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नई दिल्ली। संसद का बजट सत्र जारी है। सत्र के छठवें दिन यानि बुधवार को संसद के गेट पर एक अलग नजारा देखने को मिला। दरअसल गेट के बाहर राहुल गांधी के साथ कांग्रेस सांसद हाथों में पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का आमना-सामना हुआ इतना ही नहीं दोनों में जुबानी जंग भी देखने को मिली। राहुल ने जहां केन्द्रीय मंत्री को गद्दार दोस्त बताया तो वहीं बिट्टू ने राहुल को देशद्रोही करोर दे दिया है। जिसका सोशल मीडिया में वीडियो भी वायरल हो रहा है।
वीडियो में दिख रहा है कि राहुल गांधी बिट्टू की तरफ हैंड शेक करने के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं लेकिन बिट्टू हाथ आगे नहीं बढ़ाते हैं। गद्दार दोस्त वाले कमेंट पर बिट्टू ने भी तुरंत पलटवार किया और कहा कि उनका देश के दुश्मनों से कोई लेना-देना नहीं है.
हुआ यूं कि जब केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू संसद के मकर द्वार पर विरोध कर रहे कांग्रेस सांसदों के पास से गुजरे, तो लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उनके देखकर कहा, देखो, एक गद्दार यहीं से गुजर रहा है। इसका चेहरा देखो। इसके बाद बिट्टू के पास आने पर राहुल गांधी ने उनसे हाथ मिलाने की पेशकश करते हुए कहा, नमस्ते भाई, मेरे गद्दार दोस्त। चिंता मत करो, तुम वापस (कांग्रेस में) आ जाओगे। जिसके बाद बिट्टू ने उनसे हाथ मिलाने से मना कर दिया और पलटवलार करते हुए उनको देश का दुश्मन कह डाला।
राहुल गांधी पर दिया था विवादित बयान
यह पहली बार नहीं जब बिट्टू और राहुल गांधी के बीच इस तरह की बयानबाजी चली हो। सितंबर 2024 में बिट्टू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर तीखा और विवादास्पद बयान दिया था। बिट्टू ने राहुल गांधी पर सिख समुदाय को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि सिख किसी भी राजनीतिक दल से बंधे नहीं हैं। उन्होंने अमेरिका में सिखों को लेकर दिए गए राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, राहुल गांधी ने सिखों को बांटने की कोशिश की है, सिख किसी पार्टी से जुड़ा नहीं है और यह चिंगारी लगाने की कोशिश है, राहुल गांधी देश के नंबर वन टेरेरिस्ट हैं।
कौन हैं बिट्टू
तीन बार कांग्रेस सांसद रह चुके रवनीत सिंह बिट्टू पहली बार 2009 में आनंदपुर साहिब से लोकसभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद 2014 और 2019 में लुधियाना से जीते थे। खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथी आवाजों के मुखर आलोचक माने जाने वाले बिट्टू 2024 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो गए। इस चुनाव में वह लुधियाना से पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वारिंग से लगभग 20 हजार वोटों से हार गए। चुनाव हारने के बावजूद केंद्र सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया रेल तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी।
बिट्टू महज 11 साल के थे जब उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद 20 साल की उम्र में उन्होंने अपने दादा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह को भी खो दिया, जिनकी 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। वर्ष 2007 में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद बिट्टू ने राजनीति में कदम रखा।
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