पांच लाख दीयों से साकार हुआ भव्य नंदी, : उज्जैन ने दिया पुनः उपयोग का संदेश, मुख्यमंत्री ने की सराहना

भोपाल। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में उपयोग किए गए दीयों को कचरा बनने से बचाकर उज्जैन नगर निगम ने उनके रचनात्मक पुनः उपयोग की मिसाल पेश की है। दीपोत्सव के बाद बचे करीब पांच लाख से अधिक दीयों से नंदी की भव्य और आकर्षक आकृति तैयार की गई है। हेलीपैड परिसर में स्थापित यह विशाल आकृति पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ संसाधनों के बेहतर उपयोग का संदेश दे रही है।
कचरा बनने से बचाए लाखों दीये
दीपोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में दीयों का उपयोग किया गया था। कार्यक्रम के बाद इन दीयों को अनुपयोगी मानकर फेंकने के बजाय नगर निगम ने इनके पुनः उपयोग की योजना तैयार की। इसी पहल के तहत पांच लाख से अधिक दीयों को व्यवस्थित तरीके से सजाकर नंदी की आकर्षक आकृति तैयार की गई। इससे दीयों का उपयोग दोबारा हुआ और उन्हें कचरे में जाने से भी बचाया गया।
तीन सूत्रों का दिया संदेश
नंदी की यह आकृति पर्यावरण संरक्षण के तीन महत्वपूर्ण सूत्रों—कम उपयोग, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण—का संदेश दे रही है। नगर निगम की यह पहल यह भी दर्शाती है कि बड़े आयोजनों से निकलने वाली सामग्री को रचनात्मक सोच के साथ दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है। इससे स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
मुख्यमंत्री ने की पहल की सराहना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हेलीपैड परिसर में स्थापित नंदी की आकृति का अवलोकन किया। उन्होंने उपयोग किए गए दीयों को रचनात्मक तरीके से दोबारा उपयोग में लाने के लिए नगर निगम उज्जैन की पहल की सराहना की। मुख्यमंत्री ने इस तरह की पहल को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उपयोगी कदम बताया।
इस अवसर पर संभाग आयुक्त आशीष सिंह, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राकेश गुप्ता, उप पुलिस महानिरीक्षक नवनीत भसीन, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा तथा नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
उज्जैन नगर निगम की यह पहल बड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के बाद सामग्री के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक रचनात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।
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