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दिल्ली का कूड़ा बनेगा बसों का ईंधन : भविष्य की परिवहन व्यवस्था पर मोदी के मंत्री की नई सोच, अपनी भविष्यवाणियों पर भी किया दावा

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 07, 2026
09:51 AM
भविष्य की परिवहन व्यवस्था पर मोदी के मंत्री की नई सोच, अपनी भविष्यवाणियों पर भी किया दावा

नई दिल्ली। देश में ई20 पेट्रोल को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भविष्य के ईंधन को लेकर बड़ा विजन पेश किया है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने दावा किया की आने वाले समय में दिल्ली की बसें पेट्रोल, डीजल या बिजली से नहीं, बल्कि शहर के कूड़े-कचरे से तैयार होने वाले ग्रीन हाइड्रोजन पर चल सकती हैं।

उन्होंने कहा कि नगर निगम के कचरे को पहले अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। इसके बाद बायोडाइजेस्टर तकनीक की मदद से उससे हाइड्रोजन गैस तैयार की जाएगी। यही हाइड्रोजन भविष्य में बसों के ईंधन के रूप में इस्तेमाल होगी। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से ऐसे विकल्पों की ओर बढ़ रही है, जहां पारंपरिक ईंधनों की जगह स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का उपयोग किया जाएगा।

50 वर्षों में गलत साबित नहीं हुई मेरी भविष्यवाणियां

केन्द्रीय मंत्री का यह भी मानना है कि वैज्ञानिक तकनीक के जरिए कचरे को ऊर्जा में बदलकर न केवल प्रदूषण कम किया जा सकता है, बल्कि स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था भी विकसित की जा सकती है। उन्होंने अपने इस दावे पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि पिछले 50 वर्षों में उन्होंने जो भी भविष्यवाणियां की हैं, वे समय के साथ सही साबित हुई हैं। उन्होंने कहा कि कूड़े से हाइड्रोजन बनाकर बसें चलाने की योजना भी जल्द हकीकत का रूप ले सकती है। उनका मानना है कि तकनीकी प्रगति और बेहतर प्रबंधन के जरिए यह लक्ष्य हासिल करना संभव है।

लैंडफिल का कचरा भी बन रहा संसाधन

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि दिल्ली के लैंडफिल स्थलों पर जमा लगभग 80 लाख टन कचरे का उपयोग पहले ही एक्सप्रेसवे निर्माण जैसे कार्यों में किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक देशभर के बड़े कचरा पहाड़ों को समाप्त करना है। इसके लिए कचरे को बोझ नहीं, बल्कि संसाधन के रूप में उपयोग करने की नीति पर काम किया जा रहा है।

कचरे से कमाई और पर्यावरण दोनों को फायदा

गडकरी ने कहा कि यदि ठोस अपशिष्ट और सीवेज का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किया जाए तो इससे स्थानीय निकायों की आय भी बढ़ सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि उनके संसदीय क्षेत्र की नगर निगम उपचारित (ट्रीटेड) गंदे पानी की बिक्री से हर साल करीब 325 करोड़ रुपये की आय अर्जित कर रही है। उनके अनुसार, कचरे से ऊर्जा और अन्य संसाधन तैयार करने की दिशा में काम बढ़ने से प्रदूषण कम होगा, स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा मिलेगा और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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