इश्क ने मिटाईं मजहब की सरहदें : मुस्लिम जेलर बनी हिंदू युवक की जीवनसंगिनी, सतना जेल से शुरू हुई अनोखी प्रेम कहानी

छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुशनगर में हुई एक शादी इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यह कोई सामान्य विवाह नहीं, बल्कि ऐसी प्रेम कहानी है जो जेल की ऊंची दीवारों और सख्त नियमों के बीच पनपी। केंद्रीय जेल सतना में पदस्थ मुस्लिम महिला सहायक जेल अधीक्षिका फिरोजा खातून ने हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट चुके हिंदू युवक धर्मेंद्र सिंह चंदला के साथ हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर लिया।
5 मई को संपन्न हुई इस शादी में वैदिक मंत्रोच्चार, सात फेरे और पारंपरिक रस्मों के बीच दोनों ने साथ जीवन बिताने की कसमें खाईं। शादी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला लोगों के बीच चर्चा और बहस का विषय बन गया है।
कैदी और जेलर के बीच कैसे बढ़ीं नजदीकियां
जानकारी के अनुसार फिरोजा खातून रीवा की रहने वाली हैं और केंद्रीय जेल सतना में सहायक जेल अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। जेल में उनकी जिम्मेदारी वारंट शाखा की थी। दूसरी ओर धर्मेंद्र सिंह चंदला हत्या के एक चर्चित मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था।
बताया जाता है कि जेल में अच्छे व्यवहार के कारण धर्मेंद्र प्रशासनिक और वारंट संबंधी कामों में जेल अधिकारियों की मदद करता था। इसी दौरान फिरोजा और धर्मेंद्र के बीच बातचीत शुरू हुई। धीरे-धीरे यह परिचय दोस्ती में बदला और फिर दोनों एक-दूसरे के करीब आते चले गए। कई वर्षों तक एक-दूसरे को समझने के बाद दोनों ने समाज और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर विवाह करने का फैसला लिया।

परिवार ने बनाई दूरी, बजरंग दल ने निभाया कन्यादान
इस विवाह की सबसे खास बात यह रही कि फिरोजा खातून के परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया। बताया जा रहा है कि इसी कारण लड़की पक्ष से कोई भी सदस्य शादी समारोह में शामिल नहीं हुआ। ऐसे में बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता आगे आए और उन्होंने विवाह की रस्मों में सहयोग किया। इतना ही नहीं, कन्यादान की रस्म भी उन्हीं के द्वारा निभाई गई। विवाह पूरी तरह हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ, जिसमें दूल्हा-दुल्हन ने अग्नि के समक्ष सात फेरे लिए।

14 साल जेल में रहा धर्मेंद्र
धर्मेंद्र सिंह चंदला वर्ष 2007 में नगर परिषद चंदला के तत्कालीन उपाध्यक्ष कृष्ण दत्त दीक्षित की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। करीब 14 वर्षों तक जेल में रहने और अच्छे आचरण के आधार पर उसे रिहा कर दिया गया था। पिछले चार वर्षों से वह जेल से बाहर सामान्य जीवन जी रहा था। इसी दौरान दोनों ने अपने रिश्ते को विवाह का रूप देने का निर्णय लिया।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस अनोखी शादी को लेकर सोशल डमकपं पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे प्रेम, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बता रहे हैं। वहीं कुछ लोग सरकारी सेवा के दौरान एक जेल अधिकारी और कैदी के बीच संबंध बनने पर सवाल भी उठा रहे हैं। हालांकि तमाम चर्चाओं के बीच फिरोजा और धर्मेंद्र ने यह साबित कर दिया कि प्यार धर्म, जाति और परिस्थितियों की सीमाओं में बंधकर नहीं रहता। यही वजह है कि उनकी यह अनोखी प्रेम कहानी अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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