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खाद की कालाबाजारी-जमाखोरी करने वालों की अब खैर नहीं:मिडिल ईस्ट वार के बीच केन्द्रीय कृषि मंत्री ने हाईलेवल मीटिंग, दिए सख्त निर्देश
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच खाद की आपूर्ति मजबूत करने, कालाबाजारी रोकने के लिए केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को हाईलेवल मीटिंग की। बैठक में आने वाले खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए तैयारियों की भी समीक्षा की गई। बैठक में शिवराज ने सख्त निर्देश दिए हैं कि की आपूर्ति पूरे देश में बराबर और बिना रुकावट के होनी चाहिए। खाद-बीज की कालाबाजारी करने वालों पर हो सख्त एक्शनमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि खाद और बीज की कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक संकट का फायदा उठाने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को भी इस दिशा में कड़े कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।बीज सुखाने के लिए गैसों की उपलब्धता की भी समीक्षाबैठक में कृषि रसायनों और बीज सुखाने के लिए जरूरी गैसों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा दूध और अन्य कृषि उत्पादों के लिए पैकेजिंग सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने पेट्रोलियम मंत्रालय और अन्य विभागों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए ताकि सप्लाई में कोई बाधा न आए।कृषि क्षेत्र की माॅनिटरिंग के लिए बनाया गया स्पेशल सेलकृषि क्षेत्र की लगातार निगरानी के लिए एक स्पेशल सेल बनाया गया है, जो चैबीसों घंटे काम करेगा। यह सेल हर हफ्ते खाद, बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता पर रिपोर्ट सीधे कृषि मंत्री को देगा। कृषि मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि संकट के समय उन्हें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और सरकार किसानों तक जरूरी संसाधन समय पर पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।10 वर्षो में 44 फीसदी बढ़ा कृषि उत्पादनउन्होंने यह भी बताया कि पिछले 10 वर्षों में देश में कृषि उत्पादन करीब 44 प्रतिशत बढ़ा है और कई किसानों की आय दोगुनी हुई है। केंद्र सरकार किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर रिकॉर्ड खरीद भी शामिल है।

दिल्ली विधानसभा में गूंजा शीशमहल मुद्दा:मंत्री वर्मा ने खोली ‘महंगे राज’ की परतें, पढ़ें पूरी खबर
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर हुए खर्चों को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सदन में एक लंबी सूची पेश करते हुए कहा कि शीशमहल जैसे इस घर में अत्यंत महंगे और लग्जरी सामान लगाए गए हैं। प्रवेश वर्मा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री आवास में लगाए गए जिम उपकरणों से लेकर फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक आइटम तक हर चीज बेहद महंगी है। उन्होंने कहा कि एक ट्रेडमिल की कीमत करीब 14 लाख रुपए थी और उसके लिए अलग से ट्रेनर को भी भुगतान किया गया। इसके अलावा डम्बल सेट पर करीब 3 लाख रुपए खर्च किए गए। उन्होंने बताया कि घर में 88 इंच का बड़ा टीवी लगाया गया। साथ ही तीन टीवी पर कुल 27 लाख रुपए खर्च हुए। इसके अलावा चिमनी, सोफा, मिनी बार और एंट्रेंस लाइट जैसी सुविधाएं भी लगाई गईं।सोफा सेट के लिए हुए थे दो टेंटरप्रवेश वर्मा ने फर्नीचर के खर्च का जिक्र करते हुए कहा कि सोफा सेट के दो टेंडर हुए। एक 35 लाख रुपए का और दूसरा 1.5 लाख रुपए का। घर में 76 टेबल लगाए गए, जिन पर करीब 1 करोड़ 5 लाख रुपए खर्च हुए। 8 बेड पर 40 लाख रुपए खर्च किए गए, जबकि कुर्सियों पर 60 लाख रुपए और कंसोल पर 50 लाख रुपए खर्च किए गए। उन्होंने बताया कि घर में 1.5 करोड़ रुपए के पर्दे (कर्टन) लगाए गए। इसके अलावा 60 लाख रुपए के कार्पेट और छोटे पफी (सोफे के साथ रखे जाने वाले छोटे स्टूल) भी खरीदे गए।28 लोगों के बैठने लायक बनाया गया था डाइनिंग टेबलप्रवेश वर्मा ने आगे कहा कि एक बड़ा डाइनिंग टेबल लगाया गया, जो 28 लोगों के बैठने लायक है और जिसकी कीमत 14 लाख रुपए है। इसके अलावा, जिम में स्पिन बाइक 1 लाख रुपए की, फ्यूजन क्रेस्ट मशीन 3 लाख रुपए की और बॉडी सॉलिड उपकरण 6 लाख रुपए के लगाए गए। उन्होंने कहा कि घर में करीब 12 लाख रुपए के इलेक्ट्रिकल आइटम और 14 लाख रुपए की सीलिंग डेकोरेटिव फिटिंग्स लगाई गईं।घर में लगाए थे 11 टीवीउन्होंने यह भी दावा किया कि घर में कुल 11 टीवी लगाए गए, जिन पर डेढ़ करोड़ रुपए खर्च हुए। साथ ही बारबेक्यू यूनिट, सीलिंग स्पीकर, कैमरा, एम्प्लीफायर और प्री-एम्प्लीफायर जैसे महंगे उपकरण भी लगाए गए। उन्होंने कहा कि 50 एयर कंडीशनर लगाए गए और 5 लाख रुपए का इन्वर्टर सिस्टम भी लगाया गया।एक दिन में पास कर दिए गए थे कामों के टेंडर और एस्टिमेटप्रवेश वर्मा ने आरोप लगाया कि इन सभी कामों के टेंडर और एस्टिमेट एक ही दिन में तैयार और पास कर दिए गए। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता के पैसे पर बहुत बड़ी डकैती की गई है। दिल्ली सरकार के मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि बजट सत्र को बाधित करने के लिए धमकी भरे ईमेल भेजे जा रहे हैं।

एलपीजी रिफिल बुकिंग के नहीं बदले नियम:सरकार ने दावों को बताया भ्रामक, कहा- अफवाहों पर न करें विश्वास
नई दिल्ली। एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग समय-सीमा (रिफिल टाइमलाइन) में बदलाव को लेकर चल रही खबरों और सोशल मीडिया पोस्ट पर सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ कहा है कि एलपीजी रिफिल बुकिंग के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और पुरानी व्यवस्था ही लागू है। मंत्रालय ने बताया कि कुछ समाचार रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्टों में यह दावा किया जा रहा था कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत एलपीजी रिफिल बुकिंग के लिए 45 दिन, नॉन-पीएमयूवाई सिंगल सिलेंडर के लिए 25 दिन और डबल सिलेंडर के लिए 35 दिन की नई समय-सीमा तय की गई है। सरकार ने इन दावों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मौजूदा नियमों के तहत एलपीजी रिफिल बुकिंग की समय-सीमा शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन ही है, और यह सभी प्रकार के कनेक्शन पर समान रूप से लागू होती है।अफवाहों पर न करें विश्वास, सरकार ने की अपीलसरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसी अफवाहों पर विश्वास न करें और न ही उन्हें आगे फैलाएं। साथ ही, घबराहट में गैस सिलेंडर की अनावश्यक बुकिंग से भी बचने की सलाह दी गई है। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि देश में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और किसी तरह की कमी की कोई स्थिति नहीं है। सरकार ने बताया कि देश की सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और सोमवार तक 18,700 टन कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति की जा चुकी है।में पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त भंडार पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, देश भर में पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त भंडार है और 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंप सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं। इसके साथ ही, पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन का तेजी से विस्तार किया जा रहा है और सिर्फ एक दिन में 7,500 नए कनेक्शन दिए गए हैं।सरकार ने यह भी बताया कि एलपीजी की आपूर्ति को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और नए स्रोतों को जोड़ा जा रहा है। राज्यों से निगरानी और वितरण व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए कहा गया है, ताकि सप्लाई पूरी तरह सुचारू बनी रहे।

अलविदा हरीश राणा :13 साल की लंबी खामोशी का हुआ अंत, माता-पिता ने बेटे को बनाया अमर
नई दिल्ली। कभी जिंदगी से भरे सपनों के साथ इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने निकले हरीश राणा ने 13 साल तक कोमा में रहने के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया है। गमगीन माहौल में बुधवार सुबह उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया है। इस दौरान सभी के आंखों से आंसू बह रहे थे। बता दें कि भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले पहले शख्स हरीश राणा का मंगलवार को शाम 4ः10 बजे निधन हो गया। वह पिछले 13 साल से कोमा में थे। असहनीय पीड़ झेलकर 13 साल बाद हरीश राणा दुनिया को जरूर अलविदा कह दिया है, लेकिन उनके माता-पिता ने अपने बेटे को अमर बना दिया है। सूत्रों के अनुसार, उनके माता-पिता की सहमति से एम्स में उनकी दोनों आंख के कॉर्निया व हृदय के वाल्व दान किया गया गया। हालांकि, एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि हरीश का हृदय, किडनी व लिवर दान नहीं हो सकता था। लेकिन, परिवार की सहमति से दोनों कॉर्निया व हृदय के चारों वाल्व लेकर सुरक्षित रख दिया गया है। इसके बाद पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया है। हरीश के परिजनों ने उनकी मौत के बाद हरीश के क्रियाशील अंगों को दान करने की इच्छा जताई थी।13 साल की लंबी खामोशी का अंतहरीश 2013 में हॉस्टल के चैथे फ्लोर से नीचे गिरने के बाद कोमा में चले गए थे और तब से लगातार लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे। बताया जाता है कि पंजाब विश्वविद्यालय से बीटेक कर रहे हरीश राणा चैथी मंजिल से गिर गए थे। सिर में गंभीर चोट लगी और इसके बाद उनकी जिंदगी अस्पताल और मशीनों के बीच सिमट कर रह गई। समय बीतता गया, लेकिन होश कभी वापस नहीं आया. परिवार के लिए यह इंतजार धीरे-धीरे एक अंतहीन पीड़ा में बदलता चला गया। सुप्रीम कोर्ट का फैसला 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले में हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। अदालत ने पूरी संवेदनशीलता के साथ इस मामले को सुना और मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत प्रक्रिया की अनुमति दी। इसके बाद 14 मार्च को हरीश राणा को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया। यहां पेलिएटिव केयर यूनिट में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनके साथ रही. डॉक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार धीरे-धीरे लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाने की प्रक्रिया शुरू की। यह कोई अचानक लिया गया कदम नहीं था, बल्कि पूरी मेडिकल निगरानी में चरणबद्ध तरीके से किया गया। इस दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि हरीश को किसी भी तरह का दर्द या असुविधा न हो। उन्हें लगातार दर्द निवारक दवाएं दी जाती रहीं, ताकि अंतिम समय में उन्हें शांति मिले। बेसुध बेटे को घर की हर बात बताती थी हरीश की मांहरीश राणा की मां ने अपने बेटे की हालत को लेकर भावुक करते हुए बताया कि वह लंबे समय से बेसुध था और अपनी पीड़ा भी व्यक्त नहीं कर पाता था। उन्होंने कहा कि एक मां के लिए इससे बड़ा दुख और क्या हो सकता है कि उसका बच्चा अपनी तकलीफ तक न बता सके। उन्होंने बताया कि वह रोज सुबह-शाम उसकी मालिश करती थी और उसे घर की सारी बातें सुनाती थीं। आज क्या हुआ, कौन आया, क्या-क्या हुआ। कई बार घंटों तक इंतजार करती रहती थी कि वह एक बार पलक झपका दे, ताकि मुझे लगे कि उसने मेरी बातें सुन लीं। उन्होंने कहा कि बेटे की छोटी-छोटी हरकतें ही उनके लिए सुकून का सहारा थीं। कभी उसे उबासी आती, कभी छींक आती या आंखों के आसपास की त्वचा फड़कती, तो हमें उसी से यह एहसास होता था कि वह जिंदा है। हरीश राणा की मां ने कहा कि अब जब उसके जीवन की अंतिम घड़ियां आ पहुंची हैं, तो उनके लिए यह स्थिति बेहद कठिन है।टीम में थे ये विभाग शामिलइससे पहले मरीज की देखभाल को लेकर डॉक्टर पूरी तरह सतर्क थे। एम्स की पूर्व ऑन्को-एनेस्थीसिया प्रमुख डॉ सुषमा भटनागर ने बताया था कि इस प्रक्रिया में मरीज को दिए जाने वाले पोषण को धीरे-धीरे कम किया जाता है या बंद किया जाता है। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाता है कि उसे किसी प्रकार का दर्द न हो। इसके लिए लगातार दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं, ताकि मरीज को आराम मिले और उसे किसी तरह की पीड़ा महसूस न हो। इस पूरी प्रक्रिया को लागू करने के लिए डॉक्टर सीमा मिश्रा के नेतृत्व में एक विशेष मेडिकल टीम गठित की गई थी। इस टीम में न्यूरोसर्जरी, ऑन्को-एनेस्थीसिया, पेलिएटिव मेडिसिन और मनोचिकित्सा विभाग के विशेषज्ञ शामिल थे।

देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टाॅक:अफवाहों पर आयल कंपनियों ने स्पष्ट की स्थिति, दिलाया भरोसा भी
नई दिल्ली। देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच तेल कंपनियों ने साफ किया है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है और कहीं भी ईंधन की कोई कमी नहीं है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें।कंपनी ने स्पष्ट कहा कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है, पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और सप्लाई चेन बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चल रही है। भारत पेट्रोलियम ने यह भी बताया कि भारत पेट्रोल और डीजल का नेट एक्सपोर्टर है और कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के पर्याप्त भंडार मौजूद हैं।घबराहट में पेट्रोल पंपों पर न लगाए भीड़ः बीपीसीएल ने की अपीलबीपीसीएल ने लोगों से अपील की कि वे घबराहट में पेट्रोल पंपों पर भीड़ न लगाएं और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। बीपीसीएल ने यह भी भरोसा दिलाया कि वह निर्बाध ईंधन आपूर्ति के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी तरह हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने भी सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि देश भर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है।कंपनी ने ग्राहकों से कहा कि वे अफवाहों से भ्रमित न हों और सामान्य रूप से ईंधन का उपयोग जारी रखें। एचपीसीएल ने भरोसा दिलाया कि उसका नेटवर्क निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सक्रिय है।सरकार ने भी स्पष्ट की स्थितिइस बीच, सरकार ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि देश की सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और ईंधन का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने मंगलवार को जानकारी दी कि देश में 18,700 टन कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति की जा चुकी है और 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंप सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं।उन्होंने बताया कि पीएनजी कनेक्शन का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है और सिर्फ एक दिन में 7,500 नए घरेलू और वाणिज्यिक कनेक्शन दिए गए हैं। सरकार एलपीजी आपूर्ति को और मजबूत करने के लिए लगातार नए स्रोतों पर काम कर रही है, ताकि किसी भी तरह की कमी न हो।जमाखोरी-कालाबाजारी रोकने सख्त कार्रवाई जारीसरकार ने यह भी बताया कि एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए देश भर में सख्त कार्रवाई जारी है। अब तक 642 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 155 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पिछले 24 घंटों में करीब 3,400 छापे मारे गए और लगभग 1,000 सिलेंडर जब्त किए गए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश भर में सभी रिटेल आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है।

होर्मुज को लेकर ईरान से आई राहत भरी खबर:भारतीय जहाजों के लिए भी है गुड न्यूज, पर तेहरान ने रखी हैं सख्त शर्तें
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, खासकर स्ट्रेट आफ होर्मुज को लेकर। यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 फीसदी कच्चे तेल और एलपीजी परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल ही में इस मार्ग के बाधित होने से कई देशों के जहाज फंस गए थे, जिनमें भारत के भी 20 जहाज शामिल हैं।भारत सरकार ने पुष्टि की है कि ये जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में खड़े हैं और आगे बढ़ने के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच ईरान की ओर से राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सीमित रूप से फिर से खोलने के लिए तैयार है, लेकिन इसके साथ कुछ सख्त शर्तें भी लागू की जाएंगी।गैर शत्रुतापूर्ण देशों के जहाजों को ही मिलेगी अनुमतिईरान द्वारा संयुक्त राष्ट्र को भेजे गए संदेश के अनुसार, केवल “गैर-शत्रुतापूर्ण” देशों के जहाजों को ही होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए संबंधित जहाजों को ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा और निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। हालांकि, यूनाइटेड स्टेट और इजरायल से जुड़े जहाजों पर पूरी तरह प्रतिबंध जारी रहेगा। इतना ही नहीं, ईरान ने उन देशों के जहाजों पर भी रोक लगाने की बात कही है, जो उसके खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं।यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब क्षेत्र में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।भारत सरकार ने ईंधन संकट से किया इनकारभारत के लिए राहत की बात यह है कि सरकार ने देश में किसी भी प्रकार के ईंधन संकट से इनकार किया है। शिपिंग, जलमार्ग और पोर्ट मंत्रालय के अनुसार, देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है। करीब एक लाख पेट्रोल पंप सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं।होर्मुज स्ट्रेट बंद रहा तो पूरी दुनिया पर पड़ेगा असरविशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से बंद रहता, तो इसका असर न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ता। फिलहाल ईरान के इस सीमित राहत वाले फैसले से वैश्विक बाजार को कुछ हद तक स्थिरता मिलने की उम्मीद है, लेकिन हालात अब भी संवेदनशील बने हुए हैं।

देश को तबाह करने की काली करतूत के जिम्मेदार नेहरू:भाजपा नेता ने फिर किया वाार, निशिकांत ने इंदिरा-राजीव को भी घेरा
नई दिल्ली। देश की सियासत में एक बार फिर तीखा वार देखने को मिल रहा है, जहां भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। दुबे लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तारीखवार उन समझौतों और निर्णयों को उजागर कर रहे हैं, जिन्हें वे देशहित के खिलाफ बताते हैं। “कांग्रेस का काला अध्याय” नाम से शुरू की गई उनकी यह शृंखला केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि दस्तावेजों के जरिए अतीत के फैसलों को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश है। निशिकांत की शृंखला ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जहां इसे आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। इसी क्रम में निशिकांत दुबे ने बुधवार को कांग्रेस का काला अध्याय 9 एपिसोड एक्स पर पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है, आज, यानी 25 मार्च 1914 को शिमला में ब्रिटिश इंडिया, चीन सरकार और तिब्बत ने मिलकर एक समझौता किया, जिसके अंतर्गत नेपाल और तिब्बती समझौता 1856 तथा जम्मू कश्मीर तिब्बती समझौता 1842 लागू हुआ। तिब्बत और भारत के बीच सीमा निर्धारण मैकमोहन लाइन के तहत किया गया। नेहरू ने तिब्बतियों को बनाया चीन का नागरिकहालांकि मई 1951 में नेहरू ने चीन के आधिपत्य को सत्रह समझौते के अनुसार तिब्बतियों को चीन का नागरिक बना दिया। बचा काम 29 अप्रैल 1954 में तिब्बत पर चीन के पूर्ण नियंत्रण का समझौता कर लिया तथा इस समझौते के तहत चीन को बेरोकटोक भारत आने की छूट दे दी। देश को तबाह करने की काली करतूत के जिम्मेदार केवल और केवल नेहरु जी ही हैं।श्रीलंका को लेकर राजीव गांधी को घेराइसके पहले 24 मार्च को निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा था, 24 मार्च 1990 को श्रीलंका से भारतीय सेना हारकर जबरदस्ती भगाई गई और लौटी। भारतीय सेना की अंतिम टुकड़ी को विदा करने वालों में आज के हमारे विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर भी थे, जो उन दिनों श्रीलंका में कार्यरत थे। भारतीय सेना तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के जिद और जुनून के कारण जबरदस्ती 1987 में अपने ही तमिल भाइयों को मारने पहुंची थी। इंदिरा को भी खड़ा किया कटखरे मेंगांधी परिवार का यह जुनून नया नहीं था। इसके पहले 24 मार्च 1971 को भी इंदिरा गांधी ने भारतीय सेना को श्रीलंका के छात्र आंदोलन पर नियंत्रण के लिए वहां भेजा था लेकिन 1971 के पाकिस्तान युद्ध के दौरान श्रीलंका ने पाकिस्तान का साथ दिया। हमारे हजारों जवान 1987 से लेकर 1990 तक मारे गए। श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रेमदास ने भारतीय जवानों पर तरह-तरह के आरोप लगाए और राजीव गांधी को चिट्ठी लिखी। पहली बार विदेशी धरती पर भारतीय प्रधानमंत्री के ऊपर हमला हुआ और देश के सम्मान को ठेस पहुंची।

पश्चिम एशिया जंग:राहुल ने भारत की विदेशी नीति पर खड़े किए सवाल, ट्रंप का नाम लेकर पीएम पर भी किया वार
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की विदेश नीति को लेकर देश की राजनीति में तीखी बहस देखने को मिल रही है। इसी मुद्दे पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं और सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े किए हैं।संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत की विदेश नीति अब संस्थागत न होकर प्रधानमंत्री की “निजी विदेश नीति” बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि प्रभावित हो रही है और दुनिया इसे गंभीरता से नहीं ले रही। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रभाव है और वे उनके दबाव में निर्णय लेते हैं।पीएम की स्थिति कमजोर होती है तो विदेशी नीति पर पड़ेगा असरराहुल गांधी ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप को यह पहले से पता होता है कि प्रधानमंत्री मोदी क्या कदम उठाएंगे और क्या नहीं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री की स्थिति कमजोर होती है, तो इसका सीधा असर देश की विदेश नीति पर पड़ेगा। उनके अनुसार, हाल के व्यापार समझौतों और संसद में दिए गए बयानों से भारत का कोई स्पष्ट और मजबूत रुख सामने नहीं आया है।राहुल ने आम जनता से जुड़े मुद्दों को भी उठायाइसके अलावा राहुल गांधी ने आम जनता से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का असर सीधे तौर पर लोगों पर पड़ रहा है, जिसमें एलपीजी और पेट्रोल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने मौजूदा हालात की तुलना कोविड काल से की, लेकिन उस समय हुई जनहानि और कठिनाइयों का जिक्र नहीं किया।अमेरिका और इस्राइल के हितों को ध्यान में रख फैसले ले रही सरकारराहुल गांधी ने यह भी बताया कि वे केरल में अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कारण सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने बैठक की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें संरचनात्मक खामियां हैं, जिन्हें सुधारा नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिका और इस्राइल के हितों को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है, न कि देश और किसानों के हित में। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बहस होने की संभावना है।

कांग्रेस ने खराब की हिमाचल की सेहत:भाजपा सांसद ने लगाया गंभीर आरोप, अनुराग ने खटाखट माडल का भी किया जिक्र
नई दिल्ली। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में राज्य की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की, लेकिन विपक्ष ने इस मुद्दे पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई।पत्रकारों से बातचीत में ठाकुर ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर विपक्षी नेताओं की अनुपस्थिति निराशाजनक रही। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस न केवल राज्य में गलत नीतियां लागू कर रही है, बल्कि उसकी विचारधारा देशहित के खिलाफ भी काम कर रही है। ठाकुर ने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार के फैसलों का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है।दिखावा साबित हुआ खटाखट माडलउन्होंने विशेष रूप से “खटाखट मॉडल” का जिक्र किया, जिसे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने विधानसभा चुनाव से पहले पेश किया था। ठाकुर के अनुसार यह मॉडल केवल दिखावा साबित हुआ और इससे राज्य की आर्थिक स्थिति और बिगड़ी है। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा, जो पहले कभी नहीं हुआ।अनुराग ने टैक्स को लेकर भी कांग्रेस सरकार को घेराठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर टैक्स बढ़ाकर जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार सत्ता में आने के कुछ ही महीनों में डीजल पर वैट बढ़ाकर 10.40 रुपये कर दिया गया, साथ ही 5 रुपये का सेस भी लगाया गया। उन्होंने “टॉयलेट टैक्स” जैसे फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे आम लोगों की परेशानियां बढ़ी हैं।1,000 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त बोझ उठा रही प्रदेश की जनताउन्होंने दावा किया कि इन नीतियों के कारण प्रदेश की जनता को हर साल 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है। ठाकुर ने कहा कि यह मॉडल राज्य को वित्तीय संकट की ओर धकेल रहा है। वहीं, भाजपा के राज्यसभा सदस्य सिकंदर कुमार ने भी कांग्रेस सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाएं सभी राज्यों के लिए हैं, लेकिन हिमाचल में उन्हें सही ढंग से लागू नहीं किया जा रहा।

मिडिल ईस्ट वार:जंग जारी रही तो होंगे घातक परिणाम, राज्यसभा से पीएम मोदी ने देश को किया आगाह, और क्या कहा पढ़े खबर
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया जंग पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मंगलवार को राज्यसभा में कहा है कि इस युद्ध ने पूरी दुनिया में बड़ा ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। अगर यह जंग जारी रही, तो इसके गंभीर दुष्परिणाम होंगे। जिसका असर भारत पर भी पड़ रहा है। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने जंग छोड़कर संवाद का रास्ता सुझाया है। हम सभी संबंधित पक्षों के संपर्क में हैं।पीएम ने कहा कि हालात चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन भारत लगातार कूटनीतिक प्रयासों के जरिए समाधान की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भारत हर सेक्टर में यह प्रयास कर रहा है कि किसी भी सेक्टर में दूसरे देशों पर बहुत अधिक निर्भरता न हो। पीएम ने शिप बिल्डिंग से लेकर रेयर अर्थ मिनरल्स तक, आत्मनिर्भरता के प्रयास गिनाए और कहा इस संकट ने दुनिया को हिला दिया है। इससे रिकवर करने में भी दुनिया को काफी समय लगेगा। सरकार पल-पल बदलते हालात पर नजर रखे हुए है।समस्या के समाधान के लिए भारत ने सुझाया संवाद का रास्तापीएम ने कहा कि उन्होंने क्षेत्र के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर दो दौर की बातचीत की है और ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी निरंतर संवाद जारी है। भारत ने इस समस्या के समाधान के लिए संवाद का ही रास्ता सुझाया है। उन्होंने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बड़ी संख्या में जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें भारतीय क्रू मेंबर्स भी शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में इस तरह की रुकावट और कमर्शियल जहाजों पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। भारत इस स्थिति में अपने जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।भारत ने हमलों का किया विरोधउन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने नागरिकों, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और परिवहन से जुड़े ढांचों पर हमलों का कड़ा विरोध किया है। किसी भी तरह का हिंसक संघर्ष मानवता के हित में नहीं है, और भारत सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांति के रास्ते पर आने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।भारतीयों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकताविदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इस संकट के दौरान अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित वापस लौटे हैं। केवल ईरान से ही 1,000 से अधिक भारतीय लौटे हैं, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल हैं।संघर्ष में कुछ भारतीयों की भी हुई मौतप्रधानमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि इस संघर्ष के दौरान कुछ भारतीयों की मौत हुई है और कुछ घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दी जा रही है और घायलों के बेहतर इलाज की व्यवस्था की गई है। सरकार इस कठिन समय में पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी देशों से सकारात्मक आश्वासन भी मिला है।पीएम ने देश की जनता को दिलाया भरोसाऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में कई देशों से तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत पहुंचे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में भी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि देश की जरूरतों से जुड़े सभी आवश्यक सामान सुरक्षित रूप से भारत में पहुंचते रहें।

मौके का फायदा:तेल को लेकर ईरान ने भारत को दिया आफर, पर रख दी कठिन शर्तें, पढ़े खबर
नई दिल्ली। ईरान के तेल को लेकर वैश्विक बाजार में नई हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय संघर्ष के बीच कच्चे तेल और गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसी बीच अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईरान का तेल फिर उपलब्ध हो गया है। इस मौके का फायदा उठाते हुए ईरान ने भारत को भी तेल बेचने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन इसके साथ कुछ कठिन शर्तें जुड़ी हुई हैं।सूत्रों के अनुसार, ईरान भारत को जो तेल ऑफर कर रहा है, उसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड से 6 से 8 डॉलर प्रति बैरल अधिक है। यह स्थिति भारत के लिए चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि आमतौर पर प्रतिबंधों के कारण ईरान अपना तेल छूट देकर बेचता रहा है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, ने मई 2019 के बाद से अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था।ऊर्जा बाजार पर बढ़ा दबाव मौजूदा हालात में होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो रही है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ गया है। भारत को भी इसका असर झेलना पड़ रहा है, खासकर एलपीजी (रसोई गैस) की कमी के रूप में।तेल का भुगतान डाॅलर में चाहती हैं ईरानी ट्रेडर्स और सरकारी कंपनियां ईरान की ओर से एक और बड़ी शर्त पेमेंट को लेकर रखी गई है। ईरानी ट्रेडर्स और सरकारी कंपनियां तेल का भुगतान डॉलर में चाहती हैं, हालांकि कुछ मामलों में रुपये में भुगतान की भी बात सामने आई है। लेकिन मुख्य समस्या यह है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम तीव्र से बाहर है, जिससे भुगतान प्रक्रिया जटिल हो जाती है।ट्रम्प प्रशासन ने दी है 30 दिनों की छूटअमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने हाल ही में 30 दिनों की सीमित छूट दी है, जिसके तहत पहले से समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की खरीद की अनुमति है। इस छूट के तहत 20 मार्च तक लोड किए गए तेल को 19 अप्रैल तक उतारना होगा और भुगतान सात दिनों के भीतर करना होगा। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियां किसी भी समझौते से पहले भुगतान तंत्र और जोखिमों का आकलन कर रही हैं, ताकि भविष्य में किसी वित्तीय या कानूनी संकट से बचा जा सके।

ईसाई धर्म अपनाने पर एससी स्टेटस खत्म:सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, संविधान का दिया हवाला
नई दिल्ली। धर्मांतरण पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को मामले पर सुनवाई के दौरान हैदराबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा है कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा सांविधानिक आदेश, 1950 में साफ कहा गया है कि खंड-3 में बताए गए धर्मों के अलावा किसी भी धर्म में धर्मांतरण करने पर जन्म के बावजूद, अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत समाप्त हो जाता है। जस्टिस पी. के. मिश्रा और एन. वी. अंजारिया की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी दूसरे धर्म में धर्मांतरण करने से अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति एक ही समय पर क्लॉज 3 में बताए गए धर्म के अलावा किसी दूसरे धर्म को मानने या उसका पालन करने का दावा नहीं कर सकता, और साथ ही अनुसूचित जाति का सदस्य होने का दावा भी नहीं कर सकता।धर्मांतरण के पल ही खत्म हो जाता है अजा का दर्जअदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में, जहां कोई व्यक्ति यह दावा करता है कि उसने संवैधानिक आदेश के क्लॉज 3 में न बताए गए किसी धर्म से वापस हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में धर्मांतरण किया है, तो तीन शर्तों का एक साथ और पूरी तरह से साबित होना जरूरी है। क्लॉज 3 में न बताए गए किसी भी धर्म में धर्मांतरण करने पर, जन्म की स्थिति चाहे जो भी हो, धर्मांतरण के उसी पल से अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत और पूरी तरह से खत्म हो जाता है।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनाया फैसलाबता दें कि यह आदेश एक ऐसे व्यक्ति के मामले में दिया गया, जिसने ईसाई धर्म अपना लिया था और अब पेस्टर के तौर पर काम कर रहा है, लेकिन उसने कुछ लोगों के खिलाफ एससी-एसटी (अत्याचार रोकथाम) कानून के तहत मामला दर्ज कराया था। 30 अप्रैल 2025 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था नहीं है। ऐसे में पीड़ित व्यक्ति एससी-एसटी कानून के प्रावधानों का लाभ लेने का पात्र नहीं है। इसके बाद हाईकोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज धाराओं को खत्म करने का आदेश दिया था।

लोकसभा:किसानों की आय को लेकर गरमाया सदन, टीएमसी सांसद के आरोप पर भड़के शिवराज, मप्र का दिया उदाहरण
नई दिल्ली। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान किसानों की आय को लेकर चर्चा गरमा गई। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय के सवाल पर जवाब देते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया कि देश में किसानों की आय दोगुनी ही नहीं, बल्कि कई मामलों में तीन गुना तक बढ़ी है। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि सरकार किसानों की स्थिति सुधारने के लिए लगातार काम कर रही है।शिवराज ने बताया कि केंद्र सरकार किसानों को हर साल 6,000 रुपये की किसान सम्मान निधि सीधे उनके खातों में दे रही है। साथ ही उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में किसान अब एक साल में तीन-तीन फसलें उगाकर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने एक किसान का उदाहरण भी देना चाहा, लेकिन लोकसभा स्पीकर ने उन्हें संक्षेप में जवाब देने की हिदायत दी।सपा सांसद ने भी सरकार पर दागा सवालइसी दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने हस्तक्षेप किया और सरकार से सीधा सवाल पूछा कि क्या वह स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करेगी। इस पर सदन का माहौल कुछ तनावपूर्ण हो गया और धर्मेंद्र यादव उत्तेजित होकर अपनी बात रखने लगे। स्पीकर ने उन्हें शांत रहने की सलाह दी और कहा कि प्रश्नकाल के दौरान संयम बनाए रखना चाहिए। उन्होंने मंत्री से भी कहा कि जवाब संक्षेप में दें।शिवराज ने यूपीए सरकार पर साधा निशानाअपने जवाब में शिवराज सिंह चैहान ने पिछली यूपीए सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से मना किया था। साथ ही उन्होंने बताया कि मौजूदा सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद कर रही है और किसानों को बेहतर दाम दिलाने के लिए कदम उठा रही है।फल-सब्जियों के परिवहन में मदद कर रही सरकारउन्होंने यह भी कहा कि सरकार अब फल और सब्जियों जैसे उत्पादों की खरीद और उनके परिवहन पर भी सहायता दे रही है, जिससे किसानों को बाजार तक पहुंचने में मदद मिल रही है। कुल मिलाकर, किसानों की आय, एमएसपी और स्वामीनाथन आयोग को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली।

दिल्ली विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी:बजट पेश होने से पहले स्पीकर के पास आया ई-मेल, लिस्ट में कई दिग्गजों के नाम
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में बजट पेश होने से ठीक पहले, मंगलवार सुबह बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया है। विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को सुबह 7ः28 और 7ः49 बजे धमकी भरे ईमेल मिले। जिसमें कहा गया था कि विधानसभा और पास के मेट्रो स्टेशन को बम से उड़ाया जाएगा। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई और पूरे परिसर की गहनता से जांच शुरू कर दी। स्पीकर विजेन्द्र गुप्ता को मिले दोनों ईमेल में कई नाम शामिल किए गए थे, जिनमें एलजी तरनजीत सिंह संधू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के नाम थे।दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां आई हरकत मेंमामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं। विधानसभा परिसर और आसपास के इलाके की गहनता से जांच शुरू की गई। डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक टीम ने पूरे विधानसभा क्षेत्र में विस्तार से जांच की। पुलिस ने आसपास के मेट्रो स्टेशन की भी जांच तेज कर दी, ताकि अगर किसी तरह की कोई संदिग्ध चीज हो तो पकड़ी जा सके।सुरक्षा कारणों से स्थगित हुई विधानसभा की कार्यवाहीसुरक्षा कारणों से विधानसभा की कार्यवाही को 11ः30 बजे तक स्थगित कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल किसी तरह की संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। हालांकि सुरक्षा में कोई कमी न रहे, इसके लिए पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी है। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता मंगलवार को विधानसभा में बजट 2026 पेश करने वाली हैं। इसी बीच विधानसभा को बम उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने लगभग जांच पूरी कर ली है। अभी तक कुछ संदिग्ध नहीं मिला है। ऐसे में सीएम रेखा गुप्ता विधानसभा में पहुंच गई हैं और बजट पेश कर रही हैं।

संसद में गूंजा मोबाइल डेटा प्लान्स का मुद्दा:आप सांसद ने कंपनियों को खड़ा किया कटघरे में, पेट्रोल को दिया हवाला
नई दिल्ली। राज्यसभा में आप सांसद राघव चड्ढा ने मोबाइल फोन यूजर्स से जुड़े एक मुद्दे को उठाया गया। राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि देश के करोड़ों मोबाइल यूजर रोजाना डेटा प्लान्स के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से लूटे जा रहे हैं। सोमवार को इस विषय पर बोलते हुए उन्होंने इस पूरी व्यवस्था को उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताया। सांसद ने विस्तार से समझाते हुए कहा कि जब कोई यूजर अपना मोबाइल रिचार्ज कराता है, तो उसे उसके प्लान के अनुसार प्रतिदिन 1.5 जीबी, 2 जीबी या 3 जीबी डेटा मिलता है। लेकिन यह डेटा ‘डेली लिमिट’ के रूप में होता है, जो हर दिन रात 12 बजे समाप्त हो जाता है। यदि उस दिन का पूरा डेटा उपयोग नहीं हुआ, तो बचा हुआ डेटा स्वतः समाप्त (फॉरफिट) हो जाता है और अगले दिन के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं किया जाता।मोबाइल डेटा उपभोक्ता का अधिकारराज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब उपभोक्ता पूरे डेटा का पैसा देता है, तो उसे पूरा डेटा उपयोग करने का अधिकार क्यों नहीं मिलता। इस व्यवस्था को उन्होंने एक उदाहरण से समझाया। उन्होंने कहा, यदि किसी व्यक्ति ने महीने की शुरुआत में अपनी गाड़ी में 20 लीटर पेट्रोल भरवाया और महीने के अंत तक केवल 15 लीटर ही उपयोग हुआ, तो क्या पेट्रोल पंप वाला बचा हुआ 5 लीटर वापस ले लेगा? इसका जवाब है, नहीं, क्योंकि उपभोक्ता ने पूरे 20 लीटर का भुगतान किया है। ठीक उसी प्रकार, मोबाइल डेटा भी उपभोक्ता का अधिकार होना चाहिए और उसे समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।सांसद ने कंपनियों पर यह भी लगाया आरोपसांसद ने यह भी आरोप लगाया कि टेलीकॉम कंपनियां जानबूझकर ‘डेली डेटा लिमिट’ वाले प्लान को बढ़ावा देती हैं, जबकि ‘मंथली डेटा लिमिट’ वाले प्लान कम उपलब्ध कराए जाते हैं। उनका तर्क था कि यदि मासिक डेटा सीमा हो, तो उपभोक्ता पूरे महीने में अपनी सुविधा के अनुसार अधिकतम डेटा उपयोग कर सकता है, जिससे कंपनियों को कम फायदा होता है। यही कारण है कि कंपनियां दैनिक सीमा वाले प्लान को प्राथमिकता देती हैं। उन्होंने कहा कि आज इंटरनेट केवल मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। उन्होंने इसे ‘डिजिटल ऑक्सीजन’ बताया।

मिडिल ईस्ट में वार, भारत में फूटा महंगाई का बम: प्रीमियम पेट्रोल 2.30 रुपए हुआ महंगा, नई दरें लागू
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। तेल विपणन कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। आॅयल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल में 2.30 रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया है। हालांकि आम उपभोक्ताओं फिलहाल राहत दी गई है। दरअसल नॉर्मल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नई दरें 20 मार्च से लागू हो चुकी हैं।डीलरों के माध्यम से प्राप्त जानकारी में कहा गया है, इस ताजा मूल्य वृद्धि का सीधा असर प्रमुख तेल कंपनियों के ब्रांडेड ईंधनों पर देखने को मिला है। इनमें इंडियन आॅयल काॅर्पोरेशन, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन ने यह बढ़ोतरी खास तौर पर प्रीमियम या ब्रांडेड ईंधनों पर लागू की है। इसमें एचपीसीएल का पावर पेट्रोल और आईओसीएल का एक्सपी95 शामिल हैं, जिन्हें बेहतर इंजन परफॉर्मेंस और ज्यादा माइलेज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।जानें राज्यों के बढ़े हुए रेटनई कीमतों के मुताबिक, नई दिल्ली में प्रीमियम पेट्रोल 107 रुपये से बढ़कर 112.30 रुपये प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में इसकी कीमत 115 रुपये से बढ़कर 120.30 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है, जबकि चेन्नई में यह 112 रुपये से बढ़कर 117.30 रुपये प्रति लीटर हो गई है। नई दिल्ली में सामान्य पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल 103.50 रुपये और डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं चेन्नई में पेट्रोल 100.80 रुपये और डीजल 92.39 रुपये प्रति लीटर है।तो सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ेगा असरविशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल सरकार और कंपनियां आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने से बचने की कोशिश कर रही हैं।

मोदी के मंत्री को जान से मारने आया काॅल:जयंत चौधरी की सुरक्षा हुई चाकचैबंद, धमकाने वाले ने तीन-चार बार किए थे फोन
नई दिल्ली। केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी को जान से मारने की धमकी दी गई है। जयंत चौधरी को एक अनजान नंबर से कॉल आया था। आरोपी ने उन्हें गोली मारने की धमकी दी। बताया गया है कि धमकी देने वाला व्यक्ति पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का रहने वाला है। फिलहाल, जयंत चैधरी के आवास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और दिल्ली पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी के निजी सहायक विश्वेंद्र शाह ने बताया, दो दिन पहले मंत्री जयंती चैधरी अपने आवास से संसद के लिए निकले थे। संसद पहुंचने के बाद एक फोन आया था। लगातार तीन से चार बार कॉल किए गए थे। एक बार जब फोन उठाया गया तो दूसरी तरफ से सीधे गोली मारने की धमकी दी गई थी। उसने बोला कि जो फोटो भेजी है वो देखी है या नहीं देखी है। मैंने फोन कट होने के बाद जैसे ही व्हाट्सअप पर फोटो को देखा तो उसमें मंत्री जयंत चैधरी की आधिकारिक यात्राओं का शेड्यूल था। उस शेड्यूल के साथ व्हाट्सअप पर भेजे गए एक फोटो में सीधे गोली मारने की बात का भी उल्लेख था।धमकी देने वाले के पास था मंत्री के दौरे का शेड्यूल उन्होंने बताया, जिस जिले में मंत्री का दौरा होता है, तो इसके लिए एक पूरा शेड्यूल होता है। उसे सिर्फ जिले के अधिकारियों के पास भेजा जाता है, लेकिन वह शेड्यूल धमकी देने वाले व्यक्ति के पास था। धमकी देने वाले व्यक्ति के पास मंत्री जयंत चैधरी के आगरा के कार्यक्रम का शेड्यूल था।जांच में जुटी पुलिसजयंत चौधरी के निजी सहायक विश्वेंद्र शाह ने कहा कि दिल्ली पुलिस को इस मामले को लेकर शिकायत दी गई है। पुलिस अपनी जांच कर रही है। इसमें आरोपी की लोकेशन पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में ट्रेस हुई है। मतलब कि धमकी भरा कॉल बंगाल के मुर्शिदाबाद से आया था। आरोपी की पहचान इस्लाइल के रूप में हुई है।

ईरान-इजरायल मुद्दे पर गरमाई सियासत:सरकार का बचाव कर थरूर ने पार्टी लाइन को दिखाया आइना, निशाने पर रही सोनिया
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रम पर भारत सरकार की चुप्पी को लेकर देश की राजनीति में बहस तेज हो गई है। खास बात यह है कि इस मसले को लेकर कांग्रेस के नेता ही आमने-सामने हो गए हैं। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सरकार की चुप्पी को जिम्मेदारी से पलायन करने का आरोप लगाया। तो वहीं तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार के रुख का बचाव करते हुए इसे जिम्मेदार कूटनीति बताया है, जबकि शशि थरूर ने अपने लेख में कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में केवल नैतिकता के आधार पर फैसले नहीं लिए जाते। उन्होंने माना कि यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून और भारत के मूल सिद्धांतोंकृसंप्रभुता, अहिंसा और शांतिपूर्ण समाधानकृके खिलाफ है, लेकिन इसके बावजूद भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देनी होती है। उनके अनुसार, कई बार सार्वजनिक रूप से कुछ न कहना भी एक रणनीतिक फैसला होता है, जिससे कूटनीतिक विकल्प खुले रहते हैं।पश्चिम एशिया से भारत के जुड़े हैं आर्थिक और सामरिक हितथरूर ने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया में भारत के बड़े आर्थिक और सामरिक हित जुड़े हैं। इस क्षेत्र के साथ भारत का लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार है, ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है और करीब 90 लाख भारतीय वहां रहते हैं। ऐसे में कोई भी कड़ा बयान इन हितों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने अमेरिका के साथ भारत के बढ़ते रक्षा और तकनीकी संबंधों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि भावनात्मक प्रतिक्रिया देना व्यावहारिक नहीं होगा।वैश्विक मुद्दों पर स्पष्ट और नैतिक रुख अपनाना चाहिएः सोनियादूसरी ओर, सोनिया गांधी ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर मौन रहना तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से बचना है। उनके अनुसार, भारत जैसे बड़े देश को वैश्विक मुद्दों पर स्पष्ट और नैतिक रुख अपनाना चाहिए।सरकार की आलोचना करना उचित नहींः थरूरथरूर ने आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे आंशिक रूप से सहमत हैं कि युद्ध सही नहीं है, लेकिन सरकार की आलोचना करना उचित नहीं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति का हवाला देते हुए कहा कि भारत हमेशा सिद्धांत और व्यवहारिकता के बीच संतुलन बनाता आया है। अंत में, थरूर ने कहा कि भारत की चुप्पी किसी युद्ध का समर्थन नहीं, बल्कि संयम और जिम्मेदार कूटनीति का संकेत है, जो देश के दीर्घकालिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी है।

नई जंग, नए हथियार:रक्षा मंत्री ने सेना को ड्रोन और काउंटर-ड्रोन में आत्मनिर्भर बनने का दिया संदेश
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने इंडियन आर्मी को बड़ा संदेश भी दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि आज जब पूरी दुनिया रूस और यूक्रेन के साथ-साथ ईरान-इजरायल के बीच जारी संघर्ष को देख रही है, तो हम साफ देख सकते हैं कि फ्यूचर वॉरफेयर में ड्रोन्स और काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी की बहुत बड़ी भूमिका है। उन्होंने बताया कि आज भारत में एक ऐसे ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के निर्माण की जरूरत है, जिसमें हम पूरी तरह आत्मनिर्भर हों। यह आत्मनिर्भरता सिर्फ प्रोडक्ट के स्तर पर ही नहीं बल्कि कंपोनेंट के स्तर पर भी जरूरी है। यानी ड्रोन के मॉड्यूल से लेकर सॉफ्टवेयर, इंजन और और बैटरी सभी भारत में ही बने। यह काम आसान नहीं है क्योंकि अधिकांश देशों में जहां ड्रोन्स बनते हैं, वहां कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट चीन से आयात किए जाते हैं।ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग में पूरी तरह आत्मनिर्भर बने भारतराजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की रक्षा तैयारियों और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए यह जरूरी है कि भारत ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग में पूरी तरह आत्मनिर्भर बने। उन्होंने यहां मौजूद एमएसएमई व अन्य लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि इस काम में देश को आप सभी की जरूरत है। सरकार की तरफ से आपको हर तरह का समर्थन प्राप्त होगा। हम सबको मिलकर मिशन मोड में काम करना होगा ताकि 2030 तक भारत, स्वदेशी ड्रोन निर्माण का ग्लोबल हब बन जाए।आज की छोटी शुरुआत कल बदल सकती है बड़ी सफलता मेंउन्होंने कहा कि किसी भी देश के डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को बनाने में जहां पर बड़ी इंडस्ट्रीज, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स का हाथ होता है। वहीं, सरकार की तरफ से देश की रक्षा जरूरतों के अनुसार स्पष्ट पॉलिसी पुश का भी हाथ होता है। कई बार बड़ा परिवर्तन एक छोटे विचार और छोटे प्रयास से ही शुरू होता है। इसलिए जो अपने-अपने क्षेत्र में काम कर रहे हैं, यह मानकर चलिए कि आपकी आज की छोटी शुरुआत कल बड़ी सफलता में बदल सकती है।

राज्यसभा सांसदों का विदाई समारोह बना यादगार:खरगे के चुटीले बयान से सदन में लगे जमकर ठहाके, निशाने पर रहे देवगौड़ा-अठावले
नई दिल्ली। राज्यसभा में विदाई समारोह के दौरान एक हल्का-फुल्का लेकिन यादगार माहौल देखने को मिला, जब विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने खास अंदाज में चुटीले बयान देकर पूरे सदन को हंसी से भर दिया। उनके भाषण में राजनीतिक तंज, हास्य और भावनाओं का अनोखा मिश्रण देखने को मिला।खरगे ने पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा का जिक्र करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि वह उन्हें पिछले 54 वर्षों से जानते हैं और लंबे समय तक साथ काम किया। लेकिन फिर उन्होंने हल्के व्यंग्य में कहा, “मोहब्बत हमसे की, लेकिन शादी नरेंद्र मोदी जी के साथ कर ली।” इस टिप्पणी पर सदन में जोरदार ठहाके लगे और खुद प्रधानमंत्री मोदी भी मुस्कुराते नजर आए।आठवले की कविताओं पर ली चुटकीयही नहीं, खरगे ने केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले पर भी चुटकी ली। उन्होंने हंसते हुए कहा कि अठावले की कविताओं में हमेशा प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ ही सुनाई देती है, मानो उन्हें उसी विषय पर सबसे ज्यादा महारत हासिल हो। इस टिप्पणी ने भी सदन का माहौल और खुशनुमा बना दिया।सच्चे प्रतिनिधि निभाते रहते हैं जिम्मेदारीहालांकि इस हास्य के बीच खरगे ने एक गंभीर संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन में कभी वास्तविक “सेवानिवृत्ति” नहीं होती। जनसेवा का भाव पद और कार्यकाल से कहीं ऊपर होता है, और सच्चे जनप्रतिनिधि हमेशा देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते रहते हैं।सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों को दी शुभकामनाएंअपने संबोधन में खरगे ने अप्रैल से जुलाई के बीच सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों को शुभकामनाएं भी दीं। उल्लेखनीय है कि वे स्वयं भी जून में राज्यसभा से सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि राज्यसभा में बिताया गया समय उनके लिए बेहद सीखने वाला और संतोषजनक रहा।पवार के पुनः सदन आने पर जताई खुशीइसके अलावा, उन्होंने शरद पवार के पुनः सदन में आने पर खुशी जताई और दिग्विजय सिंह, के.टी.एस. तुलसी तथा अभिषेक मनु सिंघवी के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने संसदीय बहसों को समृद्ध किया है और उनकी भूमिका हमेशा याद रखी जाएगी।कुल मिलाकर, यह विदाई सत्र हंसी, सम्मान और प्रेरणा से भरा रहा, जिसने संसद की गरिमा के साथ-साथ मानवीय पहलुओं को भी उजागर किया।

...फिर भी पूरे देश में शोर मचा रही कांग्रेस:नकवी ने ऐसे साधा निशाना, टारगेट में रहीं दीदी भी, शहजाद ने भी कांग्रेस को कोसा
नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला और भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर कांग्रेस सहित विपक्ष पर निशाना साधा है। नकवी ने कहा, कांग्रेस पार्टी एक अर्थहीन संपत्ति की तरह हो गई है, जिसका न तो अंदर कोई मूल्य है और न ही बाहर कोई अहमियत। इसी वजह से यह अपना घर भी नहीं संभाल पा रही है, फिर भी पूरे देश में शोर मचा रही है, हमें बचाओ! हमें बचाओ! हमें बचाओ!। वहीं के असम के नगांव से कांग्रेस से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे पर नकवी ने कहा, आप अपना घर संभालने में असमर्थ हैं। आप अपने सीमित संसाधनों की रक्षा करने या उनका सही ढंग से प्रबंधन करने में सक्षम नहीं हैं। आप उनका विश्वास जीतने में विफल रहे हैं।पश्चिम बंगाल चुनाव पर भी बोले नकवीपश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों पर भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, मुझे लगता है कि उन्हें (ममता बनर्जी) पहले से ही पता है कि चुनाव में हारने वाली हैं। जब ऐसा होगा तो वे चुनाव आयोग के साथ खेल खेलना शुरू कर देंगे। आपको अपने किए का परिणाम भुगतना ही होगा। आज पश्चिम बंगाल की जनता कुशासन, भ्रष्टाचार और अपराध से तंग आ चुकी है। वे अब इस बोझ को सहन नहीं कर पा रहे हैं और इससे बोझिल महसूस कर रहे हैं।पूनावाला ने भी कांग्रेस पर साधा निशानावहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, कांग्रेस पार्टी एक बार फिर बिखर रही है। कांग्रेस में अब किसी को भी राहुल गांधी पर भरोसा नहीं रहा। यही कारण है कि कांग्रेस के असम सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और उपाध्यक्ष नवज्योति दोनों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। दोनों ने कहा कि कोई समन्वय नहीं है, कोई संवाद नहीं है और कोई विचार-विमर्श नहीं है।शहजाद पूनावाला ने कहा, तमिलनाडु में एक बार फिर डीएमके-कांग्रेस वाम गठबंधन में मिशन या विजन की बजाय भ्रम, विभाजन, सत्ता की महत्वाकांक्षा और भ्रष्टाचार की झलक दिखाई दे रही है। वामपंथियों को सिर्फ पांच सीटें मिली हैं और अब उन्होंने डीएमके के खिलाफ बगावत कर दी है। अभी हाल ही में हमने कांग्रेस नेताओं को डीएमके के खिलाफ, कुशासन की कमी और महिलाओं की सुरक्षा के अभाव को लेकर आवाज उठाते देखा है।

असम में कांग्रेस को लगा तगड़ा झटका:नगांव से सांसद प्रद्युत ने हाथ का साथ छोड़ पकड़ा कमल, चुनाव से भाजपा की बड़ी सेंध
नई दिल्ली। असम में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। 9 अप्रैल को मतदान होगा और 4 मई को नतीजे आएंगे। इससे पहले राज्य में दलबदल का खेल शुरू हो गया है। इसी क्रम में कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए नगांव से पार्टी सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने हाथ का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। प्रद्युत बोरदोलोई ने बुधवार को दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ली। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की मौजूदगी में असम भाजपा के अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने उन्हें सदस्यता ग्रहण कराई। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि उनके भाजपा में शामिल होने से पार्टी और मजबूत होगी।मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, आज, नगांव से मौजूदा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई भाजपा में शामिल हो गए हैं। हमारे प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने हमारी पार्टी में उनका स्वागत किया है। प्रद्युत बोरदोलोई नगांव लोकसभा से दो बार सांसद रह चुके हैं। वह तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस कैबिनेट में पूर्व मंत्री थे। इसके अलावा, वह एक पुराने कांग्रेसी हैं। कांग्रेस के साथ उनका जुड़ाव 1975 से है। इसलिए, भाजपा में उनके शामिल होने से हमारी पार्टी निश्चित रूप से और मजबूत होगी।इस्तीफा के अलावा नहीं बचा था कोई विकल्पः प्रद्युत वहीं, प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा कि उनके पास कांग्रेस से इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की असम इकाई के भीतर उन्हें बार-बार अपमानित किया गया और वहां काम करने के लिए अनुकूल माहौल नहीं था।मुमकिन नहीं था फैसले को टालनाबोरदोलोई ने कहा, यह फैसला दर्दनाक था, लेकिन इसे टालना मुमकिन नहीं था। यह कदम उठाते हुए मुझे दुख हो रहा है, लेकिन मेरे पास कोई और विकल्प नहीं बचा था। मैं मानसिक रूप से आहत था और अंदर से पूरी तरह थक चुका था। सांसद ने दावा किया कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने कई मौकों पर उनका अपमान किया, जिससे उन्हें पार्टी में अकेलापन महसूस होने लगा था।राजनीतिक करियर को लेकर कांग्रेस की भूमिका को भी किया स्वीकारइसके साथ ही, बोरदोलोई ने अपने राजनीतिक करियर को संवारने में कांग्रेस की भूमिका को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा, कांग्रेस पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है। आज मैं जो कुछ भी हूं, वह कांग्रेस की ही बदौलत हूं। उन्होंने आगे कहा कि उनका यह फैसला पार्टी की विरासत के प्रति अनादर के कारण नहीं, बल्कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण लिया गया है।

मप्र से लेकर दिल्ली तक आग का तांडव,:साध नगर में बहुमंजिला इमारम में भड़की भीषण आग, सात की मौत, इनमें तीन बच्चे, धुआं बना मौत का कारण
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के इंदौर के बाद दिल्ली पालम इलाके से आग की दर्दनाक खबर सामने आ गई है। यहां के साध नगर में बुधवार सुबह सात बजे एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लगने से 7 लोगों की मौत हो गई है। इसमें तीन बच्चे भी शामिल हैं। वहीं कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। बता दें कि इंदोर में भी ऐसा ही एक दर्दनाक हादसा हो गया है। यहां के तिलक नगर क्षेत्र में एक तीन-मंजिला घर के बाहर इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग पॉइंट पर धमाके के बाद आग भीषण आग लग गई। इस हादसे में एक ही परिवार के 8 लोग जिंदा जल गए हैं।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग सुबह करीब 7 बजे इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित एक कॉस्मेटिक दुकान से शुरू हुई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और ऊपरी मंजिलों तक फैल गई। इमारत में कपड़ों और कॉस्मेटिक्स के कई स्टोर थे, जबकि दूसरी और तीसरी मंजिल पर रिहायशी फ्लैट बने हुए थे। आग के साथ फैले घने धुएं के कारण कई लोग अंदर ही फंस गए और बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाया।दमकल कर्मियों ने कई को निकाला सुरक्षितघटना की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस की करीब 30 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। दमकल कर्मियों ने कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। कुछ लोग जान बचाने के लिए इमारत से कूद गए, जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट हो सकता है। बताया जा रहा है कि घटना के समय अधिकांश लोग सो रहे थे, जिससे उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला। हालांकि, आग लगने के वास्तविक कारणों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।सीएम ने मजिस्ट्रियल जांच के दिए आदेशइस हादसे पर रेखा गुप्ता ने गहरा दुख जताते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन, पुलिस और फायर विभाग मिलकर राहत कार्य में जुटे हैं और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी। वहीं, तरनजीत सिंह संधू ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त किया और कहा कि बचाव कार्यों पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है। यह हादसा एक बार फिर शहरी इलाकों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

राज्यसभा से 37 सांसद रिटायर:पीएम मोदी ने दिया भावुक संदेश, देवगौड़ा-खड़गे और पवार के योगदान को भी किया याद
दिल्ली। संसद के उच्च सदन यानि राज्यसभा से आज 37 सांसद सेवानिवृत्त हो गए हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सदन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपने भावुक, परिपक्व और स्पष्ट राजनीतिक संदेश में कहा कि सक्रिय राजनीति में भले ही भूमिका बदलती हो, लेकिन जनसेवा का संकल्प सार्वजनिक जीवन की प्रतिबद्धता कभी समाप्त नहीं होती। पीएम मोदी ने निवर्तमान सांसदों के योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि राज्यसभा से रिटायर हो रहे सांसदों की विदाई महज औपचारिकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह संसदीय परंपराओं, राजनीतिक संस्कारों और लोकतांत्रिक निरंतरता का एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरी है। पीएम ने सदन के दिग्गज नेताओं एचडी देवेगौड़ा, मल्लिकार्जुन खड़गे और शरद पवार का उल्लेख करते हुए कहा कि इन नेताओं का दशकों का अनुभव केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संसदीय परंपराओं की अमूल्य धरोहर है, जिससे नई पीढ़ी के सांसदों को राजनीतिक अनुशासन और प्रतिबद्धता सीखनी चाहिए।हर दो साल में आता है भावुक अवसरराज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, यह एक ऐसा अवसर है जो हर दो साल में एक बार इस सदन में हमें भावुक क्षणों में सराबोर कर देता है। सदन में कई विषयों पर चर्चा होती है, जिनमें से प्रत्येक का अपना महत्व होता है, लेकिन जब ऐसा अवसर आता है, तो हम अपने उन सहयोगियों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं जो एक विशेष उद्देश्य के लिए आगे बढ़ रहे हैं। पीएम ने कहा, कुछ सहकर्मी यहां से विदाई लेकर लौट रहे हैं, कुछ यहां से अपने अनुभव का लाभ उठाकर सामाजिक जीवन में योगदान देने जा रहे हैं। जो लोग जा रहे हैं लेकिन वापस नहीं लौटेंगे, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि राजनीति में कभी विराम नहीं लगता।सदन के अंदर रहते हैं कुछ खट्टे-मीठे अनुभव सदन के अंदर अनेक विषयों पर चर्चाएं होती हैं, हर किसी का महत्वपूर्ण योगदान होता है, कुछ खट्टे-मीठे अनुभव भी रहते हैं। लेकिन, जब ऐसा अवसर आता है, तो स्वाभाविक रूप से दलगत भावना से ऊपर उठकर हम सबके भीतर एक समान भाव प्रकट होता है कि हमारे ये साथी अब किसी और विशेष काम के लिए आगे बढ़ रहे हैं। आज यहां से जो साथी विदाई ले रहे हैं, उनमें से कुछ फिर से आने के लिए विदाई ले रहे हैं और कुछ विदाई के बाद यहां का अनुभव लेकर सामाजिक जीवन में कुछ न कुछ विशेष योगदान के लिए जा रहे हैं।राजनीति में नहीं होता कोई फुल स्टाॅपप्रधानमंत्री ने आगे कहा, जो जा रहे हैं, लेकिन आने वाले नहीं हैं, उनको भी मैं कहना चाहूंगा कि राजनीति में कोई फुल स्टॉप नहीं होता है, भविष्य आपका भी इंतजार कर रहा है और आपका अनुभव, आपका योगदान राष्ट्र जीवन में हमेशा बना रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, हमारे उपसभापति हरिवंश सदन से विदा ले रहे हैं। हरिवंश को इस सदन में लंबे समय तक अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का अवसर मिला। वे बहुत ही मृदुभाषी हैं और सदन को चलाने में सबका विश्वास जीतने का इन्होंने निरंतर प्रयास किया है।पीएम ने देवगौड़ा, खड़गे और पवार के योगदान को सराहाप्रधानमंत्री ने कहा, मैं जरूर कहूंगा कि देवगौड़ा, खड़गे, शरद पवार ऐसे वरिष्ठ लोग हैं, जिनके जीवन की आधे से अधिक उम्र संसदीय कार्यप्रणाली में गई है और इतने लंबे अनुभव के बाद भी सभी नए सांसदों को इनसे सीखना चाहिए कि समर्पित भाव से सदन में आना, यथासंभव योगदान करना और जिम्मेदारी के प्रति पूरी तरह समर्पित कैसे रहा जा सकता है। मैं उनके योगदान की भूरि-भूरि सराहना करूंगा।

आईपैक रेड विवाद:ईडी की याचिका पर एससी आज करेगा सुनवाई, दीदी पर लगे हैं गंभीर आरोप
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आईपैक) के दफ्तर और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर पर तलाशी अभियान के दौरान दखलंदाजी की। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित कॉज लिस्ट के अनुसार, इस मामले की सुनवाई बुधवार को जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच के सामने होगी। पिछली सुनवाई के दौरान, ईडी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि पश्चिम बंगाल में उसे श्आतंकितश् किया गया है।साॅलिसिटर ने आरोपों को का किया खंडनमनी लॉन्ड्रिंग विरोधी संघीय एजेंसी की ओर से पेश होते हुए, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने उन आरोपों का खंडन किया कि ईडी ने अपनी शक्तियों का हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है। वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा द्वारा उठाए गए तर्कों का जवाब देते हुए एएसजी राजू ने कहा, ईडी का हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया गया है, बल्कि इसे आतंकित किया गया है।ईडी ने खटखटाया था सुप्रीम कोर्ट का दरवाजाइस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च के लिए तय करते हुए, जस्टिस मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने मामले में दलीलें पूरी करने के लिए समय दिया था। ईडी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देने की मांग की है। ईडी ने आरोप लगाया है कि संघीय एजेंसी के एक साथ चल रहे तलाशी अभियानों के दौरान इन लोगों ने उसके कानूनी कर्तव्यों में बाधा डाली।अपने जवाबी हलफनामे में, मुख्यमंत्री बनर्जी ने दखलंदाजी और बाधा डालने के सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि परिसर में उनकी सीमित मौजूदगी का एकमात्र मकसद उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़ा गोपनीय और मालिकाना डेटा वापस लेना था।

वीरता-पराक्रम से हर कठिनाई का समाधा: पीएम मोदी ने सुभाषित से युवाओं को दिया हौसले का संदेश
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शौर्य के महत्व और एक वीर व्यक्ति के पूरे विश्व पर पड़ने वाले गहरे प्रभाव को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषित शेयर किया है। उन्होंने कहा कि वीरता और पराक्रम ही वह पूंजी हैं, जिनके बल पर हर कठिनाई का सामना किया जा सकता है। भारत के युवाओं का साहस और आत्मविश्वास इस दिशा में प्रेरणा का काम करता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, वीरता और पराक्रम वो पूंजी है, जिससे हर कठिनाई का सामना किया जा सकता है। भारत के युवाओं का साहस और आत्मविश्वास इसी की प्रेरणा देता है। उन्होंने संस्कृति सुभाषित शेयर करते हुए लिखा, एकेनापि हि शूरेण पादाक्रान्तं महीतलम। क्रियते भास्करेणेव स्फारस्फुरिततेजसा।सुभाषित में कहा गया है, सूर्य जिस प्रकार अपने प्रखर और विस्तृत तेज से समग्र पृथ्वी को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार एक वीर पूरी पृथ्वी को अपने पराक्रम से प्रभावित करता है। इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को संस्कृत में एक सुभाषितम का पाठ किया, जिसमें जीवन की सबसे कठिन बाधाओं को दूर करने में आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति के महत्व का उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि साहस और दृढ़ संकल्प से परिपूर्ण व्यक्ति के लिए जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है।प्रधानमंत्री ने श्एक्सश् पर पोस्ट में लिखा, ष्जो व्यक्ति साहस और संकल्प से भरा हो, उसके लिए जीवन में कुछ भी असंभव नहीं। आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति के बल पर हम कठिन से कठिन चुनौतियों को पार कर सकते हैं। एकोऽपि सिंहः साहस्रं यूथं मथ्नाति दन्तिनाम् । तस्मात् सिंहमिवोदारमात्मानं वीक्ष्य सम्पतेत॥इस संस्कृत सुभाषित में कहा गया, जिस प्रकार एक शेर में हजार हाथियों को हराने की शक्ति होती है, उसी प्रकार एक व्यक्ति को शेर की तरह निडरता, साहस, आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति के साथ नेक कार्यों में संलग्न होना चाहिए।

राज्यसभा चुनाव:ओडिशो में क्राॅस वोटिंग करने वाले विधायकों पर कांग्रेस का एक्शन, दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
नई दिल्ली। एक दिन पहले यानि सोमवार को हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान कई कांग्रेस विधायकों ने पार्टी को झटका देते हुए एनडीए समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में क्राॅस वोटिंग की थी, जिसकी वजह से इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि कांग्रेस ने अब ऐसे विधायकों पर सख्त रुख अख्तियार कर लिया है, जिन्होंने क्राॅस वोटिंग की है। इतना ही नहीं कांग्रेस ने ओडिशा में तीन विधायकों पर निलंबन की गाज करा दी है। निलंबित किए गए विधायकों में रमेश जेना, दशरथी गोमांगो और सोफिया फिरदौस शामिल हैं।बताया जा रहा है कि इन तीनों विधायकों ने कांग्रेस और बीजू जनता दल के संयुक्त उम्मीदवार के बजाय भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय के पक्ष में मतदान किया। इस क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस-बीजद गठबंधन के उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा, जबकि दिलीप राय चुनाव जीतने में सफल रहे।यह बोली कांग्रेसकांग्रेस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है। पार्टी के अनुसार, तीनों विधायकों ने न केवल व्हिप का उल्लंघन किया, बल्कि पार्टी की विचारधारा और हितों के खिलाफ भी काम किया। इस आधार पर ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित करने का फैसला लिया।भविष्य में इन विधायकों के खिलाफ हो सकती है कड़ी कार्रवाईपार्टी सूत्रों के अनुसार, मामले की विस्तृत समीक्षा की जा रही है और भविष्य में इन विधायकों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई, यहां तक कि निष्कासन, भी किया जा सकता है। कांग्रेस मीडिया सेल के अध्यक्ष अरबिंद दास ने कहा कि पूरी घटना की जांच जारी है। वहीं, भक्त चरण दास ने भी क्रॉस वोटिंग की पुष्टि करते हुए आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि पार्टी को ऐसी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि निलंबित विधायक अब विधानसभा में कांग्रेस के अन्य विधायकों के साथ नहीं बैठ सकेंगे।चार सीटों के लिए थे पांच उम्मीदवारराज्यसभा की चार सीटों के लिए हुए इस चुनाव में कुल पांच उम्मीदवार मैदान में थे। भारतीय जनता पार्टी ने मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया था, जबकि बीजद की ओर से संतृप्त मिश्रा मैदान में थे। कांग्रेस-बीजद के संयुक्त उम्मीदवार डॉ. दत्तेश्वर होता थे। चुनाव परिणामों में भाजपा के दोनों उम्मीदवार और बीजद के प्रत्याशी विजयी रहे, जबकि क्रॉस वोटिंग के चलते दिलीप राय को भी जीत मिली। इस घटनाक्रम ने ओडिशा की राजनीति में हलचल मचा दी है और पार्टी अनुशासन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

मैटरनिटी लीव पर एससी का अहम फैसला:बच्चा गोद लेने वाली महिलाओं के लिए है राहत भरा
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मैटरनिटी लीव को लेकर एक बहुत अहम और बड़ा फैसला सुनाया है, जो खास तौर पर बच्चा गोद लेने वाली महिलाओं के लिए राहत भरा माना जा रहा है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ तीन महीने तक के बच्चे को गोद लेने वाली ही नहीं, बल्कि उससे ज्यादा उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिलाएं भी मातृत्व अवकाश की हकदार होंगी। दरअसल, पहले कानून में यह प्रावधान था कि अगर कोई महिला तीन महीने तक के बच्चे को गोद लेती है, तभी उसे 12 हफ्तों की मैटरनिटी लीव मिलती थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस नियम को गलत और भेदभावपूर्ण माना। कोर्ट ने सामाजिक सुरक्षा संहिता के सेक्शन 60(4) को रद्द करते हुए कहा कि यह प्रावधान संविधान के आर्टिकल 14 (समानता का अधिकार) और आर्टिकल 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करता है।कोर्ट ने समझाया मातृत्व अवकाश का मकसदकोर्ट का मानना है कि मातृत्व अवकाश का मकसद सिर्फ बच्चे के जन्म या गोद लेने के शुरुआती समय तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि मां और बच्चे के बीच आत्मीय रिश्ता बनाने और बच्चे की देखभाल के लिए भी जरूरी होता है। अगर बच्चे की उम्र के आधार पर यह सुविधा दी जाए या रोकी जाए, तो यह सही नहीं है। इससे उन महिलाओं के साथ नाइंसाफी होती है, जो किसी कारण से थोड़ा बड़े बच्चे को गोद लेती हैं।कोर्ट ने केन्द्र को दिया सुझावइसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक और अहम सुझाव दिया है। कोर्ट ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि पिता के लिए भी पितृत्व अवकाश को लेकर साफ और ठोस कानून बनाया जाए। इससे बच्चों की परवरिश में पिता की भूमिका भी मजबूत होगी और जिम्मेदारी सिर्फ मां पर ही नहीं रहेगी। मैटरनिटी लीव को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले से तीन महीने से बड़े बच्चे को गोद लेने वाली महिलाओं को काफी राहत मिलेगी। अब पहले जैसी उम्र की पाबंदी नहीं रहेगी, जिससे कई महिलाओं को फायदा मिलेगा।

लोकतंत्र का अपमान बर्दाश्त नहीं:204 पूर्व अफसरों का राहुल गांधी पर सीधा हमला, पत्र लिख माफी मांगने की कही बात
नई दिल्ली। देश के 204 पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने संसद की गरिमा को लेकर चिंता जताते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। इन हस्ताक्षरकर्ताओं में 116 सेवानिवृत्त सशस्त्र बल अधिकारी, 84 सेवानिवृत्त नौकरशाह (जिनमें 4 राजदूत शामिल हैं) और 4 वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं। इस पत्र के समन्वयक जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य हैं, जिन्होंने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर जोर दिया है। पत्र में राहुल गांधी से देश से माफी मांगने और आत्ममंथन करने की अपील की गई है। पत्र में कहा गया है कि भारत की संसद देश की संवैधानिक व्यवस्था का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है, जहां जनता की आवाज को अभिव्यक्ति मिलती है, कानून बनाए जाते हैं और गणराज्य की बुनियाद मजबूत होती है। ऐसे में संसद की गरिमा केवल परंपरा का विषय नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा का अहम हिस्सा है।संसद भवन में उच्चतम मानकों के अनुरूप होना चाहिए सांसदों का आचरणसंसद भवन के भीतर सांसदों का आचरण उच्चतम मानकों के अनुरूप होना चाहिए। लोकसभा और राज्यसभा के कक्षों के साथ-साथ संसद परिसर के अन्य हिस्से (जैसे सीढ़ियां, गलियारे और लॉबी) भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं और वहां भी उसी गरिमा का पालन किया जाना चाहिए।पत्र लिखने वालों ने 12 मार्च की घटना पर जताई चिंताहस्ताक्षरकर्ताओं ने 12 मार्च की घटना पर विशेष चिंता जताई। उनके अनुसार, उस दिन माननीय स्पीकर द्वारा संसद परिसर में किसी भी तरह के प्रदर्शन या विरोध पर स्पष्ट रोक लगाने के बावजूद विपक्ष ने इस निर्देश की अनदेखी की। खुले पत्र में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने जानबूझकर इस आदेश का उल्लंघन किया, जो न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि संसदीय परंपराओं के प्रति अनादर भी दर्शाता है। पत्र में यह भी कहा गया कि राहुल गांधी और कुछ अन्य सांसद संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय और बिस्कुट लेते हुए दिखाई दिए, जो देश की सर्वोच्च विधायी संस्था के सदस्यों के अनुरूप आचरण नहीं है। संसद की सीढ़ियां किसी प्रदर्शन या राजनीतिक मंचन का स्थान नहीं हैं।अहंकार और विशेषाधिकार की भावना को दर्शाता है व्यवहारहस्ताक्षरकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह व्यवहार अहंकार और विशेषाधिकार की भावना को दर्शाता है और संसद जैसी संस्था के प्रति सम्मान की कमी को उजागर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद को लोकतंत्र का मंदिर माना जाता है, जहां जनप्रतिनिधि गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए आते हैं, लेकिन इस तरह के व्यवहार से उसकी गरिमा को ठेस पहुंचती है।पत्र में आगे कहा गया कि राहुल गांधी पहले भी संसद के भीतर और बाहर इस तरह के नाटकीय व्यवहार के जरिए सार्वजनिक संवाद के स्तर को गिराते रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि वे संसद को गंभीर बहस के मंच के बजाय एक राजनीतिक मंच के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

हिमायनी पुरी के खिलाफ पोस्ट पर रोक:दिल्ली हाईकोर्ट ने मेटा समेत कई पक्षों को भेजा नोटिस
नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी द्वारा दायर मानहानि मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम कदम उठाते हुए मेटा प्लेटफॉर्म्स सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और पक्षकारों को समन जारी किया है। अदालत ने सभी से चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी। अदालत ने इस दौरान हिमायनी पुरी के खिलाफ किसी भी तरह की आपत्तिजनक या मानहानिकारक सामग्री को सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म पर पोस्ट पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है और यदि ऐसे कंटेंट को रोका नहीं गया तो हिमायनी को अपूरणीय क्षति हो सकती है। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यह निषेधाज्ञा भारत के भीतर लागू होगी, खासकर उन वीडियो और पोस्ट पर जो भारत के आईपी एड्रेस से अपलोड किए गए हैं। वहीं, जो सामग्री भारत के बाहर से अपलोड हुई है, उसे सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा भारत में ब्लॉक किया जाएगा।हिमायनी पुरी ने अदालत से मांग की है कि इंटरनेट पर अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी खबर पोस्टों और वीडियो को हटाया जाए, जिनमें उनका नाम जोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि ये सभी दावे झूठे और बेबुनियाद हैं और इससे उनकी छवि को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। हिमायनी की ओर से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने अदालत में दलील दी कि उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि वे एक केंद्रीय मंत्री की बेटी हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक द्वेष का मामला बताया।महेश जेठमलानी ने यह भी कहा कि यह पूरी तरह से कल्पना पर आधारित आरोप है कि जिस फर्म में हिमायनी पार्टनर थीं, उसे एप्सटीन से कोई फंड मिला था। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि पहले हिमायनी की मां ने विदेशों में संपत्तियों से जुड़े आरोपों को लेकर मानहानि का मुकदमा दायर किया था, जिसमें फैसला उनके पक्ष में आया था। वहीं, मेटा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने कहा कि एक इंटरमीडियरी के रूप में कंपनी खुद से कंटेंट नहीं हटा सकती। ऐसा केवल अदालत या सरकार के निर्देश पर ही संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि 'ग्लोबल ब्लॉकिंग ऑर्डर' संभव नहीं है, क्योंकि इससे कई जटिलताएं पैदा होती हैं।अरविंद दातार ने यह भी उल्लेख किया कि हिमायनी अमेरिकी नागरिक हैं और चाहें तो अमेरिका में भी मामला दर्ज कर सकती हैं। अदालत ने निर्देश दिया है कि जिन लोगों ने इस मामले से जुड़े मानहानिकारक पोस्ट किए हैं, वे 24 घंटे के भीतर उन्हें हटा दें। अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उन पोस्ट को हटाने के लिए बाध्य होंगे। हिमायनी पुरी ने अपने बयान में कहा कि सोशल मीडिया और कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनके खिलाफ झूठी और निराधार बातें फैलाई जा रही हैं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है। इसी कारण उन्होंने यह मानहानि का मामला दायर किया है और साथ ही 10 करोड़ रुपए के हर्जाने की भी मांग की है।

कांग्रेस के काले अध्यायों ने देश को पीछे धकेला:भाजपा सांसद का तीखा हमला, निशिकांत ने दिया चीन का हवाला
नई दिल्ली। भाजपा के दिग्गज नेता और सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर एक बार फिर तीखा वार किया है। यही नहीं उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक के बाद एक पोस्ट कर कांग्रेस पर प्रहार किया। निशिकांत दुबे ने एक्स पर लिखा है, आज से एक नया दैनिक दिनचर्या का कार्य आरंभ कर रहा हूं। आजादी के बाद, कांग्रेस के काले कारनामे जिसने भारत के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास को प्रभावित किया। 17 मार्च 1959 को, आज ही के दिन, तिब्बत से दलाई लामा जी भारत आए थे, इसी घटना के विरोध में चीन ने भारत पर 1962 का आक्रमण किया। आज भी हमारी लगभग 78 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन चीन ने इस युद्ध के बाद अपने कब्जे में जबरदस्ती रखी है। चीन हमारा पड़ोसी इसी घटना के बाद बना।उत्पात मचाने के लिए नहीं बनी संसदवहीं, दूसरे पोस्ट में संसद में जारी गतिरोध के बीच सांसद निशिकांत ने विपक्ष के व्यवहार और निलंबन को लेकर लिखा है। उन्होंने पोस्ट में कहा, आज सभी कांग्रेस पार्टी के सांसदों का निलंबन शायद वापस होगा। पहला समझौता हुआ कि विपक्ष के नेता अनर्गल, बेबुनियाद, तथ्यहीन, बकवास बातें सदन में नहीं करेंगे, उसके बदले मैं शांतिपूर्ण व्यवहार करूंगा। दूसरा, वेल में विपक्ष के सांसद सत्ता पक्ष की तरफ नहीं जाएंगे और कागज नहीं फेंकेंगे। लोकसभा के मेज पर चढ़कर उत्पात नहीं मचाएंगे और लोकसभा के अधिकारियों के साथ अभद्रता नहीं करेंगे। लोकतंत्र की मर्यादा बनी रहे, जनता ने हमें वाद-विवाद के लिए संसद बनाया है, ना कि उत्पात मचाने के लिए।विदेशी सोरोस रिपोर्ट से देश को बर्बाद करने की सुपारी लेने वाली कांग्रेसइसके अलावा, विदेशी रिपोर्ट और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए निशिकांत ने एक और तीखा हमला बोला है। उन्होंने तीसरे एक्स पोस्ट में लिखा, विदेशी सोरोस रिपोर्ट से देश को बर्बाद करने की सुपारी लेने वाली कांग्रेस। भाजपा ने कभी भी अपने आंतरिक मामलों में विदेशी रिपोर्ट का सहारा नहीं लिया। 2005 से 2013 तक की सभी विदेशी रिपोर्ट कांग्रेस पार्टी तथा भारत सरकार को बायकॉट करने की बात करती थी। हमने संसद में भी इसकी चर्चा नहीं कराई।इसके पहले 13 मार्च को निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी को वोकेशनल लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा बताया था। उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी का मुख्य उद्देश्य पिकनिक मनाना है। इसलिए पिकनिक मनाने वाले को पूरा देश पहचानता है। उन्हें न तो गरीबों की चिंता है और न ही देश की चिंता है, देश उन्हें अच्छी तरह से जानता है।

जब भारत बना शांति का सूत्रधार:1956 के स्वेज संकट पर जयराम रमेश का बड़ा बयान
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच 1956 के स्वेज संकट को याद करते हुए भारत की कूटनीतिक भूमिका को अहम बताया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह उस समय भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संतुलन और शांति कायम करने में योगदान दिया था, वैसी ही समझदारी आज के दौर में भी जरूरी है।रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि करीब 70 साल पहले दुनिया स्वेज संकट से जूझ रही थी। 26 जुलाई 1956 को मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्देल नासिर ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया था, जिससे पश्चिमी देशोंकृविशेष रूप से ब्रिटेन और फ्रांसकृमें तीखी प्रतिक्रिया हुई। इसके बाद 29 अक्टूबर 1956 को ब्रिटेन, फ्रांस और इजराइल ने मिस्र पर सैन्य हमला कर दिया, जिससे युद्ध जैसी स्थिति बन गई।हालांकि, कुछ ही दिनों में उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर के हस्तक्षेप के बाद हमलावर देशों को पीछे हटना पड़ा। रमेश ने यह भी उल्लेख किया कि यही आइजनहावर इससे पहले ईरान के प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसद्देग को हटाने के अभियान को मंजूरी दे चुके थे। संघर्ष के थमने के बाद नवंबर 1956 में संयुक्त राष्ट्र ने संयुक्त राष्ट्र आपातकालीन बल की तैनाती सिनाई और गाजा क्षेत्र में की। इस बल में भारत सहित 10 देशों ने भाग लिया और इसने जून 1967 तक क्षेत्र में शांति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।भारत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए रमेश ने बताया कि इस मिशन में भारतीय सैन्य अधिकारियों ने नेतृत्व किया। दिसंबर 1959 से जनवरी 1964 तक लेफ्टिनेंट जनरल पी.एस. ज्ञानि और जनवरी 1966 से जून 1967 तक मेजर जनरल इंदरजीत रिक्ये ने इस बल की कमान संभाली। साथ ही, 20 मई 1960 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने गाजा में तैनात भारतीय सैनिकों को संबोधित भी किया था।रमेश ने यह भी कहा कि यूएनएफई की वापसी के तुरंत बाद 1967 में छह-दिवसीय युद्ध शुरू हो गया, जिसने क्षेत्र में बड़े संघर्ष को जन्म दिया। यह ऐतिहासिक संदर्भ ऐसे समय में सामने आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता है। हालिया हमलों के चलते जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है और तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।


