शुक्रवार, 4 सितंबर 202606:57:50 AM
Download App
Home/मनोरंजन

मां बनने की राह में टूटने लगी थीं अनुष्का रंजन : बोलीं- ‘लगता था मेरी बॉडी में ही कुछ कमी है’

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Sep 03, 2026
07:32 AM
बोलीं- ‘लगता था मेरी बॉडी में ही कुछ कमी है’

मुंबई। अभिनेत्री अनुष्का रंजन ने मां बनने की अपनी निजी यात्रा से जुड़ा ऐसा अनुभव साझा किया है, जिसने आईवीएफ जैसी प्रक्रिया से गुजरने वाली महिलाओं की भावनात्मक चुनौतियों को सामने ला दिया। अनुष्का अपने पति और अभिनेता आदित्य सील के साथ नेहा धूपिया और अंगद बेदी के शो ‘डबल डेट’ में पहुंची थीं। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि गर्भधारण की कोशिश के दौरान उन्हें शारीरिक परेशानियों के साथ-साथ मानसिक दबाव का भी सामना करना पड़ा।

पहले प्राकृतिक तरीके से की कोशिश

अनुष्का ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने और आदित्य ने स्वाभाविक रूप से बच्चा कंसीव करने की कोशिश की। डॉक्टरों की सलाह पर दोनों ने कुछ समय तक इंतजार किया। इसके बाद उन्हें आईयूआई कराने का सुझाव दिया गया। अनुष्का के मुताबिक यह आईवीएफ की तुलना में अपेक्षाकृत कम जटिल प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन इसमें भी दवाओं और इंजेक्शन का दौर काफी चुनौतीपूर्ण था।

लगातार दवाइयों के कारण उन्हें अपने शरीर में बदलाव महसूस होने लगे और यह अनुभव उनके लिए आसान नहीं था। इसके बाद दंपती ने आईवीएफ का विकल्प चुनने का फैसला किया।

इलाज से ज्यादा भारी पड़ने लगा भावनात्मक दबाव

अनुष्का ने बताया कि आईवीएफ के दौरान शारीरिक प्रक्रिया से ज्यादा उन्हें मानसिक तौर पर संघर्ष करना पड़ा। उनके मन में बार-बार यह सवाल आने लगा कि आखिर परेशानी कहां है और क्या उनके शरीर में ही कोई कमी है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उस दौरान उन्हें अपने खान-पान और पुरानी जीवनशैली को लेकर अपराधबोध होने लगा था। यहां तक कि परिवार या करीबी लोगों से यह बताना भी मुश्किल लगता था कि वे बच्चे की योजना बना रहे हैं।

अनुष्का का दर्द देखकर आदित्य ने लिया फैसला

आदित्य सील ने पत्नी के इस संघर्ष को बेहद करीब से देखा। उन्होंने बताया कि अनुष्का जिस शारीरिक दर्द और मानसिक तनाव से गुजर रही थीं, उसे देखकर उन्होंने मन बना लिया था कि अगर यह प्रयास सफल नहीं हुआ तो वे दोबारा आईवीएफ प्रक्रिया से नहीं गुजरेंगे।

गोद लेने का विकल्प भी था तैयार

दंपती ने इस दौरान गोद लेने के विकल्प पर भी विचार किया था। दोनों का मानना था कि माता-पिता बनने का अर्थ केवल जैविक संतान होना नहीं है। अगर प्राकृतिक रूप से बच्चा नहीं हो पाता, तो वे किसी बच्चे को अपनाकर उसे प्यार, सुरक्षा और बेहतर भविष्य देना चाहते थे। अनुष्का और आदित्य की यह कहानी दिखाती है कि माता-पिता बनने का सफर कई बार उम्मीद, दर्द, डर और भावनाओं से होकर गुजरता है।

प्रफुल्ल तिवारी
Written By

प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें