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चावल उत्पादन में भारत का बजा डंका,:शिवराज का दावा- चीन को पीछे छोड़ दुनिया में बना नंबर-1, श्रेय दिया मोदी नेतृत्व को
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 साल के दौरान दौरान भारत के कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव और प्रगति देखने को मिली है। यही नहीं उन्होंने यह भी दावा किया खाद्यान्न उत्पादन, चावल में भारत दुनिया में नंबर-1 भी बना है। उन्होंने दलहन और तिलहन के क्षेत्र में भी सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया। शिवराज ने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब भारत को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशों से गेहूं मंगाना पड़ता था। उस दौर में अमेरिका से पीएल-480 योजना के तहत लाल गेहूं आयात कर देश की जनता को खिलाया जाता था। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और भारत खाद्यान्न उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर ही नहीं बल्कि दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।किसानों की मेहतन-सरकार की नीतियों के कारण देश भरे अन्न भंडारशिवराज ने कहा कि आज किसानों की मेहनत और सरकार की नीतियों के कारण देश के अन्न भंडार भर चुके हैं। खासकर चावल के उत्पादन में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने बताया कि लगभग 150 मिलियन टन चावल उत्पादन के साथ भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में पहला स्थान हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि अगर कुल खाद्यान्न उत्पादन की बात करें तो साल 2014 तक देश में लगभग 252 मिलियन टन उत्पादन होता था, लेकिन आज यह बढ़कर करीब 357 मिलियन टन तक पहुंच गया है। यह वृद्धि किसानों की मेहनत, बेहतर नीतियों और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल का परिणाम है।बागवानी क्षेत्र में हुई प्रगति का भी शिवराज ने किया जिक्रकेंद्रीय मंत्री ने बागवानी क्षेत्र में हुई प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फलों और सब्जियों के उत्पादन, क्षेत्रफल और उत्पादकताकृतीनों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पहले जहां बागवानी फसलों का उत्पादन लगभग 277 मिलियन टन था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 369 मिलियन टन हो गया है। इससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।दलहन-तिलहन क्षेत्र में सरकार के प्रयासों का किया उल्लेखउन्होंने दलहन और तिलहन के क्षेत्र में भी सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता दोनों है। हालांकि अभी भी कुछ मात्रा में आयात करना पड़ता है, लेकिन सरकार लगातार उत्पादन बढ़ाने के लिए काम कर रही है। इसी दिशा में तुअर, मसूर और उड़द जैसी दालों की किसानों के जितनी चाहें उतनी खरीद करने का फैसला किया गया है।किसानों को तकनीकी सहायता देने डिजिटल प्लेटफार्म विकसित कर रही सरकारशिवराज ने बताया कि किसानों को सही जानकारी और तकनीकी सहायता देने के लिए सरकार एक बड़ा डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि किसानों को खेती से जुड़ी सारी जरूरी जानकारी एक ही जगह पर उपलब्ध हो सके। इस प्लेटफॉर्म के पहले चरण को भी लॉन्च किया जा चुका है, जिसमें किसान अपनी भाषा में फोन कॉल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

टेरर फंडिंग केस में कश्मीरी अलगाववादी नेता को राहत:सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ शब्बीर शाह को दी जमानत, 6 साल से थे जेल में
नई दिल्ली। कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को टेरर फंडिंग मामले में 6 साल बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। बता दें कि शब्बीर शाह 2019 से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की गिरफ्त में थे, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी है। इस दौरान शीर्ष अदालत ने लंबे समय से चल रही न्यायिक हिरासत और ट्रायल में सामने आई कुछ अनियमितताओं पर भी गंभीर टिप्पणी की। गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले शब्बीर शाह की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था याचिका में शब्बीर शाह की ओर से कहा गया कि उनकी उम्र अब 74 साल हो चुकी है, वे इस मामले में छह साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं और ट्रायल में कुल 400 गवाह हैं, जिनमें से अभी सिर्फ 15 की ही गवाही पूरी हुई है।सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एनआईए से खासकर 1990 के दशक की पुरानी स्पीच पर आधारित सबूतों को लेकर कई बार सवाल किए थे। कोर्ट ने पूछा था कि इतने पुराने बयानों पर अब कैसे भरोसा किया जा सकता है और छह साल से ज्यादा हिरासत का क्या ठोस आधार है। फरवरी 2026 में कोर्ट ने एनआईए को पुराने सबूतों के बजाय नए और समकालीन प्रमाण पेश करने को कहा था। कोर्ट ने मामले की सुनवाई कई बार टाली थी और अंत में शब्बीर शाह की उम्र, लंबी हिरासत और ट्रायल की धीमी गति को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर कर दी। जमानत पर कुछ शर्तें लगाई गई हैं, जैसे वे जेल से बाहर रहते हुए किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे और ट्रायल में सहयोग करेंगे। शाह पर आरोप लगाया था कि वे जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश में शामिल थे और टेरर फंडिंग में उनका हाथ था। एनआईए ने मामले में कई चार्जशीट दाखिल की थीं, जिसमें शाह को बाद में शामिल किया गया था।

कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं, चाहे पीएम ही क्यों न हों:लोकसभा में बोले स्पीकर, राहुल के आरोपों का भी दिया जवाब
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव चर्चा के बाद खारिज हो गया है। इसके बाद वे फिर काम लौट आए हैं। बिरला ने गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही फिसंभालते हुए बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में नेता प्रतिपक्ष या किसी भी सदस्य को बोलने से कभी नहीं रोका गया और संसद के नियम सभी के लिए समान रूप से लागू होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं है, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों।स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव पर पिछले दो दिनों में 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई, ताकि सभी सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि यह सदन देश के 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करता है और हर सांसद यहां अपनी जनता की समस्याओं और अपेक्षाओं को लेकर आता है। उन्होंने हमेशा कोशिश की कि सभी सांसद नियमों के तहत अपनी बात रखें और जो सदस्य कम बोलते हैं उन्हें भी बोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उनके अनुसार, संवाद और चर्चा से ही लोकतंत्र मजबूत होता है।बिरला ने सदन को बताया विचारों का जीवंत मंचबिरला ने सदन को विचारों का जीवंत मंच बताते हुए कहा कि पिछले दो दिनों में सभी सदस्यों के विचारों को गंभीरता से सुना गया। उन्होंने कहा कि वह हर सदस्य के आभारी हैं, चाहे वे सरकार की आलोचना ही क्यों न करते हों। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है कि यहां हर आवाज को महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि स्पीकर की कुर्सी किसी व्यक्ति की नहीं बल्कि लोकतंत्र की महान भावना का प्रतीक है।विपक्ष के आरोपों का भी दिया जवाबविपक्ष की शिकायतों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष या किसी भी सदस्य को नियमों के तहत बोलने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ लोगों का मानना है कि सदन के नेता नियमों से ऊपर होते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने बताया कि नियम 372 के तहत प्रधानमंत्री को भी सदन में बोलने से पहले अध्यक्ष की अनुमति लेनी होती है।माइक बंद करने के आरोपों पर भी बिरला ने सफाई दी और कहा कि चेयर के पास माइक बंद करने का कोई बटन नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में सभी महिला सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिला है।सदन की व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारीसदन में निलंबन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हालांकि उनके सभी दलों के सांसदों से व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं, लेकिन सदन की व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है। जब सदस्य नियमों का पालन नहीं करते तो कभी-कभी निलंबन जैसे कठोर फैसले लेने पड़ते हैं। उन्होंने सभी सांसदों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील भी की।

फारूक अब्दुल्ला: J&K के पूर्व सीएम पर जानलेवा हमले की गूंज संसद तक, आमने-सामने हुए खड़गे-नड्डा
नई दिल्ली। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर हुए जानलेवा हमले का मुद्दा संसद में उठा हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाए कि फारूक अब्दुल्ला की सुरक्षा खतरे हैं और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जाना इसका प्रमुख कारण है। हालांकि, कांग्रेस के आरोपों और फारूक अब्दुल्ला पर हमले को लेकर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सदन में जवाब दिया।मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में कहा, फारूक अब्दुल्ला पर हमला हुआ है। उनकी सुरक्षा खतरे में है। जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा था। अब वहां की पुलिस और सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री के पास होने से आज जम्मू-कश्मीर में ऐसी हालत है। जम्मू-कश्मीर से कानून व्यवस्था खत्म हो रही है और प्रमुख नेताओं को मारने का मंसूबा है। फारूक अब्दुल्ला को भी इस तरह मार दिया गया होता। उनके सुरक्षाकर्मियों ने उनकी जान बचाई।केन्द्र सरकार के हाथ में कश्मीर के लोग सुरक्षित नहीं: खड़गेकांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा, मैं जानना चाहता हूं कि क्या सरकार का फारूक अब्दुल्ला को मारने का इरादा है। अगर उनको सुरक्षित रखना चाहते थे, तो फुल सिक्योरिटी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने के बाद ही लोग सुरक्षित रह सकते हैं। केंद्र सरकार के हाथ में कश्मीर के लोग सुरक्षित नहीं है। क्योंकि सरकार का एक मंसूबा है कि जो लोग धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और देश को एक करने की कोशिश कर रहे हैं, उनको खत्म करना है।यह बोले केंद्रीय मंत्री केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने फारूक अब्दुल्ला पर हमले को लेकर कहा, बुधवार रात फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमला हुआ। यह बहुत ही चिंता का विषय है और गंभीर मामला है। भारत सरकार इस घटना को लेकर बहुत गंभीर है। मैं सरकार की ओर से इस बात का विश्वास दिलाता हूं कि इस घटना की पूरी जांच की जाएगी। गिरफ्तार आरोपी के मंसूबों के बारे में गहराई से पता किया जाएगा। इस तरह की घटना दोबारा न हो और फारूक अब्दुल्ला के जीवन की रक्षा से जुड़ा हर कदम जरूर उठाया जाएगा।नड्डाने की खड़गे के आरोपों की निंदाइसी बीच, जेपी नड्डा ने मल्लिकार्जुन खड़गे के आरोपों को लेकर कांग्रेस की निंदा करते हुए कहा, हर घटना को राजनीतिक चश्मे से देखना और उसे राजनीतिक रूप देना उचित नहीं है। पूर्व राज्य का दर्जा नहीं मिला, इस कारण यह घटना हुई, इस निष्कर्ष पर पहुंचना और सरकार पर गंभीर आरोप लगाना निंदनीय है।जेपी नड्डा ने अपने जवाब में आगे कहा, विपक्ष के नेता की ओर से यह कहना कि सरकार का मंसूबा उनकी (फारूक) की जान लेना है। इस पर मेरा कहना है कि यह कांग्रेस की सोच का नतीजा है। हमेशा से कांग्रेस के मंसूबे इसी तरह के रहे हैं।

मिडिल ईस्ट संकट में भारत की बड़ी डिप्लोमैटिक सफलता:स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता, जयशंकर की मेहनत लाई रंग
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता सामने आई है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच हुई अहम टेलीफोनिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। इस फैसले को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाला बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। हाल ही में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ा है। सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में करीब 90 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।भारत की सक्रिय कूटनीति आई कामऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भारत ने सक्रिय कूटनीति का परिचय देते हुए ईरान के साथ संवाद स्थापित किया। विदेश मंत्री जयशंकर और अराघची के बीच हुई बातचीत का मुख्य उद्देश्य इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखना और कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाना था। बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय टैंकरों को इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दे दी, जिससे भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति की चिंता काफी हद तक कम हो गई है।जयंशकर ने कई अन्य वैश्विक शक्तियों से भी की बातसूत्रों के मुताबिक, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मुद्दे पर केवल ईरान से ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख वैश्विक शक्तियों से भी संपर्क साधा। उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो से भी बातचीत कर समुद्री व्यापारिक मार्गों को खुला रखने और वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया।इन देशों के जहाजों पर सख्त प्रतिबंध लागूगौरतलब है कि ईरान ने यह विशेष रियायत ऐसे समय में दी है जब अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर इस मार्ग से गुजरने को लेकर सख्त प्रतिबंध लागू हैं। हालांकि भारत के साथ अपने विशेष संबंधों को ध्यान में रखते हुए ईरान ने भारतीय जहाजों को छूट दी है। इसे भारत की मजबूत और संतुलित विदेश नीति का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

कर दिया काम यूथ कांग्रेस वालों ने:राहुल के बयान पर BJP ने किया वार, कहा- कांग्रेस को नेहरू की बात समझने में क्यो रही दिक्कत, जानें क्या है पूरा मामला
नई दिल्ली। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और यूथ कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने एक्स पर किए पोस्ट में आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान हुए विवादित प्रदर्शन का समर्थन किया और उस पर गर्व जताया। अमित मालवीय ने राहुल गांधी का एक वीडियो क्लिप पोस्ट करते हुए एक्स पोस्ट में दावा किया कि नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कर दिया काम यूथ कांग्रेस वालों ने। मालवीय का दावा है कि यह टिप्पणी उस घटना के बाद आई जब यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान शर्ट उतारकर प्रदर्शन किया और कार्यक्रम को बाधित किया। अमित मालवीय ने कहा कि इस तरह के प्रदर्शन से पूरी दुनिया के सामने भारत की छवि को नुकसान पहुंचा।उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब दुनियाभर के शीर्ष तकनीकी विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और इनोवेटर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य पर चर्चा करने के लिए एक मंच पर जुटे थे, तब कांग्रेस पार्टी को लगा कि भारत का प्रतिनिधित्व करने का सबसे अच्छा तरीका अराजकता व अशोभनीय प्रदर्शन है। मालवीय ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया।एक्स पोस्ट में अमित मालवीय ने इस मुद्दे को देश की राजनीतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से भी जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि जिस पंडित जवाहरलाल नेहरू को कांग्रेस अपना वैचारिक आधार मानती है, उन्होंने राष्ट्रीय चरित्र और निष्ठा के सवाल पर बिल्कुल अलग सोच रखी थी।मालवीय ने 1950 के दशक की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि जब महाराजा यशवंतराव होलकर द्वितीय के निधन के बाद इंदौर की गद्दी के उत्तराधिकार का सवाल उठा, तब यह विवाद सामने आया कि क्या उनकी अमेरिकी पत्नी से जन्मे बेटे रिचर्ड होलकर को होलकर वंश की विरासत मिलनी चाहिए।उन्होंने एक्स पोस्ट में आगे लिखा कि उस समय की सरकार में राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे वरिष्ठ नेता भी इस मामले पर चर्चा में शामिल थे। इस पर विचार-विमर्श के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्पष्ट राय दी थी कि उत्तराधिकारी वही होना चाहिए जो भारतीय मां से जन्मा हो। अंततः सरकार ने महाराजा की भारतीय पत्नी से जन्मी बेटी राजकुमारी उषा देवी राजे साहिब होलकर को होलकर वंश की वैध उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता दी। बाद में नेहरू ने भी लिखा कि उनकी मान्यता इसलिए हुई क्योंकि वह जन्म से ही होलकर वंश का हिस्सा थीं।अमित मालवीय ने कहा कि यह उदाहरण दिखाता है कि राष्ट्रीय पहचान और निष्ठा जैसे मुद्दे केवल विचार नहीं हैं बल्कि वे मूल और जुड़ाव से गहराई से जुड़े होते हैं। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस से सवाल करते हुए कहा कि अगर खुद जवाहरलाल नेहरू मानते थे कि विदेशी मूल से जन्मा व्यक्ति देश की जिम्मेदारी उठाने के योग्य नहीं माना जा सकता, तो कांग्रेस को नेहरू की ही बात समझने में दिक्कत क्यों हो रही है। मालवीय के मुताबिक शायद यही वजह है कि आज वे देश की गरिमा की रक्षा करने के बजाय दुनिया के सामने भारत को शर्मिंदा करने वाले प्रदर्शनों पर गर्व कर रहे हैं।

एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में राहत:केंद्र ने एस्मा लागू कर जमाखोरी पर कसा शिकंजा, फैसले का उद्देश्य घरेलू रसोई गैस को प्राथमिकता
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट वार के चलते देश में एलपीजी सिलिंडरों की संभावित कमी और जमाखोरी की बढ़ती शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य घरेलू रसोई गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना और काले बाजारी गतिविधियों पर रोक लगाना है।सरकारी सूत्रों के अनुसार, एस्मा लागू होने के बाद एलपीजी और अन्य आवश्यक ईंधनों की आपूर्ति में प्राथमिक क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें अस्पताल, स्कूल, सरकारी संस्थान और अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। इससे इन संस्थानों में गैस की कमी से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को रोका जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से आम जनता को राहत मिलेगी और बाजार में कृत्रिम संकट पैदा करने वालों पर सख्ती की जा सकेगी।दरअसल, पिछले कुछ महीनों से कई राज्यों में एलपीजी सिलिंडरों की जमाखोरी और कालाबाजारी की घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिली थी। कई जगहों पर कमर्शियल गैस सिलिंडरों की कमी की शिकायतें सामने आईं, जिससे होटल और रेस्टोरेंट उद्योग की चिंताएं बढ़ गई हैं।एस्मा क्या है?आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) एक ऐसा कानून है, जिसका उद्देश्य जीवन से जुड़ी आवश्यक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना है। इस कानून के तहत सरकार को यह अधिकार मिलता है कि वह महत्वपूर्ण सेवाओं में बाधा डालने वाली गतिविधियों पर रोक लगाए और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करे। आमतौर पर इसका उपयोग परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सार्वजनिक सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए किया जाता है।रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देशसरकार ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बनी रहे। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत में एलपीजी की कुल खपत लगभग 3.13 करोड़ टन रही, जबकि घरेलू उत्पादन करीब 1.28 करोड़ टन ही था। शेष जरूरत आयात के जरिए पूरी की गई।

शेयर बाजार में आई सुनामी जैसी तेजी: ट्रंप का बयान बना टर्निंग पॉइंट, सेंसेक्स-निफ्टी दोनों बने राॅकेट
नई दिल्ली। वैश्विक तनाव और युद्ध की आशंकाओं के कारण पिछले कुछ दिनों से गिरावट झेल रहे भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जोरदार वापसी देखने को मिली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर हालात में नरमी के संकेत मिलने के बाद बाजार में निवेशकों का भरोसा लौटा और प्रमुख सूचकांक तेज उछाल के साथ खुले।मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,566 के मुकाबले करीब 800 अंकों की तेजी के साथ 78,375 पर खुला। शुरुआती कारोबार में ही इसमें और तेजी आई और यह 900 अंक से अधिक चढ़कर लगभग 78,526 के स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 भी मजबूती के साथ 24,280 पर खुला और कुछ ही देर में 24,303 के स्तर तक पहुंच गया।यूएस की भूमिका को लेकर वैश्वि बाजारों में अस्थिरतादरअसल, बीते कुछ दिनों से ईरान और इजरायल के बीच युद्ध की स्थिति और यूनाइटेड स्टेट की भूमिका को लेकर वैश्विक बाजारों में भारी अस्थिरता बनी हुई थी। सोमवार को भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन सेंसेक्स करीब 1,352 अंक गिरकर 77,566 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी भी कमजोर होकर 24,028 के स्तर पर बंद हुआ था।ट्रंप का दावाः ईरानी सेना हो चुकी है काफी कमजोर मंगलवार को बाजार में आई तेजी के पीछे डोनाल्ड ट्रंप के बयान को अहम माना जा रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी सेना काफी कमजोर हो चुकी है और युद्ध अपने अंतिम चरण में हो सकता है। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में तनाव कुछ कम हुआ और निवेशकों की धारणा में सुधार देखने को मिला।90-91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचा कच्चा तेलइसी के साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज गिरावट आई। हाल ही में 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा कच्चा तेल घटकर करीब 90-91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयातक देशों के लिए सकारात्मक मानी जाती है, जिससे शेयर बाजार में खरीदारी बढ़ी। मजबूत वैश्विक संकेतों का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा। जापान और साउथ कोरिया समेत कई एशियाई बाजार तेजी के साथ कारोबार करते नजर आए। इसका असर भारतीय बाजार में भी दिखाई दिया।कई शेयरों में दिखी तेजीतेजी के माहौल में कई प्रमुख शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। इंटरग्लोब एविएशन इंडिगो एशियन पेंट्स टाइटन कंपनी वीकेएसजे और एचडीएफसी बैंक जैसे लार्जकैप शेयर बढ़त में रहे। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की खरीदारी देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में शेयर बाजार में और स्थिरता देखने को मिल सकती है।

गुरुग्राम दिल दहलाने वाला हादसा:रोटी की तलाश में गए थे काम पर, मिट्टी के ढेर ने छीन ली 7 मजदूरों की जिंदगी
नई दिल्ली। गुरुग्राम में सोमवार शाम को एक निर्माण स्थल पर मिट्टी का एक बड़ा ढेर गिरने से सात मजदूरों की मौत हो गई, जबकि चार मजदूर घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अभी भी मलबे में 10 मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह घटना एक निर्माण स्थल पर घटी, जहां आगामी आवासीय परियोजना के लिए एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है। बताया जाता है कि दीवार गिरने के बाद इमारत के तहखाने में मिट्टी का एक बड़ा धंसाव हुआ, जिसके कारण यह हादसा हुआ। पुलिस और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के साथ-साथ नागरिक सुरक्षा दल और दमकलकर्मियों द्वारा बचाव अभियान जारी है।कई लोगों के हताहत होने की सूचनाअधिकारियों ने बताया कि यह दुर्घटना सोमवार शाम 7ः30 से 8ः00 बजे के बीच गुरुग्राम-रेवाड़ी सीमा के पास हुई। हालांकि, पुलिस को घटना की सूचना रात 9ः15 बजे के बाद ही मिली, जब एक अस्पताल ने कई लोगों के हताहत होने की सूचना दी। पुलिस उपायुक्त (मानेसर) दीपक कुमार ज्वारिया ने हादसे की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में पांच श्रमिकों जब अस्पताल लाया गया था तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। अन्य की मौत की पुष्टि बाद में घटनास्थल पर ही हुई।ईमारत के तहखाने में थे कई मजदूरउन्होंने कहा, पुलिस को रात 9.15 बजे के बाद अस्पताल से घटना की सूचना मिली, जहां पांच लोगों की मौत की खबर मिली थी। बचाव दल को तुरंत मौके पर भेजा गया। निर्माण स्थल पर मौजूद बचे हुए लोगों और ठेकेदारों ने पुलिस को बताया कि जब इमारत गिरी तब कई मजदूर तहखाने में थे। उन्होंने दावा किया कि कम से कम 10 और मजदूर अभी भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं।मृतकों की नहीं हुई पचानघटना के बाद, नागरिक सुरक्षा दल, दमकलकर्मी और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के कर्मियों ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया। मलबा हटाने और फंसे हुए श्रमिकों की तलाश के लिए भारी मशीनरी, ऊंचे खंभों पर लगी बत्तियां और अन्य उपकरण तैनात किए गए। पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी बचाव कार्य की निगरानी और उसमें तेजी लाने के लिए घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि मृत श्रमिकों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। उन्होंने आगे कहा कि यदि मृतक या घायल श्रमिकों के परिवारों से शिकायतें प्राप्त होती हैं तो एफआईआर दर्ज की जा सकती है। घटनास्थल पर बचाव अभियान जारी था।

सोनिया-राहुल की बढ़ी मुश्किलें? :नेशनल हेराल्ड केस में 20 अप्रैल को अहम सुनवाई
नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड धन शोधन मामले में कांग्रेस की दिग्गज नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती है। दरअसल खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 अप्रैल को सुनवाई होगी। ईडी ने दिल्ली हाईकोर्ट में राऊज एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया। सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 20 अप्रैल तय की।2000 करोड़ से अधिक की संपत्ति पर कब्जा करने रची थी साजिशदरअसल, यह हाई-प्रोफाइल मामला उन आरोपों से संबंधित है, जिनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने नेशनल हेराल्ड अखबार के मूल प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा करने के लिए साजिश रची। उन्होंने यंग इंडियन के माध्यम से मात्र 50 लाख रुपए की मामूली रकम का भुगतान किया, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी शेयरधारक हैं।इन्हें बनाया गया है आरोपीईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, साथ ही यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाया गया। एजेंसी का आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियों को गलत तरीके से अपने कब्जे में लिया।जांच में मिले मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अहम सबूत ईडी का दावा है कि जांच के दौरान फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अहम सबूत सामने आए। एजेंसी के अनुसार, एजेएल की संपत्तियों को बेहद कम कीमत पर हासिल करने की साजिश रची गई और इसके जरिए अवैध रूप से लाभ उठाया गया।दिसंबर 2025 में राऊज एवेन्यू कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और दूसरों के खिलाफ चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में यह साफ किया था कि ईडी चाहे तो इस मामले में आगे जांच जारी रख सकती है। इसी आदेश के खिलाफ ईडी ने हाईकोर्ट का रुख किया।

पीएम ने सैक्षणिक संस्थानों से की अपील:कैंपस को उद्योग और रिसर्च बेस्ड एजुकेशन के रूप में करें विकसित, एवीजीसी सेक्टर को बढ़ावा देने पर भी दिया जोर
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश के शैक्षणिक संस्थानों से अपील की कि वे अपने कैंपस को उद्योग सहयोग और शोध आधारित शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करें, ताकि छात्रों को वास्तविक दुनिया का अनुभव मिल सके। प्रधानमंत्री ने यह बात बजट के बाद आयोजित एक वेबिनार को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कही। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा की और एवीजीसी (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) सेक्टर को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत तेजी से नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस वेबिनार में इस बात पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए कि कैसे शैक्षणिक संस्थानों के कैंपस को उद्योग सहयोग और शोध आधारित सीखने के केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने संस्थानों, उद्योग और शिक्षाविदों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि इन चर्चाओं से भविष्य के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार होगा और विकसित भारत की नींव और मजबूत होगी।युवाओं की बदलती सोच देश की सबसे बड़ी ताकतपीएम मोदी ने कहा कि भारत के युवाओं की बदलती सोच देश की सबसे बड़ी ताकत है और इसके अनुसार शिक्षा प्रणाली को भी विकसित करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि सरकार लगातार शिक्षा को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति (एनईपी) ऐसा आधार प्रदान करती है जिससे पाठ्यक्रम को बाजार की जरूरतों और वास्तविक अर्थव्यवस्था के अनुरूप बनाया जा सकता है। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑटोमेशन और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में इसकी जरूरत है।शिक्षा को अर्थव्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया को करना होगा तेजउन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली को वास्तविक दुनिया की अर्थव्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया को और तेज करना होगा। प्रधानमंत्री ने एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर भी गर्व जताया और कहा कि सरकार बेटियों को भविष्य की तकनीकों में समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।इसके साथ ही उन्होंने एक मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम बनाने की जरूरत बताई, जहां युवा शोधकर्ताओं को बिना किसी बाधा के नई सोच और प्रयोग करने के पूरे अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा वातावरण बनाना होगा जहां युवा शोधकर्ता नई खोज और नए विचारों पर खुलकर काम कर सकें।

सरकार ने 'इजरायली गिरफ्तारी' के दावे को बताया भ्रामक:कांग्रेस समर्थक के 'एक्स' अकाउंट से जुड़ा था पोस्ट
नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक दावे को भारत सरकार ने पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया है। दावा किया जा रहा था कि सऊदी अरब में एक भारतीय नागरिक को इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के एजेंट के रूप में गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में शनिवार को विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर सफाई जारी करते हुए लोगों से ऐसी अफवाहों से सावधान रहने की अपील की।दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही थी। इसमें दावा किया गया था कि सऊदी अरब की सुरक्षा एजेंसियों ने मोसाद से जुड़े दो एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि ये दोनों एजेंट ईरान को फंसाने के लिए बम धमाकों की साजिश रच रहे थे। हालांकि विदेश मंत्रालय ने इस दावे को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताया है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे ऐसे बेतुके और बिना किसी आधार वाले दावों से सावधान रहें।"सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह दावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच फैल रही गलत सूचनाओं की एक बड़ी लहर का हिस्सा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब में किसी भारतीय नागरिक की इस तरह की गिरफ्तारी की कोई विश्वसनीय जानकारी या आधिकारिक पुष्टि नहीं है। जांच में यह भी सामने आया कि यह भ्रामक दावा 'एमोक्सिसिलिन' नाम के एक 'एक्स' अकाउंट से पोस्ट किया गया था। इसी अकाउंट से यह जानकारी शेयर की गई थी कि सऊदी अरब ने दो कथित मोसाद एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक भारतीय भी शामिल है।बताया जा रहा है कि यह अकाउंट लंबे समय से राजनीतिक रूप से झुकाव वाले पोस्ट साझा करता रहा है। अकाउंट पर अक्सर कांग्रेस पार्टी के पक्ष में कथित तौर पर सामग्री पोस्ट की जाती है और कई बार बिना पुष्टि वाली जानकारी भी साझा की जाती रही है। इस अकाउंट पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषणों और बयानों की तारीफ करते हुए कई पोस्ट भी किए जाते हैं। कई बार उनके बयानों को साझा करते हुए उन्हें 'सांघियों' पर तीखा हमला बताया जाता है। 'सांघी' शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर ऑनलाइन भाजपा, आरएसएस या दक्षिणपंथी विचारधारा के समर्थकों के लिए किया जाता है।इसके साथ ही अकाउंट पर अक्सर भाजपा और उसके समर्थकों का मजाक उड़ाने या आलोचना करने वाले पोस्ट भी साझा किए जाते हैं, जिनमें 'सांघी इकोसिस्टम' और 'भक्त' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय सोशल मीडिया पर गलत जानकारी तेजी से फैलती है, इसलिए लोगों को ऐसी अपुष्ट खबरों पर भरोसा करने से बचना चाहिए और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करना चाहिए।

मिडिल ईस्ट वार का असर बोर्ड परीक्षाओं पर:CBSE ने पश्चिम एशियाई देशों में स्थगित की 10वीं की परीक्षाए, मस्कट में भारतीय दूतावास ने की पुष्टि
नई दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने पश्चिम एशिया के कई देशों में कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। यह फैसला क्षेत्र में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच लिया गया है। मस्कट में भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की। मस्कट में भारतीय दूतावास ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म श्एक्सश् पर सीबीएसई का सर्कुलर शेयर किया, जिसमें छात्रों और अभिभावकों को खाड़ी देशों में परीक्षा कार्यक्रम में हुए बदलाव की जानकारी दी गई। सर्कुलर के अनुसार, यह फैसला बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) में सीबीएसई से जुड़े स्कूलों पर असर डालेगा।कक्षा 10 की परीक्षाएं 7 मार्च से 11 मार्च के बीच होनी थीं। 2 मार्च, 5 मार्च और 6 मार्च को होने वाली परीक्षाओं को पहले ही रद्द किया जा चुका है। सीबीएसई ने कहा कि पश्चिमी एशिया में कक्षा 10 के छात्रों के परिणाम कैसे घोषित किए जाएंगे, इसकी जानकारी बाद में अलग से दी जाएगी। इसी बीच, शनिवार को होने वाली कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा भी टाल दी गई है। टाली गई परीक्षा की नई तारीखें बाद में बताई जाएंगी। बोर्ड ने आगे कहा कि वह 7 मार्च को मौजूदा हालात की समीक्षा करेगा और 9 मार्च से होने वाली परीक्षाओं के बारे में आगे के निर्देश जारी करेगा।सीबीएसई ने कक्षा 12 के सभी छात्रों को सलाह दी है कि वे अपने-अपने स्कूलों के साथ लगातार संपर्क में रहें और आगे के अपडेट के लिए आधिकारिक घोषणाओं को ध्यान से फॉलो करें। छात्रों से यह भी कहा गया है कि वे अपने स्कूलों के साथ लगातार संपर्क में रहें, सिर्फ आधिकारिक सीबीएसई नोटिफिकेशन पर ही भरोसा करें। कोई भी परीक्षाओं के बारे में जानकारी के लिए अनौपचारिक स्रोतों या अफवाहों पर निर्भर न रहें।बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने तेहरान में कई ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए, जिसमें शहर के सेंटर में मौजूद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई भी मारे गए। इसके बाद ईरान ने तेल अवीव और इजरायल में दूसरी जगहों के साथ-साथ पश्चिमी एशिया में अमेरिकी मिलिट्री बेस और डिप्लोमैटिक मिशन को निशाना बनाकर जवाबी हमले किए। ईरानी हमलों ने पड़ोसी देशों में आम नागरिकों और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नुकसान पहुंचाया, जिसमें सऊदी अरब में एक ऑयल रिफाइनरी और दुबई में एक लग्जरी होटल शामिल हैं। इन हमलों से एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का डर बढ़ गया है, जिसमें और भी पश्चिमी एशियाई देश शामिल हो सकते हैं।

गिद्ध गणना:शुरुआती रुझान मप्र को गिद्ध स्टेट बनाने के दे रहे संकेत, अप्रैल-मई में दूसरे चरण की गिनती में साफ होगी तस्वीर
भोपाल। फरवरी-मार्च में हुई गिद्ध गणना के शुरूआती रूझान मप्र को देश में गिद्ध स्टेट बनाने के संकेत दे रहे हैं। यहां गिद्धों की संख्या 14 हजार के पार मिली है। हालांकि अधिकृत आंकड़े अभी जारी नहीं किये गये हैं। बावजूद इसके प्रथम चरण में हुए इस तीन दिवसीय सर्वे के बाद दूसरा चरण अप्रैल या मई में होगा। जिसमें प्रजनन गतिविधि और दीर्घकालिक जनसंख्या रुझानों का फिर मूल्यांकन किया जाएगा। जिसके बाद गिद्धों का वास्तविक आंकड़ा सामने आएगा। महत्वपूर्ण है कि मप्र पहले से चीता, टाइगर, तेंदुआ स्टेट है। अब यहां गिद्धों की संख्या भी बढ़ गई है। इस बार 20 से 22 फरवरी तक हुए सर्वे में गिद्धों की करीब 7 प्रजाति पाई गई हैं। इनमें भारतीय गिद्ध, सिनेरियस गिद्ध, मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजेर) और हिमालयन ग्रिफॉन जैसी प्रजातियां प्रमुख हैं। 2016 में पहली बार गिद्धों की गणना हुई थी। तब 7028 गिद्ध गिने गए थे। इसके बाद से लगातार गिनती की जा रही है। खास बात यह है कि इसमें सिर्फ बैठे हुए गिद्धों की गिनती की जाती है। उड़ते हुए गिद्धों को नहीं गिना जाता है। कहां कितने गिद्ध मिलेप्रदेश में सबसे ज्यादा 1532 गिद्ध रायसेन जिले में पाए गए। पवई रेंज में 1,127 गिद्ध, गांधी सागर में 1,084, शिवपुरी में 735 और रायसेन में 1532 गिद्ध पाए गए हैं। वहीं रीवा में 622, अनूपपुर में 413, बांधवगढ़ में 276 और कान्हा में 224 गिद्ध दर्ज किए गए हैं। प्रदेश में ऐसे बढ़ी गिद्धों की संख्या जानकारी के अनुसार, प्रदेश में गिद्धों की गणना की शुरुआत वर्ष 2016 से की गई थी। प्रदेश में गिद्धों की कुल 7 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसमें से 4 प्रजातियां स्थानीय एवं 3 प्रजाति प्रवासी हैं। गिद्धों की गणना करने के लिए शीत ऋतु का अंतिम समय सही रहता है। इस दौरान स्थानीय एवं प्रवासी गिद्धों की गणना आसानी से हो जाती है। वर्ष 2019 की गणना में गिद्धों की संख्या 8 हजार 397, वर्ष 2021 में 9 हजार 446, वर्ष 2024 में 10 हजार 845 और 2025 में 12 हजार 981 हो गई थी। इस बार हुई गणना में यह संख्या 14 हजार से ज्यादा पहुंच सकती है।2014 में शुरू हुए थे संरक्षण के प्रयासभोपाल के केरवा डैम में गिद्ध प्रजनन केंद्र की स्थापना के साथ वर्ष 2014 में गिद्धों के संरक्षण के प्रयास शुरू हुए थे। मार्च 2017 में यहां पहले सफल प्रजनन के रूप में सफेद पीठ वाले गिद्ध का चूजा पैदा हुआ था। यहां सफेद पीठ वाले और लंबी चोंच वाले गिद्धों का प्रजनन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, गिद्धों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास के लिए पन्ना (पवई), रायसेन (हलाली डैम), शिवपुरी और गांधीसागर अभयारण्य (मंदसौर) में भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। बीते 23 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रायसेन जिले के हलाली डैम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्धों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा था। इन पर उच्च तकनीक वाले जीपीएस ट्रैकर लगाए गए हैं। जिससे वन विभाग इनकी निगरानी भी कर रहा है।

भाजपा की नई सियासी जमावट:अचानक बदल दिए 9 राज्यों गवर्नर और एलजी, बोस के इस्तीफे से हैरान सियासी पंडित
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने गुरवार की शाम दिल्ली से लेकर बिहार-पश्चिम बंगाल तक 9 राज्यों-केन्द्र शासित प्रदेशों के राज्यपाल और उपराज्यपाल को बदल दिया है। दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का एलजी बनाया गया है। वहीं तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का लेफ्टिनेंट गवर्नर बनाया गया। इसके अलावा तमिलनाडु के गवर्नर आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया है। बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस के ईस्तीफा देने के बाद आरएन रवि को बंगाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि बोस का इस्तीफा राजनीतिक पंडितों को हैरान करने वाला था। वहीं तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल बनाया गया है। इसी तरह सैयद अता हसनैन को बिहार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जबकि हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु के राज्यपाल का कार्यभार सौंपा गया है। रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ मान जाते हैं हसनैनभारतीय सेना के दिग्गज अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को रणनीतिक मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है और उनके पास कश्मीर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में काम करने का व्यापक अनुभव है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य के रूप में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी हैं। बिहार जैसे बड़े और जटिल राज्य में उनकी नियुक्ति प्रशासन में अनुशासन और सुरक्षात्मक दृष्टिकोण को मजबूती प्रदान करेगी।एक मंझे जुए राजनयिक हैं संधूअमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत रहे तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। संधू एक मंझे हुए राजनयिक हैं, जिनके पास अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का लंबा अनुभव है। उन्होंने वाशिंगटन डीसी और श्रीलंका जैसे महत्वपूर्ण मिशनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। दिल्ली जैसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से सक्रिय केंद्र शासित प्रदेश में उनकी नियुक्ति केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। उनकी छवि एक शांत लेकिन प्रभावी प्रशासक की रही है।भारतीय कार्पोरेट क्षेत्र का माना जाना नाम हैं वीके सक्सेनावीके सक्सेना दिल्ली के उपराज्यपाल रह चुके हैं। वह पहले ऐसे कॉर्पोरेट व्यक्ति हैं, जिनको लेफ्टिनेंट गवर्नर पद पर नियुक्त किया गया था। सक्सेना भारतीय कॉर्पोरेट और सामाजिक क्षेत्र का जाना-माना नाम हैं। विनय कुमार सक्सेना ने खादी और ग्रामोद्योग आयोग का नेतृत्व किया था।रिटायर्ड आईएएस अफसर हैं सीवी आनंद बोसकेरल के कोयट्टम के रहने वाले सीवी आनंद बोस रिटायर्ड आईएएस अफसर हैं। उन्होंने अंग्रेजी, मलयालम और हिंदी में करीब 40 पुस्तकें लिखी हैं। उनको जवाहरलाल नेहरू फैलोशिप से सम्मानित किया जा चुका है। बोस उस कार्यकारी ग्रुप के अध्यक्ष थे, जिसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए विकास एजेंडा तैयार किया था। मोदी सरकार ने सबके लिए किफायती आवास के उनके कॉन्सेप्ट को अपनाया गया था।

मिडिल ईस्ट वार से भारत को भारी नुकसान:दुबई के जेबेल अली बंदरगाह पर फंसे फल-सब्जियों से लदे 1000 कंटेनर, असर महाराष्ट्र के किसान और निर्यातकों पर
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर अब भारत के कृषि निर्यात पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दुबई के जेबेल अली बंदरगाह पर भारत से भेजे गए लगभग 800 से 1000 कंटेनर फंस गए हैं। इन कंटेनरों में केले, अंगूर, अनार, तरबूज, पत्तेदार सब्जियां और प्याज जैसे जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पाद भरे हुए हैं। बंदरगाह पर 28 फरवरी से कामकाज प्रभावित होने के कारण ये कंटेनर आगे अन्य देशों में नहीं भेजे जा पा रहे हैं, जिससे लाखों-करोड़ों रुपये के सामान के खराब होने का खतरा पैदा हो गया है।जेबेल अली बंदरगाह खाड़ी क्षेत्र का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है और मध्य-पूर्व के कई देशों में कृषि उत्पादों की आपूर्ति का मुख्य हब माना जाता है। यहां से भारत समेत कई देशों के फल और सब्जियां खाड़ी के अलग-अलग बाजारों में पहुंचते हैं। लेकिन मौजूदा संघर्ष के कारण बंदरगाह का संचालन बाधित हो गया है, जिससे वहां पहुंचे या रास्ते में आए कई भारतीय शिपमेंट फंस गए हैं।ऐसे उत्पाद ज्यादा दिन तक नहीं रह सकते सुरक्षितइस स्थिति से खास तौर पर महाराष्ट्र के किसान और निर्यातक प्रभावित हुए हैं। राज्य से बड़ी मात्रा में अंगूर, अनार, केले और प्याज खाड़ी देशों को निर्यात किए जाते हैं। चूंकि ये उत्पाद अधिक समय तक सुरक्षित नहीं रहते, इसलिए बंदरगाह पर देरी होने से इनके खराब होने की आशंका काफी बढ़ गई है। इससे निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।रमजान के महीने में अंगूर और अनार की अधिक रहती है मांगस्थिति इसलिए भी गंभीर हो गई है क्योंकि खाड़ी देशों में इस समय रमजान का महीना शुरू है। इस दौरान फलों, विशेष रूप से अंगूर और अनार की मांग बहुत अधिक रहती है। आमतौर पर किसान इसी मांग को ध्यान में रखते हुए अपनी फसल की कटाई और निर्यात की योजना बनाते हैं। लेकिन इस बार शिपमेंट फंस जाने के कारण बाजार की मांग पूरी नहीं हो पा रही है।निर्यातकों के अनुसार लगभग 5,000 से 6,000 टन अंगूर पहले ही प्रभावित हो चुके हैं, जबकि खेतों में मौजूद करीब 10,000 टन निर्यात योग्य अंगूरों को अब स्थानीय बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ सकता है। इससे किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है।मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट पर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। दुबई जाने वाले लगभग 80 कंटेनर अभी तक अनलोड नहीं किए जा सके हैं, जबकि नासिक से आए 200 से अधिक कंटेनर बंदरगाह के बाहर ही फंसे हुए हैं। इससे बंदरगाह क्षेत्र में भारी भीड़भाड़ और जाम की स्थिति बन गई है।किसान संगठनों ने सरकार से लगाई मदद की गुहारइस संकट को देखते हुए किसान संगठनों ने सरकार से तत्काल मदद की मांग की है। महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने सरकार से प्रति क्विंटल 1,500 रुपये की सब्सिडी देने, बंदरगाह शुल्क और विलंब शुल्क माफ करने तथा निर्यातकों के लिए अस्थायी खरीद योजना शुरू करने की मांग की है।नुकसान से बचने निर्यातक वापस मंगा रहे कंटेनरकुछ निर्यातकों ने नुकसान से बचने के लिए अपने कंटेनर वापस मंगाने भी शुरू कर दिए हैं। निर्यातकों का कहना है कि लंबी देरी के कारण कई बार माल बंदरगाह पर ही खराब हो जाता है। उदाहरण के तौर पर नासिक से भेजे गए प्याज के एक शिपमेंट को कस्टम मंजूरी मिलने में चार दिन लग गए और तब तक पूरा माल खराब हो गया।व्यवधान का असर यहीं तक सीमित नहींइस व्यवधान का असर केवल निर्यात तक सीमित नहीं है। ईरान और अन्य खाड़ी देशों से भारत आने वाले सेब, कीवी और खजूर के लगभग 600 से 700 कंटेनर भी बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं। इसके अलावा भारत के चीनी निर्यात पर भी अनिश्चितता पैदा हो गई है, क्योंकि चालू सीजन में मंजूर 20 लाख टन चीनी में से केवल लगभग 5 लाख टन ही निर्यात हो पाने की संभावना जताई जा रही है। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब सीधे भारतीय कृषि व्यापार और किसानों की आय पर पड़ने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही जहाजरानी सेवाएं सामान्य नहीं हुईं, तो नुकसान और बढ़ सकता है।

नीतीश के राज्यसभा जाने का सपना होगा सकार:संसदीय जीवन के शुरुआत से थी यह इच्छा, लालू-मोदी के क्लब में होंगे शामिल
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने की अपनी इच्छा सार्वजनिक कर दी है। इसके साथ ही उनके लंबे समय से अधूरे रहे एक राजनीतिक सपने के पूरा होने का रास्ता साफ हो गया है। नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनके मन में यह इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के भी दोनों सदनों के सदस्य बनें। इसी क्रम में उन्होंने इस बार होने वाले चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा जताई है।बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में एनडीए की ओर से उम्मीदवारों के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार भाजपा की ओर से बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और शिवेश राम को राज्यसभा भेजा जा सकता है, जबकि जेडीयू के कोटे से नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर का नाम सामने आया है। दोनों नेता जल्द ही राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं।नीतीश कुमार का राजनीतिक जीवन काफी लंबा और सक्रिय रहा है। वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में रह चुके हैं। वे कई बार विधायक रहे हैं और विधान परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे संसद के निचले सदन लोकसभा के भी सदस्य रह चुके हैं। हालांकि अब तक वे राज्यसभा के सदस्य नहीं बन पाए थे, जिस कारण यह एक अधूरी इच्छा मानी जाती थी। अब राज्यसभा पहुंचने के साथ ही उनका यह सपना भी पूरा हो जाएगा।अपने संदेश में नीतीश कुमार ने बिहार की जनता को भरोसा दिलाया कि उनका राज्य के लोगों से जुड़ाव हमेशा बना रहेगा। उन्होंने कहा कि वे बिहार के विकास के लिए पहले की तरह प्रतिबद्ध रहेंगे और जो भी नई सरकार बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा। उन्होंने विकसित बिहार बनाने के संकल्प को आगे भी जारी रखने की बात कही।राज्यसभा पहुंचने के बाद नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं की सूची में शामिल हो जाएंगे, जो चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं। इससे पहले लालू प्रसाद यादव और दिवंगत सुशील कुमार मोदी यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। ये दोनों नेता विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभाकृचारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं।अब यदि नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित होते हैं, तो वे भी लालू प्रसाद यादव और सुशील कुमार मोदी के साथ उस खास राजनीतिक क्लब में शामिल हो जाएंगे, जिसके सदस्य देश में बहुत कम नेता हैं। इस तरह दशकों से मन में रही उनकी अधूरी राजनीतिक ख्वाहिश पूरी होने जा रही है।

संसद जाएंगे नितिन नवीन:भाजपा ने 10 राज्यसभा उम्मीदवारों का किया ऐलान, छग से लक्ष्मी वर्मा पर जताया भरोसा
नई दिल्ली। 10 राज्यों के 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा अपनी तैयारी तेज कर दी है। इतना ही नहीं पार्टी ने आज मंगलवार को 9 उम्मीदवारों का ऐलान भी कर दिया है। इस लिस्ट में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का नाम है। उन्हें बिहार से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है। अब तक वे बिहार विधानसभा के सदस्य हैं और पटना की बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।इसके अलावा बिहार से शिवेश कुमार, पश्चिम बंगाल से पार्टी के दिग्गज नेता राजीव सिन्हा को राज्यसभा में भेजने का निर्णय लिया गया है। वे इस समय पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी के सबसे बड़े चेहरों के तौर पर मैदान में हैं और जमकर पार्टी का प्रचार कर रहे हैं। वहीं असम से तेरश गोवाला और जोगेन मोहन, छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा, हरियाणा से संजय भाटिया, ओडिशा से मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को उम्मीदवार घोषित किया गया है।9 मार्च तक नामांकन वापस ले सकेंगे उम्मीदवारबता दें कि चुनाव की अधिसूचना 26 फरवरी को जारी की गई थी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 6 मार्च को की जाएगी। उम्मीदवारों के पास 9 मार्च तक अपना नामांकन वापस लेने का विकल्प होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतपत्रों पर वरीयताएं अंकित करने के लिए केवल पूर्व-निर्धारित विशिष्टताओं वाले एकीकृत बैंगनी रंग के पेन ही मान्य होंगे, जो रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे।लगातार अपना कद बढ़ा रहे नितिन नवीनभाजपा ने जिस समय नितिन नवीन का नाम पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर आगे बढ़ाया था, लोग चैंक से गए थे। तब तक उनकी पहचान बिहार के एक क्षेत्र तक सीमित थी। लेकिन नितिन नवीन लगातार अपना कद बढ़ा रहे हैं। भाजपा के दिग्गज नेताओं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह के बीच वे धीरे-धीरे अपनी राष्ट्रीय पहचान बनाने में सफल होते दिखाई दे रहे हैं।पश्चिम बंगाल के कूचा बिहार से उन्होंने पार्टी का प्रचार अभियान शुरू किया था। इसमें वे काफी आक्रामकता के साथ ममता बनर्जी सरकार पर हमला करते हुए दिखाई पड़े थे। उन्होंने जिस तरह बेहद आक्रामक शैली में ममता सरकार पर हमला बोला था, और जिस तरह उनके बयान सुर्खियां बन रहे हैं, यह बताता है कि वे बहुत तेजी से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर अपनी स्वीकृति बढ़ा रहे हैं।

भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था दुनिया के लिए बनी उम्मीद की किरण:पोस्ट-बजट वेबिनार में बोले पीएम मोदी, जमीनी स्तर पर दिखनी चाहिए सामूहिक जिममेदारी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दिल्ली में आयोजित पोस्ट बजट वेबिनार को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था दुनिया के लिए उम्मीद की किरण बनी हुई है।उन्होंने कहा कि जब वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में बदलाव हो रहा है, ऐसे समय में जो भारतीय कंपनियां स्वच्छ और हरित ऊर्जा में निवेश कर रही हैं, वे दुनिया के बेहतर बाजारों तक पहुंच बनाने में सफल होंगी। वेबिनार को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष का केंद्रीय बजट आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने और उसे और मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता को दोहराता है। उन्होंने कहा, सतत विकास, कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण मिशन महत्वपूर्ण कदम हैं। अब सतत विकास को व्यापार की मूल रणनीति बनाना होगा और इस वर्ष के बजट ने इसके लिए मजबूत ढांचा तैयार किया है।ज्यादा सपंर्क बढ़ाएं और निर्यात करेंइस ढांचे को सफल बनाने के लिए उद्योग, निवेशकों और अन्य हितधारकों को मिलकर काम करना होगा। जमीनी स्तर पर सामूहिक जिम्मेदारी दिखनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने नीति निर्माताओं और उद्योग जगत से कहा कि वे सरकार के प्रयासों से जुड़ें और लगातार सुझाव देते रहें। प्रधानमंत्री ने आगे कहा, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं बदल रही हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ रही है। हमारा संकल्प स्पष्ट है - ज्यादा निर्माण करें, ज्यादा उत्पादन करें, ज्यादा संपर्क बढ़ाएं और ज्यादा निर्यात करें।ऊर्जा मंत्रालय को लेकर यह बोले पीएम नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाकर रिकॉर्ड 32,914 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इसमें से 22,000 करोड़ रुपए सौर रूफटॉप योजना पीएम सूर्य घर योजना के लिए निर्धारित किए गए हैं। वहीं, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजना के लिए 600 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, ताकि बुनियादी ढांचे को मजबूत कर नवीकरणीय ऊर्जा को बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके। इसके साथ ही राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 600 करोड़ रुपए का आवंटन रखा गया है, जो पिछले वर्ष के अनुमान के बराबर है।छोटे शहर भारत की विकास यात्रा के प्रमुख स्तंभप्रधानमंत्री ने कहा कि विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और छोटे शहर भारत की विकास यात्रा के प्रमुख स्तंभ हैं। आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने और मजबूत करने के व्यापक विषय के तहत बजट के बाद चार अलग-अलग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन सत्रों में विनिर्माण, औद्योगिक उन्नयन और रणनीतिक क्षेत्रय एमएसएमई, वित्त और बाजार तक पहुंचय शहरों के आर्थिक क्षेत्रय तथा बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन जैसे विषय शामिल हैं। इन चर्चाओं में यह समझने की कोशिश की जाएगी कि बजट में घोषित सुधार औद्योगिक क्षमता बढ़ाने, प्रतिस्पर्धा सुधारने और रोजगार सृजन को कैसे बढ़ावा दे सकते हैं।

यह दिन वन्यजीव संरक्षण के प्रति समर्पित: पीएम मोदी ने विश्व वन्यजीव दिवस की दी शुभकामनाएं, क्या कहा ओम बिरला ने जानें
नई दिल्ली। विश्व वन्यजीव दिवस पर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित भाजपा नेताओं ने पशु प्रेमियों को शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा, विश्व वन्यजीव दिवस हमारे ग्रह को समृद्ध करने वाली और हमारे पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित रखने वाली अद्भुत जैव विविधता का उत्सव मनाने का अवसर है। यह दिन वन्यजीव संरक्षण के प्रति समर्पित प्रत्येक व्यक्ति के योगदान को सराहने का भी दिन है। हम वन्यजीवों के संरक्षण, सतत प्रयासों और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं ताकि हमारा वन्य जीवन बढ़ता रहे।प्रकृति और मानव जीवन एक-दूसरे के पूरकः ओम बिरलालोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विश्व वन्यजीव दिवस पर सभी को शुभकामनाएं दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, प्रकृति और मानव जीवन एक-दूसरे के पूरक हैं। जैव विविधता का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की सुरक्षा का आधार है। बीते वर्षों में भारत ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। देश में रामसर आर्द्रभूमियां 100 के करीब पहुंच गई हैं, तथा वन्य जीवन संरक्षण की दिशा में हम निरंतर प्रतिबद्ध हैं।उन्होंने आगे कहा कि वन्यजीवों की रक्षा करना केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि हमारा संवैधानिक कर्तव्य और नैतिक उत्तरदायित्व भी है। आइए, प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध पर्यावरण सुनिश्चित करने का संकल्प लें।जानवारों को बचाने के लिए हम कमिटेड: यादवकेंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि जब हम विश्व वन्यजीव दिवस मना रहे हैं और अपने ग्रह की शानदार जैव विविधता का जश्न मना रहे हैं, तो भारत अपने समृद्ध इकोसिस्टम को खतरे में डालने वाले कई खतरों के बारे में भी सचेत है। इसलिए हम न सिर्फ अपने पास जो है उसे बचाने के लिए, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र को ठीक करने के लिए जरूरी जानवरों को बचाने के लिए भी कमिटेड हैं। उम्मीद है कि हमारा वन्य जीवन फले-फूले और उस ग्रह को समृद्ध करे जिसे हम अपना घर कहते हैं।गडकरी ने भी दी विश्व वन्यजीव दिवस की बधाईकेंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, विश्व वन्यजीव दिवस पर बधाई। आइए हम उस जबरदस्त जैव विविधता का जश्न मनाएं जो हमारे ग्रह को बनाए रखती है और इंसानियत को प्रेरित करती है। जंगलों से लेकर समुद्रों तक, हर प्रजाति प्रकृति का बैलेंस बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। वन्यजीवों की रक्षा करना सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं है, यह आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारा फर्ज है।

मिडिल ईस्ट वारः:ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत पर पीएम मोदी की खामोशी से भड़कीं सोनिया, विदेश नीति पर उठाए सवाल, राहुल भी बोले
नई दिल्ली। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली हुसैनी खामेनेई की कथित तौर पर इजरायली-अमेरिकी हमलों में मौत के बाद देश की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान न आने पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इसे “कर्तव्यहीनता” बताते हुए सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं।सोनिया गांधी ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित अपने लेख में केंद्र सरकार की चुप्पी की आलोचना की। उन्होंने लिखा कि किसी पद पर बैठे राष्ट्राध्यक्ष की लक्षित हत्या समकालीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक गहरी चोट है और ऐसे समय में भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश की चुप्पी तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है। उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता जैसे मूल सिद्धांतों का उल्लंघन होता है, तब भारत को स्पष्ट और नैतिक रुख अपनाना चाहिए।घटना वैश्विक कूटनीतिक संतुलन के लिए गंभीर चुनौतीअपने लेख में सोनिया गांधी ने उल्लेख किया कि 1 मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि उसके सर्वोच्च नेता की पिछले दिन अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए लक्षित हमलों में हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा कि यह घटना वैश्विक कूटनीतिक संतुलन के लिए गंभीर चुनौती है। उनके अनुसार, इस घटनाक्रम से भी अधिक चिंताजनक भारत सरकार की प्रतिक्रिया का अभाव है।सोनिया ने पीएम मोदी के बयानों का किया जिक्रउन्होंने प्रधानमंत्री के शुरुआती बयानों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अमेरिका-इजरायल के बड़े हमलों पर सीधे टिप्पणी करने के बजाय केवल यूएई पर ईरान के जवाबी हमले की निंदा की। सोनिया गांधी ने कहा कि बाद में प्रधानमंत्री ने ‘गहरी चिंता’ और ‘संवाद व कूटनीति’ की सामान्य बातें कहीं, लेकिन उन्होंने घटनाओं की पूरी श्रृंखला और हमलों की प्रकृति पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाया।बिना किसी बचाव के संसद में होनी चाहिए बहससोनिया गांधी ने मांग की कि संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में इस मुद्दे पर विस्तृत और खुली चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के कमजोर होने और सरकार की “परेशान करने वाली चुप्पी” पर बिना किसी बचाव के बहस होनी चाहिए, ताकि देश को स्पष्ट दिशा मिल सके।राहुल गांधी ने भी की थी सरकार की आलोचनाविपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सोनिया गांधी के लेख को साझा करते हुए लिखा कि जब किसी विदेशी नेता की लक्षित हत्या पर भारत संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट समर्थन नहीं करता, तो इससे देश की विदेश नीति की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं।कांग्रेस का कहना है कि भारत को वैश्विक मंच पर शांति, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के पक्ष में मजबूती से खड़ा होना चाहिए। पार्टी का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका और अधिक जिम्मेदार होनी चाहिए। वहीं, सरकार की ओर से इस पर अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

मिडिल ईस्ट की वर्तमान स्थिति चिंताजनक:पीएम मोदी ने शांति-स्थिरता बनाए रखने किया आह्वान, कनाडा के साथ हुई डील का भी किया जिक्र
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरी दुनिया को फिर से शांति का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि विश्व में चल रहे तनावों को लेकर भारत की सोच स्पष्ट है। हमने शांति और स्थिरता बनाए रखने का आह्वान किया है। जब दो लोकतंत्र साथ खड़े होते हैं तो शांति की आवाज और सशक्त हो जाती है।नई दिल्ली में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति हमारे लिए गहरी चिंता का विषय है। भारत बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सभी विवादों के समाधान का समर्थन करता है। इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए हम सभी देशों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे। आतंकवाद मानवता के लिए गंभीर चुनौतियांभारत और कनाडा के बीच हुए समझौतों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हम डिफेंस इंडस्ट्रीज, मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस और मिलिट्री एक्सचेंज बढ़ाने पर काम करेंगे। इसी उद्देश्य से आज हमने इंडिया-कनाडा डिफेंस डायलॉग की स्थापना करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि हम सहमत हैं कि आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ दोनों देशों के लिए ही नहीं, पूरी मानवता के लिए साझा और गंभीर चुनौतियां हैं। इनके विरुद्ध हमारा करीबी सहयोग वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।लोकतांत्रिक मूल्यों में अटूट विश्वास रखते हैं भारत-कनाडासंयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी ने कहा कि हमारी पहली बैठक से ही हमारे संबंधों में एक नई ऊर्जा, परस्पर विश्वास और सकारात्मकता आई है। सहयोग के हर क्षेत्र में बढ़ती गति का श्रेय मैं अपने मित्र प्रधानमंत्री कार्नी को देता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और कनाडा लोकतांत्रिक मूल्यों में अटूट विश्वास रखते हैं। मानवता की भलाई हमारा साझा विजन है। यही विजन हमें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। आज हमने इस विजन को अगले स्तर की साझेदारी में बदलने पर चर्चा की।पीएम के रूप में पहली बार भारत आए कार्नीपीएम मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्नी का भारत में स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। प्रधानमंत्री के रूप में ये उनकी पहली भारत यात्रा है। हम इसे एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के रूप में देखते हैं। पिछले साल कनाडा में आयोजित जी7 बैठक में उन्होंने मेरा और मेरे प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया था। आज उसी आत्मीयता से उनका स्वागत करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

हमारे युवा जो ठान लेते है, वह दिखाते हैं करके:पीएम मोदी ने ऐसे की युवाओं की शक्ति की प्रशंसा
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं की शक्ति की प्रशंसा करते हुए एक संदेश में आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति के महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि आज हमारा देश अपने सपनों को साकार कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की युवा शक्ति का दृढ़ संकल्प अतुलनीय है। उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, भारतवर्ष की युवाशक्ति का दृढ़ संकल्प अतुलनीय है। हमारे युवा साथी जो ठान लेते हैं, वो करके दिखाते हैं। यही वजह है कि आज हमारा देश अपने सपनों को साकार कर रहा है।उन्होंने एक संस्कृत सुभाषितम भी शेयर किया है। पीएम मोदी ने लिखा, न वा उ मां वृजने वारयन्ते न पर्वतासो यदहं मनस्ये। मम स्वनात् कृधुकर्णो भयात एवेदनु द्यून्किरणः समेजात। संस्कृत सुभाषितम कहा गया है, आपके आत्मविश्वास की शक्ति गहन है। कोई भी आपके आत्मनिर्णय को कुचल नहीं सकता। बड़े पहाड़ के आकार की बड़ी बाधाएं भी आपके मार्ग में बाधा नहीं डाल सकतीं। आप सूर्य से अधिक शक्तिशाली हैं बशर्ते आपके पास इच्छा-शक्ति हो।बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने दिसंबर 2025 से भारतीय परंपरा के कालजयी ज्ञान को आधुनिक नीति और जन-संवाद से जोड़ने के लिए समय-समय पर संस्कृत सुभाषित (प्रेरणादायक श्लोक) शेयर करना शुरू किया है। वे अक्सर अपने भाषणों, मन की बात और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से संस्कृत सुभाषित शेयर करते हैं।संस्कृत सुभाषितों को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करके प्रधानमंत्री मोदी समकालीन शासन को भारत की सभ्यतागत ज्ञान से सचेत रूप से जोड़ रहे हैं और प्राचीन श्लोकों का उपयोग विकास, स्थिरता, लैंगिक न्याय, नैतिक नेतृत्व और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व जैसी आधुनिक प्राथमिकताओं को समझाने के लिए कर रहे हैं। पीएम मोदी ने 8 दिसंबर को पहले सुभाषित में भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन में संस्कृत की स्थायी प्रासंगिकता को रेखांकित किया था।

यादों में राष्ट्र ऋषि :जेपी की ढाल और आपातकाल का 'अंडरग्राउंड कमांडर'
नई दिल्ली । कल्पना कीजिए एक ऐसे लड़के की, जिसके पास स्कूल की फीस भरने और किताबें खरीदने तक के भी पैसे नहीं थे। वह अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए कड़कड़ाती धूप में गलियों में सब्जियां बेचा करता था। किसे पता था कि सब्जी बेचने वाला यह साधारण सा लड़का एक दिन भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा रणनीतिकार बनेगा? कोई यह सोच भी नहीं सकता था कि यह शख्स देश के प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए कैबिनेट मंत्री के पद को मुस्कुराते हुए ठुकरा देगा? यह कहानी है भारत के 'राष्ट्र ऋषि' चंडिकादास अमृतराव देशमुख की, जिन्हें दुनिया प्यार और सम्मान से 'नानाजी देशमुख' के नाम से जानती है। 11 अक्टूबर, 1916 को महाराष्ट्र के परभणी में जन्मे नानाजी देशमुख बचपन से ही बाल गंगाधर तिलक के विचारों से प्रभावित थे। जब वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक डॉ. हेडगेवार के संपर्क में आए, तो उनके जीवन की दिशा ही बदल गई। उन्होंने अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया।संघ ने जब उन्हें उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में काम करने के लिए भेजा, तो उनकी जेब खाली थी। संगठन के पास न पैसा था, न कोई ठिकाना। उन्हें रहने के लिए धर्मशालाओं का सहारा लेना पड़ा। लेकिन मुसीबत यह थी कि उस समय धर्मशाला के नियम के अनुसार कोई भी व्यक्ति तीन दिन से ज्यादा नहीं रुक सकता था। ऐसे में नानाजी देशमुख को हर तीसरे दिन अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर नई जगह तलाशनी पड़ती थी।अंततः, प्रसिद्ध समाजसेवक बाबा राघवदास ने उन्हें अपने घर में इस शर्त पर पनाह दी कि नानाजी रोज उनके लिए खाना पकाया करेंगे। एक रसोइये और प्रचारक की दोहरी भूमिका निभाते हुए, इस युवा ने महज तीन साल के भीतर गोरखपुर और उसके आस-पास के इलाकों में संघ की 250 शाखाएं खड़ी कर दीं। यह उनके अदम्य साहस और जमीनी कौशल का पहला बड़ा प्रमाण था। नानाजी देशमुख का व्यक्तित्व ऐसा था कि घोर राजनीतिक विरोधी भी उनके मुरीद हो जाते थे। 1948 में जब महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर प्रतिबंध लगा, तो नानाजी ने संगठन का काम गुप्त रूप से जारी रखा।दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान उन्होंने अपना 'अंडरग्राउंड' नेटवर्क पंडित नेहरू की कैबिनेट के मंत्री और दिग्गज कांग्रेसी नेता रफी अहमद किदवई के घर से संचालित किया। एक धुर विरोधी नेता के घर में बैठकर अपनी रणनीति को अंजाम देना, यह केवल नानाजी देशमुख की कूटनीतिक समझ और व्यक्तिगत संबंधों की गहराई के कारण ही संभव था।1975 में जब इंदिरा गांधी ने देश पर 'आपातकाल' थोपा, तब भी नानाजी देशमुख गिरफ्तारी से बच निकले। कभी सरदारजी के भेष में, तो कभी मूंछें लगाकर एक व्यापारी के रूप में, वे पूरे देश में घूमते रहे और लोकतंत्र की बहाली के लिए एक जमीनी आंदोलन खड़ा कर दिया। 1974 के जेपी आंदोलन के दौरान पटना में एक विशाल जन-प्रदर्शन हो रहा था। अचानक पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस की लाठियां सीधे 70 पार कर चुके जयप्रकाश नारायण (जेपी) की तरफ आ रही थीं। उसी क्षण, नानाजी देशमुख एक ढाल बनकर जेपी के ऊपर लेट गए। पुलिस की बेरहम लाठियों से नानाजी की बांह की हड्डी टूट गई, लेकिन उन्होंने लोकतंत्र के उस महान नायक को खरोंच तक नहीं आने दी।इस अदम्य साहस और उनके द्वारा बुने गए विपक्षी गठजोड़ ने 1977 में कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ फेंका। जब मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी, तो नानाजी देशमुख को उद्योग मंत्रालय का प्रस्ताव दिया गया। लेकिन नानाजी ने मंत्री पद ठुकरा दिया। और फिर 60 वर्ष की आयु में उन्होंने वह किया जो भारतीय राजनीति में अकल्पनीय है। उन्होंने सक्रिय राजनीति से हमेशा के लिए संन्यास लेने की घोषणा कर दी। उनका मानना था कि 60 के बाद नेताओं को कुर्सी छोड़कर समाज सेवा करनी चाहिए।उन्होंने 'दीनदयाल शोध संस्थान' (डीआरआई) के जरिए एक अनोखा मॉडल पेश किया। 'समाज शिल्पी दंपति' (एसएसडी), इसमें पढ़े-लिखे नवविवाहित जोड़ों को 5 साल के लिए गांवों में भेजा जाता था। जोड़ों को इसलिए चुना गया ताकि गांव की महिलाएं बिना किसी झिझक के महिला कार्यकर्ता से अपनी परेशानियां साझा कर सकें। इन जोड़ों ने आदिवासी इलाकों में अंधविश्वास मिटाए, कुपोषण खत्म किया और शिक्षा की नई अलख जगाई।लेकिन 'विवाद-मुक्त ग्राम' सबसे बड़ी क्रांति थी। नानाजी देशमुख का मानना था कि मुकदमों में उलझा गांव कभी तरक्की नहीं कर सकता। उन्होंने महिलाओं और बुजुर्गों को जिम्मेदारी दी कि गांव का कोई भी झगड़ा पुलिस थाने या अदालत तक न जाए। फैसले चौपाल पर, आपसी सहमति से होने लगे।यह मॉडल इतना सफल हुआ कि जब 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने चित्रकूट का दौरा किया, तो वे इन मुकदमों से आजाद गांवों को देखकर हैरान रह गए। उन्होंने देश भर के जजों के सामने 'चित्रकूट मॉडल' की मिसाल पेश की। नानाजी देशमुख को भारत रत्न और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। 27 फरवरी 2010 को 94 वर्ष की आयु में नानाजी देशमुख ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

भारत की धरती से चुन-चुन कर बाहर किए जाएंगे घुसपैठिए:बिहार की भूमि से शाह ने दिया संख्त संदेश, कहा- यह चुनावी वादा नहीं, सरकार है दृढ़संकल्प
अररिया। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के अररिया में गुरुवार को घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि देश को घुसपैठियों से मुक्त कराना कोई चुनावी वादा नहीं, बल्कि केंद्र सरकार का दृढ़ संकल्प है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “हम एक-एक घुसपैठिए को भारत की भूमि से चुन-चुनकर बाहर करेंगे। यह सिर्फ घोषणा नहीं, बल्कि जल्द शुरू होने वाली ठोस कार्रवाई है।”केंद्रीय गृह मंत्री अररिया जिले में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बॉर्डर आउट पोस्ट ‘लेटी’ और ‘इंदरवा’ के उद्घाटन तथा एसएसबी के विभिन्न कार्यों के ई-लोकार्पण और ई-शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने सीमा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की विस्तार से जानकारी दी।सड़क निर्माण से सीमा की निगरानी में होगी वृद्धि अमित शाह ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा सड़क योजना के तहत 556 किलोमीटर लंबी बॉर्डर रोड को स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना के 18 खंडों में से 14 खंडों का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष चार खंडों में निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण पूरा होने से सीमा पर निगरानी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों को बेहतर आवागमन और विकास योजनाओं का लाभ भी मिलेगा।एसएसबी के जवानों को सराहाएसएसबी के जवानों की सराहना करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि वे देश की सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत-नेपाल सीमा एक मित्र देश के साथ लगती है और दोनों देशों के संबंध सौहार्दपूर्ण हैं, लेकिन यह भी आवश्यक है कि देशविरोधी तत्व इस मैत्रीपूर्ण सीमा का दुरुपयोग न कर सकें। इसके लिए सीमा बल को सतर्क रहने और अपने खुफिया तंत्र को मजबूत बनाए रखने की जरूरत है।सीमा से अतिक्रमण हटाने दिए निर्देशउन्होंने जोर देकर कहा कि सीमावर्ती गांवों में जवानों और अधिकारियों का स्थानीय लोगों से बेहतर संवाद होना चाहिए। गांवों से समय पर और सही सूचना मिलने पर घुसपैठ की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है। अमित शाह ने घोषणा की कि सीमा से 10 किलोमीटर के दायरे में जितने भी अवैध अतिक्रमण हैं, उन्हें अभियान चलाकर हटाया जाएगा। साथ ही घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें भारत से बाहर भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन से पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार के कई इलाके प्रभावित हुए हैं।उन्होंने सीमांचल की जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि घुसपैठिए केवल चुनाव को प्रभावित नहीं करते, बल्कि गरीबों के राशन में हिस्सेदारी लेते हैं, युवाओं के रोजगार के अवसर कम करते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनते हैं। गृह मंत्री ने विश्वास जताया कि सीमांचल क्षेत्र में जल्द ही व्यापक अभियान शुरू किया जाएगा, जिससे सीमा सुरक्षा और आंतरिक व्यवस्था दोनों को मजबूत किया जा सके।

पर्यावरण का संरक्षण मेरे जीवन का पवित्र उद्देश्य:शिवराज ने कार्यकर्ताओं से की अपील, भांजे-भांजियों को याद दिलाया अपना जन्मदिन भी
नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को अपने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि वे उनके जन्मदिन पर एक पेड़ जरूर लगाएं और उसकी फोटो खींचकर उन्हें भेजें, जिससे उनका जन्मदिन सार्थक हो जाएगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि प्रिय बहनों-भाइयों और भांजे-भांजियों, हमारा जीवन किसलिए है। वो कैसे सफल और सार्थक होगा। वो सार्थक होगा किसी अच्छे उद्देश्य के लिए जीने से। पर्यावरण का संरक्षण मेरे जीवन का एक पवित्र उद्देश्य रहा है और इसलिए मैं रोज पौधा लगाता हूं। 5 मार्च को मेरा जन्मदिन है। आप स्नेह के कारण, प्रेम और आत्मीयता के कारण उसे उत्साह से मनाते भी हैं। राजनीतिक क्षेत्र का कार्यकर्ता होने के कारण कई कार्यकर्ता होर्डिंग लगा देते हैं। कई आत्मीयजन शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह लेकर आते हैं। लेकिन, 5 मार्च को इस बार मेरी आप सबसे अपील है कि जन्मदिन को भी उद्देश्यपूर्ण बनाएं।हर सेवा है महत्वपूर्णशिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मेरे जन्मदिन पर न फूल-मालाएं, न शॉल, न श्रीफल, न स्मृति चिन्ह, न होर्डिंग, बस इस दिन एक पेड़ जरूर लगाएं और उसका फोटो अपलोड कर दें या मुझे भेज दें। मेरा जन्मदिन सार्थक हो जाएगा। हर सेवा महत्वपूर्ण है, लेकिन जब मैं गहराई में सोचता हूं तो पौधा लगाना इस दुनिया की सबसे बड़ी सेवा है। पेड़ हर एक के काम आते हैं। मनुष्यों को जीने के लिए जरूरी हैं। कीट-पतंगे और पक्षी उनका घर और भोजन हैं पेड़। पशुओं को छांव भी देते हैं और भोजन भी देते हैं। धरती का शृंगार भी हैं और धरती का जीवन भी हैं पेड़। पौधा लगाना इस संसार की सबसे बड़ी सेवा है और इसीलिए तो मैं पौधा लगाता हूं। आप पौधा लगाएं, केवल मेरे जन्मदिन पर नहीं, अपने जन्मदिन पर भी। मैं बीते 5 वर्षों से प्रतिदिन पौधा लगा रहा हूं।एआई समिट में यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन भी बोले शिवराजएआई समिट में यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि मैं कृषि मंत्री और किसान हूं, मैं आपको पूरे विश्वास के साथ कह रहा हूं कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में हुए कृषि समझौते भारत के किसानों के हित में हैं। कुछ लोग गलतफहमी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, रोज झूठ बोलते हैं। एआई समिट में जाकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कपड़े उतारे। ये भारत माता का अपमान है।

भारत का वांटेड अपराधी अनिल कुमार रेड्डी का यूएई से प्रत्यर्पण:सीबीआई की मेहनत लाई रंग, कई मामलों में था वांछित
नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की मदद से वांटेड अपराधी के अनिल कुमार रेड्डी को यूएई से गिरफ्तार करके भारत लाया गया है। वह कई मामलों में धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग और आपराधिक धमकी के आरोपों में वांछित था। सीबीआई ने इसकी जानकारी दी। सीबीआई ने इंटरपोल चैनलों के जरिए यूएई से वांछित भगोड़े अनिल कुमार रेड्डी येद्दुला की भारत वापसी का समन्वय किया। भगोड़े अनिल के खिलाफ सीबीआई की इंटरनेशनल पुलिस कोऑपरेशन यूनिट (आईपीयूसी) ने विदेश मंत्रालय (एमईए) और एनसीबी-अबू धाबी के सहयोग से रेड नोटिस जारी कराया था। सीबीआई ने आंध्र प्रदेश पुलिस के अनुरोध पर 5 सितंबर 2022 को इस मामले में इंटरपोल के माध्यम से यह रेड नोटिस जारी कराया था।दुबई लेकर पहुंची हैदराबादइसके बाद यूएई के अधिकारियों ने भगोड़े अनिल को गिरफ्तार कर लिया और फिर उसे भारतीय एजेंसी को सौंपने का फैसला लिया गया। गुरुवार को अनिल कुमार रेड्डी को दुबई पुलिस की एक टीम एस्कॉर्ट करके दुबई से हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ले आई। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद एयरपोर्ट पर उसे आंध्र प्रदेश की पुलिस टीम को सौंप दिया गया।सीबीआई ने सफलता पूर्वक आपरेशन को दिया आंमाजपिछले महीने भारत में सीबीआई ने एनसीबी-कुआलालंपुर के साथ मिलकर एक अहम अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इंटरपोल के कोऑपरेशन सिस्टम के तहत तीन रेड नोटिसधारी व्यक्तियों श्रीधरन सुब्रमण्यम, प्रतीफकुमार सेल्वराज और नवींद्रन राज कुमारसन को भारत से मलेशिया डिपोर्ट किया गया।

पीएम मोदी के इजराइयल दौरे का चर्चित पलः:नेतन्याहू ने रात्रि भोज में भारतीय परिधान पहनकर दोस्त को दिया सरप्राइज, चौंके और भी देश
नई दिल्ली-यरूशलम। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर इजरायल पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू ने एयरपोर्ट पर स्वयं उपस्थित होकर प्रधानमंत्री मोदी का अभिनंदन किया। इस दौरान दोनों देशों के बीच दोस्ती और साझेदारी की झलक साफ दिखाई दी।दौरे का सबसे खास और चर्चित पल तब आया जब प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में आयोजित रात्रि भोज में पारंपरिक भारतीय परिधान पहनकर सभी को चैंका दिया। नेतन्याहू ने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने अपने मित्र प्रधानमंत्री मोदी को पारंपरिक भारतीय वेशभूषा पहनकर सरप्राइज दिया। उनकी इस पहल को भारत-इजरायल की सांस्कृतिक नजदीकियों का प्रतीक माना जा रहा है।एयरपोर्ट पर स्वागत के दौरान एक रोचक क्षण भी देखने को मिला। जब सारा नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी से हाथ मिलाया, तो नेतन्याहू ने मुस्कुराते हुए दोनों के परिधानों के रंग की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी और प्रधानमंत्री मोदी के वस्त्रों का ‘सैफरन’ रंग एक-दूसरे से मेल खा रहा है। इस टिप्पणी पर वहां मौजूद सभी लोग हंसी में शामिल हो गए और माहौल बेहद आत्मीय हो गया।दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल की संसद ज्ञदमेेमज को भी संबोधित किया। ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। संसद में उनके स्वागत में सांसदों ने खड़े होकर अभिवादन किया और स्पीकर ने हिंदी में उनका स्वागत किया, जो भारत-इजरायल संबंधों की गहराई को दर्शाता है।संसद में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी को “प्रिय मित्र” और “भाई” बताते हुए कहा कि उनके आगमन से उन्हें अत्यंत खुशी हुई है। उन्होंने दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में व्यापार दोगुना, सहयोग तिगुना और आपसी समझ चैगुनी हुई है। उन्होंने भूमध्य सागर तट पर हुई अपनी पिछली मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने साथ मिलकर कई “चमत्कार” किए हैं।यह दौरा भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला माना जा रहा है।

प्रयागराजः BSNL निदेशक को VIP ट्रीटमेंट मिलने पर भड़के सिंधिया:कहा- ऐसा आचरण अस्वीकार्य, नोटिस देकर 7 दिन में मांगा जवाब
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भारत संचार निगम लिमिटेड के निदेशक विवेक बंसल की प्रस्तावित यात्रा के दौरान वीआईपी ट्रीटमेंट का खुलासा होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को विवेक बंसल को वीआईपी ट्रीटमेंट मिलने को अनुचित और नियमों का उल्लंघन बताया। साथ ही कहा कि ऐसा आचरण अस्वीकार्य और हैरान करने वाला है। उन्होंने यह भी बताया कि इस कार्य के लिए अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सिंधिया ने कहा कि यह घटना स्थापित नियमों और परंपराओं का उल्लंघन है। सिंधिया ने कहा,“कल मीडिया ने मुझसे कुछ सवाल पूछे और मैंने साफ कर दिया है कि यह अनुचित है और स्थापित नियमों और परंपराओं का उल्लंघन है। यह मुझे बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। यह बेहद हैरान करने वाला है।” उन्होंने आगे कहा,“निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है और उन्हें सात दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है। हम उचित कार्रवाई करेंगे।”सिंधिया ने आगे इस बात पर जोर दिया कि आज के दौर में अधिकारियों के लिए किसी भी प्रकार का रॉयल ट्रीटमेंट अकल्पनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उप महाप्रबंधक द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, यात्रा से जुड़े 21 अलग-अलग कार्यों के प्रबंधन के लिए दो दिनों में लगभग 50 कर्मचारियों को तैनात किया गया था।रिपोर्ट के अनुसार, मिनट-दर-मिनट की योजना में नौका विहार, मंदिर दर्शन, त्रिवेणी संगम में स्नान और तौलिये, तेल, कंघी और यहां तक कि अंतर्वस्त्रों से युक्त स्नान किट की तैयारी शामिल थी। अधिकारियों को सूट की व्यवस्था करना, तस्वीरें खींचना, परिवहन का प्रबंध करना और वाहनों में पानी की बोतलें, चॉकलेट, चिप्स और अन्य पेय पदार्थ रखना जैसे काम भी सौंपे गए थे।इस निजी यात्रा से जुड़े दस्तावेज सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया और लोग इसकी खुलकर आलोचना कर रहे हैं। विवाद सामने आने के तुरंत बाद, बंसल की यात्रा रद्द कर दी गई। बता दें, सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल ने पिछली तिमाही में 1,300 करोड़ रुपए से अधिक का घाटा दर्ज किया था। हालांकि, कंपनी का इसे लेकर कोई बयान सामने नहीं आया है।

उन्हें शर्म आनी चाहिए:एआई समिट में यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रोटेस्ट को लेकर राहुल पर बरसे केन्द्रीय मंत्री, कहा- वह नहीं सुधरने वाले
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए शर्टलेस प्रोटेस्ट को लेकर कांग्रेस भाजपा के निशाने पर है। एनडीए के नेता आए दिन कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोल रहे हैं। इसी क्रम में केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने राहुल पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकर्ताओं ने एआई समिट के दौरान भारत को बदनाम करने की साजिश रची और राहुल गांधी उनका समर्थन कर रहे हैं। उन्हें शर्म आनी चाहिए और माफी मांगनी चाहिए थी। लेकिन, राहुल गांधी कभी सुधरने वाले नहीं हैं। दिल्ली पुलिस द्वारा मंगलवार को इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब की गिरफ्तारी पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध हमारी ऐतिहासिक धरोहर है। यह हमारे खून में है और हर भारतीय का लोकतांत्रिक अधिकार है। मुझे युवा कांग्रेस के अपने बब्बर शेर साथियों पर गर्व है, जिन्होंने निडर होकर देश के हित में आवाज उठाई है। अमेरिका के साथ हुए ट्रेड डील में देश के हितों से समझौता किया गया है। यह समझौता हमारे किसानों और टेक्सटाइल उद्योग को नुकसान पहुंचाएगा तथा हमारे डेटा को अमेरिका के हाथों में सौंप देगा। सत्ता को सच का आईना दिखाना अपराध नहीं, देशभक्ति है। नेता प्रतिपक्ष की बातें सुनकर आ जाती है हंसीः सिंहराहुल गांधी के बयान पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की बातें सुनकर सचमुच हंसी आ जाती है। आप बार-बार खुद को हास्यास्पद क्यों बना लेते हैं? देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। उनके लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि है। वे आपकी तरह हर मुद्दे पर अनावश्यक बयानबाजी नहीं करते, बल्कि देश के हित में दृढ़ और ठोस निर्णय लेते हैं। यही कारण है कि आज देश निरंतर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। लेकिन, राहुल गांधी को देश का विकास नहीं दिखाई देगा। उन्होंने गलत चश्मा लगाया हुआ है। पीएम मोदी देशहित में समर्पित हैं और आप बेतुके बयान देते रहते हैं। अपने में सुधार लाइए, आपका भला होगा। हालांकि, आप मानने वाले नहीं हैं, आप आदत से लाचार हैं, पीएम मोदी देश को आगे बढ़ाते रहेंगे।एआई समिट को सराहा पूरी दुनिया नेउन्होंने कहा कि एआई समिट को पूरी दुनिया ने सराहा। लेकिन, राहुल गांधी के इशारे पर वहां पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने शर्टलेस प्रोटेस्ट किया। राहुल गांधी ने पूरे विश्व के सामने भारत को बदनाम किया। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि पूरे देश के सामने राहुल गांधी के कार्यकर्ताओं ने जो किया है, वह देशद्रोह नहीं तो क्या है। देशद्रोह क्या होता है, देश का मान-सम्मान गिराना देशद्रोह होता है। राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए थी। लेकिन, नहीं मांगेंगे, क्योंकि आप कभी सुधरने वाले नहीं हैं। भगवान आपका भला करे।

एनसीईआरटी की बुक में कटघरे में न्यायपालिका: व्यथित सीजेआई ने कही यह बात, जानें क्या है पूरा मामला
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार को एनसीईआरटी की क्लास 8 की नई किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े चैप्टर पर आपत्ति जताई। सीजेआई ने कहा कि किसी को भी इस बात की इजाजत नहीं दी जाएगी कि वो न्यायपालिका को बदनाम करें। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, मुकुल रोहतगी ने सीजेआई के सामने यह मामला उठाया था। कपिल सिब्बल ने कहा कि यह दुख की बात है कि कक्षा 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी है। उन्हें लगातार इस बारे में फोन कॉल, मैसेज मिल रहे हैं। बार और बेंच दोनों इससे व्यथित है। नाराजगी जाहिर करते हुए सीजेआई ने कहा, संस्था का प्रमुख होने के नाते मैंने हमेशा अपने दायित्व को निभाया है। मैं किसी को इस बात की इजाजत नहीं दूंगा कि वो न्यायपालिका को बदनाम करें। किसी कीमत पर मैं इसकी इजाजत नहीं दूंगा, कोई कितना भी बड़ा क्यों न हो। कानून अपना काम करेगा। मैं जानता हूं कि इससे कैसे निपटा जाए। मैं स्वतरू संज्ञान ले रहा हूं।यह सोची-समझी चालः चीफ जस्टिसमुख्य न्यायाधीश ने कहा, यह सोची समझी चाल प्रतीत होती है। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कहूंगा। सीजेआई के रूप में मैं अपनी ड्यूटी निभा रहा हूं। इस मामले पर बेंच के दूसरे सदस्य जस्टिस बागची ने कहा कि यह (चैप्टर) संविधान के बुनियादी ढांचे के खिलाफ है। दरअसल, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की नई रिलीज हुई क्लास 8 की सोशल साइंस किताब में श्हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिकाश् शीर्षक अध्याय के तहत श्ज्यूडिशियरी में करप्शनश् पर एक सेक्शन शुरू किया गया है।संशोधित अध्याय में इनका किया गया उल्लेखसंशोधित अध्याय में न्यायपालिका के समक्ष मौजूद प्रमुख चुनौतियों के रूप में न्यायपालिका के अलग-अलग स्तरों पर भ्रष्टाचार के अलावा जजों की कमी, मुश्किल कानूनी प्रक्रियाएं और कमजोर बुनियादी ढांचा जैसी अनेक वजहों से लंबित मामलों का भारी बोझ का उल्लेख किया गया है। इसके विपरीत, पिछली किताब में मुख्य रूप से न्यायपालिका की भूमिका, स्वतंत्र न्यायपालिका की अवधारणा, अदालतों की संरचना और नागरिकों की उन तक पहुंच की व्याख्या की गई थी, जिसमें भ्रष्टाचार का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। नए एडिशन में करप्शन का विषय शामिल करने पर आलोचना की गई है।

दिल्ली में दिल दहला देने वाली वारतदा:समयपुर बादली में क्रूर पति ने पत्नी और तीन मासूमों की गला रेतकर की हत्या, कमरे का मंजर देख पुलिस रह गई दंग
नई दिल्ली। दिल्ली के समयपुर बादली इलाके से दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। यहां पर बुधवार सुबह एक ही परिवार के चार सदस्यों की निर्मम हत्या कर दी गई है। इसमें तीन मासूम बच्चे और एक महिला शामिल है। इस जघन्य हत्या की खबर फैलते ही इलाके में हड़कंप मच गया है। चारों की हत्या किसी धारदार हथियार से गला रेतकर की गई है। पुलिस को शक है कि इस जघन्य हत्याकांड को महिला के पति ने ही अंजाम दिया है, जो फिलहाल फरार है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।यह दर्दनाक घटना समयपुर बादली के चंदन पार्क इलाके की है। पुलिस को सूचना मिली थी कि एक घर के अंदर चार लोगों के शव पड़े हैं। प्रारंभिक जांच में गला दबाकर हत्या किए जाने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि पुलिस ने आधिकारिक रूप से मौत के कारणों की पुष्टि नहीं की है। बताया जा रहा है कि जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो कमरे का मंजर देखकर दंग रह गई। महिला और उसके तीनों नाबालिग बच्चियों के गले कटे हुए थे और चारों तरफ खून फैला हुआ था। तीनों बच्चियों की उम्र, 3 साल, 4 साल और 5 साल बताई जा रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि महिला के पति ने ही कथित तौर पर अपनी पत्नी और बच्चों की बेरहमी से हत्या की और मौके से भाग निकला। आरोपी सब्जी बेचने का काम करता है।महिला का प्रति आजादपुर मंडी में डिस्ट्रीब्यूटर का करता था कामपुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिला का पति, जो आजादपुर मंडी में डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में काम करता है, घटना के बाद से फरार है। संदेह के आधार पर उसी की तलाश की जा रही है। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है और पड़ोसियों से पूछताछ की जा रही है। चारों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए शववारदात की गंभीरता को देखते हुए जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, क्राइम टीम और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को तुरंत मौके पर बुलाया गया। फॉरेंसिक टीम ने घर के अंदर से उंगलियों के निशान और अन्य साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस ने चारों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है ताकि मौत के सटीक समय और तरीके का पता लगाया जा सके।आरोपी की तलाश में जुटी कई टीमेंएक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली है। फरार आरोपी पति को पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस की कई विशेष टीमें गठित की गई हैं। पड़ोसियों और रिश्तेदारों से पूछताछ की जा रही है ताकि हत्या की असली वजह का पता चल सके और फरार आरोपी के संभावित छिपने के ठिकानों का पता चल सके।


