MADHYA-PRADESH NEWS

पांढुर्णा में विकास की नई गूंज:जाम सावली हनुमान लोक के लोकार्पण से बदलेगा जिले का भविष्य
छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्णा में स्थित प्रसिद्ध जाम सावली हनुमान मंदिर परिसर गुरुवार को ऐतिहासिक पल का साक्षी बना, जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भव्य हनुमान लोक का लोकार्पण किया। सीएम ने 362 करोड़ रुपए के 67 विकास कार्यों का भी लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में उत्साह और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में जुटने लगे थे और मुख्यमंत्री के आगमन पर जय श्रीराम और बजरंगबली के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।पूजा-अर्चना और पारंपरिक विधि-विधान के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई। मुख्यमंत्री ने हनुमान लोक की परिकल्पना को धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास का एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि जाम सवाली हनुमान मंदिर पहले से ही श्रद्धा का केंद्र रहा है, लेकिन हनुमान लोक के विकसित होने से यह देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अपनी अलग पहचान बनाएगा।मुख्यमंत्री ने महाकाल लोक का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह उज्जैन को वैश्विक पहचान मिली, उसी तरह पांढुर्णा भी धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर तेजी से उभरेगा। उन्होंने बताया कि इस पहल से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पर्यटन आधारित रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।सीएम ने 362 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पणइस दौरान 362 करोड़ रुपये की लागत से 67 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया गया। इनमें सौसर में केंद्रीय विद्यालय, पांढुर्णा में कलेक्टर-एसपी कार्यालय, जिला अस्पताल, जिला पंचायत भवन और रेलवे ओवरब्रिज जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा और नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।हनुमान लोक के निर्माण से इन्हें मिलेगा बढ़ावाहनुमान लोक के निर्माण से होटल, परिवहन, छोटे व्यापार और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन में कमी आने की उम्मीद है।कार्यक्रम के अंत में जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने इस पहल को पांढुर्णा के विकास का नया अध्याय बताते हुए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा और लोगों में भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जाग उठीं।

सिंहस्थ महापर्व-2028: :सीएम मोहन ने क्षिप्रा के नए घाटों का किया मुआयना, श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए किए जा रहे तैयार
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज उज्जैन में क्षिप्रा नदी पर निर्माणधीन घाटों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने में कोई कमी नहीं रखी जायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री अंगारेश्वर और श्री सिद्धवट के मध्य क्षिप्रा नदी पर बन रहे नए घाटों का अवलोकन भी किया। ये घाट आगामी सिंहस्थ महापर्व-2028 को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं के स्नान और अन्य सुविधाओं के लिए तैयार किए जा रहे हैं। घाटों पर श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं की जा रही हैं।सीएम ने नवनिर्मित घाटों के लगभग 200 मीटर क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए वस्त्र बदलने की व्यवस्था तथा सुविधाजनक स्थानों पर टॉयलेट बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रमुख घाटों पर लगभग 200 मीटर की दूरी पर सुविधा घर विकसित करने के निर्देश भी दिए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घाटों के आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए लगभग 500 मीटर की दूरी पर सीढ़ियाँ या अन्य पहुँच मार्ग सुनिश्चित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए, जिससे मुख्य घाटों तक पहुंचना आसान हो सके।निर्माणाधीन पुल का भी किया निरीक्षणसीएम ने श्री सिद्धवट और श्री अंगारेश्वर मंदिर के बीच निमार्णाधीन पुल का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि पुल के निर्माण से दोनों प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच आवागमन सुगम होगा और श्रद्धालुओं को एक वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध होगा। घाटों पर स्नान के लिए लगभग 5 मीटर चौड़ा घाट तैयार किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं के आने-जाने के साथ बैठने की भी पर्याप्त सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घाटों पर श्रद्धालुओं के बैठने सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं भी विकसित करने के निर्देश दिए।

छिंदवाड़ा का जहरीला सिरप कांड:एसआईटी ने कोर्ट में पेश की फाइनल रिपोर्ट, गुनहगारों की बढ़ी मुश्किलें
भोपाल। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 23 बच्चों की मौत से जुड़े बहुचर्चित जहरीले कफ सिरप कांड में जांच अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को न्यायालय में पूरक और अंतिम चालान पेश कर दिया। इस चालान में हाल ही में गिरफ्तार किए गए दो शिशु रोग विशेषज्ञों डॉ. एस.एस. ठाकुर और अमन सिद्दीकी के खिलाफ साक्ष्यों और जब्त दस्तावेजों का विस्तृत विवरण शामिल है।इस मामले की शुरुआत 4 अक्टूबर 2025 को हुई थी, जब परासिया के बीएमओ डॉ. अंकित सहलाम की शिकायत पर थाना परासिया में प्रकरण दर्ज किया गया। प्रारंभिक जांच के दौरान शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया गया था। बाद में जांच का दायरा बढ़ाते हुए तमिलनाडु से जुड़े तीन आरोपियों सहित कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन सभी के खिलाफ एसआईटी ने पहले ही आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिया था।नए तथ्यों और साक्षों के आधार पर एसआईटी ने और दो डाॅक्टरों को किया था अरेस्टजांच के दौरान सामने आए नए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने दो और डॉक्टरों को गिरफ्तार किया। इसके बाद पूरक चालान दाखिल कर जांच को पूर्ण घोषित कर दिया गया है। एसआईटी प्रमुख एवं डीएसपी जितेंद्र जाट ने बताया कि सभी गवाहों के बयान, वैज्ञानिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विवेचना पूरी कर ली गई है और अब आगे की कार्रवाई न्यायालय में होगी।विशेषज्ञों की मेडिकल रिपोर्ट ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई। जिन बच्चों की मौत हुई थी, उनके पोस्टमार्टम और क्लीनिकल जांच में समान लक्षण पाए गए। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि सभी मौतें जहरीले कफ सिरप के सेवन से हुईं, जिससे जांच को स्पष्ट दिशा मिली।पीड़ित परिवारों ने जांच पर उठाए सवालहालांकि, पीड़ित परिवारों ने जांच पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि परासिया के स्टेशन रोड स्थित एक अन्य डॉक्टर ने भी बीमार बच्चों को यही कफ सिरप लेने की सलाह दी थी, लेकिन उसके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि उसके क्लीनिक के सामने स्थित दो मेडिकल स्टोरों को सील किया जा चुका है। पीड़ित पक्ष के वकील संजय पटोरिया का कहना है कि न्यायालय के निर्देश पर इस मामले में आरोपियों की संख्या और बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के कुछ पहलुओं पर अभी और कार्रवाई की आवश्यकता है।

मप्र बोर्ड कक्षा 5वीं-8वीं के परिणाम जारीः:दोनों कक्षाओं में टाॅप पर रहा नरसिंहपुर, बेटों पर भारी पड़ी लाडलियां
भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केंद्र ने बुधवार को कक्षा 5वीं और 8वीं का वार्षिक परीक्षा के रिजल्ट जारी कर दिए हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने दोनों कक्षाओं के परिणाम घोषित किए। इस साल 5वीं का में जहां 95.14 फीसदी छात्र पास हुए हैं। वहीं कक्षा 8वीं का रिजल्ट 93.83 फीसदी रहा है। परीक्षा परिणाम में छात्राओं ने एक बार फिर बाजी मारी है। छात्राओं का उत्तीर्ण प्रतिशत 94.98 फीसदी रहा है, जबकि छात्रों का पास प्रतिशत 92.74 प्रतिशत दर्ज किया गया। बता दें कि इस बार कुल 24 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए थे। वहीं कक्षा 5वीं में पास होने के मामले में छात्राएं अव्वल रहीं हैं। जारी परिणाम में 96.19 फीसदी छात्राएं उत्तीर्ण हुईं। वहीं 94.15 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश के लाखों बच्चों को इस परिणाम के माध्यम से खुशी मिलने वाली है। इस साल पिछले साल से बेहतर परिणाम आया। ग्रामीण क्षेत्र का परिणाम शहरी क्षेत्र से बेहतर रहा। वहीं, सरकारी स्कूलों का परिणाम निजी स्कूलों से बेहतर रहा है।काॅपी जांचने के लिए बनाए गए थे 322 मूल्यांकन केन्द्रमंत्री ने कहा पहली बार बड़े स्तर पर परिणाम जारी किया गया है। कॉपी जांचने के लिए प्रदेशभर में 322 मूल्यांकन केंद्र बनाए गए थे। यहां 1.10 लाख से ज्यादा शिक्षकों ने उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया। इसके बाद अंकों की ऑनलाइन एंट्री कर परिणाम तैयार किया गया।टॉप जिलों का प्रदर्शनकक्षा 5वीं मेंनरसिंहपुर: 99.70ःबालाघाट: 99.30ःडिंडोरी: 99.29ःकक्षा 8वीं मेंनरसिंहपुर: 99.38 फीसदीडिंडोरी: 98.74 फीसदीबालाघाट: 98.71 फीसदीबोर्ड पैटर्न में हुआ था एग्जाम इस बार प्रदेश के सरकारी, निजी स्कूलों और मदरसों के करीब 23.68 लाख विद्यार्थियों ने बोर्ड पैटर्न पर परीक्षा दी थी। फरवरी में आयोजित इन परीक्षाओं के लिए प्रदेश भर में मूल्यांकन का विशाल कार्य किया गया। 322 केंद्रों पर 1.10 लाख से अधिक शिक्षकों ने कॉपियों की जांच की, जिसके बाद अंकों की ऑनलाइन प्रविष्टि की गई।

चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन:मां महागौरी की आराधना से सौभाग्य और सुख की होती है प्राप्ति, इस बार बन रहा विशेष संयोग भी
नई दिल्ली। चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि 26 मार्च को पड़ रही है। इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। साथ ही अशोक अष्टमी व्रत और मासिक दुर्गाष्टमी भी मनाई जाएगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का भी संयोग बन रहा है, जो शुभ कार्यों के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है। नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की आराधना से भक्तों को शक्ति, सौभाग्य और सुख की प्राप्ति होती है।दृक पंचांग के अनुसार, गुरुवार को सूर्योदय 6 बजकर 18 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 36 मिनट पर होगा। तिथि की बात करें तो अष्टमी सुबह 11 बजकर 48 मिनट तक है। उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन अष्टमी का मान होगा। नक्षत्र आर्द्रा है जो शाम 4 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। धर्मशास्त्र के अनुसार, शुभ कार्य सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत काल या अभिजित मुहूर्त में करना शुभकर होता है। वहीं, राहुकाल और दुर्मुहूर्त या अशुभ समय के दौरान किसी भी शुभ काम से बचना चाहिए।जानें शुभ मुहूर्त के बारे मेंगुरुवार को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 45 मिनट से 5 बजकर 31 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 2 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। वहीं, गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 34 मिनट शाम से 6 बजकर 58 मिनट तक, अमृत काल सुबह 6 बजकर 50 मिनट से 8 बजकर 21 मिनट तक और सर्वार्थ सिद्धि योग शाम 4 बजकर 19 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। साथ ही रवि योग शाम 4 बजकर 19 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।अशुभ समयअशुभ समय की बात करें तो 26 मार्च को राहुकाल दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 3 बजकर 31 मिनट तक, यमगंड सुबह 6 बजकर 18 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 9 बजकर 23 मिनट से 10 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। वहीं, दुर्मुहूर्त सुबह 10 बजकर 24 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।

श्री महाकाल लोक में दिखा अलौकिक दृश्य:भोले की एक झलक पाने देर रात लाईन में लगे भक्त, भव्य शृंगार को देख हुए भाव-विभोर
उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर की प्राचीन भव्यता पूरे विश्व में विख्यात है। बारह ज्योतिर्लिंगों में दक्षिणमुखी महाकालेश्वर का अपना एक विशिष्ट स्थान है और उसमें भी विशिष्ट है यहां होने वाली भस्म आरती। आरती में शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और पूरे मंदिर का माहौल देखने लायक होता है। ऐसा ही अलौकिक दृश्य बुधवार को देखने को मिला है। इस दिन भक्त बाबा के दर पर दर्शन के लिए देर रात से लंबी कतारों में लगे हुए थे।देश-विदेश से आए श्रद्धालु बाबा का भव्य शृंगार देखने के लिए उत्सुक नजर आए। पूरा मंदिर बाबा के भक्तों की लंबी कतारों से भरा हुआ था। सुबह भोर में बाबा के पट खुले और फिर महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा पहले बाबा का जलाभिषेक किया, जिसमें उन्हें पंचामृत से स्नान करवाया गया। इस पंचामृत में शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस का मिश्रण शामिल था। अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई। इसमें महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।जय महाकाल के जयकारों से गूंजा परिसरइसके बाद पूरा मंदिर परिसर जय महाकाल के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। भक्तों ने श्हर हर महादेवश् और ऊं नमः शिवाय के जयकारे लगाए। इसके बाद भगवान महाकाल का सुंदर श्रृंगार किया गया। फूलों की मालाएं, बेलपत्र, चंदन और अन्य पूजा सामग्री से बाबा को सजाया गया। फिर, बाद में महाकाल की कपूर आरती की गई और उसके बाद उन्हें भोग लगाया गया। हर दिन अलग तरीके से किया जाता है बाबा का शृंगारहर दिन बाबा का शृंगार अलग-अलग तरीके से किया जाता है। वहीं, भस्म आरती देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उज्जैन आते हैं। महाकाल की भस्म आरती न सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि यह आस्था का जीवंत प्रमाण है। आरती में शामिल होने के लिए पुरुषों के लिए धोती और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

61 के हुए मप्र के मुखिया:पीएम मोदी ने की दीर्घायु और स्वस्थ्य जीवन की कामना, इन हस्तियों ने भी दी शुभकामनाएं
नई दिल्ली-भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार यानि 25 मार्च 2026 को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। यह उनका 61वां जन्म दिन है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत तमाम पार्टी के दिग्गज नेताओं ने सीएम मोहन को जन्म दिन की शुभकामनाएं दी है। पीएम ने सीएम के कार्यों की सराहना भी की है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं। वे मध्य प्रदेश के सर्वांगीण विकास को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई अनेक पहलों में अग्रणी हैं। मैं उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।अमित शाह ने मोहन को दी शुभकामनाएंकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। मोदी जी के मार्गदर्शन और आपके नेतृत्व में प्रदेश विकास और जनकल्याण के नए आयाम छू रहा है। प्रभु महाकाल आपको उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करें।गडकरी ने की दीर्घायु और मंगलमय जीवन की प्रार्थनाकेंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सीएम मोहन यादव को शुभकामनाएं देते हुए ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लिखा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करता हूं।ऊर्जावान नेतृत्व के धनी मप्र के सीएमः योगीउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पोस्ट में लिखा, जनसेवा को समर्पित, ऊर्जावान नेतृत्व के धनी, मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की हार्दिक बधाई। बाबा महाकाल से आपके उत्तम स्वास्थ्य, सुदीर्घ और सुयशपूर्ण जीवन की प्रार्थना है। वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पोस्ट किया, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। आपके दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।हरियाणा के सीएम ने भी दी जन्मदिन की शुभकामनाएंहरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लिखा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर से प्रार्थना है कि आप सदैव स्वस्थ रहें, ऊर्जावान रहें और दीर्घायु हों व प्रदेशवासियों के कल्याण और राज्य की निरंतर प्रगति के आपके सभी संकल्प पूर्ण हों।

जन्मदिवस विशेष:संघर्ष, अध्ययन और संस्कारों से गढ़ा नेतृत्व—डॉ. मोहन यादव
अनूप पौराणिकमध्यप्रदेश की राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो केवल पद प्राप्त नहीं करते, बल्कि अपने विचार, व्यवहार और कार्यशैली से नेतृत्व की नई परिभाषा गढ़ते हैं। डॉ. मोहन यादव ऐसे ही नेताओं में शामिल हैं, जिनका जीवन संघर्ष, अध्ययन, संगठन और संस्कारों के संतुलन का सशक्त उदाहरण है। 25 मार्च 1965 को उज्जैन में जन्मे डॉ. यादव का प्रारंभिक जीवन सादगी और अनुशासन से परिपूर्ण रहा। धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना से समृद्ध उज्जैन की भूमि ने उनके व्यक्तित्व को गहराई और संतुलन प्रदान किया, जहाँ परंपरा और आधुनिकता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।उनकी शैक्षिक यात्रा उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी आधारशिला रही है। विज्ञान, प्रबंधन (एमबीए), विधि और राजनीतिक शास्त्र में पीएचडी जैसी विविध शिक्षा ने उन्हें व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया। उनके लिए शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और शासन को समझने का उपकरण रही। यही कारण है कि उनके निर्णयों में संवेदनशीलता के साथ-साथ तर्क, तथ्य और दूरदृष्टि का संतुलन दिखाई देता है।डॉ. मोहन यादव का सार्वजनिक जीवन छात्र राजनीति से शुरू हुआ। माधव विज्ञान महाविद्यालय में छात्रसंघ के पदों पर रहते हुए उन्होंने नेतृत्व की प्रारंभिक झलक प्रस्तुत की। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने संगठन, अनुशासन और सामूहिक निर्णय की प्रक्रिया को निकट से समझा। नगर स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक की जिम्मेदारियों ने उन्हें एक सशक्त संगठनकर्ता के रूप में स्थापित किया। यही अनुभव उनके राजनीतिक जीवन की मजबूत नींव बना।राजनीतिक जीवन में संघर्ष भी उनके साथ-साथ चला। वर्ष 2003 में भारतीय जनता पार्टी द्वारा बड़नगर विधानसभा से टिकट मिलने के बाद परिस्थितियोंवश उसे लौटाना उनके जीवन का एक कठिन निर्णय था। लेकिन इस चुनौती ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि उनके धैर्य और निष्ठा को और मजबूत किया। उन्होंने प्रतीक्षा को अपनी शक्ति बनाया और संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखा। यह प्रसंग उनके व्यक्तित्व की गहराई और परिपक्वता को दर्शाता है।प्रशासनिक अनुभव के क्षेत्र में भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया। उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने नगर विकास और अधोसंरचना को नई दिशा दी। उनके कार्यकाल में विकास योजनाओं को इस प्रकार लागू किया गया कि शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान सुरक्षित बनी रहे। यह संतुलन उनके नेतृत्व की विशेषता है—जहाँ विकास और विरासत साथ-साथ चलते हैं। मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पर्यटन को आर्थिक और सांस्कृतिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाया। उनके नेतृत्व में प्रदेश को लगातार दो वर्षों तक राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण और प्रशासनिक क्षमता का प्रमाण है।विधायक के रूप में लगातार तीन बार जनता का विश्वास जीतना उनकी जनसंपर्क क्षमता और लोकप्रियता को दर्शाता है। वे संवाद आधारित राजनीति में विश्वास रखते हैं, जहाँ जनता के साथ सीधा जुड़ाव प्राथमिकता होता है। उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, जब मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को प्रभावी रूप से लागू करने में अग्रणी भूमिका निभाई। नए महाविद्यालयों की स्थापना, कौशल आधारित शिक्षा और पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण ने शिक्षा को रोजगार और नवाचार से जोड़ा।डॉ. मोहन यादव केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं। विभिन्न संगठनों में उनकी भूमिका ने युवाओं को प्रेरित करने का कार्य किया। उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण पहलें कीं, जिनमें विक्रमादित्य परंपरा का पुनर्स्थापन और सांस्कृतिक आयोजनों का विस्तार शामिल है। 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करना उनके लंबे राजनीतिक और सामाजिक साधना का परिणाम था। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उनके निरंतर परिश्रम, संगठन निष्ठा और जनविश्वास का प्रतीक है।उनकी जीवन यात्रा यह स्पष्ट करती है कि नेतृत्व कोई संयोग नहीं होता, बल्कि यह निरंतर प्रयास, धैर्य और आत्मसंयम से विकसित होता है। डॉ. मोहन यादव का नेतृत्व इस बात का उदाहरण है कि जब व्यक्ति अपने मूल्यों, शिक्षा और संगठन के प्रति समर्पित रहता है, तो वह न केवल सफलता प्राप्त करता है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा भी बनता है।(लेखक :- युवा पत्रकार और शोधार्थी है)

निगम मंडल नियुक्तियां:हारे हुए नेताओं के लिए बीजेपी की ना
प्रसन्न शहाणे हारे हुए नेताओं को निगम मंडलों में एडजेस्ट नहीं करेंगे हेमंत खंडेलवाल का यह बयान मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर एक नई रणनीति की ओर इशारा करता है। उनके इस रुख से पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं और चुनाव हार चुके वरिष्ठ नेताओं के बीच समीकरण बदल सकते हैं।इस बयान के पीछे की अहम वजहों का आंकलन करें तो समझ में आता है की राष्ट्रीय संगठन की मंशा भांपते हुए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बिना लाग लपेट के सीधे और सपाट शब्दों में ये फरमान सुनाया है ,,पार्टी चाहती है की कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना है तो हारे हुए नेताओं को तवज्जो देना बंद करना होगा ,, लंबे समय से संगठन में यह मांग उठती ही रही है कि जो कार्यकर्ता जमीन पर रहकर मेहनत करते हैं, उन्हें सत्ता में भागीदारी मिलनी चाहिए। श्हारे हुए नेताओंश् को दूर रखकर खंडेलवाल संभवतः उन सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका देना चाहते हैं जो पिछले कई चुनावों से हाशिए पर थे।मध्य प्रदेश में निगम-मंडलों की नियुक्तियां लंबे समय से चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हेमंत खंडेलवाल के हालिया बयान ने उन नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं जो चुनाव हारने के बाद पुनर्वास की उम्मीद लगाए बैठे थे।लगता है पार्टी अब परफॉर्मेंस आधारित राजनीति चाहती है यानी पार्टी अब केवल कद या पुराने अनुभव के आधार पर पद बांटने के मूड में नहीं है। चुनावी हार को जवाबदेही से जोड़कर बीजेपी एक ऐसा कल्चर विकसित करना चाहती है जहाँ जीत ही सबसे बड़ी योग्यता मानी जाए। इससे न केवल गुटबाजी पर लगाम लगेगी बल्कि जो नेता चुनाव हारने के बाद भी निगम-मंडलों के जरिए अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश करते हैं वो भी अलग थलग पड़ जायेंगे साथ ही इस नए फॉर्मूले से वरिष्ठ नेताओं का दबाव कम होगा और नए चेहरों को उभरने का रास्ता मिलेगा।वर्तमान में लगभग 40 से अधिक ऐसे बोर्ड, निगम और प्राधिकरण हैं जहाँ अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद रिक्त हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं एमपी हाउसिंग बोर्ड , मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम ,नागरिक आपूर्ति निगम , पर्यटन विकास निगमऔर कृषि विपणन बोर्डखंडेलवाल के श्हारे हुए नेताओं को जगह नहींश् वाले फॉर्मूले के बाद अब ऐसे चेहरों पर नजर रहेगी जो संगठन के निष्ठावान कार्यकर्ता हो , वे नेता जो दशकों से संगठन में जिला अध्यक्ष या प्रदेश पदाधिकारी रहे हैं, लेकिन उन्हें कभी चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला। सरकार को सिंधिया खेमे के उन नेताओं को भी संतुष्ट करना होगा जो वर्तमान में किसी सदन के सदस्य नहीं हैं, लेकिन सक्रिय हैं। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाना भी जरूरी है लिहाजा नियुक्तियों में मालवा-निमाड़ और ग्वालियर-चंबल के साथ-साथ विंध्य क्षेत्र को साधने की कोशिश की जाएगी, ताकि 2028 के लिए सामाजिक समीकरण भी दुरुस्त रहें। यानी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष के लिए अपनी श्कोर टीमश् तैयार करने का सुनहरा मौका है, जिसमें युवा और ऊर्जावान चेहरों को प्रशासनिक अनुभव मिल सके।

सोम डिस्टिलरीज को तगड़ा झटका:हाईकोर्ट से सभी याचिकाएं खारिज , एक्साइज विभाग के एक्शन को बताया भी वैध
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शराब कारोबार से जुड़ी एक अहम याचिका पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि शराब का व्यापार मौलिक अधिकार नहीं है। मप्र हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने न्यायमूर्ति विवेक अग्रवालकी अध्यक्षता में सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनी की याचिका खारिज कर दी।मामला एक्साइज विभाग द्वारा 8 लाइसेंस निलंबित किए जाने से जुड़ा था। विभाग ने 4 फरवरी 2026 को यह कार्रवाई की थी, जो 26 फरवरी 2024 को जारी शो-कॉज नोटिस पर आधारित थी। नोटिस में फर्जी परमिट के जरिए शराब के अवैध परिवहन के आरोप लगाए गए थे।कपंनी की दलील पर सरकार ने दिया तर्ककंपनी की ओर से दलील दी गई कि संबंधित नोटिस 2023-24 की अवधि से जुड़ा था और 31 मार्च 2024 को लाइसेंस समाप्त हो चुके थे। नए लाइसेंस जारी होने के बाद पुराने मामलों के आधार पर कार्रवाई को अवैध बताया गया। वहीं राज्य सरकार ने तर्क दिया कि एक्साइज कानून के तहत विभाग को नियम उल्लंघन पर कार्रवाई का पूरा अधिकार है।सरकारी नियंत्रण में होता है शराब का व्यापारकोर्ट ने अपने 32 पन्नों के फैसले में कहा कि शराब का व्यापार पूर्णतः सरकारी नियंत्रण में होता है और यह किसी भी तरह से मौलिक अधिकार की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस निलंबित या रद्द करना पूरी तरह वैध है।कोर्ट ने फैसले में यह भी कहाहाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शो-कॉज नोटिस किसी एक समयावधि तक सीमित नहीं होता। यदि आरोप गंभीर हों तो बाद में भी कार्रवाई की जा सकती है और पुराने उल्लंघन नए लाइसेंस को प्रभावित कर सकते हैं। फैसले में यह भी कहा गया कि यदि धोखाधड़ी के आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो अन्य कानूनी दलीलें कमजोर पड़ जाती हैं। अदालत ने इस कार्रवाई को “प्रोपोर्शनैलिटी टेस्ट” के अनुरूप उचित ठहराया।

मप्र में फिर करवट लेगा मौसम:राहत के बाद गर्मी ने दिखाने शुरू किए तीखे तेवर, 38 डिग्री पर पहुंचा रायसेन का पारा, तपे यह जिले भी
भोपाल। मध्य प्रदेश में इन दिनों मौसम लगातार करवट बदल रहा है, लेकिन इसके बावजूद गर्मी का प्रभाव धीरे-धीरे तेज होता जा रहा है। प्रदेश के उत्तर और मध्य हिस्सों में बादलों की मौजूदगी से कुछ समय के लिए राहत जरूर मिली है, मगर यह राहत ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान फिर तेजी से बढ़ेगा और गर्मी अपने तीखे तेवर दिखाएगी।सोमवार को उज्जैन, सागर और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में बादल छाए रहने से तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली। हालांकि, प्रदेश के अन्य इलाकों में गर्मी का असर साफ नजर आया। रायसेन में पारा 38 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि नर्मदापुरम, रतलाम, खरगोन और खजुराहो में तापमान 35 डिग्री से ऊपर बना रहा।मप्र में सक्रिय होंगे दो नए वेदर सिस्टममौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 26 और 29 मार्च को दो नए वेदर सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, जिनके प्रभाव से आंधी और हल्की बारिश हो सकती है। इससे तापमान में थोड़ी गिरावट आएगी, लेकिन यह राहत अस्थायी ही होगी। इसके बाद गर्मी फिर जोर पकड़ेगी और तापमान तेजी से बढ़ेगा।मार्च में मई जैसा होने लगा था अहसासमार्च के महीने में ही मई जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है। शुरुआती दिनों में ही तेज गर्मी का दौर शुरू हो गया था। हालांकि बीच-बीच में आए मौसम बदलाव ने कुछ राहत दी, लेकिन अब फिर तापमान बढ़ने लगा है। दिन के समय तेज गर्मी और रात में सामान्य तापमान का सिलसिला जारी है।अप्रैल-मई में पड़ेगी भीषण गर्मीमौसम विभाग का अनुमान है कि अप्रैल और मई में प्रदेश को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा। ग्वालियर, चंबल, रीवा, जबलपुर, शहडोल और सागर संभाग में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है। वहीं भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे बड़े शहर भी गर्मी की चपेट में रहेंगे। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से पहले ही किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं। अब बढ़ती गर्मी गेहूं, फल और सब्जियों की खेती के लिए नई चुनौती बनकर सामने आ रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर:मप्र में वितरण को लेकर नई गाइड लाइन जारी, शैक्षणिक-चिकित्सा संस्थानों को मिली प्राथमिकता
भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के वितरण को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। यह व्यवस्था सोमवार से लागू कर दी गई है। सरकार का कहना है कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों और केंद्र सरकार के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए गैस आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्थित किया गया है, ताकि आवश्यक सेवाओं पर किसी प्रकार का असर न पड़े।नई गाइडलाइन के अनुसार, शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इन संस्थानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार 100 प्रतिशत तक आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए कुल आवंटन में 30 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। इसके बाद केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, पुलिस विभाग, जेल, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित अन्य आवश्यक सेवाओं को 35 प्रतिशत तक गैस आवंटित की जाएगी।इनका सीमित कोटा किया गया निर्धारितहोटल, रेस्टोरेंट और मिठाई दुकानों को सीमित कोटा निर्धारित किया गया है। इन श्रेणियों को 9-9 प्रतिशत गैस आवंटन मिलेगा, जबकि ढाबा और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए 7 प्रतिशत हिस्सा तय किया गया है। औद्योगिक क्षेत्र में फार्मास्यूटिकल, फूड प्रोसेसिंग और पॉली पैक उद्योगों को 5 प्रतिशत गैस दी जाएगी। अन्य उद्योगों और जरूरतमंद श्रेणियों को भी 5 प्रतिशत तक आवंटन का प्रावधान किया गया है।अब उपभोक्ताओं की दैनिक खपत का रखा जाएगा रिकार्डसरकार ने स्पष्ट किया है कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति विभिन्न पैक साइज-5 किलोग्राम, 19 किलोग्राम, 47.5 किलोग्राम और 425 किलोग्राम में की जाएगी। वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए उपभोक्ताओं की दैनिक खपत का रिकॉर्ड रखा जाएगा और उसी आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।जमाखोरी और कालाबाजारी में कठोर कार्रवाई के निर्देइसके साथ ही, जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन को नियमित निरीक्षण करने के लिए कहा गया है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने संस्थानों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया है, ताकि गैस आपूर्ति का संतुलन बनाए रखा जा सके। यह व्यवस्था अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।

मप्र बोर्ड परीक्षाः :लाखों छात्रों का इंतजार होगा खत्म, जानें कब जारी होंगे 10वीं-12वीं के परिणाम, मूल्यांकन में लगे में 20 लाख शिक्षक
भोपाल। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 10वीं और 12वीं के वार्षिक परीक्षा परिणाम अप्रैल के दूसरे सप्ताह में जारी होने की संभावना है। स्कूल शिक्षा विभाग ने मूल्यांकन कार्य को समय पर पूरा करने के लिए सभी मूल्यांकन केंद्रों को सख्त निर्देश दिए हैं। वहीं कक्षा 5वीं और 8वीं के नतीजे इसी सप्ताह घोषित किए जा सकते हैं, जिससे लाखों छात्रों का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है।इस वर्ष कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में लगभग 16 लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया था। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए करीब 20 हजार शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। अधिकारियों के अनुसार मूल्यांकन प्रक्रिया तेजी से अंतिम चरण में पहुंच रही है और अधिकांश केंद्रों पर कार्य लगभग पूरा हो चुका है। विभाग का उद्देश्य है कि परिणाम समय पर जारी किए जाएं, ताकि छात्र आगे की पढ़ाई और करियर की योजना सही समय पर बना सकें।तकनीकी स्तर पर भी तैयारियां तेजमूल्यांकन कार्य में तेजी लाने के साथ ही रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही मूल्यांकन पूरी तरह समाप्त होगा, परिणाम घोषित करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। इसके लिए तकनीकी स्तर पर भी तैयारियां पूरी की जा रही हैं, ताकि रिजल्ट जारी होते ही छात्र आसानी से अपना परिणाम देख सकें।फेल होने वाले छात्रों को जून में फिर मिलेगा अवसरविभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो छात्र दो विषयों में अनुत्तीर्ण होंगे, उन्हें जून माह में पुनः परीक्षा देने का अवसर दिया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों का एक साल खराब होने से बचाना है और उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने का मौका देना है।इसी सप्ताह आ सकता है 5वीं-8वीं का रिजल्टइधर कक्षा 5वीं और 8वीं के परिणाम भी इसी सप्ताह जारी होने की संभावना है। इन परीक्षाओं का आयोजन राज्य शिक्षा केंद्र मध्य प्रदेश द्वारा फरवरी 2026 में किया गया था। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरा हो चुका है और अब परिणाम घोषित करने की अंतिम तैयारियां चल रही हैं। परिणाम की तारीख जल्द ही आधिकारिक पोर्टल पर घोषित की जाएगी।

बामुलाहिजा: गुना में किस नेता का था पार्सल... निगम-मंडल के रास्ते राज्यसभा की तीसरी सीट का राज... पढ़िए सियासी फुसफुसाहट
संदीप भम्मरकरगुना में दिल्ली का सियासी पार्सल?गुना की एक छोटी सी पुलिस चौकी और वहां पकड़ी गई एक करोड़ की रकम, कहानी यहीं खत्म हो जानी थी। लेकिन 20 लाख में “सेटलमेंट” हुआ... फोन गुजरात से आया... और अब सवाल दिल्ली तक जा पहुंचा है। आखिर ये सिर्फ कैश था... या किसी बड़े खेल की कड़ी? मामला दब चुका था, फाइल बंद हो चुकी थी, लेकिन ग्वालियर अंचल के ही एक अफसर ने “लीक” कर पूरी कहानी को सड़कों पर ला दिया। अब तक कार्रवाई पुलिस तक सीमित है, लेकिन असली सवाल वहीं खड़ा है कि वो एक करोड़ आखिर गया कहां? और उससे भी बड़ा सवाल३ ये पैसा किसके लिए था? सूत्रों की गलियों में अब एक नई फुसफुसाहट तैर रही है... कहा जा रहा है कि ये रकम दिल्ली के किसी बड़े नेता से जुड़ी थी। मुख्यमंत्री की सख्त कार्रवाई के बाद मामला और गरमा गया है... लेकिन सियासत की ये परतें इतनी आसानी से खुलती नहीं हैं। गुना की चैकी में पकड़ा गया कैश अब सिर्फ “सबूत” नहीं रहा। ये एक सवाल बन चुका है... जिसका जवाब शायद फाइलों में नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों में छुपा है।बाबा का कांग्रेस में हिन्दू बमआदिवासी इलाकों में धर्म और पहचान को लेकर नैरेटिव सेट करने में जुटे उमंग सिंघार की मुहिम को उनकी ही पार्टी के भीतर से झटका लग गया है। भागवत कथा वाचक पंडित मोहित नागर ने कांग्रेस के मंच से ऐसा “हिंदू बम” फोड़ा कि सियासत में गूंज दूर तक सुनाई दे रही है। उनका साफ कहना है कि आदिवासी हिंदू ही हैं, उनका अलग कोई धर्म नहीं। दिलचस्प बात ये है कि कुछ ही दिन पहले उमंग सिंघार आदिवासी सभाओं में ठीक इसके उलट बात रखते दिखे थे, जहां वे आदिवासियों को हिंदू न मानने की लाइन पर जोर दे रहे थे। अब हाल ये है कि कांग्रेस में ही दो विचार आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं। एक तरफ “पहचान की नई राजनीति” तो दूसरी तरफ “परंपरा का पुराना पाठ”। सवाल ये है कि ये घटना ये भीतर का टकराव है ये गहरी दरारों का नतीजा हैं। लेकिन बाहर तो क्लीयर हो रहा है कि आदिवासियों के हिन्दू एजेंडे को लेकर कांग्रेस का मैसेज क्लीयर नहीं है।निगम-मंडल से राज्यसभा का रास्तातीन सीटें, एक पक्की फिर भी कांग्रेस खेमे में बेचैनी? क्या इस बार वोटिंग मशीन नहीं “मनोविज्ञान” हैक होने वाला है? ये सवाल राज्यसभा चुनाव से पहले फिर से हवा में तैर रहे हैं। वैसे तो “ऑपरेशन लोटस” भूलने वाला कांड नहीं है। लेकिन राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेसी खेमा फिर उसी एहसास से गुजर रहा है। विजयपुर की हालिया घटना के बाद कांग्रेस का वही दर्द फिर उभरने लगा है कि फिर से कोई “खेल” न हो जाए। सियासी गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी की तरफ से एक पुराना लेकिन असरदार फॉर्मूला फिर हवा में तैर रहा है। एक राज्यसभा वोट के बदले निगम-मंडल की कुर्सी! ये कोई नया प्रयोग नहीं है। इससे पहले भी इस तरह के “पैकेज डील” सियासत के मंच पर दिख चुके हैं। अब कांग्रेस के भीतर नजरें अपने ही विधायकों पर टिक गई हैं कौन नाराज है, कौन संतुष्ट और कौन “ऑफर” के लिए तैयार बैठा है ये सब बारीकी से तौला जा रहा है। वोटिंग का दिन अभी दूर है, लेकिन सियासी बाजार सज चुका है। अब देखना ये है, कांग्रेस का कुनबा एकजुट रहेगा३ या फिर कोई “एक वोट” पूरी कहानी बदल देगा?पीसीसी में फट रही ठेकेदारों की फाइलेंपहले साथ में टेंडर, फिर साथ में ट्रांजेक्शन और अब सीधे प्रेस कॉन्फ्रेंस! वैसे तो अफसरों और ठेकेदारों के बीच ‘पहले प्यार’ वाला रिश्ता रहता है। ये रिश्ता अक्सर “समझदारी की चाय” पर चलता है। लेकिन जैसे ही रकम की चीनी कम-ज्यादा होती है, रिश्ते में कड़वाहट घुलने लगती है तो नतीजा पॉलिटिकल प्रहार के रूप में बदल रहा है। ऐसे ही “नाराज फूफा” अब नया ठिकाना ढूंढ चुके हैं और वो है प्रदेश कांग्रेस कमेटी का दफ्तर। एक-एक कर ठेकेदार अपने पुराने कांग्रेसी कनेक्शन खंगालते हुए पीसीसी पहुंच रहे हैं और साथ ला रहे हैं पूरा हिसाब-किताब, फाइलें, और “गुप्त डायरी” का खजाना। इधर पीसीसी में बैठे नेता भी किसी शिकारी बाज से कम नहीं मुद्दा मिला नहीं कि झपट्टा मारा... और फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आरोपों के तीर चलाए जा रहे हैं। इन तीरों का निशाना भले अफसर दिखते हों, लेकिन चोट सीधी सरकार पर लग रही है। और इस पूरे खेल का सबसे दिलचस्प किरदार हैं वही ठेकेदार जो सिस्टम से नाराज होकर मैदान में उतरे थे। अब मीडिया में उठती धूल को दूर खड़े होकर ऐसे देख रहे हैं जैसे कोई अपनी ही फिल्म का ट्रेलर एंजॉय कर रहा हो। फाइलें खुल रही हैं रिश्ते टूट रहे हैं और सियासत इस पूरे ड्रामे का फ्रंट रो टिकट लेकर बैठी है।सीधी कार्यवाही से कुनबा नाराजसीधी कार्रवाई और सत्ता का सख्त संदेश! लेकिन इस बार मामला सिर्फ ट्रांसफर-पोस्टिंग का नहीं, पूरे अफसरी कुनबे की धड़कनों का है। सीधी के कलेक्टर और गुना के एसपी पर हुई कार्यवाही के बाद सीएम के गुस्से का शिकार बनने वाले कलेक्टरों की संख्या 10 हो गई है और एसपी जैसे सीनियर आईपीएस अफसरों का आंकड़ा 8 पर पहुंच गया है। वैसे, हटाने की कार्यवाही तो एक परंपरा सी बन चुकी है। लेकिन मौजूदा कार्यवाही के बाद ऊपर के अफसरी कुनबे के कान खड़े कर दिए हैं। चर्चा आईएएस और आईपीएस एसोसिएशन के ग्रुप्स में हुई। अफसर ये कहते सुनाई दिए कि कलेक्टर-एसपी जैसे जिम्मेदार अफसर पर इस तरह का बर्ताव करके हटाना ठीक नहीं है। वैसे, देखा गया है कि एसोसिएशन के नाक-भौंहे चढ़ाने का कोई फायदा नहीं होता। अब क्या असर दिखाई देगा, कहना मुश्किल है।

बाबा महाकाल का अद्भुत शृंगार देखकर गदगद हुए भक्त:कपाट खुलते ही जय श्री महाकाल के जयकारों से गूंजा परिसर
उज्जैन। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर सोमवार को बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के बाबा महाकाल के दर पर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। मंदिर परिसर में श्रद्धालु बाबा की झलक पाने के लिए रविवार देर रात से लंबी कतारों में लगे हुए थे। परंपरा के अनुसार, बाबा महाकाल को जगाने के लिए सोमवार सुबह 4 बजे मंदिर के पट खोले गए। सुबह-सुबह ही कई सारे श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होते हुए दिखाई दिए। उन्होंने सुबह-सुबह भगवान के दर्शन किए और पवित्र पूजा विधियों को देखा।यह आरती महाकाल मंदिर की सबसे विशेष और पवित्र परंपरा का हिस्सा मानी जाती है। भक्तों ने बड़ी श्रद्धा से भगवान के दर्शन किए और आरती के दौरान पूजा विधि को बड़े मन से देखा। यह आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा करवाई जाती है।पंचामृत से हुआ बाबा महाकाल का अभिषेकइसमें बाबा निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। सुबह 3ः30 से 4ः00 बजे के बीच मंदिर के पट खुलते हैं और गर्भगृह में पूजा शुरू होती है। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक किया गया, जिसमें शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस का मिश्रण शामिल था। अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई।अद्भुत शृंगार देखकर गदगद हुए श्रद्धालु इसके बाद बाबा का भव्य श्रृंगार किया गया। इसमें महाकाल को चंदन से शृंगार किया गया व माथे पर चंद्रमा सुसज्जित किया गया और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा को फूलों की माला अर्पित की गई। भक्त बाबा का अद्भुत शृंगार देखकर खुशी से गदगद दिखे। इसके बाद महाकाल की कपूर आरती होती है और उसके बाद उन्हें भोग लगाया जाता है। हर दिन बाबा का शृंगार अलग-अलग तरीके से किया जाता है।भक्तों ने अलौकिक क्षण के दर्शनइस पावन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से इस अलौकिक क्षण के दर्शन किए। संपूर्ण मंदिर परिसर जयकारों से गुंजायमान रहा और वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया। लगभग दो घंटे चली इस आरती के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और प्रभु का शृंगार साथ-साथ चलता रहा।

व्यंग्य:चादर की एक कथा-व्यथा
गणेश साकल्ले एक अदद चादर की असली अहमियत मनुष्य को घर से बाहर निकलने और खासतौर पर रेल यात्रा के दौरान ही समझ में आती है। वैसे तो कवि वृंद का वह दोहा प्राइमरी स्कूल से ही हमारे दिमाग में इंस्टॉल कर दिया गया था कि ‘अपनी पहुंच बिचारि के करतब करिये ठौर, तेते पांव पसारिए जैती लांबी सौर।' सीधा-सा गणित है कि अपनी हैसियत के अनुसार पहले से ही अपनी चादर की इंच-टेप से पैमाइश कर लेनी चाहिए। पिछले दिनों पंजाब मेल से मुंबई की यात्रा का सुयोग बना। टिकट तो फर्स्ट एसी का कटाना चाह रहे थे, मगर फिर कवि वृंद का वही दोहा याद आ गया। तो हमने अपनी ‘चादर' के अनुसार सेकेंड एसी का टिकट कटाया और कोच में दाखिल हो गए। अटेंडेंट महोदय अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ आए और एक कंबल, एक तकिया और दो चादरों का सेट रखकर चले गए। रात्रिभोज के पश्चात बर्थ पर बैठे मुसाफिरों के बीच शुरू हो गई वैश्विक युद्धों जैसे विषयों पर गपशप। हर कोई ट्रम्प को गरियाने के मूड में नजर आ रहा था और वार्ता का लब्बोलुआब यही था कि ट्रम्प महोदय के लिए गाजा या सीरिया तक तो ठीक था, मगर उन्हें अपनी चादर ईरान तक तानने की क्या जरूरत थी? खैर, अपन ने एक चादर बर्थ की मर्यादा बचाने के लिए बिछाई और दूसरी ओढ़ने के लिए उठा ली। पर जैसे ही चादर ओढ़ी, एक दार्शनिक संकट खड़ा हो गया। पांव ढंकता तो सिर लावारिस हो जाता और सिर ढंकता तो पांव। बरबस किसी शायर की ये पंक्तियां दिमाग में चली आईं कि ‘इतनी छोटी है मेरी चादर कि जिसमें पांव ढांकूं तो मेरा सर खुल जाता है।' आसपास के सहयात्रियों का जहां खर्राटा ‘संगीत समारोह' शुरू हो गया था, मैं आधे घंटे तक इसी ‘चादर-युद्ध' में उलझा रहा और इस उधेड़बुन में लगा रहा कि पांव सिकोड़ूं या सिर? तभी जेहन में एक और शेर कौंधा, ‘पांव सिकोड़ूं तो चादर बड़ी हो जाती है, ये हुनर आ जाए तो मुश्किलें खड़ी नहीं होतीं।’ दार्शनिक विचारों के इस घटाटोप के बीच ‘सिस्टम' का नुमाइंदा यानी अटेंडेंट फिर से हत्थे चढ़ गया। हमने उसे अपनी समस्या बताई। वह किसी मंझे हुए राजनेता की तरह जोर से ठहाका मारकर हंसा और चुटीले अंदाज में बोला, ‘बाबूजी, चादर छोटी पड़ गई? कोई बात नहीं, हम आपको दूसरी दे देते हैं।’ उसने अपने साथी को आवाज लगाई और कहा कि इन्हें एक लंबी चादर लाकर दे दो। उसका साथी बिजली की गति से गया और मुझे एक नई व लंबी चादर थमा दी। मैंने अपने पत्रकार स्वभाव के चलते उसे थोड़ा और कुरेदने की कोशिश की, मगर वह यह कहकर चलता बना, ‘बाबूजी, अब आप सो जाइए। दुनियादारी शायद आप मुझसे ज्यादा जानते होंगे।’ उसके इन शब्दों के मायने मैं आधी रात तक खोजता रहा। उसने कहा नहीं, मगर वह शायद यही कहना चाहता था कि यहां तो पूरा सिस्टम ही अनावृत है। कहां-कहां ढंकोंगे। जितना ढंक जाए, उतने में ही खैरियत समझो। नींद तो नहीं आई, अलबत्ता सिस्टम के कई पहलू मन-मस्तिष्क में घुमड़ते रहे। आखिर में मन को यह समझाकर सोना ही मुनासिब समझा कि इस दौर में ‘कागजों की इमारतें और फाइलों के ढेर हैं, बिना कमीशन के यहां कानून भी अंधेर है।' इसे दूसरे रूप में देखें तो आज का सच यही है कि ‘बिकता है यहां इंसाफ भी बस दाम लगाइए, ईमान की क्या बात है, कभी बाजार आइए!'

राज्यसभा चुनाव को लेकर मप्र कांग्रेस हलचल:जीतू के बाद अब अरुण यादव ने दावेदारी को लेकर लिया बड़ा बयान, क्या कहा जानें
बुरहानपुर। मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर जून में चुनाव होना है। वर्तमान में दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के पास है। यही आंकड़ा आगामी चुनाव में भी रहने की उम्मीद है। खास बात यह है कि चुनाव से पहले ही राज्यसभा चुनाव को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है। इसकी सबसे ज्यादा हलचल कांग्रेस में देखने को मिल रही है। कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के मैदान से हटने के बाद पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने शुक्रवार को कहा था कि मैं इस रेस में नहीं हूं। वहीं अब पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण यादव ने दावेदारी को लेकर बड़ा बयान दे दिया है। जो सियासी गलियारों में चर्चा का भी विषय बन गया है।बुरहानपुर में ईद मिलन समारोह में शामिल होने पहुंचे अरुण यादव से जब मीडिया ने राज्यसभा चुनाव में दावेदारी को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि मैं इस रेस में शामिल नहीं हूं, मप्र कांग्रेस से राज्यसभा का कौन उम्मीदवार होगा यह निर्णय दिल्ली हाईकमान लेगा।मप्र में हार्स ट्रेडिंग जैसी कोई बात नहीं बिहार में कांग्रेस विधायकों द्वारा किए गए भीतरघात पर अरुण यादव ने कहा मध्यप्रदेश में कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है। यहां कोई मतभेद नहीं है। एक सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार की जीत तय है। हार्स ट्रेडिंग जैसी कोई बात नहीं है।

मप्र मे आफत की बारिश:आंधी-ओलों से खड़ी फसलें चौपट, कुदरत के कहर से संकट में अन्नदाता, 14 जिलों में आज भी ओलावृष्टि का खतरा
भोपाल। मध्यप्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। पिछले तीन दिनो ंसे सक्रिय खराब मौसम सूबे के करीब 21 जिलों को अपने केन्द्र पर ले रखा है। गरज-चमक के साथ हो रही बारिश, गिरते ओलों ने फसलों को चौपट कर दिया है। मालवा-निमाड़, ग्वालियर-चंबल, महाकौशल और और विंध्य में गिरे ओलों और बारिश से 50 फीसदी फसलें बर्बाद हो गई हैं। कुदरत की मार से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई है।इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों को अब आर्थिक संकट में लाकर खड़ा कर दिया है। ऐसे में उनकी नजरें सरकार की मदद पर टिक गई हैं। यही नहीं, राज्य के कई हिस्सों में तबाही मचाने के बाद शनिवार को रीवा-सिंगरौली बेल्ट समेत 14 जिलों में बारिश और ओलावृष्टि का खतरा बना हुआ है। बड़वानी में मक्के की फसल तबाहबता दें कि इस समय किसान कटाई की तैयारी में थे, लेकिन अचानक बदले मौसम ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। तेज ठंडी हवाओं और काले बादलों ने पूरे इलाके का माहौल बदल दिया। बड़वानी जिले के तलून क्षेत्र में शुक्रवार रात हुई बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज आंधी से खेतों में खड़ी मक्का और केले की फसलें पूरी तरह चैपट हो गई हैं। अकेले तलून क्षेत्र में ही लगभग 100 से 150 एकड़ में लगी मक्का की फसल आंधी के कारण जमीन पर बिछ गई है, जिससे किसानों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।मनावर में भी फसलों को भारी नुकसानवहीं मनावर और आसपास के क्षेत्रों में गुरुवार रात तेज हवा, आंधी और भारी बारिश हुई। इस मौसमी बदलाव के कारण ग्राम खेड़ी हवेली और पीपरीमान क्षेत्र में मक्का, गेहूं, चना, पपीता और केले की फसलों को भारी नुकसान होने का अनुमान है।सरकार से मुआवजे की आस में भितरवार अंचल के किसानइसी तरह ग्वालियर के भितरवार अंचल के तमाम ऐसे गांव है जहां फसलों को नुकसान हुआ है और अब किसान सरकार से मुआवजे की आस में है। सेकरा जागीर के किसान दीपक, आकाश, अमर सिंह, बृजमोहन, सुघर सिंह, लक्ष्मण सिंह बताते है कि फसलें में करीब 50 फीसदी का नुकसान है फिलहाल कोई भी सरकारी कर्मचारी सर्वे के लिए नहीं पहुंचा।खेतों में खड़ी है गेहूं और चना फसलमध्यप्रदेश के रायसेन जिले में मौसम ने अचानक करवट बदल ली है। सुल्तानगंज तहसील के कई गांवों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में खड़ी फसल पर खतरा मंडराने लगा है।सुल्तानगंज तहसील अंतर्गत नई गढ़िया, गोपई, उमरहारी और गुलवाड़ा गांवों में अचानक मौसम बिगड़ गया। यहां बारिश के साथ चने और बेर के आकार के ओले गिरे। ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी गेहूं और चना जैसी फसलों को नुकसान पहुंचाने की आशंका बढ़ा दी है।काले बादलों ने माहौल बदल दियासुल्तानगंज और बेगमगंज क्षेत्र में भी बारिश का असर देखने को मिला, जहां बाजार में चांद रात को लेकर सजी दुकानों पर बारिश ने खलल डाल दिया। दुकानदारों को भी नुकसान उठाना पड़ा।

रुपया धड़ाम, मप्र में सियासत तेज: कांग्रेस के निशाने पर बालीवुड की दिग्गज हस्तियां, इंदौर में लगे महानायक के पोस्टर, ईनाम की भी घोषणा
इंदौर। अमेरिकी डाॅलर के रुपये की गिरती कीमत को लेकर मप्र का सियासी पारा हो गई है। बता दें कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 93 रुपए के पार पहुंच गया है। जिसको लेकर सियासत शुरू हो गई है। यही नहीं कांग्रेस नेताओं ने पोस्टर वार शुरू कर दिया है। हालांकि इस बार कांग्रेसी नेताओं के निशाने पर बालीवुड की दिग्गज हस्तियां हैं। कांग्रेस नेताओं ने इंदौर में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के पोस्टर लगवाए हैं, जिसमें लिखा है- अमिताभ बच्चन को गिरते रुपयों पर ट्वीट करने वाले को ईनाम देंगे। पोस्टर में साल 2013 का अमिताभ बच्चन का एक पुराना ट्वीट दिखाया गया है। उस ट्वीट में उन्होंने रुपये की गिरावट पर चिंता जताई थी। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जब पहले रुपये की कमजोरी को देश की प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता था, तो अब हालात और खराब होने के बावजूद वही आवाजें खामोश क्यों हैं। पोस्टरों में तंज कसते हुए लिखा गया है कि जो लोग पहले आर्थिक मुद्दों पर खुलकर बोलते थे, वे अब चुप्पी साधे हुए हैं।शहर की राजनीति में बढ़ी हलचलमामले को और ज्यादा गर्माते हुए कांग्रेस नेताओं ने एक अनोखी घोषणा भी की है। उन्होंने कहा है कि जो व्यक्ति अमिताभ बच्चन से रुपये की गिरावट पर ट्वीट करवा देगा, उसे 51 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। इतना ही नहीं, अगर खुद अमिताभ बच्चन इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हैं, तो यह इनाम उन्हें ही दिया जाएगा। इस ऐलान के बाद शहर की राजनीति में हलचल और बढ़ गई है।इन कलाकारों की चुप्पी पर खड़े किए सवालकांग्रेस ने केवल अमिताभ बच्चन ही नहीं, बल्कि अन्य कलाकारों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी ने जूही चावला, अनुपम खेर और विवेक अग्निहोत्री जैसे नामों का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग पहले सोशल मीडिया पर हर मुद्दे पर सक्रिय रहते थे, वे अब रुपये की गिरावट पर कुछ क्यों नहीं बोल रहे हैं।कांग्रेस ने केन्द्र सरकार पर साधा निशानाकांग्रेस ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। आयात महंगा होने से पेट्रोल-डीजल, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ते हैं, जिससे महंगाई बढ़ती है। इसके अलावा विदेश में पढ़ाई और इलाज भी महंगे हो जाते हैं, कंपनियों की लागत बढ़ती है और रोजगार पर असर पड़ता है।पार्टी नेताओं का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ पोस्टर वार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे लेकर आगे भी आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने मांग की है कि जो लोग पहले रुपये के गिरने पर देशभक्ति की बातें करते थे, वे अब सामने आकर देश की अर्थव्यवस्था पर अपनी राय रखें।

सास का खूनी खेल:मामूली विवाद ने ले ली बहू और अजन्मे बच्चे की जान, पन्ना का है दिल दहलाने वाला मामा
पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से रूह को कंपा देने वाली खबर सामने आई है। यहां के सिमरिया थाना क्षेत्र में एक सास ने क्रूरता की सभी हदें पार करते हुए बहू को मौत के घाट उतार दिया है। बताया जा रहा है कि मामूली घरेलू विवाद के चलते सास ने 7 माह की गर्भवती बहू की कुदाली से निर्मम हत्या कर दी। घटना 14 मार्च की है। पुलिस ने आरोपी महिला को अरेस्ट कर जेल भेज दिया है। पुलिस द्वारा सख्ती बरते जाने के बाद महिला ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक और दहशत का माहौल है।दरअसल, 14 मार्च को ग्राम पडवार निवासी शिक्षक दयाराम साहू ने पुलिस को सूचना दी थी कि उसकी पत्नी नीता साहू घर में अचेत अवस्था में पड़ी हुई है। महिला के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटों के निशान थे। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, जहां महिला मृत पाई गई। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू की। घटना की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल टीम और डॉग स्क्वॉड को भी मौके पर बुलाया गया।सास को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की गईघटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया और साक्ष्य एकत्र किए गए। वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला की हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच को तेज किया। जांच के दौरान पुलिस ने मृतका के परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ की। लगातार पूछताछ और मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस का शक मृतका की सास पर गहराता गया। पुलिस ने सास को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, जिसमें उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।गुस्से में आकर बहू पर कुदाली से किए कई वारआरोपी सास ने बताया कि घरेलू विवाद और आपसी कलह के चलते गुस्से में आकर उसने बहू पर कुदाली से कई वार कर दिए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त खून से सनी कुदाली भी बरामद कर ली है। फिलहाल पुलिस ने आरोपी सास को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।

मप्र में निवेश की तलाश:सीएम मोहन आज राजस्थान के चुनिंदा उद्योगपतियों से होंगे रूबरू, रेखांकित करेंगे सरकार की प्राथमिकताओं को
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव आज शनिवार को राजस्थान के जयपुर स्थित आईटीसी राजपूताना में आयोजित होने वाले एक इंटरैक्टिव सत्र के दौरान उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेंगे। उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह और मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) के प्रबंध निदेशक चंद्रमावली शुक्ला इस कार्यक्रम में सीएम के साथ उपस्थित रहेंगे। इस सत्र के दौरान, राज्य की स्पष्ट नीति, प्रशासनिक तत्परता और निवेश-अनुकूल दृष्टिकोण को देश भर के प्रमुख औद्योगिक समूहों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।इस सत्र में मध्य प्रदेश की औद्योगिक नीति, क्षेत्र-वार प्रोत्साहन, विकसित औद्योगिक क्षेत्रों की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे का विस्तार, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, कौशल विकास इकोसिस्टम और त्वरित अनुमोदन प्रणालियों पर एक विस्तृत प्रस्तुति शामिल होगी।सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करेंगे सीएमइस चर्चा के दौरान, मुख्यमंत्री यादव राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करेंगे और इस बात पर प्रकाश डालेंगे कि मध्य प्रदेश निवेशकों के लिए एक स्थिर नीतिगत वातावरण, पारदर्शी प्रक्रियाएं और समय-सीमा के अंदर निर्णय लेने की प्रक्रिया कैसे सुनिश्चित कर रहा है। शुक्रवार को जारी एक सरकारी बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री निवेश को रोजगार सृजन, कौशल वृद्धि और औद्योगिक विस्तार से जोड़ने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को भी प्रस्तुत करेंगे।चुनिंदा उद्योगपतियों के साथ आमने-सामने करेंगे बैठकमुख्यमंत्री यादव का मुख्य भाषण राज्य की औद्योगिक दिशा और दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण पर केंद्रित होगा। वह प्रस्तावित परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा करने के लिए चुनिंदा उद्योगपतियों के साथ आमने-सामने बैठकें भी करेंगे। सरकार ने कहा कि जयपुर में होने वाला यह निवेश संवाद एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल होने की उम्मीद है, जो मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास और निवेश की संभावनाओं को राष्ट्रीय औद्योगिक समुदाय से जोड़ेगी।मप्र सरकार द्वारा आयोजित किया गया कार्यक्रमइससे पहले, भीलवाड़ा में कपड़ा क्षेत्र पर केंद्रित इसी तरह का एक चर्चा सत्र आयोजित किया गया था। यह राजस्थान में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित किया गया इस तरह का दूसरा कार्यक्रम है। उद्योग विभाग के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य जयपुर और पूरे राजस्थान के उद्योगपतियों तथा निवेशकों को मध्य प्रदेश में उपलब्ध व्यावसायिक अवसरों के बारे में जानकारी देना और उन्हें राज्य में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

मप्र में राजनीतिक नियुक्तियों का दौर शुरू:जयभान सिंह पवैया को मिली वित्त आयोग की बड़ी जिम्मेदारी, अन्य सदस्यों को जल्द मिलेगी शुखशबरी
भोपाल। मध्य प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का दौर शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने राज्य वित्त आयोग के गठन को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है, जिससे प्रदेश की वित्तीय संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। राजधानी भोपाल से जारी आदेश के अनुसार वरिष्ठ नेता जयभान सिंह पवैया को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनके साथ के.के. सिंह को सदस्य और वीरेंद्र कुमार को सदस्य सचिव बनाया गया है, जबकि अन्य सदस्यों की नियुक्ति जल्द की जाएगी।यह आयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 और मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग अधिनियम, 1994 के तहत गठित किया गया है। आयोग का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित किया गया है। आयोग का मुख्य उद्देश्य पंचायतों और नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति का गहन पुनर्विलोकन करना और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के लिए ठोस सिफारिशें देना होगा।राज्य वित्त आयोग के पास रहेगी यह बड़ी जिम्मेदारीराज्य वित्त आयोग कर, शुल्क, पथकर और फीस से प्राप्त आय को राज्य और स्थानीय निकायों के बीच किस प्रकार बांटा जाए, इसके सिद्धांत तय करेगा। साथ ही यह पंचायतों और नगरपालिकाओं को दिए जाने वाले अनुदानों, वित्तीय सुधारों और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी सुझाव देगा।आयोग इन पर देगा अपनी अनुशंसाएंइसके अलावा आयोग भूमि कर के बंटवारे, पेट्रोलियम उत्पादों से मिलने वाले राजस्व में हिस्सेदारी, स्थानीय निकायों की ऋण सीमा और पुनर्भुगतान व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी अपनी अनुशंसाएं देगा। जन सुविधाओं के विस्तार, सेवाओं की गुणवत्ता सुधार और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दे भी इसकी प्राथमिकता में शामिल रहेंगे। आयोग 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली पांच वर्षीय अवधि के लिए अपनी सिफारिशें राज्यपाल को सौंपेगा, जो प्रदेश के विकास और स्थानीय शासन को नई दिशा दे सकती हैं।

अखंड भारत की याद दिलाता है चेटीचंड का पर्व:उज्जैन में बोले सीएम, चल समारोह को भगवा झंडी दिखाकर किया रवाना
भोपाल। चेटीचंड का पर्व शुक्रवार को धूमधाम से मनाया गया। चेटी चंड के पावन पर्व को सिंधी समाज संत झूलेलाल के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं। इस अवसर पर उज्जैन के टॉवर चैक पर भव्य चल समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव शामिल हुए और चल समारोह को भगवा झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में राज्यसभा सांसद और एक्ट्रेस सुश्री जयाप्रदा, मशहूर एक्टर आफताब शिवदासानी, तारक मेहता का उल्टा चश्मा फेम गोली उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि चेटीचंड का पर्व अखंड भारत की याद दिलाता है और भारतीयों के हृदय में अखंड भारत का सपना जागृत रखता है। सामाजिक उत्सवों से एक दूसरे के प्रति प्रेम और आत्मीयता बढ़ती है। सीएम ने सम्राट विक्रमादित्य को उनकी वीरता, न्यायप्रियता और दानशीलता के लिए याद किया उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य से प्रेरित होकर शासन उन गुणों को आत्मसात कर सुशासन के नए आयाम स्थापित कर रहा है। सीएम ने चेटीचंड पर्व की दी शुभकामनाएंसीएम ने विक्रम संवत 2083 में बाबा श्री महाकाल की नगरी से देश एवं प्रदेशवासियों को चेटीचंड के महापर्व की मंगलकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश, प्रदेश विकास के नवीन आयाम स्थापित कर रहा है। सिंहस्थ 2028 के लिए सरकार नवीन विकास के कार्य कर रही है। सभी गणमान्य नागरिक भी विकास कार्यों में अपना योगदान दे रहे है। आगामी सिंहस्थ के दिव्य आयोजन से प्रदेश और उज्जैन की वैश्विक पटल पर नवीन पहचान स्थापित होगी।

नेशनल चंबल सेंक्चुरी:अवैध रेत खनन पर एससी का हंटर, तीन राज्यों को नोटिस, जवाब मिलने पर होगी सुनवाई
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में हो रहे अवैध रेत खनन के मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा है कि इन राज्यों से जवाब मिलने के बाद पूरे मामले पर विस्तार से सुनवाई की जाएगी। यह मामला उस समय सामने आया जब मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि चंबल अभयारण्य के संरक्षित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। इन इलाकों में घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम भी चल रहा है। लेकिन, खनन की गतिविधियों के कारण घड़ियालों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंच रहा है।वनों को नुकसान पहुंचाने वालों को नहीं किया जाएगा बर्दाश्तसुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने साफ कहा कि संरक्षित वनों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि ऐसी गतिविधियों पर वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एक्ट, फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट, बायोलॉजिकल डायवर्सिटी एक्ट और इंडियन फॉरेस्ट एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।कोर्ट ने दिया बड़ा संकेतअदालत ने यह भी कहा कि अगर संरक्षित क्षेत्रों में अवैध खनन जारी रहता है, तो इसके लिए संबंधित विभागों के अधिकारी ही नहीं, बल्कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारी भी परोक्ष रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे। कोर्ट ने संकेत दिया कि इस तरह की लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी को भी बनाया पक्षकारइस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी को भी पक्षकार बनाया गया है, ताकि वह मामले की निगरानी और जांच में सहयोग कर सके। अदालत ने यह मामला मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर स्वतरू संज्ञान लेते हुए उठाया है, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है। फिलहाल कोर्ट ने राज्यों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को तय की गई है। उम्मीद है कि अगली सुनवाई में अवैध खनन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर और स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आएंगे।

मप्र में बदला मौसम का रुख:बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज आंधी से फसलें हुईं तबाह, मौसम विभाग ने किसानों की और बढ़ाई टेंशन
भोपाल। मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज बदल गया है। मौसम के रुख में अचानक ने सूबे के अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की लकीरें भी खींच दी है। प्रदेश के कई हिस्सों में बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज आंधी ने जहां आम जनजीवन को प्रभाववित किया है। वहीं खेतों में खड़ी फसलें जमीन पर सो गई हैं। यही नहीं मौसम विभाग ने आगामी दिनों में तेज आंधी के साथ बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने आज 34 जिलों में अलर्ट जारी किया है, जहां कहीं ओले गिरने तो कहीं तेज हवा और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन एक साथ सक्रिय होने से पूरे प्रदेश में मौसम का मिजाज बिगड़ गया है। राज्य के बड़े हिस्से में गुरुवार की रात से मौसम में बड़ा बदलाव आया, तेज हवाएं चलीं, और उसके बाद बारिश हुई और कई स्थानों पर ओले भी गिरे हैं। राज्य के मौसम में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन के सक्रिय होने से प्रदेश के आधे से ज्यादा हिस्से में यह बदलाव आया है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर सहित कई इलाकों में बारिश दर्ज की गई, तो वहीं 10 स्थानों पर आंधी के साथ ओले भी गिरने की खबरें आ रही हैं।गेहूं-चना की फसलों को हुआ भारी नुकसानबारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं, चना की फसलों को भी नुकसान हुआ है, वहीं तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार को भी राज्य के बड़े हिस्से में बादल छाए हुए हैं और हवाएं चल रही हैं कई स्थानों पर तो बारिश भी दर्ज की गई। मौसम विभाग ने आगामी तीन से चार दिनों तक इसी तरह का मौसम रहने का अनुमान जताया है। इसके साथ ही राज्य के 30 से ज्यादा जिलों में आंधी के साथ बारिश और ओले गिरने की भी संभावना जताई है।मौसम के वर्तमान हालात से किसानों की बढ़ी चिंताकृषि के जानकारों का कहना है कि मौसम में आए इस बदलाव का रबी की फसल के साथ गेहूं और चना को बड़ा नुकसान हो रहा है क्योंकि ओले गिरने और आंधी के साथ बड़े पैमाने पर फसलें खेत में बिछ गई हैं और उनके खराब होने का खतरा है। स्थिति तब और विकट हो गई जब कई स्थानों पर कटी हुई फसलें खुले खेतों में ही भीग गईं। मौसम के वर्तमान हालात ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।इन जिलों में ओलावृष्टि और बारिश का अलर्टसिवनी, मंडला, बालाघाट, दतिया, निवाड़ी और टीकमगढ़ में ओले गिरने की संभावना जताई गई है। इन इलाकों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान हो सकता है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। 28 जिलों में तेज आंधी-बारिश के साथ बिजली गिरने का अलर्ट बाकी जिलों में तेज हवा, गरज-चमक और बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। लोगों को खुले में जाने से बचने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है।भोपाल समेत कई शहरों में बदला मौसमराजधानी भोपाल में देर रात और तड़के सुबह तेज बारिश हुई। इसके अलावा रतलाम, उज्जैन, बैतूल, मैहर और पांढुर्णा में भी मौसम ने अचानक करवट ली और बारिश दर्ज की गई। ओलावृष्टि और तेज बारिश से गेहूं और संतरे की फसलों को नुकसान पहुंचा है। कई जगह खेतों में खड़ी फसल गिर गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका है। जनजीवन हो सकता है प्रभावितकई जिलों में आंधी की रफ्तार 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इससे बिजली सप्लाई और यातायात प्रभावित होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 22 मार्च के बाद यह सिस्टम कमजोर पड़ जाएगा और प्रदेश में फिर से गर्मी बढ़ने लगेगी। कई शहरों में तापमान 40 डिग्री के पार जा सकता है।

उज्जैन के नैवेद्य लोक में मिलेगा स्वाद का अनोखा अनुभव:सीएम मोहन ने किया भव्य शुभारंभ, महाकाल नगरी को मिली नई पहचान
उज्जैन। महाकाल नगरी उज्जैन के निवासियों को चैत्र नवरात्रि और नव वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर एक नयी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने शहर के नानाखेड़ा बस स्टैंड के समीप स्थित नैवेद्य लोक का भव्य शुभारंभ किया। नैवेद्य के शुभारंभ अवसर पर सांसद अनिल फिरोजिया, राज्य सभा सांसद बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा भी मौजूद रहें।सीएम के द्वारा वैदिक मंत्रों उच्चारण और शंख ध्वनि के बीच फीता काटकर इंदौर की 56 दुकान की तर्ज पर 18 करोड़ रूपये की लागत से बनाये गये नैवेद्य लोक का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रत्येक स्टॉल का अवलोकन किया और दुकानदारों से भी मिले और व्यजंनों का स्वाद भी लिया। नैवेद्य लोक में शहर के प्रमुख और प्रसिद्ध रेस्टोरेंट और खाद्य प्रतिष्ठानों के द्वारा स्टॉल्स लगाई गई। इनमें “स्वाद और सेहत” का अनुपम समन्वय सुनिश्चित किया गया है। यहां उज्जैन के पारंपरिक एवं लोकप्रिय व्यंजनों के साथ मोटे अनाज (श्री अन्न) से निर्मित अत्यंत पौष्टिक एवं स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों को विशेष महत्व प्रदान किया गया है।नैवेद्य लोक में विभिन्न प्रकार के आकर्षक स्टॉलनैवेद्य लोक में विभिन्न प्रकार के आकर्षक स्टॉल स्थापित है, जिनमें प्रमुख रूप से हरे कृष्ण ऑर्गेनिक फार्मिंग द्वारा ऑर्गेनिक श्री अन्न एवं ताजा जैविक उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यहां स्वाद के साथ स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखते हुए आमजन के लिए उपलब्ध व्यंजन में कोदो श्री अन्न की खिचड़ी, कोदो श्री अन्न की खीर, कोदो श्री अन्न की इडली, ज्वार का पोहा, रागी की सेव। फ्रेश बॉक्स आर्गेनिक द्वारा विशेष रूप से तैयार श्री अन्न आधारित व्यंजन एवं सेवाएं उपलब्ध रहेगी। इनमें हेल्दी सलाद, डाइट प्लान, आर्गेनिक ग्रॉसरी, आर्गेनिक ऑयल एवं घी शामिल है।प्रसिद्ध कचरू भैया की कचैड़ी भी मिलेगीगोपाल मंदिर स्थित मावा बाजार की प्रसिद्ध कचरू भैया की कचैड़ी (जो वर्ष 1968 से अपने अनुपम स्वाद के लिए विख्यात है) भी कुछ दिनों के लिए नैवेद्य लोक में उपलब्ध रहेगी, जिससे उज्जैनवासियों एवं आगंतुकों को पुरानी यादों का स्वाद भी प्राप्त होगा। ये सभी व्यंजन न केवल स्वादिष्ट हैं, अपितु उच्च पोषण मूल्य से युक्त होने के कारण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगे। नैवेद्य लोक का शुभारंभ उज्जैनवासियों के साथ ही महाकाल के दर्शनार्थ आने वाले लाखों श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए एक आकर्षक, सुलभ एवं स्वास्थ्यकर भोजन विकल्प प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कचरू भैया से मिलकर कहा कि अच्छा हुआ आपने यहां पर भी स्टाल प्रारंभ की है। अब नानाखेड़ा के लोगों को कचैड़ी के लिए पुराने शहर नहीं जाना पड़ेगा।

महाकालेश्वर मंदिरः ब्रह्म मुहूर्त में खुले बाबा महाकाल के कपाट:चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन देखने को मिला अद्भुत शृंगार, एक झलक पाने लगी भक्तों की कतार
उज्जैन। नवरात्र के दूसरे दिन, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में सुबह की भस्म आरती देखने के लिए भक्तों का सैलाब देखने को मिला। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को बाबा का अद्भुत शृंगार देखने को मिला, जिसे देखने के लिए भक्त रात से ही कतारबद्ध थे। सुबह 4 बजे की भस्म आरती के दौरान बाबा का विधि-विधान से पूजन किया गया।सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, और फलों के रस से बने पंचामृत से बाबा को स्नान कर अभिषेक पूजन कराया और भस्म आरती की शुरुआत हुई, जिसे मंत्रोच्चार और ढोल-नगाड़ों के साथ संपन्न किया जाता है।शिवलिंग पर बिखेरी जाती है भस्मयह आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा की जाती है। वे मंत्रोच्चार के साथ बाबा महाकाल को भस्म अर्पित करते हैं। इस समय शिवलिंग पर भस्म बिखेरी जाती है, जो निराकार रूप का प्रतीक है। इस दौरान बाबा अपने भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।बाबा का किया गया विशेष शृंगारइसके बाद बाबा का विशेष शृंगार किया गया। इसमें महाकाल को बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया। बाबा के माथे पर स्पष्ट त्रिपुंड व माथे पर चंद्रमा सुसज्जित किया गया और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा को फूलों की माला पहनाई गई। साथ ही ताजा बिल्वपत्र (बेलपत्र) चढ़ाए गए और रंग-बिरंगे फूलों की मालाओं से पूरे शृंगार को और भी आकर्षक बनाया गया।बम-बम भोले के जयघोष से गूंजा परिसरइस दौरान मंदिर परिसर बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। भस्म आरती लगभग दो घंटे तक चलती है। पवित्र भस्म कपिला गाय के गोबर से बने कंडों, शमी, पीपल, पलाश, बड़, अमलतास और बेर की लकड़ियों को जलाकर तैयार की जाती है।उज्जैन के महाकाल मंदिर में भस्म आरती के अलावा दिन भर में छह अन्य आरतियां होती हैं, जिनमें बालभोग, भोग, पूजन, संध्या और शयन आरती शामिल हैं। भस्म आरती का विशेष महत्व है, जो भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव का केंद्र है। गर्भगृह में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं हैय वे नंदी हॉल या बैरिकेड्स से दर्शन करती हैं।

चैत्र नवरात्रि दूसरा दिन:देवी धाम में उमड़ा भक्तों का सैलाब, मां के दिव्य शृंगार और अलौकिक दर्शन ने श्रद्धालुओं को किया भाव-विभोर
मैहर। चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर आज दूसरे दिन जगत जननी मां शारदा के दरबार में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मां के दिव्य शृंगार और अलौकिक दर्शन ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। नवरात्रि के दूसरे दिन मां शारदा का विशेष शृंगार किया गया, जिसके दर्शन कर भक्तों ने जय माता दी के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंजा दिया।चैत्र नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही मंदिर में भक्तों का सैलाब मैहर माता के दर्शन के लिए पहुंच रहा है। चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां शारदा का नीले रंग के वस्त्र और सोने के आभूषणों से माता का दिव्य शृंगार हुआ। मां को बड़ी नथ पहनाकर सुसज्जित किया गया। प्रधान पुजारी पवन दाऊ महाराज द्वारा विधि-विधान से मां की आरती की गई और भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें दर्शन के लिए लगी रहीं। भक्त 1000 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़कर मां के दरबार तक पहुंच रहे हैं और शुभ अवसर पर आशीर्वाद ले रहे हैं।नौ दिनों तक बंद रहेंगे वीआईपी दर्शनचैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन से ही भक्त बड़ी संख्या में मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच रही है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति और प्रशासन ने नौ दिनों तक वीआईपी दर्शन को बंद रखने का फैसला लिया है। यह फैसला भक्तों की भीड़ और भव्य मेले को ध्यान में रखकर लिया है। 19 मार्च से लेकर 27 मार्च तक मंदिर में सामान्य तरीके से भक्त दर्शन कर पाएंगे।नवरात्रि के दौरान लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं माता का दर्शन करनेप्रशासन के अनुसार, नवरात्रि के दौरान देश-विदेश से प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु माता रानी के दर्शन के लिए मैहर पहुंचते हैं। ऐसे में आम श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके, इसके लिए यह फैसला लिया गया है।यह बात सभी जानते हैं कि चैत्र नवरात्रि में प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां शारदा मंदिर की बहुत मान्यता है। माना जाता है कि इसी स्थान पर मां सती का हार गिरा था और यहां पुजारी से पहले मां के परम भक्त उनकी पूजा करते हैं। माना जाता है कि मंदिर में जब पुजारी मंदिर के कपाट खोलते हैं तो प्रतिमा के पास ताजा फूल मिलते हैं।

इंदौर भीषण अग्निकांड:पीड़ित परिवारों से मिले सीएम मोहन, शोक व्यक्त कर बंधाया ढांढस, हर संभव मदद का भी दिया आश्वासन
इंदौर। इंदौर में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में दो परिवारों के आठ लोगों की जान चली गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। लौमहर्षक घटना से आहत मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव गुरुवार को पीड़ित परिवारों से मिलने इंदौर पहुंचे और उनसे मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने मृतकों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया तथा घायलों का हालचाल जाना।मुख्यमंत्री ओल्ड पलासिया स्थित 13 पंथी जैन समाज धर्मशाला पहुंचे, जहां उन्होंने करीब 20 मिनट तक परिजनों के साथ समय बिताया। इस दौरान उन्होंने घटना की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए। वहीं सीएम ने ईवी चार्जिंग को लेकर एसओपी बनाने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की बारीकी से जांच की जाएगी। पीड़ित परिवार की हर संभव मदद करेंगे।हादसे को लेकर पीड़ित परिवारों में भारी आक्रोशहादसे को लेकर पीड़ित परिवारों में भारी आक्रोश है। पीड़ित परिवार ने फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की देरी से आने की शिकायत की। मृतक मनोज पुगलिया के बेटे सौरभ ने आरोप लगाया कि आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड करीब डेढ़ घंटे की देरी से मौके पर पहुंची। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ फायर टैंकरों में पानी नहीं था और एक वाहन गलत गली में चला गया, जिससे राहत कार्य प्रभावित हुआ और नुकसान बढ़ गया।आग लगने के अलग-अलग दावेपरिजनों के अनुसार आग सुबह करीब 4 बजे लगी थी। प्रारंभिक जानकारी में आग का कारण गाड़ी की चार्जिंग बताया गया था, लेकिन सौरभ का दावा है कि आग बिजली पोल में हुए शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई। पहले कार में आग लगी, जो धीरे-धीरे घर के अंदर खड़ी बाइकों और फिर पूरे मकान में फैल गई। इस हादसे में पुगलिया परिवार का घर पूरी तरह जलकर खाक हो गया। बचने वाले सदस्य फिलहाल रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर फायर ब्रिगेड पहुंच जाती, तो कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

हिंदू नववर्ष, चैत्र नवरात्रि:अभूतपूर्व उल्लास में डूबी धमनगरी, महाकाल मंदिर में लहराया धर्म ध्वज, सूर्योपासना से भक्तिमय हुआ रामघाट
उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन में हिंदू नववर्ष, चैत्र नवरात्रि और गुड़ी पड़वा का उत्सव इस बार अभूतपूर्व आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर पूरी नगरी भक्ति में डूबी नजर आई। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने जगत की रचना की थी, इसलिए इसे ‘सृष्टि आरंभ दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है।सुबह की पहली किरण के साथ शिप्रा नदी के रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट पर हजारों श्रद्धालु एकत्रित हुए। भक्तों ने सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे घाट क्षेत्र में वैदिक मंत्रोच्चार और सूर्योपासना से वातावरण भक्तिमय हो उठा। वहीं महाकालेश्वर मंदिर में परंपरा अनुसार ध्वज परिवर्तन का आयोजन हुआ, जो नववर्ष के स्वागत का प्रमुख प्रतीक माना जाता है। हरसिद्धि मंदिर सहित शहर के सभी देवी मंदिरों में विशेष सजावट और अनुष्ठान किए गए, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।रामघाट पर हुआ कोटि सूर्योपासना का भव्य आयोजनसुबह 5ः30 बजे रामघाट पर ‘कोटि सूर्योपासना’ का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें हजारों लोगों ने एक साथ सूर्य वंदना की। यह आयोजन नवसंवत्सर अभिनंदन समारोह समिति और विभिन्न ज्योतिष संस्थाओं के सहयोग से किया गया।शाम को विक्रमोत्सव 2026 के तहत ‘सृष्टि आरंभ दिवसदृउज्जयिनी गौरव दिवस’ का भव्य कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें भगवान शिव और शिप्रा की महिमा पर आधारित नृत्य-नाट्य प्रस्तुति, ड्रोन शो और आतिशबाजी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। प्रसिद्ध गायक विशाल मिश्रा की संगीत प्रस्तुति कार्यक्रम को और खास बनाएगी।इस अवसर पर ‘सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण 2026’ के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तित्व को 1.01 करोड़ रुपये का सम्मान दिया जाएगा, जिससे उज्जैन की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी।

सृष्टि के आरंभ की अमृत बेला का पर्व है नव संवत्सर:कोटि सूर्य उपासना कार्यक्रम में बोले सीएम, की ब्रह्म ध्वज की स्थापना
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित विक्रमोत्सव-2026 के अंतर्गत कोटि सूर्य उपासना कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। सीएम दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों को सृष्टि के आरंभ दिवस, गुड़ी पड़वा, चेटी चंड, नववर्ष विक्रम संवत् 2083 के आरंभ, घट स्थापना, नवरात्रि आरंभ, ज्योर्तिविज्ञान दिवस, नवरेह सहित आज देशभर में मनाये जा रहे सभी पर्वों की बधाई और मंगलकामनाएं दीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि आज गुड़ी पड़वा है। संपूर्ण सृष्टि में गुड़ जैसी मिठास फैल गई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हमारी भारतीय संस्कृति में आज से नव संवत्सर एवं नववर्ष का प्रारंभ हो गया है। उन्होंने कहा कि नव संवत्सर सृष्टि के आरंभ दिवस की अमृत बेला को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला पर्व है। आज से एक नए संवत् और भारतीय नववर्ष का प्रारंभ हो गया है। विक्रमादित्य ने रखी सामाजिक सद्भाव की नींव हमारे यहां संवत् सृष्टि के साथ, प्रकृति के सानिध्य में और शासक के पुरुषार्थ से प्रारंभ होता है। सम्राट विक्रमादित्य ने शकों को परास्त किया। तत्कालीन समाज के अराजक तत्वों और आतताईयों का दमन किया। उन्होंने अपनी संपूर्ण प्रजा को कर्जमुक्त बनाया। सच्चे अर्थों में सामाजिक सद्भाव की नींव रखी। वे लोकतंत्र के महानायक थे। उनके पुरुषार्थ से ही प्रारंभ किया गया विक्रम संवत् आज 2083 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। सम्रामट विक्रमादित्य के आदर्शों पर चल रही सरकारमुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य के ओजस्वी शासन उनके शौर्य, साहस, पराक्रम एवं न्याय के प्रतिमानों को आत्मसात करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का प्रयास किया। हम समाज के हर वर्ग के चहुंमुखी विकास के लिए प्रयासरत हैं। हमने वीर विक्रमादित्य शोधपीठ सहित वैदिक घड़ी की भी स्थापना की है।देश की सेवा करने की प्रेरणा देता हे ध्वजइस दौरान सीएम ने ब्रम्ह ध्वज की स्थापना कर कहा कि यह ध्वज हमें सदैव एकजुट रहकर देश-प्रदेश की सेवा करने की प्रेरणा देता है। विक्रमोत्सव-2026 के आयोजन में निहित भावों और इसकी रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य ने अपनी शासन व्यवस्था से राज व्यवस्था को लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलने का सूत्रपात्र किया। उनका नेतृत्व और राज-काज शैली ऐसी थी, जिसमें बाद के शासकों को जनकल्याणकारी शासन व्यवस्था के लिए प्रेरित किया। विक्रमादित्य की शासन व्यवस्था को लागू करना चाहती हैं सरकारेंआज यदि दो हजार साल बाद भी सम्राट विक्रमादित्य को याद कर रहे हैं, तो इसके पीछे यह भाव परिलक्षित होता है कि भारत राष्ट्र की सरकार और राज्य सरकारें, वीर विक्रमादित्य की शासन व्यवस्था को अंगीकृत करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज स्वस्फूर्त और अनुशासित समाज है। हमने हमेशा जियो और जीने दो सहित सबको लेकर चलने की भावना से जीना सीखा है। सम्राट विक्रमादित्य ने लोकतंत्र को बढ़ावा दिया, इसी से लोकतंत्र के सूत्र हम भारतीयों के शरीर में रक्त की तरह प्रवाहित है और अब यह हमारे अस्तित्व की पहचान भी बन गया है।

मुकेश मल्होत्रा को फौरी राहत:SCने मप्र हाईकोर्ट पर लगाई अंतरिम रोक, 23 जुलाई तक टला विधायकी पर संकट
नई दिल्ली-भोपाल। मध्यप्रदेश के विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के लिए सुप्रीम कोर्ट से राहत भरी खबर आई है। दरअसल शीर्ष अदालत ने गुरुवार को मप्र हाईकोर्ट के उस फैसले पर अंतरिक रोक लगा दी है, जिसमें उनके विधायकी को शून्य कर दिया गया था। अब मामले पर अगली सुनवाई 23 जुलाई होगी तब तक मप्र हाईकोर्ट के आदेश पर रोक जारी रहेगी। यानि अगली पेशी तक मल्होत्रा का निर्वाचन यथावत बना रहेगा। गुरुवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन शामिल थे, ने यह अंतरिम राहत दी। विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत से हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की, जिसे स्वीकार कर लिया गया।मल्होत्रा पर चुनावी हलफनामें में आपराधिक मामले छिपाने का आरोपदरअसल, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने फैसले में कहा था कि मुकेश मल्होत्रा ने चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई है, जो एक गंभीर चूक है। इसी आधार पर अदालत ने उनके निर्वाचन को अमान्य घोषित कर दिया था। हालांकि, उन्हें 15 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की अनुमति भी दी गई थी।मल्होत्रा ने खटखटाया था एससी का दरवाजाइस फैसले को चुनौती देते हुए मल्होत्रा ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहां उन्हें फिलहाल राहत मिल गई है। हालांकि, इस अंतरिम आदेश के साथ कुछ शर्तें भी लागू की गई हैं। मल्होत्रा आगामी राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं कर सकेंगे और उन्हें इस अवधि में मानदेय भी नहीं मिलेगा। लेकिन वे विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने के लिए स्वतंत्र रहेंगे।कांग्रेस के ने एसी के फैसले का किया स्वागतकांग्रेस ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे आंशिक राहत बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि एक निर्वाचित विधायक को मतदान से वंचित करना लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि इस मुद्दे पर फिर से अदालत का रुख किया जाएगा, ताकि मल्होत्रा को पूर्ण अधिकार मिल सकें।


