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सुप्रीम कोर्ट को कोई डरा-धमका नहीं सकता : शीर्ष अदालत ने राहुल को लगाई लताड़, आचरण पर भी उठाए सवाल

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Oct 15, 2026
08:14 AM
शीर्ष अदालत ने राहुल को लगाई लताड़, आचरण पर भी उठाए सवाल

नई दिल्ली। बीते 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने, वहां नारेबाजी करने और भीड़ को लेकर आने से जुड़े मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई। इस दौरान शीर्ष अदालत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को जमकर लताड़ लगाई। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा सुप्रीम कोर्ट को कोई डरा-धमका नहीं सकता। इतना ही नहीं, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के आचरण पर भी सवाल उठाए हैं। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि राहुल गांधी को खुद के आचरण को लेकर सफाई देनी होगी।

वहीं कोर्ट ने राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की याचिका पर नोटिस जारी किया। अदालत ने प्रदर्शन से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निजी पक्ष अपने पास उपलब्ध वीडियो भी सुरक्षित रख सकते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। इस निर्देश को मामले से जुड़े घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अखिलेश यादव को भी जारी हुआ नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने कथित एसआईआर अनियमितताओं को लेकर शीर्ष अदालत तक मार्च करने के खिलाफ दायर याचिका पर राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य लोगों को नोटिस भी जारी किया है। ये सुनवाई उस याचिका पर हो रही थी, जो इंडिया ब्लॉक ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने के बाद जमा की थी। हालांकि, याचिका में कुछ खामियां होने के कारण कोर्ट ने उसमें सुधार करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद ही 16 अक्टूबर को सुनवाई की तारीख मुकर्रर की गई थी।

जंतर-मंतर को लेकर सरकार से सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के फैसले पर भी सरकार से जवाब मांगा। अदालत ने पूछा कि क्या यह निर्णय न्यायालय की मौखिक टिप्पणियों के कारण लिया गया था या फिर प्रदर्शन स्थल के रूप में जंतर-मंतर की उपयोगिता का आकलन करने के बाद ऐसा किया गया। इस सवाल के जरिए अदालत ने सरकार से फैसले के पीछे के कारणों को स्पष्ट करने को कहा।

सरकार ने क्या दिया जवाब?

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल मेहता ने अदालत को बताया कि जंतर-मंतर को लेकर लिया गया निर्णय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर नहीं था। उनके अनुसार, इस विषय पर विचार करने के लिए समिति का गठन काफी पहले कर दिया गया था और समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट भी प्रस्तुत की थी।

फिलहाल, मामले में अदालत के निर्देशों और सरकार के जवाब के बाद आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रदर्शन से जुड़े वीडियो सुरक्षित रखने का आदेश भी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से अहम है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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