MADHYA-PRADESH NEWS

विधानसभा में मौतों पर घिरेगी सरकार:गूजेगा प्रदेश पर बढ़ते कर्ज से लेकर दूषित पानी की सप्लाई और गायों की कटाई का मामला भी
भोपाल। मप्र विधानसभाका बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होकर 6 मार्च तक चलेना प्रस्तावित है। सत्र को लेकर पक्ष और विपक्ष तैयारियों में लगा हैं। सत्ता पक्ष एक ओर जहां बजट एवं केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, अमेरिकी ट्रैड डील की खूबियां गिनाने की तैयारी में है। वहीं विपक्षी दल कांगे्रस भ्रष्टाचार से लेकर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 33 लोगों की मौत, भोपाल के सरकारी बूचडखाने में गायों की कटाई, नकली कप सीरप से छिंदवाड़ा एवं बैतूल में 25 बच्चों की मौतों को लेकर सरकार की घेराबंदी की तैयारी में है। साथ ही प्रदेश पर लगातार बढ़ रहे कर्ज, फसलों के दाम नहीं मिलना एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मामलों को जोरशोर से उठाया जाएगा। जनता की समस्याओं को लेकर कांग्रेस ने नंबर जारी किया है। विधानसभा सत्र में सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अनुमानित 4.70 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश करेगी, जो पिछले वर्ष से करीब 10 प्रतिशत अधिक होगा। सत्र के दौरान विपक्ष के सभी विधायकों द्वारा उनके क्षेत्र में भ्रष्टाचार, अवैध उत्खनन, गरीबों की जमीन हड़पने के मामले भी उठाए जाएंगे। बजट सत्र में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा 18 फरवरी को बजट पेश कर सकते हैं। कांग्रेस विधायकों को सत्र की तैयारी करने के निर्देशकांग्रेस ने बजट सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए तीन चरणों में विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है। पहले चरण में विधायक अपने-अपने क्षेत्रों से भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और घोटालों के तथ्य सदन में पेश करेंगे। उमंग सिंघार ने विधायकों को निर्देश दिए हैं कि वे सबूतों के साथ मुद्दे उठाएं, जैसे विभागीय धांधली और माफिया राज। यह रणनीति स्थानीय मुद्दों को राज्य स्तर पर लाकर सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाएगी।सत्र के दौरान रोजाना प्रदर्शन की तैयारीबजट सत्र के दौरान विधानसभा में विपक्ष द्वारा रोजाना गांधी प्रतिमा के सामने सांकेतिक प्रदर्शन होंगे। पिछले सत्रों में भी कांग्रेस ने रोजाना अलगक-अलग ढंग से प्रदर्शन किया। जो सत्र के दौरान सुर्खियों में रहा। तीसरे चरण में एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस, महिला कांग्रेस और सेवादल जैसे संगठन सड़कों पर उतरेंगे। विधानसभा का घेराव किया जाएगा, जो विरोध को जन आंदोलन का रूप देग। यह रणनीति 2023 के किसान आंदोलन से प्रेरित लगती है, जहां सड़क विरोध ने राजनीतिक दबाव बनाया।

कर्नल सोफिया कुरैशी मामला:SC में सुनवाई पहले विजय शाह ने अपने किए पर फिर मांगी माफी, भाषा में लगाम लगाने खाई कसम
इंदौर। मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विजय शाह ने शनिवार को भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ अपने विवादित बयान पर एक बार फिर बिना शर्त माफी मांगी। उनकी यह माफी ऐसे समय में आई है, जब सर्वोच्च न्यायालय इस मामले की सुनवाई करने वाला है। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उनके शब्द 'देशभक्ति के उत्साह' में कहे गए थे। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या किसी विशेष समुदाय का अपमान करना नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि मैंने यह पहले भी कई बार कहा है, और आज फिर से यह दोहरा रहा हूं।उन्होंने कहा, "मेरे शब्दों में किसी भी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या समाज के किसी भी वर्ग का अपमान करने का इरादा नहीं था। सार्वजनिक जीवन में भाषा पर संयम और संवेदनशीलता अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने घटना पर आत्ममंथन किया है, जिम्मेदारी स्वीकार की है और भविष्य में अपनी भाषा पर अधिक नियंत्रण रखने की कसम खाई है। उन्होंने आश्वासन दिया, "ऐसी गलती फिर से नहीं होगी," और विशेष रूप से सशस्त्र बलों से जुड़े सभी नागरिकों से माफी मांगी।बता दें कि यह विवाद पिछले साल मई में इंदौर जिले के रायकुंडा गांव में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मंत्री कुंवर विजय शाह के भाषण के दौरान एक वीडियो क्लिप के वायरल होने से शुरू हुआ। वीडियो क्लिप में विजय शाह ने कथित रूप से कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में अपमानजनक बयान दिया, जो 'आॅपरेशन सिंदूर'- भारत की आतंकवादी हमले के खिलाफ सैन्य प्रतिक्रिया के दौरान मीडिया को ब्रीफिंग देने के लिए व्यापक रूप से पहचानी गई थीं।टिप्पणियों की हुई थी व्यापक आलोचनाइन टिप्पणियों की व्यापक आलोचना की गई थी, क्योंकि ये अशिष्ट, साम्प्रदायिक और एक महिला अधिकारी, भारतीय सेना, और कुछ समुदायों के प्रति अपमानजनक थीं। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पहले विजय शाह को 'अपमानजनक टिप्पणियां' और 'अशिष्ट भाषा' का उपयोग करने के लिए फटकारा था और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।सुप्रीम कोर्ट ने लिया था मामले पर संज्ञानसुप्रीम कोर्ट ने बाद में मामले का संज्ञान लिया और इसे जांचने के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया। इसके बाद कोर्ट ने विजय शाह द्वारा की गई पहले की माफी को 'नकली आंसू' कहते हुए खारिज कर दिया और जवाबदेही पर जोर दिया। 19 जनवरी को, सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर संबंधित धाराओं के तहत अभियोजन की स्वीकृति पर निर्णय लेने का आदेश दिया था। इस समय सीमा के पास आते ही विजय शाह ने शनिवार को इंदौर के रेजिडेंसी कोठी में कुछ विशेष पत्रकारों को बुलाकर अपने बयान को स्पष्ट करने और अपनी माफी को दोहराने की कोशिश की।

इंदौर का स्नेहधाम:कॉन्ट्रैक्टर के कदम से उड़ी बुजुर्गों की नींद, कंपनी के खिलाफ आईडीए ने अपनाया कड़ा रुख
इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा करोड़ों की लागत से तैयार किए गए बुजुर्गों के आशियाने स्नेहधाम में अचानक हलचल मच गई है। इस केंद्र का संचालन करने वाले कॉन्ट्रैक्टर ने यहां रह रहे बुजुर्गों को अचानक जगह खाली करने का नोटिस थमा दिया है। इस अप्रत्याशित सूचना के बाद यहां निवास कर रहे वरिष्ठ नागरिकों में हड़कंप मच गया है।स्नेहधाम का संचालन करने वाली कंपनी बालाजी के डायरेक्टर विवेक तिवारी ने कहा है कि इस विशाल भवन में कुल 108 वरिष्ठ नागरिकों के रहने की व्यवस्था है, लेकिन वर्तमान में केवल 4 से 5 लोग ही यहां रह रहे हैं। तिवारी के अनुसार इतने कम लोगों के साथ केंद्र का संचालन करना आर्थिक रूप से संभव नहीं हो पा रहा है। दूसरी ओर, इंदौर विकास प्राधिकरण ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। आईडीए ने कॉन्ट्रैक्टर को ब्लैक लिस्ट करने और उसकी अर्नेस्ट मनी जब्त करने की चेतावनी दी है। प्राधिकरण का स्पष्ट कहना है कि यदि मौजूदा संचालक इसे नहीं चला पाता है तो किसी अन्य एनजीओ को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। वहीं आईडीए सीईओ परीक्षित झाड़े ने यह भी कहा है कि बुजुर्गों से घर खाली नहीं करवाए जाएंगे, कंपनी ने यह नोटिस दिए हैं जिसकी जांच चल रही है। बुजुर्गों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। बुजुर्गों के लिए सदमे जैसी स्थितिनोटिस मिलने के बाद बुजुर्गों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। यहां रहने वाले अधिकांश वरिष्ठ नागरिकों ने स्नेहधाम को ही अपना स्थाई घर मान लिया था। इनमें से किसी ने अपना पुश्तैनी घर किराए पर दे दिया है तो किसी ने उसे खाली छोड़ दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 जून 2025 को इस भवन का लोकार्पण कर इसे बुजुर्गों के हित में एक बड़ा कदम बताया था, लेकिन अब 28 फरवरी तक भवन खाली करने के निर्देश ने इन बुजुर्गों की रातों की नींद उड़ा दी है।भारी भरकम खर्च और सुविधाओं का दावास्नेहधाम में रहने के लिए बुजुर्गों को भारी कीमत चुकानी पड़ती है। यहां रहने वाली महिलाओं ने अधिकारियों से शिकायत की है कि बालाजी कंपनी के संचालकों ने उनसे दो लाख रुपए एडवांस डिपॉजिट के रूप में लिए हैं और प्रतिमाह 35 हजार रुपए किराया वसूला जाता है। पीड़ितों में 70 से 90 वर्ष की महिलाएं और दिव्यांग भी शामिल हैं, जिनका कहना है कि इस उम्र में वे अब अचानक कहां जाएंगी।करोड़ों का निवेश और आधुनिक ढांचाआईडीए ने स्कीम 134 में 20 हजार वर्गफीट के भूखंड पर करीब 18 करोड़ रुपए खर्च करके इस छह मंजिला भवन का निर्माण किया है। इस सर्वसुविधायुक्त बिल्डिंग में 32 फ्लैट्स हैं, जहां भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं, टीवी, लॉन्ड्री और बिजली जैसी तमाम सुविधाएं देने का वादा किया गया था। वर्तमान में कंपनी के डायरेक्टरों का कहना है कि वे टेंडर सरेंडर करना चाहते हैं और बुजुर्गों को अन्य जगह शिफ्ट करने के लिए चर्चा कर रहे हैं।

बंधक श्रम उन्मूलन दिवस:भोपाल नए लेबर कोर्ड पर वर्कशाॅप में 9 को, स्टेट लेवल एक्शन प्लान का भी होगा विमोचन
भोपाल। श्रम विभाग ने 9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस पर कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेन्शन सेंटर (मिंटो हॉल) में कार्यशाला का आयोजन किया है। उद्घाटन सुबह 10 बजे श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल करेंगे। कार्यशाला में राज्य स्तरीय एक्शन प्लान का विमोचन भी होगा।पूरे मध्य प्रदेश में महीनेभर चलेगा अभियानबंधक श्रम (बंधुआ मजदूरी) कराने वालों के विरुद्ध मध्यप्रदेश का श्रम विभाग 9 फरवरी बंधक श्रम उन्मूलन दिवस से विशेष अभियान भी शुरू करने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि श्रम मंत्री की पहल पर विभाग ने बाल एवं बंधक श्रम को रोकने और जागरुकता लाने एक विशेष वेदा पहल की शुरुआत की है।कार्यशाला के प्रमुख चार बिंदुपहलाः बाल एवं कुमार श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत राज्य एक्शन प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। इसमें अधिनियम के अंतर्गत निरीक्षण, पहचान, बचाव एवं पुनर्वास की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी।दूसराः बंधुआ श्रम (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के क्रियान्वयन के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अधिनियम की उपलब्धियों एवं वर्तमान चुनौतियों पर विचार किया जाएगा।तीसराः नई चार श्रम संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी।चैथाः राज्य एक्शन प्लान के माध्यम से विभागीय समन्वय, प्रवर्तन व्यवस्था एवं जनजागरूकता को सुदृढ़ करने की रणनीति प्रस्तुत की जाएगी।श्रम विभाग के अनुसार, कार्यशाला का उद्देश्य कानून, नीति और जमीनी क्रियान्वयन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि राज्य में बाल एवं बंधुआ श्रम के उन्मूलन की दिशा में प्रभावी और ठोस परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

कूनो के जंगल में फिर गूंजी किलकारी:आशा ने 5 नन्हें मेहमानों को दिया जन्म, कुनबा बढ़कर पहुंचा 35 पर, इसमें 24 भारतीय
श्योपुर। मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। दअरसल कूनों के जंगल में एक बार फिर किलकारी गूंजी है। पार्क में मादा चीता आशा ने पांच नन्हे शावकों को जन्म दिया है। जानकारी के अनुसार सभी शावक स्वस्थ हैं और विशेषज्ञों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है। इस नए जन्म के साथ कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़कर 35 हो गई है। वहीं, भारत में जन्म लेने वाले शावकों की कुल संख्या अब 24 तक पहुंच गई है।मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा, कूनो ने गर्व का एक खास पल देखा है, जब आशा ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है, जिससे भारत की चीता संरक्षण यात्रा और मजबूत हुई है। इसके साथ ही, भारत में पैदा हुए शावकों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है और कुल चीतों की आबादी 35 हो गई है। यह उपलब्धि हमारे वन कर्मचारियों और पशु चिकित्सकों की अथक मेहनत को दिखाती है। यह राज्य वन्यजीव संरक्षण के केंद्र के रूप में उभर रहा है।चीता प्रोजेक्ट के लिए गर्व का पलः केन्द्रीय मंत्रीकेंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने एक्स पोस्ट में लिखा, कूनो में पांच शावकों के जन्म का स्वागत। आशा की विरासत आगे बढ़ी, भारत ने उसके पांच प्यारे शावकों का स्वागत किया। प्रोजेक्ट चीता के लिए यह बहुत गर्व और खुशी का पल है, क्योंकि नामीबियाई चीता और दूसरी बार मां बनी आशा ने 7 फरवरी 2026 को कूनो नेशनल पार्क में पांच शावकों को जन्म दिया। इसके साथ ही, भारत में पैदा हुए जीवित शावकों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है, जो भारतीय धरती पर चीतों का 8वां सफल जन्म है। यह भारत की चीता संरक्षण यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्यावरण के प्रति जागरूक नेतृत्व में शुरू किया गया और पोषित किया गया।उन्होंने आगे लिखा, यह खुशी भरी उपलब्धि फील्ड स्टाफ और पशु चिकित्सकों के अटूट समर्पण, कौशल और प्रतिबद्धता का एक शानदार प्रमाण है, जो जमीन पर अथक प्रयास कर रहे हैं। आशा और उसके शावक फलें-फूलें और भारत की चीता कहानी को और भी बड़ी सफलता की ओर ले जाएं। उनके आने से भारत में चीतों की कुल आबादी अब 35 हो गई है। भारत में वन्यजीव संरक्षण के लिए यह सच में एक ऐतिहासिक और दिल को छू लेने वाला पल है।

शहडोल में दो बाघों की मौत का मामला:लापरवाह अफसर पर गिरी गाज, बीट गार्ड भी नपे, करंट फैलाने वाले आरोपी भी पहुंचे हवालात
शहडोल। शहडोल जिले में दो बाघों की दर्दनाक मौत के मामले में वन विभाग ने डिप्टी रेंजर समेत एक बीट गार्ड को निलंबित कर दिया है। खेत में लगाए गए बिजली के करंट की चपेट में आकर एक नर बाघ और एक मादा बाघिन की मौत के मामले में लापरवाही बरतने पर यह कार्रवाई की गई है। इस मामले में करंट फैलाने वाले सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।यह मामला वन परिक्षेत्र जयसिंहनगर के मासीरा सर्किल अंतर्गत बीट बनचाचर, कक्ष क्रमांक 382 की राजस्व भूमि से जुड़ा है। जहां खेतों की सुरक्षा के लिए अवैध रूप से लगाए गए बिजली के तारों की चपेट में आकर दोनों बाघों की मौत हो गई थी। घटना सामने आने के बाद वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था और मैदानी अमले की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।और भी जिम्मेदारों पर हो सकती है कार्रवाईवन विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि संबंधित क्षेत्र में नियमित गश्त, निगरानी और समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते यह गंभीर घटना हुई। इसी लापरवाही को आधार बनाते हुए डिप्टी रेंजर और बीट गार्ड पर सस्पेंशन की गाज गिरी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार आगे भी जांच के आधार पर और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो सकती है।7 आरोपी गिरफ्तारइस पूरे मामले में वन विभाग पहले ही त्वरित कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार कर चुका है, जिन्होंने खेतों में करंट फैलाने का अवैध कृत्य किया था। इन आरोपियों के खिलाफ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है।निगरानी और गश्त होगी सख्तदो बाघों की मौत की घटना ने वन विभाग और प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है। अब विभाग का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और गश्त को और सख्त किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।इन्हें किया गया सस्पेंडवहीं इस पूरे मामले में उत्तर वन मंडल की डीएफओ तरुणा वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि दो बाघों की मौत के मामले में लापरवाही बरतने पर कार्रवाई की गई है। डिप्टी रेंजर बृहस्पति पटेल और बीट गार्ड राजेंद्र पूरी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।

विक्रमोत्सव-2026 का आगाज 12 को:महोत्सव को ऐतिहासिक बनाने सीएम मोहन ने संभाला मोर्चा, हर सप्ताह समीक्षा कर जिम्मेदारों को दे रहे टाॅस्क
भोपाल। मध्यप्रदेश के उत्सव और मेले प्रदेशवासियों के साथ ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं को आकर्षित करते रहे हैं। ऐसे उत्सवों में विक्रमोत्सव ने सबसे अलग पहचान बनाई है। इस वर्ष उज्जैन में 12 फरवरी से 30 जून की अवधि में 139 दिवसीय विक्रमोत्सव का आयोजन दीर्घ अवधि के महोत्सव की दृष्टि से एक रिकार्ड होगा।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2026 में हो रहे विक्रमोत्सव को बहु आयामी बनाने के निर्देश दिए हैं। इस दिशा में संस्कृति विभाग और सहयोगी संस्थाओं ने आवश्यक तैयारियों को तेजी से पूर्ण करने का कार्य किया है। निर्धारित कार्यक्रमों के अनुसार विक्रमोत्सव-2026 में कलश यात्रा, नाटक मंचन, वैचारिक समागम, शोध संगोष्ठी, फिल्मों के प्रदर्शन, वेद अंताक्षरी और सूर्योपासना के आयोजन होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव हर सप्ताह विक्रमोत्सव की रूपरेखा पर चर्चा कर तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं।विक्रमादित्य पर केन्द्रित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताएं भी होंगी आयोजित प्रदेश के नगरों में विक्रमादित्य महानाट्य मंचन के साथ ही शिक्षण संस्थाओं में सम्राट विक्रमादित्य पर केन्द्रित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के वैज्ञानिक पक्ष को भी प्रचारित किया जाएगा। विज्ञान सम्मत कार्यों के संबंध में विज्ञान महाविद्यालयों, अभियांत्रिकी महाविद्यालयों और पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों को जोड़कर अभिनव कार्यक्रम किए जाएंगे। आगामी 15 फरवरी को प्रदेश में शिवरात्रि मेलों के शुभारंभ, महादेव की कलाओं के शिवार्चन, कलश यात्रा, शिवोैहम के अंतर्गत बैंड प्रस्तुति, शिवनाद और विक्रम व्यापार मेले का आयोजन होगा। इसके बाद 16 से 20 फरवरी की अवधि में शिव पुराण, 16 से 25 फरवरी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नाट्य प्रस्तुतियां और 26 से 28 फरवरी तक इतिहास समागम, पुतुल समारोह और अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी जैसी गतिविधियां होंगी। फरवरी और मार्च माह में वैचारिक समागम, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, विभिन्न भाषाओं और बोलियों में लोकरंजन के तहत कवि गोष्ठियां, शोध संगोष्ठियां, फिल्म प्रदर्शन के कार्यक्रम होंगे। गुड़ी पड़वा पर उज्जैन के रामघाट (दत्त अखाड़ा) पर सूर्य उपासना का कार्यक्रम होगा। उज्जयिनी गौरव दिवस अंतर्गत शिप्रा तट पर सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण और विक्रम पंचांग 2082-83 और आर्ष भारत के द्वितीय संस्करण का लोकार्पण होगा। महादेव की नदी कथा-नृत्य नाट्य और प्रख्यात पार्श्व गायकों द्वारा सांगीतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। महोत्सव में जिलों में भी विक्रमोत्सव के कार्यक्रम होंगे।विरासत से युवाओं को जोड़ने में मिल रही है सफलतासम्राट विक्रमादित्य के योगदान की जानकारी युवा पीढ़ी तक देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा निरन्तर कार्यक्रम किये जा रहे हैं। गत वर्ष नई दिल्ली में सम्राट विक्रमादित्य के मंचन का होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विरासत से विकास के संकल्प के अनुरूप इतिहास के गौरवशाली व्यक्तित्वों पर केन्द्रित आयोजन के निर्देश दिए हैं। संस्कृति विभाग के साथ विक्रमादित्य पीठ, वीर भारत न्यास और अन्य संस्थाएं विभिन्न नवाचारों के माध्यम से विविध गतिविधियों का संचालन कर रही हैं। हाल ही में अभ्युदय मध्यप्रदेश ऑनलाइन स्पर्धा में बड़ी संख्या में नागरिकों ने भागीदारी की। युवाओं ने ऑनलाइन स्पर्धा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और ई-स्कूटी, लैपटॉप जैसे पुरस्कार प्राप्त किए।

मप्र के नौकरशाही को नहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश की परवाह:उच्च शिक्षा विभाग ने कैम्पस के लिए जारी कर दी जातिगत भेदभाव वाली गाइडलाइन, सामान्य वर्ग बाहर
भोपाल। कैम्पस में छात्रों का उत्पीड़न रोकने के लिए लाई गई विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ( यूजीसी ) की गाइडलाइन पर देश भर में मचे बवाल के बाद देश की सर्वोच्च अदालत ने भले ही इसके अमल पर रोक लगा दी हो, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार अपरोक्ष रूप से इसे लागू करने पर आमादा है। विवाद की जड़ में उत्पीडन का शिकार होने वाले छात्रों की श्रेणियां रही हैं, जिनमें सामान्य वर्ग को शामिल नहीं किया गया था। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट का स्टे भी आया। लेकिन लगता है प्रदेश की अफसरशाही को इससे कोई वास्ता नहीं। अदालत के आदेश के तीन दिन बाद ही प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने जो दिशा निर्देश जारी किये हैं उनमें भी कैंपस में पीड़ित होने वाले छात्रों को सिर्फ आरक्षित वर्ग तक ही सीमित रखा गया है। सरकार के इस कदम से सवर्ण समाज में आंदोलन की दबी चिंगारी को फिर हवा मिलने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी की गाइडलाइन लागू करने पर रोक लगा दी थी। सर्वोच्च अदालत ने माना था कि उत्पीडन के शिकार होने वाले छात्रों में सामान्य वर्ग को शामिल न करना और यह मानना की ऐसी सिर्फ आरक्षित वर्ग के साथ ही होगा, उचित नहीं है। इससे भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा। यह समाज को बांटने वाला है और इसका दुरूपयोग हो सकता है। इसके बाद अलग -अलग राज्यों में चल रहे आंदोलन थम गए थे। लेकिन तीन दिन बाद यानी 2 फरवरी को प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश की सभी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार और कॉलेजों के प्राचार्य को एक विस्तृत सर्कुलर भेजता है। उच्च शिक्षा विभाग के अवर सचिव वीरन सिंह भलावी के हस्ताक्षर से जारी इस सर्कुलर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2023 के नियमों का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में अनिवार्य रूप से लोकपाल और विद्यार्थी शिकायत निवारण समिति का गठन किया जाना है। ये समितियां 15 दिनों के भीतर शिकायतों का निराकरण कर संस्था प्रमुख को भेजेंगी। इससे असंतुष्ट होने पर छात्र लोकपाल को अपील करेंगे जहाँ से 30 दिनों के भीतर निराकरण होगा। ख़ास बात यह है कि शिकायत निवारण समितियों में एक सदस्य अनिवार्य रूप से एससी -एसटी - ओबीसी का रखे जाने का प्रावधान है। सामान्य वर्ग के सदस्य की कोई अनिवार्यता नहीं है। आपत्ति वाले प्रावधान जस के तससर्कुलर में छात्रों की शिकायतों में एडमिशन से लेकर सिलेबस, पढाई के स्तर को शामिल किया गया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की मंशा के विपरीत जातिगत भेदभाव यहां मौजूद है। इसके तहत यह मानकर चला जा रहा है कि भेदभाव केवल आरक्षित वर्ग के साथ ही हो सकता है, सामान्य वर्ग के साथ नहीं। सर्कुलर के बिंदु 7 की कंडिका कहती है- श्अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक अथवा दिव्यांग श्रेणियों के विद्यार्थियों से कथित भेदभाव की शिकायत।्य आगे कहा गया है कि लोकपाल का फैसला आने के बाद संस्थान के साथ ही पीड़ित छात्र को भी उसके आदेश की प्रति उपलब्ध कराई जाएगी। जहां शिकायत झूठी पाई जाएगी वहां लोकपाल शिकायतकर्ता के विरुद्ध उपयुक्त कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है। बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रदेश की नौकरशाही इस बात से अनजान है कि इस संवेदनशील मामले को लेकर देश भर में बवाल हो चुका है और सुप्रीम कोर्ट स्थगन आदेश दे चुका है। जाहिर है अफसर इससे अनजान तो नहीं होंगे। फिर , यह इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि किस तरह फाइलें चलती हैं और उन पर हस्ताक्षर होते हैं। अगर सतर्कता दिखाई जाती तो पहले से जारी इस गाइड लाइन से जातियों वाला बिंदु हटाया जा सकता था। सवाल यह भी कि ऐसे दिशा निर्देशों की वजह से यदि कोई अप्रिय घटना घटती है तो फिर जिम्मेदारी किसकी तय होगी।

रोज डे:किसी को यूं नहीं दिया जाता गुलाब...जान लिजिए रोज डे इतिहास
नीलम अहिरवारवैलेंटाइन डे के पहले दिन यानी रोज डे के दिन लोग एक दूसरे को फूल देते हैं और अपनी फिलिंग्स बताते हैं। ये बताने के लिए कि आप उसके लिए कितने खास है३फिर चाहे वो आपकी फैमिली मेबर्स हों पत्नी हो, बच्चे, माता पिता या फिर कोई खास समवन स्पेशल३लेकिन रोड डे का इतिहास क्या किस कब और क्यों गुलाब का फूल किया जाता है चलिए जानते हैंगुलाब और मोहब्बत का अटूट रिश्ता है, जहां लाल गुलाब प्रेम, जुनून और गहरे भावनात्मक संबंधों का प्रतीक माना जाता है। प्रेमी जोड़े अक्सर वेलेंटाइन वीक के दौरान, विशेषकर रोज डे पर, अपने दिल की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए एक-दूसरे को गुलाब का फूल देते हैं। यह फूल आकर्षण और सुंदरता का पर्याय है, जो प्रेम की शुरुआत के लिए बहुत लोकप्रिय है। वो इसलिए क्योंकि वो अपने खास महक और रंगों के कारण गुलाब एशिया में भी खास माना जाता रहा है वैसे रोज डे का इतिहास यूरोप से जुड़ा हुआ है, जहां गुलाब सदियों से प्रेम और सम्मान व्यक्त करने के लिए दिया जाता रहा है। प्रेम के प्रतीक के रूप में वैलेंटाइन डे की शुरुआत तो 14वीं सदी में हुई थी, जिसे संत वैलेंटाइन से जोड़ते हैं और रोज डे का इतिहास रोमन पौराणिक कथाओं की देवी वीनस से आता है। इसकी एक कहानी और भी है, ऐसा माना जाता है कि रोज डे का इतिहास मुगल काल से भी जुड़ता है। कहते हैं कि बेगम नूरजहां को लाल गुलाब बहुत पसंद थे और जहांगीर अपनी बीवी को खुश करने के लिए हर दिन कई टन गुलाब भिजवाते थे। यह भी कहानी है कि महारानी विक्टोरिया के जमाने में भी गुलाब देकर लोग अपने इमोशन एक्सप्रेस करते थे और प्यार का इजहार लाल गुलाब देकर करते थे।माना जाता है कि विक्टोरियन लोग गुलाब देकर एक-दूसरे के प्रति अपना प्यार, सम्मान और लगाव दिखाने वाले पहले इंसान रहे हैं. हालांकि ऐसा कोई सबूत नहीं है ये तो रही इतिहास की बात लेकिन किसी को भी किसी रंग का गुलाब नहीं दिया जा सकता है। इनके रंगों का भी बड़ा महत्व होता है...गुलाब के अलग-अलग रंग अलग-अलग भावनाओं का प्रतीक होते हैं, जैसे लाल गुलाब प्रेम का प्रतीक होता है, गुलाबी प्रशंसा का, पीला दोस्ती का और सफेद शांति का संकेत देता है.. ऑरेंज रोज इस बात को जाहिर करता है कि आप दोनों एक-दूसरे को लेकर पैशनेट हैं। दोनों अट्रैक्शन महसूस करते हैं और एक-दूसरे की जिंदगी में शामिल होना चाहते हैं। नारंगी कलर के गुलाब रिश्ते को पहला सीरियस मोड़ देने के लिए सही चुनाव है। वहीं नीले रंग के गुलाब बहुत रेयर होते हैं, यही वजह है कि इन्हें किसी को देना यह दिखाता है कि वह शख्स आपके लिए कितना खास है। यह इस फीलिंग को जाहिर करता है कि आपके जिंदगी में यूं तो कई लोग हैं लेकिन स्पेशल वन होने के नाते गर्लफ्रेंड या वाइफ की जगह बेहद खास है।

महाकालेश्वर मंदिर:उज्जैन में मौजूद हैं बाबा महाकाल का वृद्ध स्वरूप, इनके दर्शन के बिना अधूरी है धार्मिक यात्रा
नई दिल्ली। उज्जैन का महाकाल मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध दक्षिणमुखी और स्वयंभू मंदिर है। महाकाल मंदिर शिप्रा नदी के तट पर स्थित है, जहां जाने से समय भी बदल जाता है। माना जाता है कि महाकाल के दर्शन मात्र से जीवन में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलता है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि महाकाल मंदिर में मुख्य गर्भगृह में मौजूद शिवलिंग से भी पुराना शिवलिंग मंदिर में मौजूद है, जिसके दर्शन के बिना महाकाल की दर्शन यात्रा अधूरी मानी जाती है।उज्जैन के महाकाल मंदिर में कई प्राचीन मंदिर स्थापित हैं, जिनकी अपनी-अपनी मान्यता है। कुछ मंदिर का निर्माण नए सिरे से किया गया है लेकिन कुछ मंदिर की जड़े प्राचीन काल से जुड़ी हैं। मंदिर परिसर में महाकाल के दर्शन से पहले वृद्धकालेश्वर महादेव का मंदिर बना है, जिसे मुख्य मंदिर से भी प्राचीन बताया जाता है। मंदिर के गर्भगृह में बाबा महाकाल के प्रतिरूप में शिवलिंग मौजूद हैं और उनका शृंगार प्रतिदिन बाबा महाकाल की तरह ही होता हैं।भगवानों में फर्क कर पाना बहुत मुश्किलवृद्धकालेश्वर महादेव और बाबा महाकाल में फर्क कर पाना बहुत मुश्किल है क्योंकि शिवलिंग का आकार और रूप दोनों एक जैसे हैं। कहा जाता है कि वृद्धकालेश्वर महादेव, बाबा महाकाल के वृद्ध स्वरुप हैं और उनसे भी ज्यादा प्राचीन हैं। उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन का पुण्य तभी पूरा मिलता है, जब महाकालेश्वर के श्वृद्धश् स्वरूप के दर्शन न हो जाए। इसलिए भक्त महाकाल के दर्शन के बाद बाबा वृद्धकालेश्वर के दर्शन जरूर करते हैं।महाकाल से भी पुराने हैं बाबा वृद्धकालेश्वरमाना ये भी जाता है कि बाबा वृद्धकालेश्वर, महाकाल से भी पुराने हैं और उनसे पहले धरती पर प्रकट हुए थे। हालांकि आक्रमणकारियों की वजह से शिवलिंग और मंदिर दोनों को खंडित करने की कोशिश की गई लेकिन आज भी बाबा वृद्धकालेश्वर अपनी जगह पर स्थापित हैं और भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण कर रहे हैं। मंदिर की हालत थोड़ी जर्जर है जिसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि मंदिर आक्रमणकारियों का शिकार हुआ था लेकिन साथ ही समय-समय पर मंदिर का रखरखाव भी होता रहता है।हर किसी को नहीं हो पाते स्पर्श दर्शनजहां महाकाल के स्पर्श दर्शन हर किसी को नहीं हो पाते हैं, वहीं उसके उलट बाबा वृद्धकालेश्वर के स्पर्श दर्शन के लिए मंदिर हमेशा खुला रहता है। भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए सावन और महाशिवरात्रि के दिन विशेष पूजा कराते हैं। जूना महाकाल की भी बाबा महाकाल की तरह ही अलग-अलग आरतियां प्रतिदिन की जाती हैं।

एमपीपीजीसीएल की उपलब्धि:जबलपुर में स्थापित होगा देश का सबसे बड़ा मल्टी फंक्शनल ट्रेनिंग सिम्युलेटर, 14 करोड़ में नयागांव में लेगा आकार
भोपाल। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी (एमपीपीजीसीएल ) जबलपुर के नयागांव स्थित पॉवर जनरेटिंग प्रशिक्षण संस्थान में लगभग 14 करोड़ रूपए की लागत से देश का सबसे बड़ा मल्टी-फंक्शनल थर्मल एवं हाइड्रो ऑपरेटर ट्रेनिंग सिम्युलेटर स्थापित करने जा रही है। इस अत्याधुनिक सिम्युलेटर के माध्यम से विद्युत उत्पादन अभियंताओं को विद्युत संयंत्रों के संचालन, नियंत्रण एवं आपातकालीन परिस्थितियों के प्रबंधन का यथार्थपरक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त होगा, जिससे प्लांट ट्रिपिंग जैसी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी। यह सिम्युलेटर रिमोट ऑपरेशन की सुविधा से भी युक्त होगा। इससे पॉवर जनरेटिंग प्रशिक्षण संस्थान न केवल राज्य बल्कि अन्य राज्यों की विद्युत कंपनियों के अभियंताओं एवं तकनीकी विद्यार्थियों के लिए भी एक प्रमुख प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में स्थापित होगा।मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी अपने कार्मिकों को उच्च स्तरीय तकनीकी , वित्तीय एवं प्रबंधकीय दक्षताओं से सुसज्जित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मुख्यालय स्थित नयागांव में प्रशिक्षण संस्थान को अत्याधुनिक नवाचारों के साथ विकसित कर रही है। कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह, डायरेक्टर टेक्निकल सुबोध निगम और डायरेक्टर कॉमर्शियल श्री मिलिन्द भान्दक्कर के प्रगतिशील मार्गदर्शन में यह संस्थान देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक विशिष्ट एवं अग्रणी प्रशिक्षण केंद्र के रूप में उभर रहा है।मुख्य अभियंता मानव संसाधन व प्रशासन दीपक कुमार कश्यप ने जानकारी कि प्रशिक्षण संस्थान में आधुनिक स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना की जा रही है, जहाँ कंपनी के सभी कॉडर के कार्मिकों को तकनीकी, वित्तीय व प्रबंधकीय विषयों पर समग्र प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह संस्थान नवनियुक्त कार्मिकों व अभियंताओं के लिए प्रेरण प्रशिक्षण (इंडक्शन ट्रेनिंग) का प्रमुख केंद्र होगा। कंपनी की मिड-कैरियर ट्रेनिंग पॉलिसी के अंतर्गत करंट चार्ज अथवा पदोन्नति प्राप्त करने वाले सहायक अभियंता से लेकर अतिरिक्त मुख्य अभियंता स्तर तक के कार्मिकों को विशेष रूप से संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रमों से लाभान्वित किया जाएगा।निर्माणाधीन ‘मंत्रा’ ऑडिटोरियम एवं आईटी प्रशिक्षण केंद्र-प्रशिक्षण संस्थान परिसर में 150 सीटों की क्षमता वाला अत्याधुनिक ‘मंत्रा’ ऑडिटोरियम निर्माणाधीन है, जिसमें सम्मेलन, सेमिनार, कार्यशालाएँ एवं विभिन्न प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 21 कम्प्यूटर एवं समर्पित कार्यस्थलों से युक्त एक आधुनिक कम्प्यूटर प्रशिक्षण केंद्र भी विकसित किया जा रहा है, जहाँ ईआरपी, ऑटोकैड, प्राइमावेरा सहित विभिन्न तकनीकी एवं वित्तीय सॉफ्टवेयर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

खिवनी अभयारण्यः:विंध्य पर्वतमालाओं की गोंद में बसी यह सेंक्चुअरी बना रही खास पहचान, युवाओं के लौट रहे दिन
भोपाल। विंध्य पर्वतमालाओं की गोद में स्थित खिवनी अभयारण्य मध्यप्रदेश के उभरते हुए इको-टूरिज्म स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। देवास और सीहोर जिलों की सीमा पर फैला लगभग 134 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला यह अभयारण्य प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव शोधकर्ताओं और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित कर रहा है। घने जंगल, पर्वत घाटियां, बहते नदी-नाले और समृद्ध जैव विविधता इसे एक अनूठा प्राकृतिक स्थल बनाते हैं। ईको-पर्यटन विकास बोर्ड के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। सफारी संचालन, भोजन व्यवस्था, आवास प्रबंधन तथा लघु उद्योगों के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं और कारीगरों की आय में वृद्धि हो रही है। अभयारण्य में https://mpforest.gov.in/ecotourism/ecobooking/destination.aspx के माध्यम से बुकिंग की जा सकती है।देवास जिले में स्थित इस अभयारण्य का लगभग 89.9 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र देवास तथा 44.8 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र सीहोर जिले में आता है। खिवनी अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन का सुंदर उदाहरण देखने को मिलता है। यहां ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के साथ अनेक औषधीय पौधों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं, जो इसकी प्राकृतिक समृद्धि को दर्शाती हैं। अभयारण्य में पर्यटकों के ठहरने के लिये सर्व-सुविधायुक्त टूरिस्ट कैंपस विकसित किया गया है, जिसमें कॉटेज, टेंट, वॉच टावर, पैगोडा और भोजन की व्यवस्था उपलब्ध है।वन्यजीव और जैव विविधता की समृद्ध धरोहरखिवनी अभयारण्य में मांसाहारी वन्यजीवों में बाघ, तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा, सोनकुत्ता, जंगल कैट, गोल्डन जैकाल, एशियन पाम सिवेट सहित अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं, वहीं शाकाहारी जीवों में चीतल, सांभर, नीलगाय, चैसिंगा, कृष्णमृग, जंगली सूअर और खरहा प्रमुख हैं। पक्षियों की लगभग 170 प्रजातियां तथा तितलियों की करीब 65 प्रजातियां इस अभयारण्य की जैव विविधता को और समृद्ध बनाती हैं।प्रमुख दर्शनीय स्थलअभयारण्य में बाल गंगा मंदिर, कलम तलई सनसेट पॉइंट, ईको व्यू पॉइंट, गोल कोठी, खिवनी मिडो, शंकर खो एवं भदभदा झरने, भूरी घाटी और दौलतपुर घाटी जैसे अनेक आकर्षक स्थल हैं। विशेषकर वर्षाकाल में झरनों, हरियाली और पर्वत श्रृंखलाओं का दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।पर्यटन मानचित्र पर लाने के प्रयासखिवनी अभयारण्य को पर्यटन मानचित्र पर व्यापक स्तर पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नियमित मॉनिटरिंग के साथ पर्यटकों की सुविधाओं के समुचित प्रबंधन किया जा रहा है। खिवनी अभयारण्य भोपालदृइंदौर मार्ग पर आष्टा से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इंदौरदृनेमावरदृहरदा मार्ग से कन्नौद होकर भी यहां पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन हरदा तथा निकटतम हवाई अड्डे इंदौर और भोपाल हैं।प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीवों की विविधता और शांत वातावरण के कारण खिवनी अभयारण्य पर्यटकों की नई पसंद बनता जा रहा है और मध्यप्रदेश के इको-टूरिज्म को एक नई दिशा दे रहा है।

मप्र में कम लिंगानुपात वाले 9 जिलों में से मजज एक में महिला कलेक्टर:जिलाधीशों की पदस्थापना में तबादला नीति का नहीं रखा ध्यान
भोपाल। प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने राज्य के प्रशासनिक इतिहास में अब तक सबसे ज्यादा 17 जिलों में महिला अधिकारियों को जिलाधीश बनाया है। जिलाधीशों की पदस्थापना में शासन स्तर पर सामान्य प्रशासन विभाग की तबादला नीति का ही ध्यान नहीं रखा गया। यही वजह है कि कम लिंगानुपात वाले 9 जिलों में से सिर्फ एक जिले ग्वालियर में ही महिला अधिकारी कलेक्टर है। जबकि शेष कम लिंगानुपात वाले जिले मुरैना, भिंड, शिवपुरी, दतिया, छतरपुर, सागर, विदिशा और रायसेन में कलेक्टर या पुलिस अधीक्षक जैसे बड़े प्रशासनिक पद पर एक भी महिला अधिकारी नहीं है। सामान्य प्रशासन विभाग की तबादला नीति में स्पष्ट प्रावधान है कि श्कम लिंगानुपात वाले जिलों में उच्च प्रशासनिक पदों पर यथासंभव महिला अधिकारियों की पदस्थापना की जाए।्य पुलिस अधीक्षक एवं जिलाधीशों की पदस्थापना के समय शासन स्तर पर तबादला नीति का ध्यान नहीं रखा जाता है। यही वजह है कि नीति में स्पष्ट प्रावधान होने के बाद भी कम लिंगानुपात वाले 9 जिलों में एक भी महिला पुलिस अधीक्षक या रेंज पुलिस महानिरीक्षक नहीं है। वहीं दूसरी ओर सरकार ने 17 जिलों में महिला अधिकारियों को कलेक्टर बनाया है। लेकिन ग्वालियर का छोड़कर कम लिंगानुपात वाले किसी भी जिले में महिला कलेक्टर नहीं है। इन 17 जिलों में हैं महिला कलेक्टरप्रदेश में 17 जिलों में महिला कलेक्टर हैं। जिनमें रुचिका चैहान ग्वालियर, ऊषा परमार पन्ना, प्रतिभा पाल रीवा, रजनी सिंह नरसिंहपुर, सोनिया मीणा नर्मदापुरम, श्रीमती शीतला पटले सिवनी, नेहा मीणा झाबुआ, रिजु बाफना शाजापुर, भव्या मित्तल खरगोन, रानी बातड़ मैहर, नीतु माथुर आलीराजपुर, अंजु पवन भदौरिया डिंडौरी, जमुना भिंड निवाड़ी, अदिति गर्ग मंदसौर, जयति सिंह बड़वानी, प्रीति यादव आगर-मालवा और मिशा सिंह रतलाम कलेक्टर हैं। जीएडी की नीति के अनुसार इनमें सिर्फ ग्वालियर ही कम लिंगानुपात वाला जिला है। राजनीतिक कारणों से नहीं होती महिलाओं की पदस्थापनाबताया गया कि कम लिंगानुपात वाले जिलों में महिला कलेक्टरों की पदस्थापना सामान्यतरू राजनीतिक कारणों से नहीं होती है। कम लिंगानुपात वाले 9 जिले ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, दतिया, छतरपुर, सागर, विदिशा और रायसेन राजनीतिक दृष्टि से प्रभावशाली जिलों में गिने जाते हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग के 5 जिले ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी और दतिया कम लिंगानुपात वाले जिले हैं।

कंचनबाई की बहादुरी को सलाम:सीएम यादव ने परिवार को 4 लाख देने की घोषणा, मधुमक्खियों के हमले से 20 मासूमों को बचाने खुद दे दी थी जान
भोपाल। मप्र के नीमच जिले में आंगनवाड़ी केंद्र के 20 बच्चों को मधुमक्खियों के हमले से बचाकर खुद जान गंवाने वाली महिला कंचनबाई मेघवाल के परिजनों को मध्यप्रदेश सरकार चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगी। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने परिवार को 4 लाख आर्थिक सहायत देने की घोषणा की है।मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, नीमच जिले के ग्राम रानपुर में मधुमक्खियों के डंक से आंगनवाड़ी में कार्यरत बहन कंचन बाई मेघवाल जी का असमय निधन अत्यंत दुखद व हृदयविदारक है। प्रदेश सरकार इस दुख की घड़ी में उनके परिवार के साथ है। इस घटना में मानवीय आधार पर मैंने कंचन बहन के परिवार को 4 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी राज्य सरकार उठाएगी। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति एवं परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति दें। शांति।कंचन बाई ने इस तरह बचाई बच्चों की जान विगत सोमवार को आंगनवाड़ी में काफी बच्चे थे। केंद्र की सहायिका बाकी बच्चों को लेने गई थी। इसी दौरान वहां मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। पास में ही स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष 45 वर्षीय कंचनबाई का घर है जो घर के पास मौजूद हैंडपंप पर कपड़े धो रही थीं। बच्चों पर हमला देख घर से दरी और कंबल लेकर दौड़ी और आनन-फानन सारे बच्चों को दरी और कंबल से घेरा बनाकर सुरक्षित किया। इस दौरान मधुमक्खियों ने कंचनबाई को काटा। इसके बाद डायल 112 से अस्पताल ले जाया गया लेकिन उनका निधन हो गया। कंचन बाई अपने पीछे दो बेटियां और एक बेटा छोड़ गई हैं। उनकी इस बहादुरी को सलाम किया जा रहा है और सरकार से परिवार को सहायता देने की मांग उठ रही है।

मप्र कांग्रेस ने फिर बदली प्रवक्ताओं के चयन वाली कमेटी:जयवर्धन, हेमंत समेत 7 की एंट्री, समिति के संयोजक समेत 8 को दिखाया बाहर का रास्ता
भोपाल। मप्र कांग्रेस में प्रवक्ताओं का चयन करने वाली कमेटी लेकर मचा घमासान थम नहीं रहा है। प्रदेश कांग्रेस ने एक बार फिर टैलेंट हंट समिति में संशोधन कर दिया है। पिछले दो महीने के भीतर तीसरी बार जारी टैलेंट हंट कमेटी में विधायक जयवर्धन सिंह, हेमंत कटारे, महेश परमार समेत 7 लोगों के नाम जोड़े गए हैं। जबकि पूर्व में घोषित टैलेंट हंट समिति के संयोजक अभय तिवारी, यश घनघोरिया, मेघा परमार, 4 प्रदेश प्रवक्ता समेत 8 सदस्यों को बाहर कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने नई श्टैलेंट हंट्य समिति का गठन किया है। प्रदेश कांग्रेस में प्रवक्ताओं की खोज के लिए 9 दिसंबर को प्रदेश संगठन प्रभारी महामंत्री संजय कामले ने टैलेंट हंट समिति का गठन किया था। इसको लेकर विवाद उठा तो कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने 23 दिसंबर को टैलेंट हंट की नई कमेटी जारी कर दी। जिसमें कमेटी के सदस्यों के क्लस्टर भी तय कर दिए थे। इसके बाद कांग्रेस में विवाद उठा तो मुकेश नायक ने इस्तीफा दे दिया था। हालांकि बाद में प्रदेशाध्यक्ष के दखल के बाद वे वापस काम पर लौटे। नए प्रवक्ताओं की तलाश शुरूप्रदेश कांग्रेस ने दो दिन पहले प्रवक्ताओं को कार्यमुक्त कर टैलेंट हंट कार्यक्रम के जरिए नए प्रवक्ताओं की तलाश शुरू कर दी है। इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुकेश नायक द्वारा 23 दिसंबर को गठित की गई टैलेंट हंट कमेटी में बदलाव कर दिया है। पटवारी ने टैलेंट हंट समिति से अभय तिवारी, युवक कांगे्रस अध्यक्ष यश घनघोरिया, एनएसयूआई अध्यक्ष आशुतोष चैकसे, बाल कांग्रेस अध्यक्ष मेघा परमार और प्रवक्ता अभिनव बरोलया, मिथुन अहिरवार, राहुल राज और आनंद जाट को बाहर कर दिया है। बताया गया कि अभय तिवारी को असम चुनाव में व्यस्त होने की वजह से टैलेंट हंट समिति से बाहर किया गया है। बतौर सदस्य इन्हें किया गया शामिलटैलेंट हंट समिति से हटाए गए पदाधिकारियों के स्थान पर विधायक जयर्वधन सिंह, हेमंत कटारे, महेश परमार, पूर्व विधायक शैलेन्द्र पटेल, विचार विभाग के अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता, मुणाल पंत और अपूर्व भारद्वाज को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। जबकि नई टैलेंट हंट समिति के अध्यख मुकेश नायक को बनाया गया है। जबकि विधायक आरिफ मसूद, विक्रांत भूरिया, महेन्द्र जोशी और रीना बौरासी को नई समिति में भी शामिल किया गया है।

4.37 करोड़ का लघु निर्माण घोटाला:तीन प्राचार्यों पर गिरी गाज, सात को शो-काज नोटिस, तीन फर्मों के नाम पर दी थी भुगतान की सहमति
सतना। मैहर जिले के रामनगर विकासखंड की हायर सेकेण्ड्री एवं हाई स्कूलों में लघु निर्माण कार्य भवन मरम्मत, पार्किंग शेड एवं साइकिल स्टैंड निर्माण के नाम पर हुए 4.37 करोड़ के भुगतान के मामले में ताबड़तोड़ कार्रवाईयों का दौर चल रहा है। संयुक्त संचालक लोक शिक्षण रीवा संभाग रीवा ने तीन प्राचार्यों को नियम विरुद्घ भुगतान के मामले में निलंबित कर दिया इससे पहले भी तीन प्राचार्यों को सस्पेंड किया गया था। वहीं इसी प्रकार के फर्जीवाड़े में शामिल अन्य सात प्राचार्यों को कमिश्नर रीवा ने कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। माना जा रहा है कि नोटिस जा जवाब आने के पश्चात इन पर भी कार्रवाई होनी लगभग तय है।बताया जाता है कि मैहर जिले की करीब 20 स्कूलों ने वाणी इंफ्राक्चर, श्री महाकाल ट्रेड्र्स और रुद्र इंटरप्राइजेज के नाम पर 4 करोड़ 37 लाख 89 हजार 420 रुपए का नियम विरुद्घ भुगतान किया था जिसकी जांच एसडीएम रामनगर के द्वारा की गई। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात मामले में संलिप्त कर्मचारियों के विरुद्घ निलंबन की कार्रवाई का दौर शुरू हुआ। अब संयुक्त संचालक रीवा ने शासकीय हाई स्कूल बड़वार के प्राचार्य संकर्षण प्रसाद पाण्डेय को 23 लाख 24 हजार 332 रुपए के नियम विरुद्घ भुगतान के मामले में निलंबित किया गया है। निलंबित प्राचार्य को विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय अमरपाटन से अटैच किया गया है इनके द्वारा वाणी इंफ्राक्चर भोपाल के नाम पर भुगतान किया गया था। इसी प्रकार शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सगौनी के प्राचार्य रवीन्द्र सिंह को भी निलंबित किया गया है। इनके द्वारा वाणी इंफ्राक्चर के नाम पर ही 24 लाख 94 हजार 855 रुपए का नियम विरुद्घ भुगतान किया गया था। इसके अलावा शासकीय हाई स्कूल मड़वार की प्राचार्य श्रीमती किरण पटेल को निलंबित कर बीईओ कार्यालय अमरपाटन से अटैच किया गया इनके द्वारा भी 24 लाख 5564 रुपए का भुगतान श्री रुद्र इंटरप्राइजेज के नाम पर किया गया था। फिलहाल तीनों को निलंबित कर बीईओ कार्यालय अटैच किया गया है जबकि इससे पहले तीन प्राचार्य निलंबित हो चुके हैं।इन्हें शो-काज नोटिसवाणी इंफ्राक्चर के नाम पर 22 लाख 29506 रुपए के भुगतान के मामले में संभागायुक्त रीवा ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हर्रई के प्राचार्य सियंबर सिंह, कंदवारी के प्राचार्य श्रवण सिंह, हाई स्कूल गोविंदपुर के प्राचार्य मथुरा प्रसाद वर्मा, गुलवार गुजारा के शिवलाल बैस, शासकीय उच्चर माध्यमिक विद्यालय देवराज नगर के रामलखन रावत, शासकीय उच्चर माध्यमिक विद्यालय देवदहा के लक्ष्मण प्रसाद शुक्ला और शासकीय उच्चर माध्यमिक विद्यालय गोरसरी के गुलजार सिंह टेकाम को नियम विरुद्घ भुगतान के मामले में नोटिस जारी की गई है।अब तक 9 कर्मचारियों का निलंबन4.37 करोड़ के फर्जीवाड़े में अब तक 9 कर्मचारियों का निलंबन हो चुका है। सबसे पहले सुलखमा के प्राचार्य रामलाल साकेत को निलंबित किया गया इसके पश्चात रामनगर के बीईओ पर निलंबन की कार्रवाई हुई। वहीं बाबू सहभृत्य विनोद कुमार पटेल का निलंबन हुआ और इसके बाद मझटोलवा प्राचार्य कामता प्रसाद तिवारी छिरहाई प्राचार्य रामाधार वर्मा व मनकहरी प्राचार्य राजेश कुमार साकेत को निलंबित किया गया था।

मप्र बनेगा बनेगा देश की दालों का केंद्र:सीहोर के अमलाहा में कल लगेगा देश के कृषि मंत्रियों का जमावड़ा, शिवराज करेंगे अध्यक्षता
भोपाल। सीहोर जिले का अमलाहा क्षेत्र 07 फरवरी को देश की कृषि राजनीति और अनुसंधान का मुख्य केंद्र बनने जा रहा है। यहां आयोजित होने वाले दलहन क्षेत्र के राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के 09 प्रमुख राज्यों के कृषि मंत्री शिरकत करेंगे। इस बड़े आयोजन में दालों के उत्पादन को बढ़ाने, वर्तमान चुनौतियों से निपटने और भविष्य की नई संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।सम्मेलन की कमान खुद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान संभालेंगे। उनके साथ केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चैधरी भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में दलहन अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक, बीज उत्पादक संस्थाएं, दाल उद्योग के बड़े प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो देश को दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का खाका तैयार करेंगे।ये दिग्गज मंत्री होंगे शामिलसम्मेलन की गरिमा बढ़ाने के लिए अलग-अलग राज्यों के कृषि मंत्री सीहोर पहुँच रहे हैं। इनमें शामिल हैं मध्यप्रदेश से एदल सिंह कंसाना, उत्तर प्रदेश से सूर्य प्रताप शाही, पंजाब से सरदार गुरमीत सिंह खुडियन, हरियाणा से श्याम सिंह राणा, छत्तीसगढ़ से रामविचार नेताम, बिहार से राम कृपाल यादव, गुजरात से रमेशभाई कटारा, ओडिशा से कनक वर्धन सिंह देव, पश्चिम बंगाल से सोवानदेव चट्टोपाध्याय शामिल होंगे।क्यों खास है यह सम्मेलनअमलाहा में होने वाली इस चर्चा में दलहन उत्पादक राज्यों के बीच समन्वय और नई तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए दलहन फसलों को बढ़ावा देना है।

सीएम मोहन हरिद्वार के दौरे पर:योगपीठ परिसर में योगगुरु के साथ किया शीर्षासन, तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन दिनों हरिद्वार प्रवास पर हैं। अपने दौरे के दूसरे दिन यानि गुरुवार को सीएम डॉ. यादव ने पतंजलि योगपीठ पहुंचकर योगगुरु बाबा रामदेव के साथ योगाभ्यास किया। इस अवसर पर दोनों ने विभिन्न योगासन किए और योग के महत्व पर चर्चा भी की। योगपीठ परिसर में मुख्यमंत्री का यह रूप लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया।हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्वागत योगगुरु बाबा रामदेव ने किया। इसके बाद दोनों ने योग सत्र में भाग लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री और बाबा रामदेव ने साथ-साथ शीर्षासन किया, जिसकी तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। मुख्यमंत्री का यह योगमय रूप पहली बार सार्वजनिक रूप से देखने को मिला, जिसे लोगों ने खूब सराहा।कोई साधारण आसन नहीं शीर्षासनविशेषज्ञों के अनुसार शीर्षासन कोई साधारण आसन नहीं है। इसे करने के लिए लंबे समय तक अभ्यास, शारीरिक संतुलन और मानसिक एकाग्रता आवश्यक होती है। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा सहजता से शीर्षासन करना इस बात का संकेत है कि वे नियमित रूप से योग और प्राणायाम का अभ्यास करते हैं। बाबा रामदेव ने भी मुख्यमंत्री के योग कौशल की प्रशंसा करते हुए कहा कि योग व्यक्ति को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी सशक्त बनाता है।योगाभ्यास के बाद कन्या गुरुकुल पहुंचे सीएम मोहनयोगाभ्यास के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कन्या गुरुकुल पहुंचे, जहां उन्होंने बाबा रामदेव के साथ हवन कार्यक्रम में भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार और हवन की आहुतियों के बीच मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और योग परंपरा विश्व को स्वस्थ जीवन की दिशा दिखा रही है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज पूरी दुनिया भारत की इस प्राचीन विद्या को अपना रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से भी नियमित योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।मुख्यमंत्री और बाबा रामदेव का यह योगाभ्यास कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि आमजन के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा भी बन गया।

सिंगरौली के बेटे को दिल दे बैठी फ्रांस की खूबसूरत युवती:हिन्दू रीति-रिवाज के साथ आज लेंगे सात फेरे, शहनाई के साथ गूजेंगा वैदिक मंत्रोच्चार
नीरज द्विवेदी, सिंगरौलीदेश की उर्जाधानी कहे जाने वाली सिंगरौली की आवोहवा विदेशी पर्यटकों को खूब भा रही है। इसका ताजा उदाहरण बुधवार को देखने को तब मिला है। जब फ्रांस मूल की रहने वाली युवती ने सिंगरौली के एक युवक साथ सात जन्मों तक साथ निभाने का वचन ले लिया। दरअसल सिंगरौली निवासी संदीप कुमार सिंह, पिता स्व. रमेश प्रसाद सिंह, का विवाह फ्रांस की नागरिक शेरला पुलानीया के साथ आज गुरुवार को हिंदू रीति-रिवाजों के साथ संपन्न होगा। नव दंपति आज रात अपने परिवार और रिश्तेदारों की मौजूदगी में अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेंगे।विवाह से पूर्व 4 फरवरी, बुधवार को होटल हेरिटेज पैलेस में संदीप और शेरला की हल्दी रस्म हर्षोल्लास और पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर लगभग पचास फ्रांसीसी नागरिकों ने पीले वस्त्र धारण कर परिवारजनों के साथ दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया। हल्दी रस्म सौंदर्य, पवित्रता, सुरक्षा और सुखद वैवाहिक जीवन के आशीर्वाद का प्रतीक मानी जाती है। विशेष बात यह रही कि फ्रांसीसी मेहमानों ने भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान दर्शाते हुए पूरी रस्म वैदिक मंत्रोच्चार और हिंदू परंपराओं के अनुरूप संपन्न कराई।जानकारी के अनुसार संदीप कुमार सिंह बैढ़न, सिंगरौली के निवासी हैं। उन्होंने सरस्वती शिशु मंदिर, बैढ़न से 12वीं की शिक्षा प्राप्त करने के बाद इंदौर से बीसीए एवं पुणे से एमसीए की डिग्री हासिल की। इसके पश्चात वे बेल्जियम में स्थायी रूप से बस गए, जहां उन्होंने आईटी कंसल्टेंसी के क्षेत्र में अपना व्यवसाय प्रारंभ किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात फ्रांस की नागरिक शेरला पुलानीया से हुई। यह मुलाकात पहले दोस्ती और फिर धीरे-धीरे प्रेम में परिवर्तित हो गई। शेरला पुलानीया वर्तमान में सनाफ्री फार्मास्यूटिकल कंपनी में ब्रांड मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। अब दोनों विवाह के पवित्र दांपत्य सूत्र में बंधने जा रहे हैं।हल्दी रस्म में दिखा पीले रंग का पारंपरिक परिधानभारतीय विवाह की सबसे रंगीन और उल्लासपूर्ण रस्मों में से एक हल्दी समारोह होटल हेरिटेज पैलेस में पारंपरिक वैदिक विधियों के साथ संपन्न हुआ। फ्रांसीसी नागरिकों ने पीले रंग के आकर्षक परिधान पहनकर पूरे वातावरण को उल्लास और ऊर्जा से भर दिया। भारतीय मान्यताओं के अनुसार हल्दी समारोह में पीले रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं, जो दुल्हन की सुंदरता और वैवाहिक आभा को और अधिक निखारते हैं।विदेशियों ने की भारतीय संस्कृति की सराहनाकार्यक्रम में शामिल फ्रांसीसी नागरिकों ने बातचीत के दौरान बताया कि वे भारतीय संस्कृति की विविधता, आध्यात्मिकता और ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा से अत्यंत प्रभावित हैं। होटल हेरिटेज पैलेस के खान-पान, पारंपरिक परिधानों और सांस्कृतिक माहौल ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि भारत की यह विशेषता है कि यहां विभिन्न जाति-धर्म के लोग एकजुट होकर सामाजिक समरसता का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित:भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर शिवराज का दावाः कांग्रेस को बताया झूठ की दुकान
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सियासी घमासान जारी है। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि इस समझौते से देश के किसानों का नुकसान होगा। हालांकि विपक्ष के आरोपों औ किसानों को समझाने के लिए भाजपा नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया है। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता कूटनीति, विकास और सम्मान का एक अनोखा उदाहरण है। यही नहीं भारत के हितों की रक्षा करते हुए किसानों पर पूरा ध्यान दिया गया है। भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते के लिए शिवराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद भी दिया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा, संसद में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने समझौते को लेकर चीजें स्पष्ट कर दी हैं। ये ऐसा व्यापार समझौता है, जो कूटनीति, विकास और सम्मान का अनुपम उदाहरण है। मैं कृषि मंत्री के नाते पूरी जिम्मेदारी से कहता हूं कि भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस समझौते में देश के किसानों का पूरा ध्यान रखा गया है, खासकर यहां के अनाज, फल और मिलेट्स। इनके लिए कोई बाजार नहीं खोला गया है। हमारे किसान पूरी तरह सुरक्षित हैं।टैरिफ घटने से किसानों को होगा फायदा उन्होंने कहा कि टैरिफ घटने से किसानों को फायदा होगा। पहले साल 63 हजार करोड़ रुपए का चावल निर्यात किया गया। यह निर्यात बढ़ेगा। चावल व टेक्सटाइल का निर्यात और बढ़ेगा। शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि टेक्सटाइल सेक्टर निर्यात क्षेत्र में बहुत उल्लेखनीय भूमिका निभा रहा है। इसलिए टेक्सटाइल का निर्यात बढ़ने से कपास के किसानों को भी फायदा होगा। उन्होंने दोहराया कि यह व्यापार समझौता भारत और यहां के किसानों के हित में है। उनके हित पूरी तरह सुरक्षित हैं।झूठ की दुकान है कांग्रेसविपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस एक झूठ की दुकान है। वह अफवाहों के जरिए अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। मैदान में कांग्रेस कभी जीती नहीं है। लगातार हार की निराशा और हताशा कांग्रेस की कुंठा के रूप में प्रकट हो रही है। उनके खेत की मेड़ दिखाई नहीं देती है, बल्कि सिर्फ सत्ता की सीढ़ी दिखाई देती है।कांग्रेस के लोग कर रहे अमर्यादित व्यवहारशिवराज सिंह चौहान ने कहा, कांग्रेस के लोग अमर्यादित व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक मर्यादाओं की धज्जियां उड़ाई हैं। संसद को विपक्ष ने सड़क का चैराहा बना दिया है। उन्होंने कहा कि मुझे तकलीफ है कि क्या संसद के अंदर गुंडों की तरह व्यवहार किया जाएगा। प्रधानमंत्री को संसद में बोलने से रोका जा रहा है। वाणिज्य मंत्री को सदन में बोलने नहीं दिया जाता है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील से देश के अन्नदाता होंगे तबाह:जीतू ने लगाया गंभीर आरोप, कर्ज को लेकर मोहन को भी घेरा
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने देश और प्रदेश में सबसे अधिक पीड़ित और दुखी किसान और युवा के होने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील से किसानों का बुरा हाल हो जाएगा। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पटवारी ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा दिया गया हालिया बयान, जिसमें भारत-अमेरिका ट्रेड डील की जानकारी सामने आई है, बेहद चिंताजनक है। इस डील के तहत भारत अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों पर शून्य प्रतिशत टैरिफ लगाएगा। इसमें ड्राई फ्रूट्स, फल-सब्जियां, शराब, स्पिरिट, औद्योगिक उत्पाद, रसायन और चिकित्सा उपकरण शामिल हैं। वहीं, भारत में उत्पादित कृषि सामग्री जब अमेरिका जाएगी तो उस पर 18 प्रतिशत तक टैक्स लगेगा।अमेरिका के कृषि मंत्री के बयान का दिया हवालाउन्होंने सवाल उठाया कि जब अमेरिका का कृषि मंत्री खुलकर बयान दे रहा है, तो भारत के कृषि मंत्री, जो स्वयं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं, इस विषय पर मौन क्यों हैं? यह चुप्पी किसके दबाव में है? जीतू पटवारी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पहले ही आगाह किया था कि यह ट्रेड डील 100 प्रतिशत भारत के खिलाफ होगी और सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में झुकेगी। आज यह बात एक बार फिर सत्य साबित हो गई है।किसानों की स्थिति हो रही बदतरउन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में किसान की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। किसी भी फसल का न तो उचित मूल्य मिल रहा है और न ही एमएसपी पर खरीदी हो रही है। भाजपा सरकार ने खेती को लाभ का धंधा बनाने का वादा किया था, लेकिन आज भारत दुनिया में किसानों की आत्महत्या के मामलों में सबसे ऊपर पहुंचता जा रहा है, जो अत्यंत चिंताजनक है। यदि अमेरिका से सस्ता कृषि उत्पादन शून्य प्रतिशत टैक्स पर भारत आएगा, तो देश के किसानों की आमदनी पूरी तरह तबाह हो जाएगी। कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ किसी भी प्रकार की घात के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी और निर्णायक आंदोलन करेगी।कर्ज लेने में मोहन ने सभी मंत्रियों को छोड़ा पीछेकांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कर्ज लेने के मामले में अपने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को पीछे छोड़ दिया है। चालू वित्त वर्ष में प्रदेश सरकार अब तक 1 लाख 78 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है और हाल ही में लिए गए 5,200 करोड़ रुपए को मिलाकर प्रदेश पर प्रतिदिन लगभग 213 करोड़ रुपए का कर्ज बढ़ रहा है। कांग्रेस पार्टी स्पष्ट मांग करती है कि भाजपा सरकार एक श्वेत पत्र जारी करे, जिसमें प्रदेश की आर्थिक स्थिति और सुधार की योजना स्पष्ट हो।

सुर्खियों में रहने जनता को गुमराह कर रहे पीसीसी चीफ:मोहन के मंत्री का जीतू पर तीखा प्रहार
भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं की जनसमस्याओं को सुना और अनेक मामलों का मौके पर ही समाधान किया। जिन समस्याओं का तत्काल समाधान संभव नहीं हो सका, उन्हें संबंधित विभागों को प्रेषित कर शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए गए। कार्यकर्ताओं सुनवाई के बाद श्री सारंग ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित पूरी कांग्रेस सुर्खियों में बने रहने के लिए असत्य और तथ्यहीन बयान देकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। झूठ और फरेब की राजनीति करना कांग्रेस की पुरानी आदत रही है, जिसे जनता अब भली-भांति समझ चुकी है। मध्यप्रदेश सरकार पूर्ण आर्थिक अनुशासन का पालन करते हुए कार्य कर रही है।मोदी जी के नेतृत्व में भारत को मिला वैश्विक सम्मानसारंग ने कहा कि हाल ही में अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील की पूरी दुनिया में सराहना हो रही है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मजबूत निर्णय क्षमता का परिणाम है। अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील से भारत के लिए नए व्यापारिक अवसर खुलेंगे और भारत वैश्विक मंच पर एक सशक्त अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित होगा। आर्थिक अनुशासन का पालन कर रही है मप्र सरकारकांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा मप्र सरकार पर लगाए आरोपों को तथ्यहीन और भ्रामक बताते हुए सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश की भाजपा सरकार पूर्ण आर्थिक अनुशासन का पालन करते हुए कार्य कर रही है। राज्य सरकार द्वारा लिया गया कर्ज पूरी तरह पूंजीगत व्यय के लिए उपयोग किया जा रहा है, जो अर्थशास्त्र की दृष्टि से उचित और आवश्यक है। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। कांग्रेस के नेताओं को बिना तथ्यों के आरोप लगाने की आदत है। सारंग ने राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के साथ किए गए व्यवहार की कड़ी निंदा की।

सोम डिस्टलरीज की दो यूनिटों के लायसेंस निलंबित:नकली परमिट और कूटरचित दस्तावेजों से जुड़ा है मामला
भोपाल। नकली शराब परिवहन परमिटों एवं अवैध शराब के परिवहन करने के मामले में आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने मप्र के रायसेन की चर्चित आसवनी मेसर्स सोम डिस्टलरीज प्रायवेट लिमिटेड सेहतगंज, जिला रायसेन के डी-1, एफएल-9, सीएस-1 एवं सीएस-1बी तथा मेसर्स सोम डिस्टलरीज एण्ड ब्रेवरीज लिमिटेड, रोजराचक, जिला रायसेन के एफएल-9, एफएल-9-ए ऑफ बी 3 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।नकली परमिट, कूटरचित दस्तावेज और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित इस मामले में अपर सत्र न्यायाधीश देपालपुर ने कंपनी सहित विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों को भी दोषी माना था। न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि आरोपियों ने मिलकर शराब परिवहन के कूटरचित परमिट व बिल्टी तैयार की। फर्जी परमिट को असली बताकर उपयोग किया। शासन को राजस्व हानि और कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया। न्यायालय ने मेसर्स सोम डिस्टलरीज समूह के प्रतिनिधियों, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और निदेशक सहित कई आरोपियों को कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया था। हालांकि उच्च न्यायालय, इंदौर ने सत्र न्यायालय ने सजा पर रोक लगा दी थी। लेकिन लायसेंस पर रोक नहीं लगाई थी। आबकारी आयुक्त ने स्वयं की कार्रवाई की पहल प्रकरण में पारित आदेशों में आरोपियों द्वारा उच्च न्यायालय, इंदौर के समक्ष प्रस्तुत दो प्रकरणों में दोनों इकाईयों के पक्ष में स्वीकृत लायसेंस के निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है अथवा नहीं, इस संबंध में आबकारी आयुक्त ने पहले अतिरिक्त महाधिवक्ता ग्वालियर को पत्र लिखकर अभिमत मांगा, लेकिन अभिमत नहीं मिल सका। इसके बाद 25 जुलाई 2024 को अतिरिक्त महाधिवक्ता, उच्च न्यायालय जबलपुर को पत्र लिखकर अभिमत मांगा। इसके बाद तीन और पत्र भी लिखे थे। लेकिन अभिमत 24 दिसम्बर 2025 को महाधिवक्ता, उच्च न्यायालय जबलपुर से मिला। सोम की दोनों इकाईयों पर निलंबन की कार्रवाई किए जाने के पक्ष में अभिमत मिल सका। महाधिवक्ता के अभिमत तथा इकाईयों द्वारा प्रस्तुत जवाब के बाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित दो आदेशों की आद्यतन स्थिति जानने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि उच्च न्यायालय ने आरोपियों को सजा पर रोक लगाई। इन आदेशों में सोम की दोनों इकाईयों के पक्ष में स्वीकृत लायसेंस पर किसी प्रकार की रोक लगाए जाने का उल्लेख नहीं था। इसलिए आबकारी आयुक्त ने दोनों इकाईयों के सभी लायसेंस निलंबित कर दिए। विभागीय अमले पर हो चुकी है सख्त कार्रवाई नकली शराब परिवहन परमिटों एवं अवैध शराब के परिवहन मामले में अपर सत्र न्यायाधीश, देवालपुर के निर्णय दिनांक 23 दिसम्बर 2023 के बाद दोषी विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई। इनमें आबकारी उप निरीक्षक प्रीति गायकवाड़ को 25 सितम्बर 2025 को सेवा से पदच्युत किया जा चुका है। जबकि सेवानिवृत्त हो चुके अन्य सभी अधिकारियों-कर्मचारियों मदन सिंह पवांर, सहायक जिला आबकारी अधिकारी, कैलाश चन्द्र बंगाली, जिला आबकारी अधिकारी एवं रामप्रसाद मिश्रा, आबकारी उप निरीक्षक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है। आरोपियों ने इस तरह की थी गड़बड़ी आरोपियों ने मिलकर परमिट क्र. 10363, ट्रक क्र. एमपी09 एचएफ 5185 की बिल्टी और अनेक परमिट बुक कूटरचित करने का अवैध काम, अवैध साधनों से करने के लिए अपराधिक षड्यंत्र बनाकर कूटरचित परमिट से छल करने के उद्देश्य से कूटरचना की। कूटरचित दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग किया गया, जिसमें आरोपी मदन सिंह ने 5 फर्जी परमिट बुक, विरेन्द्र भारद्वाज ने 272, रामप्रसाद मिश्रा ने 25, प्रीति गायकवाड़ ने 279, संजय गोहे ने 282, कैलाश बंगाली ने 29, मोहन सिंह तोमर ने 676, उमाशंकर ने 75 और दिनकर सिंह ने 65 फर्जी परमिट तैयार किए। आरोपियों ने शासन को नुकसान और मेसर्स सोम डिस्टलरीज प्रायवेट लिमिटेड को गलत तरीके से लाभ पहुंचाने के लिए यह कूटरचना की। परमिट और बिल्टी से मेसर्स सोम डिस्टलरीज प्रायवेट लिमिटेड, रोजराचक से दीव को परिवहन किया।

मप्र सत्ता व संगठन में बड़े बदलाव के संकेत:निगम-मंडल, प्राधिकरण और संगठनात्मक पदों पर जल्द होंगी नियुक्तियां
भोपाल। मध्य प्रदेश में आने वाले दिनों में सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर बड़े पैमाने पर नियुक्तियां होने की संभावना है। जिला स्तर से लेकर प्रदेश कार्यसमिति, निगम, मंडल, आयोग और बोर्ड तक राजनीतिक संतुलन साधने की कवायद तेज हो गई है। इसे लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व से मुला$कात की। नियुक्तियों को लेकर बीच लगातार मंथन और बैठकों का दौर जारी है।सूत्रों के मुताबिक, पहले सीमित संख्या में प्राधिकरणों और निगमों के लिए प्रस्तावित सूची भेजी गई थी, लेकिन केंद्रीय संगठन ने सभी खाली पदों के लिए एक समग्र सूची तैयार कर भेजने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद अब नए सिरे से पूरी प्रक्रिया शुरू की गई है। राष्ट्रीय संगठन में हालिया बदलावों के बाद, प्रदेश से कुछ नेताओं को राष्ट्रीय स्तर की टीम में समायोजित किए जाने की भी चर्चा है। वहीं राज्य स्तर पर निगम, मंडल और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर बड़े शहरों में विशेष फोकस रखा गया है।राजनीतिक नियुक्तियों में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए ग्वालियर-चंबल, मालवा, महाकौशल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व दिए जाने की रणनीति बनाई जा रही है। सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय नेताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों में उनकी पसंद को भी तवज्जो दी जाएगी, ताकि संगठनात्मक संतुलन बना रहे। इसके अलावा, विधानसभा चुनाव में कम अंतर से हारने वाले नेताओं को भी एडजस्ट करने की तैयारी है। इन नेताओं को मंत्री का दर्जा दिए जाने की संभावनाइनमें विशेष रूप से जनजातीय वर्ग से आने वाले नेताओं को मंत्री स्तर का दर्जा दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके लिए जिलों से संबंधित नेताओं की खुफिया रिपोर्ट भी मंगाई गई है। सूत्रों का कहना है कि नियुक्तियों में संगठनात्मक पृष्ठभूमि, संघ विचारधारा से जुड़ाव और प्रदेश नेतृत्व की पसंद को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही केंद्रीय नेतृत्व की अंतिम मंजूरी के बाद सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा।वरिष्ठ सांसद को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती हैराजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि प्रदेश से एक वरिष्ठ सांसद को केंद्र सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, जिससे राज्य की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है। कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में राजनीतिक एडजस्टमेंट की प्रक्रिया निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है और माना जा रहा है कि आने वाले समय में निगम-मंडलों और संगठन में ताबड़तोड़ नियुक्तियों की घोषणा हो सकती है।

उपकार नहीं, सेवा करना हमारा धर्म: RSS चीफ ने मप्र से दिया संदेश, कहा - स्वयं के दु:ख के साथ समाज व देश का दु:ख दूर करना भारत का स्वभाव
इंदौर/कसरावद । सभी परमेश्वर के स्वरूप है, अत: उपकार नहीं, सेवा करना हमारा धर्म है। हमारे यहां चैरिटी नहीं, अपितु सेवा है। जीवन में सेवा के जो भी अवसर मिलें, उसमें सेवा करना चाहिए। सेवा से हमारी शुद्धि होती हैं। जिसके पास जो हो, वो देना चाहिए। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनरावजी भागवत ने बुधवार को कसरावद के लेपा स्थित श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में आयोजित 'मनुष्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण विषय पर व्यक्त किए।डॉ. भागवत ने कहा कि मनुष्य देखकर ही सीखता है, सुनकर या बोलकर नहीं। भारत की यात्रा में यह सत्य सिद्ध हुआ कि सुख बाहर नहीं, अपितु मनुष्य के अंदर ही है। भारत में मनुष्य के अंदर की खोज की यात्रा प्रारंभ हुई। मनुष्य के अंदर की यात्रा से हमें शाश्वत सुख प्राप्त होता है। हमारे पूर्वजों ने अनुभव के आधार पर बताया कि माया का आधार अध्यात्म ही होना चाहिए। ईश्वर ने मनुष्य को संवेदना दी है। मनुष्य की संवेदना दूसरे के सुख-दु:ख को जानती है। किसी की उपेक्षा करके सुख भोगना, मनुष्य की संवेदना में नहीं है। जीवन मूल्यों के लिए जीवन में शिक्षा और शुचिता का आवश्यक है। मनुष्य को शिक्षा इसीलिए चाहिए कि उसे स्वयं का दु:ख दूर तो करना ही है, किंतु समाज और देश का भी दु:ख दूर करना है, यह स्वभाव भारत का स्वभाव है। ऐसा धर्म जब हमने दुनिया को दिया, तब भारत बना। परतंत्रता में भी हमारा स्वाभाव नहीं बदला।भारत का अर्थ स्वभाव हैभारतीय संदर्भों में शिक्षा के बारे में डॉ. भागवत ने कहा कि जन्मांतर का ज्ञान मनुष्य के मस्तिष्क में है, इसीलिए जो ज्ञान अंदर है, उसे बाहर निकालना चाहिए। टंट्या मामा और गाडगे महाराज जैसे महापुरुषों ने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी, किंतु आज भी उनका सम्मान है। हमारे अंदर दैवीय गुण निहित है, उन्हें बाहर निकालना होगा उसका ज्ञान प्राप्त करना होगा। मनुष्य को विश्व मानवता का ज्ञान दिलाने वाली शिक्षा, आत्मनिर्भर बनाने वाली शिक्षा, श्रम की प्रतिष्ठा वाली शिक्षा ही वास्तविक शिक्षा है। व्यक्ति की बजाय कर्म की मान्यता और परिणाम की बजाय प्रामाणिक और उत्कृष्ट कार्य करना, भारत का स्वभाव है। भारत का अर्थ केवल भूगोल नहीं, अपितु स्वभाव है। भारत की उन्नति का मतलब जल, जंगल, नदी, पहाड़, जानवर और मनुष्य सभी की उन्नति है। मंच पर भारती ताई ठाकुर, संस्था के उपाध्यक्ष महेश डाबक एवं संस्था के अध्यक्ष नीतीन करमलकर उपस्थित थे। कार्यक्रम में गोष्ट-नर्मदालयाची आडियोबुक का विमोचन भी हुआ।संस्थान 15 वर्षों से शिक्षा व कौशल विकास क्षेत्र में कार्य कर रहायह संस्थान पिछले 15 वर्षों से शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में कार्यरत है। श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 17-20 जनवरी को संपन्न हुआ, तत्पश्चात निकेतन और प्रकल्प के दर्शनार्थ पूजनीय सरसंघचालकजी का प्रवास लेपा में हो रहा है। संस्थान वनवासी क्षेत्रों के कुपोषित बच्चों को शिक्षा एवं कौशल विकास के कार्य करती है।निमाड़ अभ्युदय विद्यालय में 800 बच्चे अध्ययनरतसंस्थान वनवासी बच्चों के लिए कक्षा दसवीं तक एवं बेसिक रूरल टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा शिक्षा का प्रबंध कर रहा है। निमाड़ अभ्युदय के विद्यालयों में लगभग आठ सौ बच्चे अध्ययनरत है। अपनी नर्मदा परिक्रमा में वनवासी बच्चों का शिक्षा का संकल्प करने पर सुश्री भारती ठाकुर दीदी ने यह संस्थान प्रारंभ किया। रक्षा मंत्रालय की नौकरी छोड़ कर सुश्री भारती ठाकुर दीदी ने यह प्रकल्प प्रारंभ किया। दीदी को नागा साधु को पुनर्वास में मिला आश्रम दान में प्राप्त हुआ, जहां गौशाला सहित ये प्रकल्प चल रहा है।यह थे उपस्थितइस गरिमामय अवसर पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा ताई महाजन, प.पू. प्रतापे महाराज, भारती दीदी, मेवालाल पाटीदार, नितिन करमलकर, महेश दाबक, पद्मश्री महेश शर्मा, प्रांत प्रचारक राजमोहन तथा क्षेत्र प्रचारक स्वप्निल कुलकर्णी, प्रांत संघचालक डॉ. शास्त्री, प्रांत कार्यवाह विनित नवाथे, श्रीनाथ गुप्ता, राकेश भावसार, विकास दवे सहित कार्यक्रम में अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी एवं खरगोन जिलों से लगभग 300 गणमान्य अतिथि एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

विधायक कप 2026 का समापन:एल एन ग्रुप इन्फ्रा के सीएमडी डॉ. एन एल मालवीया ने विजेता-उपविजेता टीम को किया सम्मानित
भोपाल। राजधानी भोपाल के बरखेड़ा स्थित स्व बाबूलाल गौर दशहरा मैदान में आयोजित नान स्टार क्रिकेट टूर्नामेंट.. विधायक कप 2026 टेनिस बॉल क्रिकेट प्रतियोगिता का बुधवार को समापन हो गया है। 14 दिनों तक चले इस स्पर्धा का आयोजन भेल युवा संगम समिति द्वारा किया गया। प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला डीसीसी ओर एजीके के बीच खेला गया। विजेता-उपविजेता टीम को एल एन ग्रुप इन्फ्रा के सीएमडी डॉ. एन एल मालवीया ने पुरस्कृत किया। डाॅ. मालवीया ने विजेता टीम को 71 हजार और उपविजेता टीम को 35 हजार रुपए की राशि देकर सम्मानित किया साथ ही उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं कार्यक्रम में भेल युवा संगम समिति के सदस्यों और समिति प्रमुख केवल मिश्रा ने डॉ. एन एल मालवीया का सम्मानि किया। इसके बाद उन्होंने खिलाड़ियों को शील्ड प्रदान की।इस अवसर पर डॉ एल एन मालवीया ने कहा पिछले पांच वर्ष से यह समिति खेल प्रतियोगिता का आयोजन करती आ रही है और दोनों टीम के बीच अच्छा मुकाबला हुआ मेरी ओर से सभी खिलाड़ियों ओर समिति को ऐसे सफल आयोजन के लिए बधाई। बता दे ंकि इस क्रिकेट टूर्नामेंट 32 टीमों ने भाग लिया। प्रतियोगिता का आयोजन 21 जनवरी से 04 फरवरी तक आयोजित किया गया।

राजा रघुवंशी हत्याकांड से जुड़ी बड़ी खबर:कोर्ट ने दो आरोपियों को किया दोषमुक्त, सबूतों के आभाव में हुए रिहा
इंदौर। इंदौर के बहुचर्चित ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा उलटफेर हो गया है। दरअसल कोर्ट ने इस मामले में आरोपी बनाए गए गार्ड बलवीर सिंह अहिरवार और बिल्डिंग मालिक लोकेंद्र सिंह तोमर को दोषमुक्त कर दिया है। दोनों को राजा की हत्या के बाद सबूत मिटाने के आरोप में पुलिस ने अरेस्ट किया था, लेकिन कोर्ट ने सबूतों की कमी के कारण इन्हें रिहा करने का आदेश दिया गया है। बता दें कि राजा रघुवंशी की हत्या करने के बाद सोनम रघुवंशी इंदौर आई थी और किराये के फ्लैट पर रुकी थी। जिस फ्लैट पर सोनम रुकी थी उस बिल्डिंग का मालिक लोकेंद्र सिंह तोमर है। वहीं बलवीर अहिरवार उस बिल्डिंग में चैकीदार था। मालिक लोकेंद्र ने शिलोम जेम्स नामक व्यक्ति को बिल्डिंग किराए पर दी थी। जांच में साक्ष्य मिटाने की आशंका नहीं हुई साबितपुलिस के अनुसार, राजा रघुवंशी की हत्या के बाद शुरुआती जांच में आशंका जताई गई थी कि आरोपियों ने सबूत छिपाने की कोशिश की है। इस आधार पर गिरफ्तारी की गई थी। जांच में यह पाया गया कि वारदात के बाद सोनम और विशाल चैहान लसूड़िया इलाके में स्थित एक बिल्डिंग में ठहरे थे। यह बिल्डिंग शिलाम जेम्स के नाम पर किराए पर ली गई थी और इसका प्रबंधन ब्रोकर के माध्यम से हो रहा था। संबंधित कमरे का रेंटल एग्रीमेंट विशाल के नाम पर होने के कारण शुरुआती संदेह बढ़ गया था।तकनीकी साक्ष्यों और ठोस प्रमाणों की कमीजांच में बिजली बिल, रेंटल डॉक्यूमेंट्स और अन्य तकनीकी पहलुओं की छानबीन की गई, लेकिन दोनों आरोपियों की संलिप्तता के कोई ठोस सबूत नहीं मिले। शिलॉन्ग की ईस्ट खासी हिल्स के पुलिस अधीक्षक विवेक सिगम ने बताया कि प्रारंभिक परिस्थितियों और मौके पर मिली जानकारियों के आधार पर गिरफ्तारी की गई थी। बाद में जब साक्ष्यों की पुष्टि हुई तो हत्याकांड में उनकी भूमिका साबित नहीं हो सकी। इसी आधार पर न्यायालय ने दोनों को दोषमुक्त कर दिया। मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी और राज कुशवाहा फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और पुलिस अन्य पहलुओं की जांच जारी रखी हुई है।

केसी ने मप्र कांग्रेस की बढ़ाई टेंशन:कार्यकारिणी का दायरा सीमित करने लिखा खत, बड़े जिलों में 55 तो छोटे जिलों में होंगे महज 35 सदस्य
भोपाल। कांग्रेस संगठन के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस में टेंशन बढ़ गया है! दरअसल, राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने राज्यों को निर्देश दिया है। जिसमें कहा गया कि जिला कार्यकारिणी छोटी होगी। उन्होंने ज्यादा संख्या में सदस्यों की नियुक्ति करने पर रोक लगाई है। साथ ही बड़े और छोटे जिलों के लिए संख्या भी निर्धारित की है।कांग्रेस संगठन के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने राज्यों की इकाई और जिला अध्यक्षों को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा कि बड़े जिलों में 55 और छोटे जिलों में 35 सदस्य बनाए जाएंगे। एआईसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है।तीन जिलों में गाइडलाइन से ज्यादा पदाधिकारीकेसी वेणुगोपाल ने 15 दिन के भीतर जिलों की कार्यकारिणी बनाने का भी निर्देश दिया हैं। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में अलग-अलग गुटों को साधने के लिए जम्बो कार्यकारिणी की परंपरा रही है। 30 जनवरी को मध्यप्रदेश कांग्रेस ने तीन जिलों की कार्यकारिणी जारी की है। तीनों जिलों में नई गाइडलाइन से ज्यादा पदाधिकारी बना दिए गए।भोपाल में भी लंबी सूची तैयारछिंदवाड़ा जिला कार्यकारिणी में 240 सदस्य बना दिए गए है। सागर जिले में 150 से ज्यादा पदाधिकारी बना दिए गए। छोटे जिले मऊगंज में 40 पदाधिकारी बनाए गए। वहीं भोपाल शहर की 106 और ग्रामीण की 85 सदस्यों की तैयार सूची है। ऐसे में कांग्रेस संगठन के राष्ट्रीय स्तर से आए नए फरमान से अब असमंजस्य की स्थिति है।

मप्र के अन्नदाताओं के लिए जरूरी खबर:सूबे में 7 फरवरी से शुरू होगा एमएसपी पर गेहूं उपार्जन का रजिस्ट्रेशन, 28 मार्च तक रहेगा मौका
भोपाल। मध्यप्रदेश के गेहूं उत्पादक किसानों से जुड़ी जरूरी खबर है। दरअसल सूबे में एमएसपी पर गेहूं उपार्जन का पंजीयन 7 फरवरी से शुरू होगा। जो 27 मार्च तक जारी रहेगा। किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाने के लिए प्रदेशभर में कुल 3186 पंजीयन केन्द्र बनाये गए हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीयन करा लें।पंजीयन की निरूशुल्क व्यवस्थापंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है।पंजीयन की सशुल्क व्यवस्थापंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। इन केन्द्रों पर पंजीयन के लिये शुल्क राशि प्राप्त करने के संबंध में कलेक्टर निर्देश जारी करेंगे। प्रति पंजीयन के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क निर्धारित नहीं किया जाएगा। किसान पंजीयन के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोटो पहचान-पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य होगा।सिकमी, बटाईदार, कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा। पूर्व वर्षों की किसी अपात्र संस्था में केन्द्र प्रभारी एवं ऑपरेटर को किसी अन्य संस्था में पंजीयन के लिए नहीं रखा जायेगा।उपार्जित फसल के भुगतान हेतु बैंक खाताकिसान द्वारा समर्थन मूल्य पर विक्रय उपज का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किसान के आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते में भुगतान करने में किसी कारण से समस्या उत्पन्न होने पर किसान द्वारा पंजीयन में उपलब्ध कराये गए बैंक खाते में भुगतान किया जा सकेगा। किसान पंजीयन के समय किसान को बैंक का नाम खाता नंबर और IFSC कोड की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। अक्रियाशील बैंक खाते, संयुक्त बैंक खाते एवं फिनो, एयरटेल, पेटीएम, बैंक खाते पंजीयन में मान्य नहीं होंगे। पंजीयन व्यवस्था में बेहतर सेवा प्राप्त करने के लिए यह जरूरी होगा कि किसान अपने आधार नंबर से बैंक खाता और मोबाईल नंबर को लिंक कराकर उसे अपडेट रखें।

दूरगामी प्रभाव डालेगा केन्द्रीय बजट:मोहन ने गिनाई मोदी के बजट के खूबियां, खंडेलवाल भी रहे मौजूद
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केंद्र सरकार के बजट को सभी वर्गों के कल्याण का बजट बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र का बजट और मध्य प्रदेश का बजट एक आत्मा से तालमेल वाले जैसा है। वहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इसे विकास का बजट करार दिया। राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन हॉल में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केंद्र सरकार के बजट की खूबियां गिनाई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह बजट दूरगामी प्रभाव डालने वाला है। जहां तक मध्य प्रदेश की बात की जाए, तो यह बजट राज्य के बजट से एक आत्मा से तालमेल करके चल रहा है। केंद्र सरकार के बजट में मेट्रोपॉलिटन सिटी के लिए किए गए प्रावधानों का मध्य प्रदेश को लाभ मिलेगा क्योंकि राज्य में इस दिशा में काम हो रहा है। दरअसल, राज्य में मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाने की कवायद चल रही है और इसी बीच केंद्र सरकार के बजट में मेट्रोपॉलिटन सिटी के लिए खास प्रावधान किए गए हैं।वैश्विक स्तर पर आर्थिक क्षेत्र में हुए बदलाव का जिक्र करते हुए सीएम मोहन यादव ने कहा कि बजट से पहले और बजट के बाद वैश्विक स्तर पर जिस तरह की गतिविधियां सामने आ रही हैं, उससे बजट के परिणाम का आकलन किया जा सकता है। भारत की आर्थिक मजबूती और पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान को कर्ज लेने के लिए दुनिया के देशों के सामने कटोरा लेकर घूमना पड़ रहा है, यह बात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने खुद कही है। उसे अमेरिका से कर्ज लेना होता है इसलिए वह अमेरिका की हर बात को मानने के लिए मजबूर है। लेकिन भारत के साथ ऐसी स्थिति नहीं है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट में किसान, युवा, महिला और गरीब पर खास फोकस किया गया है। इसके साथ ही इन वर्गों की स्थिति में कैसे बदलाव आए, इसका भी ध्यान रखा गया है। केंद्रीय बजट में कपड़ा उद्योग के रिफॉर्म पर जोर दिया गया है, जिसका लाभ मध्य प्रदेश को मिलेगा और एक तरफ उत्पादन होगा तो दूसरी तरफ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।सीएम मोहन यादव ने आगे कहा कि राज्य की बेरोजगारी की दर में सुधार आ रहा है और अब यह सिर्फ डेढ़ प्रतिशत है। इस मौके पर राज्य के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, राज्य के भाजपा प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह के अलावा अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

मानहानि मामले में शिवराज के लिए राहत भरी खबर:कांग्रेस नेता ने वापस लिया केस, सुप्रीम कोर्ट ने बंद की सुनवाई
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बड़ी राहत मिली है। कांग्रेस नेता, राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तनखा ने शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ दायर मानहानि के मामलों को वापस लेने का फैसला किया है। तनखा ने सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने इसे रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले का निस्तारण कर दिया और आगे की सुनवाई बंद कर दी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान विवेक तनखा की ओर से अदालत को बताया गया कि इस पूरे मुद्दे पर शिवराज सिंह चौहान के साथ आपसी समझौता हो गया है। समझौते के तहत विवेक तनखा शिवराज सिंह चैहान के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि के मामले और सिविल सूट दोनों को वापस ले रहे हैं। कोर्ट ने इस सहमति को औपचारिक रूप से रिकॉर्ड में दर्ज किया।गौरतलब है कि यह सुनवाई केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की याचिका पर हो रही थी। शिवराज चौहान ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए अपने खिलाफ चल रहे मानहानि के मुकदमे को रद्द करने की मांग की थी। इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी यह मांग खारिज कर दी थी, जिसके बाद वे शीर्ष अदालत पहुंचे थे।कांग्रेस सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विवेक तनखा ने शिवराज सिंह चैहान सहित तीन भाजपा नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। इन नेताओं में भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और भूपेंद्र सिंह भी शामिल थे।विवेक तनखा का आरोप था कि इन नेताओं ने मीडिया में उनके खिलाफ बयान दिए, जिससे उनकी सामाजिक और पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। इसी आधार पर उन्होंने आपराधिक मानहानि का मामला और सिविल सूट दायर किया था।इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शिवराज सिंह चौहान समेत तीनों भाजपा नेताओं को निचली अदालत में व्यक्तिगत पेशी से राहत दी थी। हालांकि, इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी इस मांग को ठुकरा दिया था, जिसके चलते मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। हालांकि, अब विवेक तनखा की ओर से सभी मानहानि के मामले वापस लेने की घोषणा के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूरे प्रकरण का निस्तारण कर दिया है।

समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश:अन्नदताओं के लिए मप्र सरकार ने तैयार किया मेगा प्लान, अब जिलों आयोजित होंगी कैबिनेट बैठक
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की आय में हर तरीके से वृद्धि करना ही हमारा मूल लक्ष्य है और यह उनकी फसल का उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने से ही संभव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के एक करोड़ से अधिक किसानों के हित में समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश के समावेशी मॉडल-थीम पर हम वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष (कृषि वर्ष) के रूप में मना रहे हैं। इस दौरान कृषि उत्पादों का मजबूत विपणन तंत्र स्थापित किया जाएगा, साथ ही खाद्य प्रसंस्करण को भी बढ़ावा दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि किसानों को उच्च उत्पादकता वाली फसल किस्मों-बीजों का वितरण, डिजिटलीकृत एवं नवीन कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा, प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहन, कृषि स्टार्टअप एवं एफपीओ जैसी कृषि आधारित रोजगार श्रृंखला को बढ़ावा, कृषि से संबद्ध सभी क्षेत्रों को एकीकृत करते हुए जिला-आधारित क्लस्टर्स का विकास तथा खेती-किसानी में फसल चक्र में बदलाव (विविधीकरण) को प्रोत्साहन देना कृषि वर्ष के प्रमुख लक्ष्य तय किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गत दिवस किसान कल्याण वर्ष-2026 के आयोजन की रूपरेखा के संबंध में हुई बैठक में यह जानकारी दी।कृषि केबिनेट की जाएगीसीएम ने कहा कि किसानों का कल्याण हमारे लिए एक मिशन है। इनके समग्रहित में इसके लिए कृषि वर्ष के दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कृषि केबिनेट भी की जाएगी। कृषि केबिनेट की शुरूआत निमाड़ अंचल से की जाएगी। किसान हित के सभी जरूरी निर्णय फील्ड में होने वाली कृषि केबिनेट में ही लिए जाएंगे।मुख्यमंत्री ने बताया कि खेती-किसानी से पर्यावरण में भी व्यापक सुधार आता है। उन्होंने कहा कि निमाड़ क्षेत्र में खेती-किसानी से बढ़ते लाभ और दिनों-दिन सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से दूसरे किसान भी खेती की तरफ बढ़े हैं। इससे निमाड़ अंचल में चारों तरफ हरियाली ही हरियाली है और इस हरियाली का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि पूरे निमाड़ अंचल का तापमान पहले से चार डिग्री कम हो गया है। यह उपलब्धि हमें किसानों की बेहतरी के लिए और अधिक प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करती है।कृषि में तकनीक के उपयोग पर रहेगा जोरसीएम यादव ने कहा कि कृषि वर्ष के दौरान प्रदेश के किसानों के लिए कृषि तकनीक के उपयोग पर विशेष फोकस किया जाएगा। यह तय किया जाएगा कि किसानों को उनके सभी प्रकार के हितलाभ एग्री स्टैक के जरिए ही दिए जाएं। इसके लिए किसानों के बैंक खातों को समग्र आई.डी. के साथ जोड़ दिया जाएगा। साथ ही मोबाईल एवं क्यू.आर कोड आधारित तकनीक के उपयोग से कृषि आदानों की उपलब्धता (ट्रेसबिलिटी) भी सुनिश्चित की जाएगी।उन्नत तकनीक सीखने ब्राजील जाएंगे मप्र के पशुपालककृषि वर्ष के दौरान सरकार का एक लक्ष्य दुग्ध उत्पादन में वृद्धि कर इसे वर्तमान से दुगना करना भी है। इसके लिए प्रदेश के पशुपालकों को उन्नत पशुपालन की नई-नई तकनीकें सीखने के लिए ब्राजील भेजा जाएगा। राज्य के पशुपालक उन्नत तकनीक से पशुपालन करेंगे तथा नई विधियों और पद्धतियों से उन्नत नस्लों के पशुओं से दुग्ध उत्पादन के लिए तैयार करेंगे। नई तकनीक से पशुपालकों के दुग्ध उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि होगी।पैक्स समितियों के जरिए किसानों को दिलाएंगे अधिकतम सुविधाएंमुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि वर्ष के दौरान किसानों को अधिकतम सेवाएं और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। वर्ष के दौरान राजस्व विभाग द्वारा ऐसे किसान, जो किसी वजह से अबतक केसीसी धारक नहीं हैं, उनकी सूची निकटतम प्राथमिक सहकारी साख समितियों (पैक्स) को उपलब्ध कराई जाएगी। पैक्स समितियां किसानों से सम्पर्क कर पात्र किसानों से तय प्रारूप में आवेदन लेंगी और बैंक स्तर पर केसीसी मंजूर कराने की कार्यवाही भी करेंगी। मंजूरी वाले प्रकरणों को एकत्रित कर कैम्प लगाकर किसानों को केसीसी वितरित किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में प्रदेश में 4500 से अधिक पैक्स समितियां कार्यरत हैं और करीब 23 लाख से अधिक किसान इन पैक्स समितियों से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।भोपाल में होगा आम महोत्सवकिसान कल्याण वर्ष आयोजन की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के संबंध में हुई इस बैठक में बताया गया कि आगामी मई माह में भोपाल में आम महोत्सव आयोजित किया जाएगा। महोत्सव में आम उत्पादकों, व्यापारियों, निर्यातकों और विशेषज्ञों की सहभागिता होगी। महोत्सव के दौरान आम की खेती से संबंधित नई तकनीक पर मार्गदर्शन और प्रेजेन्टेशन दिया जाएगा। साथ ही आम की सभी किस्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।राज्यस्तरीय केन्द्रीय गुणवत्ता प्रयोगशाला का होगा लोकार्पणमध्यप्रदेश सहकारी दुग्ध महासंघ (एमपीसीडीएफ) द्वारा भोपाल में तैयार की जा रही राज्यस्तरीय केन्द्रीय गुणवत्ता प्रयोगशाला का लोकार्पण भी कृषि वर्ष के दौरान किया जाएगा। लगभग 12.65 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित हो रही इस बड़ी प्रयोगशाला की सुविधा मिल जाने से पेस्टीसाइड, रसायन, भारी खनिज, वेजीटेबल आइल, शर्करा तथा दुग्ध उत्पादों और दूध में मिलावट की गहन जांच अब स्थानीय स्तर पर ही संभव होगी। इससे दीर्घ अवधि में मिलावटी दूध एवं दूध से बने उत्पादों पर अंकुश लगेगा। गुणवत्तापूर्ण उत्पादन मिलने से उपभोक्ताओं में सांची ब्रांड से बने उत्पादों की साख भी बढ़ेगी।सितम्बर में बालाघाट में होगा सिंघाड़ा एवं मखाना महोत्सवकिसान कल्याण वर्ष में सितम्बर के संभवतरू पहले सप्ताह में बालाघाट जिले में श्सिंघाड़ा एवं मखाना महोत्सवश् आयोजित किया जाएगा। महोत्सव में सिंघाड़ा उत्पादकों, व्यापारियों, निर्यातकों एवं फसल विशेषज्ञों द्वारा सहभागिता की जाएगी। सिंघाड़ा और मखाना कैश क्राप की तरह हैं। इनका सेवन स्वाथ्यवर्धक होता है। यह महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। क्षेत्रीय किसानों को सिंघाड़े और मखाने की खेती से जोड़ने के लिए महोत्सव में किसानों के बीच इनकी खेती से मिलने वाले लाभों से जुड़ी जानकारियों का वृहद स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा। महोत्सव में इन दोनों फसलों की खेती से संबंधित नई तकनीकों के बारे में किसानों को बताया जाएगा। साथ ही सिंघाड़े और मखाने की सभी प्रकार की किस्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।नवम्बर में नरसिंहपुर में होगा गन्ना महोत्सवकृषि वर्ष में नवम्बर के संभवतरू पहले सप्ताह में ही नरसिंहपुर जिले में राज्यस्तरीय किसान सम्मेलन सह गन्ना महोत्सव आयोजित किया जाएगा। महोत्सव में शक्कर कारखाना मालिक, गन्ना उत्पादक किसान सहित निर्यातक एवं विशेषज्ञ भी विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। इससे गन्ने की आधुनिक तरीके से खेती के बारे में बताया जाएगा। साथ ही गन्ने की फसल के लिए ड्रिप सिंचाई की सुविधा मांगकर्ता किसानों को यह सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि कृषि वर्ष के दौरान गन्ने की फसल की जोतध्रकबा पांच हजार हेक्टेयर तक पहुंचाया जाए।


