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भगवान सच में हैं बहुत दयालु:लगातार दूसरा टी-20 विश्व कप जीतने से गदगद बुमराह, बोले- मैं कभी पीछे नहीं छिपना चाहता
नई दिल्ली। भारतीय टीम को टी20 विश्व कप 2024 के बाद टी20 विश्व कप 2026 में चैंपियन बनाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने कहा है कि वह हमेशा चुनौतीपूर्ण काम करना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने क्रिकेट को चुना। बुमराह ने कहा है कि कुछ अलग कर पाना उन्हें बहुत खुशी देता है।बीसीसीआई टीवी पर शेयर किए गए एक वीडियो में जसप्रीत बुमराह ने कहा, मैं कभी पीछे नहीं छिपना चाहता। मैं चीजों के बीच रहना चाहता हूं। मैं हमेशा एक मुश्किल काम करना चाहता था। मैंने क्रिकेट उसी के लिए खेलना शुरू किया। जब मैं कुछ अलग कर पाता हूं, तो मुझे बहुत खुशी होती है। इससे बेहतर कोई एहसास नहीं हो सकता। मैंने अपना क्रिकेट अहमदाबाद में ही शुरू किया और सारा क्रिकेट यहीं खेला। गुजरात के लिए खेलकर रैंक में ऊपर आया। अब यहां विश्व कप खेल रहा हूं और मैन ऑफ द मैच बन रहा हूं। पिछली बार हम बस पीछे रह गए थे, इस बार हम आगे निकल गए। मैं बहुत खुश हूं।लगातार दो विश्व कप कभी नहीं हुएबुमराह ने कहा, मेरा बेटा आया, वह पिछली बार भी वहां था। इस बार, वह वहां था, मेरी मां आई थी, जो बहुत खास था। मुझे पूरे सर्कल के बारे में नहीं पता, लेकिन सच में बहुत खुश हूं। लगातार दो विश्व कप कभी नहीं हुए। भगवान सच में बहुत दयालु हैं, और मैं इससे ज्यादा शुक्रगुजार नहीं हो सकता।न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर भारत ने लगातार जीता दूसरा टी-20 विश्व कपभारतीय टीम ने 8 मार्च को टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर लगातार दूसरा टी20 विश्व कप जीता। लगातार 2 टी20 विश्व कप और कुल तीन टी20 विश्व कप जीतने वाली भारत पहली टीम है। इसके साथ ही अपने घर में टी20 विश्व कप जीतने वाली भी भारतीय टीम पहली टीम है। सेमीफाइनल में बेहतरीन गेंदबाजी करने वाले बुमराह ने फाइनल में भी शानदार गेंदबाजी की और 4 ओवर में 15 रन देकर 4 विकेट लिए। इस शानदार और यादगार प्रदर्शन के लिए बुमराह को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

चावल उत्पादन में भारत का बजा डंका,:शिवराज का दावा- चीन को पीछे छोड़ दुनिया में बना नंबर-1, श्रेय दिया मोदी नेतृत्व को
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 साल के दौरान दौरान भारत के कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव और प्रगति देखने को मिली है। यही नहीं उन्होंने यह भी दावा किया खाद्यान्न उत्पादन, चावल में भारत दुनिया में नंबर-1 भी बना है। उन्होंने दलहन और तिलहन के क्षेत्र में भी सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया। शिवराज ने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब भारत को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशों से गेहूं मंगाना पड़ता था। उस दौर में अमेरिका से पीएल-480 योजना के तहत लाल गेहूं आयात कर देश की जनता को खिलाया जाता था। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और भारत खाद्यान्न उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर ही नहीं बल्कि दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।किसानों की मेहतन-सरकार की नीतियों के कारण देश भरे अन्न भंडारशिवराज ने कहा कि आज किसानों की मेहनत और सरकार की नीतियों के कारण देश के अन्न भंडार भर चुके हैं। खासकर चावल के उत्पादन में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने बताया कि लगभग 150 मिलियन टन चावल उत्पादन के साथ भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में पहला स्थान हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि अगर कुल खाद्यान्न उत्पादन की बात करें तो साल 2014 तक देश में लगभग 252 मिलियन टन उत्पादन होता था, लेकिन आज यह बढ़कर करीब 357 मिलियन टन तक पहुंच गया है। यह वृद्धि किसानों की मेहनत, बेहतर नीतियों और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल का परिणाम है।बागवानी क्षेत्र में हुई प्रगति का भी शिवराज ने किया जिक्रकेंद्रीय मंत्री ने बागवानी क्षेत्र में हुई प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फलों और सब्जियों के उत्पादन, क्षेत्रफल और उत्पादकताकृतीनों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पहले जहां बागवानी फसलों का उत्पादन लगभग 277 मिलियन टन था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 369 मिलियन टन हो गया है। इससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।दलहन-तिलहन क्षेत्र में सरकार के प्रयासों का किया उल्लेखउन्होंने दलहन और तिलहन के क्षेत्र में भी सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता दोनों है। हालांकि अभी भी कुछ मात्रा में आयात करना पड़ता है, लेकिन सरकार लगातार उत्पादन बढ़ाने के लिए काम कर रही है। इसी दिशा में तुअर, मसूर और उड़द जैसी दालों की किसानों के जितनी चाहें उतनी खरीद करने का फैसला किया गया है।किसानों को तकनीकी सहायता देने डिजिटल प्लेटफार्म विकसित कर रही सरकारशिवराज ने बताया कि किसानों को सही जानकारी और तकनीकी सहायता देने के लिए सरकार एक बड़ा डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि किसानों को खेती से जुड़ी सारी जरूरी जानकारी एक ही जगह पर उपलब्ध हो सके। इस प्लेटफॉर्म के पहले चरण को भी लॉन्च किया जा चुका है, जिसमें किसान अपनी भाषा में फोन कॉल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

टेरर फंडिंग केस में कश्मीरी अलगाववादी नेता को राहत:सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ शब्बीर शाह को दी जमानत, 6 साल से थे जेल में
नई दिल्ली। कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को टेरर फंडिंग मामले में 6 साल बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। बता दें कि शब्बीर शाह 2019 से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की गिरफ्त में थे, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी है। इस दौरान शीर्ष अदालत ने लंबे समय से चल रही न्यायिक हिरासत और ट्रायल में सामने आई कुछ अनियमितताओं पर भी गंभीर टिप्पणी की। गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले शब्बीर शाह की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था याचिका में शब्बीर शाह की ओर से कहा गया कि उनकी उम्र अब 74 साल हो चुकी है, वे इस मामले में छह साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं और ट्रायल में कुल 400 गवाह हैं, जिनमें से अभी सिर्फ 15 की ही गवाही पूरी हुई है।सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एनआईए से खासकर 1990 के दशक की पुरानी स्पीच पर आधारित सबूतों को लेकर कई बार सवाल किए थे। कोर्ट ने पूछा था कि इतने पुराने बयानों पर अब कैसे भरोसा किया जा सकता है और छह साल से ज्यादा हिरासत का क्या ठोस आधार है। फरवरी 2026 में कोर्ट ने एनआईए को पुराने सबूतों के बजाय नए और समकालीन प्रमाण पेश करने को कहा था। कोर्ट ने मामले की सुनवाई कई बार टाली थी और अंत में शब्बीर शाह की उम्र, लंबी हिरासत और ट्रायल की धीमी गति को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर कर दी। जमानत पर कुछ शर्तें लगाई गई हैं, जैसे वे जेल से बाहर रहते हुए किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे और ट्रायल में सहयोग करेंगे। शाह पर आरोप लगाया था कि वे जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश में शामिल थे और टेरर फंडिंग में उनका हाथ था। एनआईए ने मामले में कई चार्जशीट दाखिल की थीं, जिसमें शाह को बाद में शामिल किया गया था।

मिडिल-ईस्ट वार:ईरान से आर्थिक वार में बुरा फंसा अमेरिका
गणेश साकल्लेअमेरिका-इजराइल और ईरान की जंग आज तेरहवें दिन में प्रवेश कर गई है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि अमेरिका ईरान पर हमला कर आर्थिक जंग में बुरी तरह उलझ गया है। उसे इस युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल पा रहा है। दरअसल लड़ाई तो इजराइल और ईरान के बीच थी। इसमें अमेरिका ने कूदकर पूरी दुनिया को विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। अमेरिका अब तक अपने हमलों में किसी भी मकसद में सफल नहीं हो पाया है। अगर उसके घोषित इरादों में नजर डाले तो उसका मूल मकसद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली हुसैनी खामेनेई समेत पूरी पहली पंक्ति को साफ करना था, किंतु इसमें भी वह पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। दूसरा लक्ष्य परमाणु ठिकानों को तबाह करना था। इसमें उसे सात महीने पहले हमले में कामयाबी मिली थी या अब मिली है, इसका कोई सही जवाब उसके पास नहीं है। तीसरा ईरादा ईरान में तख्ता पलट कर अपने पसंदीदा नेताओं को सत्ता के साकेत में बैठाना था, जो सफल नहीं हो पाया। 13 दिन में सैकड़ों हमले करने के बाद भी अमेरिका और इजराइल ईरान की हुकूमत को खदेड़ नहीं पाई है। इतना ही नहीं, वहां की जनता के दिलों में भी अमेरिका-इजराइल कोई जगह नहीं बना पाए हैं। सच पूछो तो यह सारे मुद्दे बहाना हैं, असल में तो अमेरिका को ईरान के तेल भंडार हथियाना है। इसके विपरीत ईरान ने बहुत ही सधी हुई रणनीति के तहत जवाबी हमले कर पूरे अमेरिका को आर्थिक युद्ध में फंसा दिया है। अमेरिका और इजराइल जिन आधुनिक हथियारों से ईरान पर हमले कर रहे हैं उसकी लागत कई करोड़ है, जबकि ईरान खाड़ी देशों के एक दर्जन देशों पर मिसाइल और ड्रोन दागकर अपने इरादे जाहिर कर चुका है। रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो ईरान जिस ड्रोन से पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिका के एयरबेस पर निशाने साध रहा है, उसकी लागत लभगग 16 लाख रुपए होती है। इन ड्रोन को ट्रेस कर मार गिराने में अमेरिका-इजराइल करीब 11 करोड़ रुपए खर्च कर रहे हैं। एक मोटे अनुमान के तहत बीते 13 दिनों में अमेरिका-इजराइल लगभग 30 हजार करोड़ से अधिक के आधुनिक हथियार चला चुके हैं। इस जंग को लेकर अमेरिका में भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ आवाज उठने लगी है। वहां के पत्रकारों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने सवाल पूछे हैं कि अमेरिका का इस लड़ाई से सीधा क्या संबंध है। उनका कहना है कि इजराइल की लड़ाई ईरान से है, इसमें अमेरिका को क्यों पड़ना चाहिए। इसका सटीम जवाब अभी तक ट्रम्प की ओर से नहीं आया है। अपने ही मुल्क में विरोध मुखर होने से ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। अब वे इस युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रहे हैं। पिछले दिनों उनके अलग-अलग बयानों से तो यही जाहिर होता है, लेकिन ईरान ने साफतौर पर सीजफायर करने से इनकार कर दिया है। उसका दावा है कि वह अमेरिका और इजराइल से लंबी लड़ाई के लिए तैयार है। खाड़ी देशों के तेल-कुओं, पेटृोलियम रिफाइनरी और दुबई जैसे बिजनेस हब पर ईरान ने हमले कर वहां की अर्थव्यवस्था को चैपट कर दिया है, जिसे पटरी आने में लंबा वक्त लगेगा। अगर इस युद्ध के लाभ-हानि का आंकलन किया जाए तो अभी तक अमेरिका-इजराइल के हाथ ईरान में इन्फ्रास्टक्चर नष्ट करने और ज्यादातर निदोर्ष लोगों को मौत के घाट उतारने के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ है, जबकि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस लेकर निकलने वाले जहाजों को निशाना बनाकर इसकी मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर ला दिया है। इसके चलते पूरी दुनिया में हाहाकार मच गया है। इसका सीधा असर भारत में भी दिखाई दे रहा है। रसोई गैस की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। साथ ही आवश्क वस्तुओं के दाम में भी अचानक उछाल आ गया है। आगे चलकर आम जरूरत की वस्तुएं और भी महंगी के आसार है।

कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं, चाहे पीएम ही क्यों न हों:लोकसभा में बोले स्पीकर, राहुल के आरोपों का भी दिया जवाब
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव चर्चा के बाद खारिज हो गया है। इसके बाद वे फिर काम लौट आए हैं। बिरला ने गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही फिसंभालते हुए बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में नेता प्रतिपक्ष या किसी भी सदस्य को बोलने से कभी नहीं रोका गया और संसद के नियम सभी के लिए समान रूप से लागू होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं है, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों।स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव पर पिछले दो दिनों में 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई, ताकि सभी सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि यह सदन देश के 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करता है और हर सांसद यहां अपनी जनता की समस्याओं और अपेक्षाओं को लेकर आता है। उन्होंने हमेशा कोशिश की कि सभी सांसद नियमों के तहत अपनी बात रखें और जो सदस्य कम बोलते हैं उन्हें भी बोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उनके अनुसार, संवाद और चर्चा से ही लोकतंत्र मजबूत होता है।बिरला ने सदन को बताया विचारों का जीवंत मंचबिरला ने सदन को विचारों का जीवंत मंच बताते हुए कहा कि पिछले दो दिनों में सभी सदस्यों के विचारों को गंभीरता से सुना गया। उन्होंने कहा कि वह हर सदस्य के आभारी हैं, चाहे वे सरकार की आलोचना ही क्यों न करते हों। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है कि यहां हर आवाज को महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि स्पीकर की कुर्सी किसी व्यक्ति की नहीं बल्कि लोकतंत्र की महान भावना का प्रतीक है।विपक्ष के आरोपों का भी दिया जवाबविपक्ष की शिकायतों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष या किसी भी सदस्य को नियमों के तहत बोलने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ लोगों का मानना है कि सदन के नेता नियमों से ऊपर होते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने बताया कि नियम 372 के तहत प्रधानमंत्री को भी सदन में बोलने से पहले अध्यक्ष की अनुमति लेनी होती है।माइक बंद करने के आरोपों पर भी बिरला ने सफाई दी और कहा कि चेयर के पास माइक बंद करने का कोई बटन नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में सभी महिला सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिला है।सदन की व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारीसदन में निलंबन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हालांकि उनके सभी दलों के सांसदों से व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं, लेकिन सदन की व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है। जब सदस्य नियमों का पालन नहीं करते तो कभी-कभी निलंबन जैसे कठोर फैसले लेने पड़ते हैं। उन्होंने सभी सांसदों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील भी की।

फारूक अब्दुल्ला: J&K के पूर्व सीएम पर जानलेवा हमले की गूंज संसद तक, आमने-सामने हुए खड़गे-नड्डा
नई दिल्ली। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर हुए जानलेवा हमले का मुद्दा संसद में उठा हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाए कि फारूक अब्दुल्ला की सुरक्षा खतरे हैं और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जाना इसका प्रमुख कारण है। हालांकि, कांग्रेस के आरोपों और फारूक अब्दुल्ला पर हमले को लेकर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सदन में जवाब दिया।मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में कहा, फारूक अब्दुल्ला पर हमला हुआ है। उनकी सुरक्षा खतरे में है। जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा था। अब वहां की पुलिस और सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री के पास होने से आज जम्मू-कश्मीर में ऐसी हालत है। जम्मू-कश्मीर से कानून व्यवस्था खत्म हो रही है और प्रमुख नेताओं को मारने का मंसूबा है। फारूक अब्दुल्ला को भी इस तरह मार दिया गया होता। उनके सुरक्षाकर्मियों ने उनकी जान बचाई।केन्द्र सरकार के हाथ में कश्मीर के लोग सुरक्षित नहीं: खड़गेकांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा, मैं जानना चाहता हूं कि क्या सरकार का फारूक अब्दुल्ला को मारने का इरादा है। अगर उनको सुरक्षित रखना चाहते थे, तो फुल सिक्योरिटी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने के बाद ही लोग सुरक्षित रह सकते हैं। केंद्र सरकार के हाथ में कश्मीर के लोग सुरक्षित नहीं है। क्योंकि सरकार का एक मंसूबा है कि जो लोग धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और देश को एक करने की कोशिश कर रहे हैं, उनको खत्म करना है।यह बोले केंद्रीय मंत्री केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने फारूक अब्दुल्ला पर हमले को लेकर कहा, बुधवार रात फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमला हुआ। यह बहुत ही चिंता का विषय है और गंभीर मामला है। भारत सरकार इस घटना को लेकर बहुत गंभीर है। मैं सरकार की ओर से इस बात का विश्वास दिलाता हूं कि इस घटना की पूरी जांच की जाएगी। गिरफ्तार आरोपी के मंसूबों के बारे में गहराई से पता किया जाएगा। इस तरह की घटना दोबारा न हो और फारूक अब्दुल्ला के जीवन की रक्षा से जुड़ा हर कदम जरूर उठाया जाएगा।नड्डाने की खड़गे के आरोपों की निंदाइसी बीच, जेपी नड्डा ने मल्लिकार्जुन खड़गे के आरोपों को लेकर कांग्रेस की निंदा करते हुए कहा, हर घटना को राजनीतिक चश्मे से देखना और उसे राजनीतिक रूप देना उचित नहीं है। पूर्व राज्य का दर्जा नहीं मिला, इस कारण यह घटना हुई, इस निष्कर्ष पर पहुंचना और सरकार पर गंभीर आरोप लगाना निंदनीय है।जेपी नड्डा ने अपने जवाब में आगे कहा, विपक्ष के नेता की ओर से यह कहना कि सरकार का मंसूबा उनकी (फारूक) की जान लेना है। इस पर मेरा कहना है कि यह कांग्रेस की सोच का नतीजा है। हमेशा से कांग्रेस के मंसूबे इसी तरह के रहे हैं।

मिडिल ईस्ट तनाव:मप्र में गहराया गैस संकट, सप्लाई 15 फीसदी पर सिमटी, सिलेंडर के लिए लंबी कतार
भोपाल। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते संकट की आंच रसोई तक पहुंच गई है। मध्यप्रदेश में भी ऐसे ही हालात देखने को मिल रहे हैं। राजधानी भोपाल सहित सूबे के लाखो रसोई गैस उपभोक्ता गैस सिलेंडर के लिए परेशान हो रहे हैं। गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं। यही नहीं आॅयल कंपनियों ने दावा किया है कि संकट के चलते प्रदेश में केवल 15 फीसदी ही गैस उपलब्ध है। ऐसे में प्रदेश में गैस संकट और गहराने की आशंका बढ़ गई है। जानकारी के मुताबिक सीमित सप्लाई के कारण कमर्शियल सिलेंडर अब सिर्फ अस्पतालों, सेना और पुलिस कैंटीन, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट कैंटीन और बस स्टैंड के भोजनालयों को ही उपलब्ध कराए जाएंगे। खाद्य विभाग जरूरत के अनुसार इन संस्थानों की सूची ऑयल कंपनियों को देगा। वहीं होटल, मैरिज गार्डन, सराफा कारीगरों और भोपाल-इंदौर मेट्रो परियोजनाओं को फिलहाल कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल पाएंगे। मेट्रो निर्माण में वेल्डिंग के लिए एलपीजी का उपयोग होता है, जिससे काम प्रभावित होने की आशंका है।जिम्मेदार अधिकारियों के दावे के उलट जमीनी हकीकतभोपाल के फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन के मुताबिक सरकार के नए निर्देशों के तहत अब 25 दिन पूरे होने के बाद ही गैस सिलेंडर की बुकिंग की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि सर्वर की दिक्कत और कुछ लोगों द्वारा अतिरिक्त सिलेंडर जमा कर लेने के कारण भी एजेंसियों के बाहर भीड़ बढ़ रही है। वहीं जिम्मेदार अधिकारियों ने दावा किया है कि घरेलू गैस की सप्लाई में कोई बड़ी दिक्कत नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई शहरों में सिलेंडर के लिए लंबी वेटिंग देखी जा रही है। कई गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की भीड़ लग रही है। टीटी नगर और 5 नंबर इलाके में सिलेंडर के लिए लोगों को काफी भागदौड़ करनी पड़ी।भोपाल में हैं डेढ़ हजार होटल-रेस्टोरेंटभोपाल होटल एसोसिएशन के तेजकुल पाल सिंह पाली के अनुसार राजधानी में करीब डेढ़ हजार होटल और रेस्टोरेंट हैं, जहां रोजाना 2 से 2.5 हजार सिलेंडर की खपत होती है। जिन होटलों में थोड़ा स्टॉक है, वे भी मुश्किल से 48 घंटे तक काम चला पाएंगे। इसके बाद कई होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की स्थिति में आ सकते हैं। होटल संचालकों ने सरकार से कमर्शियल गैस की सप्लाई बहाल करने की मांग की है, लेकिन फिलहाल सरकार ने केवल इमरजेंसी सेवाओं को प्राथमिकता देने की बात कही है।बाजार पर भी दिखाई देने लगा गैस संकट का असरइस बीच गैस संकट का असर बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण दाल, मसाले और ड्राई फ्रूट्स के दाम बढ़ गए हैं। व्यापारियों के अनुसार हरी मूंग, मसूर, चना दाल और तूअर दाल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। वहीं मिर्च और धनिया भी महंगे हो गए हैं। पिस्ता, अंजीर और केसर जैसे ड्राई फ्रूट्स के दाम भी तेजी से बढ़े हैं, क्योंकि इनका आयात ईरान के रास्ते होता है।कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पैकेजिंग सामग्री हुई महंगीव्यापारियों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पैकेजिंग सामग्री भी महंगी हो गई है। प्लास्टिक से बने पैकेजिंग आइटम के दामों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आम लोगों को और ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

यह लव जिहाद है या जवानी का इश्क... :महाकुंभ की चर्चित मोनालिसा ने मुस्लिम दोस्त से रचाई शादी, पिता पर लगाया गंभीर आरोप
तिरुवनंतपुरम। यह लव जिहाद है या जवानी की दहलीज पर कदम रखने का इश्क... प्रयागराज महाकुंभ 2025 में रुद्राक्ष की माला बेचते हुए सोशल मीडिया पर वायरल हुई मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर की रहने वाली मोनालिसा भोंसले ने केरल में कथित तौर पर अपने मुस्लिम दोस्त फरमान खान से मंदिर में शादी कर ली। शादी से पहले बुधवार को दोनों तिरुवनंतपुरम के थंपानूर पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। यहां मोनालिसा ने पुलिस से सुरक्षा मांगी और कहा कि उनके पिता उन्हें जबरन घर वापस ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार मोनालिसा ने कहा कि वह बालिग हैं। अपनी मर्जी से फरमान के साथ रहना और उससे शादी करना चाहती हैं। इधर, मोनालिसा को अपनी फिल्म में मौका देने वाले निर्देशक सनोज मिश्रा ने इसे लव जिहाद करार दिया है। फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में केरल पहुंची हैं मोनालिसा मोनालिसा इन दिनों अपनी पहली फिल्म द डायरी ऑफ मणिपुर की शूटिंग के सिलसिले में केरल आई हुई हैं। इसी दौरान फरमान खान से उनकी मुलाकात हुई। दोनों ने बताया कि फिल्म में साथ काम करने के दौरान बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे रिश्ता प्यार में बदल गया। फरमान खान ने कहा कि हम दोनों एक फिल्म में साथ काम कर रहे थे, वहीं हमारी बातचीत शुरू हुई। पहले मोनालिसा ने मुझे प्रस्ताव दिया। मैंने मना कर दिया, लेकिन बाद में हम दोनों को गहरा प्यार हो गया। मोनालिसा के मुताबिक उनका और फरमान का रिश्ता करीब छह महीने पुराना है। उन्होंने बताया कि घरवाले गांव में ही किसी और से उनकी शादी कराना चाहते थे, जो उन्हें मंजूर नहीं था।फिल्म निर्देशक ने लगाया साजिश का आरोपमोनालिसा को फिल्म में मौका देने वाले डायरेटर सनोज मिश्रा ने इस शादी पर फेसबुक पोस्ट में नाराजगी जताई है। उन्होंने लिखा कि जिस लड़की को मौका देने के लिए उन्होंने 10 करोड़ रुपए का कर्ज लेकर फिल्म बनाई, उसने एक मुस्लिम युवक के साथ भागकर सब बर्बाद कर दिया। उन्होंने इसे श्लव जिहाद्य बताते हुए इसके पीछे साजिश होने का आरोप लगाया।

वैदिक जयोतिषः कल से मीन राशि में अस्त होंगे न्याय के दवेता शनि,:इतने दिन चुनौतीपूर्ण रहेंगे इन राशि वालों को, नकारात्मक परिस्थितियां आ सकती है सामने
वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को कर्म, न्याय और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। जब शनि अपनी चाल बदलते हैं या अस्त होते हैं, तो इसका प्रभाव कई राशियों के जीवन पर देखने को मिलता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार शुक्रवार यानि 13 मार्च 2026 से शनि मीन राशि में अस्त हो जाएंगे और लगभग 35 दिनों तक यानी 17 अप्रैल 2026 तक इसी अवस्था में रहेंगे। इस दौरान कुछ राशियों के लिए समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विशेष रूप से तुला, मकर और कुंभ राशि के जातकों को इस अवधि में अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।तुला राशि: तुला राशि में शनि को उच्च का ग्रह माना जाता है, इसलिए इस राशि के लोगों पर शनि का प्रभाव विशेष रूप से देखा जाता है। जब शनि अस्त होते हैं तो कुछ नकारात्मक परिस्थितियां सामने आ सकती हैं। इस दौरान अचानक खर्च बढ़ने की संभावना है, जिससे आर्थिक संतुलन बिगड़ सकता है। पैसों के लेन-देन में सावधानी रखना बेहद जरूरी होगा। इसके अलावा बातचीत करते समय शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि छोटी सी बात भी गलतफहमी पैदा कर सकती है। परिवार और कार्यस्थल दोनों जगह धैर्य बनाए रखना बेहतर रहेगा। ज्योतिष के अनुसार शनिवार के दिन सरसों के तेल का दान करना इस समय लाभकारी माना जाता है।मकर राशि: मकर राशि के स्वामी शनि ग्रह हैं, इसलिए शनि के अस्त होने का प्रभाव इस राशि के लोगों पर ज्यादा महसूस हो सकता है। इस समय आत्मविश्वास में थोड़ी कमी आ सकती है और कामकाज में मन भी कम लग सकता है। अगर कोई कानूनी मामला चल रहा है तो उसमें देरी या अड़चन आने की संभावना बन सकती है। आर्थिक मामलों में सतर्क रहना जरूरी होगा, इसलिए उधार लेने या देने से बचना बेहतर रहेगा। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को सफलता पाने के लिए पहले से अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। इस दौरान नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना गया है।कुंभ राशि: कुंभ राशि के स्वामी भी शनि ही हैं, इसलिए शनि के अस्त होने का असर इस राशि के जातकों पर भी देखने को मिल सकता है। करियर और कारोबार से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेना जरूरी होगा, क्योंकि जल्दबाजी में लिया गया निर्णय परेशानी का कारण बन सकता है। इस समय व्यवहार थोड़ा कठोर हो सकता है, जिससे रिश्तों पर असर पड़ सकता है। आर्थिक मामलों में लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है। प्रेम और वैवाहिक जीवन में भी छोटी-मोटी परेशानियां आ सकती हैं। ऐसे में काले कुत्ते को रोटी खिलाना शुभ माना जाता है।

देवी भक्ति का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से:घटस्थापना के लिए हैं दो शुभ मुहूत, भक्तों के लिए खास रहेगी इस बार की नवरात्रि
सनातन धर्म में चैत्र नवरात्र का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है और नौ दिनों तक माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। होली के बाद आने वाला यह पहला प्रमुख धार्मिक पर्व होता है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार से हो रही है, जो भक्तों के लिए अत्यंत शुभ मानी जा रही है। इस दिन कलश स्थापना के साथ नवरात्र के व्रत की शुरुआत की जाएगी।पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होकर 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों के निर्धारण में उदयातिथि का विशेष महत्व होता है। इसी कारण 19 मार्च को ही चैत्र नवरात्र का आरंभ माना जाएगा और इसी दिन श्रद्धालु घटस्थापना कर व्रत रखेंगे। नवरात्र के पहले दिन माता दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाती है।इस वर्ष चैत्र नवरात्र की शुरुआत तीन विशेष शुभ योगों में हो रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन शुक्ल योग, ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इन योगों को अत्यंत शुभ माना जाता है और इनकी उपस्थिति में किए गए पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक कार्य विशेष फलदायी माने जाते हैं।कलश स्थापना या घटस्थापना के लिए 19 मार्च को दो विशेष शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। पहला और सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। यदि किसी कारणवश इस समय पूजा न कर पाएं तो दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है, जो 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।इसके अलावा नवरात्र के पहले दिन कई अन्य शुभ मुहूर्त भी रहेंगे। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा, जबकि प्रातः संध्या का समय सुबह 5 बजकर 15 मिनट से 6 बजकर 26 मिनट तक होगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 29 मिनट से 6 बजकर 53 मिनट तक और सायं संध्या 6 बजकर 32 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। इसके अतिरिक्त अमृत काल रात 11 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 03 मिनट तक तथा निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।इन शुभ योगों और मुहूर्तों के संयोग में शुरू हो रहा चैत्र नवरात्र भक्तों के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है। श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा कर सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करेंगे।

मिडिल ईस्ट संकट में भारत की बड़ी डिप्लोमैटिक सफलता:स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता, जयशंकर की मेहनत लाई रंग
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता सामने आई है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच हुई अहम टेलीफोनिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। इस फैसले को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाला बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। हाल ही में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ा है। सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में करीब 90 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।भारत की सक्रिय कूटनीति आई कामऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भारत ने सक्रिय कूटनीति का परिचय देते हुए ईरान के साथ संवाद स्थापित किया। विदेश मंत्री जयशंकर और अराघची के बीच हुई बातचीत का मुख्य उद्देश्य इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखना और कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाना था। बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय टैंकरों को इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दे दी, जिससे भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति की चिंता काफी हद तक कम हो गई है।जयंशकर ने कई अन्य वैश्विक शक्तियों से भी की बातसूत्रों के मुताबिक, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मुद्दे पर केवल ईरान से ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख वैश्विक शक्तियों से भी संपर्क साधा। उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो से भी बातचीत कर समुद्री व्यापारिक मार्गों को खुला रखने और वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया।इन देशों के जहाजों पर सख्त प्रतिबंध लागूगौरतलब है कि ईरान ने यह विशेष रियायत ऐसे समय में दी है जब अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर इस मार्ग से गुजरने को लेकर सख्त प्रतिबंध लागू हैं। हालांकि भारत के साथ अपने विशेष संबंधों को ध्यान में रखते हुए ईरान ने भारतीय जहाजों को छूट दी है। इसे भारत की मजबूत और संतुलित विदेश नीति का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

पूर्ववर्ती सरकारों ने दशकों तक की मछुआरा समुदाय की उपेक्षा:केरल में बोले पीएम मोदी, हमारे लिए अहम है मछुआरों की सुरक्षा
कोच्चि। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के कोच्चि में अखिल केरल धीवर सभा के स्वर्ण जयंती सम्मेलन में भाग लिया। सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 50 वर्षों में धीवर सभा ने मछुआरा समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य किया है।प्रधानमंत्री ने कहा, मलयाली लोग लंबे समय से केरल का नाम बदलकर केरलम रखने की मांग कर रहे थे। केंद्र में एनडीए सरकार द्वारा इसे मंजूरी मिलने के बाद मैं आप सभी के चेहरों पर खुशी देख सकता हूं। इस खूबसूरत राज्य को मलयाली संस्कृति के अनुसार उसका उचित नाम मिल गया है। मैं केरलम के लोगों को बधाई देता हूं।पीएम मोदी ने कहा, हमें मत्स्य पालन में नई संभावनाओं को साकार करने और मछुआरों के जीवन स्तर में सुधार करने की आवश्यकता है। समुद्र से संबंधित अर्थव्यवस्था केवल पारंपरिक मछली पकड़ने तक ही सीमित नहीं है। मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में भी नए अवसर उभर कर सामने आए हैं। केरल में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान पूरे देश ने मछुआरा समुदाय के प्रयासों को देखा। आपने फंसे हुए लोगों को बचाया और जरूरतमंदों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाई। इसीलिए पूरा देश मछुआरा समुदाय के साहस, सेवा और समर्पण को सम्मानपूर्वक याद करता है।प्रधानमंत्री ने कहा, हमारा संकल्प है कि केरलम के प्रत्येक परिवार तक समृद्धि पहुंचे और केरलम की अर्थव्यवस्था नई ऊंचाइयों को प्राप्त करे। पिछली सरकारों ने दशकों तक मछुआरा समुदाय की उपेक्षा की। लेकिन अब एनडीए सरकार उनकी प्रगति और क्षमताओं को असीमित स्तर तक बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार ने मछुआरा समुदाय की क्षमता और नीली अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका को पहचाना है। भाजपा-एनडीए सरकार ने ही मत्स्य पालन के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन किया है। उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत केरल के लिए लगभग 1400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।पीएम ने कहा, समुद्र में जाने वाले मछुआरों की सुरक्षा भी हमारे लिए महत्वपूर्ण है। पहले हमारे मछुआरे भाई-बहन खुले समुद्र में जाते थे, तो उनके घरवाले उनके वापस आने तक चिंता और डर में डूबे रहते थे, क्योंकि समुद्र में मौसम को लेकर हमेशा आशंकाएं बनी रहती थीं। लेकिन अब ऐसा नहीं है। हमने सैटेलाइट के जरिए समुद्र में जाने वाले मछुआरे भाई-बहनों की सुरक्षा को और मजबूत किया है। तकनीक भी मछुआरा समुदाय की एक ताकत है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है। इसके माध्यम से मछुआरे, व्यापारी और निर्यातक एक ही प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कर सकते हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करना भी उनके लिए आसान हो गया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, हमें मत्स्य पालन में नई संभावनाओं को साकार करने और मछुआरों के जीवन स्तर में सुधार करने की आवश्यकता है। मछुआरों के कल्याण के लिए अखिल केरल धीवर सभा का कार्य सराहनीय है और यह तटीय समुदायों को सशक्त बनाने के एनडीए के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

रचा इतिहास:50 साल बाद अमेरिका में नई ऑयल रिफाइनरी, ट्रंप ने भारतीय साझेदार को सराहा
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका ऑयल रिफाइनरी खोलने का जा रहा है, जो टेक्सास के ब्राउन्सविल होगी। उन्होंने भारत की प्रमुख निजी ऊर्जा कंपनी को भी धन्यवाद दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सोशल ट्रुथ पर पोस्ट किया, अमेरिका असली एनर्जी दबदबे की ओर लौट रहा है। आज मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिका टेक्सास के ब्राउन्सविले में 50 सालों में पहली नई ऑयल रिफाइनरी खोलने जा रहा है। यह एक ऐतिहासिक 300 अरब डॉलर की डील है, जो अमेरिका के इतिहास की सबसे बड़ी डील है। इस निवेश के लिए हमारे सहयोगी देश भारत और उनकी निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस का शुक्रिया। हमारे अमेरिका फर्स्ट एजेंडे की वजह से स्ट्रीमलाइनिंग परमिट और टैक्स कम करने से देश में अरबों डॉलर की डील हुई है।ट्रंप ने रिलायंस का किया धन्यवादउन्होंने आगे लिखा, यह अमेरिकी कामगारों, ऊर्जा क्षेत्र और दक्षिण टेक्सास के लोगों के लिए एक बड़ी जीत है। इस निवेश के लिए भारत में हमारे सहयोगी और उनकी सबसे बड़ी प्राइवेट एनर्जी कंपनी रिलायंस का धन्यवाद। यह हमारे अमेरिका फर्स्ट एजेंडा, परमिट को आसान बनाने और टैक्स कम करने की वजह से है, जिससे हमारे देश में अरबों डॉलर की डील्स वापस आ रही हैं।नई रिफायनरी अमेरिकी बाजारों को देगी ताकतडोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट में लिखा, ब्राउन्सविले पोर्ट पर एक नई रिफाइनरी अमेरिकी बाजारों को ताकत देगी। यह हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगी और अमेरिकी एनर्जी प्रोडक्शन को बढ़ाएगी व अरबों डॉलर का आर्थिक प्रभाव डालेगी। यह दुनिया की सबसे साफ रिफाइनरी होगी। यह ग्लोबल एक्सपोर्ट को बढ़ावा देगी और उस इलाके में हजारों नौकरियां और प्रगति लाएगी, जो इसके लायक है। अमेरिकी एनर्जी का दबदबा ऐसा ही दिखता है। अमेरिका फर्स्ट, हमेशा! ट्रंप ने इसे अमेरिका की ऊर्जा प्रभुत्व की दिशा में बड़ा कदम बताया। इसके साथ ही अमेरिका फर्स्ट के नारे को फिर से दोहराया।

1983-2011 के सामने फीका टी20 वर्ल्ड कप!:महशहूर कमेंटेटर के बयान से मचा बवाल
नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब टीम इंडिया ने अपने नाम कर लिया है। अहमदाबाद के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में बीते रविवार को खेले गए फाइनल मैच में भारत ने 96 रनों से शानदार जीत हासिल की और तीसरी बार ये खिताब अपने नाम कर लिया। लेकिन टीम इंडिया के चैंपियन बनने के बाद पूर्व क्रिकेटर और मौजूदा दौर के मशहूर कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने कुछ ऐसा बयान दे दिया है, जिसको लेकर वह सुर्खियों में आ गए हैं। दरअसल संजय मांजरेकर की नजर में वनडे के 2 विश्व कप (1983, 2011) की तुलना में टी20 विश्व कप (2007, 2024 और 2026) की जीत कम अहमियत रखती है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, ष्समय के साथ हमें हर साल दिए जाने वाले इन विश्व कप खिताबों को सही नजरिए से देखना होगा। भारत की टी20 विश्व कप जीत, कपिल देव की कप्तानी में 1983 और धोनी की कप्तानी में 2011 की 50 ओवर की विश्व कप जीत के मुकाबले, अपनी असली चुनौती और पवित्रता के मामले में कहीं नहीं ठहरती।भारतीय टीम के टी20 विश्व कप 2026 जीतने के ठीक बाद आया मांजरेकर का यह बयान उन्हें फिर से आलोचना के घेरे में ले आया है। मांजरेकर को भारतीय क्रिकेट फैंस की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय क्रिकेट टीम ने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में वेस्टइंडीज को हराकर अपना वनडे विश्व कप जीता था। दूसरा वनडे विश्व कप जीतने में भारत को 28 साल का समय लगा। यह इंतजार 2011 में समाप्त हुआ जब एमएस धोनी की कप्तानी में भारत ने श्रीलंका को हराकर विश्व कप जीता। भारत ने अपना पहला टी20 विश्व कप एमएस धोनी की कप्तानी में ही 2007 में जीता था। दूसरे टी20 विश्व कप के लिए भारतीय टीम को 17 साल का इंतजार करना पड़ा। रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका को फाइनल में हराकर टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता था। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम ने 8 मार्च को अहमदाबाद में न्यूजीलैंड को फाइनल में हराकर टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता। टीम इंडिया लगातार 2 टी20 विश्व कप और कुल 3 टी20 विश्व कप जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बनी। इसके अलावा अपने घर में टी20 विश्व कप जीतने का रिकॉर्ड भी टीम इंडिया के नाम दर्ज हो गया।

तेल के सबसे अहम रास्ते पर अमेरिका का स्टैंड:हॉर्मुज स्ट्रेट खुला रखने की खाई कसम, ईरान को चेतावनी भी
वाशिंगटन। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान में छिड़ी जंग के चलते तेल-गैस आयात में रुकावट का असर दुनिया भर में दिखाई देने लगा है। इस संकट के बीच व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित करने की अनुमति नहीं देंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे अमेरिकी सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” का एक मुख्य लक्ष्य इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दैनिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने दोहराया है कि होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल की आपूर्ति लगातार जारी रहनी चाहिए, ताकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को उनकी ऊर्जा जरूरतें मिलती रहें।अमेरिका ने ईरान को दी चेतावनीउन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान इस अहम समुद्री रास्ते को बंद करने की कोशिश करता है, तो उसे कड़ी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। लेविट ने कहा कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट में तेल या सामान की आवाजाही रोकने की कोशिश करता है, तो दुनिया की सबसे ताकतवर सेना उसे अब तक से भी कई गुना ज्यादा सख्त जवाब देगी। उन्होंने कहा, ष्होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी चेकपॉइंट्स में से एक है, जहां से दुनिया भर में तेल शिपमेंट का एक बड़ा हिस्सा जाता है। वहाँ कोई भी रुकावट तेल की कीमतों को तेजी से बढ़ा सकती है और इंटरनेशनल मार्केट को अस्थिर कर सकती है।लेविट ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन को पहले से अंदेशा था कि ईरान संघर्ष के दौरान ऊर्जा बाजारों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है। इसी वजह से सरकार ने पहले से कई सुरक्षा कदम तैयार कर रखे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को पूरी उम्मीद थी कि ईरान की सरकार वैश्विक बाजारों को प्रभावित करने की कोशिश करेगी।ट्रंप ने खाड़ी में काम कर रहे टैंकरों को जोखिम बीमा देने की पेशकश इन तैयारियों के तहत अमेरिकी प्रशासन ने खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए कुछ कदम उठाए हैं। लेविट के मुताबिक, अब तक ट्रंप प्रशासन ने खाड़ी में काम करने वाले टैंकरों को राजनीतिक जोखिम बीमा देने की पेशकश की है। इसके अलावा संकट के दौरान तेल की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए अमेरिकी सरकार ने कुछ नियमों में अस्थायी राहत भी दी है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने तेल से जुड़े कुछ प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से ढील दी है।स्थिति पर नजर रखे हुए हैं ट्रंप व्हाइट हाउस ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नौसेना तेल टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकालने के लिए उनके साथ चल सकती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा और ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए आगे के कदमों पर भी लगातार विचार कर रहा है। लेविट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी ऊर्जा टीम बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और उद्योग जगत के नेताओं से बातचीत भी कर रहे हैं। साथ ही अमेरिकी सेना को भी निर्देश दिए गए हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए अतिरिक्त विकल्प तैयार किए जाएं।

मिडिल ईस्ट वार:चाय-नाश्ते से लेकर चाट तक पहुंची महंगाई की आंच, एलपीजी संकट ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत में भी साफ दिखाई देने लगा है। खासतौर पर एलपीजी (लिक्विड पेट्रोलियम गैस) की सप्लाई पर पड़े असर के कारण देश के कई शहरों में महंगाई बढ़ती नजर आ रही है। गैस कंपनियों ने एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है और कमर्शियल सिलेंडर के ऑर्डर पर रोक से छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े होटल-रेस्तरां तक चिंता में हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।चाय-नाश्ते से लेकर रेस्तरां में मिलने वाले खाने तक की कीमतें बढ़ गई हैं। कई जगहों पर जो चाय पहले 10 रुपये में मिलती थी, वह अब 15 से 20 रुपये तक पहुंच गई है। गैस की किल्लत के कारण नाश्ते की चीजों के दाम भी बढ़ गए हैं और कई दुकानदारों ने मजबूरी में अपने दाम बढ़ा दिए हैं।सप्लाई प्रभावित होने से देश में एलपीजी संकट गहरायादरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट में तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो गई है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है और इन आयात का 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से आता है। ऐसे में सप्लाई प्रभावित होने से देश में एलपीजी संकट गहराने लगा है।भारत में हर साल 31 मिलियन टन एलपीजी की होती है खपतभारत में हर साल करीब 31 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है। इसमें से लगभग 87 प्रतिशत गैस घरेलू उपयोग के लिए जाती है, जबकि बाकी हिस्सा होटल, ढाबों और रेस्तरां में इस्तेमाल होता है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए तेल कंपनियों को निर्देश दिए हैं, जिसके कारण कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हो रही है।कमर्शियल सिलेंडर की कमी का सबसे ज्यादा असर छोटे कारोबारियों पर पड़ा है। दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। कई दुकानदारों का कहना है कि ब्लैक मार्केट में 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर 2500 से 2800 रुपये तक में बिक रहा है। कुछ जगहों पर सिलेंडर लेने के लिए बोली तक लगाई जा रही है।खाने-पीने की चीजों पर दिख रहा गैस की कमी का असरगैस की कमी का असर खाने-पीने की चीजों पर भी साफ दिख रहा है। जहां पहले पूरी-सब्जी की प्लेट 25 रुपये में मिलती थी, वह अब 30 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, गोलगप्पे की प्लेट में भी कटौती देखने को मिली है। कई जगह 20 रुपये में पहले 8 गोलगप्पे मिलते थे, अब उसी कीमत में केवल 5 गोलगप्पे दिए जा रहे हैं।बड़े होटल और रेस्तरां भी इस संकट से अछूते नहीं हैं। कई रेस्तरां ने अपने मेन्यू में बदलाव करना शुरू कर दिया है। कुछ जगहों पर थाली से मटर पनीर जैसे आइटम हटा दिए गए हैं, जबकि कहीं थाली की कीमत बढ़ा दी गई है। कई होटल गैस की जगह इलेक्ट्रिक तंदूर और इंडक्शन जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करने लगे हैं।मुंबई में 20 फीसदी तक होटल रेस्तरां बंदमुंबई होटल एसोसिएशन के अनुसार, एलपीजी संकट के कारण लगभग 20 प्रतिशत होटल और रेस्तरां पहले ही बंद हो चुके हैं। यदि जल्द ही गैस सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो यह आंकड़ा 50 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। हालांकि केंद्र सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए तेल कंपनियों के अधिकारियों की एक समिति बनाई है, जो एलपीजी सप्लाई की समीक्षा कर रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर कारोबारियों का कहना है कि संकट अभी भी बना हुआ है और इससे आम लोगों पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ रहा है।

ईरान-इजराइल का असरः:कमर्शियल गैस सिलेंडर को लेकर MP में हाहाकार, संकट में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसायी, शादियां प्रभावित होने का डर
भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले दो दिनों से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई ठप होने से होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसाय गंभीर संकट में आ गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ईरान-इजराइल तनाव के असर से गैस सप्लाई प्रभावित बताई जा रही है। इस स्थिति के कारण खासकर शादी-ब्याह वाले घरों और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई है।राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों में अगले 20 दिनों के भीतर हजार से ज्यादा शादियां होने वाली हैं। ऐसे में कैटरर्स के सामने सबसे बड़ी समस्या खाना बनाने के लिए ईंधन की उपलब्धता की है। कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई शुरू नहीं हुई तो हालात इमरजेंसी जैसे हो सकते हैं।इंदौर में कमर्शियल सिलेंडर संकट को लेकर खाद्य विभाग ने कैटरिंग संगठनों के साथ बैठक की। बैठक के बाद खाद्य नियंत्रक एमएल मारू ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों को फिलहाल पारंपरिक ईंधन स्रोतों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। उन्होंने लकड़ी, कंडे और पारंपरिक भट्ठी जैसे साधनों से खाना बनाने पर जोर दिया है।होटल और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों ने बयां किया दर्दहालांकि, होटल और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि आधुनिक किचन व्यवस्था में अचानक पारंपरिक ईंधन पर लौटना आसान नहीं है। इंदौर के एक रिजॉर्ट के जनरल मैनेजर मुकेश लाड ने बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिलने से उनके काम पर सीधा असर पड़ रहा है। केरोसिन आसानी से उपलब्ध नहीं है और आज के महाराज व हलवाई लकड़ी पर खाना बनाने के अभ्यस्त भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि स्थिति एक-दो दिन और बनी रही तो बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।कैटरिंग संगठन ने लिया बड़ा फैसलास्थिति को देखते हुए मध्य प्रदेश कैटरिंग संगठन ने भी एक बड़ा फैसला लिया है। संगठन के अध्यक्ष उमेश जैन के अनुसार, शादियों में अब 100 तरह के व्यंजन बनाने के बजाय केवल 15 प्रकार के पकवान तैयार किए जाएंगे, ताकि सीमित ईंधन में भी भोजन व्यवस्था की जा सके। प्रशासन ने यह भी तय किया है कि जैसे ही कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई शुरू होगी, सबसे पहले अस्पतालों और हॉस्टलों को गैस दी जाएगी, उसके बाद कैटरिंग व्यवसाय को प्राथमिकता मिलेगी।संकट का असर ग्वालियर मेंप्रदेश के कई जिलों में इस संकट का अलग-अलग असर देखने को मिल रहा है। ग्वालियर शहर में ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर अब सीधे तौर पर दिखाई देने लगा है। इसका प्रभाव आम लोगों के जनजीवन पर भी पड़ता नजर आ रहा है। सबसे ज्यादा असर इन दिनों शादियों पर पड़ रहा है।बताया जा रहा है कि देर रात हुई शादियों और आज होने वाली शादियों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी हो गई है। इसके चलते कैटरर्स को लकड़ी की भट्टी और डीजल की भट्टी पर खाना बनाना पड़ रहा है। शहर के बड़े कैटरिंग व्यवसायी बंटी सप्रा का कहना है कि केंद्र सरकार ने गैस सिलेंडरों की जमाखोरी रोकने के लिए सख्ती शुरू कर दी है, जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारी भी सक्रिय हो गए हैं। कैटरर्स का कहना है कि अगर जिस घर में शादी है, वहां से गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाता है, तभी वे ऑर्डर लेंगे। कई कैटरर्स ने नई बुकिंग लेने से भी इनकार कर दिया है और कुछ जगह ऑर्डर रद्द करने की स्थिति बन रही है।मुरैना में घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई सामान्यमुरैना में घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई फिलहाल सामान्य बनी हुई है, हालांकि कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई दो दिनों से बंद थी। अब इंडियन ऑयल के गोदाम में सिलेंडरों से भरी एक गाड़ी पहुंचने के बाद सप्लाई शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।बड़वानी में घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग की आशंकावहीं बड़वानी में कमर्शियल सिलेंडरों की कमी के कारण कई गैस एजेंसियों ने नए कनेक्शन देना फिलहाल बंद कर दिया है। कुछ जगहों पर घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग की आशंका भी जताई जा रही है। धार जिले में गैस एजेंसियों के बाहर सिलेंडर लेने के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं और उपभोक्ताओं का कहना है कि बुकिंग कराने के बाद करीब 21 दिन में सिलेंडर मिल रहा है।छतरपुर में रिटायर्ड शिक्षक के घर पर मिला 25 सिलेंडरों का अवैध भंडारइस बीच छतरपुर में प्रशासन ने एक रिटायर्ड शिक्षक के घर छापा मारकर 25 गैस सिलेंडरों का अवैध भंडार पकड़ा है। इनमें 3 भरे हुए और 22 खाली सिलेंडर मिले हैं। प्रशासन को शक है कि इन सिलेंडरों का इस्तेमाल काला बाजारी या अवैध रिफिलिंग के लिए किया जा रहा था। मामले की जांच जारी है।मप्र में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसाय पर बढ़ा दबाव कुल मिलाकर कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई ठप होने से प्रदेश में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसाय पर दबाव बढ़ गया है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सप्लाई सामान्य होते ही प्राथमिकता के आधार पर वितरण शुरू किया जाएगा।

माथे पर त्रिपुंड, सिर पर नया मुकुट:निराकार से साकार रूप के दर्शन कर निहाल हुए भोले के भक्त, जय महाकाल के जयकारों से गूंजा परिसर
उज्जैन। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि बुधवार को विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार किया गया। इसे देखने के लिए भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लगी थीं। देश-विदेश से आए श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन और उनके विशेष शृंगार को देखने के लिए उत्सुक दिखे। सुबह 4 बजे की प्रसिद्ध भस्म आरती के समय मंदिर परिसर पूरी तरह से भक्तों से भर गया था। पूरा परिसर जय महाकाल के जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति और आस्था साफ दिखाई दे रही थी।महानिर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की भस्ममध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में सुबह की भस्म आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा की जाती है। इस आरती में महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। वहीं, भस्म आरती होने के बाद बाबा का जलाभिषेक किया गया, पंचामृत से पूजा हुई, और पवित्र भस्म से उनका विशेष स्नान भी कराया गया।रंग-बिरंगे फूलों की मालाओं ने श्रुंगार को बनाया आकर्षकअभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई। इसके बाद बाबा का विशेष शृंगार किया गया, जिसमें महाकाल का मुखारविंद (कमल के समान सुंदर मुख) बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया। बाबा के माथे पर स्पष्ट त्रिपुंड व माथे पर चंद्रमा सुसज्जित किया गया और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा को फूलों की माला पहनाई गई। साथ ही ताजा बिल्वपत्र (बेलपत्र) चढ़ाए गए और रंग-बिरंगे फूलों की मालाओं से पूरे शृंगार को और भी आकर्षक बनाया गया। यह नजारा देखकर हर किसी का मन प्रसन्न हो गया।12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है महाकालेश्वर मंदिरमहाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे बहुत खास माना जाता है। यह दुनिया का एकमात्र दक्षिणमुखी स्वयंभू शिवलिंग है। भगवान शिव यहां कालों के काल महाकाल के रूप में विराजमान हैं। महाकाल के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर की वास्तुकला में कई शैलियों का भव्य संगम देखने को मिलता है। यहां ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली अलौकिक भस्म आरती के दर्शन हेतु देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं।

हिन्दू धर्म में शीतला अष्टमी का विशेष महत्व:सच्चे मन और श्रद्धा भक्ति करने पर बनी रहती है मां की कृपा, बचें इस तरह की गलतियों से
चैत्र माह में मनाया जाने वाला शीतला अष्टमी का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन माता शीतला की पूजा-अर्चना की जाती है और उनसे परिवार के सदस्यों को रोगों और बीमारियों से सुरक्षित रखने की प्रार्थना की जाती है। मान्यता है कि मौसम परिवर्तन के समय कई तरह की संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए शीतला माता की पूजा कर स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इस वर्ष शीतला अष्टमी का पर्व 11 मार्च, बुधवार को मनाया जाएगा।शीतला अष्टमी से एक दिन पहले शीतला सप्तमी मनाई जाती है। इस दिन घरों में विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें दाल-भात, पूरी, दही, लस्सी और हरी सब्जियां शामिल होती हैं। परंपरा के अनुसार इन सभी व्यंजनों को अगले दिन ठंडा और बासी रूप में खाया जाता है। शीतला अष्टमी के दिन इन्हीं पकवानों का भोग माता शीतला को अर्पित किया जाता है, जिसके बाद परिवार के सदस्य प्रसाद के रूप में उसे ग्रहण करते हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतला अष्टमी के दिन घर में चूल्हा या गैस नहीं जलाना चाहिए। इसलिए जो भी भोजन बनाना होता है, वह एक दिन पहले ही तैयार कर लिया जाता है। इस दिन ठंडा और बासी भोजन करने की परंपरा है, जिसे शरीर के लिए ठंडक देने वाला माना जाता है।इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद शीतला माता के मंदिर जाकर दर्शन करना चाहिए और विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान माता को हल्दी, दही और बाजरा का भोग लगाया जाता है। कई स्थानों पर नीम के पत्तों का भी विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि नीम स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है और रोगों से बचाव में सहायक होता है।शीतला अष्टमी का पर्व केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि यह स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी देता है। इस दिन आखिरी बार बासी भोजन करने की परंपरा मानी जाती है। इसके बाद लंबे समय तक बासी भोजन करने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन घर में पूजा करने के साथ-साथ शीतला माता के मंदिर जाना भी शुभ माना जाता है। इसके अलावा भगवान शिव की पूजा करने का भी विधान बताया गया है। कहा जाता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से की गई पूजा से माता शीतला की कृपा बनी रहती है और परिवार को रोगों से सुरक्षा मिलती है।

बामुलाहिजा....:कांग्रेस की एक कॉलम की हार, राज्यसभा के लिए किस दिग्गज का नया दांव, पुलिस ऑफिसर्स मेस की दास्तान....
TV27 पर हर सप्ताह पढ़ें संदीप भम्मरकर का विशेष काॅलमविजयपुर में कांग्रेस के जीते हुए विधायक को नामांकन फॉर्म में आपराधिक जानकारी छिपाने की वजह से अपनी विधायकी गंवानी पड़ी। अदालत का फैसला आया तो कांग्रेस इसे कानूनी लड़ाई बताने लगी, लेकिन असल सवाल कहीं और है। चुनाव के वक्त नामांकन भरवाने के लिए वकीलों और विशेषज्ञों की पूरी टीम तैनात रहती है, ताकि कागज की एक-एक पंक्ति जांची जा सके। फिर भी इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? बीजेपी की सतर्कता अपनी जगह है, लेकिन कांग्रेस की लापरवाही भी कम जिम्मेदार नहीं। अब दलीलों का दौर चल रहा है, पर असली पड़ताल उस टीम की होनी चाहिए जिसने यह फॉर्म भरवाया। क्योंकि राजनीति में कभी-कभी हार चुनाव से नहीं, एक कॉलम से होती है।दिल्ली में चला ‘मास्टर स्ट्रोक’मध्यप्रदेश कांग्रेस के एक दिग्गज नेता ने राज्यसभा को लेकर ऐसा दांव चला है कि दिल्ली दरबार में भी भौंचक माहौल है। सूत्र बताते हैं कि इस फॉर्मूले पर मंथन शुरू हो चुका है और अगर बात बन गई तो एमपी से इन्हीं दिग्गज को राज्य सभा की की सीट मिल सकती है। राज की बात यह है कि दिग्गज लीडर ने एक जोरदार फॉर्मूला दिया है, इससे कांग्रेस को दूसरे राज्यों के रास्ते भी राज्यसभा जाने का मौका मिल सकता है। दिलचस्प यह भी कि ये वही नेता हैं जो पिछले कुछ दिनों से अचानक मुख्यधारा से गायब नजर आ रहे थे। राष्ट्रीय राजनीति में जिनका भौकाल रहा है, उनका नाम अचानक सामने आए तो हैरान मत होइएगा३ क्योंकि दिल्ली की राजनीति में कई बार चाल नहीं, पूरा शतरंज बदल दिया जाता है।कांग्रेस में रंगों की राजनीतिमध्यप्रदेश कांग्रेस में इस बार होली सिर्फ रंगों की नहीं, संदेशों की भी रही। भोपाल में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कार्यकर्ताओं के साथ होली मिलन का आयोजन किया, जो लंबे समय से केवल चर्चा में ही था। दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासियों के साथ रंगपंचमी मनाकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर लीं। दोनों आयोजनों में रंग भी उड़े और सियासी जलसा भी खूब सजा। अब पार्टी के भीतर इसे ताकत के प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। रंग तो दोनों तरफ चढ़े हैं, लेकिन चर्चा इस बात की है कि भविष्य में रंग किसका जमेगा?३ क्योंकि राजनीति की होली में रंग में सियासी मायने छिपे होते हैं।जब वर्दी ने वर्दी को सलाम कियामध्यप्रदेश पुलिस में एक ऐसा पल आया, जिसने वर्दी की परंपरा को फिर जिंदा कर दिया। देश के पहले आईपीएस बैच ( वर्ष 1948) के अफसर और मध्यप्रदेश के पूर्व डीजीपी रहे एचएम जोशी की सौवीं सालगिरह पर मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाना ने पुलिस ऑफिसर्स मेस में सादा लेकिन गरिमामय आयोजन रखा। उम्र की सदी पार कर चुके जोशी का हाथ जब आज की पुलिस ने थामा, तो माहौल भावुक भी हुआ और गर्व से भरा भी। कई अफसर इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने। खास बात यह रही कि इस मौके पर सियासत का शोर नहीं था, सिर्फ वर्दी का सम्मान था। क्योंकि परंपरा तब जिंदा रहती है, जब नई वर्दी पुरानी विरासत को सलाम करती है।फिर रामेश्वर के हुए विश्वासबीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा के सालाना कवि सम्मेलन में कभी कुमार विश्वास की मौजूदगी लगभग तय मानी जाती थी। लेकिन जब कुमार विश्वास आम आदमी पार्टी की नींव रखने वालों में शरीक हुए, तो राष्ट्रवादी खेमे ने थोड़ी दूरी बना ली। इसके बाद तो रामेश्वर के आयोजन से भी उनके आने का सिलसिला ही थम गया। अब वक्त ने फिर करवट ली है। रामेश्वर शर्मा के मंच पर कुमार विश्वास की आमद फिर है। उधर कुमार विश्वास भी इन दिनों ऐसे आयोजनों में ज्यादा नजर आने लगे हैं, जिन्हें भगवाधारी खेमे में पसंद किया जाता है। अब देखना दिलचस्प होगा३ यह सिर्फ कविता की वापसी है या सियासत की नई पंक्ति लिखी जा रही है।कांटों का ताज बनी कमिश्नर की कुर्सीभोपाल नगर निगम कमिश्नर की कुर्सी किसी इम्तिहान से कम नहीं। बीते तीन-चार कमिश्नरों का हाल देखें तो तस्वीर साफ नजर आती है। आते समय जोश ऐसा कि लगता है शहर की सूरत बदल देंगे और काम का ऐसा प्रोफाइल बनाएंगे कि मंत्रालय की पांचवीं मंजिल तक चर्चा पहुंचे। लेकिन कुछ ही महीनों में जनप्रतिनिधियों की खींचतान, फंड की कमी और छोटे-छोटे कामों के दबाव की आंधी उस जोश की लौ को धीमा कर देती है। मौजूदा अफसर के साथ भी कुछ वैसी ही कहानी बनती दिख रही है। शुरुआत तेज थी, मगर अब उत्साह ठंडा पड़ता नजर आ रहा है। खबर सही जगह तक पहुंचा दी गई है, अब देखना है३ कुर्सी टिकती है या कमिश्नर।

शांति स्वरूपानंद को रेप केस में फंसाने की साजिश का पर्दाफाश:साध्वी ने वाराणसी की महिला को हथियार के रूप में किया था इस्तेमाल, पुलिस ने दर्ज किया मामला
उज्जैन। उज्जैन में चारधाम मंदिर के महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद को झूठे दुष्कर्म मामले में फंसाने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में पुलिस ने पूर्व महामंडलेश्वर साध्वी मंदाकिनी पुरी और घनश्याम पटेल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने वाराणसी की एक महिला को लालच देकर महाराज पर झूठा केस दर्ज कराने के लिए दबाव डाला।जानकारी के अनुसार, महिला कुछ समय पहले उज्जैन आई थी। महाकाल दर्शन और शिप्रा परिक्रमा के दौरान उसकी पहचान घनश्याम पटेल, साध्वी मंदाकिनी पुरी और महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद से हुई। इसके बाद मंदाकिनी पुरी ने महिला को अपने घर बुलाया, जहां वह करीब एक सप्ताह तक रही। इस दौरान पटेल और मंदाकिनी पुरी ने महिला पर महाराज के खिलाफ केस दर्ज कराने का दबाव डाला।पटेल ने महिला को 50 हजार का दिया था लालचमहिला के अनुसार, 27 फरवरी को पटेल वाराणसी पहुंचे और 50 हजार रुपये का लालच देकर केस दर्ज कराने की कोशिश की। पैसे महिला के बेटे के खाते में ट्रांसफर किए गए और उज्जैन तक का बस टिकट भी कर दिया गया। साथ ही, केस दर्ज न कराने पर मंदाकिनी पुरी द्वारा उसके अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी दी गई। डर के कारण महिला उज्जैन पहुंच गई।विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्जरंगपंचमी के दिन महिला दत्त अखाड़ा परिसर में घनश्याम पटेल की मौजूदगी में बयान दे रही थी। इस दौरान आनंदपुरी महाराज, पंडित लोकेश शर्मा और संजय गोस्वामी वहां पहुंचे और उन्होंने मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा को दी। पुलिस ने महिला के मोबाइल और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद साध्वी मंदाकिनी पुरी और घनश्याम पटेल के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।घनश्याम पटेल ने आरोपों को बताया निराधारघनश्याम पटेल ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि महिला ने अन्य लोगों के साथ मिलकर उनके खिलाफ षड्यंत्रपूर्वक फर्जी मामला दर्ज कराया। उन्होंने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

कर दिया काम यूथ कांग्रेस वालों ने:राहुल के बयान पर BJP ने किया वार, कहा- कांग्रेस को नेहरू की बात समझने में क्यो रही दिक्कत, जानें क्या है पूरा मामला
नई दिल्ली। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और यूथ कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने एक्स पर किए पोस्ट में आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान हुए विवादित प्रदर्शन का समर्थन किया और उस पर गर्व जताया। अमित मालवीय ने राहुल गांधी का एक वीडियो क्लिप पोस्ट करते हुए एक्स पोस्ट में दावा किया कि नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कर दिया काम यूथ कांग्रेस वालों ने। मालवीय का दावा है कि यह टिप्पणी उस घटना के बाद आई जब यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान शर्ट उतारकर प्रदर्शन किया और कार्यक्रम को बाधित किया। अमित मालवीय ने कहा कि इस तरह के प्रदर्शन से पूरी दुनिया के सामने भारत की छवि को नुकसान पहुंचा।उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब दुनियाभर के शीर्ष तकनीकी विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और इनोवेटर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य पर चर्चा करने के लिए एक मंच पर जुटे थे, तब कांग्रेस पार्टी को लगा कि भारत का प्रतिनिधित्व करने का सबसे अच्छा तरीका अराजकता व अशोभनीय प्रदर्शन है। मालवीय ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया।एक्स पोस्ट में अमित मालवीय ने इस मुद्दे को देश की राजनीतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से भी जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि जिस पंडित जवाहरलाल नेहरू को कांग्रेस अपना वैचारिक आधार मानती है, उन्होंने राष्ट्रीय चरित्र और निष्ठा के सवाल पर बिल्कुल अलग सोच रखी थी।मालवीय ने 1950 के दशक की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि जब महाराजा यशवंतराव होलकर द्वितीय के निधन के बाद इंदौर की गद्दी के उत्तराधिकार का सवाल उठा, तब यह विवाद सामने आया कि क्या उनकी अमेरिकी पत्नी से जन्मे बेटे रिचर्ड होलकर को होलकर वंश की विरासत मिलनी चाहिए।उन्होंने एक्स पोस्ट में आगे लिखा कि उस समय की सरकार में राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे वरिष्ठ नेता भी इस मामले पर चर्चा में शामिल थे। इस पर विचार-विमर्श के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्पष्ट राय दी थी कि उत्तराधिकारी वही होना चाहिए जो भारतीय मां से जन्मा हो। अंततः सरकार ने महाराजा की भारतीय पत्नी से जन्मी बेटी राजकुमारी उषा देवी राजे साहिब होलकर को होलकर वंश की वैध उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता दी। बाद में नेहरू ने भी लिखा कि उनकी मान्यता इसलिए हुई क्योंकि वह जन्म से ही होलकर वंश का हिस्सा थीं।अमित मालवीय ने कहा कि यह उदाहरण दिखाता है कि राष्ट्रीय पहचान और निष्ठा जैसे मुद्दे केवल विचार नहीं हैं बल्कि वे मूल और जुड़ाव से गहराई से जुड़े होते हैं। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस से सवाल करते हुए कहा कि अगर खुद जवाहरलाल नेहरू मानते थे कि विदेशी मूल से जन्मा व्यक्ति देश की जिम्मेदारी उठाने के योग्य नहीं माना जा सकता, तो कांग्रेस को नेहरू की ही बात समझने में दिक्कत क्यों हो रही है। मालवीय के मुताबिक शायद यही वजह है कि आज वे देश की गरिमा की रक्षा करने के बजाय दुनिया के सामने भारत को शर्मिंदा करने वाले प्रदर्शनों पर गर्व कर रहे हैं।

एमपी सरकार का कर्ज 5.06 लाख करोड़ पार, :मोहन आज फिर लेंगे 5800 करोड़ का ऋण, चालू वित्त वर्ष में कर्ज का आंकड़ा पहुंचा 84,900 करोड़ पर
भोपाल। वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर कर्ज लेने जा रही है। इस बार सरकार तीन किस्तों में 5,800 करोड़ रुपये का ऋण भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से लेगी। इस कर्ज के साथ ही मप्र सरकार का कर्ज 5.06 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। मंगलवार को लिया जाने वाला कर्ज विकास परियोजनाओं और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के उद्देश्य से लिया जा रहा है। बता दें कि सरकार ने होली के दौरान भी 6300 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। इसके एक सप्ताह बाद ही 5800 करोड़ रुपए का कर्ज लेने का फैसला किया है। इसका भुगतान बुधवार को किया जाएगा। इन नए कर्जों के साथ चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिए गए कुल कर्ज का आंकड़ा बढ़कर करीब 84,900 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। वहीं प्रदेश पर कुल देनदारी बढ़कर लगभग 5 लाख 6 हजार 640 करोड़ रुपए हो जाएगी।तीन किस्तों में लिया जाएगा कर्जवित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह कर्ज 10 मार्च यानी मंगलवार को तीन किस्तों में लिया जाएगा। पहली किस्त 1,900 करोड़, दूसरी 1,700 करोड़ और तीसरी 2,200 करोड़ रुपये की होगी। अधिकारियों का कहना है कि यह राशि मुख्य रूप से पूंजीगत कार्यों, यानी अधोसंरचना विकास और विभिन्न विकास परियोजनाओं में खर्च की जाएगी।जीतू ने सरकार पर लगाया गंभीर आरोपप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर प्रदेश को कर्ज में डुबोने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लगातार कर्ज लेने से प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है। वहीं, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी कर्ज वित्तीय अनुशासन और राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के नियमों के तहत लिया जा रहा है।सरकार का दावासरकार का यह दावा है कि लिया गया कर्ज विकास कार्यों और पूंजीगत परियोजनाओं में निवेश किया जाएगा, जिससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। वित्त विभाग का कहना है कि राज्य के कर्ज लेने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियामक दिशानिर्देशों के अनुसार है। इस तरह मध्य प्रदेश सरकार के ऊपर बढ़ता कर्ज और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप दोनों ही अब चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

मप्र के सरकारी सेवकों के लिए खुशखबरी:मोहन कैबिनेट ने 3 फीसदी डीए बढ़ाने के प्रस्ताव को दी हरी झंडी, अब केन्द्र के बराबर मिलेगा महंगाई भत्ता
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक हुई। मंत्रालय में आहूत की गई बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में सबसे बड़ा फैसला प्रदेश सरकारी सेवकों के हित में लिया गया। दरअसल मोहन कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता को हरी झंडी दे दी है। बता दें कि मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने होली के पहले प्रदेश कर्मचारियों का तीन फीसदी महंगाई भत्ता बढ़ाने की घोषणा की थी। जिस पर कैबिनेट ने अमल करते हुए आज प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। अब राज्य के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़कर 58 फीसदी हो गया है, जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर है। बैठक में पीएचई और पीडब्ल्यूडी के प्रोजेक्टों पर भी चर्चाबैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग द्वारा प्रस्तुत पेयजल परियोजनाओं और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सड़कों से जुड़े प्रोजेक्टों को चर्चा में रखा गया। इसके अलावा जल संसाधन विभाग के नहर और बांध निर्माण से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार हुआ। सभी प्रस्तावों को जल्द ही मंजूरी मिलने की संभावना है। इस बैठक में अनुराग जैन के स्थान पर प्रभारी मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा मौजूद थे। वहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल अनुपस्थित रहे।मप्र में 19 मार्च से शुरू होगा जल संवर्धन अभियानजल संरक्षण के क्षेत्र में मध्य प्रदेश की पहल की भी बैठक में सराहना हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश में 19 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू होगा। यह अभियान केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा भी सराहा गया है। अभियान के माध्यम से जल संरक्षण और जल स्रोतों के संवर्धन के लिए व्यापक जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति एवं व्यवस्था पर भी मंथनबैठक में खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के प्रभावों को देखते हुए रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति एवं व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि आवश्यक तैयारियों के माध्यम से आपूर्ति में कोई व्यवधान नहीं आने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बैठक से पहले मंत्रियों के साथ टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की जीत पर टीम इंडिया को मंत्रिपरिषद की ओर से बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

टी-20 विश्व कप 2026:इतिहास दोहराने वाली टीम इंडिया पर पैसों की बारिश, बीसीसीआई ने इतने करोड़ का इनाम देने किया ऐलान
मुंबई। टी-20 विश्व कप 2026 में इतिहास दोहराने के बाद टीम इंडिया पर पैसों की बारिश हुई है। भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड ने भारतीय टीम को 131 करोड़ रुपए का नकद पुरस्कार देने का ऐलान किया है। बीसीसीआई की ओर से यह घोषणा मंगलवार को की गई है। यह इनाम खिलाड़ियों के साथ-साथ कोचिंग स्टाफ और टीम के अन्य सपोर्ट स्टाफ को भी दिया जाएगा।खिलाड़ियों और स्टाफ को मिलेगा हिस्सारिपोर्ट के मुताबिक, इस राशि में 15 खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और अन्य सपोर्ट स्टाफ को शामिल किया गया है। बताया जा रहा है कि इनाम की रकम में सबसे बड़ा हिस्सा खिलाड़ियों को मिलेगा, जबकि सपोर्ट स्टाफ को मिलने वाली राशि उनकी जिम्मेदारी और पद के अनुसार तय की जाएगी।बता दें कि रविवार (8 मार्च) को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर खिताब अपने नाम किया था। इस जीत के साथ भारत ने अपना टी20 वर्ल्ड कप खिताब सफलतापूर्वक डिफेंड किया। भारत टूर्नामेंट के इतिहास में लगातार दो बार खिताब जीतने वाली पहली टीम बन चुका है।2024 के मुकाबले बढ़ा इनामइस बार घोषित 131 करोड़ रुपये की इनामी राशि 2024 टी20 वर्ल्ड कप के बाद दिए गए 125 करोड़ रुपये से ज्यादा है। यानी इस बार बोर्ड ने पिछले पुरस्कार की तुलना में छह करोड़ रुपये अधिक देने का फैसला किया है।बीसीसीआई सचिव ने दी बधाईबीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने टीम को बधाई देते हुए कहा, श्बोर्ड खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ और चयनकर्ताओं को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए एक बार फिर बधाई देता है और भविष्य के लिए उन्हें लगातार सफलता की शुभकामनाएं देता है।न्यूजीलैंड को हराकर जीता खिताबभारतीय टीम ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीता। टीम इंडिया ने इस जीत के साथ न सिर्फ अपना खिताब सफलतापूर्वक बचाया, बल्कि टूर्नामेंट के इतिहास में लगातार दो बार टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम भी बन गई।

एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में राहत:केंद्र ने एस्मा लागू कर जमाखोरी पर कसा शिकंजा, फैसले का उद्देश्य घरेलू रसोई गैस को प्राथमिकता
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट वार के चलते देश में एलपीजी सिलिंडरों की संभावित कमी और जमाखोरी की बढ़ती शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य घरेलू रसोई गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना और काले बाजारी गतिविधियों पर रोक लगाना है।सरकारी सूत्रों के अनुसार, एस्मा लागू होने के बाद एलपीजी और अन्य आवश्यक ईंधनों की आपूर्ति में प्राथमिक क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें अस्पताल, स्कूल, सरकारी संस्थान और अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। इससे इन संस्थानों में गैस की कमी से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को रोका जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से आम जनता को राहत मिलेगी और बाजार में कृत्रिम संकट पैदा करने वालों पर सख्ती की जा सकेगी।दरअसल, पिछले कुछ महीनों से कई राज्यों में एलपीजी सिलिंडरों की जमाखोरी और कालाबाजारी की घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिली थी। कई जगहों पर कमर्शियल गैस सिलिंडरों की कमी की शिकायतें सामने आईं, जिससे होटल और रेस्टोरेंट उद्योग की चिंताएं बढ़ गई हैं।एस्मा क्या है?आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) एक ऐसा कानून है, जिसका उद्देश्य जीवन से जुड़ी आवश्यक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना है। इस कानून के तहत सरकार को यह अधिकार मिलता है कि वह महत्वपूर्ण सेवाओं में बाधा डालने वाली गतिविधियों पर रोक लगाए और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करे। आमतौर पर इसका उपयोग परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सार्वजनिक सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए किया जाता है।रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देशसरकार ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बनी रहे। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत में एलपीजी की कुल खपत लगभग 3.13 करोड़ टन रही, जबकि घरेलू उत्पादन करीब 1.28 करोड़ टन ही था। शेष जरूरत आयात के जरिए पूरी की गई।

शेयर बाजार में आई सुनामी जैसी तेजी: ट्रंप का बयान बना टर्निंग पॉइंट, सेंसेक्स-निफ्टी दोनों बने राॅकेट
नई दिल्ली। वैश्विक तनाव और युद्ध की आशंकाओं के कारण पिछले कुछ दिनों से गिरावट झेल रहे भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जोरदार वापसी देखने को मिली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर हालात में नरमी के संकेत मिलने के बाद बाजार में निवेशकों का भरोसा लौटा और प्रमुख सूचकांक तेज उछाल के साथ खुले।मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,566 के मुकाबले करीब 800 अंकों की तेजी के साथ 78,375 पर खुला। शुरुआती कारोबार में ही इसमें और तेजी आई और यह 900 अंक से अधिक चढ़कर लगभग 78,526 के स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 भी मजबूती के साथ 24,280 पर खुला और कुछ ही देर में 24,303 के स्तर तक पहुंच गया।यूएस की भूमिका को लेकर वैश्वि बाजारों में अस्थिरतादरअसल, बीते कुछ दिनों से ईरान और इजरायल के बीच युद्ध की स्थिति और यूनाइटेड स्टेट की भूमिका को लेकर वैश्विक बाजारों में भारी अस्थिरता बनी हुई थी। सोमवार को भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन सेंसेक्स करीब 1,352 अंक गिरकर 77,566 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी भी कमजोर होकर 24,028 के स्तर पर बंद हुआ था।ट्रंप का दावाः ईरानी सेना हो चुकी है काफी कमजोर मंगलवार को बाजार में आई तेजी के पीछे डोनाल्ड ट्रंप के बयान को अहम माना जा रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी सेना काफी कमजोर हो चुकी है और युद्ध अपने अंतिम चरण में हो सकता है। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में तनाव कुछ कम हुआ और निवेशकों की धारणा में सुधार देखने को मिला।90-91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचा कच्चा तेलइसी के साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज गिरावट आई। हाल ही में 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा कच्चा तेल घटकर करीब 90-91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयातक देशों के लिए सकारात्मक मानी जाती है, जिससे शेयर बाजार में खरीदारी बढ़ी। मजबूत वैश्विक संकेतों का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा। जापान और साउथ कोरिया समेत कई एशियाई बाजार तेजी के साथ कारोबार करते नजर आए। इसका असर भारतीय बाजार में भी दिखाई दिया।कई शेयरों में दिखी तेजीतेजी के माहौल में कई प्रमुख शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। इंटरग्लोब एविएशन इंडिगो एशियन पेंट्स टाइटन कंपनी वीकेएसजे और एचडीएफसी बैंक जैसे लार्जकैप शेयर बढ़त में रहे। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की खरीदारी देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में शेयर बाजार में और स्थिरता देखने को मिल सकती है।

गुरुग्राम दिल दहलाने वाला हादसा:रोटी की तलाश में गए थे काम पर, मिट्टी के ढेर ने छीन ली 7 मजदूरों की जिंदगी
नई दिल्ली। गुरुग्राम में सोमवार शाम को एक निर्माण स्थल पर मिट्टी का एक बड़ा ढेर गिरने से सात मजदूरों की मौत हो गई, जबकि चार मजदूर घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अभी भी मलबे में 10 मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह घटना एक निर्माण स्थल पर घटी, जहां आगामी आवासीय परियोजना के लिए एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है। बताया जाता है कि दीवार गिरने के बाद इमारत के तहखाने में मिट्टी का एक बड़ा धंसाव हुआ, जिसके कारण यह हादसा हुआ। पुलिस और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के साथ-साथ नागरिक सुरक्षा दल और दमकलकर्मियों द्वारा बचाव अभियान जारी है।कई लोगों के हताहत होने की सूचनाअधिकारियों ने बताया कि यह दुर्घटना सोमवार शाम 7ः30 से 8ः00 बजे के बीच गुरुग्राम-रेवाड़ी सीमा के पास हुई। हालांकि, पुलिस को घटना की सूचना रात 9ः15 बजे के बाद ही मिली, जब एक अस्पताल ने कई लोगों के हताहत होने की सूचना दी। पुलिस उपायुक्त (मानेसर) दीपक कुमार ज्वारिया ने हादसे की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में पांच श्रमिकों जब अस्पताल लाया गया था तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। अन्य की मौत की पुष्टि बाद में घटनास्थल पर ही हुई।ईमारत के तहखाने में थे कई मजदूरउन्होंने कहा, पुलिस को रात 9.15 बजे के बाद अस्पताल से घटना की सूचना मिली, जहां पांच लोगों की मौत की खबर मिली थी। बचाव दल को तुरंत मौके पर भेजा गया। निर्माण स्थल पर मौजूद बचे हुए लोगों और ठेकेदारों ने पुलिस को बताया कि जब इमारत गिरी तब कई मजदूर तहखाने में थे। उन्होंने दावा किया कि कम से कम 10 और मजदूर अभी भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं।मृतकों की नहीं हुई पचानघटना के बाद, नागरिक सुरक्षा दल, दमकलकर्मी और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के कर्मियों ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया। मलबा हटाने और फंसे हुए श्रमिकों की तलाश के लिए भारी मशीनरी, ऊंचे खंभों पर लगी बत्तियां और अन्य उपकरण तैनात किए गए। पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी बचाव कार्य की निगरानी और उसमें तेजी लाने के लिए घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि मृत श्रमिकों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। उन्होंने आगे कहा कि यदि मृतक या घायल श्रमिकों के परिवारों से शिकायतें प्राप्त होती हैं तो एफआईआर दर्ज की जा सकती है। घटनास्थल पर बचाव अभियान जारी था।

ग्लोबल ऑयल मार्केट में हलचल!:ईरान युद्ध के बीच रूसी तेल पर अमेरिकी रुख बदलेगा? ट्रंप का बड़ा इशारा
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध और तेल आपूर्ति पर खतरे के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिकी राट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया संकेतों ने यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या अमेरिका रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दे सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए कुछ देशों पर लगे ऊर्जा प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने पर विचार कर रहा है।दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खाड़ी क्षेत्र के कई बड़े तेल उत्पादक देशोंकृजैसे फंजंत, ज्ञनूंपज और प्तंुकृने उत्पादन में कटौती के संकेत दिए हैं। इसके अलावा ईरान की ओर से रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्यमें बाधा डालने की आशंका ने वैश्विक बाजार को और अस्थिर कर दिया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में से एक माना जाता है।यह बोले ट्रंप फ्लोरिडा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार तेल बाजार को स्थिर करने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ देशों पर लगाए गए प्रतिबंधों को फिलहाल हटाया जा रहा है, ताकि तेल की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित न हो। ट्रंप के मुताबिक, “दुनिया में तेल की कमी नहीं होने दी जाएगी।”ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई ठिकानों पर किए हमलेइसी बीच मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कई ठिकानों पर हमले किए हैं, जिनमें बहरीन के एक पेट्रोलियम परिसर को भी निशाना बनाया गया। दूसरी ओर अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है और उसकी नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है।तेल बाजार में देखने को मिला तनाव का असरइस भू-राजनीतिक तनाव का असर सीधे तेल बाजार पर देखने को मिला। सोमवार को वैश्विक बेंचमार्क कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और यह 25 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। एक समय यह 115 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर चला गया था। हालांकि बाद में ट्रंप के बयानों के बाद बाजार में कुछ राहत आई और कीमतें गिरकर करीब 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गईं।रूस के तेल पर प्रतिबंध हटने से बाजार में बढ़ सकती है सप्लाईविशेषज्ञों का मानना है कि अगर रूस के तेल पर प्रतिबंधों में ढील दी जाती है, तो इससे वैश्विक बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका आगे क्या फैसला लेता है और मध्य पूर्व का यह संघर्ष किस दिशा में जाता है।

कंगाली की मार:पेट्रोल गायब, भोजन गायब, अब पाकिस्तान में इफ्तार पार्टियों पर भी बैन
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती अस्थिरता का असर अब पाकिस्तान की आम जिंदगी पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के बाद पाकिस्तान में फ्यूल संकट गहरा गया है। हालात को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने ऊर्जा की खपत कम करने और बढ़ती आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं।प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के उद्देश्य से स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तरों के कामकाज में बदलाव का ऐलान किया है। सरकार के फैसले के अनुसार देशभर में स्कूलों को दो हफ्तों के लिए बंद कर दिया जाएगा, जबकि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा की कक्षाएं ऑनलाइन मोड में संचालित की जाएंगी। इससे छात्रों और स्टाफ की आवाजाही कम होगी और ईंधन की बचत हो सकेगी।रोक से ऊर्जा और संसाधनों की बचत होगी इसके अलावा सरकार ने आधिकारिक डिनर और बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाली इफ्तार पार्टियों पर भी रोक लगाने का फैसला किया है। रमजान के दौरान आमतौर पर सरकारी और निजी संस्थानों में बड़े स्तर पर इफ्तार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। सरकार का मानना है कि ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने से ऊर्जा और संसाधनों की बचत होगी।महंगाई ने तोड़ी जनता की कमरइसी बीच रमजान के महीने में पाकिस्तान में महंगाई ने भी लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। पंजाब प्रांत में फल और सब्जियों की कीमतें सरकारी तय दरों से काफी ज्यादा पर बिक रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पहले दर्जे के केले का सरकारी रेट 240 पाकिस्तानी रुपये प्रति दर्जन तय किया गया था, लेकिन बाजारों में दुकानदार इसे 300 रुपये से कम में बेचने को तैयार नहीं हैं। इसी तरह अमरूद, सेब और कंधारी अनार भी निर्धारित कीमतों से अधिक दरों पर बिक रहे हैं।आयातित थाई अदरक की कीमतें आसमान परवहीं आयातित थाई अदरक, जिसकी आधिकारिक कीमत 280 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई थी, कई बाजारों में 350 रुपये तक पहुंच गई। कीमतों में इस बढ़ोतरी ने आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। चूंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए तनाव बढ़ते ही वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं। पाकिस्तान अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए सप्लाई प्रभावित होने से वहां फ्यूल संकट और महंगाई दोनों गहराते जा रहे हैं।

मप्र की विजयपुर विधानसभा सीट पर भाजपा का प्रतिनिधित्व:कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी की शून्य, जानें पूरा मामला
ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने विजयपुर विधानसभा सीट को लेकर दायर चुनाव याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव अमान्य घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी रहे रामनिवास रावत को विजयपुर से विधायक घोषित किया गया है।यह फैसला ग्वालियर बेंच के जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया ने सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव के दौरान उम्मीदवार द्वारा दी गई जानकारी में गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं और तथ्यों को छिपाया गया है। इसी आधार पर मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया गया।पूर्व मंत्री ने मल्होत्रा के खिलाफ दायर की थी याचिकादरअसल, यह मामला भाजपा नेता और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत द्वारा दायर की गई चुनाव याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुकेश मल्होत्रा ने नामांकन पत्र के साथ दाखिल किए गए अपने शपथपत्र में आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी नहीं दी थी। याचिकाकर्ता के अनुसार मल्होत्रा के खिलाफ कुल छह आपराधिक मामले दर्ज थे, लेकिन उन्होंने अपने हलफनामे में केवल दो मामलों का ही उल्लेख किया था।दस्तावेजों में सही पाए गए आरोपसुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रस्तुत दस्तावेजों और रिकॉर्ड का विस्तृत परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि उम्मीदवार द्वारा अपने आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाना निर्वाचन नियमों का उल्लंघन है। कोर्ट ने माना कि मतदाताओं को सही जानकारी देना उम्मीदवार की जिम्मेदारी होती है, ताकि वे सूचित निर्णय ले सकें।रामनिवास रावत घोषित हुए विधायकइसी आधार पर हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त करते हुए उनका निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया। साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत को विजयपुर विधानसभा क्षेत्र का निर्वाचित विधायक घोषित किया जाए।इस फैसले के बाद विजयपुर विधानसभा सीट पर अब भाजपा का प्रतिनिधित्व हो गया है। राजनीतिक रूप से इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे चुनावी हलफनामों में पारदर्शिता और सही जानकारी देने की अनिवार्यता पर जोर दिया।

छत्तीसगढ़ः मक्के की आड़ में नशे की खेती! :आरोपी भाजपा नेता को पुलिस ने उठाया, विधानसभा में भी गूंजा करोड़ की अवैध अफीम का मुद्दा
रायपुर। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में अफीम की अवैध खेती के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। बीजेपी से निलंबित आरोपी नेता विनायक ताम्रकार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. इसके साथ ही पुलिस ने उसके दो अन्य साथियों विकास बिश्नोई और मनीष ठाकुर को भी गिरफ्तार कर लिया है. आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। वहीं इस दौरान लगभग 14 लाख अफीम के पौधों को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों के अनुसार इस अवैध खेती की कीमत करीब आठ करोड़ रुपये आंकी गई है। दरअसल ग्राम समोदा और झेनझरी के बीच स्थित फार्महाउस से करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में लगे अफीम के पौधे जब्त किए गए हैं। खेत से करीब 14 लाख 30 हजार पौधे बरामद किए गए हैं। जब्त पौधे की कीमत करीब 8 करोड़ रुपए आंकी गई है। जांच में सामने आया है कि राजस्थान के मजदूर ही काम संभाल रहे थे। इसके अलावा आरोपियों ने सुरक्षा के लिए बाउंसर भी तैनात किए गए थे। फार्महाउस के चारों ओर गेट लगाए गए थे, जिससे आम लोगों का अंदर जाना लगभग असंभव था। शनिवार को कलेक्टर अभिजीत सिंह ने मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि आरोपी भाजपा नेता विनायक ताम्रकार मक्का और ज्वार के पौधों की आड़ में अफीम की खेती कर रहा था। पुलिस ने भाजपा नेता विनायक ताम्रकार सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, वहीं तीसरा आरोपी फरार है जिसकी तलाश पुलिस कर रही है। उधर भाजपा नेता के खेत में अफीम की खेती के बाद प्रदेश में सियासी हलचल भी तेज है। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल भी ग्राम समोदा में खेत का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस खेत में अफीम की खेती की जा रही है, वह भाजपा नेता विनायक ताम्रकार की जमीन बताई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जिले में पहली बार इस तरह की अफीम की खेती सामने आई है और यह जांच का विषय है कि यह खेती कब से की जा रही थी।वहीं अफीम की अवैध खेती को लेकर प्रदेशभर में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन जारी है३ खैरागढ़ में जिलाध्यक्ष कोमल साहू के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेसी अंबेडकर चैक पर एकत्रित हुए, जहाँ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झूमाझटकी भी हुई। इधर अवैध अफीम का मुद्दा कांग्रेस ने आज विधानसभा सत्र के दौरान भी उठाया३इस दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि समोदा में अवैध अफीम की खेती विनायक ताम्रकार द्वारा की जा रही थी और यह प्रशासन के संरक्षण में हो रहा था। उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर इस खेती को बढ़ावा देना चाहती है।इधर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदेश में उनकी सरकार बनने के बाद हर अपराध पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि अफीम खेती के मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो भी इस अपराध में शामिल होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।समोदा अफीम कांड को लेकर प्रदेश की राजनीति अब गरमा गई है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है, वहीं सरकार कार्रवाई का हवाला देकर आरोपों को खारिज कर रही है।


