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खाद की कालाबाजारी-जमाखोरी करने वालों की अब खैर नहीं:मिडिल ईस्ट वार के बीच केन्द्रीय कृषि मंत्री ने हाईलेवल मीटिंग, दिए सख्त निर्देश
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच खाद की आपूर्ति मजबूत करने, कालाबाजारी रोकने के लिए केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को हाईलेवल मीटिंग की। बैठक में आने वाले खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए तैयारियों की भी समीक्षा की गई। बैठक में शिवराज ने सख्त निर्देश दिए हैं कि की आपूर्ति पूरे देश में बराबर और बिना रुकावट के होनी चाहिए। खाद-बीज की कालाबाजारी करने वालों पर हो सख्त एक्शनमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि खाद और बीज की कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक संकट का फायदा उठाने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को भी इस दिशा में कड़े कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।बीज सुखाने के लिए गैसों की उपलब्धता की भी समीक्षाबैठक में कृषि रसायनों और बीज सुखाने के लिए जरूरी गैसों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा दूध और अन्य कृषि उत्पादों के लिए पैकेजिंग सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने पेट्रोलियम मंत्रालय और अन्य विभागों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए ताकि सप्लाई में कोई बाधा न आए।कृषि क्षेत्र की माॅनिटरिंग के लिए बनाया गया स्पेशल सेलकृषि क्षेत्र की लगातार निगरानी के लिए एक स्पेशल सेल बनाया गया है, जो चैबीसों घंटे काम करेगा। यह सेल हर हफ्ते खाद, बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता पर रिपोर्ट सीधे कृषि मंत्री को देगा। कृषि मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि संकट के समय उन्हें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और सरकार किसानों तक जरूरी संसाधन समय पर पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।10 वर्षो में 44 फीसदी बढ़ा कृषि उत्पादनउन्होंने यह भी बताया कि पिछले 10 वर्षों में देश में कृषि उत्पादन करीब 44 प्रतिशत बढ़ा है और कई किसानों की आय दोगुनी हुई है। केंद्र सरकार किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर रिकॉर्ड खरीद भी शामिल है।

दिल्ली विधानसभा में गूंजा शीशमहल मुद्दा:मंत्री वर्मा ने खोली ‘महंगे राज’ की परतें, पढ़ें पूरी खबर
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर हुए खर्चों को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सदन में एक लंबी सूची पेश करते हुए कहा कि शीशमहल जैसे इस घर में अत्यंत महंगे और लग्जरी सामान लगाए गए हैं। प्रवेश वर्मा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री आवास में लगाए गए जिम उपकरणों से लेकर फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक आइटम तक हर चीज बेहद महंगी है। उन्होंने कहा कि एक ट्रेडमिल की कीमत करीब 14 लाख रुपए थी और उसके लिए अलग से ट्रेनर को भी भुगतान किया गया। इसके अलावा डम्बल सेट पर करीब 3 लाख रुपए खर्च किए गए। उन्होंने बताया कि घर में 88 इंच का बड़ा टीवी लगाया गया। साथ ही तीन टीवी पर कुल 27 लाख रुपए खर्च हुए। इसके अलावा चिमनी, सोफा, मिनी बार और एंट्रेंस लाइट जैसी सुविधाएं भी लगाई गईं।सोफा सेट के लिए हुए थे दो टेंटरप्रवेश वर्मा ने फर्नीचर के खर्च का जिक्र करते हुए कहा कि सोफा सेट के दो टेंडर हुए। एक 35 लाख रुपए का और दूसरा 1.5 लाख रुपए का। घर में 76 टेबल लगाए गए, जिन पर करीब 1 करोड़ 5 लाख रुपए खर्च हुए। 8 बेड पर 40 लाख रुपए खर्च किए गए, जबकि कुर्सियों पर 60 लाख रुपए और कंसोल पर 50 लाख रुपए खर्च किए गए। उन्होंने बताया कि घर में 1.5 करोड़ रुपए के पर्दे (कर्टन) लगाए गए। इसके अलावा 60 लाख रुपए के कार्पेट और छोटे पफी (सोफे के साथ रखे जाने वाले छोटे स्टूल) भी खरीदे गए।28 लोगों के बैठने लायक बनाया गया था डाइनिंग टेबलप्रवेश वर्मा ने आगे कहा कि एक बड़ा डाइनिंग टेबल लगाया गया, जो 28 लोगों के बैठने लायक है और जिसकी कीमत 14 लाख रुपए है। इसके अलावा, जिम में स्पिन बाइक 1 लाख रुपए की, फ्यूजन क्रेस्ट मशीन 3 लाख रुपए की और बॉडी सॉलिड उपकरण 6 लाख रुपए के लगाए गए। उन्होंने कहा कि घर में करीब 12 लाख रुपए के इलेक्ट्रिकल आइटम और 14 लाख रुपए की सीलिंग डेकोरेटिव फिटिंग्स लगाई गईं।घर में लगाए थे 11 टीवीउन्होंने यह भी दावा किया कि घर में कुल 11 टीवी लगाए गए, जिन पर डेढ़ करोड़ रुपए खर्च हुए। साथ ही बारबेक्यू यूनिट, सीलिंग स्पीकर, कैमरा, एम्प्लीफायर और प्री-एम्प्लीफायर जैसे महंगे उपकरण भी लगाए गए। उन्होंने कहा कि 50 एयर कंडीशनर लगाए गए और 5 लाख रुपए का इन्वर्टर सिस्टम भी लगाया गया।एक दिन में पास कर दिए गए थे कामों के टेंडर और एस्टिमेटप्रवेश वर्मा ने आरोप लगाया कि इन सभी कामों के टेंडर और एस्टिमेट एक ही दिन में तैयार और पास कर दिए गए। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता के पैसे पर बहुत बड़ी डकैती की गई है। दिल्ली सरकार के मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि बजट सत्र को बाधित करने के लिए धमकी भरे ईमेल भेजे जा रहे हैं।

देश को तबाह करने की काली करतूत के जिम्मेदार नेहरू:भाजपा नेता ने फिर किया वाार, निशिकांत ने इंदिरा-राजीव को भी घेरा
नई दिल्ली। देश की सियासत में एक बार फिर तीखा वार देखने को मिल रहा है, जहां भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। दुबे लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तारीखवार उन समझौतों और निर्णयों को उजागर कर रहे हैं, जिन्हें वे देशहित के खिलाफ बताते हैं। “कांग्रेस का काला अध्याय” नाम से शुरू की गई उनकी यह शृंखला केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि दस्तावेजों के जरिए अतीत के फैसलों को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश है। निशिकांत की शृंखला ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जहां इसे आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। इसी क्रम में निशिकांत दुबे ने बुधवार को कांग्रेस का काला अध्याय 9 एपिसोड एक्स पर पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है, आज, यानी 25 मार्च 1914 को शिमला में ब्रिटिश इंडिया, चीन सरकार और तिब्बत ने मिलकर एक समझौता किया, जिसके अंतर्गत नेपाल और तिब्बती समझौता 1856 तथा जम्मू कश्मीर तिब्बती समझौता 1842 लागू हुआ। तिब्बत और भारत के बीच सीमा निर्धारण मैकमोहन लाइन के तहत किया गया। नेहरू ने तिब्बतियों को बनाया चीन का नागरिकहालांकि मई 1951 में नेहरू ने चीन के आधिपत्य को सत्रह समझौते के अनुसार तिब्बतियों को चीन का नागरिक बना दिया। बचा काम 29 अप्रैल 1954 में तिब्बत पर चीन के पूर्ण नियंत्रण का समझौता कर लिया तथा इस समझौते के तहत चीन को बेरोकटोक भारत आने की छूट दे दी। देश को तबाह करने की काली करतूत के जिम्मेदार केवल और केवल नेहरु जी ही हैं।श्रीलंका को लेकर राजीव गांधी को घेराइसके पहले 24 मार्च को निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा था, 24 मार्च 1990 को श्रीलंका से भारतीय सेना हारकर जबरदस्ती भगाई गई और लौटी। भारतीय सेना की अंतिम टुकड़ी को विदा करने वालों में आज के हमारे विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर भी थे, जो उन दिनों श्रीलंका में कार्यरत थे। भारतीय सेना तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के जिद और जुनून के कारण जबरदस्ती 1987 में अपने ही तमिल भाइयों को मारने पहुंची थी। इंदिरा को भी खड़ा किया कटखरे मेंगांधी परिवार का यह जुनून नया नहीं था। इसके पहले 24 मार्च 1971 को भी इंदिरा गांधी ने भारतीय सेना को श्रीलंका के छात्र आंदोलन पर नियंत्रण के लिए वहां भेजा था लेकिन 1971 के पाकिस्तान युद्ध के दौरान श्रीलंका ने पाकिस्तान का साथ दिया। हमारे हजारों जवान 1987 से लेकर 1990 तक मारे गए। श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रेमदास ने भारतीय जवानों पर तरह-तरह के आरोप लगाए और राजीव गांधी को चिट्ठी लिखी। पहली बार विदेशी धरती पर भारतीय प्रधानमंत्री के ऊपर हमला हुआ और देश के सम्मान को ठेस पहुंची।

61 के हुए मप्र के मुखिया:पीएम मोदी ने की दीर्घायु और स्वस्थ्य जीवन की कामना, इन हस्तियों ने भी दी शुभकामनाएं
नई दिल्ली-भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार यानि 25 मार्च 2026 को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। यह उनका 61वां जन्म दिन है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत तमाम पार्टी के दिग्गज नेताओं ने सीएम मोहन को जन्म दिन की शुभकामनाएं दी है। पीएम ने सीएम के कार्यों की सराहना भी की है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं। वे मध्य प्रदेश के सर्वांगीण विकास को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई अनेक पहलों में अग्रणी हैं। मैं उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।अमित शाह ने मोहन को दी शुभकामनाएंकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। मोदी जी के मार्गदर्शन और आपके नेतृत्व में प्रदेश विकास और जनकल्याण के नए आयाम छू रहा है। प्रभु महाकाल आपको उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करें।गडकरी ने की दीर्घायु और मंगलमय जीवन की प्रार्थनाकेंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सीएम मोहन यादव को शुभकामनाएं देते हुए ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लिखा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करता हूं।ऊर्जावान नेतृत्व के धनी मप्र के सीएमः योगीउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पोस्ट में लिखा, जनसेवा को समर्पित, ऊर्जावान नेतृत्व के धनी, मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की हार्दिक बधाई। बाबा महाकाल से आपके उत्तम स्वास्थ्य, सुदीर्घ और सुयशपूर्ण जीवन की प्रार्थना है। वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पोस्ट किया, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। आपके दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।हरियाणा के सीएम ने भी दी जन्मदिन की शुभकामनाएंहरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लिखा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर से प्रार्थना है कि आप सदैव स्वस्थ रहें, ऊर्जावान रहें और दीर्घायु हों व प्रदेशवासियों के कल्याण और राज्य की निरंतर प्रगति के आपके सभी संकल्प पूर्ण हों।

जन्मदिवस विशेष:संघर्ष, अध्ययन और संस्कारों से गढ़ा नेतृत्व—डॉ. मोहन यादव
अनूप पौराणिकमध्यप्रदेश की राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो केवल पद प्राप्त नहीं करते, बल्कि अपने विचार, व्यवहार और कार्यशैली से नेतृत्व की नई परिभाषा गढ़ते हैं। डॉ. मोहन यादव ऐसे ही नेताओं में शामिल हैं, जिनका जीवन संघर्ष, अध्ययन, संगठन और संस्कारों के संतुलन का सशक्त उदाहरण है। 25 मार्च 1965 को उज्जैन में जन्मे डॉ. यादव का प्रारंभिक जीवन सादगी और अनुशासन से परिपूर्ण रहा। धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना से समृद्ध उज्जैन की भूमि ने उनके व्यक्तित्व को गहराई और संतुलन प्रदान किया, जहाँ परंपरा और आधुनिकता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।उनकी शैक्षिक यात्रा उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी आधारशिला रही है। विज्ञान, प्रबंधन (एमबीए), विधि और राजनीतिक शास्त्र में पीएचडी जैसी विविध शिक्षा ने उन्हें व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया। उनके लिए शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और शासन को समझने का उपकरण रही। यही कारण है कि उनके निर्णयों में संवेदनशीलता के साथ-साथ तर्क, तथ्य और दूरदृष्टि का संतुलन दिखाई देता है।डॉ. मोहन यादव का सार्वजनिक जीवन छात्र राजनीति से शुरू हुआ। माधव विज्ञान महाविद्यालय में छात्रसंघ के पदों पर रहते हुए उन्होंने नेतृत्व की प्रारंभिक झलक प्रस्तुत की। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने संगठन, अनुशासन और सामूहिक निर्णय की प्रक्रिया को निकट से समझा। नगर स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक की जिम्मेदारियों ने उन्हें एक सशक्त संगठनकर्ता के रूप में स्थापित किया। यही अनुभव उनके राजनीतिक जीवन की मजबूत नींव बना।राजनीतिक जीवन में संघर्ष भी उनके साथ-साथ चला। वर्ष 2003 में भारतीय जनता पार्टी द्वारा बड़नगर विधानसभा से टिकट मिलने के बाद परिस्थितियोंवश उसे लौटाना उनके जीवन का एक कठिन निर्णय था। लेकिन इस चुनौती ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि उनके धैर्य और निष्ठा को और मजबूत किया। उन्होंने प्रतीक्षा को अपनी शक्ति बनाया और संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखा। यह प्रसंग उनके व्यक्तित्व की गहराई और परिपक्वता को दर्शाता है।प्रशासनिक अनुभव के क्षेत्र में भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया। उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने नगर विकास और अधोसंरचना को नई दिशा दी। उनके कार्यकाल में विकास योजनाओं को इस प्रकार लागू किया गया कि शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान सुरक्षित बनी रहे। यह संतुलन उनके नेतृत्व की विशेषता है—जहाँ विकास और विरासत साथ-साथ चलते हैं। मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पर्यटन को आर्थिक और सांस्कृतिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाया। उनके नेतृत्व में प्रदेश को लगातार दो वर्षों तक राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण और प्रशासनिक क्षमता का प्रमाण है।विधायक के रूप में लगातार तीन बार जनता का विश्वास जीतना उनकी जनसंपर्क क्षमता और लोकप्रियता को दर्शाता है। वे संवाद आधारित राजनीति में विश्वास रखते हैं, जहाँ जनता के साथ सीधा जुड़ाव प्राथमिकता होता है। उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, जब मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को प्रभावी रूप से लागू करने में अग्रणी भूमिका निभाई। नए महाविद्यालयों की स्थापना, कौशल आधारित शिक्षा और पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण ने शिक्षा को रोजगार और नवाचार से जोड़ा।डॉ. मोहन यादव केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं। विभिन्न संगठनों में उनकी भूमिका ने युवाओं को प्रेरित करने का कार्य किया। उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण पहलें कीं, जिनमें विक्रमादित्य परंपरा का पुनर्स्थापन और सांस्कृतिक आयोजनों का विस्तार शामिल है। 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करना उनके लंबे राजनीतिक और सामाजिक साधना का परिणाम था। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उनके निरंतर परिश्रम, संगठन निष्ठा और जनविश्वास का प्रतीक है।उनकी जीवन यात्रा यह स्पष्ट करती है कि नेतृत्व कोई संयोग नहीं होता, बल्कि यह निरंतर प्रयास, धैर्य और आत्मसंयम से विकसित होता है। डॉ. मोहन यादव का नेतृत्व इस बात का उदाहरण है कि जब व्यक्ति अपने मूल्यों, शिक्षा और संगठन के प्रति समर्पित रहता है, तो वह न केवल सफलता प्राप्त करता है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा भी बनता है।(लेखक :- युवा पत्रकार और शोधार्थी है)

पश्चिम एशिया जंग:राहुल ने भारत की विदेशी नीति पर खड़े किए सवाल, ट्रंप का नाम लेकर पीएम पर भी किया वार
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की विदेश नीति को लेकर देश की राजनीति में तीखी बहस देखने को मिल रही है। इसी मुद्दे पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं और सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े किए हैं।संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत की विदेश नीति अब संस्थागत न होकर प्रधानमंत्री की “निजी विदेश नीति” बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि प्रभावित हो रही है और दुनिया इसे गंभीरता से नहीं ले रही। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रभाव है और वे उनके दबाव में निर्णय लेते हैं।पीएम की स्थिति कमजोर होती है तो विदेशी नीति पर पड़ेगा असरराहुल गांधी ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप को यह पहले से पता होता है कि प्रधानमंत्री मोदी क्या कदम उठाएंगे और क्या नहीं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री की स्थिति कमजोर होती है, तो इसका सीधा असर देश की विदेश नीति पर पड़ेगा। उनके अनुसार, हाल के व्यापार समझौतों और संसद में दिए गए बयानों से भारत का कोई स्पष्ट और मजबूत रुख सामने नहीं आया है।राहुल ने आम जनता से जुड़े मुद्दों को भी उठायाइसके अलावा राहुल गांधी ने आम जनता से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का असर सीधे तौर पर लोगों पर पड़ रहा है, जिसमें एलपीजी और पेट्रोल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने मौजूदा हालात की तुलना कोविड काल से की, लेकिन उस समय हुई जनहानि और कठिनाइयों का जिक्र नहीं किया।अमेरिका और इस्राइल के हितों को ध्यान में रख फैसले ले रही सरकारराहुल गांधी ने यह भी बताया कि वे केरल में अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कारण सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने बैठक की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें संरचनात्मक खामियां हैं, जिन्हें सुधारा नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिका और इस्राइल के हितों को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है, न कि देश और किसानों के हित में। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बहस होने की संभावना है।

बंद दरवाजों के पीछे खेला जाएगा पीएसएल:कंगाल पीसीबी की फिर हुई इंटरनेशनल बेइज्जती
नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) हमेशा से ही पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) की तुलना इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से करता रहा है। हालांकि, बीसीसीआई की तरह पीसीबी कभी भी पीएसएल का आयोजन नहीं कर सका है। इसका ताजा उदाहरण आगामी सीजन की शुरुआत से पहले ही सामने आ गया है। पाकिस्तान सुपर लीग 2026 का आयोजन बंद दरवाजों के पीछे किया जाएगा, मतलब दर्शकों को स्टेडियम में आने की परमिशन नहीं होगी। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि पीएसएल के सभी मुकाबले अब छह की जगह महज दो शहरों में खेले जाएंगे। पीसीबी ने अपने इस फैसले का कारण पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईंधन संकट को बताया है। पीसीबी ने खर्च कटौती का दिया हवालापाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का कहना है कि खर्चे में कटौती करने की खातिर टूर्नामेंट का आयोजन सिर्फ दो वेन्यू पर करने का निर्णय लिया गया है। पीएसएल की शुरुआत 26 मार्च से होनी है और फाइनल मुकाबला 3 मई को खेला जाना है।आईपीएल के आयोजनों में कोई कमी नहींअमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव का असर जितना पाकिस्तान पर हो रहा है, उतना ही भारत पर भी हो रहा है। तेल की कीमतों में यहां भी उछाल आया है और बाकी चीजों के दाम भारत में भी बढ़े हैं। हालांकि, इसके बावजूद आईपीएल 2026 के आयोजन में कोई कमी नहीं रखी गई है। पीएसएल का आयोजन तो छह शहरों में किया जाना था, जबकि आईपीएल 2026 कुल 10 शहरों में खेला जाना है। इसके बावजूद खर्चे में कटौती के नाम पर बीसीसीआई ने टूर्नामेंट के शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं किया है। यह दर्शाता है कि पीसीबी के मुकाबले बीसीसीआई का कद काफी ऊंचा है।पीएसएल छोड़कर आईपीएल से जुड़ रहे विदेशी खिलाड़ीसिर्फ यही नहीं, बल्कि इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने के लिए विदेशी खिलाड़ी बिना कुछ सोचे ही पाकिस्तान सुपर लीग को छोड़कर भारत आ रहे हैं। ब्लेसिंग मुजारबानी और दासुन शनाका इसके ताजा उदाहरण भी हैं। पीसीबी के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने पीएसएल छोड़कर आईपीएल में खेलने जा रहे खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात भी कही है। हालांकि, इसके बावजूद खिलाड़ी आईपीएल की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। इसका पहला कारण आईपीएल में मिलने वाला पैसा तो है ही, लेकिन इसके साथ ही पीएसएल के मुकाबले आईपीएल की ज्यादा लोकप्रियता भी है। पीएसएल को लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के दावे एक बार फिर खोखले साबित हो रहे हैं। वहीं, आईपीएल की बराबरी करना पीएसएल और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के लिए अभी दूर की कौड़ी ही लगता है।

कांग्रेस ने खराब की हिमाचल की सेहत:भाजपा सांसद ने लगाया गंभीर आरोप, अनुराग ने खटाखट माडल का भी किया जिक्र
नई दिल्ली। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में राज्य की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की, लेकिन विपक्ष ने इस मुद्दे पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई।पत्रकारों से बातचीत में ठाकुर ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर विपक्षी नेताओं की अनुपस्थिति निराशाजनक रही। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस न केवल राज्य में गलत नीतियां लागू कर रही है, बल्कि उसकी विचारधारा देशहित के खिलाफ भी काम कर रही है। ठाकुर ने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार के फैसलों का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है।दिखावा साबित हुआ खटाखट माडलउन्होंने विशेष रूप से “खटाखट मॉडल” का जिक्र किया, जिसे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने विधानसभा चुनाव से पहले पेश किया था। ठाकुर के अनुसार यह मॉडल केवल दिखावा साबित हुआ और इससे राज्य की आर्थिक स्थिति और बिगड़ी है। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा, जो पहले कभी नहीं हुआ।अनुराग ने टैक्स को लेकर भी कांग्रेस सरकार को घेराठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर टैक्स बढ़ाकर जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार सत्ता में आने के कुछ ही महीनों में डीजल पर वैट बढ़ाकर 10.40 रुपये कर दिया गया, साथ ही 5 रुपये का सेस भी लगाया गया। उन्होंने “टॉयलेट टैक्स” जैसे फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे आम लोगों की परेशानियां बढ़ी हैं।1,000 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त बोझ उठा रही प्रदेश की जनताउन्होंने दावा किया कि इन नीतियों के कारण प्रदेश की जनता को हर साल 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है। ठाकुर ने कहा कि यह मॉडल राज्य को वित्तीय संकट की ओर धकेल रहा है। वहीं, भाजपा के राज्यसभा सदस्य सिकंदर कुमार ने भी कांग्रेस सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाएं सभी राज्यों के लिए हैं, लेकिन हिमाचल में उन्हें सही ढंग से लागू नहीं किया जा रहा।

नीतीश ही रहेंगे जेडीयू के बाॅस:निर्विरोध चुने गए पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष, विरोध में किसी ने नहीं दाखिल किया नामांकन
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को एक बार फिर निर्विरोध रूप से जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। नामांकन के वापस लिए जाने के अंतिम समय गुजर जाने के बाद उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष चुन लिया गया। नीतीश कुमार के अलावा किसी और नेता ने अपना पर्चा दाखिल नहीं किया। जदयू के राष्ट्रीय सचिव और मुख्यालय प्रभारी मोहम्मद निसार ने एक बयान जारी कर मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी के लिए नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि मंगलवार 24 मार्च, 2026 को सुबह 11 बजे थी। विरोध में कोई नेता नहीं आया सामनेनामांकन वापस लेने का समय समाप्त होने के बाद, निर्वाचन अधिकारी के पास केवल नीतीश कुमार का नामांकन ही शेष है, इसलिए उन्हें बतौर अध्यक्ष चुन लिया गया है। उन्होंने बताया कि निर्वाचन अधिकारी अनिल प्रसाद हेगड़े (पूर्व सांसद, राज्यसभा) आज दोपहर ढाई बजे नीतीश कुमार के निर्वाचित होने का निर्वाचन प्रमाण पत्र जारी किया। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा में संसदीय दल के नेता संजय कुमार झा, केंद्रीय मंत्री भारत सरकार राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, मंत्री बिहार सरकार श्रवण कुमार और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नीतीश के अध्यक्ष बनने के बाद यह हो गया तयनीतीश कुमार के अध्यक्ष बनने के बाद यह तय हो गया है कि वे राज्यसभा सदस्य के रूप में दिल्ली की राजनीति करेंगे लेकिन पार्टी की बागडोर खुद अपने पास रखेंगे। बता दें कि ललन सिंह के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद नीतीश कुमार ने यह जिम्मेदारी भी संभाली थी। नीतीश चैथी बार जदयू के अध्यक्ष बनेंगे। हाल ही में नीतीश के बेटे निशांत कुमार ने राजनीति में एंट्री ले ली। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि निशांत को नई सरकार में बिहार के डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। नीतीश के दिल्ली जाने के बाद बिहार में नई सरकार बनेगी।

मिडिल ईस्ट वार:जंग जारी रही तो होंगे घातक परिणाम, राज्यसभा से पीएम मोदी ने देश को किया आगाह, और क्या कहा पढ़े खबर
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया जंग पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मंगलवार को राज्यसभा में कहा है कि इस युद्ध ने पूरी दुनिया में बड़ा ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। अगर यह जंग जारी रही, तो इसके गंभीर दुष्परिणाम होंगे। जिसका असर भारत पर भी पड़ रहा है। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने जंग छोड़कर संवाद का रास्ता सुझाया है। हम सभी संबंधित पक्षों के संपर्क में हैं।पीएम ने कहा कि हालात चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन भारत लगातार कूटनीतिक प्रयासों के जरिए समाधान की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भारत हर सेक्टर में यह प्रयास कर रहा है कि किसी भी सेक्टर में दूसरे देशों पर बहुत अधिक निर्भरता न हो। पीएम ने शिप बिल्डिंग से लेकर रेयर अर्थ मिनरल्स तक, आत्मनिर्भरता के प्रयास गिनाए और कहा इस संकट ने दुनिया को हिला दिया है। इससे रिकवर करने में भी दुनिया को काफी समय लगेगा। सरकार पल-पल बदलते हालात पर नजर रखे हुए है।समस्या के समाधान के लिए भारत ने सुझाया संवाद का रास्तापीएम ने कहा कि उन्होंने क्षेत्र के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर दो दौर की बातचीत की है और ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी निरंतर संवाद जारी है। भारत ने इस समस्या के समाधान के लिए संवाद का ही रास्ता सुझाया है। उन्होंने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बड़ी संख्या में जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें भारतीय क्रू मेंबर्स भी शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में इस तरह की रुकावट और कमर्शियल जहाजों पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। भारत इस स्थिति में अपने जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।भारत ने हमलों का किया विरोधउन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने नागरिकों, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और परिवहन से जुड़े ढांचों पर हमलों का कड़ा विरोध किया है। किसी भी तरह का हिंसक संघर्ष मानवता के हित में नहीं है, और भारत सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांति के रास्ते पर आने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।भारतीयों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकताविदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इस संकट के दौरान अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित वापस लौटे हैं। केवल ईरान से ही 1,000 से अधिक भारतीय लौटे हैं, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल हैं।संघर्ष में कुछ भारतीयों की भी हुई मौतप्रधानमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि इस संघर्ष के दौरान कुछ भारतीयों की मौत हुई है और कुछ घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दी जा रही है और घायलों के बेहतर इलाज की व्यवस्था की गई है। सरकार इस कठिन समय में पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी देशों से सकारात्मक आश्वासन भी मिला है।पीएम ने देश की जनता को दिलाया भरोसाऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में कई देशों से तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत पहुंचे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में भी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि देश की जरूरतों से जुड़े सभी आवश्यक सामान सुरक्षित रूप से भारत में पहुंचते रहें।

निगम मंडल नियुक्तियां:हारे हुए नेताओं के लिए बीजेपी की ना
प्रसन्न शहाणे हारे हुए नेताओं को निगम मंडलों में एडजेस्ट नहीं करेंगे हेमंत खंडेलवाल का यह बयान मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर एक नई रणनीति की ओर इशारा करता है। उनके इस रुख से पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं और चुनाव हार चुके वरिष्ठ नेताओं के बीच समीकरण बदल सकते हैं।इस बयान के पीछे की अहम वजहों का आंकलन करें तो समझ में आता है की राष्ट्रीय संगठन की मंशा भांपते हुए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बिना लाग लपेट के सीधे और सपाट शब्दों में ये फरमान सुनाया है ,,पार्टी चाहती है की कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना है तो हारे हुए नेताओं को तवज्जो देना बंद करना होगा ,, लंबे समय से संगठन में यह मांग उठती ही रही है कि जो कार्यकर्ता जमीन पर रहकर मेहनत करते हैं, उन्हें सत्ता में भागीदारी मिलनी चाहिए। श्हारे हुए नेताओंश् को दूर रखकर खंडेलवाल संभवतः उन सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका देना चाहते हैं जो पिछले कई चुनावों से हाशिए पर थे।मध्य प्रदेश में निगम-मंडलों की नियुक्तियां लंबे समय से चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हेमंत खंडेलवाल के हालिया बयान ने उन नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं जो चुनाव हारने के बाद पुनर्वास की उम्मीद लगाए बैठे थे।लगता है पार्टी अब परफॉर्मेंस आधारित राजनीति चाहती है यानी पार्टी अब केवल कद या पुराने अनुभव के आधार पर पद बांटने के मूड में नहीं है। चुनावी हार को जवाबदेही से जोड़कर बीजेपी एक ऐसा कल्चर विकसित करना चाहती है जहाँ जीत ही सबसे बड़ी योग्यता मानी जाए। इससे न केवल गुटबाजी पर लगाम लगेगी बल्कि जो नेता चुनाव हारने के बाद भी निगम-मंडलों के जरिए अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश करते हैं वो भी अलग थलग पड़ जायेंगे साथ ही इस नए फॉर्मूले से वरिष्ठ नेताओं का दबाव कम होगा और नए चेहरों को उभरने का रास्ता मिलेगा।वर्तमान में लगभग 40 से अधिक ऐसे बोर्ड, निगम और प्राधिकरण हैं जहाँ अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद रिक्त हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं एमपी हाउसिंग बोर्ड , मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम ,नागरिक आपूर्ति निगम , पर्यटन विकास निगमऔर कृषि विपणन बोर्डखंडेलवाल के श्हारे हुए नेताओं को जगह नहींश् वाले फॉर्मूले के बाद अब ऐसे चेहरों पर नजर रहेगी जो संगठन के निष्ठावान कार्यकर्ता हो , वे नेता जो दशकों से संगठन में जिला अध्यक्ष या प्रदेश पदाधिकारी रहे हैं, लेकिन उन्हें कभी चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला। सरकार को सिंधिया खेमे के उन नेताओं को भी संतुष्ट करना होगा जो वर्तमान में किसी सदन के सदस्य नहीं हैं, लेकिन सक्रिय हैं। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाना भी जरूरी है लिहाजा नियुक्तियों में मालवा-निमाड़ और ग्वालियर-चंबल के साथ-साथ विंध्य क्षेत्र को साधने की कोशिश की जाएगी, ताकि 2028 के लिए सामाजिक समीकरण भी दुरुस्त रहें। यानी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष के लिए अपनी श्कोर टीमश् तैयार करने का सुनहरा मौका है, जिसमें युवा और ऊर्जावान चेहरों को प्रशासनिक अनुभव मिल सके।

सोम डिस्टिलरीज को तगड़ा झटका:हाईकोर्ट से सभी याचिकाएं खारिज , एक्साइज विभाग के एक्शन को बताया भी वैध
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शराब कारोबार से जुड़ी एक अहम याचिका पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि शराब का व्यापार मौलिक अधिकार नहीं है। मप्र हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने न्यायमूर्ति विवेक अग्रवालकी अध्यक्षता में सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनी की याचिका खारिज कर दी।मामला एक्साइज विभाग द्वारा 8 लाइसेंस निलंबित किए जाने से जुड़ा था। विभाग ने 4 फरवरी 2026 को यह कार्रवाई की थी, जो 26 फरवरी 2024 को जारी शो-कॉज नोटिस पर आधारित थी। नोटिस में फर्जी परमिट के जरिए शराब के अवैध परिवहन के आरोप लगाए गए थे।कपंनी की दलील पर सरकार ने दिया तर्ककंपनी की ओर से दलील दी गई कि संबंधित नोटिस 2023-24 की अवधि से जुड़ा था और 31 मार्च 2024 को लाइसेंस समाप्त हो चुके थे। नए लाइसेंस जारी होने के बाद पुराने मामलों के आधार पर कार्रवाई को अवैध बताया गया। वहीं राज्य सरकार ने तर्क दिया कि एक्साइज कानून के तहत विभाग को नियम उल्लंघन पर कार्रवाई का पूरा अधिकार है।सरकारी नियंत्रण में होता है शराब का व्यापारकोर्ट ने अपने 32 पन्नों के फैसले में कहा कि शराब का व्यापार पूर्णतः सरकारी नियंत्रण में होता है और यह किसी भी तरह से मौलिक अधिकार की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस निलंबित या रद्द करना पूरी तरह वैध है।कोर्ट ने फैसले में यह भी कहाहाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शो-कॉज नोटिस किसी एक समयावधि तक सीमित नहीं होता। यदि आरोप गंभीर हों तो बाद में भी कार्रवाई की जा सकती है और पुराने उल्लंघन नए लाइसेंस को प्रभावित कर सकते हैं। फैसले में यह भी कहा गया कि यदि धोखाधड़ी के आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो अन्य कानूनी दलीलें कमजोर पड़ जाती हैं। अदालत ने इस कार्रवाई को “प्रोपोर्शनैलिटी टेस्ट” के अनुरूप उचित ठहराया।

बामुलाहिजा: गुना में किस नेता का था पार्सल... निगम-मंडल के रास्ते राज्यसभा की तीसरी सीट का राज... पढ़िए सियासी फुसफुसाहट
संदीप भम्मरकरगुना में दिल्ली का सियासी पार्सल?गुना की एक छोटी सी पुलिस चौकी और वहां पकड़ी गई एक करोड़ की रकम, कहानी यहीं खत्म हो जानी थी। लेकिन 20 लाख में “सेटलमेंट” हुआ... फोन गुजरात से आया... और अब सवाल दिल्ली तक जा पहुंचा है। आखिर ये सिर्फ कैश था... या किसी बड़े खेल की कड़ी? मामला दब चुका था, फाइल बंद हो चुकी थी, लेकिन ग्वालियर अंचल के ही एक अफसर ने “लीक” कर पूरी कहानी को सड़कों पर ला दिया। अब तक कार्रवाई पुलिस तक सीमित है, लेकिन असली सवाल वहीं खड़ा है कि वो एक करोड़ आखिर गया कहां? और उससे भी बड़ा सवाल३ ये पैसा किसके लिए था? सूत्रों की गलियों में अब एक नई फुसफुसाहट तैर रही है... कहा जा रहा है कि ये रकम दिल्ली के किसी बड़े नेता से जुड़ी थी। मुख्यमंत्री की सख्त कार्रवाई के बाद मामला और गरमा गया है... लेकिन सियासत की ये परतें इतनी आसानी से खुलती नहीं हैं। गुना की चैकी में पकड़ा गया कैश अब सिर्फ “सबूत” नहीं रहा। ये एक सवाल बन चुका है... जिसका जवाब शायद फाइलों में नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों में छुपा है।बाबा का कांग्रेस में हिन्दू बमआदिवासी इलाकों में धर्म और पहचान को लेकर नैरेटिव सेट करने में जुटे उमंग सिंघार की मुहिम को उनकी ही पार्टी के भीतर से झटका लग गया है। भागवत कथा वाचक पंडित मोहित नागर ने कांग्रेस के मंच से ऐसा “हिंदू बम” फोड़ा कि सियासत में गूंज दूर तक सुनाई दे रही है। उनका साफ कहना है कि आदिवासी हिंदू ही हैं, उनका अलग कोई धर्म नहीं। दिलचस्प बात ये है कि कुछ ही दिन पहले उमंग सिंघार आदिवासी सभाओं में ठीक इसके उलट बात रखते दिखे थे, जहां वे आदिवासियों को हिंदू न मानने की लाइन पर जोर दे रहे थे। अब हाल ये है कि कांग्रेस में ही दो विचार आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं। एक तरफ “पहचान की नई राजनीति” तो दूसरी तरफ “परंपरा का पुराना पाठ”। सवाल ये है कि ये घटना ये भीतर का टकराव है ये गहरी दरारों का नतीजा हैं। लेकिन बाहर तो क्लीयर हो रहा है कि आदिवासियों के हिन्दू एजेंडे को लेकर कांग्रेस का मैसेज क्लीयर नहीं है।निगम-मंडल से राज्यसभा का रास्तातीन सीटें, एक पक्की फिर भी कांग्रेस खेमे में बेचैनी? क्या इस बार वोटिंग मशीन नहीं “मनोविज्ञान” हैक होने वाला है? ये सवाल राज्यसभा चुनाव से पहले फिर से हवा में तैर रहे हैं। वैसे तो “ऑपरेशन लोटस” भूलने वाला कांड नहीं है। लेकिन राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेसी खेमा फिर उसी एहसास से गुजर रहा है। विजयपुर की हालिया घटना के बाद कांग्रेस का वही दर्द फिर उभरने लगा है कि फिर से कोई “खेल” न हो जाए। सियासी गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी की तरफ से एक पुराना लेकिन असरदार फॉर्मूला फिर हवा में तैर रहा है। एक राज्यसभा वोट के बदले निगम-मंडल की कुर्सी! ये कोई नया प्रयोग नहीं है। इससे पहले भी इस तरह के “पैकेज डील” सियासत के मंच पर दिख चुके हैं। अब कांग्रेस के भीतर नजरें अपने ही विधायकों पर टिक गई हैं कौन नाराज है, कौन संतुष्ट और कौन “ऑफर” के लिए तैयार बैठा है ये सब बारीकी से तौला जा रहा है। वोटिंग का दिन अभी दूर है, लेकिन सियासी बाजार सज चुका है। अब देखना ये है, कांग्रेस का कुनबा एकजुट रहेगा३ या फिर कोई “एक वोट” पूरी कहानी बदल देगा?पीसीसी में फट रही ठेकेदारों की फाइलेंपहले साथ में टेंडर, फिर साथ में ट्रांजेक्शन और अब सीधे प्रेस कॉन्फ्रेंस! वैसे तो अफसरों और ठेकेदारों के बीच ‘पहले प्यार’ वाला रिश्ता रहता है। ये रिश्ता अक्सर “समझदारी की चाय” पर चलता है। लेकिन जैसे ही रकम की चीनी कम-ज्यादा होती है, रिश्ते में कड़वाहट घुलने लगती है तो नतीजा पॉलिटिकल प्रहार के रूप में बदल रहा है। ऐसे ही “नाराज फूफा” अब नया ठिकाना ढूंढ चुके हैं और वो है प्रदेश कांग्रेस कमेटी का दफ्तर। एक-एक कर ठेकेदार अपने पुराने कांग्रेसी कनेक्शन खंगालते हुए पीसीसी पहुंच रहे हैं और साथ ला रहे हैं पूरा हिसाब-किताब, फाइलें, और “गुप्त डायरी” का खजाना। इधर पीसीसी में बैठे नेता भी किसी शिकारी बाज से कम नहीं मुद्दा मिला नहीं कि झपट्टा मारा... और फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आरोपों के तीर चलाए जा रहे हैं। इन तीरों का निशाना भले अफसर दिखते हों, लेकिन चोट सीधी सरकार पर लग रही है। और इस पूरे खेल का सबसे दिलचस्प किरदार हैं वही ठेकेदार जो सिस्टम से नाराज होकर मैदान में उतरे थे। अब मीडिया में उठती धूल को दूर खड़े होकर ऐसे देख रहे हैं जैसे कोई अपनी ही फिल्म का ट्रेलर एंजॉय कर रहा हो। फाइलें खुल रही हैं रिश्ते टूट रहे हैं और सियासत इस पूरे ड्रामे का फ्रंट रो टिकट लेकर बैठी है।सीधी कार्यवाही से कुनबा नाराजसीधी कार्रवाई और सत्ता का सख्त संदेश! लेकिन इस बार मामला सिर्फ ट्रांसफर-पोस्टिंग का नहीं, पूरे अफसरी कुनबे की धड़कनों का है। सीधी के कलेक्टर और गुना के एसपी पर हुई कार्यवाही के बाद सीएम के गुस्से का शिकार बनने वाले कलेक्टरों की संख्या 10 हो गई है और एसपी जैसे सीनियर आईपीएस अफसरों का आंकड़ा 8 पर पहुंच गया है। वैसे, हटाने की कार्यवाही तो एक परंपरा सी बन चुकी है। लेकिन मौजूदा कार्यवाही के बाद ऊपर के अफसरी कुनबे के कान खड़े कर दिए हैं। चर्चा आईएएस और आईपीएस एसोसिएशन के ग्रुप्स में हुई। अफसर ये कहते सुनाई दिए कि कलेक्टर-एसपी जैसे जिम्मेदार अफसर पर इस तरह का बर्ताव करके हटाना ठीक नहीं है। वैसे, देखा गया है कि एसोसिएशन के नाक-भौंहे चढ़ाने का कोई फायदा नहीं होता। अब क्या असर दिखाई देगा, कहना मुश्किल है।

ईसाई धर्म अपनाने पर एससी स्टेटस खत्म:सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, संविधान का दिया हवाला
नई दिल्ली। धर्मांतरण पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को मामले पर सुनवाई के दौरान हैदराबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा है कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा सांविधानिक आदेश, 1950 में साफ कहा गया है कि खंड-3 में बताए गए धर्मों के अलावा किसी भी धर्म में धर्मांतरण करने पर जन्म के बावजूद, अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत समाप्त हो जाता है। जस्टिस पी. के. मिश्रा और एन. वी. अंजारिया की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी दूसरे धर्म में धर्मांतरण करने से अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति एक ही समय पर क्लॉज 3 में बताए गए धर्म के अलावा किसी दूसरे धर्म को मानने या उसका पालन करने का दावा नहीं कर सकता, और साथ ही अनुसूचित जाति का सदस्य होने का दावा भी नहीं कर सकता।धर्मांतरण के पल ही खत्म हो जाता है अजा का दर्जअदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में, जहां कोई व्यक्ति यह दावा करता है कि उसने संवैधानिक आदेश के क्लॉज 3 में न बताए गए किसी धर्म से वापस हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में धर्मांतरण किया है, तो तीन शर्तों का एक साथ और पूरी तरह से साबित होना जरूरी है। क्लॉज 3 में न बताए गए किसी भी धर्म में धर्मांतरण करने पर, जन्म की स्थिति चाहे जो भी हो, धर्मांतरण के उसी पल से अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत और पूरी तरह से खत्म हो जाता है।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनाया फैसलाबता दें कि यह आदेश एक ऐसे व्यक्ति के मामले में दिया गया, जिसने ईसाई धर्म अपना लिया था और अब पेस्टर के तौर पर काम कर रहा है, लेकिन उसने कुछ लोगों के खिलाफ एससी-एसटी (अत्याचार रोकथाम) कानून के तहत मामला दर्ज कराया था। 30 अप्रैल 2025 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था नहीं है। ऐसे में पीड़ित व्यक्ति एससी-एसटी कानून के प्रावधानों का लाभ लेने का पात्र नहीं है। इसके बाद हाईकोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज धाराओं को खत्म करने का आदेश दिया था।

लोकसभा:किसानों की आय को लेकर गरमाया सदन, टीएमसी सांसद के आरोप पर भड़के शिवराज, मप्र का दिया उदाहरण
नई दिल्ली। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान किसानों की आय को लेकर चर्चा गरमा गई। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय के सवाल पर जवाब देते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया कि देश में किसानों की आय दोगुनी ही नहीं, बल्कि कई मामलों में तीन गुना तक बढ़ी है। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि सरकार किसानों की स्थिति सुधारने के लिए लगातार काम कर रही है।शिवराज ने बताया कि केंद्र सरकार किसानों को हर साल 6,000 रुपये की किसान सम्मान निधि सीधे उनके खातों में दे रही है। साथ ही उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में किसान अब एक साल में तीन-तीन फसलें उगाकर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने एक किसान का उदाहरण भी देना चाहा, लेकिन लोकसभा स्पीकर ने उन्हें संक्षेप में जवाब देने की हिदायत दी।सपा सांसद ने भी सरकार पर दागा सवालइसी दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने हस्तक्षेप किया और सरकार से सीधा सवाल पूछा कि क्या वह स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करेगी। इस पर सदन का माहौल कुछ तनावपूर्ण हो गया और धर्मेंद्र यादव उत्तेजित होकर अपनी बात रखने लगे। स्पीकर ने उन्हें शांत रहने की सलाह दी और कहा कि प्रश्नकाल के दौरान संयम बनाए रखना चाहिए। उन्होंने मंत्री से भी कहा कि जवाब संक्षेप में दें।शिवराज ने यूपीए सरकार पर साधा निशानाअपने जवाब में शिवराज सिंह चैहान ने पिछली यूपीए सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से मना किया था। साथ ही उन्होंने बताया कि मौजूदा सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद कर रही है और किसानों को बेहतर दाम दिलाने के लिए कदम उठा रही है।फल-सब्जियों के परिवहन में मदद कर रही सरकारउन्होंने यह भी कहा कि सरकार अब फल और सब्जियों जैसे उत्पादों की खरीद और उनके परिवहन पर भी सहायता दे रही है, जिससे किसानों को बाजार तक पहुंचने में मदद मिल रही है। कुल मिलाकर, किसानों की आय, एमएसपी और स्वामीनाथन आयोग को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली।

दिल्ली विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी:बजट पेश होने से पहले स्पीकर के पास आया ई-मेल, लिस्ट में कई दिग्गजों के नाम
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में बजट पेश होने से ठीक पहले, मंगलवार सुबह बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया है। विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को सुबह 7ः28 और 7ः49 बजे धमकी भरे ईमेल मिले। जिसमें कहा गया था कि विधानसभा और पास के मेट्रो स्टेशन को बम से उड़ाया जाएगा। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई और पूरे परिसर की गहनता से जांच शुरू कर दी। स्पीकर विजेन्द्र गुप्ता को मिले दोनों ईमेल में कई नाम शामिल किए गए थे, जिनमें एलजी तरनजीत सिंह संधू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के नाम थे।दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां आई हरकत मेंमामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं। विधानसभा परिसर और आसपास के इलाके की गहनता से जांच शुरू की गई। डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक टीम ने पूरे विधानसभा क्षेत्र में विस्तार से जांच की। पुलिस ने आसपास के मेट्रो स्टेशन की भी जांच तेज कर दी, ताकि अगर किसी तरह की कोई संदिग्ध चीज हो तो पकड़ी जा सके।सुरक्षा कारणों से स्थगित हुई विधानसभा की कार्यवाहीसुरक्षा कारणों से विधानसभा की कार्यवाही को 11ः30 बजे तक स्थगित कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल किसी तरह की संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। हालांकि सुरक्षा में कोई कमी न रहे, इसके लिए पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी है। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता मंगलवार को विधानसभा में बजट 2026 पेश करने वाली हैं। इसी बीच विधानसभा को बम उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने लगभग जांच पूरी कर ली है। अभी तक कुछ संदिग्ध नहीं मिला है। ऐसे में सीएम रेखा गुप्ता विधानसभा में पहुंच गई हैं और बजट पेश कर रही हैं।

संसद में गूंजा मोबाइल डेटा प्लान्स का मुद्दा:आप सांसद ने कंपनियों को खड़ा किया कटघरे में, पेट्रोल को दिया हवाला
नई दिल्ली। राज्यसभा में आप सांसद राघव चड्ढा ने मोबाइल फोन यूजर्स से जुड़े एक मुद्दे को उठाया गया। राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि देश के करोड़ों मोबाइल यूजर रोजाना डेटा प्लान्स के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से लूटे जा रहे हैं। सोमवार को इस विषय पर बोलते हुए उन्होंने इस पूरी व्यवस्था को उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताया। सांसद ने विस्तार से समझाते हुए कहा कि जब कोई यूजर अपना मोबाइल रिचार्ज कराता है, तो उसे उसके प्लान के अनुसार प्रतिदिन 1.5 जीबी, 2 जीबी या 3 जीबी डेटा मिलता है। लेकिन यह डेटा ‘डेली लिमिट’ के रूप में होता है, जो हर दिन रात 12 बजे समाप्त हो जाता है। यदि उस दिन का पूरा डेटा उपयोग नहीं हुआ, तो बचा हुआ डेटा स्वतः समाप्त (फॉरफिट) हो जाता है और अगले दिन के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं किया जाता।मोबाइल डेटा उपभोक्ता का अधिकारराज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब उपभोक्ता पूरे डेटा का पैसा देता है, तो उसे पूरा डेटा उपयोग करने का अधिकार क्यों नहीं मिलता। इस व्यवस्था को उन्होंने एक उदाहरण से समझाया। उन्होंने कहा, यदि किसी व्यक्ति ने महीने की शुरुआत में अपनी गाड़ी में 20 लीटर पेट्रोल भरवाया और महीने के अंत तक केवल 15 लीटर ही उपयोग हुआ, तो क्या पेट्रोल पंप वाला बचा हुआ 5 लीटर वापस ले लेगा? इसका जवाब है, नहीं, क्योंकि उपभोक्ता ने पूरे 20 लीटर का भुगतान किया है। ठीक उसी प्रकार, मोबाइल डेटा भी उपभोक्ता का अधिकार होना चाहिए और उसे समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।सांसद ने कंपनियों पर यह भी लगाया आरोपसांसद ने यह भी आरोप लगाया कि टेलीकॉम कंपनियां जानबूझकर ‘डेली डेटा लिमिट’ वाले प्लान को बढ़ावा देती हैं, जबकि ‘मंथली डेटा लिमिट’ वाले प्लान कम उपलब्ध कराए जाते हैं। उनका तर्क था कि यदि मासिक डेटा सीमा हो, तो उपभोक्ता पूरे महीने में अपनी सुविधा के अनुसार अधिकतम डेटा उपयोग कर सकता है, जिससे कंपनियों को कम फायदा होता है। यही कारण है कि कंपनियां दैनिक सीमा वाले प्लान को प्राथमिकता देती हैं। उन्होंने कहा कि आज इंटरनेट केवल मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। उन्होंने इसे ‘डिजिटल ऑक्सीजन’ बताया।

खत्म होना चाहिए मिडिल ईस्ट वार:पीएम मोदी ने लोकसभा में भारत को रुख को किया स्पष्ट, कहा- नागरिकों-पावर प्लांट में हमले मंजूर नहीं
नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बीते करीब 25 दिनों से चल रही जंग ने दुनिया को संकट में डाल दिया है। मिडिल ईस्ट में आए इस संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमवार को लोकसभा में भारत के रुख को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने इन हमलों का विरोध किया है और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट अस्वीकार्य है। वहीं उन्होंने भारत के सामने आई परिस्थितियों पर बोलते हुए कहा कि सरकार संवेदनशील, सतर्क और हर सहायता के लिए तत्पर है।पीएम मोदी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा, पश्चिमी एशिया के हालात चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि भारत की स्पष्ट भूमिका है कि पश्चिम एशिया में तनाव खत्म होना चाहिए। भारत शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष है और नागरिकों और पावर प्लांट पर हमले मंजूर नहीं हैं। पीएम ने यह भी बताया कि पिछले दो-तीन हफ्तों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस विषय पर सदन को जरूरी जानकारी दी है। अभी इस संकट को तीन सप्ताह से ज्यादा हो रहा है। इससे देशों की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर विपरीत असर हो रहा है। इसलिए दुनिया संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह कर रही है।युद्ध ने खड़ी की अप्रत्याशित चुनौतियांप्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के सामने भी युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियों खड़ी की हैं। ये चुनौतियों आर्थिक भी हैं, नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ी भी हैं और मानवीय भी हैं। युद्धरत और युद्ध से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक और व्यापारिक रिश्ते हैं। जिस क्षेत्र में युद्ध हो रहा है, वह दुनिया के दूसरे देशों के साथ हमारे व्यापार का भी महत्वपूर्ण रास्ता है। विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा यही क्षेत्र पूरा करता है।यह भी बोले पीए मोदीउन्होंने कहा कि हमारे लिए ये क्षेत्र एक और कारण से भी अहम है। लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं और वहां काम करते हैं। वहां समंदर में जो कमर्शियल शिप चलते हैं, उनमें भारतीय क्रू मैंबर की संख्या भी बहुत अधिक है। ऐसे अलग-अलग कारणों के चलते भारत की चिंताएं स्वभाविक रूप से अधिक हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज दुनिया में जाए।प्रभावित परिवारों को दी जा रही आवश्यक मददपीएम मोदी ने कहा कि जब से युद्ध शुरू हुआ है, जब से हर भारतीय को जरूरी मदद दी जा रही है। मैंने खुद पश्चिम एशिया के देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बात की है। सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है। दुर्भाग्य से कुछ लोगों की दुखद मृत्यु हुई है और कुछ घायल हुए हैं। ऐसे मुश्किल हालात में प्रभावित परिवारों को आवश्यक मदद दी जा रही है। जो घायल हैं, उनका बेहतर इलाज सुनिश्चित कराया जा रहा है।भारतीयों की मदद में जुटे मिशनउन्होंने कहा कि प्रभावित देशों में हमारे जितने भी मिशन हैं, वे लगातार भारतीयों की मदद में जुटे हैं। वहां काम करने वाले भारतीय हों या टूरिस्ट हों, सभी को हर संभव मदद दी जा रही है। हमारे मिशन नियमित रूप से एडवाइजरी जारी कर रहे हैं। यहां भारत और अन्य प्रभावित देशों में 24 घंटों कंट्रोल रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन जारी की गई हैं। सभी भारतीयों को त्वरित जानकारी दी जा रही है।संकट की स्थिति में भारतीयों की सुरक्षा प्राथमिकताप्रधानमंत्री ने कहा कि संकट की स्थिति में भारतीयों की सुरक्षा हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता रही है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3.72 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से एक हजार भारतीय सुरक्षित लौटे हैं। इनमें 700 से अधिक मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवा हैं। खाड़ी के देशों में भारतीय स्कूलों में हजारों विद्यार्थी पढ़ते हैं। सीबीएसई ने ऐसे सभी भारतीय स्कूलों में होने वाली कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। छात्रों की पढ़ाई लगातार चलती रहे, इसके लिए सीबीएसई उचित कदम उठा रही है।

धुरंधर-2: आदित्य धर की मूवी की मुरीद हुईं कगंना, दिल खोलकर ऐसे की तारीफ
मुंबई। 19 मार्च को रिलीज के बाद से ही धुरंधर-2 का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है, भले ही फिल्म विवादों का सामना कर रही है, लेकिन फिल्म को तारीफें अधिक मिल रही हैं। यही कारण है कि आदित्य धर की फिल्म सिनेमा की बाकी फिल्मों से अलग है। अब कंगना रनौत ने फिल्म धुरंधर-2 देख ली और फिल्म देखने के बाद अभिनेत्री खुद को तारीफ करने से नहीं रोक पा रही हैं।कंगना रनौत ने फिल्म धुरंधर-2 की खुलकर तारीफ की है, लेकिन फिल्म के किसी किरदार का जिक्र नहीं किया है। अभिनेत्री ने फिल्म की सफलता का सारा श्रेय आदित्य धर को दिया है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर निर्देशक के नाम पोस्ट लिखा है और उन्हें युवाओं की प्रेरणा बताया है। कंगना ने लिखा, धुरंधर की सफलता की सबसे अच्छी बात यह है कि आदित्य धर एक सुपरस्टार निर्देशक के रूप में स्थापित हो गए हैं। जैसे हॉलीवुड के सुपरस्टार निर्देशक हमेशा सुपरस्टार अभिनेताओं से कहीं ज्यादा बड़े होते हैं।अपने पोस्ट में कंगना ने आदित्य धर की तुलना हॉलीवुड के बड़े निर्देशक और निर्माता से की और उनका मानना है कि बॉलीवुड में सिर्फ मुख्य अभिनेता की बातें होती हैं, लेकिन अपनी पूरी मेहनत लगाकर फिल्म बनाने वाले निर्देशकों के बारे में कुछ कहा नहीं जाता।उन्होंने आगे लिखा, हॉलीवुड के स्पीलबर्ग, टारनटिनो और नोलन। हम अपने फिल्म निर्माताओं को कभी भी पर्याप्त सम्मान या श्रेय नहीं देते। वे अत्यधिक काम करते हैं, कम वेतन पाते हैं और सुपरस्टारों द्वारा उन्हें परेशान किया जाता है। इसी वजह से मुझे आज तक कोई भी ऐसा युवा नहीं मिला, चाहे वह इस क्षेत्र का हो या बाहर का, जो फिल्म निर्माता, छाया निर्देशक, या कोई अन्य तकनीशियन बनने का सपना देखता हो। वे सिर्फ अभिनेता बनना चाहते हैं। यहां एक सुपरस्टार फिल्ममेकर हैं जो किसी भी हीरो से कहीं अधिक चमक रहे हैं। आज बहुत से युवा उनकी कहानी देख रहे हैं जो उनके जैसा बनने की ख्वाहिश रखेंगे और फिल्म उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे!! सैल्यूट, सर।कंगना ने पूरे पोस्ट में सिर्फ आदित्य धर की बात की है। बता दें कि फिल्म में हर किरदार ने भी अपने काफी सुर्खियां बटोरी हैं। फिल्म में शानदार निर्देशन के साथ सभी कलाकारों का बेहतरीन अभिनय रहा है, खासकर रणवीर सिंह दूसरे भाग में पूरी तरह छाए हुए हैं। फिल्म कमाई के मामले में भी नए रिकॉर्ड बनाती हुई नजर आ रही है।

राज्यसभा चुनाव को लेकर मप्र कांग्रेस हलचल:जीतू के बाद अब अरुण यादव ने दावेदारी को लेकर लिया बड़ा बयान, क्या कहा जानें
बुरहानपुर। मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर जून में चुनाव होना है। वर्तमान में दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के पास है। यही आंकड़ा आगामी चुनाव में भी रहने की उम्मीद है। खास बात यह है कि चुनाव से पहले ही राज्यसभा चुनाव को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है। इसकी सबसे ज्यादा हलचल कांग्रेस में देखने को मिल रही है। कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के मैदान से हटने के बाद पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने शुक्रवार को कहा था कि मैं इस रेस में नहीं हूं। वहीं अब पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण यादव ने दावेदारी को लेकर बड़ा बयान दे दिया है। जो सियासी गलियारों में चर्चा का भी विषय बन गया है।बुरहानपुर में ईद मिलन समारोह में शामिल होने पहुंचे अरुण यादव से जब मीडिया ने राज्यसभा चुनाव में दावेदारी को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि मैं इस रेस में शामिल नहीं हूं, मप्र कांग्रेस से राज्यसभा का कौन उम्मीदवार होगा यह निर्णय दिल्ली हाईकमान लेगा।मप्र में हार्स ट्रेडिंग जैसी कोई बात नहीं बिहार में कांग्रेस विधायकों द्वारा किए गए भीतरघात पर अरुण यादव ने कहा मध्यप्रदेश में कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है। यहां कोई मतभेद नहीं है। एक सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार की जीत तय है। हार्स ट्रेडिंग जैसी कोई बात नहीं है।

रुपया धड़ाम, मप्र में सियासत तेज: कांग्रेस के निशाने पर बालीवुड की दिग्गज हस्तियां, इंदौर में लगे महानायक के पोस्टर, ईनाम की भी घोषणा
इंदौर। अमेरिकी डाॅलर के रुपये की गिरती कीमत को लेकर मप्र का सियासी पारा हो गई है। बता दें कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 93 रुपए के पार पहुंच गया है। जिसको लेकर सियासत शुरू हो गई है। यही नहीं कांग्रेस नेताओं ने पोस्टर वार शुरू कर दिया है। हालांकि इस बार कांग्रेसी नेताओं के निशाने पर बालीवुड की दिग्गज हस्तियां हैं। कांग्रेस नेताओं ने इंदौर में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के पोस्टर लगवाए हैं, जिसमें लिखा है- अमिताभ बच्चन को गिरते रुपयों पर ट्वीट करने वाले को ईनाम देंगे। पोस्टर में साल 2013 का अमिताभ बच्चन का एक पुराना ट्वीट दिखाया गया है। उस ट्वीट में उन्होंने रुपये की गिरावट पर चिंता जताई थी। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जब पहले रुपये की कमजोरी को देश की प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता था, तो अब हालात और खराब होने के बावजूद वही आवाजें खामोश क्यों हैं। पोस्टरों में तंज कसते हुए लिखा गया है कि जो लोग पहले आर्थिक मुद्दों पर खुलकर बोलते थे, वे अब चुप्पी साधे हुए हैं।शहर की राजनीति में बढ़ी हलचलमामले को और ज्यादा गर्माते हुए कांग्रेस नेताओं ने एक अनोखी घोषणा भी की है। उन्होंने कहा है कि जो व्यक्ति अमिताभ बच्चन से रुपये की गिरावट पर ट्वीट करवा देगा, उसे 51 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। इतना ही नहीं, अगर खुद अमिताभ बच्चन इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हैं, तो यह इनाम उन्हें ही दिया जाएगा। इस ऐलान के बाद शहर की राजनीति में हलचल और बढ़ गई है।इन कलाकारों की चुप्पी पर खड़े किए सवालकांग्रेस ने केवल अमिताभ बच्चन ही नहीं, बल्कि अन्य कलाकारों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी ने जूही चावला, अनुपम खेर और विवेक अग्निहोत्री जैसे नामों का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग पहले सोशल मीडिया पर हर मुद्दे पर सक्रिय रहते थे, वे अब रुपये की गिरावट पर कुछ क्यों नहीं बोल रहे हैं।कांग्रेस ने केन्द्र सरकार पर साधा निशानाकांग्रेस ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। आयात महंगा होने से पेट्रोल-डीजल, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ते हैं, जिससे महंगाई बढ़ती है। इसके अलावा विदेश में पढ़ाई और इलाज भी महंगे हो जाते हैं, कंपनियों की लागत बढ़ती है और रोजगार पर असर पड़ता है।पार्टी नेताओं का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ पोस्टर वार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे लेकर आगे भी आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने मांग की है कि जो लोग पहले रुपये के गिरने पर देशभक्ति की बातें करते थे, वे अब सामने आकर देश की अर्थव्यवस्था पर अपनी राय रखें।

मप्र में निवेश की तलाश:सीएम मोहन आज राजस्थान के चुनिंदा उद्योगपतियों से होंगे रूबरू, रेखांकित करेंगे सरकार की प्राथमिकताओं को
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव आज शनिवार को राजस्थान के जयपुर स्थित आईटीसी राजपूताना में आयोजित होने वाले एक इंटरैक्टिव सत्र के दौरान उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेंगे। उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह और मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) के प्रबंध निदेशक चंद्रमावली शुक्ला इस कार्यक्रम में सीएम के साथ उपस्थित रहेंगे। इस सत्र के दौरान, राज्य की स्पष्ट नीति, प्रशासनिक तत्परता और निवेश-अनुकूल दृष्टिकोण को देश भर के प्रमुख औद्योगिक समूहों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।इस सत्र में मध्य प्रदेश की औद्योगिक नीति, क्षेत्र-वार प्रोत्साहन, विकसित औद्योगिक क्षेत्रों की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे का विस्तार, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, कौशल विकास इकोसिस्टम और त्वरित अनुमोदन प्रणालियों पर एक विस्तृत प्रस्तुति शामिल होगी।सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करेंगे सीएमइस चर्चा के दौरान, मुख्यमंत्री यादव राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करेंगे और इस बात पर प्रकाश डालेंगे कि मध्य प्रदेश निवेशकों के लिए एक स्थिर नीतिगत वातावरण, पारदर्शी प्रक्रियाएं और समय-सीमा के अंदर निर्णय लेने की प्रक्रिया कैसे सुनिश्चित कर रहा है। शुक्रवार को जारी एक सरकारी बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री निवेश को रोजगार सृजन, कौशल वृद्धि और औद्योगिक विस्तार से जोड़ने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को भी प्रस्तुत करेंगे।चुनिंदा उद्योगपतियों के साथ आमने-सामने करेंगे बैठकमुख्यमंत्री यादव का मुख्य भाषण राज्य की औद्योगिक दिशा और दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण पर केंद्रित होगा। वह प्रस्तावित परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा करने के लिए चुनिंदा उद्योगपतियों के साथ आमने-सामने बैठकें भी करेंगे। सरकार ने कहा कि जयपुर में होने वाला यह निवेश संवाद एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल होने की उम्मीद है, जो मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास और निवेश की संभावनाओं को राष्ट्रीय औद्योगिक समुदाय से जोड़ेगी।मप्र सरकार द्वारा आयोजित किया गया कार्यक्रमइससे पहले, भीलवाड़ा में कपड़ा क्षेत्र पर केंद्रित इसी तरह का एक चर्चा सत्र आयोजित किया गया था। यह राजस्थान में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित किया गया इस तरह का दूसरा कार्यक्रम है। उद्योग विभाग के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य जयपुर और पूरे राजस्थान के उद्योगपतियों तथा निवेशकों को मध्य प्रदेश में उपलब्ध व्यावसायिक अवसरों के बारे में जानकारी देना और उन्हें राज्य में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

मप्र में राजनीतिक नियुक्तियों का दौर शुरू:जयभान सिंह पवैया को मिली वित्त आयोग की बड़ी जिम्मेदारी, अन्य सदस्यों को जल्द मिलेगी शुखशबरी
भोपाल। मध्य प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का दौर शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने राज्य वित्त आयोग के गठन को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है, जिससे प्रदेश की वित्तीय संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। राजधानी भोपाल से जारी आदेश के अनुसार वरिष्ठ नेता जयभान सिंह पवैया को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनके साथ के.के. सिंह को सदस्य और वीरेंद्र कुमार को सदस्य सचिव बनाया गया है, जबकि अन्य सदस्यों की नियुक्ति जल्द की जाएगी।यह आयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 और मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग अधिनियम, 1994 के तहत गठित किया गया है। आयोग का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित किया गया है। आयोग का मुख्य उद्देश्य पंचायतों और नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति का गहन पुनर्विलोकन करना और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के लिए ठोस सिफारिशें देना होगा।राज्य वित्त आयोग के पास रहेगी यह बड़ी जिम्मेदारीराज्य वित्त आयोग कर, शुल्क, पथकर और फीस से प्राप्त आय को राज्य और स्थानीय निकायों के बीच किस प्रकार बांटा जाए, इसके सिद्धांत तय करेगा। साथ ही यह पंचायतों और नगरपालिकाओं को दिए जाने वाले अनुदानों, वित्तीय सुधारों और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी सुझाव देगा।आयोग इन पर देगा अपनी अनुशंसाएंइसके अलावा आयोग भूमि कर के बंटवारे, पेट्रोलियम उत्पादों से मिलने वाले राजस्व में हिस्सेदारी, स्थानीय निकायों की ऋण सीमा और पुनर्भुगतान व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी अपनी अनुशंसाएं देगा। जन सुविधाओं के विस्तार, सेवाओं की गुणवत्ता सुधार और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दे भी इसकी प्राथमिकता में शामिल रहेंगे। आयोग 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली पांच वर्षीय अवधि के लिए अपनी सिफारिशें राज्यपाल को सौंपेगा, जो प्रदेश के विकास और स्थानीय शासन को नई दिशा दे सकती हैं।

अखंड भारत की याद दिलाता है चेटीचंड का पर्व:उज्जैन में बोले सीएम, चल समारोह को भगवा झंडी दिखाकर किया रवाना
भोपाल। चेटीचंड का पर्व शुक्रवार को धूमधाम से मनाया गया। चेटी चंड के पावन पर्व को सिंधी समाज संत झूलेलाल के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं। इस अवसर पर उज्जैन के टॉवर चैक पर भव्य चल समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव शामिल हुए और चल समारोह को भगवा झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में राज्यसभा सांसद और एक्ट्रेस सुश्री जयाप्रदा, मशहूर एक्टर आफताब शिवदासानी, तारक मेहता का उल्टा चश्मा फेम गोली उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि चेटीचंड का पर्व अखंड भारत की याद दिलाता है और भारतीयों के हृदय में अखंड भारत का सपना जागृत रखता है। सामाजिक उत्सवों से एक दूसरे के प्रति प्रेम और आत्मीयता बढ़ती है। सीएम ने सम्राट विक्रमादित्य को उनकी वीरता, न्यायप्रियता और दानशीलता के लिए याद किया उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य से प्रेरित होकर शासन उन गुणों को आत्मसात कर सुशासन के नए आयाम स्थापित कर रहा है। सीएम ने चेटीचंड पर्व की दी शुभकामनाएंसीएम ने विक्रम संवत 2083 में बाबा श्री महाकाल की नगरी से देश एवं प्रदेशवासियों को चेटीचंड के महापर्व की मंगलकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश, प्रदेश विकास के नवीन आयाम स्थापित कर रहा है। सिंहस्थ 2028 के लिए सरकार नवीन विकास के कार्य कर रही है। सभी गणमान्य नागरिक भी विकास कार्यों में अपना योगदान दे रहे है। आगामी सिंहस्थ के दिव्य आयोजन से प्रदेश और उज्जैन की वैश्विक पटल पर नवीन पहचान स्थापित होगी।

नेशनल चंबल सेंक्चुरी:अवैध रेत खनन पर एससी का हंटर, तीन राज्यों को नोटिस, जवाब मिलने पर होगी सुनवाई
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में हो रहे अवैध रेत खनन के मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा है कि इन राज्यों से जवाब मिलने के बाद पूरे मामले पर विस्तार से सुनवाई की जाएगी। यह मामला उस समय सामने आया जब मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि चंबल अभयारण्य के संरक्षित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। इन इलाकों में घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम भी चल रहा है। लेकिन, खनन की गतिविधियों के कारण घड़ियालों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंच रहा है।वनों को नुकसान पहुंचाने वालों को नहीं किया जाएगा बर्दाश्तसुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने साफ कहा कि संरक्षित वनों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि ऐसी गतिविधियों पर वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एक्ट, फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट, बायोलॉजिकल डायवर्सिटी एक्ट और इंडियन फॉरेस्ट एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।कोर्ट ने दिया बड़ा संकेतअदालत ने यह भी कहा कि अगर संरक्षित क्षेत्रों में अवैध खनन जारी रहता है, तो इसके लिए संबंधित विभागों के अधिकारी ही नहीं, बल्कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारी भी परोक्ष रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे। कोर्ट ने संकेत दिया कि इस तरह की लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी को भी बनाया पक्षकारइस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी को भी पक्षकार बनाया गया है, ताकि वह मामले की निगरानी और जांच में सहयोग कर सके। अदालत ने यह मामला मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर स्वतरू संज्ञान लेते हुए उठाया है, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है। फिलहाल कोर्ट ने राज्यों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को तय की गई है। उम्मीद है कि अगली सुनवाई में अवैध खनन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर और स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आएंगे।

केरल फतह करने भाजपा का खाका तैयार:मोदी-शाह से लेकर पार्टी के तमाम दिग्गज उरेंगे चुनावी रण में, रैलियों से कार्यकर्ताओं में भरेंगे जोश
तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। राज्य में 9 अप्रैल को मतदान होगा और 4 मई को नतीजे आएंगे। ऐसे में राजनीतिक दलों ने अपना फोकस चुनाव प्रचार अभियान में कर दिया है। भाजपा केरल में एक आक्रामक अभियान की तैयारी कर रही है। पार्टी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से लेकर तमाम दिग्गज नेताओं को चुनावी रण में उतारने की रणनीति बनाई है। बता दें कि भाजपा राज्य में ऐतिहासिक सफलता हासिल करने के प्रयास में पार्टी अपनी शीर्ष राष्ट्रीय नेतृत्व टीम को तैनात कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री समेत अन्य वरिष्ठ नेता केरल पहुंचने वाले हैं, जो 140 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा का खाता खोलने की पार्टी की दृढ़ता को दर्शाता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो त्वरित दौरों पर प्रमुख जिलों का दौरा करेंगे। इस दौरान वह रैलियों को संबोधित करेंगे और कार्यकर्ताओं को उत्साहित करेंगे। भाजपा के अभियान का खाका राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे कसर्गोड, पलक्कड़, तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और त्रिशूर में उच्च दृश्यता वाली पहुंच पर केंद्रित है।हाल के नतीजों से बढ़ा भाजपा का आत्मविश्वासपार्टी अपने हाल के चुनावी लाभों से आत्मविश्वास ले रही है। सबसे प्रमुख है अभिनेता से राजनीतिज्ञ बने सुरेश गोपी की त्रिशूर लोकसभा सीट पर 70,000 से अधिक मतों से हासिल की गई जीत शामिल है। इसके बाद दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा ने तिरुवनंतपुरम निगम पर नियंत्रण हासिल किया, जो इस राज्य में पार्टी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है, जहां उसे परंपरागत रूप से स्थान पाने में कठिनाई रही है।भाजपा के लिए मिले-जुले रहे हैं चुनावी आंकड़ेहालांकि आंकड़े मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 15.64 प्रतिशत वोट शेयर प्राप्त किया जबकि 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों में यह थोड़ी गिरकर 14.71 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद, पार्टी उत्साहित बनी हुई है और 2021 विधानसभा चुनावों में नौ सीटों पर दूसरे स्थान पर आने को बढ़ती पकड़ का सबूत मानते हुए लगातार सक्रिय है। केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने विश्वास जताया है कि पार्टी न केवल लंबे समय से चली आ रही चुनावी बाधा को तोड़ेगी बल्कि आगामी विधानसभा में कई सीटें भी जीतेगी।

मोदी के मंत्री को जान से मारने आया काॅल:जयंत चौधरी की सुरक्षा हुई चाकचैबंद, धमकाने वाले ने तीन-चार बार किए थे फोन
नई दिल्ली। केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी को जान से मारने की धमकी दी गई है। जयंत चौधरी को एक अनजान नंबर से कॉल आया था। आरोपी ने उन्हें गोली मारने की धमकी दी। बताया गया है कि धमकी देने वाला व्यक्ति पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का रहने वाला है। फिलहाल, जयंत चैधरी के आवास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और दिल्ली पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी के निजी सहायक विश्वेंद्र शाह ने बताया, दो दिन पहले मंत्री जयंती चैधरी अपने आवास से संसद के लिए निकले थे। संसद पहुंचने के बाद एक फोन आया था। लगातार तीन से चार बार कॉल किए गए थे। एक बार जब फोन उठाया गया तो दूसरी तरफ से सीधे गोली मारने की धमकी दी गई थी। उसने बोला कि जो फोटो भेजी है वो देखी है या नहीं देखी है। मैंने फोन कट होने के बाद जैसे ही व्हाट्सअप पर फोटो को देखा तो उसमें मंत्री जयंत चैधरी की आधिकारिक यात्राओं का शेड्यूल था। उस शेड्यूल के साथ व्हाट्सअप पर भेजे गए एक फोटो में सीधे गोली मारने की बात का भी उल्लेख था।धमकी देने वाले के पास था मंत्री के दौरे का शेड्यूल उन्होंने बताया, जिस जिले में मंत्री का दौरा होता है, तो इसके लिए एक पूरा शेड्यूल होता है। उसे सिर्फ जिले के अधिकारियों के पास भेजा जाता है, लेकिन वह शेड्यूल धमकी देने वाले व्यक्ति के पास था। धमकी देने वाले व्यक्ति के पास मंत्री जयंत चैधरी के आगरा के कार्यक्रम का शेड्यूल था।जांच में जुटी पुलिसजयंत चौधरी के निजी सहायक विश्वेंद्र शाह ने कहा कि दिल्ली पुलिस को इस मामले को लेकर शिकायत दी गई है। पुलिस अपनी जांच कर रही है। इसमें आरोपी की लोकेशन पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में ट्रेस हुई है। मतलब कि धमकी भरा कॉल बंगाल के मुर्शिदाबाद से आया था। आरोपी की पहचान इस्लाइल के रूप में हुई है।

असम का चुनावी रण:सीएम सरमा आज दाखिल करेंगे नामांकन, मेगा रोड शो कर दिखाएंगे ताकत, विपक्ष के नेता भी भरेंगे पर्चा
गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को मतदान होगा। इससे पहले घोषित उम्मीदवारों ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में बड़े दिग्गज नेता आज शुक्रवार को शक्ति प्रदर्शन कर नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। इसमें मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का भी नाम है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा जलुकबारी सीट से अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इसके लिए वे कामरूप (मेट्रोपॉलिटन) जिला निर्वाचन कार्यालय पहुंचेंगे। नामांकन से पहले सीएम सरमा खानापारा वेटरनरी फील्ड से हेंगराबाड़ी स्थित डिप्टी कमिश्नर कार्यालय तक करीब 5.6 किलोमीटर लंबा रोड शो करेंगे, जिसे उनकी राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश जारी कर समर्थकों से इस रोड शो में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनता का आशीर्वाद उन्हें आगामी चुनाव में और मजबूती देगा। जलुकबारी सीट 2001 से सरमा का गढ़ रही है और वे यहां से लगातार छठी जीत हासिल करने की कोशिश में हैं। उन्होंने पहली बार 1996 में इस सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे। इसके बाद 2001 में उन्होंने पहली जीत दर्ज की और तब से लगातार इस सीट पर काबिज हैं।विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया भी दाखिल करेंगे नामांकनवहीं, विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया भी नाजिरा सीट से अपना नामांकन दाखिल करेंगे। यह सीट उनके परिवार के लिए राजनीतिक रूप से अहम रही है और वे 2011 से यहां का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रिपुन बोरा उत्तर असम की बरचल्ला सीट से चुनाव मैदान में उतरने जा रहे हैं। क्षेत्रीय दलों की बात करें तो असम जातीय परिषद (एजेपी) के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई खोवांग सीट से चुनाव लड़ेंगे, जबकि राइजोर दल के प्रमुख अखिल गोगोई शिवसागर सीट से नामांकन दाखिल करने की तैयारी में हैं।चार मई को आएंगे नतीजेनामांकन प्रक्रिया को चुनाव का अहम पड़ाव माना जा रहा है, जहां सभी प्रमुख उम्मीदवार आधिकारिक तौर पर मैदान में उतर रहे हैं। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 23 मार्च है। 24 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी जबकि 26 मार्च तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकते हैं। 126 सदस्यीय असम विधानसभा के लिए मतदान 9 अप्रैल को होगा और मतगणना 4 मई को की जाएगी।

इंदौर भीषण अग्निकांड:पीड़ित परिवारों से मिले सीएम मोहन, शोक व्यक्त कर बंधाया ढांढस, हर संभव मदद का भी दिया आश्वासन
इंदौर। इंदौर में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में दो परिवारों के आठ लोगों की जान चली गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। लौमहर्षक घटना से आहत मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव गुरुवार को पीड़ित परिवारों से मिलने इंदौर पहुंचे और उनसे मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने मृतकों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया तथा घायलों का हालचाल जाना।मुख्यमंत्री ओल्ड पलासिया स्थित 13 पंथी जैन समाज धर्मशाला पहुंचे, जहां उन्होंने करीब 20 मिनट तक परिजनों के साथ समय बिताया। इस दौरान उन्होंने घटना की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए। वहीं सीएम ने ईवी चार्जिंग को लेकर एसओपी बनाने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की बारीकी से जांच की जाएगी। पीड़ित परिवार की हर संभव मदद करेंगे।हादसे को लेकर पीड़ित परिवारों में भारी आक्रोशहादसे को लेकर पीड़ित परिवारों में भारी आक्रोश है। पीड़ित परिवार ने फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की देरी से आने की शिकायत की। मृतक मनोज पुगलिया के बेटे सौरभ ने आरोप लगाया कि आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड करीब डेढ़ घंटे की देरी से मौके पर पहुंची। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ फायर टैंकरों में पानी नहीं था और एक वाहन गलत गली में चला गया, जिससे राहत कार्य प्रभावित हुआ और नुकसान बढ़ गया।आग लगने के अलग-अलग दावेपरिजनों के अनुसार आग सुबह करीब 4 बजे लगी थी। प्रारंभिक जानकारी में आग का कारण गाड़ी की चार्जिंग बताया गया था, लेकिन सौरभ का दावा है कि आग बिजली पोल में हुए शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई। पहले कार में आग लगी, जो धीरे-धीरे घर के अंदर खड़ी बाइकों और फिर पूरे मकान में फैल गई। इस हादसे में पुगलिया परिवार का घर पूरी तरह जलकर खाक हो गया। बचने वाले सदस्य फिलहाल रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर फायर ब्रिगेड पहुंच जाती, तो कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

पश्चिम बंगाल चुनाव:ईसी के एक्शन से भड़की ममता, प्रशासनिक कार्रवाई को बताया हाई लेवल की राजनीतिक दखलंदाजी
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। वहीं 4 मई को परिणाम आएंगे। इससे पहले बंगाल का सियासी पारा हाई हो चला है। आईएएस-आईपीएस के ताबड़तोड़ तबादलों को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल को निशाना बनाकर अभूतपूर्व और चिंताजनक कदम उठा रहा है। ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए कहा कि चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही राज्य के 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को अचानक और मनमाने तरीके से हटा दिया गया, जिनमें मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, एडीजी, आईजी, डीआईजी, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक शामिल हैं। उन्होंने इसे प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि उच्च स्तर की राजनीतिक दखलअंदाजी बताया।आयोग रवैया पक्षपातपूर्णः ममतामुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि निष्पक्ष रहने वाली संस्थाओं का राजनीतिकरण किया जा रहा है, जो संविधान पर सीधा हमला है। एक तरफ जहां कथित तौर पर त्रुटिपूर्ण एसआईआर प्रक्रिया चल रही है और अब तक 200 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, वहीं आयोग का रवैया पक्षपातपूर्ण नजर आता है। अब तक अनुपूरक मतदाता सूची जारी नहीं की गई है, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी है। इससे आम नागरिकों में चिंता और असमंजस का माहौल है।चुनिंदा तरीके से सीनियर अफसरों को भेजा जा रहा बाहरममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि आईबी, एसटीएफ और सीआईडी जैसे महत्वपूर्ण विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को चुनिंदा तरीके से हटाकर राज्य से बाहर भेजा जा रहा है, जिससे प्रशासनिक ढांचे को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि आखिर भाजपा इतनी बेचैन क्यों है और बंगाल को बार-बार निशाना क्यों बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए लाइन में खड़ा करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।आयोग के फैसलों में विरोधाभास का भी किया जिक्रमुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग के फैसलों में विरोधाभास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ आयोग कहता है कि हटाए गए अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ कुछ ही घंटों में उन्हें चुनाव पर्यवेक्षक बनाकर बाहर भेज दिया जाता है।

सृष्टि के आरंभ की अमृत बेला का पर्व है नव संवत्सर:कोटि सूर्य उपासना कार्यक्रम में बोले सीएम, की ब्रह्म ध्वज की स्थापना
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित विक्रमोत्सव-2026 के अंतर्गत कोटि सूर्य उपासना कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। सीएम दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों को सृष्टि के आरंभ दिवस, गुड़ी पड़वा, चेटी चंड, नववर्ष विक्रम संवत् 2083 के आरंभ, घट स्थापना, नवरात्रि आरंभ, ज्योर्तिविज्ञान दिवस, नवरेह सहित आज देशभर में मनाये जा रहे सभी पर्वों की बधाई और मंगलकामनाएं दीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि आज गुड़ी पड़वा है। संपूर्ण सृष्टि में गुड़ जैसी मिठास फैल गई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हमारी भारतीय संस्कृति में आज से नव संवत्सर एवं नववर्ष का प्रारंभ हो गया है। उन्होंने कहा कि नव संवत्सर सृष्टि के आरंभ दिवस की अमृत बेला को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला पर्व है। आज से एक नए संवत् और भारतीय नववर्ष का प्रारंभ हो गया है। विक्रमादित्य ने रखी सामाजिक सद्भाव की नींव हमारे यहां संवत् सृष्टि के साथ, प्रकृति के सानिध्य में और शासक के पुरुषार्थ से प्रारंभ होता है। सम्राट विक्रमादित्य ने शकों को परास्त किया। तत्कालीन समाज के अराजक तत्वों और आतताईयों का दमन किया। उन्होंने अपनी संपूर्ण प्रजा को कर्जमुक्त बनाया। सच्चे अर्थों में सामाजिक सद्भाव की नींव रखी। वे लोकतंत्र के महानायक थे। उनके पुरुषार्थ से ही प्रारंभ किया गया विक्रम संवत् आज 2083 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। सम्रामट विक्रमादित्य के आदर्शों पर चल रही सरकारमुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य के ओजस्वी शासन उनके शौर्य, साहस, पराक्रम एवं न्याय के प्रतिमानों को आत्मसात करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का प्रयास किया। हम समाज के हर वर्ग के चहुंमुखी विकास के लिए प्रयासरत हैं। हमने वीर विक्रमादित्य शोधपीठ सहित वैदिक घड़ी की भी स्थापना की है।देश की सेवा करने की प्रेरणा देता हे ध्वजइस दौरान सीएम ने ब्रम्ह ध्वज की स्थापना कर कहा कि यह ध्वज हमें सदैव एकजुट रहकर देश-प्रदेश की सेवा करने की प्रेरणा देता है। विक्रमोत्सव-2026 के आयोजन में निहित भावों और इसकी रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य ने अपनी शासन व्यवस्था से राज व्यवस्था को लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलने का सूत्रपात्र किया। उनका नेतृत्व और राज-काज शैली ऐसी थी, जिसमें बाद के शासकों को जनकल्याणकारी शासन व्यवस्था के लिए प्रेरित किया। विक्रमादित्य की शासन व्यवस्था को लागू करना चाहती हैं सरकारेंआज यदि दो हजार साल बाद भी सम्राट विक्रमादित्य को याद कर रहे हैं, तो इसके पीछे यह भाव परिलक्षित होता है कि भारत राष्ट्र की सरकार और राज्य सरकारें, वीर विक्रमादित्य की शासन व्यवस्था को अंगीकृत करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज स्वस्फूर्त और अनुशासित समाज है। हमने हमेशा जियो और जीने दो सहित सबको लेकर चलने की भावना से जीना सीखा है। सम्राट विक्रमादित्य ने लोकतंत्र को बढ़ावा दिया, इसी से लोकतंत्र के सूत्र हम भारतीयों के शरीर में रक्त की तरह प्रवाहित है और अब यह हमारे अस्तित्व की पहचान भी बन गया है।

मुकेश मल्होत्रा को फौरी राहत:SCने मप्र हाईकोर्ट पर लगाई अंतरिम रोक, 23 जुलाई तक टला विधायकी पर संकट
नई दिल्ली-भोपाल। मध्यप्रदेश के विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के लिए सुप्रीम कोर्ट से राहत भरी खबर आई है। दरअसल शीर्ष अदालत ने गुरुवार को मप्र हाईकोर्ट के उस फैसले पर अंतरिक रोक लगा दी है, जिसमें उनके विधायकी को शून्य कर दिया गया था। अब मामले पर अगली सुनवाई 23 जुलाई होगी तब तक मप्र हाईकोर्ट के आदेश पर रोक जारी रहेगी। यानि अगली पेशी तक मल्होत्रा का निर्वाचन यथावत बना रहेगा। गुरुवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन शामिल थे, ने यह अंतरिम राहत दी। विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत से हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की, जिसे स्वीकार कर लिया गया।मल्होत्रा पर चुनावी हलफनामें में आपराधिक मामले छिपाने का आरोपदरअसल, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने फैसले में कहा था कि मुकेश मल्होत्रा ने चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई है, जो एक गंभीर चूक है। इसी आधार पर अदालत ने उनके निर्वाचन को अमान्य घोषित कर दिया था। हालांकि, उन्हें 15 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की अनुमति भी दी गई थी।मल्होत्रा ने खटखटाया था एससी का दरवाजाइस फैसले को चुनौती देते हुए मल्होत्रा ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहां उन्हें फिलहाल राहत मिल गई है। हालांकि, इस अंतरिम आदेश के साथ कुछ शर्तें भी लागू की गई हैं। मल्होत्रा आगामी राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं कर सकेंगे और उन्हें इस अवधि में मानदेय भी नहीं मिलेगा। लेकिन वे विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने के लिए स्वतंत्र रहेंगे।कांग्रेस के ने एसी के फैसले का किया स्वागतकांग्रेस ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे आंशिक राहत बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि एक निर्वाचित विधायक को मतदान से वंचित करना लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि इस मुद्दे पर फिर से अदालत का रुख किया जाएगा, ताकि मल्होत्रा को पूर्ण अधिकार मिल सकें।


