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कमर से पैरों तक की जकड़न होगी दूर! : यह उन्नत योगासन शरीर को देगा गजब का संतुलन

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 12, 2026
10:18 AM
यह उन्नत योगासन शरीर को देगा गजब का संतुलन

नई दिल्ली। आज की दिनचर्या में लंबे समय तक बैठे रहना, कंधों में जकड़न, कमर में खिंचाव और पैरों की मांसपेशियों में तनाव आम समस्या बनती जा रही है। ऐसे में योग केवल शरीर को अलग-अलग मुद्राओं में मोड़ने का अभ्यास नहीं, बल्कि शरीर और मन के बीच बेहतर तालमेल बनाने का माध्यम भी है। योग की उन्नत मुद्राओं में शामिल ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन शरीर के पिछले हिस्से में खिंचाव, संतुलन और लचीलेपन को बढ़ाने वाला अभ्यास माना जाता है।

क्या है ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन?

ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन तीन शब्दों से मिलकर बना है। ‘ऊर्ध्व’ का अर्थ ऊपर, ‘मुख’ का अर्थ चेहरा, जबकि ‘पश्चिम’ शरीर के पिछले हिस्से और ‘उत्तान’ गहरे खिंचाव को दर्शाता है। इस मुद्रा में साधक अपने शरीर का संतुलन कूल्हों के आधार पर बनाते हुए दोनों पैरों को ऊपर की ओर उठाता है और हाथों से पैरों के अंगूठों या पंजों को पकड़ता है।

यह मुद्रा पश्चिमोत्तानासन और संतुलन का संयोजन मानी जाती है तथा अष्टांग योग की प्राथमिक शृंखला में इसका अभ्यास किया जाता है।

शरीर के संतुलन और लचीलेपन पर असर

आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस उन्नत योगासन में शरीर का संतुलन कूल्हों पर बनाए रखते हुए दोनों पैरों को ऊपर की ओर सीधा रखा जाता है। हाथों से पैरों को पकड़ने के कारण शरीर के कई हिस्सों पर एक साथ खिंचाव पड़ता है।

इसका नियमित और सही अभ्यास पेट की मांसपेशियों की मजबूती, रीढ़ के लचीलेपन और शरीर के संतुलन को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। साथ ही जांघों के पिछले हिस्से की मांसपेशियों में खिंचाव आता है, जिससे उनका लचीलापन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

पैरों और रीढ़ को मिलता है गहरा खिंचाव

इस आसन में पैरों को सीधा रखते हुए शरीर को आगे की ओर झुकाया जाता है। इससे रीढ़, कमर और पैरों के पिछले हिस्से में गहरा खिंचाव महसूस होता है। लंबे समय तक बैठे रहने वालों के लिए शरीर में जमी जकड़न कम करने के उद्देश्य से इसे योगाभ्यास में शामिल किया जा सकता है।

अभ्यास में सावधानी जरूरी

ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन एक उन्नत योग मुद्रा है। इसलिए इसे बिना तैयारी के करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। शुरुआत में प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में इसका अभ्यास करना बेहतर है। शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे लचीलापन और संतुलन विकसित करना चाहिए।

योग का नियमित अभ्यास शरीर को अधिक लचीला और संतुलित बनाने में सहायक हो सकता है, लेकिन किसी बीमारी या लगातार बने रहने वाले दर्द की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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