MADHYA-PRADESH NEWS

चावल उत्पादन में भारत का बजा डंका,:शिवराज का दावा- चीन को पीछे छोड़ दुनिया में बना नंबर-1, श्रेय दिया मोदी नेतृत्व को
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 साल के दौरान दौरान भारत के कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव और प्रगति देखने को मिली है। यही नहीं उन्होंने यह भी दावा किया खाद्यान्न उत्पादन, चावल में भारत दुनिया में नंबर-1 भी बना है। उन्होंने दलहन और तिलहन के क्षेत्र में भी सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया। शिवराज ने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब भारत को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशों से गेहूं मंगाना पड़ता था। उस दौर में अमेरिका से पीएल-480 योजना के तहत लाल गेहूं आयात कर देश की जनता को खिलाया जाता था। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और भारत खाद्यान्न उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर ही नहीं बल्कि दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।किसानों की मेहतन-सरकार की नीतियों के कारण देश भरे अन्न भंडारशिवराज ने कहा कि आज किसानों की मेहनत और सरकार की नीतियों के कारण देश के अन्न भंडार भर चुके हैं। खासकर चावल के उत्पादन में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने बताया कि लगभग 150 मिलियन टन चावल उत्पादन के साथ भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में पहला स्थान हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि अगर कुल खाद्यान्न उत्पादन की बात करें तो साल 2014 तक देश में लगभग 252 मिलियन टन उत्पादन होता था, लेकिन आज यह बढ़कर करीब 357 मिलियन टन तक पहुंच गया है। यह वृद्धि किसानों की मेहनत, बेहतर नीतियों और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल का परिणाम है।बागवानी क्षेत्र में हुई प्रगति का भी शिवराज ने किया जिक्रकेंद्रीय मंत्री ने बागवानी क्षेत्र में हुई प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फलों और सब्जियों के उत्पादन, क्षेत्रफल और उत्पादकताकृतीनों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पहले जहां बागवानी फसलों का उत्पादन लगभग 277 मिलियन टन था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 369 मिलियन टन हो गया है। इससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।दलहन-तिलहन क्षेत्र में सरकार के प्रयासों का किया उल्लेखउन्होंने दलहन और तिलहन के क्षेत्र में भी सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता दोनों है। हालांकि अभी भी कुछ मात्रा में आयात करना पड़ता है, लेकिन सरकार लगातार उत्पादन बढ़ाने के लिए काम कर रही है। इसी दिशा में तुअर, मसूर और उड़द जैसी दालों की किसानों के जितनी चाहें उतनी खरीद करने का फैसला किया गया है।किसानों को तकनीकी सहायता देने डिजिटल प्लेटफार्म विकसित कर रही सरकारशिवराज ने बताया कि किसानों को सही जानकारी और तकनीकी सहायता देने के लिए सरकार एक बड़ा डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि किसानों को खेती से जुड़ी सारी जरूरी जानकारी एक ही जगह पर उपलब्ध हो सके। इस प्लेटफॉर्म के पहले चरण को भी लॉन्च किया जा चुका है, जिसमें किसान अपनी भाषा में फोन कॉल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

मप्र की महिला आईएएस के फार्म हाउस में जुआ खेलने का मामला:थाना प्रभारी समेत 3 पर गिरी गाज, जानें क्या है इन पर आरोप
मानपुर। इंदौर के मानपुर थाना क्षेत्र की पुलिस ने महू के अवलीपुरा स्थित एक फार्म हाउस पर दबिश देकर जुए के अड्डे का भंडाफोड़ किया। यह यह फार्म हाउस आईएएस वंदना वैद्य और उनके पति अंबरीश वैद्य के नाम पर है। वंदना वैद्य वर्तमान में वित्त विकास निगम इंदौर की प्रबंध संचालक हैं। पुलिस ने मौके से 13.67 लाख रुपए 30 मोबाइल और दो कारे जब्त की थी। इस मामले में बड़ा एक्शन हुआ है। जुआकांड में थाना प्रभारी सहित तीन पुलिस अफसर निलंबित हो गए हैं। इस मामले में मानपुर थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह हिरवे, एसआई मिथुन ओसारी और एएसआई रेशम गिरवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इन पर आरोप है कि सूचना मिलने के बाद मौके पर देरी से पहुंचे थे, जिसकी वजह से मुख्य आरोपी सहित पांच लोग मोके से नो दो ग्यार हो गए। बताया जा रहा है कि पुलिस ने फार्म हाउस से 18 जुआरियों को पकड़ा है, जिनमें ज्यादातर संभ्रांत परिवारों के हैं। जबकि पांच आरोपी मौके से भाग गए। इनमें जुआ खिलवाने वाला मुख्य आरोपी जगदीश राठौर उर्फ कूबड़ा है। वह जगह बदल-बदल कर लोगों को जुआ खिलवाता है। मानपुर क्षेत्र में फार्म हाउस पर चल रहे जुए की खबर अफसरों को पहले से थी, फिर भी समय रहते एक्शन नहीं लिया गया।

मिडिल ईस्ट तनाव:मप्र में गहराया गैस संकट, सप्लाई 15 फीसदी पर सिमटी, सिलेंडर के लिए लंबी कतार
भोपाल। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते संकट की आंच रसोई तक पहुंच गई है। मध्यप्रदेश में भी ऐसे ही हालात देखने को मिल रहे हैं। राजधानी भोपाल सहित सूबे के लाखो रसोई गैस उपभोक्ता गैस सिलेंडर के लिए परेशान हो रहे हैं। गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं। यही नहीं आॅयल कंपनियों ने दावा किया है कि संकट के चलते प्रदेश में केवल 15 फीसदी ही गैस उपलब्ध है। ऐसे में प्रदेश में गैस संकट और गहराने की आशंका बढ़ गई है। जानकारी के मुताबिक सीमित सप्लाई के कारण कमर्शियल सिलेंडर अब सिर्फ अस्पतालों, सेना और पुलिस कैंटीन, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट कैंटीन और बस स्टैंड के भोजनालयों को ही उपलब्ध कराए जाएंगे। खाद्य विभाग जरूरत के अनुसार इन संस्थानों की सूची ऑयल कंपनियों को देगा। वहीं होटल, मैरिज गार्डन, सराफा कारीगरों और भोपाल-इंदौर मेट्रो परियोजनाओं को फिलहाल कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल पाएंगे। मेट्रो निर्माण में वेल्डिंग के लिए एलपीजी का उपयोग होता है, जिससे काम प्रभावित होने की आशंका है।जिम्मेदार अधिकारियों के दावे के उलट जमीनी हकीकतभोपाल के फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन के मुताबिक सरकार के नए निर्देशों के तहत अब 25 दिन पूरे होने के बाद ही गैस सिलेंडर की बुकिंग की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि सर्वर की दिक्कत और कुछ लोगों द्वारा अतिरिक्त सिलेंडर जमा कर लेने के कारण भी एजेंसियों के बाहर भीड़ बढ़ रही है। वहीं जिम्मेदार अधिकारियों ने दावा किया है कि घरेलू गैस की सप्लाई में कोई बड़ी दिक्कत नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई शहरों में सिलेंडर के लिए लंबी वेटिंग देखी जा रही है। कई गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की भीड़ लग रही है। टीटी नगर और 5 नंबर इलाके में सिलेंडर के लिए लोगों को काफी भागदौड़ करनी पड़ी।भोपाल में हैं डेढ़ हजार होटल-रेस्टोरेंटभोपाल होटल एसोसिएशन के तेजकुल पाल सिंह पाली के अनुसार राजधानी में करीब डेढ़ हजार होटल और रेस्टोरेंट हैं, जहां रोजाना 2 से 2.5 हजार सिलेंडर की खपत होती है। जिन होटलों में थोड़ा स्टॉक है, वे भी मुश्किल से 48 घंटे तक काम चला पाएंगे। इसके बाद कई होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की स्थिति में आ सकते हैं। होटल संचालकों ने सरकार से कमर्शियल गैस की सप्लाई बहाल करने की मांग की है, लेकिन फिलहाल सरकार ने केवल इमरजेंसी सेवाओं को प्राथमिकता देने की बात कही है।बाजार पर भी दिखाई देने लगा गैस संकट का असरइस बीच गैस संकट का असर बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण दाल, मसाले और ड्राई फ्रूट्स के दाम बढ़ गए हैं। व्यापारियों के अनुसार हरी मूंग, मसूर, चना दाल और तूअर दाल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। वहीं मिर्च और धनिया भी महंगे हो गए हैं। पिस्ता, अंजीर और केसर जैसे ड्राई फ्रूट्स के दाम भी तेजी से बढ़े हैं, क्योंकि इनका आयात ईरान के रास्ते होता है।कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पैकेजिंग सामग्री हुई महंगीव्यापारियों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पैकेजिंग सामग्री भी महंगी हो गई है। प्लास्टिक से बने पैकेजिंग आइटम के दामों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आम लोगों को और ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

यह लव जिहाद है या जवानी का इश्क... :महाकुंभ की चर्चित मोनालिसा ने मुस्लिम दोस्त से रचाई शादी, पिता पर लगाया गंभीर आरोप
तिरुवनंतपुरम। यह लव जिहाद है या जवानी की दहलीज पर कदम रखने का इश्क... प्रयागराज महाकुंभ 2025 में रुद्राक्ष की माला बेचते हुए सोशल मीडिया पर वायरल हुई मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर की रहने वाली मोनालिसा भोंसले ने केरल में कथित तौर पर अपने मुस्लिम दोस्त फरमान खान से मंदिर में शादी कर ली। शादी से पहले बुधवार को दोनों तिरुवनंतपुरम के थंपानूर पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। यहां मोनालिसा ने पुलिस से सुरक्षा मांगी और कहा कि उनके पिता उन्हें जबरन घर वापस ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार मोनालिसा ने कहा कि वह बालिग हैं। अपनी मर्जी से फरमान के साथ रहना और उससे शादी करना चाहती हैं। इधर, मोनालिसा को अपनी फिल्म में मौका देने वाले निर्देशक सनोज मिश्रा ने इसे लव जिहाद करार दिया है। फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में केरल पहुंची हैं मोनालिसा मोनालिसा इन दिनों अपनी पहली फिल्म द डायरी ऑफ मणिपुर की शूटिंग के सिलसिले में केरल आई हुई हैं। इसी दौरान फरमान खान से उनकी मुलाकात हुई। दोनों ने बताया कि फिल्म में साथ काम करने के दौरान बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे रिश्ता प्यार में बदल गया। फरमान खान ने कहा कि हम दोनों एक फिल्म में साथ काम कर रहे थे, वहीं हमारी बातचीत शुरू हुई। पहले मोनालिसा ने मुझे प्रस्ताव दिया। मैंने मना कर दिया, लेकिन बाद में हम दोनों को गहरा प्यार हो गया। मोनालिसा के मुताबिक उनका और फरमान का रिश्ता करीब छह महीने पुराना है। उन्होंने बताया कि घरवाले गांव में ही किसी और से उनकी शादी कराना चाहते थे, जो उन्हें मंजूर नहीं था।फिल्म निर्देशक ने लगाया साजिश का आरोपमोनालिसा को फिल्म में मौका देने वाले डायरेटर सनोज मिश्रा ने इस शादी पर फेसबुक पोस्ट में नाराजगी जताई है। उन्होंने लिखा कि जिस लड़की को मौका देने के लिए उन्होंने 10 करोड़ रुपए का कर्ज लेकर फिल्म बनाई, उसने एक मुस्लिम युवक के साथ भागकर सब बर्बाद कर दिया। उन्होंने इसे श्लव जिहाद्य बताते हुए इसके पीछे साजिश होने का आरोप लगाया।

वैदिक जयोतिषः कल से मीन राशि में अस्त होंगे न्याय के दवेता शनि,:इतने दिन चुनौतीपूर्ण रहेंगे इन राशि वालों को, नकारात्मक परिस्थितियां आ सकती है सामने
वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को कर्म, न्याय और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। जब शनि अपनी चाल बदलते हैं या अस्त होते हैं, तो इसका प्रभाव कई राशियों के जीवन पर देखने को मिलता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार शुक्रवार यानि 13 मार्च 2026 से शनि मीन राशि में अस्त हो जाएंगे और लगभग 35 दिनों तक यानी 17 अप्रैल 2026 तक इसी अवस्था में रहेंगे। इस दौरान कुछ राशियों के लिए समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विशेष रूप से तुला, मकर और कुंभ राशि के जातकों को इस अवधि में अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।तुला राशि: तुला राशि में शनि को उच्च का ग्रह माना जाता है, इसलिए इस राशि के लोगों पर शनि का प्रभाव विशेष रूप से देखा जाता है। जब शनि अस्त होते हैं तो कुछ नकारात्मक परिस्थितियां सामने आ सकती हैं। इस दौरान अचानक खर्च बढ़ने की संभावना है, जिससे आर्थिक संतुलन बिगड़ सकता है। पैसों के लेन-देन में सावधानी रखना बेहद जरूरी होगा। इसके अलावा बातचीत करते समय शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि छोटी सी बात भी गलतफहमी पैदा कर सकती है। परिवार और कार्यस्थल दोनों जगह धैर्य बनाए रखना बेहतर रहेगा। ज्योतिष के अनुसार शनिवार के दिन सरसों के तेल का दान करना इस समय लाभकारी माना जाता है।मकर राशि: मकर राशि के स्वामी शनि ग्रह हैं, इसलिए शनि के अस्त होने का प्रभाव इस राशि के लोगों पर ज्यादा महसूस हो सकता है। इस समय आत्मविश्वास में थोड़ी कमी आ सकती है और कामकाज में मन भी कम लग सकता है। अगर कोई कानूनी मामला चल रहा है तो उसमें देरी या अड़चन आने की संभावना बन सकती है। आर्थिक मामलों में सतर्क रहना जरूरी होगा, इसलिए उधार लेने या देने से बचना बेहतर रहेगा। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को सफलता पाने के लिए पहले से अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। इस दौरान नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना गया है।कुंभ राशि: कुंभ राशि के स्वामी भी शनि ही हैं, इसलिए शनि के अस्त होने का असर इस राशि के जातकों पर भी देखने को मिल सकता है। करियर और कारोबार से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेना जरूरी होगा, क्योंकि जल्दबाजी में लिया गया निर्णय परेशानी का कारण बन सकता है। इस समय व्यवहार थोड़ा कठोर हो सकता है, जिससे रिश्तों पर असर पड़ सकता है। आर्थिक मामलों में लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है। प्रेम और वैवाहिक जीवन में भी छोटी-मोटी परेशानियां आ सकती हैं। ऐसे में काले कुत्ते को रोटी खिलाना शुभ माना जाता है।

देवी भक्ति का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से:घटस्थापना के लिए हैं दो शुभ मुहूत, भक्तों के लिए खास रहेगी इस बार की नवरात्रि
सनातन धर्म में चैत्र नवरात्र का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है और नौ दिनों तक माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। होली के बाद आने वाला यह पहला प्रमुख धार्मिक पर्व होता है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार से हो रही है, जो भक्तों के लिए अत्यंत शुभ मानी जा रही है। इस दिन कलश स्थापना के साथ नवरात्र के व्रत की शुरुआत की जाएगी।पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होकर 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों के निर्धारण में उदयातिथि का विशेष महत्व होता है। इसी कारण 19 मार्च को ही चैत्र नवरात्र का आरंभ माना जाएगा और इसी दिन श्रद्धालु घटस्थापना कर व्रत रखेंगे। नवरात्र के पहले दिन माता दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाती है।इस वर्ष चैत्र नवरात्र की शुरुआत तीन विशेष शुभ योगों में हो रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन शुक्ल योग, ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इन योगों को अत्यंत शुभ माना जाता है और इनकी उपस्थिति में किए गए पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक कार्य विशेष फलदायी माने जाते हैं।कलश स्थापना या घटस्थापना के लिए 19 मार्च को दो विशेष शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। पहला और सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। यदि किसी कारणवश इस समय पूजा न कर पाएं तो दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है, जो 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।इसके अलावा नवरात्र के पहले दिन कई अन्य शुभ मुहूर्त भी रहेंगे। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा, जबकि प्रातः संध्या का समय सुबह 5 बजकर 15 मिनट से 6 बजकर 26 मिनट तक होगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 29 मिनट से 6 बजकर 53 मिनट तक और सायं संध्या 6 बजकर 32 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। इसके अतिरिक्त अमृत काल रात 11 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 03 मिनट तक तथा निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।इन शुभ योगों और मुहूर्तों के संयोग में शुरू हो रहा चैत्र नवरात्र भक्तों के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है। श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा कर सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करेंगे।

जल गंगा संवर्धन अभियान में गड़बड़झालाः: हरदा जिसे से आया हैरान करने वाला मामला जिम्मेदारों पर लगा गंभीर आरोप
हरदा। हरदा जिले की ग्राम पंचायत पलासनेर में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत बनाए गए स्टॉप डैम में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। लगभग 14.50 लाख रुपये की लागत से बने इस डैम में निर्माण के कुछ ही समय बाद 5 फीट का बड़ा छेद हो गया है, जिससे इसका उद्देश्य विफल होता नजर आ रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के अधिकारी, सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और संबंधित इंजीनियर की मिलीभगत से डैम निर्माण में घटिया सामग्री और कम गुणवत्ता का काम कराया गया। इसके चलते पानी डैम के ऊपर से बहने के बजाय नीचे से निकल रहा है।डैम का उद्देश्य किसानों को सिंचाई सुविधा प्रदान करना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह लगभग बेकार साबित हो रहा है। शिकायतकर्ता नारायण प्रसाद चौहान ने 2 मार्च को जिला कलेक्टर और 9 मार्च को नर्मदापुरम संभाग आयुक्त को लिखित शिकायत भेजकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। चैहान का आरोप है कि फर्जी मस्टर रोल तैयार कर स्थानीय मजदूरों को काम नहीं दिया गया और लाखों रुपये का गबन किया गया।जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अंजली जोसेफ ने मामले की जांच की पुष्टि की है और कहा कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण अब सवाल कर रहे हैं कि यदि सरकारी जल संरक्षण अभियानों में ही ऐसी लापरवाही और भ्रष्टाचार हो रहा है, तो योजनाओं का वास्तविक लाभ आम जनता तक कैसे पहुंच पाएगा। कुल मिलाकर, पलासनेर का यह डैम मामला सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी की आवश्यकता को उजागर करता है।

आयुष्मान के नए नियम के खिलाफ राजधनी में दिखा आक्रोश:सरकार आदेश वापस लेने लगाई गुहार, जानें क्या तय किए गए हैं मापदंड
भोपाल। आयुष्मान के नये नियम को लेकर राजधानी भोपाल में अस्पताल संचालकों का आक्रोश सामने आया। यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल डायरेक्टर एसोसिएशन के तत्वाधान इसके लिये यह आयुष्मान कार्यालय के बाहर जुटे थे। यह सरकार से आदेश वापस लेने की मांग कर रहे थे। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष धनंजय मिश्रा ने बताया कि जल्दबाजी में लिये इस फैसले के कारण आयुष्मान भारत जैसी योजना कुछ कॉपरेट अस्पतालों तक ही सीमित रह जाएगी। क्योंकि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के कई निजी अस्पताल योजना से बाहर होने की स्थिति में आ गए हैं। जिनकी संख्या 800 से अधिक है। इसके बाद लाखों आयुष्मान कार्डधारकों के इलाज के विकल्प सीमित रह जाएंगे। गुणवत्ता और सेवाओं की पुष्टि करता है सर्टिफिकेट सरकार के नये नियम के अनुसार अप्रैल 2026 से केवल वही अस्पताल आयुष्मान योजना में बने रहेंगे। जिनके पास राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली प्राधिकरण का एनएबीएच सर्टिफिकेट होगा। जिन अस्पतालों के पास यह मान्यता नहीं है, वे योजना से बाहर कर दिए जाएंगे। यह सर्टिफिकेट अस्पतालों की गुणवत्ता, सुरक्षा और सेवाओं की पुष्टि करता है। इसमें 600 से ज्यादा पैरामीटर की जांच की जाती है। यह स्वास्थ्य सेवाओं के लिए देश का सबसे उच्च स्तर का सर्टिफिकेट माना जाता है। सरकार का मानना है कि एनएबीएच सर्टिफिकेट मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण इलाज दिलाने का भरोसा देता है।खजाने में सेंधमारी पर उठाया सरकार ने कदममहत्वपूर्ण है कि आयुष्मान भारत योजना के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले प्राइवेट अस्पतालों को लेकर मप्र में बड़ा खुलासा हुआ था। इस खुलासे से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया था। क्योंकि जांच में पता चला था कि भौतिक रूप से बंद हो चुके कई निजी अस्पताल पोर्टल पर चालू मिले। ये अस्पताल सरकार से लगातार क्लेम वसूल रहे थे। जिसके बाद कईयों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई। 295 के पास ही एनएबीएच प्रमाणित पूरे प्रदेश में 984 सरकारी और 640 प्राइवेट यानी कुल 1,624 अस्पताल आयुष्मान योजना से संबद्ध हैं। इनमें से सिर्फ 295 अस्पतालों को ही एनएबीएच प्रमाणित है। भोपाल में 29 सरकारी और 194 प्राइवेट अस्पताल इस योजना से जुड़े हैं। बावजूद इसके इनमें कम अस्पताल ही एनएबीएच से मान्यता प्राप्त हैं।

मप्र में सूरज के तीखे तेवर: मार्च में ही लू का दिखने लगा असर, कई जिलों का पारा 38 डिग्री के पार, 15 के बाद और कहर ढाएगी गर्मी
भोपाल। मप्र में मार्च के दूसरे हफ्ते से ही सूरज ने अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण सूबे का पारा तेजी से उछाल मार रहा है। यही नहीं कई जिलों में अभी से लू जैसे हालात पैदा हो गए हैं। सबसे ज्यादा असर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में देखा जा रहा है, जहां तापमान सामान्य से करीब 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 मार्च के बाद गर्मी का असर और तेज हो सकता है।मंगलवार को धार में पारा सबसे ज्यादा 39 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। सागर में 38.9 डिग्री, रतलाम में 38.8 डिग्री, नर्मदापुरम में 38.8 डिग्री, खजुराहो (छतरपुर) में 38.3 डिग्री, गुना में 38.1 डिग्री और दमोह-टीकमगढ़ में 38 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं राजधानी भोपाल का पारा 36 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। यह यह सामान्य से 4.1 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा है। मौसम विभाग के अनुसार इस साल मार्च में गर्मी का असर पिछले साल की तुलना में ज्यादा दिखाई दे रहा है। राजधानी सहित प्रदेश के आधे से ज्यादा हिस्सों में दिन का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। सोमवार के बाद लगातार दूसरे दिन मंगलवार को भी दिन के समय तेज गर्मी महसूस की गई। जबकि आगामी दिनों में न्यूनतम एवं अधिकतम तापमानों में कोई विशेष परिवर्तन की संभावना नहीं है। सुबह और रात रहती है ठंडक दिन की अपेक्षा सुबह और राते ठंडक आभास कराती है। मौसम में इस बदलाव का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है। अस्पतालों में सर्दी, जुकाम और एलर्जी के मरीजों की संख्या बढने लगी है। 40 के पार जा सकता है पारामार्च के दूसरे ही पखवाड़े में कई जिलों का पारा 40 डिग्री के करीब पहुंचता दिखाई दे रहा है। मंगलवार रतलाम प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 39.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं राजधानी भोपाल में यह 36.8 दर्ज किया गया। इसको देखते हुए अनुमान जताया गया है कि आगामी चंद दिनों में पारा 40 के पार चला जा सकता है। इसलिये ऐसे हालात दक्षिण झारखंड और उससे सटे उत्तरी छत्तीसगढ़ के ऊपर एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण जहां बना हुआ है। वहीं पश्चिमी विक्षोभ एक ट्रफ के रूप में मध्य स्तरीय क्षोभमंडलीय पछुआ हवाओं के साथ मध्य पाकिस्तान के ऊपर बने हवा के चक्रवाती परिसंचरण से उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट हवाएं उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर रही है।सुबह 10 बजे से चुभने लगी धूप मौसम विभाग की चेतावनी से पहले ही राजधानी में गर्मी अपना रौद्र रूप दिखाने लगी है। सुबह 10 बजे से ही जहां सूरज की चमक बेहाल करते हुए पसीने निकालने लगी है। वहीं दिन की गर्मी को देखते हुए लोगों ने घर व कार्यालयों में पंखे और एसी का उपयोग शुरू कर दिया है। बाजारों में भी इनकी पूछ-परख बढ़ गई है।

मप्रः जांच कमेटी की अनुशंसा के बाद भी ब्लैकलिस्ट नहीं हो सकी संस्था:एसजेडी में सप्लाई किया था करोड़ों का गुणवत्ताहीन इलेक्ट्रॉनिक सामान
भोपाल। सवा साल पहले जिस संस्था ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग को अमानक और गुणवत्ताहीन इलेक्ट्रॉनिक सामान प्रदाय किया। सस्ते सामान की अधिक कीमत बताकर अधिक भुगतान लिया। अनियमितता और गड़बड़ी करने वाली ऐसी संस्था को विभाग के अधिकारी छह महीने से बचाने का प्रयास कर रहे हैं। इस गड़बड़ी की जांच के लिए गठित कमेटी छह महीने पहले संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा कर चुकी है, लेकिन अब न तो संस्था ब्लैकलिस्ट ही हुई है और न ही किसी तरह की कार्रवाई की गई है। मप्र के जनपद एवं जिला कार्यालयों एवं संचालनालय सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में प्रदाय हेतु 467 कम्प्यूटर, 457 प्रिंटर एवं 453 यूपीएस, 5 लैपटॉप एवं एक वॉलटॉप कम्प्युटर की खरीदी हेतु 18 सितम्बर 2024 को स्वीकृति तथा 10 करोड़, 99 लाख 31 हजार 26 रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी। संचालनालय ने 23 सितम्बर को जेम पोर्टल् के माध्यम से ई-निविदा आमंत्रित की। 31 अक्टूबर 2024 को खुली इस निविदा में सबसे कम दर 10 करोड़, 99 लाख, 29 हजार 779 के साथ मेसर्स सांई बाबा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम, भोपाल ने बाजी मारी। इस संस्था ने जनपद एवं जिला कार्यालयों तथा संचालनालय में 44 कम्प्यूटर, 34 प्रिंटर एवं 30 यूपीएस प्रदाय किए गए।कमेटी ने सही पाई शिकायत, ब्लैकलिस्ट की अनुशंसाप्रदाय की गई सामग्री की खराब गुणवत्ता के के संबंध में 23 जून 2025 को जगदीश रायकवार नामक व्यक्ति ने शिकायत की। इस शिकायत की जांच के लिए विभागीय उप संचालक आर के सिंह और डॉ. श्रवण कुमार पचैरी तथा लेखाअधिकारी श्रीमती लाजवंती अभिचंदानी की कमेटी बनाकर जांच की गई। जांच में शिकायत के सभी आरोप सही पाए गए। इसके बाद कमेटी ने सितम्बर 2025 में संस्था को ब्लैकलिस्ट करने तथा उसकी देय योग्य राशि को राजसात करने की अनुशंसा की। लेकिन छह महीने में सिर्फ इस संस्था को सिर्फ नोटिस भेजकर जवाब प्राप्त होने तक की औपचारिकता हो सकी है। संस्था ने इस तरह की गड़बडियां प्रदाय किए गए कम्प्युटरों के वायोस में इंस्टालेशन 22 जुलाई 2024 दर्शाया, जबकि संचालनालय द्वारा कम्प्युटरों को दिसम्बर 2024 में खरीदा और स्थापित किया गया। वहीं कुछ कम्प्युटर खरीदी आदेश से पहले ही इंस्टॉल कर विभाग को गुमराह किया गया। संस्था ने संचालनालय को पुरानी सामग्री प्रदाय की। कम्प्युटर खोलकर चेक करने पर एसएसडी अनुबंध के अनुसार एसर कंपनी की नहीं होकर अमानकध्लोकल कंपनी की लगाई गई। संचालनालय स्तर से रेन्डम तीन कम्प्यूटरों के हार्डवेयरों को चेक किया गया, जिसमें दो कम्प्यूटरों में रेम लगी मिली और एसएसडी भी एसर कंपनी की नहीं होकर लोकल लगी मिली। संस्था ने कम्प्यूटरों से छेडखानी कर उनकी एसएसडी बदलकर प्रदाय किए गए। संस्था द्वारा प्रदाय 453 यूपीएस सायबर पॉवर कंपनी के हैं, डिब्बे पर जिनकी कीमत 6085 रुपये पाई गई। जबकि जेम पोर्टल पर पांच साल की वॉरंटी के साथ ऑफर प्राइज 3754 रुपये है,लेकिन संस्था को भुगतान प्रति यूपीएस 11247 रुपये के मान से किया गया। कमेटी ने पाया कि संस्था ने विभाग को गुमराह कर प्रति नग अधिक राशि का भुगतान प्राप्त कर वित्तीय अनियमितता की। मेसर्स सांई बाबा इलेक्ट्रिनिक्स सिस्टम भोपाल द्वारा शासकीय दृष्टि बाधित विद्यालय, भोपाल एवं आशा निकेतन भोपाल में स्थापित स्मार्ट क्लास की डिवाइज का निरीक्षण भी किया गया, जो संतोषजनक नहीं पाई गई। इस तरह कमेटी ने संसथा को ब्लेकलिस्ट करने एवं देयक राशि राजसात करने की अनुशंसा की। इस प्रकरण में कमेटी की अनुशंसा के बाद संबंधित संस्था को नोटिस जारी किया गया था। संस्था नेन नोटिस का जवाब दिया है। जवाब के परीक्षण के बाद संस्था पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सोनाली पोंक्षे वायंगंकर, प्रमुख सचिव-सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, मप्र

ईरान-इजराइल का असरः:कमर्शियल गैस सिलेंडर को लेकर MP में हाहाकार, संकट में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसायी, शादियां प्रभावित होने का डर
भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले दो दिनों से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई ठप होने से होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसाय गंभीर संकट में आ गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ईरान-इजराइल तनाव के असर से गैस सप्लाई प्रभावित बताई जा रही है। इस स्थिति के कारण खासकर शादी-ब्याह वाले घरों और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई है।राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों में अगले 20 दिनों के भीतर हजार से ज्यादा शादियां होने वाली हैं। ऐसे में कैटरर्स के सामने सबसे बड़ी समस्या खाना बनाने के लिए ईंधन की उपलब्धता की है। कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई शुरू नहीं हुई तो हालात इमरजेंसी जैसे हो सकते हैं।इंदौर में कमर्शियल सिलेंडर संकट को लेकर खाद्य विभाग ने कैटरिंग संगठनों के साथ बैठक की। बैठक के बाद खाद्य नियंत्रक एमएल मारू ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों को फिलहाल पारंपरिक ईंधन स्रोतों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। उन्होंने लकड़ी, कंडे और पारंपरिक भट्ठी जैसे साधनों से खाना बनाने पर जोर दिया है।होटल और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों ने बयां किया दर्दहालांकि, होटल और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि आधुनिक किचन व्यवस्था में अचानक पारंपरिक ईंधन पर लौटना आसान नहीं है। इंदौर के एक रिजॉर्ट के जनरल मैनेजर मुकेश लाड ने बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिलने से उनके काम पर सीधा असर पड़ रहा है। केरोसिन आसानी से उपलब्ध नहीं है और आज के महाराज व हलवाई लकड़ी पर खाना बनाने के अभ्यस्त भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि स्थिति एक-दो दिन और बनी रही तो बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।कैटरिंग संगठन ने लिया बड़ा फैसलास्थिति को देखते हुए मध्य प्रदेश कैटरिंग संगठन ने भी एक बड़ा फैसला लिया है। संगठन के अध्यक्ष उमेश जैन के अनुसार, शादियों में अब 100 तरह के व्यंजन बनाने के बजाय केवल 15 प्रकार के पकवान तैयार किए जाएंगे, ताकि सीमित ईंधन में भी भोजन व्यवस्था की जा सके। प्रशासन ने यह भी तय किया है कि जैसे ही कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई शुरू होगी, सबसे पहले अस्पतालों और हॉस्टलों को गैस दी जाएगी, उसके बाद कैटरिंग व्यवसाय को प्राथमिकता मिलेगी।संकट का असर ग्वालियर मेंप्रदेश के कई जिलों में इस संकट का अलग-अलग असर देखने को मिल रहा है। ग्वालियर शहर में ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर अब सीधे तौर पर दिखाई देने लगा है। इसका प्रभाव आम लोगों के जनजीवन पर भी पड़ता नजर आ रहा है। सबसे ज्यादा असर इन दिनों शादियों पर पड़ रहा है।बताया जा रहा है कि देर रात हुई शादियों और आज होने वाली शादियों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी हो गई है। इसके चलते कैटरर्स को लकड़ी की भट्टी और डीजल की भट्टी पर खाना बनाना पड़ रहा है। शहर के बड़े कैटरिंग व्यवसायी बंटी सप्रा का कहना है कि केंद्र सरकार ने गैस सिलेंडरों की जमाखोरी रोकने के लिए सख्ती शुरू कर दी है, जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारी भी सक्रिय हो गए हैं। कैटरर्स का कहना है कि अगर जिस घर में शादी है, वहां से गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाता है, तभी वे ऑर्डर लेंगे। कई कैटरर्स ने नई बुकिंग लेने से भी इनकार कर दिया है और कुछ जगह ऑर्डर रद्द करने की स्थिति बन रही है।मुरैना में घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई सामान्यमुरैना में घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई फिलहाल सामान्य बनी हुई है, हालांकि कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई दो दिनों से बंद थी। अब इंडियन ऑयल के गोदाम में सिलेंडरों से भरी एक गाड़ी पहुंचने के बाद सप्लाई शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।बड़वानी में घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग की आशंकावहीं बड़वानी में कमर्शियल सिलेंडरों की कमी के कारण कई गैस एजेंसियों ने नए कनेक्शन देना फिलहाल बंद कर दिया है। कुछ जगहों पर घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग की आशंका भी जताई जा रही है। धार जिले में गैस एजेंसियों के बाहर सिलेंडर लेने के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं और उपभोक्ताओं का कहना है कि बुकिंग कराने के बाद करीब 21 दिन में सिलेंडर मिल रहा है।छतरपुर में रिटायर्ड शिक्षक के घर पर मिला 25 सिलेंडरों का अवैध भंडारइस बीच छतरपुर में प्रशासन ने एक रिटायर्ड शिक्षक के घर छापा मारकर 25 गैस सिलेंडरों का अवैध भंडार पकड़ा है। इनमें 3 भरे हुए और 22 खाली सिलेंडर मिले हैं। प्रशासन को शक है कि इन सिलेंडरों का इस्तेमाल काला बाजारी या अवैध रिफिलिंग के लिए किया जा रहा था। मामले की जांच जारी है।मप्र में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसाय पर बढ़ा दबाव कुल मिलाकर कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई ठप होने से प्रदेश में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसाय पर दबाव बढ़ गया है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सप्लाई सामान्य होते ही प्राथमिकता के आधार पर वितरण शुरू किया जाएगा।

माथे पर त्रिपुंड, सिर पर नया मुकुट:निराकार से साकार रूप के दर्शन कर निहाल हुए भोले के भक्त, जय महाकाल के जयकारों से गूंजा परिसर
उज्जैन। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि बुधवार को विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार किया गया। इसे देखने के लिए भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लगी थीं। देश-विदेश से आए श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन और उनके विशेष शृंगार को देखने के लिए उत्सुक दिखे। सुबह 4 बजे की प्रसिद्ध भस्म आरती के समय मंदिर परिसर पूरी तरह से भक्तों से भर गया था। पूरा परिसर जय महाकाल के जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति और आस्था साफ दिखाई दे रही थी।महानिर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की भस्ममध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में सुबह की भस्म आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा की जाती है। इस आरती में महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। वहीं, भस्म आरती होने के बाद बाबा का जलाभिषेक किया गया, पंचामृत से पूजा हुई, और पवित्र भस्म से उनका विशेष स्नान भी कराया गया।रंग-बिरंगे फूलों की मालाओं ने श्रुंगार को बनाया आकर्षकअभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई। इसके बाद बाबा का विशेष शृंगार किया गया, जिसमें महाकाल का मुखारविंद (कमल के समान सुंदर मुख) बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया। बाबा के माथे पर स्पष्ट त्रिपुंड व माथे पर चंद्रमा सुसज्जित किया गया और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा को फूलों की माला पहनाई गई। साथ ही ताजा बिल्वपत्र (बेलपत्र) चढ़ाए गए और रंग-बिरंगे फूलों की मालाओं से पूरे शृंगार को और भी आकर्षक बनाया गया। यह नजारा देखकर हर किसी का मन प्रसन्न हो गया।12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है महाकालेश्वर मंदिरमहाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे बहुत खास माना जाता है। यह दुनिया का एकमात्र दक्षिणमुखी स्वयंभू शिवलिंग है। भगवान शिव यहां कालों के काल महाकाल के रूप में विराजमान हैं। महाकाल के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर की वास्तुकला में कई शैलियों का भव्य संगम देखने को मिलता है। यहां ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली अलौकिक भस्म आरती के दर्शन हेतु देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं।

बाबा महाकाल:भोलेनाथ की भक्ति में लीन हुईं टेलीविजन इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री, दर्शन के अनुभव को बताया 'दिव्य'
उज्जैन । टेलीविजन इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री कनिका मान मध्य प्रदेश के उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंची। इस दौरान उन्होंने महाकालेश्वर मंदिर में बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया और काफी देर तक हाथ जोड़कर बाबा के भक्ति रस में डूबी नजर आईं। माथे पर लाल चंदन लगाए नंदी महाराज के पास मौजूद अभिनेत्री बाबा महाकाल को निहारती नजर आईं। दर्शन के बाद उन्होंने बताया कि यह उनके लिए महाकाल के दर्शन का पहला अवसर था।कनिका ने कहा, "यहां मैं पहली बार बाबा के दर्शन के लिए आई हूं और मुझे नहीं पता था कि मेरा अनुभव इतना खास व यादगार होगा। मैं बाबा की सच्ची भक्त हूं, इसलिए मंदिर जाना मेरे लिए उत्साह था, लेकिन यहां का अनुभव वाकई और भी अद्भुत था।"उन्होंने भस्म आरती के बारे में खास तौर पर बात की। कनिका ने कहा, "भस्म आरती का अनुभव मेरे लिए बहुत खास रहा। वहां बहुत भीड़ थी, लेकिन मुझे ऐसा बिल्कुल महसूस नहीं हुआ कि कोई परेशानी हो रही है। जब मैं पीछे मुड़ी तो देखा कि इतनी बड़ी भीड़ है, फिर भी हर कोई शांति से और आराम से दर्शन कर रहा था। मुझे लगा कि सब वही दिव्य अनुभव ले रहे हैं जो मैं ले रही थी। मैं आगे की पंक्ति में बैठी थी और सब बहुत खुश नजर आ रहे थे।"अभिनेत्री ने मंदिर प्रबंधन की तारीफ की। उन्होंने कहा, "मंदिर कमिटी ने सारे इंतजाम इतने अच्छे तरीके से किए हैं कि किसी तरह की कोई समस्या नहीं हुई। सब कुछ बहुत सुव्यवस्थित था। इसलिए मैं सबको कहना चाहूंगी कि डरने की कोई जरूरत नहीं है। लोग सोचते हैं कि भीड़ ज्यादा है, दर्शन नहीं हो पाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं है। आप जरूर आ सकते हैं। कोई दिक्कत नहीं होगी। मैं खुद लास्ट मिनट में आई थी और फिर भी अच्छे से आगे बैठकर दर्शन किए।"

हिन्दू धर्म में शीतला अष्टमी का विशेष महत्व:सच्चे मन और श्रद्धा भक्ति करने पर बनी रहती है मां की कृपा, बचें इस तरह की गलतियों से
चैत्र माह में मनाया जाने वाला शीतला अष्टमी का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन माता शीतला की पूजा-अर्चना की जाती है और उनसे परिवार के सदस्यों को रोगों और बीमारियों से सुरक्षित रखने की प्रार्थना की जाती है। मान्यता है कि मौसम परिवर्तन के समय कई तरह की संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए शीतला माता की पूजा कर स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इस वर्ष शीतला अष्टमी का पर्व 11 मार्च, बुधवार को मनाया जाएगा।शीतला अष्टमी से एक दिन पहले शीतला सप्तमी मनाई जाती है। इस दिन घरों में विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें दाल-भात, पूरी, दही, लस्सी और हरी सब्जियां शामिल होती हैं। परंपरा के अनुसार इन सभी व्यंजनों को अगले दिन ठंडा और बासी रूप में खाया जाता है। शीतला अष्टमी के दिन इन्हीं पकवानों का भोग माता शीतला को अर्पित किया जाता है, जिसके बाद परिवार के सदस्य प्रसाद के रूप में उसे ग्रहण करते हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतला अष्टमी के दिन घर में चूल्हा या गैस नहीं जलाना चाहिए। इसलिए जो भी भोजन बनाना होता है, वह एक दिन पहले ही तैयार कर लिया जाता है। इस दिन ठंडा और बासी भोजन करने की परंपरा है, जिसे शरीर के लिए ठंडक देने वाला माना जाता है।इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद शीतला माता के मंदिर जाकर दर्शन करना चाहिए और विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान माता को हल्दी, दही और बाजरा का भोग लगाया जाता है। कई स्थानों पर नीम के पत्तों का भी विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि नीम स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है और रोगों से बचाव में सहायक होता है।शीतला अष्टमी का पर्व केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि यह स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी देता है। इस दिन आखिरी बार बासी भोजन करने की परंपरा मानी जाती है। इसके बाद लंबे समय तक बासी भोजन करने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन घर में पूजा करने के साथ-साथ शीतला माता के मंदिर जाना भी शुभ माना जाता है। इसके अलावा भगवान शिव की पूजा करने का भी विधान बताया गया है। कहा जाता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से की गई पूजा से माता शीतला की कृपा बनी रहती है और परिवार को रोगों से सुरक्षा मिलती है।

बामुलाहिजा....:कांग्रेस की एक कॉलम की हार, राज्यसभा के लिए किस दिग्गज का नया दांव, पुलिस ऑफिसर्स मेस की दास्तान....
TV27 पर हर सप्ताह पढ़ें संदीप भम्मरकर का विशेष काॅलमविजयपुर में कांग्रेस के जीते हुए विधायक को नामांकन फॉर्म में आपराधिक जानकारी छिपाने की वजह से अपनी विधायकी गंवानी पड़ी। अदालत का फैसला आया तो कांग्रेस इसे कानूनी लड़ाई बताने लगी, लेकिन असल सवाल कहीं और है। चुनाव के वक्त नामांकन भरवाने के लिए वकीलों और विशेषज्ञों की पूरी टीम तैनात रहती है, ताकि कागज की एक-एक पंक्ति जांची जा सके। फिर भी इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? बीजेपी की सतर्कता अपनी जगह है, लेकिन कांग्रेस की लापरवाही भी कम जिम्मेदार नहीं। अब दलीलों का दौर चल रहा है, पर असली पड़ताल उस टीम की होनी चाहिए जिसने यह फॉर्म भरवाया। क्योंकि राजनीति में कभी-कभी हार चुनाव से नहीं, एक कॉलम से होती है।दिल्ली में चला ‘मास्टर स्ट्रोक’मध्यप्रदेश कांग्रेस के एक दिग्गज नेता ने राज्यसभा को लेकर ऐसा दांव चला है कि दिल्ली दरबार में भी भौंचक माहौल है। सूत्र बताते हैं कि इस फॉर्मूले पर मंथन शुरू हो चुका है और अगर बात बन गई तो एमपी से इन्हीं दिग्गज को राज्य सभा की की सीट मिल सकती है। राज की बात यह है कि दिग्गज लीडर ने एक जोरदार फॉर्मूला दिया है, इससे कांग्रेस को दूसरे राज्यों के रास्ते भी राज्यसभा जाने का मौका मिल सकता है। दिलचस्प यह भी कि ये वही नेता हैं जो पिछले कुछ दिनों से अचानक मुख्यधारा से गायब नजर आ रहे थे। राष्ट्रीय राजनीति में जिनका भौकाल रहा है, उनका नाम अचानक सामने आए तो हैरान मत होइएगा३ क्योंकि दिल्ली की राजनीति में कई बार चाल नहीं, पूरा शतरंज बदल दिया जाता है।कांग्रेस में रंगों की राजनीतिमध्यप्रदेश कांग्रेस में इस बार होली सिर्फ रंगों की नहीं, संदेशों की भी रही। भोपाल में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कार्यकर्ताओं के साथ होली मिलन का आयोजन किया, जो लंबे समय से केवल चर्चा में ही था। दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासियों के साथ रंगपंचमी मनाकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर लीं। दोनों आयोजनों में रंग भी उड़े और सियासी जलसा भी खूब सजा। अब पार्टी के भीतर इसे ताकत के प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। रंग तो दोनों तरफ चढ़े हैं, लेकिन चर्चा इस बात की है कि भविष्य में रंग किसका जमेगा?३ क्योंकि राजनीति की होली में रंग में सियासी मायने छिपे होते हैं।जब वर्दी ने वर्दी को सलाम कियामध्यप्रदेश पुलिस में एक ऐसा पल आया, जिसने वर्दी की परंपरा को फिर जिंदा कर दिया। देश के पहले आईपीएस बैच ( वर्ष 1948) के अफसर और मध्यप्रदेश के पूर्व डीजीपी रहे एचएम जोशी की सौवीं सालगिरह पर मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाना ने पुलिस ऑफिसर्स मेस में सादा लेकिन गरिमामय आयोजन रखा। उम्र की सदी पार कर चुके जोशी का हाथ जब आज की पुलिस ने थामा, तो माहौल भावुक भी हुआ और गर्व से भरा भी। कई अफसर इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने। खास बात यह रही कि इस मौके पर सियासत का शोर नहीं था, सिर्फ वर्दी का सम्मान था। क्योंकि परंपरा तब जिंदा रहती है, जब नई वर्दी पुरानी विरासत को सलाम करती है।फिर रामेश्वर के हुए विश्वासबीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा के सालाना कवि सम्मेलन में कभी कुमार विश्वास की मौजूदगी लगभग तय मानी जाती थी। लेकिन जब कुमार विश्वास आम आदमी पार्टी की नींव रखने वालों में शरीक हुए, तो राष्ट्रवादी खेमे ने थोड़ी दूरी बना ली। इसके बाद तो रामेश्वर के आयोजन से भी उनके आने का सिलसिला ही थम गया। अब वक्त ने फिर करवट ली है। रामेश्वर शर्मा के मंच पर कुमार विश्वास की आमद फिर है। उधर कुमार विश्वास भी इन दिनों ऐसे आयोजनों में ज्यादा नजर आने लगे हैं, जिन्हें भगवाधारी खेमे में पसंद किया जाता है। अब देखना दिलचस्प होगा३ यह सिर्फ कविता की वापसी है या सियासत की नई पंक्ति लिखी जा रही है।कांटों का ताज बनी कमिश्नर की कुर्सीभोपाल नगर निगम कमिश्नर की कुर्सी किसी इम्तिहान से कम नहीं। बीते तीन-चार कमिश्नरों का हाल देखें तो तस्वीर साफ नजर आती है। आते समय जोश ऐसा कि लगता है शहर की सूरत बदल देंगे और काम का ऐसा प्रोफाइल बनाएंगे कि मंत्रालय की पांचवीं मंजिल तक चर्चा पहुंचे। लेकिन कुछ ही महीनों में जनप्रतिनिधियों की खींचतान, फंड की कमी और छोटे-छोटे कामों के दबाव की आंधी उस जोश की लौ को धीमा कर देती है। मौजूदा अफसर के साथ भी कुछ वैसी ही कहानी बनती दिख रही है। शुरुआत तेज थी, मगर अब उत्साह ठंडा पड़ता नजर आ रहा है। खबर सही जगह तक पहुंचा दी गई है, अब देखना है३ कुर्सी टिकती है या कमिश्नर।

भाजपा की सोच ने देश और लोकतंत्र को किया कलंकित:मुकेश मल्होत्रा की विधायकी शून्य होने पर भड़के जीतू, ट्रेड डील को लेकर भी किया वार
भोपाल। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने भाजपा को अपने निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि विश्व में संघर्ष के चलते देश में महंगाई का असर आने लगा। ट्रेड डील दबाव में की। किसानों की हालत खराब हो रही है। जो सोयाबीन, कपास और मक्का 40 प्रतिशत गिर गया। एलपीजी के 60 रुपए बढ़ गए। पेट्रोल-डीजल के दाम 200 रुपए होने की संभावना है।जीतू पटवारी ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कि भाजपा का कार्यकर्ता स्कॉर्पियो व फॉर्चूनर में घूम रहा है। उसका बड़ा घर हुआ कि नहीं हुआ और महंगाई का असर उसके घर पर पड़ा है या नहीं है। प्रदेशवासियों आपके पड़ोस में रहने वाले भाजपा के नेता को, चाहे मंडल का अध्यक्ष हो, चाहे पार्षद हो, चाहे विधायक हो। उसकी आज से 10 साल पहले की स्थिति क्या थी और आज उसकी स्थिति क्या है।न्याय व्यवस्था पर हमें भरोसाजीतू पटवारी ने कहा कि ये वही लोग हैं जो छुआछूत की बात करते थे। इनके अतीत और पुराने इतिहास को देखिए। ये वही लोग हैं जिन्होंने बाबासाहेब अंबेडकर का विरोध किया था। अगर आप सोशल साइट पर जाकर देखेंगे कि इन्होंने संविधान के खिलाफ क्या कहा है, वो आपको पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा की सोच ने देश के लोकतंत्र को कलंकित किया है। जीतू पटवारी ने कहा कि न्याय व्यवस्था पर हमें पूरा भरोसा है। हम सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं और 100 प्रतिशत मुकेश मल्होत्रा ही वापस चुन कर आएंगे। कांग्रेस ही जीत कर आएगी। भाजपा की चाल, चरित्र और चेहरा प्रदेश की जनता के सामने एक बार फिर आया है। उन्होंने कहा कि क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने की चिंता नहीं है लेकिन एक आदिवासी पद पर नहीं रहना चाहिए। कोई आदिवासी विधायक नहीं रहना चाहिए, इसकी चिंता है। ये है भाजपा, प्रदेशवासियों समझो व देखो। मैं फिर से प्रदेशवासियों से आग्रह करना चाहता हूं कि हम उन लोगों में से नहीं हैं कि पीछे हटेंगे। विश्वास के साथ, दृढ़ता के साथ, हिम्मत के साथ अलोकतांत्रिक लोगों से लड़ेगे। मैं बार-बार ये बात कहता हूं कि भ्रष्टाचार आपके पास हो रहा है तो आप देख लो कि भाजपा में रहने वाले कार्यकर्ता की स्थिति क्या है।

कटनी सड़क हादसे में 4 युवकों की दर्दनाक मौत:बड़वारा में मोटरसाकिल और कार के बीच हुई भीषण टक्कर, मृतकों में तीन मजदूर
कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले में सोमवार देर रात एक बड़ा दर्दनाक सड़क हादसा हो गया है। यहां के बड़वारा थाना क्षेत्र में मोटरसाइकिल और कार के बीच हुई भीषण भिड़ंत में चार युवकों की मौत हो गई है, जबकि कार में सवार पांच लोग घायल हुए हैं। मृतकों में तीन मजदूर हैं जो महाराष्ट्र से ट्रेन से लौटने के बाद अपने घर जा रहे थे। टक्कर इतनी भीषण थी कि मोटरसाकिल चकनाचूर हो गई है और सवार सड़क पर इधर-उधर उछलकर गिरे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार मानपुर निवासी तीन मजदूर सोमवार की देर रात को ट्रेन से कटनी पहुंचे थे। वे महाराष्ट्र से मजदूरी कर लौट रहे थे। ये तीनों मजदूर अपने एक मित्र के साथ मोटरसाइकिल से मानपुर आ रहे थे। इसी दौरान बड़वारा थाना अंतर्गत रेलवे पुलिया के पास कार और बाइक की आमने-सामने सीधी भिड़ंत हो गई। बगैर हेलमेट के थे मोटरसाइकिल सवार युवकमोटरसाइकिल पर सवार सभी युवक बगैर हेलमेट के थे। दुर्घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार बाइक पर एक साथ चार लोग सवार थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मोटर साइकिल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, बाइक सवार चारों लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। मृतकों की हुई पहचानमृतकों की पहचान रामकिशोर सिंह, रामदास सिंह, जितेंद्र सिंह और इंद्रभान सिंह के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि बाइक सवार कटनी की ओर जा रहे थे, जबकि कार उमरिया की दिशा से आ रही थी। कार में सवार लोग राजगढ़ के निवासी बताए जा रहे हैं, जो अंबिकापुर से लौट रहे थे। हादसे में कार मे सवार पांच लोग घायल हुए है, जिन्हें तत्काल बड़वारा स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।

शांति स्वरूपानंद को रेप केस में फंसाने की साजिश का पर्दाफाश:साध्वी ने वाराणसी की महिला को हथियार के रूप में किया था इस्तेमाल, पुलिस ने दर्ज किया मामला
उज्जैन। उज्जैन में चारधाम मंदिर के महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद को झूठे दुष्कर्म मामले में फंसाने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में पुलिस ने पूर्व महामंडलेश्वर साध्वी मंदाकिनी पुरी और घनश्याम पटेल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने वाराणसी की एक महिला को लालच देकर महाराज पर झूठा केस दर्ज कराने के लिए दबाव डाला।जानकारी के अनुसार, महिला कुछ समय पहले उज्जैन आई थी। महाकाल दर्शन और शिप्रा परिक्रमा के दौरान उसकी पहचान घनश्याम पटेल, साध्वी मंदाकिनी पुरी और महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद से हुई। इसके बाद मंदाकिनी पुरी ने महिला को अपने घर बुलाया, जहां वह करीब एक सप्ताह तक रही। इस दौरान पटेल और मंदाकिनी पुरी ने महिला पर महाराज के खिलाफ केस दर्ज कराने का दबाव डाला।पटेल ने महिला को 50 हजार का दिया था लालचमहिला के अनुसार, 27 फरवरी को पटेल वाराणसी पहुंचे और 50 हजार रुपये का लालच देकर केस दर्ज कराने की कोशिश की। पैसे महिला के बेटे के खाते में ट्रांसफर किए गए और उज्जैन तक का बस टिकट भी कर दिया गया। साथ ही, केस दर्ज न कराने पर मंदाकिनी पुरी द्वारा उसके अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी दी गई। डर के कारण महिला उज्जैन पहुंच गई।विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्जरंगपंचमी के दिन महिला दत्त अखाड़ा परिसर में घनश्याम पटेल की मौजूदगी में बयान दे रही थी। इस दौरान आनंदपुरी महाराज, पंडित लोकेश शर्मा और संजय गोस्वामी वहां पहुंचे और उन्होंने मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा को दी। पुलिस ने महिला के मोबाइल और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद साध्वी मंदाकिनी पुरी और घनश्याम पटेल के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।घनश्याम पटेल ने आरोपों को बताया निराधारघनश्याम पटेल ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि महिला ने अन्य लोगों के साथ मिलकर उनके खिलाफ षड्यंत्रपूर्वक फर्जी मामला दर्ज कराया। उन्होंने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

एमपी सरकार का कर्ज 5.06 लाख करोड़ पार, :मोहन आज फिर लेंगे 5800 करोड़ का ऋण, चालू वित्त वर्ष में कर्ज का आंकड़ा पहुंचा 84,900 करोड़ पर
भोपाल। वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर कर्ज लेने जा रही है। इस बार सरकार तीन किस्तों में 5,800 करोड़ रुपये का ऋण भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से लेगी। इस कर्ज के साथ ही मप्र सरकार का कर्ज 5.06 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। मंगलवार को लिया जाने वाला कर्ज विकास परियोजनाओं और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के उद्देश्य से लिया जा रहा है। बता दें कि सरकार ने होली के दौरान भी 6300 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। इसके एक सप्ताह बाद ही 5800 करोड़ रुपए का कर्ज लेने का फैसला किया है। इसका भुगतान बुधवार को किया जाएगा। इन नए कर्जों के साथ चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिए गए कुल कर्ज का आंकड़ा बढ़कर करीब 84,900 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। वहीं प्रदेश पर कुल देनदारी बढ़कर लगभग 5 लाख 6 हजार 640 करोड़ रुपए हो जाएगी।तीन किस्तों में लिया जाएगा कर्जवित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह कर्ज 10 मार्च यानी मंगलवार को तीन किस्तों में लिया जाएगा। पहली किस्त 1,900 करोड़, दूसरी 1,700 करोड़ और तीसरी 2,200 करोड़ रुपये की होगी। अधिकारियों का कहना है कि यह राशि मुख्य रूप से पूंजीगत कार्यों, यानी अधोसंरचना विकास और विभिन्न विकास परियोजनाओं में खर्च की जाएगी।जीतू ने सरकार पर लगाया गंभीर आरोपप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर प्रदेश को कर्ज में डुबोने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लगातार कर्ज लेने से प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है। वहीं, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी कर्ज वित्तीय अनुशासन और राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के नियमों के तहत लिया जा रहा है।सरकार का दावासरकार का यह दावा है कि लिया गया कर्ज विकास कार्यों और पूंजीगत परियोजनाओं में निवेश किया जाएगा, जिससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। वित्त विभाग का कहना है कि राज्य के कर्ज लेने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियामक दिशानिर्देशों के अनुसार है। इस तरह मध्य प्रदेश सरकार के ऊपर बढ़ता कर्ज और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप दोनों ही अब चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

मप्र के सरकारी सेवकों के लिए खुशखबरी:मोहन कैबिनेट ने 3 फीसदी डीए बढ़ाने के प्रस्ताव को दी हरी झंडी, अब केन्द्र के बराबर मिलेगा महंगाई भत्ता
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक हुई। मंत्रालय में आहूत की गई बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में सबसे बड़ा फैसला प्रदेश सरकारी सेवकों के हित में लिया गया। दरअसल मोहन कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता को हरी झंडी दे दी है। बता दें कि मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने होली के पहले प्रदेश कर्मचारियों का तीन फीसदी महंगाई भत्ता बढ़ाने की घोषणा की थी। जिस पर कैबिनेट ने अमल करते हुए आज प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। अब राज्य के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़कर 58 फीसदी हो गया है, जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर है। बैठक में पीएचई और पीडब्ल्यूडी के प्रोजेक्टों पर भी चर्चाबैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग द्वारा प्रस्तुत पेयजल परियोजनाओं और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सड़कों से जुड़े प्रोजेक्टों को चर्चा में रखा गया। इसके अलावा जल संसाधन विभाग के नहर और बांध निर्माण से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार हुआ। सभी प्रस्तावों को जल्द ही मंजूरी मिलने की संभावना है। इस बैठक में अनुराग जैन के स्थान पर प्रभारी मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा मौजूद थे। वहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल अनुपस्थित रहे।मप्र में 19 मार्च से शुरू होगा जल संवर्धन अभियानजल संरक्षण के क्षेत्र में मध्य प्रदेश की पहल की भी बैठक में सराहना हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश में 19 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू होगा। यह अभियान केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा भी सराहा गया है। अभियान के माध्यम से जल संरक्षण और जल स्रोतों के संवर्धन के लिए व्यापक जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति एवं व्यवस्था पर भी मंथनबैठक में खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के प्रभावों को देखते हुए रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति एवं व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि आवश्यक तैयारियों के माध्यम से आपूर्ति में कोई व्यवधान नहीं आने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बैठक से पहले मंत्रियों के साथ टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की जीत पर टीम इंडिया को मंत्रिपरिषद की ओर से बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

मप्र:अधिक वेतन लेने वालों की पेंशन कटौती तय, वित्त विभाग ने पेंशन अधिकारियों को दिए दो टूक निर्देश
भोपाल। मध्यप्रदेश के शासकीय कर्मचारियों ने अगर वेतन विसंगति के कारण अधिक वेतन प्राप्त किया है, तो सेवानिवृत्ति के बाद उनकी पेंशन से उस अधिक राशि की वसूली की जाएगी। वित्त विभाग ने सभी पेंशन अधिकारियों को इसके लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत उन कर्मचारियों और अधिकारियों से राशि वसूल की जाएगी जिन्होंने अधिक वेतन लेने के बाद लिखित रूप में लौटाने का वचन (अंडरटेकिंग) दिया था।वित्त विभाग के निर्देश में कहा गया है कि राज्य शासन के शासकीय कर्मचारियों के विसंगतिपूर्ण वेतन निर्धारण से हुए अधिक भुगतान की वसूली सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार की जाएगी। इस संबंध में वित्त विभाग ने समय-समय पर पूर्व में भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने अब यह सुनिश्चित किया है कि ऐसे मामलों में कोई ढील नहीं दी जाएगी, भले ही कर्मचारी या अधिकारी पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हों।वित्त विभाग ने विशेष रूप से कहा है कि जिन कर्मचारियों और अधिकारियों ने अंडरटेकिंग दी है, उनसे सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर वसूली कर सकती है। यह आदेश 12 जून 2020 को जारी किए गए थे और अब उन्हें लागू कर रिटायर हो चुके कर्मचारियों से भी अधिक वेतन की वसूली की जाएगी।हालांकि, जिन कर्मचारियों ने वसूली के लिए कोई लिखित वचन नहीं दिया है, उनसे रिकवरी नहीं की जाएगी। यह कदम अदालत द्वारा भी सुझाया गया है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी रस्तोगी के अनुसार, इस नीति से कोर्ट में अनावश्यक मुकदमों की संख्या कम होगी और कार्यवाही सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न होगी।इस कदम से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि वित्तीय अनुशासन और सरकारी नियमों का पालन आवश्यक है। शासकीय कर्मचारियों को अधिक वेतन प्राप्त होने पर तुरंत इसकी जानकारी देना और अगर आवश्यक हो तो राशि लौटाना जरूरी है। इस दिशा में जारी किए गए निर्देशों का उद्देश्य न केवल वसूली सुनिश्चित करना है, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकना भी है।वित्त विभाग ने सभी जिला और संभागीय पेंशन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वे इस आदेश का पालन कर सुनिश्चित करें कि केवल उन कर्मचारियों से ही राशि वसूली जाए जिन्होंने अंडरटेकिंग दी है। इससे कर्मचारियों की न्यायिक परेशानियों में कमी आएगी और प्रशासनिक प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी।

इंदौर भागीरथपुरा पानी कांड:राज्य स्तरीय समिति तत्काल प्रभाव से निरस्त, अब कमेटी की जिम्मेदारियों को संभालेगा आयोग
इंदौर। दो महीने पहले इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण दो दर्जन से अधिक मौतों के बाद गठित राज्य स्तरीय जांच समिति को सरकार ने तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। समिति निरस्तीकरण का कारण विधानसभा में कांड की जांच के लिए एकल सदस्यीय आयोग का गठन बताया गया है। अब आयोग राज्य स्तरीय समिति की जिम्मेदारियों को संभालेगा।राज्य स्तरीय समिति के अध्यक्ष सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ल थे। इसमें प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी पी. नरहरि, आयुक्त संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास संकेत भोंडवे और आयुक्त इंदौर संभाग सुदाम खाड़े सदस्य-सचिव थे। समिति का उद्देश्य घटना की विस्तृत समीक्षा कर सुझाव और अनुशंसाएं तैयार करना था, जो अब एकल सदस्यीय आयोग करेगा।सरकार ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय आयोग गठित किया है। आयोग को चार हफ्ते में रिपोर्ट जमा करनी है, जिसमें मृतकों की संख्या, रोग की प्रकृति, मेडिकल रिस्पांस, निवारक उपायों की समीक्षा और दीर्घकालिक सुधार के सुझाव शामिल होंगे। आयोग को प्रभावितों के मुआवजे और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने के अधिकार भी दिए गए हैं।समिति निरस्तीकरण और आयोग गठन से सरकार की जांच प्रक्रिया तेज और केंद्रीकृत होगी। अधिकारियों को अभिलेख प्राप्त करने, स्थल निरीक्षण करने और जल जांच के आदेश देने का अधिकार आयोग को प्राप्त है। समय सीमा पूरी होने में अभी एक हफ्ता शेष है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है। इस निर्णय से अब भागीरथपुरा कांड की जांच में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की उम्मीद है।

महाकालेश्वर मंदिर भस्मारती:बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार निहारने उत्सुक हुए भक्त, चेहरों पर दिखाई दी भक्ति और आस्था की झलक
उज्जैन। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में हर रोज सुबह की भस्म आरती लोकप्रिय रहती है। इस आरती के लिए भक्त देर रात से ही मंदिर परिसर पहुंचना शुरू कर देते हैं। मंगलवार को चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर भगवान महाकाल का खास शृंगार किया गया। इस मौके पर सुबह की भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतार देखने को मिली। देश-विदेश से आए श्रद्धालु बाबा का भव्य श्रृंगार देखने के लिए उत्सुक नजर आए। पूरा मंदिर बाबा के भक्तों की लंबी कतारों से भरा हुआ है। पूरा मंदिर परिसर जय महाकाल के जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति और आस्था साफ दिखाई दे रही थी।अपनी खासियत के लिए मानी जाती है भस्मारतीमहाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती अपनी खासियत के लिए जानी जाती है। इसमें भस्म से बाबा का अभिषेक किया जाता है, जो बहुत दिव्य और खास अनुभव देता है। बाबा की भस्म आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा की जाती है। इसमें महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। वहीं, भस्म आरती होने के बाद बाबा का जलाभिषेक किया गया, पंचामृत से पूजा हुई और पवित्र भस्म से उनका विशेष स्नान भी कराया गया।पंचामृत से पूजा और पवित्र भस्म से बाबा को कराया स्नानमध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती की गई। इस दौरान भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया, पंचामृत से पूजा और पवित्र भस्म से उनका विशेष स्नान भी कराया गया। इस पंचामृत में शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस का मिश्रण शामिल था। अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई।इसके बाद बाबा को चंदन से शृंगार किया गया व माथे पर चंद्रमा सुसज्जित किया गया और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा को फूलों की माला पहनाई गई। भक्त बाबा का अद्भुत शृंगार देखकर खुशी से गदगद दिखे। हर दिन बाबा का शृंगार अलग-अलग तरीके से किया जाता है। इस आरती में शामिल होने के लिए भक्त देश-विदेश से आते हैं।

मप्र की विजयपुर विधानसभा सीट पर भाजपा का प्रतिनिधित्व:कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी की शून्य, जानें पूरा मामला
ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने विजयपुर विधानसभा सीट को लेकर दायर चुनाव याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव अमान्य घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी रहे रामनिवास रावत को विजयपुर से विधायक घोषित किया गया है।यह फैसला ग्वालियर बेंच के जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया ने सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव के दौरान उम्मीदवार द्वारा दी गई जानकारी में गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं और तथ्यों को छिपाया गया है। इसी आधार पर मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया गया।पूर्व मंत्री ने मल्होत्रा के खिलाफ दायर की थी याचिकादरअसल, यह मामला भाजपा नेता और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत द्वारा दायर की गई चुनाव याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुकेश मल्होत्रा ने नामांकन पत्र के साथ दाखिल किए गए अपने शपथपत्र में आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी नहीं दी थी। याचिकाकर्ता के अनुसार मल्होत्रा के खिलाफ कुल छह आपराधिक मामले दर्ज थे, लेकिन उन्होंने अपने हलफनामे में केवल दो मामलों का ही उल्लेख किया था।दस्तावेजों में सही पाए गए आरोपसुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रस्तुत दस्तावेजों और रिकॉर्ड का विस्तृत परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि उम्मीदवार द्वारा अपने आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाना निर्वाचन नियमों का उल्लंघन है। कोर्ट ने माना कि मतदाताओं को सही जानकारी देना उम्मीदवार की जिम्मेदारी होती है, ताकि वे सूचित निर्णय ले सकें।रामनिवास रावत घोषित हुए विधायकइसी आधार पर हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त करते हुए उनका निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया। साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत को विजयपुर विधानसभा क्षेत्र का निर्वाचित विधायक घोषित किया जाए।इस फैसले के बाद विजयपुर विधानसभा सीट पर अब भाजपा का प्रतिनिधित्व हो गया है। राजनीतिक रूप से इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे चुनावी हलफनामों में पारदर्शिता और सही जानकारी देने की अनिवार्यता पर जोर दिया।

शाहबाज खान:संगीत से दूरी, अभिनय से दोस्ती, इंदौर के अभिनेता का अनोखा सफर
मुंबई। कहरते हैं कि भाग कहां ले जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता। ऐसा ही सिनेमा और टीवी पर चमकने वाले अभिनेता शाहबाज खान को भी नहीं पता था कि उन्हें क्या करना है, लेकिन भाग्य और मेहनत के भरोसे उन्होंने फैंस के दिलों में राज किया। इतना ही नहीं आज भी वे टीवी पर अपने निगेटिव रोल्स से राज कर रहे हैं। लेकिन यह बहुत कम लोग जानते हैं कि अभिनेता के पिता हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के दिग्गज गायक थे, जिन्होंने शास्त्रीय संगीत को नया रूप दिया था।10 मार्च को इंदौर में जन्मे शाहबाज शाही घराने से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के दिग्गज गायक उस्ताद अमीर खान थे, जिन्होंने आज गावत मन मोरा झूम के, जिन के मन में राम बिराजे और बैरागी रूप धरे जैसे गाने गाए थे। उनके दादा शामीर खान भी सारंगी वादक थे। इतने बड़े घराने से आने के बावजूद भी अभिनेता को संगीत से दूर रखा गया क्योंकि उनकी मां ही नहीं चाहती थी कि वो गायक बनें।दरअसल, अभिनेता की मां नहीं चाहती थी कि भरी महफिल में कोई यह कहे कि उस्ताद अमीर खान का बेटा कैसा गाता है। जब शाहबाज छोटे थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया और उस वक्त उन्हें संगीत की तालीम देने वाला कोई नहीं था। अगर वे किसी और घराने में संगीत सीखने जाते तो कई तरह की बातें होतीं। अभिनेता ने खुद इंटरव्यू में कहा था कि मां ने कहा था कि भले ही रिक्शा चला ले लेकिन संगीत नहीं सीखना है। अभिनेता की शुरुआती पढ़ाई बोर्डिंग स्कूल में हुई, जहां उन्होंने अकेले खुद को संभालना सीखा। वह छोटी उम्र में ही समझदार बन चुके थे लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि भाग्य उन्हें सिनेमा की तरफ लेकर जाने वाला है।होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद भी उन्हें नहीं पता था कि करना क्या है लेकिन एक दोस्त के बुलाने पर मुंबई चले गए,जहां उन्होंने कई महीनों तक थिएटर सीखा और उनकी किस्मत तब चमकी, जब उन्हें टीवी सीरीज टीपू सुल्तान में हैदर अली का रोल मिला। पहले टीवी सीरीज कुछ ही एपिसोड में खत्म होने वाली थी लेकिन अभिनेता की किस्मत ने साथ दिया और उन्होंने 58 एपिसोड तक काम किया। टीपू सुल्तान शाहबाज को पहचान दिलाने के लिए काफी था। उन्हें उर्दू की बेहतर समझ के चलते सीरियल ऑफर हुआ, जिसके बाद वो चंद्रकांता, बेताल पचीसी और द ग्रेट मराठा जैसे सीरियल में दमदार रोल में दिखे।सीरियल में पहचान बनाने के बाद उन्होंने फिल्मों का रूख किया। शुरुआत भले ही फिल्म नाचनेवाले गानेवाले से हुई, लेकिन बाद में कैसे-कैसे रिश्ते, धरतीपुत्र, जिद्दी, युग और मेजर साब जैसी फिल्मों में सिनेमा के खरतनाक विलेन बनकर उभरे। आज भी अभिनेता टीवी और ओटीटी की दुनिया पर राज कर रहे हैं।

लोक निर्माण के खराब कामों पर सख्ती: ब्लैकलिस्ट होंगे ठेकेदार, अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई, सात जिलों में किया निरीक्षण
भोपाल। मध्यप्रदेश में लोक निर्माण विभाग के गुणवत्ताहीन कामों को लेकर विभाग सख्त हो गया है। प्रदेशभर में पूरे हो चुके निर्माण कार्यों के निरीक्षण किए जा रहे हैं। जिन भी काम में कमी अथवा खराब गुणवत्ता मिल रही है, ऐसे ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किए जाने तथा कंसल्टेंटों और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है। हाल में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियेां ने सात जिलों में निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया है। निरीक्षण में गुणवत्ता के अनुकूल नहीं पाए गए कामों के लिए संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने तथा कंसलटेंट के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही कामों से जुड़े अधिकारियों को भी नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।भोपाल-मुरैना की एजेंसियों पर कार्रवाई के निर्देश निरीक्षण रिपोर्ट की समीक्षा मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भरत यादव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की गई। बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और निरीक्षण दल के सदस्य शामिल हुए। समीक्षा के दौरान भिण्ड जिले के उदोतगढ़ में निर्माणाधीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन और आवासीय भवनों का काम संतोषजनक नहीं पाया गया। इस पर संबंधित ठेकेदार मेसर्स जय कैला देवी कंस्ट्रक्शन कंपनी, मुरैना को ब्लैकलिस्ट करने और कंसलटेंट एनोवियस कंसल्टेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, भोपाल के खिलाफ कार्रवाई व वसूली के निर्देश दिए गए। साथ ही संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए।रेंडम आधार पर 35 कामों का किया निरीक्षण लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंताओं के सात दलों ने सीहोर, पांढुर्णा, भिण्ड, बड़वानी, मऊगंज, उज्जैन और पन्ना जिलों में निर्माण कार्यों की जांच की। इस दौरान कुल 35 निर्माण कार्यों का रेंडम आधार पर चयन कर उनकी गुणवत्ता और प्रगति की जांच की। इनमें 21 कार्य लोक निर्माण विभाग (सड़क और पुल) के, 5 कार्य परियोजना क्रियान्वयन इकाई (भवन) के, 6 कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम, 2 कार्य मध्यप्रदेश भवन विकास निगम तथा एक कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग का शामिल था। निरीक्षण के दौरान 20 अन्य निर्माण कार्यों में भी कमियां मिलीं, जिन्हें जल्द सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।अधिकारियों को यह भी मिले निर्देश बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि निरीक्षण से संबंधित प्रतिवेदनों का पालन सुनिश्चित करें और सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध समाधान करें। साथ ही पुल-पुलियों की मरम्मत को प्राथमिकता से पूरा करने और जहां उनकी स्थिति खतरनाक है, वहां नए प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया, ताकि मानसून से पहले जरूरी कार्य पूरे हो सकें। इसके अलावा सड़क सुरक्षा और बांध सुरक्षा ऑडिट के काम प्राथमिकता से पूरे करने, लोक कल्याण सरोवरों का निर्माण जल्द पूरा करने और लोक निर्माण सर्वेक्षण ऐप के माध्यम से सभी सड़कों की मैपिंग पूरी करने के निर्देश भी दिए गए।

अमले को शस्त्र से सशक्त नहीं बना पाया वन विभाग:डंडे के भरोसे जंगलों की सुरक्षा को मजबूर अमला, परिणामः न रूका अतिक्रमण और न ही वन्यप्राणियों का शिकार
भोपाल। बढ़ते अतिक्रमण और वन्यप्राणियों के शिकार की घटनाएं जहां प्रदेश में रूकने का नाम नहीं ले रही है। वहीं दूसरी ओर इस पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी संभालने वाला वन विभाग सुरक्षा में तैनात अमले को शस्त्र से सशक्त नहीं बना पाया है। इसके चलते इसका कार्यपालिक अमला डंडे के भरोसे जंगलों की सुरक्षा को मजबूर है। इसका खामियाजा राज्य के वन संसाधन को बतौर नुकसान उठाना पड़ रहा है। कारण यह भी है कि कार्यपालिक अमले की कमी के बीच तैनात कर्मचारी जान की परवाह में वन अपराधियों के संगठित गिरोहों का सीधा मुकाबला करने से जहां बचता है। वहीं दूसरी ओर अपराधी इसका फायदा उठाते हुए अतिक्रमण और वन्यप्राणियों के शिकार से बाज नहीं रहा है। साल दर साल बढ़ी घटनाएंवन अपराध का आंकड़ा साल दर साल बढ़ा है। वन अपराध प्रकरण का आंकड़ा जहां 60 हजार तक चला जाता है। वहीं अतिक्रमण से संबंधित प्रकरण सालाना 2 हजार तक दर्ज किये जाते हैं। अवैध परिवहन, अवैध उत्खनन ही नहीं अवैध शिकार के प्रकरणों में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।नहीं हैं बंदूक चलाने के अधिकार जंगल की सुरक्षा में तैनात अमले को सरकार द्वारा शस्त्र धारण के अधिकार तो दिये हैं पर इसके परिचालन पर पाबंदी है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि इस संबंध में नियम प्रक्रिया के प्रस्ताव मंजूरी के लिये शासन स्तर पर लंबित है। लटेरी घटना में प्राण बचाने वन अमले द्वारा की गई गोली चालान के बाद हुई एफआईआर से नाराज कर्मचारियों ने विरोध स्वरूप अपनी बंदूके जमा करा दी थी। करीब 2 साल पहले हुई इस घटनाक्रम को देखते हुए तत्कालीन वनबल प्रमुख व्हीएन अंबाडे द्वारा पुनरू मानक संचालन प्रक्रिया तैयार कराई गई, बावजूद इसके कार्यकाल के दौरान वह भी इसे मंजूर नहीं करा पाये। प्रस्ताव अभी भी विचाराधीन है। पुलिस के समान मिले गोली चलान के अधिकारमप्र वन कर्मचारी मंच के अशोक पांडेय का कहना है कि स्वयं में यह बड़ा सवाल है कि डंडे के सहारे अमला कब तक जंगलों की सुरक्षा करेगा। इसलिये पुलिस के शस्त्र संचालन का अधिकार मिलना चाहिये। खासकर गश्ती दल के कर्मचारियों के लिये यह जरूरी है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो जांच और एफआईआर का सामना कर्मचारियों को करना पड़ सकता है।

मप्र में 25 साल बाद सरकारी नौकरी के लिए हटेगी 2 बच्चों की शर्त:डीजीए ने तैयार किया मसौदा, कैबिनेट से जल्द लगेगी मुहर
भोपाल। मप्र में 25 साल बाद सरकारी नौकरी के लिए 2 बच्चों वाली अनिवार्य शर्त हटने जा रही है। इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। जल्द ही प्रस्ताव कैबिनेट में आएगा। उसके बाद मप्र सिविल सेवा नियम 1961 में संशोधन कर जोड़ी गई दो बच्चों की बाध्यता वाली शर्त को हटा दिया जाएगा। हालांकि अभी भी सरकारी कर्मचारियों के लिए 2 बच्चों कीे बाध्यता है, लेकिन ऐसे मामलों की शिकायतों पर अब सरकारी विभागों में कार्रवाई होना लगभग बंद हो चुका है। मप्र में 26 जनवरी 2001 में सरकारी नौकरी के लिए 2 बच्चों की बाध्यता लागू की थी। इसके बाद शासकीय सेवक के 2 से अधिक जीवित बच्चे होने की स्थिति में कई लोगों की नौकरी भी जा चुकी है। अब सरकार इसमें बदलाव करने जा रही है। इसको लेकर शीर्ष स्तर पर सहमति बन चुकी है। अंतिम निर्णय कैबिनेट से होगा। 2 बच्चों की बाध्यता वाली शर्त हटने के बाद 3 जीवित बच्चे होने पर भी किसी की नौकरी नहीं जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग के अनुसार शर्त हटने के साथ ही तीसरी संतान से जुड़े जितने भी शासन स्तर या न्यायालयों में लंबित हैं, वे स्वतरू समाप्त हो जाएंगे। बताया गया कि इसके लिए विभाग ने विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। हालांकि 2001 के बाद जिन लोगों की नौकरी तीसरी संतान की वजह से जा चुकी है, उन्हें सेवा में वापस लिया जाएगा या नहीं। इसका अंतिम निर्णय कैबिनेट से होगा। हालांकि प्रस्ताव में सेवा वापसी का कोई प्रावधान नहीं है। 9 साल पहले हटा चुका है छत्तीसगढ़अविभाजित मप्र में दो बच्चों की बाध्यता वाल नियम बन चुका था, ऐसे में 1 नवंबर 2000 को बंटवारे के बाद छत्त्तीसगढ़ में भी दो बच्चों की बाध्यता वाला नियम लागू किया गया था। हालांकि छत्तीसगढ़ ने 9 साल पहले 14 जुलाई 2017 को यह पाबंदी हटा दी थी। अब वहां तीन बच्चों पर भी नौकरी में लोग काम कर रहे हैं। इसी तरह राजस्थान भी 11 मई 2016 को दो बच्चों की बाध्यता वाले नियम को हटा चुका है। इनका कहना हैइस मामले में सामान्य प्रशासन विभाग ने होमवर्क किया है। अब यह मामला वरिष्ठ स्तर पर प्रक्रिया में है। अजय कटेसरिया, अपर सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग

मिट्टी से जुड़ा हौसला बना पहचान: छिंदवाड़ा की पूजा माहौरे ने प्राकृतिक खेती से रची सफलता की मिसाल
छिंदवाड़ा। कहते हैं मेहनत और सही दिशा में उठाया गया कदम जिंदगी की तस्वीर बदल देता है। छिंदवाड़ा जिले के ग्राम रोहनाकला की महिला किसान पूजा माहौरे की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कभी बढ़ती लागत और घटती पैदावार से चिंतित रहने वाली पूजा आज प्राकृतिक खेती और पशुपालन के माध्यम से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और हर महीने लगभग 40 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। पति तरुण माहौरे के साथ मिलकर उन्होंने खेती को नया स्वरूप दिया और आज वे अपने क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।जब खेती बनी चिंता का कारणपूजा माहौरे के पास लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि है। पहले वे पारंपरिक तरीके से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कर खेती करती थीं। लेकिन समय के साथ खेती की लागत बढ़ने लगी और मिट्टी की उर्वरता भी कम होने लगी। इससे खेती का लाभ घटता गया और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ने लगी।प्रशिक्षण ने बदली सोचइसी बीच कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के अंतर्गत उन्हें कृषि सखी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। यहां उन्हें नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने बीजामृत, जीवामृत, पंचगव्य, निर्मास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक घोल तैयार करना और उनका उपयोग करना सीखा। प्रशिक्षण से मिली जानकारी को उन्होंने अपने खेतों में लागू किया और धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ा दिए।प्राकृतिक खेती से बढ़ी आमदनीआज पूजा माहौरे अपने खेत के लगभग एक एकड़ क्षेत्र में रसायन मुक्त सब्जियों की खेती कर रही हैं। उनकी सब्जियां पूरी तरह प्राकृतिक होने के कारण बाजार में उनकी मांग अधिक है। वे अपने उत्पाद प्राकृतिक जैविक हाट बाजार में बेचती हैं, जहां उन्हें अच्छा मूल्य मिलता है। सब्जियों की बिक्री से उन्हें लगभग 10 हजार रुपये प्रतिमाह शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है।पशुपालन बना आय का मजबूत आधारप्राकृतिक खेती के साथ-साथ पूजा माहौरे ने देसी गिर और साहीवाल नस्ल की 10 गायों का पालन भी शुरू किया। इन गायों के दूध की बिक्री से उन्हें लगभग 30 हजार रुपये प्रतिमाह शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। इस तरह खेती और पशुपालन के समन्वय से उनकी कुल अतिरिक्त आय लगभग 40 हजार रुपये प्रतिमाह हो गई है।मेहनत को मिला सम्मानकृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत आयोजित जिला स्तरीय मिलेट मेले में पूजा माहौरे ने प्राकृतिक और जैविक सब्जियों की दुकान लगाई, जिसे लोगों ने खूब सराहा। उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें संयुक्त संचालक कृषि और उपसंचालक कृषि द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।महिलाओं के लिए प्रेरणाआज पूजा माहौरे अपने अनुभव साझा करते हुए आसपास के किसानों और महिलाओं को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि किसान कम लागत वाली प्राकृतिक खेती और पशुपालन को अपनाएं तो खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।

मोहन ने तोड़ा अशोकनगर दौरे का मिथक: जो भी सीएम गया, उसे छह महीने में गंवानी पड़ी कुर्सी, शिवराज ने किया था परहेज
भोपाल। मध्य प्रदेश के अशोक नगर के बारे में मिथक है कि जब भी किसी मुख्यमंत्री ने यहां का दौरा किया, उसे अपनी कुर्सी से हाथा धोना पड़ा। इस मिथक को लेकर पूर्व सीएम प्रकाशचंद सेठी, अर्जुन सिंह, श्यामाचरण शुक्ल, सुंदरलाल पटवा, मोतीलाल वोरा, लालू प्रसाद और दिग्गज कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह गिनाए जाते हैं। जो यहां आने के बाद अगले चुनाव में अपनी गद्दी से हट गए थे। इसी मिथक के चलते शिवराज सिंह चौहान ने डेढ़ दशक से अधिक समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहते कभी अशोक नगर शहर का दौरा नहीं किया, लेकिन अब इस मिथक को सुबे मुखिया डाॅ. मोहन यादव ने तोड़ दिया है। वे रविवार को रंगपंचमी के मौके पर अशोकनगर पहुंचे और करीला धाम में आयोजित रंगपंचमी के कार्यक्रम में सहभागिता की। बता दें कि जिला मुख्यालय अशोक नगर में अभी तक जिन मुख्यमंत्रियों ने दौरा किया उन्हें छह माह के भीतर अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी और अभी तक कई मुख्यमंत्री अशोक नगर का दौरा करने के बाद अपनी कुर्सी गवां चुके हैं। सुंदरलाल पटवा कॉलेज का उद्धाटन करने आए और 15 दिन बाद कुर्सी गंवानी पड़ी। उमा भारती जिला मुख्यालय के बायपास से गुजरी और तीन बाद उनकी कुर्सी पर संकट आ गया। दिग्विजय सिंह अशोक नगर को जिला मुख्यालय घोषित करने पहुंचे, जिसके बाद कांग्रेस आज तक सत्ता में नहीं लौटी। लालू प्रसाद यादव भी बतौर बिहार के मुख्यमंत्री यहां कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे, जिसके कुछ ही दिनों बाद राबड़ी देवी को गद्दी सौंपनी पड़ी। अंतिम समय में बदल जाता था शिवराज का कार्यक्रममाना जा रहा है कि अशोकनगर से जुड़े इस मिथक को देखते हुए मुख्यमंत्री रहते शिवराज सिंह चौहान ने एक बार भी यहां का दौरा नहीं किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का कई बार अशोकनगर का दौरा बना लेकिन अंतिम समय में उनका दौरा या तो स्थगित कर दिया गया अथवा स्थान बदल दिया गया। लेकिन अब इस मिथक को सीएम डाॅ. मोहन यादव ने तोड़ दिया है। उन्होंने करीला धाम में माता जानकी के दर्शन किए और भक्तों के साथ फूलों की होली खेली। श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अदभुत संगम करीला धामवहीं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम मोहन ने कहा कि अशोकनगर जिले का करीला धाम श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अदभुत संगम है। इस पावन स्थल पर माता सीता अपने दोनों पुत्र लव-कुश के साथ विराजमान हैं। यह देश का एक मात्र अद्वितीय मंदिर है, जहाँ माता सीता अपने दोनों पुत्रों के साथ पूजी जाती हैं। देश के अधिकांश मंदिर भगवान श्रीराम को समर्पित हैं। करीला धाम लव-कुश की जन्म-स्थली भी है, जो लव-कुश की बाल लीलाओं की साक्षी है। इस पवित्र स्थली के सम्पूर्ण विकास की योजना बनाई जायेगी।

भारत में जन्मी चीतों की पहली पीढ़ी ने लांघी सीमा: उत्साहित हुए विशेषज्ञ और अधिकारी, एनटीसीए ने कही यह बात
श्योपुर। मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर राजस्थान के बारां जिले तक पहुंचे दो चीतों की गतिविधियों ने वन्यजीव विशेषज्ञों और अधिकारियों को उत्साहित कर दिया है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए ) ने इसे चीतों का स्वाभाविक व्यवहार बताते हुए कहा है कि लंबी दूरी तय करना और नए क्षेत्रों की तलाश करना उनके प्राकृतिक स्वभाव का हिस्सा है।जानकारी के अनुसार कूनो से बाहर निकलने वाले ये दोनों चीते केपी-2 और केपी -3 हैं। खास बात यह है कि ये भारत में जन्मी चीतों की पहली पीढ़ी के शावक हैं, जिनके माता-पिता वर्ष 2022 में अफ्रीका से भारत लाए गए थे। इन शावकों की यह लंबी यात्रा ‘प्रोजेक्ट चीता’ के लिए भी सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।केपी-20 राजस्थान के मंगरोल में किया गया ट्रैक वन विभाग के अनुसार केपी-2 को राजस्थान के बारां जिले के मंगरोल रेंज में ट्रैक किया गया है, जबकि केपी-3 कूनो से लगभग 60 से 70 किलोमीटर की दूरी तय कर बांझ अमली संरक्षण रिजर्व तक पहुंच गया है। फिलहाल दोनों चीते पार्वती नदी के दोनों किनारों पर करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद बताए जा रहे हैं।विशालकाय काॅरिडोर की योजनाएनटीसीए के अधिकारियों ने बताया कि ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत पहले से ही कूनो से गांधी सागर तक एक बड़े अंतर-राज्यीय वन्यजीव कॉरिडोर की योजना बनाई गई है। यह कॉरिडोर लगभग 17,000 वर्ग किलोमीटर के विशाल लैंडस्केप में फैला होगा, जिसमें राजस्थान के 7 और मध्य प्रदेश के 8 जिले शामिल हैं। चीतों की मौजूदा आवाजाही इस योजना के महत्व को और मजबूत करती है।यह बोले विशेषज्ञविशेषज्ञों का कहना है कि जंगली जानवर अक्सर अपने लिए नए इलाकों और शिकार की तलाश में लंबी दूरी तय करते हैं। इसलिए चीतों का दूसरे राज्य में जाना किसी असामान्य घटना के बजाय उनके प्राकृतिक व्यवहार का संकेत है।चीतों की सुरक्षा को लेकर अलर्ट मोड में राज्यों का वन अमलाइधर, चीतों की सुरक्षा को लेकर दोनों राज्यों के वन विभाग पूरी तरह सतर्क हैं। किशनगंज और अंता रेंज की फील्ड टीमें 24 घंटे निगरानी कर रही हैं। जीपीएस और रेडियो कॉलर के जरिए चीतों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। छज्ब्। ने कहा कि मध्य प्रदेश और राजस्थान के वन विभागों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा गया है ताकि चीतों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।

मप्र में फसल और किसान दोनों के बुरे हाल:कांग्रेस का आरोप, गेंहू खरीदी में 2700 रुपए प्रति क्विंटल का था वादा, बिक रहा महज 1800 में
भोपाल। मप्र कांग्रेस ने एक बार फिर सरकार द्वारा मनाए जा रहे कृषक कल्याण वर्ष पर सवाल खड़े किए हैं। मप्र के किसानों से 2700 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर गेहूं खरीदने का वादा किया था, लेकिन गेहूं 1700 रुपए प्रति क्विंट की दर पर खरीदा जा रहा है। इसी तरह सोयाबीन एवं अन्य फसलों के दाम नहीं मिले। ऐसे में सरकार किस बात का कृषक कल्याण वर्ष मना रही है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी, मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, राष्ट्रीय पेनालिस्ट अभय दुबे और पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे ने किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरा। पटवारी ने कहा कि प्रदेश में किसानों के बुरे हाल हैं। कोईसुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने किसानों को तीन बड़ी गारंटियां दी थीं, गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल, धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल और सोयाबीन 6000 रुपए प्रति क्विंटल खरीदने की बात कही थी। लेकिन हकीकत यह है कि उज्जैन मंडी में गेहूं 1800 से 1900 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। यह स्थिति उज्जैन विधानसभा क्षेत्र की मंडी की है। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस ने इसका वीडियो भी जारी किया था, जिससे साफ है कि एक तरफ सरकार कृषि कल्याण की बात करती है और दूसरी तरफ किसानों को उचित दाम तक नहीं मिल पा रहा है।मप्र में कृषि व्यवस्था की रीढ़ टूट रहीकांग्रेस नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री को पिछले एक साल का हिसाब देना चाहिए। अगर सरकार सच में किसानों के हित में काम कर रही है तो वह अपने एक साल के काम का ब्योरा सार्वजनिक करे। प्रदेश में कृषि व्यवस्था सरकारी उदासीनता के बोझ तले दम तोड़ रही है। कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार विभाग में स्वीकृत 14,537 पदों में से 8,468 पद खाली हैं, यानी लगभग 60 प्रतिशत कर्मचारी नहीं हैं। इसके अलावा मत्स्य पालन विभाग में 1,290 में से 722 पद रिक्त हैं, उद्यानिकी विभाग में 3,079 में से 1,459 पद खाली हैं और पशुपालन व डेयरी विभाग में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं।


