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फिर टूटा टीम इंडिया का टी20 विश्व कप सपना : ऑस्ट्रेलिया से हार के साथ खत्म हुआ अभियान, बल्लेबाजी से लेकर गेंदबाजी और फील्डिंग तक कई मोर्चों पर टीम रही पिछड़ी

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jun 29, 2026
07:22 AM
ऑस्ट्रेलिया से हार के साथ खत्म हुआ अभियान, बल्लेबाजी से लेकर गेंदबाजी और फील्डिंग तक कई मोर्चों पर टीम रही पिछड़ी

नई दिल्ली। महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम से इस बार खिताब जीतने की सबसे ज्यादा उम्मीदें थीं। पिछले साल वनडे विश्व कप जीतने के बाद हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम को टूर्नामेंट का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। शुरुआती मुकाबलों में टीम ने दमदार प्रदर्शन भी किया, लेकिन जैसे-जैसे प्रतियोगिता आगे बढ़ी, उसकी कमजोरियां सामने आने लगीं। आखिरकार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली हार के साथ भारत का टी20 विश्व कप जीतने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया। टीम की इस निराशाजनक विदाई के पीछे कई ऐसे कारण रहे, जिन्होंने पूरे अभियान को प्रभावित किया।

मध्यक्रम की सुस्त बल्लेबाजी बनी सबसे बड़ी कमजोरी

भारत को स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा की सलामी जोड़ी ने कई मैचों में तेज शुरुआत दिलाई, लेकिन मध्यक्रम उस लय को आगे नहीं बढ़ा सका। जेमिमा रोड्रिग्स, हरमनप्रीत कौर और अन्य बल्लेबाज बीच के ओवरों में तेजी से रन बनाने में संघर्ष करते रहे। खासकर जेमिमा ने कई मौकों पर जरूरत से अधिक डॉट गेंदें खेलीं, जिससे रनगति पर असर पड़ा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी उन्होंने 28 गेंदों में 34 रन बनाए। कप्तान हरमनप्रीत का स्ट्राइक रेट भी पूरे टूर्नामेंट में अपेक्षित स्तर से नीचे रहा, जिससे बड़े मुकाबलों में टीम दबाव में आ गई।

फील्डिंग में हुई गलतियों का चुकाना पड़ा भारी मूल्य

किसी भी बड़े टूर्नामेंट में शानदार फील्डिंग जीत और हार का अंतर तय करती है, लेकिन भारतीय टीम इस विभाग में लगातार पिछड़ती रही। खिलाड़ियों ने कई आसान कैच टपकाए और मैदान पर अतिरिक्त रन भी दिए। इन गलतियों का फायदा विपक्षी टीमों ने उठाया और भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बढ़ता गया। खासकर नॉकआउट जैसे अहम मुकाबलों में फील्डिंग की छोटी-छोटी चूकें मैच का रुख बदलने वाली साबित हुईं।

तेज गेंदबाजी नहीं दे सकी अपेक्षित धार

इंग्लैंड की परिस्थितियां तेज गेंदबाजों के अनुकूल मानी जाती हैं, लेकिन भारतीय पेस अटैक उसका लाभ उठाने में नाकाम रहा। रेणुका सिंह पूरे टूर्नामेंट में केवल दो विकेट ही हासिल कर सकीं, जबकि उनका इकोनॉमी रेट भी काफी महंगा रहा। अन्य तेज गेंदबाज भी बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाने में सफल नहीं हो सकीं। इसका असर यह हुआ कि शुरुआती विकेट नहीं मिले और विपक्षी टीमों ने मजबूत साझेदारियां बनाईं।

स्पिन पर जरूरत से ज्यादा भरोसा पड़ा महंगा

भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अपनी रणनीति का बड़ा हिस्सा स्पिन गेंदबाजी पर आधारित रखा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी अधिकांश ओवर स्पिनर्स से करवाए गए। हालांकि श्री चरणी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 14 विकेट लिए, लेकिन दूसरे छोर से तेज गेंदबाजों का सहयोग नहीं मिला। कुल विकेटों में अधिकांश स्पिनर्स के खाते में जाना इस बात का संकेत रहा कि टीम के गेंदबाजी आक्रमण में संतुलन की कमी थी। तेज गेंदबाजों के लिए अनुकूल परिस्थितियों में भी स्पिन पर अत्यधिक निर्भरता भारत के लिए नुकसानदायक साबित हुई।

कप्तानी और बड़े मैचों में प्रदर्शन पर उठे सवाल

कप्तान हरमनप्रीत कौर का प्रदर्शन बल्ले और नेतृत्व दोनों ही मोर्चों पर उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। उन्होंने टूर्नामेंट में कुल 141 रन बनाए, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अर्धशतक को छोड़ दें तो बाकी पारियों में वह प्रभाव नहीं छोड़ सकीं। वहीं, बड़े मुकाबलों में गेंदबाजी बदलाव और रणनीतिक फैसलों पर भी सवाल उठे। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ भारतीय टीम कई मौकों पर दबाव में बिखरती नजर आई।

आगे की राह

भारतीय महिला क्रिकेट ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन टी20 विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में खिताब जीतने के लिए टीम को अपनी कमजोरियों पर गंभीरता से काम करना होगा। मध्यक्रम की आक्रामक बल्लेबाजी, तेज गेंदबाजी को मजबूत करना, बेहतर फील्डिंग और दबाव के क्षणों में सटीक रणनीति ही भविष्य में भारत को विश्व चैंपियन बनाने की दिशा में सबसे अहम कदम साबित होंगे।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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