संघर्ष से स्टार तक : मुकुल चौधरी ने आईपीएल में लिखी पिता के सपनों की जीत, गरीबी-कर्ज और तानों के बीच पला सपना

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 के चमकते मंच पर इन दिनों एक ऐसी कहानी सुर्खियां बटोर रही है, जो सिर्फ क्रिकेट नहीं बल्कि जुनून, त्याग और भरोसे की मिसाल है। राजस्थान के झुंझुनूं जिले के छोटे से गांव से निकले मुकुल चौधरी ने अपनी मेहनत से वो मुकाम हासिल किया, जिसकी नींव उनके पिता दलीप चौधरी ने वर्षों पहले रखी थी।
दलीप ने 2003 में ही तय कर लिया था कि अगर बेटा हुआ तो उसे क्रिकेटर बनाएंगे। 2004 में मुकुल का जन्म हुआ और उसी दिन से संघर्ष की शुरुआत भी। दलीप ने सरकारी नौकरी की तैयारी की, फिर रियल एस्टेट में हाथ आजमाया, लेकिन असफल रहे। इसके बावजूद उन्होंने अपने सपने को टूटने नहीं दिया।
बेटे के लिए घर बेचा, जेल भी गए पिता
2016 में बेहतर ट्रेनिंग के लिए मुकुल को सीकर की क्रिकेट अकादमी में दाखिला दिलाया गया। आर्थिक हालत खराब थी, लेकिन दलीप ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपना घर तक बेच दिया और 21 लाख रुपये बेटे के करियर में लगा दिए। इसके बाद होटल का कारोबार शुरू किया, लेकिन कर्ज का बोझ इतना बढ़ गया कि उन्हें जेल तक जाना पड़ा। रिश्तेदारों के ताने, समाज का दबाव-सब कुछ झेलते हुए भी दलीप अपने फैसले पर अडिग रहे।

आईपीएल में मौका और खुद से किया वादा
मुकुल के संघर्ष का फल तब मिला जब लखनउ सुपर जायंटस ने उन्हें 2.60 करोड़ रुपये में खरीदा। उन्होंने सबसे पहले पिता का कर्ज चुकाने का वादा किया। हालांकि शुरुआत आसान नहीं रही। सइनराज हैदराबाद के खिलाफ एक मैच में वह टीम को जीत नहीं दिला सके, जबकि कप्तान रिषभ पंत ने मैच खत्म किया। उस रात मुकुल भावुक हो गए, लेकिन पिता से किया वादा उन्हें आगे बढ़ाता रहा।
अगली पारी में दिया करारा जवाब
अगले ही मैच में मुकुल ने शानदार वापसी की। 27 गेंदों की उनकी दमदार पारी ने टीम को जीत दिलाई। यह सिर्फ एक इनिंग नहीं थी, बल्कि सालों के संघर्ष का जवाब थी। मुकुल के आदर्श महेन्द्र सिंह धोनी है। वह भी उसी तरह मैच फिनिश करना चाहते हैं जैसे धोनी ने 2011 क्रिकेट विश्व कप फाइनल में किया था। आज मुकुल चैधरी सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो कठिन हालात में भी अपने सपनों को जिंदा रखते हैं।
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