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सिर्फ सीने में दर्द नहीं! : दिल की बीमारी के ये संकेत भी हैं खतरनाक, समय रहते पहचानना जरूरी

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Sep 30, 2026
08:17 AM
दिल की बीमारी के ये संकेत भी हैं खतरनाक, समय रहते पहचानना जरूरी

नई दिल्ली। दिल शरीर का ऐसा महत्वपूर्ण अंग है, जो लगातार बिना रुके काम करता है। यह पूरे शरीर में खून और ऑक्सीजन पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाता है। जब दिल या उसे रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में समस्या आती है, तो शरीर कई तरह के संकेत दे सकता है। परेशानी यह है कि इन संकेतों को अक्सर गैस, थकान, तनाव या उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

दिल की बीमारी केवल हार्ट अटैक तक सीमित नहीं है। कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट फेलियर और हृदय की धड़कन से जुड़ी समस्याएं भी गंभीर हो सकती हैं। हार्ट अटैक में हमेशा तेज दर्द हो, यह जरूरी नहीं। सीने के बीच में दबाव, जकड़न, भारीपन या जलन भी चेतावनी संकेत हो सकते हैं। अगर ऐसी परेशानी कुछ मिनट रहे, ठीक होकर दोबारा शुरू हो या अन्य लक्षणों के साथ दिखाई दे तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

मामूली काम में भी फूलने लगे सांस

पहले की तुलना में सामान्य काम, थोड़ी दूरी चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर अधिक सांस फूलना भी ध्यान देने योग्य है। हार्ट फेलियर की स्थिति में सांस की समस्या धीरे-धीरे बढ़ सकती है। कुछ लोगों को रात में सांस लेने में परेशानी के कारण नींद से भी जागना पड़ सकता है।

लगातार थकान और कमजोरी भी संकेत

बिना स्पष्ट कारण के अत्यधिक थकान या कमजोरी को सिर्फ व्यस्त दिनचर्या से जोड़ना सही नहीं है। खासतौर पर महिलाओं में असामान्य थकान हार्ट अटैक से जुड़े लक्षणों में शामिल हो सकती है।

दर्द सीने से हाथ, पीठ या जबड़े तक पहुंचे

हृदय संबंधी परेशानी का दर्द केवल सीने तक सीमित नहीं रहता। यह एक या दोनों हाथों, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक महसूस हो सकता है। महिलाओं में पीठ, कंधे या जबड़े का दर्द भी कभी-कभी हृदय संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है।

सूजन, चक्कर और अचानक पसीना भी चेतावनी

पैरों और टखनों में लगातार सूजन शरीर में अतिरिक्त तरल जमा होने का संकेत हो सकती है। वहीं चक्कर, सिर हल्का लगना या अचानक पसीना आना भी महत्वपूर्ण लक्षण हैं। खासकर जब इनके साथ सीने में परेशानी या सांस फूलने जैसी समस्या हो, तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।

कब कराएं जांच?

इनमें से किसी एक लक्षण का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति को निश्चित रूप से हृदय रोग है। लेकिन नए, बार-बार होने वाले या बढ़ते लक्षणों को डॉक्टर से दिखाना जरूरी है। स्थिति के अनुसार म्ब्ळ, ब्लड टेस्ट, इकोकार्डियोग्राम, स्ट्रेस टेस्ट या अन्य जांच की सलाह दी जा सकती है।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए धूम्रपान से बचना, नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल व डायबिटीज को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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