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गौरीगणेश चतुर्थी : विघ्नहर्ता को प्रसन्न करने का उत्तम दिन, विघ्नहर्ता की आराधना से होता है विघ्नों का नाश

 विघ्नहर्ता को प्रसन्न करने का उत्तम दिन, विघ्नहर्ता की आराधना से होता है विघ्नों का नाश
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admin

Jan 21, 202611:33 AM

नई दिल्ली। माघ मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि गुरुवार को पड़ रही है, जिसे गौरीगणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। यह दिन भगवान गणेश के गौरीगणेश स्वरूप की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में गणेश जी को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देवता के रूप में पूजा जाता है।

इस विशेष तिथि पर व्रत, पूजन, जप, तप, स्नान, दान और हवन आदि शुभ कर्म सहस्रगुणा फल प्रदान करते हैं। मुद्गल पुराण और भविष्य पुराण जैसे ग्रंथों में चतुर्थी व्रत को समस्त अभीष्ट सिद्धि देने वाला बताया गया है। श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करने से गणेश भक्ति के साथ जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है और सभी प्रकार के विघ्नों का नाश होता है।

सनातन धर्म में किसी भी पूजा-पाठ या नए कार्य को करने से पहले पंचांग का विचार महत्वपूर्ण है। दृक पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 23 जनवरी की सुबह 2 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। शतभिषा नक्षत्र दोपहर 2 बजकर 27 मिनट तक है, उसके बाद पूर्व भाद्रपद शुरू होगा। योग वरीयान् शाम 5 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। वहीं, चंद्रमा कुंभ राशि में संचरण करेंगे। सूर्योदय 7 बजकर 14 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 52 मिनट पर होगा।

शुभ मुहूर्तों की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 20 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 19 मिनट से 3 बजकर 2 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 5 बजकर 49 मिनट से 6 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। मध्याह्न काल में गणेश पूजन करना विशेष रूप से शुभ फलदायी होता है। रवि योग सुबह 7 बजकर 14 मिनट से दोपहर 2 बजकर 27 मिनट तक है।

अशुभ समय का विचार भी महत्वपूर्ण है। राहुकाल दोपहर 1 बजकर 53 मिनट से 3 बजकर 12 मिनट तक रहेगा, इस दौरान कोई शुभ कार्य न करें। यमगण्ड सुबह 7 बजकर 14 मिनट से 8 बजकर 33 मिनट तक है। पूरे दिन पंचक व्याप्त है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, गौरी पुत्र गणेश की आराधना से जीवन के हर क्षेत्र में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत में गणेश पूजन अनिवार्य माना जाता है। गौरी गणेश चतुर्थी के दिन गजानन का विधि-विधान से पूजन, कर ओम गं गणपतये नमरू और उनके 12 नामों का जप करें। गणपति को दुर्वा, बेलपत्र चढ़ाकर मोदक और लड्डू का भोग लगाएं। गणेश अथर्वशीर्ष, संकटनाशन स्त्रोत का पाठ करना भी फलदायी होता है।

साथ ही गुरुवार को शक्ति की आराधना को समर्पित गुप्त नवरात्रि का चैथा दिन है। इस दिन मां भुनेश्वरी और मां छिन्नमस्ता की आराधना का विधान है।

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