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कांग्रेस शासन में खुले राम मंदिर के दरवाजे : राम मंदिर के चंदे पर दिग्गी का बड़ा हदिग्गी का बड़ा बयान, चंदे को लेकर भाजपा साधा निशानामला! ‘सनातन यात्रा से सरकार बेनकाब करने ऐलान

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Oct 17, 2026
10:47 AM
राम मंदिर के चंदे पर दिग्गी का बड़ा हदिग्गी का बड़ा बयान, चंदे को लेकर भाजपा साधा निशानामला! ‘सनातन यात्रा से सरकार बेनकाब करने ऐलान

इंदौर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर न्यास की आर्थिक व्यवस्था, भूमि सौदों कई बड़े दावे किए हैं। इंदौर में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने दावा किया की अध्योध्या मंदिर का कांग्रेस ने कभी विरोध नहीं किया। कांग्रेस शासन में मंदिर के दरवाजे खुले और शिलान्यास भी कांग्रेस शासन में ही हुआ। वहीं उन्होंने आरोप लगाया की भाजपा ने सिर्फ चंदा उगाहने का काम किया। सनातन यात्रा के जरिए हम सरकार का चेहरा बेनकाब करेंगे।

उन्होंने वर्तमान राम जन्मभूमि न्यास को भंग कर मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी ‘रामालय न्यास’ को सौंपने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि भूमि की खरीद-बिक्री और कुछ बिलों में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने इन मामलों की निष्पक्ष जांच कराए जाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही होनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखा जा सके।

रामालय न्यास को जिम्मेदारी सौंपने की मांग

कांग्रेस नेता ने मांग की कि वर्तमान राम जन्मभूमि न्यास को भंग कर मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी ‘रामालय न्यास’ को दी जाए। इस न्यास में शंकराचार्यों, निर्मोही अखाड़े और अन्य धार्मिक प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर प्रबंधन में राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को पद नहीं दिया जाना चाहिए।

मतपत्रों से चुनाव कराने की पैरवी

दिग्विजय सिंह ने चुनाव व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों के स्थान पर मतपत्रों के माध्यम से मतदान कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि मतदाता को मतदान की पुष्टि करने वाली पर्ची दी जानी चाहिए, जिसे वह स्वयं मतपेटी में डाल सके। इसके साथ ही उन्होंने मतदान मशीनों में इस्तेमाल होने वाले संगणकीय कार्यक्रमों को सार्वजनिक करने की मांग भी रखी।

मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर जताई चिंता

पूर्व मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नागरिकों से पुराने दस्तावेज मांगने और इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े मामलों की गंभीरता से समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता, मताधिकार की सुरक्षा और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उनकी मांगों और आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया तथा स्वतंत्र जांच के निष्कर्षों से ही इन दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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