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ऑपरेशन सिंदूर से लेकर पारिवारिक सीख तक : इंडियन आर्मी चीफ ने अपने अनुभवों और विचारों को किया साझा

admin

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Apr 10, 2026
09:54 AM
इंडियन आर्मी चीफ ने अपने अनुभवों और विचारों को किया साझा

नई दिल्ली। राजधानी में आयोजित एक पॉडकास्ट में भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने अनुभवों और विचारों को साझा करते हुए नेतृत्व के उस पहलू को उजागर किया, जिसमें रणनीति के साथ-साथ नैतिकता और संवेदनशीलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। ऋषभ शाह द्वारा होस्ट किए गए इस कार्यक्रम में उन्होंने विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लिए गए निर्णयों पर चर्चा की।

उन्होंने बताया कि सैन्य कार्रवाई केवल लक्ष्य को नष्ट करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसमें मानवीय मूल्यों का ध्यान रखना भी आवश्यक होता है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि भले ही उनके पास किसी भी समय हमला करने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि उस समय कोई कार्रवाई न हो जब दूसरी तरफ के लोग अपनी नमाज अदा कर रहे हों। यह निर्णय इस विचार को दर्शाता है कि “सबका मालिक एक है” और युद्ध के दौरान भी आस्था का सम्मान किया जाना चाहिए।

नेतृत्व में संतुलन और संवेदनशीलता

जनरल द्विवेदी के इस दृष्टिकोण से स्पष्ट होता है कि एक सशक्त नेता केवल कठोर निर्णय लेने वाला नहीं होता, बल्कि वह परिस्थितियों के मानवीय पहलुओं को भी समझता है। उन्होंने कहा कि सेना में लिए जाने वाले हर निर्णय में केवल रणनीतिक लाभ ही नहीं, बल्कि नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी भी शामिल होनी चाहिए। उनकी यह सोच दर्शाती है कि युद्ध जैसी कठोर परिस्थितियों में भी संवेदनशीलता और संयम बनाए रखना नेतृत्व की एक बड़ी विशेषता है।

परिवार से मिली सीख

पॉडकास्ट के दौरान जनरल द्विवेदी ने अपने निजी जीवन के अनुभवों को भी साझा किया, विशेष रूप से अपनी बेटियों का उल्लेख करते हुए। उन्होंने कहा कि उनकी बेटियों ने उन्हें सिखाया कि किसी से जुड़ने के लिए अपने पद और अहंकार को पीछे छोड़ना जरूरी होता है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी बेटियां उन्हें सामाजिक बदलाव और कार्यस्थल के सुधार के लिए प्रेरित करती हैं। वे हमेशा उन्हें यह समझाती हैं कि किसी भी प्रणाली को अधिक समावेशी और संतुलित कैसे बनाया जा सकता है।

आधुनिक नेतृत्व की नई परिभाषा

जनरल उपेंद्र द्विवेदी की बातें यह स्पष्ट करती हैं कि आज के दौर में सफल नेतृत्व केवल शक्ति और अधिकार पर आधारित नहीं है, बल्कि उसमें संवेदनशीलता, नैतिकता और व्यक्तिगत अनुभवों का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। चाहे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लिया गया संयमित निर्णय हो या परिवार से मिली सीख-उनकी सोच एक ऐसे नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत करती है, जो आधुनिक, संतुलित और मानवीय मूल्यों से प्रेरित है।

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