सीईसी को निलंबित करने की मांग को SC ने ठुकराया : सरकार और आयोग से मांगा जवाब, एसआईआर और फार्म 6 को लेकर गहराया विवाद

नई दिल्ली। चुनाव आयोग के फैसलों और कामकाज के तरीके को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने ज्ञानेश कुमार के निलंबन और पद से हटाने की मांग को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि उसे उम्मीद है कि संवैधानिक संस्था कानून के मुताबिक काम करेगी। अदालत ने मामले में केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा
बता दें कि याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने निर्वाचन आयोग के दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना कई फैसले एकतरफा लिए। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना ने की।
सीईसी की शक्तियां वापस लेने की मांग
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने दलील दी कि 2023 में बने कानून के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने सुनवाई पूरी होने तक सीईसी ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने या उनकी शक्तियां वापस लेने की अंतरिम मांग रखी।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि एसआईआर से जुड़े कई फैसले चुनाव आयोग के अन्य सदस्यों की आपत्तियों के बावजूद लिए गए। याचिका में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच ऐसे करीब 14 मामलों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आरोपों पर अभी सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
जस्टिस बागची ने कहा कि पद पर रहते हुए संरक्षण पहले भी कानून में था। सिंह ने जवाब दिया कि अब कानून रिटायरमेंट के बाद भी सुरक्षा देता है. ब्श्रप् ने कहा कि संबंधित कानून को चुनौती देने वाला मामला पहले से लंबित है। विकास सिंह ने कहा कि वह इस मामले में कानून को चुनौती नहीं दे रहे हैं, बल्कि यह देखना चाहते हैं कि चुनाव आयोग में क्या हो रहा है।
फार्म 6 में बदलाव भी बना विवाद का केंद्र
दूसरी याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले थ्वतउ 6 में कथित बदलावों पर सवाल उठाया। याचिका में आरोप है कि ैप्त् से संबंधित अतिरिक्त जानकारी फॉर्म में शामिल की गई, जबकि संबंधित नियमों में संशोधन नहीं किया गया था। ज्ज्ीम
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित थ्वतउ 6 को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद यह देखा जाएगा कि फॉर्म में बदलाव किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
