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गौरव गोगोई से जुड़े 'PAK कनेक्शन' को हल्के में नहीं ले रही असम सरकार:सीएम ने मामले की जांच केंद्र से कराने की मांग
गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रविवार को कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई से जुड़े कथित 'पाकिस्तान कनेक्शन' को लेकर गंभीर आरोप लगाए और इस मामले की जांच केंद्र सरकार से कराने की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कोई सामान्य या हल्का मामला नहीं है, बल्कि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम सवाल खड़े होते हैं।मुख्यमंत्री सरमा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख और एलिजाबेथ गोगोई, जो गौरव गोगोई की पत्नी हैं, से जुड़े आरोप बेहद संवेदनशील हैं। उन्होंने साफ कहा कि जब मामला एक मौजूदा सांसद से जुड़ा हो, वह भी लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के उपनेता से, तो इसकी गंभीरता अपने आप कई गुना बढ़ जाती है।मुख्यमंत्री ने कहा, "ये आरोप बहुत गंभीर हैं। जब संसद का एक मौजूदा सदस्य, जो कांग्रेस पार्टी में अहम जिम्मेदारी निभा रहा है, किसी भी रूप में पाकिस्तान से जुड़ा पाया जाता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।" सरमा ने बताया कि मामले की शुरूआती जांच असम पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने की थी। एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी, जिसके आधार पर सीआईडी पुलिस थाने में एक औपचारिक मामला दर्ज किया गया ताकि आगे की जांच की जा सके।मुख्यमंत्री के अनुसार, एसआईटी की रिपोर्ट को असम कैबिनेट के सामने रखा गया। कैबिनेट ने पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की और यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपों की गंभीरता, संवेदनशीलता और दूरगामी असर को देखते हुए इसकी जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराना जरूरी है।उन्होंने कहा, "एसआईटी रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद राज्य कैबिनेट इस नतीजे पर पहुंची कि मामले को केंद्रीय एजेंसी को सौंपना ही सही होगा, ताकि निष्पक्ष और व्यापक जांच हो सके।" मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि असम सरकार इस मामले को औपचारिक रूप से गृह मंत्रालय के पास भेजेगी। गृह मंत्रालय की सहमति मिलने के बाद ही केस को केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा, "हमने गृह मंत्रालय से संपर्क करने का फैसला किया है। मंत्रालय से सकारात्मक जवाब मिलने के बाद जांच पूरी तरह केंद्र को सौंप दी जाएगी।"सरमा ने दोहराया कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सीमा पार से जुड़े मामलों और जनप्रतिनिधियों से जुड़े आरोपों की जांच बिना किसी राजनीतिक दबाव के, पूरी ईमानदारी और कानून के तहत होनी चाहिए। राज्य सरकार एक निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

कांग्रेस और राहुल गांधी झूठ:भाजपा नेता तरुण चुघ का दावा- दोनों ने भारत के खिलाफ काम करने की ले रखी है सुपारी
दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया है कि देश के आर्थिक, ढांचागत, सामाजिक और ग्लोबल फैसलों पर भरोसा दिखाने के बजाय कांग्रेस और राहुल गांधी झूठ, धोखे और अविश्वास का कैंपेन चलाते हैं। भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर उठते सवालों पर भी भाजपा नेताओं ने जवाब दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा, "जब भी भारत मजबूत फैसले लेता है और तरक्की की छलांग लगाता है, तब-तब राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी बिना तथ्यों के देश की छवि खराब करने की साजिश करते हैं। राहुल गांधी लगातार विदेश टूलकिट के माध्यम से भारत के खिलाफ नैरेटिव को आगे बढ़ाते हैं। वह भारत के विरोधियों को ताकत देने की कोशिश करते हैं।"राहुल को महसूस नहीं होती असहजताउन्होंने कहा कि देश के आर्थिक, वैश्विक और सामाजिक फैसलों पर भरोसे की बजाय विपक्षी नेता भ्रम, झूठ और अविश्वास फैलाने का अभियान चलाते हैं। बढ़ते हुए भारत और शक्तिशाली के नए अवसरों में राहुल गांधी को सहजता महसूस नहीं होती है, बल्कि भ्रष्टाचारी और वंशवादी अस्तित्व का खतरा दिखाई देता है। तरुण चुघ ने कहा, "जब देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर, मजबूत विदेश नीति और दुनिया के हर कोने में व्यापार के नए समझौते करता है, तब राहुल गांधी और कांग्रेस नकारात्मक राजनीति की दिशा में निराशा फैलाने का काम कर रहे हैं।"भारत के खिलाफ काम करने की ले ली गई है सुपारीतरुण चुघ ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने भारत के खिलाफ काम करने की सुपारी ली हुई है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बीजेपी सांसद गुलाम अली खटाना ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच मजबूत रिश्तों की वजह से कई चीजों पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो गया है। भारत में काफी इन्वेस्टमेंट हो रहा है। भारत एक बड़ा एक्सपोर्ट करने वाला देश है और इसके ह्यूमन रिसोर्स बहुत बड़ी पूंजी हैं। सबका ध्यान भारत पर है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रास्ता दिखा रहे हैं।

सरसंघचालक का पद किसी जाति विशेष के लिए आरक्षित नहीं:संघ प्रमुख ने किया स्पष्ट, कहा- योग्यता के आधार पर मिलता है पद
मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित 'मुंबई व्याख्यानमाला' के दूसरे दिन समाज, राजनीति, भाषा, जाति और राष्ट्र से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। '100 इयर्स आॅफ संघ जनीर् : न्यू होराइजन्स' विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ में पद योग्यता के आधार पर मिलता है, न कि जाति के आधार पर। मोहन भागवत ने कहा कि सरसंघचालक का पद किसी जाति विशेष के लिए आरक्षित नहीं है। अनुसूचित जाति या जनजाति से होना कोई बाधा नहीं है और ब्राह्मण होना कोई अतिरिक्त योग्यता नहीं मानी जाती। उन्होंने स्वीकार किया कि संघ की शुरूआत में ब्राह्मणों की संख्या अधिक थी, लेकिन आज संघ सभी जातियों के लिए समान रूप से काम करता है।नरेन्द्र मोदी के देश के प्रधानमंत्रीउन्होंने कहा कि कई लोग कहते हैं कि नरेंद्र मोदी आरएसएस से आए प्रधानमंत्री हैं, लेकिन यह सही नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं। उनकी राजनीतिक पार्टी भाजपा है, जो आरएसएस से अलग है। हां, भाजपा में आरएसएस के स्वयंसेवक हो सकते हैं, जैसे अन्य क्षेत्रों में भी हैं।भारत महान बनेगा तो दुनिया बनेगी महानदेश और समाज पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि भारत एक प्राचीन सभ्यता है और अगर भारत महान बनेगा तो दुनिया भी महान बनेगी। उन्होंने कहा कि इस भूमि पर जन्मे लोगों का आचरण ऐसा होना चाहिए कि दुनिया के लोग यहां आकर हमारे व्यवहार से जीवन मूल्य सीखें। एक सक्षम और समृद्ध राष्ट्र के लिए एकजुट और चरित्रवान समाज जरूरी है, जहां कोई भी पीछे न छूटे।भाषा के मुद्दे पर भी संघ प्रमुखभाषा के मुद्दे पर आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हम भारत हैं और हमारी अपनी पहचान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंग्रेजी संघ की कार्यप्रणाली का हिस्सा नहीं बनेगी, क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। हालांकि, जहां अंग्रेजी की जरूरत होती है, वहां उसका उपयोग किया जाता है। संघ किसी भी भाषा का विरोध नहीं करता, लेकिन अपनी मातृभाषा और हिंदी को प्राथमिकता देना जरूरी है।संघ को लेकर नए काम में भ्रम होना स्वाभाविकसंघ को लेकर फैलने वाली भ्रांतियों पर मोहन भागवत ने कहा कि नए काम में भ्रम होना स्वाभाविक है और कई बार यह जानबूझकर भी फैलाया जाता है। संघ के साथ भी ऐसा हुआ है, लेकिन सच्चाई सामने आने पर भ्रम अपने आप खत्म हो जाता है। अब संघ ज्यादा से ज्यादा जानकारी साझा कर रहा है और आउटरीच कार्यक्रमों के जरिए लोगों को संघ के काम के बारे में बताया जा रहा है। आरएसएस की फंडिंग को लेकर उन्होंने कहा कि संघ स्वयंसेवकों के सहयोग से चलता है। यात्राओं के दौरान कार्यकर्ता होटल में रुकने या बाहर खाने के बजाय स्वयंसेवकों के घर ठहरते हैं और वही भोजन करते हैं।सभी धार्मि विचारों का होना चाहिए सम्मानधर्मांतरण और 'घर वापसी' पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि सभी धार्मिक विचारों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन जबरन धर्मांतरण गलत है। ऐसे मामलों में लोगों को उनकी इच्छा से वापस लाया जाना चाहिए। अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर उन्होंने सरकार से अपील की कि उनकी पहचान कर उन्हें निर्वासित किया जाए और देश में कारोबार भारतीयों को ही दिया जाए, चाहे वे किसी भी धर्म के हों।कार्यक्रम में फिल्म जगत और प्रशासनिक सेवा से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियां भी मौजूद रहीं, जिनमें अनन्या पांडे, करण जौहर, अभिनेता जैकी श्रॉफ और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मिलिंद म्हैस्कर व मनीषा म्हैस्कर शामिल थे। यह आयोजन संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर खास महत्व रखता है।

कर्नल सोफिया कुरैशी मामला:SC में सुनवाई पहले विजय शाह ने अपने किए पर फिर मांगी माफी, भाषा में लगाम लगाने खाई कसम
इंदौर। मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विजय शाह ने शनिवार को भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ अपने विवादित बयान पर एक बार फिर बिना शर्त माफी मांगी। उनकी यह माफी ऐसे समय में आई है, जब सर्वोच्च न्यायालय इस मामले की सुनवाई करने वाला है। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उनके शब्द 'देशभक्ति के उत्साह' में कहे गए थे। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या किसी विशेष समुदाय का अपमान करना नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि मैंने यह पहले भी कई बार कहा है, और आज फिर से यह दोहरा रहा हूं।उन्होंने कहा, "मेरे शब्दों में किसी भी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या समाज के किसी भी वर्ग का अपमान करने का इरादा नहीं था। सार्वजनिक जीवन में भाषा पर संयम और संवेदनशीलता अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने घटना पर आत्ममंथन किया है, जिम्मेदारी स्वीकार की है और भविष्य में अपनी भाषा पर अधिक नियंत्रण रखने की कसम खाई है। उन्होंने आश्वासन दिया, "ऐसी गलती फिर से नहीं होगी," और विशेष रूप से सशस्त्र बलों से जुड़े सभी नागरिकों से माफी मांगी।बता दें कि यह विवाद पिछले साल मई में इंदौर जिले के रायकुंडा गांव में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मंत्री कुंवर विजय शाह के भाषण के दौरान एक वीडियो क्लिप के वायरल होने से शुरू हुआ। वीडियो क्लिप में विजय शाह ने कथित रूप से कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में अपमानजनक बयान दिया, जो 'आॅपरेशन सिंदूर'- भारत की आतंकवादी हमले के खिलाफ सैन्य प्रतिक्रिया के दौरान मीडिया को ब्रीफिंग देने के लिए व्यापक रूप से पहचानी गई थीं।टिप्पणियों की हुई थी व्यापक आलोचनाइन टिप्पणियों की व्यापक आलोचना की गई थी, क्योंकि ये अशिष्ट, साम्प्रदायिक और एक महिला अधिकारी, भारतीय सेना, और कुछ समुदायों के प्रति अपमानजनक थीं। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पहले विजय शाह को 'अपमानजनक टिप्पणियां' और 'अशिष्ट भाषा' का उपयोग करने के लिए फटकारा था और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।सुप्रीम कोर्ट ने लिया था मामले पर संज्ञानसुप्रीम कोर्ट ने बाद में मामले का संज्ञान लिया और इसे जांचने के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया। इसके बाद कोर्ट ने विजय शाह द्वारा की गई पहले की माफी को 'नकली आंसू' कहते हुए खारिज कर दिया और जवाबदेही पर जोर दिया। 19 जनवरी को, सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर संबंधित धाराओं के तहत अभियोजन की स्वीकृति पर निर्णय लेने का आदेश दिया था। इस समय सीमा के पास आते ही विजय शाह ने शनिवार को इंदौर के रेजिडेंसी कोठी में कुछ विशेष पत्रकारों को बुलाकर अपने बयान को स्पष्ट करने और अपनी माफी को दोहराने की कोशिश की।

विधानसभा चुनावः केरल फतह करने नितिन उतरे मैदान में:त्रिशूर में प्रबद्ध संगम में शिरकत कर कार्यकर्ताओं में भरा जोश
त्रिशूर। केरल का यह चुनावी साल है। ऐसे में राजनीतिक दलों के दिग्गजों ने प्रदेश का दौरा करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में भाजपा के नव नियुक्त अध्यक्ष नितिन नबीन शनिवार को केरल के दौरे पर पहुंचे। उन्होंने त्रिशूर में पार्टी के वॉल राइटिंग प्रोग्राम के दौरान अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ हिस्सा लिया और दीवार पर पार्टी का चुनाव चिन्ह कमल का फूल बनाया। साथ ही विधानसभा चुनाव को लेकर कार्यकर्ता में जोश भी भरा। त्रिशूर में आयोजित प्रबुद्ध संगम को संबोधित करते हुए भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत के लिए जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उसकी कल्पना साकार होते दिख रही है। उन्होंने कहा कि जहां आज विश्व आर्थिक परेशानियों से गुजर रहा है, विश्व के कई देश चुनौतियों से जूझ रहे हैं, लेकिन इन विषम परिस्थितियों के बावजूद भी भारत 7 प्रतिशत ग्रोथ रेट के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है। ये बताता है कि पीएम मोदी जी का विजन और जनता का विश्वास किस प्रकार से हमारे साथ जुड़ा है। व्यापार करने भारत आ रहे विश्व के देशनितिन नवीन ने कहा, विश्व के सभी देश हमारे साथ व्यापार करने के लिए आगे आ रहे हैं। पिछले दिनों, जो लंबे समय से असमंजस का दौर चल रहा था, मैं प्रधानमंत्री मोदी के इस कूटनीतिक धैर्य को, उनके नेतृत्व को अभिनंदन करता हूं कि उन्होंने अपनी राजनीतिक कूटनीति से अमेरिका के साथ भी ट्रेड डील को पूरा कराया। ये संकेत देता है कि वैश्विक स्तर पर भारत की क्षमता किस प्रकार बढ़ी है।कार्यकर्ताओं को सौंपी जिम्मेदारीभाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विकास के पैमाने पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की उस सोच को हमेशा आगे रखकर काम किया कि हमें देश के अंतिम व्यक्ति तक विकास की योजनाएं भेजनी हैं। नितिन नवीन ने कहा, चाहे वो किसी भी समाज का हो, किसी भी क्षेत्र का हो, चाहे किसी भी इलाके का हो, हम विकास की योजनाओं से अंतिम व्यक्ति तक को जोड़ेंगे। यही कारण है कि उन्होंने देश के हर प्रांत को विकास के उस पटल से जोड़ा। उन्होंने ये कभी नहीं सोचा कि हमें मत कहां से आता है। सबका साथ-सबका विश्वास को प्राथमिकता दी है।मंदिर में की पूजा अर्चनाअपने केरल दौरे के बीच, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कालडी में श्री आदि शंकरा जन्मभूमि का भी दौरा किया और मंदिर में पूजा अर्चना की है। उन्होंने कहा कि महान आदि शंकराचार्य ने हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को मजबूत करने में अमूल्य योगदान दिया और एक ऐसी विरासत बनाई जो पीढ़ियों को प्रेरित व मजबूत करती रहेगी।

ट्रेड डील में देश के अन्नदाताओं के साथ नहीं हुआ अन्याय:अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर बोले गोयल, इन वस्तुओं पर यूएस में लगेगा 0 फीसदी टैरिफ
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता का ढंाचा जारी होने के बाद वाणिज्य और उद्योग मंत्री पियूष गोयल ने शनिवार को विस्तार से उन चीजों के बारे में जानकारी दी है, जिनपर 0 टैरिफ अमेरिका ने लगाया है। इस दौरान उन्होंने यह भी जानकारी शेयर की कि भारत ने अमेरिका को किसी भी एग्री और डेयरी प्रोडक्ट्स पर छूट नहीं दी है। वाणिज्य भवन में पत्रकारों से संबोधित करते हुए गोयल ने कहा, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में डेयरी सेक्टर में किसी प्रकार की कोई छूट नहीं दी गई है। साथ ही, मांस, मुर्गी पालन, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, अनाज, चीनी, बाजरा, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी जैसे फल, खट्टे फल, हरी मटर, मूंग, चना, तिलहन, पशु आहार उत्पाद और तंबाकू पर भी कोई राहत नहीं दी गई है।0 फीसदी टैरिफ वाली वस्तुएंजेम्स एंड डायमंड, फार्मा , स्मार्टफोन्स, स्पाइसेज, चाय कॉफी, कोकोनट, कोकोनोट ऑयल, वेजिटेबल ऑयल, केस्यू नट्स, मसाले, कई फल और सब्जियांकेला, आम, चीनी , पाइनएप्पल, मसरूम, वेजिटेबल के रूट्स, कोका और कोका से बने वस्तु, प्रोसेस फ्यूटस जैसे अमरूद का जेम्स एयरक्रॉफॅ्ट के पार्ट्स, मशीनरी पार्ट, फार्मा की वस्तुएं, जेम्स एंड डायमंड्स, कॉइंस प्लैटिनम , इसेशियल ऑयल, एल्युमिनियम पार्ट , जिंक ऑक्साइड, मिनिरल्स और नेचुरल चीजें, नेचुरल रबड आदिसेब और कपास के आयात पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में इन उत्पादों की खपत, उत्पादन के मुकाबले काफी अधिक है। इस कारण से पहले से ही इन उत्पादों का आयात होता आया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश में करीब 6 लाख टन सेब का आयात होता है। मौजूदा समय में आयात का बेस प्राइस 50 रुपए है और इस पर 50 प्रतिशत टैरिफ है, जिससे घरेलू बाजार में आयातित सेब की कीमत 75 रुपए होती है। आयोतित सेब का बेस प्राइस रखा 80 रुपएउन्होंने आगे बताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में आयातित सेब का बेस प्राइस 80 रुपए रखा गया है। वहीं, टैरिफ 25 प्रतिशत है, जिससे आयातित सेब की कीमत 100 रुपए हो जाती है। इसके साथ ही, आयात के लिए एक कोटा भी निर्धारित किया गया है। ऐसे में घरेलू किसानों को डरने की कोई आवश्यकता नहीं। किसानों के हितों को सर्वोपरि रखकर काम कर रही सरकारकेंद्रीय मंत्री ने कहा कि कपास के साथ भी ऐसा ही है। भारत में कुछ विशेष प्रकार की कपास का हमेशा से आयात होता आया है। इस कारण किसानों के लिए कोई चिंता की बात नहीं है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि सरकार लगातार किसानों के हितों को सर्वोपरि रखकर कार्य कर रही है। इस व्यापार समझौते के तहत कई कृषि उत्पादों जैसे मसालों, चाय, कॉफी और उससे जुड़े उत्पाद, नारियल और नारियल तेल, काजू और अन्य उत्पादों का जीरो ड्यूटी पर अमेरिका को निर्यात होगा। इन सामानों के निर्यात पर लगेगी जीरो ड्यूटी इसके अलावा, रत्न और आभूषण, फार्मा उत्पादों और स्मार्टफोन के निर्यात पर भी जीरो ड्यूटी लगेगी। गोयल ने आगे कहा कि भारत-अमेरिका का लक्ष्य आपसी द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक ले जाना है। इससे आने वाले समय में दुनिया की सबसे बड़ी 30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था में भारतीय निर्यातकों के लिए काफी सारे नए अवसर खुलेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि इससे देश को विकसित भारत 2047 का लक्ष्य पाने में मदद मिलेगी।

मप्र के नौकरशाही को नहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश की परवाह:उच्च शिक्षा विभाग ने कैम्पस के लिए जारी कर दी जातिगत भेदभाव वाली गाइडलाइन, सामान्य वर्ग बाहर
भोपाल। कैम्पस में छात्रों का उत्पीड़न रोकने के लिए लाई गई विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ( यूजीसी ) की गाइडलाइन पर देश भर में मचे बवाल के बाद देश की सर्वोच्च अदालत ने भले ही इसके अमल पर रोक लगा दी हो, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार अपरोक्ष रूप से इसे लागू करने पर आमादा है। विवाद की जड़ में उत्पीडन का शिकार होने वाले छात्रों की श्रेणियां रही हैं, जिनमें सामान्य वर्ग को शामिल नहीं किया गया था। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट का स्टे भी आया। लेकिन लगता है प्रदेश की अफसरशाही को इससे कोई वास्ता नहीं। अदालत के आदेश के तीन दिन बाद ही प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने जो दिशा निर्देश जारी किये हैं उनमें भी कैंपस में पीड़ित होने वाले छात्रों को सिर्फ आरक्षित वर्ग तक ही सीमित रखा गया है। सरकार के इस कदम से सवर्ण समाज में आंदोलन की दबी चिंगारी को फिर हवा मिलने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी की गाइडलाइन लागू करने पर रोक लगा दी थी। सर्वोच्च अदालत ने माना था कि उत्पीडन के शिकार होने वाले छात्रों में सामान्य वर्ग को शामिल न करना और यह मानना की ऐसी सिर्फ आरक्षित वर्ग के साथ ही होगा, उचित नहीं है। इससे भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा। यह समाज को बांटने वाला है और इसका दुरूपयोग हो सकता है। इसके बाद अलग -अलग राज्यों में चल रहे आंदोलन थम गए थे। लेकिन तीन दिन बाद यानी 2 फरवरी को प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश की सभी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार और कॉलेजों के प्राचार्य को एक विस्तृत सर्कुलर भेजता है। उच्च शिक्षा विभाग के अवर सचिव वीरन सिंह भलावी के हस्ताक्षर से जारी इस सर्कुलर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2023 के नियमों का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में अनिवार्य रूप से लोकपाल और विद्यार्थी शिकायत निवारण समिति का गठन किया जाना है। ये समितियां 15 दिनों के भीतर शिकायतों का निराकरण कर संस्था प्रमुख को भेजेंगी। इससे असंतुष्ट होने पर छात्र लोकपाल को अपील करेंगे जहाँ से 30 दिनों के भीतर निराकरण होगा। ख़ास बात यह है कि शिकायत निवारण समितियों में एक सदस्य अनिवार्य रूप से एससी -एसटी - ओबीसी का रखे जाने का प्रावधान है। सामान्य वर्ग के सदस्य की कोई अनिवार्यता नहीं है। आपत्ति वाले प्रावधान जस के तससर्कुलर में छात्रों की शिकायतों में एडमिशन से लेकर सिलेबस, पढाई के स्तर को शामिल किया गया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की मंशा के विपरीत जातिगत भेदभाव यहां मौजूद है। इसके तहत यह मानकर चला जा रहा है कि भेदभाव केवल आरक्षित वर्ग के साथ ही हो सकता है, सामान्य वर्ग के साथ नहीं। सर्कुलर के बिंदु 7 की कंडिका कहती है- श्अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक अथवा दिव्यांग श्रेणियों के विद्यार्थियों से कथित भेदभाव की शिकायत।्य आगे कहा गया है कि लोकपाल का फैसला आने के बाद संस्थान के साथ ही पीड़ित छात्र को भी उसके आदेश की प्रति उपलब्ध कराई जाएगी। जहां शिकायत झूठी पाई जाएगी वहां लोकपाल शिकायतकर्ता के विरुद्ध उपयुक्त कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है। बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रदेश की नौकरशाही इस बात से अनजान है कि इस संवेदनशील मामले को लेकर देश भर में बवाल हो चुका है और सुप्रीम कोर्ट स्थगन आदेश दे चुका है। जाहिर है अफसर इससे अनजान तो नहीं होंगे। फिर , यह इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि किस तरह फाइलें चलती हैं और उन पर हस्ताक्षर होते हैं। अगर सतर्कता दिखाई जाती तो पहले से जारी इस गाइड लाइन से जातियों वाला बिंदु हटाया जा सकता था। सवाल यह भी कि ऐसे दिशा निर्देशों की वजह से यदि कोई अप्रिय घटना घटती है तो फिर जिम्मेदारी किसकी तय होगी।

गहराई, विश्वास और गतिशीलता:भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर पीएम मोदी ने ऐसे जताई खुशी, किसानों और उद्यमियों के हित में भी बोले
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एग्जीक्यूटिव ट्रेड डील पर साइन करने के बाद भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा जारी कर दी गई है। समझौते के तहत टैरिफ में बड़ी कटौती और बाजार पहुंच बढ़ाने पर सहमति बनी है। केंद्र सरकार के अनुसार इस फ्रेमवर्क से भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा अमेरिकी बाजार खुलेगा, जबकि संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों की पूरी सुरक्षा रखी गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अहम समझौते पर खुशी जताई और सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी शेयर की है। गहराई, विश्वास और गतिशीलता, पीएम मोदी का पोस्टपीएम मोदी ने लिखा, हम दो महान देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं। इस समझौते से भारत और अमेरिका दोनों को फायदा होगा और इससे भारत के किसानों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स को काफी फायदा मिलेगा। मैं राष्ट्रपति ट्रंप को दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने के लिए उनकी प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद देता हूं। यह रूपरेखा हमारी साझेदारी की गहराई, विश्वास और गतिशीलता को दर्शाती है।समझौता मेक इन इंडिया को मजबूत करता हैरू पीएम मोदीपीएम मोदी ने अपने पोस्ट में आगे कहा, यह भारत के मेहनती किसानों, उद्यमियों, एमएसएमई, स्टार्टअप इनोवेटर्स, मछुआरों और अन्य लोगों के लिए नए अवसर खोलकर मेक इन इंडिया को मजबूत करता है। यह महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करेगा। भारत और अमेरिका नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और यह रूपरेखा हमारे बीच निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारी को और गहरा करेगा। यह फ्रेमवर्क लचीली और भरोसेमंद सप्लाई चेन को भी मजबूत करेगा और वैश्विक विकास में योगदान देगा।व्यापार समझौते पर दी गोयल ने जानकारीकेंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर व्यापार समझौते पर अहम जानकारी दी, जिसके बाद दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी कर समझौते पर मुहर लगाई। बता दें कि व्यापार समझौते की रूपरेखा के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50ः घटाकर 18 फीसदी किया है। इससे भारतीय कंपनियों को अमेरिका में सामान बेचना सस्ता और आसान हो जाएगा। जिससे निर्यात और रोजगार बढ़ेंगे।

पूर्णिया सांसद को अधी रात उठा ले गई पुलिस:31 साल पुराने मामले में एक्शन, पप्पू यादव ने कार्रवाई को बताया राजनीति से प्रेरित, कहा- मैं झुकूंगा नहीं
पटना। बिहार की राजधानी पटना में पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को पुलिस ने1995 के एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उन्हें शुक्रवार की आधी रात पटना के मंदिरी स्थित आवास से अरेस्ट किया। बताया जा रहा है कि पप्पू यादव शुक्रवार की शाम पटना पहुंचे थे। पटना के एसपी सिटी भानु प्रताप सिंह ने बताया, 1995 का एक मामला है। इसमें ट्रायल चल रहा है, जिसमें सांसद को कोर्ट में उपस्थित होना था, लेकिन वे तय तारीख पर उपस्थित नहीं हुए थे। इस कारण उनको गिरफ्तार किया गया। यहां पर बता दें कि धोखे से कमरा किराए पर लेने के 31 साल पुराने केस में पटना की विशेष अदालत ने पप्पू यादव समेत 3 आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश दिए थे। जिस पर शुक्रवार की आधी रात एक्शन हो गया। पप्पू यादव पर इस मामले में आपराधिक मामले की धारा 419, 420, 468, 448, 506 और 120बी का आरोप है। बताया जा रहा है कि अदालत में सुनवाई जारी थी, लेकिन सांसद की लगातार गैरहाजिरी चल रही थी। पटना के सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने कहा, ष्सांसद को चिकित्सा जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया है, जिसके बाद उन्हें पुलिस स्टेशन ले जाया जाएगा।पप्पू यादव बोले- एक्शन से राजनीति से प्रेरितसांसद पप्पू यादव ने कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इसका संबंध नीट की छात्रा की मौत के लिए उनकी लड़ाई का प्रतिफल है। सांसद पप्पू यादव ने सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर लिखा, बहुत शानदार बिहार पुलिस। हम नीट छात्रा न्याय की लड़ाई लड़े, बिहार पुलिस के पेट में दर्द हो गया। हमें गिरफ्तार करने पटना आवास पहुंच गई, लेकिन इससे पप्पू यादव न झुकेगा न चुप होगा। बेईमानों की कारगुजारियों को बेनकाब करके रहेंगे। जेल भेजो या फांसी दो, पप्पू रुकेगा नहीं।बिहार का सियासी पारा चढ़ाबताया जा रहा है कि मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें शनिवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस कार्रवाई को लेकर बिहार का राजनीतिक तापमान चढ़ गया है। उनके समर्थक इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रहे हैं। बता दें कि पटना के एक छात्रावास में एक छात्रा की मौत को लेकर पप्पू यादव लगातार पुलिस प्रशासन और सरकार पर सवाल उठा रहे थे। संसद के बाहर भी उन्होंने प्रदर्शन किया था। उनके समर्थकों का कहना है कि वे लगातार प्रशासन के सामने थे, तो फिर आधी रात की गिरफ्तारी का क्या मतलब?

मनोज वाजपेयी की फिल्म के टाइटल के विरोध में उठे स्वर:बसपा सुप्रीमों ने भी सुनाई खरी-खरी, प्रतिबंध लगाने भी की मांग
नई दिल्ली। नेटफ्लिक्स की अपकमिंग फिल्म घूसखोर पंडित के टाइटल को लेकर देशभर में विवाद गहराता जा रहा है। फिल्म के नाम को जातिसूचक और एक विशेष समुदाय की छवि को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए इसके विरोध में आवाजें तेजी से उठ रही हैं। फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए फिल्म के टाइटल की कड़े शब्दों में निंदा की और केंद्र सरकार से इस पर तुरंत कार्रवाई की मांग की। मायावती ने एक्स पोस्ट में लिखा, यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यूपी में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ’पंडित’ को घुसपैठिया बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है तथा जिससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय जबरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निन्दा करती है। ऐसी इस जातिसूचक फिल्म पर केन्द्र सरकार को तुरन्त प्रतिबन्ध लगाना चाहिये, बीएसपी की यह मांग।फिल्म को लेकर सोशल मीडिया में बहस तेजफिल्म के विरोध को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। यूजर्स इसे धार्मिक और जातिगत भावनाओं पर हमला करार दे रहे हैं। नेटफ्लिक्स या फिल्म के निर्माताओं की ओर से फिलहाल इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामलाइससे पहले, अधिवक्ता विनीत जिंदल ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि टाइटल घूसखोर पंडित ब्राह्मण समुदाय की गरिमा, प्रतिष्ठा और भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और जानबूझकर अपमानजनक बनाया गया है। याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने बताया कि नेटफ्लिक्स ने इस फिल्म का प्रचार शुरू कर दिया है। श्पंडितश् शब्द को भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से जोड़कर पेश किया जा रहा है, जो ब्राह्मण समुदाय के प्रति अपमानजनक और सांप्रदायिक रूप से उकसाने वाला है।उन्होंने आगे कहा कि फिल्म की रिलीज से ब्राह्मण समुदाय की छवि को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचेगा और सामाजिक सद्भाव बिगड़ेगा। ऐसे में डर है कि यह शो सामूहिक मानहानि, हेट स्पीच और सांप्रदायिक तनाव पैदा करेगा, इसलिए उन्होंने भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दिल्ली हाईकोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप और अंतरिम रोक की मांग की है।

मप्र कांग्रेस ने फिर बदली प्रवक्ताओं के चयन वाली कमेटी:जयवर्धन, हेमंत समेत 7 की एंट्री, समिति के संयोजक समेत 8 को दिखाया बाहर का रास्ता
भोपाल। मप्र कांग्रेस में प्रवक्ताओं का चयन करने वाली कमेटी लेकर मचा घमासान थम नहीं रहा है। प्रदेश कांग्रेस ने एक बार फिर टैलेंट हंट समिति में संशोधन कर दिया है। पिछले दो महीने के भीतर तीसरी बार जारी टैलेंट हंट कमेटी में विधायक जयवर्धन सिंह, हेमंत कटारे, महेश परमार समेत 7 लोगों के नाम जोड़े गए हैं। जबकि पूर्व में घोषित टैलेंट हंट समिति के संयोजक अभय तिवारी, यश घनघोरिया, मेघा परमार, 4 प्रदेश प्रवक्ता समेत 8 सदस्यों को बाहर कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने नई श्टैलेंट हंट्य समिति का गठन किया है। प्रदेश कांग्रेस में प्रवक्ताओं की खोज के लिए 9 दिसंबर को प्रदेश संगठन प्रभारी महामंत्री संजय कामले ने टैलेंट हंट समिति का गठन किया था। इसको लेकर विवाद उठा तो कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने 23 दिसंबर को टैलेंट हंट की नई कमेटी जारी कर दी। जिसमें कमेटी के सदस्यों के क्लस्टर भी तय कर दिए थे। इसके बाद कांग्रेस में विवाद उठा तो मुकेश नायक ने इस्तीफा दे दिया था। हालांकि बाद में प्रदेशाध्यक्ष के दखल के बाद वे वापस काम पर लौटे। नए प्रवक्ताओं की तलाश शुरूप्रदेश कांग्रेस ने दो दिन पहले प्रवक्ताओं को कार्यमुक्त कर टैलेंट हंट कार्यक्रम के जरिए नए प्रवक्ताओं की तलाश शुरू कर दी है। इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुकेश नायक द्वारा 23 दिसंबर को गठित की गई टैलेंट हंट कमेटी में बदलाव कर दिया है। पटवारी ने टैलेंट हंट समिति से अभय तिवारी, युवक कांगे्रस अध्यक्ष यश घनघोरिया, एनएसयूआई अध्यक्ष आशुतोष चैकसे, बाल कांग्रेस अध्यक्ष मेघा परमार और प्रवक्ता अभिनव बरोलया, मिथुन अहिरवार, राहुल राज और आनंद जाट को बाहर कर दिया है। बताया गया कि अभय तिवारी को असम चुनाव में व्यस्त होने की वजह से टैलेंट हंट समिति से बाहर किया गया है। बतौर सदस्य इन्हें किया गया शामिलटैलेंट हंट समिति से हटाए गए पदाधिकारियों के स्थान पर विधायक जयर्वधन सिंह, हेमंत कटारे, महेश परमार, पूर्व विधायक शैलेन्द्र पटेल, विचार विभाग के अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता, मुणाल पंत और अपूर्व भारद्वाज को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। जबकि नई टैलेंट हंट समिति के अध्यख मुकेश नायक को बनाया गया है। जबकि विधायक आरिफ मसूद, विक्रांत भूरिया, महेन्द्र जोशी और रीना बौरासी को नई समिति में भी शामिल किया गया है।

मप्र बनेगा बनेगा देश की दालों का केंद्र:सीहोर के अमलाहा में कल लगेगा देश के कृषि मंत्रियों का जमावड़ा, शिवराज करेंगे अध्यक्षता
भोपाल। सीहोर जिले का अमलाहा क्षेत्र 07 फरवरी को देश की कृषि राजनीति और अनुसंधान का मुख्य केंद्र बनने जा रहा है। यहां आयोजित होने वाले दलहन क्षेत्र के राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के 09 प्रमुख राज्यों के कृषि मंत्री शिरकत करेंगे। इस बड़े आयोजन में दालों के उत्पादन को बढ़ाने, वर्तमान चुनौतियों से निपटने और भविष्य की नई संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।सम्मेलन की कमान खुद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान संभालेंगे। उनके साथ केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चैधरी भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में दलहन अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक, बीज उत्पादक संस्थाएं, दाल उद्योग के बड़े प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो देश को दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का खाका तैयार करेंगे।ये दिग्गज मंत्री होंगे शामिलसम्मेलन की गरिमा बढ़ाने के लिए अलग-अलग राज्यों के कृषि मंत्री सीहोर पहुँच रहे हैं। इनमें शामिल हैं मध्यप्रदेश से एदल सिंह कंसाना, उत्तर प्रदेश से सूर्य प्रताप शाही, पंजाब से सरदार गुरमीत सिंह खुडियन, हरियाणा से श्याम सिंह राणा, छत्तीसगढ़ से रामविचार नेताम, बिहार से राम कृपाल यादव, गुजरात से रमेशभाई कटारा, ओडिशा से कनक वर्धन सिंह देव, पश्चिम बंगाल से सोवानदेव चट्टोपाध्याय शामिल होंगे।क्यों खास है यह सम्मेलनअमलाहा में होने वाली इस चर्चा में दलहन उत्पादक राज्यों के बीच समन्वय और नई तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए दलहन फसलों को बढ़ावा देना है।

पैटर्न के हिसाब से करें पढ़ाई:परीक्षा पे चर्चा प्रोग्राम में पीएम मोदी ने छात्रों को दिया बेशकीमती मंत्र, खुद का भी दिया उदाहरण
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान छात्रों को पढ़ाई के लिए एक बेशकीमती मंत्र दिया। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने पैटर्न के हिसाब से पढ़ाई करें। सबकी सलाह सुनें, लेकिन अपना तरीका तभी बदलें जब आप चाहें। परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में पहले अध्याय आपकी शैली, आपकी गति पर चर्चा के दौरान गुजरात की एक छात्रा ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया। छात्रा ने पूछा कि परीक्षा के समय परिवार और शिक्षक सभी चिंता करते हैं। लेकिन समस्या तब आती है जब शिक्षक पढ़ाई का अलग पैटर्न समझाते हैं और अभिभावक अलग तरीके से पढ़ने के लिए कहते हैं, जबकि छात्रों का खुद का एक अलग पैटर्न होता है। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि यह पैटर्न जीवनभर चलता है।पीएम ने खुद का भी दिया उदाहरणपीएम मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा, मैं प्रधानमंत्री बन गया हूं। फिर भी लोग मुझे अलग-अलग तरीकों से काम करने को कहते हैं। लेकिन सबका अपना-अपना तरीका होता है। बच्चों को उन्हीं के अंदाज में जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, जब परिवार के लोग एक साथ खाना खाने बैठते हैं तो सभी का खाने का पैटर्न अलग होता है। वह सब्जी के साथ खाने की शुरुआत करेगा, कोई दाल से करेगा और कोई दाल-सब्जी सब मिलाकर खाएगा। वहां जब वे अपने पैटर्न के हिसाब से खाते हैं तो उन्हें मजा आता है।अपनी पैटर्न पर करें भरोसाछात्रों को पढ़ाई का मंत्र देते हुए उन्होंने कहा, कुछ लोग सुबह बेहतर पढ़ाई करते हैं, कुछ रात में। आपकी अपनी जो पैटर्न है, उसी पर भरोसा करें। लेकिन सलाह भी लें और अगर उससे आपको फायदा होता है, तो ही उसे अपनी जिंदगी के तरीके में शामिल करें। इसको भी किसी के कहने पर नहीं, बल्कि अपने अनुभव से जोड़ो।पीएम ने कार्यक्रम में बदलाव का भी दिया उदाहरणउन्होंने एक और उदाहरण परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के बारे में दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, जब यह कार्यक्रम शुरू हुआ तो इसका एक अलग पैटर्न था। धीरे-धीरे इसमें कई बदलाव किए गए हैं और इसी तरह अबकी बार अलग-अलग राज्यों में छात्रों से संवाद किया। मैंने भी कुछ चीजें बदलीं, लेकिन अपना मूल तरीका नहीं छोड़ा। जवाब सुनने के बाद छात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का नेचर बहुत अच्छा था। वे हम सब बच्चों के साथ एकदम घुल मिल गए थे। उन्होंने समझाया कि हमें अपने ही पैटर्न में फोकस करना है, लेकिन हमें सभी का पैटर्न सुनना है और सभी में से कुछ-कुछ गुण लेने हैं।

धन्यवाद प्रस्ताव:पीएम मोदी ने लोकसभा की भड़ास निकाली राज्यसभा में, राहुल-खड़गे और कांग्रेस पर जमकर किया वार, गिनाई अपनी उपलब्धियां
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया। पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत विपक्ष के हंगामे के बीच शुरू की। उन्होंने कहा, धन्यवाद प्रस्ताव पर समर्थन के लिए इस सदन में अपनी भावनाओं को व्यक्त करना मैं अपना सौभाग्य मानता हूं। देश आज तेज प्रगति कर रहा है। पीएम ने विपक्ष को अपने निशाने पर लेते हुए कहा कि मैं रोज दो किलो गाली खाता हूं, मोहब्बत की दुकान वाले 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' के नारे लगा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर सिख गुरुओं का अपमान करने का आरोप लगाया और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्र को लेकर भी कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। पीएम मोदी ने अपने स्पीच में कहा कि , मेरी एक प्रार्थना है। आदरणीय खरगे जी की उम्र को देखते हुए, अगर वे बैठकर भी नारे लगाना चाहें तो लगा सकते हैं। पीछे कई सारे युवा नेता हैं। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति के अभिभाषण में देश के मध्यम वर्ग, निम्न-मध्यम वर्ग, गरीब, गांव, किसान, महिलाएं, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, बहुत ही विस्तार से भारत के प्रगति का एक स्वर संसद में गूंजा है। देश के नौजवान भारत के सामर्थ्य को कैसे आगे बढ़ा रहे हैं, इस पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। राष्ट्रपति ने भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रति भी भरोसा जताया है। यह हम सबके लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा, देश का हर व्यक्ति यह महसूस कर रहा है कि एक अहम पड़ाव पर हम पहुंच चुके हैं। न हमें रुकना है, न हमें पीछे मुड़कर देखना है। हम आगे ही आगे देखना है और लक्ष्य को प्राप्त करके ही हमें सांस लेनी है। उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।'युवा होता जा रहा हमारा देश'अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आगे कहा, भारत के भाग्य के लिए अनेक संयोग एक साथ हमें नसीब हुए हैं। ये अपने आप में बहुत ही उत्तम संयोग है। सबसे बड़ी बात है कि विश्व के समृद्ध से समृद्ध देश भी बुजुर्ग होते जा रहे हैं। वहां की आबादी उम्र के उस पड़ाव पर पहुंची है, जिन्हें हम बुजुर्ग के रूप में जानते हैं। हमारा देश ऐसा है, जो विकास की नई ऊंचाइयां छू रहा है, वैसे ही देश हमारा युवा होता जा रहा है। युवा आबादी वाला देश बनता जा रहा है। भारत के प्रति बढ़ा दुनिया का आकर्षणउन्होंने कहा, दूसरी तरफ मैं देख रहा हूं जिस प्रकार विश्व का भारत के प्रति आकर्षण बढ़ा है। विश्व भारत के प्रतिभा (टैलेंट) का अहमियत समझ रहा है। हमारे पास आज दुनिया का बहुत ही अहम टैलेंट पूल है। युवा टैलेंट पूल है, जिसके पास सपने, संकल्प और सामर्थ्य है। यानी शक्ति का आशीर्वाद हमारे साथ है।'दुनिया की चुनौतियों को समाधान दे रहा भारत'प्रधानमंत्री ने कहा, आज विश्व में जो चुनौतियां पैदा हो रही हैं, भारत उनका समाधान देने, आशा की किरण देने वाला देश बना हुआ है। हम समाधान दे रहे हैं। आज अहम अर्थव्यवस्थाओं में भारत की विकास दर काफी ऊंची है। ऊंची विकास दर और कम महंगाई एक अनोखी उपलब्धि है।इनका अहंकार सातवें आसमान परवहीं राहुल गांधी द्वारा केन्द्रीय राज्य मंत्री बिट्टू गद्दार दोस्त कहने पर पीएम ने कहा कि कल इस सदन के एक सांसद को कांग्रेस के युवराज ने गद्दार कह दिया। सोचिए, इनका अहंकार सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। उन्होंने (कांग्रेसी युवराज) उन्हें गद्दार इसलिए कहा क्योंकि वे सिख थे। यह सिखों का अपमान था, गुरुओं का अपमान था। कांग्रेस के अंदर सिखों के प्रति जो कूट-कूटकर नफरत भरी हुई है, यह उसी की अभिव्यक्ति थी।असम के लोगों से नफरत करती है कांग्रेसउन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी असम के लोगों से गहरी नफरत रखती है। जब कांग्रेस ने भूपेन हजारिका को भारत रत्न दिए जाने के फैसले का विरोध किया, तो मुझे बहुत दुख हुआ। मल्लिकार्जुन खड़गे ने हजारिका जी को 'महज एक गायक' कहकर खारिज कर दिया, जो न केवल असम, बल्कि पूरे कला जगत का घोर अपमान है।राजनीतिक विद्वेश के कारण सदांनदजी के काट दिए गए पैरउन्होंने कहा कि यही नहीं, राजनीतिक विद्वेष के कारण हमारे सदानंदन जी मास्टर के दोनों पैर काट दिए गए। भरी जवानी में दोनों पैर काट दिए। कटे हुए पैर से वे जिंदगी गुजार रहे हैं, लेकिन संस्कार इतने ऊंचे हैं कि वाणी में भी अपशब्द नहीं निकलता है। ऐसे व्यक्तित्व को, सदानंदन जी मास्टर को, मैं हृदय से अभिनंदन करता हूं, क्योंकि इतने हमले के बाद भी देश की सेवा का अपना व्रत जारी रखा और आज देश के नीति-निर्धारण में अपना योगदान दे रहे हैं।हताश कांग्रेस खोदना चाहती है हमारी कब्रपीएम मोदी ने कहा कि सत्ता हमारे लिए सुख का रास्ता नहीं है, सत्ता हमारे लिए सेवा का माध्यम है। मुद्रा योजना से लाखों-करोड़ों लोगों को मदद मिली। स्वरोजगार को बल दिया। कांग्रेस ने कभी स्टार्टअप कल्चर को प्रमोट ही नहीं किया। इनका तो हाल ऐसा है कि ये अपने घर के स्टार्टअप को भी ठीक नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हताश है और मोदी की कब्र खोदना चाहती है क्योंकि 2014 से पहले, मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर कई जानें गईं। इसके जवाब में, हमने ऐसे सभी क्रॉसिंग बंद करवा दिए। इसके अलावा, 2014 से पहले देश भर के 18,000 से अधिक गांवों में बिजली नहीं थी। तब से, इन गांवों में बिजली और रोशनी की व्यवस्था हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पहले, हमारी सेनाओं के लिए गोला-बारूद और बुलेटप्रूफ जैकेट की कमी की खबरें अक्सर आती थीं। हमने अपनी सेना को आवश्यक संसाधन और उपकरण उपलब्ध कराकर समस्या का समाधान किया।

संसद आने से मैंने ही रोका मोदी को:ओम बिरला का चौंकाने वाला खुलासा- था अनहोनी का शक
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार की शाम 5 बजे लोकसभा में धन्यवाद् प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देने वाले थे, लेकिन विपक्षी हंगामे के कारण वे स्पीच देने लोकसभा नहीं गए और पीएम के जवाब के बिना ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने वोटिंग कराकर धन्यवाद प्रस्ताव को पास कर दिया। धन्यवाद प्रस्ताव पारित होने के बाद पीएम मोदी को लेकर ओम बिरला ने सदन में बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दावा कि पीएम मोदी के साथ सदन में अप्रत्याशित घटना हो सकती थी, एसे में हमने ही पीएम से सदन में न आने का आग्रह किया था।सांसदों के अप्रिय और असंयमित व्यवहार को लेकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। स्पीकर ओम बिरला ने साफ शब्दों में कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे पवित्र मंच है और यहां इस तरह का व्यवहार न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि देश की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है। उन्होंने सभी सांसदों से संयम बरतने और संसदीय मर्यादाओं का पालन करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि कल जो कुछ भी हुआ लोकतंत्र के इतिहास में काले धब्बे जैसा है। संसद केवल बहस का मंच नहींस्पीकर ओम बिरला ने यह भी खुलासा किया कि जब प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान जवाब देने वाले थे, तब उन्हें ठोस जानकारी मिली थी कि कांग्रेस के कुछ सदस्य कोई अप्रत्याशित कदम उठा सकते हैं। इसी कारण उन्होंने स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने अंत में कहा कि संसद केवल बहस का मंच नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है।हंगामे के चलते लोकसभा स्थगितलगातार नारेबाजी और व्यवधान के कारण लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर तीन बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। सदन में व्यवस्था बनाए रखने की तमाम कोशिशों के बावजूद हालात काबू में नहीं आ सके।पीएम के बयान के बिना पारित हुआ धन्यवाद प्रस्तावलोकसभा में विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित हो गया। खास बात यह रही कि इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परंपरा के अनुसार अपना भाषण नहीं दिया। 2004 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब संसद में बिना प्रधानमंत्री के भाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया। यह प्रस्ताव ध्वनि मत से पास हुआ। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने धन्यवाद प्रस्ताव पर विपक्ष के संशोधनों को वोटिंग के लिए रखा, जो खारिज हो गए। इसके बाद अध्यक्ष ने 28 जनवरी को दिए गए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पढ़ा, जिसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इस बीच विपक्ष लगातार हंगामा करता रहा।

ज्ञान की कोई सीमा नहीं, अज्ञान की कोई उम्र नहीं:नड्डा के अबोध बालक बयान पर सुधांशु ने राहुल पर ऐसे कसा तंज
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने नेता सदन जेपी नड्डा के उस बयान पर अपनी बात रखी, जिसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का बिना नाम लिए सदन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को कहा कि अपनी पार्टी को अबोध बालक का बंधक मत बनाइए।अब सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने यदि अबोध शब्द का प्रयोग किया है तो यह बोध शब्द में अ प्रत्यय लगाकर बना है। अर्थात जिसे ज्ञान ही न हो। वैसे ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती है और अज्ञान की कोई उम्र नहीं होती है। यह बात नेता प्रतिपक्ष के आचरण से प्रमाणित होती है।सदन के पटल पर मीडिया रिपोर्ट प्रामाणिक तथ्य नहींभाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आगे कहा कि अबोध होने का प्रमाण ये है कि जिसे ये न पता हो कि फ्लोर ऑफ द हाउस में सब्सटेंशियल एविडेंस मीडिया रिपोर्ट्स नहीं होती, सदन के पटल पर मीडिया रिपोर्ट प्रामाणिक तथ्य नहीं हैं। जिसे ये न पता हो कि सेना अध्यक्ष-प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के बीच का कम्युनिकेशन राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और गोपनीय होता है, अतः यह ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट 1923 में आता है, वो पब्लिक डोमेन में नहीं हो सकता, उस पर सार्वजनिक चर्चा नहीं हो सकती। जो यह न जानता हो, वो अबोध है।सुधांशु ने नेहरू को भी घेरोसुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अगर किताब की बात है तो मैं कोट करता हूं और इसे सिद्ध कर सकता हूं। 19 नवंबर 1962 में जवाहरलाल नेहरू ने अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी को लिखा डिक्लासिफाइड बाय जेके लाइब्रेरी इन 2010 कि हमें बी2 बॉम्बर चाहिए, स्क्वाड्रन चाहिए उसके लिए पायलट, जमीन पर तकनीक स्टाफ और रडार पर लोग भी आपके (यानी अमेरिकी) रहेंगे, यानी एक प्रकार से भारत की वायुसेना की कमान अमेरिकी ले लें। उस समय अमेरिका में भारत के राजदूत बीके नेहरू, जो जवाहरलाल नेहरू जी के भतीजे भी थे। उन्होंने अपनी किताब नाइस गाइज फिनिश सेकंड में लिखा कि मैं जब वो पत्र अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार को देने जा रहा था तो उन्हें इतनी शर्म महसूस हो रही थी कि वो अपने को रोने से नहीं रोक पाए।शर्मनाक सरेंडर, भतीजे की जुबानीउन्होंने लिखा कि चाचाजी के शर्मनाक सरेंडर की कहानी खुद उनके सगे भतीजे की जुबानी। राज्यसभा में गुरुवार को जेपी नड्डा ने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को संबोधित करते हुए सदन में कहा कि अपनी पार्टी को अबोध बालक का बंधक मत बनाइए। इससे मल्लिकार्जुन खड़गे भड़क गए और उन्होंने सदन में जेपी नड्डा की बात का खंडन किया।

संसद में संग्रामः PM के भाषण के बिना LS में पास हुआ धन्यवाद प्रस्ताव:विपक्ष का हंगामा बना वजह, राज्यसभा में नड्डा ने खड़गे पर कसा तंज
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का आज 7वां दिन है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आज धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब पीएम मोदी को देना था, लेकिन पीएम की भाषण के बिना ही हंगामे के बीच धन्यवाद प्रस्ताव लोकसभा से पारित हो गया है। 2004 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के भाषण के बिना पास हुआ है। इससे पहले 10 जून 2004 को विपक्ष ने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को धन्यवाद प्रस्ताव पर नहीं बोलने दिया गया था।बता दें कि पीएम मोदी 4 फरवरी को चर्चा का जवाब देने वाले थे। इसके लिए शाम 5 बजे का समय भी तय था, लेकिन हंगामे की वजह से ऐसा नहीं हो सका था। इसके बाद संभावनाएं जताई जा रही थीं कि पीएम आज इस चर्चा का जवाब दे सकते हैं। अब इन सभी कयासों पर विराम लग गया है। पीएम की स्पीच के बिना ही हंगामे के बीच धन्यवाद प्रस्ताव लोकसभा से पारित हो गया है। स्पीकर ओम बिरला ने हंगामे के बीच ही धन्यवाद प्रस्ताव को वोटिंग के लिए लिया और ध्वनिमत से सदन ने इसे पारित कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री आज शाम 5 बजे राज्यसभा में भाषण दे सकते हैं।दोनों सदनों में हुआ जमकर हंगामाबता दें कि गुरुवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में जमकर हंगामा हुआ। लोकसभा शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की। इस पर स्पीकर ने पहली बार 65 सेकंड के भीतर और दूसरी बार 5 मिनट में कार्यवाही स्थगित कर दी। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। वहीं राज्यसभा में राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने से रोकने के मुद्दे पर राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच तीखी तकरार हुई। नड्डा-खड़गे के बीच हुई तीखी बहसमल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राहुल को पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब नहीं बोलने दिया गया। मैं उस किताब पर यहां बात करना चाहता हूं। इस पर नड्डा ने उन्हें बीच में रोकते हुए कहा कि दूसरे सदन की बात यहां नहीं कर सकते। आप कांग्रेस को अबोध बालक का बंधक न बनने दें। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी को बोलने का पूरा मौका दिया गया। उनको कई बार मौका दिया गया। सदन नियमों से चलेगा। वह नियम ही नहीं मानते। लगातार हंगामे के बाद विपक्षी सांसद राज्यसभा से वॉकआउट कर गए।

सीएम मोहन हरिद्वार के दौरे पर:योगपीठ परिसर में योगगुरु के साथ किया शीर्षासन, तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन दिनों हरिद्वार प्रवास पर हैं। अपने दौरे के दूसरे दिन यानि गुरुवार को सीएम डॉ. यादव ने पतंजलि योगपीठ पहुंचकर योगगुरु बाबा रामदेव के साथ योगाभ्यास किया। इस अवसर पर दोनों ने विभिन्न योगासन किए और योग के महत्व पर चर्चा भी की। योगपीठ परिसर में मुख्यमंत्री का यह रूप लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया।हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्वागत योगगुरु बाबा रामदेव ने किया। इसके बाद दोनों ने योग सत्र में भाग लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री और बाबा रामदेव ने साथ-साथ शीर्षासन किया, जिसकी तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। मुख्यमंत्री का यह योगमय रूप पहली बार सार्वजनिक रूप से देखने को मिला, जिसे लोगों ने खूब सराहा।कोई साधारण आसन नहीं शीर्षासनविशेषज्ञों के अनुसार शीर्षासन कोई साधारण आसन नहीं है। इसे करने के लिए लंबे समय तक अभ्यास, शारीरिक संतुलन और मानसिक एकाग्रता आवश्यक होती है। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा सहजता से शीर्षासन करना इस बात का संकेत है कि वे नियमित रूप से योग और प्राणायाम का अभ्यास करते हैं। बाबा रामदेव ने भी मुख्यमंत्री के योग कौशल की प्रशंसा करते हुए कहा कि योग व्यक्ति को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी सशक्त बनाता है।योगाभ्यास के बाद कन्या गुरुकुल पहुंचे सीएम मोहनयोगाभ्यास के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कन्या गुरुकुल पहुंचे, जहां उन्होंने बाबा रामदेव के साथ हवन कार्यक्रम में भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार और हवन की आहुतियों के बीच मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और योग परंपरा विश्व को स्वस्थ जीवन की दिशा दिखा रही है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज पूरी दुनिया भारत की इस प्राचीन विद्या को अपना रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से भी नियमित योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।मुख्यमंत्री और बाबा रामदेव का यह योगाभ्यास कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि आमजन के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा भी बन गया।

राहुल ने नरवणे की किताब दिखाकर भाजपा को दिया पलटवार का मौका:निशिकांत दुबे ने 40 किताबों की लिस्ट शेयर कर उजागर किया कांग्रेस का काला इतिहास
नई दिल्ली। पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब को लेकर संसद में चल रहे विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार पर पलटवार किया है। उन्होंने 40 किताबों की एक लिस्ट शेयर की, जिनके बारे में उनका दावा है कि वे भारत का असली इतिहास बताती हैं और पार्टी के पिछले शासन से जुड़े कथित विवादों को उजागर करती हैं। निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 40 किताबों की एक लिस्ट जारी की। उन्होंने कहा कि इन किताबों में भारत के ऐतिहासिक वृत्तांत, 1975 और 1977 के बीच आपातकाल की अवधि, वंशवादी राजनीति की आलोचना और अन्य विवरण शामिल हैं। किताबों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि वे कांग्रेस शासन के विवादास्पद पहलुओं को उजागर करती हैं।लिस्ट में किताब का शीर्षक और सरांश भी शामिलभाजपा सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 40 अलग-अलग पोस्ट किए, जिनमें से हर एक में उनकी लिस्ट की एक किताब का शीर्षक, लेखक और सारांश शामिल था। निशिकांत दुबे ने तर्क दिया कि अप्रमाणित सामग्री पर चर्चा करने के बजाय संसद को उन किताबों पर विचार करना चाहिए, जो पहले ही प्रकाशित हो चुकी हैं और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। निशिकांत दुबे के अनुसार, ये किताबें नेहरू-गांधी परिवार और कांग्रेस सरकारों के असली इतिहास पर प्रकाश डालती हैं।राहुल ने लोकसभा में उठाया था भारत-चीन गतिरोध का मुद्दा उठायह घटनाक्रम तब हुआ जब इस हफ्ते की शुरुआत में संसद में तीखी बहस हुई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 2020 के भारत-चीन गतिरोध का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी ने एक मैगजीन आर्टिकल का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि पूर्व सेना प्रमुख की एक अप्रकाशित किताब का जिक्र था। उन्होंने आगे दावा किया कि किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बारे में भी जिक्र है। इन दावों पर सत्ता पक्ष ने जोरदार विरोध किया, जिसमें सदस्यों ने मांग की कि राहुल गांधी संसदीय नियमों का पालन करें और सदन के अंदर केवल श्प्रामाणिक स्रोतश् ही पेश करें।

भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित:भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर शिवराज का दावाः कांग्रेस को बताया झूठ की दुकान
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सियासी घमासान जारी है। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि इस समझौते से देश के किसानों का नुकसान होगा। हालांकि विपक्ष के आरोपों औ किसानों को समझाने के लिए भाजपा नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया है। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता कूटनीति, विकास और सम्मान का एक अनोखा उदाहरण है। यही नहीं भारत के हितों की रक्षा करते हुए किसानों पर पूरा ध्यान दिया गया है। भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते के लिए शिवराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद भी दिया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा, संसद में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने समझौते को लेकर चीजें स्पष्ट कर दी हैं। ये ऐसा व्यापार समझौता है, जो कूटनीति, विकास और सम्मान का अनुपम उदाहरण है। मैं कृषि मंत्री के नाते पूरी जिम्मेदारी से कहता हूं कि भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस समझौते में देश के किसानों का पूरा ध्यान रखा गया है, खासकर यहां के अनाज, फल और मिलेट्स। इनके लिए कोई बाजार नहीं खोला गया है। हमारे किसान पूरी तरह सुरक्षित हैं।टैरिफ घटने से किसानों को होगा फायदा उन्होंने कहा कि टैरिफ घटने से किसानों को फायदा होगा। पहले साल 63 हजार करोड़ रुपए का चावल निर्यात किया गया। यह निर्यात बढ़ेगा। चावल व टेक्सटाइल का निर्यात और बढ़ेगा। शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि टेक्सटाइल सेक्टर निर्यात क्षेत्र में बहुत उल्लेखनीय भूमिका निभा रहा है। इसलिए टेक्सटाइल का निर्यात बढ़ने से कपास के किसानों को भी फायदा होगा। उन्होंने दोहराया कि यह व्यापार समझौता भारत और यहां के किसानों के हित में है। उनके हित पूरी तरह सुरक्षित हैं।झूठ की दुकान है कांग्रेसविपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस एक झूठ की दुकान है। वह अफवाहों के जरिए अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। मैदान में कांग्रेस कभी जीती नहीं है। लगातार हार की निराशा और हताशा कांग्रेस की कुंठा के रूप में प्रकट हो रही है। उनके खेत की मेड़ दिखाई नहीं देती है, बल्कि सिर्फ सत्ता की सीढ़ी दिखाई देती है।कांग्रेस के लोग कर रहे अमर्यादित व्यवहारशिवराज सिंह चौहान ने कहा, कांग्रेस के लोग अमर्यादित व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक मर्यादाओं की धज्जियां उड़ाई हैं। संसद को विपक्ष ने सड़क का चैराहा बना दिया है। उन्होंने कहा कि मुझे तकलीफ है कि क्या संसद के अंदर गुंडों की तरह व्यवहार किया जाएगा। प्रधानमंत्री को संसद में बोलने से रोका जा रहा है। वाणिज्य मंत्री को सदन में बोलने नहीं दिया जाता है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील से देश के अन्नदाता होंगे तबाह:जीतू ने लगाया गंभीर आरोप, कर्ज को लेकर मोहन को भी घेरा
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने देश और प्रदेश में सबसे अधिक पीड़ित और दुखी किसान और युवा के होने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील से किसानों का बुरा हाल हो जाएगा। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पटवारी ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा दिया गया हालिया बयान, जिसमें भारत-अमेरिका ट्रेड डील की जानकारी सामने आई है, बेहद चिंताजनक है। इस डील के तहत भारत अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों पर शून्य प्रतिशत टैरिफ लगाएगा। इसमें ड्राई फ्रूट्स, फल-सब्जियां, शराब, स्पिरिट, औद्योगिक उत्पाद, रसायन और चिकित्सा उपकरण शामिल हैं। वहीं, भारत में उत्पादित कृषि सामग्री जब अमेरिका जाएगी तो उस पर 18 प्रतिशत तक टैक्स लगेगा।अमेरिका के कृषि मंत्री के बयान का दिया हवालाउन्होंने सवाल उठाया कि जब अमेरिका का कृषि मंत्री खुलकर बयान दे रहा है, तो भारत के कृषि मंत्री, जो स्वयं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं, इस विषय पर मौन क्यों हैं? यह चुप्पी किसके दबाव में है? जीतू पटवारी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पहले ही आगाह किया था कि यह ट्रेड डील 100 प्रतिशत भारत के खिलाफ होगी और सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में झुकेगी। आज यह बात एक बार फिर सत्य साबित हो गई है।किसानों की स्थिति हो रही बदतरउन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में किसान की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। किसी भी फसल का न तो उचित मूल्य मिल रहा है और न ही एमएसपी पर खरीदी हो रही है। भाजपा सरकार ने खेती को लाभ का धंधा बनाने का वादा किया था, लेकिन आज भारत दुनिया में किसानों की आत्महत्या के मामलों में सबसे ऊपर पहुंचता जा रहा है, जो अत्यंत चिंताजनक है। यदि अमेरिका से सस्ता कृषि उत्पादन शून्य प्रतिशत टैक्स पर भारत आएगा, तो देश के किसानों की आमदनी पूरी तरह तबाह हो जाएगी। कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ किसी भी प्रकार की घात के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी और निर्णायक आंदोलन करेगी।कर्ज लेने में मोहन ने सभी मंत्रियों को छोड़ा पीछेकांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कर्ज लेने के मामले में अपने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को पीछे छोड़ दिया है। चालू वित्त वर्ष में प्रदेश सरकार अब तक 1 लाख 78 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है और हाल ही में लिए गए 5,200 करोड़ रुपए को मिलाकर प्रदेश पर प्रतिदिन लगभग 213 करोड़ रुपए का कर्ज बढ़ रहा है। कांग्रेस पार्टी स्पष्ट मांग करती है कि भाजपा सरकार एक श्वेत पत्र जारी करे, जिसमें प्रदेश की आर्थिक स्थिति और सुधार की योजना स्पष्ट हो।

कोई गली का गुंडा भी ऐसा नहीं करेगा:राहुल के गद्दार कहने पर बिट्टू ने लगाए गंभीर आरोप, कहा- वह मुझ पर हमला करने वाले थे
नई दिल्ली। केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने संसद परिसर में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की तरफ से गद्दार कहे जाने पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने उनके ऊपर शारीरिक रूप से हमला करने वाले थे। उन्होंने आगे कहा कि आज तो कोई गली का गुंडा भी ऐसा नहीं करेगा जैसा राहुल गांधी ने किया। मीडिया से बात करते हुए रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा राहुल ने मेरे से हाथ मिलाने की कोशिश की, लेकिन जब मैंने हाथ नहीं मिलाया, तो वह मुझ पर हमला करने ही वाले थे। केसी वेणुगोपाल और कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने राहुल गांधी को पकड़ा। अगर वे उन्हें नहीं पकड़ते तो पता नहीं क्या होता। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अगर राहुल गांधी हमला करने आते तो मेरे हाथ भी बंधे हुए नहीं थे।मुझे सामने देखकर राहुल को होता है दर्दकेंद्रीय मंत्री ने बताया कि बहस के बाद जब वे अंदर चले गए। लेकिन सवाल ये है कि वे कैसे गलत शब्द बोल सकते हैं और कहते हैं कि दोबारा मेरे पास ही आओगे। रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, राहुल गांधी गलतफहमी में हैं। भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे सम्मान दिया है और कांग्रेस नेताओं के सामने बैठाया। उन्हें (राहुल गांधी) को इस बात का दर्द है। मुझे सामने देखकर उन्हें रोज दर्द होता है। वह दर्द आज राहुल गांधी की जुबान और शारीरिक तौर पर साफ दिखाई दिया।कांग्रेस पर सिखों की हत्याएं कराने के लगाए आरोप इसी बीच, केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर सिखों की हत्याएं कराने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा, ये वे लोग हैं, जिनके समर्थकों ने हजारों सिखों को उनके गले में टायर डालकर और आग लगाकर मारा। उसके बाद गुरुद्वारों को तोड़ा गया। दरबार साहिब में गुरु ग्रंथ साहिब के अंगों में गोली लगी। इसलिए ये हमेशा सिखों के दुश्मन रहे हैं।अगर गांधी परिवार होता तो हमारे दादा नहीं बनते सीएमरवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, उनकी पार्टी (कांग्रेस) में हमेशा यह दर्द था कि मेरे पिता शहीद हुए थे और उनके दादा भी शहीद हुए थे। मैं जहां भी जाता था और तारीफ में नारे लगाता था, तो इससे उन्हें तकलीफ होती थी। कांग्रेस पार्टी ने पंजाब में हमेशा सिखों को मरवाया है। जब नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री बने और गांधी राज खत्म हुआ, उस समय मेरे दादा (सरदार बेअंत सिंह) मुख्यमंत्री बने। अगर ये लोग (गांधी परिवार) होते, तो वे सीएम नहीं बन पाते। वे पंजाब में अमन-शांति लेकर आए। सिखों-हिंदुओं को मरवाने की लड़ाई बंद हो गई थी। मेरे प्रति इसका दुख भी कांग्रेस पार्टी के मन में रहता है।

सुर्खियों में रहने जनता को गुमराह कर रहे पीसीसी चीफ:मोहन के मंत्री का जीतू पर तीखा प्रहार
भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं की जनसमस्याओं को सुना और अनेक मामलों का मौके पर ही समाधान किया। जिन समस्याओं का तत्काल समाधान संभव नहीं हो सका, उन्हें संबंधित विभागों को प्रेषित कर शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए गए। कार्यकर्ताओं सुनवाई के बाद श्री सारंग ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित पूरी कांग्रेस सुर्खियों में बने रहने के लिए असत्य और तथ्यहीन बयान देकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। झूठ और फरेब की राजनीति करना कांग्रेस की पुरानी आदत रही है, जिसे जनता अब भली-भांति समझ चुकी है। मध्यप्रदेश सरकार पूर्ण आर्थिक अनुशासन का पालन करते हुए कार्य कर रही है।मोदी जी के नेतृत्व में भारत को मिला वैश्विक सम्मानसारंग ने कहा कि हाल ही में अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील की पूरी दुनिया में सराहना हो रही है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मजबूत निर्णय क्षमता का परिणाम है। अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील से भारत के लिए नए व्यापारिक अवसर खुलेंगे और भारत वैश्विक मंच पर एक सशक्त अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित होगा। आर्थिक अनुशासन का पालन कर रही है मप्र सरकारकांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा मप्र सरकार पर लगाए आरोपों को तथ्यहीन और भ्रामक बताते हुए सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश की भाजपा सरकार पूर्ण आर्थिक अनुशासन का पालन करते हुए कार्य कर रही है। राज्य सरकार द्वारा लिया गया कर्ज पूरी तरह पूंजीगत व्यय के लिए उपयोग किया जा रहा है, जो अर्थशास्त्र की दृष्टि से उचित और आवश्यक है। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। कांग्रेस के नेताओं को बिना तथ्यों के आरोप लगाने की आदत है। सारंग ने राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के साथ किए गए व्यवहार की कड़ी निंदा की।

मप्र सत्ता व संगठन में बड़े बदलाव के संकेत:निगम-मंडल, प्राधिकरण और संगठनात्मक पदों पर जल्द होंगी नियुक्तियां
भोपाल। मध्य प्रदेश में आने वाले दिनों में सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर बड़े पैमाने पर नियुक्तियां होने की संभावना है। जिला स्तर से लेकर प्रदेश कार्यसमिति, निगम, मंडल, आयोग और बोर्ड तक राजनीतिक संतुलन साधने की कवायद तेज हो गई है। इसे लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व से मुला$कात की। नियुक्तियों को लेकर बीच लगातार मंथन और बैठकों का दौर जारी है।सूत्रों के मुताबिक, पहले सीमित संख्या में प्राधिकरणों और निगमों के लिए प्रस्तावित सूची भेजी गई थी, लेकिन केंद्रीय संगठन ने सभी खाली पदों के लिए एक समग्र सूची तैयार कर भेजने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद अब नए सिरे से पूरी प्रक्रिया शुरू की गई है। राष्ट्रीय संगठन में हालिया बदलावों के बाद, प्रदेश से कुछ नेताओं को राष्ट्रीय स्तर की टीम में समायोजित किए जाने की भी चर्चा है। वहीं राज्य स्तर पर निगम, मंडल और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर बड़े शहरों में विशेष फोकस रखा गया है।राजनीतिक नियुक्तियों में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए ग्वालियर-चंबल, मालवा, महाकौशल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व दिए जाने की रणनीति बनाई जा रही है। सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय नेताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों में उनकी पसंद को भी तवज्जो दी जाएगी, ताकि संगठनात्मक संतुलन बना रहे। इसके अलावा, विधानसभा चुनाव में कम अंतर से हारने वाले नेताओं को भी एडजस्ट करने की तैयारी है। इन नेताओं को मंत्री का दर्जा दिए जाने की संभावनाइनमें विशेष रूप से जनजातीय वर्ग से आने वाले नेताओं को मंत्री स्तर का दर्जा दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके लिए जिलों से संबंधित नेताओं की खुफिया रिपोर्ट भी मंगाई गई है। सूत्रों का कहना है कि नियुक्तियों में संगठनात्मक पृष्ठभूमि, संघ विचारधारा से जुड़ाव और प्रदेश नेतृत्व की पसंद को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही केंद्रीय नेतृत्व की अंतिम मंजूरी के बाद सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा।वरिष्ठ सांसद को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती हैराजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि प्रदेश से एक वरिष्ठ सांसद को केंद्र सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, जिससे राज्य की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है। कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में राजनीतिक एडजस्टमेंट की प्रक्रिया निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है और माना जा रहा है कि आने वाले समय में निगम-मंडलों और संगठन में ताबड़तोड़ नियुक्तियों की घोषणा हो सकती है।

उपकार नहीं, सेवा करना हमारा धर्म: RSS चीफ ने मप्र से दिया संदेश, कहा - स्वयं के दु:ख के साथ समाज व देश का दु:ख दूर करना भारत का स्वभाव
इंदौर/कसरावद । सभी परमेश्वर के स्वरूप है, अत: उपकार नहीं, सेवा करना हमारा धर्म है। हमारे यहां चैरिटी नहीं, अपितु सेवा है। जीवन में सेवा के जो भी अवसर मिलें, उसमें सेवा करना चाहिए। सेवा से हमारी शुद्धि होती हैं। जिसके पास जो हो, वो देना चाहिए। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनरावजी भागवत ने बुधवार को कसरावद के लेपा स्थित श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में आयोजित 'मनुष्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण विषय पर व्यक्त किए।डॉ. भागवत ने कहा कि मनुष्य देखकर ही सीखता है, सुनकर या बोलकर नहीं। भारत की यात्रा में यह सत्य सिद्ध हुआ कि सुख बाहर नहीं, अपितु मनुष्य के अंदर ही है। भारत में मनुष्य के अंदर की खोज की यात्रा प्रारंभ हुई। मनुष्य के अंदर की यात्रा से हमें शाश्वत सुख प्राप्त होता है। हमारे पूर्वजों ने अनुभव के आधार पर बताया कि माया का आधार अध्यात्म ही होना चाहिए। ईश्वर ने मनुष्य को संवेदना दी है। मनुष्य की संवेदना दूसरे के सुख-दु:ख को जानती है। किसी की उपेक्षा करके सुख भोगना, मनुष्य की संवेदना में नहीं है। जीवन मूल्यों के लिए जीवन में शिक्षा और शुचिता का आवश्यक है। मनुष्य को शिक्षा इसीलिए चाहिए कि उसे स्वयं का दु:ख दूर तो करना ही है, किंतु समाज और देश का भी दु:ख दूर करना है, यह स्वभाव भारत का स्वभाव है। ऐसा धर्म जब हमने दुनिया को दिया, तब भारत बना। परतंत्रता में भी हमारा स्वाभाव नहीं बदला।भारत का अर्थ स्वभाव हैभारतीय संदर्भों में शिक्षा के बारे में डॉ. भागवत ने कहा कि जन्मांतर का ज्ञान मनुष्य के मस्तिष्क में है, इसीलिए जो ज्ञान अंदर है, उसे बाहर निकालना चाहिए। टंट्या मामा और गाडगे महाराज जैसे महापुरुषों ने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी, किंतु आज भी उनका सम्मान है। हमारे अंदर दैवीय गुण निहित है, उन्हें बाहर निकालना होगा उसका ज्ञान प्राप्त करना होगा। मनुष्य को विश्व मानवता का ज्ञान दिलाने वाली शिक्षा, आत्मनिर्भर बनाने वाली शिक्षा, श्रम की प्रतिष्ठा वाली शिक्षा ही वास्तविक शिक्षा है। व्यक्ति की बजाय कर्म की मान्यता और परिणाम की बजाय प्रामाणिक और उत्कृष्ट कार्य करना, भारत का स्वभाव है। भारत का अर्थ केवल भूगोल नहीं, अपितु स्वभाव है। भारत की उन्नति का मतलब जल, जंगल, नदी, पहाड़, जानवर और मनुष्य सभी की उन्नति है। मंच पर भारती ताई ठाकुर, संस्था के उपाध्यक्ष महेश डाबक एवं संस्था के अध्यक्ष नीतीन करमलकर उपस्थित थे। कार्यक्रम में गोष्ट-नर्मदालयाची आडियोबुक का विमोचन भी हुआ।संस्थान 15 वर्षों से शिक्षा व कौशल विकास क्षेत्र में कार्य कर रहायह संस्थान पिछले 15 वर्षों से शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में कार्यरत है। श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 17-20 जनवरी को संपन्न हुआ, तत्पश्चात निकेतन और प्रकल्प के दर्शनार्थ पूजनीय सरसंघचालकजी का प्रवास लेपा में हो रहा है। संस्थान वनवासी क्षेत्रों के कुपोषित बच्चों को शिक्षा एवं कौशल विकास के कार्य करती है।निमाड़ अभ्युदय विद्यालय में 800 बच्चे अध्ययनरतसंस्थान वनवासी बच्चों के लिए कक्षा दसवीं तक एवं बेसिक रूरल टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा शिक्षा का प्रबंध कर रहा है। निमाड़ अभ्युदय के विद्यालयों में लगभग आठ सौ बच्चे अध्ययनरत है। अपनी नर्मदा परिक्रमा में वनवासी बच्चों का शिक्षा का संकल्प करने पर सुश्री भारती ठाकुर दीदी ने यह संस्थान प्रारंभ किया। रक्षा मंत्रालय की नौकरी छोड़ कर सुश्री भारती ठाकुर दीदी ने यह प्रकल्प प्रारंभ किया। दीदी को नागा साधु को पुनर्वास में मिला आश्रम दान में प्राप्त हुआ, जहां गौशाला सहित ये प्रकल्प चल रहा है।यह थे उपस्थितइस गरिमामय अवसर पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा ताई महाजन, प.पू. प्रतापे महाराज, भारती दीदी, मेवालाल पाटीदार, नितिन करमलकर, महेश दाबक, पद्मश्री महेश शर्मा, प्रांत प्रचारक राजमोहन तथा क्षेत्र प्रचारक स्वप्निल कुलकर्णी, प्रांत संघचालक डॉ. शास्त्री, प्रांत कार्यवाह विनित नवाथे, श्रीनाथ गुप्ता, राकेश भावसार, विकास दवे सहित कार्यक्रम में अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी एवं खरगोन जिलों से लगभग 300 गणमान्य अतिथि एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

सबरीमाला गोल्ड केस में गर्म हुई केरल विधानसभा की तासीर:विपक्ष का आरोप- प्रभावशाली लोगों को बचाने मामले को कमजोर कर रही सरकार
तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा में बुधवार को लगातार तीसरे दिन भी हंगामा हुआ। वजह रही सबरीमाला सोने की कथित चोरी मामले की जांच को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने आरोप लगाया कि पिनाराई विजयन सरकार आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस मामले की जांच जल्दबाजी में खत्म करना चाहती है। विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने सदन में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जांच को जानबूझकर “स्टेज-मैनेज” किया जा रहा है।सतीशन ने मुख्यमंत्री की उस टिप्पणी की कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने विधानसभा में हुई झड़पों को “मजाक” बताया था। इसके अलावा, सतीशन ने मांग की कि कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों को विधानसभा की कार्यवाही से हटाया जाए। सरकार की ओर से मंत्री एम.बी. राजेश, पी. राजीव और वी. शिवनकुट्टी ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने सरकार के रुख का बचाव करते हुए कांग्रेस पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।एम.बी. राजेश ने रिकॉर्ड से टिप्पणियां हटाने की मांग को खारिज करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष की ओर से कोई अपमानजनक भाषा इस्तेमाल नहीं की गई है। वहीं, मंत्री पी. राजीव ने कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया कि इस मामले का मुख्य आरोपी कथित तौर पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में कैसे आया। इस बयान के बाद सदन में बहस और तेज हो गई।सत्ता पक्ष ने कुछ तस्वीरों का भी जिक्र किया, जिनमें कथित मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी राष्ट्रीय नेताओं के साथ दिखाई दे रहा है। इसके जवाब में विपक्ष ने कहा कि ऐसी ही तस्वीरें वामपंथी नेताओं के साथ भी मौजूद हैं और किसी एक पक्ष को निशाना बनाना दोहरे मापदंड को दिखाता है। निजी आरोपों और तीखी बहस के कारण विधानसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। विपक्ष ने जांच में गंभीर खामियों का आरोप लगाते हुए अपना विरोध जारी रखा और अंत में सदन से वॉकआउट कर दिया। इसके बाद दिन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, केरल हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) तय 90 दिनों की अवधि में चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई। इसके चलते तीन आरोपियों को कानूनी जमानत मिल गई। विपक्ष का कहना है कि इस देरी से उसका यह आरोप और मजबूत होता है कि जांच को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। वहीं, सरकार ने साफ किया है कि जांच कानून के दायरे और अदालत की निगरानी में आगे बढ़ रही है।

केन्द्रीय मंत्री को गद्दार कहकर घिरे राहुल:दिल्ली के मंत्री ने गांधी परिवार पर किया करारा प्रहार, कहा- सिख सरदार है, गद्दार नहीं
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के छठवें दिन राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू बीच जुबानी जंग भी देखने को मिली। राहुल ने जहां केन्द्रीय मंत्री को गद्दार दोस्त बताया तो वहीं बिट्टू ने राहुल को देशद्रोही करार दे दिया है। राहुल द्वारा केन्द्रीय मंत्री को गद्दार दोस्त कहे जाने पर सियासी पारा हाई हो गया है। दिल्ली के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस की मानसिकता में अब भी बदलाव नहीं हुआ है और आज हुई घटना उसका जीता जागता प्रमाण है। मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, राहुल गांधी ने आज संसद में सिख मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के खिलाफ जिस तरह की शब्दावली का इस्तेमाल किया, उन्हें गद्दार कहा, इसकी मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। यह बयान बड़ा शर्मसार करने वाला है।आज भी नहीं कांग्रेस की मानसिकता उन्होंने कहा कि सिख सरदार है, वह कभी गद्दार नहीं हो सकता। अगर कोई गद्दार है, तो वो गांधी परिवार है, जिन्होंने श्री दरबार साहब के ऊपर तोप-टैंकों से हमला किया, श्री अकाल तख्त साहिब को गिराया और बेकसूर सिखों के गले में टायर डालकर जिंदा जलाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मानसिकता आज भी नहीं बदली है।सिखों के प्रति नकारात्मक भाव को नहीं किया जा सकता बर्दाश्तसिरसा ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं के इस तरह के अपशब्द और सिखों के प्रति नकारात्मक भाव को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि यह न केवल सिखों की तौहीन है बल्कि कांग्रेस की मानसिकता में आज भी वही जहर मौजूद है, जो 1980 के दशक में था। उन्होंने लोकसभा के स्पीकर से तुरंत कार्यवाही करने की मांग की और कहा कि इस तरह की टिप्पणियों और भावनाओं को किसी भी तरह से बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिखों के प्रति यह अपमान और द्वेष कांग्रेस की मानसिकता का हिस्सा है और इसे रोकना जरूरी है। नहीं नकारा जा सकता कांग्रेस नेताओं के पापों कोसिरसा ने साफ कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने जो पाप किए हैं, उन्हें नकारा नहीं जा सकता और उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाया जाना चाहिए। उन्होंने अपील की कि लोकसभा स्पीकर को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि सिखों के प्रति इस तरह की अपमानजनक और नकारात्मक मानसिकता को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

पश्चिम बंगाल एसआईआर पर सुप्रीम सुनवाई:दीदी ने रखा अपना पक्ष, ईसी पर भी किया प्रहार, अब 9 को होगी सुनवाई
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर चल रहा विवाद सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है। यही नहीं बुधवार को इस विवाद पर सुनवाई भी हुई। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने की। इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वकीलों के बीच मौजूद थी। उन्होंने अदालत में अपनी बात रखने की कोशिश भी की। हालांकि बेंच ने इसकी अनुमति नहीं दी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी सोमवार को होगी. मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें पश्चिम बंगाल के अपने दो साथी न्यायाधीशों से जानकारी मिली, जिन्होंने पास प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया समझाई और इसी समझ के आधार पर इस मुद्दे को शामिल किया गया। मामले में सीएम ममता बनर्जी का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने बताया कि न्यायालय ने पहले तार्किक विसंगतियों की सूची प्रदर्शित करने का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि न्यायालय को सूचित किया गया था कि सूची संचार का एकमात्र माध्यम नहीं है और संबंधित व्यक्तियों को व्यक्तिगत नोटिस भी जारी किए जा रहे हैं।32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं- बंगाल सरकारअधिवक्ता श्याम दीवान ने न्यायालय से याचिकाकर्ता के संक्षिप्त नोट पर विचार करने का आग्रह किया और बताया कि इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए केवल चार दिन शेष हैं। उन्होंने कहा कि 32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं हैं, 1.36 करोड़ नाम तार्किक विसंगति सूची में हैं, और 63 लाख मामलों की सुनवाई अभी लंबित है। उन्होंने यह भी बताया कि 8,300 सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया है, जो संविधान के तहत परिकल्पित श्रेणी नहीं है। दीवान ने आगे कहा कि निवास प्रमाण पत्र, आधार और ओबीसी प्रमाण पत्र सहित कई स्वीकृत दस्तावेजों को अस्वीकार किया जा रहा है, जिससे लोगों को चार से पांच घंटे तक कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।चुनाव आयोग पर ममता के आरोपवहीं ममता बनर्जी ने कहा कि वह न्याय के लिए अदालत आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने चुनाव आयोग को तमाम फैक्ट्स बताए थे, लेकिन उन्हें नहीं सुना गया। इस पर सीजेआई ने साफ किया कि आपकी नई याचिका में कुछ नए मुद्दे जरूर हैं, लेकिन जो बातें आप कह रही हैं, वे आपके वकील पहले ही अदालत के सामने रख चुके हैं.वोटर्स के नाम हटाए जा रहे हैंः ममता बनर्जीसुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने रवींद्रनाथ टैगोर की स्पेलिंग में बदलावों का जिक्र करते हुए लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और राज्य में बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।सिर्फ नाम हटाने के लिए हो रहा एसआईआर का इस्तेमालः ममतामुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह ठोस उदाहरण दे रही हैं और प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित तस्वीरें भी दिखा सकती हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया का उपयोग केवल नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उदाहरण देते हुए, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि जब कोई बेटी शादी के बाद अपने ससुराल जाती है, तो सवाल उठते हैं कि वह अपने पति का उपनाम क्यों इस्तेमाल कर रही है। उनके अनुसार, ऐसी कई महिलाओं के नाम एकतरफा तरीके से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि फ्लैट खरीदने या निवास स्थान बदलने वाले गरीब लोगों के नाम भी हटाए जा रहे हैं। सीएम ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इन परिस्थितियों के बावजूद, अधिकारी ऐसे मामलों को श्गलत मानचित्रणश् बताकर अदालत के पूर्व निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं।ममता ने चुनाव आयोग को व्हाट्सएप आयोग कहासुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को श्व्हाट्सएप आयोगश् कहा और कहा कि चुनाव आयोग व्हाट्सएप के माध्यम से अनौपचारिक आदेश जारी कर रहा था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस दौरान कहा कि चार राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, 24 साल बाद, तीन महीने में यह सब करने की क्या जल्दी थी? जब फसल कटाई का मौसम चल रहा है...जब लोग यात्रा कर रहे हैं...100 से अधिक लोग मारे गए! बीएलओ की मौत हो गई, कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं। एसआईआर असम क्यों नहीं किया जा रहा है? मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगे कहा कि 58 लाख नाम काट दिए गए, उनके पास अपील करने का विकल्प नहीं था। केवल बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है - पश्चिम बंगाल के लोगों को कुचलने के लिए। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि शायद अधिकारियों की उपलब्धता के बाद सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की आवश्यकता नहीं होगी। इस पर चुनाव आयोग से मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अपने अधिकारियों को भी बताएं कि वे संवेदनशील रहें और नोटिस जारी न करें...बंगाल एसआईआर पर 9 फरवरी को सुनवाई, सीएम ने जताया आभारमुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एक व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकता है और निर्देश दिया कि सोमवार तक राज्य को ग्रुप बी के उन अधिकारियों की सूची प्रस्तुत करनी चाहिए जिन्हें कार्यमुक्त किया जा सकता है और उपलब्ध कराया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने दोनों याचिकाओं पर नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि एक अन्य याचिका भी है जिसमें भारत निर्वाचन आयोग पहले ही हलफनामा दाखिल कर चुका है और उसमें उठाए गए मुद्दे वर्तमान मामले से संबंधित होंगे। मुख्य न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि उक्त मामले पर भी सोमवार को सुनवाई की जाए और कहा कि न्यायालय उस दिन इससे संबंधित सभी मुद्दों पर सुनवाई करेगा। सीएम ममता बनर्जी ने न्यायालय से जनता के अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया और पीठ के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ को बहस का अवसर देने के लिए शुभकामनाएं दीं और सर्वोच्च न्यायालय से लोकतंत्र को बचाने का आग्रह किया।

भारत-यूएस ट्रेड डील पर सियासी संग्राम:विपक्ष के आरोपों पर उद्योग मंत्री का दावा- व्यापार समझौते में किसानों के हितों को रखा गया ख्याल
नई दिल्ली। अमेरिका के साथ ट्रेड डील में भारत अपने संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा संसद में दी गई। केंद्रीय मंत्री ने संसद को बताया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी 2025 में अमेरिका यात्रा के बाद, भारत और अमेरिका एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को संपन्न करने के उद्देश्य से नियमित रूप से चर्चा करते रहे हैं।इस दौरान दोनों पक्षों के अपने-अपने संवेदनशील पक्ष रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, बातचीत के दौरान, भारतीय पक्ष अपने संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत-अमेरिका करीब एक वर्ष तक बातचीत करने के बाद द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में सफल रहे हैं। 2 फरवरी, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर द्विपक्षीय और कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत की है। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका को किए जाने वाले भारतीय निर्यात पर टैरिफ की दर को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया।उन्होंने आगे कहा कि यह अमेरिका द्वारा कई प्रतिस्पर्धी देशों पर लगाए गए टैरिफ से कम है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में काफी वृद्धि होगी। गोयल ने संसद को बताया कि इस समझौते से एमएसएमई, उद्यमियों, कुशल श्रमिकों और उद्योगों के लिए नए अवसर खुलेंगे। साथ ही, एडवांस टेक्नोलॉजी तक पहुंच सुनिश्चित होगी। यह समझौता दुनिया के लिए भारत में बनाओ, दुनिया के लिए भारत में डिजाइन करो और दुनिया के लिए भारत में इनोवेट करो के दृष्टिकोण को साकार करेगी।उन्होंने आगे बताया कि यह ऐतिहासिक समझौता भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और विकसित भारत 2047 की दिशा में हमारी यात्रा को आगे बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

राहुल ने मीडिया के सामने लहराई नरवणे की अप्रकाशित बुक:दावा- चीनी टैंकों पर हमला करना चाहती हमारी सेना, पर....
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की किताब को मीडिया के सामने पेश करते हुए दावा किया कि हमारी सेना चीन के टैंकों पर हमला करना चाहती थी, क्योंकि वे भारत की सीमा में घुस आए थे। राहुल गांधी ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा, वे कहते हैं कि यह किताब मौजूद नहीं है, लेकिन यह रही वह किताब। भारत के हर युवा को यह देखना चाहिए कि यह किताब मौजूद है। यह मिस्टर नरवणे की किताब है। यह जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब है, लेकिन मुझे कहा गया है कि मैं इसे कोट नहीं कर सकता हूं। किताब के हवाले से कांग्रेस सांसद ने कहा, इसमें एक लाइन प्रमुख है, जिसमें सेना प्रमुख से कहा गया कि जो उचित समझो, वो करो।नरवणे को किसी ने नहीं दिया जवाबराहुल गांधी ने कहा, जब पूर्व सेना प्रमुख नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन कर बताया कि चीनी टैंक कैलाश रिज (सीमा क्षेत्र) तक पहुंच गए हैं, तो हमें क्या करना है? लेकिन तब राजनाथ सिंह का कोई जवाब नहीं आया। नरवणे ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से पूछा, एनएसए से पूछा और फिर से राजनाथ सिंह से पूछा। किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। नरवणे ने उन्हें फिर फोन किया, जिस पर रक्षा मंत्री ने कहा- मैं टॉप से पूछता हूं। टॉप से ऑर्डर आया कि जब चीन की सेना हमारे बॉर्डर के अंदर आए तो बिना हमसे पूछे फायर न करें।कांग्रेस सांसद ने कहा, हमारी सेना चीन के टैंकों पर हमला करना चाहती थी, क्योंकि वे भारत की सीमा में घुस आए थे। लेकिन इस मुश्किल समय में टॉप ने मैसेज दिया कि जो उचित समझो, वो करो। मतलब टॉप ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की और सेना से कहा कि आपको जो करना है करो, मेरे बस की नहीं है। राहुल गांधी ने आगे कहा, पूर्व सेना प्रमुख नरवणे ने अपनी किताब में साफ लिखा है, मुझे सच में बहुत अकेला महसूस हुआ। पूरे सिस्टम ने मुझे छोड़ दिया था। कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि अगर लोकसभा में प्रधानमंत्री आते हैं तो वह इस किताब को स्वयं उन्हें सौंपेंगे।

केसी ने मप्र कांग्रेस की बढ़ाई टेंशन:कार्यकारिणी का दायरा सीमित करने लिखा खत, बड़े जिलों में 55 तो छोटे जिलों में होंगे महज 35 सदस्य
भोपाल। कांग्रेस संगठन के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस में टेंशन बढ़ गया है! दरअसल, राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने राज्यों को निर्देश दिया है। जिसमें कहा गया कि जिला कार्यकारिणी छोटी होगी। उन्होंने ज्यादा संख्या में सदस्यों की नियुक्ति करने पर रोक लगाई है। साथ ही बड़े और छोटे जिलों के लिए संख्या भी निर्धारित की है।कांग्रेस संगठन के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने राज्यों की इकाई और जिला अध्यक्षों को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा कि बड़े जिलों में 55 और छोटे जिलों में 35 सदस्य बनाए जाएंगे। एआईसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है।तीन जिलों में गाइडलाइन से ज्यादा पदाधिकारीकेसी वेणुगोपाल ने 15 दिन के भीतर जिलों की कार्यकारिणी बनाने का भी निर्देश दिया हैं। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में अलग-अलग गुटों को साधने के लिए जम्बो कार्यकारिणी की परंपरा रही है। 30 जनवरी को मध्यप्रदेश कांग्रेस ने तीन जिलों की कार्यकारिणी जारी की है। तीनों जिलों में नई गाइडलाइन से ज्यादा पदाधिकारी बना दिए गए।भोपाल में भी लंबी सूची तैयारछिंदवाड़ा जिला कार्यकारिणी में 240 सदस्य बना दिए गए है। सागर जिले में 150 से ज्यादा पदाधिकारी बना दिए गए। छोटे जिले मऊगंज में 40 पदाधिकारी बनाए गए। वहीं भोपाल शहर की 106 और ग्रामीण की 85 सदस्यों की तैयार सूची है। ऐसे में कांग्रेस संगठन के राष्ट्रीय स्तर से आए नए फरमान से अब असमंजस्य की स्थिति है।

देशद्रोहियों से हमारा कोई लेना-देना नहीं:राहुल के गद्दार दोस्त कहने पर मोदी के मंत्री ने दिया करारा जवाब
नई दिल्ली। संसद का बजट सत्र जारी है। सत्र के छठवें दिन यानि बुधवार को संसद के गेट पर एक अलग नजारा देखने को मिला। दरअसल गेट के बाहर राहुल गांधी के साथ कांग्रेस सांसद हाथों में पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का आमना-सामना हुआ इतना ही नहीं दोनों में जुबानी जंग भी देखने को मिली। राहुल ने जहां केन्द्रीय मंत्री को गद्दार दोस्त बताया तो वहीं बिट्टू ने राहुल को देशद्रोही करोर दे दिया है। जिसका सोशल मीडिया में वीडियो भी वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि राहुल गांधी बिट्टू की तरफ हैंड शेक करने के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं लेकिन बिट्टू हाथ आगे नहीं बढ़ाते हैं। गद्दार दोस्त वाले कमेंट पर बिट्टू ने भी तुरंत पलटवार किया और कहा कि उनका देश के दुश्मनों से कोई लेना-देना नहीं है. हुआ यूं कि जब केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू संसद के मकर द्वार पर विरोध कर रहे कांग्रेस सांसदों के पास से गुजरे, तो लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उनके देखकर कहा, देखो, एक गद्दार यहीं से गुजर रहा है। इसका चेहरा देखो। इसके बाद बिट्टू के पास आने पर राहुल गांधी ने उनसे हाथ मिलाने की पेशकश करते हुए कहा, नमस्ते भाई, मेरे गद्दार दोस्त। चिंता मत करो, तुम वापस (कांग्रेस में) आ जाओगे। जिसके बाद बिट्टू ने उनसे हाथ मिलाने से मना कर दिया और पलटवलार करते हुए उनको देश का दुश्मन कह डाला।राहुल गांधी पर दिया था विवादित बयानयह पहली बार नहीं जब बिट्टू और राहुल गांधी के बीच इस तरह की बयानबाजी चली हो। सितंबर 2024 में बिट्टू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर तीखा और विवादास्पद बयान दिया था। बिट्टू ने राहुल गांधी पर सिख समुदाय को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि सिख किसी भी राजनीतिक दल से बंधे नहीं हैं। उन्होंने अमेरिका में सिखों को लेकर दिए गए राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, राहुल गांधी ने सिखों को बांटने की कोशिश की है, सिख किसी पार्टी से जुड़ा नहीं है और यह चिंगारी लगाने की कोशिश है, राहुल गांधी देश के नंबर वन टेरेरिस्ट हैं। कौन हैं बिट्टूतीन बार कांग्रेस सांसद रह चुके रवनीत सिंह बिट्टू पहली बार 2009 में आनंदपुर साहिब से लोकसभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद 2014 और 2019 में लुधियाना से जीते थे। खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथी आवाजों के मुखर आलोचक माने जाने वाले बिट्टू 2024 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो गए। इस चुनाव में वह लुधियाना से पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वारिंग से लगभग 20 हजार वोटों से हार गए। चुनाव हारने के बावजूद केंद्र सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया रेल तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी।बिट्टू महज 11 साल के थे जब उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद 20 साल की उम्र में उन्होंने अपने दादा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह को भी खो दिया, जिनकी 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। वर्ष 2007 में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद बिट्टू ने राजनीति में कदम रखा।


