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हिंद-प्रशांत में बढ़ेगी भारत-जापान की ताकत : राजनाथ-कोइजुमी की बैठक में समुद्री सुरक्षा से रक्षा तकनीक तक बड़ा मंथन

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 20, 2026
08:13 AM
राजनाथ-कोइजुमी की बैठक में समुद्री सुरक्षा से रक्षा तकनीक तक बड़ा मंथन

नई दिल्ली। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच भारत और जापान ने अपनी रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया है। नई दिल्ली में गुरुवार को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के बीच हुई अहम बैठक में समुद्री सुरक्षा, रक्षा तकनीक, उपकरण निर्माण और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि हिंद-प्रशांत में शांति, सुरक्षा और नियम आधारित व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारत-जापान सहयोग को नई गति देना जरूरी है।

बैठक में रक्षा सहयोग के मौजूदा दायरे को व्यापक बनाने के साथ-साथ समुद्री साझेदारी को मजबूत करने और रक्षा उपकरणों तथा तकनीक के क्षेत्र में नए अवसर तलाशने पर जोर दिया गया। दोनों देशों के बीच यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और निर्बाध वैध व्यापार को लेकर रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है।

साझा हितों पर राजनाथ सिंह का जोर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जापानी समकक्ष का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और जापान के संबंध केवल रणनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे साझा लोकतांत्रिक मूल्य, आपसी सम्मान और लंबे समय से चले आ रहे सभ्यतागत संबंध भी हैं।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते अब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और नियम आधारित व्यवस्था की मजबूत आधारशिला बन चुके हैं। अगले वर्ष दोनों देश राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे, जो द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।

समुद्र की सुरक्षा को बताया रणनीतिक जरूरत

राजनाथ सिंह ने हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की सुरक्षा को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की समुद्री जीवनरेखाएं कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता, हवाई मार्गों की निर्बाध पहुंच और वैध व्यापार का सुरक्षित संचालन केवल आर्थिक जरूरत नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता भी है।

उन्होंने भारत के ‘महासागर’ दृष्टिकोण और जापान के ‘मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत’ दृष्टिकोण के बीच बेहतर तालमेल को महत्वपूर्ण बताया। भारत का महासागर दृष्टिकोण क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए साझा तथा समग्र प्रगति पर केंद्रित है।

रक्षा उत्पादन में साझेदारी बढ़ाने की तैयारी

बैठक में रक्षा उपकरणों और तकनीकी सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने के रास्तों पर भी चर्चा हुई। विशेष रूप से भारत में रक्षा उत्पादन, तकनीकी साझेदारी और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

भारत की ‘मेक इन इंडिया’ नीति के तहत जापान के साथ रक्षा उद्योग और अत्याधुनिक तकनीक में सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और व्यापक बना सकता है। अब रक्षा संबंध केवल सैन्य अभ्यासों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उत्पादन और तकनीकी क्षमता निर्माण तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं।

सैन्य सहयोग से आगे बढ़ रही साझेदारी

भारत और जापान पिछले कुछ वर्षों में नियमित सैन्य अभ्यासों और उच्चस्तरीय संवाद के जरिए अपने रक्षा संबंधों को मजबूत करते रहे हैं। अब सहयोग का दायरा समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, तकनीकी विकास और क्षमता निर्माण तक फैल चुका है। वर्ष 2024 में हुई तीसरी विदेश एवं रक्षा मंत्री स्तरीय ‘दो प्लस दो’ वार्ता में भी दोनों देशों ने मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत तथा द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई थी।

युद्ध स्मारक पहुंचकर जापानी रक्षा मंत्री ने दी श्रद्धांजलि

भारत यात्रा के दौरान जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने 20 अगस्त को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर भारतीय वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शहीदों के सम्मान में पुष्पांजलि अर्पित की।

भारत-जापान रक्षा संबंधों में बढ़ता तालमेल दोनों देशों की साझा रणनीतिक सोच को दर्शाता है। हिंद-प्रशांत में स्थिरता बनाए रखने से लेकर रक्षा उत्पादन और आधुनिक तकनीक तक, दोनों देश अब अपनी साझेदारी को अधिक व्यापक और मजबूत आधार देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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