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कांग्रेस और राहुल गांधी झूठ:भाजपा नेता तरुण चुघ का दावा- दोनों ने भारत के खिलाफ काम करने की ले रखी है सुपारी
दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया है कि देश के आर्थिक, ढांचागत, सामाजिक और ग्लोबल फैसलों पर भरोसा दिखाने के बजाय कांग्रेस और राहुल गांधी झूठ, धोखे और अविश्वास का कैंपेन चलाते हैं। भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर उठते सवालों पर भी भाजपा नेताओं ने जवाब दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा, "जब भी भारत मजबूत फैसले लेता है और तरक्की की छलांग लगाता है, तब-तब राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी बिना तथ्यों के देश की छवि खराब करने की साजिश करते हैं। राहुल गांधी लगातार विदेश टूलकिट के माध्यम से भारत के खिलाफ नैरेटिव को आगे बढ़ाते हैं। वह भारत के विरोधियों को ताकत देने की कोशिश करते हैं।"राहुल को महसूस नहीं होती असहजताउन्होंने कहा कि देश के आर्थिक, वैश्विक और सामाजिक फैसलों पर भरोसे की बजाय विपक्षी नेता भ्रम, झूठ और अविश्वास फैलाने का अभियान चलाते हैं। बढ़ते हुए भारत और शक्तिशाली के नए अवसरों में राहुल गांधी को सहजता महसूस नहीं होती है, बल्कि भ्रष्टाचारी और वंशवादी अस्तित्व का खतरा दिखाई देता है। तरुण चुघ ने कहा, "जब देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर, मजबूत विदेश नीति और दुनिया के हर कोने में व्यापार के नए समझौते करता है, तब राहुल गांधी और कांग्रेस नकारात्मक राजनीति की दिशा में निराशा फैलाने का काम कर रहे हैं।"भारत के खिलाफ काम करने की ले ली गई है सुपारीतरुण चुघ ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने भारत के खिलाफ काम करने की सुपारी ली हुई है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बीजेपी सांसद गुलाम अली खटाना ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच मजबूत रिश्तों की वजह से कई चीजों पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो गया है। भारत में काफी इन्वेस्टमेंट हो रहा है। भारत एक बड़ा एक्सपोर्ट करने वाला देश है और इसके ह्यूमन रिसोर्स बहुत बड़ी पूंजी हैं। सबका ध्यान भारत पर है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रास्ता दिखा रहे हैं।

ट्रेड डील में देश के अन्नदाताओं के साथ नहीं हुआ अन्याय:अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर बोले गोयल, इन वस्तुओं पर यूएस में लगेगा 0 फीसदी टैरिफ
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता का ढंाचा जारी होने के बाद वाणिज्य और उद्योग मंत्री पियूष गोयल ने शनिवार को विस्तार से उन चीजों के बारे में जानकारी दी है, जिनपर 0 टैरिफ अमेरिका ने लगाया है। इस दौरान उन्होंने यह भी जानकारी शेयर की कि भारत ने अमेरिका को किसी भी एग्री और डेयरी प्रोडक्ट्स पर छूट नहीं दी है। वाणिज्य भवन में पत्रकारों से संबोधित करते हुए गोयल ने कहा, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में डेयरी सेक्टर में किसी प्रकार की कोई छूट नहीं दी गई है। साथ ही, मांस, मुर्गी पालन, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, अनाज, चीनी, बाजरा, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी जैसे फल, खट्टे फल, हरी मटर, मूंग, चना, तिलहन, पशु आहार उत्पाद और तंबाकू पर भी कोई राहत नहीं दी गई है।0 फीसदी टैरिफ वाली वस्तुएंजेम्स एंड डायमंड, फार्मा , स्मार्टफोन्स, स्पाइसेज, चाय कॉफी, कोकोनट, कोकोनोट ऑयल, वेजिटेबल ऑयल, केस्यू नट्स, मसाले, कई फल और सब्जियांकेला, आम, चीनी , पाइनएप्पल, मसरूम, वेजिटेबल के रूट्स, कोका और कोका से बने वस्तु, प्रोसेस फ्यूटस जैसे अमरूद का जेम्स एयरक्रॉफॅ्ट के पार्ट्स, मशीनरी पार्ट, फार्मा की वस्तुएं, जेम्स एंड डायमंड्स, कॉइंस प्लैटिनम , इसेशियल ऑयल, एल्युमिनियम पार्ट , जिंक ऑक्साइड, मिनिरल्स और नेचुरल चीजें, नेचुरल रबड आदिसेब और कपास के आयात पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में इन उत्पादों की खपत, उत्पादन के मुकाबले काफी अधिक है। इस कारण से पहले से ही इन उत्पादों का आयात होता आया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश में करीब 6 लाख टन सेब का आयात होता है। मौजूदा समय में आयात का बेस प्राइस 50 रुपए है और इस पर 50 प्रतिशत टैरिफ है, जिससे घरेलू बाजार में आयातित सेब की कीमत 75 रुपए होती है। आयोतित सेब का बेस प्राइस रखा 80 रुपएउन्होंने आगे बताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में आयातित सेब का बेस प्राइस 80 रुपए रखा गया है। वहीं, टैरिफ 25 प्रतिशत है, जिससे आयातित सेब की कीमत 100 रुपए हो जाती है। इसके साथ ही, आयात के लिए एक कोटा भी निर्धारित किया गया है। ऐसे में घरेलू किसानों को डरने की कोई आवश्यकता नहीं। किसानों के हितों को सर्वोपरि रखकर काम कर रही सरकारकेंद्रीय मंत्री ने कहा कि कपास के साथ भी ऐसा ही है। भारत में कुछ विशेष प्रकार की कपास का हमेशा से आयात होता आया है। इस कारण किसानों के लिए कोई चिंता की बात नहीं है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि सरकार लगातार किसानों के हितों को सर्वोपरि रखकर कार्य कर रही है। इस व्यापार समझौते के तहत कई कृषि उत्पादों जैसे मसालों, चाय, कॉफी और उससे जुड़े उत्पाद, नारियल और नारियल तेल, काजू और अन्य उत्पादों का जीरो ड्यूटी पर अमेरिका को निर्यात होगा। इन सामानों के निर्यात पर लगेगी जीरो ड्यूटी इसके अलावा, रत्न और आभूषण, फार्मा उत्पादों और स्मार्टफोन के निर्यात पर भी जीरो ड्यूटी लगेगी। गोयल ने आगे कहा कि भारत-अमेरिका का लक्ष्य आपसी द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक ले जाना है। इससे आने वाले समय में दुनिया की सबसे बड़ी 30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था में भारतीय निर्यातकों के लिए काफी सारे नए अवसर खुलेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि इससे देश को विकसित भारत 2047 का लक्ष्य पाने में मदद मिलेगी।

अंडर-19 वर्ल्ड कप विजेताओं पर हुई धन वर्षा:बीसीसीआई ने 7.5 करोड़ देने का किया ऐलान, बंटवारे पर मंथन शुरू
नई दिल्ली। भारत ने शुक्रवार को इंग्लैंड के खिलाफ जीत दर्ज करते हुए अंडर-19 वर्ल्ड कप खिताब अपने नाम किया। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने विश्व कप विजेता टीम, टेक्निकल स्टाफ और सिलेक्शन कमिटी के लिए कुल 7.5 करोड़ रुपए के कैश अवॉर्ड की घोषणा की है। बीसीसीआई के सेक्रेटरी देवजीत सैकिया ने शनिवार को बताया, जिम्बाब्वे और नामीबिया में अंडर-19 मेंस क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम को 7.5 करोड़ रुपए का कैश अवॉर्ड दिया जाएगा। हम खिलाड़ियों, टेक्निकल स्टाफ और सिलेक्शन कमिटी के लिए इनाम की रकम के बंटवारे पर काम कर रहे हैं, लेकिन बीसीसीआई की ओर से उन्हें कुल 7.5 करोड़ रुपए का इनाम दिया जाएगा।वैभव ने खेली थी तूफानी पारीहरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए फाइनल मैच में भारत ने वैभव सूर्यवंशी की तूफानी पारी के दम पर 9 विकेट खोकर 411 रन बनाए थे। सूर्यवंशी ने 80 गेंदों में 15 चैकों और इतने ही छक्कों के साथ 175 रन की पारी खेली थी, जबकि कप्तान आयुष म्हात्रे ने 51 गेंदों में 53 रन जोड़े।311 रन पर सिमट गए थे अंग्रेजइसके जवाब में इंग्लैंड की टीम 40.2 ओवरों में महज 311 रन पर सिमट गई। इस टीम के लिए कैलेब फाल्कनर ने 67 गेंदों में 7 छक्कों और 9 चैकों के साथ 115 रन की पारी खेली, जबकि बेन डॉकिन्स ने 66 रन का योगदान टीम के खाते में दिया, लेकिन इंग्लैंड को शर्मनाक हार के बचा नहीं सके।भारती छठवीं बार बना अंडर-19 वर्ल्ड कप विजेताभारत के छठी बार अंडर-19 वर्ल्ड कप खिताब जीतने पर सैकिया ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट में लिखा था, यह शानदार कामयाबी एक मजबूत सिस्टम की ताकत का सबूत है, जो लंबे समय तक प्लेयर डेवलपमेंट, कॉम्पिटिटिव घरेलू स्ट्रक्चर, डेडिकेटेड टेक्निकल स्टाफ से सपोर्टेड क्वालिटी कोचिंग प्रोग्राम और एक मजबूत टैलेंट आइडेंटिफिकेशन प्रोसेस पर बना है। एज-ग्रुप क्रिकेट एक मुख्य प्राथमिकता बनी हुई है। बीसीसीआई भविष्य के लिए इन नींवों में इन्वेस्ट करना और उन्हें मजबूत करना जारी रखेगा। बहुत बढ़िया, लड़कों! आप पर देश को बहुत गर्व है।

अंडमान में दुनिया देखेगी भारतीय सेना का शौर्य:सुखोई-30 और थाइलैंड के ग्रिपेन फाइटर के बीच होगी जंग
नई दिल्ली। भारतीय सेना के तीनों अंगों के साथ दुनिया के कई मित्र देश अभ्यास करना चाहते हैं। सफल ऑपरेशन सिंदूर के बाद इसकी फेहरिस्त और भी लंबी हो गई है। इसी कड़ी में साल 2026 का पहला अभ्यास किसी मित्र देश की एयरफोर्स के साथ 9 फरवरी को अंडमान के पास आयोजित किया जा रहा है। भारत और थाईलैंड की वायु सेनाओं के बीच होने वाले इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना की ओर से फ्रंटलाइन फाइटर जेट सुखोई-30 और रॉयल थाईलैंड एयर फोर्स की ओर से ग्रिपेन फाइटर एयरक्राफ्ट हिस्सा लेंगे। भारतीय वायुसेना के मिड-एयर रिफ्यूलर टैंकर और एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम एडब्ल्यूएसीएस की भी तैनाती की जाएगी।अभ्यास का मुख्य उद्देश्य है यहरक्षा अधिकारियों के अनुसार इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की वायुसेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाना और बेस्ट प्रैक्टिस साझा करना है। अभ्यास अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के पास नॉर्थ मलक्का स्ट्रेट में आयोजित किया जाएगा। भारतीय वायुसेना की ओर से 4 से 6 सुखोई विमान भाग लेंगे, जबकि रॉयल थाईलैंड एयर फोर्स के भी इतने ही ग्रिपेन इसमें शामिल होंगे।अभ्यास के दौरान समुद्र में होगी जहाजों की तैनातीअभ्यास के दौरान सर्च एंड रेस्क्यू के लिए समुद्र में जहाजों की भी तैनाती होगी। सुखोई-30 अंडमान के एयरबेस से टेकऑफ करेंगे, जबकि ग्रिपेन थाईलैंड के एयरबेस से उड़ान भरेंगे। इस अभ्यास का एक उद्देश्य द्वीप क्षेत्रों में लॉजिस्टिक एंड्यूरेंस की क्षमता को परखना भी है।दो महीनों में होंगे कई अभ्यासऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारतीय वायुसेना अपने एक्सरसाइज कैलेंडर के अनुसार लगातार अभ्यास कर रही है। अगले दो महीनों में तीन बड़े वायुसेना अभ्यास प्रस्तावित हैं, जिनमें फ्रांस, अमेरिका और ग्रीस की वायुसेनाएं भारतीय वायुसेना के साथ ऑपरेशनल कौशल साझा करेंगी।ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुए अभ्यासों की सूची पर नजर डालें तो भारत ने फ्रांस के साथ एक्सरसाइज गरुड़, रूस के साथ अविइंद्रा और कई मल्टीनेशनल अभ्यासों में हिस्सा लिया है।भारत और थाईलैंड रक्षा सहयोगभारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, भारत और थाईलैंड की साझा समुद्री सीमाएँ हैं और दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र में थाईलैंड की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है।भारत और थाईलैंड के द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को भारत की ‘लुक ईस्ट’ नीति से गति मिली, जिसे बाद में ‘एक्ट ईस्ट’ नीति में उन्नत किया गया। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मई 2003 में शुरू किए गए सुरक्षा सहयोग पर जॉइंट वर्किंग ग्रुप ने सहयोग को मजबूत करने के लिए सात प्राथमिक क्षेत्रों में से एक के रूप में सैन्य सहयोग को नामित किया।भारत और थाईलैंड के बीच रक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) 25 जनवरी 2012 को हस्ताक्षरित किया गया। इस समझौते में नियमित संयुक्त अभ्यास, अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के पास आतंकवाद, समुद्री डकैती और तस्करी का मुकाबला करने के लिए संयुक्त समुद्री गश्त, एक-दूसरे की सशस्त्र सेनाओं के प्रशिक्षण संस्थानों में अधिकारियों का प्रशिक्षण, सेवा-स्तरीय वार्ता और विभिन्न स्तरों पर यात्राओं का आदान-प्रदान शामिल है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील का खाका तैयार:दोनों देशों का दावा- ऐहासिक मील का पत्थर साबित होगा व्यापर समझोता
नई दिल्ली। व्यापार समझौते पर भारत और अमेरिका ने संयुक्त बयान जारी किया है। भारत-अमेरिका ने अंतरिम समझौते के लिए एक रूपरेखा तैयार की है, जिसमें व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) वार्ताओं के प्रति देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाया गया है। दोनों देशों ने कहा है कि अंतरिम समझौता हमारे देशों की साझेदारी में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा। संयुक्त बयान में कहा गया है, अमेरिका और भारत को यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि वे आपसी और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार (अंतरिम समझौता) के संबंध में एक फ्रेमवर्क पर सहमत हो गए हैं। फ्रेमवर्क 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुरू की गई वार्ताओं के प्रति देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है, जिसमें अतिरिक्त बाजार पहुंच प्रतिबद्धताएं शामिल होंगी और अधिक लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं का समर्थन किया जाएगा। भारत-अमेरिका ने संयुक्त बयान में अंतरिम समझौते की मुख्य शर्तों के बारे में भी जानकारी दी है।इन सामनों पर पर खत्म हो सकता है अमेरिकी टैरिफसमझौते के अनुसार, भारत अमेरिका के सभी इंडस्ट्रियल सामानों और अमेरिका के कई तरह के खाने-पीने और खेती के प्रोडक्ट्स पर टैरिफ खत्म करेगा या कम करेगा, जिसमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन (डीडीजीएस), जानवरों के चारे के लिए लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स, और दूसरे प्रोडक्ट्स शामिल हैं। वहीं, अमेरिका सहमति के अनुसार भारत के मूल सामानों पर 18 प्रतिशत की पारस्परिक टैरिफ दर लागू करेगा, जिसमें कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, ऑर्गेनिक रसायन, घर की सजावट का सामान, हस्तशिल्प उत्पाद, और कुछ मशीनरी शामिल हैं।भारतीय विमानों और विमान के पुर्जों से हटेगा टैरिफफ्रेमवर्क के अनुसार, अंतरिम समझौते की सफलता भारतीय सामानों की एक विस्तृत श्रृंखला पर टैरिफ हटाने का रास्ता भी सुनिश्चित करेगी। इस सूची में जेनेरिक दवाएं, रत्न और हीरे, और विमान के पुर्जे शामिल हैं। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारत की वैश्विक हिस्सेदारी मजबूत है और अमेरिकी मांग अधिक है। बयान में कहा गया है कि वाशिंगटन कुछ भारतीय विमानों और विमान के पुर्जों पर भी टैरिफ हटाएगा। ये शुल्क पहले एल्यूमीनियम, स्टील और तांबे के आयात से संबंधित राष्ट्रीय सुरक्षा घोषणाओं के तहत लगाए गए थे।भारत के फार्मास्युटिकल उद्योग को और भी हो सकता है लाभ यह भी समझौता हुआ है कि भारत को ऑटोमोटिव पुर्जों के लिए विशेष रियायती शुल्क व्यवस्था मिलेगी। ये पुर्जे ऑटोमोबाइल और ऑटो पुर्जों पर अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा टैरिफ के तहत आते हैं। भारत के फार्मास्युटिकल उद्योग को और भी लाभ हो सकता है। जेनेरिक दवाओं और फार्मास्युटिकल सामग्री से संबंधित परिणाम अमेरिकी धारा 232 जांच पर निर्भर करेंगे। संयुक्त बयान के अनुसार, ये उत्पाद अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा बाजार में भारत का मुख्य निर्यात हैं।मेडिकल उपकरणों में आ रहीं बाधाओं को दूर करने में सहमत हुआ अमेरिकाशुल्क से आगे बढ़कर, दोनों देशों ने कुछ अहम क्षेत्रों में एक-दूसरे को प्राथमिक बाजार पहुंच देने पर भी सहमति जताई है। अमेरिका और भारत मूल के नियम स्थापित करेंगे, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि समझौते के लाभ मुख्य रूप से दोनों देशों को मिलें। इसके अलावा, अमेरिका और भारत उन नॉन-टैरिफ बाधाओं पर बात करेंगे, जो द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करती हैं। भारत अमेरिकी मेडिकल उपकरणों के व्यापार में लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करने पर सहमत हुआ है।प्रतिबंधात्मक आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को किया जाएगा खत्मदोनों देशों में सहमति बनी है कि प्रतिबंधात्मक आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को खत्म किया जाएगा, जिससे अमेरिकी सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) सामानों के लिए बाजार पहुंच में देरी हो रही थी। भारत ने समझौता लागू होने के छह महीने के भीतर यह तय करने का वादा किया कि पहचाने गए सेक्टरों में अमेरिकी या अंतर्राष्ट्रीय मानकों को स्वीकार किया जा सकता है या नहीं। इसमें टेस्टिंग की जरूरतें शामिल हैं। इसी तरह के वादे अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों को प्रभावित करने वाली पुरानी बाधाओं पर भी लागू होते हैं।

गहराई, विश्वास और गतिशीलता:भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर पीएम मोदी ने ऐसे जताई खुशी, किसानों और उद्यमियों के हित में भी बोले
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एग्जीक्यूटिव ट्रेड डील पर साइन करने के बाद भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा जारी कर दी गई है। समझौते के तहत टैरिफ में बड़ी कटौती और बाजार पहुंच बढ़ाने पर सहमति बनी है। केंद्र सरकार के अनुसार इस फ्रेमवर्क से भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा अमेरिकी बाजार खुलेगा, जबकि संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों की पूरी सुरक्षा रखी गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अहम समझौते पर खुशी जताई और सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी शेयर की है। गहराई, विश्वास और गतिशीलता, पीएम मोदी का पोस्टपीएम मोदी ने लिखा, हम दो महान देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं। इस समझौते से भारत और अमेरिका दोनों को फायदा होगा और इससे भारत के किसानों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स को काफी फायदा मिलेगा। मैं राष्ट्रपति ट्रंप को दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने के लिए उनकी प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद देता हूं। यह रूपरेखा हमारी साझेदारी की गहराई, विश्वास और गतिशीलता को दर्शाती है।समझौता मेक इन इंडिया को मजबूत करता हैरू पीएम मोदीपीएम मोदी ने अपने पोस्ट में आगे कहा, यह भारत के मेहनती किसानों, उद्यमियों, एमएसएमई, स्टार्टअप इनोवेटर्स, मछुआरों और अन्य लोगों के लिए नए अवसर खोलकर मेक इन इंडिया को मजबूत करता है। यह महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करेगा। भारत और अमेरिका नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और यह रूपरेखा हमारे बीच निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारी को और गहरा करेगा। यह फ्रेमवर्क लचीली और भरोसेमंद सप्लाई चेन को भी मजबूत करेगा और वैश्विक विकास में योगदान देगा।व्यापार समझौते पर दी गोयल ने जानकारीकेंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर व्यापार समझौते पर अहम जानकारी दी, जिसके बाद दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी कर समझौते पर मुहर लगाई। बता दें कि व्यापार समझौते की रूपरेखा के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50ः घटाकर 18 फीसदी किया है। इससे भारतीय कंपनियों को अमेरिका में सामान बेचना सस्ता और आसान हो जाएगा। जिससे निर्यात और रोजगार बढ़ेंगे।

वाशिंगटन पोस्टः अमेरिकी अखबार में इतिहास की सबसे बड़ी कटौती:कांग्रेस नेता के बेटे की भी गई नौकरी, फूटा थरूर का गुस्सा, खेल विभाग और विदेशी कार्यालय भी बंद
वॉशिंगटन। अमेरिका के मशहूर अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने बीते दिनों एक तिहाई कर्मचारियों की छटनी कर दी है, यानि 800 पत्रकारों में से 300 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इसमें कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर का बेटा ईशान थरूर भी शामिल है। वे सीनियर कॉलमिस्ट के पद पर कार्यर थे। इसके अलावा अखबार ने कथित तौर पर अपना खेल विभाग और कई विदेशी कार्यालय भी बंद कर दिए हैं। वॉशिंगटन पोस्ट के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने चार फरवरी को एक कंपनी-व्यापी कॉल के दौरान इस छंटनी की घोषणा की। ये अखबार के 150 साल के इतिहास की सबसे बड़ी कटौती मानी जा रही है। ईशान के साथ-साथ अधिकांश अंतरराष्ट्रीय स्टाफ और कई अनुभवी सहयोगियों को भी अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है। ईशान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि वॉशिंगटन पोस्ट ने इंटरनेशनल टीम के कई शानदार पत्रकारों के साथ उन्हें भी नौकरी से निकाल दिया है। यह न्यूज रूम के लिए बेहद दुखद दिन है।वहीं बेटे को नौकरी से निकाले जाने पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का गुस्सा फूट पड़ा है। शशि थरूर ने अखबार के व्यावसायिक तर्क पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि ईशान का कॉलम इंटरनेट पर बेहद लोकप्रिय था। उनके वैश्विक नजरिया न्यूजलेटर के 5 लाख से अधिक (हाफ मिलियन प्लस!) व्यक्तिगत सब्सक्राइबर्स थे।अखबार इसे भुनाने की कर सकता था कोशिशउन्होंने बताया कि मैंने दुनिया भर के विदेश मंत्रियों, राजनयिकों और विद्वानों से मुलाकात की है जो उनके लेखों को रोजाना पढ़ते थे। थरूर के अनुसार, इतने बड़े पाठक वर्ग वाले न्यूजलेटर को बंद करना समझ से परे है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखबार इसे भुनाने की कोशिश कर सकता था, लेकिन इसे खत्म करना खुद को नुकसान पहुंचाने जैसा कृत्य है।ईशान को नुकसान पहुंचाने जैसा फैसलाशशि थरूर ने कहा कि वॉशिंगटन पोस्ट चाहती तो इतनी बड़ी पाठक संख्या से कमाई कर सकती थी, लेकिन ऐसा करने के बजाय अखबार ने उस कॉलम को बंद कर दिया, जो उनके मुताबिक खुद को नुकसान पहुंचाने जैसा फैसला है। हालांकि बाद में शशि थरूर ने यह पोस्ट डिलीट कर दी। इसके बाद उन्होंने एक और पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों को समझाने और उनका विश्लेषण करने में ईशान थरूर से बेहतर या उनके बराबर कोई नहीं है।ईशान ने भी व्यक्त की निराशाईशान थरूर ने लिखा, आज मुझे वॉशिंगटन पोस्ट से निकाल दिया गया है, साथ ही अधिकांश अंतरराष्ट्रीय स्टाफ और कई अन्य शानदार सहकर्मियों को भी। मैं हमारे न्यूजरूम के लिए और खासकर उन बेजोड़ पत्रकारों के लिए दुखी हूं, जिन्होंने पोस्ट के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम किया- संपादक और संवाददाता जो लगभग 12 वर्षों से मेरे दोस्त और सहयोगी रहे हैं। उनके साथ काम करना सम्मान की बात थी। अपने योगदानों पर प्रकाश डालते हुए ईशान ने कहा, मैंने पाठकों को दुनिया और उसमें अमेरिका की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने में मदद करने के लिए जनवरी 2017 में वर्ल्डव्यू कॉलम शुरू किया था और मैं उन पांच लाख वफादार पाठकों का आभारी हूं जो सालों से हफ्ते में कई बार इस कॉलम को पढ़ते रहे हैं।

ट्रांस-अरुणाचल हाईवे से जुड़े मुआवजा घोटाले ईडी का एक्शन:आधा दर्जन लाभार्थियों के ठिकानों पर दी दबिश, एक परिसर से मिले 22 करोड़
नई दिल्ली। ट्रांस-अरुणाचल हाईवे से जुड़े मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कई ठिकानों पर एक साथ छोमारी की है। तलाशी के दौरान एक फर्जी लाभार्थी के परिसर से 2.2 करोड़ रुपए नकद बरामद किए जाने की भी पुष्टि हुई है। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।बता दें कि यह मामला भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान मुआवजे के आकलन, उसके प्रमाणन और वितरण में हुई गंभीर अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम में सरकारी अधिकारियों और निजी लाभार्थियों की आपसी मिलीभगत के जरिए अपराध की आय अर्जित की गई और बाद में उसका धन शोधन किया गया।157.70 किलोमीटर लंबी थी परियोजनाईडी की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह परियोजना कुल 157.70 किलोमीटर लंबी थी, जिसे प्रशासनिक रूप से याचुली (0.00-43.635 किमी), जीरो (43.635-63.700 किमी) और रागा (63.700-149.440 किमी) सेक्टरों में विभाजित किया गया था। जांच में सामने आया है कि जीरो के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर द्वारा शुरुआत में पोटिन-बोपी खंड के लिए 289.40 करोड़ रुपए का मुआवजा आकलन तैयार किया गया था। हालांकि, बाद में राज्य स्तरीय बैठक में इस मुआवजा पैकेज को सीमित करते हुए कुल 198.56 करोड़ रुपए पर फ्रीज कर दिया गया।भारी मात्रा में धन को बचत खातों में किया डायवर्टईडी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मुआवजा वितरण के दौरान भारी मात्रा में धन को बचत खातों में डायवर्ट किया गया और कई फर्जी लाभार्थियों के नाम पर चेक जारी किए गए। इससे सरकारी खजाने को लगभग 44 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। जांच एजेंसी के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों ने जानबूझकर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ट्रांस-अरुणाचल हाईवे (पोटिन-बोपी) परियोजना के याजाली सेक्टर में संरचनाओं का फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर आकलन तैयार किया और उसका प्रमाणन किया। इसके जरिए अस्तित्वहीन संरचनाओं और अयोग्य लाभार्थियों के नाम जोड़कर अवैध रूप से मुआवजा दिलाया गया।जद में रहे यह ठिकानेजांच के तहत ईडी ने 6 आवासीय परिसरों पर तलाशी अभियान शुरू किया है। इनमें तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर, डीएलआरएसओ, आकलन से जुड़े अधिकारी और प्रमुख निजी लाभार्थी-कनड्यूट्स के ठिकाने शामिल हैं। छापेमारी का उद्देश्य दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्य जुटाना तथा अपराध की आय से अर्जित चल-अचल संपत्तियों की पहचान करना है। ईडी के अनुसार, इन छह परिसरों में से चार इटानगर और उसके आसपास स्थित हैं, एक लिकाबाली (डिब्रूगढ़ के पास) में और एक आलो में है, जो मेचुका-चीन सीमा के नजदीक स्थित है। तलाशी के ये स्थान अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी से पूर्वी हिस्सों तक फैले हुए हैं और इनमें सीमा से सटे, दुर्गम पहाड़ी इलाकों के संवेदनशील और दूरस्थ क्षेत्र भी शामिल हैं।

ब्राह्मण समाज के आक्रोश का असर:मनोज वाजपेयी की फिल्म पर चला दिल्ली हाई कोर्ट का चाबुक, नेटफ्लिक्स से हटेंगे घूसखोर पंडत के सभी कंटेंट
मुंबई। नेटफ्लिक्स पर टीजर रिलीज के साथ विवादों में घिरी अभिनेता मनोज बाजपेयी की फिल्म “घूसखोर पंडत” सुर्खियों में है। फिल्म के टाइटल को लेकर ब्राह्मण समाज में रोष का माहौल है और देश के कई राज्यों से फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग उठ रही है। अब मामले में नया अपडेट आया है, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता विनीत जिंदल की याचिका पर सुनवाई करते हुए फिल्म के नाम और उससे जुड़ी सभी प्रचार-सामग्री को सभी प्लेटफॉर्म से हटाने की घोषणा की है। इसके अलावा, फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे ने मामले पर अपना पक्ष भी रखा है।ब्राह्मण समुदाय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचा रही फिल्मअधिवक्ता विनीत जिंदल द्वारा याचिका में दावा किया गया है कि टाइटल ‘घूसखोर पंडित’ ब्राह्मण समुदाय की गरिमा, प्रतिष्ठा और भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और जानबूझकर अपमानजनक बनाया गया है। अब फैसले के बाद फिल्म से जुड़ी सारी प्रचार सामग्री को हटाने का निर्देश दे दिया गया है।निदेशक ने फिल्म को लेकर दी सफाई“घूसखोर पंडत” के निर्देशक नीरज पांडे ने फिल्म को लेकर बढ़ते विवाद पर सफाई दी है और उनका कहना है कि फिल्म का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर कर लिखा, हमारी फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है, और श्पंडितश् शब्द का प्रयोग केवल एक काल्पनिक पात्र के बोलचाल के नाम के रूप में किया गया है। कहानी एक व्यक्ति के कार्यों और विकल्पों पर केंद्रित है और किसी भी जाति, धर्म या समुदाय पर टिप्पणी या प्रतिनिधित्व नहीं करती है।फिल्म का उद्देश्य दर्शकों का मनोरंजन करना उन्होंने आगे लिखा, एक फिल्म निर्माता के रूप में, मैं अपने काम को गहरी जिम्मेदारी की भावना के साथ करता हूं। यह फिल्म, मेरी पिछली फिल्मों की तरह, पूरी ईमानदारी से बनाई गई है और इसका एकमात्र उद्देश्य दर्शकों का मनोरंजन करना है। हम समझते हैं कि फिल्म के शीर्षक से कुछ दर्शकों को ठेस पहुंची है, और हम उन भावनाओं को समझते हैं। इन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, हमने फिलहाल सभी प्रचार सामग्री हटाने का निर्णय लिया है, क्योंकि हमारा मानना है कि फिल्म को पूरी तरह से देखा जाना चाहिए और उस कहानी के संदर्भ में समझा जाना चाहिए जिसे हम बताना चाहते हैं, न कि आंशिक झलक के आधार पर। मैं जल्द ही दर्शकों के साथ फिल्म साझा करने के लिए उत्सुक हूं। कुल मिलाकर अब फिल्म विवादों के बीच सीधा नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। हालांकि फिल्म किस दिन रिलीज होगी, उसको लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है।

मप्र बनेगा बनेगा देश की दालों का केंद्र:सीहोर के अमलाहा में कल लगेगा देश के कृषि मंत्रियों का जमावड़ा, शिवराज करेंगे अध्यक्षता
भोपाल। सीहोर जिले का अमलाहा क्षेत्र 07 फरवरी को देश की कृषि राजनीति और अनुसंधान का मुख्य केंद्र बनने जा रहा है। यहां आयोजित होने वाले दलहन क्षेत्र के राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के 09 प्रमुख राज्यों के कृषि मंत्री शिरकत करेंगे। इस बड़े आयोजन में दालों के उत्पादन को बढ़ाने, वर्तमान चुनौतियों से निपटने और भविष्य की नई संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।सम्मेलन की कमान खुद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान संभालेंगे। उनके साथ केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चैधरी भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में दलहन अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक, बीज उत्पादक संस्थाएं, दाल उद्योग के बड़े प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो देश को दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का खाका तैयार करेंगे।ये दिग्गज मंत्री होंगे शामिलसम्मेलन की गरिमा बढ़ाने के लिए अलग-अलग राज्यों के कृषि मंत्री सीहोर पहुँच रहे हैं। इनमें शामिल हैं मध्यप्रदेश से एदल सिंह कंसाना, उत्तर प्रदेश से सूर्य प्रताप शाही, पंजाब से सरदार गुरमीत सिंह खुडियन, हरियाणा से श्याम सिंह राणा, छत्तीसगढ़ से रामविचार नेताम, बिहार से राम कृपाल यादव, गुजरात से रमेशभाई कटारा, ओडिशा से कनक वर्धन सिंह देव, पश्चिम बंगाल से सोवानदेव चट्टोपाध्याय शामिल होंगे।क्यों खास है यह सम्मेलनअमलाहा में होने वाली इस चर्चा में दलहन उत्पादक राज्यों के बीच समन्वय और नई तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए दलहन फसलों को बढ़ावा देना है।

पैटर्न के हिसाब से करें पढ़ाई:परीक्षा पे चर्चा प्रोग्राम में पीएम मोदी ने छात्रों को दिया बेशकीमती मंत्र, खुद का भी दिया उदाहरण
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान छात्रों को पढ़ाई के लिए एक बेशकीमती मंत्र दिया। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने पैटर्न के हिसाब से पढ़ाई करें। सबकी सलाह सुनें, लेकिन अपना तरीका तभी बदलें जब आप चाहें। परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में पहले अध्याय आपकी शैली, आपकी गति पर चर्चा के दौरान गुजरात की एक छात्रा ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया। छात्रा ने पूछा कि परीक्षा के समय परिवार और शिक्षक सभी चिंता करते हैं। लेकिन समस्या तब आती है जब शिक्षक पढ़ाई का अलग पैटर्न समझाते हैं और अभिभावक अलग तरीके से पढ़ने के लिए कहते हैं, जबकि छात्रों का खुद का एक अलग पैटर्न होता है। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि यह पैटर्न जीवनभर चलता है।पीएम ने खुद का भी दिया उदाहरणपीएम मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा, मैं प्रधानमंत्री बन गया हूं। फिर भी लोग मुझे अलग-अलग तरीकों से काम करने को कहते हैं। लेकिन सबका अपना-अपना तरीका होता है। बच्चों को उन्हीं के अंदाज में जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, जब परिवार के लोग एक साथ खाना खाने बैठते हैं तो सभी का खाने का पैटर्न अलग होता है। वह सब्जी के साथ खाने की शुरुआत करेगा, कोई दाल से करेगा और कोई दाल-सब्जी सब मिलाकर खाएगा। वहां जब वे अपने पैटर्न के हिसाब से खाते हैं तो उन्हें मजा आता है।अपनी पैटर्न पर करें भरोसाछात्रों को पढ़ाई का मंत्र देते हुए उन्होंने कहा, कुछ लोग सुबह बेहतर पढ़ाई करते हैं, कुछ रात में। आपकी अपनी जो पैटर्न है, उसी पर भरोसा करें। लेकिन सलाह भी लें और अगर उससे आपको फायदा होता है, तो ही उसे अपनी जिंदगी के तरीके में शामिल करें। इसको भी किसी के कहने पर नहीं, बल्कि अपने अनुभव से जोड़ो।पीएम ने कार्यक्रम में बदलाव का भी दिया उदाहरणउन्होंने एक और उदाहरण परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के बारे में दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, जब यह कार्यक्रम शुरू हुआ तो इसका एक अलग पैटर्न था। धीरे-धीरे इसमें कई बदलाव किए गए हैं और इसी तरह अबकी बार अलग-अलग राज्यों में छात्रों से संवाद किया। मैंने भी कुछ चीजें बदलीं, लेकिन अपना मूल तरीका नहीं छोड़ा। जवाब सुनने के बाद छात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का नेचर बहुत अच्छा था। वे हम सब बच्चों के साथ एकदम घुल मिल गए थे। उन्होंने समझाया कि हमें अपने ही पैटर्न में फोकस करना है, लेकिन हमें सभी का पैटर्न सुनना है और सभी में से कुछ-कुछ गुण लेने हैं।

धन्यवाद प्रस्ताव:पीएम मोदी ने लोकसभा की भड़ास निकाली राज्यसभा में, राहुल-खड़गे और कांग्रेस पर जमकर किया वार, गिनाई अपनी उपलब्धियां
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया। पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत विपक्ष के हंगामे के बीच शुरू की। उन्होंने कहा, धन्यवाद प्रस्ताव पर समर्थन के लिए इस सदन में अपनी भावनाओं को व्यक्त करना मैं अपना सौभाग्य मानता हूं। देश आज तेज प्रगति कर रहा है। पीएम ने विपक्ष को अपने निशाने पर लेते हुए कहा कि मैं रोज दो किलो गाली खाता हूं, मोहब्बत की दुकान वाले 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' के नारे लगा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर सिख गुरुओं का अपमान करने का आरोप लगाया और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्र को लेकर भी कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। पीएम मोदी ने अपने स्पीच में कहा कि , मेरी एक प्रार्थना है। आदरणीय खरगे जी की उम्र को देखते हुए, अगर वे बैठकर भी नारे लगाना चाहें तो लगा सकते हैं। पीछे कई सारे युवा नेता हैं। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति के अभिभाषण में देश के मध्यम वर्ग, निम्न-मध्यम वर्ग, गरीब, गांव, किसान, महिलाएं, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, बहुत ही विस्तार से भारत के प्रगति का एक स्वर संसद में गूंजा है। देश के नौजवान भारत के सामर्थ्य को कैसे आगे बढ़ा रहे हैं, इस पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। राष्ट्रपति ने भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रति भी भरोसा जताया है। यह हम सबके लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा, देश का हर व्यक्ति यह महसूस कर रहा है कि एक अहम पड़ाव पर हम पहुंच चुके हैं। न हमें रुकना है, न हमें पीछे मुड़कर देखना है। हम आगे ही आगे देखना है और लक्ष्य को प्राप्त करके ही हमें सांस लेनी है। उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।'युवा होता जा रहा हमारा देश'अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आगे कहा, भारत के भाग्य के लिए अनेक संयोग एक साथ हमें नसीब हुए हैं। ये अपने आप में बहुत ही उत्तम संयोग है। सबसे बड़ी बात है कि विश्व के समृद्ध से समृद्ध देश भी बुजुर्ग होते जा रहे हैं। वहां की आबादी उम्र के उस पड़ाव पर पहुंची है, जिन्हें हम बुजुर्ग के रूप में जानते हैं। हमारा देश ऐसा है, जो विकास की नई ऊंचाइयां छू रहा है, वैसे ही देश हमारा युवा होता जा रहा है। युवा आबादी वाला देश बनता जा रहा है। भारत के प्रति बढ़ा दुनिया का आकर्षणउन्होंने कहा, दूसरी तरफ मैं देख रहा हूं जिस प्रकार विश्व का भारत के प्रति आकर्षण बढ़ा है। विश्व भारत के प्रतिभा (टैलेंट) का अहमियत समझ रहा है। हमारे पास आज दुनिया का बहुत ही अहम टैलेंट पूल है। युवा टैलेंट पूल है, जिसके पास सपने, संकल्प और सामर्थ्य है। यानी शक्ति का आशीर्वाद हमारे साथ है।'दुनिया की चुनौतियों को समाधान दे रहा भारत'प्रधानमंत्री ने कहा, आज विश्व में जो चुनौतियां पैदा हो रही हैं, भारत उनका समाधान देने, आशा की किरण देने वाला देश बना हुआ है। हम समाधान दे रहे हैं। आज अहम अर्थव्यवस्थाओं में भारत की विकास दर काफी ऊंची है। ऊंची विकास दर और कम महंगाई एक अनोखी उपलब्धि है।इनका अहंकार सातवें आसमान परवहीं राहुल गांधी द्वारा केन्द्रीय राज्य मंत्री बिट्टू गद्दार दोस्त कहने पर पीएम ने कहा कि कल इस सदन के एक सांसद को कांग्रेस के युवराज ने गद्दार कह दिया। सोचिए, इनका अहंकार सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। उन्होंने (कांग्रेसी युवराज) उन्हें गद्दार इसलिए कहा क्योंकि वे सिख थे। यह सिखों का अपमान था, गुरुओं का अपमान था। कांग्रेस के अंदर सिखों के प्रति जो कूट-कूटकर नफरत भरी हुई है, यह उसी की अभिव्यक्ति थी।असम के लोगों से नफरत करती है कांग्रेसउन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी असम के लोगों से गहरी नफरत रखती है। जब कांग्रेस ने भूपेन हजारिका को भारत रत्न दिए जाने के फैसले का विरोध किया, तो मुझे बहुत दुख हुआ। मल्लिकार्जुन खड़गे ने हजारिका जी को 'महज एक गायक' कहकर खारिज कर दिया, जो न केवल असम, बल्कि पूरे कला जगत का घोर अपमान है।राजनीतिक विद्वेश के कारण सदांनदजी के काट दिए गए पैरउन्होंने कहा कि यही नहीं, राजनीतिक विद्वेष के कारण हमारे सदानंदन जी मास्टर के दोनों पैर काट दिए गए। भरी जवानी में दोनों पैर काट दिए। कटे हुए पैर से वे जिंदगी गुजार रहे हैं, लेकिन संस्कार इतने ऊंचे हैं कि वाणी में भी अपशब्द नहीं निकलता है। ऐसे व्यक्तित्व को, सदानंदन जी मास्टर को, मैं हृदय से अभिनंदन करता हूं, क्योंकि इतने हमले के बाद भी देश की सेवा का अपना व्रत जारी रखा और आज देश के नीति-निर्धारण में अपना योगदान दे रहे हैं।हताश कांग्रेस खोदना चाहती है हमारी कब्रपीएम मोदी ने कहा कि सत्ता हमारे लिए सुख का रास्ता नहीं है, सत्ता हमारे लिए सेवा का माध्यम है। मुद्रा योजना से लाखों-करोड़ों लोगों को मदद मिली। स्वरोजगार को बल दिया। कांग्रेस ने कभी स्टार्टअप कल्चर को प्रमोट ही नहीं किया। इनका तो हाल ऐसा है कि ये अपने घर के स्टार्टअप को भी ठीक नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हताश है और मोदी की कब्र खोदना चाहती है क्योंकि 2014 से पहले, मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर कई जानें गईं। इसके जवाब में, हमने ऐसे सभी क्रॉसिंग बंद करवा दिए। इसके अलावा, 2014 से पहले देश भर के 18,000 से अधिक गांवों में बिजली नहीं थी। तब से, इन गांवों में बिजली और रोशनी की व्यवस्था हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पहले, हमारी सेनाओं के लिए गोला-बारूद और बुलेटप्रूफ जैकेट की कमी की खबरें अक्सर आती थीं। हमने अपनी सेना को आवश्यक संसाधन और उपकरण उपलब्ध कराकर समस्या का समाधान किया।

संसद आने से मैंने ही रोका मोदी को:ओम बिरला का चौंकाने वाला खुलासा- था अनहोनी का शक
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार की शाम 5 बजे लोकसभा में धन्यवाद् प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देने वाले थे, लेकिन विपक्षी हंगामे के कारण वे स्पीच देने लोकसभा नहीं गए और पीएम के जवाब के बिना ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने वोटिंग कराकर धन्यवाद प्रस्ताव को पास कर दिया। धन्यवाद प्रस्ताव पारित होने के बाद पीएम मोदी को लेकर ओम बिरला ने सदन में बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दावा कि पीएम मोदी के साथ सदन में अप्रत्याशित घटना हो सकती थी, एसे में हमने ही पीएम से सदन में न आने का आग्रह किया था।सांसदों के अप्रिय और असंयमित व्यवहार को लेकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। स्पीकर ओम बिरला ने साफ शब्दों में कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे पवित्र मंच है और यहां इस तरह का व्यवहार न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि देश की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है। उन्होंने सभी सांसदों से संयम बरतने और संसदीय मर्यादाओं का पालन करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि कल जो कुछ भी हुआ लोकतंत्र के इतिहास में काले धब्बे जैसा है। संसद केवल बहस का मंच नहींस्पीकर ओम बिरला ने यह भी खुलासा किया कि जब प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान जवाब देने वाले थे, तब उन्हें ठोस जानकारी मिली थी कि कांग्रेस के कुछ सदस्य कोई अप्रत्याशित कदम उठा सकते हैं। इसी कारण उन्होंने स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने अंत में कहा कि संसद केवल बहस का मंच नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है।हंगामे के चलते लोकसभा स्थगितलगातार नारेबाजी और व्यवधान के कारण लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर तीन बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। सदन में व्यवस्था बनाए रखने की तमाम कोशिशों के बावजूद हालात काबू में नहीं आ सके।पीएम के बयान के बिना पारित हुआ धन्यवाद प्रस्तावलोकसभा में विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित हो गया। खास बात यह रही कि इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परंपरा के अनुसार अपना भाषण नहीं दिया। 2004 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब संसद में बिना प्रधानमंत्री के भाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया। यह प्रस्ताव ध्वनि मत से पास हुआ। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने धन्यवाद प्रस्ताव पर विपक्ष के संशोधनों को वोटिंग के लिए रखा, जो खारिज हो गए। इसके बाद अध्यक्ष ने 28 जनवरी को दिए गए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पढ़ा, जिसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इस बीच विपक्ष लगातार हंगामा करता रहा।

ज्ञान की कोई सीमा नहीं, अज्ञान की कोई उम्र नहीं:नड्डा के अबोध बालक बयान पर सुधांशु ने राहुल पर ऐसे कसा तंज
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने नेता सदन जेपी नड्डा के उस बयान पर अपनी बात रखी, जिसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का बिना नाम लिए सदन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को कहा कि अपनी पार्टी को अबोध बालक का बंधक मत बनाइए।अब सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने यदि अबोध शब्द का प्रयोग किया है तो यह बोध शब्द में अ प्रत्यय लगाकर बना है। अर्थात जिसे ज्ञान ही न हो। वैसे ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती है और अज्ञान की कोई उम्र नहीं होती है। यह बात नेता प्रतिपक्ष के आचरण से प्रमाणित होती है।सदन के पटल पर मीडिया रिपोर्ट प्रामाणिक तथ्य नहींभाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आगे कहा कि अबोध होने का प्रमाण ये है कि जिसे ये न पता हो कि फ्लोर ऑफ द हाउस में सब्सटेंशियल एविडेंस मीडिया रिपोर्ट्स नहीं होती, सदन के पटल पर मीडिया रिपोर्ट प्रामाणिक तथ्य नहीं हैं। जिसे ये न पता हो कि सेना अध्यक्ष-प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के बीच का कम्युनिकेशन राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और गोपनीय होता है, अतः यह ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट 1923 में आता है, वो पब्लिक डोमेन में नहीं हो सकता, उस पर सार्वजनिक चर्चा नहीं हो सकती। जो यह न जानता हो, वो अबोध है।सुधांशु ने नेहरू को भी घेरोसुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अगर किताब की बात है तो मैं कोट करता हूं और इसे सिद्ध कर सकता हूं। 19 नवंबर 1962 में जवाहरलाल नेहरू ने अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी को लिखा डिक्लासिफाइड बाय जेके लाइब्रेरी इन 2010 कि हमें बी2 बॉम्बर चाहिए, स्क्वाड्रन चाहिए उसके लिए पायलट, जमीन पर तकनीक स्टाफ और रडार पर लोग भी आपके (यानी अमेरिकी) रहेंगे, यानी एक प्रकार से भारत की वायुसेना की कमान अमेरिकी ले लें। उस समय अमेरिका में भारत के राजदूत बीके नेहरू, जो जवाहरलाल नेहरू जी के भतीजे भी थे। उन्होंने अपनी किताब नाइस गाइज फिनिश सेकंड में लिखा कि मैं जब वो पत्र अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार को देने जा रहा था तो उन्हें इतनी शर्म महसूस हो रही थी कि वो अपने को रोने से नहीं रोक पाए।शर्मनाक सरेंडर, भतीजे की जुबानीउन्होंने लिखा कि चाचाजी के शर्मनाक सरेंडर की कहानी खुद उनके सगे भतीजे की जुबानी। राज्यसभा में गुरुवार को जेपी नड्डा ने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को संबोधित करते हुए सदन में कहा कि अपनी पार्टी को अबोध बालक का बंधक मत बनाइए। इससे मल्लिकार्जुन खड़गे भड़क गए और उन्होंने सदन में जेपी नड्डा की बात का खंडन किया।

संसद में संग्रामः PM के भाषण के बिना LS में पास हुआ धन्यवाद प्रस्ताव:विपक्ष का हंगामा बना वजह, राज्यसभा में नड्डा ने खड़गे पर कसा तंज
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का आज 7वां दिन है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आज धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब पीएम मोदी को देना था, लेकिन पीएम की भाषण के बिना ही हंगामे के बीच धन्यवाद प्रस्ताव लोकसभा से पारित हो गया है। 2004 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के भाषण के बिना पास हुआ है। इससे पहले 10 जून 2004 को विपक्ष ने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को धन्यवाद प्रस्ताव पर नहीं बोलने दिया गया था।बता दें कि पीएम मोदी 4 फरवरी को चर्चा का जवाब देने वाले थे। इसके लिए शाम 5 बजे का समय भी तय था, लेकिन हंगामे की वजह से ऐसा नहीं हो सका था। इसके बाद संभावनाएं जताई जा रही थीं कि पीएम आज इस चर्चा का जवाब दे सकते हैं। अब इन सभी कयासों पर विराम लग गया है। पीएम की स्पीच के बिना ही हंगामे के बीच धन्यवाद प्रस्ताव लोकसभा से पारित हो गया है। स्पीकर ओम बिरला ने हंगामे के बीच ही धन्यवाद प्रस्ताव को वोटिंग के लिए लिया और ध्वनिमत से सदन ने इसे पारित कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री आज शाम 5 बजे राज्यसभा में भाषण दे सकते हैं।दोनों सदनों में हुआ जमकर हंगामाबता दें कि गुरुवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में जमकर हंगामा हुआ। लोकसभा शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की। इस पर स्पीकर ने पहली बार 65 सेकंड के भीतर और दूसरी बार 5 मिनट में कार्यवाही स्थगित कर दी। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। वहीं राज्यसभा में राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने से रोकने के मुद्दे पर राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच तीखी तकरार हुई। नड्डा-खड़गे के बीच हुई तीखी बहसमल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राहुल को पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब नहीं बोलने दिया गया। मैं उस किताब पर यहां बात करना चाहता हूं। इस पर नड्डा ने उन्हें बीच में रोकते हुए कहा कि दूसरे सदन की बात यहां नहीं कर सकते। आप कांग्रेस को अबोध बालक का बंधक न बनने दें। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी को बोलने का पूरा मौका दिया गया। उनको कई बार मौका दिया गया। सदन नियमों से चलेगा। वह नियम ही नहीं मानते। लगातार हंगामे के बाद विपक्षी सांसद राज्यसभा से वॉकआउट कर गए।

राहुल ने नरवणे की किताब दिखाकर भाजपा को दिया पलटवार का मौका:निशिकांत दुबे ने 40 किताबों की लिस्ट शेयर कर उजागर किया कांग्रेस का काला इतिहास
नई दिल्ली। पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब को लेकर संसद में चल रहे विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार पर पलटवार किया है। उन्होंने 40 किताबों की एक लिस्ट शेयर की, जिनके बारे में उनका दावा है कि वे भारत का असली इतिहास बताती हैं और पार्टी के पिछले शासन से जुड़े कथित विवादों को उजागर करती हैं। निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 40 किताबों की एक लिस्ट जारी की। उन्होंने कहा कि इन किताबों में भारत के ऐतिहासिक वृत्तांत, 1975 और 1977 के बीच आपातकाल की अवधि, वंशवादी राजनीति की आलोचना और अन्य विवरण शामिल हैं। किताबों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि वे कांग्रेस शासन के विवादास्पद पहलुओं को उजागर करती हैं।लिस्ट में किताब का शीर्षक और सरांश भी शामिलभाजपा सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 40 अलग-अलग पोस्ट किए, जिनमें से हर एक में उनकी लिस्ट की एक किताब का शीर्षक, लेखक और सारांश शामिल था। निशिकांत दुबे ने तर्क दिया कि अप्रमाणित सामग्री पर चर्चा करने के बजाय संसद को उन किताबों पर विचार करना चाहिए, जो पहले ही प्रकाशित हो चुकी हैं और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। निशिकांत दुबे के अनुसार, ये किताबें नेहरू-गांधी परिवार और कांग्रेस सरकारों के असली इतिहास पर प्रकाश डालती हैं।राहुल ने लोकसभा में उठाया था भारत-चीन गतिरोध का मुद्दा उठायह घटनाक्रम तब हुआ जब इस हफ्ते की शुरुआत में संसद में तीखी बहस हुई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 2020 के भारत-चीन गतिरोध का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी ने एक मैगजीन आर्टिकल का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि पूर्व सेना प्रमुख की एक अप्रकाशित किताब का जिक्र था। उन्होंने आगे दावा किया कि किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बारे में भी जिक्र है। इन दावों पर सत्ता पक्ष ने जोरदार विरोध किया, जिसमें सदस्यों ने मांग की कि राहुल गांधी संसदीय नियमों का पालन करें और सदन के अंदर केवल श्प्रामाणिक स्रोतश् ही पेश करें।

भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित:भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर शिवराज का दावाः कांग्रेस को बताया झूठ की दुकान
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सियासी घमासान जारी है। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि इस समझौते से देश के किसानों का नुकसान होगा। हालांकि विपक्ष के आरोपों औ किसानों को समझाने के लिए भाजपा नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया है। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता कूटनीति, विकास और सम्मान का एक अनोखा उदाहरण है। यही नहीं भारत के हितों की रक्षा करते हुए किसानों पर पूरा ध्यान दिया गया है। भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते के लिए शिवराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद भी दिया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा, संसद में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने समझौते को लेकर चीजें स्पष्ट कर दी हैं। ये ऐसा व्यापार समझौता है, जो कूटनीति, विकास और सम्मान का अनुपम उदाहरण है। मैं कृषि मंत्री के नाते पूरी जिम्मेदारी से कहता हूं कि भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस समझौते में देश के किसानों का पूरा ध्यान रखा गया है, खासकर यहां के अनाज, फल और मिलेट्स। इनके लिए कोई बाजार नहीं खोला गया है। हमारे किसान पूरी तरह सुरक्षित हैं।टैरिफ घटने से किसानों को होगा फायदा उन्होंने कहा कि टैरिफ घटने से किसानों को फायदा होगा। पहले साल 63 हजार करोड़ रुपए का चावल निर्यात किया गया। यह निर्यात बढ़ेगा। चावल व टेक्सटाइल का निर्यात और बढ़ेगा। शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि टेक्सटाइल सेक्टर निर्यात क्षेत्र में बहुत उल्लेखनीय भूमिका निभा रहा है। इसलिए टेक्सटाइल का निर्यात बढ़ने से कपास के किसानों को भी फायदा होगा। उन्होंने दोहराया कि यह व्यापार समझौता भारत और यहां के किसानों के हित में है। उनके हित पूरी तरह सुरक्षित हैं।झूठ की दुकान है कांग्रेसविपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस एक झूठ की दुकान है। वह अफवाहों के जरिए अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। मैदान में कांग्रेस कभी जीती नहीं है। लगातार हार की निराशा और हताशा कांग्रेस की कुंठा के रूप में प्रकट हो रही है। उनके खेत की मेड़ दिखाई नहीं देती है, बल्कि सिर्फ सत्ता की सीढ़ी दिखाई देती है।कांग्रेस के लोग कर रहे अमर्यादित व्यवहारशिवराज सिंह चौहान ने कहा, कांग्रेस के लोग अमर्यादित व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक मर्यादाओं की धज्जियां उड़ाई हैं। संसद को विपक्ष ने सड़क का चैराहा बना दिया है। उन्होंने कहा कि मुझे तकलीफ है कि क्या संसद के अंदर गुंडों की तरह व्यवहार किया जाएगा। प्रधानमंत्री को संसद में बोलने से रोका जा रहा है। वाणिज्य मंत्री को सदन में बोलने नहीं दिया जाता है।

कोई गली का गुंडा भी ऐसा नहीं करेगा:राहुल के गद्दार कहने पर बिट्टू ने लगाए गंभीर आरोप, कहा- वह मुझ पर हमला करने वाले थे
नई दिल्ली। केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने संसद परिसर में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की तरफ से गद्दार कहे जाने पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने उनके ऊपर शारीरिक रूप से हमला करने वाले थे। उन्होंने आगे कहा कि आज तो कोई गली का गुंडा भी ऐसा नहीं करेगा जैसा राहुल गांधी ने किया। मीडिया से बात करते हुए रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा राहुल ने मेरे से हाथ मिलाने की कोशिश की, लेकिन जब मैंने हाथ नहीं मिलाया, तो वह मुझ पर हमला करने ही वाले थे। केसी वेणुगोपाल और कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने राहुल गांधी को पकड़ा। अगर वे उन्हें नहीं पकड़ते तो पता नहीं क्या होता। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अगर राहुल गांधी हमला करने आते तो मेरे हाथ भी बंधे हुए नहीं थे।मुझे सामने देखकर राहुल को होता है दर्दकेंद्रीय मंत्री ने बताया कि बहस के बाद जब वे अंदर चले गए। लेकिन सवाल ये है कि वे कैसे गलत शब्द बोल सकते हैं और कहते हैं कि दोबारा मेरे पास ही आओगे। रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, राहुल गांधी गलतफहमी में हैं। भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे सम्मान दिया है और कांग्रेस नेताओं के सामने बैठाया। उन्हें (राहुल गांधी) को इस बात का दर्द है। मुझे सामने देखकर उन्हें रोज दर्द होता है। वह दर्द आज राहुल गांधी की जुबान और शारीरिक तौर पर साफ दिखाई दिया।कांग्रेस पर सिखों की हत्याएं कराने के लगाए आरोप इसी बीच, केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर सिखों की हत्याएं कराने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा, ये वे लोग हैं, जिनके समर्थकों ने हजारों सिखों को उनके गले में टायर डालकर और आग लगाकर मारा। उसके बाद गुरुद्वारों को तोड़ा गया। दरबार साहिब में गुरु ग्रंथ साहिब के अंगों में गोली लगी। इसलिए ये हमेशा सिखों के दुश्मन रहे हैं।अगर गांधी परिवार होता तो हमारे दादा नहीं बनते सीएमरवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, उनकी पार्टी (कांग्रेस) में हमेशा यह दर्द था कि मेरे पिता शहीद हुए थे और उनके दादा भी शहीद हुए थे। मैं जहां भी जाता था और तारीफ में नारे लगाता था, तो इससे उन्हें तकलीफ होती थी। कांग्रेस पार्टी ने पंजाब में हमेशा सिखों को मरवाया है। जब नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री बने और गांधी राज खत्म हुआ, उस समय मेरे दादा (सरदार बेअंत सिंह) मुख्यमंत्री बने। अगर ये लोग (गांधी परिवार) होते, तो वे सीएम नहीं बन पाते। वे पंजाब में अमन-शांति लेकर आए। सिखों-हिंदुओं को मरवाने की लड़ाई बंद हो गई थी। मेरे प्रति इसका दुख भी कांग्रेस पार्टी के मन में रहता है।

केन्द्रीय मंत्री को गद्दार कहकर घिरे राहुल:दिल्ली के मंत्री ने गांधी परिवार पर किया करारा प्रहार, कहा- सिख सरदार है, गद्दार नहीं
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के छठवें दिन राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू बीच जुबानी जंग भी देखने को मिली। राहुल ने जहां केन्द्रीय मंत्री को गद्दार दोस्त बताया तो वहीं बिट्टू ने राहुल को देशद्रोही करार दे दिया है। राहुल द्वारा केन्द्रीय मंत्री को गद्दार दोस्त कहे जाने पर सियासी पारा हाई हो गया है। दिल्ली के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस की मानसिकता में अब भी बदलाव नहीं हुआ है और आज हुई घटना उसका जीता जागता प्रमाण है। मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, राहुल गांधी ने आज संसद में सिख मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के खिलाफ जिस तरह की शब्दावली का इस्तेमाल किया, उन्हें गद्दार कहा, इसकी मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। यह बयान बड़ा शर्मसार करने वाला है।आज भी नहीं कांग्रेस की मानसिकता उन्होंने कहा कि सिख सरदार है, वह कभी गद्दार नहीं हो सकता। अगर कोई गद्दार है, तो वो गांधी परिवार है, जिन्होंने श्री दरबार साहब के ऊपर तोप-टैंकों से हमला किया, श्री अकाल तख्त साहिब को गिराया और बेकसूर सिखों के गले में टायर डालकर जिंदा जलाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मानसिकता आज भी नहीं बदली है।सिखों के प्रति नकारात्मक भाव को नहीं किया जा सकता बर्दाश्तसिरसा ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं के इस तरह के अपशब्द और सिखों के प्रति नकारात्मक भाव को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि यह न केवल सिखों की तौहीन है बल्कि कांग्रेस की मानसिकता में आज भी वही जहर मौजूद है, जो 1980 के दशक में था। उन्होंने लोकसभा के स्पीकर से तुरंत कार्यवाही करने की मांग की और कहा कि इस तरह की टिप्पणियों और भावनाओं को किसी भी तरह से बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिखों के प्रति यह अपमान और द्वेष कांग्रेस की मानसिकता का हिस्सा है और इसे रोकना जरूरी है। नहीं नकारा जा सकता कांग्रेस नेताओं के पापों कोसिरसा ने साफ कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने जो पाप किए हैं, उन्हें नकारा नहीं जा सकता और उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाया जाना चाहिए। उन्होंने अपील की कि लोकसभा स्पीकर को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि सिखों के प्रति इस तरह की अपमानजनक और नकारात्मक मानसिकता को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

पश्चिम बंगाल एसआईआर पर सुप्रीम सुनवाई:दीदी ने रखा अपना पक्ष, ईसी पर भी किया प्रहार, अब 9 को होगी सुनवाई
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर चल रहा विवाद सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है। यही नहीं बुधवार को इस विवाद पर सुनवाई भी हुई। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने की। इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वकीलों के बीच मौजूद थी। उन्होंने अदालत में अपनी बात रखने की कोशिश भी की। हालांकि बेंच ने इसकी अनुमति नहीं दी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी सोमवार को होगी. मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें पश्चिम बंगाल के अपने दो साथी न्यायाधीशों से जानकारी मिली, जिन्होंने पास प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया समझाई और इसी समझ के आधार पर इस मुद्दे को शामिल किया गया। मामले में सीएम ममता बनर्जी का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने बताया कि न्यायालय ने पहले तार्किक विसंगतियों की सूची प्रदर्शित करने का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि न्यायालय को सूचित किया गया था कि सूची संचार का एकमात्र माध्यम नहीं है और संबंधित व्यक्तियों को व्यक्तिगत नोटिस भी जारी किए जा रहे हैं।32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं- बंगाल सरकारअधिवक्ता श्याम दीवान ने न्यायालय से याचिकाकर्ता के संक्षिप्त नोट पर विचार करने का आग्रह किया और बताया कि इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए केवल चार दिन शेष हैं। उन्होंने कहा कि 32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं हैं, 1.36 करोड़ नाम तार्किक विसंगति सूची में हैं, और 63 लाख मामलों की सुनवाई अभी लंबित है। उन्होंने यह भी बताया कि 8,300 सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया है, जो संविधान के तहत परिकल्पित श्रेणी नहीं है। दीवान ने आगे कहा कि निवास प्रमाण पत्र, आधार और ओबीसी प्रमाण पत्र सहित कई स्वीकृत दस्तावेजों को अस्वीकार किया जा रहा है, जिससे लोगों को चार से पांच घंटे तक कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।चुनाव आयोग पर ममता के आरोपवहीं ममता बनर्जी ने कहा कि वह न्याय के लिए अदालत आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने चुनाव आयोग को तमाम फैक्ट्स बताए थे, लेकिन उन्हें नहीं सुना गया। इस पर सीजेआई ने साफ किया कि आपकी नई याचिका में कुछ नए मुद्दे जरूर हैं, लेकिन जो बातें आप कह रही हैं, वे आपके वकील पहले ही अदालत के सामने रख चुके हैं.वोटर्स के नाम हटाए जा रहे हैंः ममता बनर्जीसुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने रवींद्रनाथ टैगोर की स्पेलिंग में बदलावों का जिक्र करते हुए लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और राज्य में बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।सिर्फ नाम हटाने के लिए हो रहा एसआईआर का इस्तेमालः ममतामुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह ठोस उदाहरण दे रही हैं और प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित तस्वीरें भी दिखा सकती हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया का उपयोग केवल नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उदाहरण देते हुए, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि जब कोई बेटी शादी के बाद अपने ससुराल जाती है, तो सवाल उठते हैं कि वह अपने पति का उपनाम क्यों इस्तेमाल कर रही है। उनके अनुसार, ऐसी कई महिलाओं के नाम एकतरफा तरीके से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि फ्लैट खरीदने या निवास स्थान बदलने वाले गरीब लोगों के नाम भी हटाए जा रहे हैं। सीएम ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इन परिस्थितियों के बावजूद, अधिकारी ऐसे मामलों को श्गलत मानचित्रणश् बताकर अदालत के पूर्व निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं।ममता ने चुनाव आयोग को व्हाट्सएप आयोग कहासुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को श्व्हाट्सएप आयोगश् कहा और कहा कि चुनाव आयोग व्हाट्सएप के माध्यम से अनौपचारिक आदेश जारी कर रहा था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस दौरान कहा कि चार राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, 24 साल बाद, तीन महीने में यह सब करने की क्या जल्दी थी? जब फसल कटाई का मौसम चल रहा है...जब लोग यात्रा कर रहे हैं...100 से अधिक लोग मारे गए! बीएलओ की मौत हो गई, कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं। एसआईआर असम क्यों नहीं किया जा रहा है? मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगे कहा कि 58 लाख नाम काट दिए गए, उनके पास अपील करने का विकल्प नहीं था। केवल बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है - पश्चिम बंगाल के लोगों को कुचलने के लिए। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि शायद अधिकारियों की उपलब्धता के बाद सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की आवश्यकता नहीं होगी। इस पर चुनाव आयोग से मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अपने अधिकारियों को भी बताएं कि वे संवेदनशील रहें और नोटिस जारी न करें...बंगाल एसआईआर पर 9 फरवरी को सुनवाई, सीएम ने जताया आभारमुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एक व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकता है और निर्देश दिया कि सोमवार तक राज्य को ग्रुप बी के उन अधिकारियों की सूची प्रस्तुत करनी चाहिए जिन्हें कार्यमुक्त किया जा सकता है और उपलब्ध कराया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने दोनों याचिकाओं पर नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि एक अन्य याचिका भी है जिसमें भारत निर्वाचन आयोग पहले ही हलफनामा दाखिल कर चुका है और उसमें उठाए गए मुद्दे वर्तमान मामले से संबंधित होंगे। मुख्य न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि उक्त मामले पर भी सोमवार को सुनवाई की जाए और कहा कि न्यायालय उस दिन इससे संबंधित सभी मुद्दों पर सुनवाई करेगा। सीएम ममता बनर्जी ने न्यायालय से जनता के अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया और पीठ के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ को बहस का अवसर देने के लिए शुभकामनाएं दीं और सर्वोच्च न्यायालय से लोकतंत्र को बचाने का आग्रह किया।

भारत-यूएस ट्रेड डील पर सियासी संग्राम:विपक्ष के आरोपों पर उद्योग मंत्री का दावा- व्यापार समझौते में किसानों के हितों को रखा गया ख्याल
नई दिल्ली। अमेरिका के साथ ट्रेड डील में भारत अपने संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा संसद में दी गई। केंद्रीय मंत्री ने संसद को बताया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी 2025 में अमेरिका यात्रा के बाद, भारत और अमेरिका एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को संपन्न करने के उद्देश्य से नियमित रूप से चर्चा करते रहे हैं।इस दौरान दोनों पक्षों के अपने-अपने संवेदनशील पक्ष रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, बातचीत के दौरान, भारतीय पक्ष अपने संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत-अमेरिका करीब एक वर्ष तक बातचीत करने के बाद द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में सफल रहे हैं। 2 फरवरी, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर द्विपक्षीय और कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत की है। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका को किए जाने वाले भारतीय निर्यात पर टैरिफ की दर को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया।उन्होंने आगे कहा कि यह अमेरिका द्वारा कई प्रतिस्पर्धी देशों पर लगाए गए टैरिफ से कम है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में काफी वृद्धि होगी। गोयल ने संसद को बताया कि इस समझौते से एमएसएमई, उद्यमियों, कुशल श्रमिकों और उद्योगों के लिए नए अवसर खुलेंगे। साथ ही, एडवांस टेक्नोलॉजी तक पहुंच सुनिश्चित होगी। यह समझौता दुनिया के लिए भारत में बनाओ, दुनिया के लिए भारत में डिजाइन करो और दुनिया के लिए भारत में इनोवेट करो के दृष्टिकोण को साकार करेगी।उन्होंने आगे बताया कि यह ऐतिहासिक समझौता भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और विकसित भारत 2047 की दिशा में हमारी यात्रा को आगे बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

राहुल ने मीडिया के सामने लहराई नरवणे की अप्रकाशित बुक:दावा- चीनी टैंकों पर हमला करना चाहती हमारी सेना, पर....
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की किताब को मीडिया के सामने पेश करते हुए दावा किया कि हमारी सेना चीन के टैंकों पर हमला करना चाहती थी, क्योंकि वे भारत की सीमा में घुस आए थे। राहुल गांधी ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा, वे कहते हैं कि यह किताब मौजूद नहीं है, लेकिन यह रही वह किताब। भारत के हर युवा को यह देखना चाहिए कि यह किताब मौजूद है। यह मिस्टर नरवणे की किताब है। यह जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब है, लेकिन मुझे कहा गया है कि मैं इसे कोट नहीं कर सकता हूं। किताब के हवाले से कांग्रेस सांसद ने कहा, इसमें एक लाइन प्रमुख है, जिसमें सेना प्रमुख से कहा गया कि जो उचित समझो, वो करो।नरवणे को किसी ने नहीं दिया जवाबराहुल गांधी ने कहा, जब पूर्व सेना प्रमुख नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन कर बताया कि चीनी टैंक कैलाश रिज (सीमा क्षेत्र) तक पहुंच गए हैं, तो हमें क्या करना है? लेकिन तब राजनाथ सिंह का कोई जवाब नहीं आया। नरवणे ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से पूछा, एनएसए से पूछा और फिर से राजनाथ सिंह से पूछा। किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। नरवणे ने उन्हें फिर फोन किया, जिस पर रक्षा मंत्री ने कहा- मैं टॉप से पूछता हूं। टॉप से ऑर्डर आया कि जब चीन की सेना हमारे बॉर्डर के अंदर आए तो बिना हमसे पूछे फायर न करें।कांग्रेस सांसद ने कहा, हमारी सेना चीन के टैंकों पर हमला करना चाहती थी, क्योंकि वे भारत की सीमा में घुस आए थे। लेकिन इस मुश्किल समय में टॉप ने मैसेज दिया कि जो उचित समझो, वो करो। मतलब टॉप ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की और सेना से कहा कि आपको जो करना है करो, मेरे बस की नहीं है। राहुल गांधी ने आगे कहा, पूर्व सेना प्रमुख नरवणे ने अपनी किताब में साफ लिखा है, मुझे सच में बहुत अकेला महसूस हुआ। पूरे सिस्टम ने मुझे छोड़ दिया था। कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि अगर लोकसभा में प्रधानमंत्री आते हैं तो वह इस किताब को स्वयं उन्हें सौंपेंगे।

देशद्रोहियों से हमारा कोई लेना-देना नहीं:राहुल के गद्दार दोस्त कहने पर मोदी के मंत्री ने दिया करारा जवाब
नई दिल्ली। संसद का बजट सत्र जारी है। सत्र के छठवें दिन यानि बुधवार को संसद के गेट पर एक अलग नजारा देखने को मिला। दरअसल गेट के बाहर राहुल गांधी के साथ कांग्रेस सांसद हाथों में पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का आमना-सामना हुआ इतना ही नहीं दोनों में जुबानी जंग भी देखने को मिली। राहुल ने जहां केन्द्रीय मंत्री को गद्दार दोस्त बताया तो वहीं बिट्टू ने राहुल को देशद्रोही करोर दे दिया है। जिसका सोशल मीडिया में वीडियो भी वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि राहुल गांधी बिट्टू की तरफ हैंड शेक करने के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं लेकिन बिट्टू हाथ आगे नहीं बढ़ाते हैं। गद्दार दोस्त वाले कमेंट पर बिट्टू ने भी तुरंत पलटवार किया और कहा कि उनका देश के दुश्मनों से कोई लेना-देना नहीं है. हुआ यूं कि जब केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू संसद के मकर द्वार पर विरोध कर रहे कांग्रेस सांसदों के पास से गुजरे, तो लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उनके देखकर कहा, देखो, एक गद्दार यहीं से गुजर रहा है। इसका चेहरा देखो। इसके बाद बिट्टू के पास आने पर राहुल गांधी ने उनसे हाथ मिलाने की पेशकश करते हुए कहा, नमस्ते भाई, मेरे गद्दार दोस्त। चिंता मत करो, तुम वापस (कांग्रेस में) आ जाओगे। जिसके बाद बिट्टू ने उनसे हाथ मिलाने से मना कर दिया और पलटवलार करते हुए उनको देश का दुश्मन कह डाला।राहुल गांधी पर दिया था विवादित बयानयह पहली बार नहीं जब बिट्टू और राहुल गांधी के बीच इस तरह की बयानबाजी चली हो। सितंबर 2024 में बिट्टू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर तीखा और विवादास्पद बयान दिया था। बिट्टू ने राहुल गांधी पर सिख समुदाय को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि सिख किसी भी राजनीतिक दल से बंधे नहीं हैं। उन्होंने अमेरिका में सिखों को लेकर दिए गए राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, राहुल गांधी ने सिखों को बांटने की कोशिश की है, सिख किसी पार्टी से जुड़ा नहीं है और यह चिंगारी लगाने की कोशिश है, राहुल गांधी देश के नंबर वन टेरेरिस्ट हैं। कौन हैं बिट्टूतीन बार कांग्रेस सांसद रह चुके रवनीत सिंह बिट्टू पहली बार 2009 में आनंदपुर साहिब से लोकसभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद 2014 और 2019 में लुधियाना से जीते थे। खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथी आवाजों के मुखर आलोचक माने जाने वाले बिट्टू 2024 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो गए। इस चुनाव में वह लुधियाना से पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वारिंग से लगभग 20 हजार वोटों से हार गए। चुनाव हारने के बावजूद केंद्र सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया रेल तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी।बिट्टू महज 11 साल के थे जब उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद 20 साल की उम्र में उन्होंने अपने दादा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह को भी खो दिया, जिनकी 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। वर्ष 2007 में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद बिट्टू ने राजनीति में कदम रखा।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर संसद में घमासान:कांग्रेस सांसद ने लोकसभा में पेश किया स्थगन प्रस्ताव, चर्चा कराने की अपील
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर संसद में घमासान जारी है। यही नहीं, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बुधवार को लोकसभा में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चर्चा की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसके लिए उन्होंने लोकसभा के महासचिव स्नेहलता श्रीवास्तव को एक पत्र लिखा है।उन्होंने सदन के कामकाज को स्थगित करने के प्रस्ताव पर चर्चा करने की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि यह प्रस्ताव एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गंभीर सार्वजनिक मामले से संबंधित है, जिसे संसद में शीघ्र चर्चा की आवश्यकता है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने अपने पत्र में लिखा, मैं प्रस्ताव करता हूं कि यह सदन प्रश्नकाल, शून्यकाल और दिन के अन्य सभी सूचीबद्ध कार्यवाहियों को स्थगित कर दे ताकि एक अत्यंत महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दे पर विचार किया जा सके, अर्थात संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति की ओर से जारी किया गया कथित बयान, जिसमें दावा किया गया है कि भारत के प्रधानमंत्री सहमत हो गए हैं।रूस से तेल खरीदी पर यह बोले कांग्रेस सांसदउन्होंने कहा कि भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका और वेनेजुएला से तेल आयात में काफी वृद्धि करने के लिए, भारतीय टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को शून्य करने के लिए, और 500 बिलियन डॉलर से अधिक के अमेरिकी सामानों की खरीद के लिए प्रतिबद्ध होने पर सहमति व्यक्त की है।तिवारी ने चर्चा की अनुमति देने किया आग्रहउन्होंने कहा, रूसी कच्चे तेल ने ईंधन की महंगाई को कम करने में मदद की है, और किसी भी अचानक बदलाव से नागरिकों और उद्योगों पर बोझ पड़ सकता है। बड़े व्यापारिक समझौते घरेलू विनिर्माण, किसानों और लघु एवं मध्यम उद्यमों को भी प्रभावित कर सकते हैं। तिवारी ने केंद्र से तत्काल बयान जारी करने और पूरी चर्चा की अनुमति देने का आग्रह किया ताकि व्यापार, ऊर्जा और विदेश नीति के मामलों में पारदर्शिता के बिना लिए गए निर्णयों को देश के सामने प्रस्तुत न किया जाए।

लोकतंत्र के मंदिर में नहीं बोलने दिया जा रहा राहुल को:भाई की तरफदारी कर बोलीं प्रियंका- असलियत में डर गई है सरकार
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संसद में बोलने से रोके जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है, देश के हर नागरिक की इस पर आस्था है। इसलिए हमें इसके अंदर जरूरी मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए। लोकसभा में भारत-चीन गतिरोध पर राहुल गांधी की ओर से पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की किताब का हवाला दिए जाने पर मचे हंगामे को लेकर प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, राहुल गांधी एक पब्लिक सोर्स से कोट कर रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है। वहीं, सत्ता पक्ष के लोग खुद कभी मैग्जीन तो कभी किताब से संसद में कोट करते रहे हैं।डर गई है सरकारउन्होंने कहा, संसद में हमेशा ही चीन, पाकिस्तान और विदेश नीति से जुड़े जरूरी मामलों पर चर्चा होती रही है। यही हमारी परंपरा रही है। विपक्ष हो या सरकार, सभी ने खुलकर अपना पक्ष रखा है। असलियत में सरकार डर गई है कि उनकी सच्चाई देश के सामने आ जाएगी, इसलिए वे किताब को पब्लिश भी नहीं होने दे रहे हैं।अगर कोई पक्ष रख रहा तो उसमें क्या दिक्कतप्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि यह सिर्फ विपक्ष के नेता को बोलने न देने का मामला नहीं है। यह लोकतंत्र और संसद के काम करने के तरीके का एक बुनियादी मुद्दा है। अगर कोई अपना पक्ष रख रहा है, तो उसमें क्या दिक्कत है? वे डर रहे हैं कि क्या बातें सामने आने वाली हैं। किताब में ऐसी चीजें लिखी हैं जो दिखाती हैं कि संकट के समय में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और हमारे शीर्ष नेतृत्व की क्या प्रतिक्रिया रही। यह उनकी सरकार के चरित्र को दिखाता है कि जब देश पर हमला हो रहा है और चीनी सैनिक हमारी सीमा पर आ रहे हैं, तो वे कैसे प्रतिक्रिया दे रहे हैं। संसद के 8 विपक्षी सदस्यों के सस्पेंशन पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि हर सत्र में विपक्ष के सांसदों को सस्पेंड किया जा रहा है, इसमें कोई नई बात नहीं रह गई है।उज्ज्वल रमन ने सांसदों के निलंबन पर जताया दुखउज्ज्वल रमन सिंह ने सांसदों के निलंबन को दुखद बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा इस तरह की नजीर पेश करती रही है। सरकार की जिम्मेदारी है कि संसद चले। उन्होंने कहा कि संसद ऐसी जगह है, जहां विचारों का खुलकर आदान-प्रदान होता है, लेकिन भाजपा सरकार विपक्ष की आवाज को दबाना चाहती है। सरकार खुद अपनी जिम्मेदारी से भागती है। सत्ता में बैठे लोग सदन के अंदर संवाद नहीं करना चाहते हैं। नेता प्रतिपक्ष को लोकसभा में बोलने नहीं दिया जाता है। उन्होंने कहा, बात पर्चियां उछालने की नहीं है, बात यह है कि आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। सरकार देश का पैसा बर्बाद करा रही है। वह चाहती है कि देश में कोई चर्चा न की जाए।

चेक बाउंस का मामला:बालीवुड अभिनेता के खिलाफ हाईकोर्ट का सख्त रुख, कल तक जेल अधीक्षक सामने करना होगा आत्मसमर्पण
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने उन्हें 4 फरवरी तक संबंधित जेल अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अभिनेता के व्यवहार को निंदनीय करार देते हुए कहा कि बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद भुगतान न करना न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है। यह मामला दिल्ली की कंपनी मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जिसने राजपाल यादव की कंपनी को फिल्म निर्माण के लिए रकम दी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चेक बाउंस जैसे मामलों में भुगतान को लेकर अदालत को दिए गए आश्वासनों का उल्लंघन करना गंभीर विषय है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई के दौरान कहा कि राजपाल यादव को कई अवसर दिए गए, लेकिन हर बार उन्होंने कोर्ट का भरोसा तोड़ा।दरअसल, पूरा मामला साल 2010 का है, जब राजपाल यादव ने बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म श्अता-पता लापताश् बनाने के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। फिल्म आर्थिक रूप से सफल नहीं हो पाई। इसके बाद कर्ज की रकम लौटाने में लगातार देरी होती गई। शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप है कि रकम चुकाने के लिए दिए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद राजपाल यादव और उनसे जुड़ी कंपनी के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत केस दर्ज कराया गया। मामले की सुनवाई के दौरान कड़कड़डूमा कोर्ट ने राजपाल यादव को कई बार नोटिस भेजे, लेकिन वे लंबे समय तक अदालत में पेश नहीं हुए, जिसके बाद साल 2013 में उन्हें 10 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वे 3 से 6 दिसंबर 2013 तक चार दिन जेल में रहे। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने उनकी अपील पर सजा निलंबित कर दी थी।इसके बाद, निचली अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी। जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने यह कहते हुए सजा पर अस्थायी रोक लगा दी कि अभिनेता कोई आदतन अपराधी नहीं हैं और उनके मामले में सुधार और समाधान की गुंजाइश है। इसी आधार पर कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी समझौते की संभावनाएं तलाशने की सलाह दी और केस को मेडिएशन सेंटर भेज दिया।

लोकसभा में 'यार' शब्द पर हंगामा:राहुल ने संस्मरण का दिया हवाला, स्पीकर ने जताया ऐतराज
नई दिल्ली । अगस्त 2020 के लद्दाख विवाद को लेकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर सरकार और विपक्ष के बीच पहले से ही तीखी बहस चल रही थी। इसी बीच, लोकसभा में एक नया हंगामा तब शुरू हुआ जब विपक्ष की ओर से किसी सदस्य ने कथित तौर पर 'यार' शब्द का प्रयोग किया। हाउस चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे कृष्ण प्रसाद टेनेटी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और कांग्रेस सांसदों को फटकार लगाई। उन्होंने इसे असंसदीय और आपत्तिजनक बताया, हालांकि कांग्रेस सांसदों ने इसे गंभीरता से नहीं लेते हुए कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। एग्जीक्यूटिव चेयरमैन ने विपक्ष के नेताओं से सख्ती से कहा, "आप चेयर को यार नहीं कह सकते हैं।"इससे पहले, सुबह से सदन की कार्यवाही में रुकावट के बाद दोपहर 2 बजे जब लोकसभा फिर से शुरू हुई,तो सदन में काफी हंगामा और शोर-शराबा देखने को मिला। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पूर्व थल सेना प्रमुख मनोज नरवणे की एक किताब (जो अभी प्रकाशित नहीं हुई है) से जुड़ी कुछ बातों पर चर्चा करना चाहते थे। हालांकि, हाउस चेयरमैन ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी। कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि जानकारी का सोर्स साबित करने के बावजूद उन्हें हाउस में बोलने नहीं दिया जा रहा है। हालांकि, चेयर ने उनकी दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि रूल 239 के तहत, स्पीकर ने एक ऐसा फैसला दिया है जो हाउस के सदस्यों को बिना वेरिफाइड या अस्पष्ट तथ्यों का जिक्र करने या उनके बारे में बोलने से रोकता है।नेता प्रतिपक्ष ने अपना आरोप जारी रखते हुए कहा कि वह सिर्फ लद्दाख में उठाए गए मुद्दे और प्रधानमंत्री मोदी ने उस पर क्या प्रतिक्रिया दी, यह उठा रहे थे। उन्होंने इस मुद्दे पर बोलने की इजाजत न मिलने का विरोध करते हुए कहा, "हमारे प्रेसिडेंट का भाषण इस बारे में था कि भारत को किस रास्ते और दिशा में जाना चाहिए। ग्लोबल स्टेज पर, मुख्य मुद्दा यूनाइटेड स्टेट्स और चीन के बीच टकराव है। यह हमारे स्ट्रेटेजिक हितों के लिए ज़रूरी है। मुझे इसे उठाने से क्यों रोका जाना चाहिए?"राहुल गांधी अपनी बात पर अड़े रहे और चेयर ने बार-बार इस पर आपत्ति जताई, जिसके चलते सदन में जोरदार हंगामा और शोर-शराबा हुआ। विपक्ष के सदस्यों ने विपक्ष के नेता को बोलने और राष्ट्रीय महत्व के मामले उठाने के अधिकार से वंचित करने के चेयर के फैसले का विरोध करते हुए नारे लगाए।

भारत-यूएस ट्रेड डील पर राज्यसभा में बरपा हंगामाः:विपक्ष ने सदन का किया बाॅकआउट, नड्डा ने रवैए को बताया लोकतंत्र के लिए घातक
नई दिल्ली। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर मंगलवार को राज्यसभा में जबरदस्त हंगामा हुआ। विपक्ष ने कहा कि यह जो समझौता हुआ है, इसकी जानकारी वाशिंगटन से आ रही है। विपक्ष ने नारेबाजी के बाद सदन का बहिष्कार किया। वहीं, नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस व विपक्ष का यह व्यवहार एक तरह से गैर राष्ट्रवादी व्यवहार है। इन्हें देश से कुछ लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह एंटी नेशनल है। दरअसल, अमेरिका के साथ हुई डील का मुद्दा मंगलवार को राज्यसभा में उठाया गया। विपक्ष ने इस विषय को लेकर हंगामा किया। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने कहा कि यह जो समझौता हुआ है, उसके बारे में हमें वाशिंगटन से जानकारी मिल रही है। उन्होंने इस स्थिति पर प्रश्न उठाया और कहा कि यह क्या हो रहा है। विपक्ष का कहना था कि सरकार द्वारा इस बारे में जानकारी नहीं दी गई, जबकि अमेरिका ने इसको लेकर जानकारी सार्वजनिक की है।वहीं, राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने इसके जवाब में कहा, कल (सोमवार) देर रात अमेरिका के राष्ट्रपति ने एक पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने टैरिफ के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अवगत कराया। उन्होंने प्रधानमंत्री के बारे में, एक सच्चे दोस्त के बारे में भी पोस्ट में चर्चा की। इसके बाद प्रधानमंत्री ने जवाब देते हुए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने भारत व अमेरिका के ट्रेड के बारे में, जो भारत और अमेरिका के संबंध हैं, उसकी चर्चा की है।यह विपक्ष की हताशाराज्यसभा में बोलते हुए नड्डा ने कहा कि सरकार पूरी ट्रेड डील के बारे में राज्यसभा को जानकारी देगी। इस संबंध में संबंधित विभाग के मंत्री सदन को जानकारी देंगे। उन्होंने विपक्ष के हंगामे को लोकतंत्र के लिए काफी घातक बताया। जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष का यह व्यवहार गैर जिम्मेदाराना है। हम विपक्ष के प्रत्येक सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं। यह विपक्ष की हताशा है, जिस कारण वे इस प्रकार शोर-शराबा कर रहे हैं।विपक्ष का व्यवहार निंदनीयः नड्डाहालांकि, विपक्ष जेपी नड्डा के बयान से संतुष्ट नहीं हुआ और नारेबाजी-हंगामे के बीच सदन का बहिष्कार किया। वहीं, जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस और उनके सहयोगियों का व्यवहार बहुत ही निंदनीय है। इन्हें न देश के विकास में कोई रुचि है, न ही व्यापार के विकास को लेकर कोई रुचि है। ये केवल हर विषय पर राजनीति करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पहले यह कहते रहे कि ट्रंप का जवाब दीजिए, 50 प्रतिशत टैरिफ लग गया है। आज जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने सूमोटो स्टेटमेंट पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री की तारीफ की और कहा कि मैं उनका सच्चा दोस्त हूं। ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी उनकी तरह एक मजबूत नेता हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर रहे हैं।सरकार किसी भी बात पर चर्चा करने से नहीं हटती पीछेजेपी नड्डा ने कहा कि सरकार किसी भी बात पर चर्चा करने से पीछे नहीं हटती है। मैंने आज भी विपक्ष को कहा कि सरकार आज ही इस पूरे विषय पर सदन में जानकारी देगी। विपक्ष ने ‘जी राम जी’ पर चर्चा की, हमने उस पर चर्चा की और एसआईआर पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आप देश में एक वातावरण बनाने का प्रयास कर रहे हैं कि सरकार कुछ छुपा रही है, सरकार चर्चा नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है। विपक्ष का यह बहुत गैर जिम्मेदाराना व्यवहार है। विपक्ष का यह एक तरह से गैर राष्ट्रवादी व्यवहार है। इन्हें देश से कुछ लेना-देना नहीं है, यह एंटी नेशनल है।

उन पर भयंकर प्रेशर:अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर राहुल ने पीएम को घेरा, कहा- फूट सकता है इमेज का गुब्बारा
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लोकसभा में डोकलाम का मुद्दा उठाया, जिसके बाद कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया। इसके बाद, संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने किसान, अडानी और एपस्टीन फाइल्स का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कई आरोप गए। राहुल गांधी ने कहा, मोदी जी घबराए हुए हैं। जो ट्रेड डील चार महीने से रुकी थी, कुछ बदला नहीं। वो किसी न किसी कारण दबाव में है, जो मैं जानता हूं, नरेंद्र मोदी जानते हैं। मोदी जी ने कल शाम उस डील को साइन कर दिया। उन पर भयंकर प्रेशर है। कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, नरेंद्र मोदी जी का जो इमेज का गुब्बारा है, जो हजारों करोड़ रुपए लेकर बनाया गया है, वो फूट सकता है।मोदी जी डरे हुए हैं क्योंकि उनकी इमेज...इतिहास में पहली बार एलओपी को प्रेसिडेंशियल एड्रेस में नहीं बोलने दिया गया है। यूएस के साथ ट्रेड डील में हिंदुस्तान के किसानों की मेहनत, खून पसीने को मोदी जी ने बेच दिया है। वो इसलिए बेचा है कि उन्होंने समझौता किए हैं। राहुल गांधी ने आगे कहा, सिर्फ आपके नहीं बेचा है, देश को बेचा है। इसीलिए मुझे वहां नहीं बोलने दिया गया। मोदी जी डरे हुए हैं, क्योंकि जिन लोगों ने उनकी इमेज बनाई है अब वो उसे तोड़ने लगे हैं।अडानी पर जो केस है, असल में वो मोदी पर...राहुल ने नरेंद्र मोदी पर दबाव में होने का आरोप लगाते हुए कई मुद्दों का जिक्र किया. उन्होंने कहा, अडानी जी पर यूनाइटेड स्टेट में एक केस है, वो मोदी के फाइनेंशियल स्ट्रक्चर का टार्गेट कर रहा है। दूसरा एपस्टीन फाइल है। अडानी पर जो केस है, वो असल में मोदी जी पर केस है। नरेंद्र मोदी पर ये दो प्रेशर प्वाइंट्स है। राहुल गांधी ने कहा कि देश ये समझ रहा है कि प्रधानंमत्री ने समझौता किया है।

जीत की लय बनाए रखने जमीन पर करना होगा काम:एनडीए नेताओं को पीएम मोदी ने दी नसीहत, अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को बताया सब्र का फल
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बनी सहमति के बाद मंगलवार को एनडीए संसदीय दल की बैठक आयोजित हुई। पार्लियामेंट एनेक्सी बिल्डिंग में आयोजित हुई एनडीए सांसदों की बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अध्यक्षता की। जहां एक तरफ पीएम मोदी ने एनडीए सांसदों को चर्चा में हिस्सा लेने के लिए कहा। साथ ही अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर खुशी जाहिर करते हुए सब्र का फल बताया।वहीं पीएम मोदी ने एनडीए नेताओं को आने वाले चुनावों के बारे में गाइड किया और उन्हें गठबंधन की जीत की लय बनाए रखने के लिए जमीनी स्तर पर काम करते रहने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए गठबंधन अपनी जन.हितैषी नीतियों और कड़ी मेहनत से अलग.अलग चुनाव जीत रहा है। मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ-साथ एनडीए के तमाम मंत्री और सांसद मौजूद रहे।भाजपा ने नितिन नबीन का किया स्वागतमीटिंग के बाद मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने इस सेशन के दौरान अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का औपचारिक रूप से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ऐतिहासिक ट्रेड डील पर चर्चा हुई, जिसमें नौ ट्रेड डील शामिल हैं जिन्हें फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कहा जाता है। भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट एक हफ्ते से भी कम समय पहले साइन किया गया था। इसके अलावा, कल अमेरिका के साथ एक ट्रेड एग्रीमेंट पूरा हुआ, जिससे लोगों में उत्साह है। एनडीए संसदीय दल की बैठक में भी सभी लोग उत्साहित थे और उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री को बधाई दी।39 देशों के साथ ट्रेड डील पर यह बोले रिजिजूरिजिजू ने कहा कि 39 विकसित देशों के साथ ये ऐतिहासिक ट्रेड डील दिखाते हैं कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में, ये सभी विकसित देश भारत के साथ पार्टनरशिप में तालमेल बिठाना और काम करना चाहते हैं। इससे हमारे आम लोगों को बहुत फायदा होगा। ये सभी विकसित देश हैं, चाहे वे ईयू के सभी सदस्य देश हों या ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड या यूके।ष् इससे पहले दिन में जब प्रधानमंत्री मोदी मीटिंग के लिए पहुंचे, तो पत्रकारों के एक ग्रुप ने उन्हें भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बधाई दी। प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया और पत्रकारों को हाथ हिलाते हुए धन्यवाद कहा। इस बीच, संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सभी एनडीए सांसदों को शानदार मार्गदर्शन दिया है।हवा में नहीं जीते जाते चुनावरिजिजू ने कहा कि उन्होंने सभी एनडीए सहयोगियों को बताया कि एनडीए परिवार लगातार एक के बाद एक चुनाव जीत रहा है। चुनाव हवा में नहीं जीते जाते, जीतने के लिए, जमीन पर काम करना होता है और अच्छी नीतियों के साथ देश को आगे बढ़ाना होता है। इस दौरान रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा, उन पर सोमवार को सदन की कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप लगाया, जब उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब से जुड़े एक मैगजीन आर्टिकल का हवाला देते हुए लद्दाख गतिरोध का मुद्दा उठाया था।

इंडिया-यूएस ट्रेड डील फाइनल, झूमा भारतीय शेयर बाजार:सेंसेक्स बना राॅकेट, निफ्टी में भी आया जबरदस्त उछाल
मुंबई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात भारत से व्यापार समझौते का ऐलान कर दिया है। इतना ही नहीं उन्होंने भारत पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया। ट्रंप के इस ऐलान के बाद भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद से करीब 3,657 अंक उछलकर 85,323.20 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी अपने पिछले क्लोजिंग से 1,219.65 अंकों की बढ़त के साथ 26,308.05 पर ओपन हुआ। खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 9.31 बजे) 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 2254 अंकों यानी 2.76 प्रतिशत की तेजी के साथ 83,920.51 पर था, तो वहीं एनएसई निफ्टी 691.30 (2.76 प्रतिशत) अंकों की उछाल के साथ 83,920.51 पर था। इस दौरान निफ्टी के सभी इंडेक्स हरे निशान में ट्रेड करते हुए नजर आए।सेंसेक्स ने छुआ अपने हाई स्तर कोकारोबार के दौरान जहां सेंसेक्स ने 85,871.73 का हाई स्तर छुआ, वहीं निफ्टी ने 26,341.20 का स्तर छुआ। व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप दोनों में 4 प्रतिशत की शानदार तेजी देखने को मिली। वहीं विभिन्न सेक्टर्स में निफ्टी ऑटो, आईटी, मेटल, बैंक, पीएसयू बैंक और फार्मा में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल दर्ज की गई।सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 में दिखी तेजीइस दौरान सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 में तेजी देखी गई, जिनमें अदाणी पोर्ट्स में सबसे ज्यादा 6.89 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। इसके बाद बजाज फाइनेंस (4.90 प्रतिशत), इंडिगो (4.66 प्रतिशत), बजाज फिनसर्व (4.39 प्रतिशत), इटरनल (4.16 प्रतिशत), एल एंड टी (3.70 प्रतिशत) और सन फार्मा (3.63 प्रतिशत) टॉप गेनर्स में शामिल रहे। सिर्फ आईटीसी के शेयरों में गिरावट देखी गई।

आई-पैक रेड विवाद:ईडी की याचिका पर आज होगी सुप्रीम सुनवाई, दीदी पर लगा है गंभीर आरोप
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के ऑफिस और इसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित घर पर हाल ही में हुई तलाशी के दौरान दखल दिया था। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर पब्लिश कॉज लिस्ट के अनुसार, जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और विपुल एम पंचोली की बेंच मंगलवार को इस मामले की सुनवाई फिर से शुरू करेगी। अपनी याचिका में ईडी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ एक साथ रेड ऑपरेशन के दौरान कानूनी कर्तव्यों में बाधा डालने के आरोप में एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।पुलिस ने ईडी अधिकारियों के दर्ज एफआईआर पर लगा दी थी रोकपिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने तलाशी के सिलसिले में पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर रोक लगा दी थी, यह देखते हुए कि याचिकाएं एक केंद्रीय जांच में राज्य एजेंसियों द्वारा कथित हस्तक्षेप के गंभीर सवाल उठाती हैं। मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए, जस्टिस मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने उन्हें अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था और मामले को 3 फरवरी को आगे की सुनवाई के लिए लिस्ट किया था।डिजिटल स्टोरेज को सुरिक्षत रखने का निर्देशअपने अंतरिम आदेश में अदालत ने तलाशी वाले परिसरों के साथ-साथ आसपास के इलाकों की रिकॉर्डिंग वाले सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल स्टोरेज डिवाइस को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया था, यह देखते हुए कि, प्रथम दृष्टया, याचिकाओं में प्रवर्तन निदेशालय या अन्य केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जांच और राज्य एजेंसियों द्वारा इसमें हस्तक्षेप से संबंधित एक गंभीर मुद्दा उठाया गया है।


