चंद्रमौलेश्वर रूप में बाबा की पहली सवारी : वैदिक मंत्रों, डमरुओं की गूंज के बीच भगवान महाकाल निकले नगर भ्रमण पर, जयकारों से गूंजी अवंतिका नगरी

उज्जैन। श्रावण-भाद्रपद मास के पावन अवसर पर सोमवार को भगवान श्री महाकालेश्वर की पहली सवारी भव्य धार्मिक वातावरण और राजसी परंपरा के साथ निकाली गई। अवंतिकानाथ भगवान महाकाल चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में चांदी की पालकी पर विराजमान होकर अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले। बाबा की सवारी के दर्शन के लिए उज्जैन सहित देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर में दिनभर आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
दूध, पंचामृत से हुआ बाबा का दिव्य अभिषेक
सवारी से पहले महाकाल मंदिर में भगवान का जल, दुग्ध और पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद बाबा का आकर्षक श्रृंगार कर विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस पावन अवसर पर करीब 3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

वैदिक मंत्रों से गूंज उठी तीर्थ नगरी
इस वर्ष पहली सवारी की विशेष थीम वैदिक उद्घोष रखी गई थी। सैकड़ों वेदपाठी बटुकों द्वारा किए गए वैदिक मंत्रोच्चार से पूरी अवंतिका नगरी आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठी। दोपहर करीब 3:30 बजे कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने भगवान महाकाल के रजत मुखारविंद का पूजन कर पालकी को रवाना किया। मंदिर के मुख्य द्वार पर पुलिस बल ने भगवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
शाम 4 बजे शुरू हुई सवारी करीब 5 किलोमीटर लंबे मार्ग से होकर गुजरी। इस दौरान झांझ-डमरू, भजन मंडलियों, आदिवासी लोकनृत्यों और श्रद्धालुओं की पुष्पवर्षा ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। सवारी कोट मोहल्ला, गुदरी, कहारवाड़ी होते हुए शिप्रा नदी के रामघाट पहुंची, जहां पूजन के बाद गणगौर दरवाजा, छत्रीचौक, गोपाल मंदिर और पटनी बाजार मार्ग से होते हुए शाम करीब 7 बजे पुन: महाकाल मंदिर पहुंची।

सुरक्षा के लिए तैनात रहा पुलिस का मजबूत पहरा
लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। सवारी मार्ग पर 1200 से अधिक पुलिसकर्मी, 500 से ज्यादा वालंटियर्स, 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे और 5 ड्रोन के माध्यम से निगरानी रखी गई। प्रमुख स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी। संवेदनशील क्षेत्रों में छतों से भी निगरानी की गई।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष यातायात व्यवस्था
सवारी के दौरान शहर में विशेष यातायात योजना लागू रही। कई मार्गों पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की गई और अलग-अलग स्थानों पर पार्किंग व्यवस्था की गई। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में भागीदार बनें। भगवान महाकाल की पहली सवारी ने एक बार फिर उज्जैन को भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर कर दिया।
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