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महाराष्ट्र की सियासत में बड़े बदलाव की आहट : एनसीपी के दोनों गुटों के एक होने के बाद ही एनडीए में एंट्री का संकेत, भाजपा ने रखी बड़ी संकेत

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 18, 2026
07:33 AM
एनसीपी के दोनों गुटों के एक होने के बाद ही एनडीए में एंट्री का संकेत, भाजपा ने रखी बड़ी संकेत

नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं। दरअसल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों धड़ों के संभावित विलय को हलचल शुरू हो गई है। इस घटनाक्रम पर भाजपा ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कि यदि एनसीपी के दोनों गुट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो पहले उन्हें आपस में विलय करना होगा। अलग-अलग इकाइयों के रूप में एनडीए में शामिल होने के विकल्प पर फिलहाल सहमति नहीं है। यह जानकारी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के हवाले से सामने आई है।

बता दें कि हाल के दिनों में दोनों एनसीपी गुटों के नेताओं और सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रमुख नेताओं के बीच हुई बैठकों के बाद सियासी गलियारों में नए समीकरणों को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक इस राजनीतिक गतिविधि के पीछे प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को भी अहम वजह माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि शरद पवार के नेतृत्व वाला एनसीपी गुट इस विधेयक पर अपेक्षाकृत नरम रुख अपना सकता है। इस गुट के पास लोकसभा में आठ और राज्यसभा में एक सांसद है। माना जा रहा है कि संसद में विधेयक को समर्थन दिलाने के लिए इन सांसदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसी कारण बीजेपी दोनों गुटों के विलय को प्राथमिकता दे रही है।

विलय के बाद मिल सकता है प्रतिनिधित्व

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि एनसीपी के दोनों धड़ों का विलय होता है तो बाद में दोनों पक्षों को सरकार में प्रतिनिधित्व देने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि इन अटकलों के बीच कुछ नेताओं की असहजता की भी चर्चा है। हाल ही में शरद पवार और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मुलाकात के बाद इस विषय को लेकर राजनीतिक चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है।

संजय राउत ने जताया भरोसा

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने विलय की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसी बातें पिछले दो वर्षों से सामने आती रही हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल लगातार ऐसे किसी भी विलय से इनकार करते रहे हैं और उन्हें दोनों नेताओं के बयान पर भरोसा है। राउत ने संकेत दिया कि जब तक पार्टी नेतृत्व आधिकारिक निर्णय नहीं लेता, तब तक इन अटकलों को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए।

कर्जमाफी पर सरकार को चेतावनी

इस बीच शरद पवार ने किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे पर राज्य सरकार को समयसीमा का पालन करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने नई समयसीमा तय की है और अब उसके परिणाम का इंतजार किया जाएगा। यदि किसानों की कर्जमाफी का वादा पूरा नहीं हुआ तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। वहीं, एनसीपी में संभावित टूट या विलय के सवाल पर उन्होंने फिलहाल कोई विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि अभी इस विषय पर चर्चा का उचित समय नहीं है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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