टिकट मिलने के बाद परिस्थितियोंवश उसे लौटाना उनके जीवन का एक कठिन निर्णय था। लेकिन इस चुनौती ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि उनके धैर्य और निष्ठा को और मजबूत किया। उन्होंने प्रतीक्षा को अपनी शक्ति बनाया और संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखा। यह प्रसंग उनके व्यक्तित्व की गहराई और परिपक्वता को दर्शाता है।प्रशासनिक अनुभव के क्षेत्र में भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया। उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने नगर विकास और अधोसंरचना को नई दिशा दी। उनके कार्यकाल में विकास योजनाओं को इस प्रकार लागू किया गया कि शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान सुरक्षित बनी रहे। यह संतुलन उनके नेतृत्व की विशेषता है—जहाँ विकास और विरासत साथ-साथ चलते हैं। मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पर्यटन को आर्थिक और सांस्कृतिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाया। उनके नेतृत्व में प्रदेश को लगातार दो वर्षों तक राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण और प्रशासनिक क्षमता का प्रमाण है।विधायक के रूप में लगातार तीन बार जनता का विश्वास जीतना उनकी जनसंपर्क क्षमता और लोकप्रियता को दर्शाता है। वे संवाद आधारित राजनीति में विश्वास रखते हैं, जहाँ जनता के साथ सीधा जुड़ाव प्राथमिकता होता है। उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, जब मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को प्रभावी रूप से लागू करने में अग्रणी भूमिका निभाई। नए महाविद्यालयों की स्थापना, कौशल आधारित शिक्षा और पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण ने शिक्षा को रोजगार और नवाचार से जोड़ा।डॉ. मोहन यादव केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं। विभिन्न संगठनों में उनकी भूमिका ने युवाओं को प्रेरित करने का कार्य किया। उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण पहलें कीं, जिनमें विक्रमादित्य परंपरा का पुनर्स्थापन और सांस्कृतिक आयोजनों का विस्तार शामिल है। 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करना उनके लंबे राजनीतिक और सामाजिक साधना का परिणाम था। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उनके निरंतर परिश्रम, संगठन निष्ठा और जनविश्वास का प्रतीक है।उनकी जीवन यात्रा यह स्पष्ट करती है कि नेतृत्व कोई संयोग नहीं होता, बल्कि यह निरंतर प्रयास, धैर्य और आत्मसंयम से विकसित होता है। डॉ. मोहन यादव का नेतृत्व इस बात का उदाहरण है कि जब व्यक्ति अपने मूल्यों, शिक्षा और संगठन के प्रति समर्पित रहता है, तो वह न केवल सफलता प्राप्त करता है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा भी बनता है।(लेखक :- युवा पत्रकार और शोधार्थी है)

पश्चिम एशिया जंग:राहुल ने भारत की विदेशी नीति पर खड़े किए सवाल, ट्रंप का नाम लेकर पीएम पर भी किया वार
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की विदेश नीति को लेकर देश की राजनीति में तीखी बहस देखने को मिल रही है। इसी मुद्दे पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं और सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े किए हैं।संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत की विदेश नीति अब संस्थागत न होकर प्रधानमंत्री की “निजी विदेश नीति” बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि प्रभावित हो रही है और दुनिया इसे गंभीरता से नहीं ले रही। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रभाव है और वे उनके दबाव में निर्णय लेते हैं।पीएम की स्थिति कमजोर होती है तो विदेशी नीति पर पड़ेगा असरराहुल गांधी ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप को यह पहले से पता होता है कि प्रधानमंत्री मोदी क्या कदम उठाएंगे और क्या नहीं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री की स्थिति कमजोर होती है, तो इसका सीधा असर देश की विदेश नीति पर पड़ेगा। उनके अनुसार, हाल के व्यापार समझौतों और संसद में दिए गए बयानों से भारत का कोई स्पष्ट और मजबूत रुख सामने नहीं आया है।राहुल ने आम जनता से जुड़े मुद्दों को भी उठायाइसके अलावा राहुल गांधी ने आम जनता से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का असर सीधे तौर पर लोगों पर पड़ रहा है, जिसमें एलपीजी और पेट्रोल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने मौजूदा हालात की तुलना कोविड काल से की, लेकिन उस समय हुई जनहानि और कठिनाइयों का जिक्र नहीं किया।अमेरिका और इस्राइल के हितों को ध्यान में रख फैसले ले रही सरकारराहुल गांधी ने यह भी बताया कि वे केरल में अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कारण सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने बैठक की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें संरचनात्मक खामियां हैं, जिन्हें सुधारा नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिका और इस्राइल के हितों को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है, न कि देश और किसानों के हित में। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बहस होने की संभावना है।

बंद दरवाजों के पीछे खेला जाएगा पीएसएल:कंगाल पीसीबी की फिर हुई इंटरनेशनल बेइज्जती
नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) हमेशा से ही पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) की तुलना इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से करता रहा है। हालांकि, बीसीसीआई की तरह पीसीबी कभी भी पीएसएल का आयोजन नहीं कर सका है। इसका ताजा उदाहरण आगामी सीजन की शुरुआत से पहले ही सामने आ गया है। पाकिस्तान सुपर लीग 2026 का आयोजन बंद दरवाजों के पीछे किया जाएगा, मतलब दर्शकों को स्टेडियम में आने की परमिशन नहीं होगी। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि पीएसएल के सभी मुकाबले अब छह की जगह महज दो शहरों में खेले जाएंगे। पीसीबी ने अपने इस फैसले का कारण पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईंधन संकट को बताया है। पीसीबी ने खर्च कटौती का दिया हवालापाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का कहना है कि खर्चे में कटौती करने की खातिर टूर्नामेंट का आयोजन सिर्फ दो वेन्यू पर करने का निर्णय लिया गया है। पीएसएल की शुरुआत 26 मार्च से होनी है और फाइनल मुकाबला 3 मई को खेला जाना है।आईपीएल के आयोजनों में कोई कमी नहींअमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव का असर जितना पाकिस्तान पर हो रहा है, उतना ही भारत पर भी हो रहा है। तेल की कीमतों में यहां भी उछाल आया है और बाकी चीजों के दाम भारत में भी बढ़े हैं। हालांकि, इसके बावजूद आईपीएल 2026 के आयोजन में कोई कमी नहीं रखी गई है। पीएसएल का आयोजन तो छह शहरों में किया जाना था, जबकि आईपीएल 2026 कुल 10 शहरों में खेला जाना है। इसके बावजूद खर्चे में कटौती के नाम पर बीसीसीआई ने टूर्नामेंट के शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं किया है। यह दर्शाता है कि पीसीबी के मुकाबले बीसीसीआई का कद काफी ऊंचा है।पीएसएल छोड़कर आईपीएल से जुड़ रहे विदेशी खिलाड़ीसिर्फ यही नहीं, बल्कि इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने के लिए विदेशी खिलाड़ी बिना कुछ सोचे ही पाकिस्तान सुपर लीग को छोड़कर भारत आ रहे हैं। ब्लेसिंग मुजारबानी और दासुन शनाका इसके ताजा उदाहरण भी हैं। पीसीबी के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने पीएसएल छोड़कर आईपीएल में खेलने जा रहे खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात भी कही है। हालांकि, इसके बावजूद खिलाड़ी आईपीएल की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। इसका पहला कारण आईपीएल में मिलने वाला पैसा तो है ही, लेकिन इसके साथ ही पीएसएल के मुकाबले आईपीएल की ज्यादा लोकप्रियता भी है। पीएसएल को लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के दावे एक बार फिर खोखले साबित हो रहे हैं। वहीं, आईपीएल की बराबरी करना पीएसएल और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के लिए अभी दूर की कौड़ी ही लगता है।

कांग्रेस ने खराब की हिमाचल की सेहत:भाजपा सांसद ने लगाया गंभीर आरोप, अनुराग ने खटाखट माडल का भी किया जिक्र
नई दिल्ली। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में राज्य की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की, लेकिन विपक्ष ने इस मुद्दे पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई।पत्रकारों से बातचीत में ठाकुर ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर विपक्षी नेताओं की अनुपस्थिति निराशाजनक रही। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस न केवल राज्य में गलत नीतियां लागू कर रही है, बल्कि उसकी विचारधारा देशहित के खिलाफ भी काम कर रही है। ठाकुर ने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार के फैसलों का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है।दिखावा साबित हुआ खटाखट माडलउन्होंने विशेष रूप से “खटाखट मॉडल” का जिक्र किया, जिसे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने विधानसभा चुनाव से पहले पेश किया था। ठाकुर के अनुसार यह मॉडल केवल दिखावा साबित हुआ और इससे राज्य की आर्थिक स्थिति और बिगड़ी है। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा, जो पहले कभी नहीं हुआ।अनुराग ने टैक्स को लेकर भी कांग्रेस सरकार को घेराठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर टैक्स बढ़ाकर जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार सत्ता में आने के कुछ ही महीनों में डीजल पर वैट बढ़ाकर 10.40 रुपये कर दिया गया, साथ ही 5 रुपये का सेस भी लगाया गया। उन्होंने “टॉयलेट टैक्स” जैसे फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे आम लोगों की परेशानियां बढ़ी हैं।1,000 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त बोझ उठा रही प्रदेश की जनताउन्होंने दावा किया कि इन नीतियों के कारण प्रदेश की जनता को हर साल 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है। ठाकुर ने कहा कि यह मॉडल राज्य को वित्तीय संकट की ओर धकेल रहा है। वहीं, भाजपा के राज्यसभा सदस्य सिकंदर कुमार ने भी कांग्रेस सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाएं सभी राज्यों के लिए हैं, लेकिन हिमाचल में उन्हें सही ढंग से लागू नहीं किया जा रहा।

नीतीश ही रहेंगे जेडीयू के बाॅस:निर्विरोध चुने गए पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष, विरोध में किसी ने नहीं दाखिल किया नामांकन
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को एक बार फिर निर्विरोध रूप से जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। नामांकन के वापस लिए जाने के अंतिम समय गुजर जाने के बाद उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष चुन लिया गया। नीतीश कुमार के अलावा किसी और नेता ने अपना पर्चा दाखिल नहीं किया। जदयू के राष्ट्रीय सचिव और मुख्यालय प्रभारी मोहम्मद निसार ने एक बयान जारी कर मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी के लिए नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि मंगलवार 24 मार्च, 2026 को सुबह 11 बजे थी। विरोध में कोई नेता नहीं आया सामनेनामांकन वापस लेने का समय समाप्त होने के बाद, निर्वाचन अधिकारी के पास केवल नीतीश कुमार का नामांकन ही शेष है, इसलिए उन्हें बतौर अध्यक्ष चुन लिया गया है। उन्होंने बताया कि निर्वाचन अधिकारी अनिल प्रसाद हेगड़े (पूर्व सांसद, राज्यसभा) आज दोपहर ढाई बजे नीतीश कुमार के निर्वाचित होने का निर्वाचन प्रमाण पत्र जारी किया। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा में संसदीय दल के नेता संजय कुमार झा, केंद्रीय मंत्री भारत सरकार राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, मंत्री बिहार सरकार श्रवण कुमार और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नीतीश के अध्यक्ष बनने के बाद यह हो गया तयनीतीश कुमार के अध्यक्ष बनने के बाद यह तय हो गया है कि वे राज्यसभा सदस्य के रूप में दिल्ली की राजनीति करेंगे लेकिन पार्टी की बागडोर खुद अपने पास रखेंगे। बता दें कि ललन सिंह के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद नीतीश कुमार ने यह जिम्मेदारी भी संभाली थी। नीतीश चैथी बार जदयू के अध्यक्ष बनेंगे। हाल ही में नीतीश के बेटे निशांत कुमार ने राजनीति में एंट्री ले ली। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि निशांत को नई सरकार में बिहार के डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। नीतीश के दिल्ली जाने के बाद बिहार में नई सरकार बनेगी।

मिडिल ईस्ट वार:जंग जारी रही तो होंगे घातक परिणाम, राज्यसभा से पीएम मोदी ने देश को किया आगाह, और क्या कहा पढ़े खबर
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया जंग पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मंगलवार को राज्यसभा में कहा है कि इस युद्ध ने पूरी दुनिया में बड़ा ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। अगर यह जंग जारी रही, तो इसके गंभीर दुष्परिणाम होंगे। जिसका असर भारत पर भी पड़ रहा है। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने जंग छोड़कर संवाद का रास्ता सुझाया है। हम सभी संबंधित पक्षों के संपर्क में हैं।पीएम ने कहा कि हालात चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन भारत लगातार कूटनीतिक प्रयासों के जरिए समाधान की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भारत हर सेक्टर में यह प्रयास कर रहा है कि किसी भी सेक्टर में दूसरे देशों पर बहुत अधिक निर्भरता न हो। पीएम ने शिप बिल्डिंग से लेकर रेयर अर्थ मिनरल्स तक, आत्मनिर्भरता के प्रयास गिनाए और कहा इस संकट ने दुनिया को हिला दिया है। इससे रिकवर करने में भी दुनिया को काफी समय लगेगा। सरकार पल-पल बदलते हालात पर नजर रखे हुए है।समस्या के समाधान के लिए भारत ने सुझाया संवाद का रास्तापीएम ने कहा कि उन्होंने क्षेत्र के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर दो दौर की बातचीत की है और ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी निरंतर संवाद जारी है। भारत ने इस समस्या के समाधान के लिए संवाद का ही रास्ता सुझाया है। उन्होंने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बड़ी संख्या में जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें भारतीय क्रू मेंबर्स भी शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में इस तरह की रुकावट और कमर्शियल जहाजों पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। भारत इस स्थिति में अपने जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।भारत ने हमलों का किया विरोधउन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने नागरिकों, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और परिवहन से जुड़े ढांचों पर हमलों का कड़ा विरोध किया है। किसी भी तरह का हिंसक संघर्ष मानवता के हित में नहीं है, और भारत सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांति के रास्ते पर आने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।भारतीयों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकताविदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इस संकट के दौरान अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित वापस लौटे हैं। केवल ईरान से ही 1,000 से अधिक भारतीय लौटे हैं, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल हैं।संघर्ष में कुछ भारतीयों की भी हुई मौतप्रधानमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि इस संघर्ष के दौरान कुछ भारतीयों की मौत हुई है और कुछ घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दी जा रही है और घायलों के बेहतर इलाज की व्यवस्था की गई है। सरकार इस कठिन समय में पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी देशों से सकारात्मक आश्वासन भी मिला है।पीएम ने देश की जनता को दिलाया भरोसाऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में कई देशों से तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत पहुंचे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में भी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि देश की जरूरतों से जुड़े सभी आवश्यक सामान सुरक्षित रूप से भारत में पहुंचते रहें।

निगम मंडल नियुक्तियां:हारे हुए नेताओं के लिए बीजेपी की ना
प्रसन्न शहाणे हारे हुए नेताओं को निगम मंडलों में एडजेस्ट नहीं करेंगे हेमंत खंडेलवाल का यह बयान मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर एक नई रणनीति की ओर इशारा करता है। उनके इस रुख से पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं और चुनाव हार चुके वरिष्ठ नेताओं के बीच समीकरण बदल सकते हैं।इस बयान के पीछे की अहम वजहों का आंकलन करें तो समझ में आता है की राष्ट्रीय संगठन की मंशा भांपते हुए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बिना लाग लपेट के सीधे और सपाट शब्दों में ये फरमान सुनाया है ,,पार्टी चाहती है की कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना है तो हारे हुए नेताओं को तवज्जो देना बंद करना होगा ,, लंबे समय से संगठन में यह मांग उठती ही रही है कि जो कार्यकर्ता जमीन पर रहकर मेहनत करते हैं, उन्हें सत्ता में भागीदारी मिलनी चाहिए। श्हारे हुए नेताओंश् को दूर रखकर खंडेलवाल संभवतः उन सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका देना चाहते हैं जो पिछले कई चुनावों से हाशिए पर थे।मध्य प्रदेश में निगम-मंडलों की नियुक्तियां लंबे समय से चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हेमंत खंडेलवाल के हालिया बयान ने उन नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं जो चुनाव हारने के बाद पुनर्वास की उम्मीद लगाए बैठे थे।लगता है पार्टी अब परफॉर्मेंस आधारित राजनीति चाहती है यानी पार्टी अब केवल कद या पुराने अनुभव के आधार पर पद बांटने के मूड में नहीं है। चुनावी हार को जवाबदेही से जोड़कर बीजेपी एक ऐसा कल्चर विकसित करना चाहती है जहाँ जीत ही सबसे बड़ी योग्यता मानी जाए। इससे न केवल गुटबाजी पर लगाम लगेगी बल्कि जो नेता चुनाव हारने के बाद भी निगम-मंडलों के जरिए अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश करते हैं वो भी अलग थलग पड़ जायेंगे साथ ही इस नए फॉर्मूले से वरिष्ठ नेताओं का दबाव कम होगा और नए चेहरों को उभरने का रास्ता मिलेगा।वर्तमान में लगभग 40 से अधिक ऐसे बोर्ड, निगम और प्राधिकरण हैं जहाँ अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद रिक्त हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं एमपी हाउसिंग बोर्ड , मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम ,नागरिक आपूर्ति निगम , पर्यटन विकास निगमऔर कृषि विपणन बोर्डखंडेलवाल के श्हारे हुए नेताओं को जगह नहींश् वाले फॉर्मूले के बाद अब ऐसे चेहरों पर नजर रहेगी जो संगठन के निष्ठावान कार्यकर्ता हो , वे नेता जो दशकों से संगठन में जिला अध्यक्ष या प्रदेश पदाधिकारी रहे हैं, लेकिन उन्हें कभी चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला। सरकार को सिंधिया खेमे के उन नेताओं को भी संतुष्ट करना होगा जो वर्तमान में किसी सदन के सदस्य नहीं हैं, लेकिन सक्रिय हैं। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाना भी जरूरी है लिहाजा नियुक्तियों में मालवा-निमाड़ और ग्वालियर-चंबल के साथ-साथ विंध्य क्षेत्र को साधने की कोशिश की जाएगी, ताकि 2028 के लिए सामाजिक समीकरण भी दुरुस्त रहें। यानी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष के लिए अपनी श्कोर टीमश् तैयार करने का सुनहरा मौका है, जिसमें युवा और ऊर्जावान चेहरों को प्रशासनिक अनुभव मिल सके।

सोम डिस्टिलरीज को तगड़ा झटका:हाईकोर्ट से सभी याचिकाएं खारिज , एक्साइज विभाग के एक्शन को बताया भी वैध
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शराब कारोबार से जुड़ी एक अहम याचिका पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि शराब का व्यापार मौलिक अधिकार नहीं है। मप्र हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने न्यायमूर्ति विवेक अग्रवालकी अध्यक्षता में सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनी की याचिका खारिज कर दी।मामला एक्साइज विभाग द्वारा 8 लाइसेंस निलंबित किए जाने से जुड़ा था। विभाग ने 4 फरवरी 2026 को यह कार्रवाई की थी, जो 26 फरवरी 2024 को जारी शो-कॉज नोटिस पर आधारित थी। नोटिस में फर्जी परमिट के जरिए शराब के अवैध परिवहन के आरोप लगाए गए थे।कपंनी की दलील पर सरकार ने दिया तर्ककंपनी की ओर से दलील दी गई कि संबंधित नोटिस 2023-24 की अवधि से जुड़ा था और 31 मार्च 2024 को लाइसेंस समाप्त हो चुके थे। नए लाइसेंस जारी होने के बाद पुराने मामलों के आधार पर कार्रवाई को अवैध बताया गया। वहीं राज्य सरकार ने तर्क दिया कि एक्साइज कानून के तहत विभाग को नियम उल्लंघन पर कार्रवाई का पूरा अधिकार है।सरकारी नियंत्रण में होता है शराब का व्यापारकोर्ट ने अपने 32 पन्नों के फैसले में कहा कि शराब का व्यापार पूर्णतः सरकारी नियंत्रण में होता है और यह किसी भी तरह से मौलिक अधिकार की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस निलंबित या रद्द करना पूरी तरह वैध है।कोर्ट ने फैसले में यह भी कहाहाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शो-कॉज नोटिस किसी एक समयावधि तक सीमित नहीं होता। यदि आरोप गंभीर हों तो बाद में भी कार्रवाई की जा सकती है और पुराने उल्लंघन नए लाइसेंस को प्रभावित कर सकते हैं। फैसले में यह भी कहा गया कि यदि धोखाधड़ी के आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो अन्य कानूनी दलीलें कमजोर पड़ जाती हैं। अदालत ने इस कार्रवाई को “प्रोपोर्शनैलिटी टेस्ट” के अनुरूप उचित ठहराया।

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर:मप्र में वितरण को लेकर नई गाइड लाइन जारी, शैक्षणिक-चिकित्सा संस्थानों को मिली प्राथमिकता
भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के वितरण को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। यह व्यवस्था सोमवार से लागू कर दी गई है। सरकार का कहना है कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों और केंद्र सरकार के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए गैस आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्थित किया गया है, ताकि आवश्यक सेवाओं पर किसी प्रकार का असर न पड़े।नई गाइडलाइन के अनुसार, शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इन संस्थानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार 100 प्रतिशत तक आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए कुल आवंटन में 30 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। इसके बाद केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, पुलिस विभाग, जेल, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित अन्य आवश्यक सेवाओं को 35 प्रतिशत तक गैस आवंटित की जाएगी।इनका सीमित कोटा किया गया निर्धारितहोटल, रेस्टोरेंट और मिठाई दुकानों को सीमित कोटा निर्धारित किया गया है। इन श्रेणियों को 9-9 प्रतिशत गैस आवंटन मिलेगा, जबकि ढाबा और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए 7 प्रतिशत हिस्सा तय किया गया है। औद्योगिक क्षेत्र में फार्मास्यूटिकल, फूड प्रोसेसिंग और पॉली पैक उद्योगों को 5 प्रतिशत गैस दी जाएगी। अन्य उद्योगों और जरूरतमंद श्रेणियों को भी 5 प्रतिशत तक आवंटन का प्रावधान किया गया है।अब उपभोक्ताओं की दैनिक खपत का रखा जाएगा रिकार्डसरकार ने स्पष्ट किया है कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति विभिन्न पैक साइज-5 किलोग्राम, 19 किलोग्राम, 47.5 किलोग्राम और 425 किलोग्राम में की जाएगी। वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए उपभोक्ताओं की दैनिक खपत का रिकॉर्ड रखा जाएगा और उसी आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।जमाखोरी और कालाबाजारी में कठोर कार्रवाई के निर्देइसके साथ ही, जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन को नियमित निरीक्षण करने के लिए कहा गया है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने संस्थानों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया है, ताकि गैस आपूर्ति का संतुलन बनाए रखा जा सके। यह व्यवस्था अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।

मौके का फायदा:तेल को लेकर ईरान ने भारत को दिया आफर, पर रख दी कठिन शर्तें, पढ़े खबर
नई दिल्ली। ईरान के तेल को लेकर वैश्विक बाजार में नई हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय संघर्ष के बीच कच्चे तेल और गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसी बीच अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईरान का तेल फिर उपलब्ध हो गया है। इस मौके का फायदा उठाते हुए ईरान ने भारत को भी तेल बेचने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन इसके साथ कुछ कठिन शर्तें जुड़ी हुई हैं।सूत्रों के अनुसार, ईरान भारत को जो तेल ऑफर कर रहा है, उसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड से 6 से 8 डॉलर प्रति बैरल अधिक है। यह स्थिति भारत के लिए चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि आमतौर पर प्रतिबंधों के कारण ईरान अपना तेल छूट देकर बेचता रहा है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, ने मई 2019 के बाद से अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था।ऊर्जा बाजार पर बढ़ा दबाव मौजूदा हालात में होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो रही है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ गया है। भारत को भी इसका असर झेलना पड़ रहा है, खासकर एलपीजी (रसोई गैस) की कमी के रूप में।तेल का भुगतान डाॅलर में चाहती हैं ईरानी ट्रेडर्स और सरकारी कंपनियां ईरान की ओर से एक और बड़ी शर्त पेमेंट को लेकर रखी गई है। ईरानी ट्रेडर्स और सरकारी कंपनियां तेल का भुगतान डॉलर में चाहती हैं, हालांकि कुछ मामलों में रुपये में भुगतान की भी बात सामने आई है। लेकिन मुख्य समस्या यह है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम तीव्र से बाहर है, जिससे भुगतान प्रक्रिया जटिल हो जाती है।ट्रम्प प्रशासन ने दी है 30 दिनों की छूटअमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने हाल ही में 30 दिनों की सीमित छूट दी है, जिसके तहत पहले से समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की खरीद की अनुमति है। इस छूट के तहत 20 मार्च तक लोड किए गए तेल को 19 अप्रैल तक उतारना होगा और भुगतान सात दिनों के भीतर करना होगा। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियां किसी भी समझौते से पहले भुगतान तंत्र और जोखिमों का आकलन कर रही हैं, ताकि भविष्य में किसी वित्तीय या कानूनी संकट से बचा जा सके।

बामुलाहिजा: गुना में किस नेता का था पार्सल... निगम-मंडल के रास्ते राज्यसभा की तीसरी सीट का राज... पढ़िए सियासी फुसफुसाहट
संदीप भम्मरकरगुना में दिल्ली का सियासी पार्सल?गुना की एक छोटी सी पुलिस चौकी और वहां पकड़ी गई एक करोड़ की रकम, कहानी यहीं खत्म हो जानी थी। लेकिन 20 लाख में “सेटलमेंट” हुआ... फोन गुजरात से आया... और अब सवाल दिल्ली तक जा पहुंचा है। आखिर ये सिर्फ कैश था... या किसी बड़े खेल की कड़ी? मामला दब चुका था, फाइल बंद हो चुकी थी, लेकिन ग्वालियर अंचल के ही एक अफसर ने “लीक” कर पूरी कहानी को सड़कों पर ला दिया। अब तक कार्रवाई पुलिस तक सीमित है, लेकिन असली सवाल वहीं खड़ा है कि वो एक करोड़ आखिर गया कहां? और उससे भी बड़ा सवाल३ ये पैसा किसके लिए था? सूत्रों की गलियों में अब एक नई फुसफुसाहट तैर रही है... कहा जा रहा है कि ये रकम दिल्ली के किसी बड़े नेता से जुड़ी थी। मुख्यमंत्री की सख्त कार्रवाई के बाद मामला और गरमा गया है... लेकिन सियासत की ये परतें इतनी आसानी से खुलती नहीं हैं। गुना की चैकी में पकड़ा गया कैश अब सिर्फ “सबूत” नहीं रहा। ये एक सवाल बन चुका है... जिसका जवाब शायद फाइलों में नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों में छुपा है।बाबा का कांग्रेस में हिन्दू बमआदिवासी इलाकों में धर्म और पहचान को लेकर नैरेटिव सेट करने में जुटे उमंग सिंघार की मुहिम को उनकी ही पार्टी के भीतर से झटका लग गया है। भागवत कथा वाचक पंडित मोहित नागर ने कांग्रेस के मंच से ऐसा “हिंदू बम” फोड़ा कि सियासत में गूंज दूर तक सुनाई दे रही है। उनका साफ कहना है कि आदिवासी हिंदू ही हैं, उनका अलग कोई धर्म नहीं। दिलचस्प बात ये है कि कुछ ही दिन पहले उमंग सिंघार आदिवासी सभाओं में ठीक इसके उलट बात रखते दिखे थे, जहां वे आदिवासियों को हिंदू न मानने की लाइन पर जोर दे रहे थे। अब हाल ये है कि कांग्रेस में ही दो विचार आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं। एक तरफ “पहचान की नई राजनीति” तो दूसरी तरफ “परंपरा का पुराना पाठ”। सवाल ये है कि ये घटना ये भीतर का टकराव है ये गहरी दरारों का नतीजा हैं। लेकिन बाहर तो क्लीयर हो रहा है कि आदिवासियों के हिन्दू एजेंडे को लेकर कांग्रेस का मैसेज क्लीयर नहीं है।निगम-मंडल से राज्यसभा का रास्तातीन सीटें, एक पक्की फिर भी कांग्रेस खेमे में बेचैनी? क्या इस बार वोटिंग मशीन नहीं “मनोविज्ञान” हैक होने वाला है? ये सवाल राज्यसभा चुनाव से पहले फिर से हवा में तैर रहे हैं। वैसे तो “ऑपरेशन लोटस” भूलने वाला कांड नहीं है। लेकिन राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेसी खेमा फिर उसी एहसास से गुजर रहा है। विजयपुर की हालिया घटना के बाद कांग्रेस का वही दर्द फिर उभरने लगा है कि फिर से कोई “खेल” न हो जाए। सियासी गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी की तरफ से एक पुराना लेकिन असरदार फॉर्मूला फिर हवा में तैर रहा है। एक राज्यसभा वोट के बदले निगम-मंडल की कुर्सी! ये कोई नया प्रयोग नहीं है। इससे पहले भी इस तरह के “पैकेज डील” सियासत के मंच पर दिख चुके हैं। अब कांग्रेस के भीतर नजरें अपने ही विधायकों पर टिक गई हैं कौन नाराज है, कौन संतुष्ट और कौन “ऑफर” के लिए तैयार बैठा है ये सब बारीकी से तौला जा रहा है। वोटिंग का दिन अभी दूर है, लेकिन सियासी बाजार सज चुका है। अब देखना ये है, कांग्रेस का कुनबा एकजुट रहेगा३ या फिर कोई “एक वोट” पूरी कहानी बदल देगा?पीसीसी में फट रही ठेकेदारों की फाइलेंपहले साथ में टेंडर, फिर साथ में ट्रांजेक्शन और अब सीधे प्रेस कॉन्फ्रेंस! वैसे तो अफसरों और ठेकेदारों के बीच ‘पहले प्यार’ वाला रिश्ता रहता है। ये रिश्ता अक्सर “समझदारी की चाय” पर चलता है। लेकिन जैसे ही रकम की चीनी कम-ज्यादा होती है, रिश्ते में कड़वाहट घुलने लगती है तो नतीजा पॉलिटिकल प्रहार के रूप में बदल रहा है। ऐसे ही “नाराज फूफा” अब नया ठिकाना ढूंढ चुके हैं और वो है प्रदेश कांग्रेस कमेटी का दफ्तर। एक-एक कर ठेकेदार अपने पुराने कांग्रेसी कनेक्शन खंगालते हुए पीसीसी पहुंच रहे हैं और साथ ला रहे हैं पूरा हिसाब-किताब, फाइलें, और “गुप्त डायरी” का खजाना। इधर पीसीसी में बैठे नेता भी किसी शिकारी बाज से कम नहीं मुद्दा मिला नहीं कि झपट्टा मारा... और फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आरोपों के तीर चलाए जा रहे हैं। इन तीरों का निशाना भले अफसर दिखते हों, लेकिन चोट सीधी सरकार पर लग रही है। और इस पूरे खेल का सबसे दिलचस्प किरदार हैं वही ठेकेदार जो सिस्टम से नाराज होकर मैदान में उतरे थे। अब मीडिया में उठती धूल को दूर खड़े होकर ऐसे देख रहे हैं जैसे कोई अपनी ही फिल्म का ट्रेलर एंजॉय कर रहा हो। फाइलें खुल रही हैं रिश्ते टूट रहे हैं और सियासत इस पूरे ड्रामे का फ्रंट रो टिकट लेकर बैठी है।सीधी कार्यवाही से कुनबा नाराजसीधी कार्रवाई और सत्ता का सख्त संदेश! लेकिन इस बार मामला सिर्फ ट्रांसफर-पोस्टिंग का नहीं, पूरे अफसरी कुनबे की धड़कनों का है। सीधी के कलेक्टर और गुना के एसपी पर हुई कार्यवाही के बाद सीएम के गुस्से का शिकार बनने वाले कलेक्टरों की संख्या 10 हो गई है और एसपी जैसे सीनियर आईपीएस अफसरों का आंकड़ा 8 पर पहुंच गया है। वैसे, हटाने की कार्यवाही तो एक परंपरा सी बन चुकी है। लेकिन मौजूदा कार्यवाही के बाद ऊपर के अफसरी कुनबे के कान खड़े कर दिए हैं। चर्चा आईएएस और आईपीएस एसोसिएशन के ग्रुप्स में हुई। अफसर ये कहते सुनाई दिए कि कलेक्टर-एसपी जैसे जिम्मेदार अफसर पर इस तरह का बर्ताव करके हटाना ठीक नहीं है। वैसे, देखा गया है कि एसोसिएशन के नाक-भौंहे चढ़ाने का कोई फायदा नहीं होता। अब क्या असर दिखाई देगा, कहना मुश्किल है।

ईसाई धर्म अपनाने पर एससी स्टेटस खत्म:सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, संविधान का दिया हवाला
नई दिल्ली। धर्मांतरण पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को मामले पर सुनवाई के दौरान हैदराबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा है कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा सांविधानिक आदेश, 1950 में साफ कहा गया है कि खंड-3 में बताए गए धर्मों के अलावा किसी भी धर्म में धर्मांतरण करने पर जन्म के बावजूद, अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत समाप्त हो जाता है। जस्टिस पी. के. मिश्रा और एन. वी. अंजारिया की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी दूसरे धर्म में धर्मांतरण करने से अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति एक ही समय पर क्लॉज 3 में बताए गए धर्म के अलावा किसी दूसरे धर्म को मानने या उसका पालन करने का दावा नहीं कर सकता, और साथ ही अनुसूचित जाति का सदस्य होने का दावा भी नहीं कर सकता।धर्मांतरण के पल ही खत्म हो जाता है अजा का दर्जअदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में, जहां कोई व्यक्ति यह दावा करता है कि उसने संवैधानिक आदेश के क्लॉज 3 में न बताए गए किसी धर्म से वापस हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में धर्मांतरण किया है, तो तीन शर्तों का एक साथ और पूरी तरह से साबित होना जरूरी है। क्लॉज 3 में न बताए गए किसी भी धर्म में धर्मांतरण करने पर, जन्म की स्थिति चाहे जो भी हो, धर्मांतरण के उसी पल से अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत और पूरी तरह से खत्म हो जाता है।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनाया फैसलाबता दें कि यह आदेश एक ऐसे व्यक्ति के मामले में दिया गया, जिसने ईसाई धर्म अपना लिया था और अब पेस्टर के तौर पर काम कर रहा है, लेकिन उसने कुछ लोगों के खिलाफ एससी-एसटी (अत्याचार रोकथाम) कानून के तहत मामला दर्ज कराया था। 30 अप्रैल 2025 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था नहीं है। ऐसे में पीड़ित व्यक्ति एससी-एसटी कानून के प्रावधानों का लाभ लेने का पात्र नहीं है। इसके बाद हाईकोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज धाराओं को खत्म करने का आदेश दिया था।

लोकसभा:किसानों की आय को लेकर गरमाया सदन, टीएमसी सांसद के आरोप पर भड़के शिवराज, मप्र का दिया उदाहरण
नई दिल्ली। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान किसानों की आय को लेकर चर्चा गरमा गई। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय के सवाल पर जवाब देते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया कि देश में किसानों की आय दोगुनी ही नहीं, बल्कि कई मामलों में तीन गुना तक बढ़ी है। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि सरकार किसानों की स्थिति सुधारने के लिए लगातार काम कर रही है।शिवराज ने बताया कि केंद्र सरकार किसानों को हर साल 6,000 रुपये की किसान सम्मान निधि सीधे उनके खातों में दे रही है। साथ ही उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में किसान अब एक साल में तीन-तीन फसलें उगाकर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने एक किसान का उदाहरण भी देना चाहा, लेकिन लोकसभा स्पीकर ने उन्हें संक्षेप में जवाब देने की हिदायत दी।सपा सांसद ने भी सरकार पर दागा सवालइसी दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने हस्तक्षेप किया और सरकार से सीधा सवाल पूछा कि क्या वह स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करेगी। इस पर सदन का माहौल कुछ तनावपूर्ण हो गया और धर्मेंद्र यादव उत्तेजित होकर अपनी बात रखने लगे। स्पीकर ने उन्हें शांत रहने की सलाह दी और कहा कि प्रश्नकाल के दौरान संयम बनाए रखना चाहिए। उन्होंने मंत्री से भी कहा कि जवाब संक्षेप में दें।शिवराज ने यूपीए सरकार पर साधा निशानाअपने जवाब में शिवराज सिंह चैहान ने पिछली यूपीए सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से मना किया था। साथ ही उन्होंने बताया कि मौजूदा सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद कर रही है और किसानों को बेहतर दाम दिलाने के लिए कदम उठा रही है।फल-सब्जियों के परिवहन में मदद कर रही सरकारउन्होंने यह भी कहा कि सरकार अब फल और सब्जियों जैसे उत्पादों की खरीद और उनके परिवहन पर भी सहायता दे रही है, जिससे किसानों को बाजार तक पहुंचने में मदद मिल रही है। कुल मिलाकर, किसानों की आय, एमएसपी और स्वामीनाथन आयोग को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली।

दिल्ली विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी:बजट पेश होने से पहले स्पीकर के पास आया ई-मेल, लिस्ट में कई दिग्गजों के नाम
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में बजट पेश होने से ठीक पहले, मंगलवार सुबह बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया है। विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को सुबह 7ः28 और 7ः49 बजे धमकी भरे ईमेल मिले। जिसमें कहा गया था कि विधानसभा और पास के मेट्रो स्टेशन को बम से उड़ाया जाएगा। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई और पूरे परिसर की गहनता से जांच शुरू कर दी। स्पीकर विजेन्द्र गुप्ता को मिले दोनों ईमेल में कई नाम शामिल किए गए थे, जिनमें एलजी तरनजीत सिंह संधू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के नाम थे।दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां आई हरकत मेंमामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं। विधानसभा परिसर और आसपास के इलाके की गहनता से जांच शुरू की गई। डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक टीम ने पूरे विधानसभा क्षेत्र में विस्तार से जांच की। पुलिस ने आसपास के मेट्रो स्टेशन की भी जांच तेज कर दी, ताकि अगर किसी तरह की कोई संदिग्ध चीज हो तो पकड़ी जा सके।सुरक्षा कारणों से स्थगित हुई विधानसभा की कार्यवाहीसुरक्षा कारणों से विधानसभा की कार्यवाही को 11ः30 बजे तक स्थगित कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल किसी तरह की संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। हालांकि सुरक्षा में कोई कमी न रहे, इसके लिए पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी है। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता मंगलवार को विधानसभा में बजट 2026 पेश करने वाली हैं। इसी बीच विधानसभा को बम उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने लगभग जांच पूरी कर ली है। अभी तक कुछ संदिग्ध नहीं मिला है। ऐसे में सीएम रेखा गुप्ता विधानसभा में पहुंच गई हैं और बजट पेश कर रही हैं।

सर्राफा बाजार में हलचल जारी:औकात में आ रही चांदी, गोल्ड के भाव भी उतरे
मुंबई। सोने और चांदी में मंगलवार को कमजोरी तेजी जा रही है और कीमतें 4.3 प्रतिशत कम हो गई हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सुबह 10ः34 पर 2 अप्रैल 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में सोना 2,094 रुपए या 1.50 प्रतिशत घटकर 1,37,166 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। अब तक के कारोबार में सोने ने 1,36,684 रुपए का न्यूनतम स्तर और 1,38,450 रुपए का उच्चतम स्तर छूआ है। सोने के साथ चांदी में भी कमजोरी देखी जा रहा है। एमसीएक्स पर 5 मई, 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में चांदी 9,837 रुपए या 4.37 प्रतिशत घटकर 2,15,330 रुपए प्रति किलो पर थी। अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,15,330 रुपए का न्यूनतम स्तर और 2,19,658 रुपए का उच्चतम स्तर छूआ है। सोने और चांदी की कीमत में मजबूती की वजह डॉलर इंडेक्स को माना जा रहा है। दुनिया की छह बड़ी मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की स्थिति दर्शाने वाले यह इंडेक्स खबर लिए जाने तक करीब 0.51 प्रतिशत की तेजी के साथ 99.23 अंक पर था। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी गिरे सोने और चांदी के भावडॉलर इंडेक्स में शामिल विदेशी मुद्राओं में यूरो, जापानी येन, ब्रिटिश पाउंड, कैनेडियन डॉलर, स्विस फ्रैंक और स्वीडिश क्रोना हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी में बड़ी गिरावट देखी जा रही है। खबर लिखे जाने तक सोना 1.67 प्रतिशत या 73 डॉलर की कमजोरी के साथ 4,356 डॉलर प्रति औंस और चांदी 3.78 प्रतिशत या 2.625 डॉलर की कमजोरी के साथ 66.73 डॉलर प्रति औंस पर था। अब तक 15 फीसदी फिसल चुका है सोनाहाल के दिनों में सोने में काफी गिरावट देखी गई है। बीते एक हफ्ते (डॉलर में) में यह 13 प्रतिशत से ज्यादा और बीते एक महीने में 15 प्रतिशत से ज्यादा फिसल चुका है। चांदी की भी यही स्थिति है। बीते एक हफ्ते (डॉलर में) में यह 16 प्रतिशत से ज्यादा और बीते एक महीने में 24 प्रतिशत से ज्यादा फिसल चुकी है।

संसद में गूंजा मोबाइल डेटा प्लान्स का मुद्दा:आप सांसद ने कंपनियों को खड़ा किया कटघरे में, पेट्रोल को दिया हवाला
नई दिल्ली। राज्यसभा में आप सांसद राघव चड्ढा ने मोबाइल फोन यूजर्स से जुड़े एक मुद्दे को उठाया गया। राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि देश के करोड़ों मोबाइल यूजर रोजाना डेटा प्लान्स के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से लूटे जा रहे हैं। सोमवार को इस विषय पर बोलते हुए उन्होंने इस पूरी व्यवस्था को उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताया। सांसद ने विस्तार से समझाते हुए कहा कि जब कोई यूजर अपना मोबाइल रिचार्ज कराता है, तो उसे उसके प्लान के अनुसार प्रतिदिन 1.5 जीबी, 2 जीबी या 3 जीबी डेटा मिलता है। लेकिन यह डेटा ‘डेली लिमिट’ के रूप में होता है, जो हर दिन रात 12 बजे समाप्त हो जाता है। यदि उस दिन का पूरा डेटा उपयोग नहीं हुआ, तो बचा हुआ डेटा स्वतः समाप्त (फॉरफिट) हो जाता है और अगले दिन के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं किया जाता।मोबाइल डेटा उपभोक्ता का अधिकारराज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब उपभोक्ता पूरे डेटा का पैसा देता है, तो उसे पूरा डेटा उपयोग करने का अधिकार क्यों नहीं मिलता। इस व्यवस्था को उन्होंने एक उदाहरण से समझाया। उन्होंने कहा, यदि किसी व्यक्ति ने महीने की शुरुआत में अपनी गाड़ी में 20 लीटर पेट्रोल भरवाया और महीने के अंत तक केवल 15 लीटर ही उपयोग हुआ, तो क्या पेट्रोल पंप वाला बचा हुआ 5 लीटर वापस ले लेगा? इसका जवाब है, नहीं, क्योंकि उपभोक्ता ने पूरे 20 लीटर का भुगतान किया है। ठीक उसी प्रकार, मोबाइल डेटा भी उपभोक्ता का अधिकार होना चाहिए और उसे समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।सांसद ने कंपनियों पर यह भी लगाया आरोपसांसद ने यह भी आरोप लगाया कि टेलीकॉम कंपनियां जानबूझकर ‘डेली डेटा लिमिट’ वाले प्लान को बढ़ावा देती हैं, जबकि ‘मंथली डेटा लिमिट’ वाले प्लान कम उपलब्ध कराए जाते हैं। उनका तर्क था कि यदि मासिक डेटा सीमा हो, तो उपभोक्ता पूरे महीने में अपनी सुविधा के अनुसार अधिकतम डेटा उपयोग कर सकता है, जिससे कंपनियों को कम फायदा होता है। यही कारण है कि कंपनियां दैनिक सीमा वाले प्लान को प्राथमिकता देती हैं। उन्होंने कहा कि आज इंटरनेट केवल मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। उन्होंने इसे ‘डिजिटल ऑक्सीजन’ बताया।

खत्म होना चाहिए मिडिल ईस्ट वार:पीएम मोदी ने लोकसभा में भारत को रुख को किया स्पष्ट, कहा- नागरिकों-पावर प्लांट में हमले मंजूर नहीं
नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बीते करीब 25 दिनों से चल रही जंग ने दुनिया को संकट में डाल दिया है। मिडिल ईस्ट में आए इस संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमवार को लोकसभा में भारत के रुख को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने इन हमलों का विरोध किया है और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट अस्वीकार्य है। वहीं उन्होंने भारत के सामने आई परिस्थितियों पर बोलते हुए कहा कि सरकार संवेदनशील, सतर्क और हर सहायता के लिए तत्पर है।पीएम मोदी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा, पश्चिमी एशिया के हालात चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि भारत की स्पष्ट भूमिका है कि पश्चिम एशिया में तनाव खत्म होना चाहिए। भारत शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष है और नागरिकों और पावर प्लांट पर हमले मंजूर नहीं हैं। पीएम ने यह भी बताया कि पिछले दो-तीन हफ्तों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस विषय पर सदन को जरूरी जानकारी दी है। अभी इस संकट को तीन सप्ताह से ज्यादा हो रहा है। इससे देशों की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर विपरीत असर हो रहा है। इसलिए दुनिया संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह कर रही है।युद्ध ने खड़ी की अप्रत्याशित चुनौतियांप्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के सामने भी युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियों खड़ी की हैं। ये चुनौतियों आर्थिक भी हैं, नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ी भी हैं और मानवीय भी हैं। युद्धरत और युद्ध से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक और व्यापारिक रिश्ते हैं। जिस क्षेत्र में युद्ध हो रहा है, वह दुनिया के दूसरे देशों के साथ हमारे व्यापार का भी महत्वपूर्ण रास्ता है। विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा यही क्षेत्र पूरा करता है।यह भी बोले पीए मोदीउन्होंने कहा कि हमारे लिए ये क्षेत्र एक और कारण से भी अहम है। लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं और वहां काम करते हैं। वहां समंदर में जो कमर्शियल शिप चलते हैं, उनमें भारतीय क्रू मैंबर की संख्या भी बहुत अधिक है। ऐसे अलग-अलग कारणों के चलते भारत की चिंताएं स्वभाविक रूप से अधिक हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज दुनिया में जाए।प्रभावित परिवारों को दी जा रही आवश्यक मददपीएम मोदी ने कहा कि जब से युद्ध शुरू हुआ है, जब से हर भारतीय को जरूरी मदद दी जा रही है। मैंने खुद पश्चिम एशिया के देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बात की है। सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है। दुर्भाग्य से कुछ लोगों की दुखद मृत्यु हुई है और कुछ घायल हुए हैं। ऐसे मुश्किल हालात में प्रभावित परिवारों को आवश्यक मदद दी जा रही है। जो घायल हैं, उनका बेहतर इलाज सुनिश्चित कराया जा रहा है।भारतीयों की मदद में जुटे मिशनउन्होंने कहा कि प्रभावित देशों में हमारे जितने भी मिशन हैं, वे लगातार भारतीयों की मदद में जुटे हैं। वहां काम करने वाले भारतीय हों या टूरिस्ट हों, सभी को हर संभव मदद दी जा रही है। हमारे मिशन नियमित रूप से एडवाइजरी जारी कर रहे हैं। यहां भारत और अन्य प्रभावित देशों में 24 घंटों कंट्रोल रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन जारी की गई हैं। सभी भारतीयों को त्वरित जानकारी दी जा रही है।संकट की स्थिति में भारतीयों की सुरक्षा प्राथमिकताप्रधानमंत्री ने कहा कि संकट की स्थिति में भारतीयों की सुरक्षा हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता रही है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3.72 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से एक हजार भारतीय सुरक्षित लौटे हैं। इनमें 700 से अधिक मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवा हैं। खाड़ी के देशों में भारतीय स्कूलों में हजारों विद्यार्थी पढ़ते हैं। सीबीएसई ने ऐसे सभी भारतीय स्कूलों में होने वाली कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। छात्रों की पढ़ाई लगातार चलती रहे, इसके लिए सीबीएसई उचित कदम उठा रही है।

बाबा महाकाल का अद्भुत शृंगार देखकर गदगद हुए भक्त:कपाट खुलते ही जय श्री महाकाल के जयकारों से गूंजा परिसर
उज्जैन। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर सोमवार को बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के बाबा महाकाल के दर पर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। मंदिर परिसर में श्रद्धालु बाबा की झलक पाने के लिए रविवार देर रात से लंबी कतारों में लगे हुए थे। परंपरा के अनुसार, बाबा महाकाल को जगाने के लिए सोमवार सुबह 4 बजे मंदिर के पट खोले गए। सुबह-सुबह ही कई सारे श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होते हुए दिखाई दिए। उन्होंने सुबह-सुबह भगवान के दर्शन किए और पवित्र पूजा विधियों को देखा।यह आरती महाकाल मंदिर की सबसे विशेष और पवित्र परंपरा का हिस्सा मानी जाती है। भक्तों ने बड़ी श्रद्धा से भगवान के दर्शन किए और आरती के दौरान पूजा विधि को बड़े मन से देखा। यह आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा करवाई जाती है।पंचामृत से हुआ बाबा महाकाल का अभिषेकइसमें बाबा निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। सुबह 3ः30 से 4ः00 बजे के बीच मंदिर के पट खुलते हैं और गर्भगृह में पूजा शुरू होती है। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक किया गया, जिसमें शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस का मिश्रण शामिल था। अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई।अद्भुत शृंगार देखकर गदगद हुए श्रद्धालु इसके बाद बाबा का भव्य श्रृंगार किया गया। इसमें महाकाल को चंदन से शृंगार किया गया व माथे पर चंद्रमा सुसज्जित किया गया और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा को फूलों की माला अर्पित की गई। भक्त बाबा का अद्भुत शृंगार देखकर खुशी से गदगद दिखे। इसके बाद महाकाल की कपूर आरती होती है और उसके बाद उन्हें भोग लगाया जाता है। हर दिन बाबा का शृंगार अलग-अलग तरीके से किया जाता है।भक्तों ने अलौकिक क्षण के दर्शनइस पावन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से इस अलौकिक क्षण के दर्शन किए। संपूर्ण मंदिर परिसर जयकारों से गुंजायमान रहा और वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया। लगभग दो घंटे चली इस आरती के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और प्रभु का शृंगार साथ-साथ चलता रहा।

धमकियों से नहीं घबराएगा कोई भी ईरानी:ट्रंप के 48 घंटे वाले अल्टीमेटम पर अराघची का करारा जवाब
नई दिल्ली। मिडिल-ईस्ट में चल रही जंग के करीब 25 दिन बीत गए हैं, लेकिन यह युद्ध अभी तक अंजाम तक नहीं पहुंचा है। अमेरिका-इजरायल जहां ईरान को लगातार परिणाम भुगतने की चेतावनी दे रहे हैं। वहीं ईरान भी मुंहतोड़ जवाब देने की चेतावनी देने से बाज नहीं आ रहा है। इस बीच होर्मुज खोलने को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 48 घंटे वाले अल्टीमेटम वाले बयान पर ईरान ने करारा जवाब दिया है। बता दें कि ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि होर्मुज खोलो, वरना बिजलीघर तबाह कर देंगे। ट्रंप के इस अल्टीमेटम पर ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान ने इस सामरिक समुद्री मार्ग को बंद नहीं किया है। उन्होंने कहा कि जहाजों की आवाजाही में आ रही कमी का मुख्य कारण बीमा कंपनियों में व्याप्त युद्ध का भय है, जिसकी वजह से शिपिंग कंपनियां इस क्षेत्र से गुजरने में संकोच कर रही हैं। अराघची ने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। ईरानी विदेश मंत्री ने ट्रंप को दिखाया आईनासोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल पर युद्ध शुरू करने का आरोप लगाते हुए कहा, होर्मुज स्ट्रे्ट बंद नहीं हुई है। शिपिंग कंपनियां इसलिए हिचकिचा रही हैं क्योंकि बीमा कंपनियों को उस युद्ध का डर है जो ईरान ने नहीं, बल्कि आपने ही शुरू किया है। कोई भी बीमा कंपनी और कोई भी ईरानी और धमकियों से नहीं घबराएगा। सम्मान करने की कोशिश करें। समुद्र में जहाजों के आने-जाने की आजादी तभी संभव है जब व्यापार करने की आजादी हो। अगर आप इन दोनों का सम्मान नहीं करेंगे, तो आपको दोनों में से कुछ भी नहीं मिलेगा।आईडीएफ ने ईरान को लेकर किया यह दावाइजरायली डिफेंस फोर्स का कहना है कि उसने तेहरान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए हैं, जिनका निशाना ईरान के आतंकवादी शासन का इंफ्रास्ट्रक्चर है। ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान की राजधानी तेहरान में हुए धमाकों की आवाज बहुत ज्यादा है। फार्स न्यूज एजेंसी ने तेहरान के पांच इलाकों में धमाकों की भयानक आवाजें आने की खबर दी।ईरानी मीडिया ने कहा कि हमले एरिया 1, 4, 11, 13 और 21 में हुए और कितना नुकसान हुआ और कितने लोग मारे जा सकते हैं, इसकी घोषणा बाद में की जाएगी। वहीं ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम शहर के पूर्वी हिस्से में एक्टिवेट हो गए हैं। इसका मतलब है कि ईरान अमेरिका-इजरायली ड्रोन का जवाब दे रहे हैं।मिडिल ईस्ट के हालात बहुत गंभीरइंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में हालात बहुत गंभीर हैं और 1970 के दशक के दो एनर्जी संकटों को मिलाकर भी उनसे ज्यादा खराब हैं। ऑस्ट्रेलिया के नेशनल प्रेस क्लब में एक भाषण में बिरोल ने कहा कि मौजूदा संकट का सबसे बड़ा समाधान होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना है, जिसे ईरान ने देश पर अमेरिका-इजरायल हमले के बाद असरदार तरीके से ब्लॉक कर दिया है।


