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मस्तक पर चन्द्रमा, भांग और भस्म से मनमोहक श्रृंगार : बाबा महाकाल के निराकार स्वरूप का दर्शन कर धन्य हुए भक्त

बाबा महाकाल  के निराकार स्वरूप का दर्शन कर धन्य हुए भक्त
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admin

Jan 05, 202612:02 PM

उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में माघ मास कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर सोमवार सुबह भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। देर रात से लाइन लगाए भक्तों ने बाबा महाकाल की दिव्य भस्मारती का दर्शन कर अभिभूत हुए। ब्रह्म मुहूर्त में बाबा का भांग और भस्म से विशेष शृंगार किया गया।

महाकाल के मस्तक पर चंद्रमा और कमल लगाकर सजाया गया। यह दृश्य देखकर श्रद्धालु गदगद हो गए और मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। हजारों भक्त देर रात से ही लाइन में लगकर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचे। सुबह करीब 4 बजे बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया।

भगवान शिव का प्रिय अलंकार है भस्म

मान्यता है कि भस्म शिव का प्रिय अलंकार है, जो जीवन-मृत्यु के चक्र और निराकार स्वरूप का प्रतीक है। इस आरती में भाग लेने से भक्तों को संकटों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। दुनिया भर से श्रद्धालु भस्म आरती और बाबा के दर्शन के लिए उज्जैन आते हैं। भस्म आरती की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, हर दिन यहां हजारों भक्त शामिल होते हैं।

दुनिया में अपनी तरह की इकलौती है महाकाल मंदिर की भस्मारती

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती दुनिया में अपनी तरह की इकलौती आरती है, जो ब्रह्म मुहूर्त में सुबह करीब 4 बजे होती है। इस दौरान भगवान शिव का शृंगार और आरती भस्म की जाती है, जो पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। भस्म श्मशान से लाई गई ताजी चिता की राख से तैयार की जाती है। इसमें गोहरी, पीपल, पलाश, शमी और बेल की लकड़ियों की राख भी मिलाई जाती है।

बाबा महाकाल के निराकार स्वरूप में होते हैं दर्शन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय महाकाल निराकार स्वरूप में होते हैं, इसलिए महिलाएं सिर पर घूंघट या ओढ़नी डालकर रहती हैं। परंपरागत रूप से महिलाओं को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं होती, लेकिन वे बाहर से या विशेष व्यवस्था के अंतर्गत दर्शन कर सकती हैं। भस्म आरती में शंखनाद, ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चार के बीच भस्म चढ़ाई जाती है। इसके बाद पंचामृत अभिषेक और अन्य अलंकारों से बाबा को सजाया जाता है।

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