Download App

Latest News

नारायण की कृपा प्राप्ति का विशेष दिन तिल द्वादशी : तिल दान से मिलता है अश्वमेध यज्ञ जैसा फल

तिल दान से मिलता है अश्वमेध यज्ञ जैसा फल
a

admin

Jan 14, 202611:45 AM

नई दिल्ली। षटतिला एकादशी के अगले दिन मनाई जाने वाली तिल द्वादशी बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन तिल से स्नान, तिल का दान, तिल से हवन और तिल युक्त भोजन करने से बहुत लाभ मिलता है। हिंदू पंचांग के अनुसार द्वादशी तिथि है, जो रात 8रू16 बजे तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी शुरू हो जाएगी।

दृक पंचांग के अनुसार, नक्षत्र ज्येष्ठा है, जो अगले दिन यानी 16 जनवरी की सुबह 5 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। इसके बाद मूल नक्षत्र शुरू होगा। चंद्रमा पूरे दिन वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे। सूर्योदय सुबह 7 बजकर 15 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 46 मिनट पर होगा। चंद्रोदय 16 जनवरी की सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर और चन्द्रास्त दोपहर 2 बजकर 34 मिनट पर होगा। इस दिन वृद्धि योग है, जो रात 8 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। तैतिल करण रात 8 बजकर 16 मिनट तक चलेगा।

किसी भी कार्य को करने से पहले राहुकाल नोट कर लें। दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से 3 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य या नया काम नहीं करना चाहिए। भविष्य पुराण के अनुसार जब द्वादशी तिथि पर मूल नक्षत्र या पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र हो, तो इसे तिल द्वादशी कहा जाता है। इस साल 15 जनवरी को द्वादशी के साथ ज्येष्ठा नक्षत्र है और अगले दिन मूल नक्षत्र शुरू हो रहा है। इस संयोग में तिल द्वादशी व्रत का विशेष महत्व है।

धर्म शास्त्रों में उल्लेखित है कि तिल द्वादशी का व्रत करने से व्यक्ति को कई जन्मों तक भयानक रोगों जैसे अंधापन, बहरापन, कोढ़ आदि से मुक्ति मिलती है। यह व्रत स्वास्थ्य, लंबी आयु और सदा निरोगी रहने का वरदान देता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। व्रत रखने वाले लोग तिल से बने व्यंजन जैसे तिल के लड्डू, तिल की चिक्की आदि बनाते और दान करते हैं। तिल दान करने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर का फल मिलता है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार, पौष मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को कूर्म द्वादशी मनाई जाती है। इसके लगभग 15 दिन बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की द्वादशी को कृष्ण कूर्म द्वादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की पूजा का विशेष महत्व होता है।

Powered by Tomorrow.io

Advertisement

Ad

Related Post

Placeholder