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सोम डिस्टलरीज की दो यूनिटों के लायसेंस निलंबित : नकली परमिट और कूटरचित दस्तावेजों से जुड़ा है मामला

नकली परमिट और कूटरचित दस्तावेजों से जुड़ा है मामला
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admin

Feb 05, 202611:13 AM

भोपाल। नकली शराब परिवहन परमिटों एवं अवैध शराब के परिवहन करने के मामले में आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने मप्र के रायसेन की चर्चित आसवनी मेसर्स सोम डिस्टलरीज प्रायवेट लिमिटेड सेहतगंज, जिला रायसेन के डी-1, एफएल-9, सीएस-1 एवं सीएस-1बी तथा मेसर्स सोम डिस्टलरीज एण्ड ब्रेवरीज लिमिटेड, रोजराचक, जिला रायसेन के एफएल-9, एफएल-9-ए ऑफ बी 3 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

नकली परमिट, कूटरचित दस्तावेज और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित इस मामले में अपर सत्र न्यायाधीश देपालपुर ने कंपनी सहित विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों को भी दोषी माना था। न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि आरोपियों ने मिलकर शराब परिवहन के कूटरचित परमिट व बिल्टी तैयार की। फर्जी परमिट को असली बताकर उपयोग किया। शासन को राजस्व हानि और कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया। न्यायालय ने मेसर्स सोम डिस्टलरीज समूह के प्रतिनिधियों, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और निदेशक सहित कई आरोपियों को कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया था। हालांकि उच्च न्यायालय, इंदौर ने सत्र न्यायालय ने सजा पर रोक लगा दी थी। लेकिन लायसेंस पर रोक नहीं लगाई थी।

आबकारी आयुक्त ने स्वयं की कार्रवाई की पहल

प्रकरण में पारित आदेशों में आरोपियों द्वारा उच्च न्यायालय, इंदौर के समक्ष प्रस्तुत दो प्रकरणों में दोनों इकाईयों के पक्ष में स्वीकृत लायसेंस के निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है अथवा नहीं, इस संबंध में आबकारी आयुक्त ने पहले अतिरिक्त महाधिवक्ता ग्वालियर को पत्र लिखकर अभिमत मांगा, लेकिन अभिमत नहीं मिल सका। इसके बाद 25 जुलाई 2024 को अतिरिक्त महाधिवक्ता, उच्च न्यायालय जबलपुर को पत्र लिखकर अभिमत मांगा। इसके बाद तीन और पत्र भी लिखे थे। लेकिन अभिमत 24 दिसम्बर 2025 को महाधिवक्ता, उच्च न्यायालय जबलपुर से मिला। सोम की दोनों इकाईयों पर निलंबन की कार्रवाई किए जाने के पक्ष में अभिमत मिल सका।

महाधिवक्ता के अभिमत तथा इकाईयों द्वारा प्रस्तुत जवाब के बाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित दो आदेशों की आद्यतन स्थिति जानने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि उच्च न्यायालय ने आरोपियों को सजा पर रोक लगाई। इन आदेशों में सोम की दोनों इकाईयों के पक्ष में स्वीकृत लायसेंस पर किसी प्रकार की रोक लगाए जाने का उल्लेख नहीं था। इसलिए आबकारी आयुक्त ने दोनों इकाईयों के सभी लायसेंस निलंबित कर दिए।

विभागीय अमले पर हो चुकी है सख्त कार्रवाई

नकली शराब परिवहन परमिटों एवं अवैध शराब के परिवहन मामले में अपर सत्र न्यायाधीश, देवालपुर के निर्णय दिनांक 23 दिसम्बर 2023 के बाद दोषी विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई। इनमें आबकारी उप निरीक्षक प्रीति गायकवाड़ को 25 सितम्बर 2025 को सेवा से पदच्युत किया जा चुका है। जबकि सेवानिवृत्त हो चुके अन्य सभी अधिकारियों-कर्मचारियों मदन सिंह पवांर, सहायक जिला आबकारी अधिकारी, कैलाश चन्द्र बंगाली, जिला आबकारी अधिकारी एवं रामप्रसाद मिश्रा, आबकारी उप निरीक्षक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है।

आरोपियों ने इस तरह की थी गड़बड़ी

आरोपियों ने मिलकर परमिट क्र. 10363, ट्रक क्र. एमपी09 एचएफ 5185 की बिल्टी और अनेक परमिट बुक कूटरचित करने का अवैध काम, अवैध साधनों से करने के लिए अपराधिक षड्यंत्र बनाकर कूटरचित परमिट से छल करने के उद्देश्य से कूटरचना की। कूटरचित दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग किया गया, जिसमें आरोपी मदन सिंह ने 5 फर्जी परमिट बुक, विरेन्द्र भारद्वाज ने 272, रामप्रसाद मिश्रा ने 25, प्रीति गायकवाड़ ने 279, संजय गोहे ने 282, कैलाश बंगाली ने 29, मोहन सिंह तोमर ने 676, उमाशंकर ने 75 और दिनकर सिंह ने 65 फर्जी परमिट तैयार किए। आरोपियों ने शासन को नुकसान और मेसर्स सोम डिस्टलरीज प्रायवेट लिमिटेड को गलत तरीके से लाभ पहुंचाने के लिए यह कूटरचना की। परमिट और बिल्टी से मेसर्स सोम डिस्टलरीज प्रायवेट लिमिटेड, रोजराचक से दीव को परिवहन किया।

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