कांग्रेस नेता सज्जन कुमार का निधन : 1984 दंगा मामले में काट रहे थे उम्रकैद की सजा, 80 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। लंबे समय से जेल में बंद सज्जन कुमार ने करीब सात साल तिहाड़ में बिताए।
सज्जन कुमार को 1984 के दंगों से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने 14 दिसंबर 2018 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। निचली अदालत ने पहले उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया। इस फैसले के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, हालांकि शीर्ष अदालत से उन्हें राहत नहीं मिली।
पत्नी से मिलने के लिए मांगी थी जमानत
इस वर्ष अप्रैल में सज्जन कुमार ने अपनी बीमार पत्नी से मुलाकात के लिए सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत की मांग की थी। हालांकि अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। इससे पहले 27 अप्रैल 2022 को उन्हें दंगों से जुड़े एक मामले में जमानत मिली थी, लेकिन दूसरे मामले में सजा बरकरार रहने के कारण वह जेल में ही रहे।
जनकपुरी-विकासपुरी मामले में भी चला मुकदमा
1984 की हिंसा से जुड़े जनकपुरी और विकासपुरी मामले में भी सज्जन कुमार के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। राउज एवेन्यू कोर्ट ने पहले उन्हें इन मामलों में बरी कर दिया था। बाद में मामले की दोबारा जांच हुई और विशेष जांच दल ने फरवरी 2015 में उनके खिलाफ अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कीं।
पहली प्राथमिकी एक नवंबर 1984 को जनकपुरी में सरदार सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से संबंधित थी। दूसरी प्राथमिकी दो नवंबर को सरदार गुरचरण सिंह को जिंदा जलाने के मामले में दर्ज की गई थी। इन घटनाओं में दो लोगों की मौत हुई थी।
अदालत में आरोपों से किया था इनकार
खुद को 1984 के दंगों में शामिल होने के आरोपों से पूरी तरह अलग बताया था। उनका कहना था कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और जांच एजेंसी ने मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की।
सज्जन कुमार लंबे समय तक दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में रहे। हालांकि 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषसिद्धि के बाद उनका राजनीतिक जीवन पूरी तरह बदल गया। उनके निधन के साथ ही उन मामलों से जुड़ी उनकी लंबी कानूनी लड़ाई का भी अंत हो गया।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
