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भारत का रास्ता विकासवाद, नहीं विस्तारवाद : इंडोनेशिया की संसद से पीएम मोदी का दुनिया को बड़ा संदेश, साझा विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों पर दिया जोर

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 07, 2026
10:37 AM
इंडोनेशिया की संसद से पीएम मोदी का दुनिया को बड़ा संदेश, साझा विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों पर दिया जोर

जकार्ता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक रिश्तों को और मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति का मूल आधार विस्तारवाद नहीं, बल्कि विकासवाद है। दुनिया के सामने भारत हमेशा सहयोग, साझेदारी और साझा प्रगति का संदेश लेकर चलता है और सबका साथ, सबका विकास इसी सोच का प्रतीक है।

गरमजोशी भरे स्वागत पर जताया आभार

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत इंडोनेशिया की संसद, सरकार और वहां की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए की। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्हें जिस आत्मीयता और सम्मान के साथ स्वागत मिला, वह उनके जीवन के सबसे यादगार पलों में शामिल रहेगा। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं, महिलाओं और बच्चों द्वारा मिले स्नेह का उल्लेख करते हुए इसे दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास का प्रतीक बताया।

सर्वोच्च नागरिक सम्मान को भारत का सम्मान बताया

पीएम मोदी ने कहा कि इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलना केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के प्रति वहां की जनता के स्नेह और दोनों देशों की मजबूत होती मित्रता का सम्मान है। उन्होंने इस सम्मान के लिए इंडोनेशिया की सरकार और संसद का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊर्जा मिलेगी।

समुद्र नहीं, दोनों देशों के बीच सेतु है

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया की राजधानियां भले ही दूर हों, लेकिन समुद्री दूरी बेहद कम है। उन्होंने कहा कि जहां दुनिया के कई क्षेत्रों में समुद्र सीमाओं का प्रतीक रहा है, वहीं भारत और इंडोनेशिया के बीच यही समुद्र सदियों से व्यापार, संस्कृति और सभ्यताओं को जोड़ने वाला सेतु रहा है। भविष्य में भी यह साझेदारी दोनों देशों के विकास का महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

साझा सांस्कृतिक विरासत का किया उल्लेख

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की साझा सांस्कृतिक विरासत पर आधारित हैं। रामायण और महाभारत जैसी परंपराएं, नालंदा की ज्ञान परंपरा तथा बोरोबुदुर और प्रम्बानन जैसे ऐतिहासिक स्मारक दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव के प्रमाण हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि लोकतांत्रिक मूल्यों, सांस्कृतिक संबंधों और विकास आधारित सहयोग के बल पर भारत और इंडोनेशिया आने वाले वर्षों में वैश्विक मंच पर साझेदारी का नया अध्याय लिखेंगे।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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