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नई दिल्ली। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को को मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग में लिए फैसलों की जानकारी शेयर कर दी है। आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। इसे 5.25 फीसदी पर यथावत रखा गया है। ऐसे में न लोन महंगे होंगे और न ही ईएमआई पर कोई असर पड़ेगा। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मॉनिटरी पॉलिसी की बैठक में रेपो रेट को नहीं बदलने का फैसला किया है
बता दें कि केंद्रीय बजट 2026 और हाल ही में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद यह पहली नीतिगत समीक्षा है, जिस पर दलाल स्ट्रीट और आर्थिक जगत की निगाहें टिकी थी। आरबीआई ने इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे यथास्थिति बनाए रखा है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि जहां ग्लोबल लेवल पर अनिश्चितता फैली हुई है, वहीं भारत में महंगाई पूरी तरह से कंट्रोल है। महंगाई दर आरबीआई के सीमा से नीचे बना हुआ है। महंगाई दर 4 फीसदी के आसपास बना हुआ है, जिसका मतलब है कि हमारी इंडस्ट्री और देश पर महंगाई का ज्यादा भार नहीं है।
आरबीआई गवर्नर ने जोर देकर कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और घरेलू मुद्रास्फीति व विकास का परिदृश्य सकारात्मक है। गवर्नर ने यह भी साफ किया कि भविष्य में मौद्रिक नीति संशोधित शृंखला पर आधारित नए मुद्रास्फीति आंकड़ों से निर्देशित होगी। इससे पहले साल 2025 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने उदार रुख अपनाते हुए रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की बड़ी कटौती की थी। दिसंबर 2025 में हुई साल की अंतिम मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट और घटा दिया गया, जिससे यह 5.5% से घटकर 5.25% पर आ गया था।
2026 की पहली एमपीसी के बाद मांग व खपत पर गवर्नर क्या बोले?
अर्थव्यवस्था के चालकों पर प्रकाश डालते हुए गवर्नर ने कहा कि कॉरपोरेट प्रदर्शन में सुधार और अनौपचारिक क्षेत्र में निरंतर गति से विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। मांग के मोर्चे पर, ग्रामीण मांग स्थिर बनी हुई है, जबकि शहरी खपत में और वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके अलावा, गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता और संभावित भारत-अमेरिका व्यापार सौदा निर्यात की गति को मजबूत समर्थन प्रदान करेंगे।
आर्थिक अनुमानों पर क्या बोले गवर्नर?
आरबीआई गवर्नर ने भविष्य के आर्थिक परिदृश्य पर भरोसा जताते हुए अगले वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के लिए विकास दर के अनुमान को संशोधित कर बढ़ा दिया है, जिसके क्रमशः 6.9 फीसदी और 7 फीसदी रहने की उम्मीद है। महंगाई के मोर्चे पर, चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति 2.1 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इसके 4 फीसदी और दूसरी तिमाही में 4.2 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है। वैश्विक हालात के बारे में बोलते हुए गवर्नर ने कहा कि जनवरी के अंत तक विदेशी मुद्रा भंडार 723.8 अरब डॉलर के बहुत ही स्वस्थ स्तर पर है और चालू वित्त वर्ष में चालू खाता घाटा भी श्मध्यमश् रहने की उम्मीद है।
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