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चावल उत्पादन में भारत का बजा डंका,:शिवराज का दावा- चीन को पीछे छोड़ दुनिया में बना नंबर-1, श्रेय दिया मोदी नेतृत्व को
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 साल के दौरान दौरान भारत के कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव और प्रगति देखने को मिली है। यही नहीं उन्होंने यह भी दावा किया खाद्यान्न उत्पादन, चावल में भारत दुनिया में नंबर-1 भी बना है। उन्होंने दलहन और तिलहन के क्षेत्र में भी सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया। शिवराज ने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब भारत को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशों से गेहूं मंगाना पड़ता था। उस दौर में अमेरिका से पीएल-480 योजना के तहत लाल गेहूं आयात कर देश की जनता को खिलाया जाता था। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और भारत खाद्यान्न उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर ही नहीं बल्कि दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।किसानों की मेहतन-सरकार की नीतियों के कारण देश भरे अन्न भंडारशिवराज ने कहा कि आज किसानों की मेहनत और सरकार की नीतियों के कारण देश के अन्न भंडार भर चुके हैं। खासकर चावल के उत्पादन में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने बताया कि लगभग 150 मिलियन टन चावल उत्पादन के साथ भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में पहला स्थान हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि अगर कुल खाद्यान्न उत्पादन की बात करें तो साल 2014 तक देश में लगभग 252 मिलियन टन उत्पादन होता था, लेकिन आज यह बढ़कर करीब 357 मिलियन टन तक पहुंच गया है। यह वृद्धि किसानों की मेहनत, बेहतर नीतियों और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल का परिणाम है।बागवानी क्षेत्र में हुई प्रगति का भी शिवराज ने किया जिक्रकेंद्रीय मंत्री ने बागवानी क्षेत्र में हुई प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फलों और सब्जियों के उत्पादन, क्षेत्रफल और उत्पादकताकृतीनों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पहले जहां बागवानी फसलों का उत्पादन लगभग 277 मिलियन टन था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 369 मिलियन टन हो गया है। इससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।दलहन-तिलहन क्षेत्र में सरकार के प्रयासों का किया उल्लेखउन्होंने दलहन और तिलहन के क्षेत्र में भी सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता दोनों है। हालांकि अभी भी कुछ मात्रा में आयात करना पड़ता है, लेकिन सरकार लगातार उत्पादन बढ़ाने के लिए काम कर रही है। इसी दिशा में तुअर, मसूर और उड़द जैसी दालों की किसानों के जितनी चाहें उतनी खरीद करने का फैसला किया गया है।किसानों को तकनीकी सहायता देने डिजिटल प्लेटफार्म विकसित कर रही सरकारशिवराज ने बताया कि किसानों को सही जानकारी और तकनीकी सहायता देने के लिए सरकार एक बड़ा डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि किसानों को खेती से जुड़ी सारी जरूरी जानकारी एक ही जगह पर उपलब्ध हो सके। इस प्लेटफॉर्म के पहले चरण को भी लॉन्च किया जा चुका है, जिसमें किसान अपनी भाषा में फोन कॉल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

टेरर फंडिंग केस में कश्मीरी अलगाववादी नेता को राहत:सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ शब्बीर शाह को दी जमानत, 6 साल से थे जेल में
नई दिल्ली। कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को टेरर फंडिंग मामले में 6 साल बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। बता दें कि शब्बीर शाह 2019 से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की गिरफ्त में थे, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी है। इस दौरान शीर्ष अदालत ने लंबे समय से चल रही न्यायिक हिरासत और ट्रायल में सामने आई कुछ अनियमितताओं पर भी गंभीर टिप्पणी की। गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले शब्बीर शाह की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था याचिका में शब्बीर शाह की ओर से कहा गया कि उनकी उम्र अब 74 साल हो चुकी है, वे इस मामले में छह साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं और ट्रायल में कुल 400 गवाह हैं, जिनमें से अभी सिर्फ 15 की ही गवाही पूरी हुई है।सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एनआईए से खासकर 1990 के दशक की पुरानी स्पीच पर आधारित सबूतों को लेकर कई बार सवाल किए थे। कोर्ट ने पूछा था कि इतने पुराने बयानों पर अब कैसे भरोसा किया जा सकता है और छह साल से ज्यादा हिरासत का क्या ठोस आधार है। फरवरी 2026 में कोर्ट ने एनआईए को पुराने सबूतों के बजाय नए और समकालीन प्रमाण पेश करने को कहा था। कोर्ट ने मामले की सुनवाई कई बार टाली थी और अंत में शब्बीर शाह की उम्र, लंबी हिरासत और ट्रायल की धीमी गति को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर कर दी। जमानत पर कुछ शर्तें लगाई गई हैं, जैसे वे जेल से बाहर रहते हुए किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे और ट्रायल में सहयोग करेंगे। शाह पर आरोप लगाया था कि वे जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश में शामिल थे और टेरर फंडिंग में उनका हाथ था। एनआईए ने मामले में कई चार्जशीट दाखिल की थीं, जिसमें शाह को बाद में शामिल किया गया था।

कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं, चाहे पीएम ही क्यों न हों:लोकसभा में बोले स्पीकर, राहुल के आरोपों का भी दिया जवाब
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव चर्चा के बाद खारिज हो गया है। इसके बाद वे फिर काम लौट आए हैं। बिरला ने गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही फिसंभालते हुए बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में नेता प्रतिपक्ष या किसी भी सदस्य को बोलने से कभी नहीं रोका गया और संसद के नियम सभी के लिए समान रूप से लागू होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं है, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों।स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव पर पिछले दो दिनों में 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई, ताकि सभी सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि यह सदन देश के 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करता है और हर सांसद यहां अपनी जनता की समस्याओं और अपेक्षाओं को लेकर आता है। उन्होंने हमेशा कोशिश की कि सभी सांसद नियमों के तहत अपनी बात रखें और जो सदस्य कम बोलते हैं उन्हें भी बोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उनके अनुसार, संवाद और चर्चा से ही लोकतंत्र मजबूत होता है।बिरला ने सदन को बताया विचारों का जीवंत मंचबिरला ने सदन को विचारों का जीवंत मंच बताते हुए कहा कि पिछले दो दिनों में सभी सदस्यों के विचारों को गंभीरता से सुना गया। उन्होंने कहा कि वह हर सदस्य के आभारी हैं, चाहे वे सरकार की आलोचना ही क्यों न करते हों। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है कि यहां हर आवाज को महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि स्पीकर की कुर्सी किसी व्यक्ति की नहीं बल्कि लोकतंत्र की महान भावना का प्रतीक है।विपक्ष के आरोपों का भी दिया जवाबविपक्ष की शिकायतों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष या किसी भी सदस्य को नियमों के तहत बोलने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ लोगों का मानना है कि सदन के नेता नियमों से ऊपर होते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने बताया कि नियम 372 के तहत प्रधानमंत्री को भी सदन में बोलने से पहले अध्यक्ष की अनुमति लेनी होती है।माइक बंद करने के आरोपों पर भी बिरला ने सफाई दी और कहा कि चेयर के पास माइक बंद करने का कोई बटन नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में सभी महिला सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिला है।सदन की व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारीसदन में निलंबन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हालांकि उनके सभी दलों के सांसदों से व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं, लेकिन सदन की व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है। जब सदस्य नियमों का पालन नहीं करते तो कभी-कभी निलंबन जैसे कठोर फैसले लेने पड़ते हैं। उन्होंने सभी सांसदों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील भी की।

फारूक अब्दुल्ला: J&K के पूर्व सीएम पर जानलेवा हमले की गूंज संसद तक, आमने-सामने हुए खड़गे-नड्डा
नई दिल्ली। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर हुए जानलेवा हमले का मुद्दा संसद में उठा हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाए कि फारूक अब्दुल्ला की सुरक्षा खतरे हैं और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जाना इसका प्रमुख कारण है। हालांकि, कांग्रेस के आरोपों और फारूक अब्दुल्ला पर हमले को लेकर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सदन में जवाब दिया।मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में कहा, फारूक अब्दुल्ला पर हमला हुआ है। उनकी सुरक्षा खतरे में है। जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा था। अब वहां की पुलिस और सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री के पास होने से आज जम्मू-कश्मीर में ऐसी हालत है। जम्मू-कश्मीर से कानून व्यवस्था खत्म हो रही है और प्रमुख नेताओं को मारने का मंसूबा है। फारूक अब्दुल्ला को भी इस तरह मार दिया गया होता। उनके सुरक्षाकर्मियों ने उनकी जान बचाई।केन्द्र सरकार के हाथ में कश्मीर के लोग सुरक्षित नहीं: खड़गेकांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा, मैं जानना चाहता हूं कि क्या सरकार का फारूक अब्दुल्ला को मारने का इरादा है। अगर उनको सुरक्षित रखना चाहते थे, तो फुल सिक्योरिटी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने के बाद ही लोग सुरक्षित रह सकते हैं। केंद्र सरकार के हाथ में कश्मीर के लोग सुरक्षित नहीं है। क्योंकि सरकार का एक मंसूबा है कि जो लोग धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और देश को एक करने की कोशिश कर रहे हैं, उनको खत्म करना है।यह बोले केंद्रीय मंत्री केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने फारूक अब्दुल्ला पर हमले को लेकर कहा, बुधवार रात फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमला हुआ। यह बहुत ही चिंता का विषय है और गंभीर मामला है। भारत सरकार इस घटना को लेकर बहुत गंभीर है। मैं सरकार की ओर से इस बात का विश्वास दिलाता हूं कि इस घटना की पूरी जांच की जाएगी। गिरफ्तार आरोपी के मंसूबों के बारे में गहराई से पता किया जाएगा। इस तरह की घटना दोबारा न हो और फारूक अब्दुल्ला के जीवन की रक्षा से जुड़ा हर कदम जरूर उठाया जाएगा।नड्डाने की खड़गे के आरोपों की निंदाइसी बीच, जेपी नड्डा ने मल्लिकार्जुन खड़गे के आरोपों को लेकर कांग्रेस की निंदा करते हुए कहा, हर घटना को राजनीतिक चश्मे से देखना और उसे राजनीतिक रूप देना उचित नहीं है। पूर्व राज्य का दर्जा नहीं मिला, इस कारण यह घटना हुई, इस निष्कर्ष पर पहुंचना और सरकार पर गंभीर आरोप लगाना निंदनीय है।जेपी नड्डा ने अपने जवाब में आगे कहा, विपक्ष के नेता की ओर से यह कहना कि सरकार का मंसूबा उनकी (फारूक) की जान लेना है। इस पर मेरा कहना है कि यह कांग्रेस की सोच का नतीजा है। हमेशा से कांग्रेस के मंसूबे इसी तरह के रहे हैं।

मिडिल ईस्ट संकट में भारत की बड़ी डिप्लोमैटिक सफलता:स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता, जयशंकर की मेहनत लाई रंग
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता सामने आई है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच हुई अहम टेलीफोनिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। इस फैसले को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाला बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। हाल ही में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ा है। सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में करीब 90 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।भारत की सक्रिय कूटनीति आई कामऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भारत ने सक्रिय कूटनीति का परिचय देते हुए ईरान के साथ संवाद स्थापित किया। विदेश मंत्री जयशंकर और अराघची के बीच हुई बातचीत का मुख्य उद्देश्य इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखना और कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाना था। बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय टैंकरों को इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दे दी, जिससे भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति की चिंता काफी हद तक कम हो गई है।जयंशकर ने कई अन्य वैश्विक शक्तियों से भी की बातसूत्रों के मुताबिक, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मुद्दे पर केवल ईरान से ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख वैश्विक शक्तियों से भी संपर्क साधा। उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो से भी बातचीत कर समुद्री व्यापारिक मार्गों को खुला रखने और वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया।इन देशों के जहाजों पर सख्त प्रतिबंध लागूगौरतलब है कि ईरान ने यह विशेष रियायत ऐसे समय में दी है जब अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर इस मार्ग से गुजरने को लेकर सख्त प्रतिबंध लागू हैं। हालांकि भारत के साथ अपने विशेष संबंधों को ध्यान में रखते हुए ईरान ने भारतीय जहाजों को छूट दी है। इसे भारत की मजबूत और संतुलित विदेश नीति का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

पूर्ववर्ती सरकारों ने दशकों तक की मछुआरा समुदाय की उपेक्षा:केरल में बोले पीएम मोदी, हमारे लिए अहम है मछुआरों की सुरक्षा
कोच्चि। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के कोच्चि में अखिल केरल धीवर सभा के स्वर्ण जयंती सम्मेलन में भाग लिया। सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 50 वर्षों में धीवर सभा ने मछुआरा समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य किया है।प्रधानमंत्री ने कहा, मलयाली लोग लंबे समय से केरल का नाम बदलकर केरलम रखने की मांग कर रहे थे। केंद्र में एनडीए सरकार द्वारा इसे मंजूरी मिलने के बाद मैं आप सभी के चेहरों पर खुशी देख सकता हूं। इस खूबसूरत राज्य को मलयाली संस्कृति के अनुसार उसका उचित नाम मिल गया है। मैं केरलम के लोगों को बधाई देता हूं।पीएम मोदी ने कहा, हमें मत्स्य पालन में नई संभावनाओं को साकार करने और मछुआरों के जीवन स्तर में सुधार करने की आवश्यकता है। समुद्र से संबंधित अर्थव्यवस्था केवल पारंपरिक मछली पकड़ने तक ही सीमित नहीं है। मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में भी नए अवसर उभर कर सामने आए हैं। केरल में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान पूरे देश ने मछुआरा समुदाय के प्रयासों को देखा। आपने फंसे हुए लोगों को बचाया और जरूरतमंदों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाई। इसीलिए पूरा देश मछुआरा समुदाय के साहस, सेवा और समर्पण को सम्मानपूर्वक याद करता है।प्रधानमंत्री ने कहा, हमारा संकल्प है कि केरलम के प्रत्येक परिवार तक समृद्धि पहुंचे और केरलम की अर्थव्यवस्था नई ऊंचाइयों को प्राप्त करे। पिछली सरकारों ने दशकों तक मछुआरा समुदाय की उपेक्षा की। लेकिन अब एनडीए सरकार उनकी प्रगति और क्षमताओं को असीमित स्तर तक बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार ने मछुआरा समुदाय की क्षमता और नीली अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका को पहचाना है। भाजपा-एनडीए सरकार ने ही मत्स्य पालन के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन किया है। उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत केरल के लिए लगभग 1400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।पीएम ने कहा, समुद्र में जाने वाले मछुआरों की सुरक्षा भी हमारे लिए महत्वपूर्ण है। पहले हमारे मछुआरे भाई-बहन खुले समुद्र में जाते थे, तो उनके घरवाले उनके वापस आने तक चिंता और डर में डूबे रहते थे, क्योंकि समुद्र में मौसम को लेकर हमेशा आशंकाएं बनी रहती थीं। लेकिन अब ऐसा नहीं है। हमने सैटेलाइट के जरिए समुद्र में जाने वाले मछुआरे भाई-बहनों की सुरक्षा को और मजबूत किया है। तकनीक भी मछुआरा समुदाय की एक ताकत है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है। इसके माध्यम से मछुआरे, व्यापारी और निर्यातक एक ही प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कर सकते हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करना भी उनके लिए आसान हो गया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, हमें मत्स्य पालन में नई संभावनाओं को साकार करने और मछुआरों के जीवन स्तर में सुधार करने की आवश्यकता है। मछुआरों के कल्याण के लिए अखिल केरल धीवर सभा का कार्य सराहनीय है और यह तटीय समुदायों को सशक्त बनाने के एनडीए के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

बामुलाहिजा....:कांग्रेस की एक कॉलम की हार, राज्यसभा के लिए किस दिग्गज का नया दांव, पुलिस ऑफिसर्स मेस की दास्तान....
TV27 पर हर सप्ताह पढ़ें संदीप भम्मरकर का विशेष काॅलमविजयपुर में कांग्रेस के जीते हुए विधायक को नामांकन फॉर्म में आपराधिक जानकारी छिपाने की वजह से अपनी विधायकी गंवानी पड़ी। अदालत का फैसला आया तो कांग्रेस इसे कानूनी लड़ाई बताने लगी, लेकिन असल सवाल कहीं और है। चुनाव के वक्त नामांकन भरवाने के लिए वकीलों और विशेषज्ञों की पूरी टीम तैनात रहती है, ताकि कागज की एक-एक पंक्ति जांची जा सके। फिर भी इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? बीजेपी की सतर्कता अपनी जगह है, लेकिन कांग्रेस की लापरवाही भी कम जिम्मेदार नहीं। अब दलीलों का दौर चल रहा है, पर असली पड़ताल उस टीम की होनी चाहिए जिसने यह फॉर्म भरवाया। क्योंकि राजनीति में कभी-कभी हार चुनाव से नहीं, एक कॉलम से होती है।दिल्ली में चला ‘मास्टर स्ट्रोक’मध्यप्रदेश कांग्रेस के एक दिग्गज नेता ने राज्यसभा को लेकर ऐसा दांव चला है कि दिल्ली दरबार में भी भौंचक माहौल है। सूत्र बताते हैं कि इस फॉर्मूले पर मंथन शुरू हो चुका है और अगर बात बन गई तो एमपी से इन्हीं दिग्गज को राज्य सभा की की सीट मिल सकती है। राज की बात यह है कि दिग्गज लीडर ने एक जोरदार फॉर्मूला दिया है, इससे कांग्रेस को दूसरे राज्यों के रास्ते भी राज्यसभा जाने का मौका मिल सकता है। दिलचस्प यह भी कि ये वही नेता हैं जो पिछले कुछ दिनों से अचानक मुख्यधारा से गायब नजर आ रहे थे। राष्ट्रीय राजनीति में जिनका भौकाल रहा है, उनका नाम अचानक सामने आए तो हैरान मत होइएगा३ क्योंकि दिल्ली की राजनीति में कई बार चाल नहीं, पूरा शतरंज बदल दिया जाता है।कांग्रेस में रंगों की राजनीतिमध्यप्रदेश कांग्रेस में इस बार होली सिर्फ रंगों की नहीं, संदेशों की भी रही। भोपाल में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कार्यकर्ताओं के साथ होली मिलन का आयोजन किया, जो लंबे समय से केवल चर्चा में ही था। दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासियों के साथ रंगपंचमी मनाकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर लीं। दोनों आयोजनों में रंग भी उड़े और सियासी जलसा भी खूब सजा। अब पार्टी के भीतर इसे ताकत के प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। रंग तो दोनों तरफ चढ़े हैं, लेकिन चर्चा इस बात की है कि भविष्य में रंग किसका जमेगा?३ क्योंकि राजनीति की होली में रंग में सियासी मायने छिपे होते हैं।जब वर्दी ने वर्दी को सलाम कियामध्यप्रदेश पुलिस में एक ऐसा पल आया, जिसने वर्दी की परंपरा को फिर जिंदा कर दिया। देश के पहले आईपीएस बैच ( वर्ष 1948) के अफसर और मध्यप्रदेश के पूर्व डीजीपी रहे एचएम जोशी की सौवीं सालगिरह पर मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाना ने पुलिस ऑफिसर्स मेस में सादा लेकिन गरिमामय आयोजन रखा। उम्र की सदी पार कर चुके जोशी का हाथ जब आज की पुलिस ने थामा, तो माहौल भावुक भी हुआ और गर्व से भरा भी। कई अफसर इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने। खास बात यह रही कि इस मौके पर सियासत का शोर नहीं था, सिर्फ वर्दी का सम्मान था। क्योंकि परंपरा तब जिंदा रहती है, जब नई वर्दी पुरानी विरासत को सलाम करती है।फिर रामेश्वर के हुए विश्वासबीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा के सालाना कवि सम्मेलन में कभी कुमार विश्वास की मौजूदगी लगभग तय मानी जाती थी। लेकिन जब कुमार विश्वास आम आदमी पार्टी की नींव रखने वालों में शरीक हुए, तो राष्ट्रवादी खेमे ने थोड़ी दूरी बना ली। इसके बाद तो रामेश्वर के आयोजन से भी उनके आने का सिलसिला ही थम गया। अब वक्त ने फिर करवट ली है। रामेश्वर शर्मा के मंच पर कुमार विश्वास की आमद फिर है। उधर कुमार विश्वास भी इन दिनों ऐसे आयोजनों में ज्यादा नजर आने लगे हैं, जिन्हें भगवाधारी खेमे में पसंद किया जाता है। अब देखना दिलचस्प होगा३ यह सिर्फ कविता की वापसी है या सियासत की नई पंक्ति लिखी जा रही है।कांटों का ताज बनी कमिश्नर की कुर्सीभोपाल नगर निगम कमिश्नर की कुर्सी किसी इम्तिहान से कम नहीं। बीते तीन-चार कमिश्नरों का हाल देखें तो तस्वीर साफ नजर आती है। आते समय जोश ऐसा कि लगता है शहर की सूरत बदल देंगे और काम का ऐसा प्रोफाइल बनाएंगे कि मंत्रालय की पांचवीं मंजिल तक चर्चा पहुंचे। लेकिन कुछ ही महीनों में जनप्रतिनिधियों की खींचतान, फंड की कमी और छोटे-छोटे कामों के दबाव की आंधी उस जोश की लौ को धीमा कर देती है। मौजूदा अफसर के साथ भी कुछ वैसी ही कहानी बनती दिख रही है। शुरुआत तेज थी, मगर अब उत्साह ठंडा पड़ता नजर आ रहा है। खबर सही जगह तक पहुंचा दी गई है, अब देखना है३ कुर्सी टिकती है या कमिश्नर।

भाजपा की सोच ने देश और लोकतंत्र को किया कलंकित:मुकेश मल्होत्रा की विधायकी शून्य होने पर भड़के जीतू, ट्रेड डील को लेकर भी किया वार
भोपाल। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने भाजपा को अपने निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि विश्व में संघर्ष के चलते देश में महंगाई का असर आने लगा। ट्रेड डील दबाव में की। किसानों की हालत खराब हो रही है। जो सोयाबीन, कपास और मक्का 40 प्रतिशत गिर गया। एलपीजी के 60 रुपए बढ़ गए। पेट्रोल-डीजल के दाम 200 रुपए होने की संभावना है।जीतू पटवारी ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कि भाजपा का कार्यकर्ता स्कॉर्पियो व फॉर्चूनर में घूम रहा है। उसका बड़ा घर हुआ कि नहीं हुआ और महंगाई का असर उसके घर पर पड़ा है या नहीं है। प्रदेशवासियों आपके पड़ोस में रहने वाले भाजपा के नेता को, चाहे मंडल का अध्यक्ष हो, चाहे पार्षद हो, चाहे विधायक हो। उसकी आज से 10 साल पहले की स्थिति क्या थी और आज उसकी स्थिति क्या है।न्याय व्यवस्था पर हमें भरोसाजीतू पटवारी ने कहा कि ये वही लोग हैं जो छुआछूत की बात करते थे। इनके अतीत और पुराने इतिहास को देखिए। ये वही लोग हैं जिन्होंने बाबासाहेब अंबेडकर का विरोध किया था। अगर आप सोशल साइट पर जाकर देखेंगे कि इन्होंने संविधान के खिलाफ क्या कहा है, वो आपको पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा की सोच ने देश के लोकतंत्र को कलंकित किया है। जीतू पटवारी ने कहा कि न्याय व्यवस्था पर हमें पूरा भरोसा है। हम सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं और 100 प्रतिशत मुकेश मल्होत्रा ही वापस चुन कर आएंगे। कांग्रेस ही जीत कर आएगी। भाजपा की चाल, चरित्र और चेहरा प्रदेश की जनता के सामने एक बार फिर आया है। उन्होंने कहा कि क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने की चिंता नहीं है लेकिन एक आदिवासी पद पर नहीं रहना चाहिए। कोई आदिवासी विधायक नहीं रहना चाहिए, इसकी चिंता है। ये है भाजपा, प्रदेशवासियों समझो व देखो। मैं फिर से प्रदेशवासियों से आग्रह करना चाहता हूं कि हम उन लोगों में से नहीं हैं कि पीछे हटेंगे। विश्वास के साथ, दृढ़ता के साथ, हिम्मत के साथ अलोकतांत्रिक लोगों से लड़ेगे। मैं बार-बार ये बात कहता हूं कि भ्रष्टाचार आपके पास हो रहा है तो आप देख लो कि भाजपा में रहने वाले कार्यकर्ता की स्थिति क्या है।

कर दिया काम यूथ कांग्रेस वालों ने:राहुल के बयान पर BJP ने किया वार, कहा- कांग्रेस को नेहरू की बात समझने में क्यो रही दिक्कत, जानें क्या है पूरा मामला
नई दिल्ली। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और यूथ कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने एक्स पर किए पोस्ट में आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान हुए विवादित प्रदर्शन का समर्थन किया और उस पर गर्व जताया। अमित मालवीय ने राहुल गांधी का एक वीडियो क्लिप पोस्ट करते हुए एक्स पोस्ट में दावा किया कि नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कर दिया काम यूथ कांग्रेस वालों ने। मालवीय का दावा है कि यह टिप्पणी उस घटना के बाद आई जब यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान शर्ट उतारकर प्रदर्शन किया और कार्यक्रम को बाधित किया। अमित मालवीय ने कहा कि इस तरह के प्रदर्शन से पूरी दुनिया के सामने भारत की छवि को नुकसान पहुंचा।उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब दुनियाभर के शीर्ष तकनीकी विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और इनोवेटर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य पर चर्चा करने के लिए एक मंच पर जुटे थे, तब कांग्रेस पार्टी को लगा कि भारत का प्रतिनिधित्व करने का सबसे अच्छा तरीका अराजकता व अशोभनीय प्रदर्शन है। मालवीय ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया।एक्स पोस्ट में अमित मालवीय ने इस मुद्दे को देश की राजनीतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से भी जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि जिस पंडित जवाहरलाल नेहरू को कांग्रेस अपना वैचारिक आधार मानती है, उन्होंने राष्ट्रीय चरित्र और निष्ठा के सवाल पर बिल्कुल अलग सोच रखी थी।मालवीय ने 1950 के दशक की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि जब महाराजा यशवंतराव होलकर द्वितीय के निधन के बाद इंदौर की गद्दी के उत्तराधिकार का सवाल उठा, तब यह विवाद सामने आया कि क्या उनकी अमेरिकी पत्नी से जन्मे बेटे रिचर्ड होलकर को होलकर वंश की विरासत मिलनी चाहिए।उन्होंने एक्स पोस्ट में आगे लिखा कि उस समय की सरकार में राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे वरिष्ठ नेता भी इस मामले पर चर्चा में शामिल थे। इस पर विचार-विमर्श के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्पष्ट राय दी थी कि उत्तराधिकारी वही होना चाहिए जो भारतीय मां से जन्मा हो। अंततः सरकार ने महाराजा की भारतीय पत्नी से जन्मी बेटी राजकुमारी उषा देवी राजे साहिब होलकर को होलकर वंश की वैध उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता दी। बाद में नेहरू ने भी लिखा कि उनकी मान्यता इसलिए हुई क्योंकि वह जन्म से ही होलकर वंश का हिस्सा थीं।अमित मालवीय ने कहा कि यह उदाहरण दिखाता है कि राष्ट्रीय पहचान और निष्ठा जैसे मुद्दे केवल विचार नहीं हैं बल्कि वे मूल और जुड़ाव से गहराई से जुड़े होते हैं। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस से सवाल करते हुए कहा कि अगर खुद जवाहरलाल नेहरू मानते थे कि विदेशी मूल से जन्मा व्यक्ति देश की जिम्मेदारी उठाने के योग्य नहीं माना जा सकता, तो कांग्रेस को नेहरू की ही बात समझने में दिक्कत क्यों हो रही है। मालवीय के मुताबिक शायद यही वजह है कि आज वे देश की गरिमा की रक्षा करने के बजाय दुनिया के सामने भारत को शर्मिंदा करने वाले प्रदर्शनों पर गर्व कर रहे हैं।

मप्र:अधिक वेतन लेने वालों की पेंशन कटौती तय, वित्त विभाग ने पेंशन अधिकारियों को दिए दो टूक निर्देश
भोपाल। मध्यप्रदेश के शासकीय कर्मचारियों ने अगर वेतन विसंगति के कारण अधिक वेतन प्राप्त किया है, तो सेवानिवृत्ति के बाद उनकी पेंशन से उस अधिक राशि की वसूली की जाएगी। वित्त विभाग ने सभी पेंशन अधिकारियों को इसके लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत उन कर्मचारियों और अधिकारियों से राशि वसूल की जाएगी जिन्होंने अधिक वेतन लेने के बाद लिखित रूप में लौटाने का वचन (अंडरटेकिंग) दिया था।वित्त विभाग के निर्देश में कहा गया है कि राज्य शासन के शासकीय कर्मचारियों के विसंगतिपूर्ण वेतन निर्धारण से हुए अधिक भुगतान की वसूली सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार की जाएगी। इस संबंध में वित्त विभाग ने समय-समय पर पूर्व में भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने अब यह सुनिश्चित किया है कि ऐसे मामलों में कोई ढील नहीं दी जाएगी, भले ही कर्मचारी या अधिकारी पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हों।वित्त विभाग ने विशेष रूप से कहा है कि जिन कर्मचारियों और अधिकारियों ने अंडरटेकिंग दी है, उनसे सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर वसूली कर सकती है। यह आदेश 12 जून 2020 को जारी किए गए थे और अब उन्हें लागू कर रिटायर हो चुके कर्मचारियों से भी अधिक वेतन की वसूली की जाएगी।हालांकि, जिन कर्मचारियों ने वसूली के लिए कोई लिखित वचन नहीं दिया है, उनसे रिकवरी नहीं की जाएगी। यह कदम अदालत द्वारा भी सुझाया गया है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी रस्तोगी के अनुसार, इस नीति से कोर्ट में अनावश्यक मुकदमों की संख्या कम होगी और कार्यवाही सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न होगी।इस कदम से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि वित्तीय अनुशासन और सरकारी नियमों का पालन आवश्यक है। शासकीय कर्मचारियों को अधिक वेतन प्राप्त होने पर तुरंत इसकी जानकारी देना और अगर आवश्यक हो तो राशि लौटाना जरूरी है। इस दिशा में जारी किए गए निर्देशों का उद्देश्य न केवल वसूली सुनिश्चित करना है, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकना भी है।वित्त विभाग ने सभी जिला और संभागीय पेंशन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वे इस आदेश का पालन कर सुनिश्चित करें कि केवल उन कर्मचारियों से ही राशि वसूली जाए जिन्होंने अंडरटेकिंग दी है। इससे कर्मचारियों की न्यायिक परेशानियों में कमी आएगी और प्रशासनिक प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी।

इंदौर भागीरथपुरा पानी कांड:राज्य स्तरीय समिति तत्काल प्रभाव से निरस्त, अब कमेटी की जिम्मेदारियों को संभालेगा आयोग
इंदौर। दो महीने पहले इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण दो दर्जन से अधिक मौतों के बाद गठित राज्य स्तरीय जांच समिति को सरकार ने तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। समिति निरस्तीकरण का कारण विधानसभा में कांड की जांच के लिए एकल सदस्यीय आयोग का गठन बताया गया है। अब आयोग राज्य स्तरीय समिति की जिम्मेदारियों को संभालेगा।राज्य स्तरीय समिति के अध्यक्ष सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ल थे। इसमें प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी पी. नरहरि, आयुक्त संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास संकेत भोंडवे और आयुक्त इंदौर संभाग सुदाम खाड़े सदस्य-सचिव थे। समिति का उद्देश्य घटना की विस्तृत समीक्षा कर सुझाव और अनुशंसाएं तैयार करना था, जो अब एकल सदस्यीय आयोग करेगा।सरकार ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय आयोग गठित किया है। आयोग को चार हफ्ते में रिपोर्ट जमा करनी है, जिसमें मृतकों की संख्या, रोग की प्रकृति, मेडिकल रिस्पांस, निवारक उपायों की समीक्षा और दीर्घकालिक सुधार के सुझाव शामिल होंगे। आयोग को प्रभावितों के मुआवजे और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने के अधिकार भी दिए गए हैं।समिति निरस्तीकरण और आयोग गठन से सरकार की जांच प्रक्रिया तेज और केंद्रीकृत होगी। अधिकारियों को अभिलेख प्राप्त करने, स्थल निरीक्षण करने और जल जांच के आदेश देने का अधिकार आयोग को प्राप्त है। समय सीमा पूरी होने में अभी एक हफ्ता शेष है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है। इस निर्णय से अब भागीरथपुरा कांड की जांच में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की उम्मीद है।

एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में राहत:केंद्र ने एस्मा लागू कर जमाखोरी पर कसा शिकंजा, फैसले का उद्देश्य घरेलू रसोई गैस को प्राथमिकता
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट वार के चलते देश में एलपीजी सिलिंडरों की संभावित कमी और जमाखोरी की बढ़ती शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य घरेलू रसोई गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना और काले बाजारी गतिविधियों पर रोक लगाना है।सरकारी सूत्रों के अनुसार, एस्मा लागू होने के बाद एलपीजी और अन्य आवश्यक ईंधनों की आपूर्ति में प्राथमिक क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें अस्पताल, स्कूल, सरकारी संस्थान और अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। इससे इन संस्थानों में गैस की कमी से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को रोका जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से आम जनता को राहत मिलेगी और बाजार में कृत्रिम संकट पैदा करने वालों पर सख्ती की जा सकेगी।दरअसल, पिछले कुछ महीनों से कई राज्यों में एलपीजी सिलिंडरों की जमाखोरी और कालाबाजारी की घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिली थी। कई जगहों पर कमर्शियल गैस सिलिंडरों की कमी की शिकायतें सामने आईं, जिससे होटल और रेस्टोरेंट उद्योग की चिंताएं बढ़ गई हैं।एस्मा क्या है?आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) एक ऐसा कानून है, जिसका उद्देश्य जीवन से जुड़ी आवश्यक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना है। इस कानून के तहत सरकार को यह अधिकार मिलता है कि वह महत्वपूर्ण सेवाओं में बाधा डालने वाली गतिविधियों पर रोक लगाए और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करे। आमतौर पर इसका उपयोग परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सार्वजनिक सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए किया जाता है।रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देशसरकार ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बनी रहे। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत में एलपीजी की कुल खपत लगभग 3.13 करोड़ टन रही, जबकि घरेलू उत्पादन करीब 1.28 करोड़ टन ही था। शेष जरूरत आयात के जरिए पूरी की गई।

कंगाली की मार:पेट्रोल गायब, भोजन गायब, अब पाकिस्तान में इफ्तार पार्टियों पर भी बैन
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती अस्थिरता का असर अब पाकिस्तान की आम जिंदगी पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के बाद पाकिस्तान में फ्यूल संकट गहरा गया है। हालात को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने ऊर्जा की खपत कम करने और बढ़ती आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं।प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के उद्देश्य से स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तरों के कामकाज में बदलाव का ऐलान किया है। सरकार के फैसले के अनुसार देशभर में स्कूलों को दो हफ्तों के लिए बंद कर दिया जाएगा, जबकि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा की कक्षाएं ऑनलाइन मोड में संचालित की जाएंगी। इससे छात्रों और स्टाफ की आवाजाही कम होगी और ईंधन की बचत हो सकेगी।रोक से ऊर्जा और संसाधनों की बचत होगी इसके अलावा सरकार ने आधिकारिक डिनर और बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाली इफ्तार पार्टियों पर भी रोक लगाने का फैसला किया है। रमजान के दौरान आमतौर पर सरकारी और निजी संस्थानों में बड़े स्तर पर इफ्तार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। सरकार का मानना है कि ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने से ऊर्जा और संसाधनों की बचत होगी।महंगाई ने तोड़ी जनता की कमरइसी बीच रमजान के महीने में पाकिस्तान में महंगाई ने भी लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। पंजाब प्रांत में फल और सब्जियों की कीमतें सरकारी तय दरों से काफी ज्यादा पर बिक रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पहले दर्जे के केले का सरकारी रेट 240 पाकिस्तानी रुपये प्रति दर्जन तय किया गया था, लेकिन बाजारों में दुकानदार इसे 300 रुपये से कम में बेचने को तैयार नहीं हैं। इसी तरह अमरूद, सेब और कंधारी अनार भी निर्धारित कीमतों से अधिक दरों पर बिक रहे हैं।आयातित थाई अदरक की कीमतें आसमान परवहीं आयातित थाई अदरक, जिसकी आधिकारिक कीमत 280 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई थी, कई बाजारों में 350 रुपये तक पहुंच गई। कीमतों में इस बढ़ोतरी ने आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। चूंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए तनाव बढ़ते ही वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं। पाकिस्तान अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए सप्लाई प्रभावित होने से वहां फ्यूल संकट और महंगाई दोनों गहराते जा रहे हैं।

मप्र की विजयपुर विधानसभा सीट पर भाजपा का प्रतिनिधित्व:कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी की शून्य, जानें पूरा मामला
ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने विजयपुर विधानसभा सीट को लेकर दायर चुनाव याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव अमान्य घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी रहे रामनिवास रावत को विजयपुर से विधायक घोषित किया गया है।यह फैसला ग्वालियर बेंच के जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया ने सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव के दौरान उम्मीदवार द्वारा दी गई जानकारी में गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं और तथ्यों को छिपाया गया है। इसी आधार पर मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया गया।पूर्व मंत्री ने मल्होत्रा के खिलाफ दायर की थी याचिकादरअसल, यह मामला भाजपा नेता और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत द्वारा दायर की गई चुनाव याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुकेश मल्होत्रा ने नामांकन पत्र के साथ दाखिल किए गए अपने शपथपत्र में आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी नहीं दी थी। याचिकाकर्ता के अनुसार मल्होत्रा के खिलाफ कुल छह आपराधिक मामले दर्ज थे, लेकिन उन्होंने अपने हलफनामे में केवल दो मामलों का ही उल्लेख किया था।दस्तावेजों में सही पाए गए आरोपसुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रस्तुत दस्तावेजों और रिकॉर्ड का विस्तृत परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि उम्मीदवार द्वारा अपने आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाना निर्वाचन नियमों का उल्लंघन है। कोर्ट ने माना कि मतदाताओं को सही जानकारी देना उम्मीदवार की जिम्मेदारी होती है, ताकि वे सूचित निर्णय ले सकें।रामनिवास रावत घोषित हुए विधायकइसी आधार पर हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त करते हुए उनका निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया। साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत को विजयपुर विधानसभा क्षेत्र का निर्वाचित विधायक घोषित किया जाए।इस फैसले के बाद विजयपुर विधानसभा सीट पर अब भाजपा का प्रतिनिधित्व हो गया है। राजनीतिक रूप से इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे चुनावी हलफनामों में पारदर्शिता और सही जानकारी देने की अनिवार्यता पर जोर दिया।

सोनिया-राहुल की बढ़ी मुश्किलें? :नेशनल हेराल्ड केस में 20 अप्रैल को अहम सुनवाई
नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड धन शोधन मामले में कांग्रेस की दिग्गज नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती है। दरअसल खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 अप्रैल को सुनवाई होगी। ईडी ने दिल्ली हाईकोर्ट में राऊज एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया। सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 20 अप्रैल तय की।2000 करोड़ से अधिक की संपत्ति पर कब्जा करने रची थी साजिशदरअसल, यह हाई-प्रोफाइल मामला उन आरोपों से संबंधित है, जिनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने नेशनल हेराल्ड अखबार के मूल प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा करने के लिए साजिश रची। उन्होंने यंग इंडियन के माध्यम से मात्र 50 लाख रुपए की मामूली रकम का भुगतान किया, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी शेयरधारक हैं।इन्हें बनाया गया है आरोपीईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, साथ ही यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाया गया। एजेंसी का आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियों को गलत तरीके से अपने कब्जे में लिया।जांच में मिले मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अहम सबूत ईडी का दावा है कि जांच के दौरान फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अहम सबूत सामने आए। एजेंसी के अनुसार, एजेएल की संपत्तियों को बेहद कम कीमत पर हासिल करने की साजिश रची गई और इसके जरिए अवैध रूप से लाभ उठाया गया।दिसंबर 2025 में राऊज एवेन्यू कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और दूसरों के खिलाफ चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में यह साफ किया था कि ईडी चाहे तो इस मामले में आगे जांच जारी रख सकती है। इसी आदेश के खिलाफ ईडी ने हाईकोर्ट का रुख किया।

पीएम ने सैक्षणिक संस्थानों से की अपील:कैंपस को उद्योग और रिसर्च बेस्ड एजुकेशन के रूप में करें विकसित, एवीजीसी सेक्टर को बढ़ावा देने पर भी दिया जोर
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश के शैक्षणिक संस्थानों से अपील की कि वे अपने कैंपस को उद्योग सहयोग और शोध आधारित शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करें, ताकि छात्रों को वास्तविक दुनिया का अनुभव मिल सके। प्रधानमंत्री ने यह बात बजट के बाद आयोजित एक वेबिनार को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कही। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा की और एवीजीसी (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) सेक्टर को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत तेजी से नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस वेबिनार में इस बात पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए कि कैसे शैक्षणिक संस्थानों के कैंपस को उद्योग सहयोग और शोध आधारित सीखने के केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने संस्थानों, उद्योग और शिक्षाविदों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि इन चर्चाओं से भविष्य के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार होगा और विकसित भारत की नींव और मजबूत होगी।युवाओं की बदलती सोच देश की सबसे बड़ी ताकतपीएम मोदी ने कहा कि भारत के युवाओं की बदलती सोच देश की सबसे बड़ी ताकत है और इसके अनुसार शिक्षा प्रणाली को भी विकसित करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि सरकार लगातार शिक्षा को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति (एनईपी) ऐसा आधार प्रदान करती है जिससे पाठ्यक्रम को बाजार की जरूरतों और वास्तविक अर्थव्यवस्था के अनुरूप बनाया जा सकता है। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑटोमेशन और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में इसकी जरूरत है।शिक्षा को अर्थव्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया को करना होगा तेजउन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली को वास्तविक दुनिया की अर्थव्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया को और तेज करना होगा। प्रधानमंत्री ने एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर भी गर्व जताया और कहा कि सरकार बेटियों को भविष्य की तकनीकों में समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।इसके साथ ही उन्होंने एक मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम बनाने की जरूरत बताई, जहां युवा शोधकर्ताओं को बिना किसी बाधा के नई सोच और प्रयोग करने के पूरे अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा वातावरण बनाना होगा जहां युवा शोधकर्ता नई खोज और नए विचारों पर खुलकर काम कर सकें।

संसद में जयशंकर की दो टूक:पश्चिम एशिया संकट का हल कूटनीति से, भारतीयों की सुरक्षित वापसी सरकार की प्राथमिकता
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर संसद में चिंता जताई गई। राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मिडिल ईस्ट की वर्तमान स्थिति पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।विदेश मंत्री ने बताया कि भारत ने 20 फरवरी को ही आधिकारिक बयान जारी कर अपनी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने तथा संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ता संघर्ष पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है और भारत शांति तथा स्थिरता का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रहे हैं। सरकार के विभिन्न मंत्रालय आपस में समन्वय के साथ काम कर रहे हैं ताकि स्थिति के अनुसार उचित कदम उठाए जा सकें। जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है।ईरान में हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारीविदेश मंत्री के अनुसार खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं, जबकि ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं। इस क्षेत्र से भारत को तेल और गैस की बड़ी आपूर्ति होती है, इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। उन्होंने बताया कि मौजूदा संकट के कारण क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति बिगड़ी है, जिसका असर आम जनजीवन और कामकाज पर पड़ रहा है। इस दौरान भारत ने अपने दो नाविकों को खो दिया है, जबकि एक अन्य नाविक अभी भी लापता है।ईरानी युद्धपोत को कोची एयरपोर्ट पर रुकने दी थी अनुमतिइस दौरान उन्होंने ईरानी जहाजों पर जानकारी देते हुए बताया, हिंद महासागर में ईरान के तीन जहाज थे, जिसमें से एक को हमने शरण दी। विदेश मंत्री ने कहा, मैंने ईरान के विदेश मंत्री से 28 फरवरी और पांच मार्च को बात की। ईरान के तीन जहाज हिंद महासागर में थे। हमने एक जहाज को ईरान के निवेदन पर डॉकिंग की परमिशन दी और शरण दी। भारत ने मानवीय आधार पर ईरानी युद्धपोत “लवन” को कोची पोर्ट पर रुकने की अनुमति दी थी, जिसके लिए ईरान ने धन्यवाद दिया। सरकार ने भरोसा दिलाया कि संकट के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। एस जयशंकर ने बताया कि हमने दो भारतीय नाविकों (मर्चेंट शिपिंग) को खो दिया है और एक अभी भी लापता है।भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर बोले भी विदेश मंत्रीभारतीय नागरिकों की सुरक्षा के बारे में जानकारी देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि तेहरान में भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय है और हाई अलर्ट पर काम कर रहा है। दूतावास भारतीय छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद कर रहा है। वहीं, ज्मीतंद में मौजूद भारतीय व्यापारियों को ।तउमदपं के रास्ते भारत लौटने में भी सहायता दी गई है। अब तक लगभग 67 हजार भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंच चुके हैं।

मप्र में 25 साल बाद सरकारी नौकरी के लिए हटेगी 2 बच्चों की शर्त:डीजीए ने तैयार किया मसौदा, कैबिनेट से जल्द लगेगी मुहर
भोपाल। मप्र में 25 साल बाद सरकारी नौकरी के लिए 2 बच्चों वाली अनिवार्य शर्त हटने जा रही है। इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। जल्द ही प्रस्ताव कैबिनेट में आएगा। उसके बाद मप्र सिविल सेवा नियम 1961 में संशोधन कर जोड़ी गई दो बच्चों की बाध्यता वाली शर्त को हटा दिया जाएगा। हालांकि अभी भी सरकारी कर्मचारियों के लिए 2 बच्चों कीे बाध्यता है, लेकिन ऐसे मामलों की शिकायतों पर अब सरकारी विभागों में कार्रवाई होना लगभग बंद हो चुका है। मप्र में 26 जनवरी 2001 में सरकारी नौकरी के लिए 2 बच्चों की बाध्यता लागू की थी। इसके बाद शासकीय सेवक के 2 से अधिक जीवित बच्चे होने की स्थिति में कई लोगों की नौकरी भी जा चुकी है। अब सरकार इसमें बदलाव करने जा रही है। इसको लेकर शीर्ष स्तर पर सहमति बन चुकी है। अंतिम निर्णय कैबिनेट से होगा। 2 बच्चों की बाध्यता वाली शर्त हटने के बाद 3 जीवित बच्चे होने पर भी किसी की नौकरी नहीं जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग के अनुसार शर्त हटने के साथ ही तीसरी संतान से जुड़े जितने भी शासन स्तर या न्यायालयों में लंबित हैं, वे स्वतरू समाप्त हो जाएंगे। बताया गया कि इसके लिए विभाग ने विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। हालांकि 2001 के बाद जिन लोगों की नौकरी तीसरी संतान की वजह से जा चुकी है, उन्हें सेवा में वापस लिया जाएगा या नहीं। इसका अंतिम निर्णय कैबिनेट से होगा। हालांकि प्रस्ताव में सेवा वापसी का कोई प्रावधान नहीं है। 9 साल पहले हटा चुका है छत्तीसगढ़अविभाजित मप्र में दो बच्चों की बाध्यता वाल नियम बन चुका था, ऐसे में 1 नवंबर 2000 को बंटवारे के बाद छत्त्तीसगढ़ में भी दो बच्चों की बाध्यता वाला नियम लागू किया गया था। हालांकि छत्तीसगढ़ ने 9 साल पहले 14 जुलाई 2017 को यह पाबंदी हटा दी थी। अब वहां तीन बच्चों पर भी नौकरी में लोग काम कर रहे हैं। इसी तरह राजस्थान भी 11 मई 2016 को दो बच्चों की बाध्यता वाले नियम को हटा चुका है। इनका कहना हैइस मामले में सामान्य प्रशासन विभाग ने होमवर्क किया है। अब यह मामला वरिष्ठ स्तर पर प्रक्रिया में है। अजय कटेसरिया, अपर सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग

मोहन ने तोड़ा अशोकनगर दौरे का मिथक: जो भी सीएम गया, उसे छह महीने में गंवानी पड़ी कुर्सी, शिवराज ने किया था परहेज
भोपाल। मध्य प्रदेश के अशोक नगर के बारे में मिथक है कि जब भी किसी मुख्यमंत्री ने यहां का दौरा किया, उसे अपनी कुर्सी से हाथा धोना पड़ा। इस मिथक को लेकर पूर्व सीएम प्रकाशचंद सेठी, अर्जुन सिंह, श्यामाचरण शुक्ल, सुंदरलाल पटवा, मोतीलाल वोरा, लालू प्रसाद और दिग्गज कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह गिनाए जाते हैं। जो यहां आने के बाद अगले चुनाव में अपनी गद्दी से हट गए थे। इसी मिथक के चलते शिवराज सिंह चौहान ने डेढ़ दशक से अधिक समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहते कभी अशोक नगर शहर का दौरा नहीं किया, लेकिन अब इस मिथक को सुबे मुखिया डाॅ. मोहन यादव ने तोड़ दिया है। वे रविवार को रंगपंचमी के मौके पर अशोकनगर पहुंचे और करीला धाम में आयोजित रंगपंचमी के कार्यक्रम में सहभागिता की। बता दें कि जिला मुख्यालय अशोक नगर में अभी तक जिन मुख्यमंत्रियों ने दौरा किया उन्हें छह माह के भीतर अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी और अभी तक कई मुख्यमंत्री अशोक नगर का दौरा करने के बाद अपनी कुर्सी गवां चुके हैं। सुंदरलाल पटवा कॉलेज का उद्धाटन करने आए और 15 दिन बाद कुर्सी गंवानी पड़ी। उमा भारती जिला मुख्यालय के बायपास से गुजरी और तीन बाद उनकी कुर्सी पर संकट आ गया। दिग्विजय सिंह अशोक नगर को जिला मुख्यालय घोषित करने पहुंचे, जिसके बाद कांग्रेस आज तक सत्ता में नहीं लौटी। लालू प्रसाद यादव भी बतौर बिहार के मुख्यमंत्री यहां कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे, जिसके कुछ ही दिनों बाद राबड़ी देवी को गद्दी सौंपनी पड़ी। अंतिम समय में बदल जाता था शिवराज का कार्यक्रममाना जा रहा है कि अशोकनगर से जुड़े इस मिथक को देखते हुए मुख्यमंत्री रहते शिवराज सिंह चौहान ने एक बार भी यहां का दौरा नहीं किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का कई बार अशोकनगर का दौरा बना लेकिन अंतिम समय में उनका दौरा या तो स्थगित कर दिया गया अथवा स्थान बदल दिया गया। लेकिन अब इस मिथक को सीएम डाॅ. मोहन यादव ने तोड़ दिया है। उन्होंने करीला धाम में माता जानकी के दर्शन किए और भक्तों के साथ फूलों की होली खेली। श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अदभुत संगम करीला धामवहीं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम मोहन ने कहा कि अशोकनगर जिले का करीला धाम श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अदभुत संगम है। इस पावन स्थल पर माता सीता अपने दोनों पुत्र लव-कुश के साथ विराजमान हैं। यह देश का एक मात्र अद्वितीय मंदिर है, जहाँ माता सीता अपने दोनों पुत्रों के साथ पूजी जाती हैं। देश के अधिकांश मंदिर भगवान श्रीराम को समर्पित हैं। करीला धाम लव-कुश की जन्म-स्थली भी है, जो लव-कुश की बाल लीलाओं की साक्षी है। इस पवित्र स्थली के सम्पूर्ण विकास की योजना बनाई जायेगी।

केरल में जल्द बजेगी चुनावी रणभेरीः:इलेक्शन की तैयारियों को लेकर ईसी ने की अहम पीसी, सम्मानित हुए first time voter
तिरुवनंतपुरम। चुनाव आयोग ने केरल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों को लेकर कोच्चि में एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुकबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले आयोग ने पहली बार वोट देने जा रहे युवाओं और समाज के प्रेरणादायक लोगों को सम्मानित भी किया। इस मौके पर अमृता, यानल सुलेमान और फेनल सारा जेफरसन जैसे युवा मतदाताओं को सम्मानित किया गया। अमृता सेंट पॉल्स कॉलेज से बीकॉम इन कोऑपरेशन, यानल सुलेमान बीकॉम इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट और फेनल सारा जेफरसन बी वोक इन मैनेजमेंट ऑफ पब्लिक सिस्टम्स एंड वेलफेयर की पढ़ाई कर रही हैं। इसके अलावा 96 वर्षीय पीबी विशलम को भी सम्मानित किया गया, जो 1956 में सरकारी दाई के रूप में सेवा शुरू करने के बाद आज भी सक्रिय मतदाता के रूप में लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। साथ ही दिव्यांग अधिकारों के लिए काम करने वाले राजीव पलारोथी को भी सम्मानित किया गया।आयोग ने दलों के साथ की बैठकमुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि पिछले दो दिनों में आयोग ने केरल की सभी राजनीतिक पार्टियों और राज्य की चुनाव मशीनरी के साथ विस्तृत बैठकें कीं। इसमें मुख्य सचिव, डीजीपी, पुलिस और विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी भी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने युवाओं, स्विप आइकॉन और समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की, ताकि आने वाले चुनाव में ज्यादा से ज्यादा लोग मतदान में हिस्सा लें। उन्होंने बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) और चुनाव अधिकारियों की मेहनत की भी सराहना की, जिन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया।केरल में लोकतंत्र की पुरानी परंपराज्ञानेश कुमार ने कहा कि केरल में लोकतंत्र की परंपरा बहुत पुरानी है। यहां एक हजार साल पहले नट्टाकूट्टम जैसी संस्थाएं सामूहिक निर्णय की परंपरा को आगे बढ़ा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि 1960 में केरल ने पहला आचार संहिता लागू किया था, जिसे बाद में चुनाव आयोग ने पूरे देश में अपनाया और आज इसे मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट कहा जाता है। इसके अलावा 1982 में परावूर विधानसभा क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का पहला पायलट प्रयोग भी केरल में ही किया गया था।

सरकार ने 'इजरायली गिरफ्तारी' के दावे को बताया भ्रामक:कांग्रेस समर्थक के 'एक्स' अकाउंट से जुड़ा था पोस्ट
नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक दावे को भारत सरकार ने पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया है। दावा किया जा रहा था कि सऊदी अरब में एक भारतीय नागरिक को इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के एजेंट के रूप में गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में शनिवार को विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर सफाई जारी करते हुए लोगों से ऐसी अफवाहों से सावधान रहने की अपील की।दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही थी। इसमें दावा किया गया था कि सऊदी अरब की सुरक्षा एजेंसियों ने मोसाद से जुड़े दो एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि ये दोनों एजेंट ईरान को फंसाने के लिए बम धमाकों की साजिश रच रहे थे। हालांकि विदेश मंत्रालय ने इस दावे को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताया है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे ऐसे बेतुके और बिना किसी आधार वाले दावों से सावधान रहें।"सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह दावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच फैल रही गलत सूचनाओं की एक बड़ी लहर का हिस्सा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब में किसी भारतीय नागरिक की इस तरह की गिरफ्तारी की कोई विश्वसनीय जानकारी या आधिकारिक पुष्टि नहीं है। जांच में यह भी सामने आया कि यह भ्रामक दावा 'एमोक्सिसिलिन' नाम के एक 'एक्स' अकाउंट से पोस्ट किया गया था। इसी अकाउंट से यह जानकारी शेयर की गई थी कि सऊदी अरब ने दो कथित मोसाद एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक भारतीय भी शामिल है।बताया जा रहा है कि यह अकाउंट लंबे समय से राजनीतिक रूप से झुकाव वाले पोस्ट साझा करता रहा है। अकाउंट पर अक्सर कांग्रेस पार्टी के पक्ष में कथित तौर पर सामग्री पोस्ट की जाती है और कई बार बिना पुष्टि वाली जानकारी भी साझा की जाती रही है। इस अकाउंट पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषणों और बयानों की तारीफ करते हुए कई पोस्ट भी किए जाते हैं। कई बार उनके बयानों को साझा करते हुए उन्हें 'सांघियों' पर तीखा हमला बताया जाता है। 'सांघी' शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर ऑनलाइन भाजपा, आरएसएस या दक्षिणपंथी विचारधारा के समर्थकों के लिए किया जाता है।इसके साथ ही अकाउंट पर अक्सर भाजपा और उसके समर्थकों का मजाक उड़ाने या आलोचना करने वाले पोस्ट भी साझा किए जाते हैं, जिनमें 'सांघी इकोसिस्टम' और 'भक्त' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय सोशल मीडिया पर गलत जानकारी तेजी से फैलती है, इसलिए लोगों को ऐसी अपुष्ट खबरों पर भरोसा करने से बचना चाहिए और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करना चाहिए।

बंगाल एसआईआर पर सियासी पारा हाई:दीदी ने भाजपा को दी खुली चुनौती, कहा- छूकर दिखाए बंगाल को
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर को लेकर सियासी पारा हाई है। यही नहीं राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वोटर लिस्ट से वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाकार धरने पर बैठ गई हैं। धरना-प्रदर्शन कर रहीं ममता ने शनिवार को भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे बंगाल और बिहार को बांटने की बात कर रहे हैं। मैं उन्हें चुनौती देती हूं कि वे बंगाल को छूकर दिखाएं। ममता बनर्जी ने कहा कि उनका (भाजपा) काम बंगाल को बांटना है और वे एक और श्बंग-भंगश् चाहते हैं। पहले बिहार को बांटकर झारखंड बनाया गया था और अब वे बिहार को फिर से बांटने की कोशिश कर रहे हैं। गैस की कीमते बढ़ने पर केन्द्र सरकार को घेरागैस की कीमतें बढ़ने पर ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि गैस की कीमतें फिर से बढ़ा दी गई हैं। अब आपको 21 दिन पहले गैस बुक करानी होगी, तो अगर आपके घर में गैस खत्म हो जाए तो आप 21 दिन क्या करेंगे? आप क्या खाएंगे? क्या आप लोगों के लिए घर पर खाना पहुंचाएंगे? यहां तक कि केरोसिन का कोटा भी कम कर दिया गया है। आप हर दिन चीजों की कीमतें बढ़ा रहे हैं।कल चुनाव आयोग पर लगाया था गंभीर आरोपएक दिन पहले शुक्रवार को ममता बनर्जी ने कहा था कि इनमें से कुछ वोटर आज हमारे साथ यहां हैं। कमीशन को शर्म आनी चाहिए कि उसने एसआईआर में उन वोटरों को मरा हुआ मार्क कर दिया जो जिंदा हैं, लेकिन, आज वे यह साबित करने के लिए यहां हैं कि वे अभी जिंदा हैं। चुनाव आयोग भाजपा के एजेंट के तौर पर काम कर रही है, जो खुद एक बेशर्म पॉलिटिकल ताकत है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि याद रखें हम काम कर रहे हैं। हमने उन सभी 22 वोटरों को ट्रैक किया है जिन्हें मरा हुआ बताया गया है। मैं मीडिया से भी रिक्वेस्ट करूंगी कि वे ऐसे वोटरों के बारे में पूरी कवरेज दें, जो अभी जिंदा हैं, लेकिन कमीशन के रिकॉर्ड के मुताबिक मर चुके हैं।

मप्र में फसल और किसान दोनों के बुरे हाल:कांग्रेस का आरोप, गेंहू खरीदी में 2700 रुपए प्रति क्विंटल का था वादा, बिक रहा महज 1800 में
भोपाल। मप्र कांग्रेस ने एक बार फिर सरकार द्वारा मनाए जा रहे कृषक कल्याण वर्ष पर सवाल खड़े किए हैं। मप्र के किसानों से 2700 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर गेहूं खरीदने का वादा किया था, लेकिन गेहूं 1700 रुपए प्रति क्विंट की दर पर खरीदा जा रहा है। इसी तरह सोयाबीन एवं अन्य फसलों के दाम नहीं मिले। ऐसे में सरकार किस बात का कृषक कल्याण वर्ष मना रही है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी, मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, राष्ट्रीय पेनालिस्ट अभय दुबे और पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे ने किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरा। पटवारी ने कहा कि प्रदेश में किसानों के बुरे हाल हैं। कोईसुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने किसानों को तीन बड़ी गारंटियां दी थीं, गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल, धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल और सोयाबीन 6000 रुपए प्रति क्विंटल खरीदने की बात कही थी। लेकिन हकीकत यह है कि उज्जैन मंडी में गेहूं 1800 से 1900 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। यह स्थिति उज्जैन विधानसभा क्षेत्र की मंडी की है। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस ने इसका वीडियो भी जारी किया था, जिससे साफ है कि एक तरफ सरकार कृषि कल्याण की बात करती है और दूसरी तरफ किसानों को उचित दाम तक नहीं मिल पा रहा है।मप्र में कृषि व्यवस्था की रीढ़ टूट रहीकांग्रेस नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री को पिछले एक साल का हिसाब देना चाहिए। अगर सरकार सच में किसानों के हित में काम कर रही है तो वह अपने एक साल के काम का ब्योरा सार्वजनिक करे। प्रदेश में कृषि व्यवस्था सरकारी उदासीनता के बोझ तले दम तोड़ रही है। कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार विभाग में स्वीकृत 14,537 पदों में से 8,468 पद खाली हैं, यानी लगभग 60 प्रतिशत कर्मचारी नहीं हैं। इसके अलावा मत्स्य पालन विभाग में 1,290 में से 722 पद रिक्त हैं, उद्यानिकी विभाग में 3,079 में से 1,459 पद खाली हैं और पशुपालन व डेयरी विभाग में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं।

अविमुक्तेश्वरानंद की गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा काशी से शुरू:उद्देश्य गाय को राज्य माता का दर्जा दिलाना, 11 मार्च को लखनऊ में शक्ति प्रदर्शन के साथ होगा समापन
वाराणसी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शनिवार को वाराणसी से अपनी गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा की शुरुआत की। यह यात्रा विभिन्न जिलों से गुजरते हुए 11 मार्च को लखनऊ में बड़े धरना-प्रदर्शन के साथ समाप्त होगी। यात्रा का मुख्य उद्देश्य गाय को राज्य माता का दर्जा दिलाने और समाज में गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना बताया गया है।यात्रा की शुरुआत वाराणसी स्थित उनके आश्रम से हुई। इस दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह यात्रा किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि धर्म और समाज की भावना से प्रेरित है। उन्होंने इसे गौ माता की रक्षा के लिए धर्मयुद्ध बताया और कहा कि समाज में गाय के महत्व को समझाने के लिए यह अभियान शुरू किया गया है।चिंतामणि गणेश मंदिर में की निर्विघ्न यात्रा की प्रार्थनायात्रा के पहले दिन उन्होंने चिंतामणि गणेश मंदिर में दर्शन कर निर्विघ्न यात्रा की प्रार्थना की। इसके बाद वे संकट मोचन हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने हनुमान जी से गौ रक्षा के लिए आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों से आशीर्वाद लेकर यात्रा शुरू करने का उद्देश्य यह है कि यह अभियान शांति और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़े।इन जिलों से गुजरेगी यात्रास्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि यह यात्रा वाराणसी से निकलकर जौनपुर, सुलतानपुर, रायबरेली, मोहनलालगंज और लालगंज होते हुए लखनऊ पहुंचेगी। जौनपुर में वे ऋषि जमदग्नि के आश्रम में भी जाएंगे। उन्होंने कहा कि पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि जमदग्नि ऋषि ने गायों और समाज की रक्षा की थी। वहीं राजा कार्तवीर्य अर्जुन द्वारा गायों पर अत्याचार की कथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बाद में भगवान परशुराम ने उनके संरक्षण में अन्याय के खिलाफ कार्रवाई की थी।स्वामी ने बताया यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्वउन्होंने कहा कि इस यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। उनके अनुसार गंगा नदी का उद्गम गौमुख से होता है, जिसका संबंध गाय से जोड़ा जाता है। इसी तरह गोमती नदी का नाम भी गाय से जुड़ा हुआ माना जाता है। लखनऊ गोमती नदी के किनारे बसा है, इसलिए इस यात्रा का प्रतीकात्मक महत्व और बढ़ जाता है।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि 11 मार्च को लखनऊ में इस यात्रा का समापन होगा और वहीं से गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध का शंखनाद किया जाएगा। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे इस यात्रा में शामिल होकर गौ संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाएं और समाज में गाय के सम्मान को बढ़ाने में योगदान दें।

West Bengal SIR:दीदी ने ECI पर लगाया गंभीर आरोप, कहा- आनी चाहिए शर्म
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ईसीआई) पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) एक्सरसाइज में कई जिंदा वोटर्स को मरा हुआ दिखाने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने अनिश्चितकालीन एसआईआर विरोधी धरने पर कहा, इनमें से कुछ वोटर आज हमारे साथ यहां हैं। कमीशन को शर्म आनी चाहिए कि उसने एसआईआर में उन वोटरों को मरा हुआ मार्क कर दिया जो जिंदा हैं। लेकिन, आज वे यह साबित करने के लिए यहां हैं कि वे अभी भी जिंदा हैं। चुनाव आयोग भाजपा के एजेंट के तौर पर काम कर रही है, जो खुद एक बेशर्म पॉलिटिकल ताकत है।ममता ने मीडिया से की अपीलमुख्यमंत्री ने आगे कहा, याद रखें हम काम कर रहे हैं। हमने उन सभी 22 वोटरों को ट्रैक किया है जिन्हें मरा हुआ बताया गया है। मैं मीडिया से भी रिक्वेस्ट करूंगी कि वे ऐसे वोटरों के बारे में पूरी कवरेज दें, जो अभी जिंदा हैं लेकिन कमीशन के रिकॉर्ड के मुताबिक मर चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस साल के आखिर में पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव एक मजाक होंगे, जब तक कि असली वोटर उस चुनाव में अपना वोट नहीं डाल पाते। तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेताओं के अलावा, तृणमूल कांग्रेस से जुड़े बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) के एसोसिएशन के सदस्य भी धरना-प्रदर्शन की जगह पर मौजूद थे।अनिश्चितकालीन धरने पर बैठीं ममताइत्तेफाक से मुख्यमंत्री के धरना-प्रदर्शन की जगह पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (सीईओ) के ऑफिस से मुश्किल से 1.5 किलोमीटर दूर है। मुख्यमंत्री का अनिश्चितकालीन प्रदर्शन ठीक उससे पहले शुरू हुआ है जब चीफ इलेक्शन कमिश्नर (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की लीडरशिप में ईसीआई की पूरी बेंच 8 मार्च को कोलकाता आ रही है, जिसका अगले दो दिनों का शेड्यूल काफी बिजी है।तृणमूल कांग्रेस लीडरशिप ने इस बात का कोई इशारा नहीं दिया कि प्रदर्शन कब तक चलेगा, लेकिन स्टेज के आकार और वहां मौजूद सुविधाओं से ऐसा लगता है कि प्रदर्शन काफी लंबा चलने वाला है।

'मैं नीतीश कुमार को बिहार से जाने नहीं दूंगा':पटना में मुख्यमंत्री आवास के बाहर भूख हड़ताल पर बैठा जदयू कार्यकर्ता
पटना । नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में वापसी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बिहार में मुख्यमंत्री पद छोड़ना होगा। हालांकि, इस फैसले से सत्ताधारी पार्टी जदयू के कार्यकर्ता नाखुश हैं। एक समर्थक ने नीतीश कुमार के बिहार के मुख्यमंत्री बने रहने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री आवास के बाहर भूख हड़ताल शुरू कर दी है।जदयू कार्यकर्ता अमरेंद्र दास त्रिलोकी ने कहा, "यह सुनकर कि नीतीश कुमार केंद्र में जा सकते हैं, हमें बहुत दुख हुआ। 2005 से पहले बिहार में कानून-व्यवस्था की कमी और अशांति थी। 2005 में पद संभालने के बाद से, नीतीश कुमार ने हर क्षेत्र में विकास का काम किया। अच्छा शासन स्थापित किया गया और लोगों को न्याय मिला। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, साफ पीने का पानी और महिला सशक्तिकरण में प्रगति हुई। त्रिलोकी ने आगे कहा, "बिहार में आज अनेकों योजनाएं चल रही हैं, जिससे यहां की जनता खुशहाल है। आज बिहार में उतनी गरीबी नहीं है, जिनती देश के अन्य राज्यों में है। राज्य में 20 घंटे से अधिक समय तक बिजली रहती है। पहले घर-घर में लालटेन और मोमबत्ती जलाई जाती थीं, लेकिन आज के दौर में ये सब चीजें किसी के भी घर में नहीं मिलेंगी, क्योंकि लगातार बिजली आने के कारण उनकी जरूरत नहीं पड़ती है।"जदयू कार्यकर्ता ने कहा, "मैं नीतीश कुमार को बिहार से जाने नहीं दूंगा। हमारी इच्छा है कि नीतीश कुमार आखिरी समय तक बिहार को सुशोभित करें। हम लोग उन्हें रोकने की कोशिश करेंगे। जिस तरह सीएम नीतीश कहते हैं कि पूरा बिहार मेरा परिवार है, उसी तरह हम भी कहते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश हमारे परिवार के ही सदस्य हैं।" सीएम नीतीश कुमार से अनुरोध करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने आपको बहुमत दिया है और कुर्सी पर आपको बैठाने का काम किया है। इसलिए आपको दिल्ली नहीं जाने देंगे। आप बिहार में ही रहें।इससे पहले, पटना में गुरुवार को भी नीतीश कुमार के आवास के बाहर बड़ी संख्या में उनके समर्थक जुटे। उन्होंने नीतीश कुमार के बिहार में मुख्यमंत्री बने रहने के समर्थन में नारेबाजी की। कुछ कार्यकर्ता भावुक भी नजर आए। हालांकि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू के कार्यकर्ताओं और बिहार की जनता का आभार जताते हुए गुरुवार को अपने राज्यसभा चुनाव लड़ने की इच्छा का ऐलान किया था। बाद में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया।

भाजपा की नई सियासी जमावट:अचानक बदल दिए 9 राज्यों गवर्नर और एलजी, बोस के इस्तीफे से हैरान सियासी पंडित
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने गुरवार की शाम दिल्ली से लेकर बिहार-पश्चिम बंगाल तक 9 राज्यों-केन्द्र शासित प्रदेशों के राज्यपाल और उपराज्यपाल को बदल दिया है। दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का एलजी बनाया गया है। वहीं तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का लेफ्टिनेंट गवर्नर बनाया गया। इसके अलावा तमिलनाडु के गवर्नर आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया है। बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस के ईस्तीफा देने के बाद आरएन रवि को बंगाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि बोस का इस्तीफा राजनीतिक पंडितों को हैरान करने वाला था। वहीं तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल बनाया गया है। इसी तरह सैयद अता हसनैन को बिहार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जबकि हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु के राज्यपाल का कार्यभार सौंपा गया है। रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ मान जाते हैं हसनैनभारतीय सेना के दिग्गज अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को रणनीतिक मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है और उनके पास कश्मीर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में काम करने का व्यापक अनुभव है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य के रूप में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी हैं। बिहार जैसे बड़े और जटिल राज्य में उनकी नियुक्ति प्रशासन में अनुशासन और सुरक्षात्मक दृष्टिकोण को मजबूती प्रदान करेगी।एक मंझे जुए राजनयिक हैं संधूअमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत रहे तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। संधू एक मंझे हुए राजनयिक हैं, जिनके पास अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का लंबा अनुभव है। उन्होंने वाशिंगटन डीसी और श्रीलंका जैसे महत्वपूर्ण मिशनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। दिल्ली जैसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से सक्रिय केंद्र शासित प्रदेश में उनकी नियुक्ति केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। उनकी छवि एक शांत लेकिन प्रभावी प्रशासक की रही है।भारतीय कार्पोरेट क्षेत्र का माना जाना नाम हैं वीके सक्सेनावीके सक्सेना दिल्ली के उपराज्यपाल रह चुके हैं। वह पहले ऐसे कॉर्पोरेट व्यक्ति हैं, जिनको लेफ्टिनेंट गवर्नर पद पर नियुक्त किया गया था। सक्सेना भारतीय कॉर्पोरेट और सामाजिक क्षेत्र का जाना-माना नाम हैं। विनय कुमार सक्सेना ने खादी और ग्रामोद्योग आयोग का नेतृत्व किया था।रिटायर्ड आईएएस अफसर हैं सीवी आनंद बोसकेरल के कोयट्टम के रहने वाले सीवी आनंद बोस रिटायर्ड आईएएस अफसर हैं। उन्होंने अंग्रेजी, मलयालम और हिंदी में करीब 40 पुस्तकें लिखी हैं। उनको जवाहरलाल नेहरू फैलोशिप से सम्मानित किया जा चुका है। बोस उस कार्यकारी ग्रुप के अध्यक्ष थे, जिसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए विकास एजेंडा तैयार किया था। मोदी सरकार ने सबके लिए किफायती आवास के उनके कॉन्सेप्ट को अपनाया गया था।

सत्ता में नियुक्तियों की फाइनल सूची पहुंची दिल्ली:संगठन से हरी झंडी मिलते ही पद की आस लगाए नेताओं के बहुरेंगे दिन, इसी सप्ताह जारी हो सकती है लिस्ट
भोपाल। निगम-मंडलों, प्राधिकरण एवं स्थानीय स्तर की अन्य नियुक्तियों के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं की लम्बी प्रतीक्षा जल्द ही खत्म होने वाली है। मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में निगम-मंडलों के साथ ही महाविद्यालयों की जनभागीदारी और स्थानीय नगर निगमों, प्राधिकरणों में नियुक्ति के लिए सूची फायनल होकर दिल्ली पहुंच चुकी है और केन्द्र से हरी झंडी मिलते ही संभवतः इसी सप्ताह सत्ता की नियुक्तियों की सूचियां जारी हो सकती हैं। पार्टी-संगठन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में करीब चार दर्जन नामों के अलावा करीब 300-400 कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्तर के अन्य शासी निकायों में समायोजित करने की तैयारी की जा चुकी है। जिलाध्यक्षों और पार्टी के स्थानीय जनप्रतिनिधियो के समन्वय के तैयार कार्यकर्ताओं की सूची जो प्रदेश संगठन के पास पहुंची हैं, उनमें भी एक-एक नाम पर फिर से मंथन किया जा चुका है। इसके बाद सूची फायनल कर केन्द्रीय नेतृत्व के पास भेजी जा चुकी हैं। जैसे ही केन्द्र से हरी झंडी मिलेगी, प्रदेश नेतृत्व यह सूची जारी कर देगा। जमीनी कार्यकर्ता पर फोकस क्यों? राज्य स्तर के निगम-मंडलों और स्थानीय प्राधिकरणों में जहां पार्टी के वरिष्ठ और सक्रिय कार्यकर्ताओं को अवसर मिलेगा। इनमें कुछ पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और टिकट से वंचित रहे दावेदार कार्यकर्ताओं को भी शामिल किया जाएगा। वहीं जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूती देने वाले प्रदेशभर के कार्यकर्ताओं को स्थानीय नगरीय निकायों में वरिष्ठ पार्षद और महाविद्यालयों में जनभागीदारी समितियों सहित स्थानीय स्तर के अन्य पदों पर नियुक्त करेगी। 15 मार्च तक सभी मोर्चा कार्यकारिणीभाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संकेत दिए हैं कि भाजपा के सभी मोर्चाओं की कार्यकारिणी आगामी 10 दिनों में घोषित हो जाएंगी। इन प्रदेश स्तरीय कार्यकारिणयों में कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को अवसर मिलेगा। वहीं पार्टी के अलावा सभी मोर्चा-संगठनों की जिला स्तर पर इकाई भी जल्द ही गठित की जाएंगी। इस तरह ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओं को सत्ता और संगठन में अवसर दिया जाएगा। मंत्रि-मंडल में फेरबदल तय, लेकिन फिलहाल टला केन्द्रीय नेतृत्व के निर्देश और प्रदेश संगठन के समन्वय से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी समय में अपने मंत्रि-मंडल में विस्तार करेंगे। इस दौरान कुछ मंत्रियों-राज्यमंत्रियों की कुर्सी जा सकती है।उनके स्थान पर पूर्व में छूटे कुछ विधायकों को सरकार में अवसर मिलेगा। लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार में कई मंत्रियों के विभाग बदलना तय है। जिन मंत्रियों के पास प्रमुख दो या अधिक विभाग हैं। उनके एक महत्वपूर्ण विभाग छीनकर छोटे विभाग दिए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री के पास कुछ विभाग भी मंत्रियों में बांटे जा सकते हैं।

मोहन की चेतावनी:कार्यालयीन समय का पालन करें अधिकारी-कर्मचारी, सिर्फ परिणाम देने वालों की कलेक्टरी बचेगी
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने निकट भविष्य में होने वाले प्रशासनिक फेरबदल से पहले मैदानी अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ परफॉर्मेंस और परिणाम देने वाले अधिकारी ही मैदान में टिक पाएंगे। हालांकि यह सिद्धांत अन्य अधिकारी एवं कर्मचारियों पर भी लागू होगा। मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में समाधान अभियान की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद कलेक्टरों के साथ वर्चुअली बैठक में निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। उपार्जन से पहले केन्द्रों का समय-सीमा में निर्धारण, उनकी स्थापना और इन केन्द्रों पर सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। CM ने कहा कि संकल्प से समाधान अभियान का अंतिम चरण जारी है। अभियान के अंतर्गत 40 लाख आवेदनों का निराकरण हुआ है। अब 16 मार्च तक जिला स्तरीय शिविर लगना है। अभियान में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। जो कलेक्टर्स जिले की सभी गतिविधियों में परफार्मेंस और परिणाम देंगे वे ही मैदान में रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन और व्यवस्था के संबंध में मिथ्या या भ्रम फैलाने वाली जानकारियों का जिला स्तर पर तत्काल प्रभावी रूप से खंडन किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान में शाला और महाविद्यालयीन स्तर पर परीक्षाओं का समय चल रहा है। जिला अधिकारी शैक्षणिक संस्थाओं, छात्रावासों, विश्वविद्यालय परिसरों का आकस्मिक निरीक्षण आवश्यक रूप से करें। ...तो 6 दिन खुलेंगे सरकारी कार्यालय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने एक बार फिर शासकीय सेवकों से कार्यालयनी समय पालन की अपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में गत दिवस मंत्रालय में कार्यालयीन समय अनुसार उपस्थिति का आकस्मिक निरीक्षण कराया गया था। जिला स्तर पर जिला कलेक्टर्स द्वारा अपने स्तर पर इस प्रकार के निरीक्षण की व्यवस्था की जाए। कार्यालयीन स्टाफ को दी गई सुविधाएं, उनका अधिकार है, इसके साथ उनसे नियमानुसार कार्य लेना भी सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आकस्मिक निरीक्षण की प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी। यदि कार्यालयीन समय के पालन में सुधार नहीं आया तो राज्य में 6 कार्य दिवसीय सप्ताह की व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। शासकीय कार्यालयों में आम नागरिकों के लिए सुगम व्यवस्था स्थापित करना हमारा उद्देश्य है। गेहूं उपार्जन 16 मार्च से मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला कलेक्टर पंजीकृत किसानों में से चिन्हित किसानों के सत्यापन, उपार्जन केन्द्रों पर बारदानों की उपलब्धता और किसानों को समय पर भुगतान के लिए शत-प्रतिशत व्यवस्था सुनिश्चित करें। गेहूं का उपार्जन इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 16 मार्च से 5 मई तक होगा और शेष संभागों जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, चम्बल व सागर में 23 मार्च से 12 मई तक किया जाएगा। किसान अपना पंजीयन 7 मार्च तक करा सकेंगे। खाड़ी देशों में रह रहे नागरिकों के परिवारों से करें संपर्कमुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को खाड़ी देशों में वर्तमान में निर्मित अप्रत्याशित परिस्थितियों को देखते हुए इन देशों में रह रहे जिले के विद्यार्थियों, नागरिकों के परिवारों से सम्पर्क में रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मप्र भवन नई दिल्ली और वल्लभ भवन मंत्रालय में प्रदेशवासियों की सहायता के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। जिला स्तर पर ऐसे व्यक्तियों और परिवारों से कलेक्टर्स निरंतर समन्वय और सम्पर्क रखें।

मंत्रालय में 5 सीनियर अफसरों का टाइम खराब:डीजीए की छापामार कार्रवाई में खुली पोल, विभाग ने सभी जिम्मेदारों को दैनिक सूची बनाने दिए निर्देश
भोपाल। मप्र में कार्यालयीन समय प्रबंधन को लेकर पिछले महीने मारे गए आकस्मिक छापों में पांच वरिष्ठ अधिकारी निशाने पर आ गए हैं। इन अधिकारियों का कार्यालयीन समय बहुत की खराब है। ये न खुद समय पर आते हैं और न ही जाते हैं। इनके अधीनस्त अमले का भी कार्यालयनी समय बिगड़ा हुआ है। हालांकि सामान्य प्रशासन विभाग ने छापामार कार्रवाई के बाद सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि सभी अधिकारी और कर्मचारियों के कार्यालय आने और जाने की दैनिक सूची बनाएं और भेजें। मंत्रालय में जो वरिष्ठ अधिकारी समय प्रबंधन को लेकर सामने आए हैं, उनमें एक अपर मुख्य सचिव और अन्य 4 प्रमुख सचिव स्तर के हैं। बताया गया कि सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ल ने पिछले महीने मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर मंत्रालय खुलते ही दो वरिष्ठ अधिकारियों के कक्षों का निरीक्षण किया था। तक वे कार्यालय में अनुपस्थित मिले। अपर मुख्य सचिव उनके कक्ष के फोटो वरिष्ठ स्तर पर भेजे गए। इनमें से एक वरिष्ठ अधिकारी हाल ही में विभाग बदला गया है। 1 को छोड़कर 4 के पास प्रमुख विभागजिन अधिकारियों का कार्यालनीय समय प्रबंधन खराब हैं, उनमें से 1 अधिकारी को छोड़कर अन्य 4 के पास प्रमुख विभाग हैं। प्रमुख सचिव स्तर के एक अधिकारी पिछले 25 महीने से विभाग में पदस्थ हैं। इनके अधीन तीन प्रमुख विभागध्यक्ष कार्यालय भी हैं। बताते हैं कि दोपहर भोज के बाद इनके लौटने का तय नहीं है। एक अधिकारी का पिछले महीने ही विभाग बदला है, पुराने विभाग में भी उनका कार्यालयीन समय प्रबंधन बिगड़ा था, नए में भी सुधार नहीं है। अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी के ऊपर नए साल में विभागों का भार कम किया था, लेकिन विभाग कम होने पर भी कार्यालयनी समय में सुधार नहीं हुआ। इसी तरह करीब 16 महीने से विभाग की कमान संभाल रहे प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी इसलिए कार्यालय समय पर नहीं आते कि उनके पास अच्छा विभाग नहीं है। विभाग में कुछ काम ही नहीं है। जबकि सरकार की नजर में अधिकारी के हिसाब से बेहतर विभाग है। करीब 8 महीने से विभाग देख रहे प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी का कार्यालय आने का अपना ढंग है। हालांकि मुख्यमंत्री समेत अन्य सभी प्रमुख बैठकों में समय पर पहुंचते का खासा ध्यान रखते हैं।

खाली पदों के सहारे कृषक कल्याण वर्ष मना रही है मप्र सरकार:पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने पीएम को लिखा पत्र, सहकारिता विभाग में 35% पद हैं रिक्त
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश में खेती-किसानी से जुड़े विभाग कृषि, पशुपालन एवं डेयरी, मत्स्य पालन, सहकारिता और उद्यानिकी विभाग में हजारों की संख्या में खाली पड़े पदों को भरने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा है। पटवारी ने पत्र में खाली पदों का हवाला देकर प्रदेश सरकार द्वारा मनाए जा रहे कृषक कल्याण वर्ष पर भी सवाल उठाए हैं। पटवारी के अनुसार कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार विभाग में स्वीकृत 14,537 पदों में से 8,468 पद रिक्त हैं। यानी लगभग 60 प्रतिशत अमला अनुपस्थित है। यह स्थिति केवल कृषि विभाग तक सीमित नहीं है। मत्स्य पालन विभाग में 1,290 पदों में से 722 पद खाली हैं, उद्यानिकी विभाग में 3,079 पदों में से 1,459 पद रिक्त हैं, और पशुपालन एवं डेयरी विभाग में 7,992 पदों में से 1,797 पद खाली हैं।इसी प्रकार सहकारिता विभाग में लगभग 35 प्रतिशत पद रिक्त हैं। खाद्य तंत्र की स्थिति भी चिंताजनक है। खाद्य संचालनालय में 109 पदों के विरुद्ध केवल 48 कर्मचारी कार्यरत हैं। जिलों के कार्यालयों में 598 पदों के मुकाबले मात्र 245 कर्मचारी हैं और खाद्य आयोग में 61 पदों में से 48 पद रिक्त हैं। कृषि प्रशासन के शीर्ष स्तर पर भी स्थिति गंभीर है। वरिष्ठ अधिकारियों के 182 स्वीकृत पदों में से 113 पद खाली हैं। कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय में 1,065 पदों में से 557 पद खाली हैं। बीज एवं फार्म विकास निगम में 14 में से 5 पद रिक्त हैं। जैविक प्रमाणीकरण संस्था में 23 में से 8 पद खाली हैं। कृषि विस्तार प्रशिक्षण संस्थान में 49 में से 27 पद रिक्त हैं तथा मंडी बोर्ड में भी लगभग 40 प्रतिशत पद खाली हैं।तत्काल शुरू की जाए भर्तीपटवारी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मांग की है, केंद्र सरकार की निगरानी में मप्र में कृषि और उससे जुड़े विभागों में रिक्त पदों की स्थिति की तत्काल समीक्षा कराई जाए। खाली पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करवाने के लिए राज्य सरकार को निर्देशित किया जाए। कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मैदानी स्तर पर संस्थागत क्षमता बढ़ाने की राष्ट्रीय रणनीति तैयार की जाए।

67 के हुए शिवराज:जन्म दिन पर पौधरोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश, जीव-प्रकृति से प्रेम करने का दिया संदेश
भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को अपना 67वां जन्म दिन मना रहे हैं। इस खास दिन को उन्होंने सिर्फ खुशियों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सार्थक बनाने के लिए पौधरोपण किया। जन्मदिन के मौके पर उन्होंने कहा कि हर साल के बीतने के साथ हमें यह सोचना चाहिए कि अपनी जिंदगी का बचा हुआ समय कैसे सार्थक और उपयोगी बनाया जाए। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जन्मदिन खुशी और उल्लास के साथ मनाया जाता है। चारों ओर खुशियां होती हैं, लेकिन जब मैं अपने जन्मदिन के बारे में सोचता हूं, तो मेरे मन में एक ख्याल आता है कि जिंदगी का एक और साल बीत गया और जो बची हुई जिंदगी है उसका कैसे सार्थक उपयोग करें। उनका यह भी मानना है कि जन्मदिन हमें अपने जीवन को बेहतर बनाने और समाज के लिए कुछ करने का संकल्प लेने का अवसर देता है।मनुष्य ही नहीं, यह भी हैं चेतना के अंगउन्होंने कहा कि हम सबमें एक ही चेतना है। मनुष्य मात्र ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षी, कीट-पतंगे और पेड़-पौधे भी उसी चेतना के अंग हैं। इसलिए हमें हर जीव और प्रकृति के प्रति प्रेम और सम्मान रखना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि हमारे धर्मग्रंथों में लिखा है आत्मत सर्व भूतेषु, यानी सभी प्राणी अपने जैसे हैं। इसी भावना के साथ हमें सबसे प्रेम करना चाहिए और द्वेष, हिंसा या मारकाट से दूर रहना चाहिए।प्रेम का सबसे बड़ा भाव सेवा मेंउनका मानना है कि प्रेम का सबसे बड़ा रूप सेवा में है। जब हम किसी की मदद करते हैं, किसी की सेवा करते हैं, तब हमारा प्रेम वास्तविक रूप में प्रकट होता है। उन्होंने कहा कि इस जन्मदिन पर उनका संकल्प यही है कि वे हमेशा सेवा और प्रेम की भावना के साथ समाज के लिए काम करें। इसके साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को भी अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि पेड़ हमारी जिंदगी के लिए कितने जरूरी हैं, इसे आम आदमी भी समझता है। ऑक्सीजन, फल और छाया सब कुछ पेड़ों से ही मिलता है।पौधे लगाकर दिया पर्यावरण के संरक्षण का संदेशशिवराज सिंह चौहान ने बताया कि उन्होंने छोटे-छोटे पौधे कई साल पहले लगाए थे, जो अब बड़े होकर फल देने लगे हैं। इसी तरह आज भी उन्होंने नए पौधे लगाकर पर्यावरण के संरक्षण का संदेश दिया। उनका कहना है कि अगर हर व्यक्ति छोटे-छोटे कदम उठाए और पर्यावरण की सेवा करे, तो हमारी दुनिया और समाज दोनों सुंदर और सुरक्षित बन सकते हैं।


