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मप्र में यूसीसी की उलटी गिनती शुरू : जगदीशपुर कैबिनेट बैठक में मसौदे पर लगेगी मुहर, बदलेंगे शादी, तलाक और लिव-इन के नियम

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 18, 2026
06:50 AM
जगदीशपुर कैबिनेट बैठक में मसौदे पर लगेगी मुहर, बदलेंगे शादी, तलाक और लिव-इन के नियम

भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की उलटी गिनती शुरू हो गई है। रविवार को जगदीशपुर में होने वाली कैबिनेट बैठक में इस ऐतिहासिक फैसले पर मुहर भी लग सकती है। कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद इस अहम विधेयक को 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानूसन सत्र में पेश किया जाएगा।

बता दें कि यूसीसी के लिए में गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दी है। रिपोर्ट तीन खंडों में तैयार की गई है, जिसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर विस्तृत सुझाव दिए गए हैं। अब प्रस्तावित विशेष कैबिनेट बैठक में यूसीसी के मसौदा विधेयक पर चर्चा कर उसे मंजूरी दिए जाने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो सरकार आगामी मानसून सत्र में इसे विधानसभा में पेश कर सकती है।

सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून की तैयारी

प्रस्तावित यूसीसी का उद्देश्य प्रदेश में सभी धर्मों के नागरिकों के लिए पारिवारिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। अभी अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून प्रभावी हैं, जबकि यूसीसी लागू होने के बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में एक समान नियम लागू होंगे। सरकार का मानना है कि इससे कानूनी प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और समान होगी।

यूसीसी ड्राफ्ट की 7 सबसे बड़ी सिफारिशें

मध्य प्रदेश के यूसीसी ड्राफ्ट में कई अहम और बड़े बदलाव किए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक इस ड्राफ्ट की मुख्य बातें इस प्रकार हैं।

  • आदिवासी रहेंगे दायरे से बाहर: राज्य की अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है, ताकि उनकी पारंपरिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाएं पूरी तरह सुरक्षित रहें।

  • बहुविवाह पर पूर्ण रोकः नए कानून के लागू होने के बाद राज्य में बिना कानूनी तलाक के एक से अधिक विवाह करने (बहुविवाह) पर पूरी तरह से पाबंदी होगी।

  • लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशनः ड्राफ्ट में पहली बार लिव-इन रिलेशनशिप को एक स्पष्ट कानूनी ढांचे के तहत लाने का प्रस्ताव है। ऐसे जोड़ों के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।

  • बेटियों को संपत्ति में बराबर का हकः उत्तराधिकार और पैतृक संपत्ति के मामले में अब लड़कियों (बेटियों) को भी बेटों के बराबर समान कानूनी अधिकार दिए जाएंगे।

  • विवाह और तलाक के नियम होंगे समानः सभी धर्मों और समुदायों के नागरिकों के लिए शादी, तलाक और गुजारा भत्ता से जुड़े पारिवारिक मामलों में एक समान नियम लागू होंगे।

  • गोद लेने की पारदर्शी प्रक्रियाः बच्चा गोद लेने से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं को भी सभी समुदायों के लिए पारदर्शी और एक समान बनाया गया है।

  • बुजुर्ग माता-पिता को बेसहारा छोड़ने पर एक्शनः ड्राफ्ट में बच्चों की संपत्ति में माता-पिता दोनों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने और बुजुर्ग माता-पिता को बेसहारा छोड़ने वाले बच्चों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के सुझाव शामिल हैं।

कैबिनेट से विधानसभा तक तय होगी अगली राह

यदि विशेष कैबिनेट बैठक में मसौदे को मंजूरी मिलती है तो कानून विभाग अंतिम विधेयक तैयार करेगा। इसके बाद इसे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। सदन से पारित होने के बाद विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अधिसूचना जारी होने के बाद ही समान नागरिक संहिता प्रदेश में प्रभावी होगी। सरकार के इस कदम को राज्य की कानूनी व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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