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दिल्ली की घेराबंदी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, : बैरिकेडिंग से इंटरनेट तक पर सख्त निर्देश

admin

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Oct 11, 2026
08:21 AM
बैरिकेडिंग से इंटरनेट तक पर सख्त निर्देश

नई दिल्ली। दिल्ली में सीजेपी के विरोध प्रदर्शन को लेकर लगाई गई पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। रविवार को विशेष सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने अधिकारियों को बैरिकेडिंग के फैसले की तत्काल समीक्षा करने और इंटरनेट सेवाओं को कानून के मुताबिक निर्बाध रखने के निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए तथा लोगों की आवाजाही और यातायात में अनावश्यक बाधा नहीं होनी चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था के नाम पर लोगों की न्याय तक पहुंच प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

बैरिकेडिंग पर तत्काल समीक्षा के निर्देश

जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने विरोध प्रदर्शन के दौरान राजधानी में लगाई गई पाबंदियों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को चुनौती दी थी। शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों और विपक्षी दलों के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया था। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल थे।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यातायात और कानून-व्यवस्था की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडिंग के निर्णय की तुरंत समीक्षा की जाए। लोगों की सामान्य आवाजाही सुनिश्चित करना भी अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

इंटरनेट, मेट्रो और रेल सेवाएं रहें सामान्य

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इंटरनेट सेवाएं कानून के अनुसार बिना अनावश्यक रुकावट के जारी रहें। मेट्रो और रेल सेवाओं का संचालन भी सामान्य रूप से किया जाए। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में आवश्यक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, लेकिन उनका आधार परिस्थितियां और कानून होना चाहिए।

अदालतों तक पहुंच में बाधा न हो

शीर्ष अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आसपास धारा 163 लागू होने से संबंधित सूचना बोर्ड हटाने का भी निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए, जिससे लोगों को न्याय पाने या किसी भी अदालत में पहुंचने को लेकर आशंका हो।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध हिरासत नहीं होनी चाहिए और किसी को हिरासत में लेने की कार्रवाई कानून के अनुरूप ही की जानी चाहिए। धारा 163 के दायरे से बाहर शांतिपूर्ण और निहत्थे ढंग से एकत्र लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

अवमानना मामले में नोटिस, हलफनामा भी मांगा

सभी पक्षों को सुनने और अवमानना याचिका में लगाए गए आरोपों पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए। अदालत ने जवाब में हलफनामा दाखिल करने और अपने निर्देशों के पालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।

इसके अलावा, सुनवाई के दौरान सामने आई अन्य गैर-सूचीबद्ध याचिकाओं को भी अवमानना कार्यवाही के साथ जोड़ने का निर्देश दिया गया। अदालत के आदेश से स्पष्ट है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिकों की आवाजाही, इंटरनेट सेवाओं और न्याय तक पहुंच के अधिकारों का भी ध्यान रखना होगा।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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