बामुलाहिजा : कार्यवाही के दायरे में कलेक्टर

संदीप भम्मरकर
जब कप्तान ही लाइफ जैकेट उतार दे, तो नाव का भरोसा कौन करे! जबलपुर के बरगी डैम क्रूज हादसे ने लापरवाही की परतें खोल दीं। बीस दिन पहले इसी क्रूज पर कलेक्टर की बैठक हुई, मगर सुरक्षा नियम ‘ड्रेस कोड’ ही नहीं बने। न अफसरों ने पहना, न मौजूद अन्य जनप्रतिनिधि या मौजूद स्टाफ ने... हिदायत देने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। अब सवाल सीधा है… जो खुद नियम तोड़े, उससे सिस्टम क्या उम्मीद रखे? गलियारों में चर्चा तेज है, ऊपर से ढील मिली, तो नीचे तक लापरवाही की लहर बहना तय है!
एक अफसर, बार-बार सवाल!
किस्मत नहीं… पैटर्न बोलता है! बरगी डैम क्रूज हादसे के बाद अब उंगलियां एमपीटी के एमडी दिलीप यादव पर भी टिक गई हैं। इंदौर के भागीरथपुरा कांड की परछाईं फिर याद दिला रही है कि जिम्मेदारी सिर्फ पद नहीं, जवाबदेही भी मांगती है। क्रूज चल रहा था, पर सुरक्षा किनारे खड़ी रही। सियासी गलियारों में चर्चा गरम है- एक ही अफसर… और बार-बार वही सवाल, आखिर चूक कहां हो रही है?”
बीजेपी की 'लाड़ली' ही हिट!
हर फॉर्मूला हर मैदान में नहीं चलता! एमपी में ‘लाड़ली बहना’ ने विधानसभा चुनाव की जीत का जादू रचा, तो देशभर में वही स्क्रिप्ट कॉपी होने लगी। महाराष्ट्र, बिहार में इसका असर दिखा भी। मगर बंगाल के बाद चर्चा पलटी… अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी की योजनाएं वैसा कमाल नहीं दिखा सकीं। दक्षिण में भी यही कहानी रही। अब सियासी गलियारों में गूंज है, स्कीम वही… पर टाइमिंग और जमीन अलग हो, तो नतीजे भी बदल जाते हैं!
मैडम का ब्रेक, नेताजी शॉक!
सियासत में कभी हॉर्न नहीं, एक आवाज़ ही काफी होती है! भोपाल के 10 नंबर मार्केट में गाड़ी में बैठे-बैठे जनता दरबार लगा रहे पूर्व विधायक नेताजी ट्रैफिक का ‘स्पीड ब्रेकर’ बन गए। लोग नजरें घुमाकर निकलते रहे, तभी एक मैडम ने कार से ही तगड़ा ‘वर्बल कमेंट’ कर दिया। नेताजी सन्न… जवाब देने की हिम्मत गायब! पुराने किस्से भी याद आ गए, जब ऐसी ही मैडम फैक्टर ने उन्हें किनारे लगा दिया था। अब चर्चा यही, एक डांट… और पूरी सियासत फ्लैशबैक में! बता दें कि ये इलाका नेताजी का होम ग्राउंड है।
पोस्टिंग का खेल, रिश्ते फेल!
ट्रांसपोर्ट महकमे में कुर्सी की बोली के चक्कर में दोस्ती साइलेंट होने लगी है। इस महकमे के जिलों के अफसरों में कभी गहरी यारी थी, अब हर अफसर दूसरे को शक की नजर से देख रहा है। दरअसल, मंत्रीजी के बंगले पर बैठा एक ‘मैनेजर’ ऐसा खेल खेल रहा है कि ड्रीम पोस्टिंग के लिए सब अपनी-अपनी लिमिट तोड़ने को तैयार हैं। नतीजा… बातचीत बंद, भरोसा खत्म। पोस्टिंग भले ठंडे बस्ते में हो, लेकिन रेट लगातार हाई हो रहे हैं।
बस में बैठो… राज़ खुलेंगे!
सियासत में सबसे बड़ा ड्रामा वही, जिसका ट्रेलर भी न मिले! पीसीसी में चंद दिग्गजों को चुपचाप बुलाया गया, फिर बस में बिठाकर होटल ले जाया गया… और वहीं खुला ‘सरप्राइज़ मीटिंग’ का राज़। दिल्ली से आए जिम्मेदार नेता का बुलावा था, सो सब हाज़िर। कमरे में एक-एक कर दिल का प्रेशर कुकर खुला और मौजूदा पीसीसी पर जमकर भड़ास निकली। सारे नोट्स दिल्ली रवाना… अब गलियारों में कानाफूसी है कि ये मीटिंग है या किसी नए घटनाक्रम की पटकथा लिखी जा रही है।
सीएम हाउस का असली स्विच!
जहां से फाइल चलती है, वहीं से किस्मत पलटती है! सीएम हाउस का पॉवर सेंटर भले सचिवालय हो, मगर असली ‘स्विच’ कुछ खास अफसरों के हाथ में है। यहां के बड़े साहब का रुतबा ही ऐसा हो जाता है कि जिनसे जुड़ते ही नीचे के अफसर खुद-ब-खुद ‘पॉवरफुल’ हो जाते हैं। लंबे समय से एक ही विभाग में टिके एक खिलाड़ी अफसर ने दोनों सीएम के दौर में अपनी पकड़ ढीली नहीं होने दी। अब मंत्रालय के गलियारों में गूंज है, गुड बुक में एंट्री हो गई… सीएम सेक्रेट्रेट अगला चीफ तय मानिए!
आधा टाइम, पूरा तूफान!
जब व्यवस्था पार्ट-टाइम हो तो टीम फुल-टाइम बहस की डिमांड करती है! बीजेपी में फुल-टाइम संगठन मंत्री की गैरमौजूदगी ने अजीब सा समीकरण बना दिया है। फौरी व्यवस्था में क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल दो राज्यों की जिम्मेदारी संभालते हुए आधा-आधा वक्त दे रहे हैं। नतीजा ये कि एक धड़ा राहत की सांस ले रहा है, तो दूसरा ‘दुखड़ा’ सुनाने के मौके को तरस रहा है। क्षेत्रीय संगठन मंत्री का डेरा लगता है, पर मुलाकात मुश्किल। अब गलियारों में चर्चा है, ये व्यवस्था नहीं… सियासी संतुलन का अनोखा प्रयोग है!
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