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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को आगे बढ़ा आसान नहीं : वित्त मंत्री का बड़़ा बयान, कहा- कुछ मुद्दों पर सहमति बनाना है चुनौतीपूर्ण

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Oct 05, 2026
06:30 AM
वित्त मंत्री का बड़़ा बयान, कहा- कुछ मुद्दों पर सहमति बनाना है चुनौतीपूर्ण

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन अब वार्ता एक ऐसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है, जहां दोनों पक्षों के लिए आगे बढ़ना आसान नहीं दिख रहा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि दोनों देशों के बीच चर्चा जारी है, हालांकि फिलहाल समझौते को लेकर कुछ मुद्दों पर सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित म्यूनिख लीडर्स मीटिंग 2026 में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच बेहद कठिन और गहन बातचीत हुई है। उन्होंने संकेत दिया कि वार्ता में दोनों पक्ष अपनी-अपनी प्राथमिकताओं और हितों को लेकर काफी सतर्क हैं।

व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में

निर्मला सीतारमण ने कहा कि वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है। अमेरिका लंबे समय से भारत के साथ व्यापार घाटे को कम करने पर जोर देता रहा है। वित्त मंत्री के मुताबिक, यही अमेरिका की प्रमुख चिंताओं में से एक है और इसी मुद्दे का असर मौजूदा व्यापार वार्ता पर भी दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि दोनों देश अब भी यह तलाश सकते हैं कि बातचीत को आगे बढ़ाने की कोई गुंजाइश बची है या नहीं। हालांकि, मौजूदा स्थिति में दोनों पक्षों के लिए कुछ अतिरिक्त रियायतें देना या लेना काफी मुश्किल हो सकता है।

अंतरिम व्यापार समझौते की दिशा में प्रयास

भारत और अमेरिका के बीच यह वार्ता फरवरी 2026 में घोषित अंतरिम व्यापार समझौते के लिए तय रूपरेखा के तहत आगे बढ़ रही है। दोनों देशों ने व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखने के साथ-साथ अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करने की बात कही थी।

मौजूदा बातचीत में बाजार पहुंच, टैरिफ और व्यापार संतुलन जैसे मुद्दे अहम माने जा रहे हैं। दोनों देशों के लिए चुनौती यह है कि ऐसा संतुलित समझौता तैयार किया जाए, जिससे व्यापारिक हितों के साथ घरेलू उद्योगों की चिंताओं को भी ध्यान में रखा जा सके।

भारत-ईयू समझौते का दिया उदाहरण

वित्त मंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए व्यापार समझौते को भारत के व्यापार समझौतों को लेकर अपनाए गए दृष्टिकोण का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता करीब दो अरब लोगों और वैश्विक जीडीपी के लगभग एक-चैथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाली अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है।

सीतारमण ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के कथन का उल्लेख करते हुए इसे “सभी समझौतों की जननी” कहना उचित बताया।

भारत ने 92.5% टैरिफ लाइनों को खोला

वित्त मंत्री के अनुसार, भारत-ईयू समझौते के तहत भारत ने अपनी 92.5 प्रतिशत टैरिफ लाइनों और व्यापार मूल्य के करीब 97 प्रतिशत हिस्से को खोला है। वहीं, यूरोपीय संघ ने व्यापार मूल्य के करीब 99 प्रतिशत और लगभग 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को खोला है।

उन्होंने कहा कि बाजार पहुंच से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को दोनों अर्थव्यवस्थाओं की जरूरतों और पूरकता को ध्यान में रखकर तय किया गया है, ताकि भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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