गर्भावस्था में हाई बीपी को न करें नजरअंदाज! : WHO ने दी चेतावनी, मां और बच्चे की जान पर मंडरा सकता है खतरा

नई दिल्ली। गर्भावस्था महिलाओं के जीवन का बेहद संवेदनशील दौर होता है। इस दौरान शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिनमें रक्तचाप का बढ़ना भी शामिल है। अक्सर महिलाएं उच्च रक्तचाप को सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन यह लापरवाही मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप से जुड़ी समस्याएं मातृ मृत्यु और गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
हर 10 में से एक से अधिक गर्भावस्थाओं में खतरा
डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में लगभग 10 से 15 प्रतिशत गर्भधारण में उच्च रक्तचाप से संबंधित समस्याएं सामने आती हैं। इनमें प्री-एक्लेम्पसिया जैसी गंभीर स्थिति भी शामिल है। इन विकारों के कारण हर साल हजारों महिलाओं की जान चली जाती है। इसके अलावा, मृत-जन्म और नवजात शिशुओं की मृत्यु का जोखिम भी बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित जांच से रक्तचाप में होने वाले बदलावों का समय रहते पता लगाया जा सकता है। उचित उपचार और चिकित्सकीय निगरानी से गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है।
प्री-एक्लेम्पसिया के इन लक्षणों को पहचानें
प्री-एक्लेम्पसिया गर्भावस्था की गंभीर जटिलता है, जो आमतौर पर 20 सप्ताह के बाद विकसित होती है। इसमें उच्च रक्तचाप के साथ किडनी, लिवर और शरीर के अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं।
इसके प्रमुख चेतावनी संकेत हैं:
तेज या लगातार सिरदर्द होना।
आंखों के सामने धुंधलापन या चमक दिखाई देना।
पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होना।
चेहरे और हाथों में अचानक सूजन आना।
सांस लेने में परेशानी होना।
इनमें से कोई लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। कई बार शुरुआत में स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए नियमित जांच बेहद महत्वपूर्ण है।
जांच और इलाज में देरी पड़ सकती है भारी
गर्भावस्था के दौरान चिकित्सक रक्तचाप की नियमित जांच करते हैं। जरूरत पड़ने पर पेशाब में प्रोटीन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जांचें भी कराई जाती हैं। स्थिति के अनुसार दवाएं, अतिरिक्त निगरानी और अस्पताल में उपचार की आवश्यकता हो सकती है। बिना डॉक्टर की सलाह के रक्तचाप की दवाएं लेना या बंद करना उचित नहीं है।
प्रसव के बाद भी रहें सतर्क
उच्च रक्तचाप का खतरा बच्चे के जन्म के बाद भी बना रह सकता है। ऐसी महिलाओं में भविष्य में हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी संबंधी समस्याओं की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए प्रसव के बाद भी चिकित्सक की सलाह के अनुसार रक्तचाप की जांच कराते रहना चाहिए।
डब्ल्यूएचओ ने गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप से होने वाली मौतों और जटिलताओं को कम करने के लिए बेहतर जांच, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और समय पर आपातकालीन उपचार पर जोर दिया है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
