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माफिया राज से मुक्त हुआ यूपी : दीक्षांत समारोह में बोले सीएम योगी, युवा अधिवक्ताओं को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने दिया संदेश

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Oct 17, 2026
10:09 AM
दीक्षांत समारोह में बोले सीएम योगी, युवा अधिवक्ताओं को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने दिया संदेश

लखनऊ। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को डाॅ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय पहुंचे। उन्होंने दीक्षांत समारोह में शिरकत की। योगी ने समारोह में एलएलएम की रूपाली जायसवाल और एलएलबी आॅनर्स की तेजस्विनी कौशल को स्वर्ण पदक प्रदान किया। वहीं साइबर लॉ, बौद्धिक संपदा अधिकार और मीडिया लॉ सहित विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान योगी युवा अधिवक्ताओं को अन्याय के सामने चुप न रहने का भी संदेश दिया। उन्होंने जोर दिया कि इतिहास अपना फैसला सुनाएगा, लेकिन न्याय के पक्ष में बहस करने की जिम्मेदारी अधिवक्ताओं की है।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश अब ‘रूल ऑफ माफिया’ से मुक्त होकर ‘रूल ऑफ लॉ’ की दिशा में आगे बढ़ चुका है। वर्ष 2017 से पहले कानून-व्यवस्था और निवेश को लेकर संदेह का माहौल था, जबकि माफिया गतिविधियां विकास में बाधा बनती थीं। सरकार ने कानून का शासन स्थापित कर प्रदेश की छवि बदलने का काम किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी व्यक्ति या पद संविधान से ऊपर नहीं हो सकता।

योगी ने आपातकाल का किया जिक्र

योगी ने 25 जून 1975 को लोकतंत्र के इतिहास की महत्वपूर्ण तारीख बताते हुए आपातकाल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस दौर ने कानून के शासन और शासक की मनमानी के बीच का अंतर स्पष्ट किया। न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धांतों के पक्ष में लिया गया निर्णय इतिहास में विशेष स्थान बनाता है।

सत्य, अध्ययन और संवैधानिक मूल्यों पर जोर

मुख्यमंत्री ने युवा वकीलों को ‘सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः’ के आदर्श अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सत्य और निरंतर अध्ययन अधिवक्ता के जीवन का आधार होना चाहिए। डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने विधिवेत्ताओं में शिव जैसा मस्तिष्क, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसा वचन होने की आवश्यकता बताई।

एआई के दौर में मानवीय विवेक जरूरी

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता काम आसान कर सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय इंसानी विवेक से ही होना चाहिए। लापरवाही से तैयार कानूनी मसौदा किसी निर्दोष व्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है। डीपफेक और साइबर अपराधों ने साक्ष्यों की विश्वसनीयता को नई चुनौती दी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर थाने और 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क हैं। ‘एआई प्रज्ञा’ के माध्यम से 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

2047 के विकसित भारत में युवाओं की अहम भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में युवा अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। प्रदेश को 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की कार्ययोजना भी तैयार है। उन्होंने विद्यार्थियों से गांवों में जमीन और पारिवारिक विवादों के समाधान में योगदान देने तथा दबाव में भी सिद्धांतों से समझौता नहीं करने की अपील की।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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