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जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा : जली नकदी मामले ने बढ़ाई थी मुश्किलें, महाभियोग से पहले ही खत्म हुआ कार्यकाल

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Apr 10, 2026
08:32 AM
जली नकदी मामले ने बढ़ाई थी मुश्किलें, महाभियोग से पहले ही खत्म हुआ कार्यकाल

नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने पद से अचानक इस्तीफा देकर न्यायिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने अपना त्यागपत्र द्रौपदी मुर्मू को सौंपते हुए कहा कि वे इस प्रतिष्ठित पद पर किसी भी विवाद का बोझ नहीं डालना चाहते। उनके इस कदम से उनके खिलाफ चल रही महाभियोग प्रक्रिया भी स्वतः समाप्त हो गई है।

जस्टिस वर्मा लंबे समय से विवादों में घिरे हुए थे। मार्च 2025 में दिल्ली उच्च न्यायालय में उनके कार्यकाल के दौरान आवंटित सरकारी आवास के आउटहाउस में कथित रूप से जली हुई नकदी मिलने के बाद मामला गंभीर हो गया था। इस घटना ने उनकी साख पर गहरा असर डाला और जांच की मांग तेज हो गई।

A Peep Into 'Roll Of Advocates' System Of Allahabad HC

जुलाई में लगाया गया था महाभियोग का प्रस्ताव

जुलाई 2025 में संसद के दोनों सदनों-लोकसभा और राज्यसभा में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया, जिसे बड़ी संख्या में सांसदों का समर्थन मिला। इसके बाद जजेज (इन्क्वायरी) एक्ट, 1968 के तहत एक तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। जस्टिस वर्मा ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी।

इस्तीफे ने विवाद पर लगाया विराम

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा शामिल थे, ने स्पष्ट कहा कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और न्यायसंगत है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी माना कि आंतरिक जांच में वर्मा का कथित नियंत्रण संदिग्ध नकदी पर पाया गया था। अंततः बढ़ते दबाव और कानूनी चुनौतियों के बीच जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा देकर इस पूरे विवाद पर विराम लगा दिया, हालांकि इस प्रकरण ने न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही पर नई बहस छेड़ दी है।

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