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बीच सत्र में नहीं बदलनी पड़ेगी भाषा : सीबीएससी छात्रों को बड़ी राहत, तीन भाषा नीति पर सरकार ने दूर किया भ्रम

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jun 26, 2026
10:52 AM
सीबीएससी छात्रों को बड़ी राहत, तीन भाषा नीति पर सरकार ने दूर किया भ्रम

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे वे छात्र, जिन्होंने पहले से दो विदेशी भाषाओं का विकल्प चुना है, उन्हें बीच में अपनी भाषा या विषय बदलने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे छात्र कक्षा 10 तक उसी भाषा संयोजन के साथ अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगे।

भविष्य के छात्रों पर लागू होगी नई व्यवस्था

शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तीन-भाषा फॉर्मूले में कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़ने की अनिवार्यता केवल आने वाले नए बैचों पर लागू होगी। यह नियम कक्षा 6 से शुरू होने वाले भविष्य के विद्यार्थियों के लिए प्रभावी रहेगा। पहले से पढ़ाई कर रहे छात्रों पर इसे पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू नहीं किया जाएगा।

सरकार बोली- यह बदलाव नहीं, केवल स्थिति स्पष्ट की गई

शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं किया है। उनके अनुसार, यह प्रावधान पहले से ही नीति का हिस्सा था, लेकिन इसे लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई थी। अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा छात्रों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

बहुत कम छात्र होंगे प्रभावित

मंत्रालय के मुताबिक, हर वर्ष लगभग 24 लाख छात्र सीबीएसई की कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा देते हैं। इनमें से करीब 30 हजार छात्र ही दो विदेशी भाषाओं का विकल्प चुनते हैं। यानी लगभग 98.5 प्रतिशत विद्यार्थी पहले से ही तीन-भाषा फॉर्मूले के अनुरूप पढ़ाई कर रहे हैं। यह राहत मुख्य रूप से महानगरों और शहरी क्षेत्रों के उन छात्रों के लिए अहम है, जिन्होंने पहले से विदेशी भाषाओं का चयन किया हुआ है।

सर्कुलर के बाद बढ़ा था विवाद

दरअसल, मई 2026 में सीबीएसई ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) के तहत एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें कहा गया था कि 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल हों। इस घोषणा के बाद कई अभिभावकों और छात्रों ने विरोध जताया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी अंतरिम राहत

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने इन याचिकाओं को पहले से लंबित समान मामलों के साथ जोड़ते हुए विस्तृत सुनवाई का निर्णय लिया। अब शिक्षा मंत्रालय की नई स्पष्टता के बाद मौजूदा छात्रों की सबसे बड़ी चिंता दूर हो गई है और वे बिना किसी बदलाव के अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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