Download App

Latest News

बाजार की पाठशाला : पीएफ और ईपीएस क्या होते हैं, इनमें क्या है अंतर? रिटायरमेंट के बाद कैसे तय होती है पेंशन, समझें गणितगणतंत्र दिवस पर नई उड़ान : लद्दाख स्काउट्स भारत में आइस हॉकी को नई पहचान दिलाने को तैयार टीम मुझसे यही चाहती है : कीवियों की धुनाई करने के बाद बोले अभिषेक, युवी का रिकार्ड तोड़ना नामुमकिन से ज्यादा, पर...पद्म भूषण अवार्ड मिलने पर इमोशनल हुईं प्लेबैक सिंगर : फैंस का अदा किया शुक्रिया, क्या कहा जानें77वां गणतंत्र दिवसः कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति ने फहराया ध्वज : साक्षी बने विदेशी मेहमान, परेड में देखने को मिला सेना का शौर्य और अनदेशी ताकत

बाजार की पाठशाला : पीएफ और ईपीएस क्या होते हैं, इनमें क्या है अंतर? रिटायरमेंट के बाद कैसे तय होती है पेंशन, समझें गणित

पीएफ और ईपीएस क्या होते हैं, इनमें क्या है अंतर? रिटायरमेंट के बाद कैसे तय होती है पेंशन, समझें गणित
a

admin

Jan 26, 202610:12 PM

नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों की आर्थिक सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार उनका प्रोविडेंट फंड (पीएफ) और पेंशन स्कीम (ईपीएस) है। हर महीने सैलरी से कटने वाली रकम भविष्य के लिए जमा होती है, लेकिन अधिकतर कर्मचारी यह नहीं जानते कि यह पैसा किन हिस्सों में जाता है और रिटायरमेंट के बाद उन्हें इससे क्या फायदा मिलता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत ईपीएफ और ईपीएस दो अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं, जिनका उद्देश्य और लाभ भी अलग है।

ईपीएफ यानी कर्मचारी भविष्य निधि एक तरह की लॉन्ग टर्म सेविंग स्कीम है, जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान होता है। इसमें जमा रकम पर हर साल ब्याज मिलता है और रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने पर पूरी राशि निकाली जा सकती है। वहीं, ईपीएस यानी कर्मचारी पेंशन योजना का मकसद रिटायरमेंट के बाद हर महीने तय पेंशन देना होता है, ताकि बुढ़ापे में नियमित आमदनी बनी रहे।

कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए का 12 प्रतिशत हिस्सा सीधे उसके ईपीएफ खाते में जमा होता है। इसके अलावा नियोक्ता भी 12 प्रतिशत योगदान देता है, लेकिन यह दो भागों में बंटता है। नियोक्ता के योगदान का 8.33 प्रतिशत हिस्सा ईपीएस यानी पेंशन फंड में जाता है, जबकि बाकी 3.67 प्रतिशत ईपीएफ खाते में जमा होता है। सरकार ने पेंशन के लिए अधिकतम वेतन सीमा 15,000 रुपए तय की है, यानी इससे ज्यादा सैलरी होने पर भी पेंशन की गणना इसी सीमा के आधार पर होती है।

यह जानना जरूरी है कि पेंशन की राशि आपके ईपीएस खाते में जमा कुल रकम पर निर्भर नहीं करती। ईपीएफओ इसके लिए एक तय फॉमूर्ला लागू करता है। पेंशन की गणना पेंशन योग्य वेतन और पेंशन योग्य सेवा के आधार पर होती है। इसका फॉमूर्ला है: पेंशन योग्य वेतन ़ पेंशन योग्य सेवा रु 70। यही फॉमूर्ला तय करता है कि रिटायरमेंट के बाद आपको हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी।

ईपीएस स्कीम का एक बड़ा फायदा फैमिली पेंशन है। अगर किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान या पेंशन शुरू होने के बाद मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को पेंशन मिलती है। ईपीएफओ के नियमों के अनुसार, सदस्य की पत्नी या पति को उसकी पेंशन का 50 प्रतिशत हिस्सा आजीवन दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी सदस्य की पेंशन 7,500 रुपए थी, तो उसके निधन के बाद उसके जीवनसाथी को 3,750 रुपए प्रति माह पेंशन मिलेगी।

ईपीएस के तहत परिवार के दो बच्चों को भी पेंशन का लाभ मिलता है। प्रत्येक बच्चे को सदस्य की पेंशन का 25-25 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता है। यह बाल पेंशन 25 वर्ष की उम्र तक मिलती है। अगर बच्चे अनाथ हो जाते हैं, तो यह पेंशन बढ़ाकर 75 प्रतिशत तक कर दी जाती है। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपए से कम न हो।

आमतौर पर कर्मचारी को 58 साल की उम्र के बाद पेंशन मिलती है, लेकिन 50 साल की उम्र के बाद अर्ली पेंशन लेने का विकल्प भी मौजूद है। हालांकि, अर्ली पेंशन लेने पर हर साल 4 प्रतिशत की कटौती होती है। वहीं, अगर कोई कर्मचारी 58 साल के बाद भी काम जारी रखता है और पेंशन लेना टालता है, तो उसकी पेंशन में हर साल 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान है।

Powered by Tomorrow.io

Advertisement

Ad

Related Post

Placeholder